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उद्योगों, होटलों और संस्थाओं को मध्य प्रदेश से नोटिस, पावर क्वॉलिटी मीटर पर भारी खर्च

 इंदौर  उद्योगों और उच्चदाब कनेक्शन से बिजली लेने वाले उपभोक्ताओं को नया मीटर लगाना होगा। पावर क्वॉलिटी मीटर के नामक इस मीटर के लिए हर उपभोक्ता को कम से कम साढ़े पांच लाख या इससे ज्यादा खर्च करना होंगे। बीते दिनों में कई उद्योगों के साथ कुछ होटल व अन्य संस्थाओं के पास भी ऐसे नोटिस पहुंचे हैं। बिजली कंपनी के इस फरमान का उद्योगों ने विरोध शुरू किया है लेकिन कंपनी ने गेंद नियामक आयोग के पाले में डाल दी है। हैरान करने वाली बात ये है कि नियमों की आड़ में मीटर भी एक खास कंपनी का लगवाने को मजबूर किया जा रहा है। बिजली कंपनी की ओर से पहले कुछ आयरन रोलिंग मिलों को नोटिस पहुंचे, इसके बाद अन्य उद्योगों में इस तरह के नोटिस पहुंचे। अब बताया जा रहा है कि उच्चदाब कनेक्शन ले चुके होटल व अन्य उपभोक्ताओं को भी कहा गया है कि वे पावर क्वॉलिटी मीटर लगाए। पावर क्वॉलिटी मीटर को लगाने के लिए कारण बताया जा रहा है कि उच्चदाब उपभोक्ताओं के नई मशीन व उपकरणों के उपयोग के दौरान पैदा होने वाली हारमोनिक्स (विकृत करंट) की निगरानी इस मीटर से हो सकेगी। बिजली कंपनी की दलील है कि ये हारमोनिक्स या विकृत करंट भारी मशीनों के चलने से पैदा होता है। हारमोनिक्स पर नजर रखेगा जो बाद में बिजली आपूर्ति करने वाली ग्रिड या आसपास के सप्लाय सिस्टम में दाखिल होकर उन्हें भी खराब कर सकता है। मीटर हर उद्योग में पैदा होने वाली ऐसी हारमोनिक्स पर नजर रखेगा। बाद में बिजली कंपनी फिर इनसे निपटने की कोई युक्ति लाएगी। यानी अभी हारमोनिक्स की निगरानी के लिए मीटर लगाना होगा बाद में फिर उसे दूर करने के उपाय के लिए कोई उपकरण अनिवार्य किया जाएगा। आमतौर पर हारमोनिक्स या विकृत करंट की समस्या ऐसी फैक्ट्रियों में ज्यादा आती है जहां लोहा या धातु गलाने वाली भट्टियां (फर्नेस) या ऐसे उपकरण होते हैं। लिहाजा ऐसे मीटर सिर्फ चुनिंदा फैक्ट्रियों में लगने थे लेकिन आदेश में सभी एचटी कनेक्शन को लिखकर इसका दायरा बढ़ाकर सभी कनेक्शनधारी को शामिल कर लिया गया। विकल्प नहीं, खरीदना मजबूरी उद्योगों नोटिस मिलने के बाद बिजली कंपनी के अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं तो उन्हें एक कंपनी के प्रतिनिधि के पास भेजा जा रहा है। बताया जा रहा है पावर क्वॉलिटी मीटर सिर्फ यहीं कंपनी उपलब्ध करवाएगी। स्नाइडर नामक कंपनी के प्रतिनिधि शीतेंद्र श्रीवास्तव से जब नईदुनिया ने उद्योग संचालक बनकर बात की तो उसने बताया कि एक मीटर की लागत 5 लाख 70 हजार के लगभग होगी। उसने ऑफर दिया कि यदि आप ज्यादा लोगों को इकट्ठा कर लाते हैं तो हम कीमत पर बैठकर बात कर लेंगे। कंपनी के प्रतिनिधि से पूछा गया कि किसी और कंपनी का सस्ता मीटर नहीं मिल सकता। इस पर उसने कहा कि गारंटीड टेक्निकल स्पेसिफिकेशन पर खरा उतरना जरूरी है। इसकी टेस्टिंग अभी हमारी कंपनी ने ही करवाई है। दूसरी किसी कंपनी के मीटर की टेस्टिंग नहीं हुई है ऐसे में विकल्प कोई और नहीं है। विरोध शुरू एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मप्र (एआईएमपी) और रोलिंग मिल एसोसिएशन ने इस आदेश का विरोध शुरू कर दिया है। एआईएमपी अध्यक्ष योगेश गुप्ता ने कहा कि मनमाने तरीके से मीटर लगाने का आदेश देना और लाखों रुपये खर्च करने का दबाव बनाना गलत है। एसोसिएशन इसका विरोध करेगा। रोलिंग मिल एसोसिएशन अध्यक्ष सतीश मित्तल ने कहा कि खास कंपनी की मोनोपोली की आड़ में उद्योगों को आर्थिक हानि पहुंचाई जा रही है। दूसरी ओर पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की ओर से इस मामले में कहा गया है कि यह आदेश नियामक आयोग की ओर से दिया गया है। उद्योगों को राहत पाने के लिए आयोग में अपील करना होगी।

मध्य प्रदेश में रिकॉर्ड तोड़ सर्दी, मौसम विभाग ने शीतलहर और कोल्ड वेव अलर्ट जारी किया

भोपाल  मध्य प्रदेश में नवंबर महीने के लास्ट में शुरू हुए सर्दी का असर दिसंबर के महीने में भी देखने को मिल रहा है। यहां लगातार मौसम बदल रहा है। उत्तर से आने वाली बर्फीली हवाओं के चलते 2-3 डिग्री की गिरावट हो सकती है। बुधवार के दिन मौसम शुष्क रहेगा। इसके बाद न्यूनतम तापमान में 2-3 डिग्री की गिरावट होगी। मौसम विभाग की मानें तो अगले 24 घंटे में मौसम साफ रहेगा। इसके चलते न्यूनतम तापमान में गिरावट हो सकती है। इसकी वजह है बंगाल की खाड़ी में बनने वाला चक्रवर्ती तूफान दितवाह है। यह तूफान उत्तर की ओर बढ़ सकता है। वहीं,एक अन्य साइक्लोनिक सर्कुलेशन पंजाब के आसपास सक्रिय है। इसके चलते अगले 24 घंटे में शीतलहर का दौर होगा। इसके साथ ही 5 दिसंबर से शीतलहर तेज हो सकती है। तापमान लगातार सामान्य से कम इन दिनों भी शहर में तापमान लगातार सामान्य से कम बने हुए हैं। सर्द हवा के कारण तेज सर्दी का अहसास हो रहा है। मंगलवार को भी भोपाल में न्यूनतम तापमान 8.4 डिग्री रहा, जबकि पचमढ़ी में 7.2 डिग्री दर्ज किया गया। इंदौर में 8.6 डिग्री दर्ज किया गया। प्रदेश के चार महानगरों में भी भोपाल सबसे सर्द रहा। दो दिन सामान्य वरिष्ठ मौसम विज्ञानी एचएस पांडे का कहना है अभी दो दिन तापमान इसी तरह रहने की संभावना है। इस समय एक प्रतिचक्रवात मध्यभारत के ऊपर बना हुआ है, इसके कारण उत्तरी हवा में रूकावट हो रही है, हांलाकि पूर्वी और मध्यक्षेत्र तक हवा पहुंच रही है। इसलिए भोपाल में इस समय अन्य शहरों के मुकाबले ज्यादा सर्दी है। अगले दो दिनों में यह प्रतिचक्रवात कमजोर पडऩे की संभावना है। 5 दिसंबर के आसपास तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते आगे बर्फबारी होने की भी संभावना है। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस करेगा प्रभावित वेस्टर्न डिस्टर्बेंस 5 दिसंबर के दिन से वेस्टर्न हिमालयी एरिया को प्रभावित करेगा। इसके चलते प्रदेश में दिन और रात के तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज होगी। इसके चलते नवंबर के आखिरी दिनों में मिली राहत ज्यादा समय तक नहीं रहेगी। दिसंबर में इस बार ठंड पिछले कई सालों से ज्यादा पड़ सकती है। देश के हिमालयी क्षेत्रों में जल्दी बर्फबारी के कारण मध्य प्रदेश में ठंडी हवाओं का असर बढ़ा है। वर्तमान स्थिति: 12 शहरों में पारा 10°C से नीचे पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पहले भी प्रदेश में कड़ाके की ठंड जारी है। सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात में प्रदेश के 12 शहरों में न्यूनतम तापमान 10°C से नीचे रहा। प्रदेश का इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी 7.2°C के साथ सबसे ठंडा रहा। भोपाल और इंदौर में भी पारा 9°C  से नीचे दर्ज किया गया। मंगलवार को दिन के तापमान में भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा और सुबह के समय कई स्थानों पर कोहरा छाया रहा। ग्वालियर में विजिबिलिटी 500 से 1,000 मीटर तक दर्ज की गई, जबकि भोपाल और दतिया में भी दृश्यता 1,000 मीटर तक रही। नवंबर में टूटा था रिकॉर्ड वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल नवंबर में सर्दी ने कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त किए हैं। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली, जो साल 1931 के बाद शीतलहर के सबसे ज्यादा दिन का रिकॉर्ड है। वहीं, 17 नवंबर की रात में पारा $5.2°C  तक पहुंच गया था, जो ओवरऑल रिकॉर्ड रहा। पिछले पांच सालों में दिसंबर में सबसे कम न्यूनतम तापमान -16 दिसंबर 2024 – 3.3  20 दिसंबर 2023 – 8.8 -8 दिसंबर 2022 – 8.6 -20 दिसंबर 2021 – 3.4 -20 दिसंबर 2020 – 6.7

डॉ. यादव का बयान—मोदी जी के नेतृत्व में नया भारत आकार ले रहा है

प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र बदल रहा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने जनजातीय हस्तियों और प्रतिभाओं को किया सम्मानित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने नई शिक्षा नीति के माध्यम से युवाओं तक भारतीय संस्कृति से जुड़ने का संदेश पहुंचाया। हमारा जनजातीय समाज भी भगवान कृष्ण की मुरली और मयूर पंख के उपयोग के साथ संपूर्ण समाज से जुड़कर समरस भाव से रहता आया है। भारतीय सिनेमा ने भी राष्ट्र भक्ति के विचार को सशक्त बनाना प्रारंभ किया है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में एक सुखद परिवर्तनशील वातावरण को हम देख रहे हैं। राष्ट्र बदल रहा है। कोरोना के कठिन दौर में नागरिकों को जीवन रक्षा के लिए वैक्सीन की व्यवस्था की गई। भारत दुनिया की आर्थिक शक्ति बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में एक निजी टीवी चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 'जनजातीय प्रज्ञा' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से चैनल के मैनेजिंग एडीटर मध्यप्रदेश  प्रवीण दुबे और मैनेजिंग एडिटर छत्तीसगढ़  विश्वेश ठाकुर ने बातचीत की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में जनजातीय वर्ग के कल्याण और सम्मान, स्वास्थ्य क्षेत्र, पर्यावरण और वन्य प्राणी संरक्षण सहित अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय समाज से जुड़ी प्रदेश के विभिन्न हस्तियों और प्रतिभाओं को सम्मानित किया। इनमें पद्म  अर्जुन धुर्वे डिंडोरी, फुलझरिया बाई, डिंडोरी,  सूर्यभान मरावी बालाघाट, साक्षी भवड़िया अलीराजपुर, प्रियंका अलीराजपुर, रोहित वैशाखी बड़वानी और बसंती देवी अनूपपुर शामिल हैं। प्रमुख बिन्दु     प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने नई शिक्षा नीति के माध्यम से युवाओं तक भारतीय संस्कृति से जुड़ने का संदेश पहुंचाया।     जनजातीय समाज भी भगवान कृष्ण की मुरली और मयूर पंख के उपयोग के साथ संपूर्ण समाज से जुड़कर समरस भाव से रहता आया है।     भारतीय सिनेमा ने भी राष्ट्र भक्ति के विचार को सशक्त बनाना प्रारंभ किया है।     प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में एक सुखद परिवर्तनशील वातावरण को हम देख रहे हैं।     राष्ट्र बदल रहा है।     भारत दुनिया की आर्थिक शक्ति बना है।     प्रदेश में जनजातीय वर्ग के कल्याण और सम्मान, स्वास्थ्य क्षेत्र, पर्यावरण और वन्य प्राणी संरक्षण सहित अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख किया।     जनजातीय समाज से जुड़ी प्रदेश के विभिन्न हस्तियों और प्रतिभाओं को सम्मानित किया।  

प्रदेश की सिंचाई क्षमता 100 लाख हैक्टयर तक बढ़ाएंगे: मुख्यमंत्री डॉ.यादव

प्रदेश में दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का हुआ विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ.यादव प्रदेश की सिंचाई क्षमता 100 लाख हैक्टयर तक बढ़ाएंगे: मुख्यमंत्री डॉ.यादव प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल पर होगी प्रदेश की सिंचाई योजनाओं की समीक्षा: मुख्यमंत्री डॉ.यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित हुई है। प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी। प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र 100 लाख हैक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य लेकर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को विधानसभा समिति कक्ष में जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पार्वती-काली-सिंध और चम्बल अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना, केन-बेतवा अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना की स्वीकृति और केंद्र सरकार के सहयोग को राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश दिए। बैठक में जल संसाधन विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि इस दिशा में राज्य में अध्ययन और सर्वेक्षण का कार्य किया गया है। राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया है। इस सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी। इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपए होगी। सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे। राज्य की नदियों में बाढ़, जल प्रबंधन, जल के समुचित उपयोग नदी कछारों में पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से राज्य की नदियों को आपस में जोड़ने के लिए तकनीकी दल का गठन 13 नवम्बर 2024 को किया गया था । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल की झील की प्राचीन तकनीक का अध्ययन कर इस तर्ज पर कम लागत में सुरक्षित जलाशय एवं बांध निर्माण की अवधारणा पर कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के इस मॉडल का प्रदर्शन करने के निर्देश भी विभाग को दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जानकारी दी गई कि राज्य में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर किया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना उज्जैन जिसकी लागत 614.53 करोड़ रुपए है। इसकी भौतिक प्रगति 48 प्रतिशत है। इसी तरह कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना उज्जैन की लागत 919.94 करोड़ है। इस परियोजना की भौतिक प्रगति 42 प्रतिशत है। सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है। बैठक में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन और संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। प्रमुख बिन्दु     प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित।     प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी।     प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र 100 लाख हैक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य।     प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी।     राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश।     राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया।     सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी।     इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपए होगी।     सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे।     राज्य की नदियों को आपस में जोड़ने के लिए तकनीकी दल का गठन 13 नवम्बर 2024 को किया गया।     भोपाल की झील की प्राचीन तकनीक का अध्ययन कर इस तर्ज पर कम लागत में सुरक्षित जलाशय एवं बांध निर्माण की अवधारणा पर कार्य करने के निर्देश।     सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना उज्जैन जिसकी लागत 614.53 करोड़ रुपए है। इसकी भौतिक प्रगति 48 प्रतिशत है।     कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना उज्जैन की लागत 919.94 करोड़ है। इस परियोजना की भौतिक प्रगति 42 प्रतिशत है।     सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: व्यावसायिक शिक्षा के साथ कौशल और कृषि शिक्षा को भी दी जाए प्राथमिकता

व्यावसायिक शिक्षा के साथ कौशल विकास और कृषि शिक्षा भी बने प्राथमिकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्कूल शिक्षा विभाग की गतिविधियों की हुई समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र र्में सुविधाओं का निरंतर विस्तार हो रहा है। विद्यार्थियों को प्रोत्साहन के लिए विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। प्रदेश में विगत 2 वर्षों में ड्रॉप आउट रेट 21.4 प्रतिशत से घटकर मात्र 16.8 प्रतिशत रह गया है। इसे और भी कम करने की दिशा में कार्य किया जाए। प्रोत्साहन योजनाओं का अधिक से अधिक विद्यार्थियों को लाभ दिलवाया जाए। विगत 2 वर्ष में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुसार हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी द्वितीय परीक्षा आयोजित कर समय सीमा में परिणाम घोषित किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति में व्यवसायिक शिक्षा देने की दिशा में प्रयास बढ़ाए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को विधानसभा समिति कक्ष में स्कूल शिक्षा विभाग की गतिविधियों की जानकारी ली और कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि अच्छे परीक्षा परिणाम लाने वाले विद्यालयों के प्राचार्यों को भी प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग की गतिविधियों की जानकारी ली और कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "भवन एक कक्षाएं अनेक" की तर्ज पर एक विद्यालय भवन में शेष खाली समय में महाविद्यालय की कक्षाएं संचालित करने की व्यवस्था प्रारंभ करने पर विचार कर कार्रवाई करने को कहा। बैठक में मुख्य रूप से पाठ्य पुस्तकों के नि:शुल्क प्रदाय, स्कूटी वितरण और साइकिल वितरण योजना के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि बालिका शिक्षा एवं छात्रावास का लाभ विद्यार्थियों को दिया जा रहा है। सेनिटेशन और हाइजिन किट का वितरण 19 लाख बालिकाओं को प्रति बालिका 300 रुपए के मान से डीबीटी द्वारा किया गया है। छात्रावासों में वाशिंग मशीन, रोटी मेकर, मैट्रेस जैसी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाभियान योजना में 210 छात्रावास स्वीकृत हुए हैं। शालाओं के सुदृढ़ीकरण का कार्य भी सुनिश्चित किया गया है। सांदीपनि और पीएम  विद्यालयों का लाभ विद्यार्थियों को मिल रहा है। परीक्षा परीणामों में सुधार के प्रयासों को सफलता मिल रही है। वर्ष 2024-25 के प्रथम परीक्षा परिणामों में कक्षा दसवीं 74 प्रतिशत और कक्षा 12वीं 76 प्रतिशत से अधिक परिणाम मिले हैं। प्रथम और द्वितीय परीक्षा में क्रमश: औसत 87 और 82 प्रतिशत परिणाम रहा है। इसी तरह शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज हुई है। विभागीय समीक्षा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश-     किताबों का वितरण प्रत्येक स्तर तक सुनिश्चित करें।     साइकिल मैन्यूफ़ैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिये योजना बनाई जाये।     नवोदय विद्यालय की तर्ज़ पर सांदीपनि आश्रम विद्यालय बनायें जायें।     व्यवसायिक शिक्षा पर ज़ोर दिया जाये।     विद्यालयों में कृषि की शिक्षा भी दी जाये।     रूचि अनुसार कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाये।     अच्छा परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षकों को राज्य स्तर पर पुरस्कृत किया जाये।     विद्यालय पहुँच मार्ग में यदि दिक़्क़त है तो उसे अन्य विभागों से समन्वय कर सुव्यवस्थित किया जाये।     आवश्यकता वाले दूरस्थ क्षेत्रों में निजी निवेश पर निजी विद्यालयों को प्रोत्साहित करने की नीति बनाई जाये।     शिक्षा विभाग के पोर्टल और ऐप पर काम किये जायें, शिक्षकों की परेशानी कम करें।  

मुरैना सोलर सह स्टोरेज अपने तरह की पहली परियोजना होगी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियां सराहनीय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुरैना सोलर सह स्टोरेज अपने तरह की पहली परियोजना होगी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव  प्रदेश के सोलर पार्क से भारतीय रेल को मिलती है बिजली: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों का स्तर काफी अच्छा है। ऊर्जा और नवकरणीय ऊर्जा दोनों विभागों को कार्यों का स्तर श्रेष्ठ से श्रेष्ठतम की ओर ले जाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऊर्जा और नवकरणीय ऊर्जा विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। नवीन और नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला, मुख्य सचिव  अनुराग जैन और संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पारम्परिक ऊर्जा उत्पादन के साथ नवीन और नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में प्रदेश में हो रहे कार्यों की विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की। बैठक में बताया कि अक्टूबर 2024 में ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर परियोजना स्थापित की गई है। आगर,शाजापुर और नीमच के सोलर पार्क से उत्पन्न बिजली का उपयोग भारतीय रेल्वे द्वारा भी किया जा रहा है। नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की इन परियोजनाओं से स्थानीय नागरिकों को रोजगार मिला है और 60 मिलियन टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है। बैठक में जानकारी दी गई कि मुरैना सोलर सह स्टोरेज परियोजना राज्य की पहली स्टोरेज परियोजना होगी, जिससे सालाना 180 करोड़ रुपए की बचत होगी। वर्ष 2027 में परियोजना के कार्य पूरे हो रहे हैं। प्रदेश में किसानों के लिए सोलर पंप योजना, सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना, कुसुम अ योजना पर बैठक में चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि कुल 15 विकासकों को जिलों का आवंटन किया गया है। लगभग 1300 भवनों पर 48 मेगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। प्रदेश के नागरिकों द्वारा भी घरेलू छतों पर बड़ी संख्या में उपकरण स्थापित कर रूफटॉप योजना का लाभ लिया जा रहा है। प्रदेश में 76 हजार से अधिक आवासीय इकाईयां कार्य कर रही हैं। इनकी स्थापित क्षमता लगभग 3 लाख किलोवाट है। प्रधानमंत्री जनमन योजना में 11 जिलों में एक हजार से अधिक घरों में सौर्य संयंत्र बैटरी सहित स्थापित किए जा चुके हैं।      ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों का स्तर काफी अच्छा।     ऊर्जा और नवकरणीय ऊर्जा दोनों विभागों को कार्यों का स्तर श्रेष्ठ से श्रेष्ठतम की ओर ले जाना है।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पारम्परिक ऊर्जा उत्पादन के साथ नवीन और नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में प्रदेश में हो रहे कार्यों की विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की।     अक्टूबर 2024 में ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर परियोजना स्थापित।     आगर,शाजापुर और नीमच के सोलर पार्क से उत्पन्न बिजली का उपयोग भारतीय रेल्वे द्वारा भी किया जा रहा।     नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की इन परियोजनाओं से स्थानीय नागरिकों को रोजगार मिला।     60 मिलियन टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है।     मुरैना सोलर सह स्टोरेज परियोजना राज्य की पहली स्टोरेज परियोजना होगी, जिससे सालाना 180 करोड़ रुपए की बचत होगी।     वर्ष 2027 में परियोजना के कार्य पूरे हो रहे हैं। प्रदेश में किसानों के लिए सोलर पंप योजना, सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना, कुसुम अ योजना पर बैठक में चर्चा हुई।     सभी 55 जिलों के लिए रूफटॉप सौर योजना में सर्वे कार्य हो रहा है।     प्रदेश में 76 हजार से अधिक आवासीय इकाईयां कार्य कर रही हैं। इनकी स्थापित क्षमता लगभग 3 लाख किलोवाट है।     प्रधानमंत्री जनमन योजना में 11 जिलों में एक हजार से अधिक घरों में सौर्य संयंत्र बैटरी     सहित स्थापित किए जा चुके हैं।  

MP में 76 हजार टीबी केस सामने आए, 2025 का लक्ष्य कमजोर; इंदौर में 1,833 मौतों ने बढ़ाई चिंता

इंदौर   प्रधानमंत्री द्वारा साल 2025 तक टीबीमुक्त भारत बनाने की घोषणा के सात वर्ष बाद भी इंदौर में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। 2018 में अभियान शुरू होने से अब तक इंदौर में 76,549 नए टीबी मरीज सामने आ चुके हैं, जो यह संकेत देता है कि लक्ष्य काफी पीछे छूट गया है। हर साल औसतन 7–8 हजार नए रोगी मिल रहे हैं। इनमें से 1,833 मरीजों की मौत भी दर्ज की जा चुकी है, जो अभियान की सफलता पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपलब्ध इलाज और साधनों के बावजूद मौतों का यह आंकड़ा बेहद गंभीर है। देशभर में बढ़ता टीबी का बोझ, इंदौर का योगदान भी बड़ा इंदौर सहित पूरे देश में टीबीमुक्त भारत अभियान चलने के बावजूद राष्ट्रीय टीबी आंकड़ों में लगातार वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2021 में जहां 21 लाख मरीज थे, वहीं 2022 में 28 लाख, 2023 में 25 लाख, 2024 में 26 लाख और 2025 में अब तक 26 लाख मरीज दर्ज किए जा चुके हैं। डाक्टरों की मानें तो वर्ष के अंत तक यह संख्या 30 लाख तक पहुंच सकती है। इन बढ़ते आंकड़ों में इंदौर का योगदान भी बड़ा है, क्योंकि यहां हर वर्ष हजारों मरीज सामने आ रहे हैं। उपलब्ध दवाएं और सुविधा केंद्र होने के बावजूद 1,833 मौतें अभियान को लगभग असफल साबित कर रही हैं। टीबी जांच के 44 केंद्र सक्रिय, इलाज और आर्थिक सहायता भी उपलब्ध इंदौर में सामान्य टीबी की जांच 44 माइक्रोस्कोपी सेंटरों में की जाती है। अभियान शुरू होने से अब तक 76,549 सामान्य टीबी मरीज मिले हैं। जांच से लेकर इलाज तक का सारा खर्च सरकार वहन करती है। साथ ही उपचार अवधि के दौरान मरीजों को 6 महीने तक हर माह 1,000 रुपये की सहायता भी दी जाती है। चिकित्सकों के अनुसार यदि मरीज बिना नागा 6 महीने तक नियमित दवा लेते रहें तो वे पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। इसके बावजूद लापरवाही के कारण कई मरीज इलाज अधूरा छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। एमडीआर टीबी के 1,745 मरीज, सबसे ज्यादा मौतें इसी श्रेणी में सामान्य टीबी के अतिरिक्त इंदौर में 1,745 एमडीआर (मल्टीड्रग रेजिस्टेंस) मरीज भी मिले हैं। यह टीबी का सबसे खतरनाक रूप माना जाता है, जो आमतौर पर उन्हीं मरीजों में विकसित होता है जो बीच में दवा छोड़ देते हैं या इलाज पूरा नहीं करते। विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी से होने वाली कुल मौतों में सबसे अधिक मौतें एमडीआर टीबी के कारण होती हैं। साल 2018 से 2025 तक मिलने वाले सामान्य और एमडीआर मरीजों के आधिकारिक आंकड़े भी यही दिखाते हैं कि बीमारी पर रोक नहीं लग सकी। सरकार का उद्देश्य यह है कि कोई भी मरीज बिना जांच और बिना इलाज के न रहे, न कि शहर में टीबी पूरी तरह खत्म हो। बड़ी संख्या में ठीक हो रहे मरीज जिला क्षय अधिकारी डाक्टर शैलेंद्र जैन ने बताया कि टीबीमुक्त भारत अभियान का मतलब यह नहीं है कि इंदौर में एक भी मरीज नहीं मिलेगा। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी मरीज बिना इलाज और बिना जांच के न रहे। इसके लिए हम हर तरह की सुविधा दे रहे हैं। बड़ी संख्या में मरीज ठीक हो रहे हैं और भविष्य में जल्द ही इस पर पूरी तरह से लगाम कसने में भी मदद मिलेगी।  

रतलाम मंडल के यात्रियों के लिए बुरी खबर, 60 दिनों के ट्रैक ब्लॉक से कई जरूरी ट्रेनें प्रभावित

रतलाम मुंबई सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 4 पर ट्रैक नवीनीकरण कार्य के चलते 23 नवंबर, 2025 से 60 दिनों का ब्लॉक लिया जा रहा है। इस ब्लॉक के कारण पश्चिम रेलवे की कई ट्रेनें प्रभावित होंगी। इस अवधि के दौरान, पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल से गुजरने वाली कुछ ट्रेनों को शॉर्ट-टर्मिनेट किया जाएगा या आंशिक रूप से रद्द किया जाएगा। यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए रेलवे ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं की हैं। ये ट्रेन हो रहीं प्रभावित प्रभावित होने वाली ट्रेनों में निम्नलिखित शामिल हैं: ट्रेन संख्या 22210 हजरत निजामुद्दीन – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस दादर स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट होगी और दादर तथा मुंबई सेंट्रल के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेगी। इसी प्रकार, ट्रेन संख्या 09086 इंदौर – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस भी दादर स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट होगी और दादर-मुंबई सेंट्रल के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेगी। ये ट्रेन भी रहेंगी रद्द अन्य प्रभावित ट्रेनों में ट्रेन संख्या 09076 काठगोदाम – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस और ट्रेन संख्या 09186 कानपुर अनवरगंज – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस शामिल हैं। ये दोनों ट्रेनें भी दादर स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट होंगी तथा दादर और मुंबई सेंट्रल स्टेशनों के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेंगी। मेंटिनेंस की वजह से ये रूट भी प्रभावित उत्तर पश्चिम रेलवे के चूरू-आसलू-दुधवाखारा स्टेशन के चूरू-सादुलपुर सेक्शन में पैच डबलिंग और ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य के कारण पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल से होकर गुजरने वाली कुछ ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। ब्लॉक कार्य के चलते कई ट्रेनों के मार्ग में परिवर्तन किया गया है और कुछ स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव भी दिए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए प्रभावित ट्रेनों का विवरण जारी किया गया है। इन ट्रेनों का बदला गया रूट 20497 रामेश्वरम – फिरोजपुर एक्सप्रेस: 06, 13, 20 और 27 जनवरी, 2026 को रामेश्वरम से चलने वाली यह ट्रेन सीकर-लोहारू-सादुलपुर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। इसे झुंझुनू और लोहारू स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव दिया गया है। 20498 फिरोजपुर – रामेश्वरम एक्सप्रेस: 24 जनवरी, 2026 को फिरोजपुर से चलने वाली यह ट्रेन सादुलपुर-लोहारू-सीकर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। इसे लोहारू और झुंझुनू स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव दिया गया है। 04711 बीकानेर – बांद्रा टर्मिनस स्पेशल: 21 जनवरी, 2026 को बीकानेर से चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन बीकानेर, मेरटा रोड बाईपास – जयपुर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। नोखा, नागौर, मेरटा रोड बाईपास, डेगाना, मकराना और फुलेरा स्टेशनों पर इसके अतिरिक्त ठहराव होंगे। 04712 बांद्रा टर्मिनस – बीकानेर स्पेशल: 22 जनवरी, 2026 को बांद्रा टर्मिनस से चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन जयपुर – मेरटा रोड बाईपास – बीकानेर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। फुलेरा, मकराना, डेगाना, मेरटा रोड बाईपास, नागौर और नोखा स्टेशनों पर इसके अतिरिक्त ठहराव होंगे। 04715 बीकानेर – साईंनगर शिर्डी स्पेशल: 24 जनवरी, 2026 को बीकानेर से चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन बीकानेर, मेरटा रोड बाईपास – जयपुर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। नोखा, नागौर, मेरटा रोड बाईपास, डेगाना, मकराना और फुलेरा स्टेशनों पर इसके अतिरिक्त ठहराव होंगे।  

भाजपा प्रदेश कार्यालय में सोमवार से शुक्रवार, दोपहर 1 से 3 बजे तक दो मंत्री करेंगे कार्यकर्ताओं से मुलाकात

भोपाल  कार्यकर्ताओं को क्षेत्र के काम से अब मंत्रियों से मिलने के लिए बंगले या मंत्रालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे। सोमवार से शुक्रवार तक प्रदेश भाजपा कार्यालय में दो मंत्री दोपहर एक से तीन बजे तक बैठेंगे। कार्यकर्ताओं से संवाद कर उनकी समस्या का यथासंभव समाधान करेंगे। सत्ता और संगठन में समन्वय के लिए गठित समन्वय टोली की बैठक में हुए निर्णय के बाद इसकी शुरुआत भी सोमवार एक दिसंबर से हो गई। उप मुख्यमंत्री और राज्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से किया संवाद उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने कार्यालय में कार्यकर्ताओं से संवाद किया। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों की उपलब्धता से संगठन और शासन के बीच समन्वय और मजबूत होगा तथा समस्याओं का समाधान त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा। यह प्रयास संगठनात्मक गति, कार्यकर्ता संपर्क और समस्या-निराकरण को नई दिशा देगा। समाधान होने पर कार्यकर्ताओं को अवगत भी कराया जाएगा वहीं, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मंत्री-दिन प्रणाली का उद्देश्य कार्यकर्ताओं की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। सोमवार को हमने और गौतम टेटवाल ने कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुना और समाधान भी कराया। प्राप्त आवेदनों को सूचीबद्ध कर संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिन समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं हो सका, उनका फालोअप किया जाएगा। समाधान होने पर कार्यकर्ताओं को अवगत भी कराया जाएगा। यह व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी कार्यकर्ताओं से मिलने की यह व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी। केवल बड़े आयोजनों या विशेष कार्यक्रमों की स्थिति में ही इसे समायोजित किया जाएगा। इस निर्णय से भाजपा कार्यकर्ता भी बहुत खुश हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र के कई कार्य ऐसे हैं जिनके लिए मंत्री से मिलना जरूरी होता है। इस व्यवस्था से अब सीधे मंत्री से मिलकर क्षेत्र की समस्या उठाई भी जा सकती है और उसका समाधान भी किया जा सकेगा। कब कौन मंत्री रहेगा कार्यालय में उपलब्ध     2 दिसंबर- राकेश सिंह, दिलीप अहिरवार     3 दिसंबर- विश्वास सारंग, लखन पटेल     4 दिसंबर- कैलाश विजयवर्गीय, प्रतिमा बागरी     5 दिसंबर- विजय शाह, नरेंद्र शिवाजी पटेल  

मध्यप्रदेश सरकार तीन किस्तों में लेगी 3 हजार करोड़ रुपये का कर्ज, कुल कर्ज बढ़कर 49,600 करोड़

भोपाल   मध्यप्रदेश की मोहन सरकार शीतकालीन सत्र के दौरान दूसरा अनुपूरक बजट पेश करने की तैयारी में है। इसके लिए सरकार एक बार फिर 3,000 करोड़ का कर्ज नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से लेने जा रही है, जिसका भुगतान बुधवार को किया जाएगा। ये सभी कर्ज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के जरिए लिए जा रहे हैं, और इनका ब्याज हर छह महीने में 3 जून और 3 दिसंबर को चुकाया जाएगा। इस नए कर्ज के साथ चालू वित्तीय वर्ष में राज्य का कुल कर्ज बढ़कर 49,600 करोड़ पहुंच जाएगा। पहला कर्ज 1 हजार करोड़ रुपए का होगा वित्त विभाग के द्वारा नोटिफिकेशन जारी किया गया। जिसके अनुसार, पहला कर्ज एक हजार करोड़ रुपए का होगा। जिसका भुगतान सरकार के द्वारा आठ साल में किया जाएगा। इसके बाद एक हजार करोड़ का दूसरा कर्ज भी लिया जाएगा। जिसको सरकार 13 साल में चुकाएगी। तीसरे कर्ज की राशि भी 1 हजार करोड़ रुपए होगी। जिसका भुगतान ब्याज के साथ 23 साल में किया जाएगा। इन कर्जों का ब्याज जून और दिसंबर महीने में अदा किया जाएगा। नवंबर में सरकार ने लिया था कर्ज इससे पहले सरकार ने 11 नवंबर को ऑक्शन के बाद सरकार ने 12 नवंबर को 1500-1500 सौ करोड़ के दो कर्ज और 1 हजार करोड़ का दूसरा कर्ज लिया था। जो कि 16 साल, 22 साल और 19 साल के लिए हैं। इनके ब्याज का भुगतान सरकार को 6-6 महीने की अवधि में करना होगा। ऐसे ही 28 अक्टूबर को 5200 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। उसमें पहली राशि 2700 करोड़ की थी, जो कि 21 साल के लिए ली गई थी। वहीं, दूसरी राशि 2500 करोड़ की, जो 22 साल के लिए ली गई थी। कर्ज लेने की लिमिट बरकरार सरकार ने अपनी रेवेन्यू को लेकर कहा है कि वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार 12487.78 करोड़ के रेवेन्यू सरप्लस में थी। इसमें आमदनी 234026.05 करोड़ और खर्च 221538.27 करोड़ रहा। इसके विपरीत वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदेश सरकार की रिवाइज्ड आमदनी 262009.01 करोड़ और खर्च 260983.10 करोड़ बताया है। इस तरह पिछले वित्त वर्ष में भी सरकार की आय 1025.91 करोड़ सरप्लस बताई गई है, जो भी कर्ज लिया जा रहा है वह लोन की लिमिट के भीतर है। ऐसे ही 30 सितंबर को 1500-1500 करोड़ के दो कर्ज लिए थे। जिसका भुगतान एक अक्टूबर को हुआ था। ये कर्ज 20 साल और 23 साल के अवधि के लिए हैं। इसका भुगतान एक अक्टूबर हो हुआ था।