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पीएम श्री एयर एम्बुलेंस से ताराबाई को उच्च स्तरीय इलाज के लिए इंदौर भेजा, परिजनों ने CM मोहन यादव को किया धन्यवाद

पीएम श्री एयर एम्बुलेंस से ताराबाई को उच्च स्तरीय इलाज के लिए इंदौर भेजा मरीज के परिजनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त किया इंदौर  खुशियों की दास्तां पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा प्रदेश में गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को उच्च स्तरीय उपचार के लिए बड़े शहरों के अस्पतालों में भेजने हेतु वरदान सिद्ध हो रही है। इस योजना के तहत मंगलवार सुबह खंडवा जिले के पंधाना विकासखण्ड के ग्राम शाहपुरा निवासी श्रीमती ताराबाई पति बलराम उम्र 73 वर्ष को खंडवा की हवाई पट्टी से एयर एम्बुलेंस के माध्यम से इंदौर के एम वाय हॉस्पिटल में उच्च स्तरीय इलाज के लिए भिजवाया गया। मरीज के साथ उनके परिजन श्री लक्ष्मण ओसवाल भी गए। उन्होंने ताराबाई के उपचार के लिए एयर एंबुलेंस की निशुल्क सुविधा मिलने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर खंडवा महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव और श्री मुकेश तन्वे भी मौजूद थे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ओ.पी. जुगतावत ने बताया कि रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण ताराबाई लकवा ग्रस्त हो गई थी, मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए आज एयर एंबुलेंस के माध्यम से इंदौर भिजवाया गया है, जिससे वहां उन्हें उच्च स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। डॉ. जुगतावत ने बताया कि एयर एम्बुलेंस से आयुष्मान कार्ड धारको को राज्य के भीतर और बाहर सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज के लिए भेजने हेतु निशुल्क सेवा उपलब्ध है। गैर आयुष्मान कार्ड नागरिको को राज्य के भीतर सरकारी अस्पतालों तक निशुल्क तथा राज्य के बाहर अनुमोदित दरों पर सशुल्क सेवा उपलब्ध है। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. अनिरुद्ध कौशल, अस्पताल अधीक्षक डॉ.रंजीत बड़ोले, नोडल अधिकारी एयर एंबुलेंस डॉ.दीपशिखा इवने व अधिकारी मौजूद थे।

प्रदेश के 260 सांदीपनि विद्यालयों में 950 स्कूल लीडर्स के प्रयासों की सराहना

प्रदेश के 260 सांदीपनि विद्यालयों में 950 स्कूल लीडर्स के अनुकरणीय प्रयासों को सराहना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिये किये जा रहे हैं प्रयास भोपाल  प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित सांदीपनि विद्यालय शिक्षण नेतृत्व और शैक्षिक वातावरण में गुणवत्ता के नये मानक प्रस्तुत कर रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये इन विद्यालयों में शिक्षकों को उनके नवाचारी प्रयासों के लिये राज्य स्तरीय पहचान प्रदान करने तथा उनके प्रोत्साहन के लिये "प्रेरक प्रयास" कार्यक्रम की अभिनव पहल प्रारंभ की गई है। इस पहल से विद्यालयों के स्कूल लीडर्स और शिक्षकों द्वारा किये जा रहे अनुकरणीय एवं प्रभावी कार्यों को हर सप्ताह राज्य स्तर से सभी विद्यालयों में विस्तारित किया जा रहा है। प्रेरक प्रयास कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सांदीपनि विद्यालय स्तर पर हो रहे हर सकारात्मक प्रयास, चाहे वह छोटा हो या बड़ा उनकी समय पर पहचान हो और सबसे सामने लाया जाये। इस प्रयास से सीखने और सिखाने की परंपरा को बढ़ावा मिल रहा है। इस कार्यक्रम में हर सप्ताह विद्यालयों में नेतृत्व, शिक्षण पद्धति, विद्यार्थी की उपस्थिति एवं प्रगति, नवाचार को पहचान कर चयन किया जाता है, जिन्हें तीन श्रेणियों में आरंभकर्ता, प्रयासकर्ता, सर्वोत्तम गुणवत्ता के रूप में बांटा जाता है। उन्हें विद्यालय स्तर पर सम्मानित कर राज्य स्तर पर बढ़ावा देने के लिये बहुरंगीय पोस्टर के माध्यम से सभी शिक्षकों के बीच साझा किया जाता है। प्रदेश में 260 सांदीपनि विद्यालयों में 950 से अधिक शिक्षकों के अनुकरणीय प्रयासों को राज्य स्तर पर पहचान दिलायी गयी है। विद्यांजलि पोर्टल के माध्यम से स्वयंसेवकों को आमंत्रण केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने विद्यांजलि पोर्टल की शुरूआत की है। इस पोर्टल के माध्यम से स्कूल शिक्षा को सामुदायिक भागीदारी से मजबूत करने के प्रयास किये जा रहे हैं। नई शिक्षा नीति-2020 में स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में सहभागिता को प्रोत्साहित करने के बिन्दु को मुख्य रूप से जोड़ा गया है। विद्यांजलि एक ऐसा मंच है, जहाँ विभिन्न पृष्ठभूमि से जुड़े लोग जैसे पेशेवर, सेवानिवृत्त, गृहणियां और स्वयंसेवी संगठन अपने समय, कौशल और संसाधनों के माध्यम से शासकीय विद्यालयों की गुणवत्ता सुधार में सहभागी बन सकते हैं। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन के अनुरूप शुरू की गयी है।  

मिशन वात्सल्य योजना अंतर्गत गैर संस्थागत सेवा योजना को आगामी 5 वर्षों तक संचालित करने की स्वीकृति

प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में संशोधन की स्वीकृति मिशन वात्सल्य योजना अंतर्गत गैर संस्थागत सेवा योजना को आगामी 5 वर्षों तक संचालित करने की स्वीकृति प्रदेश के 13 जिलों के आयुष चिकित्सालयों में 373 नवीन पदों की स्वीकृतिे मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् में भर्ती के लिए सेवा शर्ते एवं नियम 2025 अनुमोदित मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में सिंचाई के लिये सोलर पम्प स्थापना की योजना में संशोधन की स्वीकृति प्रदान की गयी है। संशोधन अनुसार कृषकों को स्वीकृत सोलर पम्प स्थापना क्षमता से एक क्षमता अधिक तक का विकल्प प्रदाय किया जायेगा। अब 3 एच.पी. के अस्थाई विद्युत कनेक्शनधारियों को 5 एच.पी. और 5 एच.पी. के अस्थाई विद्युत कनेक्शनधारियों को 7.5 एच.पी. का सोलर पंप प्रदाय करने का विकल्प दिया जाएगा। योजना के प्रथम चरण में अस्थायी विद्युत कनेक्शन संयोजन वाले किसानों अथवा अविद्युतीकृत किसानों को सोलर पम्प का लाभ दिया जाएगा। योजना अनुसार 7.5 एचपी क्षमता तक का सोलर पम्प पम्प लगाने के लिए अस्थाई विद्युत कनेक्शन धारी कृषक का अंश 10% रहेगा। शासन द्वारा 90% की सब्सिडी दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की कुसुम-ब योजना को प्रदेश में "प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना" नाम से 24 जनवरी 2025 से लागू किया गया है। इसका क्रियान्वयन राज्य में मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा किया जा रहा है। इस निर्णय से सोलर पंप की स्थापना से विद्युत पंपों को विद्युत प्रदाय के लिए राज्य सरकार पर अनुदान के भार को सीमित किया जा सकेगा एवं विद्युत वितरण कम्पनियों की वितरण हानियों को कम किया जा सकेगा। मिशन वात्सल्य योजना अंतर्गत गैर संस्थागत सेवा योजना संचालित करने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद मिशन वात्सल्य योजना अंतर्गत गैर संस्थागत सेवा योजना यथा स्पॉन्सरशिप, फॉस्टर केयर, आफ्टर केयर को आगामी 5 वर्षों तक प्रदेश के समस्त जिलों में संचालित करने की स्वीकृति दी गयी है। योजना के तहत पात्र बच्चे को 4 हजार रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जायगी। इसके साथ ही 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर बाल देखभाल संस्थान छोड़ने वाले बच्चों को ऑफटर केयर के माध्यम से रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जायेगा। योजना के तहत विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्त माता के बच्चे, अनाथ एवं विस्तारित परिवार के साथ निवासरत बच्चे, असाध्य बीमारी से पीड़ित माता-पिता के बच्चे, बच्चे की शारीरिक और आर्थिक रूप से देखभाल करने में असमर्थ माता पिता के बच्चे, किशोर न्याय अधिनियम 2015 के अनुसार देख रेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे (बेघर, प्राकृतिक आपदा से पीड़ित, बाल श्रमिक, बाल वेश्यावृति के शिकार, एड्स पीड़ित, बाल भिक्षुक, सड़क पर रहने वाले, घर से भागे, निर्योग्यत वाले, लापता, शोषण और दुर्व्यवहार के शिकार श्रेणी के बच्चे) लाभान्वित होंगे। मिशन वात्सल्य योजना क्रियान्वयन के लिए कुल 1,022 करोड़ 40 लाख रुपये का व्यय होगा। इसमें राज्यांश 408 करोड़ 96 लाख रुपये और केंद्रांश 613 करोड़ 44 लाख रुपये होगा। इससे प्रदेश के 33 हजार 346 बच्चे लाभान्वित होंगे। यदि योजना अन्तर्गत निर्धारित स्वीकृत अवधि में भारत सरकार द्वारा योजना मापदण्डों में कोई परिवर्तन किए जाते है तो उक्त अवधि में परिवर्तित मापदण्ड प्रभावशील होंगे। आयुष चिकित्सालयों में 373 नवीन पदों की स्वीकृतिे मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के 12 जिलों भोपाल, इन्दौर, नरसिंहपुर, मण्डलेश्वर (खरगौन), बालाघाट, गुना, भिण्ड, सीहोर, अमरकंटक (अनूपपुर), पन्ना, श्योपुर एवं शुजालपुर (शाजापुर) में 50 बिस्तरीय आयुष चिकित्सलयों एवं बड़वानी जिले में 30 बिस्तरीय चिकित्सालय के संचालन के लिए 373 पद एवं 806 मानव संसाधन सेवाएं ऑन कॉल की स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृत नवीन पदों में प्रथम श्रेणी के 52 पद, द्वितीय श्रेणी के 91 और तृतीय श्रेणी के 230 पद शामिल है। नियमित पदों पर वार्षिक वित्तीय भार 25 करोड़ 57 लाख रूपये आयेगा। इसके साथ ही स्वीकृत मानव संसाधन सेवाओं मे द्वितीय श्रेणी के 91, तृतीय श्रेणी के 117 और चतुर्थ श्रेणी के 598 पद शामिल है। मानव सेवाओं का प्रबंधन भारत सरकार के राष्ट्रीय आयुष मिशन से किया जायेगा। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् में भर्ती के लिए सेवा शर्ते एवं नियम अनुमोदित मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद्के वैज्ञानिकों/अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तें नियम 2025 का अनुमोदन प्रदान किया गया।विज्ञान, तकनीकी, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में वर्तमान समय में हो रहे अनुप्रयोगों के दृष्टिगत् प्रदेश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् की गतिविधियों में सुदूर संवेदन उपयोग केन्द्र, ग्रामीण प्रौद्योगिकी उपयोग केन्द्र, मौसम परिवर्तन अनुसंधान केन्द्र, अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान केन्द्र एवं उन्नत शोध एवं उपकरण सुविधा केन्द्र कार्यरत् है, के लिए उत्कृष्ट वैज्ञानिकों की आवश्यकता बनी रहती है। निर्णय अनुसार मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद में गैर वैज्ञानिक संवर्ग के लिए, सेवा संरचना एवं भर्ती नियमों को अंगीकृत किया गया है। वैज्ञानिक संवर्ग के लिए चूंकि केडर का प्रावधान नहीं होने एवं वैज्ञानिक संवर्ग के पदों को भविष्य में होने वाले वैज्ञानिक, तकनीकी, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में हो रहे अनुसंधानों के हुए मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद में वैज्ञानिक संवर्ग के केडर का उन्नयन किया जायेगा। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचार के लिए योग्य वैज्ञानिकों की सेवाएं प्रदेश को प्राप्त हो सकेगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 11 मई, 2015 द्वारा मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद में नवीन पदों की भर्ती पर लगाई गई रोक हटाये जाने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश में वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षेत्र में वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् नोडल एजेन्सी के रूप में कार्यरत है। मेडिको लीगल संस्थान के अधिकारियों को पुनरीक्षित (सातवें) वेतनमान का वास्तविक लाभ प्रदान किये जाने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा मेडिको लीगल संस्थान के अधिकारियों को पुनरीक्षित वेतनमान (सातवां वेतनमान) का वास्तविक लाभ लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के संवर्ग के समान 1 जनवरी 2016 से प्रदान करने की स्वीकृति दी गई है। शासन के समस्त विभागों में पुनरीक्षित वेतनमान (सातवां वेतनमान) का वास्तविक लाभ 1 जनवरी 2016 से प्रदान किया गया है। उसी अनुक्रम में मेडिको लीगल संस्थान के अधिकारियों को भी लाभ दिए जाने का निर्णय लिया गया है। लाभ दिये जाने पर एरियर राशि का अनुमानित वित्तीय भार 93 लाख रुपये आएगा। प्रदेश … Read more

जल दर्पण पोर्टल से अब हर गांव का नल-जल सिस्टम ऑनलाइन देखा जा सकेगा

 भोपाल प्रदेश में घर-घर नल से जल पहुंचने के लिए जल जीवन मिशन के अंतर्गत एकल व समूह नल जल योजनाओं पर काम हो रहा है। कई योजनाएं पूरी हो चुकी है और उनके संचालन का कार्य पंचायत को सौंपा गया है। यह शिकायत आम है कि योजनाएं भले ही बना ली गई हों, मगर जलापूर्ति नहीं हो रही है। विधानसभा में इसको लेकर प्रश्न भी उठ चुका है। इसे देखते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने तय किया है कि वह अब योजनाओं की निगरानी आनलाइन करेगा। इसके लिए जल दर्पण पोर्टल बनाया है, जिसमें मैदानी अमले को प्रतिदिन यह रिपोर्ट देनी होगी कि योजना चालू है या बंद। पानी आ रहा है या नहीं। पाइपलाइन ठीक काम कर रही है या नहीं। जानकारी सही दी जा रही है या नहीं, इस पर नजर उच्चाधिकारी रखेंगे। प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत 27,990 एकल नल जल योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। 15,947 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 12,043 के काम जारी हैं। इनमें से 8,358 नल-जल परियोजनाओं के आकलन में चूक हुई, जिसके कारण लागत 2,813 करोड़ रुपये बढ़ गई। केंद्र सरकार ने इस अतिरिक्त राशि को देने से इन्कार कर दिया और भार राज्य सरकार के खजाने पर आ गया। दोषी इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। इसके साथ ही बड़ी आबादी को मिलने वाले लाभ को देखते हुए सरकार ने काम आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह भी तय किया है कि पंचायतों द्वारा क्रियान्वित योजनाओं की निगरानी प्रतिदिन के आधार पर होगी। 28 हजार गांवों से फीडबैक लेने के लिए जल दर्पण पोर्टल विभाग ने बनाया है। इसमें मैदानी स्तर से बताया जाएगा कि योजना चालू है या बंद। यदि बंद है तो यह बताना पड़ेगा कि बिजली की लाइन कटने, पाइप लाइन की खराबी या फिर किस कारण से बंद हैं। इसके आधार पर सुधार की कार्य योजना तैयार होगी। कुल मिलाकर सरकार का उद्देश्य यह है कि योजना यदि संचालन लिए पंचायतों को सौंप दी गई हैं तो फिर घरों पर नल से जल पहुंचाना चाहिए। इसमें कोई परेशानी आ रही है तो उसका पता लगाकर समाधान किया जाए। ऐसे होगा काम जल दपर्ण पोर्टल में नलजल योजनाओं की दैनिक चालू बंद की स्थिति की जानकारी मैदानी क्षेत्र से नियमित ली जाएगी। उपयंत्रियों पोर्टल पर रहैंडपंप टेक्नीशियनों, हेल्परों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्यों को रजिस्टर करेंगे। ये अपने-अपने कार्यक्षेत्र की नलजल योजनाओं की दैनिक चालू-बंद स्थिति की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करेंगे। इसका सत्यापन उपयंत्री एवं सहायक यंत्री से कराया जाएगा। निगरानी का तंत्र कर रहे हैं विकसित : विभाग के प्रमुख सचिव पी नरहरि का कहना है कि घर-घर नल से जल पहुंचाना सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। बड़ी संख्या में योजनाएं पंचायतों द्वारा क्रियान्वित की जा रही हैं। कई बार शिकायत आती है कि जलापूर्ति नहीं हो रही है। हमने संचालन, संधारण और निगरानी की कार्य योजना बनाई है। निगरानी का तंत्र विकसित किया गया है। जल दर्पण पोर्टल के माध्यम से दैनिक आधार पर निगरानी की जाएगी। इसका लाभ यह होगा कि वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगा और यदि कहीं कोई समस्या है तो उसे दूर करने की दिशा में काम किया जाएगा।

नर्स गायत्री चौधरी को कलेक्टर सम्मानित, अस्पताल में मरीजों के बीच सर्जिकल वार्ड में शराब पार्टी का किया पर्दाफाश

अशोकनगर  मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में कुछ दिन पूर्व अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में मरीज और उनके तीमारदार पलंग पर शराब पी रहे हैं। नर्सिंग ऑफिसर ने रंगेहाथ उन लोगों को पकड़ा था। इसका वीडियो वायरल हुआ था। इस काम के लिए नर्सिंग ऑफिसर गायत्री चौधरी को कलेक्टर ने सम्मानित किया। गायत्री चौधरी को कलेक्टर ने किया सम्मानित दरअसल, पलंग पर शराब पी रहे लोगों को नर्सिंग ऑफिसर गायत्री चौधरी ने रंगे हाथों पकड़ा था। साथ ही उनलोगों को डांट भी लगाई थी और वीडियो बनाकर उच्च अधिकारियों को दिया था। अशोकनगर कलेक्टर ने इसकी खूब प्रशंसा की है। इसे लिए उन्हें सम्मानित किया गया है।  दरअसल,  जिला अस्पताल में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर गायत्री चौधरी को समीक्षा बैठक के दौरान उनके दायित्वों का पूर्ण निष्ठा एवं कुशलतापूर्ण तरीके से निर्वहन करने पर प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने 29 अक्टूबर 2025 को रात्रि 11 बजे अपनी ड्यूटी के दौरान जिला चिकित्सालय के सर्जिकल वार्ड में भर्ती मरीज और उनके परिजनों को शराब का सेवन करते हुए पाया था। साथ ही कार्यस्थल को मंदिर बताते हुए ऐसा नहीं करने की सलाह दी थी। इस प्रकार निडर होकर अपने दायित्वों का पूर्ण निष्ठा और कुशलतापूर्ण तरीके से निर्वहन किया। कलेक्टर ने इस कार्य की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही भविष्य में भी इसी प्रकार अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन पूरी सूझबूझ, परिश्रम एवं समर्पित भाव के साथ करती रहें। सोशल मीडिया पर एक्टिव हजारों में फॉलोअर्स गायत्री चौधरी सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव रहती हैं और इंस्टाग्राम पर उनके 22000 से अधिक फॉलोअर्स हैं, जिस पर वह अपने मॉडल लुक में फोटोज और वीडियो को अपलोड करती हैं, जिनके व्यूज भी हजारों और लाखों में हैं। साथ ही ड्यूटी का निर्वहन भी समय से करती हैं।  

मरीज की जान बचाई पीएम श्री एयर एम्बुलेंस ने, खंडवा से इंदौर एयरलिफ्ट किया गया

 खडंवा  पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा इमरजेंसी में कई जिंदगियों को बचाने ने अहम भूमिका निभा रही है। इसी कड़ी में खडंवा के शाहपुर निवासी 73 साल की ताराबाई पति बालाराम कोउपचार के लिए इंदौर एयरलिफ्ट कर भर्ती करवाया गया।  खंडवा जिला अस्पताल में भर्ती ताराबाई को इलाज के लिए एयर एंबुलेंस से आज सुबह 9.30 बजे इंदौर भेजा गया। शाहपुर निवासी 73 साल की ताराबाई पति बालाराम को रीढ़ की हड्डी में समस्या है। जिस कारण उनके दोनों पैर काम नहीं कर रहे। ताराबाई को फिमेल मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया था।  यहां से उन्हें खंडवा नागचुन हवाई पट्टी से इंदौर एयर एंबुलेंस की मदद से रेफर किया गया है। जिले में पहली बार किसी मरीज को एयर एंबुलेंस से खंडवा से इंदौर रेफर किया गया है।

कड़ाके की ठंड में बदलाव: इंदौर और भोपाल के स्कूल अब सुबह 8:30 बजे से शुरू, पहली से आठवीं कक्षा

भोपाल   कड़ाके की ठंड के चलते राजधानी भोपाल और इंदौर में स्कूलों के समय में बदलाव हुआ है। जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय से जारी आदेश के मुताबिक, अब पहली से आठवीं कक्षा तक के स्कूल सुबह 8.30 बजे के बाद खुलेंगे। यह आदेश सरकारी, प्राइवेट, केंद्रीय, जवाहर नवोदय, सीबीएसई, आईसीएससी सभी स्कूलों पर लागू होगा। जिला शिक्षा अधिकारी ने यह आदेश कडाके की ठंड को देखते हुए जारी किया है। साथ ही इस आदेश को तत्काल प्रभाव से प्रभावशील होगा। बढ़ती सर्दी के कारण फैसला यह फैसला बढ़ती सर्दी और बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि तेज हवाओं और गिरते तापमान के बीच छोटे बच्चों का जल्द स्कूल पहुंचना मुश्किल हो रहा था। 6 डिग्री के आसपास पहुंचा तापमान  इंदौर जिले में लगातार पड़ रही कड़ाके की ठंड से आमजन हालाकान हैं। तापमान 6 डिग्री के करीब पहुुंच रहा है, ऐसे में सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों को खासी परेशानी होती है। अब जिले के सभी शासकीय और निजी स्कूल सुबह 9 बजे बाद ही शुरू हो सकेंगे। कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्कूलों का समय बदलने के निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी को दिए है। मंगलवार से स्कूलों में आदेश लागू होंगे। ठंड में बढ़ी बच्चों की परेशानी नवंबर में लगातार कड़ाके की ठंड बढ़ती जा रही है, वहीं आने वाले समय में तापमान में गिरावट और शीतलहर का अलर्ट जारी किया गया है, इसलिए सुबह 7 बजे स्कूल जाने वाले बच्चों को ठंड से परेशान होना पड़ता है। बच्चों की परेशानी को देखते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्कूलों का समय बदलने के निर्देश दिए है। सुबह की शिफ्ट में संचालित होने वाले स्कूलों का समय दो घंटे बढ़ाया जा रहा है।    

मंदिर की चोरी का मामला: मां शारदा के छत्र और सोने के नथ हुए गायब

मैहर मध्य प्रदेश की विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी मैहर में मां शारदा मंदिर में चढ़ावे को लेकर एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिसके बाद हड़कंप मच गया। जबलपुर के एक श्रद्धालु ने आरोप लगाया है कि उसकी ओर से माता को अर्पित किया गया 2 किलो चांदी का छत्र और एक सोने की नथ मंदिर के खजाने (कोषालय) में जमा ही नहीं की गई। इस कथित चोरी को लेकर जब श्रद्धालु ने कलेक्टर से शिकायत की, तो जिला प्रशासन ने मंदिर के प्रधान पुजारी को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया। यह नोटिस अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे मंदिर के प्रबंधन और भक्तों की आस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या है पूरा मामला? दरअसल यह पूरी घटना 22 अक्टूबर 2025 की बताई जा रही है। जब जबलपुर निवासी व्यवसायी संजय पटेल ने सायंकाल आरती से पहले 2 किलो चांदी का छत्र, चांदी का मुकुट और एक सोने की नथ मां शारदा को अर्पित करने के लिए वहां मौजूद पुजारी सुमित महाराज को दी थी। श्रद्धालु का आरोप है कि उन्हें दान की कोई रसीद नहीं दी गई। जब एक हफ्ते बाद 30 अक्टूबर को उन्होंने इस बारे में कलेक्टर मैहर से मौखिक शिकायत की, तो प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह कीमती चढ़ावा मंदिर समिति के खजाने में जमा ही नहीं हुआ था। कलेक्टर को की गई शिकायत के बाद, प्रशासन ने मंदिर के प्रधान पुजारी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि जवाब न मिलने या असंतोषजनक जवाब देने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुजारी ने कहा- "यह साजिश है" मामला तूल पकड़ने और नोटिस वायरल होने के बाद, मंदिर के प्रधान पुजारी पवन महाराज ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने इन आरोपों को मंदिर को बदनाम करने की साजिश बताया है। प्रधान पुजारी पवन महाराज ने बताया कि दानदाता संजय पटेल ने खुद ही यह मिन्नत की थी कि उनकी ओर से अर्पित छत्र और नथ को एक हफ्ते तक माता के पास ही रखा जाए। उन्होंने दावा किया कि दानदाता की इच्छानुसार, 28 अक्टूबर को यह सारा कीमती सामान विधिवत कोषालय में जमा किया जा चुका है और अब साजिशन इस मामले को तूल दिया जा रहा है। मन्दिर कर्मचारी समेत अन्य लोगों को नोटिस इस पूरे प्रकरण पर मैहर मन्दिर परिसर की प्रशासक एवं एसडीएम दिव्या पटेल ने बताया कि मंदिर समिति को शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके आधार पर जांच शुरू की गई है।एसडीएम ने कहा, "शिकायत की जांच के लिए मंदिर के कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए थे। उनके जवाब प्राप्त हो गए हैं। इन जवाबों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।हालांकि अब देखना यह भी होगा कि प्रशासन जांच के बाद इस पर क्या कार्यवाही करता है।

अब घर बैठे बनेगा जीवन प्रमाणपत्र, पेंशनर्स के लिए बड़ी सुविधा

भोपाल  पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। नगरीय निकायों के पेंशनर्स अब जीवन प्रमाणपत्र के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्त होंगे। नगरीय विकास विभाग ने डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट की सुविधा लागू करते हुए सभी निकायों को व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि यह प्रणाली आधार और बायोमेट्रिक आधारित है, जिससे पेंशनर्स घर बैठे ऑनलाइन जीवन प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकेंगे और उन्हें बार-बार उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं रहेगी। वैकल्पिक होगी सुविधा प्रदेश के नगरीय निकायों में करीब 16,500 पेंशनर्स इस सुविधा का लाभ ले सकेंगे। विभाग ने अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रक्रिया संबंधी प्रशिक्षण देने को भी कहा है। हालांकि यह सुविधा वैकल्पिक होगी और पुरानी प्रक्रिया पूर्ववत जारी रहेगी। ऑनलाइन प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पेंशनर्स के पास आधार संख्या, लिंक मोबाइल नंबर और पेंशन संबंधी विवरण अनिवार्य होंगे। बायोमेट्रिक डिवाइस, आरडी सर्विस से युक्त उपकरण और जीवन प्रमाण ऐप की मदद से प्रक्रिया पूरी की जाएगी। क्या होता है जीवन प्रमाण पत्र जीवन प्रमाण पत्र, जिसे डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र भी कहते हैं, केंद्र और राज्य सरकार के पेंशनभोगियों के लिए एक बायोमेट्रिक आधारित डिजिटल सेवा है। यह एक डिजिटल प्रमाण पत्र है जो पेंशनरों को पेंशन वितरण एजेंसी को स्वयं उपस्थित हुए बिना अपनी पेंशन जारी रखने की अनुमति देता है। इस सेवा के माध्यम से, पेंशनभोगी किसी भी सीएससी केंद्र, बैंक शाखा या सरकारी कार्यालय में जाकर अपने आधार और बायोमेट्रिक डेटा का उपयोग करके अपना डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बना सकते हैं।

खंडवा का सिहाड़ा गांव: वक्फ बोर्ड के दावे पर पंचायत ट्रिब्यूनल में आज होगा जवाब

 खंडवा   मध्य प्रदेश के खंडवा स्थित पूरे सिहाड़ा गांव की जमीन को वक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्ति बताया है। इस मामले में पंचायत की ओर से मंगलवार को मध्य प्रदेश स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल में भोपाल जाकर अपना जवाब पेश किया जाएगा। ग्राम पंचायत ने दरगाह कमेटी को नोटिस भेजा था दरअसल, ग्राम सिहाड़ा स्थित दरगाह के आसपास अतिक्रमण होने और तार फेंसिंग कराने पर ग्राम पंचायत ने दरगाह कमेटी को नोटिस भेजा था। नोटिस का जवाब देने के बजाए दरगाह कमेटी ने वक्फ बोर्ड में पंचायत के नोटिस की शिकायत कर दी। इस पर वक्फ बोर्ड ने भी पूरे गांव की जमीन को अपनी संपत्ति करार दे दिया। कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को भी जारी हुए हैं नोटिस मामला तत्काल मध्य प्रदेश स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल के पास गया, जहां से पंचायत के अलावा खंडवा के कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को भी नोटिस जारी हुए। पंचायत की ओर से जवाब पेश करने के लिए सरपंच प्रतिनिधि हेमंत चौहान भोपाल पहुंचे हैं। पंचायत ने वक्फ बोर्ड के दावे को बताया झूठा पंचायत की ओर से तैयार जवाब में कहा गया है कि पूरा गांव या उसकी भूमि वक्फ संपत्ति नहीं, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार शासकीय भूमि है। विवादित खसरा नंबर 781, रकबा 14.05 हेक्टेयर राजस्व अभिलेखों में मध्य प्रदेश शासन, ग्राम आबादी के नाम दर्ज है। इस भूमि पर ग्राम पंचायत भवन, प्राथमिक विद्यालय, आंगनवाड़ी केंद्र, नल-जल योजना और आवासीय मकान बने हैं, जो सार्वजनिक उपयोग की सुविधाएं हैं। वक्फ बोर्ड से जुड़े कुछ लोगों ने अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण किए हैं, जिन्हें हटाया जाना चाहिए। वक्फ बोर्ड का पंचायत पर आरोप इस बीच, जिला वक्फ बोर्ड के सचिव रियाज खान का कहना है कि ग्राम पंचायत द्वारा दरगाह की जमीन को अपनी बताकर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। विवाद इस जमीन को लेकर है, पूरे गांव की जमीन को लेकर पंचायत लोगों को गुमराह कर रही है।