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मंत्री टेटवाल: प्रदेश के 18 हजार युवाओं को हर साल जीवन कौशल शिक्षा प्रशिक्षण

भोपाल कौशल विकास राज्य एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कौशल विकास संचालनालय में कौशल विकास विभाग एवं यूएनएफपीए की साझेदारी पर आधारित ब्रोशर का विमोचन किया। राज्य मंत्री टेटवाल ने कहा कि कौशल विकास केवल तकनीकी शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के व्यक्तिगत निर्माण, संर्वांगीण विकास के लिए जीवन कौशल अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 18 हजार युवाओं को हर वर्ष जीवन कौशल शिक्ष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मंत्री टेटवाल ने कहा कि जीवन कौशल शिक्षा का इस वृहद स्तर पर क्रियान्वयन मध्यप्रदेश के लिए अनूठी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास युवाओं को रोजगार के साथ जीवन में सफल होने के लिए भी तैयार कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष कंट्री की प्रतिनिधि सुएंड्रिया एम. वोज़्नार ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन के प्रयासों और सहयोग की सराहना करती हूँ। उन्होंने कहा कि कौशल विकास संचालनालय के साथ मिलकर किये जा रहे कार्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगारपरक कौशल प्रदान कर रहे हैं, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से सुदृढ़, आत्मविश्वासी और सामाजिक रूप से जागरूक भी बना रहे हैं। इस अवसर पर कौशल विकास संचालनालय द्वारा यूएनएफपीए के तकनीकी सहयोग से संचालित महत्वपूर्ण कार्यक्रम जीवन कौशल शिक्षा (जीवन तरंग), मानसिक स्वास्थ्य एवं सजगता कार्यशाला एवं डिजिटल स्टोरीटेलिंग कार्यशाला से संबंधित प्रशिक्षण अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर कार्यक्रम की उपलब्धियों, विस्तार योजनाओं तथा प्रशिक्षकों के अनुभवों को भी साझा किया गया। यह साझेदारी मध्यप्रदेश को कौशल विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी मॉडल के रूप में स्थापित करेगी।  

नरेला रक्षाबंधन: मंत्री सारंग को 1,84,632 बहनों ने बांधा रक्षा-सूत्र, रिकॉर्ड कायम

भोपाल नरेला रक्षाबंधन उत्सव विश्व के सबसे बड़े रक्षाबंधन महोत्सव का बुधवार को ऐतिहासिक समापन हुआ। इस वर्ष सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री तथा नरेला विधायक विश्वास कैलाश सारंग को रिकॉर्ड 1 लाख 84 हज़ार 632 बहनों ने रक्षा-सूत्र बांधकर नया स्वर्णिम कीर्तिमान स्थापित किया। विगत 16 वर्षों से निरंतर आयोजित इस विख्यात रक्षाबंधन महोत्सव में नरेला विधानसभा के सभी 17 वार्डों सहित भोपाल के विभिन्न क्षेत्रों से बहनों ने भाग लेकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया। बहनों के स्नेह से भावविभोर हुए मंत्री सारंग मंत्री सारंग ने कहा कि यह महोत्सव केवल एक पर्व नहीं बल्कि बहनों और भाइयों के अटूट विश्वास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष 1 लाख 82 हज़ार से अधिक बहनों ने राखी बांधकर आशीर्वाद दिया था। इस वर्ष यह संख्या और बढ़कर 1 लाख 84 हज़ार 632 हो गई। यह स्नेह और विश्वास ही मुझे जनसेवा के लिए निरंतर शक्ति प्रदान करता है। मंत्री सारंग ने कहा कि रक्षाबंधन महोत्सव अब केवल राखी का पर्व नहीं, बल्कि नारी शक्ति के सम्मान का भी मंच बन चुका है। लव जिहाद और नशे की काली छाया में बहनों को फँसाने वाले तत्वों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार का धर्म स्वातंत्र्य कानून इस लड़ाई को और अधिक सशक्त बनाता है। ‘विश्वास विजय वाहिनी’ हर पीड़ित परिवार को कानूनी व सामाजिक सहायता उपलब्ध कराएगी। अंतिम दिन भी उमड़ा बहनों का जनसैलाब बुधवार को उत्सव के अंतिम दिन के कार्यक्रमों में उत्साह देखते ही बनता था। नरेला विधानसभा के वार्ड 41 एवं 59 में आयोजित महोत्सव में बहनों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। अपने ‘भैया’ विश्वास सारंग को राखी बांधने के लिए बहनें कतारबद्ध खड़ी रहीं। इस अवसर पर राखी बांधने आई हर बहन को उपहार स्वरूप छाता, साड़ी, अभिमंत्रित रुद्राक्ष प्रदान किया गया और भोजन की विशेष व्यवस्था की गई। टूटा पिछले वर्ष का रिकॉर्ड यह रक्षाबंधन महोत्सव पिछले कई वर्षों से विश्व रिकॉर्ड में दर्ज है। विगत वर्ष 1 लाख 82 हज़ार बहनों ने रक्षासूत्र बांधकर नया इतिहास रचा था। वहीं इस वर्ष 1 लाख 84 हज़ार से अधिक बहनों ने राखी बांधकर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। इस तरह महोत्सव ने न केवल अपना पुराना रिकॉर्ड तोड़ा बल्कि एक नई ऊँचाई भी हासिल की। भव्य स्वागत और शोभायात्रा वार्ड 59 शाखा ग्राउंड स्थित मुख्य कार्यक्रम स्थल पर मंत्री सारंग का स्वागत अत्यंत भव्य रहा। कार्यकर्ताओं और रहवासियों ने बग्गी, दोपहिया और चारपहिया वाहनों की रैली के साथ उनका स्वागत किया। पूरे क्षेत्र में पुष्पवर्षा और आतिशबाजी से माहौल गूंज उठा। मंत्री सारंग ने खुले हाथों से बहनों और क्षेत्रवासियों का अभिवादन किया और इस अपार स्नेह के लिए आभार जताया।  

जर्मन व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने किया इंदौर–उज्जैन दौरा, नवाचार और उद्योग का परिचय

मध्यप्रदेश–जर्मनी टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन सहयोग 2025 जर्मन व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने किया इंदौर–उज्जैन दौरा, नवाचार और उद्योग का परिचय उद्योग, नवाचार और अध्यात्म का संगम: जर्मन प्रतिनिधिमंडल का इंदौर–उज्जैन दौरा इंदौर–उज्जैन में जर्मन व्यापारियों का दौरा, उद्योग और संस्कृति के नए पहलुओं से परिचय जर्मन व्यापार प्रतिनिधिमंडल का इंदौर–उज्जैन दौरा, नवाचार, उद्योग और अध्यात्म का अनूठा संगम इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में निवेश एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के निरंतर प्रयासों का असर बुधवार को उज्जैन और इंदौर में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। ‘मध्यप्रदेश ग्लोबल इनोवेशन प्रोग्राम 2025’ के तीसरे दिन जर्मनी की पाँच अग्रणी टेक कंपनियों के प्रतिनिधिमंडल ने आईआईटी इंदौर, चरक सेन्टर फॉर डिजिटल हेल्थ केयर का भ्रमण किया और उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड में स्थानीय उद्यमियों, स्टार्टअप्स से संवाद किया। प्रतिनिधिमंडल का दौरा एमपीआईडीसी के नेतृत्व में जीआईआईसी एवं आईएम ग्लोबल के सहयोग से हो रहा है। यह दौरा 22 अगस्त तक इंदौर और भोपाल में जारी रहेगा। प्रतिनिधि मंडल की तीसरे दिवस दिन की शुरुआत आईआईटी इंदौर के चरक सेन्टर फॉर डिजिटल हेल्थ केयर के अनुभवात्मक दौरे से हुई। इस दौरान आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन और उनके स्टार्टअप कार्यों का परिचय दिया गया। इसके बाद डिजिटल हेल्थकेयर टेक्नोलॉजीज का प्रदर्शन किया गया। साथ ही इंटेलिजेंट मैन्युफैक्चरिंग सेंटर का भ्रमण भी हुआ। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल उज्जैन पहुँचा, उज्जैन स्मार्ट सिटी कार्यालय में आयोजित सत्रों में प्रतिनिधिमंडल ने पहले स्थानीय उद्योगपतियों एवं HNIs से बैठक की। इस दौरान निवेश और संभावित साझेदारियों के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ। साथ ही उज्जैन आधारित टेक स्टार्टअप्स के साथ विशेष इंटरैक्शन हुआ, जिसमें युवा उद्यमियों ने अपने नवाचारपूर्ण उत्पाद एवं समाधानों का प्रदर्शन किया। उज्जैन स्मार्ट सिटी में आयोजित राउंड टेबल मीटिंग में आयुक्त स्मार्ट सिटी अभिलाष मिश्रा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत संदीप शिवा सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं उद्यमी उपस्थित रहे। "आर्टिफिशियल इंटेलीजेन्स एंड सिंहस्थ-2028" सत्र में प्रतिनिधिमंडल एवं स्थानीय उद्यमियों ने चर्चा के दौरान यह जाना कि एआई, डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्मार्ट समाधान आगामी सिंहस्थ 2028 को एक वैश्विक आयोजन के रूप में प्रस्तुत करने में कैसे योगदान दे सकते हैं। इस अवसर पर स्मार्ट मैनेजमेंट, भीड़ नियंत्रण, रियल टाइम डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे विषयों पर विस्तृत संवाद हुआ। बैठक के दौरान स्मार्ट सिटीके लिए इनोवेटिव समाधान, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित रिप्लेसमेंट एजेन्ट्स पर गहन चर्चा हुई। इस अवसर पर एआई और टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स की सक्रिय भागीदारी ने स्थानीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को नई दिशा प्रदान की। लेक्सीनेक्सी एआई, मिलेट आईटी, एमआर सॉफ्ट प्रा.लि. जैसे स्थानीय उद्यम अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों एवंजर्मन डेलीगेशन के साथसाझेदारी व सहयोग के अवसर तलाश रहे हैं। यह पहल उज्जैन को ग्लोबल इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त कदम है। इस अवसर पर कार्यकारी निदेशक एमपीआईडीसी राजेश राठौड़ एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत संदीप शिवा ने अपने संबोधन में कहा कि Cities 2.0 Vision और महाकुंभ प्रोजेक्ट को आधुनिक तकनीकी समाधानों के आदर्श मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने ज़ोर दिया कि उज्जैन शीघ्र ही सस्टेनेबल अर्बन डेवलपमेंट और स्मार्ट टेक्नोलॉजी एडॉप्शन का अग्रणी केंद्र बनेगा। आईएम ग्लोबल के संस्थापक सी.के. तिवारी ने कहा कि नए व्यवसायों की चुनौतियों का समाधान केवल रिसर्च-ड्रिवन अप्रोच और ग्लोबल कोलैबोरेशन से ही संभव है। उन्होंने स्टार्टअप्स को अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी और प्रतिस्पर्धी वैश्विक बाज़ारों में सफलता के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने उज्जैन प्रवास के दौरान सर्वप्रथम महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन-पूजनकर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की। इसके बाद मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) के क्षेत्रीय कार्यालय उज्जैन का दौरा किया, जहाँ कार्यकारी निदेशक राजेश राठौड़ ने उनका स्वागत किया। बैठक के दौरान मध्यप्रदेश में निवेश, नवाचार और औद्योगिक विकास की व्यापक संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल को राज्य में विकसित हो रहे नवीन औद्योगिक ढांचे, प्रौद्योगिकी आधारित पारिस्थितिकी तंत्र तथा सरकार द्वारा निवेशकों को प्रदत्त सुगम और पारदर्शी नीतिगत वातावरण की जानकारी दी गई। प्रतिनिधिमंडल को विक्रम उद्योगपुरी लिमिटेड की औद्योगिक परियोजनाओं और उज्जैन में उभरते निवेश अवसरों से भी अवगत कराया गया। यह संवाद भारत-जर्मनी के मध्य औद्योगिक सहयोग और भविष्य की साझेदारियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। जर्मन कंपनी टाइलर्स, हैलोनिक, स्टेक्स, क्यू-कनेक्ट-एजी और क्लाउड-स्क्विड के प्रतिनिधि मंडल ने अपनी प्रतिक्रिया में उज्जैन दौरे को अत्यंत सार्थक बताया। उनका मानना था कि उद्योग और अध्यात्म का यह अनूठा संगम है। एआई एवं टेक्नोलॉजी के ज़रिए वैश्विक आयोजन ‘सिंहस्थ-2028’ की तैयारियाँ मध्यप्रदेश की प्रगतिशील सोच और नवाचार क्षमता का प्रमाण हैं।  

राज्यपाल पटेल का सुझाव: विवाह से पहले आनुवांशिक कार्ड का मिलान जरूरी

विवाह के पहले आनुवांशिक कार्ड का करें मिलान : राज्यपाल पटेल राज्यपाल पटेल का सुझाव: विवाह से पहले आनुवांशिक कार्ड का मिलान जरूरी विवाह से पूर्व करें आनुवांशिक जाँच, स्वास्थ्य के लिए अहम: राज्यपाल पटेल “परंपरागत चिकित्सा का स्वास्थ्य संवर्धन में योगदान एवं सिकल सैल एनीमिया प्रबंधन” पर मण्डला में हुई कार्यशाला भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि विवाह के पहले आनुवांशिक कार्ड का मिलान अवश्य कराना चाहिए। सिकल सैल एनीमिया की बीमारी आनुवांशिक है। इसके उन्मूलन के लिए व्यापक जनजागरूकता आवश्यक है। राज्यपाल पटेल बुधवार को मण्डला के ग्राम सेमरखापाके एकलव्य आदर्श विद्यालय ऑडीटोरियम में “परंपरागत चिकित्सा का स्वास्थ्य संवर्धन में योगदान एवं सिकल सैल एनीमिया प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला में शामिल हुए। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सैल से पीड़ित व्यक्ति का चिन्हांकन एवं त्वरित रोग उपचार ही इस बीमारी से बचाव का कारगर उपाय है। जितनी जल्दी इस रोग का पता चलेगा, इसे नियंत्रित करने की संभावना उतनी अधिक होगी। उन्होंने कहा कि आमजन स्वास्थ्य केन्द्रों में जाकर सिकल सैल एनीमिया की जांच अवश्य करवाएं। उन्होंने कहा कि मां के गर्भ में और बच्चे के जन्म के 72 घंटे में इसकी जांच की सुविधा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शहडोल जिले से वर्ष 2023 से सिकल सैल उन्मूलन का अभियान शुरू हुआ है। तब से लेकर अब तक देश में 7 करोड़ लोगों की जाँच की जा चुकी है, जिसमें मध्यप्रदेश में एक करोड़ 14 हजार व्यक्तियों की जांच की गई। जनजातीय कार्य, लोक परिसंपत्ति प्रबंधन, भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. विजय शाह ने कहा कि प्रदेश में प्राचीन औषधियों को अस्तित्व में बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। मंडला में डी-मार्ट की तर्ज पर ट्रायबल मार्ट बनाया जायेगा। जनजातीय बंधु इसका संचालन करेंगे। यहां मिलने वाले उत्पाद की कीमत बाजार की तुलना में 25-30 प्रतिशत कम होगी। स्थानीय लोगों को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पतिया उइके ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जनजातीय जीवन को बेहतर बनाया जा रहा है। प्रदेश में सिकल सैल एनीमिया उन्मूलन के लिए युद्ध स्तर पर कार्य हो रहे हैं। केन्द्र व राज्य की डबल इंजन सरकार के प्रयासों की बदौलत स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आए हैं। आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य सिकल सैल एनीमिया उन्मूलन के संबंध में चिकित्सकों एवं परंपरागत वैद्यों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करना और उसे वृहद स्तर पर लोगों तक पहुंचाना है। बालाघाट में आयुर्वेद रिसर्च सेंटर खोलने की स्वीकृति भारत सरकार ने दी है। रिसर्च के क्षेत्र में अच्छा काम करने वालों के साथ एम.ओ.यू. भी किए जा रहे हैं। परंपरागत वैद्यों के ज्ञान को सहेजने और शोध के दस्तावेजीकरण की तरफ बढ़ रहे हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी परंपरागत रूप से काम कर रहे पारंपरिक वैद्यों को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है। जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि राज्यपाल पटेल अति संवेदनशील हैं, जो जनजातीय जिलों के सुदूर अंचलों तक जाकर इस बीमारी की रोकथाम के लिए मार्गदर्शन दे रहे हैं। नर सेवा ही नारायण सेवा है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि पूजा अर्चना से परमेश्वर दर्शन देंगे या नहीं यह तो नहीं पता लेकिन जब दीन-हीन बीमार व्यक्ति की सेवा होगी तो उसकी आंखों में परमेश्वर के दर्शन स्वतः हो जाएंगे। राज्यपाल पटेल ने कार्यक्रम में सिकल सैल एनीमिया से ग्रसित बच्चों ने भी अपने अनुभव साझा किए। राज्यपाल पटेल एवं अन्य अतिथियों ने मिशन नेत्रज्योति अंतर्गत चश्मा, सिकल सैल दिव्यांगता प्रमाण पत्र, आयुष्मान कार्ड, पोषण किट, विधवा पेंशन कार्ड एवं स्व-सहायता समूह को राशि वितरित की। भगवान धनवंतरी एवं जननायक बिरसामुण्डा के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। राज्यपाल पटेल का स्वागत अंगवस्त्र, तुलसी पौधा एवं गोंडी पेंटिंग भेंट कर किया गया। कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने स्मृति चिन्ह स्वरूप गोंडी पेंटिंग भेंट कर अभिनंदन किया। कार्यशाला में प्रमुख सचिव आयुष डी.पी. आहूजा, आयुक्त आयुष श्रीमती उमा महेश्वरी, राष्ट्रीय आयुर्वेद महासम्मेलन के प्रो. रविनारायण आचार्य एवं परंपरागत वैद्य शामिल हुए।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: सम्पूर्णता अभियान से जिलों और विकासखंडों में जीवन में सकारात्मक बदलाव

सम्पूर्णता अभियान से आकांक्षी जिलों और विकासखंडों के रहवासियों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव आकांक्षी कृषि जिलों की अवधारणा कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण सम्पूर्णता कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन और समुदाय की सक्रिय भागीदारी मूलभूत सुविधाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है सम्पूर्णता अभियान का उद्देश्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्पूर्णता अभियान सम्मान समारोह में जिला और विकासखंड अधिकारियों को किया सम्मानित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और प्रतिबद्धता के परिणाम स्वरूप देश ने विकास की नई गति प्राप्त की है। पिछड़े जिलों‍ और विकासखंडों को आकांक्षी रूप में चिन्हित कर विकास के लिए समन्वित प्रयास करना, इस दिशा में उठाया गया प्रभावी कदम है। आज आयोजित सम्पूर्णता अभियान सम्मान समारोह, जिला और विकासखंड स्तर पर स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, आधारभूत संरचना और सुशासन में आए सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त उदाहरण है। इन जिलों और विकासखंडों के रहवासियों के जीवन और जीवन जीने की परिस्थितियों में आया बदलाव अभियान की सफलता को अभिव्यक्त करता है। सम्पूर्णता अभियान से आकांक्षी जिलों और विकासखंडों में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण और उन्हें पोषक भोजन की उपलब्धता, बच्चों के टीकाकरण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण, स्कूलों में बिजली की उपलब्धता और समय पर पाठ्य पुस्तक वितरण जैसी गतिविधियों में सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को राज्य स्तरीय सम्पूर्णता अभियान सम्मान समारोह के अंतर्गत कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्पूर्णता अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदेश के आकांक्षी जिलों और विकासखंडों के अधिकारियों को उनकी टीम सहित सम्मानित किया। राज्य नीति आयोग की कॉफी टेबल बुक का विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने राज्य नीति आयोग द्वारा प्रदेश में संचालित विकास गतिविधियों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर विकसित कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप, खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर उपस्थित रही। मुख्य सचिव अनुराग जैन, नीति आयोग भारत सरकार के अपर सचिव रोहित कुमार और सदस्य प्रोफेसर रमेशचंद्र ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।   राज्य सरकार प्रत्येक पात्र हितग्राही को सभी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही को दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। प्रदेश में शिक्षा, कृषि, उद्योग, रोजगार, ऊर्जा सहित सभी क्षेत्रों में लक्ष्य निर्धारित कर कार्य किये जा रहे है। प्रदेश में अब 30 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं, इनमें से 10 पिछले सवा साल में शुरू किए गए। सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए नदी जोड़ो परियोजना की शुरुआत की गई है। सवा साल में साढ़े सात लाख हेक्टेयर सिंचाई रकबा बढ़ा है। प्रदेश में खेती के साथ मत्स्य पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में किसानों के लिए कृषि मेले, निवेश और उद्योग बढ़ाने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर समिट और विभिन्न सेक्टर्स की रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव आयोजित की गई हैं। उन्होंने कहा कि जो कलेक्टर और अन्य अधिकारी बेहतर कार्य करेंगे उन्हें सम्मानित किया जाएगा। कार्य में लापरवाही को राज्य सरकार किसी भी स्थिति में अनदेखा नहीं करेगी। सम्पूर्णता अभियान ने शासन-प्रशासन की कार्य संस्कृति को दी नई दिशा : मुख्य सचिव जैन मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि सम्पूर्णता अभियान ने शासन-प्रशासन की कार्य संस्कृति को नई दिशा दी है। डेटा आधारित मूल्यांकन और स्कोरिंग प्रणाली तथा प्राथमिकताओं की स्पष्टता व पारदर्शिता से प्रशासनिक दक्षता और जन सेवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। इससे जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी प्रोत्साहन मिला है। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद्र ने कहा कि प्रदेश के समुख बड़ी चुनौती थी, परंतु प्रदेश के अधिकारियों के समर्पित प्रयासों से लक्षित संकेतों में सम्पूर्णता प्राप्त करना संभव हुआ है। रमेश चंद्र ने स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े संकेतकों में मध्यप्रदेश में हुए कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड कार्यक्रम में हुए बेहतर कार्य से कृषि क्षेत्र में न केवल उत्पादकता सुधरेगी अपितु उपज की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। उन्होंने आकांक्षी कृषि जिलों की अवधारणा का उल्लेख करते हुए इसे कृषि विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। नीति आयोग के अपर सचिव रोहित कुमार ने कहा कि सम्पूर्णता कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं। मध्यप्रदेश द्वारा इस क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियां अन्य राज्यों के लिए उदाहरण हैं।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर सहित जिले की टीम को किया सम्मानित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मान समारोह के अंतर्गत जिला बड़वानी और विकासखंड पाटी के लिए तत्कालीन कलेक्टर राहुल फटिंग, जिला दमोह और विकासखंड तेंदूखेड़ा के लिए कलेक्टर सुधीर कोचर, जिला धार तथा विकासखंड तिरला के लिए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, जिला खंडवा और विकासखंड छैगांव माखन के लिए कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और तत्कालीन कलेक्टर अनूप कुमार सिंह, जिला निवाड़ी और विकासखंड पृथ्वीपुर के लिए कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ और तत्कालीन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा, जिला टीकमगढ़ और विकासखंड बलदेवगढ़ के लिए कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय और तत्कालीन कलेक्टर अवधेश शर्मा, जिला विदिशा और विकासखंड बासौदा के लिए कलेक्टर अंशुल गुप्ता (प्रशिक्षण पर), तत्कालीन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, जिला झाबुआ और विकासखंड थांदला, मेघनगर, रामा व राणापुर के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत जितेन्द्र सिंह चौहान, जिला रतलाम और विकासखंड बाजना के लिए कलेक्टर राजेश बाथम, जिला अनूपपुर और विकासखंड पुष्पराजगढ़ के लिए कलेक्टर हर्षुल पंचोली और जिला शहडोल और विकासखंड पाली के अधिकारियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला डिण्डौरी और आकांक्षी विकासखंड करंजिया, मेहेंदवानी व बजाग के लिए संयुक्त कलेक्टर सुभारती मेरावी तथा तत्कालीन कलेक्टर हर्ष सिंह, जिला खरगोन और विकासखंड भगवानपुर तथा झिरन्या के लिए कलेक्टर श्रीमती भाव्या मित्तल और तत्कालीन कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, जिला राजगढ़ और विकासखंड जीरापुर के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अर्पित गुप्ता, जिला श्योपुर और विकासखंड श्योपुर, कराहल तथा विजयपुर के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अतेन्द्र सिंह गुर्जर तथा तत्कालीन कलेक्टर लोकेश कुमार जांगीड़, जिला अलीराजपुर और विकासखंड कट्ठीवाड़ा के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रखर सिंह, जिला छतरपुर और विकासखंड बक्सवाहा के लिए सीईओ … Read more

राज्यपाल पटेल: समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए सरकार की योजनाएँ सक्रिय

राज्यपाल ने सिवनी जिले के ग्रामीणों से किया आत्मीय संवाद प्रधानमंत्री आवास के गृह प्रवेश में राज्यपाल शामिल हुए   भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए योजनाएँ बनाकर उनका मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन कर रही हैं। आयुष्मान भारत योजना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत है। अब पाँच लाख रुपये तक निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध होने से हर गरीब परिवार सुरक्षित हुआ है। सरकार के प्रयासों से महिलाएं आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से सशक्त बन रही है। कृषि क्षेत्र में भी महिलाओं को ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में प्रशिक्षित कर आधुनिक खेती में उनका योगदान प्राप्त किया जा रहा है। राज्यपाल पटेल ने बुधवार को सिवनी जिले के विकासखंड केवलारी के ग्राम झोला में ग्रामीणजनों के साथ आत्मीय संवाद के दौरान यह बात कही। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आज ग्रामीण महिलाएँ स्व-सहायता समूहों के माध्यम से छोटे-बड़े उद्योग संचालित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाएँ अपने परिवार का बेहतर लालन-पालन के साथ ही समाज में भी सशक्त भूमिका निभा रही हैं। राज्यपाल पटेल ने जनजातीय समुदाय में पाए जाने वाले अनुवांशिक रोग सिकल सैल रोग और रोकथाम के संबंध में बताया। उन्होंने कहा कि जैसे विवाह से पहले लड़के-लड़की की कुंडली मिलाई जाती है, उसी तरह सिकल सैल कार्ड भी अवश्य मिलाना चाहिए। यदि दोनों ही वाहक या रोगग्रस्त हों तो विवाह कदापि न किया जाए। उन्होंने बताया कि सरकार सिकल सैल उन्मूलन के लिए व्यापक अभियान चला रही है। इसके अंतर्गत नि:शुल्क जांच एवं परामर्श की व्यवस्था की गई है। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जांच कराए और इस रोग की रोकथाम में सहयोग दे। प्रत्येक बच्चे की शिक्षा और समाज के उत्थान के लिए युवाओं की भूमिका पर दिया बल राज्यपाल ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री जन मन कार्यक्रम और धरती आबा अभियान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी बच्चे स्कूल जाएं। युवा पात्र परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने और शिक्षा के प्रसार में सहयोग करें।  जनजातीय विकास सरकार की प्राथमिकता : डॉ. विजय शाह कार्यक्रम को जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. विजय शाह ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय अंचलों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री जन मन और धरती आबा अभियान जैसे विशेष कार्यक्रमों का उद्देश्य जनजातीय समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जोड़कर मुख्यधारा में लाना है।  डॉ. शाह ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें और उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करें। मंत्री ने यह भी बताया कि जनजातीय युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं कौशल विकास योजनाएँ चल रही हैं, जिनसे वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं। राज्यपाल पटेल ने श्रीमती मुलिया बाई के प्रधानमंत्री आवास का किया उद्घाटन राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विकासखंड केवलारी के ग्राम झोला के प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हितग्राही श्रीमती मुलिया बाई पति सुक्कू बैगा के आवास का शुभारंभ कर गृह प्रवेश कराया। राज्यपाल ने लाभान्वित परिवार से संवाद कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलाव की जानकारी ली। राज्यपाल ने कहा कि ग्रामों की वास्तविक उन्नति तभी संभव है जब योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुँचे और उसका सदुपयोग हो। उन्होंने ग्रामीणों से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। प्रवास के दौरान ग्रामीणों ने पारंपरिक सैला नृत्य प्रस्तुत किया। महिलाओं ने स्वागत गीत गाकर अतिथियों का अभिनंदन किया। प्राथमिक शाला झोला का निरीक्षण राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने प्राथमिक शाला झोला का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों से आत्मीय संवाद किया। बच्चों से सामान्य प्रश्न पूछे, जिनका उत्साहपूर्वक उत्तर देकर बच्चों ने अपनी जिज्ञासा और आत्मविश्वास का परिचय दिया। राज्यपाल पटेल ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की ज्योति ही विकास की आधारशिला है। बच्चों की तरक्की के साथ ही गांव और समाज प्रगति की राह पर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने बच्चों को स्वच्छता, अनुशासन और संस्कारों के महत्व से भी अवगत कराया। राज्यपाल ने शिक्षकों से शैक्षणिक गतिविधियों, पढ़ाई की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के परिणाम की जानकारी ली। उन्होंने शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई में विशेष रुचि लेकर गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रेरित किया।          

दिव्यांग कल्याण परिषद ने विधायक को सौंपा 10 सूत्रीय मांग पत्र, पेंशन बढ़ाने की मांग

दिव्यांग कल्याण एवं विकास परिषद के सदस्य,10 सूत्रीय मांगों का सौपा मांग पत्र,दिव्यांगों को मिलने वाली पेंशन 600 से बढ़ा कर 5 हजार कराये,सरकार तक भेजे हमारी मांगे,आज जनसुनवाई में आये नागरिको की विधायक ने सुनी समस्याए आष्टा मध्य प्रदेश के आष्टा में दिव्यांग कल्याण एवं विकास परिषद के सदस्य आज विधायक गोपालसिंह इंजीनियर द्वारा प्रत्येक बुधवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई में पहुचे । दिव्यांग जनों ने 10 सूत्रीय मांग पत्र विधायक को सौपा एवं उनकी मांगों को शासन तक पहुचने एवं उन मांगो को पूर्ण कराने की मांग की । सौपे गये मांग पत्र में मांग की गई कि अभी दिव्यांजनो को 600₹ पेंशन मिलती है सरकार उसे बढ़ा कर 5 हजार करे । दिव्यांग जनों को एवं आये अन्य  ग्रामीणोंजनों को विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने भरोसा दिया कि उनकी समस्या को जल्द हल कर जो मांग शासन स्तर की है उसे वे शासन तक पहुचायेंगे । आज जनसुनवाई में कई ग्रामो से ग्रामीण विधायक कार्यालय में आयोजित होने वाली जनसुनवाई में  पहुचे । स्मरण रहे प्रत्येक बुधवार को आष्टा विधायक अपने कार्यालय में सुबाह 10 बजे से जनता की समस्याओं को सुनने,उनेह हल करवाने के लिये जनसुनवाई करते है । आज बुधवार को प्रातः 10 बजे से कार्यालय में उपस्तिथ रह कर विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने जनता की समस्याओं को सुना एवं उनकी समस्याओं को हल करने के सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश दिये । आष्टा विधायक गोपालसिंह इंजीनियर जो की हर बुधवार को अपने कार्यालय में जन सुनवाई कार्यक्रम के तहत उपस्तिथ रहते है । आज भी बड़ी संख्या में क्षेत्र से नागरिक जनसुनवाई में पहुचे एवं अपनी अपनी पीड़ा से विधायक को अवगत कराया एवं आवेदन दिये। जनता से प्राप्त आवेदनों पर विधायक ने कहा की आपका जन सेवक होने के नाते आपकी समस्याओं को सुनना, हल करना मेरा धर्म है। आज आये आवेदनों को तत्काल सम्बंधित विभागों के अधिकारियों से चर्चा कर ग्रामीणों की समस्याओं का समय सीमा में तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिये । आज जनसुनवाई में कई विभागों के 44 आवेदन प्राप्त हुए उन्हें निराकरण हेतु भेजे गये । विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने कार्यालय आये सभी नागरिको को भरोसा दिया कि आपकी समस्याओं का जल्द निराकरण होगा,जो मांग शासन स्तर की है उनेह वे शासन तक पहुचायेंगे। मीडिया प्रभारी सुशील संचेती ने जानकारी देते हुए बताया की आज जनसुनवाई में दिव्यांजनो की दस सूत्रीय मांगों के साथ घाटे वाले बाबा स्थल पर चबूतरा एवं टीन शेड निर्माण कराने,किसान सम्मन निधि अप्राप्त होने की शिकायत,मकान का पट्टा दिलाने,ग्राम टिंगम टेकरी मांडा गुराडिया तहसील जावर में मकान का पट्टा दिलाने,करंट लगने पर आर्थिक सहायता प्रदाय हेतु,स्पेशल मोबाइल एवं दिव्यांगों के लिए छड़ी प्रदाय हेतु मांग पत्र,दुपाड़िया से मुंदीखेड़ी तक रोड एवं डीपी हेतु आवेदन,अज्ञात वाहन से टक्कर मारने पर सहायता राशि दिलाने,काजीपुरा वार्ड क्रमांक 9 आष्टा में बाउंड्री वॉल एवं तीन पहिया वाहन दिलाने,ग्राम पंचायत अरनिया जोहरी में वाधयन्त्र हेतु राशि स्वीकृत करने, इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहन हेतु आवेदन,आर्थिक सहायता की मांग,प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रथम क़िस्त प्रदाय हेतु मांग सहित अन्य 44 आवेदन प्राप्त हुए। सभी आई शिकायतों एवं आवेदनों को सम्बंधित विभागों को निराकरण हेतु निर्देश दिये है । विभागों की आई समस्याओं को लेकर मौके से ही सम्बंधित विभाग के अधिकारियों को आई समस्याओं के निराकरण करने के निर्देश दिये,कुछ आवेदन निराकरण हेतु सम्बंधित विभागों को भेजे गये ।

फलोद्यान बगिया विकास में स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने दिखाया विशेष उत्साह

एक बगिया मां के नाम परियोजना, MPSEDC ने किया ऐप का निर्माण फलोद्यान बगिया विकास में स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने दिखाया विशेष उत्साह 34 हजार से अधिक महिलाओं ने कराया ऐप पर रजिस्ट्रेशन, निजी भूमि पर विकसित की जाएगी बगिया भोपाल स्व सहायता समूह की महिलाओं को समृद्ध बनाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नवाचारों के माध्यम से महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्रदेश में "एक बगिया मां के नाम" परियोजना शुरू की गई है। इसके अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निजी भूमि पर फलोद्यान की बगिया लगाई जाएगी। फलोद्यान की बगिया लगाने को लेकर समूह की महिलाओं ने विशेष उत्साह का दिखाया है। प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य से अधिक 34 हजार 84 महिलाओं ने एक बगिया मां के नाम ऐप पर पंजीयन कराया है। परियोजना के अंतर्गत सरकार हितग्राहियों को पौधे, खाद, गड्ढे खोदने के साथ ही पौधों की सुरक्षा के लिए कटीले तार की फेंसिंग और सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जल कुंड बनाने के लिए राशि प्रदान कर रही है। योजनान्तर्गत प्रदेश में फलदार पौधे लगाने का कार्य भी शुरू हो गया है। MPSEDC ने किया ऐप का निर्माण एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का चयन एक बगिया मां के नाम ऐप से किया जा रहा है। ऐप का निर्माण मनरेगा परिषद द्वारा MPSEDC के माध्यम से कराया गया है। अन्य किसी माध्यम से हितग्राही का चयन नहीं किया जाएगा। चयनित महिला हितग्राही के नाम पर भूमि नहीं होने की दशा में उस महिला के पति-पिता-ससुर-पुत्र की भूमि पर उनकी सहमति के आधार पर पौधरोपण किया जा सकेगा। पहली बार अत्याधुनिक तकनीक से किया जा रहा पौधरोपण प्रदेश में पहली बार अत्याधुनिक तकनीक से पौधरोपण का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए सिपरी सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से पौधरोपण के लिए जमीन का चयन वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से किया गया है। जमीन चिन्हित होने के बाद सॉफ्टवेयर की मदद से ही भूमि का परीक्षण किया गया है। जलवायु के साथ ही किस जमीन पर कौन सा फलदार पौधा उपयोगी है, पौधा कब और किस समय लगाया जाएगा, पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी कहाँ पर उपलब्ध है, यह सब वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से पता लगाया जा रहा है। जमीन के उपयोगी नहीं पाए जाने पर पौधरोपण का कार्य नहीं होगा। पौधरोपण का कार्य बेहतर ढंग से हो इसके लिए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रदेश में 31 हजार 300 महिलाओं को मिलेगा परियोजना का लाभ “एक बगिया माँ के नाम’’ परियोजना अंतर्गत प्रदेश की 31 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को लाभ मिलेगा। इनकी निजी जमीन पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाएं जाएंगे, जो समूह की महिलाओं की आर्थिक समृद्धि का आधार बनेंगे। हर एक ब्लॉक में 100 हितग्राहियों का किया जा रहा चयन एक बगिया मां के नाम परियोजना अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक में न्यूनतम 100 हितग्राहियों का चयन किया जा रहा है। चयनित हुई समूह की पात्र महिलाओं को बाकायदा प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण महिलाओं को वर्ष में दो बार दिया जाएगा। न्यूनतम 0.5, अधिकतम 1 एकड़ जमीन होना अनिवार्य एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने के लिए चयनित हुई समूह की महिला के पास बगिया लगाने के लिए भूमि की सीमा भी निर्धारित की गई है। चयनित महिला के पास न्यूनतम 0.5 या अधिकतम एक एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। प्रति 25 एकड़ पर 1 'कृषि सखी' की होगी तैनाती फलोद्यान की बगिया लगाने के लिए चयनित हितग्राहियों की सहायता के लिए कृषि सखी की तैनाती की जाएगी। ये कृषि सखी हितग्राहियों को खाद, पानी, कीटों की रोकथाम, जैविक खाद, जैविक कीटनाशक तैयार करने और अंतरवर्तीय फसलों की खेती के बारे में जानकारी प्रदान करेंगी। प्रत्येक 25 एकड़ पर एक कृषि सखी की तैनाती की जाएगी। ड्रोन-सैटेलाइट इमेज और डैशबोर्ड से निगरानी पौधरोपण का कार्य सही ढंग से हो रहा है या नहीं, पौधे कहाँ लगे हैं, कहाँ नहीं लगे, इसकी ड्रोन-सैटेलाइट इमेज से बकायदा निगरानी भी की जाएगी। साथ ही पर्यवेक्षण के लिए अलग से एक डैशबोर्ड भी बनाया गया है। प्रदर्शन के आधार पर प्रथम 3 जिले, 10 जनपद पंचायत व 25 ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। हितग्राहियों के चयन में टॉप 5 जिले एक बगिया मां के नाम परियोजना के लिए हितग्राहियों के चयन में प्रदेश के 5 जिले सिंगरौली, देवास, खंडवा, निवाड़ी और टीकमगढ़ अग्रणी हैं।  

चांदी खरीदने वालों के लिए खुशखबरी! अब मिलेगी हॉलमार्किंग की गारंटी, धोखाधड़ी से बचेंगे ग्राहक

भोपाल  सोने के बाद अब चांदी खरीदने वालों को भी हॉलमार्क का लाभ मिलने वाला है। एक सितंबर से देश भर के साथ ही चांदी के गहनों और बर्तनों पर सरकार हॉलमार्क लागू करने जा रही है, हालांकि प्रारंभ में इसे स्वैच्छिक तौर पर लागू किया जा रहा है। चांदी पर 6 डिजिट वाली एचयूआईडी हॉलमार्किंग लागू होगी। यानी अब हर चांदी पर सोने की तरह ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (bureau of indian standards) की मुहर (BIS Seal) होगी, जो शुद्धता और असलियत की गारंटी देगी। 900, 800, 835, 925, 970 और 990 जैसी 6 ग्रेड चांदी पर हॉलमार्किंग लागू की जाएगी। इससे ग्राहकों को सही दाम मिलेगा और ईमानदार व्यापारियों का विश्वास बढ़ेगा। गहनों की मजदूरी बढ़ेगी, तो गहने भी होंगे महंगे एमपी के सराफा कारोबारियों की मानें तो इससे गहनों की मजदूरी पर 30 फीसदी का इजाफा होगा। इससे वर्तमान में एक हजार रुपए की मिलने वाली पायल के दाम 1500 रुपए तक हो जाएंगे। ग्वालियर में सालाना चांदी का 500 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार होता है। जाने क्या है 'हॉलमार्क' (What is Hallmark) हॉलमार्क एक सरकारी मान्यता प्राप्त प्रमाण है, जो धातु की शुद्धता बताता है। जैसे, सोने में 22 कैरेट या 18 कैरेट का हॉलमार्क होता है, वैसे ही अब चांदी पर भी एक खास निशान होगा, जो बताएगा कि उसमें चांदी की शुद्धता कितनी है। बीआईएस के तहत मान्यता प्राप्त अस्सेइंग और हॉलमार्किंग सेंटर में धातु की जांच के बाद यह मुहर लगाई जाती है। ग्राहकों को क्या फायदे? (Costumer Benefits) शुद्धता की गारंटी : हर हॉलमार्क चांदी पर बीआईएस का लोगो, शुद्धता का अंक और पंजीकरण नंबर। सही दाम : वजन और शुद्धता में धोखाधड़ी की संभावना कम। बेचने में आसानी : हॉलमार्क चांदी की पुनर्खरीद पर बेहतर रेट मिलेगा। व्यापारियों को क्या फायदे? साख में बढ़ोतरी – ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा। नकली बाजार पर रोक : मिलावटी चांदी बेचने वालों पर लगाम। बिक्री में वृद्धि : गुणवत्ता की गारंटी से ग्राहक वफादारी बढ़ेगी।

उपभोक्ता आयोग का काम प्रशंसनीय: 3.07 लाख से अधिक प्रकरण हुए निराकृत, 78 हजार का 90 दिन में निपटान

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में उपभोक्ताओं के आवेदन पर लगातार कार्यवाही की जा रही है। जून 2025 तक कुल 3 लाख 7 हजार 536 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है। कुल प्राप्त प्रकरण संख्या 3 लाख 31 हजार 789 हैं। राजपूत ने बताया है कि निराकृत प्रकरणों में से 78 हजार 20 प्रकरणों का निराकरण 90 दिन में किया गया। उपभोक्त विवाद प्रतितोषण आयोग अंतर्गत जिला अनूपपुर में 475, अशोकनगर में 2365, बड़वानी 1093, बालाघाट 3571, बैतूल 2228, भिंड 6175, भोपाल क्रं-एक 19 हजार 498, भोपाल क्रं-2 4395, बुरहानपुर 1739, छतरपुर 6579, छिंदवाड़ा 6479, दमोह 5634, दतिया 5821, देवास 3313, धार 4337, डिंडोरी 676, गुना 10 हजार 865, ग्वालियर 23 हजार 210, हरदा 3014, इंदौर क्रं-1 में 27 हजार 916, इंदौर क्रं-2 में 5863, जबलपुर क्रं-1 में 15 हजार 464, जबलपुर क्रं-2 में 3566, झाबुआ 1288, कटनी 3781, खंडवा 6081, मंडला 4785, मंडलेश्वर 4063, मंदसौर 7954, मुरैना 9162, नर्मदापुरम 5597, नरसिंहपुर 2536, नीमच 1995, पन्ना 1585, रायसेन 1193, राजगढ़ 5050, रतलाम 3999, रीवा 11 हजार 904, सागर 9297, सतना 11 हजार 65, सीहोर 6565, सिवनी 4051, शहडोल 1801, शाजापुर 3190, श्योपुर 2258, शिवपुरी 11 हजार 84, सीधी 2172, टीकमगढ़ 3428, उज्जैन 12 हजार 537, उमरिया 485 और विदिशा में 4354 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है।