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शादी में मामा का तोहफा: 81 लाख नकद, 25 तोला सोना और 1 करोड़ 61 लाख का मायरा

नागौर राजस्थान के नागौर जिले के जायल में एक बार फिर मायरा की चर्चा छा गई है, लेकिन इस बार जाट समाज के बाद ब्राह्मण भाइयों ने इतिहास रच दिया. यहां दो ब्राह्मण भाइयों ललित कुमार व्यास और ओमप्रकाश व्यास ने अपनी बहन गायत्री देवी के बेटे नीलेश की शादी में 1 करोड़ 61 लाख रुपये का भव्य मायरा भरा. यह ब्राह्मण समाज में अब तक का सबसे बड़ा मायरा माना जा रहा है, जिसने जायल की परंपरा को नई ऊंचाई दी है. यह रस्म जायल के माहेश्वरी भवन में पारंपरिक विधि-विधान से पूरी हुई. पिता श्यामसुंदर व्यास की मौजूदगी में भाइयों ने बहन गायत्री को चुनरी ओढ़ाकर मायरा भरा. यह न सिर्फ भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है, बल्कि ब्राह्मण समाज की एकता, संस्कार और परंपरा को भी दर्शाता है. ब्रॉम्हण भाइयों के मायरे की खास बातें – 81 लाख रुपये नकद – 25 तोला सोना – चांदी के जेवरात – अन्य कपड़े, उपहार और सामान जायल का मायरा है एक ऐतिहासिक परंपरा  राजस्थान के नागौर जिले में जायल-खिंयाला का मायरा सदियों पुरानी संस्कृति का हिस्सा है. यहां मामा (भाई) अपनी बहन के बच्चों की शादी में दिल खोलकर उपहार देते हैं, जिसे महिलाएं विशेष गीतों (जायल खिंयाला रो मायरो) में गाती हैं. पहले मुख्य रूप से जाट समुदाय में बड़े मायरे चर्चित थे, लेकिन अब अन्य समाज भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. आपको बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में नागौर में कई बड़े मायरे भरे गए हैं. जिसके तहत कुछ परिवारों ने करोड़ों की जमीन, नकद, सोना-चांदी दिए. जबकि हाल ही में 21 करोड़ से ज्यादा के मायरे भी सुर्खियां बने. लेकिन इस बार ब्राह्मण समाज का यह योगदान खास है. क्योंकि यह समाज में एक नई मिसाल कायम कर रहा है. आज भी जीवंत हैं राजस्थान की परंपरा जायल क्षेत्र में इस ऐतिहासिक मायरे की हर ओर चर्चा है. भाई-बहन का प्यार, परंपरा का सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा का जीता-जागता उदाहरण भी है. साथ ही यह मायरा बताती है कि राजस्थान की रस्में आज भी जीवंत हैं, जहां रिश्ते पैसे से नहीं, बल्कि भावनाओं और संस्कारों से मजबूत होते हैं.   

आयुर्वेद के संवर्धन में सरकार का कदम, भजनलाल शर्मा ने किया स्पष्ट बयान

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान की मिट्टी में आयुर्वेद की जड़ें गहरी हैं, यहां औषधि उत्पादन की अद्भुत क्षमता है। प्रदेश की पहाड़ी, वन, औषधीय पौधे इसके साक्षी हैं कि यहां की भूमि सदियों से आयुर्वेद का केंद्र रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आयुर्वेद के संवर्धन तथा जनमानस में उसके व्यापक उपयोग के लिए प्राथमिकता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने  राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह में अपने उद्बोधन के दौरान ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1976 में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान एक महाविद्यालय के रूप में आरंभ होकर आज देश के प्रमुख डीम्ड टू बी आयुर्वेद यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित हो गया है। राजस्थान की धरती पर स्थापित इस संस्थान ने पचास वर्षों में जिस ऊंचाई, प्रतिष्ठा और राष्ट्रीय नेतृत्व को प्राप्त किया है, वह प्रेरणास्पद है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोगी सेवा – इन चारों स्तंभों पर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान ने पिछले पांच दशकों में नेतृत्व स्थापित किया है। देश को विश्वगुरु बनाने में आयुर्वेद और योग की प्रमुख भूमिका मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश को विश्वगुरु बनाने में आयुर्वेद और योग की प्रमुख भूमिका रही है। आयुर्वेद के माध्यम से हम यह पहले से ही जान लेते हैं कि कौन से महीने में कौन सी बीमारी होगी और उसका उपचार कैसे किया जाए। उन्होंने कहा कि वेदों के साथ हमारे ऋषियों ने आयुर्वेद के माध्यम से मानव जीवन को समझा है। चरक, सुश्रुत, वाग्भट्ट जी जैसे महान वैद्यों ने इस विद्या को व्यवस्थित रूप दिया। उन्होंने कहा कि चरक संहिता में कहा गया है कि स्वस्थ शरीर धर्म का प्रथम साधन है। सुश्रुत को आज पूरा विश्व शल्य चिकित्सा का जनक मानता है। प्रधानमंत्री का सपना ‘भारत में उपचार और भारत द्वारा उपचार’ शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना ‘भारत में उपचार और भारत द्वारा उपचार’ है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में एक अलग आयुष मंत्रालय की स्थापना की गई। जिससे आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को नई ऊर्जा मिली। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में अपने प्रयासों से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कराया। इससे न केवल योग, बल्कि पूरी भारतीय चिकित्सा परंपरा को विश्व मंच पर पहचान मिली। आयुर्वेद अनुसंधान में निवेश बढ़ाया गया, आयुर्वेद संस्थानों का विस्तार किया गया। आयुर्वेद को जन-स्वास्थ्य की मुख्यधारा में आगे बढ़ाना हमारी प्राथमिकता शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पिछले वर्षों में आयुर्वेद के लिए नए आयुर्वेद चिकित्सालय, महाविद्यालय एवं डिस्पेंसरी की स्थापना से सुलभ चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की गई। स्नातक-स्नातकोत्तर सीटों में वृद्धि, आधुनिक लैब, ड्रग-स्टैंडर्डाइजेशन यूनिट और शिक्षण-फार्मेसी को सुदृढ़ किया गया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद अस्पतालों का विस्तार, पंचकर्म इकाइयों का सुदृढ़ीकरण, दवाखानों का आधुनिकीकरण, शिक्षा एवं अनुसंधान के नए अवसर सहित विभिन्न निर्णयों से आयुर्वेद को जन-स्वास्थ्य की मुख्यधारा में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने एनआईए के लिए जयपुर में जमीन आवंटित करने हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। एनआईए की भूमिका से पीढ़ी दर पीढ़ी आयुर्वेद का दीपक प्रज्वलित केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय प्रताप राव जाधव ने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की 50 वर्ष की यह यात्रा केवल समय की गणना नहीं है, बल्कि उन असंख्य चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, और कर्मयोगियों की अटूट निष्ठा, समर्पण और तपस्या का प्रतीक है, जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी आयुर्वेद के दीपक को प्रज्वलित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोगों की असंतुलित जीवनशैली के कारण मधुमेह, विटामिन बी 12 एवं डी की कमी जैसी अनेक बीमारियां पनप रही हैं। इन बीमारियों के निदान के लिए योग एवं आयुर्वेद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शक्तिशाली नेतृत्व में हमारी सरकार का विजन स्पष्ट है परंपरा की जड़ों में विज्ञान का संरक्षण और कल्याण की शाखाओं का विस्तार। भारत सरकार का उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना ही नहीं, बल्कि स्वस्थ, सशक्त और संतुलित व्यवस्था का निर्माण करना है। उन्होंने इस वर्ष के बजट में आयुर्वेद के तीन नए अखिल भारतीय संस्थान सहित सभी घोषणाओं के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राजस्थान में आयुष के क्षेत्र में हो रहे उल्लेेखनीय कार्य की भी सराहना की। उप मुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में आयुष्मान आदर्श ग्राम योजना लाकर आयुर्वेद और योग के माध्यम से आरोग्य ग्राम बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व को आयुर्वेद और योग भारत की देन है। उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नेशनल आयुष मिशन में वर्ष 2025-26 की कार्ययोजना के तहत राजस्थान को देश में सर्वाधिक 348 करोड़ रुपए आवंटित किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एनआईए परिसर में नवनिर्मित ओपीडी सुश्रुत भवन का लोकार्पण किया। इससे पहले उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर विधायक बालमुकुन्द आचार्य, केन्द्रीय आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, एनसीआईएसएम अध्यक्ष डॉ. मनीषा कोटेकर, प्रमुख शासन सचिव आयुष सुबीर कुमार, एनआईए कुलपति प्रो. संजीव शर्मा सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

रेस्टोरेंट की पहली मुलाकात से कत्ल तक का सफर: कैसे अंजू ने प्यार के लिए पति को मौत दी?

जयपुर संयोग से हुई एक मुलाकात का अंजाम करीब 8 साल बाद बेहद खौफनाक हुआ। राजस्थान में प्रेमी संजू के हाथों पति की हत्या कराने वाली अंजू की कहानी काफी हद तक इंदौर की सोनम रघुवंशी से मिलती-जुलती है। राजा रघुवंशी की तरह ही आशीष को भी उसकी दुल्हन ने ही धोखे से मौत के घाट उतार दिया। अंजू और संजू की इस कहानी की शुरुआत 2018 में हुई थी, लेकिन करीब 7 साल तक दोनों में कोई संपर्क नहीं था। दोबारा हुई मुलाकात के बाद दोनों ने सारी हदें पार कर दीं।   आरोप है कि अंजलि उर्फ अंजू ने 30 जनवरी को संजू और उसके दोस्तों के साथ मिलकर अपने पति आशीष की हत्या कर दी, जिसके साथ 3 महीने पहले ही उसकी शादी हुई थी। अंजू और संजू की पहली मुलाकात 2018 में एक शादी समारोह के दौरान हुई थी। अंजू वहां एक मेहमान बनकर गई थी जबकि संजू वहां एक वेटर के रूप में लोगों को नाश्ता और खाना परोस रहा था। यहां दोनों ने एक दूसरे को देखा और दिल दे बैठे। थोड़ी देर बातचीत के बाद संजू ने अंजू को अपना मोबाइल नंबर दिया। लेकिन अंजू के पास कोई मोबाइल नहीं होने की वजह से दोनों का संपर्क नहीं बन पाया। मोबाइल हाथ आने के बाद जिंदगी में नया मोड़ अंजलि की जिंदगी में एक बड़ा मोड़ तब आया जब उसने 2014 में अपना मोबाइल फोन खरीदा। अब उसने करीब 7 साल पहले उस नंबर को डायल किया जो संजू ने दिया था। सालों पहले मिले और कुछ घंटों के बाद ही बिछड़े अंजू-संजू की फोन पर लंबी बात होने लगी। दोनों की दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई। दोनों एक दूसरे को बहुत चाहने लगे और एक दूसरे के साथ जिंदगी बिताने की कसमें खाने लगे थे। इधर, बीकॉम कर चुकी अंजू के लिए परिवार के लोग योग्य दूल्हे की तलाश में थे। उनकी तलाश रवाला के आशीष पर जाकर खत्म हुई। एमकॉम करने के बाद बीएड कर रहे संजय से अंजू की शादी तय कर दी गई। परिवार की मर्जी के मुताबिक आशीष से शादी करके वह सादुलशहर से रावला चली गई पर खुश नहीं थी। पति की हत्या के 16 दिन पहले अंजलि मायके गई। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान उसने संजू के साथ मिलकर आशीष की हत्या की साजिश रची। शादी के बाद दोनों की आमने-सामने मुलाकात नहीं हुई, पर वे वॉट्सऐप पर लगातार संपर्क में रहते थे। हत्या के दिन भी दोनों के बीच 5-7 बार बात हुई थी। पति की हत्या और लूट का नाटक 30 जनवरी की रात अंजलि ने डिनर के बाद पति को टहलने के लिए चलने को कहा। वह पति को लेकर गांव के सुनसान रास्ते की ओर चली गई जहां प्लान के मुताबिक संजय अपने दो दोस्तों के साथ झाड़ियों में छिपा था। जैसे ही अंजलि अपने पति के साथ वहां पहुंची, संजू ने अपने दो दोस्तों के साथ आशीष पर हमला कर दिया। रॉड से पीटने के बाद मफलर से उसका गला घोंट दिया। इसके बाद अंजलि ने इसे दुर्घटना और लूट दिखाने के लिए प्रेमी को अपने गहने दे दिए। वह बेहोशी का नाटक करके लेट गई। बाद में एक राहगीर की सूचना पर पहुंची पुलिस ने आशीष को अस्पताल पहुंचाया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में जब यह बात सामने आई कि आशीष का गला घोंटा गया था तो पुलिस ने हत्या के एंगल से पड़ताल की और जो सच सामने आया उससे पूरा देश हैरान है।

कर्ज का बढ़ता बोझ: पांच साल में दोगुना, बजट में 8 लाख करोड़ संभव

जयपुर राजस्थान का बजट 11 फरवरी को विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। इसमें राजस्थान के आय-व्यय अनुमान भी पेश किए जाएंगे। सरकार अपने खर्च का लेखा-जोखा रखने के साथ ही यह भी बताएगी कि प्रदेश पर कर्ज कितना बढ़ चुका है और आने वाले वित्त वर्ष में यह और कितना बढ़ जाएगा।  बीते 5 वर्षों में राजस्थान में कर्ज की रफ्तार दोगुनी तेजी से बढ़ी है। मार्च  2022 तक राजस्थान पर कुल कर्ज 3,53,556.08 करोड़ रुपए था। यानी प्रति व्यक्ति लगभग 45 हजार रुपए का औसत कर्ज था, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष में यह 7 लाख 23 हजार करोड़ रुपए प्रोजेक्टेड है और यदि इसी रफ्तार से यह आगे बढ़ा तो आने वाले नए बजट में कर्ज की यह सीमा बढ़कर 8 लाख करोड़ रुपए पार कर जाएगी। बजट अनुमान के मुताबिक 2025-26 में कर्मचारियों के वेतन पर 83,775 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। इसमें अगले साल भी औसतन 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं आने वाले वित्त वर्ष में पेंशन व्यय 34,146 करोड़ रुपए से 40 हजार करोड़ रुपए  तक पहुंचने की संभावना है, जिसमें 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेंशन व्यय में यह तेज बढ़ोतरी आने वाले वर्षों में गंभीर वित्तीय चुनौती बन सकती है। ब्याज भुगतान बना हुआ है दबाव राज्य पर बढ़ते कर्ज का असर ब्याज भुगतान पर भी दिखाई देता है। 2025-26 में ब्याज भुगतान 40,058 करोड़ रुपए बताया गया है, जो भले ही केवल 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता हो लेकिन कुल राजस्व व्यय का बड़ा हिस्सा अब भी ब्याज चुकाने में जा रहा है। वित्त वर्ष 2021-22 में कुल ऋण की स्थिति 3,53,556 करोड़ रुपये थी। अगले वर्ष, 2022-23 में कुल ऋण बढ़कर 3,88,383 करोड़ रुपये हो गया। 2023-24 में कुल ऋण लगभग 571638 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद वित्त वर्ष 2024-25 में यह 641740 करोड़ और मौजूदा वित्त वर्ष में यह लगभग 726384 करोड़ रुपए हो गया।

लॉरेंस गैंग का खौफ: जोधपुर के दो व्यापारी निशाने पर

जोधपुर जोधपुर शहर में दो कारोबारियों को कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नाम पर जान से मारने की धमकी देने और दो करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। इस संबंध में चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है, जिसके बाद पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। डिब्बा कॉल के जरिए दी गई धमकी पुलिस के अनुसार हाउसिंग बोर्ड के दो लोगों को एक डिब्बा कॉल के जरिए धमकी दी गई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को लॉरेंस गैंग से जुड़ा बताते हुए लॉरेंस का भाई 'आरजू' होने का दावा किया। आरोपी ने दोनों कारोबारियों से 48 घंटे के भीतर एक-एक करोड़ रुपये, कुल दो करोड़ रुपये की रंगदारी देने की मांग की और पैसे नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी। भारत से ही आया था धमकी जानकारी के मुताबिक धमकी देने वाला और कॉल रिसीव करने वाला व्यक्ति दोनों ही भारत से बाहर थे। आरोपी ने पहले एक व्यक्ति को कॉल किया और फिर उसी के माध्यम से व्हाट्सएप कॉल से बात करवाई गई। बिचौलिए ने अपने मोबाइल का स्पीकर ऑन कर धमकी देने वाले की आवाज दोनों को सुनाई। इस तरह की तकनीक को डिब्बा कॉल कहा जाता है, जिसमें कॉल को तीसरे व्यक्ति के माध्यम से जोड़कर बातचीत करवाई जाती है, जिससे कॉल का स्रोत ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है। क्रिकेट सट्टे के व्यवसाय से जुड़े हैं कारोबारी सूत्रों के अनुसार दोनों कारोबारी क्रिकेट सट्टे के व्यवसाय से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनमें से एक हाल ही में दुबई से भारत लौटा है। धमकी मिलने के बाद उनके परिवार में डर और दहशत का माहौल है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पहले भी कई बार लॉरेंस गैंग के नाम पर फर्जी लोगों द्वारा धमकी देने के मामले सामने आ चुके हैं। फिलहाल कॉल डिटेल, तकनीकी साक्ष्य और बिचौलिए की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धमकी वास्तविक गैंग से जुड़ी है या किसी ने फर्जी तरीके से डराने की कोशिश की है।

शेखावाटी में मौसम ने ली करवट, जानें आने वाले 7 दिन कैसा रहेगा हाल

सीकर राजस्थान में उत्तरी हवाओं का दबाव कम होने के चलते अब शेखावाटी में सर्दी का असर कम होने लगा है। सुबह और रात के तापमान में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार अब एक सप्ताह तक शेखावाटी में इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना है, जिससे लोगों को धीरे-धीरे सर्दी से राहत मिलने लगेगी। इस बार शेखावाटी में न्यूनतम तापमान माइनस 3 डिग्री सेल्सियस तक चला गया था। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, आमतौर पर शेखावाटी में तेज सर्दी का कारण पहाड़ी इलाकों से आने वाली ठंडी हवाएं होती हैं। लेकिन इस बार पहाड़ी क्षेत्रों में भी केवल सीजन के आखिर में ही बर्फबारी हुई, जिसकी वजह से शेखावाटी में लंबे समय तक कड़ाके की सर्दी नहीं पड़ी। ठंड से मिली राहत इसी कारण फरवरी के दूसरे सप्ताह में ही लोगों को ठंड से राहत मिलना शुरू हो गई है। शेखावाटी में न्यूनतम तापमान भले ही 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ हो, लेकिन दोपहर में तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहने के चलते अब धूप में तेजी महसूस की जा रही है। मौसम विभाग का कहना है कि यदि प्रदेश के मौसम में कोई नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय नहीं होता है या पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी नहीं होती है, तो शेखावाटी में धीरे-धीरे गर्मी का असर बढ़ना शुरू हो जाएगा। फरवरी के शेष दो सप्ताह में भले ही सुबह और रात के समय सर्दी कुछ तेज रह सकती है, लेकिन मार्च के पहले सप्ताह से ही लोगों को ठंड से साफ तौर पर राहत मिलना शुरू हो जाएगी। नहीं होगा कोई बदलाव जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार, अभी एक सप्ताह तक राजस्थान और शेखावाटी के मौसम में किसी भी तरह का बड़ा बदलाव नहीं होगा। मौसम शुष्क बना रहेगा और इस दौरान तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिलता रहेगा।

भयानक हादसा: रातों-रात गिरी तीन मंजिला इमारत, दो लोगों की जान गई, 13 को अस्पताल पहुंचाया गया

कोटा राजस्थान के कोटा शहर में शनिवार देर रात एक बड़ा हादसा हो गया। तलवंडी इलाके में स्थित एक तीन मंजिला इमारत अचानक ढह गई, जिसमें कम से कम दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग मलबे में दब गए। इस इमारत में एक रेस्तरां चल रहा था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीन का इस्तेमाल किया गया। 15 लोगों को मलबे से निकाला गया, दो की मौत प्रशासन के अनुसार अब तक 15 लोगों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका है। इनमें से दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 13 लोग घायल हैं और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहीं, दो लोगों को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें प्राथमिक इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि अब मलबे में किसी के दबे होने की संभावना कम है, फिर भी एहतियात के तौर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखा गया है। घायलों की पहचान सीएमएचओ नरेंद्र नागर के अनुसार घायलों की पहचान सुदीता (30) निवासी कोटा, शालीन सुवास्या (25) निवासी कुन्हाड़ी, मोहम्मद जहांगीर (30) निवासी महावीर नगर, भूपेंद्र (40) निवासी रंगबाड़ी, पूरब मीणा (24) निवासी जय हिंद नगर, बोरखेड़ा, तलब निवासी सुभाष नगर, नावेद (20) निवासी सुभाष नगर, रेस्टोरेंट मालिक मोहम्मद जहांगीर और मोहम्मद साबिर निवासी झारखंड के रूप में हुई है। इसके अलावा, रेस्क्यू टीम का कर्मचारी रॉकी डेनियल भी इस हादसे में घायल हुआ है। कोटा मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल संगीता सक्सेना ने बताया कि कुल 10 लोग वहां लाए गए थे, जिनमें से दो को मृत घोषित कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि दो मरीज अभी अस्पताल में भर्ती हैं, जिन्हें मामूली चोटें आई हैं और उनका इलाज चल रहा है। वहीं, मामूली चोट वाले तीन मरीजों का इलाज करने के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि घायलों में एक व्यक्ति रेस्क्यू टीम का सदस्य भी था। कलेक्टर ने बताया इमारत गिरने का कारण जिला कलेक्टर पीयूष समारिया ने बताया कि जिस इमारत के गिरने की घटना हुई है, उसके बगल में एक पुरानी इमारत को तोड़ा गया था। कलेक्टर के मुताबिक, इसी वजह से इस इमारत की नींव कमजोर हो गई थी और यही हादसे का शुरुआती कारण माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि पूरी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी। मंत्री मदन दिलावर बोले- यह बड़ा हादसा है राज्य के कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह एक बड़ा हादसा है। लोकसभा अध्यक्ष और कोटा सांसद ओम बिरला के ओएसडी राजीव दत्ता ने कहा कि यह एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही पूरा प्रशासन मौके पर पहुंच गया था। राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कोटा मेडिकल कॉलेज का दौरा किया और बिल्डिंग गिरने से घायल हुए पीड़ितों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। ओम बिरला ने जताया दुख, अधिकारियों को दिए निर्देश लोकसभा अध्यक्ष और कोटा सांसद ओम बिरला ने इस हादसे पर दुख जताते हुए ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि कोटा के इंद्रविहार में इमारत गिरने की घटना बेहद दुखद है और वह जिला प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने जिला कलेक्टर समेत संबंधित अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि हादसे में घायल सभी लोगों को उचित और शीघ्र इलाज मिले। ओम बिरला ने ईश्वर से सभी घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की और इस मुश्किल समय में प्रभावित परिवारों को शक्ति और धैर्य देने की कामना की।

सिर्फ ‘नीच’ बोलना SC/ST ऐक्ट के तहत अपराध नहीं, हाईकोर्ट ने दी बड़ी व्याख्या

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति को ‘नीच’ जैसे सामान्य अपमानजनक शब्द कह देने मात्र से एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) ऐक्ट अपने-आप लागू नहीं होता। जस्टिस वीरेन्द्र कुमार ने स्पष्ट किया कि यह ऐक्ट तभी लगाया जा सकता है, जब यह साबित हो कि अपमान खास तौर पर जाति के आधार पर किया गया था और आरोपी को पीड़ित की जाति की जानकारी थी।   क्या है मामला यह मामला वर्ष 2011 में आईआईटी जोधपुर से जुड़े एक विवाद से संबंधित है। उस समय सरकारी अधिकारी अतिक्रमण की जांच के लिए मौके पर पहुंचे थे। जांच के दौरान कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और कथित रूप से अधिकारियों को ‘नीच’ और ‘भिखारी’ जैसे शब्द कहे। अधिकारियों ने इसे जातिगत अपमान मानते हुए एफआईआर दर्ज करवाई और एससी/एसटी ऐक्ट की धारा के साथ आईपीसी की धाराएं भी जोड़ी गईं। आरोपियों की क्या दलील आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका देते हुए कहा कि उन्हें अधिकारियों की जाति के बारे में जानकारी नहीं थी और बोले गए शब्द जाति का संकेत नहीं देते। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था, इसलिए इसे जातिगत अपमान नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि इस्तेमाल किए गए शब्द किसी विशेष जाति की ओर संकेत नहीं करते और ना ही ऐसा कोई प्रमाण है कि आरोपियों को अधिकारियों की जाति के बारे में जानकारी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि एससी/एसटी ऐक्ट लगाने के लिए जाति-आधारित अपमान का स्पष्ट और ठोस प्रमाण होना आवश्यक है। इस आधार पर कोर्ट ने एससी/एसटी ऐक्ट के तहत लगाए गए आरोपों को रद्द कर दिया। हालांकि, सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी से रोकने और उनसे धक्का-मुक्की से संबंधित आईपीसी की धाराएं बनी रहेंगी और इन्हीं धाराओं पर मामला आगे चलेगा।  

राजस्थान में जल्द शुरू होगी सरकारी ‘भारत टैक्सी’ सेवा?

जयपुर/नई दिल्ली. देश के टैक्सी सेक्टर में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। केंद्र सरकार ने 'सहकार से समृद्धि' के मंत्र के साथ 'भारत टैक्सी' ऐप लॉन्च कर दिया है। यह कोई साधारण प्राइवेट कंपनी नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा कोऑपरेटिव (सहकारी) टैक्सी प्लेटफॉर्म है। राजस्थान, जो अपनी पर्यटन अर्थव्यवस्था के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, वहां इस सेवा का आना न केवल यात्रियों के लिए जेब राहत की खबर होगा, बल्कि हजारों टैक्सी ड्राइवरों के लिए शोषण से आजादी का मार्ग भी है। क्या है 'भारत टैक्सी'?  'भारत टैक्सी' एक सरकारी और सहकारी मॉडल पर आधारित ऐप है, जिसे ओला और उबर जैसी प्राइवेट कंपनियों के विकल्प के रूप में पेश किया गया है। इसका संचालन 'सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड' द्वारा किया जा रहा है। इस ऐप की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें टैक्सी चलाने वाला ड्राइवर (जिसे 'सारथी' कहा गया है) ही इस प्लेटफॉर्म का हिस्सेदार यानी मालिक है। जहाँ प्राइवेट कंपनियां हर राइड पर 20% से 30% तक कमीशन काटती हैं, वहीं भारत टैक्सी में ड्राइवर से कोई कमीशन नहीं लिया जाएगा। राजस्थान में क्यों है ज्यादा जरूरत? राजस्थान एक 'टूरिज्म हब' है। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और जैसलमेर जैसे शहरों में विदेशी और घरेलू पर्यटकों की भारी आवाजाही रहती है। पर्यटकों का भरोसा: अक्सर पर्यटकों को प्राइवेट कैब में 'सर्ज प्राइसिंग' (पीक आवर्स में बढ़ा हुआ किराया) और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। सरकारी भरोसे वाली 'भारत टैक्सी' आने से पर्यटकों के बीच 'ट्रस्ट फैक्टर' बढ़ेगा। सस्ती राइड: राजस्थान के आम नागरिकों को अब प्राइवेट टैक्सी ऑपरेटर्स के मनमाने किराए से राहत मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत टैक्सी का किराया अन्य ऐप्स के मुकाबले 20% से 30% तक कम हो सकता है। राजस्थान में कब और कहाँ होगी शुरुआत? वर्तमान में इस सेवा का दिल्ली-NCR और गुजरात में सफल पायलट ट्रायल पूरा हो चुका है और 5 फरवरी को इसे आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया गया है। विस्तार योजना: केंद्र सरकार का लक्ष्य अगले दो वर्षों के भीतर इसे देश के हर राज्य और शहर में पहुँचाना है। राजस्थान के 'टॉप' शहर: उम्मीद है कि अगले चरण में राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और कोटा जैसे महानगरों में 'भारत टैक्सी' के सपोर्ट सेंटर स्थापित किए जाएंगे। टैक्सी ड्राइवरों के लिए 'अच्छे दिन'! राजस्थान के हजारों टैक्सी और ऑटो चालक लंबे समय से प्राइवेट कंपनियों की भारी कमीशन कटौती और 'सर्ज प्राइसिंग' के कारण परेशान हैं। ऐसे में सरकारी 'भारत टैक्सी' उनके लिए ज़्यादा बेहतर विकल्प बन सकती है।  सीधे बैंक खाते में पैसा: भारत टैक्सी में यात्री द्वारा दिया गया किराया सीधे ड्राइवर के बैंक खाते में जाएगा। सामाजिक सुरक्षा: इस योजना के तहत ड्राइवरों को 5 लाख रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा भी दिया जा रहा है, जो राजस्थान के चालक समुदाय के लिए एक बड़ी सुरक्षा है। फिलहाल ये चल रही टैक्सियांराजस्थान सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत उबर, ओला, मेरु और पिंक सिटी कैब जैसी निजी टैक्सी सेवाएं राज्य में संचालित हो रही हैं। ये शहर के भीतर और शहरों के बीच यात्रा के लिए मोबाइल ऐप और कॉल बुकिंग के माध्यम से उपलब्ध हैं। सुरक्षा और नियमनराज्य परिवहन विभाग ने टैक्सी यात्रियों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। चौबीसों घंटे नियंत्रण कक्ष- लाइव लोकेशन ट्रैकिंग सुविधा- आपातकालीन पैनिक बटन सुविधा- आठ वर्ष से अधिक पुराने वाहनों पर प्रतिबंध, महिला यात्रियों के लिए महिला चालक का विकल्प भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

ज्वैलरी शॉप से लाखों रुपए की सोने की चेन ले उड़ा कबूतर

नागौर. राजस्थान के नागौर जिले से सामने आया एक अनोखा वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक कबूतर सोने की चेन चोंच में दबाकर उड़ता और बाद में उसे गले में डालकर बैठा नजर आ रहा है। जहां एक ओर सोने-चांदी के भावों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, वहीं इस ‘सोने की चेन पहने कबूतर’ ने लोगों को हैरान कर दिया है। ये है पूरा मामला ये वायरल वीडियो नागौर जिले के डेगाना कस्बे का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार डेगाना के सर्राफा बाजार स्थित एक ज्वेलरी शॉप में सोने के आभूषण तैयार किए जा रहे थे। इसी दौरान अचानक एक कबूतर दुकान के भीतर घुस आया और काउंटर पर रखी तैयार हो रही सोने की चेन को अपनी चोंच में दबाकर उड़ गया। कुछ ही पलों में कबूतर चेन लेकर दुकान के बाहर जा बैठा और उसे गले में डाल लिया। घटना को देखकर दुकान संचालक और आसपास मौजूद व्यापारी कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गए। सोने जैसी कीमती वस्तु को इस तरह उड़ते देख वहां अफरा-तफरी मच गई। दुकानदारों ने तुरंत कबूतर पर नजर बनाए रखी और उसे नीचे उतारने के प्रयास शुरू कर दिए। काफी देर की मशक्कत के बाद कबूतर ने चेन वहीं गिरा दी और उड़ गया, जिससे सोने की चेन सुरक्षित वापस मिल गई। इसके बाद व्यापारियों ने राहत की सांस ली। ये कमेंट कर रहे यूजर्स इस घटना का वीडियो वहां मौजूद लोगों ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिसके बाद ये तेजी से वायरल हो गया। वीडियो पर यूजर्स मजेदार कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, 'लगता है कबूतर को भी सोने की कीमत समझ आ गई है।' वहीं दूसरे ने कहा, 'कोई पुराना हिसाब-किताब बाकी होगा।' कुछ यूजर्स ने तो अनोखी डिमांड करते हुए लिखा कि “ये कबूतर मुझे चाहिए।' एक अन्य यूजर ने लिखा, भाई ये मॉडर्न कबूतर है, चिट्ठी नहीं अब सोने की चेन लेकर जाता है।' अन्य ने कहा कि 'शायद पत्नी ने एनिवर्सरी पर गोल्ड चेन की डिमांड कर दी होगी,' तो किसी ने इसे वेलेंटाइन डे से जोड़ते हुए लिखा कि 'वैलेंटाइन डे से पहले कबूतर अपनी GF के लिए गिफ्ट लेकर जा रहा है।'