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जाति प्रमाण पत्र मामले में खंडवा के विधायक कंचन तन्वे को न्यायालय ने दिया समर्थन

जबलपुर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने खंडवा से भाजपा विधायक कंचन तन्वे को राहत प्रदान की है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता का वह आवेदन निरस्त कर दिया है, जिसमें विधायक के जाति प्रमाण पत्र की वैधता की सत्यता परखने के लिए राजस्व रिकार्ड तलब किए जाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता को उक्त आवेदन पूर्व में पेश करना था। जब मामले में मुद्दे तय हो गए और आवेदक ने अपनी गवाही समाप्त कर दी, तब उक्त आवेदन स्वीकार नहीं किया जा सकता। उक्त मत के साथ न्यायालय ने आवेदन निरस्त कर मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद निर्धारित कर दी। याचिका खंडवा के आंबेडकर वार्ड निवासी कुंदन मालवीय की ओर से दायर की गई है।   आवेदक का कहना है कि तन्वे वर्ष 2023 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित खंडवा सीट से भाजपा की उम्मीदवार थी। आरोप है कि अनावेदिका ने जो जाति प्रमाण पत्र पेश किया है, वह वैध नहीं, क्योंकि उक्त जाति प्रमाण पत्र का कोई प्रकरण क्रमांक नहीं है, न ही उसकी शासकीय कार्यालय में कोई फाइल है। इतना ही नहीं उक्त प्रमाण पत्र में पिता की जगह पति का नाम दर्ज है। याचिका में मांग की गई कि झूठा जाति प्रमाण पत्र पेश करने पर निर्वाचन शून्य घोषित किया जाना चाहिए। मामले में पूर्व में हुई गवाही के बाद आवेदक की ओर से जाति प्रमाण पत्र की सत्यता के लिए राजस्व रिकार्ड तलब किए जाने का आवेदन पेश किया गया था।

Diwali 2025 तारीख फिक्स: इस दिन करें मां लक्ष्मी की आराधना, मिलेगा अधिक फल

ग्वालियर इस वर्ष में कार्तिक अमावस्या पर श्रीमहालक्ष्मी के पूजन और दीपदान को लेकर भ्रम की स्थिति है। भ्रम का कारण सोमवार व मंगलवार को अमावस्या तिथि का होना है। ज्योतिष विद्वानों ने इस भ्रम की स्थिति को दूर करते हुए 20 अक्टूबर सोमवार को श्रीमहालक्ष्मी पूजन को श्रेष्ठ फलदायी होने के साथ शास्त्र सम्मत बताया है। ज्योतिषाचार्य पं रवि शर्मा ने बताया कि इस दिन प्रदोष काल में अमावस्या की उपस्थिति केवल 14 मिनट की है। यह अवधि एक घटिका (24 मिनट) से भी बहुत कम है। पूजा के कर्मकाल के लिए इतनी अल्पअवधि को केवल 'स्पर्श मात्र' ले सकते हैं। यह दीपावली हेतु पर्याप्त आधार प्रदान करने योग्य नहीं।   धर्मसिंधु का निर्णय सूत्र जब ऐसी स्थिति उत्पन्न हो कि एक दिन पूर्ण व्याप्ति हो और दूसरे दिन न हो, तो धर्मसिंधु का निम्नलिखित सूत्र निर्णय को अंतिम रूप देता है: पूर्वत्रैवप्रदोषव्याप्तौलक्ष्मीपूजादौपूर्वा अभ्यंगस्नानादौपरा॥ अर्थात यदि केवल पूर्व पहले दिन ही प्रदोष काल में अमावस्या की व्याप्ति हो, तो लक्ष्मी पूजन आदि पूर्व पहले दिन ही करना चाहिए। अभ्यंग स्नान आदि अगले दिन किया जा सकता है। 20 अक्टूबर को 'पूर्वत्रैव प्रदोषव्याप्ति' (केवल पहले दिन प्रदोष व्याप्ति) है, अगले दिन केवल स्पर्श मात्र है इसलिए लक्ष्मी पूजन इसी दिन होगा। उपरोक्त सभी शास्त्रीय प्रमाणों, तर्कों और पंचांग के गणितीय विश्लेषण से यह निर्विवाद रूप से सिद्ध होता है कि दीपावली का मुख्य पर्व, लक्ष्मी-गणेश पूजन और दीपदान 20 अक्टूबर, सोमवार को ही करना शुभ, मंगलकारी और शास्त्र सम्मत है। 21 अक्टूबर को प्रदोष काल में अमावस्या की व्याप्ति एक घटिका भी न होने के कारण उसे लक्ष्मी पूजन के लिए ग्रहण नहीं किया जा सकता। वह दिन अमावस्या के स्नान दान और श्राद्ध कर्मों के लिए मान्य होगा। 20 अक्टूबर, सोमवार सूर्यास्त: लगभग पांच बजकर 42 मिनट प्रदोष काल का आरंभ: पांच बजकर 42 मिनट से अमावस्या तिथि का आरंभ पांच बजकर 45 मिनट से इस दिन प्रदोष काल के आरंभ से लेकर संपूर्ण रात्रि तक अमावस्या तिथि की अखंड और संपूर्ण व्याप्ति है। यह लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे आदर्श और शास्त्र सम्मत स्थिति है। 21 अक्टूबर , मंगलवार सूर्यास्त: लगभग पांच बजकर 41 मिनट से प्रदोष काल: आरंभ पांच बजकर 41 मिनट से अमावस्या तिथि की समाप्ति पांच बजकर 55 मिनट पर इस दिन प्रदोष काल में अमावस्या की उपस्थिति केवल 14 मिनट की है। यह अवधि एक घटिका (24 मिनट) से भी बहुत कम है। पूजा के कर्मकाल के लिए इतनी अल्प अवधि को केवल 'स्पर्श मात्र' ले सकते हैं। यह दीपावली हेतु पर्याप्त आधार प्रदान करने योग्य नहीं।

सावधान! बाजार में धड़ल्ले से बिक रहे नकली चांदी के सिक्के, त्योहारी खरीदारी में बरतें सतर्कता

भिंड. त्योहारों के मौसम में जहां बाजारों में रौनक बढ़ती है, वहीं अब मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए हैं। सर्राफा बाजार में इन दिनों मिलावटी और नकली चांदी के सिक्कों की खुलेआम बिक्री हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि असली चांदी में जस्ता मिलाकर ऐसे सिक्के तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें सामान्य खरीदार पहचान नहीं पाते। जांच के बगैर न करें खरीदारी त्योहारों पर लोग धार्मिक कारणों से चांदी के सिक्के खरीदते हैं। लेकिन इस बार बाजार में ऐसे सिक्के बड़ी मात्रा में खपाए जा रहे हैं जिनमें 92.5 या 999 हॉलमार्क नहीं होता। विशेषज्ञों की मानें तो चांदी के सिक्के खरीदते समय सबसे पहले हॉलमार्क और फर्म की सील देखनी चाहिए। प्रमाणित दुकान से ही खरीदारी करें और हमेशा रसीद अवश्य लें, ताकि धोखाधड़ी की स्थिति में शिकायत की जा सके। अक्सर पुराने या एंटीक सिक्कों के नाम पर मिलावटी धातु वाले सिक्के दिए जा रहे हैं। इससे बचने के लिए सिक्कों का बारकोड स्कैन करें और मार्का जांच अवश्य करें। सोना-चांदी के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी अशोक धर्मकांटा के संचालक अशोक सोनी बताशा बाजार के अनुसार इस बार त्योहारी सीजन में सोने-चांदी के दामों ने आम खरीदारों की जेब पर भारी असर डाला है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को चांदी का भाव ₹1,65,000 प्रति किलो तक पहुंच गया। दो साल पहले तक जो सोने की लोंग ₹500 से ₹800 में मिल जाती थी, अब उसकी कीमत ₹2000 से ₹2500 तक हो गई है। इसी तरह चांदी की पायलें, जो पहले ₹1500 से ₹2000 में मिल जाती थीं, अब ₹4000 से ₹4500 तक बिक रही हैं। त्योहार की चमक पर पड़ा असर दामों में इस बढ़ोतरी और नकली चांदी की बढ़ती बिक्री से सर्राफा व्यापारी भी मायूस हैं। उनका कहना है कि दीपावली जैसे बड़े पर्व पर भी इस बार बाजार में वह रौनक नहीं दिख रही जो हर साल देखने को मिलती थी। ग्राहकों से अपील सतर्क रहें, प्रमाणित खरीदारी करें – विशेषज्ञों और सर्राफा व्यापारियों ने ग्राहकों से अपील की है कि वे लालच या जल्दबाजी में खरीदारी न करें। हमेशा प्रमाणित दुकानों से ही सोने-चांदी के सिक्के और जेवर खरीदें। हॉलमार्क, सील, रसीद और बारकोड जांचें, ताकि नकली या मिलावटी धातु से बचा जा सके।

ग्वालियर को मिला तोहफा, रेलवे बोर्ड बनाएगा नैरोगेज म्यूजियम को पर्यटन हब

ग्वालियर.  रेलवे बोर्ड की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हेरिटेज आशिमा मेहरोत्रा और डिप्टी डायरेक्टर हेरिटेज राजेश कुमार ने तानसेन रोड स्थित पुराने एरिया मैनेजर कार्यालय में बने नैरोगेज म्यूजियम का निरीक्षण किया। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इस म्यूजियम का निरीक्षण कर इसे संवारने के निर्देश दिए थे, वहीं भाजपा नेता सुधीर गुप्ता ने भी रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार को ज्ञापन सौंपकर इस म्यूजियम को नागपुर नैरोगेज म्यूजियम की तर्ज पर विकसित करने की मांग की थी। इसके बाद गुरुवार को रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने इस म्यूजियम का निरीक्षण किया। इस दौरान एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर आशिमा मेहरोत्रा ने नैरोगेज हेरिटेज संग्रहालय के साथ ही लोको शेड का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस हेरिटेज बिल्डिंग को रेनोवेशन की जरूरत है। इसके अलावा संग्रहालय के तौर पर विकसित करने की स्थिति में बिल्डिंग में वर्तमान में संचालित होने वाले एडीईएन, एडीईई तथा एसीएम आफिस को दूसरी जगह पर शिफ्ट किया जाएगा। हेरिटेज बिल्डिंग के पास जीर्ण-शीर्ण क्वार्टर को हटाकर वहां म्यूजियम का विस्तार किया जा सकता है। पर्यटक स्थल की तरह यह विस्तार नागपुर नैरोगेज हेरिटेज म्यूजियम की तरह होगा इसमें बच्चों की टाय ट्रेन चलाने का भी विकल्प रखा जा सकता है। वहीं, सिंधिया स्टेट के हेरिटेज सैलून कोच, इंजन तथा नैरोगेज ट्रेन से संबंधित सभी उपकरण को यहां शोकेस किया जा सकता है। डिजिटल स्क्रीन और आडियो विजुअल के माध्यम से रेलवे हेरिटेज नैरोगेज ट्रेन का इतिहास दिखाने की भी संभावना है। संग्रहालय को ऐतिहासिक रूप देने के साथ ही यहां फोटो गैलरी और कैफेटेरिया का भी निर्माण किया जा सकता है। सिंधिया स्टेट के दौर में 1885 में निर्मित नैरोगेज म्यूजियम ऐतिहासिक महत्व रखता है। इस अवसर पर प्रयागराज से मुख्य चल शक्ति अभियंता आरडी मौर्य, एडीआरएम नंदीश शुक्ला, सीडब्लूएम शिवाजी कदम, सीनियर डीएमई गौरव यादव, एडीईएन अजीत मिश्रा, स्टेशन डायरेक्टर वीके भारद्वाज एवं प्रयागराज तथा झांसी के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। नैरोगेज ट्रैक का भी किया निरीक्षण, बोर्ड को देंगे रिपोर्ट वहीं रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने घोसीपुरा से लेकर मोतीझील तक नैरोगेज ट्रैक का भी निरीक्षण किया। लंबे समय से शहर में नैरोगेज हेरिटेज ट्रेन चलाने की मांग की जा रही है। ऐसे में, रेलवे के अधिकारियों ने इसका भी गहनता से सर्वे किया। हालांकि अभी इस मामले में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर बोर्ड को सौंपी जाएगी और अंतिम निर्णय वहीं से होगा।  

2080 करोड़ की लागत से बनेगा उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई सफर होगा और तेज

उज्जैन  उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे कंट्रोल्ड हाइवे बनाने का टेंडर निरस्त होने के बाद मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPRDC) ने इस 102 किलोमीटर के हाईवे को बनाने के लिए एक बार फिर से 2418.46 करोड रुपए का टेंडर जारी किया था। इसको भरने के लिए अंतिम तारीख 24 जुलाई थी। नए टेडर 20 जून को जारी किए गए थे, जो सितंबर माह में अब खाले गए। एलएलसी वोल्गाडोरस्ट्रॉय कंपनी ने 2080 करोड़ में हाईवे बनाने का टेंडर लिया है। 2 साल में कार्य पूरा करना है।  सिंहस्थ 2028 तक एक्सप्रेसवे होना है तैयार इस कार्य में 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार के द्वारा दी जाएगी और 60 प्रतिशत राशि ठेकेदार को व्यय करनी है। इस हाइवे के बनने से उज्जैन की मुंबई व दिल्ली से दूरी मात्र 10 घंटे में पूरी हो जाएगी। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाइवे को सिंहस्थ 2028 से पहले बनाना है। पूर्व में 102.80 किमी लंबे उज्जैन-जावरा फोरलेन परियोजना को मंजूरी दी गई थी जो ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाइवे के इस जगह पर बना था। तब शहरी क्षेत्र में इसका विरोध भी काफी हुआ था, इसके लिए संघर्ष समिति ने लगातार तीन माह तक धरना भी दिया था। अब इसको पीपीपी मोड पर हाइब्रिड एनयूटी आधार पर बनाया जाएगा।  7 बड़े और 26 छोटे पुल बनेंगे हाईवे पर इस हाइवे पर 7 बड़े और 26 छोटे पुल सहित 270 पुलिया, पांच लाई ओवर और दो रेलवे ओवरब्रिज होंगे। यह मार्ग जावरा के पास ग्राम भूतेड़ा से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा। अब मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने एक बार फिर से इस कार्य के लिए टेंडर जारी किए हैं। दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे व उज्जैन रोड यहां मिलेगा ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे सफर 10 घंटे में पूरा इस हाइवे बनने के बाद उज्जैन से दिल्ली या मुंबई तक का सफर 10 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। सितंबर 2024 में उज्जैन के गांवों से जमीन अधिग्रहण शुरु हुआ था और मार्च 2025 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य था। मगर किसानों की तरफ से जमीन के बदले मुआवजा या रोड के डिजाइन को लेकर आए विरोध व तकनीकी कारणों के चलते काम रुक गया था। इसलिए इस मार्ग का दोबारा से टेंडर जारी किया गया है और जिस कंपनी ने इसे लिया है उसे 2 साल में यह कार्य पूरा करके भी देना है।  51 से अधिक गांवों से गुजरेगा हाइवे यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जावरा तहसील के 12 गांव से होता हुआ उज्जैन तक 51 गांवों से गुजरेगा। इनमें नागदा, खाचरौद, उन्हेंल तहसील के 30 गांव शामिल है। इसमें जावरा तहसील के डोडियाना, ललियान सहित जावरा तहसील के 12 गांव इसमें समिलित हो रहे हैं। अन्य तहसील के गांव जैसे निबोदिया खुर्द, पांसलोद, भाटीसुडा, आक्यानजीक, झिरनिया, पिपलिया डाबी, लसुडिया चुवंड, पिपलियाशीष, नवादा, कुंडला, नागझिरी, भाटखेडी, बंजारी, दुमनी, मीण, घिनौदा आदि गांव शामिल है। फैक्ट फाइल     स्थान : मध्य प्रदेश     लंबाई: 98.73 किमी परियोजना     इस प्रकार : ग्रीनफील्ड राजमार्ग चार-लेन का बनेगा     इन कपनी ने लिया टेंडर एलएलसी वोल्गाडोरस्ट्रॉय     राशि- 2080 करोड़     कार्य – 2 साल में करना है पूरा     मेंटेनेंस – कार्य पूरा होने के बाद 15 साल तक करना है मेंटेनेंस खुल गया है टेंडर- एमपीआरडीसी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का टेंडर खुल गया है जिस कंपनी ने यह टेंडर लिया है वह जल्द ही ड्राइंग डिजाइन बनाकर इस कार्य को शुरु करने के लिए काम करेगी।-विजय सिंह, एमपीआरडीसी

खेती की जमीन पर अवैध कॉलोनियां, भोपाल कलेक्टर ने एसडीएम को दिए सख्त निर्देश

भोपाल  भोपाल जिले में कॉलोनाइजरों द्वारा किसानों के साथ मिलकर खेती जमीन पर अवैध कॉलोनियां काटकर प्लाट बेचे जा रहे हैं। जब इन सभी कॉलोनाइजरों को चिह्नित कर नोटिस देते हुए अनुमतियों के दस्तावेज मांगे गए तो यह कलेक्टर न्यायालय में पेश नहीं कर सके। ऐसे में अब इन सभी अवैध कॉलोनियों को काटने वाले बिल्डर, किसान व अन्य सहित करीब 113 लोगों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसको लेकर कलेक्टर न्यायालय द्वारा इनकी सूची बनाकर एसडीएम को थमा दी गई है और जल्द से जल्द इनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद भी यदि जमीनी स्तर पर एसडीएम, तहसीलदार द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है तो उनसे भी जवाब-तलब किया जाएगा। शहर के नगरीय क्षेत्र में प्रापर्टी के दामों में जमकर वृद्धि होने के बाद से अब लोग मकान, प्लाट, फार्म हाउस खरीदने के लिए शहरी क्षेत्र से लगी सीमा पर ग्रामीण क्षेत्रों में जमकर प्रापर्टी की खरीदारी कर रहे हैं। तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं यही कारण है कि बड़े -बड़े बिल्डर यहां स्थित जमीनों के मालिक यानि किसानों के साथ मिलकर बिना किसी अनुमति के अवैध कॉलोनिया काटकर प्लाट बेच रहे हैं। जिसमें किसी तरह की कोई अनुमति नहीं ली जाती है बस खरीदार को बदले में एक रजिस्ट्री थमा दी जाती है। जिसके बाद में बिजली, पानी, सड़क, सीवेज सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगाना पड़ते हैं। इन्हीं अवैध कॉलोनियों के खिलाफ हुजूर, कोलार तहसील, गोविंदपुरा वृत्त के एसडीएम और तहसीलदारों को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने निर्देश दिए थे। कलेक्टर न्यायालय में अवैध कॉलोनी काटने के मामले में एसडीएम द्वारा चिह्नित कॉलोनाइजर, बिल्डर व किसानों को नोटिस जारी कर अनुमति संबंधी दस्तावेज पेश करने का समय दिया गया था। कलेक्टर न्यायालय में वह डायवर्जन, भवन अनुज्ञा सहित अन्य कोई भी ऐसी अनुमति नहीं पेश कर पाए, जिससे यह साबित हो सके कि वह अवैध कॉलोनी नहीं काट रहे हैं। इसके बाद कलेक्टर ने सभी के खिलाफ एसडीएम को एफआईआर करवाने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने सूची कुछ दिनों पहले हुजूर, कोलार एसडीएम को भेज दी थी, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं करवा पा रहे हैं। नगरीय सीमा से लगे इन क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियां जिले में नगरीय सीमा से लगे जिन क्षेत्रों में जमकर खेती की जमीन पर अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं। इनमें सेवनिया ओंकारा, कोटरा, पिपलिया बेरखेड़ी, कुराना, थुआखेड़ा, कालापीन, सुरैया नगर, छावनी पठार, कुराना, कानासैया, खंडाबर, सिकंदराबाद, थुआखेड़ा, शोभापुर, कोलुआ खुर्द, अरेड़ी, नरेला वाज्याफ्त, इब्राहिमपुरा, जगदीशपुर, कलखेड़ा, हज्जामपुरा, अचारपुरा, बसई, परेवाखेड़ा, ईंटखेड़ी सड़क, अरवलिया, मुबारकपुर, बीनापुर, गोलखेड़ी, चौपड़ा कलां, हज्जाम सहित बसई शामिल हैं। एसडीएम को दिए एफआईआर के निर्देश     जिले में बिना अनुमति के अवैध कॉलोनी विकसित कर प्लाट बेचने वालों की सूची तैयार कर ली है। उनके खिलाफ एफआईआर करने के निर्देश हुजूर, कोलार तहसील के एसडीएम को दिए गए हैं। यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो जवाब तलब किया जाएगा। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर  

लाडली बहना योजना अपडेट: अब मिलेगा दोगुना फायदा, 3000 रुपए तक की सुविधा

भोपाल  मध्य प्रदेश की 1.26 करोड़ से ज़्यादा लाडली बहना योजना की लाभार्थियों को इस महीने से हर महीने 1,500 रुपये मिलेंगे, जो कि पहले के 1,250 रुपये से ज़्यादा हैं। हालांकि, यह बढ़ी हुई राशि दिवाली के बाद ही उनके खातों में आएगी। पहले जहां हर महीने की 15 तारीख के आसपास पैसे मिल जाते थे, वहीं अब लाभार्थियों को बढ़ी हुई रकम के लिए महीने के अंत तक इंतज़ार करना होगा। भाईदूज से मिलेंगे 1500 रुपए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि 1,250 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये की यह मासिक सहायता राशि भाई दूज से मिलनी शुरू हो जाएगी। लेकिन, अभी यह साफ नहीं है कि सरकार इस महीने की 15 तारीख से पहले 1,250 रुपये देगी और फिर 250 रुपये अलग से, या फिर एक साथ पूरे 1,500 रुपये का भुगतान करेगी। अधिकारियों का कहना है कि दिवाली के बाद लाभार्थियों को एक साथ 1,500 रुपये मिलेंगे। अगले महीने से हर महीने इसी तरह 1,500 रुपये दिए जाएंगे, जैसा कि अभी पैसे देने का तरीका है। 3000 रुपए तक बढ़ेगी राशि मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि भाई दूज के बाद से हर महीने 1,500 रुपये मिलेंगे और धीरे-धीरे इस योजना के तहत मिलने वाली राशि को 3,000 रुपये तक बढ़ाया जाएगा। इस योजना का मासिक खर्च, जो अभी 1.26 करोड़ लाभार्थियों को 1,250 रुपये देने के लिए 1,541 करोड़ रुपये से ज़्यादा है, अब 1,800 करोड़ रुपये से ऊपर चला जाएगा। शुरुआत में मिलते थे 1000 रुपए शुरुआत में, मध्य प्रदेश सरकार ने इस योजना के तहत हर महीने 1,000 रुपये दिए थे। 27 अगस्त 2023 को पिछली बीजेपी सरकार ने अक्टूबर 2023 से इसे बढ़ाकर 1,250 रुपये प्रति माह करने की घोषणा की थी। सरकार ने धीरे-धीरे राशि बढ़ाने का वादा किया था: 1,000 रुपये से 1,250 रुपये, फिर 1,500 रुपये, 1,750 रुपये, 2,000 रुपये, 2,250 रुपये, 2,500 रुपये, 2,750 रुपये और आखिर में 3,000 रुपये प्रति माह तक। मंत्री ने की पुष्टि महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने पुष्टि की है कि लाभार्थियों को अक्टूबर से हर महीने 1,500 रुपये मिलेंगे। दिवाली के बाद एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जहां लाभार्थियों के खातों में पैसे ट्रांसफर किए जाएंगे। कार्यक्रम का शहर अभी तय नहीं हुआ है। क्या है लाडली बहना योजना लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की महिलाओं के लिए सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना है। 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले शुरू की गई इस योजना को एक ऐसा कदम माना गया जिसने बीजेपी को भारी बहुमत से सत्ता में वापस लाने में मदद की। कई दूसरे राज्यों ने भी अलग-अलग नामों और तरीकों से इस योजना की नकल की है। 12 सितंबर को सीएम यादव ने 1.26 करोड़ लाड़ली बहना लाभार्थियों के बैंक खातों में 1,541 करोड़ रुपये से ज़्यादा की 28वीं किस्त ट्रांसफर की थी। योजना शुरू होने के बाद से अब तक 41,000 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं।

मध्य प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स निगम ने युवाओं को दिया सिंहस्थ के लिए तकनीकी समाधान प्रस्तुत करने का मौका

उज्जैन   सिंहस्थ-2028 के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा-आधारित तकनीकों के माध्यम से भीड़ प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा, गतिशीलता, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसी चुनौतियों का समाधान किया जाएगा। इसके लिए उज्जैन महाकुंभ हैकाथान का आयोजन किया गया था। भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल में उज्जैन महाकुंभ हैकाथान-2025 के दो दिन के सत्र में प्रौद्योगिकी, नवाचार और संस्कृति का संगम देखने को मिला। मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रानिक्स विकास निगम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इस आयोजन में देशभर के युवाओं को एक मंच पर सिंहस्थ-2028 के लिए स्मार्ट, सुरक्षित और समावेशी समाधान प्रस्तुत करने का अवसर मिला। यह सिंहस्थ-2028 के लिए समाधान विकसित करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। देश के 26 राज्यों से पंजीकरण और 11 राज्यों की 36 चयनित टीमों की भागीदारी ने इस हैकाथान को भारत की नवाचार विविधता का प्रतीक बनाया। टीमों ने नवाचार और तकनीक के अलग-अलग प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किए। चयनित टीमें अगले दो महीनों के परिशोधन अवधि में अपने समाधानों को और विकसित करेंगी, जिससे सिंहस्थ-2028 के लिए एक सशक्त, समावेशी और टिकाऊ तकनीकी आधार तैयार हो सके। कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, आयुक्त, नगरीय प्रशासन संकेत एस. भोंडवे सहित गणमान्य व्यक्तियों ने प्रतिभागियों के रचनात्मक, तकनीकी और सामाजिक रूप से प्रासंगिक समाधानों की सराहना की। किसी ने यूनिफाइड प्लेटफार्म तो किसी ने भीड़ नियंत्रण प्रणाली की विकसित सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजनों के लिए डिजाइन नवाचारों में जंगोह (इंदौर) ने 'सिंहथा यूनिफाइड' प्लेटफार्म प्रस्तुत किया। यह स्थानीय भाषाओं में एआइ-संचालित सहायता, रीयल-टाइम अपडेट्स प्रस्तुत करता है। सेल्फ सर्व बूथ ने एक 6डी वर्चुअल रियलिटी अनुभव प्रस्तुत किया, जो कुंभ के वातावरण को वैश्विक दर्शकों के लिए सजीव बनाता है। संचार वारियर ने एक रीयल-टाइम भीड़ निगरानी और चेतावनी प्रणाली विकसित की जो आपात स्थिति में मूक रिपोर्टिंग को भी सक्षम बनाती है। सेफ क्लाक ने भारतीय भाषाओं में डेटा भंडारण माडल पर ध्यान केंद्रित किया। मेडीवेंड ने रियल-टाइम वाइस इंटरफेस से युक्त एक चिकित्सा वेंडिंग प्लेटफार्म प्रदर्शित किया। उज्जैन महाकुंभ हैकाथान ने न केवल भविष्य की तकनीकी शासन प्रणाली की झलक दी, बल्कि मध्य प्रदेश के डिजिटल ट्रांसफार्मेशन विजन को भी मजबूती प्रदान की।

मध्य प्रदेश में मंत्री-कार्यशैली पर समीक्षा, मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी तेज

भोपाल मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है. निगम, मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्तियों को लेकर जोर-शोर से चर्चा चल रही है. इसके साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार की खबरें भी सुर्खियों में हैं. पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक बड़े नेताओं की मुलाकातों का सिलसिला लगातार जारी है. पिछले दो दिनों में ही 10 से अधिक बड़े नेताओं ने एक-दूसरे से मुलाकात की है, जिसने इन बदलावों की अटकलों को और हवा दी है. नेताओं की मुलाकातों का सिलसिला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की. वहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से चर्चा की. इसके अलावा, संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और हेमंत खंडेलवाल ने भी दिल्ली में कई बड़े नेताओं से मुलाकात की. इन मुलाकातों में संगठन और सरकार के बीच तालमेल, नियुक्तियों और मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल जैसे मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है.  मध्य प्रदेश के कमिश्नर और कलेक्टरों की भोपाल में दो दिन चली कांफ्रेंस के बाद अब मुख्यमंत्री डा मोहन यादव अपनी सरकार के मंत्री व विधायकों के कामकाज की समीक्षा करेंगे। वह मंत्रियों के साथ वन-टू-वन बैठक करके विभागवार उनके कामकाज की समीक्षा करेंगे। विभागवार मंत्रियों के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा और इसके आधार पर मंत्रियों के कामकाज की ग्रेडिंग तय होगी। जल्द ही मंत्रियों के साथ बैठक का दौर शुरू करने की तैयारी है। यही वजह रही कमिश्नर कलेक्टरों की कांफ्रेंस में किसी भी मंत्री से शामिल नहीं किया गया। विधायकों को चार साल का रोडमैन बनाने के लिए कहा कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों की स्थिति का आकलन किया है। इस आधार पर अब वह मंत्रियों से जानेंगे कि उन्होंने 20 माह में अपने प्रभार के जिलों में क्या-क्या कार्य किए। इसी तरह मुख्यमंत्री डॉ. यादव पार्टी के विधायकों के कामकाज को भी देखेंगे। उल्लेखनीय है कि विधायकों को चार साल का रोडमैप बनाने के लिए कहा गया था। उन्होंने अपने विधायक निधि का जनकल्याण में कितना उपयोग किया, इसकी रिपोर्ट भी तैयार कराई गई है। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इधर, मुख्यमंत्री ने पहले ही मंत्रियों के परफारमेंस की एक रिपोर्ट तैयार कराई है, जो केंद्रीय नेतृत्व को भेजी गई थी। सिंहस्थ -2028 से कार्यों से जुड़े से 12 विभागों की मुख्यमंत्री अलग से बैठक लेंगे। मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत मुख्यमंत्री जिस तरह से मंत्रियों के कामकाज पर नजर बनाए हुए हैं उससे मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत मिल रहे हैं। पूर्व में मुख्यमंत्री द्वारा अपने मंत्रियों के कामकाज की रिपोर्ट तैयार कराने के बाद इसकी प्रबल संभावना देखी जा रही है। मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो क्षेत्रीय संतुलन साधने के हिसाब कुछ पूर्व मंत्रियों को फिर मौका दिया जा सकता है। वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित 31 मंत्री हैं। नियम के अनुसार 35 मंत्री हो सकते हैं। इन बिंदुओं पर होगी चर्चा     कितने मंत्रियों ने गांव में रात्रि विश्राम किया और गांव में चौपाल लगाई।     प्रभार के जिलों में प्रतिमाह दौरा कर रहे हैं या नहीं।     मंत्रियों की अपने प्रभार के जिलों में अधिकारियों के साथ कैसा तालमेल हैं।     पार्टी संगठन के कामकाज में सहभागिता कैसी है।     केंद्र से मिले अभियानों को सफल बनाने में कितने मंत्रियों का प्रदर्शन अच्छा रहा।     कितने मंत्रियों से आमजन व पार्टी कार्यकर्ता संतुष्ट है या नहीं।  

डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम: 9 जिलों के 10 शहरों में नक्शा प्रोजेक्ट का शुभारंभ

उज्जैन  प्रदेश में शहर की जमीनों का रिकॉर्ड अब डिजिटल किया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय भूमि संसाधन विभाग द्वारा 'नक्शा' (National Geospatial Knowledge based Land Survey of Urban Habitation) कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।  प्रोजेक्ट की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान ने रायसेन जिले से की थी। इसमें प्रदेश के 9 जिलों के 10 शहरों को पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया है। इनमें उज्जैन जिले से उन्हेल शामिल हैं। वहीं शाहगंज, छनेरा, आलीराजपुर, देपालपुर, धारकोठी, मेघनगर, माखननगर (बाबई), विदिशा और सांची कस्बा है। उन्हेल कस्बे के लिए आयुक्त, भू-अभिलेख द्वारा जारी अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित की गई है। इसमें वर्णित क्षेत्र भू-सर्वेक्षण के अधीन अधिसूचित किए गए हैं। इस आधार पर कलेक्टर द्वारा प्रारूप (नियम 14) में सर्वेक्षण संक्रियाओं के प्रारंभ होने की घोषणा की गई है। इसके बाद कस्बा उन्हेल में नक्शा प्रोजेक्ट के तहत कार्य प्रचलित है। भू-सर्वेक्षण के दौरान नवीन अधिकार अभिलेख तैयार किया जाएगा। इसमें सभी खातेदारों के नाम, उनके अंश, दायित्व तथा सुखाचार अधिकार अभिलिखित किए जाएंगे। ग्रामों के लिए निस्तार पत्रक तथा वाजिब-उल-अर्ज भी तैयार किया जाएगा। 413 शहरों में नक्शे और संपत्तियों की झंझटें खत्म जमीनों, मकानों के नक्शे, संपत्तियों में आनेवाली झंझटें खत्म कर दी गई हैं। प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी रिकॉर्ड, संपत्तियों का प्रबंधन और विकास योजनाओं को बेहतर बनाने के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली यानि GIS सर्वे और मानचित्रण का उपयोग किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि प्रदेश के 413 शहरों में यह काम पूरा कर लिया गया है। जीआइएस सर्वे के तहत ड्रोन सहित विभिन्न तकनीकों के इस्तेमाल से जमीनी सर्वेक्षण किया गया और डिजिटल मानचित्र बनाए गए हैं। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि नगरीय निकायों की कार्य दक्षता में भी वृद्धि होगी। GIS सर्वे से संपत्ति के मालिक, कर प्रणाली और भूमि उपयोग की जानकारी एक क्लिक से मिल सकेगी। इससे जहां पारदर्शिता में वृद्धि होगी वहीं जमीन से संबंधित लेनदेन भी सरल हो गया है। GIS डेटा के इस्तेमाल से शहरी नियोजन और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।