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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय के सिचुएशन रूम से कानून व्यवस्था एवं सुरक्षा संबंधी की पड़ताल

जिला कलेक्टरों से वर्चुअली प्राप्त की जानकारी दिल्ली विस्फोट को दृष्टिगत रखते हुए सावधानी एवं सतर्कता बनाए रखने के निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को दिल्ली में हुए विस्फोट के संदर्भ में मंगलवार को मंत्रालय के सिचुएशन रूम से जिला कलेक्टरों से कानून व्यवस्था की स्थिति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश में सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा‍कि प्रदेश में सभी सार्वजनिक स्थलों, भीड़ भरे इलाकों, धार्मिक स्थलों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर चौकसी बढ़ाई जाए। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष सावधानी बरती जाए। साथ ही यह ध्यान भी रखा जाए कि आमजन और सामान्य जीवन प्रभावित न हो। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना ने सोमवार को दिल्ली में हुए विस्फोट के बाद प्रदेश में किए गए सतर्कता के उपायों और सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में जानकारी दी। सिचुएशन रूम में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव गृह श्री शिव शेखर शुक्ला और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

म.प्र. को दो श्रेणियों में मिले पुरस्कार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बधाई

"जल संचय-जन भागीदारी" में भी अग्रणी स्थान राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 18 नवंबर को प्रदान करेंगी पुरस्कार भोपाल  मध्यप्रदेश ने जल संरक्षण में एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। नई दिल्ली में मंगलवार को जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की घोषणा की। मध्यप्रदेश को दो श्रेणियों में सम्मान प्राप्त हुआ। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले को पूर्वी क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ जिले का पुरस्कार मिला है, जबकि खंडवा जिले की ग्राम पंचायत कावेश्वर ने सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत श्रेणी में संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 18 नवंबर 2025 को पुरस्कार प्रदान करेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुरस्कृत जिलों को बधाई दी है। "जल संचय-जन भागीदारी" पहल में भी वेस्टर्न-जोन की श्रेणी एक में पहला पुरस्कार ईस्ट निमाड़ को मिला। श्रेष्ठ 50 शहरी निकायों में गुनाजिले को प्रथम रैंक मिला। ज़िलों में श्रेणी तीन में गुना, बैतूल, धार, देवास, सिवनी और खरगौन का चयन हुआ है। उल्लेखनीय है कि जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग ने वर्ष 2024 के लिए 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के तहत कुल 46 विजेताओं (संयुक्त विजेताओं सहित) की घोषणा की । ये पुरस्कार 10 श्रेणियों में दिए जा रहे हैं — सर्वश्रेष्ठ राज्य, सर्वश्रेष्ठ जिला, सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत, सर्वश्रेष्ठ शहरी स्थानीय निकाय, सर्वश्रेष्ठ स्कूल या कॉलेज, सर्वश्रेष्ठ उद्योग, सर्वश्रेष्ठ जल उपयोक्ता संघ, सर्वश्रेष्ठ संस्था (स्कूल या कॉलेज के अतिरिक्त), सर्वश्रेष्ठ सिविल सोसायटी और जल क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जल शक्ति मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर जल प्रबंधन और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक व्यापक अभियान चला रहा है। इसी उद्देश्य से लोगों में जल के महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने और उन्हें जल उपयोग के सर्वोत्तम तौर तरीकों को अपनाने में प्रेरित करने के लिए राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी। वर्ष 2024 के लिए 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार का शुभारंभ 23 अक्टूबर 2024 को गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर किया गया था। कुल 751 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनकी समीक्षा और मूल्यांकन विशेषज्ञ समिति द्वारा किया गया। चयनित आवेदनों का परीक्षण केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा किया गया। अंतिम रिपोर्टों के आधार पर वर्ष 2024 के 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के लिए कुल 46 विजेताओं का चयन किया गया। राष्ट्रीय जल पुरस्कार का उद्देश्य देश में व्यक्तियों और संगठनों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की पहचान करना और सरकार के ‘जल समृद्ध भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करना है। ये पुरस्कार जल के महत्व के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें जल के सर्वोत्तम उपयोग के प्रयासों को अपनाने के लिये प्रेरित करते हैं। यह पहल सभी लोगों और संगठनों के लिए जल संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन गतिविधियों में एक मजबूत साझेदारी और जन सहभागिता को और सशक्त बनाने का अवसर प्रदान करता है। जल संचय जन भागीदारी पहल में भी अग्रणी मप्र जल संचय जन भागीदारी पुरस्कार : कैच द रेन के अंतर्गत साउथ जोन की श्रेणी एक में पहला पुरस्कार ईस्ट निमाड़ जिले को तथा श्रेष्ठ 50 शहरी निकायों में गुना को, ज़िलों में श्रेणी तीन में दूसरी रैंक में गुना, बैतूल, धार, देवास, सिवनी और खरगौन का चयन हुआ है। इस पहल के अंतर्गत राज्यों को पाँच ज़ोन में बाँटा गया है। जिलों को न्यूनतम 10,000 कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण एवं संचयन संरचनाएँ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों के जिलों के लिए यह लक्ष्य 3,000 संरचनाएँ है, जबकि देशभर के नगर निगमों के लिए यह संख्या 10,000 निर्धारित की गई है। इन संरचनाओं में वर्षा जल संचयन (रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग) के अलावा झीलों, तालाबों और बावड़ियों का पुनर्जीवन भी शामिल है। शहरी जल संरक्षण प्रयासों को सशक्त करने के लिए, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने जल शक्ति मंत्रालय के साथ साझेदारी की है। नगरीय निकायों को कम-से-कम 2,000 पुनर्भरण संरचनाएँ बनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस वर्ष कुल 100 पुरस्कारों की घोषणा की गई है, जिनमें तीन सर्वश्रेष्ठ राज्य, 67 जिले, छह नगर निगम, एक नगरीय स्थानीय निकाय, दो सहयोगी मंत्रालय/विभाग, दो उद्योग, तीन गैर-सरकारी संगठन, दो परोपकारी व्यक्ति और 14 नोडल अधिकारी शामिल हैं।  

राज्यपाल पटेल ने गुजरात के बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय राजपीपला का किया भ्रमण

भगवान बिरसा मुंडा को किया नमन, छात्रावास पहुंचे भोपाल  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल मंगलवार को गुजरात के नर्मदा जिले के राजपीपला के भगवान बिरसा मुंड़ा विश्वविद्यालय पहुंचे। उन्होंने परिसर स्थित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक डॉ. दर्शना बेन वसावा भी मौजूद थी। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि बिरसा मुंडा विश्वविद्यालय की प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की संकल्पना है। उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रावास का निरीक्षण किया। विद्यार्थियों की आवास व्यवस्थाओं की समीक्षा की। विश्वविद्यालय के स्वरूप और विकास के विषय में विश्वविद्यालय प्रबंधन से चर्चा की। राज्यपाल श्री पटेल ने विश्वविद्यालय परिसर में “एक पेड़- मां के नाम” अभियान के तहत पौध-रोपण किया। राज्यपाल के आगमन पर उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। राज्यपाल श्री पटेल को विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मधुकर पाडवी ने बताया कि विश्वविद्यालय जनजातीय कला, विरासत, संस्कृति, औषधीय प्रणालियों, भाषा और साहित्य का संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए समर्पित है। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा के माध्यम से जनजातीय समुदायों की परंपराएँ और ज्ञान प्रणाली, व्यापक सामाजिक पुनर्जागरण में योगदान दें सके। कुलपति डॉ. पाडवी ने बताया कि विश्वविद्यालय विभिन्न विषयों जैसे मानविकी, वाणिज्य, विज्ञान, कानून, शिक्षा, आदिवासी पारंपरिक कला, शिल्प और कौशल आधारित शिक्षा में स्नातक से लेकर स्नातकोत्तर, व्यावसायिक और पी.एच.डी. तक के शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहा है।  बिरसा मुंडा जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2017 मे हुई थी। इसका उद्देश्य विशेष रूप से गुजरात और विकासशील क्षेत्रों की जनजातीय आबादी के संदर्भ में परिवर्तनकारी और नवीन शैक्षणिक और अनुसंधान कार्यक्रम विकसित करना है। विश्वविद्यालय की स्थापना जनजातीय क्षेत्रों के तीव्र विकास को बढ़ावा देने के लिए तकनीकी, कौशल-आधारित, व्यावसायिक, प्रबंधन, पर्यटन, जनजातीय कला, संस्कृति और पारंपरिक मूल्य प्रणालियों और अन्य संबंधित क्षेत्रों में शैक्षिक अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है। विश्वविद्यालय में जनजातीय कला, संस्कृति, परंपरा, भाषा, औषधीय प्रथाओं, रीति-रिवाजों, वन-आधारित आर्थिक गतिविधियों, वनस्पतियों, जीवों, और जनजातीय क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित ज्ञान और प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए शिक्षण और अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध है।  

गिरफ्तारी वारंट पर स्टे की मांग: ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक ने दी हाईकोर्ट में चुनौती

जबलपुर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। मामला नवंबर 2020 में कोलकाता में आयोजित एक सभा में दिए गए बयान से जुड़ा है। अभिषेक बनर्जी ने उस दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय को गुंडा कहा था। इस बयान को लेकर आकाश विजयवर्गीय ने 2021 में मानहानि का मामला दर्ज कराया था। एक मई, 2021 से इस प्रकरण की सुनवाई भोपाल की एमपीएमएलए कोर्ट में चल रही है, लेकिन बताया गया है कि अभिषेक बनर्जी अब तक किसी भी पेशी में हाजिर नहीं हुए। इसे गंभीरता से लेते हुए अदालत के न्यायिक मजिस्ट्रेट तथागत याग्निक ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ 11 अगस्त और 26 अगस्त 2025 की तारीखों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अभिषेक बनर्जी ने इस गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने अंतरिम राहत के मुद्दे पर सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित कर लिया।

पंचायत प्रतिनिधियों को विकास कार्यों के लिए मिलेंगे 50-50 हजार रुपए

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जंबूरी मैदान में सरपंच संयुक्त मोर्चा सम्मेलन को किया संबोधित दिल्ली विस्फोट के मृतकों की आत्मा की शांति के लिए सम्मेलन में रखा गया दो मिनिट का मौन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि त्रिस्तरीय पंचायतराज व्यवस्था में सरपंच के पास पर्याप्त शक्तियां हैं। सरपंच अपनी पंचायत को नई ऊंचाइयों पर लेकर जा सकते हैं। सरपंचों के माध्यम से ही प्रदेश में ग्राम विकास का कारवां चल रहा है। ग्राम स्तर पर सभी कल्याणकारी योजनाओं और विकास गतिविधियों का क्रियान्वयन पंचायतों के माध्यम से ही हो रहा है। पंचायत व्यवस्था को सशक्त करने के उद्देश्य से पंचायतों को 25 लाख रूपए तक के कार्य करने का अधिकार दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पंचायत प्रतिनिधियों को विकास कार्यों के लिए 50-50 हजार रुपए की राशि अंतरित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नगरीय‍निकायों के समान पंचायतों में भी विकास योजनाएं बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। पंचायतों को गांव के विकास की योजना बनाने के लिये सक्षम बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि भोपाल में पंचायत प्रतिनिधियों की कॉन्फ्रेंस आगामी 24 से 26 नंवबर को होने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को जंबूरी मैदान पर आयोजित सरपंच संयुक्त मोर्चा सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कार्यक्रम स्थल पर भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सरपंच संघों के प्रतिनिधियों द्वारा ज्ञापन सौंपा गया। देश को प्रधानमंत्री श्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह की क्षमता पर है भरोसा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिल्ली में हुए कार विस्फोट को अत्यंत दु:खद बताया। उन्होंने मृतकों की आत्मा की शांति के लिए 2 मिनट का मौन धारण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की क्षमता पर भरोसा है। भारत सरकार ने आतंकवाद और नक्सलवाद को समूल नष्ट करने के लिए अभियान छेड़ रखा है। पंचायतों को मिलेंगे कार्यालय और सामुदायिक भवन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने तीनों स्तर के पंचायत संस्थान के लिए कार्यालय और गांवों के लिए सामुदायिक भवन की व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया है। इस अनुक्रम में प्रदेश की पंचायतों के लिए 2472 अटल पंचायत भवन, 1037 सामुदायिक भवन, 106 जनपद पंचायत भवन तथा 5 जिला पंचायत भवन स्वीकृत किए हैं। गांव के शांति धाम भी व्यवस्थित रूप से विकसित हों, इस उद्देश्य से दिसम्बर 2026 तक सभी शांति धाम अतिक्रमण से मुक्त कर उनके पहुंच मार्ग बनाने और आवश्यक फेंसिंग और पौधरोपण कार्य के निर्देश दिए गए हैं। सुदृढ़ पंचायत राजव्यवस्था के माध्यम से आत्मनिर्भर पंचायत व समृद्ध मध्यप्रदेश के पथ पर राज्य सरकार पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग से अग्रसर है। युवाओं को उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं। वर्ष-2026 को कृषि आधारित उद्योग वर्ष के रूप में घोषित किया जाएगा।कृषि उत्पादों के निर्माण के लिए कृषि और खाद्यान्न आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पंचायतों के माध्यम से लघु उद्योग, कुटीर उद्योग और रोजगार उद्योग स्थापित करने के लिए भी गतिविधियां जारी हैं। किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सब्जी और अन्य फसलों के लिए खाद्य प्रसंस्करण इकाईयां खोली जा रही हैं। युवाओं को उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि किसानों को हर फसल का उचित दाम मिले। श्रीराम वन गमन पथ विकसित करने की प्रक्रिया में पंचायत प्रतिनिधियों को जोड़ा जाएगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे पंचायत प्रतिनिधि भगवान श्रीराम से संबंधित प्रत्येक स्थान की जानकारी उपलब्ध कराएं। इन्हें श्रीराम वन गमन पथ विकसित करने की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। साथ ही भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े सभी स्थानों को भी राज्य सरकार तीर्थ के रूप में विकसित करेगी। पंचायतें अपने पारंपरिक कार्य करते हुए शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और उद्योग के कार्यों को भी प्रमुखता से करें। गांवों में किसानों को गोपालन और पशुपालन के लिए प्रेरित करें, जिससे मध्यप्रदेश को दूध उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बनाया जा सके। नदियों के उद्गम स्थलों का बेहतर रखरखाव करें पंचायत प्रतिनिधि – मंत्री श्री पटेल पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रह्लाद पटेल ने पंचायत प्रतिनिधियों की मांग पर 25 लाख रूपए तक के कार्यों का अधिकार सरपंचों को देने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पंचायतें देश का सबसे अच्छा और सबसे बड़ा रिकॉर्ड रूम बन सकती हैं। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि जिन पंचायतों में नदियां के उद्गम स्थल मौजूद हैं, वहां के सरपंच अपनी कार्य योजना में उद्गम स्थल के बेहतर रखरखाव संबंधी कार्यों को शामिल करें। ऐसी पंचायतें जहाँ की आबादी 5000 से अधिक होगी, वहां 2 सामुदायिक भवन स्वीकृत किए जाएंगे। सम्मेलन में पंचायत प्रतिनिधियों के विभिन्न संगठनों के अध्यक्ष और प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

सरदार पटेल ने देश की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

आधुनिक भारत के निर्माण में लौह पुरुष सरदार पटेल की भूमिका रही सबसे महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सरदार पटेल ने देश की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोया: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर यूनिटी मार्च का किया शुभारंभ वल्लभ भवन के सरदार पटेल पार्क से आरंभ यूनिटी मार्च में बड़ी संख्या में युवा हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आधुनिक भारत के निर्माण में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही। सरदार पटेल ने अनेकों रियासतों  को एक करते हुए अखंड भारत की नींव रखी। उन्होंने देश की विविधता को एकता के सूत्र में पिरोया। आजादी के समय सरदार पटेल ने पाकिस्तान की घटनाओं को दृष्टिगत रखते हुए देश को सुरक्षित रखा। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया के सामने जिस मजबूती के साथ खड़ा है, उसमें सबसे बड़ी भूमिका सरदार पटेल की रही है। सरदार पटेल की 150वीं जयंती से उनके गौरवशाली कार्यों का स्मरण करने के लिए प्रदेश में यूनिटी मार्च का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती पर "एक भारत-आत्मनिर्भर भारत" के लक्ष्य के साथ भोपाल- सीहोर लोकसभा क्षेत्र में निकाले जा रहे यूनिटी मार्च को वल्लभ भवन के सरदार पटेल पार्क में संबोधित कर रहे थे। देशभक्ति गीतों की धुनों के बीच आसमान में छोड़े गए तिरंगे बैलून मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करने के बाद 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान में कटहल और आम के पौधे रोपे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और पुलिस बैंड द्वारा बजाई जा रही देशभक्ति गीतों की धुनों के बीच आसमान में तिरंगे बैलून छोड़े। सामूहिक समवेत स्वर में वंदे मातरम का गान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झंडी दिखाकर यूनिटी मार्च को रवाना किया। यूनिटी मार्च में 2 हजार से अधिक युवाओं ने भाग लिया।  सरदार पटेल के प्रयासों से भोपाल सहित कई रियासतें अखंड भारत का बनीं हिस्सा: सांसद  आलोक शर्मा सांसद  आलोक शर्मा ने कहा कि लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर देशभर के प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में 3 दिवसीय यूनिटी मार्च (पदयात्रा) का आयोजन किया जा रहा है। सरदार पटेल ने 562 रियासतों का विलय कर अखंड भारत की नींव रखी। भारत 1947 में अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हो गया था लेकिन भोपाल सहित जूनागढ़ और हैदराबाद जैसी कई रियासतों ने भारत में शामिल होने से इनकार किया। इसके बाद इन रियासतों को अखंड भारत का हिस्सा बनाने में सरदार पटेल की अहम भूमिका रहीं। उन्होंने बताया‍ कि यह रैली बैरसिया और सीहोर में भी आयोजित की जाएगी। अखंड भारत के लक्ष्य से युवा पीढ़ी को अवगत कराने के लिए गतिविधियां जारी वरिष्ठ विधायक  हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सरदार पटेल ऐसा व्यक्तित्व थे, जिन्होंने देश को एक करने का कार्य किया। वर्तमान समय में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत, दुनिया की चौथी सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था बना है। हमारी सरकार द्वारा सरदार पटेल के अखंड भारत के लक्ष्य से युवा पीढ़ी को अवगत कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में भोपाल महापौर मती मालती राय, विधायक  भगवानदास सबनानी, पूर्व सांसद  आलोक संजर, पूर्व विधायक  ध्रुव नारायण सिंह, नगर निगम अध्यक्ष  किशन सूर्यवंशी सहित  रवींद्र यति, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे। 

धान परिवहन कार्य में लगे वाहनों पर लगेगा जीपीएस: खाद्य मंत्री राजपूत

मिलिंग कार्य में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जायेगी : खाद्य मंत्री  राजपूत धान परिवहन कार्य में लगे वाहनों पर लगेगा जीपीएस: खाद्य मंत्री  राजपूत खाद्य मंत्री ने दिये एनसीसीएफ के प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई एवं ब्लैक लिस्टेड करने के निर्देश भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविन्द सिंह राजपूत ने सख्त निर्देश दिये हैं कि मिलर्स धान मिलिंग के कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरते।मिलिंग कार्य में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आई तो कठोर कार्रवाई की जायेगी। मिलिंग कार्य के दौरान कोई भी गड़बड़ी या अनियमितता पाई जायेगी तो संबंधित जिला प्रबंधक एवं क्षेत्रीय प्रबंधक के खिलाफ भी दण्डात्मक कार्रवाई की जायेगी। खाद्य मंत्री  राजपूत मंत्रालय में प्रदेश के मिलर्स के साथ आयोजित बैठक में विपणन वर्ष 2025-26 की मिलिंग नीति के प्रारूप पर चर्चा कर रहे थे। बैठक में शहडोल उमरिया क्षेत्र के मिलर्स द्वारा एनसीसीएफ के प्रभारी एवं कर्मचारियों के कार्य व्यवहार पर विरोध जताये जाने के कारण खाद्य मंत्री  राजपूत ने एनसीसीएफ के प्रभारी एवं संबंधित जिले के ब्रांच मैनेजर के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के साथ कम्पनी को ब्लैक लिस्ट करने के निर्देश अपर मुख्य सचिव खाद्य को दिये। मंत्री  राजपूत ने कहा कि अन्तर जिला मिलिंग एवं धान के परिवहन के लिये किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि विपणन वर्ष 2025-26 में जिन ट्रकों से धान परिवहन होगा उन पर जीपीएस ट्रेकर अनिवार्य रूप से लगाते हुए उक्त वाहनों का सत्यापन परिवहन सेवा पोर्टल से कराया जाये। खाद्य मंत्री  राजपूत ने कहा कि यदि कोई ट्रक बिना जीपीएस पाया जायेगा, तो संबंधित धान प्रदाय करने वाले कर्मचारी एवं परिवहनकर्ता तथा संबंधित मिलर्स के खिलाफ दण्डात्मक कार्रवाई की जायेगी। गोदामों की भंडारण क्षमता का निरीक्षण करे अधिकारी खाद्य मंत्री  राजपूत ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि वो समय पर मिलर्स के गोदामों की वास्तविक भंडारण क्षमता की पड़ताल करने के साथ इस वर्ष धान मिलिंग के लिये अनुबंध करने वाले मिलर्स के साथ उनके गोदाम, मिल का निरीक्षण जिला स्तरीय समिति द्वारा आवश्यक रूप से कराया जाये। उन्होंने कहा कि यह संज्ञान में आया है कि मिलर्स द्वारा बताये गये गोदाम की स्थिति एवं उसकी क्षमता पर्यप्त नहीं होती है, इसलिये अधिकारी पड़ताल में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरते। खाद्य मंत्री ने अफसरों को निर्देश दिये कि इस विपणन वर्ष 2025-26 में जो मिलर्स गुणवत्तायुक्त अच्छा कार्य करेंगे, उन्हें गत वर्ष की तुलना में 3 से 4 गुना अधिक मात्रा में धान देने के प्रावधान किये जाए, जिससे उनकी मिलिंग क्षमता का पूरा उपयोग किया जा सके। तय समय सीमा में पूर्ण करें मिलिंग कार्य खाद्य मंत्री  राजपूत ने कहा कि सभी मिलर्स द्वारा इस बार धान मिलिंग का कार्य भारत सरकार द्वारा जून 2026 की तय की गई समय सीमा में पूर्ण करना अनिवार्य है। उन्होंने दिसम्बर 2025 से ही पूरी मिलिंग प्रक्रिया की सतत् निगरानी एवं समीक्षा करने के निर्देश नान के प्रबंध संचालक को दिये। इसके साथ ही उन्होंने निगम मुख्यालय पर प्रत्येक 15 दिवस में क्षेत्रीय प्रबंधक एवं जिला प्रबंधक की बैठक कर प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिये। मिलर्स को समय पर भुगतान करने के दिये निर्देश मिलर्स द्वारा उपार्जन एवं मिलिंग का भुगतान समय पर नहीं होने की समस्या पर खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव मती रश्मि अरूण शमी ने नान के प्रबंध संचालक अनुराग वर्मा को समय पर मिलर्स के भुगतान करने के निर्देश दिये गये। साथ ही निर्देश दिये गये कि नियमित रूप से भुगतान कार्य की समीक्षा अनिवार्य रूप से करें। अपर मुख्य सचिव खाद्य मती रश्मि अरूण समी ने मिलिंग के लिये उपार्जन केन्द्र से ही अधिक से अधिक धान उठाव कराने के निर्देश अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि धान उठाव के उपयोग में आने वाले वाहनों के रजिस्टेशन प्रक्रिया का टेस्ट रन करें। बैठक में मिलर्स ने महत्वपूर्ण सुझाव दिये। इस दौरान एमडी नागरिक आपूर्ति विभाग  अनुराग वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

लाड़ली बहना योजना: इस माह से 1,500 रुपये का भुगतान, अब तक 44 हजार करोड़ से अधिक राशि जारी

लाड़ली बहनों को इस माह से मिलेंगे 1500 रूपये, अब तक 44 हजार करोड़ से अधिक की राशि का अंतरण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और नेतृत्व में प्रदेश में नारी सशक्तिकरण का अभियान द्रुतगति जारी है। प्रदेश की लाड़ली बहनों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव का किया हुआ वादा 12 नवम्बर 2025 को पूरा होने जा रहा है। एक करोड़ 26 लाख से अधिक लाड़ली बहनों को सिवनी में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बड़ी हुई राशि उनके खाते में अंतरित की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रत्येक लाड़ली बहना के खाते में 1500 रूपये देने की शुरूआत करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस पहल पर प्रदेश की लाड़ली बहनों ने अपने भैया मोहन के प्रति आभार जताते हुए कहा है कि वे ठीक उसी प्रकार हमारा ध्यान रख रहे हैं, जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बहन सुभद्रा का ध्यान रखा था। प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में चल रही मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। जून 2023 से अक्टूबर 2025 तक योजना के अंतर्गत लाभार्थी महिलाओं को कुल 29 किस्तों में नियमित आर्थिक सहायता राशि का अंतरण किया गया है। रक्षा बंधन पर अगस्त 2023, अगस्त 2024 और अगस्त 2025 में लाभार्थी महिलाओं को 250 रूपये की विशेष सहायता राशि तीन बार प्रदान की गई। इस प्रकार योजना के आरंभ से अब तक 44,917.92 करोड़ रूपये की राशि का सीधा अंतरण लाभार्थी महिलाओं के खातों में किया जा चुका है। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई है। योजना से महिलाएं न केवल अपनी छोटी-छोटी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा कर रही हैं, बल्कि बैंकिंग में प्रणाली से भी सीधे जुड़ रही हैं। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में प्रदेशभर में महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का सीधा लाभ मिल रहा है। योजना की अब तक की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश के सभी 52 जिलों में कुल 1,26,36,250 (एक करोड़ 26 लाख 36 हजार 250)  महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। लाड़ली बहना योजना में सबसे अधिक लाभार्थी इंदौर जिले में हैं, जहाँ 4 लाख 40 हजार 723 महिलाओं को योजना का लाभ मिला है। इसके बाद सागर में 4 लाख 19 हजार 903, रीवा में 4 लाख 3 हजार 182, छिंदवाड़ा में 3 लाख 90 हजार 311, धार में 3 लाख 82 हजार 417 और जबलपुर 3 लाख 81 हजार 848 महिलाओं को लाभ मिला है। योजना के तहत बालाघाट जिले में 3 लाख 47 हजार 816, उज्जैन में 3 लाख 40 हजार 203, और मुरैना में 3 लाख 33 हजार 821 बहनों को लाभ मिला है। छतरपुर में 3 लाख 24 हजार 454, खरगोन में 3 लाख 13 हजार 741, भोपाल में 3 लाख 9 हजार 20 तथा ग्वालियर जिले में 3 लाख 5 हजार 969 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। इसी क्रम में राजगढ़ में 2 लाख 95 हजार 459, शिवपुरी में 2 लाख 87 हजार 943, देवास में 2 लाख 85 हजार 496, विदिशा में 2 लाख 74 हजार 946, भिंड में 2 लाख 72 हजार 343, और बेतुल में 2 लाख 71 हजार 474 लाभार्थी पंजीकृत हुई हैं। सिवनी जिले में 2 लाख 68 हजार 187, मंदसौर में 2 लाख 62 हजार 827, रतलाम में 2 लाख 50 हजार 176, रायसेन में 2 लाख 46 हजार 390, दमोह में 2 लाख 45 हजार 143, सीहोर में 2 लाख 42 हजार 717, और कटनी में 2 लाख 41 हजार 302 बहनों को राशि का लाभ मिला है। बड़वानी में 2 लाख 37 हजार 60, गुना में 2 लाख 28 हजार 604, खंडवा में 2 लाख 16 हजार 372, नर्मदापुरम में 2 लाख 9 हजार 837, सिद्धी में 2 लाख 9 हजार 706, टीकमगढ़ में 2 लाख 7 हजार 79, तथा नरसिंहपुर में 2 लाख 8 हजार 734 लाभार्थी महिलाओं को योजना की राशि प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में सिंगरौली जिले में 1 लाख 97 हजार 4, मंडला में 1 लाख 95 हजार 153, झाबुआ में 1 लाख 92 हजार 511, शहडोल में 1 लाख 88 हजार 729, पन्ना में 1 लाख 82 हजार 220, शाजापुर में 1 लाख 73 हजार 900, नीमच में 1 लाख 57 हजार 658, तथा अशोक नगर में 1 लाख 55 हजार 387 महिलाएँ इस योजना से लाभान्वित हुई हैं। दतिया में 1 लाख 44 हजार 239, अनूपपुर में 1 लाख 26 हजार 54, अलीराजपुर में 1 लाख 23 हजार 492, आगर मालवा में 1 लाख 17 हजार 255, उमरिया में 1 लाख 9 हजार 113, श्योपुर में 1 लाख 8 हजार 673, और हरदा जिले में 93 हजार 516 बहनों को योजना की राशि का लाभ मिला है। निवाड़ी जिले में 80 हजार 157 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने प्रदेश की महिलाओं के जीवन में आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान की भावना को सशक्त किया है। महिलाओं ने इस राशि का उपयोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा, और छोटे व्यापार के लिए पूंजी के रूप में किया है। लाड़ली बहना योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है बल्कि परिवारिक निर्णयों में भी उनकी भूमिका को भी सुदृढ़ कर रही है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का व्यापक प्रभाव अब प्रदेश के हर कोने में देखा जा सकता है। गाँवों से लेकर शहरों तक महिलाएँ “आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश” के निर्माण में अपनी सशक्त भूमिका निभा रही हैं।  

मध्यप्रदेश के छात्रों के लिए खुशखबरी, मिलेगी आधुनिक AVGC लैब की सौगात

मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों को मिलेगी ए. व्ही.जी.सी लैब की सौगात भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर, धार और रतलाम के 8 शासकीय महाविद्यालयों में स्थापित होंगी अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं भोपाल प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को परंपरागत कोर्स के साथ-साथ रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा एक अभिनव पहल की जा रही है। इसमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, धार, जबलपुर और रतलाम जिलों के 8 महाविद्यालयों में एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, ग्राफिक्स, कॉमिक्स एंड एक्सटेंडेड रियलिटी (ए. व्ही.जी.सी) लैब स्थापित की जा रही हैं। इनमें से 4 प्रयोगशालाएं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से स्थापित की जा रही हैं। जबकि 4 लैब उच्च शिक्षा विभाग द्वारा बनाई जाएगी। अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग  अनुपम राजन ने बताया कि ये लैब उन शासकीय महाविद्यालयों में स्थापित की जा रही हैं, जहां फाइन आर्ट्स विषय का अध्ययन संचालित है। ए. व्ही.जी.सी लैब के माध्यम से विद्यार्थियों को एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, ग्राफिक डिजाइनिंग और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसे आधुनिक विषयों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होगा, जिससे उन्हें रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। प्राथमिक तौर पर पहले इसे पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में प्रदेश के 8 महाविद्यालयों में प्रारंभ किया जा रहा है। प्रत्येक लैब में करीब 90 लाख रुपये का आएगा खर्च प्रदेश के 8 शासकीय महाविद्यालयों में ए. व्ही.जी.सी स्थापित करने में लगभग 7 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आएगा। इसमें प्रति लैब लगभग 90 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इन महाविद्यालयों में स्थापित होगी ए. व्ही.जी.सी लैब्स     शासकीय कमलाराजे कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय, ग्वालियर     शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, इंदौर     शासकीय हमीदिया आर्ट्स एवं कॉमर्स महाविद्यालय एवं सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय भोपाल     शासकीय माधव आर्ट्स एवं कॉमर्स महाविद्यालय, उज्जैन     शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, धार     शासकीय एम.के.बी.आर्ट्स एवं कॉमर्स महाविद्यालय, जबलपुर     शासकीय कन्या महाविद्यालय, रतलाम  

जनसेवा और सादगी का उदाहरण: मुख्यमंत्री मोहन यादव बेटे की शादी सामूहिक विवाह में

भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर सादगी और सामाजिक समरसता की मिसाल पेश करने जा रहे हैं। उन्होंने अपने छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव का विवाह किसी भव्य आयोजन में नहीं, बल्कि सामूहिक विवाह सम्मेलन में कराने का निर्णय लिया है। यह पहला अवसर होगा जब कोई मुख्यमंत्री अपने पुत्र का विवाह सामूहिक समारोह में संपन्न कराएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हमेशा अपने जीवन और कार्यशैली में सादगी को प्राथमिकता दी है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने पारिवारिक आयोजन को भी समाजहित से जोड़ा है।  जानकारी के अनुसार, 30 नवंबर को उज्जैन में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में मुख्यमंत्री के पुत्र डॉ. अभिमन्यु यादव, डॉ. इशिता यादव के साथ सात फेरे लेंगे। इशिता, खरगोन जिले के किसान दिनेश यादव की पुत्री हैं। अभिमन्यु और इशिता की सगाई लगभग पांच महीने पहले भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास में संपन्न हुई थी। डॉ. अभिमन्यु ने भोपाल में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और पढ़ाई के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री निवास के बजाय कॉलेज हॉस्टल में रहे। बेटे अभिमन्यु की शादी उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तय किया है कि उनके छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव का विवाह 30 नवंबर को उज्जैन के होटल अथर्व में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में होगा। इस आयोजन में 21 जोड़े एक साथ परिणय सूत्र में बंधेंगे। मुख्यमंत्री के बेटे के विवाह का हिस्सा बनना इस सम्मेलन को प्रतीकात्मक रूप से और भी खास बना देगा। डॉ. अभिमन्यु का विवाह डॉ. इशिता यादव से होगा, जो खरगोन जिले के प्रख्यात किसान दिनेश यादव की पुत्री हैं। दोनों की सगाई इसी वर्ष, लगभग पांच महीने पहले, भोपाल के मुख्यमंत्री निवास में संपन्न हुई थी। अभिमन्यु की सादगी और आत्मनिर्भरता की कहानी मुख्यमंत्री के पुत्र डॉ. अभिमन्यु यादव ने भोपाल में रहकर चिकित्सा शास्त्र की पढ़ाई पूरी की। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने पढ़ाई के दौरान मुख्यमंत्री निवास की बजाय कॉलेज हॉस्टल में रहना चुना। उनका कहना था कि छात्र जीवन का असली अनुभव और अनुशासन हॉस्टल में ही मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी उस समय साफ कहा था कि – “मुख्यमंत्री निवास किसी विद्यार्थी के लिए नहीं, बल्कि राज्य के प्रशासनिक कार्यों के लिए होता है। पढ़ाई की असली जगह कॉलेज और हॉस्टल हैं।” यह सोच दर्शाती है कि उन्होंने अपने बच्चों में भी अनुशासन, आत्मनिर्भरता और ज़मीन से जुड़े रहने की सीख दी है। सादगी से भरा विवाह, समाज के लिए संदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने परिवारजनों को पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि अभिमन्यु की शादी सादगी से, बिना दिखावे के और सामूहिक विवाह सम्मेलन में ही होगी। इस आयोजन में गरीब और सामान्य परिवारों की बेटियों की भी शादियां होंगी, जिससे यह समारोह समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणादायक बन जाएगा। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से यह संदेश जाता है कि उच्च पद पर रहते हुए भी व्यक्ति अपनी जड़ों और सामाजिक संवेदनाओं से जुड़ा रह सकता है। उज्जैन में मिथक तोड़कर पेश की थी नई सोच मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले भी सामाजिक परंपराओं में नई सोच के लिए चर्चा में रहे हैं। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद यह सवाल उठा था कि महाकाल की नगरी उज्जैन में मुख्यमंत्री को रात्रि विश्राम नहीं करना चाहिए, क्योंकि वर्षों से यह एक प्रचलित मान्यता रही है। लेकिन मोहन यादव ने इस मान्यता को तोड़ते हुए कहा – “मैं महाकाल का भक्त और पुत्र हूं, मेरे लिए उज्जैन मेरा घर है, और महाकाल की नगरी में रुकना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।” उस रात उन्होंने उज्जैन में रात्रि विश्राम कर यह मिथक समाप्त किया और यह दिखाया कि श्रद्धा और कर्म के बीच कोई विरोध नहीं, बल्कि संतुलन संभव है। सादगी और परिवार की मर्यादा का उदाहरण मुख्यमंत्री मोहन यादव उन विरले नेताओं में से हैं जिनका परिवार कभी भी शासकीय आवास में स्थायी रूप से नहीं रहा। वे अपने परिवार को राजनीति से दूर रखते हैं और हमेशा आम जीवनशैली अपनाने पर ज़ोर देते हैं। उनका मानना है कि नेता की पहचान उसके आचरण और सादगी से होती है, न कि उसके पद से। यही कारण है कि आज वे अपने बेटे की शादी भी समाज की बेटियों के साथ एक ही मंच पर करवा रहे हैं — यह केवल एक विवाह नहीं, बल्कि एक संदेश है – “समानता और सादगी का।” बताया जा रहा है कि सामूहिक विवाह सम्मेलन में सभी समाजों के 20 जोड़े शामिल होंगे। इसमें मुख्यमंत्री की तरफ से ही सभी जोड़ों को गिफ्ट भी दिया जाएगा। बता दें मुख्यमंत्री समाज के लोगों को पहले से ही सादगी और सरल जीवन यापन करने के लिए प्रेरित करते आए हैं।  डॉ. मोहन यादव की पहचान हमेशा एक ऐसे जननेता के रूप में रही है जो परंपरा और आधुनिकता दोनों को समान महत्व देते हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनका परिवार शासकीय आवास में शिफ्ट नहीं हुआ। वे अपने परिवार को सरकारी सुख-सुविधाओं से दूर रखते हैं।