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MP में ठंड का कहर, इंदौर में 10 साल का तापमान रिकॉर्ड टूटा; अगले 5 दिन बारिश की संभावना नहीं

भोपाल  मध्यप्रदेश में बारिश का दौर थामने के बाद ठंड का असर बढ़ने लगा है। बुधवार रात कई शहरों में पारा काफी लुढ़क गया। इंदौर में सीजन की सबसे ठंडी रात रही। यहां पर न्यूनतम तापमान 12.1 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 13 डिग्री, ग्वालियर में 16.3 डिग्री, उज्जैन में 14.5 डिग्री और जबलपुर में 18.2 डिग्री दर्ज किया गया। राजगढ़ सबसे ठंडा रहा। यहां पारा 11 डिग्री रहा। मौसम विभाग के अनुसार, इस सीजन में पहली पार तापमान में इतनी गिरावट देखने को मिली है। सभी शहरों में तापमान 20 डिग्री से कम ही रहा। पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू होना भी इसकी एक वजह है। पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बर्फबारी का असर अब मध्य प्रदेश में भी दिखाई देने लगा है। गुरुवार रात प्रदेश के ज्यादातर शहरों में तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई। सबसे ठंडा शहर राजगढ़ रहा, जहां पारा एक ही रात में दो डिग्री गिरकर 9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। इंदौर में भी मौसम ने रिकॉर्ड तोड़ ठंड दिखाई। मौसम विभाग के अनुसार, बीती रात शहर का न्यूनतम तापमान 10.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। यह पिछले 10 वर्षों में नवंबर माह का सबसे कम तापमान है। साल 2017, 2020 और 2022 में पारा 11 डिग्री तक जरूर पहुंचा था, लेकिन इतना नीचे नहीं गया था। भोपाल में भी ठंड ने अपने तेवर दिखाए। राजधानी में तापमान 2 डिग्री तक गिरा और रात में न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते 10 साल में नवंबर में यह स्थिति केवल पांच बार देखने को मिली है, जबकि पचमढ़ी में रात का तापमान 17.4 डिग्री दर्ज किया गया। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि आने वाले पांच दिन तक प्रदेश में बारिश की कोई संभावना नहीं है। उत्तरी हवाओं के चलते ठंड और बढ़ेगी तथा रात के तापमान में गिरावट बनी रहेगी। नमी की वजह से नहीं लुढ़का पारा मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में बने सिस्टम के कारण बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों तरफ से नमी आई। जिससे बादल छाए रहे। इस वजह से दिन का तापमान नहीं बढ़ सका।वर्तमान में हरियाणा के पास एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) बना हुआ है। इस वजह से यह प्रदेश में ठंडी हवा आने से रोक रहा है।अगले 24 में यह चक्रवात उत्तर भारत में सक्रिय वेस्टर्न डिस्टरबेंस में समाहित हो जाएगा। इसके बाद ही हमारे यहां ठंड का असर शुरू होगा। रात में 20 डिग्री के नीचे पारा बता दें कि पिछले 24 घंटे के दौरान श्योपुर, शिवपुरी, ग्वालियर, अशोकनगर, गुना, बैतूल, सागर, टीकमगढ़, छतरपुर और छिंदवाड़ा जिलों में हल्की बारिश हुई। इसके साथ दिन के तापमान में भी गिरावट हुई। नरसिंहपुर में एक ही रात में पारा 5.4 डिग्री लुढ़ककर 17.2 डिग्री पर आ गया। छिंदवाड़ा-मंडला में 17.6 डिग्री, नौगांव में 15 डिग्री, रीवा में 15.8 डिग्री, सिवनी में 17.4 डिग्री, टीकमगढ़ में 16.8 डिग्री, उमरिया में 17.3 डिग्री, मलाजखंड में 16.7 डिग्री, भोपाल में 18.8 डिग्री, इंदौर में 18.2 डिग्री, उज्जैन में 18.3 डिग्री, ग्वालियर में 20.1 डिग्री, खंडवा-शिवपुरी में 17 डिग्री, खरगोन में 17.8 डिग्री, पचमढ़ी में 17.2 डिग्री रहा।इधर, बुधवार को दिन में पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां अधिकतम तापमान 25.2 डिग्री रहा। रायसेन में 27 डिग्री, बैतूल में 26.7 डिग्री, श्योपुर में 29.6 डिग्री, छिंदवाड़ा-दमोह में 29.5 डिग्री, नरसिंहपुर में 29.6 डिग्री, सिवनी में 28 डिग्री, सीधी में 28.8 डिग्री, उमरिया में 29.9 डिग्री और मलाजखंड में पारा 26.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रात के साथ दिन में भी ठंडक, पारा लुढ़का रात के अलावा दिन में भी ठंडक घुलने लगी है। गुरुवार को भोपाल में तापमान 28.4 डिग्री, इंदौर में 28.3 डिग्री, ग्वालियर में 28.6 डिग्री, उज्जैन में 29.5 डिग्री और जबलपुर में 30.7 डिग्री सेल्सियस रहा। दमोह, खजुराहो, मंडला, रीवा, सागर, सतना, उमरिया, नर्मदापुरम, खंडवा, खरगोन को छोड़ दें तो बाकी शहरों में पारा 30 डिग्री से कम ही दर्ज किया गया। इसलिए बढ़ा ठंड का असर बता दें कि हिमालय के तीन राज्य जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल में बर्फबारी शुरू हो गई है। जम्मू-कश्मीर के बारामूला में गुलमर्ग व्हाइट वंडरलैंड में बदल गया है। उत्तराखंड में बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम भी बर्फ से ढंक गए हैं। हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों लाहौल और स्पीति और किन्नौर, कुल्लू में ताजा बर्फबारी हुई। इन पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी का असर मैदानी राज्यों में नजर आने लगा है। मध्य प्रदेश में पारे में 6.1° तक की गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर से लगातार हवा आने से पारे में और भी गिरावट हो सकती है। मौसम विभाग का मानना है कि नवंबर में पहले ही दौर में तेज ठंड शुरू हो गई है, जो अब लगातार रहेगी। उत्तरी हिस्से में दो सिस्टम एक्टिव मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरी हिस्से में एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव है। इनका असर तो प्रदेश में देखने को नहीं मिलेगा, लेकिन चक्रवात जब वेस्टर्न डिस्टरबेंस में समाहित हो जाएगा तो ठंड का असर भी तेज होगा। बता दें कि इस बार अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में बने मौसमी सिस्टम के कारण बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों तरफ से नमी आई। जिससे बादल छाए रहे। इस वजह से दिन का तापमान नहीं बढ़ सका। आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान में भी गिरावट देखने को मिल सकती है। कोहरे का असर भी बढ़ेगा मौसम विभाग की मानें तो अब ठंड के साथ कोहरा भी बढ़ेगा। फिलहाल, देर रात और अलसुबह ठंड का असर ज्यादा है। वहीं सुबह हलका कोहरा भी है, जो आने वाले दिनों में बढ़ जाएगा। अभी मंडला में सबसे कम 1-2 किलोमीटर विजिबिलिटी मंडला में देखने को मिली है। जबलपुर, रीवा और सतना में यह 2 से 4 किलोमीटर रही। नवंबर में तेज ठंड का ट्रेंड प्रदेश में नवंबर में पिछले 10 साल से ठंड के साथ बारिश का ट्रेंड भी है। अबकी बार भी ऐसा ही मौसम रहेगा। वहीं, बारिश के लिहाज से अक्टूबर का महीना उम्मीदों पर खरा उतरा है। औसत 2.8 इंच पानी गिर गया, जो सामान्य 1.3 इंच से 121% ज्यादा है। वहीं, भोपाल में दिन ठंडे रहे। 30 अक्टूबर को दिन का तापमान 24 … Read more

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अधिकारी-कर्मचारियों के साथ गाया वंदे मातरम्

राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने अधिकारी-कर्मचारियों के साथ गाया वंदे मातरम् राष्ट्रीय गीत की 150वी वर्षगांठ पर राजभवन में हुआ आयोजन भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल शुक्रवार को राजभवन के बैंक्वेट हॉल में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने राजभवन के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का गायन किया। राज्यपाल  पटेल ने आज़ादी के संघर्ष, बलिदान और प्रेरणा के प्रतीक  बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित राष्ट्र गीत वंदे मातरम् की वर्षगांठ की सभी को शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, अपर सचिव  उमाशंकर भार्गव, जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव मती मीनाक्षी सिंह सहित राजभवन के अधिकारी-कर्मचारी ने राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन किया।  

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150वें वर्ष के स्मरणोत्सव समारोह का किया शुभारम्भ

प्रधानमंत्री  मोदी ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150वें वर्ष के स्मरणोत्सव समारोह का किया शुभारम्भ राज्यपाल  मंगुभाई पटेल कार्यक्रम में भोपाल से वर्चुअली हुए शामिल भोपाल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 वें वर्ष स्मरणोत्सव समारोह का शुभारंभ शुक्रवार को किया। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल  मंगुभाई पटेल भोपाल राजभवन से वर्चुअली शामिल हुए। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, अपर सचिव  उमाशंकर भार्गव, जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव मती मीनाक्षी सिंह सहित राजभवन के अधिकारी उपस्थित थे।  

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के नजदीक उमरिया में दो बाघों ने गांव में मवेशियों को बनाया निशाना

उमरिया  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सटे पनपथा गांव के सरैया टोला में गुरुवार की शाम उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब रहवासी क्षेत्र में एक नहीं बल्कि दो बाघों की चहल-कदमी देखी गई। अचानक बाघों को बस्ती की ओर बढ़ते देख ग्रामीणों में भय और दहशत का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि बाघों ने गांव के ही गेंदिया सिंह के एक मवेशी पर हमला कर शिकार किया था। मवेशी को निवाला बनाने के दौरान दोनों बाघ रहवासी क्षेत्र तक पहुंच गए। ग्रामीणों ने आपसी साहस दिखाते हुए तेज आवाजें और बर्तनों की खड़खड़ाहट से किसी तरह बाघों को जंगल की ओर खदेड़ा। सूचना मिलने पर वन विभाग और पार्क टीम मौके पर पहुंची, जिन्होंने क्षेत्र का मुआयना किया और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है। टीम लगातार क्षेत्र में पेट्रोलिंग और निगरानी बनाए हुए है, ताकि बाघों की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके। फिलहाल गांव में रात होते ही सन्नाटा और डर का माहौल है, जबकि ग्रामीण बाघों की दोबारा आमद की आशंका से अब भी सहमे हुए हैं।  

76 अधिकारियों का बड़ा जिम्मा, वन क्षेत्रपालों को मिला पदस्थापना आदेश

भोपाल  प्रशासनिक नजरिए से 7 नवंबर का दिन मध्यप्रदेश के लिए कुछ खास होगा। इस दिन प्रदेश को 8 सौ से ज्यादा नए अधिकारी, कर्मचारी मिलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन नव-चयनित सरकारी सेवकों को समारोहपूर्वक नियुक्ति एवं पदस्थापना आदेश प्रदान करेंगे। शुक्रवार को राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में यह कार्यक्रम आयोजित होगा। खास बात यह है कि यहां 76 वन क्षेत्रपालों को भी पदस्थापना आदेश प्रदान किए जाएंगे। इसके साथ ही इन्हें प्रदेश के वनों के संरक्षण, संवर्धन का अहम दायित्व दे दिया जाएगा। 7 नवम्बर को पूर्वान्ह 11.30 बजे से कार्यक्रम शुरु होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यहां वन एवं लोक स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा विभाग के कुल 877 अधिकारी-कर्मचारियों को नियुक्ति एवं पदस्थापना आदेश प्रदान करेंगे। इनमें वन विभाग के 543 नव-नियुक्त वनरक्षक एवं वन क्षेत्रपाल और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के 334 नव-नियुक्त विशेषज्ञ एवं नर्सिंग ऑफिसर शामिल हैं। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग भर्ती परीक्षा वर्ष 2024-25 से चयनित 75 निश्चेतना विशेषज्ञ, 62 सर्जरी विशेषज्ञ, 106 शिशु रोग विशेषज्ञ एवं 91 नर्सिंग ऑफिसर को नियुक्ति आदेश दिए जाएंगे। वन विभाग में मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मण्डल, भोपाल द्वारा आयोजित वनरक्षक भर्ती परीक्षा वर्ष 2022-23 में चयनित 467 नव-नियुक्त वनरक्षकों को पदस्थापना आदेश दिए जाएंगे। इन्होंने वन प्रशिक्षण विद्यालयों में वानिकी प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया है। साथ ही मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित वन क्षेत्रपाल भर्ती परीक्षा वर्ष 2020-21 से चयनित 76 वन क्षेत्रपाल को भी पदस्थापना आदेश प्रदान किए जाएगे। इन्होंने देश की विभिन्न प्रशिक्षण अकादमियों में 18 माह का प्रशिक्षण पूरा किया है। द्वितीय श्रेणी (Class II) के राजपत्रित अधिकारी बता दें कि मध्यप्रदेश में वन क्षेत्रपाल (Range Forest Officer) द्वितीय श्रेणी (Class II) के राजपत्रित अधिकारी होते हैं। ये राज्य वन सेवा (State Forest Service – SFS) के अंतर्गत आते हैं जोकि वन मंडल अधिकारी (DFO) के अधीन रहकर कार्य करते हैं। प्राय: इन्हें एक वन रेंज (Forest Range) का प्रभार दिया जाता है। वनों के संरक्षण, संवर्धन का अहम दायित्व वन क्षेत्रपालों का ही रहता है। वृक्षों की कटाई, वन उत्पादों का संग्रहण और वन क्षेत्र का प्रबंधन भी इनके कार्यों में शामिल है।

हुरून इंडिया की सूची में मध्यप्रदेश के सबसे धनी व्यक्ति विनोद अग्रवाल, संपत्ति 4,430 करोड़

इंदौर  इंदौर शहर के जाने-माने उद्योगपति और समाजसेवी विनोद अग्रवाल प्रदेश में सबसे ज्यादा धनी तो हैं ही, वे सेवा कार्यों में भी अव्वल हैं। गुरुवार को हुरून इंडिया ने देशभर के दानदाताओं की सूची जारी की, इसमें अग्रवाल कोल के मुखिया विनोद अग्रवाल देश में 71वें नंबर पर हैं। वे प्रदेश में सबसे ऊपर हैं। वे लगातार 5 बार से इस लिस्ट में जगह बनाए हुए हैं। अग्रवाल ने वर्ष 2024-25 में 19 करोड़ की राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, पशु कल्याण, गरीब, कुपोषण जैसे कार्यों में लगाई। मालूम हो, पिछले दिनों हुरून इंडिया ने देश के सबसे धनी लोगों की सूची जारी की थी। इसमें विनोद अग्रवाल की संपत्ति 4430 करोड़ रुपए थी। वे प्रदेश के सबसे धनी व्यक्ति भी है। 5 साल से वे परोपकार में प्रदेश में नंबर वन हैं। बुधवार को ही उन्होंने इंदौर के अन्नपूर्णा माता मंदिर में 10 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले हाईटेक सभा मंडप और अन्नक्षेत्र का भूमिपूजन किया। वे अपनी संस्था बालाजी सेवार्थ विनोद अग्रवाल फाउंडेशन के माध्यम से कई प्रकल्प चला रहे हैं। हालांकि बीते साल उन्होंने 20 करोड़ रुपए दान में लगाए थे, वे देश में 58वें नंबर पर थे। टाटा-बिरला से मिली प्रेरणा विनोद अग्रवाल ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि भगवान ने बहुत कुछ दिया है। सभी को अपनी कमाई से दूसरों के लिए कुछ करना चाहिए। मैंने टाटा-बिरला को देखकर परोपकार शुरू किया। ऐसे ही अन्य सक्षम लोगों को मदद के लिए हाथ बढ़ाना चाहिए। परोपकार करने से आत्म संतुष्टि मिलती है। पूरे शहर में जरूरतमंदों को बांटेंगे भोजन अग्रवाल ने बताया कि अयोध्या में अन्नक्षेत्र का वर्तमान में काम चल रहा है। महालोक, सालासर बालाजी में जनसुविधा के लिए काम करवाए हैं। अन्नपूर्णा मंदिर में हाईटेक भोजनशाला बनाई जा रही है। हर दिन दो से ढाई हजार जरूरतमंद लोगों को शहर के अलग-अलग हिस्सों में भोजन पहुंचाएंगे। योग के साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य के वे कई प्रकल्प चला रहे हैं।

देशभर के 10 संभागों में वंदे मातरम्@150 के कार्यक्रम, भोपाल में समारोह हुआ भव्य

भोपाल   वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी ने आज से पूरे देश में ‘वंदे मातरम्@150’ अभियान की शुरुआत की। मध्यप्रदेश में इस अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के शौर्य स्मारक में किया। इस मौके पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष, मंत्रीगण, सांसद, विधायक, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने शौर्य स्मारक और भाजपा प्रदेश कार्यालय दोनों स्थानों पर ‘वंदे मातरम्’ के मूल स्वरूप में सामूहिक गायन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा और स्वतंत्रता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब किसी देश में आजादी की भावना जागृत होती है, तो इस गीत के शब्द लोगों के मन में नई ऊर्जा का संचार करते हैं। भोपाल के शौर्य स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंत्री कृष्णा गौर, विश्वास सारंग, सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, रामेश्वर शर्मा, महापौर माली श्री राय, ACS अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह, DGP कैलाश मकवाना, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल और भोपाल की पुलिस कमिश्नर हरि नारायण चारी मिश्रा मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वंदे मातरम का मूल मंत्र हमेशा से हमें प्रेरित करता रहा है। हर देश में जब स्वतंत्रता की भावना बढ़ती है, तब इन शब्दों से एक नए प्रकार का स्पंदन उत्पन्न होता है, जिसे हम गीतों के रूप में अनुभव कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि "कदम कदम बढ़ाए जा" पुलिस बैंड द्वारा प्रस्तुत किया गया है और यह गीत आजादी के संघर्ष के दौरान रचित गीतों में से एक है। इस गीत की रचना में त्रिदेवियों दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती को जोड़ने की विशेष संरचना है और इसके माध्यम से उनकी पूजा का संदेश भी निहित है। हमारी त्रिदेवियों की कल्पना हजारों वर्षों से चली आ रही है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अतीत के अप्रतिम गीतों ने आजादी की अलख जगाई। 19वीं शताब्दी से शुरू हुई यह यात्रा हमें आज भी प्रेरित करती है। आजादी के हर संघर्ष में, चाहे वह अमेरिका हो या इंग्लैंड, जब आजादी की अलख जगती है, तब शब्दों से नए संकल्प उत्पन्न होते हैं। राष्ट्रभक्ति गीतों के माध्यम से देश अपनी पहचान बनाता है। 10 संभागों में एक साथ हुआ आयोजन भाजपा के इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत भोपाल सहित राज्य के 10 संभागों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। हर संभाग में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार के मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। शौर्य स्मारक पर हुए आयोजन में मंत्री कृष्णा गौर, विश्वास सारंग, सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर माली श्री राय, DGP कैलाश मकवाना, ACS अशोक वर्णवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। ‘स्वदेशी संकल्प’ भी लिया गया ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन के बाद कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने ‘स्वदेशी का संकल्प’ भी लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि “वंदे मातरम्” की रचना में भारत की त्रिदेवियों—दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का आह्वान है, जो हमारी संस्कृति और मातृशक्ति की प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक जागृति का प्रतीक बनेगा। 10 संभागों में हो रहे कार्यक्रम वंदे मातरम गायन के बाद स्वदेशी का संकल्प भी सामूहिक रूप से लिया जाएगा। इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत मध्यप्रदेश के भोपाल सहित 10 संभागों और 10 विशेष स्थानों पर विशेष आयोजन हो रहे है। इन आयोजनों में प्रदेश मंत्री, बीजेपी के प्रदेश पदाधिकारी, सांसद, विधायक सहित जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ नेता शामिल हो रहे है। 26 नवंबर तक चलेगा अभियान 07 नवंबर से शुरू होने वाला यह उत्सव 26 नवम्बर (संविधान दिवस) तक देशभर के साथ प्रदेशभर में मनाया जाएगा, जिसमें हर जिले और हर शैक्षणिक संस्थान की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पूरे प्रदेश में होंगे आयोजन भाजपा ने राज्यभर के 10 प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर भी इस अभियान के तहत विशेष आयोजन किए हैं। इनमें महाकाल लोक (उज्जैन), देवी अहिल्याबाई स्मारक (इंदौर), शहीद रामप्रसाद बिस्मिल स्मारक (मुरैना), रानी लक्ष्मीबाई बलिदान स्थल (ग्वालियर), शहीद रघुनाथ शाह–शंकर शाह स्थल (जबलपुर) और सेठानी घाट (नर्मदापुरम) शामिल हैं। 26 नवंबर तक चलेगा राष्ट्रव्यापी उत्सव यह अभियान 7 नवंबर से 26 नवंबर (संविधान दिवस) तक चलेगा। इस दौरान राज्य के प्रत्येक जिले, स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम् गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान आयोजित किए जाएंगे। भाजपा नेताओं ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य देशभर में राष्ट्रगीत के प्रति भावनात्मक जुड़ाव को और सशक्त बनाना है। मुख्यमंत्री बोले — "वंदे मातरम् हमारी पहचान" मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा—     “वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, यह हमारी पहचान है। इसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों भारतीयों को प्रेरित किया। अब समय है कि नई पीढ़ी इस गीत के संदेश को समझे और भारत की सांस्कृतिक एकता को सहेजे।” अब जानिए कौन से मंत्री कहां है मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव- शौर्य स्मारक (भोपाल) उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल- कलेक्टर कार्यालय (रीवा) मंत्री कैलाश विजयवर्गीय- कलेक्टर कार्यालय (इंदौर) मंत्री राकेश सिंह – कलेक्टर कार्यालय (जबलपुर) मंत्री राव उदय प्रताप सिंह- कलेक्टर कार्यालय (नर्मदापुरम) मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर -कलेक्टर कार्यालय (ग्वालियर) मंत्री गोविंद सिंह राजपूत- कलेक्टर कार्यालय (सागर) मंत्री एंदल सिंह कंसाना -कलेक्टर कार्यालय (मुरैना) मंत्री दिलीप जायसवाल -कलेक्टर कार्यालय (शहडोल) मंत्री गौतम टेटवाल -कलेक्टर कार्यालय (उज्जैन) भाजपा आज इन दस स्थानों पर कर रही आयोजन     भाजपा प्रदेश कार्यालय भोपाल     मॉ नर्मदा तट सेठानी घाट नर्मदापुरम     शहीद रामप्रसाद बिस्मिल स्मारक मुरैना     रानी लक्ष्मीबाई बलिदान स्थल ग्वालियर     रानी लक्ष्मीबाई स्मारक स्थल सागर     शहीद पदम्धर स्मारक रीवा     शहीद स्मारक शहडोल     शहीद रघुनाथ शाह, शंकर शाह बलिदान स्थल जबलपुर     देवी अहिल्या बाई स्मारक स्थल इंदौर     महाकाल लोक उज्जैन

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ से शुरू हुई सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री करेंगे नेतृत्व

छतरपुर  बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में 'सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0' का शुभारंभ दिल्ली के इंद्रप्रस्थ से हुआ। यह यात्रा वृंदावन तक जाएगी। शुक्रवार सुबह 9 बजे कात्यायनी मंदिर परिसर में संत-महात्माओं की उपस्थिति में मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के बाद संतों की ओर से सौंपे गए धर्म ध्वज को लेकर बागेश्वर बाबा के नेतृत्व में यात्रा वृंदावन के लिए रवाना होगी। धीरेंद्र शास्त्री बोले- यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि एक वैचारिक क्रांति गुरुवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए बागेश्वर महाराज ने कहा कि यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि एक वैचारिक क्रांति है, जिसका उद्देश्य विचारों को जगाना और समाज को जोड़ना है। उन्होंने कहा, हम विवाद नहीं, संवाद के माध्यम से आगे बढ़ना चाहते हैं। यह यात्रा सनातन एकता का संदेश लेकर चलेगी। महाराज श्री ने बताया कि मंचीय कार्यक्रम में राष्ट्रगान, हनुमान चालीसा, श्रीराम नाम संकीर्तन और हिंदू एकता की शपथ ली जाएगी। उन्होंने देश-विदेश के हिंदुओं से 7 से 16 नवंबर के बीच चलने वाली इस यात्रा में कम से कम एक दिन शामिल होने का आग्रह किया। इस पदयात्रा में देश के कई संत, आचार्य शामिल होंगे इस पदयात्रा में जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज, राजेंद्र दास महाराज, दीदी मां ऋतंभरा, चिदानंद मुनि जी, स्वामी ज्ञानानंद महाराज, सुधांशु जी महाराज, राजू दास महाराज, मृदुल कांत शास्त्री, दाती महाराज, पंडित संजीव कृष्ण ठाकुर और महामंडलेश्वर नवल किशोर दास सहित देशभर के अनेक संत, आचार्य और महामंडलेश्वर भाग ले रहे हैं। राजनीतिक क्षेत्र से दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सांसद मनोज तिवारी और मंत्री कपिल मिश्रा भी उपस्थित रहेंगे। बागेश्वर महाराज ने बताया कि यात्रा दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की 422 ग्राम पंचायतों से होकर गुजरेगी, जिससे करीब 5 करोड़ लोगों तक इसका संदेश पहुंचेगा। इस साल 300 से अधिक मुस्लिम सदस्य भी होंगे शामिल इस बार यात्रा को मुस्लिम समाज से भी समर्थन मिला है। फैज खान के नेतृत्व में 300 से अधिक मुस्लिम सदस्य पदयात्रा में शामिल होंगे। हाल ही में दिल्ली में हुई बैठक में मुस्लिम समुदाय ने कहा कि यह यात्रा 'लोगों को जोड़ने का कार्य कर रही है', इसलिए वे भी इसमें साथ चलेंगे।     महाराज का संदेश – यात्रा में मर्यादा व शांति बनाए रखें     बागेश्वर महाराज ने सभी पदयात्रियों से कहा है कि वे मर्यादित होकर चलें।     किसी जाति, पंथ या संप्रदाय पर टिप्पणी न करें, और अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग न करें।     प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि सभी संवेदनशील स्थलों पर विशेष सुरक्षा की जाए। पदयात्रा के सात संकल्प 1. यमुना माता का शुद्धिकरण। 2. भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। 3. गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा मिले। 4. श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर भव्य रूप में निर्मित हो। 5. ब्रज परिक्षेत्र से मांस-मदिरा पर प्रतिबंध। 6. अवैध धर्मांतरण और लव जिहाद पर रोक। 7. जात-पात और ऊंच-नीच का भेद समाप्त कर सामाजिक समरसता स्थापित हो।

मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना: नई यात्राओं का हुआ ऐलान

तिरुपति, रामेश्वरम, कामाख्या, द्वारका, वैष्णोदेवी, जगन्नाथपुरी और अयोध्या में होंगे तीर्थ दर्शन भोपाल संस्कृति, पर्यटन तथा धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के विशेष प्रयास किए जा रहे है। साथ ही प्रदेश में तीर्थाटन की परंपरा को संरक्षित और प्रोत्साहित करते हुए एवं प्रदेश के बुजुर्गों को तीर्थयात्रा का लाभ दिए जाने के लिए मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना का संचालन किया जा रहा है। ‘‘मध्यप्रदेश तीर्थ-दर्शन योजना’’ केवल धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह परिवार और समाज में बुजुर्गों के सम्मान को पुनर्स्थापित करने का महत्त्वपूर्ण प्रयास है। इसका अगला चरण 13 नवंबर 2025 से प्रारंभ होकर 29 मार्च 2026 तक चलेगा। पहली यात्रा श्री तिरुपति तीर्थ के लिए 13 नवंबर को जबलपुर से रवाना होगी। पांच महीनों में प्रदेश के बुजुर्गों को तिरुपति, रामेश्वरम, कामाख्या, द्वारका, वैष्णोदेवी, जगन्नाथपुरी और अयोध्या में तीर्थ दर्शन कराए जाएंगे। राज्य मंत्री श्री लोधी ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से वरिष्ठ नागरिकों के समूह देश के प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा के लिए भेजे जाएंगे धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा संबंधित जिलों के कलेक्टर्स को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए है। योजना उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए है जिनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक है तथा वे आयकर-दाता नहीं हैं। महिलाओं को आयु सीमा में 2 वर्ष की छूट दी गई है। इच्छुक आवेदक अपने आवेदन तहसील, स्थानीय निकाय, जनपद कार्यालय अथवा कलेक्टर द्वारा निर्धारित स्थानों पर जमा कर सकते हैं। राज्य मंत्री श्री लोधी ने बताया कि यात्रियों का अंतिम चयन संबंधित जिले के कलेक्टर द्वारा किया जाएगा। किसी जिले में निर्धारित कोटे से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो यात्रियों का चयन कम्प्यूटरीकृत लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। यात्रियों की स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से ट्रेन में डॉक्टर और सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए जायेंगे। उन जिलों में जहाँ ट्रेन का स्टॉपेज या स्टेशन नहीं है वहाँ के यात्रियों को बोर्डिंग स्टेशन तक लाने को व्यवस्था संबंधित जिलों के कलेक्टर्स करेंगे। राज्य मंत्री श्री लोधी ने सभी यात्रियों से आग्रह किया है कि मौसम के अनुरूप वस्त्र, ऊनी वस्त्र, कंबल, चादर, तौलिया, साबुन और आवश्यक दवाइयां जैसी व्यक्तिगत उपयोग की सामग्री अपने साथ रखें। IRCTC करेगा यात्रा का प्रबंधन योजना का क्रियान्वयन भारत सरकार के उपक्रम IRCTC (इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के द्वारा किया जा रहा है। यात्रा के दौरान IRCTC द्वारा पेयजल, भोजन, नाश्ता और चाय उपलब्ध कराई जाएगी। यात्रियों के रुकने की व्यवस्था, उन्हें तीर्थ स्थल तक बसों द्वारा ले जाने और वापस ट्रेन तक लाने की जिम्मेदारी भी IRCTC की होगी। सभी तीर्थ यात्रियों के लिए अपने साथ ओरिजिनल आधार कार्ड या वोटर कार्ड रखना अनिवार्य है। राज्यमंत्री श्री लोधी ने बताया कि ‘‘मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना’’ उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए संबल है, जो तीर्थयात्रा की इच्छा तो रखते हैं परंतु आर्थिक या स्वास्थ्यगत कठिनाइयों के कारण यात्रा करने में असमर्थ होते हैं।  यह योजना धार्मिक आस्था को सम्मान देती है और बुजुर्गों को आध्यात्मिक आनंद के साथ सामाजिक सुरक्षा का विश्वास भी प्रदान करती है। राज्य मंत्री श्री लोधी ने कहा कि प्रदेश सरकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा आध्यात्मिक पर्यटन के विस्तार के लिए निरंतर अधोसंरचना उन्नयन, तीर्थस्थलों के सौंदर्यीकरण, स्वच्छता सुविधाओं के विस्तार और यात्रा मार्गों के विकास पर कार्य कर रही है। इससे न केवल श्रद्धालुओं को सुगमता मिल रही है, बल्कि धार्मिक पर्यटन को आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी सशक्त बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के ये प्रयास आने वाले समय में मध्यप्रदेश को ‘‘आध्यात्मिक पर्यटन के अग्रणी राज्य’’ के रूप में और अधिक प्रतिष्ठा दिलाएँगे।

सरकारी और निजी नर्सिंग कॉलेजों पर सवाल: 33 हजार में से 29 हजार सीटें खाली!

भोपाल प्रदेश के सरकारी और निजी नर्सिंग कॉलेजों में हुए फर्जीवाड़े का असर अब प्रवेश में देखने को मिल रहा है। कालेजों में डिग्री और डिप्लोमा मिलाकर 33 हजार सीटों में से चार हजार सीटों पर भी प्रवेश नहीं हुए हैं, जबकि अंतिम चरण की काउंसलिंग पूरी हो गई है। सीटें रिक्त रहने के कारण इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आइएनसी) ने प्रवेश की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी है। कुछ और नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता इस बीच मिल सकती है, पर पहले से ही लगभग 90 प्रतिशत सीटें रिक्त हैं। नर्सिंग काउंसिल के अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्ष से भी कम प्रवेश हुए हैं। एक समय था, जब प्रतिवर्ष 40 से 45 हजार सीटों पर प्रवेश हो रहे थे। प्रदेश में आधे से अधिक नर्सिंग कॉलेज बिना मापदंड चल रहे थे। वर्ष 2022 में ला स्टूडेंट एसोसिएशन ने हाई कोर्ट जबलपुर में ऐसे कॉलेजों की सूची के साथ याचिका लगाई।   कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी। इसके बाद 200 से अधिक कॉलेज बंद हो गए। फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद दूसरे राज्यों के विद्यार्थी मप्र नहीं आ रहे। उल्टा, यहां के छात्र दूसरे राज्यों में नर्सिंग की पढ़ाई के लिए जा रहे हैं। इस कारण सीटें नहीं भर पा रही हैं। नर्सिंग पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की सर्वाधिक संख्या बीएससी नर्सिंग और जीएनएम (डिप्लोमा) की होती हैं। वर्ष 2024 में सरकारी व निजी मिलाकर कुल 19,212 सीटों में से 3,030 यानी 16 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश हुए थे। वर्ष 2025 में 22,880 में से 2843 यानी 12 प्रतिशत में ही प्रवेश हुए हैं। फिर कैसे मिलेगा अस्पतालों को नर्सिंग स्टाफ प्रवेश कम होने से बड़ी चिंता यह है कि सरकारी और निजी अस्पतालों को कुशल नर्सिंग स्टाफ कैसे मिल पाएगा। अभी स्थिति यह है कि सरकारी कालेजों की ही बीएससी नर्सिंग की लगभग 150 सीटें रिक्त हैं। बड़ी जद्दोजहद के बाद सभी सरकारी कालेजों को मान्यता मिल पाई है। जिस तरह से नए निजी और सरकारी अस्पताल खुल रहे हैं, प्रतिवर्ष लगभग 10 हजार नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता है।