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रिटायर्ड डीएसपी सहित तीन लोगों के खिलाफ सतना में बिजली चोरी की कार्रवाई

 सतना सतना जिले के बिरसिंहपुर विद्युत वितरण केन्द्र के अंतर्गत आने वाले गुझवां गांव में शुक्रवार को विद्युत विभाग के जेई सुनील मिश्रा के नेतृत्व में विषुत विभाग की जांच टीम ने छापा मारते हुए सेवानिवृत्त डीएसपी समेत दो अन्य पर विद्युत चोरी का मामला दर्ज किया है। इस बड़ी कार्रवाई से पूरे गांव में हलचल मचा दी है और अन्य लोगों में भी विद्युत चोरी को लेकर दशहत का माहौल है। विद्युत विभाग की टीम के मुताबिक रिटायर्ड डीएसपी रामकीर्ति शुक्ला के परिसर में अवैध रूप से 'कटिया फांस' कर बिजली का उपयोग किया जा रहा था। इस मामले में बिजली चोरी का एक प्रकरण दर्ज किया गया है। इसी अभियान के तहत, गुझवा गांव के गुलाब गुप्ता के खिलाफ भी बिजली चोरी का एक अन्य प्रकरण दर्ज किया गया है। विद्युत वितरण केंद्र ने इन दोनों ही मामलों में वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। जेई सुनील मिश्रा ने बताया कि बिजली चोरी रोकने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

लालघाटी चौराहे पर भीखमंगाई पर कड़ा अभियान, भोपाल प्रशासन का सख्त कदम

भोपाल राजधानी को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन पिछले 10 महीनों से प्रयासरत है। साल की शुरुआत में अभियान चलाकर भिक्षुकों को समझाया गया था और कईयों को सुधार गृह तक भेजा गया था। कुछ मामलों में एफआइआर भी दर्ज हुई थी, लेकिन वक्त के साथ अभियान धीमा पड़ गया। नतीजा यह हुआ कि शहर के चौक-चौराहों, धार्मिक स्थलों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भिक्षुकों की संख्या फिर से बढ़ गई। इसी को देखते हुए प्रशासन ने भिक्षावृत्ति रोकने के लिए सात टीमों का गठन किया है। प्रत्येक टीम की जिम्मेदारी एसडीएम को दी गई है। शुक्रवार को संत हिरदाराम नगर क्षेत्र की टीम ने लालघाटी चौराहे पर निरीक्षण किया। टीम ने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को समझाया कि वे भीख न मांगें और अपने घर लौट जाएँ। चेतावनी दी गई कि यदि दोबारा भीख मांगते पकड़े गए तो कार्रवाई की जाएगी। छह घंटे चला अभियान तहसीलदार हर्ष विक्रम सिंह के नेतृत्व में सुबह 10 बजे शुरू हुआ अभियान शाम चार बजे तक चला। नगर निगम सहायक प्रभारी उद्यान अवध नारायण मकोरिया की अगुवाई में टीम लालघाटी चौराहे पर पहुंची। टीम को देखकर कई भिक्षुक भाग निकले, लेकिन कुछ वहीं लौटकर वाहन चालकों से पैसे मांगने लगे। टीम ने जब आधार कार्ड देखे तो पाया कि अधिकांश भिक्षुक राजस्थान और महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। उन्हें समझाया गया कि भोपाल में भिक्षावृत्ति पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसलिए वे अपने गृह राज्य लौट जाएँ। मासूम बच्चों के साथ मिली महिला निरीक्षण के दौरान लालघाटी फ्लाईओवर के नीचे एक महिला अपने छोटे बच्चों के साथ बैठी मिली। पूछताछ में उसने बताया कि वह महाराष्ट्र की रहने वाली है और इलाज के लिए भोपाल आई है। उसके पति यहां मजदूरी कर रहे हैं। टीम ने उसे भी चेतावनी दी कि सड़क पर बैठकर भिक्षा न मांगे। नहीं माने तो होगी एफआईआर हुई बैठक में निर्णय लिया गया है कि यदि भिक्षुक समझाईश के बाद भी नहीं मानते और भीख मांगते पाए जाते हैं तो लेने और देने वाले दोनों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके बाद भिक्षुकों को सुधार गृह भेजकर स्वजनों से संपर्क कर सौंपा जाएगा। नोडल अधिकारी और जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी ने बताया कि शहर को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए सभी एसडीएम के नेतृत्व में टीमें गठित की गई हैं। अभी भिक्षुकों को समझाया जा रहा है, लेकिन आगे सड़क से हटाकर सुधार गृह भेजने और एफआइआर दर्ज करने की कार्रवाई होगी।

तीन युवकों की दर्दनाक मौत: उज्जैन में कार और डंपर की भयानक टक्कर

उज्जैन  आगर रोड पर घट्टिया के ग्राम जैथल के पास कार और डंपर की आपस में आमने-सामने भिड़ंत हो गई। भिड़ंत इतनी खतरनाक थी कि कार का अगला हिस्सा चकनाचूर हो गया। घटना में कार में सवार चार में तीन युवकों की मौत हो गई। एक की हालत गंभीर है। युवक बड़नगर और उज्जैन के रहने वाले हैं और नलखेड़ा में बगलामुखी माता मंदिर के दर्शन कर वापस लौट रहे थे। बड़नगर के इंगोरिया निवासी आदित्य पंड्या उम्र 22 वर्ष, अभय पंडित उम्र 20 वर्ष, उज्जैन के राजेश रावल उम्र 50 वर्ष व शैलेन्द्र आचार्य उम्र 20 वर्ष नलखेड़ा में दर्शन कर पुन: उज्जैन लौट रहे थे। जैथल के पास रात को 12.30 बजे गलत दिशा से आ रहे डंपर से कार की टक्कर हो गई। डंपर अलिसा फूड कंपनी का बताया जा रहा है। टक्कर में आदित्य पंड्या, अभय पंडित, राजेश रावल की मौत हो गई। शैलेंद्र आचार्य को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। डंपर चालक फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को अस्पताल पहुंचाया। कार में मृत युवकों को ग्रामीणों से मदद से बाहर निकाला गया। सूचना मिलने पर विधायक सतीश मालवीय मौके पर पहुंचे।

महालक्ष्मी मंदिर की अनोखी भव्यता: 5 दिन तिजोरियों और नोट-आभूषणों से सजा रहेगा मंदिर

रतलाम  रतलाम में मां महालक्ष्मी का मंदिर सज चुका है। सजावट फूलों से नहीं, हीरे, जवाहरात और नोटों से हुई है। मंदिर की हर लड़ में नोट लगे हैं। किसी में 10 तो किसी में 500 रुपए नजर आ रहे हैं।इस अद्भुत सज्जा के लिए भक्तों ने अपनी तिजोरी खोल दी है। मंदिर में अर्पित नकदी-आभूषण को दीपोत्सव के पांच दिन के बाद प्रसादी के रूप में भक्तों को समिति वापस लौटाएगी। मंदिर की सजाने की सालों पुरानी परंपरा के तहत इस साल 2 करोड़ रुपए से मंदिर को सजाया गया है। आज तक यहां से एक रुपया इधर से उधर नहीं हुआ है। धन राशि देने वालों में रतलाम के अलावा प्रदेश समेत अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। दीपोत्सव के पहले दिन यानी आज धनतेरस से मंदिर की सजावट को भक्त निहार सकते हैं। संभवत: यह देश का पहला ऐसा मंदिर है, जो पांच दिनों तक भक्तों द्वारा अर्पित आभूषण और नोटों से सजा रहता है पहले जानिए आखिर यह परंपरा शुरू कैसे हुई…? मंदिर में पूजा कराने वाले अश्विनी पुजारी बताते हैं कि करीब 300 साल पुराना महालक्ष्मी जी का यह मंदिर रियासतकालीन है। रतलाम के महाराजा रतन सिंह राठौर ने जब रतलाम शहर बसाया, तब से यहां दीपावली धूमधाम से मनाई जाने लगी। राजा वैभव, निरोगी काया और प्रजा की खुशहाली के लिए पांच दिन तक अपनी संपदा मंदिर में रखकर आराधना कराते थे। इसके लिए महाराजा शाही खजाने के सोने-चांदी के आभूषण मां लक्ष्मी जी के श्रृंगार के लिए चढ़ाते थे, तभी से ये परंपरा चली आ रही है। धीरे-धीरे व्यवस्था बदलती गई और भक्त मंदिर के लिए चढ़ावा लेकर आने लगे। पिछले कई सालों से मंदिर की सजावट नोट और आभूषणों से की जा रही है। श्रद्धालु अपनी स्वेच्छा से मंदिर की सजावट के लिए अपनी तिजोरी खोलते हैं। अभी यह मंदिर सरकारी होकर कोर्ट ऑफ वार्डस में आता है। प्रशासन भी सजावट को लेकर पूरी निगरानी रखता है। मंदिर में आखिर क्या है खास… मंदिर के गर्भगृह में महालक्ष्मी की मूर्ति के साथ ही गणेश जी व सरस्वती मां की भी मूर्ति स्थापित है। लक्ष्मी की मूर्ति के हाथ में धन की थैली रखी है, जो वैभव का प्रतीक है। साथ मंदिर में महालक्ष्मी 8 रूप में विराजमान हैं। जिनमें अधी लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, लक्ष्मीनारायण, धन लक्ष्मी, विजयालक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी और ऐश्वर्य लक्ष्मी मां विराजमान हैं। पुजारी बताते हैं कि दीपावली पर्व हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है। दीपावली धन, वैभव का त्योहार है, जहां पर विष्णु भगवान के हाथों में महालक्ष्मी विराजमान हैं। सभी भक्त चाहते थे कि माताजी का वास्तविक स्वरूप, जो पुराणों, वेदों में दिखाया जाता है। यानी माता धन बरसा कर रही हैं, भक्त यहां आकर उसी रूप की अनुभूति करते हैं। मान्यता है कि जिस व्यक्ति का धन महालक्ष्मी के श्रृंगार में इस्तेमाल होता है, उसके घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। अब जान लीजिए मंदिर की सजावट होती कैसे है… दीपावली के एक सप्ताह पहले से सजावट महालक्ष्मी मंदिर में हर साल दीपावली के एक सप्ताह पहले से सजावट की तैयारी शुरू हो जाती है। शरद पूर्णिमा से ही यहां रुपए और गहने पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। मंदिर को 1 रुपए से लेकर 20, 50, 100 और 500 रुपए के नए नोटों से सजाया जाता है। इस बार सजावट के लिए रतलाम, झाबुआ, मंदसौर, नीमच के अलावा गुजरात, राजस्थान के भक्त ने श्रद्धानुसार राशि जमा कराई है। कई भक्त तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने एक साथ 5 लाख रुपए तक मंदिर काे दिए हैं। श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले नोटों से मंदिर के लिए वंदनवार बनाया जाता है। महालक्ष्मी का आकर्षक श्रृंगार कर गर्भगृह को खजाने के रूप में सजाया जाता है। मंदिर परिसर कुबेर के खजाने के रूप में दिखाई देता है। कई भक्त अपने घरों की तिजोरी तक मंदिर में सजावट के लिए रख जाते हैं। मंदिर की सजावट के लिए एक हजार श्रद्धालुओं ने धनराशि दी है। एक रुपए का भी हेरफेर नहीं, इसलिए यह व्यवस्था मंदिर की सजावट के लिए जो भक्त श्रद्धानुसार धन राशि, आभूषण सजावट के लिए देते हैं, उनकी बाकायदा एंट्री होती है। इस बार इसमें बदलाव कर डिजिटलाइजेशन कर दिया गया। नोट गिनने की मशीन का भी इस्तेमाल किया गया है। ऑनलाइन एंट्री में नकदी व आभूषण देने वाले भक्तों का नाम, पता, पासपोर्ट फोटो और मोबाइल नंबर के साथ क्या धन राशि या आभूषण दी, उसकी डिटेल लिखी गई।ऑनलाइन टोकन पर महालक्ष्मी मंदिर की सील लगाई जाती है। साथ ही रजिस्टर में भी एंट्री की जाती है। दीपोत्सव के पांचवें दिन टोकन देखकर भक्तों को उनके द्वारा दी गई धन-राशि प्रसादी के रूप में लौटा दी जाती है। मंदिर परिसर में बंदूकधारी गार्ड तैनात मंदिर में रुपए आने का सिलसिला शुरू होते ही बंदूकधारी गार्ड भी तैनात कर दिए जाते हैं। महालक्ष्मी मंदिर में सजने वाले कुबेर के खजाने की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए हैं। मंदिर के पीछे ही माणक चौक पुलिस थाना है, जहां 24 घंटे फोर्स तैनात रहती है।

दिवाली तक मौसम का मिजाज, इंदौर में बारिश और भोपाल-ग्वालियर में धूप खिली रहेगी

भोपाल  मध्यप्रदेश में मौसम ने मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। शनिवार को इंदौर संभाग के चार जिलों बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में बादल छाए रहेंगे और कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। वहीं भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर समेत अधिकतर जिलों में मौसम साफ और धूप वाला रहने का अनुमान है। अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सिय मौसम विभाग की मानें तो हवा की दिशा में बदलाव के चलते रात के तापमान में वृद्धि देखी जा रही है। बीते दो रातों में अधिकांश शहरों का न्यूनतम तापमान 20 डिग्री के ऊपर रहा। छतरपुर के नौगांव को छोड़ दें तो बाकी जगहों पर ठंड कम महसूस हुई। दिन में भी गर्मी का असर नजर आया इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और खजुराहो में अधिकतम तापमान 33 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, शनिवार को दक्षिणी जिलों में हल्की बारिश की संभावना है, लेकिन रविवार और सोमवार को प्रदेशभर में मौसम साफ रहेगा। इन दिनों बारिश की कोई चेतावनी नहीं है। दिवाली के बाद बढ़ेगी ठंड, फरवरी तक रहेगा असर मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि नवंबर से जनवरी तक प्रदेश में तेज सर्दी का दौर रहेगा। इस बार फरवरी तक ठंड का असर बना रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सर्दी 2010 के बाद की सबसे ठंडी सर्दी हो सकती है। उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों के चलते सामान्य से अधिक वर्षा भी देखने को मिल सकती है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी ला-नीना स्थितियों के विकसित होने की पुष्टि की है, जिससे ठंड और अधिक तीव्र हो सकती है। विदा हुआ मानसून प्रदेश से अब पूरी तरह मानसून विदा हो चुका है। इस बार मानसून 16 जून को पहुंचा था और 13 अक्टूबर को विदाई हुई। कुल 3 महीने 28 दिन तक मानसून सक्रिय रहा। हालांकि मानसून विदा होने के बावजूद कुछ स्थानों पर बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी। इस बार मानसून में अच्छी बारिश राज्य में इस बार मानसून ने अच्छी बारिश दी। भोपाल, ग्वालियर समेत 30 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई। सबसे ज्यादा बारिश गुना जिले में हुई, जहां कुल 65.7 इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं श्योपुर में 216.3% बारिश हुई, जो सामान्य से कहीं अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार की बारिश ने पीने के पानी और सिंचाई दोनों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की है। हालांकि, शाजापुर ऐसा जिला रहा, जहां सबसे कम बारिश (81.1%) दर्ज की गई, जो  कमी की श्रेणी में आता है। भोपाल, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग के कुछ जिलों में बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका, लेकिन उज्जैन, बैतूल और सीहोर जैसे जिलों में बारिश सामान्य के करीब रही।  

मध्यप्रदेश में बड़ी बदलाव की शुरुआत: पेपर स्टाम्प बंद, ई-स्टाम्प से हर साल बचेगा करोड़ों का खर्च

भोपाल  मध्य प्रदेश में 126 साल पुरानी मैनुअल स्टाम्प व्यवस्था अब बंद होने जा रही है. जैसे कभी टेलीग्राम और मनीऑर्डर बंद हुए थे, वैसे ही अब मैनुअल स्टाम्प पूरी तरह खत्म किए जा रहे हैं. सरकार अब सिर्फ ई-स्टाम्प जारी करेगी. नई व्यवस्था कुछ महीनों में लागू होने जा रही है. इससे सरकार को हर साल करीब 34 करोड़ रुपए की बचत होगी, जो अब तक स्टाम्प की छपाई, ढुलाई और सुरक्षा पर खर्च होते थे. बता दें कि 100 रुपए से ज्यादा वाले मैनुअल स्टाम्प तो साल 2015 में ही बंद किए जा चुके हैं. अभी तक 100 रुपए से नीचे वाले स्टाम्प की छपाई नीमच और हैदराबाद प्रेस में की जाती है, फिर इन्हें सुरक्षा इंतजामों के साथ अलग-अलग जिलों में भेजा जाता है. ई-स्टाम्प लागू होने के बाद ये परेशानी खत्म हो जाएगी. ई-स्टाम्प सिस्टम से ये भी ट्रैक किया जा सकेगा कि किसने, कब और कितने मूल्य का स्टाम्प खरीदा है. इससे फर्जीवाड़े और दोहरी बिक्री जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगेगी. मैनुअल स्टाम्प बंद करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है. जल्द मैनुअल स्टाम्प बंद होगा किरायानामा से लेकर एफिडेविट तक लोगों को रोजमर्रा के कामों में स्टाम्प की जरूरत पड़ती है. किरायानामा, एफिडेविट, पॉवर ऑफ अटॉर्नी और सेल एग्रीमेंट जैसे दस्तावेजों के लिए अब लोगों को लंबी लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा. बैंक या अधिकृत केंद्र से आसानी से ई-स्टाम्प खरीदा जा सकेगा. इसके अलावा अब कोई भी व्यक्ति घर बैठे ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर खुद भी ई-स्टाम्प जनरेट कर सकेगा. इससे आम लोगों का समय और पैसा दोनों बचेंगे. डेटा रीयल टाइम में उपलब्ध  राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ई-स्टाम्प सिस्टम से पारदर्शिता और राजस्व संग्रहण दोनों में सुधार होगा. अब हर ट्रांजेक्शन का डेटा रीयल टाइम में उपलब्ध रहेगा. खास बात यह है कि मध्य प्रदेश देश का इकलौता राज्य है जो अपने खुद के सॉफ्टवेयर से ई-स्टाम्प जारी करता है. बाकी राज्यों में यह काम थर्ड पार्टी एजेंसी "स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया" करती है, एमपी में पैसा सीधे राज्य सरकार के खजाने में जाता है, जबकि बाकी राज्यों में पहले एजेंसी के पास जमा होकर फिर सरकार तक पहुंचता है.  डिजिटल स्टाम्प के लाभ और खर्च में कमी डिजिटल स्टाम्प के चलन में आने से हर साल स्टाम्प पेपर की प्रिंटिंग और उसे वेंडर्स तक पहुंचाने पर होने वाले खर्च में बचत होगी। वर्तमान में, इस प्रक्रिया पर लगभग 30 से 35 करोड़ रुपए का खर्च आता है। कागजी स्टाम्प की समाप्ति के बाद, यह खर्च बच जाएगा और राज्य के वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। पंजीकरण विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, जैसे ही राज्य सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देगी, कागजी स्टाम्प पेपर का प्रचलन समाप्त हो जाएगा। इसके बाद, केवल डिजिटल स्टाम्प का ही उपयोग किया जाएगा, जो एक नई तकनीकी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कदम न केवल पारदर्शिता लाएगा, बल्कि स्टाम्प के दुरुपयोग को भी कम करेगा। इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्पिंग सिस्टम (ESS) का प्रभाव मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्पिंग सिस्टम (ESS) की शुरुआत जुलाई 2013 में हुई थी। इस प्रणाली के माध्यम से, स्टाम्प पेपर को अधिकृत वेंडर के जरिए ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। ईएसएस के जरिए न केवल स्टाम्प की खरीद प्रक्रिया सरल होती है, बल्कि इसकी ट्रैकिंग भी आसान होती है। इससे स्टाम्प के दुरुपयोग की संभावना कम हो जाती है और लेनदेन की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित होती है। ई-स्टाम्प कैसे खरीदें: एक सरल प्रक्रिया डिजिटल स्टाम्प खरीदने के लिए, उपयोगकर्ताओं को निम्नलिखित सरल चरणों का पालन करना होगा:     मध्य प्रदेश के ई-स्टाम्पिंग पोर्टल या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जाएं।     आवश्यक दस्तावेज श्रेणी (जैसे बिक्री विलेख, किराया समझौता) चुनें और लेनदेन का विवरण भरें।     नेट बैंकिंग, यूपीआई या कार्ड जैसे ऑनलाइन तरीकों से भुगतान करें।     सफल भुगतान के बाद, आपको तुरंत एक डिजिटल स्टाम्प प्रमाण पत्र प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त, यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन प्रक्रिया में संकोच करता है, तो वह अपने शहर में किसी अधिकृत ई-स्टाम्प वेंडर से भी स्टाम्प खरीद सकता है। स्टाम्प का दुरूपयोग और ट्रेकिंग आसान होगी एमपी में इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्पिंग सिस्टम (ESS) जुलाई 2013 में शुरू हुई थी। इस सिस्टम में स्टाम्प पेपर को अधिकृत वेंडर के जरिए ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। ईएसएस के जरिए स्टाम्प की ट्रेकिंग आसान होती है। ऑनलाइन ऐसे खरीद सकते हैं ई-स्टाम्प     मध्य प्रदेश के ई-स्टाम्पिंग पोर्टल या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जाएं।     आवश्यक दस्तावेज श्रेणी (जैसे बिक्री विलेख, किराया समझौता) चुनें और लेनदेन का विवरण भरें।     नेट बैंकिंग, यूपीआई या कार्ड जैसे ऑनलाइन तरीकों से भुगतान करें।     सफल भुगतान के बाद आपको तुरंत डिजिटल स्टाम्प प्रमाण पत्र मिल जाएगा। अधिकृत वेंडर से भी ले सकते हैं     अपने शहर में किसी अधिकृत ई-स्टाम्प वेंडर से भी खरीद सकते हैं।     स्टाम्प वेंडर जरूरी स्टाम्प शुल्क और प्रक्रिया के लिए मार्गदर्शन करेंगे।     जरूरी विवरण देने के बाद, आप भुगतान कर सकते हैं और स्टाम्प वेंडर से डिजिटल स्टाम्प प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं। अधिकृत वेंडर से खरीदने की प्रक्रिया अधिकृत वेंडर से स्टाम्प खरीदने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:     अपने शहर में किसी अधिकृत ई-स्टाम्प वेंडर से संपर्क करें।     स्टाम्प वेंडर आपको आवश्यक स्टाम्प शुल्क और प्रक्रिया के बारे में मार्गदर्शन करेगा।     जरूरी विवरण देने के बाद, आप भुगतान कर सकते हैं और स्टाम्प वेंडर से डिजिटल स्टाम्प प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। इस नई प्रणाली के माध्यम से, मध्य प्रदेश सरकार ने न केवल दस्तावेजों की प्रक्रिया को सरल बनाया है, बल्कि पारदर्शिता को भी बढ़ावा दिया है। डिजिटल स्टाम्प के माध्यम से, नागरिकों को एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका उपलब्ध होगा, जिससे उन्हें अपने लेनदेन में आसानी होगी। इस परिवर्तन के साथ, मध्य प्रदेश अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जिसमें तकनीकी प्रगति और पारदर्शिता को महत्व दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में, उम्मीद की जा रही है कि यह प्रणाली अन्य क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीडियो कॉल पर जानी कुमारी संस्कृति की कुशलक्षेम, इलाज के बाद इंदौर वापसी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुमारी संस्कृति से वीसी से की बात, इलाज के बाद स्वस्थ होकर इंदौर लौटी सड़क हादसे में घायल हुई थी संस्कृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ईलाज के लिये संस्कृति को एयर एम्बुलेंस से भेजा था मुंबई संस्कृति और उसके दादा-दादी ने मुख्यमंत्री को दिया धन्यवाद मुख्यमंत्री ने कहा – संस्कृति से इंदौर मिलने आयेंगे भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास से इंदौर की कुमारी संस्कृति वर्मा से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बात कर उसके स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने संस्कृति को स्वस्थ होकर लौटने पर बधाई देते हुए कहा कि तुम्हारे चेहरे की मुस्कान से तो हमारी दीपावली आज ही मन गई। मुख्यमंत्री ने संस्कृति से कहा कि अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखो और पढ़ाई भी जारी रखो। सरकार सभी प्रकार की मदद करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति और उसके परिजन को धनतेरस, रूपचौदस और दीपावली की शुभकामनाएं दीं और कहा कि समय खराब था, पर संकट का समय अब पूरी तरह टल गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संवेदनशीलता और मानवीयता एक बेटी के जीवन में नया सवेरा लेकर आई है। संस्कृति ने बताया कि वह खूब पढ़-लिखकर सीए बनना चाहती है और इसलिए वह कॉमर्स प्लस एप्लाईड मैथ्स लेकर पढ़ाई कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगली बार इंदौर प्रवास के दौरान वे संस्कृति से मिलने जाएंगे।  उल्लेखनीय है कि इंदौर के संगम नगर निवासी 17 वर्षीय बेटी कुमारी संस्कृति पुत्री अशोक वर्मा एक अप्रत्याशित दुर्घटना के कारण 15 सितंबर 2025 को एयरपोर्ट रोड इंदौर पर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थी। इससे उसके शरीर के बाएं बांह एवं अन्य जगह गंभीर चोटें आई थीं। यह चोटें इतनी गंभीर थी कि उसके जीवन पर भी संकट में आ गया था। इंदौर में उसे चिकित्सकों की टीम द्वारा श्रेष्ठ उपचार दिया गया, किंतु उसकी गंभीर चोटों की जटिलता को देखते हुए चिकित्सकों के दल ने यह निर्णय लिया कि उसे शल्य चिकित्सा के लिए बॉम्बे हॉस्पिटल, मुंबई भेजना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने त्वरित निर्णय लेते हुए कलेक्टर इंदौर को संस्कृति को एयर एंबुलेंस से एयरलिफ्ट कर शासन के व्यय पर तुरंत बॉम्बे हॉस्पिटल मुंबई शिफ्ट कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने निर्देश का पालन किया और संस्कृति को मुम्बई पहुंचाया गया, जहां उसके बायीं बांह एवं हाथ को बचाने के लिए सर्जरी की गई, फॉलोअप के साथ संस्कृति को फिजियोथैरेपी की सलाह के साथ उसे शुक्रवार को छुट्टी दे दी गई। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उसके इलाज पर लगभग 30 लाख रुपए का व्यय किया गया। इंदौर की कक्षा 12वीं में पढ़ने वाली इस होनहार बेटी के जीवन में भी उजाला लाने के लिए सरकार और जिला प्रशासन ने अथक प्रयास किया और यह प्रयास रंग लाया। संस्कृति अब पुनः अपने सामान्य जीवन की ओर लौट रही है। उसके जीवन में भी आशा के सारे रंग सरकार की मदद से पुनः जाग रहे हैं।  

धनतेरस पर किसानों संग रहेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव, 18 अक्टूबर का दिन अन्नदाताओं को समर्पित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 18 अक्टूबर को पूरा दिन किसानों के बीच रहेंगे, किसानों के साथ मनायेंगे धनतेरस मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे किसानों की बात, किसानों के साथ मुख्यमंत्री निवास में होगा किसान सम्मेलन, करेंगे सीधा संवाद मुख्यमंत्री राजगढ़ एवं सीहोर में भी किसान सम्मेलन में शामिल होंगे भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार 18 अक्टूबर को सुबह से देर शाम तक किसान भाइयों के बीच रहेंगे और उनके साथ धनतेरस मनायेंगे। मुख्यमंत्री शनिवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित किसान सम्मेलन में किसान भाइयों से सीधा संवाद भी करेंगे। इसके बाद राजगढ़ जिले के ब्यावरा और सीहोर जिले के बिलकिसगंज झागरिया में आयोजित किसान सम्मेलनों में शामिल होकर किसानों को राहत राशि का वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ब्यावरा में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को 277 करोड़ रूपये की राहत राशि का अंतरण करेंगे एवं 33 करोड़ रूपये की लागत की ब्यावरा नगर जल प्रदाय योजना का भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव यहां 193 करोड़ रूपये की लागत के 41 विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण भी करेंगे। बाद में मुख्यमंत्री डॉ. यादव सीहोर जिले के बिलकिसगंज झागरिया में आयोजित किसान सम्मेलन में शामिल होंगे और यहां जिले के 2 लाख से अधिक किसानों को फसल क्षति की 118 करोड़ रूपये से अधिक की राहत राशि सिंगल क्लिक के जरिए किसानों के खाते में अंतरित करेंगे। मुख्यमंत्री निवास में किसान सम्मेलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार की सुबह मुख्यमंत्री निवास परिसर में आयोजित किसान सम्मेलन में किसानों के बीच उनसे उनके हित की बात करेंगे। किसानों से संवाद में मुख्यमंत्री राज्य सरकार द्वारा कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों के विकास की दिशा में उठाए जा रहे विभिन्न कल्याणकारी कदमों और नवाचारों पर भी प्रकाश डालेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों के साथ धनतेरस और दीपावली पर्व की शुरुआत करेंगे। किसान भाई सोयाबीन की फसल को भावांतर योजना के दायरे में लाने की युगांतकारी पहल के लिए मुख्यमंत्री डॉ यादव का आभार भी व्यक्त करेंगे। इस किसान सम्मेलन में नर्मदापुरम, भोपाल, सीहोर, राजगढ़, रायसेन और विदिशा जिलों के करीब 2500 से अधिक प्रगतिशील किसान शामिल होंगे। किसान सम्मेलन का उद्देश्य प्रदेश के किसानों को भावांतर भुगतान योजना की जानकारी देना और उन्हें योजना का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस अवसर पर कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी किसानों को योजना की प्रक्रिया, पात्रता तथा लाभ वितरण से संबंधित विस्तृत जानकारी देंगे। भावांतर योजना के तहत प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसान 24 अक्टूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक अपनी फसल कृषि उपज मंडियों में विक्रय कर सकेंगे। राज्य सरकार द्वारा योजना में पात्र किसानों के आधार लिंक बैंक खातों में भावांतर की राशि फसल विक्रय के 15 दिन के भीतर सीधे जमा कर दी जाएगी। ई-उपार्जन पोर्टल पर भावांतर योजना के लिए किसानों का पंजीयन कार्य 17 अक्टूबर तक पूरा किया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र किसान इस योजना का लाभ पाने से वंचित न रहे। किसान सम्मेलन के मुख्य आकर्षण     भावांतर योजना की विस्तृत जानकारी और प्रशिक्षण।     मुख्यमंत्री द्वारा किसानों से सीधा संवाद।     कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा मार्गदर्शन।     किसान सम्मेलन में सरकार द्वारा किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों की जानकारी भी दी जाएगी।  

अंतरराष्ट्रीय मंच ITB एशिया 2025 में मध्यप्रदेश पर्यटन की वैश्विक प्रस्तुति

आइटीबी एशिया 2025 सिंगापुर में मध्यप्रदेश पर्यटन की भागीदारी मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के पवेलियन को मिली सराहना भोपाल सिंगापुर के मरीना बे सैंड्स एक्सपो और कन्वेंशन सेंटर में आयोजित प्रतिष्ठित ट्रैवल ट्रेड शो आईटीबी एशिया 2025 में मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड प्रमुख भागीदारी कर रहा है। सिंगापुर गणराज्य में भारत के उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले ने 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित आईटीबी एशिया में मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड के पवेलियन का आधिकारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर सिंगापुर गणराज्य में भारत के उच्चायोग में प्रथम सचिव (वाणिज्य)  टी. प्रभाकर भी उपस्थित थे। आयोजन मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक, प्राकृतिक और साहसिक गंतव्य के रूप में वैश्विक मानचित्र पर प्रस्तुत करने और साझेदारियों को प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आईटीबी एशिया में मध्यप्रदेश पर्यटन का प्रतिनिधित्व अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति, गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड  शिव शेखर शुक्ला और प्रबंधक  सौरभ पांडे कर रहे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न पर्यटन क्षेत्रों के प्रमुख हितधारक भी सम्मिलित हैं।   अपर मुख्य सचिव  शुक्ला ने कहा कि आईटीबी एशिया वैश्विक मंच पर मध्यप्रदेश की पर्यटन क्षमता और विविधता को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। हमारा लक्ष्य मध्यप्रदेश को एक अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय गंतव्य के रूप में स्थापित करना है जहां विरासत, वन्य-जीवन, आध्यात्मिकता और सतत पर्यटन का संगम यात्रियों को वास्तव में अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करता है।  विशेष बैठकें और सहयोग अपर मुख्य सचिव  शुक्ला ने विभिन्न प्रतिनिधियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं। चर्चा में मध्यप्रदेश पर्यटन को तंजानिया, नाइजीरिया और साउथ अफ्रीका जैसे देशों में प्रस्तुत करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। इसके अलावा उन्होंने सु मिच गोह, डायरेक्टर ऑफ पब्लिक पॉलिसी – एशिया पैसिफिक एयर बीएनबी (Airbnb) के साथ मध्यप्रदेश में सतत और समावेशी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सहयोगी अवसरों पर चर्चा की। इस बैठक में विशेष रूप से राज्य के ग्रामीण होम स्टे संचालकों को आतिथ्य सत्कार का प्रशिक्षण देने और मध्यप्रदेश के नवाचारों को व्यापक रूप से प्रचारित करने पर जोर दिया गया। आईटीबी एशिया, MICE (मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंस एंड एक्ज़ीबिशंस), कॉर्पोरेट और ट्रैवल टेक्नोलॉजी क्षेत्रों के प्रमुख पेशेवरों, अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शकों और खरीदारों को एक साथ लाता है। यह आयोजन व्यापारिक वार्ताओं, नेटवर्किंग और रणनीतिक साझेदारियों हेतु एक वैश्विक मंच के रूप में कार्य करता है। मध्यप्रदेश का प्रतिनिधिमंडल अंतर्राष्ट्रीय टूर ऑपरेटरों, खरीदारों और यात्रा उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ बी2बी बैठकें कर रहा है। इन बैठकों का उद्देश्य अंतर्देशीय पर्यटन को बढ़ावा देने और सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशना है। बैठक में राज्य के प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों—जैसे वन्यजीव अभ्यारण्य, सांस्कृतिक विरासत, साहसिक पर्यटन और फिल्म व विवाह पर्यटन—पर विशेष चर्चा हो रही है, जिससे ‘अतुल्य भारत का हृदय’ के रूप में मध्य प्रदेश की पहचान मजबूत हो रही है। प्रदर्शनी में राज्य की पर्यटन संपत्तियों, प्राचीन धरोहरों, यूनेस्को स्मारकों, साहसिक गतिविधियों और जिम्मेदार पर्यटन पहलों की जानकारी प्रदर्शित की गई है। पवेलियन में मध्यप्रदेश को स्वच्छ, हरित और सुरक्षित गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो महिला यात्रियों के लिए भी आकर्षक है। मध्यप्रदेश की यह सहभागिता राज्य की वैश्विक दृश्यता बढ़ाने, व्यापारिक संबंध मजबूत करने और सतत एवं समावेशी पर्यटन आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की रणनीति का हिस्सा है।  

मंत्री परमार का संदेश — आदर्श समाज की नींव शिक्षण संस्थानों से रखी जाती है

आदर्श नागरिकों का निर्माण शिक्षा के मंदिरों से ही संभव : मंत्री  परमार महाविद्यालयों को शोध एवं नवाचारों का केंद्र बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध भोपाल संभाग की एकदिवसीय कार्यशाला संपन्न भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि आदर्श नागरिक का निर्माण करना ही शिक्षा का ध्येय है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने यह महत्वपूर्ण अवसर दिया है कि शिक्षा के माध्यम से देश को विश्व में और प्रदेश को देश में अग्रणी बनाने की ओर आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश देश भर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने में अग्रणी भूमिका में हैं। उच्च शिक्षा मंत्री  परमार ने शुक्रवार को भोपाल स्थित सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी (नूतन) महाविद्यालय में 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के परिप्रेक्ष्य में एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप भोपाल संभाग की एकदिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ किया। मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में हो रहे व्यापक परिवर्तन से सभी को अवगत करवाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्नातक में प्रवेश लेने वाले 12वीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों को विद्यालय स्तर पर समस्त जानकारी दी जानी चाहिए। स्नातकोत्तर में प्रवेश लेने के पहले विद्यार्थियों को मेजर एवं माइनर विषय सहित समस्त जानकारी महाविद्यालय स्तर पर ही प्रदान की जानी चाहिए। उच्च शिक्षा मंत्री  परमार ने कहा कि स्नातक के प्रथम वर्ष के प्रथम अध्याय में भारतीय ज्ञान परम्परा का समावेश किया गया है। प्रदेश के महाविद्यालयों को शोध एवं नवाचारों के केंद्र बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जितने स्वशासी या अन्य ऐसे संस्थान हैं वे भी शोध एवं नवाचारों की दिशा में सतत् क्रियाशील रहें। शासन से आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि के लिए लगातार पदपूर्ति की जा रही है। इस सत्र के अंत तक 4 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रकिया पूरी हो जाएगी। शैक्षणिक एवं अन्य संवर्ग की भर्ती प्रकिया में उच्च शिक्षा विभाग निरंतर क्रियाशील है। प्राध्यापकों के आचरण का अनुसरण ही विद्यार्थी करते हैं, संस्थान परिसर के प्रति विद्यार्थियों के मन में पूर्ण समर्पण भाव जागृत करने का दायित्व प्राध्यापकों का है। इस एकदिवसीय कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों द्वारा अध्यादेशों के संदर्भ में प्रस्तुतिकरण एवं विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं के समाधान को लेकर विमर्श हुआ। साथ ही एईडीपी एवं कृषि पाठ्यक्रम तथा एआई सर्टिफिकेट कोर्स सहित स्वयं पोर्टल, अपार आईडी एवं अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC) से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। विद्यार्थियों के हितों से जुड़े विविध विषयों पर विस्तृत विचार मंथन हुआ। कार्यशाला के शुभारम्भ के अवसर पर आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा ने कहा कि हमारा क्रियान्वयन, विद्यार्थी केन्द्रित हैं। कार्यशाला में मिलने वाले निष्कर्ष एवं सुझावों को विद्यार्थियों के हितों के अनुरूप समावेश किया जाएगा। विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी उच्च शिक्षा डॉ धीरेंद्र शुक्ल ने कार्यशाला के उद्देश्य की जानकारी दी। सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी (नूतन) महाविद्यालय भोपाल की प्राचार्य डॉ दीप्ति वास्तव ने स्वागत उद्बोधन दिया। क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक  मथुरा प्रसाद एवं प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय हमीदिया महाविद्यालय भोपाल के प्राचार्य (अग्रणी प्राचार्य) डॉ अनिल शिवानी सहित विविध विषय-विशेषज्ञ, विविध शिक्षाविद्, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के नोडल अधिकारी, स्वयं पोर्टल एवं अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट के नोडल अधिकारी तथा भोपाल संभाग के विभिन्न जिलों के शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक, शिक्षामित्र एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।