samacharsecretary.com

भाजपा उज्जैन: नगर और ग्रामीण स्तर के नए जिला पदाधिकारी घोषित, देर रात हुई सूची जारी

उज्जैन  राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चा के बीच भाजपा की नगर व ग्रामीण स्तर पर नवनियुक्त जिला पदाधिकारियों(MP BJP District Executive) की सूची मंगलवार देररात 12.30 बजे जारी की। इसमें नगर में 5 उपाध्याक्ष, 3 महामंत्री, 8 मंत्री, एक कोषाध्यक्ष और एक जिला कार्यालय मंत्री के रूप में 18 पदाधिकारी के नामों की घोषणा की गई। इसी तरह ग्रामीण में 7 उपाध्यक्ष, 2 महामंत्री, 6 मंत्री, एक कोषाध्यक्ष और एक कार्यालय मंत्री के रूप में 17 पदाधिकारी घोषित किए। नगर कार्यकारिणी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल जी की सहमति से भाजपा ग्रामीण जिलाध्यक्ष राजेश धाकड़ ने उज्जैन ग्रामीण के नवनियुक्त पदाधिकारियों(MP BJP District Executive) की घोषणा की, वहीं भाजपा नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने भी नगर स्तर के नए पदाधिकारियों के नामों की घोषणा की। शहर कार्यकारिणी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जुड़े नामों की प्रमुखता है। नगर पदाधिकारियों में उमेश सिंह सेंगर, कल्याण शिवहरे, सोनल जोशी, अशोक कैथवास और शैलेंद्र शर्मा को उपाध्यक्ष बनाया। आनंद सिंह खिंची, जगदीश पांचाल और कमल बैरवा को महामंत्री, सुभाष डोडिया, विजय चौधरी, जितेंद्र कृपलानी, प्रेमलता बैंडवाल, कांता विश्वकर्मा, वर्षा कछवाय, विजय दीक्षित और पवन विश्वकर्मा को मंत्री बनाया है। कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी प्रकाश यादव और कार्यालय मंत्री अनिल शिंदे को सौंपी है। उज्जैन ग्रामीण उज्जैन ग्रामीण में पदम सिंह पटेल, राजेंद्र अवाना, संदीप व्यास, पंकज यादव, महिपाल सिंह उमठ, अनिल यादव, अश्विन दिंडोरकर को जिला उपाध्यक्ष, राकेश यादव, श्याम शर्मा जिला महामंत्री, विजय चौधरी, रितु पाटीदार, कृष्णा सूर्यवंशी (अजा), वर्षा पाटोदी, अजीता परमार (अजा), निरंजन मेहता को जिला मंत्री बनाया गया। कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी ज्योति पलोड़ को दी गई है। सुमेर सिंह कालूहेड़ा को जिला कार्यालय मंत्री बनाए गए हैं। सूची जारी होते ही शहर में उत्साह की लहर दौड़ पड़ी। वायरल सूची को नकारते रहे एक सूची सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी, जिसमें उपाध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री, कोषाध्यक्ष, कार्यालय मंत्री सहित अन्य पदों के नाम सामने आए थे। विशेष बात यह रही कि वायरल सूची से राजनीतिक हलचल तेज हो गई। उत्सव की तैयारी जैसे ढोल-बाजे व आतिशबाजी तक की खबरें सामने आईं, लेकिन भाजपा नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल और प्रचार प्रमुख दिनेश जाटवा ने इसे आधिकारिक नहीं बताया। प्रचार प्रमुख ने स्पष्ट किया था कि सूची अभी प्रदेश स्तर पर होल्ड पर है और जल्द जारी की जाएगी। फिर देर रात 12:30 बजे दोनों नगर व ग्रामीण पदाधिकारी सूची आधिकारिक रूप से जारी की गई।

मायका सूना: 32 नदियों का निरीक्षण करने गए मंत्री प्रहलाद पटेल को केवल 7 में पानी मिला

भोपाल  मध्यप्रदेश में 962 छोटी और बड़ी नदियां हैं, जिनका उद्गम स्थल इस प्रदेश में है। इसलिए इसे नदियों का मायका कहा जाता है। लेकिन अब इन नदियों को संकट का सामना करना पड़ रहा है। वहीं सरकार भी इस समस्या को लेकर चिंतित है। पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल पिछले दो साल से इन नदियों के उद्गम स्थलों का दौरा कर रहे हैं ताकि इस समस्या का समाधान ढूंढ सकें। प्रहलाद पटेल ने दो बार नर्मदा परिक्रमा की है। साथ ही, उनके पास नर्मदा के संरक्षण का 35 साल का अनुभव है। इस अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने एक किताब लिखी है। इसका नाम है परिक्रमा कृपा सार। इस किताब का विमोचन 14 सितंबर को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत करेंगे। एक महीने में 32 नदियों किया दौरा     इसके बाद यह सवाल किए जाने पर कि पिछले साल उद्गम की यात्रा में कैसा अनुभव रहा? इस पर पटेल ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और मैंने बेतवा के उद्गम से शुरुआत की थी। एक महीने में 32 नदियों के उद्गम पर गए। हमें 7 जगह ही पानी मिला और बाकी जगह सूखा था। यह चिंता का विषय था। फिर 30 जून आ गया। चाहकर भी कुछ कर नहीं पाए। हम सिर्फ इतना निर्णय ही कर पाए कि इस बार पौधरोपण नहीं होगा। मध्य प्रदेश में छोटी-बड़ी 962 नदियों के उद्गम स्थल हैं। इस वजह से प्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है। लेकिन, सरकार नदियों की टूटती सांसों को लेकर चिंतित है। मप्र के पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल नदियों के उद्गम स्थलों की दो सालों से यात्रा कर रहे हैं। नदियों के उद्गम स्थल पर चर्चा  मंत्री प्रहलाद पटेल अब तक 32 नदियों के उद्गम स्थलों का दौरा कर चुके हैं, लेकिन इनमें से केवल 7 नदियों के उद्गम स्थल पर पानी मिला। इससे यह साफ हो गया है कि कई नदियां सूख रही हैं। इस समस्या को हल करने के लिए सरकार अब नदियों के संरक्षण के लिए एक नई योजना पर काम कर रही है।   मंत्री पटेल की नदियों के उद्गम स्थलों की यात्रा पर एक नजर     प्रहलाद पटेल ने अब तक 32 नदियों के उद्गम स्थलों का दौरा किया, जिनमें से केवल 7 स्थानों पर पानी मिला, बाकी जगह सूखा था।     मंत्री पटेल ने बताया कि जब जल गंगा अभियान शुरू हुआ, तब उन्हें राज्य का अनुभव नहीं था, लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें योजना बनाने का जिम्मा सौंपा।     मंत्री पटेल ने पौधारोपण रोकने का फैसला लिया, क्योंकि पौधों के बचाव के लिए जरूरी सुविधाएं जैसे बाड़ और पानी की व्यवस्था नहीं थी।     पटेल ने नर्मदा परिक्रमा के दौरान अपने गुरुदेव से सीखा कि नदी के संगम और उद्गम स्थल पर जीवन की संभावना होती है, और इनका संरक्षण बेहद जरूरी है।     पटेल का मानना है कि बड़ी नदियाँ तभी बच सकेंगी, जब हम छोटी नदियों को बारहमासी बनाए रखेंगे। पटेल ने रखी अपनी बात मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि जब जल गंगा संवर्धन अभियान शुरू हुआ, तब मैं राज्य में मंत्री बना। मेरा राज्य का अनुभव नहीं था। मैंने मुख्यमंत्री जी से पूछा कि कार्ययोजना क्या होगी? उन्होंने कहा कि आपके विभाग को ही तय करना है। पटेल ने आगे कहा कि इस अभियान का लक्ष्य बहुत सुंदर है। नए स्त्रोत बनाएं और पुराने स्रोतों की क्षमता का वर्धन करें। नए स्रोतों में खेत तालाब और अमृत सरोवर ही बन सकते हैं। तीसरा कोई विकल्प आपके पास है नहीं। पुराने स्रोतों में कुएं, बावड़ी, तालाब और नदियां हैं। इनकी साफ-सफाई पंचायत के आसपास हैं तो ये काम हम कर सकते हैं। ये काम मैं वर्षों से करता आ रहा हूं। मुझे लगा मंत्री होने के नाते मैं क्या करूंगा। तब मुझे लगा कि हमें नदी के उद्गम से यात्रा शुरू करनी चाहिए। मैं नर्मदा का परिक्रमा वासी हूं। मैं जब परिक्रमा में था और जब नदी का संगम होता था तो मेरे गुरुदेव कहते थे कि एक किलोमीटर ऊपर चलो उस नदी को पार करेंगे फिर वापस आओ और फिर नर्मदा जी के किनारे चलेंगे। गुरू आज्ञा थी इसलिए ज्यादा बुद्धि नहीं लगाई। इस दौरान एक जगह सूखा नाला मिला। मैं अंदर घुसने लगा तो मेरे गुरुदेव ने इशारा किया। हम ऊपर की तरफ गए। फिर डेढ़ किलोमीटर वापस नीचे आए। गर्मी बहुत थी। तीन किलोमीटर ज्यादा चले तो मन खराब हुआ। मैने रात में सेवा करते समय गुरु जी से पूछ ही लिया कि जब पानी नहीं था तो इतना परेशान क्यों किया। मैं तो बहुत परेशान था। वो उठकर बैठे और मुझसे कहा: जहां नदी पहाडों या स्त्री पुरुष का संगम हो वहां जीवन की संभावना होती है उसको रौंदने की गलती मत करना। हमें जागने में 30 साल लग गए मंत्री पटेल ने कहा: मेरे गुरु जी ने कहा और जहां नदी का उद्गम होता है वहां सर्वाधिक ऊर्जा होती है। उद्गम किसी मनुष्य ने नहीं बनाया। उद्गम पहले से था उसके किनारे जीवन आया। उद्गम छोटा हो या बड़ा हो। ये बात 1994-95 की थी आज 2025 चल रहा है। हमको भी जगने में 30 साल लग गए। अब बाद में कई बातें ध्यान में आतीं हैं लोग संगम पर स्नान करने जाते हैं। संगम पर साधना करने जाते हैं अपने आश्रम बनाते हैं। लेकिन, क्यों करते हैं कभी इस पर बहस नहीं हुई। तब मुझे लगा कि बड़ी नदियां जैसे नर्मदा को मैने बचपन से देखा है उसका अस्तित्व तब तक है जब तक हम छोटी नदियों को बारहमासी रखेंगे। मंत्री पटेल ने साझा किया अपना अनुभव मंत्री प्रहलाद पटेल ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि वह नर्मदा नदी परिक्रमा में शामिल थे। जब वह परिक्रमा करते थे और नदी का संगम आता था, तो उनके गुरुदेव उन्हें कहते थे कि एक किलोमीटर ऊपर चलो, उस नदी को पार करो, फिर वापस आओ और नर्मदा जी के किनारे चलो। गुरुदेव की आज्ञा मानकर उन्होंने ज्यादा सोचे बिना यह किया। एक दिन, जब वह एक सूखे नाले के पास पहुंचे, तो वह अंदर जाने लगे, लेकिन उनके गुरुदेव ने उन्हें इशारा किया। फिर वे … Read more

शिप्रा नदी से मिली आरक्षक आरती की लाश, उज्जैन में राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

उज्जैन   मध्य प्रदेश के उज्जैन की शिप्रा नदी में बिना रैलिंग वाले पुल से कार समेत गिरे तीन पुलिसकर्मियों की तलाश में शुरु हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन मंगलवार शाम को आरक्षक आरती पाल का शव बरामद होने के साथ पूरा हो गया। करीब 68 घंटे की जद्दोजहद के बाद आरती का शव नदी के बड़े पुल से 80 मीटर दूरी में स्थित गहरे गड्ढे से बरामद किया गया। वहीं, आज बुधवार को दिवंगत आरक्षक आरती पाल को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। वैसे तो आरती मूल रूप से रतलाम जिले की रहने वाली खीं, लेकिन रेस्क्यू के दौरान उनका पूरा परिवार उज्जैन ही आ गया था। ऐसे में सभी की सहमति से आज बुधवार को उज्जैन चक्र तीर्थ श्मशान घाट पर आरती का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई आरती पाल की अंतिम विदाई के मौके पर एडीजी उमेश जोगा, डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, परिवार के लोगों के साथ साथ हजारों की संख्या में उज्जैन वासी शामिल हुए। सभी ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी। शिप्रा नदी से निकला कॉन्स्टेबल आरती पाल का शव, परिवार में पसरा मातम उज्जैन की शिप्रा नदी में बिना रैलिंग वाले पुल से कार समेत गिरे तीन पुलिसकर्मियों की तलाश में शुरु हुआ सर्च ऑपरेशन मंगलवार देर शाम तीसरे दिन पूरा हो गया। दरअसल, करीब 68 घंटे की जद्दोजहद के बाद महिला कांस्टेबल आरती पाल का शव नदी के बड़े पुल से 80 मीटर दूरी पर स्थित गहरे गड्ढे से बरामद हुआ है। उज्जैन के उन्हेल थाने में कार्यरत महिला आरक्षक आरती पाल मूल रूप से रतलाम की रहने वाली हैं। उनका शव मिलने की सूचना के बाद से परिवार के बीच कोहराम मच गया। माता-पिता समेत उनके घर के हर सदस्य का रो-रोकर बुरा हाल है। जबकि, हर कोई सदमें में है। शिप्रा नदी में हादसे का शिकार होकर जान गवाने वाली आरती पाल मूल रूप से रतलाम शहर के अरिहंत परिसर की रहती थीं। आरती के पिता अशोक पाल कलेक्टर कार्यालय से सेवानिवृत हुए हैं और माता शीला पाल गृहणी हैं। साल 2013 में पुलिस सेवा में आई आरती के परिवार में उनका एक छोटा भाई लोकेंद्र 12वीं कक्षा में पढ़ रहा है। बेटी का शव मिलने की खबर मिलते ही उसके बचे होने की नामुमकिन सी उम्मीद बांधे बैठे परिवार में मातम पसर हुआ है। मां का कहना है कि, जबतक बेटी को देख नहीं लेती, यकीन नहीं करूंगी कि अब वो इस दुनिया में नहीं है। बता दें कि, आरती अपने परिवार के प्रति इतनी जिम्मेदार थी कि, माता-पिता की सेवा के चलते अबतक विवाह नहीं किया था। घर की जिम्मेदारियां निभाने अबतक नहीं की शादी आरती के चाचा अजय पाल ने बताया कि, ऐसी जानकारी मिली थी कि, हादसे का शिकार हुआ वाहन आरती ही चला रही थी। आपको बता दें कि, एनडीआरएफ – एसडीआरएफ, पुलिस और उज्जैन-महिदपुर के लोकल रेस्क्यू दलों के कुल 130 जवानों ने 68 घंटे में 40 फीट गहराई तक तलाशने के बाद मंगलवार शाम महिला कांस्टेबल का शव नदी से ढूंढ निकाला है। बताया जा रहा है कि, आरती पाल का शव वाहन के साथ नदी में बड़े पुल से करीब 80 मीटर की दूरी पर स्थित एक गहरे गड्ढे में फंसा मिला है। हादसे से एक दिन पहले बोलकर गई थी 'जल्दी आऊंगी' चाचा के अनुसार, आरती के एक अन्य भाई जितेंद्र पाल का इसी साल 30 जुलाई को बीमारी के कारण निधन हो गया था। सवा माह पूरा होने पर धूप-ध्यान करने आखिरी बार बेटी 4 सितंबर को ही घर आई थी। उस दिन पूरा परिवार एक साथ था। वहीं, 5 सितंबर को जाते समय उसने घर वालों से कहा था, 'इस बार जल्दी आऊंगी'। लेकिन, घर से लौटने के अगले ही दिन इस तरह की दिल दहला देने वाली खबर आई, जिसने परिवार को झकझोर कर रख दिया और अब पता चला है कि, बेटी का शव मिला है। हमें पता नहीं था कि, बेटी इस हाल में जल्दी घर आएगी। ये सिर्फ आरती के माता-पिता नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए गहरी क्षति है। पुलिस महकमें में हड़कंप आपको बता दें कि, 6 सितंबर शनिवार रात को उज्जैन की शिप्रा नदी के पुल से एक वाहन नदी में गिर गया था। प्रत्यक्षदर्शियों की सूचना पर रात डेढ़ बजे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर वाहन और उसमें सवारों की तलाश की गई पर नदी का बहाव तेज होने के कारण रेस्क्यू रोकना पड़ा। रविवार सुबह 6 बजे दोबारा तलाश दोबारा से शुरु हुई। इसी बीच रेस्क्यू दल समेत पुलिस महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शिप्रा पुल से करीब 2 किलोमीटर दूर मिली कार से उन्हेल थाना प्रभारी अशोक शर्मा का शव निकला। बाद में मालूम हुआ कि, बीती रात जो वाहन हादसे का शिकार हुआ है, उसमें टीआई के साथ एसआई मदनलाल निनामा और महिला आरक्षक आरती पाल भी मौजूद थीं। 68 घंटे बाद पूरा हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन घटना ने पुलिस महकमें को सन्न कर दिया। टीआई के साथ एसआई और महिला आरक्षक होने की पुष्टि होने पर रेस्क्यू ऑपरेशन की रफ्तार बढ़ाई गई, लेकिन रविवार देर रात तक दोनों लापता पुलिसकर्मियों का कोई सुराग नहीं लगा। सोमवार की सुबह से एक बार फिर एसडीआरएफ ने रेस्क्यू शुरु किया तब जाकर शाम को एसआई मदनलाल का शव भी मिल गया। इसके बाद रेस्क्यू अभियान आगे बढ़ा और मंगलवार शाम करीब 68 घंटे बाद आरक्षक आरती पाल का शव भी नदी से बरामद कर लिया गया। नदी में कार गिरने का वीडियो हुआ वायरल इधर, सोमवार रात शिप्रा नदी के बड़े पुल से पुलिसकर्मियों की कार गिरने का लाइव वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में कार अन्य वाहनों के साथ जाती दिख रही थी ऐर अचानक ही पुल से नीचे गिर गई। फिलहाल, सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर अब भी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।

36 लोगों को नोटिस, भोपाल के अनंतपुरा कोकता में विभागीय जमीन पर कब्जे की जांच शुरू

भोपाल  भोपाल के अनंतपुरा कोकता में पशुपालन विभाग की जमीन पर कब्जे के मामले में नोटिस जारी किए गए हैं। गोविंदपुरा तहसीलदार सौरभ वर्मा ने 36 लोगों से 10 दिन में जवाब मांगा है। जिसमें कब्जे से जुड़ी पूरी जानकारी शामिल रहेगी।  बता दें, डायमंड सिटी के 20 मकान भी जद में है। इसके अलावा खेती कार्य के लिए कब्जा करने पर 8, कॉलोनी के पहुंच मार्ग के लिए 4 नोटिस दिए हैं। इसके अलावा बीपीएस स्कूल, द ग्रीन स्केप मेंशन शादी हॉल/रिसोर्ट समेत एक हॉस्टल और एक दुकान संचालक को भी नोटिस दिए हैं। पक्ष रख चुके लोग, कहा-कोई लेना नहीं सीमांकन के दौरान निशान और जमीन पर खूटियां लगाई गई थी। इससे स्पष्ट हो गया था कि प्रशासन किन लोगों को नोटिस देगा। इसलिए लोग एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव को अपनी पीड़ा सुना चुके हैं। वहीं, कई लोग पहले से ही अपना पक्ष बता चुके थे। स्कूल के लिए 2400 स्क्वायर फीट जमीन दिसंबर 2021 में सिद्धार्थ सिन्हा ने खरीदी थी। जमीन की जानकारी जुटाई तो यह सही बताई गई थी। इसके बाद एसडीएम ऑफिस से नामांतरण कराया। सभी अनुमति लेने के बाद ही बिल्डिंग बनाई और स्कूल संचालित करना शुरू किया। स्कूल को लेकर भी जिला शिक्षा विभाग से सभी अनुमति और मान्यता प्राप्त की गई। लोगों का भी कहना है कि जमीन खरीदते समय सारे रिकॉर्ड देखें थे। डायवर्जन, रजिस्ट्री, नक्शे, नामांकन कराया। सरकारी तौर पर जब बटांकन कराया तो आरआई-पटवारी आए। उन्होंने ही बताया था कि उनके हिस्से में कहीं कोई सरकारी जमीन नहीं है। सीमांकन में इतना कब्जा मिला था सीमांकन रिपोर्ट के अनुसार, 4 कॉलोनी के गेट, सड़क और पार्क भी कब्जे में शामिल हैं। वहीं, डायमंड सिटी कॉलोनी में 20 मकान, एक प्राइवेट स्कूल, शादी हॉल/रिसोर्ट, 1 एकड़ जमीन पर खेती, फार्म हाउस और पक्का निर्माण और 130 डेसीमल भूमि पर अवैध तरीके से खेती करना पाया गया। दुकानें, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और पेट्रोल पंप नगर निगम के हैं। वहीं, बायपास का 200 फीट हिस्सा भी पशुपालन विभाग की जमीन पर ही निकला था। ऐसे में इन्हें सरकारी प्रक्रिया में कोई राहत मिल सकती है। अब तक यह प्रक्रिया हुई     27 अगस्त को गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव, तहसीलदार सौरभ वर्मा की मौजूदगी में 11 पटवारी और 3 राजस्व निरीक्षकों ने सीमांकन शुरू किया था।     तीन दिन के भीतर सीमांकन कार्य पूरा हो गया। इसके बाद रिपोर्ट एसडीएम और तहसीलदार को दी गई। रिपोर्ट में बताया गया कि किस रकबे में किसका और कितना कब्जा है?     इसी बीच 2 सितंबर को डायमंड सिटी समेत आसपास रहने वाले कई लोग एसडीएम ऑफिस पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई।     3 सितंबर को यह रिपोर्ट एसडीएम श्रीवास्तव और तहसीलदार वर्मा ने कलेक्टर को पेश की।     8-9 सितंबर को चिंह्नित कब्जाधारियों को नोटिस भेजे गए।     नोटिस में 10 दिन की मोहलत दी गई है। इसलिए किया गया था सीमांकन 34 साल बाद पशुपालन विभाग को सीमांकन के पीछे भोपाल के मछली परिवार पर हुई कार्रवाई है। ड्रग्स और रेप केस के मामले में इस परिवार के दो सदस्य जेल में बंद है, जबकि अन्य पर भी कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद 30 जुलाई और फिर 21 अगस्त को जिला प्रशासन ने दो बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 बड़े अवैध निर्माण जमींदोज कर दिए। ये सभी सरकारी जमीन पर बनाए जाना सामने आए। इस जमीन की कीमत सवा सौ करोड़ रुपए आंकी गई। इसी बीच पशुपालन विभाग ने गोविंदपुरा एसडीएम श्रीवास्तव और तहसीलदार वर्मा को एक आवेदन दिया, जिसमें कहा गया कि उनकी जमीन पर भी कब्जा हो सकता है। इसलिए सीमांकन किया जाए। प्रशासन ने पड़ताल की तो कब्जे की बात सही निकली। इसके बाद मछली परिवार समेत 20 लोगों को नोटिस दिए गए। इन्हें भी सीमांकन के दौरान मौजूद रहने को कहा गया था। हालांकि, मछली परिवार की तरफ से वकीलों ने अपना पक्ष भी रखा। कहा कि जमीन पर उनका कब्जा नहीं है।

पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटवा चेक-बाउंस केस में नहीं हुए हाजिर, कोर्ट ने जारी किया अरेस्ट वारंट

रायसेन  मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा के भतीजे और रायसेन जिले की भोजपुर सीट से बीजेपी एमएलए सुरेंद्र पटवा की मुश्किलें बढ़ गई है। उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। यह वारंट इंदौर की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने जारी किया है। उन पर चेक बाउंस के कई मामले चल रहे हैं। कोर्ट ने सुरेंद्र पटवा को गिरफ्तार कर 24 सितंबर को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है। यह आदेश सीबीआई और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को भेजा गया है। पटवा के खिलाफ यह वारंट तीसरी बार जारी हुआ है। इससे पहले भी कोर्ट ने 29 अगस्त 2025 को वारंट जारी किया था। इसमें 8 सितंबर को पेश होना था। लेकिन वह नहीं गए। इसके बाद 9 सितंबर को गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। इस मामले में दर्ज हुआ मामला दरअसल, यह कार्रवाई चेक बाउंस से जुड़े मामले में की गई है। इस मामले में सुरेंद्र पटवा के अलावा उनकी पत्नी मोनिका पटवा और फर्म 'पटवा इंटरप्राइजेस' के खिलाफ भी केस दर्ज है। पटवा इंटरप्राइजेस ने इंदौर की एक फर्म से 67.5 लाख रुपए का कर्ज लिया था। इस कर्ज के भुगतान के लिए पटवा ने 10-10 लाख रुपए के चेक दिए थे। लेकिन बाद में बाउंस हो गए। बार-बार नोटिस भेजे जाने के बाद भी कोर्ट में पेश नही हुए। 10 दिन के भीतर दूसरा वारंट जारी विधायक सुरेंद्र पटवार के खिलाफ इंदौर की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने वारंट जारी किया है. CBI ने सुरेंद्र पटवा के खिलाफ FIR दर्ज कराई है. बीजेपी विधायक सुरेंद्र पटवा के SBI समेत कई बैंकों में फर्जी खातों की जानकारी मिली थी. पटवा के खिलाफ 10 दिनों के भीतर दूसरी बार वारंट जारी किया गया है. इससे पहले 29 अगस्त को पहला वारंट जारी किया गया था. इसके मुताबिक बीजेपी विधायक पटवा को 8 सितंबर को पेश होना था, लेकिन कोर्ट में पेश नहीं हुए. पेश न होने पर 9 सितंबर 2025 को पटवा के खिलाफ फिर से वारंट जारी किया गया है. पटवा के खिलाफ लगभग 100 के करीब चेक बाउंस के मामले जिला कोर्ट में चल रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट भी लग चुका है झटका पटवा पर कई फर्जी बैंक अकाउंट खोलने का आरोप है. करीब 7 साल पहले कोर्ट ने उनके खिलाफ कुर्की का भी आदेश जारी किया था. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा था. उस समय सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश पलटते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे. कौन हैं सुरेंद्र पटवा? सुरेंद्र पटवा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे हैं. वे रायसेन जिले की भोजपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं. इसके साथ ही शिवराज सरकार में पर्यटन मंत्री भी रह चुके हैं. उनकी गितनी बीजेपी के दिग्गज नेताओं में की जाती है. सीबीआई और ईओडब्ल्यू को आदेश बार बार आदेश के बाद पेश नहीं होने पर विशेष न्यायाधीश सुरेश कुमार गुप्ता ने पटवा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कोर्ट ने सीबीआई और ईओडब्ल्यू को आदेश दिया है कि वे पटवा को गिरफ्तार कर अदालत में पेश करें। कोर्ट की तरफ जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि आरोपी कोर्ट में 16 सितंबर को उपस्थित नहीं होता है तो बिना जमानत के गिरफ्तार किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। पूर्व सीएम के भतीजे हैं विधायक विधायक पटवा पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे हैं और भोजपुर सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं। वे शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार में पर्यटन और संस्कृति मंत्री भी रह चुके हैं। इस घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सीबीआई और ईओडब्ल्यू इस गिरफ्तारी वारंट को कैसे तामील करती है। इस मामले में आगे क्या होता है, इस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।

परिवहन, विभाग राजस्व बढ़ाने निगरानी प्रणाली को करें और अधिक मजबूत: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सड़क दुर्घटना पर रोक लगाने के लिए अंतरविभागीय बैठक हो नियमित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव परिवहन, विभाग राजस्व बढ़ाने निगरानी प्रणाली को करें और अधिक मजबूत: मुख्यमंत्री डॉ. यादव सड़क हादसों पर लगेगा ब्रेक, CM डॉ. यादव ने दिए नियमित अंतरविभागीय बैठक के निर्देश बस स्टॉप पर यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं देने पर दें ध्यान मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा इंदौर से होगी शुरू मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिवहन विभाग की बैठक में दिए निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में सड़क दुर्घटना पर रोक लगाने के लिए अंतरविभागीय बैठक नियमित रूप से हो। सड़कों पर सुरक्षा से जुड़ी कमियां पाए जाने पर उन्हें तत्काल दूर किया जाए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सड़क पर बने बस स्टॉप पर नागरिकों को साफ-सफाई के साथ आवश्यक सुविधाएं मिलें। परिवहन विभाग की राजस्व संग्रह निगरानी प्रणाली को और मजबूत किए जाने के निर्देश भी दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में हुई परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक में ये निर्देश दिए। मुख्य सचिव अनुराग जैन भी मौजूद थे।  मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा जल्द हो शुरू, मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने दिए निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा इंदौर से जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परिवहन सेवा में यात्रियों की सुविधाओं और किफायती किराये पर विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परिवहन सेवा में इलेक्ट्रिकल व्हीकल और उससे जुड़े अधोसंरचना के कार्य को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि परिवहन सेवा के लिए बनाए गए नियमों का सख्ती से पालन हो, यह सुनिश्चित किया जाए। बैठक में जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शीघ्र प्रारंभ की जा रही है। इसकी शुरूआत बसों की आवाजाही के प्रदेश के सबसे बड़े केंद्र इंदौर नगर से होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बसों में शहरों एवं गांवों के नाम फ्रंट ग्लास पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किए जाएं। साथ ही बस स्टॉप पर भी गांव और नगरों के नाम अनिवार्य रूप से लिखवाए जाएं। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए वाहनों की गति सीमा पर नियंत्रण किया जाना बेहद जरूरी है। इसी के साथ गाड़ी चलाने वाले व्यक्ति के पास आवश्यक कागजों की वैधता की जांच भी नियमित हो। परिवहन विभाग में बेहतर प्रबंधन के लिए अधिकारी-कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया। परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि विभाग के आधुनिकीकरण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। परिवहन अमले को उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नशे की हालत मं  गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाही की जा रही है। परिवहन से प्रदेश में बढ़ा है 6 प्रतिशत राजस्व बैठक में बताया गया कि इस वर्ष 16 लाख 60 हजार वाहनों का पंजीयन किया गया है। इसमें 2 लाख 58 हजार से अधिक इलेक्ट्रिकल व्हीकल का पंजीयन किया गया है। प्रदेश में ऑन रोड वाहनों की संख्या एक करोड़ 80 लाख के करीब है। परिवहन से प्राप्त होने वाली राजस्व आय में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2024-25 में 4 हजार 874 करोड़ रुपए की राजस्व आय हुई है। इसमें पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बैठक में राजस्व वृद्धि के किए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि राजस्व संग्रह में विशेष तौर पर चालान से प्राप्त की जाने वाली राशि के अधिकार प्रधान आरक्षक को सौंपे जाने की भी अधिसूचना शीघ्र जारी की जाएगी। बैठक में कैश लेस उपचार योजना, राहवीर योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र व्यक्तियों को मिले इसके लिए नागरिकों में जागरूकता अभियान चलाने संबंध में भी चर्चा हुई। बैठक में प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी गई। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने बताया कि उज्जैन जिले में सार्वजनिक बस संचालन का विस्तृत सर्वे पूरा कर लिया गया है। जबलपुर और इंदौर में रूट सर्वे और श्रेणीवार संचालित बसों की संख्या का अनुमान और आवश्यक सर्वे भी लगभग पूरा किया जा चुका है। बैठक में बताया गया कि 6 बिंदुओं पर प्राथमिकता पूर्वक ध्यान दिया जा रहा है। इनमें संस्थागत व्यवस्था एवं स्टॉफ, नियम एवं करों में संशोधन, रूट सर्वे एवं स्कीम की अधिसूचना, आईटी प्लेटफार्म एवं एजेंसी का चयन, परिवहन अधोसंरचना की योजना और ऑपरेटर से चर्चा एवं कैपेसिटी बिल्डिंग पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। बैठक में परिवहन आयुक्त विवेक शर्मा एवं विभागीय अधिकारी मौजूद थे।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश     बसों के संचालन में और यात्रियों को बेहतर सेवाएं देने नई तकनीक का प्रयोग करें।     बसों के साथ ही बस स्टैंड और बस स्टॉप पर स्वच्छता रहे। वातावरण सुविधाजनक हो।     यात्री बसों का बीमा अनिवार्य हो। सभी कार्य नियमों के अंतर्गत हों, पारदर्शिता रहे।     दिव्यांग यात्रियों का विशेष ध्यान रखा जाए।     बसें फिट हों, स्टॉफ का व्यवहार अच्छा हो।     अप-डाउनर्स को भी आवश्यक सुविधाएं दी जाएं।     बड़े शहरों की तरह कस्बों, गांवों के नाम मार्ग के किनारे बोर्ड पर अंकित किए जाएं।  

एमपी एग्रो अनुत्पादन व्यय नियंत्रित करें : एसीएस राजन

भोपाल  उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि द एमपी स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड नये कार्य क्षेत्र विकसित कर आय वृद्धि के प्रयास करे। उन्होंने यह निर्देश एमपी स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कार्पोरेशन के संचालक मंडल की 200वीं बैठक में दिये। बैठक में अपर मुख्य सचिव उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण अनुपम राजन, आयुक्त उद्यानिकी श्रीमती प्रीति मैथिल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री कुशवाह ने कहा कि एमपी एग्रो राज्य शासन के कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के लिये कार्य करने वाली महत्वपूर्ण एजेन्सी है। उद्यानिकी विभाग द्वारा अनेक योजनाओं के लिये एमपी एग्रो को नोडल एजेन्सी बनाया गया है। इसके काम में तेजी लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी विभाग द्वारा राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के माध्यम से कलस्टर विकसित करने की जिम्मेदारी भी एमपी एग्रो को दी गई है। यह काम समय-सीमा में किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नर्मदापुरम जिला स्थित बाबई कृषि फार्म की आय वृद्धि के लिये विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाये। फार्म स्थित मशीनरी और उपकरणों के उपयोग के लिये विशेष एजेन्सी की सेवाएँ ली जा सकती है। अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि एमपी एग्रो अनुउत्पादन व्ययों को नियंत्रित करें। उन्होंने कहा कि परम्परागत प्रक्रिया के स्थान पर एग्रो विशेष एजेन्सियों की सेवाएँ लेकर बेहतर प्रोजेक्ट तैयार करें। उन्होंने कहा कि एग्रो लिमिटेड को अपनी टेण्डर प्रक्रिया में गति लाने की आवश्यकता है इससे समयानुसार योजनाओं का लाभ किसानों को मिल सकेगा। आयुक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण श्रीमती प्रीति मैथिल ने कहा‍कि एमपी एग्रो को व्यवसाय वृद्धि के लिये ड्रोन टेक्नोलॉजी, एग्रीपीवी कृषि जैसे क्षेत्रों में नवीन प्रयोग करने की आवश्कता है। उन्होंने एग्रो द्वारा टेण्डर प्रक्रिया की समय-सीमा में सुधार कराये जाने का सुझाव भी दिये। प्रबंध संचालक अरविंद दुबे ने बताया कि एमपी एग्रो ने इस वर्ष 2025-26 में लिक्विड बायो फर्टिलाइजर उत्पादन का लक्ष्य एक लाख 25 हजार लीटर रखा है। इसमें एक करोड़ लाख 96 लाख रूपये की सकल आय अनुमानित है। 2024-25 में निगम को 2470 बायो गैस संयंत्र का लक्ष्य के विरूद्ध 1840 संयंत्रों का निर्माण कराया गया है। बैठक में निगम के अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन भत्तो से संबंधित प्रस्ताव भी पारित किये गये।  

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता प्रशिक्षकों को मंत्री टेटवाल ने दी शुभकामनाएं

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता प्रशिक्षकों को मंत्री टेटवाल ने दी शुभकामनाएं मंत्री टेटवाल का सम्मान, राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त प्रशिक्षकों को दी बधाई कौशल विकास के प्रशिक्षकों ने बढ़ाया मध्यप्रदेश का मान भोपाल कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 से सम्मानित प्रशिक्षण अधिकारी प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। राज्यमंत्री टेटवाल ने तीनों प्रशिक्षकों से मिलकर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। राज्यमंत्री टेटवाल ने कहा कि यह उपलब्धि प्रशिक्षकों की प्रतिबद्धता, नवाचार और मेहनत का परिणाम है। राज्यमंत्री टेटवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार का संकल्प युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान करना है, ताकि वे वर्तमान के प्रतिर्स्धात्मक वातावरण के अनुकूल स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन प्रयासों की बड़ी उपलब्धि है और आने वाले समय में विभाग को और अधिक नवाचार करने की प्रेरणा देगा। यह गौरव पूरे प्रदेश और विभाग के लिए गर्व का क्षण है, जो यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश कौशल विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय मानक स्थापित कर रहा है। राष्ट्रपति ने किया था पुरस्कृत शिक्षक दिवस 5 सितम्बर को राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु ने प्रदेश के तीन प्रशिक्षण अधिकारियों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया था। शासकीय संभागीय आईटीआई, भोपाल के प्रशिक्षण अधिकारी (ट्रेड रेफ्रिजरेशन एंड एयर कंडीशनिंग) राजेंद्र मालवीया को यह पुरस्कार उनकी नवाचारी पद्धतियों और व्यावहारिक प्रशिक्षण की दिशा में किए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए मिला। उन्होंने प्रशिक्षार्थियों को स्वरोजगार और उद्यमिता की राह दिखाई। उनके प्रशिक्षार्थियों ने स्वयं व्यवसाय स्थापित कर लाखों रूपये का रोजगार उत्पन्न किया और अनेक विद्यार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय अवसर प्राप्त कर प्रदेश का नाम रोशन किया। शासकीय संभागीय आईटीआई, भोपाल के प्रशिक्षण अधिकारी (ट्रेड मैकेनिक डीजल) प्रशांत दीक्षित ने विद्यार्थियों के लिए नई तकनीकें विकसित करने और ई-कंटेंट निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया। कोविड-19 महामारी के दौरान उनके डिजिटल कंटेंट से देशभर के लाखों आईटीआई विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। उनकी इस पहल ने कौशल शिक्षा को तकनीकी रूप से मजबूत आधार प्रदान किया। शासकीय संभागीय आईटीआई, भोपाल के प्रशिक्षण अधिकारी (ट्रेड कोपा दृष्टिबाधित) श्रीमती प्रेमलता रहांगडाले ने दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रयास किए। उन्होंने उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाने में सफलता पाई। उनके प्रशिक्षार्थी समाज में गरिमापूर्ण पहचान बना रहे हैं और विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्राप्त कर रहे हैं। मध्यप्रदेश की यह उपलब्धि निरंतर बनी हुई है। वर्ष 2024 में भी प्रदेश के दो प्रशिक्षण अधिकारियों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया गया था। यह साबित करता है कि कौशल विकास विभाग लगातार गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और नवाचार का नया मानक स्थापित कर रहा है। राज्यमंत्री टेटवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार और रोजगार से सशक्त बनाना सरकार की प्राथमिकता है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदेश की इस दिशा में हो रहे प्रयासों की पुष्टि है और आने वाले समय में और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा भी है।  

किसानों के लिए खुशखबरी: बीज संघ ने शुरू किया उच्च गुणवत्ता वाले हाइब्रिड बीजों का उत्पादन

मंत्री सारंग की अध्यक्षता में सहकारी बीज उत्पादक-विपणन संघ की बैठक भोपाल  सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मंगलवार को मंत्रालय में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बीज उत्पादक एवं विपणन संघ मर्यादित के संचालक मंडल की बैठक की। बैठक में वर्ष 2025-26 के लिए संघ द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक के दौरान प्रजनक बीज उठाव एवं वितरण, आधार एवं प्रमाणित बीज के उत्पादन और विपणन की वर्तमान स्थिति तथा आगामी लक्ष्यों की समीक्षा की गई। मंत्री सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों की वास्तविक मांग के अनुरूप बीजों का उत्पादन बढ़ाया जाए। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि जिन बीजों एवं ब्रांड की अधिक मांग है, उनके उत्पादन एवं आपूर्ति पर प्राथमिकता के साथ कार्य किया जाए। मंत्री सारंग ने कहा कि ‘एमपी चीता’ ब्रांड को एक सशक्त मार्केटिंग रणनीति के साथ राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया जाए, जिससे यह किसानों के बीच एक भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण ब्रांड के रूप में स्थापित हो सके। उन्होंने कहा कि चिन्हित फसलों और बीजों पर फोकस करते हुए, हॉटिकल्चर (बागवानी) फसलों को भी बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। बैठक में बताया गया कि बीज संघ ने किसानों की उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने के उद्देश्य से उच्च गुणवत्ता वाले हाइब्रिड बीजों का उत्पादन प्रारंभ कर दिया है। इन बीजों से बेहतर पैदावार, रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा गुणवत्तापूर्ण फसल प्राप्त होगी। मंत्री सारंग ने इस पहल को कृषि क्षेत्र में बड़ा कदम बताते हुए इसे व्यापक स्तर पर प्रचारित करने के निर्देश दिए। बैठक में यह भी बताया गया कि बीज उत्पादन एवं गुणवत्ता सुधार के लिए किसानों और तकनीकी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मंत्री सारंग ने निर्देश दिये है कि रिसर्च एवं डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान दिया जाए और इसके लिए आवश्यकतानुसार मैन पावर भी बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि बीज उत्पादन एवं गुणवत्ता संवर्धन के लिए एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया जाए, जिसमें विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, अनुसंधान संस्थानों तथा कृषि विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाए। इससे बीजों की ब्रांड वैल्यू और गुणवत्ता सुधार के नए आयाम जुड़ सकेंगे। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव सहकारिता डीपी आहूजा, कृषि सचिव निशांत वरवड़े, आयुक्त सहकारिता मनोज पुष्प, प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक मनोज गुप्ता, बीज संघ के प्रबंध संचालक महेंद्र दीक्षित सहित सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं संघ के संचालक मंडल के सदस्य उपस्थित रहे।  

हॉकी एशिया कप जीत पर मंत्री सारंग ने विवेक सागर का किया सम्मान

भोपाल खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मंगलवार को तात्या टोपे स्टेडियम, भोपाल में मध्यप्रदेश के अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी विवेक सागर को सम्मानित किया। विवेक सागर ने हाल ही में राजगीर (बिहार) में आयोजित हॉकी एशिया कप-2025 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम को विजय दिलाने में अहम भूमिका निभाई, साथ ही पूरे टूर्नामेंट में अपने खेल कौशल और नेतृत्व क्षमता का परिचय भी दिया। मंत्री सारंग ने कहा कि विवेक सागर जैसे खिलाड़ियों के कारण मध्यप्रदेश की खेल पहचान पूरे देश ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो रही है। उन्होंने कहा कि राजगीर में आयोजित फाइनल मुकाबले सहित पूरे टूर्नामेंट में विवेक सागर का प्रदर्शन सर्वोच्च रहा। उन्होंने अपने जज्बे और संघर्ष से भारत को गौरवान्वित किया है। यह हम सभी के लिए गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश की धरती से ऐसे सितारे निकल रहे हैं, जो पूरी दुनिया में अपनी प्रतिभा की चमक बिखेर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि राजगीर में खेले गए एशिया कप-2025 के फाइनल में भारतीय हॉकी टीम ने साउथ कोरिया को 4-1 से पराजित कर चौथी बार एशिया कप का खिताब अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारतीय टीम ने आगामी हॉकी वर्ल्ड कप के लिए भी क्वालिफाई कर लिया है। मंत्री सारंग ने भारतीय टीम की इस उपलब्धि पर कप्तान, कोच और सभी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि भारतीय हॉकी की विजय का यह क्रम आगे भी अविराम जारी रहेगा और भारतीय हॉकी नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करेगी।