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नो-कॉन्फिडेंस मोशन पर गरमाई राजनीति, अमित शाह ने विपक्ष पर साधा निशाना

नई दिल्ली लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के नो-कॉन्फिडेंस मोशन पर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'यह कोई आम बात नहीं है। करीब 4 दशक बाद, लोकसभा स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन लाया गया है। यह पार्लियामेंट्री पॉलिटिक्स और इस सदन के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।'   विपक्ष इमानदारी पर उठा रही सवाल शुरूआती दिनों को याद करते हुए गृह मंत्री बोले, 'मैं पूरे सदन को बताना चाहता हूं कि विद्यमान स्पीकर की नियुक्ति जब हुई, तब दोनों दलों के नेता ने एक साथ उन्हें आसन पर बैठाने का काम किया। इसका मतलब है कि स्पीकर को अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों ने एक प्रकार से मुक्त माहौल भी देना है और दायित्वों के निर्वहन के लिए उनका समर्थन भी करना है। मगर आज स्पीकर के निर्णय पर कोई असहमति तो व्यक्त हो सकती है, लेकिन लोकसभा के नियमों में स्पीकर के निर्णयों को अंतिम माना गया है। इसके विपरित विपक्ष ने स्पीकर की निष्ठा पर सवालिया निशान खड़ा किया। ये लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है, और न केवल भारत, बल्कि दुनियाभर में हमारी लोकतंत्र की साख बनी है, गरिमा बनी है… और पूरी दुनिया लोकतंत्र की इस प्रतिष्ठा को स्वीकार करती है।लेकिन जब इस पंचायत के मुखिया पर, उसकी निष्ठा पर सवालिया निशान लगता है तो केवल देश में नहीं, पूरी दुनिया में हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा होता है। लेकिन यहां उनपर शंका के सवाल उठा दिए। सदन आपसी विश्वास पर चलता है: शाह अमित शाह बोले, 'मैं बताना चाहता हूं कि 75 साल से इन दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को पाताल से भी गहरा किया है, लेकिन आज विपक्ष ने इस साख पर एक प्रकार से सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष और विपक्ष—दोनों के लिए सदन के जो स्पीकर होते हैं, वे कस्टोडियन होते हैं। इसलिए नियम बनाए गए हैं। यह सदन कोई मेला नहीं है; यहां नियमों के अनुसार चलना पड़ता है। जो बातें सदन के नियम परमिट नहीं करते, उस तरह से बोलने का किसी को अधिकार नहीं है, चाहे वह कोई भी हो।'  

आदिवासी महोत्सव में पहुंचेंगे Amit Shah, एमपी के कई क्षेत्रों को मिलेंगी बड़ी सौगातें

भोपाल प्रदेश का पहला बैगा महोत्सव शहडोल में नहीं, बल्कि बालाघाट में होगा। जिले में स्थान के चयन की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। यह जिला मुख्यालय या आसपास के क्षेत्रों में मार्च के अंत या अप्रैल के पहले सप्ताह में होगा। इसमें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शामिल होंगे। आदिवासी समाज से आने वाले अन्य केंद्रीय व राज्य के मंत्री व प्रमुख जन भी हिस्सा लेंगे। प्रदेश में नक्सलियों के खात्मे के बाद सरकार पहला बड़ा आयोजन करने जा रही है, इसका मकसद आदिवासी समाज को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना और नक्सली गतिविधियों के कारण विकास से पिछड़े बालाघाट, मंडला जैसे जिलों पर अतिरिक्त ध्यान देना है। गृह मंत्री ने कार्य योजना को सराहा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर उक्त महोत्सव की कार्य योजना बनाई गई, इसे केंद्रीय गृहमंत्री के सामने रखा गया, उन्होंने भी इसे सराहा है साथ ही उक्त महोत्सव में सहभागी बनने की इच्छा भी जताई है। बता दें, केंद्र ने नक्सलियों के खात्मे के लिए राज्य को मार्च-अप्रैल तक की गाइडलाइन दी थी लेकिन उसके तीन महीने पहले ही मप्र पुलिस और एजेंसियों ने मिलकर चिह्नित नक्सलियों का खात्मा कर दिया। कई को मार गिराया तो कुछ ने सरकार के समक्ष समर्पण किए थे। नक्सल से प्रभावित क्षेत्र को मिलेंगी सौगातें बैगा महोत्सव में आदिवासी समाज के उन लोगों को बड़ी सौगात मिल सकती है जो लंबे समय तक नक्सलियों के चंगुल में रहे। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऐसे क्षेत्रों की जरुरतों का अलग से रोडमैप तैयार कर लिया है। इसका मकसद आदिवासी समाज को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना और नक्सली गतिविधियों के कारण विकास से पिछड़े बालाघाट, मंडला जैसे जिलों पर अतिरिक्त ध्यान देना है। हालांकि अभी भी सरकार ने नक्सलियों के विरुद्ध अभियान को बंद नहीं किया, बल्कि यह आगे भी जारी रहेगा। क्षेत्र में सख्ती के साथ सर्च अभियान जारी है।

बिहार की सियासत में हलचल: अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे सम्राट चौधरी

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को दिल्ली बुलाया है। बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर चल रहीं चर्चाओं के बीच सियासी हलचल तेज है। सम्राट रविवार को शाह से मिलने पटना से दिल्ली जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के बाद बिहार में नए सीएम के नाम पर मंथन चल रहा है। चर्चा है कि अगला सीएम भारतीय जनता पार्टी से होगा। अमित शाह ने सम्राट चौधरी को दिल्ली क्यों बुलाया है, इस बारे में कोई स्पष्ट वजह तो सामने नहीं आई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश के राज्यसभा जाने के बाद नई सरकार के गठन को लेकर उनसे चर्चा की जा सकती है। सम्राट बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में नंबर दो की पॉजिशन पर हैं। वह राज्य का सबसे अहम माने जाने वाला गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, जो पहले नीतीश के पास हुआ करता था। बताया जा रहा है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने संभावित सीएम पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनने के बाद वे बिहार सीएम पद से इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद नए सिरे से सरकार का गठन किया जा सकता है। अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका ऐलान उसी समय होने की संभावना है।  

अमित शाह का बड़ा बयान: केदारनाथ से कन्याकुमारी तक घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर करेंगे

हरिद्वार. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठियों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम से लेकर कन्याकुमारी तक, एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर भारत से बाहर किया जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को उत्तराखंड सरकार के 4 साल पूरे होने पर हरिद्वार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, "उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने लगभग 10 हजार से अधिक अतिक्रमण उखाड़कर फेंक दिए हैं। यह सिर्फ अतिक्रमण की बात नहीं है। मैं प्रदेशवासियों से कहना चाहता हूं कि पूरे देश में जहां-जहां घुसपैठिए हैं, केदारनाथ धाम से लेकर कन्याकुमारी तक, एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर हम भारत के बाहर निकालने का काम करेंगे।" इस दौरान शाह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "जो भारत का नागरिक नहीं है, उसका नाम मतदाता सूची से कटना चाहिए। भाजपा चुनाव आयोग की प्रक्रिया का पूरा समर्थन कर रही है, क्योंकि जिस देश में लोकतंत्र को संभालने वाली इकाई, यानी मतदाता सूची शुद्ध न हो, उस देश का लोकतंत्र कभी सलामत नहीं रह सकता है। राहुल गांधी को जितना विरोध करना है, उतना कर लें। वे एसआईआर का भी विरोध करते हैं। उन्हें हर चीज में नकारात्मकता दिखाई देती है।" धामी सरकार के 4 साल पूरे होने पर उन्होंने कहा, "आज पुष्कर सिंह धामी सरकार के 4 साल पूरे होने का अवसर है, लेकिन इसके साथ ही आज भाजपा सरकार के 9 साल पूरे होने का भी मौका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड आए थे। यहां राज्य के 25 साल पूरे होने का महोत्सव शुरू करके गए। मैं कार्यक्रम के माध्यम से उत्तराखंड की जनता को बताना चाहता हूं कि एक जमाना था जब उत्तराखंड की भूमि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही थी। उत्तराखंड की संस्कृति बचाने के लिए यहां के युवा मैदान में उतरे थे। उस समय कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सहन न करने वाला दमन हमारे युवाओं पर किया था।" अमित शाह ने कहा, "अनेक युवाओं को गोली लगी। उन्होंने बलिदान दिया। रामपुर तिराहा की घटना आज भी उत्तराखंड वासी भूले नहीं हैं। उस वक्त भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तराखंड की रचना की थी। कांग्रेस के शो कॉल्ड विद्वान कर रहे थे कि छोटे राज्य कैसे टिकेंगे और अर्थव्यवस्थाएं कैसे चलेंगी। अटल जी ने 3 छोटे राज्य बनाए थे जिनमें उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और झारखंड शामिल हैं। ये तीनों राज्यों विकास के रास्ते पर आगे बढ़ गए हैं। जब हमारी सरकार के 9 साल पूरे हो रहे हैं।" कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, "जब त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया था, तब पहले कार्यक्रम में मैंने हिस्सा लिया था। तब मैंने कहा था कि 'अटल जी ने बनाया है, पीएम नरेंद्र मोदी संवारने का काम करेंगे। ये 9 साल उत्तराखंड के विकास के थे। पिछले 4 साल के अंदर पुष्कर सिंह धामी ने एक-एक समस्या को चुन-चुनकर समाप्त करने का संकल्प लिया है। इसके कारण उत्तराखंड विकास के रास्ते पर तेज गति से आगे बढ़ रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि आज 1132 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन हो रहा है। यहां पर नई न्याय संहिताओं की प्रदर्शनी का भी उद्घाटन हो रहा है। राज्य के वकील मित्रों को आग्रह है कि वे ये प्रदर्शनी जरूर देखें। पीएम मोदी के नेतृत्व में अंग्रेजों की ओर से बनाए गए 150 साल पुराने कानून समाप्त करके नागरिकों की सुरक्षा के लिए न्याय संहिताएं बनाई गई हैं। अमित शाह ने कहा कि नए कानूनों को 2028 में पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। उसके बाद कोई भी नागरिक पुलिस थाने में जाकर एफआईआर कराएगा तो तीन साल में सुप्रीम कोर्ट तक पूरी न्याय प्रणाली समाप्त हो जाएगी। अब समय पर न्याय मिलेगा। ये दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय संहिताएं हैं। इसी बीच, केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 2026 में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में एनडीए की सरकार बनने जा रही है। 2027 का उद्घाटन उत्तराखंड की जनता को करना है। यहां फिर से पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार बनानी है।

CISF स्थापना दिवस समारोह में पहुंचे अमित शाह, ओडिशा में जवानों का बढ़ाया हौसला

कटक गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को कटक में आयोजित सीआईएसएफ के 57वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज 56 वर्ष पूरे करने के बाद सीआईएसएफ ने यह मुकाम हासिल किया है। 57 मात्र एक संख्या नहीं है बल्कि यह समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की एक यात्रा का प्रतीक है, जो औद्योगिक सुरक्षा के क्षेत्र में शून्य से शिखर तक के दृढ़ प्रयास को दर्शाती है। देश के अर्थतंत्र की मजबूती की कल्पना और इस देश को दुनिया का सबसे बड़ा अर्थतंत्र बनाने की संपल्पना औद्योगिक विकास के बिना नहीं हो सकती। औद्योगिक विकास को सुरक्षित वातावरण देने के लिए जरूरी है, राष्ट्रीय स्तर पर एक इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स की और मुझे खुशी है कि इन 56 सालों में सीआईएसएफ ने अपनी स्थापना के उद्देश्यों को सिद्ध किया है। साथ ही, हर प्रकार की चुनौतियों से सीखते हुए समय के साथ अपने को बदलने का प्रयास भी किया है। उन्होंने आधुनिकता को भी अपनाया है और परंपराओं को भी जीवित रखा है। उन्होंने कहा कि मुझे बेहद खुशी है कि सुरक्षा बलों का अपना सम्मेलन आयोजित किया जाता है। देश की सीमाओं की रक्षा करने वालों को ऐसा अवसर मिलना चाहिए और देश के भीतर नागरिक क्षेत्रों में विभिन्न सुरक्षा भूमिकाओं में कार्यरत लोगों को भी ऐसा मंच मिलना चाहिए। मैं सीआईएसएफ की इस पहल को बधाई देना चाहता हूं। भारत के औद्योगिक विकास की संपल्पना सीआईएसएफ के बिना नहीं हो सकती। चाहे हवाई अड्डे हों, चाहे बंदरगाह हों या फिर बड़ी औद्योगिक इकाइयां हों, सीआईएसएफ हमेशा राष्ट्र की ढाल बनकर मजबूती से खड़ा है। गृह मंत्री ने कहा कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने एक निर्णय किया है कि सभी बंदरगाहों की सुरक्षा भी सीआईएसएफ को सौंपकर हम इस मामले में भी निश्चिंत होना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश की जनता के सामने दो महत्वपूर्ण संकल्प रखे हैं। 2047 तक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनना, दुनिया में नंबर एक पर पहुंचना और 2027 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना। इस लक्ष्य को पाने के लिए सीआईएसएफ अहम भूमिका निभा रही है।

माओवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई, अमित शाह ने बताया कब तक खत्म होगा खतरा

रायपुर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत के 31 मार्च तक माओवादियों से मुक्त हो जाने का दावा करते हुए शुक्रवार को कहा कि सुरक्षा बल आंध्र प्रदेश के तिरुपति से नेपाल के पशुपति तक लाल गलियारा बनाने का सपना देखने वालों को पराजित करेंगे। शाह ने कटक जिले के मुंडाली में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि सीआईएसएफ प्रमुख प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान करके देश की आर्थिक वृद्धि में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा, 'आज, मैं राष्ट्र को आश्वस्त करना चाहता हूं कि देश 31 मार्च तक माओवादियों से मुक्त हो जाएगा। हमारी सेनाएं तिरुपति से पशुपति तक लाल गलियारा बनाने का सपना देखने वालों को पराजित करेंगी।' शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश से नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने कहा, 'हमारे सुरक्षा बल अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं और देश अब लाल विद्रोहियों का सफाया करने के कगार पर है।' पांच लाख रुपये का इनामी नक्सली ढेर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में पांच लाख रुपये का एक इनामी नक्सली मारा गया है। पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। दंतेवाड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि मुठभेड़ बुधवार रात गीदम पुलिस थाना इलाके के जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में हुई, जब जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और बस्तर फाइटर्स का एक संयुक्त दल नक्सल विरोधी अभियान पर निकला था। उन्होंने बताया कि मारे गए नक्सली की पहचान बीजापुर जिले के बुरजी गांव के निवासी राजेश पुनेम के रूप में हुई है, जो माओवादियों की भैरमगढ़ एरिया कमेटी का सदस्य था। उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। राय ने बताया कि सुरक्षाबलों को तीन मार्च को गीदम थाना क्षेत्र के गुमलनार, गिरसापारा और नेलगोड़ा के मध्य जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में नक्सली सामग्री और हथियार छिपाए जाने की जानकारी मिली थी। ओडिशा ने बलांगीर, बरगढ़ को नक्सल-मुक्त घोषित किया ओडिशा पुलिस ने माओवादियों के खिलाफ अभियान में बड़ी सफलता हासिल करते हुए राज्य के दो पश्चिमी जिलों बलांगीर और बरगढ़ को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किया है। पुलिस महानिदेशक वाई बी खुरानिया ने आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा की कि बलांगीर और बरगढ़ जिले अब नक्सल-मुक्त हो गये हैं। यह घोषणा उस समय की गई जब बरगढ़ से सटे महासमुंद जिले के 15 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। बताया गया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिवीजन में सक्रिय थे। उनके मुख्यधारा में लौटने के साथ ही इन दोनों जिलों में नक्सली गतिविधियों के पूरी तरह समाप्त होने की पुष्टि की गई।

‘प्रगति’–‘विकास’ का अनावरण: Amit Shah बोले– टेक्नोलॉजी से पारदर्शी और तेज होगी जनगणना 2027

नई दिल्ली केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में जनगणना-2027 के लिए विकसित डिजिटल टूल्स का सॉफ्ट लॉन्च किया। इस दौरान उन्होंने जनगणना के आधिकारिक शुभंकर “प्रगति” (महिला) और “विकास” (पुरुष) का भी औपचारिक अनावरण किया। सरकार की ओर से 16 जून 2025 को राजपत्र अधिसूचना जारी किए जाने के साथ ही भारत की जनगणना 2027 की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। दो चरणों में होने वाली यह जनगणना दुनिया का सबसे बड़ा जनगणना अभियान मानी जा रही है। इस बार पहली बार पूरी जनगणना डिजिटल माध्यम से की जाएगी और नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प भी दिया जाएगा। स्व-गणना के लिए एक सुरक्षित वेब-आधारित पोर्टल तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से उत्तरदाता घर-घर सर्वेक्षण से पहले अपनी जानकारी 16 भाषाओं में ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। सफल पंजीकरण के बाद उन्हें एक विशिष्ट स्व-गणना आईडी मिलेगी, जिसे प्रगणक के साथ साझा करने पर दर्ज जानकारी की पुष्टि की जा सकेगी। इस अवसर पर चार प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किए गए, जिन्हें सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने विकसित किया है। इनमें हाउस लिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर (एनएलबीसी) वेब एप्लिकेशन, एचएलओ मोबाइल एप्लिकेशन, स्व-गणना पोर्टल और जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली पोर्टल शामिल हैं। ये प्लेटफॉर्म जनगणना कार्यों की योजना, डेटा संग्रह और निगरानी को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाएंगे। जनगणना-2027 के शुभंकर “प्रगति” और “विकास” को मित्रवत और सहज प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ये दोनों पात्र वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी का संदेश भी देते हैं। इन शुभंकरों के माध्यम से जनगणना से जुड़ी जानकारी समाज के विभिन्न वर्गों तक सरल तरीके से पहुंचाई जाएगी। जनगणना-2027 का पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच गृह-सूचीकरण और आवास संबंधी जानकारी एकत्र करने के लिए चलाया जाएगा। दूसरा चरण फरवरी 2027 में देशभर में जनसंख्या गणना के रूप में आयोजित होगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय विवरण दर्ज किए जाएंगे। पूरे अभियान में देशभर के लगभग 30 लाख प्रगणक, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी शामिल होंगे, जो सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे। सरकार का उद्देश्य तकनीक के उपयोग से इस विशाल जनगणना को अधिक सटीक, सुरक्षित और व्यापक बनाना है। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव, भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

नामांकन के बाद गरजे अमित शाह, बोले– जेपी की विरासत संभाल रहे हैं नीतीश कुमार

नई दिल्ली नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़कर अब दिल्ली की राह पर निकल रहे हैं। उन्होंने बिहार विधानसभा परिसर में गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन किया। इस दौरान होम मिनिस्टर अमित शाह, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत कई नेता मौजूद थे। नीतीश कुमार के साथ ही भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी नामांकन दाखिल कर दिया है। शिवेश राम और उपेंद्र कुशवाहा ने भी नामांकन दाखिल कर दिया। इस मौके पर गृह मंत्री अमित शाह लगातार नीतीश कुमार के साथ मौजूद रहे। उन्होंने नीतीश कुमार की सराहना भी की है और कहा कि बिहार के लोग उनके कार्यकाल को हमेशा याद करेंगे। अमित शाह ने कहा कि हम और भाजपा के करोड़ों कार्यकर्ता नितिन नवीन जी का संसद में स्वागत करते हैं। इसके अलावा उन्होंने नीतीश कुमार की जमकर तारीफ की। शाह ने कहा, 'नीतीश कुमार जी ने भी अपना नामांकन किया है। लंबे अरसे के बाद नीतीश कुमार राज्यसभा में प्रवेश करेंगे। 2005 से अब तक वह सीएम रहे। उनका यह कार्य़काल बिहार के इतिहास में स्वर्णि म अक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने अपने काल में राज्य को जंगलराज से मुक्त किया। उन्होंने सड़कों का जाल बिछाया। उनके कुर्ते पर भी कभी दाग नहीं लगा।' होम मिनिस्टर ने कहा कि बिना किसी आरोप के उन्होंने इतना लंबा सफर शायद ही किसी नेता ने तय किया होगा। हर घर में बिजली पहुंचाने में उनका बड़ा रोल है। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में हमेशा शुचिता और ईमानदारी बरती। उनकी लीडरशिप में ही पीएम मोदी की भेजी हुई हर योजना जन-जन तक पहुंची। वह जेपी आंदोलन से निकले प्रमुख नेता थे। उन्होंने पूरी जिंदगी जेपी के सिद्धांतों पर चलकर गुजारी है। हम उनका दिल से स्वागत करते हैं। उनके कार्यकाल को बिहार के लोग हमेशा याद रखेंगे और उसका सम्मान भी करेंगे। गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने एक फेसबुक पोस्ट लिखकर अपनी राज्यसभा की इच्छा जाहिर की है। उनका कहना था कि अपनी संसदीय राजनीति में वह लोकसभा में रहे, विधानसभा के दोनों सत्रों में रहे और अब राज्यसभा जाने की इच्छा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में नई बनने वाली सरकार को मेरा पूरा समर्थन और मार्गदर्शन मिलेगा। गौरतलब है कि नीतीश कुमार के हटने के बाद उनके बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम का पद मिल सकता है। वहीं बिहार के राजनीतिक इतिहास में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री हो सकता है। हालांकि यह तय नहीं है कि भाजपा की ओर से कौन सा नेता कमान संभालेगा।  

मोगा से गरजेगी बीजेपी, 14 मार्च को अमित शाह भरेंगे चुनावी हुंकार

पंजाब पंजाब की राजनीति में चुनावी सरगर्मियां तेज होती दिख रही हैं। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 14 मार्च को मोगा जिले के किल्ली चहल गांव से पार्टी के चुनावी अभियान का आगाज कर सकते हैं। खास बात यह है कि इसी स्थान से आम आदमी पार्टी (AAP) ने 17 फरवरी को अपने 2027 चुनाव अभियान की शुरुआत की थी। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि रैली का स्थान बेहद सोच-समझकर चुना गया है, क्योंकि मोगा को पंजाब की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। यह क्षेत्र मालवा इलाके का केंद्र बिंदु है, जिसे राज्य की सियासी दिशा तय करने वाला इलाका भी कहा जाता है। हाल ही में AAP ने भी यहां नशा विरोधी अभियान को केंद्र में रखते हुए बड़ी रैली की थी, जिसमें पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान मौजूद रहे थे। बीजेपी के एक वरिष्ठ सूत्र के मुताबिक, “मोगा राज्य का सेंटर प्वाइंट है और पंजाब की राजनीति का कोर क्षेत्र माना जाता है। मालवा में मजबूत उपस्थिति किसी भी पार्टी की जमीन पर पकड़ को दर्शाती है।” ऐसे में अमित शाह की रैली को राजनीतिक ताकत दिखाने के तौर पर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि 14 मार्च की यह रैली पार्टी के शीर्ष स्तर पर अंतिम रूप दी गई है। संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं, खासकर राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष ने इसकी तैयारियों को अंतिम रूप दिया है। पार्टी नेताओं का मानना है कि गृह मंत्री की यह रैली राज्य में बीजेपी के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत का संकेत देगी। एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया पंजाब दौरे के बाद अमित शाह की रैली यह स्पष्ट संदेश देगी कि पंजाब अब पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि यह रैली इस बात का भी संकेत होगी कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह दोनों की नजरें पंजाब पर टिकी हुई हैं। कुछ समय से यह धारणा बन रही थी कि बीजेपी ने पंजाब को राजनीतिक रूप से बैक बर्नर पर रख दिया है, क्योंकि पार्टी पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी जैसे चुनावी राज्यों की तैयारियों में व्यस्त थी। हालांकि, जालंधर के पास डेरा सचखंड बल्लां में संत रविदास जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी की हालिया यात्रा को पंजाब में फिर से सक्रिय चुनावी रणनीति की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। साल 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा माने जा रहे हैं, खासकर इसलिए क्योंकि कृषि कानूनों के मुद्दे पर 2020 में शिरोमणि अकाली दल से उसका गठबंधन टूट गया था। अब राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी बना हुआ है कि क्या दोनों पुराने सहयोगी फिर से चुनाव से पहले एकजुट होंगे। दोनों दलों के कुछ वर्गों में गठबंधन की संभावनाओं को लेकर चर्चा जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मालवा क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में पंजाब में चुनावी मुकाबला और तेज होगा, जिसमें सभी प्रमुख दल अपनी ताकत झोंकते नजर आएंगे।

तीन दिन सीमांचल में अमित शाह, सियासी एजेंडे पर होगा मंथन

पटना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय बिहार दौरे पर बुधवार शाम पहुंच चुके। पूर्णिया एयरपोर्ट पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी मंत्री लेशी सिंह और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उनका स्वागत किया। यहां से वह सड़क मार्ग से किशनगंज पहुंचे। यहां पर लैंड पोर्ट अथॉरिटी की समीक्षा बैठक में शामिल हुए। किशनगंज में ही रात्रि विश्राम किया। आज यानी गुरुवार को गृह मंत्री अररिया में रहेंगे, जहां वह सुबह 11 बजे लेट्टी सीमा चौकी पर आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेंगे। इसके बाद कलेक्ट्रेट में पुलिस अधीक्षकों और सीमावर्ती क्षेत्रों के जिला अधिकारियों के साथ भारत-नेपाल सीमा से संबंधित मुद्दों का आकलन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें सुरक्षा को लेकर बातचीत होगी। आज ही वह दूसरे चरण की वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में भी भाग लेंगे और फिर रात रुकने के लिए पूर्णिया लौटेंगे। शुक्रवार यानी 27 फरवरी को गृह मंत्री शाह पूर्णिया में सीमावर्ती जिलों से संबंधित मामलों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक बार फिर अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। समीक्षा बैठकों के अंतिम दौर के समापन के बाद वे नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। यह तो थी अमित शाह के कार्यक्रम की जानकारी आगे आपको बताते हैं अमित शाह के कार्यक्रम का एजेंडा क्या है? 'यह यात्रा मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा को लेकर है' वरिष्ठ पत्रकार गिरिंद्र नाथ झा ने कहा कि गृह मंत्री की यह यात्रा मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा को लेकर है। इसमें सिलिगुड़ी कॉरिडोर का मुद्दा प्रमुख है। दूसरी जो महत्वपूर्ण बात है वह यह कि केंद्र सरकार वाइब्रेंट विलेज के कार्यक्रम पर भी काम कर रही है। गृह मंत्री का इस कार्यक्रम पर काफी फोकस है। अररिया में वह वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में भी भाग लेंगे। इसके साथ ही वह सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा उपायों, प्रशासनिक तैयारियों और चल रही विकास पहलों की समीक्षा करेंगे। इस दौरान वे भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। 'बंगाल के कुछ प्रमुख नेता मुलाकात करने आएंगे' गृह मंत्री अमित शाह के इस दौरे का बंगाल चुनाव से जोड़कर देखा जाए या नहीं? इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार गिरिंद्र नाथ झा ने कहा कि बंगाल चुनाव से इसे नहीं जोड़ना उचित नहीं होगा। अगर बंगाल चुनाव मुद्दा रहता तो वह बंगाल में ही प्रवास करते हैं। वह सीमा सुरक्षा पर बातचीत करने आए हैं। हां, सीमावर्ती जिले जैसे उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर या अन्य जिलों के कुछ नेता गृह मंत्री से मुलाकात करने जरूर आएंगे। 'सीमांचल दौरे के दो मायने निकाले जा रहे' वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं कि अमित शाह के सीमांचल दौरे के दो मायने निकाले जा रहे हैं। पहला यह कि भारत सरकार सीमांचल को घुसपैठियों से मुक्त बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है। गृह मंत्री शाह ने हाल के वर्षों में कई बार सीमांचल का दौरा किया है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी वह कई बार घुसपैठियों का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने आरोप भी लगाया था कि क्षेत्र में अवैध प्रवासियों के माध्यम से वोट बैंक बनाने के प्रयास चल रहे हैं। सभी अवैध गतिविधियों को पूरी तरह से रोक लगाने की बात कही थी। 'इन चीजों पर भी मंथन करेंगे अमित शाह' वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि दूसरी बात यह है कि सीमांचल के जिलों की सीमा पश्चिम बंगाल से सटती है। इस सीमवर्ती गांवों में सैकड़ों ऐसे लोग हैं जिनका संबंध बंगाल से भी है। उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर के विधानसभा सीटों पर भाजपा फोकस कर रही है। किशनगंज और पूर्णिया में रात्रि विश्राम के दौरान वह सीमावर्ती जिलों के कुछ प्रमुख नेताओं से मिलकर रणनीति बना सकते हैं। इसके अलावा घुसपैठियों का मुद्दा भी है। यह कॉमन मुद्दा है जो कि सीमांचल और बंगाल में दोनों जगहों पर है। इसके अलावा बार्डर पर सुरक्षा को कैसे मजबूत किया जाए? इन चीजों पर भी मंथन करेंगे। गृह मंत्री के दौरे पर भाजपा ने क्या कहा? भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से हमलोग गृह मंत्री का स्वागत करते हैं। गृह मंत्री का घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रूख है। वह घुसपैठियों को हर हाल में देश के बाहर करना चाहते हैं। आतंकवाद और आतंरिक सुरक्षा पर भी उनका काफी फोकस है। तीन दिवसीय दौरे पर वह इन्हीं मुद्दों पर फोकस करेंगे। तेजस्वी यादव गृह के सीमांचल दौरे पर क्या बोले? तेजस्वी यादव ने गृह मंत्री अमित शाह के सीमांचल दौरे पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर की जा रही राजनीतिक कवायद है। उन्होंने कहा कि घुसपैठ कोई वास्तविक मुद्दा नहीं है और इससे पहले भी झारखंड व बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान इस मुद्दे को उठाया गया था। अब बंगाल चुनाव में इस मुद्दे को उठाकर जनता को भटकाने की कोशिश की जा रही है।