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Xiaomi Pad 8 Review,144Hz डिस्प्ले और दमदार परफॉर्मेंस, क्या यह टैबलेट बन पाएगा आपका मिनी लैपटॉप?

Xiaomi ने एंड्रॉयड टैबलेट मार्केट में पिछले कुछ सालों में काफी तेज़ी से अपनी पकड़ मजबूत की है. हाल ही में कंपनी ने Xiaomi Pad 8 लॉन्च किया है. मैं इस टैबलेट को पिछले कुछ समय से लगातार इस्तेमाल कर रहा हूं, जिसमें डेली वर्क, कंटेंट कंजम्प्शन, गेमिंग और प्रोडक्टिविटी शामिल है. इस रिव्यू में आपको इस टैबलेट के तमाम ऐस्पेक्ट्स पर बात करेंगे. बताएंगे कि ये खरीदने लायक है भी या नहीं. Xiaomi Pad 8: डिजाइन और बिल्ड क्वालिटी Xiaomi Pad 8 को हाथ में लेते ही सबसे पहले इसका प्रीमियम लुक और फील ध्यान खींचता है. बिल्ड क्वॉलिटी सॉलिड है. कंपनी ने इसमें एल्युमिनियम अलॉय यूनिबॉडी डिजाइन दिया है, जो इसे मजबूत और सॉलिड बनाता है. बैक पैनल स्मूद है और मैट फिनिश के साथ आता है, जिससे फिंगरप्रिंट्स कम दिखाई देते हैं. फ्रेम फ्लैट है, जो आजकल के मॉडर्न डिजाइन ट्रेंड को फॉलो करता है, और इसे पकड़ना भी काफी आरामदायक लगता है. इसमें कीबोर्ड अटैच करना काफी आसान है, क्योंकि मैग्नेटिक सिस्टम है. ट्रैकपैड का भी फीडबैक इस सेग्मेंट के हिसाब से अच्छा है. यह टैबलेट काफी पतला है और वजन भी बैलेंस्ड रखा गया है, जिससे लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर हाथों में ज्यादा थकान महसूस नहीं होती. चाहे आप इसे सोफे पर बैठकर इस्तेमाल करें या बेड पर लेटकर, इसकी ग्रिप और फील दोनों ही अच्छे लगते हैं. कैमरा मॉड्यूल पीछे की तरफ थोड़ा उभरा हुआ है, जिसमें सिंगल कैमरा सेटअप दिया गया है, लेकिन डिजाइन के हिसाब से यह क्लीन और मिनिमल लगता है. पावर बटन और वॉल्यूम बटन की प्लेसमेंट सही जगह पर है और इनका फीडबैक भी अच्छा है. स्पीकर्स चारों तरफ दिए गए हैं, जो स्टीरियो आउटपुट के साथ आते हैं. Xiaomi Pad 8: डिस्प्ले Xiaomi Pad 8 में लगभग 11 इंच का बड़ा IPS LCD पैनल दिया गया है, जिसका रिजॉल्यूशन 3.2K के आसपास है और रिफ्रेश रेट 144Hz तक जाता है. इसका मतलब यह है कि स्क्रीन काफी शार्प और स्मूद दोनों लगती है. ऑन करते ही स्क्रीन भी आपको प्रीमियम महसूस होगी. रियल लाइफ इस्तेमाल में चाहे आप वीडियो देख रहे हों, वेब ब्राउज़िंग कर रहे हों या गेम खेल रहे हों, स्क्रीन हर जगह अच्छा परफॉर्म करती है. कलर्स वाइब्रेंट हैं लेकिन ओवरसैचुरेटेड नहीं लगते, और ब्राइटनेस भी इतनी है कि इंडोर के साथ-साथ आउटडोर में भी स्क्रीन पढ़ने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती. Dolby Vision और HDR सपोर्ट की वजह से OTT प्लेटफॉर्म पर कंटेंट देखना एक अलग ही अनुभव देता है. लंबे समय तक वीडियो देखने के बाद भी आंखों पर ज्यादा जोर नहीं पड़ता. Xiaomi Pad 8: परफॉर्मेंस परफॉर्मेंस के मामले में Xiaomi Pad 8 मिक्स्ड बैग की तरह रहा. इसमें Qualcomm Snapdragon 8 सीरीज का चिपसेट दिया गया है, जो फ्लैगशिप लेवल का माना जाता है. साथ में 8GB या 12GB रैम और तेज़ UFS स्टोरेज मिलता है, जिससे ऐप्स जल्दी खुलते हैं और मल्टीटास्किंग स्मूद रहती है. मेरे इस्तेमाल में, मैंने इस टैबलेट पर हैवी गेमिंग से लेकर मल्टीपल ऐप्स के बीच स्विच करना सब कुछ किया, और ज्यादातर समय यह बिना किसी लैग के काम करता रहा. हाई ग्राफिक्स गेम्स भी आसानी से चल जाते हैं और फ्रेम ड्रॉप बहुत कम देखने को मिलता है. लंबे समय तक मल्टीटास्किंग और गेमिंग में ये थोड़ा गर्म होने लगता है. हीटिंग का मुद्दा भी बहुत बड़ा नहीं लगा, हालांकि लंबे गेमिंग सेशन के दौरान हल्की गर्माहट जरूर महसूस होती है, लेकिन यह नॉर्मल है और परफॉर्मेंस पर ज्यादा असर नहीं डालती. Xiaomi Pad 8: कैमरा टैबलेट में कैमरे का यूज लिमिटेड होता है. वीडियो कॉलिंग सबसे बड़ा यूजकेस है. क्योंकि मोबाइल की तरह इसे आप हर जगह ले जा कर फोटोज या वीडियोज नहीमं बना सकते हैं. इसलिए किसी टैबलेट में कैमरा उतना बड़ा फोकस नहीं होता. हालांकि Xiaomi ने यहां भी ठीक-ठाक काम किया है. पीछे की तरफ 13 मेगापिक्सल का कैमरा दिया गया है, जो अच्छी लाइट में डिसेंट फोटो ले लेता है. डॉक्यूमेंट स्कैन करना हो या कभी-कभी फोटो क्लिक करनी हो, यह काम अच्छे से कर देता है. वीडियोज भी डिसेंट बन जाते हैं. फ्रंट में 8 मेगापिक्सल का कैमरा है, जो वीडियो कॉलिंग और ऑनलाइन मीटिंग्स के लिए बेहतरीन है. खास बात यह है कि कैमरा की पोजिशन ऐसी है कि वीडियो कॉल के दौरान फ्रेमिंग सही रहती है, जो वर्क फ्रॉम होम या ऑनलाइन क्लासेस के लिए जरूरी है. Xiaomi Pad 8: सॉफ्टवेयर सॉफ्टवेयर की बात करें तो Xiaomi Pad 8 में एंड्रॉयड बेस्ड HyperOS दिया गया है, जिसे खास तौर पर बड़े स्क्रीन के लिए ऑप्टिमाइज किया गया है. मल्टीटास्किंग फीचर्स जैसे स्प्लिट स्क्रीन और फ्लोटिंग विंडो काफी काम के हैं. मैंने इसे डेली वर्क प्रोडक्टिविटी के लिए यूज किया, जैसे डॉक्यूमेंट पढ़ना, नोट्स बनाना और वेब ब्राउज़िंग, और यहां इसका एक्सपीरिएंस काफी स्मूद रहा. हालांकि, कुछ जगहों पर अभी भी ऐप ऑप्टिमाइजेशन की कमी महसूस होती है, जो लगभग सभी एंड्रॉयड टैबलेट्स में देखने को मिलती है. प्री लोडेड ऐप्स कई बार मुश्किल का सबब बनते हैं. स्टायलस और कीबोर्ड सपोर्ट इसे एक मिनी लैपटॉप जैसा बना देते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से लैपटॉप रिप्लेसमेंट अभी भी नहीं बन पाता. Xiaomi Pad 8: बैटरी बैटरी के मामले में भी Xiaomi Pad 8 निराश नहीं करता. इसमें लगभग 9200mAh के बीच की बड़ी बैटरी दी गई है, जो आराम से दो दिन तक का बैकअप दे देती है. 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट इसे जल्दी चार्ज कर देता है. अगर आप इसे नॉर्मल इस्तेमाल जैसे वीडियो देखना, ब्राउज़िंग और हल्का काम करने के लिए इस्तेमाल करते हैं, तो दो दिन चलेगा, वर्ना 1.5 दिन. iaomi Pad 8: बॉटम लाइन कुछ दिनों के इस्तेमाल के बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि Xiaomi Pad 8 एक वेल बैलेंस्ड टैबलेट है. इसका डिस्प्ले शानदार है, परफॉर्मेंस दमदार है और डिजाइन प्रीमियम फील देता है. यह कंटेंट कंजम्प्शन के लिए बेहतरीन है और प्रोडक्टिविटी भी अच्छे से संभाल लेता है. लेकिन अगर आप इसे पूरी तरह से लैपटॉप के ऑल्टरनेटिव के के रूप में देख रहे हैं, तो अभी इसमें थोड़ी कमी है, खासकर सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन के मामले में. फिर भी, अपने प्राइस सेगमेंट में यह … Read more

जिम में घंटों पसीना बहाने के बाद भी नहीं घट रहा वजन? कहीं आप भी ‘फिटनेस प्लेटो’ के शिकार तो नहीं!

बढ़ती बीमारियों के बीच लोग अपनी सेहत का खास ख्याल रखना शुरू कर दिया है और सही लाइफस्टाइल और एक्सरसाइज को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया है. फिट होने के लिए लोग जिम जाकर घंटों एक्सरसाइज भी करते हैं और काफी वेट लॉस भी कर लेते हैं. शुरुआत में एक्सरसाइज करने पर तेजी से रिजल्ट मिलते हैं, लेकिन कुछ समय बाद वही मेहनत करने के बावजूद बदलाव रुक जाता है. ऐसा होता है कि पसीना पहले जितना ही बहता है, मेहनत भी कम नहीं होती, फिर भी वजन कम नहीं होता या बॉडी टोन नहीं होती. यह स्थिति अक्सर कंफ्यूजन पैदा करती है, लेकिन असल में यह शरीर की एक नॉर्मल प्रोसेस है. फिटनेस प्लेटो क्या होता है? हमारा शरीर बहुत जल्दी चीजों को अपनाने की शक्ति रखता है. जब आप पहली बार वर्कआउट शुरू करते हैं, तो हर मूवमेंट नया होता है. मसल्स पर प्रेशर पड़ता है, वे टूटते हैं और फिर मजबूत बनते हैं. लेकिन जब आप लंबे समय तक एक ही तरह की एक्सरसाइज करते रहते हैं तो शरीर उसे सीख जाता है और कम एनर्जी में वही काम करने लगता है. इसी को फिटनेस प्लेटो कहा जाता है. समय के साथ मसल्स ज्यादा एफिशिएंट हो जाती हैं यानी पहले जो एक्सरसाइज आपको चुनौती देती थी,अब वही शरीर के लिए आसान हो जाती है. इससे कम मसल फाइबर एक्टिव होते हैं और कैलोरी बर्न भी कम होती है. बाहर से देखने पर लगता है कि आप वही मेहनत कर रहे हैं, लेकिन अंदर से असर कम हो जाता है. उम्र का होता है अहम रोल हर इंसान के शरीर में 30 साल के बाद हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं, टेस्टोस्टेरोन और ग्रोथ हार्मोन कम होने लगते हैं. जबकि स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) बढ़ सकता है, इससे मसल्स बनना धीमा हो जाता है और रिकवरी में ज्यादा समय लगता है. यानी पहले जितनी मेहनत से जो रिजल्ट मिलता था, अब उससे कम मिलता है. क्यों रूक जाती है प्रोग्रेस? एक और बड़ी वजह है कंफर्ट जोन में फंसे रहना. कई लोग महीनों तक एक ही वजन, एक ही स्पीड और एक ही रेप्स करते रहते हैं. जब शरीर को नई चुनौती नहीं मिलती, तो उसे बदलने की जरूरत भी महसूस नहीं होती. यही कारण है कि प्रोग्रेस रुक जाती है. यह चीजें डालती हैं असर रिकवरी भी उतनी ही जरूरी है जितनी एक्सरसाइज. नींद की कमी, स्ट्रेस और डिहाइड्रेशन सीधे आपके परफॉर्मेंस को इफेक्ट करते हैं. अगर शरीर को पूरा आराम नहीं मिलता, तो मसल्स सही तरीके से रिपेयर नहीं हो पाती है. न्यूट्रिशन की कमी शरीर में न्यूट्रिशन की कमी भी एक बड़ा कारण हो सकती है, कम प्रोटीन लेने से मसल्स नहीं बनतीं, और विटामिन D, B12 या आयरन की कमी से थकान बनी रहती है. कई बार रिपोर्ट्स नॉर्मल होने के बावजूद हल्की कमी भी असर डालती है. इस स्थिति से बाहर कैसे निकलें? सबसे पहला तरीका है प्रोग्रेसिव ओवरलोड अपनाना, जिसका मतलब है धीरे-धीरे वजन बढ़ाना, रेप्स बढ़ाना या एक्सरसाइज की तीव्रता बढ़ाना. हर 4 से 6 हफ्ते में अपनी वर्कआउट रूटीन बदलें. नई एक्सरसाइज ट्राई करें ताकि शरीर को नई चुनौती मिले. इन बातों का भी रखें ध्यान     प्रोटीन की मात्रा बढ़ाएं     हफ्ते में कम से कम एक दिन पूरा आराम करें     पर्याप्त नींद लें (7-8 घंटे)     पानी खूब पिएं     स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को प्रायोरिटी दें  

महंगे कॉस्मेटिक्स को कहें अलविदा, घर पर इन 4 चीजों से बनाएं शुद्ध विटामिन C सीरम

आज के समय में विटामिन C सीरम स्किन केयर का अहम हिस्सा बन गया है. यह चेहरे के दाग-धब्बों को कम कर स्किन को ग्लोइंग और हेल्दी बनाए रखने में मदद करता है. वैसे तो बाजार में कई तरह के विटामिन C सीरम आसानी से मिल जाते हैं लेकिन वे अक्सर काफी महंगे होते हैं. ऐसे में आप चाहें तो इसे घर पर ही आसानी से नेचुरल तरीके से बना सकते हैं. आइए जानते हैं कि घर पर विटामिन C सीरम बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है, इसे कैसे बनाया जाता है और इसका सही तरीके से कैसे इस्तेमाल कैसे किया जाता है. विटामिन C सीरम बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है? 1 चम्मच संतरा पाउडर 2 बड़ा चम्मच गुलाब जल 2 चम्मच एलोवेरा जेल आधा कप उबला पानी डार्क ग्लास की बोतल (सीरम सूरज की रोशनी से सेफ रहेगा) घर पर विटामिन C सीरम कैसे बनाएं?     विटामिन C सीरम बनाने के लिए संतरे के पाउडर को एक कटोरे में लें और इसमें 2 चम्मच गुलाब जल और 2 चम्मच एलोवेरा जेल अच्छे से मिलाएं.     अब इसमें उबले पानी को ठंडा करके डालें. हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि पानी अधिक न हो.     अब आप इस सीरम को एयरटाइट बोतल में भरकर फ्रिज में रख दें.     अब आपका केमिकल फ्रि विटामिन C सीरम तैयार है जिसे स्किन को अच्छे से साफ करने के बाद लगना है.     आप इस सीरम को  7-10 दिन तक उपयोग कर सकते हैं. संतरे का पाउडर आप बाजार से खरीद सकते हैं या चाहें तो इसे घर पर भी आसानी से बना सकते हैं. इसके लिए 2 संतरे के छिलके  को अच्छी तरह से धूप में सुखा लें. जब ये पूरी तरह सूख जाएं तो इन्हें मिक्सी में डालकर बारीक पीस लें और पाउडर तैयार कर लें.  

आयुष मंत्रालय की सलाह: पीरियड्स के दर्द और तनाव से राहत के लिए करें ये योगासन

नई दिल्ली   पीरियड्स के दौरान दर्द, थकान, मूड स्विंग्स और अनियमित चक्र जैसी परेशानियां कई महिलाओं को प्रभावित करती हैं। ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट कुछ विशेष योगासन को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग इन समस्याओं को प्राकृतिक तरीके से कम करने में बहुत मददगार साबित हो सकता है। नियमित योग अभ्यास से मासिक धर्म चक्र सही रहता है, दर्द कम होता है और मानसिक तनाव भी घटता है। साथ ही मंत्रालय ने मासिक धर्म के दौरान सेहत सुधारने के लिए कुछ आसान और प्रभावी योगासनों को अपनाने की सलाह महिलाओं को दी है। ये आसान आसन घर पर भी किए जा सकते हैं और पीरियड्स के दौरान होने वाली असुविधाओं को काफी हद तक कम करने में प्रभावी भी हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, इन आसनों को नियमित रूप से करने से न सिर्फ मासिक धर्म संबंधी शारीरिक समस्याएं कम होती हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। योग अभ्यास के साथ माइंडफुलनेस रखना भी जरूरी है। हालांकि पीरियड्स के दौरान अगर दर्द बहुत ज्यादा हो तो डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें। स्वस्थ आहार, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद के साथ योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। बेहतर मासिक धर्म स्वास्थ्य के लिए सुप्त बद्ध कोणासन करें, यह आसन पेल्विक क्षेत्र को खोलता है, रक्त संचार बढ़ाता है और पेट व कमर के दर्द को कम करता है। पश्चिमोत्तानासन यह आसन पीठ और पैरों की मांसपेशियों को खींचता है, जिससे मासिक धर्म संबंधी ऐंठन और दर्द में राहत मिलती है। यह तनाव भी कम करता है। वहीं, वक्रासन रीढ़ की हड्डी को मोड़ने वाला यह आसन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और मासिक धर्म की अनियमितता को दूर करने में मदद करता है। बालासन या बच्चे की मुद्रा कहलाने वाला यह आसन शरीर को गहरी छूट देता है। पीरियड्स के दौरान होने वाली थकान और मूड स्विंग्स को शांत करता है। सेतु बंधासन, जिसे पुल मुद्रा भी कहते हैं, आसन कमर और पेल्विक क्षेत्र को मजबूत बनाता है व हार्मोनल बैलेंस बनाए रखने में सहायक है। साथ ही विपरीत करणी भी राहत देता है। दीवार के सहारे पैर ऊपर करके लेटने वाला यह आसन रक्त प्रवाह को सुधारता है और पैरों में सूजन तथा थकान को कम करता है।

Suzuki Burgman Street का नया अवतार भारत में लॉन्च, ₹1.02 लाख की शुरुआती कीमत में मिलेंगे हाई-टेक फीचर्स

सुजुकी मोटरसाइकिल इंडिया ने अपनी पसंदीदा 125cc स्कूटर लाइनअप में अब नया ट्विस्ट देते हुए Suzuki Burgman Street का दूसरा जेनरेशन लॉन्च हो चुका है. नया वर्जन न सिर्फ डिजाइन में और भी स्टाइलिश दिखता है, बल्कि इसमें कम्फर्ट, फीचर्स और परफॉर्मेंस भी बेहतर कर दी गई है. Suzuki ने इंडिया में नया Burgman Street लॉन्च कर दिया है. इसके Ride Connect वेरिएंट की कीमत ₹1.02 लाख (एक्स-शोरूम, दिल्ली) और TFT वेरिएंट की कीमत ₹1.13 लाख रखी गई है. लेकिन असली बात ये नहीं है कि इसमें नया इंजन या प्लेटफॉर्म आया है. Suzuki ने जो किया है, वो है इस पॉपुलर स्कूटर को और भी बेहतर बनाना. मतलब, ज्यादा फीचर्स, बेहतर कम्फर्ट और और भी ज्यादा कंवीनियंस अब आपको मिलेगा. आइए अब देखते हैं इस स्कूटर में क्या खास देखने को मिलता है. डिजाइन और परफॉरमेंस   Suzuki Burgman Street अब भी वही भरोसेमंद 124cc का एयर-कूल्ड इंजन इस्तेमाल करता है, जो 8.31 hp की पावर और 10.2 Nm का टॉर्क देता है. Suzuki का SEP प्लेटफॉर्म रोजमर्रा की राइडिंग में स्मूद और एफिशिएंट परफॉर्मेंस के लिए जाना जाता है. लेकिन असली बदलाव है राइडिंग के फील में. हल्का फ्रेम, ट्यून किए गए सस्पेंशन और लंबा व्हीलबेस शहरी सड़क पर बेहतर स्टेबिलिटी और हैंडलिंग देने के लिए डिजाइन किए गए हैं. लुक की बात करें तो इसमें थोड़े अपडेट्स किए गए हैं. LED लाइटिंग, स्मोक्ड विंडस्क्रीन और कुल मिलाकर एक प्रीमियम फिनिश इसे और खास बनाती है. Burgman Street के फीचर्स इस अपडेट के साथ Burgman ने स्मार्ट फीचर्स पर पूरा ध्यान दिया है. अब इसमें बड़ा 24.6-लीटर का अंडरसीट स्टोरेज मिलता है, साथ ही फ्रंट में स्टोरेज पॉकेट, डुअल यूटिलिटी हुक और USB चार्जिंग पोर्ट भी हैं. फ्यूलिंग को अब आसान बनाने के लिए टेल-माउंटेड फ्यूल लिड भी जोड़ा गया है. सबसे खास बात है Ride Connect TFT Edition, जिसमें 4.2-इंच का कलर TFT डिस्प्ले और कीलेस सिस्टम है. ये फीचर्स Burgman को 125cc सेगमेंट में एक प्रीमियम स्कूटर की तरह और आगे ले जाते हैं. साइड-स्टैंड इंटरलॉक, कम्बाइंड ब्रेकिंग सिस्टम और वॉटरप्रूफ स्विच जैसे फीचर्स अभी भी मौजूद हैं.

आईफोन लवर्स के लिए बड़ी अपडेट, iPhone 18 Pro मॉडल्स में दिखेंगे नए शेड्स पर गायब रहेगा क्लासिक ब्लैक

 ऐप्पल इस बार भी अपने प्रो मॉडल्स में ब्लैक कलर ऑप्शन नहीं देगी. iPhone 17 Pro मॉडल्स के साथ ऐप्पल ने इस ट्रेंड की शुरुआत की थी और यह इस साल भी जारी रहेगा. iPhone 18 Pro मॉडल्स इस मामले में निराश कर सकते हैं  ऐप्पल इस साल सितंबर में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च करेगी. इन मॉडल्स में तगड़ी अपग्रेड मिलने की उम्मीद की जा रही है, लेकिन एक मामले में ग्राहकों को निराशा झेलनी पड़ सकती है. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, iPhone 18 Pro मॉडल्स में भी पिछले साल लॉन्च हुए iPhone 17 Pro मॉडल्स वाली कहानी रिपीट होगी. दरअसल, ऐप्पल इस बार भी अपने प्रो मॉडल्स को ब्लैक कलर ऑप्शन में लॉन्च नहीं करेगी. ऐसे में प्रो मॉडल्स में ब्लैक कलर ऑप्शन का इंतजार कर रहे ग्राहकों के हाथ निराशा लगना तय है. किन कलर ऑप्शंस में आएंगे iPhone 18 Pro मॉडल्स? अब तक सामने आई लीक्स के मुताबिक, ऐप्पल अपकमिंग सीरीज के मॉडल के लिए डीप रेड फिनिश टेस्ट कर रही है. यह रेड वाइन जैसी शेड हो सकती है, जो iPhone 17 Pro के कॉस्मिक ऑरेंज कलर की तरह अलग ही नजर आएगा. इसके अलावा कंपनी ब्राउन और पर्पल कलर ऑप्शन में भी नए आईफोन उतारने की प्लानिंग कर रही है. कुल मिलाकर यह साफ हो गया है कि iPhone 18 Pro मॉडल्स को ब्लैक कलर में नहीं उतारा जाएगा. पिछले साल कंपनी ने किया था यह बदलाव पिछले साल iPhone 17 Pro मॉडल्स के मामले में कंपनी ने बड़ा बदलाव किया था. पहली बार ऐसा हुआ था, जब कंपनी के हाई-एंड आईफोन को ब्लैक या डार्क ग्रे कलर ऑप्शन में नहीं लाया गया था. इस बार भी ऐप्पल इसी पैटर्न को रिपीट कर रही है. iPhone 17 Pro मॉडल्स को कॉस्मिक ऑरेंज कलर दिया गया, जो सुपरहिट हुआ. iPhone 18 Pro मॉडल्स में मिल सकती हैं ये अपग्रेड्स iPhone 18 Pro और 18 Pro Max में ऐप्पल 2nm प्रोसेस पर बना नया प्रोसेसर, अंडर-डिस्प्ले फेसआईडी, वेरिएबल अपर्चर के साथ मेन कैमरा और प्रो मैक्स मॉडल में अपनी अब तक की सबसे बैटरी समेत कई बड़ी अपग्रेड दे सकती है. इनमें डायनामिक आईलैंड का साइज भी छोटा होगा. इसके लिए फेसआईडी के कुछ कंपोनेंट को डिस्प्ले के नीचे शिफ्ट किया जाएगा. फोल्डेबल आईफोन को दिया जा सकता है ब्लैक कलर ऑप्शन ऐप्पल इस साल सितंबर में iPhone 18 Pro मॉडल्स के साथ अपना पहला फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करेगी. ऐप्पल को कवर करने वाले ब्लूमबर्ग के पत्रकार मार्क गुरमैन का मानना है कि फोल्डेबल आईफोन को ब्राइट कलर ऑप्शन नहीं दिया जाएगा और कंपनी इसे ग्रे या ब्लैक और सिल्वर या व्हाइट कलर में लॉन्च कर सकती है.

हाथों में बार-बार झुनझुनी और सुन्नपन को न करें नजरअंदाज, यह शरीर में छिपी इन बीमारियों का हो सकता है संकेत

क्या आपके हाथों में बार-बार झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होता है? कई लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह शरीर का एक संकेत भी हो सकता है, जिसे समझना जरूरी है.  अक्सर यह समस्या तब महसूस होती है जब हम गलत पोजीशन में सो जाते हैं या लंबे समय तक एक ही स्थिति में हाथ रखते हैं. ऐसे में नसों पर दबाव पड़ता है या खून का प्रवाह कुछ समय के लिए कम हो जाता है, जिससे झुनझुनी होने लगती है. कब होती है दिक्कत? लेकिन अगर यह परेशानी बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो इसके पीछे कोई खास कारण भी हो सकता है. theheartysoul की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे आम वजहों में से एक है कार्पल टनल सिंड्रोम, जिसमें कलाई की नस दब जाती है और अंगूठे, उंगलियों में झुनझुनी या दर्द होने लगता है. कभी-कभी समस्या कलाई में नहीं, बल्कि कोहनी या गर्दन से भी जुड़ी हो सकती है. नसों में कहीं भी दबाव आने से हाथ तक इसका असर पहुंच सकता है, जिससे झुनझुनी और कमजोरी महसूस होती है. ब्लड सर्कुलेशन और डायबिटीड भी कारण खराब ब्लड सर्कुलेशन भी इसका एक कारण हो सकता है.  ठंड में या अचानक तापमान बदलने पर उंगलियां सुन्न पड़ सकती हैं और रंग भी बदल सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके अलावा, डायबिटीज जैसी बीमारियां भी नसों को प्रभावित कर सकती हैं. जब नसें कमजोर होने लगती हैं, तो हाथ-पैरों में झुनझुनी, जलन या सुन्नपन महसूस होने लगता है. विटामिन B12 की कमी विटामिन B12 की कमी भी एक अहम कारण है, जो धीरे-धीरे नसों को नुकसान पहुंचा सकती है. कई बार लोग थकान या कमजोरी को नजरअंदाज करते रहते हैं, लेकिन यह संकेत हो सकता है कि शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी है. कुछ मामलों में थायरॉयड की समस्या भी हाथों में झुनझुनी का कारण बन सकती है. शरीर का मेटाबॉलिज्म बिगड़ने से नसों पर असर पड़ता है और यह समस्या बढ़ सकती है. ये भी होता है कारण कंधे और गर्दन के बीच नसों या ब्लड वेसल्स पर दबाव पड़ने से भी हाथों में झुनझुनी हो सकती है. खासतौर पर जब हाथ लंबे समय तक ऊपर रखा जाए या भारी वजन उठाया जाए.  अगर झुनझुनी के साथ कमजोरी, चीजें गिरना, या दर्द बढ़ने लगे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह संकेत हो सकता है कि नसों पर लगातार दबाव पड़ रहा है या कोई गंभीर समस्या विकसित हो रही है. अचानक एक तरफ हाथ सुन्न हो जाना, बोलने में दिक्कत या चक्कर आना जैसी स्थिति स्ट्रोक का संकेत भी हो सकती है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.

LPG की किल्लत में इलेक्ट्रिक चूल्हा है तगड़ा विकल्प, जानें 1 घंटे इस्तेमाल करने पर कितना आएगा बिजली बिल

 LPG सिलेंडर की कमी के बीच अब लोग खाना बनाने के लिए अलग-अलग ऑप्शन तलाश रहे हैं. कई लोगों ने इंडक्शन कुकटॉप खरीद लिए हैं तो कुछ इंफ्रारेड चूल्हों से काम चला रहे हैं. गैस स्टोव का एक सस्ता ऑप्शन इलेक्ट्रिक चूल्हा भी है. यह एक इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर होता है, जो बिजली की मदद से चलता है. इसकी कीमत भी एकदम सस्ती होती है और इससे करंट आने का भी डर नहीं रहता. आज हम आपको बताएंगे कि यह काम कैसे करता है और एक घंटे तक यूज करने पर कितनी बिजली की खपत करता है. कोयले की मदद से काम करता है इलेक्ट्रिक चूल्हा इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर यानी बिजली की मदद से कोयले को जलाकर काम करने वाला चूल्हा. यह एक तरह का इलेक्ट्रिक स्टोव होता है, जो कोयले को गर्म करने के लिए बनाया गया है. यह बिजली से कोयले को गर्म करता है. कोयला गर्म होने पर यह हीट जनरेट करने लगता है, जिससे चाय बनाने से लेकर खाना तक पकाया जा सकता है. 1 घंटे में कितनी बिजली की खपत करेगा इलेक्ट्रिक चूल्हा? इलेक्ट्रिक चूल्हे की बिजली खपत उसके बर्नर पर निर्भर करती है. मोटे तौर पर यह अंदाजा लगाया जाता है कि मीडियम से बड़े बर्नर वाले चूल्हे लगातार एक घंटे तक चलने पर एक यूनिट बिजली की खपत करते हैं. अगर ज्यादा बड़ा बर्नर होगा तो उसकी बिजली खपत भी बढ़ जाएगी. ऐसे में अगर आप एक यूनिट के 8 रुपये दे रहे हैं तो यह एक घंटे में 8 रुपये की बिजली की खपत करेगा. इन बातों का ध्यान रखना भी जरूरी इलेक्ट्रिक चूल्हे की बिजली की खपत का हिसाब देखते समय यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि बहुत ही कम मौकों पर ये लगातार एक घंटे तक चलते हैं. आमतौर पर 5-7 मिनट में कोयला गर्म हो जाता है, जिसके बाद चूल्हे को बिजली की जरूरत नहीं रहती. इसी तरह हीट सेटिंग को कम कर भी बिजली की बचत की जा सकती है. इस तरह देखा जाए तो इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर पर खाना बनाना काफी सस्ता होता है. कम लागत के अलावा और भी हैं इलेक्ट्रिक चूल्हे के फायदे इलेक्ट्रिक चूल्हे पर इंडक्शन की तरह अलग से बर्तनों की जरूरत नहीं पड़ती. इस पर हर प्रकार के बर्तनों को यूज किया जा सकता है. इसे यूज करते समय आग की लपटें नहीं निकलती तो इसे यूज करना एकदम आसान है. कोयले का यूज होने के बावजूद इससे धुआं नहीं निकलता और यह खाना भी जल्दी पका देता है. हल्का होने के कारण इसे कहीं भी ले जाना आसान है.

पेट के मोटापे की समस्या: भारत में 10 में से 6 महिलाएं शिकार, कमर के साइज से जानें खतरा

भोपाल  भारत में 30 से 49 साल की हर दस में पांच-छह महिलाओं को पेट की चर्बी की समस्या है. पुरुषों से कहीं ज्यादा महिलाएं इससे जूझ रही हैं. डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम जर्नल में छपी स्टडी के मुताबिक, यह ट्रेंड टीनएजर्स और युवा लड़कियों में भी तेजी से बढ़ रहा है. अर्बन लाइफस्टाइल, ज्यादा कमाई और नॉन-वेज डाइट इसका बड़ा कारण. BMI से बेहतर कमर नापना जरूरी, क्योंकि एशियन इंडियंस में बॉडी फैट ज्यादा होता है. भारत में मोटापे की परिभाषा बदल रही है क्योंकि एक्सपर्ट अब सिर्फ वेट मशीन पर दिखने वाले वजन से ही लोगों को ओवरवेट या मोटापे का शिकार नहीं मान रहे हैं, बल्कि वे अब कमर के बढ़ते साइज से भी मोटापे का पता लगा रहा हैं।  डायबिटीज एंड मेटाबॉलिक सिंड्रोम जर्नल में पब्लिश हुई स्टडी के मुताबिक, भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाएं 'एब्डोमिनल ओबेसिटी' यानी पेट के मोटापे का ज्यादा शिकार हो रही हैं. स्थिति इतनी गंभीर है कि 30 से 49 साल की उम्र वाली 10 में से करीब 6 महिलाएं इस समस्या से घिरी हुई हैं।  एक्सपर्ट्स इसे एक मेटाबॉलिक इमरजेंसी मान रहे हैं।  क्या कहती है रिसर्च? आमतौर पर हम मोटापे को बॉडी मास इंडेक्स (BMI) से नापते हैं, लेकिन यह स्टडी बताती है कि BMI शरीर की असल स्थिति छुपा सकता है क्योंकि एशियन इंडियंस में बॉडी फैट ज्यादा होता है. कई बार वजन सामान्य होने के बावजूद पेट पर जमी चर्बी अंदरूनी अंगों के लिए खतरनाक होती है इसलिए कमर की माप मापना सही रहेगा।  स्टडी के मुताबिक, यह ट्रेंड टीनएजर्स और युवा लड़कियों में भी तेजी से बढ़ रहा है. अर्बन लाइफस्टाइल, ज्यादा कमाई और नॉन-वेज डाइट इसका बड़ा कारण है।  स्टडी बताती है कि भारत में महिलाओं में एब्डॉमिनल ऑबेसिटी पुरुषों से ज्यादा है. NFHS-5 (2019-21) डेटा से पता चलता है कि भारत में 40% महिलाएं और 12% पुरुष पेट के मोटापे से ग्रस्त हैं. महिलाओं के लिए 80 सेमी और पुरुषों के लिए 94 सेमी से अधिक कमर का घेरा इस खतरे की श्रेणी में आता है. यह समस्या अब गांवों और मिडिल क्लास तक फैल चुकी है।  फोर्टिस C-DOC के चेयरमैन डॉ. अनूप मिश्रा कहते हैं, 'कमर नापना आसान है. हर डॉक्टर को मेजरमेंट टेप रखना चाहिए. यह डायबिटीज, हार्ट डिजीज और कैंसर का संकेत देता है. BMI एशियंस के लिए सटीक नहीं इसलिए वेस्ट सर्कम्फरेंस (कमर का घेरा) पर फोकस करें. यह ट्रेंड टीनएजर्स में भी दिख रहा, जो बचपन की कुपोषण के बाद फास्ट लाइफस्टाइल से प्रभावित हैं।  कारण और जोखिम रिसर्च के मुताबिक, उम्र बढ़ना, शहरों में रहना, अधिक कमाई और नॉन-वेज खाना महिलाओं में पेट की चर्बी बढ़ा रहा. लीवर-पैंक्रियास के आसपास फैट मेटाबॉलिक रिस्क बढ़ाता है. स्टडी चेतावनी देती है इससे टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी और यहां तक कि ब्रेस्ट कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।  खासकर मिड एज की लड़कियों में यह ट्रेंड अधिक देखा जा रहा है जो कम उम्र में खराब न्यूट्रिशन और फिर अचानक बदली हुई लाइफस्टाइल का नतीजा है।  कैसे रोक सकते हैं इस समस्या को एक्सपर्ट्स कहते हैं, टेप से कमर नापें और रूटीन चेकअप कराएं. हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज से इस समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है. अब जनरल ऑबेसिटी नहीं बल्कि एब्डॉमिनल पर भी ध्यान देने की जरूरत है. ये समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ रही है इसलिए शहरी महिलाओं को खास ध्यान देने की जरूरत है. एक्सपर्ट्स अब सलाह दे रहे है कि वजन चेक करने के साथ-साथ अपनी कमर का घेरा नापना भी उतना ही जरूरी हो गया है। 

14 साल के सफर के बाद टेस्ला मॉडल एस और एक्स की विदाई, अब रोबोटैक्सी और ऑटोनोमस कारों पर होगा फोकस

Tesla के लिए 1 अप्रैल 2026 सिर्फ एक तारीख नहीं बल्कि एक युग के खत्म होने का दिन है. कंपनी ने आधिकारिक रूप से अपने मॉडल एस और मॉडल एक्स के प्रोडक्शन को बंद कर दिया है. एलॉन मस्क ने इसकी जानकारी दी है. उन्होंने बताया है कि कंपनी अब इन कारों के ऑर्डर नहीं ले रही है. मस्क ने बताया कि उनके पास इन्वेंट्री में सिर्फ 600 यूनिट्स ही बची हैं. अपने ट्विट के साथ मस्क ने एक तस्वीर शेयर की है, जो ओरिजनल मॉडल एस की है. इस कार को टेस्ला ने 14 साल पहले जून 2012 में लॉन्च किया था. एलॉन मस्क ने अपने ट्विट में लिखा, 'टेस्ला मॉडल एस और एक्स के कस्टम ऑर्डर अब पूरे हो चुके हैं. अब स्टॉक में केवल कुछ ही गाड़ियां बची हैं. एक युग के अंत के लिए हम एक आधिकारिक सेरेमनी आयोजित करेंगे. मुझे ये गाड़ियां बेहद पसंद हैं.' टेस्ला की इन गाड़ियों के प्रोडक्शन को बंद करने की जानकारी जनवरी में ही आ गई थी. कंपनी ने 2025 की चौथे क्वार्टर की अर्निंग कॉल में इसकी जानकारी दी थी. उस वक्त ब्रांड ने दोनों इलेक्ट्रिक कार्स के लिए इसे 'सम्मानजनक निर्वहन' बताया था. कंपनी ने उस वक्त जानकारी दी थी कि इन गाड़ियों के फैक्टरी स्पेस को ऑप्टिमम रोबोट्स को बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. 14 साल का सफर मॉडल एस टेस्ला की पहली मास मार्केट कार थी, जिसे कंपनी ने जून 2012 में लॉन्च किया था. ग्लोबली ये कार 2015 और 2016 में टॉप सेलिंग इलेक्ट्रिक व्हीकल थी. सिर्फ 2015 में ही कंपनी ने इसकी 50 हजार से ज्यादा यूनिट्स को बेचा था. मॉडल एक्स को कंपनी ने 2015 में इंट्रोड्यूस किया था, जिसे अपनी फाल्कन-विंग डोर के लिए जाना जाता था. अपने पूरे प्रोडक्शन के दौरान इन दोनों गाड़ियों की 610,000 यूनिट्स को बेचा गया है. रिपोर्ट्स की मानें, तो टेस्ला के पास अभी भी 295 नई मॉडल एस और 301 मॉडल एक्स गाड़ियां हैं. टेस्ला की वेबसाइट से इन दोनों गाड़ियों को हटा दिया गया है. कंपनी इन गाड़ियों के प्रोडक्शन को बंद करने के साथ ही ऑटोनोमस कार के फ्यूचर पर फोकस करेगी. टेस्ला अपनी टू-सीटर साइबरकैब रोबोटैक्सी का प्रोडक्शन शुरू करने की तैयारी कर रही है. इस कार में कोई स्टीयरिंग व्हील और पैडल नहीं होंगे.