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भोपाल के बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय को मिला नया नाम, जानें ‘मां वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी’ रखने की वजह

भोपाल  बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक में विश्वविद्यालय का नाम बदलकर वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। प्रस्ताव अब अंतिम निर्णय के लिए राज्य शासन को भेजा जाएगा। शासन की स्वीकृति मिलने के बाद ही नाम परिवर्तन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।  राजा भोज की विरासत का दिया गया हवाला बैठक में राजा भोज के ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रस्ताव के समर्थकों का कहना था कि मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और बौद्धिक विरासत में राजा भोज का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसी आधार पर विश्वविद्यालय को नई पहचान देने की पहल की गई है। राजा भोज की विरासत का दिया गया हवाला प्रस्ताव में राजा भोज के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक योगदान का उल्लेख किया गया. प्रस्ताव में कहा गया, 'राजा भोज की तुलना में बरकतउल्ला भोपाली के भोपाल निवासी होने से अधिक इस क्षेत्र के लिए किसी प्रकार का योगदान नजर नहीं आता है'. इसी तर्क के आधार पर विश्वविद्यालय का नाम बदलने की सिफारिश की. प्रस्ताव में ये भी कहा गया कि भोपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए विश्वविद्यालय का नाम "वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय" किया जाना अधिक उपयुक्त होगा।  कौन थे बरकतउल्ला भोपाली? बता दें कि मौलाना मोहम्मद बरकतउल्ला भोपाली भोपाल में जन्मे भारत के प्रमुख क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानियों में से थे. उन्होंने भारत के बाहर रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को वैश्विक समर्थन दिलाने का प्रयास किया. इसके अलावा गदर आंदोलन से जुड़े और भारतीय क्रांतिकारियों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बने. वहीं 1927 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में उनका निधन हुआ था।  राजा भोज ने लिखे थे 80 ग्रंथ राजा भोज द्वारा लगभग अस्सी ग्रंथ लिखे गए, जिनमें से 27 ग्रंथ आज भी उपलब्ध है. राजा भोज ने केवल स्वयं ग्रंथ नहीं लिखे, बल्कि अपनी राजधानी धारा (धार) को ज्ञान का सबसे बड़ा केंद्र बनाया था. उन्होंने वहां 'भोजशाला' (सरस्वती मंदिर) की स्थापना की, जो उस दौर का एक महान विश्वविद्यालय था. भोज शाला में उनके द्वारा स्थापित की गई वाग देवी की प्रतिमा जो आज इंग्लैंड के संग्रहालय में रखी गई है. उन्हें विद्या की आराध्य देवी सरस्वती के रूप में 1000 वर्ष तक पूजी गई।  शासन की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि कार्यपरिषद से प्रस्ताव पारित होने के बाद अब इसे शासन के पास भेजा जाएगा। आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। अंतिम फैसला राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाएगा। अरबी-पर्शियन विभागों का होगा पुनर्गठन बैठक में शैक्षणिक ढांचे से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। इसके तहत अरबी और पर्शियन विभागों को पुनर्गठित कर तुलनात्मक भाषा एवं संस्कृति विभाग के अंतर्गत लाने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे अकादमिक गतिविधियों में बेहतर समन्वय और अध्ययन के नए अवसर विकसित होंगे। बीएड कॉलेजों पर सख्ती कार्यपरिषद की बैठक में बीएड कॉलेजों के निरीक्षण में सामने आई अनियमितताओं पर भी चर्चा हुई। करीब 30 कॉलेजों में कमियां मिलने के बाद संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि नियमों के पालन को लेकर आगे भी सख्ती जारी रहेगी। 1988 में मिला था 'बरकतउल्लाह' नाम भोपाल के इस प्रमुख उच्च शिक्षा केंद्र की स्थापना साल 1970 में 'भोपाल विश्वविद्यालय' के रूप में हुई थी। इसके बाद, मौलाना बरकतउल्लाह के देश की आजादी में दिए गए अद्वितीय योगदान को सम्मान देने के लिए साल 1988 में इसका नाम बदलकर 'बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय' किया गया था। 1854     भोपाल में महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना बरकतउल्लाह का जन्म हुआ। 1915     काबुल (अफगानिस्तान) में बनी भारत की पहली अस्थायी सरकार में मौलाना बरकतउल्लाह प्रधानमंत्री बने। 1970     भोपाल में इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय की स्थापना 'भोपाल विश्वविद्यालय' के नाम से हुई। 1988     विश्वविद्यालय का नाम बदलकर क्रांतिकारी मौलाना बरकतउल्लाह के नाम पर रखा गया। 2026 (अब)     कार्य परिषद की बैठक में नाम बदलकर 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' करने का प्रस्ताव पास हुआ। क्या है नए नाम 'वाग्देवी भोजपाल' का मतलब? विश्वविद्यालय को दिया गया नया नाम 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' इसके ऐतिहासिक और प्राचीन स्वरूप को दर्शाता है। इसमें शामिल 'वाग्देवी' शब्द ज्ञान, कला और बुद्धि की देवी मां सरस्वती का प्रतीक है। वहीं 'भोजपाल' शब्द भोपाल के प्राचीन इतिहास और राजा भोज के काल से सीधा संबंध जोड़ता है। नाम परिवर्तन पर उठा विरोध का स्वर बैठक में नाम परिवर्तन के प्रस्ताव का विरोध भी सामने आया। कुछ सदस्यों ने स्वतंत्रता सेनानी बरकतउल्लाह भोपाली के योगदान का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय का मौजूदा नाम बरकरार रखने की बात कही। उनका तर्क था कि बरकतउल्लाह भोपाली का स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है, इसलिए उनके नाम से जुड़े संस्थान की पहचान कायम रहनी चाहिए। कार्यपरिषद के इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में बहस शुरू हो गई है। अब सभी की नजर राज्य शासन के निर्णय पर टिकी है, जहां इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगनी है। 

जनजातीय समुदाय के रीति-रिवाजों को रखा जाएगा यूसीसी से अलग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में शीघ्र लागू होगी समान नागरिक संहिता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय समुदाय के रीति-रिवाजों को रखा जाएगा यूसीसी से अलग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दो साल में प्रारंभ किये प्रदेश में 7 नए मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री डॉ. यादव नई दिल्ली में इंडिया@2047 कॉन्क्लेव में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश में एक निशान, एक विधान और एक कानून लागू हो, इस राष्ट्रीय भावना में कुछ भी गलत नहीं है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को देश के 3 राज्यों ने पहले ही लागू कर दिया है। हमारी सरकार भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। शीघ्र ही मध्यप्रदेश भी देश का यूसीसी लागू करने वाला राज्य बन जाएगा। इसके लिए हमने उच्चतम न्यायालय की रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति श्रीमती रंजना देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीति गठित कर दी है। यह समिति जिला स्तर पर सभी वर्गों से उनकी राय ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जनजातीय समुदाय को यूसीसी से पृथक रखा जाएगा। उन्हें अपने पारम्परिक रीति-रिवाज मानने की स्वतंत्रता होगी। गुजरात में भी इसी प्रकार का प्रावधान लागू किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया@2047 कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति योग्य है, तो सरकार जाति, धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर कार्य करती है। आज जनजातीय वर्ग से आने वाली श्रीमती द्रोपदी मुर्मु देश के राष्ट्रपति पद की शोभा बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि हम मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए खुले विचार और खुले हृदय के साथ काम करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मध्यप्रदेश को सभी क्षेत्रों में अव्वल राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन की चुनौती के दौर में प्रधानमंत्री डॉ. नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर हमारी सरकार ने पर्यावरण और ईंधन को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) खरीदा है। अब वे ईवी से ही यात्रा करेंगे। यह पर्यावरण अनुकूल वाहन (ईवी) ईंधन के संरक्षण के साथ-साथ वायु प्रदूषण को भी रोकने में कारगर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। ग्रामीण आबादी को दूध उत्पादन, पशुपालन और आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए प्रयास किए गए हैं। गांव-गांव तक बिजली, पानी और सड़कों का विकास हुआ है। पिछले साल सरकार ने औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए काम किया। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है। प्रदेश के इंडस्ट्रियल पार्कों में यूनिट्स खुल गईं और लोगों को रोजगार के अवसर मिलने लगे हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस -2025) में 30 लाख करोड़ रुपए के एमओयू साइन हुए थे। इसमें से अब तक करीब 30 प्रतिशत निवेश धरातल पर नजर आ रहा है। यह राज्य सरकार का बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विकास में शिक्षा का विशेष महत्व है। मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर 2002-03 तक मेडिकल कॉलेजों की संख्या केवल 5 थी। अब इनकी संख्या बढ़कर 30 हो गई है। इनमें से 7 नए मेडिकल कॉलेज तो हमने पिछले 2 साल के दौरान ही प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में 3 नए शासकीय विश्वविद्यालय खरगोन में टंट्या मामा, गुना में तात्या टोपे और सागर में रानी अवंती बाई लोधी के नाम पर शुरू किए गए हैं। सभी 55 जिलों में नए पीएम एक्सीलेंस कॉलेज भी संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अब कृषि संकाय की भी पढ़ाई कराई जा रही है। प्रदेश में नए-नए सांदीपनि विद्यालय तेजी से खोले जा रहे हैं। प्रदेश के शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास के लिए हम तेजी से काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ग्लोबल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव (जीआईएस) पहले केवल इंदौर तक सीमित थी। हमारी सरकार ने इसे पहली बार राजधानी (भोपाल) में आयोजित किया। इससे पहले राज्य में संभाग और जिला स्तर पर रीवा, ग्वालियर, नर्मदापुरम, कटनी जैसे स्थानों पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (आरआईसी) आयोजित कर निवेशकों को आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर अंचल की अलग-अलग विशेषता है। राज्य सरकार ने उद्योग केंद्रित 18 नीतियां लागू कीं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में भारी उद्योग, लघु उद्योग और एमएसएमई में देशभर से निवेश आया। कई कारखानों में उत्पादन शुरू हो चुका है। राज्य सरकार की पहल पर प्रदेश में आई औद्योगिक क्रांति से अब तक 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग स्थापित करने पर सरकार प्रति श्रमिक 5000 रुपए महीना आर्थिक सहायता 10 वर्ष तक देगी। अन्य श्रेणी के उद्योगों को आगे बढ़ने में भी सरकार पूरी मदद दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी धर्म का अपमान करना हमारी संस्कृति नहीं है लेकिन अपने धर्म पर गर्व करने में क्या बुराई है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में अपना विशिष्ट स्थान बना रहा है। अब हमारी सरकारें माननीय न्यायालयों के निर्णयों को पूरे सदभाव और शांतिपूर्ण तरीके से लागू करा रही हैं। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी ने विरासत से विकास का घोष वाक्य दिया है। हमारा इतिहास बहुत समृद्ध है। राजा भोज की कर्मस्थली धार में स्थापत्य कला के अनेक उदाहरण भरे पड़े हैं। यहां भोजशाला परिसर में ज्ञान की देवी सरस्वती (मां वाग्देवी) की प्रतिमा को वापस लाकर स्थापित किया जाएगा। हम न्यायालय के निर्णय को लागू कराते हुए यहां विकास कार्यों को भी गति देंगे। उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक पर्यटन से आर्थिक विकास को गति मिलती है और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है। भोजशाला के विकास से धार में पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार बहनों के कल्याण के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रदेश की सभी पात्र लाड़ली बहनों को प्रोत्साहन राशि की अब तक 36 किश्तें दी जा चुकी हैं। इस योजना की शुरुआत से अब तक करीब 55 हजार करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता लाड़ली बहनों को हम दे चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित … Read more

अपना व्यवसाय शुरू कर कमा रहे हर माह लगभग 1.50 लाख रुपये

भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना से झाबुआ के प्रेम गामड़ बने आत्मनिर्भर अपना व्यवसाय शुरू कर कमा रहे हर माह लगभग 1.50 लाख रुपये जीवन में सफलता सिर्फ बड़े संसाधनों से ही नहीं, मेहनत और दृढ़ संकल्प से प्राप्त होती है भोपाल  सफलता की कहानी जीवन में सफलता सिर्फ बड़े संसाधनों से ही नहीं, मेहनत और दृढ़ संकल्प से प्राप्त होती है। व्यक्ति यदि अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखकर निरंतर प्रयास करता रहे, तो परिस्थितियां भी उसके मार्ग की बाधा नहीं बन पातीं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है झाबुआ निवासी प्रेम गामड़ पिता मंजेश गामड़ की जिन्होंने स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल स्थापित की है। स्नातक तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद प्रेम गामड़ ने निजी क्षेत्र में कार्य करना प्रारंभ किया। नौकरी के माध्यम से आजीविका तो चल रही थी, लेकिन उनके मन में स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने और कुछ नया करने का सपना था। वे ऐसा कार्य करना चाहते थे जिससे उन्हें आत्मसंतुष्टि के साथ-साथ समाज के लोगों को बेहतर सेवाएं भी प्रदान करने का अवसर मिले। इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के प्रति रुचि एवं तकनीकी समझ को देखते हुए उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स सेल्स एंड सर्विस के क्षेत्र में स्वरोजगार स्थापित करने का निर्णय लिया, लेकिन व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए आवश्यक पूंजी की व्यवस्था करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। 14.40 लाख रुपये के ऋण से शुरू किया व्यवसाय, अब हर माह हो रही लगभग 1.50 लाख रुपये की आय प्रेम गामड़ ने जिला आदिवासी वित्त एवं विकास निगम, झाबुआ कार्यालय में संपर्क कर"भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना" के संबंध में मार्गदर्शन प्राप्त किया। निगम द्वारा उनका ऋण प्रकरण तैयार कर एम.पी. ऑनलाइन के माध्यम से बैंक ऑफ बड़ौदा, झाबुआ शाखा को भेजा गया। बैंक द्वारा प्रकरण का परीक्षण करने के बाद प्रेम गामड़ का 14.40 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। ऋण प्राप्त होने के बाद उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स सेल्स एंड सर्विस व्यवसाय प्रारंभ किया और पूरी मेहनत एवं लगन के साथ अपने कार्य को आगे बढ़ाया। आज उनका व्यवसाय क्षेत्र में अच्छी पहचान बना चुका है तथा वे प्रतिमाह लगभग 1.50 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने अपनी इकाई में एक अन्य व्यक्ति को रोजगार प्रदान किया है। रोजगार की तलाश से रोजगारदाता बनने तक, प्रेम ने युवाओं को दिया प्रेरणा का संदेश प्रेम गामड़ बताते हैं कि एक समय ऐसा था जब वे स्वयं रोजगार की तलाश में भटकते थे, लेकिन आज वे अपना सफल व्यवसाय संचालित कर आत्मनिर्भर बन चुके हैं। वे अपनी सफलता का श्रेय मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम एवं भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना को देते हैं। उनका कहना है कि शासन की योजनाएं युवाओं के लिए सुनहरा अवसर हैं। यदि सही जानकारी, दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत का साथ हो तो कोई भी युवा स्वरोजगार के माध्यम से अपनी अलग पहचान बना सकता है। आज प्रेम गामड़ की सफलता जिले के उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है, जो स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रहे हैं।  

श्रमोदय आदर्श ITI भोपाल में श्रमिकों के बच्चों के लिए मुफ्त आवासीय प्रवेश शुरू

श्रमोदय आदर्श आई.टी.आई. भोपाल में श्रमिकों के बच्चों के लिए निशुल्क आवासीय प्रवेश प्रक्रिया शुरू इच्छुक आवेदक 30 जून तक करें आवेदन प्रशिक्षण अवधि के दौरान निशुल्क हॉस्टल और भोजन की सुविधा भी भोपाल  मध्यप्रदेश भवन एवं संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों के लिए भोपाल स्थित श्रमोदय आदर्श आई.टी.आई. में शैक्षणिक सत्र 2026 के लिए निशुल्क आवासीय प्रशिक्षण की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारत सरकार से एनसीवीटी (NCVT) मान्यता प्राप्त इस संस्थान में प्रवेश के इच्छुक आवेदक 26 मई से 30 जून 2026 तक ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। इसके साथ ही 1 जून से 30 जून 2026 के मध्य चॉइस फिलिंग की सुविधा उपलब्ध रहेंगी। संस्थान में चयनित होने वाले छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण अवधि के दौरान निशुल्क हॉस्टल और भोजन की सुविधा भी दी जाएगी। इस प्रवेश प्रक्रिया में भाग लेने के लिए 8वीं और 10वीं पास अभ्यर्थी संस्थान में संचालित आठ अलग-अलग ट्रेडों के लिए पात्र हैं। इच्छुक उम्मीदवार अपने नजदीकी कियोस्क सेंटर के माध्यम से पंजीयन और चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया आसानी से पूरी कर सकते हैं, तथा प्रवेश से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल www.dsd.mp.gov.in पर भी विजिट कर सकते हैं। इलेक्ट्रीशियन और वेल्डर ट्रेड के लिए 20-20 सीटें निर्धारित हैं। इसके अलावा टेक्नीशियन मेकाट्रोनिक्स, एडवांस सी.एन.सी. मशीनिंग टेक्नीशियन, सिविल इंजिनियर असिस्टेंट, आई.ओ.टी. (स्मार्ट सिटी), फैशन डिज़ाइन एंड टेक्नोलॉजी और इंटीरियर डिज़ाइन एंड डेकोरेशन प्रत्येक ट्रेड में 24-24 सीटें उपलब्ध हैं। संस्था के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने या ऑनलाइन आवेदन में किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या होने पर आवेदक हेल्पलाइन नंबर 9424454453 और 9826947798 पर संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं।  

संपत्ति रजिस्ट्री में अब नहीं होगी परेशानी, Sampada 2.0 के नए नियम लागू

भोपाल  संपदा 2.0 पोर्टल में घर बैठे रजिस्ट्री (online registry) को सुरक्षित करने बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। खासतौर पर वीडियो केवाईसी सॉल्यूशन को अधिक सुरक्षित, तेज और पारदर्शी बनाने यूजर लाइवनेस प्रयास, नॉन इंटरएक्टिव वीडियो में डॉक्यूमेंट कैप्चर करने जैसे नियमों को बदला गया है, ताकि वास्तविक व्यक्ति ही पंजीयन में शामिल हो। इसके लिए बकायदा एक एजेंसी को हायर किया जा रहा है। अगले दो से तीन माह में नए बदलाव के साथ संपदा 2.0 में घर बैठे पंजीयन की सुविधा में बेहतर तरीके से नजर आएगी। गौरतलब है कि पोर्टल (property Registry) से नागरिक घर बैठे ऑनलाइन भुगतान, ई-स्टांपिंग और संपत्तियों का पंजीकरण आसानी से कर सकते हैं। इस नए सिस्टम में लॉग-इन, डिजिलॉकर एकीकरण, दस्तावेज ड्राफ्टिंग, और वीडियो केवाईसी जैसी सुविधाएं शामिल हैं। दस्तावेज के सत्यापन और बेहतर होंगे (Sampada 2.0) -यूजर लाइवेनेस के अधिकतम प्रयासों को तीन से घटाकर 2 कर दिया है।  समय बचाने नॉन-इंटरैक्टिव वीडियो केवाईसी वर्क फ्लो से सीधे डॉक्यूमेंट कैप्चर (Sampada 2.0) करने के एक स्टेप को हटा दिया गया है। – धोखाधड़ी रोकने के लिए सिस्टम यूजर की लाइव फोटो का मिलान, अपलोड किए गए दस्तावेज और डेटाबेस में मौजूद इमेज के साथ तीन अलग-अलग स्तरों पर करेगा। -चेहरे से सिस्टम दिए गए आधार दस्तावेज और रिकॉर्ड में दर्ज आधार दस्तावेज (Sampada 2.0) का मिलान कर यूजर की पहचान सुनिश्चित कर लेगा। -नए नियमों के तहत डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और आधार नियमों का कड़ाई से पालन करने अब किसी भी यूजर के बायोमेट्रिक डेटा या चेहरे की पहचान से जुड़े डेटा का दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा। – तकनीकी अपग्रेडेशन के बाद मध्य प्रदेश के नागरिकों को जमीनों और संपत्तियों की रजिस्ट्री के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और पूरी प्रक्रिया बेहद सुरक्षित और उंगलियों पर उपलब्ध होगी। अधिक सुरक्षित और सरल संपदा 2.0 (Sampada 2.0) में वीडियो ई-केवायसी (e-KYC)को अधिक सुरक्षित और सरल बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स टीम तय की जा रही है। -स्वप्रेश शर्मा, जिला पंजीयक

Higher Education Reform: AI और डिजिटल जांच पर फोकस, छात्रों के मूल्यांकन में होंगे बड़े बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग आने वाले समय में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। विभाग का फोकस अब एआई आधारित शिक्षण, डिजिटल मूल्यांकन, ऑनलाइन उपस्थिति और विद्यार्थियों की डिजिटल शैक्षणिक पहचान पर है। हालही में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में इन बदलावों की रूपरेखा पर मंथन किया गया है। सबसे बड़ा बदलाव परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था में देखने को मिल सकता है। विभाग उत्तर पुस्तिकाओं के शत-प्रतिशत डिजिटल वैलिडेशन की दिशा में काम कर रहा है। इसके लागू होने के बाद कॉपियों की जांच और मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय होने की उम्मीद है। इससे परिणामों में देरी और मूल्यांकन संबंधी शिकायतों में भी कमी आ सकती है।  परीक्षा पैटर्न में बदलाव के संकेत उच्च शिक्षा विभाग वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा भी कर रहा है। अभी 30 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन और 70 प्रतिशत लिखित परीक्षा का प्रावधान है, लेकिन इसे 40:60 करने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई, प्रोजेक्ट कार्य और कक्षा में सहभागिता को अधिक महत्व मिलेगा। कॉलेजों में बढ़ेगा एआई का दायरा विभाग एआई को उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रहा है। महाविद्यालयों में  एआईसे जुड़े सर्टिफिकेट कोर्स संचालित किए जा रहे हैं, ताकि विद्यार्थी नई तकनीकों को समझ सकें और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें। साथ ही एआई टूल्स के जिम्मेदार और रचनात्मक उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। हर विद्यार्थी की बनेगी डिजिटल पहचान विद्यार्थियों के लिए  अपार आईडी तैयार करने का काम भी तेजी से चल रहा है। इसके जरिए छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा। इससे प्रवेश, अंकसूची, प्रमाण-पत्र और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाएं आसान हो सकेंगी। मोबाइल ऐप से दर्ज होगी उपस्थिति विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है। इससे कॉलेजों में उपस्थिति की निगरानी आसान होगी और कक्षाओं में नियमित सहभागिता बढ़ाने में मदद मिलेगी। भारतीय भाषाओं में भी मिलेगा पढ़ाई का विकल्प नई शिक्षा नीति के तहत तेलुगु, तमिल, मराठी समेत विभिन्न भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी पसंद और सुविधा के अनुसार शिक्षा उपलब्ध कराना है। विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का प्रयास उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का भी सशक्त साधन है। विभाग का लक्ष्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाना है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाई जा सके। 

पथरीली जमीन बनी Indore Metro प्रोजेक्ट की बाधा, एयरपोर्ट क्षेत्र में शुरू हुई ब्लास्टिंग

इंदौर  इंदौर में मेट्रो ट्रेन के अंडरग्राउंड हिस्से का काम फिलहाल एयरपोर्ट के समीप चल रहा है। यहां मेट्रो स्टेशन भूमिगत होगा और करीब डेढ़ किलोमीटर आगे जाकर ट्रैक एलिवेटेड हिस्से से जुड़ेगा। लगभग आठ माह पहले इस हिस्से में मेट्रो के लिए खुदाई शुरू की गई थी, लेकिन 20 फीट की खुदाई के बाद चट्टानें मिलने के कारण अब नियंत्रित ब्लास्टिंग के जरिए खुदाई की जा रही है।  बीते दो दिनों से पूरे इलाके में विस्फोटों की गूंज सुनाई दे रही है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की टीम नियंत्रित ब्लास्टिंग के माध्यम से चट्टानों को तोड़कर आगे का काम कर रही है। माना जा रहा है कि सिंहस्थ से पहले एयरपोर्ट क्षेत्र में अंडरग्राउंड मेट्रो के हिस्से का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। 10 किमी अंडरग्राउंड ट्रैक बनेगा इंदौर में कुल 10 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड ट्रैक का निर्माण होना है। फिलहाल 20 किलोमीटर लंबे मेट्रो ट्रैक का निर्माण पूरा हो चुका है और उस पर संचालन कभी भी शुरू किया जा सकता है, लेकिन अभी तक इसकी अंतिम मंजूरी नहीं मिल पाई है। खजराना से एयरपोर्ट रोड तक 10 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड ट्रैक का निर्माण प्रस्तावित है, हालांकि इस हिस्से में अभी तक व्यापक स्तर पर काम शुरू नहीं हो पाया है। इस रूट में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हस्तक्षेप के बाद बदलाव किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप लगभग दो किलोमीटर अतिरिक्त अंडरग्राउंड मेट्रो रूट जोड़ा गया। इससे परियोजना की लागत में करीब 2,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। 15,000 करोड़ रुपये है लागत इंदौर मेट्रो परियोजना पर कुल लगभग 15,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वर्तमान में छह किलोमीटर लंबे हिस्से में मेट्रो का संचालन और परीक्षण कार्य जारी है। गांधी नगर मेट्रो स्टेशन से रेडिसन चौराहा तक पांच मेट्रो स्टेशन बनकर तैयार हो चुके हैं। इसके अलावा विभिन्न गति स्तरों पर मेट्रो का ट्रायल रन भी कई बार सफलतापूर्वक किया जा चुका है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने अभी तक किराए की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, हालांकि अधिकतम किराया लगभग 80 रुपये तक होने की संभावना जताई जा रही है। 

लाडली बहना योजना की 37वीं किस्त को लेकर बड़ा अपडेट, जानिए पैसा आया या नहीं

भोपाल   लाडली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की वो योजना है जो प्रदेश की जरुरतमंद महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है, इस महत्वाकांक्षी स्कीम ने बहनों के जीवन को काफी लाभ पहुंचाया है। बहनें हर महीने सरकार की ओर से आने वाली किस्त का बेसब्री से इंतजार करती है और जब ये राशि आ जाती है तो अपनी जरुरत को पूरा करती हैं।  मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश की करोड़ों पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए महत्वाकांक्षी लाडली बहना योजना चलाती है. इस योजना के तहत प्रदेश की पात्र महिलाओं को हर महीना 1500-1500 रुपये की राशि दी जाती है। इस योजना के तहत अब तक जब से ये योजना शुरू हुई कुल 36 किस्त जारी हो चुकी है. प्रदेश की महिलाओं को अब 37वीं किस्त का इंतजार है।  इस योजना की 37वीं किस्त 10 जून के बाद जारी होनी संभावना है. 37वीं किस्त के रूप में प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के जरिए राशि ट्रांसफर की जाएगी. बता दें कि शुरूआत में महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये दिए जाते थे, जिसे बढ़ाकर 1,500 रुपये किया जा चुका है. हालांकि अच्छी बात ये है कि भविष्य में इस योजना की राशि को बढ़ाकर 3000 रुपये तक किया जाएगा. सीएम मोहन यादव पहले ही इसके बारे में संकेत दे चुके हैं।  लाडली बहना योजना की शुरुआत साल 2023 में तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने की थी. शुरुआत में लाडली बहनों के खातों में 1000 रुपये अंतरित किए जाते थे. इस राशि को अक्तूबर 2023 में बढ़ाकर 1250 रुपये कर दिया गया. नवंबर 2025 में योजना की राशि में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई और इसे 1500 रुपये कर दिया गया. अब तक इस योजना की 36 किस्ते जारी हो चुकी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार (13 मई 2026) को नरसिंहपुर के गोटेगांव में आयोजित एक कार्यक्रम में लाडली बहना योजना की 36वीं किस्त जारी की थी।  पिछले महीने की किस्त लाडली बहनों के खाते में आ चुकी है अब फिर से राज्य की 1.25 करोड़ महिलाएं 37वीं किस्त का इंतजार कर रही है। सरकार हितग्राही महिलाओं के खातों में 1500-1500 रुपये राशि ट्रांसफर करती है, अब तक इस योजना की 36 किस्तें अंतरित की जा चुकी हैं और इस जून महीने में 37वीं किस्त बहनो के खाते में आएगी। नरसिंहपुर से हुई थी योजना कि 36वीं किस्त जारी लाडली बहनों की 36वीं किस्त मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछले महीने 13 मई को नरसिंहपुर के मुंगवानी से जारी की थी। 1 करोड़ 25 लाख 542 महिलाओं के खातों में करीब 1835 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की गई थी लाडली बहना की 37वीं किस्त कब आएगी? वैसे आमतौर पर हर महीने लाडली बहना योजना की किस्त 10 से 20 तारीख के बीच जारी होती है, जानकारी ये है कि इस बार भी  लाडली बहनो की 37वीं किस्त इन्हीं तारीखों के बीच जारी होगी। हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक इसका आधिकारिक ऐलान तो नहीं किया है लेकिन इन्हीं तारीखों के बीच ये किस्त आ सकती है। DBT को कैसे एक्टिवेट करें? वैसे तो लाडली बहना योजना की किस्त सीधे महिलाओं के खातों में भेजी जाती है लेकिन कई बार आधार कार्ड तो बैंक अकाउंट से लिंक रहता है लेकिन डीबीटी सक्रिय नहीं होता है, अगर ऐसा हो तो नीचे दिए प्रोसेस को अपनाकर  प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. ऑफलाइन ऐसा करें.. जिस बैंक में आपका अकाउंट है उसकी शाखा में जाएं. आधार सीडिंग फॉर्म में अपनी जानकारी भरें. इस फॉर्म के साथ बैंक खाता पासबुक और आधारकार्ड की फोटोकॉपी लगाएं. बैंक से DBT एक्टिवेशन के लिए रिक्वेस्ट करें लिहाजा लाडली बहनों के खाते में कुछ ही दिनों में योजना की 37वीं किस्त आने वाली है।

रसिंहपुर के डायल-112 हीरोज ट्रेन से गिरकर घायल हुए व्यक्ति को त्वरित सहायता पहुँचाकर कराया अस्पताल में भर्ती

भोपाल  नरसिंहपुर जिले के थाना गाडरवारा अंतर्गत चौकी सालीचौका क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता, सूझबूझ एवं संवेदनशील कार्रवाई से ट्रेन से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए एक व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। त्वरित सहायता मिलने से घायल को समय रहते चिकित्सकीय सुविधा मिल सकी। 03 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि चौकी सालीचौका क्षेत्र अंतर्गत दूधी नदी रेलवे पुल के पास एक व्यक्ति ट्रेन से गिरकर घायल हो गया है। पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही तत्काल सालीचौका क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री राजेंद्र धाकड़ एवं पायलट श्री शुभम वर्मा ने मौके पर पहुंचकर पाया कि एक व्यक्ति ट्रेन से गिरकर घायल हो गया था और रेलवे ट्रेक पर पड़ा हुआ था। उसके सिर एवं हाथ में गंभीर चोटें थीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं सूझबूझ का परिचय देते हुए घायल व्यक्ति को सुरक्षित ट्रैक से बाहर निकाला और तत्काल डायल 112 वाहन से शासकीय अस्पताल सालीचौका पहुँचाया। अस्पताल पहुँचने पर प्रधान आरक्षक श्री करण सिंह ठाकुर ने घायल की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल निजी एंबुलेंस की व्यवस्था कराई। प्राथमिक उपचार के उपरांत घायल व्यक्ति को उपचार हेतु शासकीय अस्पताल गाडरवारा रेफर किया गया। डायल-112 जवानों एवं पुलिस स्टाफ की त्वरित कार्यवाही से घायल व्यक्ति को समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध हो सकी। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह कार्यवाही दर्शाती है कि डायल-112 सेवा आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल सहायता पहुँचाकर आमजन की सुरक्षा एवं जीवन रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। दुर्घटनाओं एवं अन्य संकटपूर्ण परिस्थितियों में डायल-112 जवान संवेदनशीलता, साहस एवं सेवा भाव के साथ लोगों की मदद कर रहे हैं।  

जनजातीय समुदाय के रीति-रिवाजों को रखा जाएगा यूसीसी से अलग

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश में एक निशान, एक विधान और एक कानून लागू हो, इस राष्ट्रीय भावना में कुछ भी गलत नहीं है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को देश के 3 राज्यों ने पहले ही लागू कर दिया है। हमारी सरकार भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। शीघ्र ही मध्यप्रदेश भी देश का यूसीसी लागू करने वाला राज्य बन जाएगा। इसके लिए हमने उच्चतम न्यायालय की रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति मती रंजना देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीति गठित कर दी है। यह समिति जिला स्तर पर सभी वर्गों से उनकी राय ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जनजातीय समुदाय को यूसीसी से पृथक रखा जाएगा। उन्हें अपने पारम्परिक रीति-रिवाज मानने की स्वतंत्रता होगी। गुजरात में भी इसी प्रकार का प्रावधान लागू किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया@2047 कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति योग्य है, तो सरकार जाति, धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर कार्य करती है। आज जनजातीय वर्ग से आने वाली मती द्रोपदी मुर्मु देश के राष्ट्रपति पद की शोभा बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि हम मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए खुले विचार और खुले हृदय के साथ काम करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मध्यप्रदेश को सभी क्षेत्रों में अव्वल राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन की चुनौती के दौर में प्रधानमंत्री डॉ. नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर हमारी सरकार ने पर्यावरण और ईंधन को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) खरीदा है। अब वे ईवी से ही यात्रा करेंगे। यह पर्यावरण अनुकूल वाहन (ईवी) ईंधन के संरक्षण के साथ-साथ वायु प्रदूषण को भी रोकने में कारगर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। ग्रामीण आबादी को दूध उत्पादन, पशुपालन और आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए प्रयास किए गए हैं। गांव-गांव तक बिजली, पानी और सड़कों का विकास हुआ है। पिछले साल सरकार ने औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए काम किया। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है। प्रदेश के इंडस्ट्रियल पार्कों में यूनिट्स खुल गईं और लोगों को रोजगार के अवसर मिलने लगे हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस -2025) में 30 लाख करोड़ रुपए के एमओयू साइन हुए थे। इसमें से अब तक करीब 30 प्रतिशत निवेश धरातल पर नजर आ रहा है। यह राज्य सरकार का बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विकास में शिक्षा का विशेष महत्व है। मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर 2002-03 तक मेडिकल कॉलेजों की संख्या केवल 5 थी। अब इनकी संख्या बढ़कर 30 हो गई है। इनमें से 7 नए मेडिकल कॉलेज तो हमने पिछले 2 साल के दौरान ही प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में 3 नए शासकीय विश्वविद्यालय खरगोन में टंट्या मामा, गुना में तात्या टोपे और सागर में रानी अवंती बाई लोधी के नाम पर शुरू किए गए हैं। सभी 55 जिलों में नए पीएम एक्सीलेंस कॉलेज भी संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अब कृषि संकाय की भी पढ़ाई कराई जा रही है। प्रदेश में नए-नए सांदीपनि विद्यालय तेजी से खोले जा रहे हैं। प्रदेश के शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास के लिए हम तेजी से काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ग्लोबल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव (जीआईएस) पहले केवल इंदौर तक सीमित थी। हमारी सरकार ने इसे पहली बार राजधानी (भोपाल) में आयोजित किया। इससे पहले राज्य में संभाग और जिला स्तर पर रीवा, ग्वालियर, नर्मदापुरम, कटनी जैसे स्थानों पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (आरआईसी) आयोजित कर निवेशकों को आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर अंचल की अलग-अलग विशेषता है। राज्य सरकार ने उद्योग केंद्रित 18 नीतियां लागू कीं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में भारी उद्योग, लघु उद्योग और एमएसएमई में देशभर से निवेश आया। कई कारखानों में उत्पादन शुरू हो चुका है। राज्य सरकार की पहल पर प्रदेश में आई औद्योगिक क्रांति से अब तक 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग स्थापित करने पर सरकार प्रति श्रमिक 5000 रुपए महीना आर्थिक सहायता 10 वर्ष तक देगी। अन्य श्रेणी के उद्योगों को आगे बढ़ने में भी सरकार पूरी मदद दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी धर्म का अपमान करना हमारी संस्कृति नहीं है लेकिन अपने धर्म पर गर्व करने में क्या बुराई है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में अपना विशिष्ट स्थान बना रहा है। अब हमारी सरकारें माननीय न्यायालयों के निर्णयों को पूरे सदभाव और शांतिपूर्ण तरीके से लागू करा रही हैं। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। प्रधानमंत्री  मोदी ने विरासत से विकास का घोष वाक्य दिया है। हमारा इतिहास बहुत समृद्ध है। राजा भोज की कर्मस्थली धार में स्थापत्य कला के अनेक उदाहरण भरे पड़े हैं। यहां भोजशाला परिसर में ज्ञान की देवी सरस्वती (मां वाग्देवी) की प्रतिमा को वापस लाकर स्थापित किया जाएगा। हम न्यायालय के निर्णय को लागू कराते हुए यहां विकास कार्यों को भी गति देंगे। उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक पर्यटन से आर्थिक विकास को गति मिलती है और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है। भोजशाला के विकास से धार में पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार बहनों के कल्याण के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रदेश की सभी पात्र लाड़ली बहनों को प्रोत्साहन राशि की अब तक 36 किश्तें दी जा चुकी हैं। इस योजना की शुरुआत से अब तक करीब 55 हजार करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता लाड़ली बहनों को हम दे चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने के लिये मध्यप्रदेश सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ विकसित मध्यप्रदेश @2047 के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है।