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मोहन भागवत का इंदौर आगमन, 13 सितंबर को करेंगे पुस्तक विमोचन; 8 महीने में चौथा दौरा

इंदौर  RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत 13 सितंबर को इंदौर में रहेंगे। सरसंघचालक भागवत का यह इंदौर में साल का चौथा दौरा है। इस बार मोहन भागवत इंदौर में पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं। भागवत 14 सितंबर रविवार शाम तक इंदौर में रहेंगे। रविवार दोपहर 3.15 बजे स्थानीय ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राज्य मंत्रिमंडल के कई सदस्य और कुछ गणमान्य लोग भी समारोह में उपस्थित रहेंगे। बता दें की पटेल ने यह पुस्तक अपनी नर्मदा परिक्रमा के दौरान लिखी थी। उन्होंने दो बार 1994 और 2007 में पैदल नर्मदा परिक्रमा की थी। संघ प्रमुख का यह चौथा दौरा संघ प्रमुख का पिछले 8 महीने में यह चौथा इंदौर का दौरा है। इससे पहले वह 3 जनवरी 2025, 13 जनवरी 2025 और 10 अगस्त 2025 में इंदौर आ चुके हैं। इस साल इन कार्यक्रम में आ चुके हैं संघ प्रमुख     डॉ. मोहन भागवत इस साल सबसे पहले 3 जनवरी को इंदौर आए थे। वह इंदौर में आरएसएस के शताब्दी कार्यक्रम स्वर शतकम में हुए शामिल थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि हर अग्रपंक्ति में हमारा देश होना चाहिए। ऐसा भारत संघ के कार्य से खड़ा होगा और इसलिए संघ कार्य में जो करना आवश्यक होगा, वह मैं करूंगा।     दूसरी बार डॉ. भागवत इंदौर में 13 जनवरी को आए थे। इस दौरान उन्होंने इंदौर में श्री रामजन्म भूमि तीर्थ ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय को देवी अहिल्या राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। तब उन्होंने कहा था कि लोग पूछते थे कि राम मंदिर क्यों जरूरी? रोजगार, गरीबी, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं की बात क्यों नहीं करते। मैं कहता था कि रोजगार, खुशहाली का रास्ता भी राम मंदिर से होकर जाता है। हमने हमेशा समाजवाद, रोजगार, गरीबी की बात की, लेकिन क्या हुआ। हमारे साथ चले जापान-इजराइल आज कहां से कहां पहुंच गए।     तीसरी बार संघ प्रमुख 10 अगस्त यानी रक्षाबंधन के दूसरे इंदौर में आए थे। इस दौरान मोहन भागवत ने 96 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हुए कैंसर केयर हॉस्पिटल का उद्घाटन किया था। तब भागवत ने सभी जाति-बिरादरी के प्रमुखों से कमजोर वर्गों को ऊपर उठाने के लिए मिलकर प्रयास करने की अपील की। उन्होंने कहा देश में आज शिक्षा और स्वास्थ्य आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गए हैं। इन दोनों ही सेवाओं को कमर्शियल बना दिया गया है।

बदल गया बागेश्वर धाम का शेड्यूल: पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताई 7 दिन की खास दिनचर्या

छतरपुर बागेश्वर धाम पर आने वाले श्रद्धालुओं को यह जानने के लिए उत्सुकता रहती थी कि कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का दरबार कब लगेगा। कब उनके दर्शन हो सकेंगे। तो आपको बता दें कि धाम पर अब सात दिन में पांच दिन दरबार लगाया जाएगा। जिसमें नई अर्जी, पुरानी पेशी सहित प्रेतराज का दरबार शामिल हैं। इसे लेकर धाम के कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नई व्यवस्था को लेकर सात दिन की नियमावली बताई है। धीरेंद्र शास्त्री ने शेयर किया वीडियो इस नियमावली के अनुसार ही धाम पर दरबार लगाया जाएगा और अन्य कार्य किए जाएंगे। इस लेकर शास्त्री जी ने एक वीडियो जारी किया है और उस वीडियो में उन्होंने सात दिन की नियमावली बनाई है। आपको बता दें कि धाम पर देशभर से श्रद्धालु रोजाना पहुंचते हैं और शनिवार मंगलवार को तो अत्यधिक भीड़ होती है। अब लोगों को यह जानकारी रहेगी कि वह कब कौन सा दरबार लगाएंगे। रविवार को वह किसी से नहीं मिलेंगे। इस दिन वह धाम की व्यवस्थाओं पर ध्यान देंगे।   यह है धाम की सात दिन की नियमावली सोमवार- नई अर्जी का दरबार लगाया जाएगा। मंगलवार- पुरानी पेशी का दरबार लगाया। बुधवार- नई अर्जी का दरबार लगेगा। जिनके पर्चा नहीं बने उनका दरबार लगेगा। गुरुवार- हर गुरुवार को बागेश्वर धाम पर रहेंगे और श्रद्धालुओं से मिलेंगे। शुक्रवार- नई अर्जी का दरबार लगाया जाएगा। लोगों की समस्याएं बालाजी तक पहुंच सकेंगी। शनिवार- प्रेतराज सरकार का दरबार लगाया जाएगा। रविवार- धाम की व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जाएगा। अन्नपूर्णा की व्यवस्था और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर ध्यान देंगे। इस दिन किसी से नहीं मिलेंगे।

चौंकाने वाला मामला: 15 दिन पहले जन्मे जुड़वां बच्चों की मौत, जांच के लिए कब्र से शव निकाला गया

धार ग्राम कछवानिया में 15 दिन पूर्व जन्मे जुड़वां बच्चों की मौत हो गई। तबीयत बिगड़ने पर स्वजन दोनों को धामनोद अस्पताल ले गए थे, जहां से लौटने के बाद आधे घंटे के अंदर दोनों बच्चों की मौत हो गई। स्वजन ने पहले एक शिशु को दफना दिया था, लेकिन बाद में पूरे मामले की जांच के लिए दफनाए गए शव को खोदकर निकाला गया। इंदौर भेजे गए दोनों शव दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए इंदौर भेजा गया है। धामनोद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। कछवानिया निवासी शिवकन्या पत्नी विनोद ने 26 अगस्त को धामनोद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जुड़वां शिशुओं को जन्म दिया था। ग्रामीणों और स्वजन ने दोनों बच्चों की मौत पर संदेह जताया और मामले की जांच की मांग की।   पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल भेजे गए शव बुधवार सुबह तहसीलदार कुणाल अवास्या और धामनोद पुलिस की मौजूदगी में दफनाए गए शिशु के शव को निकाला गया। शवों को धामनोद अस्पताल लाया गया, जहां से उन्हें पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल इंदौर भेजा गया। धामनोद सीबीएमओ डा. कीर्ति बैरागी के मुताबिक, पीएम रिपोर्ट से ही मौत के कारण का पता हो पाएगा।

फार्मेसी पंजीयन प्रक्रिया होगी पूरी तरह ऑनलाइन, पूरी पारदर्शिता से करें प्रकरणों का निराकरण : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक हुई भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अब ऑनलाइन प्रणाली से घर बैठे पंजीयन प्रमाणपत्र मेल और डिजिलॉकर के माध्यम से उपलब्ध होंगे। इससे पंजीयन प्रक्रिया सुव्यवस्थित हुई है और लंबित मामलों का निपटारा तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग 50 प्रतिशत विद्यार्थियों के आवेदन अपूर्ण हैं, जिन्हें समय पर पूरा करवाना आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल होटल पलाश भोपाल में मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी परिषद की बैठक में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि प्राइवेट विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे सभी विद्यार्थियों की सही जानकारी उपलब्ध कराएँ। यदि गलती छात्रों की है तो उन्हें सुधार के लिये सूचित किया जाए और यदि संस्थान की लापरवाही है तो मान्यता एवं एफिलिएशन पर कार्रवाई करें। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मासिस्ट, पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। विकसित और स्वस्थ भारत के लिए गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में जून 2025 से अगस्त 2025 तक की कार्यप्रगति की समीक्षा की गई। इसमें 3500 से अधिक नए पंजीयन सफलतापूर्वक पूर्ण हुए, 5800 आवेदन प्रक्रिया में लंबित रहे तथा 1650 आवेदन निजी विश्वविद्यालयों की सूची उपलब्ध न होने के कारण शेष रहे। बताया गया कि संपूर्ण कार्यप्रणाली को अब डिजिटल मोड पर स्थानांतरित कर दिया गया है। इसमें समग्र आईडी, डिजिलॉकर, विवाह एवं निवास प्रमाणपत्र तथा एफडीए का एकीकरण किया गया है। नई प्रणाली से स्लॉट बुकिंग एवं परिषद कार्यालय में उपस्थित होकर सत्यापन कराने की आवश्यकता समाप्त होगी और सिस्टम आधारित ऑटो वेरिफिकेशन से प्रमाणपत्र सीधे डिजिलॉकर पर उपलब्ध होंगे। यह पहल परिषद को डिजिटल गवर्नेंस में देश की अग्रणी परिषद बनाएगी। बैठक में परिषद अध्यक्ष श्री संजय कुमार जैन, सदस्य श्री राजू चतुर्वेदी, श्री गौतमचंद धींग, श्री रामरतन गर्ग, श्री सत्येन्द्र सिंह चौहान, श्री देवेंद्र कुमार बजाजत्य, श्री अशोक जैन एवं डॉ. पवन दुबे सहित श्री दिनेश मौर्य (ड्रग कंट्रोलर, म.प्र.), श्री आत्री मुख्य विश्लेषक और चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए। परिषद की रजिस्ट्रार श्रीमती भव्या त्रिपाठी ने प्रगति और आगामी योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

टीकमगढ़ परीक्षण संभाग को एम.पी. ट्रांसको की सर्वोत्तम दक्षता ट्रॉफी

भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के टीकमगढ़ परीक्षण संभाग ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि के लिए टीकमगढ़ को राज्य स्तरीय सर्वोत्तम दक्षता ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। जबलपुर मुख्यालय में आयोजित समारोह में एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक श्री सुनील तिवारी ने यह ट्रॉफी टीकमगढ़ टीम को प्रदान की। टीकमगढ़ की ओर से कार्यपालन अभियंता श्री आर.पी. कान्यकुब्ज, सहायक अभियंता श्री जी.पी. राय और श्रीमती चंदा यादव ने यह सम्मान ग्रहण किया। प्रबंध  संचालक श्री सुनील तिवारी ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद टीकमगढ़ की टीम की यह उपलब्धि सभी के लिए प्रेरणा है। 

प्रदेश के 9300 हाई एवं हायर सेकण्डरी स्कूलों में 12 सितंबर को उमंग दिवस

बच्चों को जीवन कौशल शिक्षा देने के लिये चलाया जा रहा है कार्यक्रम भोपाल "उमंग है तो जिंदगी में रंग है" इस थीम पर आधारित उमंग दिवस का आयोजन 12 सितम्बर को प्रदेश के 9 हजार 300 हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का लाभ 20 लाख से अधिक बच्चों को मिलेगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निर्धारित 10 जीवन कौशलों से परिचित करवाना है। कार्यक्रम की मदद से बच्चे जीवन में आने वाले चुनौतियों का सामना मजबूती से कर सकेंगे। कार्यक्रम का एक और उद्देश्य है कि बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार किया जाये। यह कार्यक्रम स्कूल शिक्षा विभाग एवं संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) के सहयोग से तैयार किया गया है। जीवन कौशल शिक्षा आधारित करिकुलम और उसके संचालन में की गई पिछले 7 वर्षों की कड़ी मेहनत से बच्चों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव को उत्साह के रूप में मनाना है। कार्यक्रम में बच्चे एक-दूसरे के अनुभवों को साझा करते हैं और अन्य विद्यार्थियों को प्रोत्साहित एवं मार्गदर्शित करते है। उमंग स्कूल हेल्थ एवं वेलनेस कार्यक्रम एक फ्लैगशिप प्रोग्राम है जिसमें गतिविधि आधारित कक्षावार जीवन कौशल शिक्षा के मॉड्यूल हैं जिसे शिक्षा विभाग, स्वास्थ विभाग एवं यूनाईटेड नेशन्स पॉप्युलेशन फंड (यूएनएफपीए) की बराबर भागीदारी से मिलकर चलाया जा रहा है। प्रदेश की सभी शासकीय हाई एवं हॉयर सेकेंडरी स्कूलों में प्रत्येक मंगलवार को एक सत्र लिया जाता है। प्रत्येक शाला से 2 शिक्षकों को (एक पुरुष एवं एक महिला) हेल्थ एवं वेलनेस एंबेसेडर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। राज्य में अब तक लगभग 19 हजार शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। यह प्रशिक्षित शिक्षक हेल्थ एंड वैलनेस एम्बेसडर कक्षाओं में जीवन कौशल गतिविधियों का संचालन करते हैं। उमंग दिवस के कार्यक्रम में विभिन्न विभाग के अधिकारी एवं मोटिवेशनल वक्ताओं को भी शिक्षण संस्था में आमंत्रित किया जाएगा, जिससे विद्यार्थी आगे बढ़ाने के लिए और उत्साह पूर्वक कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित हो सकें। इस कार्यक्रम में न केवल विद्यार्थियों को बल्कि शाला में उपस्थित प्रत्येक शिक्षक को भी इस विषय से अवगत होने का मौका मिलेगा।  

माँ नर्मदा की उद्गम स्थली में कपिलधारा पहुँच मार्ग का भूमिपूजन

गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा : लोक निर्माण मंत्री सिंह भोपाल  लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने अमरकंटक में कपिलधारा पहुँच मार्ग का भूमिपूजन किया। माँ नर्मदा की उद्गम स्थली को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि यह मार्ग केवल सड़क नहीं बल्कि श्रद्धा और आस्था को आधुनिकता से जोड़ने वाला पथ बनेगा। कपिलधारा जलप्रपात, जिसे ऋषि कपिल की तपोभूमि माना जाता है, हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। मंत्री श्री सिंह ने बताया कि पाँच किलोमीटर लंबे इस नए पहुँच मार्ग को ऐसा रूप दिया जाएगा, जिससे यह केवल सड़क न लगकर एक पर्यटन स्थल जैसा अनुभव प्रदान करेगा।इस दो लेन चौड़े मार्ग पर पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ, छायादार आश्रय स्थल, कम्पोस्ट शौचालय और सौर ऊर्जा से संचालित दीपक लगाए जाएँगे। मार्ग की बाउंड्री पर कपिल मुनि की तपस्या, राजा सगर के पुत्रों और माँ गंगा के अवतरण की गाथाएँ उकेरी जाएँगी। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि यह मॉडल भीमबेटका और भोजपुर जैसे स्थलों पर भी लागू किया जाएगा। समीक्षा बैठक में विभागीय निर्णय लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश के मुख्य अभियंता उपस्थित रहे। बैठक में विभागीय प्रस्तुतियाँ दी गईं। मंत्री श्री सिंह ने गुणवत्ता पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारियों ने औचक निरीक्षणों में सख़्ती दिखाई है, वहीं कुछ ने बिल्कुल भी कार्रवाई नहीं की। यह रवैया अब स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने घोषणा की कि अच्छा काम करने वालों को सम्मान और लापरवाही करने वालों को दंड मिलेगा। लोक कल्याण सरोवर योजना पर जोर बैठक में लोक कल्याण सरोवर योजना पर चर्चा हुई। मंत्री श्री सिंह ने निर्देश दिए कि प्रत्येक परिक्षेत्र में 10-10 सरोवरों का चयन कर मुख्य अभियंता स्वयं उनका भौतिक निरीक्षण करें। इन सरोवरों पर सूचना पट्टिकाएँ लगाई जाएँ और इन्हें स्थानीय समाज के लिए उपयोगी धरोहर बनाया जाए। टेक्नोलॉजी आधारित नवाचार मंत्री श्री सिंह ने बताया कि 18 से 20 सितम्बर तक प्रदेश की सभी सड़कों और पुलों का सर्वेक्षण रोड़ ट्रेकिंग एंड सर्वे मोबाइल ऐप से किया जाएगा। यह ऐप मुख्यमंत्री द्वारा अभियंता दिवस पर लोकार्पित किए जाने का प्रस्ताव है। भास्कराचार्य संस्थान द्वारा तैयार मास्टर प्लान रोड मैपिंग टूल पर भी चर्चा हुई, जिसे 1 नवम्बर को मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि इस टूल से सड़क योजना वैज्ञानिक और डेटा आधारित होगी। नर्मदा परिक्रमा पथ का विकास बैठक में नर्मदा परिक्रमा पथ पर प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि यह पथ श्रद्धालुओं के लिए केवल एक रास्ता नहीं होगा, बल्कि आस्था और संस्कृति का अनुभव बनेगा। इसमें ठहरने, भोजन और शौचालय जैसी सुविधाएँ होंगी। घाटों और मंदिरों का जीर्णोद्धार होगा तथा पूरी योजना ईको-फ्रेंडली सिद्धांतों पर आधारित रहेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि संत समुदाय और स्थानीय समाज की राय लेकर ही इस योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। पारदर्शिता और जवाबदेही पर बल समीक्षा बैठक में मंत्री श्री सिंह ने कहा कि विभाग की प्राथमिकता पारदर्शिता और जवाबदेही है। उन्होंने कहा कि “जनता को हर सड़क और भवन में गुणवत्ता और पारदर्शिता का अनुभव होना चाहिए।  

प्रधानमंत्री मोदी के धार आगमन पर स्वास्थ्य गतिविधियों की तैयारी की उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने की समीक्षा

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावित धार आगमन पर उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में प्रदेश में स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा की जाने वाली गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि सभी कार्य योजनाबद्ध रूप से किए जाएँ ताकि विशेष स्वास्थ्य सेवाओं से अधिक से अधिक लक्षित समूह लाभान्वित हो सके। उन्होंने आगामी 17 सितंबर से “स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान” पखवाड़े को सुव्यवस्थित रूप से आयोजित कर अधिक से अधिक नागरिकों को लाभान्वित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि अभियान की सतत मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाये। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मेडिकल टीचर्स की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सेवा शर्तों, मानदेय और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री तरुण राठी, मिशन संचालक डॉ. सलोनी सिडाना और सीईओ आयुष्मान मध्यप्रदेश डॉ. योगेश भरसट उपस्थित थे।  

पौधे लगाने का काम शुरू: सिंगरौली, खंडवा, रायसेन और देवास में लक्ष्य से अधिक स्वीकृति

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के एक पेड़ मां के नाम अभियान 2.0 से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में मनरेगा योजना के अंतर्गत एक बगिया मां के नाम से परियोजना शुरू की है। इसके माध्यम से स्व-सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया जा रहा है। समूह की महिलाओं की निजी भूमि पर फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। फलोद्यान की बगिया विकसित करने में प्रदेश में सिंगरौली, खंडवा, रायसेन और देवास जिलों की महिलाएं सबसे अधिक जागरूक दिखाई दे रही हैं। इन जिलों की महिलाओं ने निर्धारित लक्ष्य को पूर्ण कर लिया है। सिंगरौली जिले में समूह की 300 महिलाओं को परियोजना का लाभ दिए जाने का लक्ष्य रखा गया था, जबकि यहां 571 महिलाओं को फलदार पौधे लगाने की स्वीकृति मिली है। इसी तरह से खंडवा जिले में 700 की जगह 1187, रायसेन जिले में 700 की जगह 1178 और देवास जिले में 600 की जगह 751 महिलाओं को फलोद्यान की बगिया लगाने की स्वीकृति मिली है। अब तक 15 हजार 377 महिलाओं को मिली स्वीकृति प्रदेश में समूह की 31 हजार 300 महिलाओं को एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 15 हजार 377 महिलाओं को फलोद्यान की बगिया लगाने की स्वीकृति भी मिल चुकी है। साथ ही इन महिलाओं की निजी जमीन पर विभिन्न प्रकार के फलदार पौधों को लगाने का कार्य भी शुरू हो गया है। पौधों की सुरक्षा से लेकर कटीले तार की फेंसिंग, पौधे खरीदने, खाद, गड्ढे खोदने के साथ ही सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जल कुंड बनाने के लिए राशि भी उपलब्ध कराई जा रही है। ड्रोन से निगरानी एक बगिया मां के नाम परियोजना अंतर्गत किए जा रहे पौधरोपण की मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक डेव्हलेपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा ड्रोन के माध्यम से मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि चयनित जमीन, गड्ढे सहित पौधों की यथास्थिति के बारे में आसानी से जानकारी प्राप्त हो सकें। सिपरी सॉफ्टवेयर की मदद से किया जा रहा पौधरोपण का कार्य प्रदेश में पहली बार पौधरोपण का कार्य सिपरी सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जा रहा है। जलवायु के साथ ही किस जमीन पर कौन सा फलदार पौधा उपयोगी है, पौधा कब और किस समय लगाया जाएगा, पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी कहां पर उपलब्ध है, यह सब वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से पता लगाया जा रहा है। साथ ही जमीन के उपयोगी नहीं पाए जाने पर पौधरोपण का कार्य नहीं होगा। । 30 लाख लगाए जाएंगे फलदार पौधे प्रदेश में “एक बगिया मां के नाम’’ परियोजना अंतर्गत 31 हजार 300 स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निजी जमीन पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाएं जाएंगे, जो समूह की महिलाओं की आर्थिक उन्नति का आधार बनेंगे। प्रथम 3 जिले, 10 जनपद और 25 ग्राम पंचायत को मिलेगा पुरस्कार एक बगिया मां के नाम परियोजना अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रथम 3 जिले, 10 जनपद पंचायत और 25 ग्राम पंचायत को पुरस्कृत किया जाएगा। इसके साथ ही पर्यवेक्षण के लिए अलग से एक डैशबोर्ड बनाया गया है। इसके माध्यम से प्रतिदिन किस जिले में कितना कार्य हो रहा है, इसकी निगरानी की जा रही है। एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने के लिए चयनित हुई समूह की महिला के पास बगिया लगाने के लिए भूमि भी निर्धारित की गई है। चयनित महिला के पास न्यूनतम 0.5 डिसमिल या अधिकतम एक एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। क्रियान्वयन में टॉप-10 जिले व ब्लॉक एक बगिया मां के नाम परियोजना के क्रियान्वयन में 10 सितंबर की स्थिति में 10 जिले आगे हैं। इसमें सिंगरौली, खंडवा, रायसेन, देवास, छिंदवाड़ा, आगर मालवा, बैतूल, खरगोन, सागर और बड़वानी जिला शामिल है। वहीं टॉप 10 ब्लॉक में चितरंगी, खंडवा, पंधाना, खालवा, बैढ़न, छैगांव माखन, पुनासा, देवसर, हरसूद और मुलताई शामिल है।  

राष्ट्र को आगे बढ़ाने के लिए बच्चों का शिक्षित होना जरूरी : राज्यमंत्री कृष्णा गौर

84 लाख की लागत से निर्मित प्राथमिक शाला का लोकार्पण भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने बुधवार को गोविंदपुरा विधानसभा के बागसेवनिया में 84 लाख की लागत से निर्मित शासकीय प्राथमिक शाला का लोकार्पण किया। इस अवसर पर राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्र की प्रगति के लिए शिक्षा सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने बताया कि यह स्कूल जनसेवकों की अथक मेहनत का परिणाम है। कभी जहां कचरे का ढेर हुआ करता था, वहीं अब 10 कमरों का एक सुंदर और आधुनिक विद्यालय खड़ा है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि बागसेवनिया स्थित वार्ड-54 की इस प्राथमिक शाला को जल्द ही उन्नयन कर माध्यमिक विद्यालय तक विस्तारित किया जाएगा। फिलहाल यह शाला पाँचवीं कक्षा तक संचालित है, जिसे भविष्य में आठवीं कक्षा तक बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोविंदपुरा विधानसभा में विकास की गंगा बह रही है और शिक्षा के क्षेत्र में यह स्कूल एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। कार्यक्रम में श्रीमती मोनिका ठाकुर, पार्षद श्री जितेन्द्र शुक्ला, श्री प्रताप वारे, श्री प्रताप सिंह बेस, श्रीमती अर्चना परमार, श्रीमती शीला ठाकुर, प्राचार्य श्रीमती राधा ईवने सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, महिलाएँ और बच्चे उपस्थित थे।