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रसोई गैस पर महंगाई का वार, सालभर में LPG सिलेंडर 89 रुपये तक महंगा

जयपुर राजस्थान में आम जनता की रसोई पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ आ गया है। तेल और गैस कंपनियों ने देर रात 12 बजे घरेलू उपयोग के एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला किया है, जिसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। कंपनियों द्वारा की गई इस मासिक समीक्षा (रिव्यू) के तहत आज 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में 29 रुपए प्रति सिलेंडर का इजाफा किया गया है। जयपुर में अब कितने का सिलेंडर राजस्थान एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन ने कीमतों में बढ़ोतरी की पुष्टि करते हुए नई रेट लिस्ट जारी की है। इस नई सूची के अनुसार, राजधानी जयपुर में अब 14.2 किलोग्राम वाला रसोई गैस सिलेंडर 916.50 रुपए के स्थान पर 945.50 रुपए में मिलेगा। केवल बड़ा सिलेंडर ही नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम सिलेंडरों के दाम भी बढ़ाए गए हैं। अब 5 किलोग्राम वाला छोटा घरेलू सिलेंडर 341.50 रुपए के बजाय 352 रुपए में मिलेगा, जबकि 10 किलोग्राम वाला कम्पोजिट सिलेंडर (पारदर्शी प्लास्टिक बॉडी वाला) 655 रुपए से बढ़कर 675 रुपए का हो गया है। इस साल अब तक ₹89 की भारी बढ़ोतरी आम उपभोक्ताओं के लिए यह बढ़ोतरी इसलिए भी परेशान करने वाली है क्योंकि तेल कंपनियों ने इससे पहले 7 मार्च को भी घरेलू सिलेंडरों के दाम में ₹60 की बड़ी बढ़ोतरी की थी। इस तरह देखा जाए तो चालू वर्ष के भीतर ही घरेलू रसोई गैस के दाम कुल मिलाकर 89 रुपए तक बढ़ चुके हैं। हालांकि बाजार विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध और तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में लगातार तेजी आ रही है। इसी अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण घरेलू बाजार में भी लगातार कीमतें बढ़ रही हैं। पहले बढ़ी थी कमर्शियल सिलेंडर की रेट इसके अलावा, कंपनियों ने महज 7 दिन पहले ही कॉमर्शियल (व्यावसायिक) उपयोग वाले सिलेंडरों की कीमतों में भी 42 रुपए का इजाफा किया था। वैश्विक संकट के कारण इस साल के भीतर कॉमर्शियल उपयोग का सिलेंडर रिकॉर्ड 1532 रुपए तक महंगा हो चुका है, जिससे अब घरेलू बजट भी पूरी तरह बिगड़ गया है।  

खेतों में जानलेवा खतरा, 189 कीटनाशक सैंपल फेल, विधानसभा में पेश हुआ डेटा

जयपुर  दो साल में 535 किसानों की मौत, 5.1 करोड़ रुपये का मुआवजा और 189 घटिया कीटनाशक सैंपल… आंकड़े थोड़े चौकाने वाले हैं लेकिन राजस्थान में सवाल उठा रहे हैं। विधानसभा में पेश किए गए ये आंकड़े केमिकल-आधारित खेती के खतरनाक पहलू और सुरक्षा में कमी व नियमों के पालन पर सवाल उठा रहे हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2024 और जनवरी 2026 के बीच खेतों में काम करते समय कीटनाशकों के संपर्क में आने से किसानों की मौत हुई। बीकानेर में सबसे ज्यादा 57 मौतें हुईं, इसके बाद चुरू (56), हनुमानगढ़ (42) और झालावाड़ (42) का नंबर आता है। जोधपुर में 38 मौतें हुईं। श्रीगंगानगर और ब्यावर में 31-31 मौतें हुईं। मुआवजे में भी सामने आई कमी इस दौरान राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों को मुआवजे के तौर पर 5.1 करोड़ रुपये दिए। हालांकि, अलग-अलग जिलों में मुआवजे की रकम में काफी अंतर था और इससे मौतों की रिपोर्ट और मंजूर किए गए दावों के बीच की कमियां सामने आईं। बीकानेर को मुआवजे के तौर पर 92 लाख रुपये, चुरू को 72 लाख रुपये, जोधपुर को 58 लाख रुपये और हनुमानगढ़ को 48 लाख रुपये मिले। श्रीगंगानगर को 18 लाख रुपये मिले। झालावाड़ में 42 मौतें होने के बावजूद, वहां भी सिर्फ 18 लाख रुपये ही मिले। डीग में आठ मौतें हुईं लेकिन कोई मुआवजा नहीं मिला, जबकि कोटा में 11 मौतें हुईं और 2 लाख रुपये मिले। अधिकारियों ने इस अंतर की वजह दावों की जांच और मंजूरी की प्रक्रियाओं को बताया। नहीं बताई हर मौत की सटीक वजह कृषि विभाग के रिकॉर्ड में हर मौत की सटीक वजह नहीं बताई गई थी। इस डेटा में कीटनाशकों के इस्तेमाल से जुड़े खेती के कामों के दौरान हुई मौतें शामिल थीं और इसमें सिर्फ वही मामले थे जिनकी रिपोर्ट अधिकारियों ने दी थी और जिनकी पुष्टि की थी। किशनपोल के विधायक अमीन कागजी ने कहा, "अगर रोजमर्रा के खेती के कामों के दौरान सैकड़ों किसान मर रहे हैं तो सरकार सिर्फ मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। हमें जवाबदेही, कीटनाशकों के लिए सख्त नियम और पूरे राजस्थान में किसानों के लिए एक व्यापक सुरक्षा कार्यक्रम की जरूरत है।" कीटनाशक के सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल मौतों के इन आंकड़ों के साथ विधानसभा से एक और चिंताजनक जानकारी सामने आई। उसी दो साल की अवधि में 189 कीटनाशक के नमूने क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए। पूरे राजस्थान से इकट्ठा किए गए 5,570 कीटनाशक के नमूनों में से 5,521 का विश्लेषण किया गया। जहां 5,332 नमूने तय मानकों पर खरे उतरे, वहीं 189 घटिया क्वालिटी के पाए गए। क्वालिटी की जांच के बाद अधिकारियों ने 282 नोटिस जारी किए, 14 कोर्ट केस दर्ज किए, 14 लाइसेंस सस्पेंड किए और 22 लाइसेंस रद कर दिए। घटिया क्वालिटी वाले कीटनाशक नमूनों की सूची में श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ सबसे ऊपर रहे, जहां हर जगह 17-17 नमूने खराब पाए गए। इसके बाद बीकानेर (13), कोटा (10) और भीलवाड़ा (9) का नंबर आता है। श्रीगंगानगर में सबसे ज्यादा 34 नोटिस भी जारी किए गए, जिसके बाद बीकानेर (20), हनुमानगढ़ (19) और चूरू (17) का स्थान रहा। 14 मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई, जिनमें बीकानेर में पांच और श्रीगंगानगर में तीन मामले शामिल थे। कीटनाशक को लेकर खड़े होते सवाल ये आंकड़े भारत में कीटनाशकों से जुड़े खतरों की एक गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। ज्यादा पैदावार वाली खेती में लंबे समय से केमिकल वाले कीटनाशकों पर बहुत ज्यादा निर्भरता रही है, लेकिन जानकारों ने बार-बार चेतावनी दी है कि सुरक्षा के अपर्याप्त साधनों, असुरक्षित तरीके से इस्तेमाल, जरूरत से ज्यादा छिड़काव और खराब क्वालिटी के एग्रोकेमिकल्स की वजह से खेत जहरीली जगहों में बदल सकते हैं। इंसानी सेहत को होने वाले खतरों के अलावा, कीटनाशकों के बहुत ज्यादा इस्तेमाल का संबंध मिट्टी की क्वालिटी खराब होने, पानी के दूषित होने, जैव-विविधता के नुकसान और परागण करने वाले व फायदेमंद कीड़ों की आबादी घटने से भी जोड़ा गया है। इससे केमिकल पर बहुत ज्यादा निर्भर खेती के टिकाऊपन को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

अच्छी शिक्षा और नैतिक मूल्यों पर दें जोर: राज्यपाल बागडे

 जयपुर राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि अच्छी शिक्षा देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता कैसे बढ़े, इस पर भी विशेष रूप से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों में नैतिकता और सहनशीलता के गुण विकसित करने पर विशेष ध्यान दे।  उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के प्रकाश पुंज होते है। ज्ञान का पूरे समाज में प्रसार यहीं से होता है। इसलिए उन्हें उत्कृष्ट बनाने लिए सभी मिलकर कार्य करें। राज्यपाल श्री बागडे रविवार को लोकभवन से महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के 23 वें स्थापना दिवस पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज का स्मरण करते हुए कहा कि वह विरले संत थे। उनके नाम पर विश्वविद्यालय में भवन निर्माण अच्छी पहल है। वह ऐसे संत थे जो प्रचार प्रसार से दूर रहते थे। उन्होंने कभी अपनी फोटो तक नहीं खिंचवाई। अपने चरण छूने से भी वह मना करते थे। ऐसे आदर्श संतों से प्रेरणा लेनी चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि ऐसे ही एक महापुरुष गीता प्रेस के जरिए देश में संस्कृति और संस्कारों के प्रसार की अभूतपूर्व भूमिका निभाने वाले  हनुमान प्रसाद पोद्दार जी थे।  गोविंद वल्लभ पंत जी उन्हें भारत रत्न पुरस्कार देना चाहते थे और परन्तु उन्होंने लेने से मना कर दिया। श्री बागडे ने विश्वविद्यालय भवनों का नाम संत, महात्माओं के नाम पर किए जाने की सराहना की परंतु यह भी कहा कि जिन महापुरुषों, संतों के नाम पर भवनों के नाम रखे गये हैं, उनके बारे में संक्षिप्त और सार्थक परिचय पुस्तिका भी प्रकाशित हो ताकि नई पीढ़ी को उनके बारे में निरंतर जानकारी मिलती रहे। उन्होंने कहा कि बीकानेर में महाराजा गंगासिंह जी के समय खेजड़ी को काटने पर रोक का कानून बना था। राज्य सरकार ने भी खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून बनाया है। लोकभवन स्तर पर पिछले वर्ष सर्वपल्ली राधाकृष्ण आयुर्वेद विश्वविद्यालय में 300 से अधिक खेजड़ी के पेड़ लगाए गए। हमारा प्रयास है कि खेजड़ी का एक ऐसा पार्क विकसित किया जाए ताकि इस मरुभूमि के कल्पवृक्ष के बारे में जागरूकता का प्रसार हो। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की इस वृक्ष से इसीसे और निकटता होगी। राज्यपाल ने गंग नहर निर्माण शताब्दी वर्ष पर जल संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पानी की बचत ही इसका निर्माण है। पानी बचाने के लिए जागरूकता का प्रसार होना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा राजस्थान के पारंपरिक पेड़ पौधों और जल संरक्षण से जुड़ी संस्कृति से जुड़ी किसी परियोजना पर कार्य करने की भी आवश्यकता जताई। केंद्रीय विधि एवं कानून मंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल ने स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा का आदर्श केंद्र बने। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का जो संकल्प देश के प्रधानमंत्री की पहल पर लिया गया है, उसकी पूर्ति युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में ज्ञान परंपरा के आलोक में भारतीय संस्कृति से जुड़े मूल्यों पर कार्य करने की आवश्यकता जताई। उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि  गंगनहर योजना के शताब्दी वर्ष पर जल संरक्षण के महती काम आरंभ हुए हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा में राजस्थान में किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी दी और कहा कि सरकार का प्रयास है कि उच्च शिक्षा गुणवत्ता और प्रसार में राजस्थान अग्रणी बने। इससे पहले कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने विश्वविद्यालय गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री बागडे ने विश्वविद्यालय में परीक्षा केंद्र, आचार्य तुलसी भवन, विज्ञान भवन, करणी भवन, कला भवन, रामसुखदास जी भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने राजस्थान नॉलेज कॉर्पोरेशन के साथ विश्वविद्यालय के हुए एमओयू के लिए बधाई दी और कहा कि इससे विद्यार्थियों को सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के नवीनतम ज्ञान, कौशल विकास का लाभ मिलेगा।

सीकर-बीकानेर में बदला मौसम, तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश

 जयपुर राजस्थान में शन‍िवार देर शाम हुई बारिश ने लोगों को गर्मी और उमस से राहत दिलाई. आज से प्रदेश का मौसम करवट लेने वाला है. मौसम विभाग के मुताबिक राज्य में सक्रिय परिसंचरण तंत्र के कारण जारी आंधी बारिश का दौर अब थमने की संभावना है. हालांकि आज प्रदेश के कई इलाकों में हल्की बारिश की संभावना है. बारिश ने गर्मी से दिलाई राहत सीकर और बीकानेर में दोपहर बाद मौसम का मिजाज अचानक बदल गया. दिनभर की तेज धूप और भीषण गर्मी के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. दोपहर के समय जहां तापमान बढ़ने से सड़कों पर आवाजाही कम नजर आई और लोग गर्मी से बचने के लिए घरों में रहने को मजबूर रहे. शाम होते-होते मौसम ने अचानक करवट ली और आसमान में बादल छा गए. तेज हवाओं के साथ फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, सीकर शहर, धोद सहित इलाकों में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया। अचानक बदले मौसम से लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिली. शहर के विभिन्न क्षेत्रों में हुई बारिश से मौसम सुहावना हो गया और लोगों ने लंबे समय बाद गर्मी से राहत महसूस की. मौसम विभाग की ओर से भी आज प्रदेश के कई इलाकों में तेज हवाओं और बारिश की चेतावनी दी गई है. इन जिलों में बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने अलवर, भरतपुर, दौसा,डीग, धौलपुर, झुंझुनूं, करौली, खैरथल तिजारा, कोटपुतली बहरोड़,सवाईमाधोपुर, सीकर,चूरू, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिले में आंधी बारिश का अलर्ट जारी किया है.   कल से गर्मी से मिलेगी राहत सोमवार से आंधी बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी. इस दौरान तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने की संभावना है. यानी 8 जून के बाद गर्मी से मिली राहत खत्म होने वाली है और एक बार फिर हिटवेव की चेतावनी है.  कल प्रदेश में बीकानेर और श्रीगंगानगर जिलों में हीटवेव का येलो अलर्ट है.   46 डिग्री सेल्सियस पहुंचा तापमान पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में 8 से 11 जून के बीच कुछ स्थानों पर अधिकतम तापमान 44 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, तथा कहीं-कहीं लू चलने की भी संभावना है.

भारत-पाक सीमा पर सख्ती तेज, दीपावली से पहले अवैध ढांचे गिराने की तैयारी

जैसलमेर भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर देश की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह अभेद्य और चाक-चौबंद करने के लिए बीएसएफ और आईबी एक्शन मोड में हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कड़े निर्देशों के बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने एक संयुक्त रणनीति के तहत भारत-पाक बॉर्डर के 15 किलोमीटर के दायरे में एक विशेष सर्वे अभियान छेड़ दिया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन क्लीन’ नाम दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक हुए सभी प्रकार के अवैध निर्माणों की पहचान करना, उन्हें पूरी तरह ध्वस्त करना और इन निर्माणों में इस्तेमाल की गई संदिग्ध फंडिंग का पर्दाफाश करना है। अमित शाह की हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद एक्शन शुरू जैसलमेर की जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बीकानेर दौरे के दौरान एक हाई-प्रोफाइल सुरक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सीमावर्ती इलाकों में हो रही संदिग्ध गतिविधियों और अवैध निर्माणों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई थी, जिसके तुरंत बाद इस बड़े ऑपरेशन को जमीन पर उतारा गया। सीमा क्षेत्र में किसी भी तरह के अवैध कब्जे या निर्माण को पूरी तरह रोकने के लिए राजस्व विभाग की विशेष टीमों का गठन कर उन्हें फील्ड में तैनात किया गया है। ये टीमें मौके पर जाकर जमीनों और इमारतों का भौतिक सत्यापन कर रही हैं। इस अत्यंत गोपनीय और संयुक्त विशेष सर्वे को शुरू हुए करीब एक सप्ताह का समय बीत चुका है। दीपावली से पहले अवैध निर्माणों होंगे ध्वस्त! अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार सुरक्षा मामलों से जुड़े उच्चाधिकारियों द्वारा इस विशेष सर्वे को अक्टूबर महीने तक हर हाल में पूरा करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त योजना है कि सर्वे और जांच की फाइनल रिपोर्ट तैयार होते ही, आगामी दीपावली त्योहार से पहले-पहले सभी चिन्हित अवैध अतिक्रमणों और अवैध ढांचों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और कार्रवाई को तेजी से अंजाम देने के लिए पुलिस, राजस्व और स्थानीय प्रशासन सहित सभी संबंधित महकमों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए जा चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर इस पूरे अभियान का सबसे संवेदनशील और अहम हिस्सा सुरक्षा जांच तथा वित्तीय फंडिंग की स्क्रूटनी होगी। सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान विशेष रूप से उन बड़े और भारी निवेश वाले व्यावसायिक या निजी निर्माणों पर केंद्रित है, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा के बिल्कुल नजदीक खड़े किए गए हैं। आलीशान निर्माणों की होगी अलग से जांच प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यदि सीमावर्ती क्षेत्र के भीतर कोई भी ऐसा निर्माण पाया जाता है जिसमें मोटी रकम खर्च की गई है, तो उसकी वित्तीय जांच अलग से की जाएगी। इस काम में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), सीमा सुरक्षा बल (BSF) और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) जैसी देश की सर्वोच्च सुरक्षा एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। ये एजेंसियां गहराई से यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन आलीशान या बड़े निर्माणों के पीछे वास्तविक चेहरे कौन से हैं और इस पैसे का असली स्रोत क्या है। सीमा के इतने नजदीक इस प्रकार की संदिग्ध गतिविधियां और भारी निवेश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं, इसलिए एजेंसियां किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं।  

जयपुर एयरपोर्ट पर हड़कंप: 19 वर्षीय युवती में इबोला जैसे लक्षण, सैंपल पुणे भेजा गया

जयपुर  राजस्थान की राजधानी जयपुर में इबोला संक्रमण का एक संदिग्ध मामला सामने आने से चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शारजाह से जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची एक 19 वर्षीय युगांडा की युवती में इबोला से मिलते-जुलते लक्षण पाए गए हैं। राजस्थान में इस खतरनाक बीमारी का यह पहला संदिग्ध मामला है। रूटीन स्क्रीनिंग में सामने आया मामला स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, युवती शुक्रवार को एयर अरबिया की फ्लाइट से शारजाह से जयपुर पहुंची थी। एयरपोर्ट पर रूटीन थर्मल और मेडिकल स्क्रीनिंग के दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों को उसमें संदिग्ध लक्षण दिखे। एहतियात के तौर पर युवती को तुरंत राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे विशेष रूप से तैयार आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों का कहना संक्रमण की पुष्टि नहीं, केवल संदेह RUHS के प्रिंसिपल डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने स्पष्ट किया है कि अभी तक युवती में इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। मरीज की ट्रेवल हिस्ट्री और शुरुआती लक्षणों को देखते हुए इसे केवल एक संदिग्ध मामला मानकर इलाज और निगरानी की जा रही है। एहतियात के तौर पर मानक आइसोलेशन, निगरानी और कांटेक्ट-ट्रेसिंग (संपर्क में आए लोगों की पहचान) से जुड़े सभी प्रोटोकॉल एक्टिव कर दिए गए हैं। महीने भर से बीमार है युवती स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि युवती ने पिछले करीब एक महीने से पेट दर्द और भूख न लगने (लॉस ऑफ ऐपेटाइट) की शिकायत की है। इसके अलावा वह सिरदर्द से भी पीड़ित है। फिलहाल उसे अस्पताल के क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रखा गया है। RUHS अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा, "मरीज के लक्षण इबोला की ओर इशारा जरूर करते हैं, लेकिन सिर्फ लक्षणों के आधार पर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।" जांच के लिए पुणे भेजे गए सैंपल डॉक्टरों के मुताबिक, प्रोटोकॉल के तहत मरीज का पहला ब्लड सैंपल जांच के लिए पुणे की एक विशेष प्रयोगशाला (NIV) में भेज दिया गया है। वहीं, दूसरा सैंपल नियम के अनुसार 48 घंटे बाद भेजा जाएगा। दोनों जांच रिपोर्ट आने तक युवती को सख्त क्वारंटाइन में ही रखा जाएगा। पहली रिपोर्ट शनिवार शाम या रविवार सुबह तक आने की उम्मीद है। सह-यात्रियों के लिए भी एडवाइजरी जारी प्रशासन अब उन मेडिकल स्क्रीनिग की भी जांच कर रहा है, जो युवती की शारजाह से रवानगी के वक्त हुई थी। इसके साथ ही, उक्त फ्लाइट में युवती के साथ यात्रा करने वाले अन्य यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी गई है। उनसे अपने स्वास्थ्य की निगरानी करने और किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत रिपोर्ट करने को कहा गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भारत में अब तक इबोला का एक भी कन्फर्म मामला सामने नहीं आया है, इसलिए लोग पैनिक (घबराएं) न करें और जांच रिपोर्ट का इंतजार करें। यदि रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो युवती को 21 दिनों तक पूरी तरह आइसोलेशन में रखकर निर्धारित गाइडलाइंस के तहत इलाज दिया जाएगा।  

नौकरी के नाम पर जाल: झालावाड़ से मुंबई तक फैला सेक्स रैकेट नेटवर्क

झालावाड़ झालावाड़ पुलिस ने नाबालिग लड़कियों की खरीद-फरोख्त के सनसनीखेज मामले का खुलासा किया है. इन लड़कियों से वैश्यावृत्ति करवाने के लिए बाकायदा एंग्रीमेंट करवाया जाता था. परिजनों से स्टांप पर साइन लेने के बाद इन लड़कियों को धकेल दिया जाता था. लड़कियों के परिजन जब लड़की को बेचते थे तो उन्हें मामूली रकम मिलती थी. फिर दलाल के जरिए बिकने के बाद 35 लाख रुपये तक की कीमत वसूली जाती थी. यह पूरा रैकेट मुंबई तक चल रहा था. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 10 लड़कियों को रैकेट से मुक्त करवाया है. वहीं, महिला समेत 5 दलालों को गिरफ्तार भी किया है. परिजनों ने भी साध रखी थी चुप्पी मामले की हकीकत तब पता चली जब मुंबई पुलिस ने ऐसे ही मामले में कार्रवाई की. प्रकरण के तार झालावाड़ से जुड़े और फिर पूरा मामला खुल गया. एक ही समुदाय की कई लड़कियों को शिकार बनाया गया. लेकिन सामाजिक कुरीतियों, झगड़ा प्रथा और प्रभावशाली दलालों के डर के कारण पूरा समुदाय चुप्पी साधे हुए था. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर ने स्पेशल जांच टीम गठित कर गोपनीय जांच शुरू की. बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर झांसा दलालों का गिरोह गरीब परिवारों की बच्चियों को नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर खरीदता था. इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनकी उम्र बढ़ाई जाती और उन्हें मुंबई समेत अन्य शहरों में वैश्यावृत्ति के लिए भेज दिया जाता था. पुलिस ने जानकारी जुटाना शुरू किया. फिर बूंदी से आए 5 आरोपियों को डिटेन कर लिया. ‎अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय के तहत मुंबई से 4, बूंदी से 1 और टोंक से 1 अन्य लड़की को भी दस्तयाब किया गया. कुल 10 लड़कियों में 7 नाबालिग और एक बालिग बताई जा रही है. जबकि दो लड़कियों की उम्र के बारे में सही जानकारी सामने नहीं आई है. स्टांप में लिखी शर्त ऐसी की पढ़कर कांप उठेंगे स्टांप से खुलासा हुआ है कि लड़कियों की खरीद-फरोख्त से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा दलाल खुद हड़प लेते थे. इतना ही नहीं, अनुबंध में यह अमानवीय शर्त भी दर्ज थी कि केवल आत्महत्या की स्थिति में ही कर्ज माफ माना जाएगा. ‎झालावाड़ पुलिस की इस कार्रवाई को मानव तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है. फिलहाल पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश में जुटी हुई है.

रणथंभौर टाइगर रिजर्व: शावकों संग बाघिन रिद्धि का खूबसूरत वीडियो हुआ वायरल

 रणथंभौर राजस्थान के सबसे बड़े और मशहूर रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) से एक बेहद ही मनमोहक वीडियो सामने आया है. इस वीडियो ने वन्यजीव प्रेमियों का दिल जीत लिया है. 'बाघों की नर्सरी' कहे जाने वाले इस रिजर्व में बाघिन टी-124 (RBT-124 Riddhi) अपने शावकों पर मां का प्यार लुटाती और उनकी नटखट अठखेलियों का आनंद लेती नजर आ रही है. वायरल वीडियो में क्या दिखा? 40 सेकंड के इस वीडियो में बाघिन रिद्धि जमीन पर आराम से लेटी हुई अपने दो शावकों को दूध पिलाती नजर आ रही है. तभी पीछे झाड़ियों में से एक और नन्हा शावक अठखेलियां करता हुआ निकलता है और सीधे अपनी मां के पेट पर आकर खड़ा हो जाता है. जब वह नटखट शावक नीचे उतरता है, तो बाघिन अपनी एक टांग हवा में उठाकर उसे भी दूध पीने का इशारा करती है. मां का इशारा पाते ही वह शावक भी अपने बाकी भाई-बहनों के साथ दूध पीने में मग्न हो जाता है. डीएफओ का अंदेशा हुआ सच इससे पहले रणथंभौर के नाल घाटी वन क्षेत्र में वन विभाग की नियमित गश्त के दौरान बाघिन रिद्धि को सिर्फ एक नन्हें शावक के साथ देखा गया था. तब उस शावक की उम्र करीब 2 से 3 महीने आंकी गई थी. रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह ने उस वक्त बताया था कि अभी बाघिन के साथ एक ही शावक नजर आया है, लेकिन संभवतया उसने और भी शावकों को जन्म दिया होगा. इस नए वायरल वीडियो ने वन विभाग के उस अंदेशे पर मुहर लगा दी है. शावकों को सुरक्षित और अठखेलियां करते देखना बाघ संरक्षण प्रयासों की एक बड़ी सफलता है. बाघिन रिद्धि और उसके शावकों को किसी तरह का व्यवधान न हो, इसके लिए वन विभाग द्वारा नाल घाटी क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरती जा रही है. वन विभाग की टीम लगातार इनकी निगरानी कर रही है ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. रणथंभौर में कुल कितने बाघ हैं? रणथंभौर में लगातार बढ़ती बाघों की संख्या वन प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक सुखद अहसास है. यहां के बाघों की वजह से न सिर्फ रणथंभौर बल्कि प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व भी आबाद हो रहे हैं. रणथंभौर में बाघों का वर्तमान कुनबा 77 तक पहुंच चुका है. इसमें 25 बाघ हैं, 23 बाघिन और 29 शावक हैं.

रिसर्च में खुलासा: भालू के पेट से गुजरकर बीज बन रहे ज्यादा मजबूत पौधे

अरावली जब हम भालू (Sloth Bear) के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में शहद चाटते या सुस्त पड़े जानवर की छवि आती है. लेकिन राजस्थान के सूखे और झीलों से घिरे अरावली के जंगलों (Aravalli Range) में ये भालू एक माली की तरह काम कर रहे हैं. हाल ही में आई एक साइंटिफिक रिसर्च से पता चला है कि भालू जो फल खाते हैं, उनके बीज जब भालू के पेट से होकर बाहर निकलते हैं, तो उनसे नए पौधे बहुत तेजी से उगते हैं. आसान शब्दों में कहें तो भालू अपनी इस आदत से अरावली के जंगलों को नया जीवन दे रहे हैं और पेड़-पौधों की आबादी बढ़ाने में मदद कर रहे हैं. यह रिसर्च किसने की है? इस दिलचस्प स्टडी का नाम Seasonal Diet And Seed Dispersal By Sloth Bears Melursus Ursinus in Western India है, जिसे जल्द ही इंटरनेशनल जर्नल Biotropica में पब्लिश किया जाना मंजूर कर लिया गया है. इस रिसर्च को तीन वैज्ञानिकों की टीम ने मिलकर पूरा किया है. इनमें रिसर्च स्कॉलर उत्कर्ष प्रजापति, इंडिपेंडेंट रिसर्चर डॉ. के.एस. गोपी सुंदर और उदयपुर की एक यूनिवर्सिटी के रिसर्चर विजय कुमार कोली शामिल हैं. उत्कर्ष ने अपनी पीएचडी की जरूरतों के तहत यह स्टडी की है. इन वैज्ञानिकों का कहना है कि अरावली जैसे सूखे और पतझड़ वाले जंगलों में बड़े सर्वाहारी (सब कुछ खाने वाले) जानवर पेड़-पौधों की पीढ़ियों को आगे बढ़ाने में कैसे मदद करते हैं, इस पर अतीत में बहुत कम जानकारी उपलब्ध थी. वैज्ञानिकों ने कैसे लगाया इस सच का पता? यह अहम स्टडी अरावली के अर्ध-शुष्क पतझड़ वाले जंगलों में की गई. वैज्ञानिकों ने भालू के खान-पान और बीजों को दूर-दूर तक फैलाने के तरीके को गहराई से समझने के लिए एक अनोखा रास्ता चुना. उन्होंने सर्दियों और गर्मियों के मौसम में भालू के मल (Scat) के सैंपल इकट्ठे किए और उनका एनालिसिस किया. इसके बाद उन्होंने भालू के मल से निकले बीजों और सीधे पौधों से तोड़े गए बीजों को अलग-अलग उगाकर उन पर एक्सपेरिमेंट किए. इस पूरी प्रक्रिया का मकसद यह जांचना था कि भालू के पेट से गुजरने के बाद कौन से बीज ज्यादा बेहतर अंकुरित होते हैं और किस पौधे के सीडलिंग्स ज्यादा समय तक जिंदा रहकर पेड़ बन पाते हैं. भालू के पेट से गुजरने के बाद बीजों में क्या बदलाव आया? इस रिसर्च में 6 अलग-अलग पौधों की प्रजातियों के बीज भालू के पेट से गुजरने के बाद भी पूरी तरह सुरक्षित और उगने लायक पाए गए. कुछ पौधों पर तो इसका असर बेहद चौंकाने वाला था. रिसर्च में देखा गया कि लैंटाना कैमारा नाम की एक विदेशी आक्रामक झाड़ी के बीज सिर्फ और सिर्फ तभी अंकुरित हुए, जब वे भालू के मल से होकर निकले थे. इसके विपरीत डोंकी बेरी (Grewia flavescens) के मामले में सीधे पेड़ से तोड़े गए बीज ज्यादा बेहतर तरीके से जिंदा रहे. वहीं, कोरोमंडल एबनी या तेंदू (Diospyros melanoxylon) के बीज जब भालू के पेट से होकर बाहर आए, तो उनसे उगे पौधे सामान्य बीजों के मुकाबले बहुत ज्यादा दिनों तक जिंदा रहे और मजबूत निकले. बाकी चार प्रजातियों के पौधों में भालू के मल से निकले बीज और सामान्य बीजों के उगने और जिंदा रहने की रफ्तार लगभग एक जैसी ही देखी गई. मौसम के हिसाब से बदल जाता है भालुओं का 'मेन्यू' रिसर्च से एक और दिलचस्प बात सामने आई कि अरावली के भालू मौसम के हिसाब से अपने खाने की थाली पूरी तरह बदल लेते हैं. इसे साइंस की भाषा में डाइट्री प्लास्टिसिटी कहते हैं. सर्दियों के मौसम के दौरान भालू जमकर फल खाते हैं और खास बात यह है कि वे अंधाधुंध हर तरह के फल नहीं खाते, बल्कि अपनी पसंद के चुनिंदा फल ही चुनते हैं. वहीं, गर्मियों में जब जंगलों में फल कम हो जाते हैं, तो भालू अपना मेन्यू बदलकर कीड़े-मकोड़े और दीमक खाने लगते हैं. हालांकि भालुओं का शरीर मुख्य रूप से चींटियां और दीमक खाने के लिए ही कुदरत ने बनाया है, लेकिन वे अपनी इस आदत में बदलाव कर लेते हैं और मौका मिलते ही फल खाने से पीछे नहीं हटते. अरावली के पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी है भालू? इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने भालू (Sloth Bear) को Vulnerable यानी खतरे की कगार पर खड़ी प्रजातियों की लिस्ट में रखा है. यह प्रजाति मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप में ही पाई जाती है. डॉ. के.एस. गोपी सुंदर ने आईएएनएस को बताया कि यह रिसर्च साबित करती है कि भालू चुनिंदा बीजों को फैलाने का बहुत बड़ा जरिया हैं. मौसम के हिसाब से बदलने वाली ऐसी जगहों पर, जहां पानी और संसाधनों की भारी कमी होती है, वहां भालुओं का यह लचीलापन पूरे जंगल की बनावट और हरियाली को तय करता है. इससे पहले भारत में हुए रिसर्च सिर्फ इस बात तक सीमित थे कि भालू क्या खाते हैं, लेकिन इस नई स्टडी ने पहली बार एक्सपेरिमेंट के जरिए यह साबित किया है कि भालू अरावली के इकोसिस्टम को जिंदा रखने और यहां की वनस्पति को संवारने में कितने बड़े और अहम मददगार हैं.

चंद्रेसल गांव में महंत देवानंद की हत्या, पुलिस ने कई एंगल से शुरू की जांच

कोटा कोटा जिले के चंद्रेसल (बोरखेड़ा) गांव में मठ के महंत देवानंद की हत्या कर दी गई. अज्ञात बदमाशों ने देर रात धारदार हथियार से महंत का मर्डर किया. जानकारी के अनुसार, वारदात को तब अंजाम दिया गया, जब महंत कक्ष में विश्राम कर रहे थे. तभी हमलावर मठ में घुस आए और उन पर ताबड़तोड़ हमला कर फरार हो गए. शोर सुनकर सेवादारों और ग्रामीण पहुंचे तो जो देखा उनकी आंखे फटी रह गई. महंत जमीन पर लहूलुहान हालत में थे. उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. रंजिश, संपत्ति विवाद या कुछ और वजह? देर रात को शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम और अन्य अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे. उन्होंने मामले की जानकारी ली. घटना की सूचना पर बोरखेड़ा थाना पुलिस, एफएसएल टीम और डॉग स्क्वायड मौके पर पहुंचे. पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाकर जांच शुरू कर दी है. हत्या के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है. पुलिस रंजिश, संपत्ति विवाद और चोरी के एंगल सहित विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीमों का गठन किया गया है. घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है. एडिशनल एसपी सुभाष चंद्र मिश्रा ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि स्पेशल टीम पूरे मामले की जांच कर रही है और जल्द ही आरोपी गिरफ़्त में होंगे. इलाके में आक्रोश, बीजेपी नेता ने दिया रिएक्शन घटनाक्रम के बाद पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है. भाजपा के पूर्व देहात अध्यक्ष और चंद्रसल मठ के सदस्य मुकुट नगर ने मामले पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग करते हुए घटनाक्रम की निंदा की है.  उन्होंने बताया कि महंत करीब 4 साल से यहां रह रहे थे. उनकी किसी से कोई रंजिश नहीं थी.