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बीकानेर में बोर्ड एग्जाम से पहले 4394 लेक्चरर के तबादले, शिक्षा विभाग ने दो चरणों में की ट्रांसफर लिस्ट जारी

बीकानेर  राजस्थान में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा शुरू होने में एक माह का समय बचा है, लेकिन उस से पहले ही शिक्षा विभाग ने तबादलों की झड़ी लगा दी है। शनिवार के दिन 4,394 लेक्चररों के ट्रांसफर कर दिए गए। करीब सुबह 7:30 बजे 1,644 हिन्दी लेक्चररों की ट्रांसफर लिस्ट जारी की गई। इसके कुछ ही समय बाद अन्य विषयों के 2,750 लेक्चररों की ट्रांसफर लिस्ट जारी कर दी गई। अभी और ट्रांसफर लिस्ट आने की संभावना विभागीय सूत्रों के मुताबिक अभी अन्य ट्रांसफर लिस्ट भी जारी की जा सकती हैं। इनमें बड़ी संख्या में लेक्चररों की अदला-बदली की जा सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले स्कूलों के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती हैं।  माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की 10वीं और 12वीं कक्षायों की परीक्षाएं 12 फरवरी से शुरू हो रही हैं। इस बार ये परीक्षाएं मार्च के बजाय फ़रवरी में करवाई जा रही हैं, लेकिन पाठ्यक्रम में कोई कटौती नहीं की गई है। ऐसे में छात्र पहले से ही समय की कमी से जूझ रहे थे। इस पर ये तबादलें छात्रओ की पढ़ाई पर  असर डाल सकते हैं। सर्दी में भी छुट्टी नहीं सर्दी के मौसम में भी दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों की छुट्टी नहीं की गई है। इसके बावजूद कई स्कूलों में उपस्थिति कम बनी हुई है। ऐसे समय में  लेक्चररों के तबादले होने से छात्रों की बोर्ड परीक्षा तैयारी पर सीधा असर पड़ेगा।      इन जिलों में ज्यादा तबादले     जारी आदेश के अनुसार सबसे अधिक तबादले जयपुर जिले में किए गए हैं, जहां 25 से अधिक वाइस प्रिंसिपल और समकक्ष अधिकारियों को इधर-उधर किया गया है। बीकानेर जिले से 10 से ज्यादा, चूरू से 8 से अधिक और नागौर से करीब 12 तबादले हुए हैं। इसी तरह अजमेर, अलवर, भीलवाड़ा, उदयपुर, टोंक, सीकर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर, बूंदी और भरतपुर जैसे जिलों में भी 4 से 8 के बीच तबादले किए गए हैं। कई जिलों में यह तबादले एक ही जिले के भीतर, तो कई में एक जिले से दूसरे जिले में किए गए हैं। प्रिंसिपलों के भी हुए थे तबादले माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने बोर्ड परीक्षाओं से ठीक पहले 400 से अधिक प्रिंसिपलों के तबादले किए थे। ये तबादले एक साथ नहीं, बल्कि चार अलग-अलग ट्रांसफर लिस्ट जारी कर किए गए थे, जिससे कई स्कूलों में लगातार प्रशासनिक अस्थिरता बनी रही। परीक्षा ड्यूटी पर असर बोर्ड परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्रों पर लेक्चररों की ड्यूटी लगाई जाती है। बड़ी संख्या में तबादलों के चलते परीक्षा ड्यूटी का समुचित प्रबंधन करना विभाग के लिए एक चुनौती बन सकता है। शिक्षा विभाग के इस फैसले से स्कूलों में असमंजस की स्थिति बनी हुई हैं। 

स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक प्रगति: गांव-ढाणी तक मिल रहा बेहतर इलाज, दो वर्षों में मजबूत हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर — भजनलाल शर्मा

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और संवेदना से जुड़ा क्षेत्र है। विगत दो वर्षों में राज्य सरकार ने अपने बजट में स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आगे भी स्वास्थ्य के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाया है। इससे गांव-ढाणी तक प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण निःशुल्क उपचार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बजट पूर्व संवाद का उद्देश्य यही है कि इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के सुझावों से एक ऐसा बजट बने, जिससे प्रदेश की 8 करोड़ से अधिक जनता को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं मिलें और राजस्थान स्वास्थ्य में सिरमौर बने। शर्मा शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व संवाद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार ‘पहला सुख निरोगी काया’ अर्थात् स्वस्थ शरीर ही सबसे बड़ा सुख होता है। इसी अवधारणा के साथ प्रदेश में लागू की गई मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना अब पूरे देश के लिए मिसाल बन गई है। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत अब तक 37 लाख मरीजों को 7 हजार 300 करोड़ रुपये का कैशलेस इलाज उपलब्ध करवाया गया है। इसी तरह, मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के तहत औषधियां, सर्जिकल एवं सूचर्स उपलब्ध करवाने में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है। जिला चिकित्सालयों में बुजुर्गों के लिए रामाश्रय वार्ड खोले हैं, जहां उन्हें सम्मान के साथ स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। चिकित्सा सेवा का क्षेत्र, दायित्वों को निष्ठा और ईमानदारी से निभाए स्वास्थ्यकर्मी मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा सेवा का क्षेत्र है। हर रोगी को संवेदनशीलता के साथ अच्छा उपचार मिले और जीवन रक्षा का उद्देश्य फलीभूत हो। यही इस क्षेत्र की महानता है। चिकित्सकों एवं इस क्षेत्र से जुड़े प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी को चाहिए कि वे अपने दायित्वों को निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाए। राज्य सरकार ऐसे सेवाभावी कार्मिकों के सम्मान में कोई कमी नहीं रखेगी। लेकिन जनता के पैसे का दुरूपयोग करने वाले एवं स्वास्थ्य योजनाओं में अनियमितता करने वाले कार्मिकों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रही है ताकि प्रदेश को प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 7 नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं और 15 नवीन मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं। साथ ही, भीलवाड़ा, धौलपुर, प्रतापगढ़, नाथद्वारा एवं बूंदी में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना की गई है। हमारा प्रयास है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में शोध एवं अनुसंधान को बढ़ावा मिले। इस दिशा में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। 8 हजार 700 चिकित्सा संस्थान आयुष्मान आरोग्य मंदिर में परिवर्तित मुख्यमंत्री ने कहा कि निचले स्तर तक चिकित्सा सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। विगत दो वर्षों में 7 उप जिला अस्पताल, 2 सैटेलाइट अस्पताल, 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित कुल 14 संस्थानों का जिला चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन तथा 7 नवीन सैटेलाइट अस्पतालों की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि 129 उप स्वास्थ्य केंद्रों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में क्रमोन्नयन किया है। करीब 8 हजार 700 चिकित्सा संस्थानों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में परिवर्तित किया गया एवं 412 शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित किए गए। उन्होंने कहा कि बालोतरा में नवीन जिला आयुर्वेद चिकित्सालय और ब्यावर, दूदू, डीग, डीडवाना-कुचामन और अनूपगढ़ में जिला आयुष चिकित्सालय शुरू किए गए हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बैठक में उपस्थित प्रतिभागियों के सुझावों को गंभीरता के साथ सुना। उन्होंने कहा कि प्राप्त सुझावों को आगामी बजट में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय अखिल अरोरा, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड, प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारी एवं आईएलबीएस हॉस्पिटल, नारायणा हृदयालय ग्रुप, महावीर विकलांग सेवा समिति, इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन, यूनीसेफ, महात्मा गांधी हॉस्पिटल, आईएमए राजस्थान, एसएमएस मेडिकल कॉलेज एवं आरयूएचएस के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

दूसरे राज्यों की पुलिस की एंट्री पर बवाल, गहलोत और जूली ने भजनलाल सरकार को कटघरे में खड़ा किया

जयपुर राजस्थान में कानून-व्यवस्था और पुलिस के सूचना तंत्र को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। गुजरात पुलिस द्वारा जोधपुर में एमडी ड्रग्स लैब पर की गई कार्रवाई के बाद यह सामने आया कि स्थानीय राजस्थान पुलिस को इस ऑपरेशन की पूर्व जानकारी तक नहीं थी। इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब स्वयं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पुलिस अधिकारियों से संवाद के दौरान इस पर सवाल उठाए। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर तीखा हमला बोला।  पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री खुद स्वीकार कर रहे हैं कि दूसरे राज्यों की पुलिस बिना सूचना के राजस्थान में कार्रवाई कर रही है। उन्होंने इसे राजस्थान पुलिस के सूचना तंत्र के पूरी तरह ध्वस्त होने का प्रमाण बताया। गहलोत ने कहा कि गुजरात और महाराष्ट्र, दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है और राजस्थान में भी भाजपा सत्ता में है, इसके बावजूद आपसी समन्वय का यह अभाव सरकार की गंभीर प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाता है। गहलोत ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री ही राज्य की पुलिस पर भरोसा नहीं जता पा रहे, तो आम जनता अपनी सुरक्षा के लिए किसके पास जाए। उन्होंने कहा कि गृह विभाग स्वयं मुख्यमंत्री के पास है, ऐसे में यह जवाबदेही से बचने का प्रयास है। पुलिस का मनोबल गिराकर सरकार अपनी नाकामी नहीं छिपा सकती। वहीं नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में दिया गया बयान राजस्थान की बदहाल कानून-व्यवस्था की स्वीकारोक्ति है। जूली ने कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या मुख्यमंत्री की नींद आज टूटी है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को खुद नहीं पता कि पुलिस महकमे में क्या चल रहा है। जूली ने चूरू में महिला कांस्टेबल द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का भी जिक्र करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।   इस पूरे मामले ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था, पुलिस समन्वय और सरकार की प्रशासनिक पकड़ को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।  

सचिन पायलट को राजस्थान भेजने की योजना, 2028 के CM फेस को लेकर क्यों शुरू हुई चर्चा?

जयपुर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस पार्टी सचिन पायलट को राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष बनाने वाली है। इस दौरान चर्चा यह भी है कि कांग्रेस साल 2028 में होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए पायलट को सीएम फेस भी बनाने वाली है। इसकी चर्चा तब शुरू हुई, जब बीते दिनों सचिन पायलट और राहुल गांधी की दिल्ली में मुलाकात हुई। मुलाकात में राहुल गांधी और सचिन पायलट ने क्या बात की? आइए समझते हैं इस मुलाकात के मायने। राहुल गांधी से क्या बोले सचिन पायलट बीते दिनों दिल्ली में राहुल गांधी और सचिन पायलट की गुप्ती मीटिंग हुई। इस दौरान सचिन पायलट ने राजस्थान वापस जाने की अपनी इच्छा जाहिर कर दी। सूत्रों के अनुसार, पायलट ने राहुल गांधी से कहा कि उन्हें अब दिल्ली की राजनीति से छुट्टी दी जाए और उनके गृह प्रदेश राजस्थान की जिम्मेदारी सौंप दी जाए। हालांकि, राहुल गांधी और कांग्रेस की तरफ से इस मामले पर अभी तक निर्णय नहीं हो पाया है। पायलट के लिए अब दोहरी चुनौती राजस्थान में कांग्रेस की राजनीति के दो बड़े चेहरे हैं। कांग्रेस की धुरी पहले सचिन पायलट और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच ही घूमती थी, लेकिन अब इसमें एक और बड़ा नाम पिछले कुछ सालों में उभरकर सामने आया है। तीसरी धुरी का नाम है गोविंद सिंह डोटासरा, जो वर्तमान में राजस्थान कांग्रेस के मुखिया हैं। सचिन पायलट और गहलोत ग्रुप पहले से ही राजस्थान में अपनी धाक जमाए हुए है, अध्यक्ष बनने के बाद डोटासरा ने भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवा दी है। ऐसे में सचिन पायलट की राजस्थान वापसी आसान नहीं है। क्योंकि अशोक गहलोत ही सचिन पायलट के लिए चुनौती हैं, और अब तीसरा मोर्चा भी उनके सामने खड़ा हो गया है। साल 2023 में हुए विधानसभा चुनावों में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच तकरार खुलकर सामने आई थी। इन चुनावों में सचिन पायलट चाहते थे कि उन्हें सीएम फेस बनाया जाए, और अशोक गहलोत खुद को सीएम फेस मानकर चल रहे थे। दोनों के बीच की तकरार का कांग्रेस को नुकसान भी हुआ। नतीजा यह रहा कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी तरह हार हुई और भाजपा ने जीतकर अपनी मुख्यमंत्री बना लिया।

विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से, 2 बच्चों की बाध्यता हटाने वाला बिल होगा पास

जयपुर  राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होने जा रहा है और राज्यपाल की मंजूरी के बाद विधानसभा सचिवालय ने बजट सत्र बुलाने की अधिसूचना जारी कर दी है। सभी विधायकों को इसकी सूचना भेजीहै। बजट सत्र की शुरुआत 28 जनवरी को राज्यपाल के अभिभाषण से होगी और यह सत्र मार्च तक चलेगा।अभिभाषण में राज्यपाल सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के बारे में बताएंगे और फरवरी के पहले सप्ताह में बजट पेश होने की संभावना है। राज्यपाल का अभिभाषण और फिर दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद कार्यवाही स्थगित होगी। इसके बाद कार्य सलाहकार समिति की बैठक होगी और इसमें बजट सत्र का कामकाज तय होगा। बजट में सरकार नए कार्यक्रमों की घोषणा करने के साथ कई नई योजनाएं शुरू करने का ऐलान करेगी। इस सत्र में सबसे अहम पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों में दो बच्चों की बाध्यता हटाने के लिए बिल लाने की तैयारी है। बजट सत्र में पंचायतीराज कानून और नगरपालिका कानून में संशोधन करने के लिए बिल लाए जाएंगे। इसके अलावा भी कई नए बिल और आ सकते हैं। विधानसभा का बजट सत्र हंगामेदार रहने की पूरी संभावना है और विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरेगा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अपने विधायक दल से मिलकर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है।  

CTH और बफर क्षेत्र निर्धारण पर विवाद, सरिस्का में 9 जनवरी को होंगी विशेष ग्राम सभाएं

अलवर सरिस्का टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) और बफर क्षेत्र के निर्धारण को लेकर जिला प्रशासन ने अहम प्रक्रिया शुरू की है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की अनुशंसाओं के अनुपालन में 9 जनवरी को सरिस्का से जुड़े ग्राम पंचायत क्षेत्रों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में जिला कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि इन ग्राम सभाओं का उद्देश्य प्रस्तावित सीमा निर्धारण पर ग्रामीणों से सुझाव, परामर्श और आपत्तियां प्राप्त करना है। कलेक्टर ने बताया कि ग्राम सभाओं में वन विभाग के अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे, जो सरिस्का टाइगर रिजर्व के प्रस्तावित नक्शों, सीटीएच और बफर क्षेत्र की सीमाओं तथा उनके प्रभावों की विस्तृत जानकारी ग्रामीणों को देंगे। यदि किसी ग्रामीण को इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति है या कोई सुझाव देना है, तो वह उसी दिन ग्राम सभा में अपनी बात दर्ज करा सकता है। जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 9 जनवरी के बाद प्राप्त होने वाले किसी भी सुझाव या आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें, ताकि वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय लोगों के हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके। वन विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार सरिस्का टाइगर रिजर्व के अंतर्गत 9,091.22 हेक्टेयर क्षेत्र को क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट और 4,753.63 हेक्टेयर क्षेत्र को बफर जोन के रूप में चिन्हित किया गया है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38 (V) के तहत इस तरह के किसी भी बदलाव से पहले संबंधित ग्राम सभाओं से परामर्श लेना अनिवार्य है। इसी कानूनी प्रावधान के तहत यह विशेष ग्राम सभाएं आयोजित की जा रही हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुरूप रहे। इस बीच सरिस्का के प्रस्तावित क्षेत्र निर्धारण को लेकर राजनीतिक विवाद भी गहराता नजर आ रहा है। राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरिस्का टाइगर रिजर्व के 4,839.07 हेक्टेयर सीटीएच क्षेत्र को बफर एरिया में बदलने के प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इस संबंध में जिला कलेक्टर अलवर को एक विस्तृत प्रतिवेदन सौंपते हुए इस पूरी प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है। जूली ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि राज्य सरकार का यह कदम 17 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट वे संवेदनशील क्षेत्र होते हैं, जिन्हें बाघों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक आधार पर पूरी तरह सुरक्षित और अक्षुण्ण रखा जाना आवश्यक है। इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का भौगोलिक या प्रशासनिक बदलाव वन्यजीव संरक्षण के मूल उद्देश्य के विपरीत है। नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आशंका जताई कि सीटीएच को बफर क्षेत्र में बदलने के पीछे का वास्तविक उद्देश्य क्षेत्र की 50 से अधिक बंद पड़ी खदानों को पुनः शुरू करना है। उन्होंने मालाखेड़ा, उमरैण और थानागाजी उपखंडों के दर्जनों गांवों और क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बदलाव से पर्यावरण, वन्यजीव और स्थानीय ग्रामीणों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल 9 जनवरी को होने वाली ग्राम सभाओं पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि इन्हीं सभाओं के जरिए सरिस्का टाइगर रिजर्व के भविष्य से जुड़े अहम निर्णयों की दिशा तय होगी।  

चोरी करने घुसा था एग्जॉस्ट फैन से, बीच में फंसा चोर; पुलिस ने किया रेस्क्यू

कोटा आपने यह कहावत तो खूब सुनी होगी कि आसमान से गिरा खजूर में अटका। राजस्थान के कोटा में हुई हालिया घटना पर यह एकदम मुफीद बैठती है। कोटा के एक घर में चोर को चोरी करना महंगा पड़ गया या कहिए चोर की गजब बेइज्जती हो गई। घुसा तो चोरी के बहाने ही लेकिन जिस जगह से घुसा वही उसके लिए मुसीबत बन गई। सूने घर को साफ करने का मंसूबा एग्जॉस्ट फैन के छेद ने पूरा नहीं होने दिया और वह उस छेद में ऐसा फंसा कि निकल ही नहीं पाया। बाद में घरवालों ने पुलिस को बुलाकर उसे इस छेद से बाहर निकाला। अब चोरी की ये अनोखी घटना सोशल मीडिया पर वायरल है।   पूरी घटना जानिए अब घटना को पूरी तफ्शील से जानते हैं। कोटा में रहने वाले सुभाष कुमार रावत ने बताया कि वह पत्नी के साथ 3 जनवरी को खाटू श्याम जी दर्शन करने के लिए गए थे और 4 जनवरी की रात को घर लौटे। जब सुभाष स्कूटी लेकर घर के अंदर जा रहे थे तभी उसकी रोशनी में रसोई के एग्जॉस्ट के छेद में एक व्यक्ति फंसा हुआ दिखाई दिया। इसके बाद उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर-शराबे की आवाज सुनकर एक चोर तो मौके से भाग गया पर उसका साथी एग्जॉस्ट में फंस गया। एक कार भी बाहर खड़ी थी जिसमें पुलिस का स्टीकर लगा हुआ था। शोर शराबा सुनकर आस-पड़ोस के लोग जाग गए और घर में घुसकर चोर को रंगे हाथों पकड़ लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में आए दिन संदिग्ध व्यक्ति घूमते हुए नजर आते हैं। इस मामले में बोरखेड़ा थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई है वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर शुरू कर दी है। पुलिस की लापरवाही पर लोगों की नाराजगी स्थानीय लोगों ने पुलिस की लापरवाही पर भी अपनी नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि कई बार इस इलाके में गश्त के लिए पुलिस से अपील की गई, लेकिन उसके बावजूद भी यहां पर पुलिस की गाड़ियां नहीं आती है। आज सतर्कता की वजह से एक घर में बड़ी चोरी होने से बच गई। चोरी की वारदातें कोटा शहर में लगातार बढ़ रही है।

एक साल में 10 लाख AI एक्सपर्ट! केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया मेगा प्लान

जयपुर भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को आम नागरिक तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राजस्थान से एक मेगा स्किलिंग अभियान की शुरुआत की, जिसका लक्ष्य मात्र एक वर्ष में देश के 10 लाख युवाओं को एआई कौशल प्रदान करना है। यह कार्यक्रम न केवल युवाओं को रोजगार योग्य बनाएगा, बल्कि छोटे व्यवसायों में उत्पादकता बढ़ाने और दैनिक जीवन में एआई के उपयोग को बढ़ावा देगा। मंत्री ने कहा कि तेजी से हो रहे 5G रोलआउट की तरह ही सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रतिभा विकास और एआई कौशल विकास का काम भी उतनी ही तेजी से होगा।   मंत्री ने एआई की तुलना बिजली से की राजस्थान क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए मंत्री वैष्णव ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोजमर्रा की जिंदगी का एक अभिन्न अंग बन गई है, ठीक उसी तरह जैसे कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर, इंटरनेट और मोबाइल फोन द्वारा संचालित पिछली तकनीकी क्रांतियां थीं। उन्होंने कहा कि एआई एक समान पैमाने के परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है, और इसकी भविष्य की भूमिका की तुलना बिजली से की, जिसने एक समय में हर घर और व्यक्ति तक पहुंचकर समाजों को नया रूप दिया था। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सर्वव्यापी होने वाली है और हर व्यक्ति, घर और इमारत तक पहुंचेगी। इसके संभावित लाभों पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि इस तकनीकी बदलाव को अपनाना चाहिए और इसे दैनिक जीवन में एकीकृत करना चाहिए। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति दृष्टिकोण के बारे में बात करते हुए मंत्री वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री का एक स्पष्ट और सुस्पष्ट दृष्टिकोण है, जो समाज के व्यापक हित के लिए एआई के उपयोग पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण का पहला मार्गदर्शक सिद्धांत एआई का लोकतंत्रीकरण है, यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक नागरिक को प्रौद्योगिकी तक पहुंच और इसके उपयोग का समान अवसर प्राप्त हो। भारत के एआई मिशन को मिल चुकी है वैश्विक मान्यता मंत्री ने कहा कि भारत के एआई मिशन को वैश्विक मान्यता मिल चुकी है और कई देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लोकतंत्रीकरण के भारत के मॉडल का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मिशन का एक प्रमुख स्तंभ किफायती कंप्यूटिंग अवसंरचना उपलब्ध कराना है। जीपीयू की उच्च लागत पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि हर किसी के लिए इतने महंगे संसाधनों का मालिक होना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि कई पश्चिमी देशों में, बड़ी-बड़ी कंपनियां 3.50 से 4 अमेरिकी डॉलर प्रति घंटे की दर से सेवाएं प्रदान करके एआई कंप्यूटिंग पर अपना दबदबा बनाए हुए हैं। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में उच्च गुणवत्ता वाली कंप्यूटिंग सुविधाओं को बहुत कम लागत पर उपलब्ध कराने का विचार प्रस्तुत किया है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र, स्टार्टअप, युवा, वैज्ञानिक और इंजीनियर वित्तीय बाधाओं के बिना विश्व स्तरीय कंप्यूटिंग संसाधनों का उपयोग कर सकें। मंत्री वैष्णव ने कहा कि एआई मिशन के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लोकतंत्रीकरण को समर्थन देने के लिए 38000 जीपीयू पहले ही उपलब्ध कराए जा चुके हैं। उन्होंने इस पहल को 'कॉमन कंप्यूट' की परिकल्पना बताया। उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के नवीनतम एआई इंडेक्स का भी हवाला दिया, जिसमें भारत को चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता में शीर्ष तीन देशों में स्थान दिया गया है। मंत्री वैष्णव के अनुसार, यह इंडेक्स एआई के विकास, तैनाती और अनुसंधान में हुई प्रगति का मूल्यांकन करता है।  

स्टार्टअप को बढ़ावा देने पर जोर, प्रदेश में नवाचार का माहौल बना रही सरकार : भजनलाल शर्मा

जयपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्तमान सदी में मानवता के लिए एक नया कोड-एक नई भाषा लिख रहा है। उन्होंने एआई को प्रदेश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण घटक बताते हुए कहा कि इसके विवेकपूर्ण उपयोग से सरकार ई-गवर्नेंस और डिजिटल समावेशन को और अधिक व्यापक एवं जन केन्द्रित बना रही है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को जयपुर के जेईसीसी में आयोजित राजस्थान रीजनल एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि एआई स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि सहित अनेक क्षेत्रों में परिवर्तन लाकर लोगों के जीवन को बेहतर बना रहा है और विकसित भारत एवं विकसित राजस्थान के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने उद्यमियों, निवेशकों और युवाओं को एआई के उभरते क्षेत्र में सहभागी बनने के लिए राजस्थान में आमंत्रित भी किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश एआई के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री का मानना है कि एआई केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि 21वीं सदी में राष्ट्रीय शक्ति और समृद्धि का आधार है। एआई देश की नीति, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और सामाजिक संरचना को बेहतर स्वरूप दे रहा है। एआई-एमएल पॉलिसी से नवाचार को बढ़ावा मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में तकनीक और स्टार्टअप के सशक्त इकोसिस्टम के निर्माण के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। राज्य सरकार द्वारा लाई गई एआई-एमएल पॉलिसी से एआई सिस्टम अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और निजता-संरक्षण के प्रति जवाबदेह बनेंगे। इस नीति से सार्वजनिक सेवा वितरण अधिक त्वरित, नागरिक-केंद्रित और पारदर्शी होगा तथा प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि एआई से जुड़े साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग और समाधान की प्रक्रिया सरल की जाएगी, प्रदेश में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होगा तथा स्कूलों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और कॉलेजों में एआई शिक्षा को प्रोत्साहन दिया जाएगा। उद्योग, स्टार्टअप और रिसर्च संस्थानों को भी विशेष प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे। 5 हजार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, राजस्थान में डेटा सेंटर की स्थापना केन्द्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा करते हुए कहा कि राजस्थान में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए उद्योग संगठनों के सहयोग से नए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके तहत राज्य में 5 हजार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, आने वाले समय में राजस्थान में डेटा सेंटर स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए शीघ्र ही आवश्यक प्रक्रियाएं प्रारंभ होंगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विशेष फोकस के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में रेलवे कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है। बीकानेर से जैसलमेर और सीमावर्ती इलाकों तक रेल नेटवर्क को मजबूत करने के कार्य प्रगति पर हैं, जिससे सुरक्षा, विकास और संपर्क में उल्लेखनीय सुधार होगा। डिजिफेस्ट स्टार्टअप्स के लिए ग्लोबल गेटवे मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिफेस्ट ने स्टार्टअप्स को निवेशकों से, विद्यार्थियों को अवसरों से और उद्योग को सरकार से जोड़ डिजिटल राजस्थान का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन स्टार्टअप्स के लिए ग्लोबल गेटवे साबित हो रहे हैं, जहां फंडिंग के साथ-साथ विश्वस्तरीय मेंटर्स का मार्गदर्शन भी मिल रहा है। एआई-एमएल, फिनटेक, एग्रीटेक, एआर-वीआर और प्रॉपटेक जैसे क्षेत्रों में विचार-विमर्श से नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं। राजस्थान में हर माह 81 हजार करोड़ रुपये के यूपीआई लेनदेन शर्मा ने कहा कि राजस्थान में 6 करोड़ 50 लाख से अधिक मोबाइल उपयोगकर्ता हैं और हर माह औसतन 81 हजार करोड़ रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन हो रहे हैं। ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग को देखते हुए साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए ऑपरेशन एंटी वायरस के माध्यम से साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि एवीजीसी-एक्सआर पॉलिसी, डेटा सेंटर नीति 2025, अटल इनोवेशन स्टूडियो, स्टार्टअप लॉन्चपैड, लीप प्रोग्राम और सेंटर फॉर एडवांस्ड स्किलिंग जैसी पहलों से प्रदेश में रोजगार और नवाचार को बढ़ावा मिल रहा है। एआई के विस्तार के साथ-साथ भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान हुए निवेश समझौतों में से बड़ी संख्या में परियोजनाएं धरातल पर उतर रही हैं। निवेश अनुकूल वातावरण, नई नीतियों, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और राजनिवेश पोर्टल के कारण राजस्थान निवेशकों के लिए शीर्ष राज्यों में शामिल हुआ है। प्रवासी राजस्थानियों के लिए बनाई गई नीति और विभाग से उन्हें प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिल रहा है। एआई जीवन का अभिन्न अंग बनेगा, जन-जन तक पहुंचेगी कंप्यूट सुविधा – केन्द्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव केन्द्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव कार्यक्रम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले समय में मानव जीवन का अभिन्न अंग बनेगा और हर व्यक्ति, हर घर तथा हर उद्यम तक इसकी पहुंच होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में एआई को समावेशी, सुलभ और जनोपयोगी बनाने की दिशा में ठोस और दूरदर्शी कदम उठाए जा रहे हैं।  

जयपुर मैराथन की तैयारियां तेज, कैलेंडर जारी; ड्रीम रन में उमड़ेगा एक लाख का सैलाब

जयपुर जयपुर गुलाबी नगर एक बार फिर फिटनेस, स्वास्थ्य और सामूहिक ऊर्जा के उत्सव के लिए तैयार है। जयपुर मैराथन 2026 के 17वें संस्करण का आधिकारिक इवेंट कैलेंडर लॉन्च कर दिया गया है। इस आयोजन को राजस्थान पर्यटन विभाग, राजस्थान खेल परिषद और राजस्थान युवा बोर्ड का सहयोग प्राप्त है। कैलेंडर लॉन्च कार्यक्रम में मैराथन से पहले आयोजित होने वाली एक माह की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी साझा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री अरुण चतुर्वेदी रहे। उनके साथ संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पं. सुरेश मिश्रा, एयू जयपुर मैराथन के सीईओ मुकेश मिश्रा, एयू स्मॉल फाइनेंस से धर्मेंद्र सिंह शेखावत सहित आयोजन से जुड़े कई गणमान्य अतिथि मंच पर उपस्थित थे। इस अवसर पर अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि जयपुर मैराथन अब ऐसा आयोजन बन चुका है, जिसका शहर हर वर्ष बेसब्री से इंतजार करता है। यह केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ऐसा मंच है जो पूरे शहर को स्वास्थ्य और वेलनेस के प्रति जागरूक करता है। जयपुर मैराथन ने अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है। चार अलग-अलग जोन में बांटा गया शहर संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पं. सुरेश मिश्रा ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य मैराथन को जयपुर की जीवनशैली का हिस्सा बनाना है, ताकि फिटनेस आदत बने और स्वास्थ्य को प्राथमिकता मिले। प्रतिभागियों की बेहतर तैयारी के लिए जयपुर रनर्स क्लब द्वारा शहर को चार अलग-अलग ज़ोन में विभाजित किया गया है, जहां प्रशिक्षकों की व्यवस्था की गई है। हर वर्ग के लोगों को एक मंच पर जोड़ रही मैराथन वहीं एयू जयपुर मैराथन के सीईओ मुकेश मिश्रा ने कहा कि जयपुर मैराथन 2026 अब केवल एक दिन की दौड़ तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह एक समग्र फिटनेस मूवमेंट का रूप ले चुकी है, जो युवाओं, कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स, रनर्स और आम नागरिकों को एक मंच पर जोड़ रही है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विभिन्न श्रेणियों में प्रतिभागियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। खासतौर पर ड्रीम रन में लगभग एक लाख लोगों की ऐतिहासिक भागीदारी का अनुमान लगाया जा रहा है।