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प्रधानमंत्री मोदी ने बैतूल की आईटीआई प्रशिक्षार्थी कु. तावड़े को किया सम्मानित

भोपाल  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में कौशल एवं उद्यमशीलता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 4अक्टूबर को आयोजित कौशल दीक्षांत समारोह में मध्यप्रदेश की शासकीय आईटीआई, बैतूल की इलेक्ट्रीशियन ट्रेड की प्रशिक्षार्थी कुमारी त्रिशा तावड़े को आल इंडिया सेंट्रल ज़ोन टू ईयर ट्रेड में टॉप करने पर सम्मानित किया है। कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल ने शासकीय आईटीआई की छात्रा कु.त्रिशा को इस उपलब्धि पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। राज्यमंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि यह सफलता प्रदेश में कौशल आधारित शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशिक्षकों के समर्पण और युवा प्रतिभाओं की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने बताया कि विभाग की प्राथमिकता है कि प्रशिक्षुओं को तकनीकी दक्षता के साथ जीवन कौशल, व्यक्तित्व विकास, भाषा और संचार कौशल प्रदान करना, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना, उद्योग के अनुरूप प्रशिक्षण देना और विदेशों में रोजगार की संभावनाओं को साकार करना। मध्यप्रदेश के अन्य 09 प्रशिक्षार्थियों ने भी ऑल इंडिया ट्रेड टॉपर के रूप में प्रदेश का नाम रोशन किया जिसमें चंचल सेवारिक कम्प्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, भोपाल, पूजा जाटव ड्रोन तकनीशियन, जबलपुर, श्याम महेश्वरी फैशन डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी, उज्जैन, अमन गजभिये मेसन, बालाघाट, श्रुति विश्वकर्मा मैकेनिक, ट्रैक्टर, जबलपुर, अरविंद कुमरे मैकेनिक कम्प्यूटर हार्डवेयर, बैतूल, निकिता तायवड़े मैकेनिक कम्प्यूटर हार्डवेयर, बैतूल, अभिजीत सिंह सिसोदिया मिल्क एंड मिल्क प्रोडक्ट टेक्नीशियन, भोपाल और शिवम यादव स्टेनोग्राफर एंड सेक्रेटेरियल असिस्टेंट, खंडवा शामिल है। इन सभी प्रशिक्षार्थियों ने अपने कौशल, परिश्रम और संकल्प से प्रदेश को गौरवान्वित किया। प्रदेश के सभी 280 शासकीय आईटीआई में आज कौशल दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया तथा प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी किया गया। इस अवसर पर आईटीआई स्तर पर सभी ट्रेड्स के टॉपर प्रशिक्षार्थियों को सम्मानित किया गया। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की शासकीय एकलव्य महिला आईटीआई की छात्रा कु. त्रिशा तावड़े ने 1200 में से 1187 अंक प्राप्त कर सेंट्रल जोन में प्रथम स्थान हासिल किया और मध्यप्रदेश की एकमात्र प्रशिक्षणार्थी के रूप में राष्ट्रीय मेरिट सूची में नाम दर्ज कर जिले और प्रदेश का गौरव बढ़ाया। बैतूल के ग्राम भड़ूस की इस संघर्षशील छात्रा के पिता श्री अजय तावड़े बस ड्राइवर हैं और मां श्रीमती सुशीला तावड़े गृहणी हैं। बड़ी बहन कु. एकता तावड़े भी आईटीआई बैतूल की टॉपर रह चुकी हैं और वर्तमान में रेलवे में एप्रेंटिस के रूप में कार्यरत हैं। आईटीआई बैतूल के प्राचार्य ने बताया कि सत्र 2024-25 में मैकेनिक कंप्यूटर हार्डवेयर ट्रेड में छात्र अरविंद कुमरे ने पुरुष वर्ग और छात्रा कु. निकिता तायवड़े ने महिला वर्ग में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप छात्राओं की उन्नति और कौशल प्रशिक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। महिला आईटीआई बैतूल में कौशल विकास विभाग के तहत 'हुनर पहल' कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण एवं कौशल विकास के लिए कम्युनिकेशन स्किल, सॉफ्ट स्किल, इंग्लिश स्पीकिंग प्रशिक्षण सहित हार्टफुलनेस ध्यान, व्यक्तित्व विकास शिविर और हेल्थ क्लब गतिविधियों में योग व कराटे प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आईटीआई बैतूल की छात्राओं को न केवल प्रदेश में बल्कि देश-विदेश में रोजगार पाने के अवसर मिल रहे हैं। पिछले वर्ष 85 से अधिक छात्राएं बेंगलुरु, हैदराबाद और भोपाल की कंपनियों में नौकरी के लिए चयनित हुईं, वहीं इस वर्ष 45 छात्राएं टाटा इलेक्ट्रॉनिक होसुर तमिलनाडु और 9 छात्राएं प्रतिभा सिंटेक्स पीतमपुर जा चुकी हैं।  

राज्यपाल ने प्रदान किए हिन्दीतर भाषी हिन्दी सेवी सम्मान

भोपाल  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि भाषा एक संपूर्ण संस्कृति है। यह भावों की अभिव्यक्ति के साथ व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में सहायक होती है। व्यक्ति को सरल, सहृदय और संवेदनशील बनाती है। राज्यपाल श्री पटेल मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा आयोजित हिन्दीतर भाषी हिन्दी सेवी सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न श्रेणियों के लिए प्रचार समिति द्वारा स्थापित पुरस्कारों से लेखकों, प्रशासनिक अधिकारियों, हिन्दी सेवा साधकों और युवा साहित्यकारों को सम्मानित किया और बधाई दीं। समारोह का आयोजन हिन्दी भवन में किया गया। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हिन्दी की लोकप्रियता भारत के साथ संपूर्ण विश्व में बढ़ी है। मोदी जी जब विश्व मंचों पर हिंदी में अपनी बात रखते हैं तो सम्पूर्ण विश्व बड़े ध्यान से सुनता है। उन्होंने कहा कि गैर हिन्दी राज्यों और सरकारी नीतियों में भी विगत वर्षों से हिन्दी का प्रसार तेजी से हो रहा है। वर्ष 2023 में फिजी में विश्व हिन्दी सम्मेलन में दुनिया भर के 50 देशों का शामिल होना, प्रधानमंत्री जी के इन्हीं प्रयासों का सुखद प्रतिफल है। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं के अध्ययन-अध्यापन और प्रोत्साहन के लिए विशेष प्रावधान, प्रधानमंत्री जी के संकल्पों की सिद्धि की पहल है। प्रदेश सरकार ने भी हिन्दी विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने इंजीनियरिंग और चिकित्सा जैसे तकनीकी, वैज्ञानिक विषयों का हिन्दी में अध्ययन-अध्यापन की अनुकरणीय और सराहनीय पहल की है। हिन्दी प्रसार की भ्रामक शंकाओं और चिंताओं को दूर करने के प्रयासों का करें नेतृत्व राज्यपाल श्री पटेल ने कहा है कि विश्व मंच पर भारतीय भाषाओं का सम्मान और अधिक बढ़ाने के लिए हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं में समन्वय की आवश्यकता है। आप सम्मानित और सभी गैर हिन्दी भाषियों से मेरा अनुरोध है कि हिन्दी और अहिन्दी भाषियों के संवाद सूत्र बनकर, हिन्दी के प्रसार की भ्रामक शंकाओं और चिंताओं को दूर करने के प्रयासों का नेतृत्व करें। उन्होंने कहा कि अहिन्दी भाषी स्वामी दयानंद, महात्मा गांधी और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हिन्दी के सामर्थ्य के द्वारा हमारी सांस्कृतिक विविधता को एक सूत्र में पिरोने में सफलता प्राप्त की है। विभिन्न श्रेणियों में प्रदान किए गए हिन्दी सेवी सम्मान राज्यपाल श्री पटेल ने समारोह में हिन्दी सेवी सम्मान प्रदान किया। उन्होंने  विभिन्न  श्रेणियों में साहित्यकारों, प्रशासनिक अधिकारियों, हिन्दी सेवा साधकों और मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इसी प्रकार समिति द्वारा स्थापित विभिन्न पुरस्कार प्रदान किए गए । राज्यपाल श्री पटेल ने मां सरस्वती का पूजन और दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। राज्यपाल श्री पटेल का प्रचार समिति ने पुष्प-गुच्छ से स्वागत, शॉल और श्रीफल से अभिनंदन किया। स्वागत उद्बोधन प्रचार समिति के संपादक और मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने दिया। श्री रघुनंदन शर्मा ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। आभार समिति की उपाध्यक्ष डॉ रंजना अरगढ़े ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में श्री महेश सक्सेना, सम्मानित लेखक, साहित्यकार और उनके परिजन उपस्थित रहे। 

ज्योतिरादित्य का ग्वालियर कमाल: बिना सांसद के ही चलाईं लंबी केंद्रीय बैठकें

ग्वालियर भाजपा का सबका साथ-सबका विकास के संकल्प के बीच ग्वालियर में गणित कुछ अलग है। ग्वालियर में 17 दिन बाद फिर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह के बिना विकास कार्यों की समीक्षा तीन घंटे समीक्षा की। प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह भी रहे। ग्वालियर में तोमर-सिंधिया गुटबाजी ग्वालियर-चंबल में अलग तेवरों के साथ पिछले माह से सक्रिय हुए सिंधिया अक्टूबर के पहले सप्ताह में फिर मैदान में दिखे। नेताओं की अलग-अलग बैठकों का सीधा कारण किसी से छिपा नहीं है कि ग्वालियर में तोमर-सिंधिया गुटबाजी। मंच साझा करने से लेकर बचने वाले दोनों नेता विकास कार्यों की बैठक में साथ नहीं दिखते। ग्वालियर में विकास कार्यों की बैठक के लिए प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट इंदौर से आकर यहां खुद की अध्यक्षता में बैठक लेते हैं, हकीकत में जिसे लीड केंद्रीय मंत्री ही करते हैं। प्रोटोकाल के कारण केंद्रीय मंत्री सीधे विकास कार्यों की बैठक नहीं ले सकते।   सिंधिया ने पांच बिंदुओं पर समीक्षा की सिंधिया ने बैठक के बाद सांसद के उपस्थित न होने के सवाल पर कहा कि वे व्यस्त होंगे, वे कहां हैं यह तो उनसे ही पूछा जा सकता है कि वे कहां हैं। सिंधिया ने पांच बिंदु सड़क, सीवर, पेयजल, एलिवेटेड रोड सहित पांच बिंदुओं पर समीक्षा की। ग्वालियर चंबल अंचल में पिछले एक साल दूर सिंधिया ने पिछले माह से अपनी सक्रियता दिखाई है। पिछले माह 15 सितंबर को सिंधिया ने ग्वालियर कलेक्ट्रेट में ही विकास कार्यों की लंबी चौड़ी बैठक ली थी। बैठक में ग्वालियर में संचालित सभी बड़े प्रोजेक्टों पर चर्चा की और बुनियादी सुविधाओं सीवर, सड़क, पेयजल, पार्किंग आदि पर चर्चा की। सिंधिया ने अफसरों को निर्देश बैठक के बाद सिंधिया ने यह भी स्वीकारा था कि ग्वालियर की सड़कें बदहाल हैं, जिन्हें सिंधिया ने अफसरों को अलग-अलग श्रेणी में बांटने के निर्देश दिए। शुक्रवार की बैठक में अधिकारी यह होमवर्क करके भी लाए और विधानसभावार सिंधिया को सड़कों की हालत दिखाई। सिंधिया बोले-जो दवाब बनवाए उसकी पर्ची खुलवाओ बैठक में सिंधिया ने विकास कार्यों को लेकर कहा कि जो भी ठोस कार्य योजना नेताओं के साथ बैठक बनाई जा रही है उसमें अमल के दौरान जो भी बाधा या दवाब बना रहा है उसके नाम की पर्ची खुलवाई जाए। सिंधिया का इशारा नेताओं को लेकर था। सांसद शिवपुरी में थे, मंत्री नारायण सिंह बोले-वे व्यस्त होंगे पिछली बैठक में भी सांसद भारत सिंह कुशवाह नहीं थे और शुक्रवार को भी वे नहीं दिखे। सांसद शिवुपरी में थे। मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने भी सांसद के बैठक में न होने पर कहा कि हो सकता है वे व्यस्त हों, इसलिए बैठक में नहीं आ सके हों।

अव्यक्त दुःख को अभिव्यक्ति देतीं कहानियाँ: सारिका श्रीवास्तव

इंदौर, हिंदी में कहानी का कलेवर आमतौर पर छोटा होता है और उपन्यास या लंबी कहानी की तरह उसमें एक से ज़्यादा मुद्दे उठाने की गुंजाइश नहीं होती। दिनेश भट्ट अपनी कहानी में यह जोख़िम उठाते है और एक-एक कहानी में एक से ज़्यादा सवालों से दो-चार होने की कोशिश करते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में वे कहानी की औपन्यासिक संभावनाओं का अंत भी कर देते हैं जो अच्छा नहीं है। अवसर था समकालीन हिंदी कहानीकार दिनेश भट्ट (छिंदवाड़ा) के कहानी पाठ और उसके उपरांत हुई चर्चा का। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार और 'प्रगतिशील वसुधा' के संपादक विनीत तिवारी ने पढ़ी गई कहानियों पर अपनी उपरोक्त टिप्पणी दी। उन्होंने यह भी कहा कि भाषा की सरलता कहानी का लक्षण हो सकता है, विशेषता नहीं। आजकल अधिकांश कहानियाँ बोलचाल की भाषा में रची जाती हैं। इसीलिए वे प्रवाहमान भी होती हैं लेकिन साधारण भाषा और साधारण शब्दों के इस्तेमाल से एक अनोखा बिम्ब रचना कहानीकार की महत्त्वपूर्ण उपलब्धि बनती है। दिनेश की कहानियों में वे कहीं-कहीं इसमें सफल हुए हैं। दिनेश भट्ट की कहानियों के ब्यौरे दिलचस्प हैं लेकिन इसकी सावधानी रखनी चाहिए कि कथ्य कहीं विवरणों में ढँक न जाए, बल्कि विवरणों से कथ्य और खुलकर निखरे। प्रगतिशील लेखक संघ, इंदौर इकाई द्वारा 3 अक्टूबर 2025 को कल्याण जैन स्मृति वाचनालय में आयोजित इस कार्यक्रम में दिनेश भट्ट ने अपनी तीन चर्चित कहानियों, 'गोमती का बसेरा और ईश्वर', 'सीलू मवासी का सपना' और 'अंतिम बूढ़े का लाफ्टर डे' का प्रभावशाली पाठ किया। पाठ के बाद उपस्थित रचनाकारों एवं श्रोताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएँ भी व्यक्त कीं। डॉ. संजय भालेराव ने कहा कि कहानियाँ अव्यक्त दुःख को व्यक्त करती हैं। जावेद आलम ने इन कहानियों को वेदना और पीड़ा की कहानी बताया। विजय दलाल, सारिका श्रीवास्तव, अभय नेमा, विवेक सिकरवार, अभय, रामआसरे पांडे आदि ने कहानियों के शिल्प और भाषा के द्वन्द्व की शिनाख़्त की और यथार्थवादी शैली की इन कहानियों को प्रभावशाली माना। उनका कहना था कि  यह कहानियाँ हमारे आसपास के जीवन की परतें इस तरह खोलती हैं कि जाना हुआ यथार्थ ही हमें नया और महत्त्वपूर्ण लगने लगता है। कार्यक्रम में विश्वनाथ कदम, फादर पायस लाकरा, डॉ. परमानंद भट्ट, अभय लोधी, निर्मल जैन और संजय वर्मा की भी सक्रिय भागीदारी रही। संचालन और आभार प्रदर्शन अभय नेमा ने किया।

मध्यप्रदेश में पूर्वोत्तर के निवेशकों के लिए खुलेंगे नए अवसर

गुवाहाटी में इंटरएक्टिव सत्र 5 अक्टूबर को पूर्वोत्तर के निवेशक मध्यप्रदेश के निवेश अवसरों से होंगे रूबरू भोपाल  मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए अनुकूल नीतियाँ, सुगम प्रक्रिया और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर ने मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल किया है। इसी दिशा में 5 अक्टूबर को गुवाहाटी में आयोजित होने वाला ‘इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश’ सत्र पूर्वोत्तर भारत के निवेशकों को राज्य में औद्योगिक अवसरों और साझेदारी के नए मार्ग प्रशस्त करेगा। सत्र का उद्देश्य निवेशकों को मध्यप्रदेश में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल एवं परिधान, फार्मा और हेल्थकेयर, सीमेंट एवं खनिज, इंजीनियरिंग, पेट्रोकेमिकल्स एवं केमिकल्स, पर्यटन एवं वेलनेस, नवकरणीय ऊर्जा उपकरण, प्लास्टिक्स और पॉलिमर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं से परिचित कराना है। गुवाहाटी फार्मा और सीमेंट उद्योग का प्रमुख केंद्र है, जबकि दिब्रूगढ़, तिनसुकिया, जोरहाट और शिवसागर जैसे औद्योगिक शहरों के उद्योग प्रतिनिधि सत्र में शामिल होकर प्रदेश में निवेश के अवसर पर चर्चा करेंगे । पूर्वोत्तर राज्यों के उद्योग समूह, व्यापार संघ और निवेशक, साथ ही कोलकाता और आप पास के औद्योगिक केंद्र के प्रतिनिधि इस सत्र में शामिल होंगे। यह आयोजन न केवल निवेशकों को औद्योगिक अवसरों से जोड़ेगा बल्कि पूर्वोत्तर भारत और मध्यप्रदेश के बीच आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को भी मजबूत करेगा। सत्र में FICCI असम के चेयर और धानुका ग्रुप के एमडी डॉ. घनश्याम दास धनुका, फिक्की, असम के को चेयर और बीएमजी इन्फॉर्मेटिक्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर  जॉयदीप गुप्ता और रॉयल भूटान कौंसल जनरल, गुवाहाटी  जिग्मे थिनल्ये नामग्याल सत्र को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों से वन-टू-वन मीटिंग कर मध्यप्रदेश में परियोजनाओं, निवेश योजनाओं और औद्योगिक विकास के अवसरों पर सीधे संवाद करेंगे। यह सत्र राज्य की औद्योगिक क्षमता को विस्तार देने और निवेशकों के भरोसे को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।  

कोल्ड्रिफ कप सिरप पूरे प्रदेश में की प्रतिबंधित- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. का कड़ा रूख, छिंदवाड़ा मामले में लिया सख्त एक्शन कोल्ड्रिफ कप सिरप पूरे प्रदेश में की प्रतिबंधित- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव छापामारी कर अमानक दवा जप्त करने के दिये निर्देश दोषियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जायेगा मृतक के परिजन को 4-4 लाख रूपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा उपचाररत बच्चों का पूरा इलाज करायेगी राज्य सरकार भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि छिंदवाड़ा जिले में कोल्ड्रिफ कप सिरप के कारण बच्चों की हुई मृत्यु अत्यंत दुखद है। कोल्ड्रिफ कप सिरप की जाँच रिपोर्ट आने पर मध्यप्रदेश में इस सिरप की बिक्री को पूर्णता प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रदेश में अभियान के तौर पर छापामारी कर कोल्ड्रिफ सिरप को जप्त किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छिंदवाड़ा में इस सिरप के कारण जिन 11 बच्चों को मृत्यु हुई है, उनके परिजन को 4-4 लाख रूपये आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी। साथ ही उपचाररत बच्चों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। जाँच नमूने पाये गये अमान्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छिंदवाड़ा की घटना संज्ञान में आने पर कोल्ड्रिफ सिरप के सैम्पल जाँच के लिए भेज गये थे। शनिवार की सुबह जाँच रिपोर्ट में पाया गया कि जाँच नमूने अमान्य पाये गये है। इस पर त्वरित कार्यवाही करते हुए कोल्ड्रिफ सिरप के विक्रय को पूरे प्रदेश में प्रतिबंधित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य स्तर पर भी इस मामले में संयुक्त जाँच टीम बनाई गई है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जायेगा। जाँच में पाई गई 48.6% डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा तमिलनाडु के औषधि नियंत्रक, द्वारा कोल्ड्रिफ सिरप को “नॉट ऑफ़ स्टैण्डर्ड क्वालिटी(एनएसक्यू)” घोषित किया गया है। शासकीय औषधि विश्लेषक, औषधि परीक्षण प्रयोगशाला, चेन्नई के परीक्षण अनुसार इस सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा पाई गई 48.6% पाई गई है, जो एक जहरीला तत्व है और स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक है। जिला छिंदवाड़ा से बच्चों की मृत्यु की घटनाओं की पृष्ठभूमि में इस औषधि की संदिग्ध भूमिका को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में कठोर कदम उठाए गए हैं। नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन डॉ. दिनेश कुमार मौर्य ने प्रदेश के समस्त वरिष्ठ औषधि निरीक्षक एवं औषधि निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि उक्त दवा का विक्रय एवं वितरण तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। यदि यह दवा उपलब्ध हो तो इसे तुरंत सील कर लिया जाए तथा नष्ट नहीं किया जाए, जैसा कि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 और नियमों में प्रावधान है। संबंधित औषधि के नमूने संकलित कर परीक्षण हेतु शासकीय औषधि प्रयोगशालाओं को भेजे जाएं। कोल्ड्रिफ सिरप के अन्य बैचेस भी यदि उपलब्ध हों तो उन्हें भी सील कर नमूने परीक्षण हेतु भेजे जाएं। जनहित को देखते हुए मेसर्स स्रेसन (Sresan) फार्मास्यूटिकल द्वारा निर्मित सभी अन्य औषधियों की बिक्री एवं उपयोग भी तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है और इनके नमूने कानूनी परीक्षण हेतु संकलित किए जा रहे हैं। साथ ही प्रदेश में इस दवा की आवाजाही पर सख्त निगरानी के निर्देश हैं।  

जनसुनवाई में ऊर्जा मंत्री तोमर ने किया जनसमस्याओं का निराकरण

अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचे जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ : ऊर्जा मंत्री  तोमर जनसुनवाई में ऊर्जा मंत्री  तोमर ने किया जनसमस्याओं का निराकरण भोपाल सरकार की मंशा अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह बात शनिवार को अपने ग्वालियर रेसकोर्स रोड स्थित सरकारी कार्यालय पर जनसुनवाई करते हुए कही। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने आमजन की समस्याओं को सुनते हुए सम्बन्धित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने हिदायत दी कि किसी भी समस्या का निदान निर्धारित समय-सीमा में किया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने जनसुनवाई में आई महिलाओं को तत्काल राशन दिलाने, वृद्धजनों की वृद्धावस्था पेंशन और मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड बनवाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि आपका यह सेवक किसी भी परिवार के साथ अन्याय नहीं होने देगा। आपकी सेवा के लिए आपका यह सेवक सदैव तत्पर रहा है और आगे भी आपके हर सुख-दु:ख में हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के हर स्तर पर पुख्ता इंतजाम किए हैं।  

MP सरकार का बड़ा फैसला: अब तीसरे बच्चे वाले भी होंगे सरकारी नौकरी के लिए योग्य!

भोपाल  मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी में दो बच्चों की पाबंदी की शर्त 24 साल बाद खत्म होने जा रही है। यह पाबंदी 26 जनवरी 2001 को लागू की गई थी। अब जल्द ही इस प्रस्ताव को कैबिनेट में लाकर शर्त को समाप्त किया जाएगा। इसके बाद नौकरी कर रहे किसी अधिकारी या कर्मचारी का तीसरा बच्चा होने पर उन्हें नौकरी से बर्खास्त नहीं किया जा सकेगा। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार उच्च स्तर से मिले निर्देशों के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई और तमाम परिस्थितियों का आंकलन करने के बाद उच्च स्तर पर सहमति बन गई। तीसरी संतान से जुड़े केस समाप्त होंगे नई व्यवस्था के लागू होने के बाद तीसरी संतान से जुड़े जितने भी मामले न्यायालयों या विभागीय जांचों में लंबित हैं, उन्हें स्वतः समाप्त मान लिया जाएगा। अब उन मामलों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। वर्ष 2001 के बाद जिन सरकारी कर्मचारियों पर तीसरी संतान के आधार पर कार्रवाई हो चुकी है या वे नौकरी से बाहर किए जा चुके हैं, उन मामलों पर सुनवाई नहीं होगी। तीसरी संतान से जुड़े केस होंगे समाप्त नई व्यवस्था के तहत, तीसरी संतान से संबंधित जितने भी केस न्यायालयों या विभागीय जांचों में लंबित हैं, उन्हें अब स्वतः समाप्त मान लिया जाएगा। ऐसे मामलों पर अब कोई कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि, पुराने मामलों में जिन सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी थी, उन्हें पुनः नहीं खोला जाएगा। कौन से विभाग होंगे प्रभावित? इस बदलाव से सबसे ज्यादा असर चिकित्सा शिक्षा (Medical Education), स्वास्थ्य (Health), स्कूल शिक्षा (School Education), और उच्च शिक्षा (Higher Education) विभागों पर पड़ेगा। अनुमान है कि इस पाबंदी के कारण इन विभागों में करीब 8 से 10 हजार मामले लंबित हो सकते हैं। चिकित्सा शिक्षा से जुड़ी लगभग 12 शिकायतें सामान्य प्रशासन विभाग तक पहुंची हैं, जिन पर जल्द फैसला लिया जाएगा। पड़ोसी राज्यों में पहले ही हटाई गई पाबंदी मध्य प्रदेश के पड़ोसी राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ पहले ही इस पाबंदी को हटा चुके हैं। राजस्थान ने 11 मई 2016 को, और छत्तीसगढ़ ने 14 जुलाई 2017 को यह पाबंदी समाप्त कर दी थी। इन राज्यों में अब तीसरी संतान वाले लोग सरकारी नौकरी में काम कर रहे हैं। प्रजनन दर पर ध्यान मध्य प्रदेश की प्रजनन दर (fertility rate) 2.9 है, जो राष्ट्रीय औसत (2.1) से ज्यादा है। शहरी इलाकों में यह दर 2.1 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.8 के करीब है। इसके अलावा, बिहार राज्य में सबसे अधिक प्रजनन दर (3.0) है, जिसका मतलब है कि यहां एक महिला औसतन 3 बच्चों को जन्म देती है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की प्रजनन दर 2.0 भोपाल की प्रजनन दर 2.0 है, जो राज्य के बाकी हिस्सों से कम है। राज्य के कुछ अन्य जिलों में जैसे पन्ना (4.1), शिवपुरी (4.0), और बड़वानी (3.9) में उच्च प्रजनन दर देखी जाती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख का बयान हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत की जनसंख्या नीति पर विचार करते हुए कहा था कि औसतन तीन बच्चों का होना चाहिए। उनका मानना है कि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे संसाधनों पर दबाव नहीं बढ़ेगा। उनके इस बयान के बाद ही मध्य प्रदेश में दो बच्चों की सीमा हटाने की प्रक्रिया को गति मिली, और इस नीति में बदलाव के लिए तैयारी शुरू हो गई। कौन से विभाग प्रभावित होंगे सबसे ज्यादा शिकायतें मेडिकल एजुकेशन, हेल्थ, स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग से जुड़ी हैं। अनुमान है कि ऐसे मामलों की संख्या आठ से दस हजार के बीच हो सकती है। मेडिकल एजुकेशन की करीब 12 शिकायतें सामान्य प्रशासन विभाग तक पहुंच चुकी हैं, जिन पर फैसला होना है। पहले एक जज तक की नौकरी दो संतान की पाबंदी की वजह से चली गई थी। अन्य राज्यों का उदाहरण राजस्थान और छत्तीसगढ़ पहले ही यह पाबंदी हटा चुके हैं। राजस्थान ने 11 मई 2016 और छत्तीसगढ़ ने 14 जुलाई 2017 को इसे खत्म किया। वहां अब तीन बच्चों वाले कर्मचारी भी सरकारी नौकरी में काम कर रहे हैं। मप्र की प्रजनन दर और राष्ट्रीय तुलना राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS 2019-20) के अनुसार, मध्य प्रदेश की प्रजनन दर 2.9 है। शहरी क्षेत्रों में यह 2.1 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.8 के करीब है, जबकि राष्ट्रीय औसत 2.1 है। देश में सबसे अधिक प्रजनन दर बिहार में है, जहां औसतन एक महिला 3 बच्चे को जन्म देती है। मप्र के अन्य राज्य जैसे मेघालय, उत्तर प्रदेश और झारखंड में भी प्रजनन दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। भोपाल में प्रजनन दर 2.0 है, जो राज्य में सबसे कम है, जबकि पन्ना, शिवपुरी और बड़वानी में यह क्रमशः 4.1, 4.0 और 3.9 है। मोहन भागवत के बयान का असर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में कहा कि भारत की औसत जनसंख्या नीति 2.1 के अनुसार औसतन तीन बच्चे होना चाहिए। इसके बाद दो बच्चों की सीमा हटाने की प्रक्रिया को गति मिली और नीति में बदलाव की तैयारी शुरू हुई।

सारनी पॉवर हाउस बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ कर रहा सेवाओं का विस्तार

रोशनी के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा पॉवर हाउस सारनी सारनी पॉवर हाउस बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ कर रहा सेवाओं का विस्तार पॉवर हाउस सारनी की पहल: रोशनी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का संगम बैतूल बैतूल जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर एक छोटा सा कस्बा सारनी स्थित है। वर्ष 1965 के आसपास वहां सतपुड़ा ताप विद्युत गृह की स्थापना हुई थी। वर्ष 2007 तक सतपुड़ा थर्मल पॉवर स्टेशन मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा पॉवर प्लांट था लेकिन कुछ पुरानी यूनिट बंद होने के बाद वर्ष 2019 से यह मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी का मध्यप्रदेश का तीसरा बड़ा थर्मल पॉवर स्टेशन बन गया। वर्ष 2014 से 250-250 मेगावॉट की दो यूनिट यहां बिजली का उत्पादन कर रही हैं। सारनी के आसपास सुरम्य वन क्षेत्र है। यहां भरपूर वन संपदा उपलब्ध है। वनों में स्थित सागौन, साल, पलास तथा अन्य वृक्ष यहां की हरी-भरी घाटियों को बेहद सुंदर बनाते हैं। इस क्षेत्र की आबादी करीब 86 हजार के आसपास है। सारनी पॉवर हाउस अस्पताल आसपास के क्षेत्र में संजीवनी साबित हो रहा दरअसल बात हो रही है सारनी पॉवर हाउस के अस्पताल की जहां कंपनी कार्मिकों के अलावा अन्य समुदाय के लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल बेहतर तरीके से की जा रही है। सारनी पॉवर हाउस में करीब 580 से ज्यादा अभियंता व कार्मिक कार्यरत हैं। यह कार्मिक सुविधाजनक आवासीय परिसर में रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सारनी कस्बे में बच्चों की पढ़ाई के लिए केन्द्रीय विद्यालय है, बाजार है और बुनियादी जरूरत की सारी सुविधाएं यहां पर उपलब्ध हैं। 55 वर्ष पुराना अस्पताल पूर्णत: सुसज्जित सारनी स्थित यह अस्पताल 1971 में स्थापित हुआ। इस अस्पताल के पहले चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार थे जो बाद में मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मंडल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी नियुक्त हुए। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी के मुख्य अभियंता वी. के. कैथवार ने बताया कि यह अस्पताल सभी तरह की स्वास्थ्य सेवाओं से युक्त है तथा पॉवर हाउस के कार्मिकों के साथ अन्य समुदाय के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। सुदूर अंचल में स्थापित होने के बावजूद यहां अस्पताल में 30 बिस्तरों की व्यवस्था है। अस्पताल में पूर्णकालिक चिकित्सक तथा अनुबंध के आधार पर विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी चिकित्सा सेवाएं देते हैं। अस्पताल में पदस्थ चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय रघुवंशी ने बताया कि अस्पताल में पैरामेडिकल स्टाफ, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स व वार्ड बॉय सभी मिलकर बिजली अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ आसपास के लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं में जुटे हुए हैं।  दूरदराज के लोगों का सहारा अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि से पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं, इनमें महिला वार्ड, पुरुष वार्ड, वर्न यूनिट, एक्स-रे रूम, पैथोलॉजी लैब, ऑपरेशन थिएटर के साथ दवाई वितरण की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। यहां पर इलाज के लिए प्रतिदिन आने वाले मरीजों की संख्या की बात करें तो औसतन 70 से 75 मरीजों की ओपीडी रहती है। इनमें कंपनी कार्मिकों एव उनके परिजनों के अलावा आसपास के गांव के लोग भी अपने परिवार सहित आकर स्वास्थ्य की सुविधाओं का लाभ लेते हैं। यह अस्पताल दूरदराज के समुदाय के लोगों के स्वास्थ्य की भी देखभाल करने में सक्षम है।  दो एम्बुलेंस से तत्काल इलाज की सुविधा मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह बताते हैं कि यह अस्पताल सारनी और इसके आसपास के लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। यहां पर दो एम्बुलेंस भी मरीज की सेवा में तत्पर रहती हैं जो दूर दराज के मरीजों को लाने तथा जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल बैतूल या नर्मदापुरम पहुंचाने का कार्य करती हैं।  

गोविंदपुरा में पोषण माह का भव्य आयोजन, पुरुष बने पोषण चैंपियन

गोविंदपुरा में धूमधाम से मना पोषण माह, पुरुष बने पोषण चैंपियन अन्नप्राशन, जन्मदिन का जश्न और क्विज़ प्रतियोगिता ने बढ़ाया उत्साह भोपाल गोविंदपुरा परियोजना के इंद्रपुरी सेक्टर के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 549 में सोमवार को 8वें पोषण माह की गतिविधियों का रंगारंग आयोजन किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम की थीम रही – “बच्चों की पोषण देखभाल करने वाले पुरुषों को पोषण चैंपियन से सम्मानित करना और उनकी कहानियां साझा करना।” कार्यक्रम का शुभारंभ परियोजना अधिकारी श्रीमती शुभा श्रीवास्तव ने दीप प्रज्वलन और सरस्वती पूजन से किया। इसके बाद माहौल और भी जीवंत हुआ जब सामाजिक संस्थाओं से जुड़ीं श्रीमती किरण शर्मा (सकारात्मक सोच संस्था), श्रीमती रेणु (आरंभ संस्था) और श्रीमती रेखा श्रीधर (मीत संस्था) ने मंच से महिलाओं और पुरुषों को संबोधित किया। उन्होंने परिवार और समाज में पोषण संबंधी जागरूकता पर जोर देते हुए कहा कि “पोषण केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं, पुरुष भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाएं।” सेक्टर सुपरवाइजर श्रीमती अनामिका पटेल ने उपस्थित लोगों को पोषण माह की रूपरेखा और उद्देश्य समझाए। वहीं श्रीमती नीति सक्सेना ने पुरुष प्रतिभागियों के लिए क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया। सवालों के जवाब देने में पुरुषों का उत्साह देखते ही बनता था। थीम के अनुरूप कार्यक्रम में अन्नप्राशन और जन्मदिन समारोह भी रखा गया। खास बात यह रही कि बच्चों के जन्मदिन का केक टीएचआर (टेक होम राशन) से तैयार किया गया था, जिसे काटकर पूरे उल्लास के साथ बच्चों का जन्मदिन मनाया गया। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पोषण व्यंजन प्रदर्शनी भी सजाई। प्रतिभागियों ने इन पौष्टिक व्यंजनों का स्वाद लिया और उनकी महत्ता समझी। अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत स्वल्पाहार के साथ किया गया। पूरे कार्यक्रम में माहौल उत्साह और जागरूकता से सराबोर रहा।