samacharsecretary.com

2026 से MP में कैंसर इलाज होगा आधुनिक: गामा नाइफ और पीईटी-सीटी स्कैन से सुविधा बढ़ेगी

भोपाल  मध्यप्रदेश में कैंसर मरीजों के लिए एम्स भोपाल में प्रदेश का पहला सेंट्रलाइज्ड कैंसर ब्लॉक विकसित किया जा रहा है, जिसे 2026 तक शुरू करने की तैयारी है। इस आधुनिक ब्लॉक में मरीजों को गामा नाइफ और पीईटी-सीटी स्कैन जैसी उन्नत सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। वर्तमान में एम्स में जांच और उपचार के लिए मरीजों को लंबी वेटिंग का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें सिटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचों के लिए छह माह से एक वर्ष तक का इंतजार शामिल है। नई सुविधा का उद्देश्य मरीजों को सभी सेवाएं एक जगह उपलब्ध कराना है। प्रस्तावित कैंसर ब्लॉक में जांच से लेकर छह प्रकार के उपचार तक की व्यवस्थाएं होंगी, जिनमें कीमोथेरेपी, सर्जरी, टारगेट थेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, मेंटल हेल्थ काउंसलिंग और स्टेम सेल ट्रीटमेंट शामिल हैं। वर्तमान में कैंसर मरीजों को जांच, सर्जरी और रेडिएशन के लिए अलग-अलग विभागों में जाना पड़ता है, जबकि नया ब्लॉक शुरू होने के बाद सभी विशेषज्ञ एक साथ मिलकर मरीज की स्थिति के अनुसार संयुक्त निर्णय लेंगे। जांच से लेकर 6 तरह के इलाज तक की सुविधा नए कैंसर ब्लॉक में मरीजों को जांच से लेकर ट्रीटमेंट तक की सभी सेवाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी। इसमें कीमोथेरेपी, सर्जरी, टारगेट थेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, मेंटल हेल्थ काउंसलिंग और स्टेम सेल ट्रीटमेंट की व्यवस्था होगी। एम्स प्रशासन का कहना है कि फिलहाल कैंसर मरीजों को अलग-अलग विभागों में भटकना पड़ता है। जांच एक जगह, सर्जरी दूसरी जगह और रेडिएशन तीसरी जगह होती है। लेकिन इस ब्लॉक के शुरू होने के बाद सभी विशेषज्ञ एक साथ मिलकर मरीज की स्थिति के अनुसार संयुक्त फैसले लेंगे। गंभीर मरीजों के लिए ‘प्रेफरेंस सिस्टम’ तैयार होगा एम्स के इस नए ब्लॉक में स्मार्ट स्क्रीनिंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है। अस्पताल में आने वाले हर मरीज को पहले एक स्क्रीनिंग यूनिट से गुजरना होगा। यहां डॉक्टर उनकी जांच करेंगे और यह तय करेंगे कि मरीज को कैंसर है या नहीं। जिन मरीजों में कैंसर की पुष्टि होगी, उन्हें गंभीरता के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा। इससे जिन मरीजों की हालत गंभीर है, उन्हें कम वेटिंग में प्राथमिकता के आधार पर इलाज मिलेगा। वहीं, जिन मरीजों में सिर्फ कैंसर का संदेह होगा, उन्हें आवश्यक जांच के लिए अन्य संबंधित विभागों में भेजा जाएगा। एमपी के इन जिलों से सबसे ज्यादा मरीज एम्स भोपाल के आंकड़ों के अनुसार, हर साल 36 हजार से ज्यादा कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें से करीब 60% मरीज भोपाल के बाहर के हैं। सबसे ज्यादा केस आगर मालवा (3664), रायसेन (1776), विदिशा (1536), नर्मदापुरम (1216), सागर (1072), रीवा (944) जैसे जिले टॉप पर हैं। हालांकि, इसका बड़ा कारण भोपाल से भौगोलिक नजदीकी है। यह भी सवाल उठता है कि इन जिलों के सिविल अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में कैंसर इलाज की व्यवस्था मजबूत क्यों नहीं है?। निदेशक बोले- रिसर्च-क्लिनिकल ट्रायल पर भी फोकस एम्स भोपाल के कार्यकारी निदेशक डॉ. माधवानंद कर ने बताया कि यह कैंसर ब्लॉक प्रदेश में कैंसर ट्रीटमेंट की दिशा बदल देगा। कैंसर के हर मरीज को समग्र इलाज की जरूरत होती है। अभी मरीजों को अलग-अलग विभागों में भागदौड़ करनी पड़ती है। इस ब्लॉक के शुरू होने से सर्जरी, कीमो और रेडिएशन सब एक ही छत के नीचे संभव हो जाएगा। डॉ. माधवानंद ने यह भी कहा कि यहां रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल्स पर भी फोकस किया जाएगा, ताकि कैंसर के शुरुआती लक्षणों में ही सटीक इलाज शुरू किया जा सके। गंभीर मरीजों के लिए प्रेफरेंस सिस्टम भी तैयार किया जा रहा है। अस्पताल में आने वाले हर मरीज की पहले स्क्रीनिंग यूनिट में जांच होगी, जिसके बाद यह तय किया जाएगा कि वह कैंसर रोगी है या नहीं। जिनमें बीमारी की पुष्टि होगी, उन्हें गंभीरता के आधार पर वर्गीकृत कर प्राथमिकता से उपचार दिया जाएगा। वहीं जिन मरीजों में सिर्फ कैंसर का संदेह होगा, उन्हें संबंधित विभागों में आगे की जांच के लिए भेजा जाएगा।

खुशखबरी: लाड़ली योजना के तहत बढ़े हुए पैसे सीधे खाते में, जानिए कब और कैसे मिलेंगे

भोपाल मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) एक वरदान साबित हो रही है। हर महीने लाखों बहनों के खातों में सीधे 1500 रुपये की सहायता राशि पहुंच रही है, जो उनके परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है। अब तक योजना की 29 किश्तें सफलतापूर्वक वितरित हो चुकी हैं, और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई मंचों से घोषणा की है कि यह राशि धीरे-धीरे बढ़ाकर 3000 रुपये तक पहुंचाई जाएगी। नवंबर में इस बार राशि बढ़कर आएगी!  मुख्यमंत्री मोहन यादव अपनी लाड़ली बहनों से किया वादा पूरा करने जा रहे हैं। राज्य की प्रमुख लाडली बहना योजना के 1.26 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को अब हर महीने ₹1500 मिलेंगे। यह राशि पहले ₹1250 प्रति माह थी। यह बढ़ोतरी भाई दूज के बाद से लागू होनी थी, लेकिन सरकारी सूत्रों के अनुसार, 12 नवंबर को नर्मदापुरम जिले के बाबई में एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री स्वयं लाभार्थियों के खातों में ₹1500 की राशि ट्रांसफर करेंगे। मंत्री ने भी की पुष्टि महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने भी इसकी पुष्टि की है कि नवंबर से यह बढ़ी हुई राशि मिलनी शुरू हो जाएगी। यह पिछले दो सालों में इस योजना के तहत पहली वृद्धि है। मुख्यमंत्री ने 12 सितंबर 2025 को घोषणा की थी कि लाड़ली बहना लाभार्थियों को हर महीने ₹1500 मिलेंगे, जिसे धीरे-धीरे ₹3000 प्रति माह तक बढ़ाया जाएगा। 12 अक्टूबर 2025 को, 1.26 करोड़ से अधिक लाभार्थियों के खातों में ₹1541 करोड़ की 29वीं किस्त भेजी गई थी। दीवाली बोनस का किया था ऐलान सरकार ने दिवाली बोनस के तौर पर 'भाई दूज' से ₹1500 देने का वादा किया था। 18 अक्टूबर 2025 को मुख्यमंत्री ने 'भाई दूज' पर ₹250 अतिरिक्त जमा करने और अगले महीने से ₹1500 देने की घोषणा की थी। हालांकि, 23 अक्टूबर 2025 को लाभार्थियों को भाई दूज पर वादा किया गया ₹250 अतिरिक्त नहीं मिला, लेकिन सरकार ने नवंबर से ₹1500 प्रति माह की राशि बढ़ाने का अपना वादा दोहराया। योजना के 1.26 करोड़ लाभार्थी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की शुरुआत पिछली भाजपा सरकार ने मार्च 2023 में, विधानसभा चुनावों से ठीक पहले की थी। शुरुआत में, महिला लाभार्थियों को ₹1000 प्रति माह देने की घोषणा की गई थी। अगस्त 2023 में, सरकार ने अक्टूबर 2023 से राशि बढ़ाकर ₹1250 प्रति माह करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने दिवाली से मौजूदा ₹1250 प्रति माह से बढ़ाकर ₹1500 प्रति माह करने की घोषणा की थी। इस योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या 1.26 करोड़ है। अगस्त 2023 से नए रजिस्ट्रेशन बंद 20 अगस्त 2023 के बाद से योजना के तहत कोई नया पंजीकरण शुरू नहीं किया गया है। पिछले महीने तक, लाड़ली बहना योजना के तहत राज्य सरकार ने 29 किस्तों में ₹45,000 करोड़ हस्तांतरित किए हैं।  

सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट: स्टेट हाईवे फोरलेन में तब्दील, कृषि मंत्री ने सीएम से उठाई मांग

  रायसेन रायसेन जिले के लोगों के लिए राहत की खबर है। विदिशा बायपास से रायसेन होते हुए भोपाल पहुंचने के लिए फोरलेन बनाया जाएगा। 30 अक्टूबर को सांसद खेल महोत्सव के शुभारंभ कार्यक्रम में विदिशा आए केंद्रीय कृषि मंत्री और क्षेत्रीय सांसद शिवराज सिंह चौहान ने मंच पर मौजूद सीएम डॉ मोहन यादव से भोपाल से सलामतपुर, सांची होते हुए विदिशा तक स्टेट हाइवे 18 को फोरलेन बनाने की मांग की थी। इस पर सीएम ने फोरलेन की घोषणा करते हुए मौके पर ही अधिकारियों को कार्रवाई शुरु करने के निर्देश दिए थे, जिस पर अब तेजी से काम शुरु हो गया है।  सड़क चौड़ीकरण का डीपीआर तैयार एमपीआरडीसी द्वारा सड़क चौड़ीकरण की डीपीआर तैयार की जा चुकी है, जिसे स्वीकृति के लिए चीफ सेक्रेटरी कमेटी को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही आगे की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। डीपीआर के अनुसार 44.5 किलोमीटर लंबी सड़क को फोरलेन बनाया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत 1467.42 करोड़ रुपए है। हालांकि परियोजना के अंतिम रूप तक कुछ बदलाव संभव हैं। सड़क निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर किया जाएगा। मंत्रियों ने सड़क की खराब स्थिति दरअसल, इस बार केंद्रीय मंत्री के साथ दिल्ली से आए विशेष अतिथियों ने भी सड़क की खराब स्थिति देखी थी। इसी के बाद उन्होंने मंच से सड़क को फोरलेन बनाने की मांग कर दी। हालांकि इसका प्रस्ताव दो साल पहले ही रायसेन कलेक्टर द्वारा शासन को भेजा गया था, जिस पर प्रारंभिक प्रक्रिया के बाद कार्य रुक गया था। अब परियोजना को गति मिली है। इस सड़क के निर्माण से लगभग 100 गांवों को लाभ मिलेगा, साथ ही भोपाल और विदिशा के बीच यात्रा करने वालों को राहत मिलेगी। विशेष रूप से सांची आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों के लिए यह फोर लेन सड़क सुविधा और सुरक्षा दोनों का बड़ा माध्यम बनेगी। कई अंधे मोड़ हैं खत्म होंगे अंधे मोड़ इस मार्ग पर भोपाल से सलामतपुर तिराहे तक कई अंधे मोड़ हैं। बालमपुर घाट लंबा व ऊंचा होने के कारण अत्यंत जोखिमपूर्ण है। इन मोड़ों और घाट पर लगभग हर दिन वाहन दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें कई बार बड़े हादसे भी शामिल होते हैं। औसतन हर माह 20 से 25 दुर्घटनाएं दर्ज की जाती हैं। इसी कारण लोग लंबे समय से इस सड़क को फोर लेन करने की मांग कर रहे हैं। मोड़ों और घाटों के साथ सड़क की स्थिति भी बेहद खराब है। जगह-जगह गहरे गड्ढे, जर्जर पुल-पुलियाएं और बार-बार की मरमत के बावजूद खराब हालत लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। प्रक्रिया शुरू की जाएगी विदिशा बायपास से लेकर अयोध्या बायपास तक फोरलेन सड़क बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। अभी शासन स्तर से स्वीकृति लेने की प्रक्रिया चल रही है। उमीद है जल्द ही प्रस्ताव पर स्वीकृति मिल जाएगी। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरु की जाएगी। –सोनल सिन्हा, डिवीजनल मैनेजर, एमपीआरडीसी।

कंबल वाले बाबा का भंडाफोड़: तेल-चूरन बेच रहे थे ‘औषधि’ बताकर, स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई

छिंदवाड़ा छिंदवाड़ा के चंदनगांव में 'कंबल वाले बाबा' के नाम से मशहूर गणेश यादव द्वारा लगाए गए शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारा है। यह कार्रवाई बाबा द्वारा कथित रूप से अंधविश्वास फैलाने और बिना परमिशन के इलाज के नाम पर सामग्री बेचने के आरोप में की गई है। कंबल से इलाज का दावा, बेच रहे थे चूरन और तेल कंबल से बीमारी ठीक करने का दावा करने वाले बाबा गणेश यादव के शिविर की लंबे समय से चर्चा थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पाया कि बाबा जहां कंबल से बीमारी दूर करने का दावा कर रहे थे, वहीं मरीजों को चूरन की पुड़िया और तेल भी दिया जा रहा था। बताया जा रहा है कि यह चूरन और तेल लगभग 1200 में बेचा जा रहा था। यह पूरा शिविर बिना किसी आधिकारिक परमिशन के चलाया जा रहा था, जिससे यह अंधविश्वास का खेल माना जा रहा है।    स्वास्थ्य विभाग ने जब्त किए सैंपल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके से चूरन की पुड़िया और तेल दोनों के सैंपल ले लिए हैं। इन सैंपल को जांच के लिए भेजा जाएगा, ताकि उनकी सामग्री और प्रभाव का पता लगाया जा सके। सीएमएचओ छिंदवाड़ा नरेश गोन्नाने ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके से सैंपल जब्त कर लिए हैं और अब देखना होगा कि प्रशासन इस अंधविश्वास के खेल को बंद करवाता है या नहीं। फिलहाल, प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि वह अंधविश्वास पर आधारित इस तरह के अनधिकृत शिविरों पर रोक लगाता है या नहीं।

‘झूठ का मुंह काला’ — आरोपों से बरी हुईं विधायक अनुभा मुंजारे

बालाघाट उत्तर सामान्य वनमंडल की डीएफओ (उत्तर) नेहा श्रीवास्तव द्वारा बालाघाट सीट से कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे पर दो-तीन पेटी रकम की व्यवस्था करने का आरोप लगाकर जिले व प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी थी। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में विधायक अनुभा को क्लीन चिट मिल गई है। हालांकि, इसे लेकर विभाग के अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। ‘नईदुनिया’ से चर्चा में विधायक ने कहा कि जांच रिपोर्ट में किसी ने भी मेरे द्वारा पैसे मांगने की बात की पुष्टि नहीं की है। ये भाजपा के इशारे पर किया गया कृत्य था। जांच रिपोर्ट में मुझ पर लगे आरोप झूठे साबित हुए हैं। मुझे विश्वास था कि सच सामने आएगा। झूठ का मुंह काला हो गया। 18 अगस्त को डीएफओ नेहा श्रीवास्तव की लिखित शिकायत पर वन विभाग ने दो सदस्यीय टीम गठित की थी। सूत्रों की मानें तो टीम ने जांच उपरांत अपनी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंप दी है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि डीएफओ नेहा की फारेस्ट रेस्टहाउस में विधायक द्वारा दो-तीन पेटी रकम मांगने की शिकायत की किसी भी गवाह ने पुष्टि नहीं की है। इसमें उन लाेगों के बयान लिए गए थे, जो रेस्टहाउस में तब मौजूद थे। क्लीन चिट मिलने के बाद एक बार फिर जिले में सियासी पारा चढ़ गया है।   ‘मेरी राजनीतिक छवि खराब की गई’ अनुभा ने कहा- ‘रेस्टहाउस में डीएफओ नेहा श्रीवास्तव से दो-तीन पेटी मांगने की शिकायत एक तरह से भाजपा के इशारे पर किया गया कृत्य था। इसके सूत्रधार पूर्व कैबिनेट मंत्री गौरीशंकर बिसेन और उनकी पुत्री मौसम हरिनखेड़े थीं। उन्होंने मेरी राजनीतिक छवि खराब करने की कोशिश की, लेकिन सच्चाई सबके सामने है। इससे साबित हो गया कि डीएफओ कितनी झूठी और फरेबी है। गौरीशंकर बिसेन ने पर्दे के पीछे से इसमें राजनीति की है। क्योंकि वह अपनी बेटी को राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं। मौसम हरिनखेड़े जरूर राजनीति करें, लेकिन वह किसी की लकीर मिटाकर अपनी लकीर बड़ी नहीं कर सकतीं। इस मामले से भाजपा ने आंबेडकर चौक पर मंच से मुझे और मेरे परिवार को कलंकित किया। व्यक्तिगत हमले किए गए। डीएफओ का आरोप मेरे परिवार को कलंकित करने वाला आरोप था। एक पल के लिए मैं भी विचलित हुई थी। मैंने अपने 30 साल की राजनीति में ऐसा घटनाक्रम पहले कभी नहीं देखा। क्लीन चिट मिलने से साजिशकर्ताओं के चेहरे पर करारा तमाचा है।' डीएफओ अधर गुप्ता पर आरोप तय, पत्नी नेहा को भी नोटिस बालाघाट के उत्तर व दक्षिण वनमंडल में पदस्थ डीएफओ पति-पत्नी अधर गुप्ता और नेहा श्रीवास्तव की मुश्लिकें बढ़ गई है। एक तरफ नेहा के आरोपों पर विधायक को क्लीन चिट मिल गई है, तो दूसरी तरफ नेहा से शासन ने एक मामले में सात दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। मामला वन सुरक्षा समिति लामता में एक टेंडर विवाद से जुड़ा है। इसकी शिकायत सुरक्षा समिति लामता के अध्यक्ष शत्रुघ्न असाटी ने की थी। डीएफओ नेहा ने शिकायतकर्ता को समिति के अध्यक्ष पद से हटाने का नोटिस जारी कर दिया। शासन ने इसे दुर्भावना से प्रेरित कार्रवाई माना। वहीं, नेहा के पति डीएफओ अधर गुप्ता पर बाघ की रहस्यमय मौत और बगैर प्रोटोकाल शव जलाने के मामले में आरोप तय हो गया है। सूत्रों के अनुसार, प्रशासनिक कार्यों, वन्य जीव संरक्षण और वित्तीय अनुशासन में लापरवाही बरतने पर शासन ने 170 से अधिक पत्रों आरोप पत्र जारी किया है। अधर पर लगे मुख्य आरोपों में लालबर्रा क्षेत्र में एक बाघ की संदिग्ध मौत व अवैध दाह संस्कार, प्रकरण के आरोपित वनपाल टीकाराम हनोते व वनरक्षक हिमांशु घोरमारे के फरार होने का मामला शामिल है।

MP में तनाव: पुतला फूंकने को लेकर दो गुट भिड़े, पथराव और मारपीट में तीन लोग जख्मी

दतिया हिन्दू समाज को एकजुट करने के लिए सनातन हिन्दू एकता पदयात्रा निकाल रहे पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का पुतला दहन करने को लेकर मध्य प्रदेश के दतिया जिले के इंदरगढ़ कस्बे में शनिवार शाम को बवाल हो गया। पुतला दहन को लेकर भीम आर्मी और हिंदू संगठनों के बीच पथराव और झड़पें हुईं। हालात को काबू करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। पुलिस ने वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया। झड़प में 3 लोग घायल हो गए हैं, जिन्हें इंदरगढ़ के अस्पताल में लाया गया है। कस्बे में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई है। बताया जाता है कि शनिवार को भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के लगभग 200 कार्यकर्ता ग्वालियर संभागीय अध्यक्ष केशव यादव के नेतृत्व में बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का पुतला दहन करने के लिए अंबेडकर पार्क से रैली निकाल रहे थे। यह जुलूस जब ग्वालियर चौराहे के पास पहुंचा तो तय जगह से करीब 25 फुट पहले कार्यकर्ताओं ने धीरेंद्र शास्त्री का पुतला फूंक दिया। पहले हुआ विवाद शांत कराया पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का पुतला दहन करने के दौरान वहां मौके पर मौजूद हिंदू संगठनों के 70 से 80 कार्यकर्ताओं ने विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने आजाद समाज पार्टी के नेता दामोदर यादव का पुतला जला दिया। इसी दौरान दोनों पक्षों में तू-तू, मैं-मैं शुरू हो गई। बवाल बढ़ता उससे पहले ही पुलिस ने फौरन ऐक्शन लेते हुए शुरुआत में ही दोनों पक्षों को शांत करा दिया। दोबारा झड़प फिर पथराव हालांकि पुलिस के समझाने के बाद भी तनाव कायम रहा। कुछ देर बाद भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता इंदरगढ़ थाने पहुंचे और धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदू संगठनों के सदस्यों ने जातिगत गालियां दीं और कार्यक्रम में बाधा डाली। बताया जाता है कि थाने से लौटते समय दोनों गुटों का फिर आमना सामना हो गया। देखते ही देखते दोनों तरफ से पथराव शुरू हो गया। इसमें कई वाहनों को नुकसान पहुंचा। झड़प में तीन लोगों के घायल होने की खबर है। इलाके में पुलिस फोर्स तैनात सनातन हिंदू संगठन के नगर अध्यक्ष शिरोमणि सिंह राठौर ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री जात पात मिटाने और सनातन एकता की बात करते हैं। हम संतों का पुतला नहीं जलाने देंगे। विरोध करना है तो नेताओं का करें। संतों का विरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके जवाब में कार्यकर्ताओं ने दामोदर यादव का पुतला जला दिया। पुलिस का कहना है कि हंगामा करने वाले दोनों संगठनों के कार्यकर्ताओं की पहचान कर ली गई है। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है। हर सूरत में शांति व्यवस्था कायम रखी जाएगी।

सुरक्षा पर सवाल! चौकी में घुसकर युवक को पीटा, नरसिंहपुर में पुलिस पर उठा भरोसे का संकट

नरसिंहपुर जिले के चीचली थाना क्षेत्र की गोटीटोरिया पुलिस चौकी के अंदर घुसकर एक युवक की पिटाई का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो शनिवार को सामने आया, जिसने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि हमलावर बेखौफ होकर चौकी के भीतर ही युवक को पीट रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पीड़ित युवक ओमप्रकाश चौधरी को कुछ लोगों ने पहले सरेराह घेरकर पीटा। अपनी जान बचाने के लिए वह किसी तरह भागकर गोटीटोरिया पुलिस चौकी के अंदर पहुंचा। लेकिन हमलावरों में कानून का तनिक भी डर नहीं था और उन्होंने उसका पीछा नहीं छोड़ा तथा चौकी के भीतर ही उस पर हमला कर दिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जिस समय यह गंभीर घटना हुई, उस दौरान चौकी में न तो चौकी प्रभारी मौजूद थे और न ही कोई अन्य पुलिसकर्मी। पुलिस चौकी के अंदर हुई यह घटना क्षेत्र की कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस की अनुपस्थिति पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है।   एसडीओपी ने पारिवारिक विवाद बताया गाडरवारा एसडीओपी रत्नेश मिश्रा ने इस संबंध में बताया कि यह पूरा मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा हुआ है। घटना शुक्रवार को हुई थी और पीड़ित ओमप्रकाश चौधरी ने चीचली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। एसडीओपी के अनुसार, पति-पत्नी के बीच हुए विवाद के बाद दोनों परिवारों में कहासुनी हुई, जो जल्द ही मारपीट में बदल गई। पुलिस ने इस प्रकरण में पांच आरोपियों मन्नू, पवन, जीवन, कमलू और राजकुमार चौधरी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। युवक को आई गंभीर चोटें घटना में युवक को गंभीर चोटें आई हैं, जिसके कारण उसे इलाज के लिए रेफर किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 126(2), 296 बी, 115(2), 351(3) और 305 बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है, लेकिन पुलिस चौकी के अंदर सुरक्षा भंग होने की इस घटना ने आम जनता के बीच भय का माहौल पैदा कर दिया है।

गीता जयंती पर प्रदेश में श्रीमद् भगवद् गीता का होगा सस्वर पाठ

ऑनलाइन प्रतियोगिता में इस वर्ष 70 पुरस्कार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गीता जयंती, अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के गरिमापूर्ण आयोजन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण की जाएं। ऑनलाइन श्रीमद् भगवद् गीता ज्ञान प्रतियोगिता में अधिकाधिक भागीदारी के प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसके लिए संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। ऑनलाइन श्रीमद् भगवद् गीता ज्ञान प्रतियोगिता मध्यप्रदेश के 70 वें स्थापना वर्ष में इस स्पर्धा में 70 पुरस्कारों का प्रावधान गीता ज्ञान स्पर्धा में किया गया है। पुरस्कार में प्रथम पुरस्कार एक लाख रूपए, द्वितीय पुरस्कार 51 हजार रूपए का रहेगा। इसके साथ ही 31 हजार रूपए के तीन तृतीय पुरस्कारों सहित 15 लैपटाप, 30 ई-बाइक और 20 ई-रिक्शा का वितरण भी किया जाएगा। श्रेष्ठ ज्ञान स्तर के लिए प्रतियोगिता में 11 से 25 वर्ष आयु के विद्यार्थियों को प्रोत्साहन स्वरूप 2 वर्ष तक शिक्षावृत्ति देने का प्रावधान भी किया गया है। प्रतियोगिता में नागरिकों, विद्यार्थियों के साथ ही प्रतियोगिता में कारावास के बंदी भी हिस्सा ले सकेंगे। यह ऑनलाइन प्रतियोगिता प्रदेश भर में शिक्षण संस्थानों के सहयोग से आयोजित की जा रही है। कुरूक्षेत्र में मध्यप्रदेश की कला होगी प्रदर्शित, व्यंजनों के स्टॉल सजेंगे 24 नवंबर से 1 दिसंबर की अवधि में कुरुक्षेत्र में हो रहे अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 में मध्यप्रदेश के आंचलिक और जनजातीय व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे। इसके साथ ही मध्यप्रदेश की जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी की ओर से प्रदर्शनी, मेले और नाट्य समारोह के आयोजन होंगे। नाट्य समारोह में श्री पुनीत इस्सर और श्री मोहित शेवानी मुंबई, श्री शिरीष राजपुरोहित उज्जैन के कार्यक्रम होंगे। जनजातीय संग्रहालय के सौजन्य से जनजातीय नृत्यों की प्रस्तुति भी होगी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने श्रीकृष्ण पाथेय न्यास, महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ, वीर भारत न्यास सहित उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा, गृह, जनसंपर्क, संस्कृति संचालनालय, कृषि उद्योग विकास परिषद नई दिल्ली, इस्कॉन, गीता परिवार और विश्व गीता प्रतिष्ठानम की भागीदारी के संबंध में भी अधिकारियों से चर्चा कर निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरों में गीता भवन और विभिन्न चिन्हित स्थानों पर श्रीकृष्ण पाथेय से संबंधित कार्यों को भी पूर्ण करने को कहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग और रोजगार वर्ष 2025 के समापन अवसर पर विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के साथ स्कूल विद्यार्थियों को जोड़कर एक अभिनव कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उज्जैन में 1 से 3 दिसंबर तक अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव गीता महोत्सव में ऑनलाइन श्रीमद् भागवत गीता ज्ञान प्रतियोगिता के पुरस्कृत प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इस वर्ष प्रतियोगिता में 21 लाख नागरिकों की विशाल भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 1 दिसम्बर को दशहरा मैदान उज्जैन में गीता पाठ और प्रदर्शनी सहित सांगीतिक प्रस्तुति होगी। दूसरे दिन काव्य पाठ और सांगीतिक प्रस्तुति और तीसरे दिन बैंगलोर एवं भोपाल के संगीत दल प्रस्तुति देंगे। श्रीमद् भगवद् गीता का सस्वर पाठ भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के अंतर्गत 1 दिसम्बर को लाल परेड ग्राउण्ड पर आचार्यों की सन्निधि में श्रीमद् भगवद् गीता के 15वें अध्याय का सस्वर पाठ होगा। इसके साथ ही गौ और गोपाल पर आधारित प्रदर्शनी और बैंगलोर के दल द्वारा गीता ऑन व्हील्स सांगीतिक प्रस्तुति होगी। दो दिसम्बर को रवीन्द्र भवन भोपाल के हंसध्वनि सभागार में कृष्णायन की प्रस्तुति के साथ दिव्यांग कलाकार भी कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। जिला स्तर पर कार्यक्रमों का स्वरूप 1 दिसम्बर को प्रदेश के विकासखंडों में गीता पाठ होंगे। जिला मुख्यालय पर भी आचार्यों की सन्निधि में सस्वर पाठ होंगे। भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े विशेष स्थलों जैसे इंदौर जिले के जानापाव, धार जिले के अमझेरा, उज्जैन जिले के नारायणा, अशोकनगर जिले के चंदेरी, रायसेन जिले के जामगढ़, देवास जिले के पीवडिया-खातेगांव, सागर जिले के प्राचीन नगर एरण और पन्ना जिले में भी विशेष कार्यक्रम होंगे। गीता जयंती पर श्रीकृष्ण मंदिरों की विशेष सज्जा की जाएगी। जिला स्तर पर संतों और विद्वतजनों के व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे। संस्कृति विभाग द्वारा इन सभी कार्यक्रमों की तैयारियां की जा रही है।  

कुटीर उद्योगों की स्थापना एवं स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन से रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

एक जिला-एक उत्पाद और निर्यात प्रोत्साहन कार्यशाला में हुए शामिल रीवा शहर में बनेगा हाट बाजार भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि कुटीर उद्योगों की अधिक से अधिक स्थापना एवं स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित कर रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। स्थानीय उद्यमियों को उनके द्वारा बनाए जाने वाले उत्पादों की बाजार उपलब्धता से उनकी आर्थिक समृद्धि भी बढ़ेगी। उप मुख्यमंत्री एक जिला-एक उत्पाद और निर्यात प्रोत्साहन कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आर्थिक समृद्धि शिक्षा स्वास्थ्य और स्वरोजगार पर निर्भर रहती है। हमारा देश तेजी से आत्मनिर्भर बनकर आर्थिक तौर पर समृद्ध हुआ है। स्व सहायता समूहों एवं स्थानीय कारीगरों को प्रशिक्षण देकर बनाए जा रहे उत्पादों को उच्च गुणवत्ता का बनाने में मदद करने की जिम्मेदारी एमपीआईडीसी की है जिससे प्रशिक्षित होकर कारीगर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद निर्मित कर सकें और उनका बाजार में अच्छा मूल्य मिले। उप मुख्यमंत्री ने एमपीआईडीसी के अधिकारियों की इस बात के लिए सराहना की कि उन्होंने बैम्बो लेडी ऑफ इंडिया के नाम से प्रसिद्ध नीरामोई शर्मा को असम से रीवा कार्यशाला में आमंत्रित किया। उनकी प्रशिक्षण संबंधी जानकारी से स्थानीय बांस बनाने वाले कारीगर व अन्य उद्यमी लाभ ले सकेंगे। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि रीवा में व्यंकट भवन के पास शीघ्र ही हाट बाजार का निर्माण कराया जाएगा, जहाँ स्थानीय उत्पादक अपने उत्पादों को बिक्री के लिए प्रदर्शित कर सकेंगे। उन्होंने अपेक्षा की कि एक जिला-एक उत्पाद के साथ ही स्थानीय उद्यमों के कुटीर उद्योग के जाल बिछें और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इससे जुड़कर लाभान्वित हो सकें। असम की बैम्बो ऑफ लेडी नीरामोई शर्मा ने बांस से बनाए गए गहनों सहित अन्य उत्पादों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बांस की निर्मित वस्तुओं में कम बांस के उपयोग से अधिक आय प्राप्त हो सकती है। उन्होंने स्थानीय लोगों से अपेक्षा की कि बांस लगाकर इससे लाभ प्राप्त करें और प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करें। उन्होंने कहा कि बांस कम समय में उत्पादित हो जाता है और उससे आक्सीजन भी पर्याप्त मात्रा में मिलती है। कार्यशाला में वन मण्डलाधिकारी श्री लोकेश नागपुरे ने बताया कि आने वाले वर्ष में जिले में बांस की प्रचुर मात्रा में कटाई की जाएगी जिससे यहाँ पर्याप्त संख्या में इसकी उपलब्धता रहेगी। उन्होंने बताया कि गत वर्षों में 175 किसानों ने 2 लाख 64 हजार बांस अपने खेतों व अन्य जमीनों में लगाए हैं जिसके लिए उन्हें शासन द्वारा सब्सिडी भी दी गई है। एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक श्री यूके तिवारी ने बताया कि लोकल टू ग्लोबल के उद्देश्य से स्थानीय उत्पाद एवं एक जिला-एक उत्पाद को देश और विदेश में पहचान दिलाने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया है। स्थानीय कारीगरों को उत्पाद के लिए प्रशिक्षित करने और उनको बाजार उपलब्ध कराकर समृद्धशाली बनाने में कार्यशाला उपयोगी सिद्ध होगी। कार्यशाला में महाप्रबंधक उद्योग श्री जेपी तिवारी, अग्रणी जिला प्रबंधक श्री जगमोहन, वूमन इंटरप्रेन्योर श्रीमती चेतना मिश्रा, स्टार्टअप प्रतिनिधि सुश्री संजना सिंह, एमपीआईडीसी भोपाल की प्रतिनिधि सुश्री शैलजा सोनी सहित युवा उद्यमियों ने अपने विचार व्यक्त किए। दिल्ली से वालमार्ट के प्रतिनिधि श्री नीत नेगी ने वालमार्ट से जुड़कर बाजार उपलब्धता के संबंध में जानकारी दी। कार्यशाला में श्री कमल सचदेवा, श्री दिलीप सिंह, श्री राजगोपाल मिश्र चारी, श्री विवेक दुबे सहित उद्यमी, महिला उद्यमी व स्थानीयजन उपस्थित रहे।  

डिजिटल उपस्थिति में बड़ा उलटफेर: छोटे शहर ने इंदौर-भोपाल को पछाड़ा

जबलपुर नगरीय निकायों के अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति की निगरानी सुनिश्चित करने एवं कार्यप्रणाली में पारदर्शी लाने के उद्देश्य से लागू की गई ई-अटेंडेंस में जबलपुर नगर निगम आगे हैं। इंदौर-भोपाल जैसे शहरों के मुकाबले फेस रिकॉग्निशन (चेहरे की पहचान) के आधार पर जबलपुर नगर निगम के लगभग 62 प्रतिशत अधिकारी-कर्मचारी हाजिरी लगाने लगे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो जबलपुर नगर निगम में 8 हजार 782 नियमित, संविदा के अलावा चार हजार से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी पंजीकृत है, जिसमें लगभग 5 हजार 400 अधिकारी-कर्मचारी ई-अटेंडेंस लगा रहे हैं। हालांकि इनमें अब भी शत प्रतिशत ई-अटेंडेंस नही लग रही है, जबकि इंदौर नगर निगम में 25 हजार 445 में से लगभग 13 हजार 600 ही ई-अटेंडेंस लगा रहे हैं। हालांकि यहां भी आउटसोर्स कर्मियों का आंकड़ा ज्यादा है। वहीं भोपाल में 19 हजार 996 पंजीकृत अधिकारी, कर्मचारियों में से लगभग 12 हजार 500 ही ई-अटेंडेंस लगवा रहे हैं।   फिलहाल इन आंकड़ों पर यकीन करें तो संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास से जारी आदेश में जबलपुर नगर निगम ई-अटेंडेंस प्रक्रिया को अपनाने में आगे नजर आ रहा हैं। विदित हो कि नगरीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों की उपस्थिति केवल फेस रिकॉग्निशन (चेहरे की पहचान) के आधार पर ही मान्य होगी। नवंबर माह का वेतन भी ई-अटेंडेंस के आधार पर देय होगा। प्रशिक्षण, समझाइश, लगातार निगरानी से बढ़े आंकड़े -शासन स्तर पर प्रदेश भर के नगरीय निकायों में अनिवार्य किए गए ई-अटेंडेंस लगवाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी है। – ई-अटेंडेंस फेस रिकग्निशन यानि चेहरा पहचान बायोमेट्रिक तकनीक से स्मार्ट फोन के माध्यम से अटेंडेंस लगाने से पहले कर्मचारियों की उपस्थिति को जियो स्पेशल लोकेशन से जोड़ा गया है ताकि उनकी उपस्थित कार्यालय पहुंचकर या संबंधित बीट के दायरे पर आने पर ही दर्ज हो। – निगम नगर निगम मुख्यालय सहित सभी 16 जोन कार्यालय के नियमित, संविदा अधिकारी-कर्मचारियों के साथ ही ठेकेदार व उनके कर्मचारियों को मोबाइल के माध्यम से ई-अटेंडेंस लगाने का प्रशिक्षण दिया गया। बताया गया कि ई-अटेंडेंस के लिए अपने कार्यालय के परिसर के दायरे से ही लगाना होगा। – स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और ठेकेदारों को सुबह-सुबह बीटवार सफाई कर्मचारियों को स्मार्ट फोन के माध्यम से अपनी-अपनी उपस्थिति सुनिश्चित कराने पर जोर दिया गया। निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार लगातार बैठकें कर समीक्षा कर रहें। ई अटेंडेंस के नोडल अधिकारी, सहायक नोडल भी ई-अटेंडेंस की निगरानी कर रहे। जिन कर्मचारियों की ई-अटेंडेंस आधार कार्ड या अन्य तकनीकी कारणों से नही लग रही उसका भी निदान करवाते हुए अटेंडेंस सुनिश्चित करवा रहे हैं। फर्जीवाड़ा भी आएगा सामने बहरहाल फेस रिकाग्निशन (चेहरे की पहचान) अाधारित ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता के बाद उन कर्मचारियों का पता चलेगा जो कागजाें में तो दर्ज हैं, परंतु कार्यालय नही आते। खासतौर से आउट सोर्स के नाम पर किए जा रहा फर्जी भुगतान पर रोक लगेगी। क्योंकि विभागीय अधिकारियों की सांठगाव से ये खेल हो रहा है। सफाई के नाम पर वार्डों में 40-40 सफाई कर्मचारी भेजने का दावा कर भुगतान तो ले लेते हैं परंतु वास्तव में आधे कर्मचारी भी वार्डों में नहीं भेज रहे हैं। निरीक्षण के दौरान इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। जिसमें वार्ड स्तर पर सुपरवाइजर के साथ मिलकर ऐसे दो उपस्थिति रजिस्टर बनाए गए थे जिनमें से एक में मौजूद सफाई कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति और दूसरे में फर्जी उपस्थिति दर्ज पाई गई। ठेकेदारों पर जुर्माना भी लगाया गया था।