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राज्यपाल और मुख्यमंत्री से करेंगे मुलाकात, निवेश संगोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में होंगे शामिल

भोपाल   आसियान देशों के उच्च स्तरीय राजनयिकों का प्रतिनिधिमंडल 18 से 20 नवंबर तक तीन दिवसीय भोपाल प्रवास के दौरान कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस भ्रमण का उद्देश्य मध्यप्रदेश और आसियान देशों के बीच आर्थिक, औद्योगिक, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट में औद्योगिक सहयोग पर चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से प्रतिनिधिमंडल 18 नवंबर को भेंट करेंगा। बैठक राज्य सरकार के निवेश-अनुकूल वातावरण, औद्योगिक नीति और आसियान देशों के साथ साझेदारी को लेकर केंद्रित रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक परिदृश्य, आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, एग्री-प्रोसेसिंग, पर्यटन और नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे। प्रतिनिधिमंडल प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित रात्रिभोज में शामिल होगा। जिसमें दोनों पक्षों के बीच आपसी सहयोग और आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने पर चर्चा भी होगी। राज्यपाल से शिष्टाचार भेंट और निवेश संगोष्ठी में सहभागिता राज्यपाल श्री मांगूभाई पटेल से प्रतिनिधिमंडल 19 नवंबर को शिष्टाचार भेंट करेगा। इसके बाद होटल कोर्टयार्ड मैरियट में ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट सेमिनार में शिरकत करेंगे। सेमिनार में राज्य के उद्योगपति, चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि और प्रमुख निवेशक शामिल होंगे। इसमें मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास, इन्फ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक नेटवर्क और निवेश-अनुकूल नीतियों की प्रस्तुति दी जाएगी। मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि से होंगे रूबरू प्रतिनिधिमंडल अपने भ्रमण के दूसरे दिन 19 नवंबर को साँची और भीमबेटका जैसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल विश्व प्रसिद्ध स्थलों का भ्रमण करेगा। इससे उन्हें मध्यप्रदेश की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा, बौद्ध कला और ऐतिहासिक धरोहरों से परिचित होने का अवसर मिलेगा। भ्रमण के तीसरे दिन 20 नवंबर को प्रतिनिधिमंडल भोपाल स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय और जनजातीय संग्रहालय का भी अवलोकन करेगा। राज्य सरकार का यह प्रयास प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के अनुरूप है, जिसके माध्यम से भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच आर्थिक, निवेश और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत किया जा रहा है। मध्यप्रदेश, अपनी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, मजबूत औद्योगिक आधार, निवेश-अनुकूल नीतियों और तेजी से विकसित होते बुनियादी ढांचे से आसियान देशों के लिए आकर्षक निवेश गंतव्य बनकर उभर रहा है। यह दौरा मध्यप्रदेश और आसियान देशों के बीच दीर्घकालीन सहयोग की दिशा में ठोस कदम साबित होगा और दोनों पक्षों के बीच औद्योगिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक साझेदारी को नई गति देगा। उल्लेखनीय है कि आसियान (एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशन्स) दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, सुरक्षा, सांस्कृतिक संबंध और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना है। आसियान में 10 देश सदस्य हैं, जिनमें इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, फिलीपींस, वियतनाम, म्यांमार, कम्बोडिया,लाओस और ब्रुनेई शामिल हैं।  

भारत का फूड-बास्केट बना MP: कृषि विकास में रचा नया कीर्तिमान

भोपाल  कभी 'बीमारू राज्य' और विकास की दौड़ में पिछड़ा माना जाने वाला मध्यप्रदेश आज आत्मनिर्भरता, कृषि समृद्धि और तीव्र आर्थिक विकास का प्रतीक बन चुका है। यह परिवर्तन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व, सरकार की योजनाबद्ध नीतियों और किसानों की अटूट मेहनत का परिणाम है। मध्यप्रदेश अब न केवल विकास दर में अग्रणी है, बल्कि खाद्यान्न उत्पादन में भी देश में नई पहचान बना चुका है। यही कारण है कि भारत का हृदय प्रदेश अब देश का नया 'फूड-बास्केट' कहलाने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि मध्यप्रदेश ने कृषि और उससे सम्बद्ध क्षेत्रों में जो आशातीत प्रगति की है, उसमें हमारे अन्नदाताओं की महती भूमिका है। बीते वर्षों में मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन, सिंचाई विस्तार और किसानों की आय वृद्धि के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर देश का नया 'फूड बास्केट' बनने का गौरव प्राप्त किया है। राज्य की विकास दर अब डबल डिजिट में पहुंच चुकी है, जिसमें कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने का संकल्प लिया है। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, पर्याप्त बिजली आपूर्ति, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी, भावांतर भुगतान योजना और कृषि यंत्रीकरण ने किसानों से जीवन में खुशहाली आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आज मध्यप्रदेश गेहूं, चना, मसूर, सोयाबीन और तिलहन उत्पादन में देश में अग्रणी बन चुका है। पंजाब और हरियाणा जैसे परम्परागत कृषि सम्पन्न राज्यों को कई फसलों के उत्पादन में पीछे छोड़ना राज्य के किसानों की मेहनत और सरकार की संवेदनशील नीतियों का ही परिणाम है। हमने कृषि के साथ-साथ डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्रों में भी राज्य ने नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP), एग्रो एंड फूड प्रोसेसिंग इकाइयां और कोल्ड स्टोरेज चेन जैसे अनेक कदम किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने में मददगार सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है – हर खेत तक पानी, हर किसान तक प्रगति और हर घर तक समृद्धि। मध्यप्रदेश का किसान अब सिर्फ़ अन्नदाता नहीं, बल्कि खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत का निर्माणकर्ता बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और राज्य के पूरे कृषि अमले को इस राष्ट्रीय उपलब्धि की ओर बढ़ने के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश देश की खाद्य सुरक्षा को सशक्त करेगा, बल्कि वैश्विक कृषि मानचित्र पर भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा। कृषि समृद्ध प्रदेश बनने की कहानी कभी सीमित सिंचाई साधनों, अस्थिर बिजली आपूर्ति और अपर्याप्त अवसंरचना के कारण मध्यप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था घाटे में चल रही थी। किसानों की आमदनी सीमित थी और ग्रामीण जीवन में भी कुछ कठिनाइयां थीं। परंतु बीते दो दशकों में परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। सरकार ने कृषि और ग्रामीण विकास को अपनी नीतियों के केंद्र में रखकर जो कार्य किया, उसने राज्य की तस्वीर ही बदल दी। हाल ही में हुए आर्थिक सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश ने 24 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है, जो राष्ट्रीय विकास औसत से कहीं अधिक है। यह प्रगति बताती है कि मध्यप्रदेश अब आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। कृषि विकास में आई नई क्रांति मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा विकास कृषि क्षेत्र में देखा गया है। बीते वर्षों में राज्य सरकार ने कृषि को सिर्फ़ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समृद्धि का आधार बनाने का संकल्प लिया। किसानों को फसल उत्पादन की लागत में राहत देने, खेती को लाभकारी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं लागू की गईं। कृषक कल्याण मिशन के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सभी जतन किए जा रहे हैं। भावांतर भुगतान योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फ़सल खरीदी और इस खरीदी पर बोनस राशि भी देने जैसे प्रयासों ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। इसके अलावा उन्नत कृषि उपकरणों पर सब्सिडी और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने की कोशिशों ने भी खेती-किसानी को और अधिक रूचिकर, उत्पादक और टिकाऊ बनाया है। राज्य में सिंचाई सुविधाओं का खेत तक विस्तार भी एक मील का पत्थर साबित हुआ है। नर्मदा घाटी विकास परियोजना, पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदियों को आपस में जोड़ने और केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी लिंक जैसी परियोजनाओं से लाखों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा के दायरे में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के सुदृढ़ीकरण से रबी सीजन में फसलों की उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ गई है। खेती-किसानी की बदलती परिभाषा मध्यप्रदेश के किसान अब पारम्परिक खेती तक सीमित नहीं हैं। वे नई तकनीकों और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार ला रहे हैं। ड्रिप इरिगेशन, ऑर्गेनिक फार्मिंग, मल्टीक्रॉपिंग और फसल विविधीकरण जैसे नवाचारों ने कृषि को एक व्यावसायिक रूप दिया है। प्रदेश में कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान केंद्रों और कृषि विज्ञान केंद्रों की सक्रिय भूमिका ने किसानों को नवीनतम जानकारी सहित प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया है। अब किसान बाजार की मांग के अनुसार फसलें पैदा कर रहे हैं और निर्यात की दिशा में भी कदम बढ़ा रहे हैं। कृषि से औद्योगिक विकास तक मध्यप्रदेश की तेज कृषि विकास दर देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश कृषि आधारित उद्योगों और एग्रो प्रोसेसिंग का केंद्र बनने जा रहा है। राज्य में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक हब के निर्माण से कृषि उत्पादों के निर्यात की संभावना बढ़ेगी। सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट 'वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना भी इस दिशा में मददगार सिद्ध हो रही है। यह किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में तो कारगर है ही, ग्रामीण रोजगार को भी यह योजना स्थायी बना रही है। नया मध्यप्रदेश, नया आत्मविश्वास मध्यप्रदेश आज बड़े आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब यह राज्य विकास के नए अध्याय लिख रहा है। गांव से शहर तक, खेत से बाजार तक, फ़ार्म टू लैब हर जगह परिवर्तन की एक नई लहर महसूस की जा रही है। प्रदेश के किसान अब सिर्फ अन्नदाता नहीं रहे, बल्कि “राष्ट्र निर्माता” और ऊर्जादाता भी बन रहे हैं। किसानों को उनके खेत में सोलर पम्प लगाने के … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर के सूर्या हॉफ मैराथन-2025 में नई दिल्ली से वर्चुअली जुड़कर दी बधाई

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को जबलपुर में सूर्या हॉफ मैराथन-2025 के तृतीय संस्करण की नई दिल्ली से वर्चुअली जुड़ कर आयोजन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर जबलपुर में विद्यमान मध्य भारत एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेन्ट जनरल श्री पदम सिंह शेखावत और सूर्या हॉफ मैराथन के आयोजन से जुड़ी सेना की टीम और धावकों से वर्चुअली संवाद किया। लेप्टिनेन्ट जनरल श्री पी.एस. शेखावत ने बताया कि यह मैराथन जबलपुर को भारत के खेल मानचित्र पर उभारने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। समाज के सभी वर्गों, मुख्यत: युवा वर्ग में खेल कूद और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाना, जबलपुर को पर्यटन केन्द्र के रूप में बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना भी मैराथन का उद्देश्य है। मैराथन से होने वाली आय का एक भाग दृष्टि बाधित केन्द्र के उत्थान को समर्पित किया जाएगा। इस मैराथन को क्रमश: 21, 10, 05 और 03 किलोमीटर श्रेणी में आयोजित किया गया। इसमें मध्यप्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से भी विभिन्न आयु वर्गों के लगभग 10 हजार धावकों ने भाग लिया।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर दी बधाई, मीडिया को बताया लोकतंत्र का स्तंभ

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 1966 में आज ही के दिन हुई भारतीय प्रेस परिषद की स्थापना के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय प्रेस दिवस प्रति वर्ष 16 नवम्बर को मनाया जाता है। लोकतंत्र को मजबूत करने, समाज को नई दिशा देने और विकास को गति देने में पत्रकारिता जगत का महत्वपूर्ण योगदान है। यह दिवस स्वतंत्र और दायित्वपूर्ण प्रेस की भूमिका को समर्पित है।  

हाईवे हादसा: फॉर्च्यूनर ट्रैक्टर में घुसी, पांच लोगों की मौके पर दर्दनाक मौत

ग्वालियर ग्वालियर-झांसी हाईवे पर सुबह 6.30 बजे भीषण हादसा हो गया। मालवा कॉलेज के ठीक सामने रेत से भरे ट्रैक्टर में एक फॉर्च्यूनर कार जा घुसी। हादसा इतना गंभीर था कि फॉर्च्यूनर में सवार पाँच लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। हादसे में मृत लोगों के नाम क्षितिज उर्फ प्रिंस राजावत, राज पुरोहित, कौशल सिंह भदौरिया, आदित्य उर्फ राम जादौन और अभिमन्यु सिंह तोमर हैं। यह सभी ग्वालियर के ही रहने वाले हैं, छात्र हैं। क्षितिज के पिता उमेश बिल्डर हैं, गाड़ी इसके पिता की ही थी। क्षितिज ही गाड़ी चला रहा था। जानकारी के मुताबिक फॉर्च्यूनर (एमपी 07 सीजी 9006) झांसी की ओर से आ रही थी। मालवा कॉलेज के सामने जैसे ही गाड़ी गुजरी, मोड़ से रेत से भरा ट्रैक्टर निकला। फॉर्च्यूनर तेज रफ्तार में थी, जिससे चालक गाड़ी संभाल नहीं पाया और वाहन ट्रैक्टर ट्रॉली में घुस गया। कार का आधा हिस्सा ट्रॉली के नीचे चला गया और पांचों की मौके पर ही मौत हो गई। शव ट्रैक्टर ट्रॉली और कार के बीच फंसे हुए थे। कार पूरी तरह चकनाचूर हो गई। सूचना पर पुलिस पहुंची और ग्रामीणों की मदद से कटर से गाड़ी काटकर शवों को निकालने का प्रयास शुरू किया गया। पुलिस ने क्या कहा एसएसपी, धर्मवीर सिंह ने कहा कि "झांसी रोड थाना क्षेत्र के अंतर्गत मलवा कॉलेज के सामने बड़ा हादसा हुआ है। पाँच लोगों की मौत हुई है। मौके पर फोर्स भेजी है।"

एमपी हाईकोर्ट का कड़ा रुख: युवक को टाइपिंग त्रुटि से हुई जेल, कलेक्टर से दो लाख वसूलने के निर्देश

जबलपुर मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के 26 वर्षीय सुशांत बैस ने कहा कि एक लिपिकीय त्रुटि के कारण मुझे एक साल से ज्यादा समय तक जेल में रहना पड़ा। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत उनकी गलत हिरासत इस बात का एक स्पष्ट उदाहरण बन गई है कि कैसे एक नौकरशाही का जाल किसी की ज़िंदगी को उलट-पुलट कर सकता है। सुशांत को पिछले साल चार सितंबर को गिरफ़्तार किया गया था और इस साल नौ सितंबर को हाई कोर्ट द्वारा उनकी रिहाई के आदेश के बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। हाई कोर्ट ने ज़िला कलेक्टर को अवमानना ​​का नोटिस जारी किया और उन्हें सुशांत को दो लाख रुपये का मुआवज़ा देने का निर्देश दिया। लेकिन यह राहत उनके लिए कोई सांत्वना नहीं है। पत्नी अकेले संघर्ष कर रही थी 26 वर्षीय सुशांत का कहना है कि एक साल तक चली इस यातना ने उनके दिल पर गहरे जख्म छोड़ दिए हैं। मेरी बेटी अनाया का जन्म 13 मार्च को हुआ था। मैंने उसे पहली बार घर लौटने के बाद ही देखा था। उन्होंने यह याद करते हुए कि कैसे उनकी पत्नी अकेले संघर्ष कर रही थीं और उनके माता-पिता ने एक ऐसा मुकदमा लड़ने के लिए पैसे उधार लिए थे जिसे वे समझ नहीं पा रहे थे। अनाया ने अपने पहले कदम तब रखे जब मैं जेल में था। कोई व्यवस्था, कोई पैसा मुझे वह समय वापस नहीं दिला सकता। अपनी गिरफ्तारी से बमुश्किल कुछ महीने पहले ही शादी करने वाले सुशांत कहते हैं कि इस यातना ने उनके दिल पर गहरे जख्म छोड़ दिए हैं। अब, इस गलत तरीके से कैद किए जाने के कारण मेरी नौकरी की संभावना भी खत्म हो गई हैं। कोर्ट ने अपनाया गंभीर रूख सुशांत को जेल में डालने वाला कोई अपराध नहीं था, बल्कि अधिकारियों ने शुरुआत में इसे एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के दौरान टाइपिंग की गलती बताकर टाल दिया था। शहडोल के ज़िला कलेक्टर केदार सिंह ने एक एनएसए निरोध आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें वास्तविक अभियुक्त नीरजकांत द्विवेदी के बजाय सुशांत का नाम था। न्यायालय ने युवक को हुई मानसिक प्रताड़ना पर गंभीर रुख़ अपनाया। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने राज्य सरकार की भी खिंचाई की और कहा कि वह निरोध आदेश को मंज़ूरी देने से पहले उसकी जांच-पड़ताल करने में विफल रही।

वन्यजीव संरक्षण कदम: कुत्तों का टीकाकरण कर रोका जाएगा CDV संक्रमण

भोपाल मध्य प्रदेश में चीता और बाघ सुरक्षित रहें, इसके लिए श्वानों का टीकाकरण किया जाएगा। प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क और पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र व इसके बाहर बेसहारा श्वानों को टीके लगाए जाएंगे। दरअसल, कूनो में चीतों और पन्ना में बाघों को कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) का संक्रमण होने की आशंका जताई गई थी। जिसके बाद वन विभाग ने चीतों और बाघों को इस संक्रमण से बचाने के लिए श्वानों के टीकाकरण का निर्णय लिया। पिछले वर्ष भी श्वानों को टीके लगाए गए थे। दरअसल, सीडीवी तेजी से फैलने वाला वायरस है जिससे प्रभावित वन्य प्राणी की मौत भी हो सकती है। यह प्रभावित प्राणी के श्वसन, पाचन और नर्वस सिस्टम को बुरी तरह प्रभावित करता है। पूर्व में श्वानों के खून के नमूनों में सीडीवी और रैबीज के लक्षण मिल चुके हैं। इन श्वानों के वन्य प्राणियों के संपर्क में आने के बाद यह वायरस फैल सकता है। पहले भी मिल चुके बाघ और तेंदुए में सीडीवी के लक्षण वर्ष 2015 में पन्ना में मृत बाघ के शरीर के सैंपल इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आइवीआरआइ) बरेली भेजे गए थे। जांच में बाघ में सीडीवी होने की पुष्टि हुई थी। उस समय भी पार्क प्रबंधन ने बाघों के खून की जांच की थी और 1200 श्वानों का टीकाकरण हुआ था। वर्ष 2024 में छतरपुर में एक बाघ और एक तेंदुए में सीडीवी के लक्षण मिले थे। संजय टाइगर रिजर्व भेजे गए बाघ में भी रैबीज वायरस पाया गया था। सीडीवी संक्रमण न फैले चीता व बाघों में सीडीवी संक्रमण न फैले, इसके लिए यहां श्वानों का टीकाकरण किया जाएगा। – सुभरंजन सेन, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, मप्र वन यह होता है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस सीडीवी गंभीर वायरल संक्रमण है जो कुत्तों, फेरेट्स, रैकून और लोमड़ी जैसे मांसाहारी जानवरों को प्रभावित करती है। यह श्वसन, जठरांत्र और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। यह बीमारी टीकाकरण के माध्यम से रोकी जा सकती है। यह मनुष्यों को प्रभावित नहीं करती है। सीडीवी सीधे संपर्क से फैलता है, जैसे संक्रमित जानवरों से हवा में निकली बूंदों के माध्यम से। यह संक्रमित स्राव (जैसे नाक से स्राव, मूत्र और मल) या भोजन और पानी के दूषित होने से भी फैल सकता है। इससे दस्त और उल्टी, आंखों और नाक से गाढ़ा पीला स्राव, खांसी, सिर का झुकना या लड़खड़ाना जैसे गंभीर लक्षण देखने को मिलते हैं।

MP के रायसेन में सड़क हादसा, कार की टक्कर से ट्रैक्टर ट्राली पलटी, 24 घायल

रायसेन मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के सुल्तानगंज-बेगमगंज मार्ग पर शनिवार रात में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। ट्रैक्टर ट्रॉली में बैठकर दर्शन के लिए जा रहे तीर्थयात्री घायल हो गए। हादसा इंडियन गैस एजेंसी के समीप उस वक्त हुआ जब मोदकपुर गांव से करीब 40 लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर सागर जिले के बंडा क्षेत्र के नोनिया गांव स्थित कुएं के दर्शन के लिए निकले थे। इसी दौरान सामने से आ रही तेज रफ्तार कार ने ट्रॉली को सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि यात्रियों से भरी ट्रॉली मौके पर पलट गई। हादसे में ट्रॉली में सवार 24 यात्री घायल हो गए। इनमें सात की हालत गंभीर बताई जा रही है। कार में सवार चार लोगों में से तीन मौके से फरार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार सवार लोग शराब के नशे में थे। गंभीर रूप से घायल गेंदालाल अहिरवार निवासी सिंगपुर गांव, गैरतगंज तहसील को प्राथमिक उपचार के बाद सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। घटना के बाद सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहगीरों और पुलिस की मदद से सभी घायलों को सुल्तानगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। वहां से 25 घायलों को बेहतर उपचार के लिए सागर रेफर किया गया। हादसे में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर सड़क किनारे खेत में जा गिरी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कार चोरों का दुस्साहस: ACP ऑफिस के पास से गाड़ी उड़ा कर उपाध्यक्ष को घायल किया

इंदौर अन्नपूर्णा एसीपी(ACP) कार्यालय से मात्र 200 मीटर दूर शुक्रवार शाम साढ़े सात बजे बदमाशों ने बिल्डर की कार चुरा ली। रहवासी संघ उपाध्यक्ष ने बदमाशों को रोकने की कोशिश की, मगर टक्कर मारकर भाग गए। फिर चौराहा पर भी स्कूटर सवारों को चपेट में लिया और कार लेकर फरार हो गए। चोरों ने दोबारा रिवर्स लेकर रौंदने का प्रयास किया घटना क्रांति कृपलानी नगर की है। रहवासी राजेंद्र सचदेवा के अनुसार बिल्डर कमल परियानी की कार घर के बाहर खड़ी थी। तभी दो बदमाशों ने लाक खोला व कार स्टार्ट कर ली। जीपीएस का नोटिफिकेशन मिलने पर कमल चौंके और पत्नी को सूचना दी। रहवासी संघ उपाध्यक्ष अशोक सचदेवा को भी अलर्ट कर दिया। स्कूटर सवारों को रौंदने का प्रयास वहीं बेखौफ बदमाशों में चाणक्यपुरी चौराहा पर भी एक घटना को अंजाम दिया। राजेंद्र सचदेवा के अनुसार, बदमाश चाणक्यपुरी चौराहा पहुंचे और दो स्कूटर सवारों को टक्कर मार दी। कार में जीपीएस था। आरोपित केसरबाग रोड, चोइथराम सब्जी मंडी से तिलकनगर पहुंच गए। आगे जाकर कार लावारिस छोड़ दी और फरार हो गए। अन्नपूर्णा पुलिस ने अभी केस दर्ज नहीं किया है।

एसआईआर में आपके मन के सभी कन्फ्यूज़न दूर—यहाँ मिलेंगे सरल जवाब

एसआईआर के दौरान मन में उठने वाले सवालों के समझिए आसान जवाब भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर प्रदेश में चल रही है मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया भोपाल भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है। 4 नवंबर से बीएलओ मतदाताओं के घर घर जाकर गणना पत्रक का वितरण कर रहे हैं। एसआईआर को लेकर मतदाताओं के मन में कई सवालों को लेकर असमंजस की स्थिति भी है। जानिए मतदाताओं के मन में उठने वाले सवालों का आसान जवाब सवाल और उनके जवाब प्रश्न 1- क्या गणना अवधि में गणना पत्रक के साथ कोई दस्तावेज निर्वाचक से लेना है ? उत्तर – गणना अवधि में बीएलओ द्वारा कोई दस्तावेज निर्वाचन से प्राप्त नहीं किया जाएगा। प्रश्न 2 – यदि कोई निर्वाचक अपना फार्म किन्हीं कारणों से प्रस्तुत नहीं कर पाता है तो उसको निर्वाचक नामावली में नाम जोड़ने के लिए क्या विकल्प हैं? उत्तर-   ऐसे व्यक्ति प्रारूप 6 में घोषणा पत्र के साथ अपना आवेदन नाम जोड़ने के लिए प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रश्न 3 अजिन निर्वाचकों का गणना फार्म प्राप्त नहीं होगा उनका नाम प्रारूप निर्वाचक नामावली में सम्मिलित होगा या नहीं तथा इसकी जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध होगी या नहीं? उत्तर  जिन निर्वाचकों का गणना पत्रक प्राप्त नहीं होगा उन्हें एब्सेंट/ शिफ्टेड / डेड/ रिपीटेड के रूप में बीएलओ द्वारा पड़ोसी से जांच कर चिंहांकित कर सूचीबद्ध किया जाएगा तथा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश की वेबसाइट पर प्रारूप निर्वाचक नामावली प्रकाशन के समय ही प्रदर्शित किया जाएगा। बीएलओ यह सूची अनिवार्यत: बनाएंगे तथा बीएलओ एप पर भी इसकी प्रविष्टि करेंगे। प्रश्न 4 क्या घर-घर जाकर गणना के समय कोई भी नए इलेक्टर के रूप में अपना नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकता है? उत्तर – हां कर सकता है उसे प्रारूप 6 के साथ घोषणा फॉर्म भरना होगा। प्रश्न 5 1 अप्रैल 1 जुलाई तथा 1 अक्टूबर 2026 की अर्हता तिथि में अग्रिम आवेदन प्राप्त किया जा सकते हैं ? उत्तर -हां प्रश्न 6 गणना अवधि में बीएलओ के मुख्य कार्य क्या हैं? उत्तर -गणना पत्रकों का वितरण -पूर्व एसआईआर से लिंकिंग का कार्य                     भरे हुए प्रपत्रों के संग्रहण का कार्य                     गणना पत्रक पर पिछले एस आई आर मतदाता सूची से सत्यापन का कार्य                     बीएलओ एप में गणना पत्रक से प्रविष्टि का कार्य                     एब्सेंट/ शिफ्टेड / डेथ/ रिपीटेड अंकित करने का कार्य                     समस्त भरे हुए गणना पत्रक एआरओ को सौंपने का कार्य। प्रश्न 7 बीएलओ गणना प्रपत्र में कितनी प्रति में प्राप्त करेगा? उत्तर-   बीएलओ गणना प्रपत्र दो प्रतियों में निर्वाचक  को प्रदान करेगा जिसकी एक प्रति प्राप्त करते हुए दूसरी प्रति पर निर्वाचक को पावती देगा अर्थात एक प्रति बीएलओ के पास तथा एक प्रति निर्वाचक के पास रहेगी। प्रश्न 8 यदि किसी निर्वाचक द्वारा ऑनलाइन गणना पत्रक प्रस्तुत किया है तो उसका वेरिफिकेशन कौन करेगा? उत्तर -निर्वाचन द्वारा भरे गए ऑनलाइन गणना पत्रक सीधे बीएलओ ऐप में लिंकिंग सहित प्रदर्शित होते हैं अतः बीएलओ द्वारा घर-घर विजिट के दौरान उसका सत्यापन अंकित किया जाएगा। प्रश्न 9 बीएलओ पूर्व एसआईआर की निर्वाचक नामावली से लिंकिंग के अतिरिक्त भी अन्य दस्तावेजों की घर-घर जांच विजिट के दौरान करेंगे? उत्तर -नहीं केवल पूर्व एस आई आर के निर्वाचक नामावली से जांच कर सत्यापन करना है। प्रश्न 10 -क्या घर-घर गणना विजिट के दौरान कोई नोटिस दिया जाना है? उत्तर -गणना विजिट के  दौरान कोई नोटिस नहीं दिया जाना है। प्रश्न 11-किसी निर्वाचक की मृत्यु हो गयी है तो क्या उसका मृत्यु प्रमाण पत्र परिवार से ले सकते हैं? उत्तर -हां। प्रश्न 12 किसी निर्वाचक का नाम पूर्व की एसआईआर की मतदाता सूची में है अथवा नहीं है तो उसका प्रपत्र में लिंकिंग किस प्रकार अंकित की जाएगी? उत्तर -1 पिछले एसआईआर की मतदाता सूची में मतदाता का विवरण उपलब्ध होने पर तीसरी सारणी के बाएं भाग "एसआईआर  की मतदाता सूची में मतदाता का विवरण" में चाहा गया विवरण अंकित किया जाएगा इसमें प्रविष्टि वही होगी जो पूर्व एस आई आर की नामावली में अंकित है।  2- यदि निर्वाचक का नाम पिछले एसआईआर की मतदाता सूची में अंकित नहीं है तथा उसके पिता /माता /दादा/ दादी जो पूर्व एस आई आर की निर्वाचक नामावली में उपलब्ध हो का विवरण पूर्व की एस आई आर की निर्वाचक की नामावली में अंकित किया जाएगा। प्रश्न 13 -किसी निर्वाचक द्वारा अपूर्ण फॉर्म भरा जाता है या लिंकिंग की जानकारी सत्यापित नहीं होती है तो उसका हस्ताक्षर/ अंगूठे के निशान वाला फार्म प्राप्त किया जाना है या अथवा नहीं ? उत्तर -किसी भी निर्वाचन का हस्ताक्षर/ अंगूठे के निशान वाला फॉर्म अनिवार्यतः प्राप्त किया जाना है ।संवीक्षा की कार्यवाही प्रारूप प्रकाशन के उपरांत की जाएगी। प्रश्न 14 -किसी निर्वाचक द्वारा अपूर्ण फॉर्म भरा जाता है या लिंकिंग की जानकारी सत्यापित नहीं होती है तथा फार्म प्राप्त होने पर क्या प्रविष्टि प्रारूप निर्वाचक नामावली में शामिल होगी? उत्तर -हां प्रारूप निर्वाचक नामावली में शामिल होगी।