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ओडिशा उपचुनाव में गरजे सीएम विष्णुदेव: बोले, भाजपा लाएगी परिवर्तन की लहर

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज पड़ोसी राज्य ओडिशा के नुआपाड़ा विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की धुआंधार चुनावी हुंकार भरने जा रहे हैं. संगठन के निर्देश पर सीएम साय, विधायक पुरंदर मिश्रा और सह-प्रभारी लता उसेंडी के साथ पंचमपुर में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे. ओडिशा रवाना होने से पहले सीएम साय ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि “नुआपाड़ा में भाजपा की बहुमत वाली जीत पक्की है. हम विकास की गारंटी दे रहे हैं.” बता दें, नुआपाड़ा सीट दिवंगत बीजेडी नेता राजेंद्र ढोलकिया के निधन से खाली हुई है. 11 नवंबर को मतदान होने हैं और 14 को नतीजे सामने आएंगे. भाजपा ने इस उपचुनाव के लिए 40 स्टार प्रचारकों की फौज उतारी है, जिसमें ओडिशा सीएम मोहन माझी, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, अश्विनी वैष्णव समेत मुख्यमंत्री साय शामिल हैं. इसी बीच, एग्रीस्टेक पोर्टल में रिकॉर्ड पंजीयन के बावजूद कुछ किसानों के खेत का रकबा कम दिखने की शिकायतें सामने आईं. सीएम साय ने तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिए-ई-केवाईसी में गड़बड़ी सुधारो, डुप्लीकेशन हटाओ. इस बार पिछले साल से एक लाख ज्यादा किसानों ने पंजीयन कराया. धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू, पारदर्शिता के लिए कमांड कंट्रोल सेंटर भी गठित. बिहार में पहले चरण के मतदान से ठीक पहले सीएम साय ने पटना में हुंकार भरी. उन्होंने कहा कि एनडीए स्पष्ट बहुमत से सरकार बना रहा है. राजद-कांग्रेस ने तो पशुओं का चारा भी खा लिया, लेकिन बिहार की जनता पीएम मोदी पर भरोसा जता रही है.

पहले चरण की वोटिंग से पहले बड़ा झटका, संजय सिंह ने जन सुराज छोड़ BJP में किया शामिल

मुंगेर  विधानसभा चुनाव से ठीक एक दिन पहले मुंगेर सीट पर बड़ा उलटफेर हो गया है. जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार संजय सिंह ने अचानक पार्टी छोड़कर भाजपा (एनडीए) का दामन थाम लिया है. संजय सिंह ने आज भाजपा प्रत्याशी कुमार प्रणय की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली और उनके समर्थन में उतर आए. इस कदम से मुंगेर में चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं. मतदान से ठीक पहले जन सुराज के उम्मीदवार का भाजपा में शामिल होना विपक्ष के लिए झटका साबित हो सकता है. अब देखना यह होगा कि इस फैसले का असर मतदान पर कितना पड़ता है. बता दें कि मुंगेर में कल वोटिंग है. इससे पहले अक्टूबर में जन सुराज के तीन और उम्मीदवारों ने नाम वापल ले लिए थे. ये कैंडिडेट दानापुर, ब्रह्मपुर और गोपालगंज शामिल थे. और अब इस लिस्ट में मुंगेर का नाम शामिल हो गया है. जोरदार स्वागत मुंगेर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जन सुराज के पूर्व प्रत्याशी संजय सिंह का भाजपा में जोरदार स्वागत किया गया. इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष अरुण पोद्दार, जिला प्रभारी विकास सिंह, क्षेत्रीय प्रभारी राजेश झा, प्रीति सिंह समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे. भाजपा में शामिल होते हुए संजय सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही बिहार और देश का विकास संभव है. जन सुराज की सोच अच्छी थी, लेकिन जनता भाजपा के विकास मॉडल पर भरोसा करती है. अब मैं भाजपा प्रत्याशी कुमार प्रणय की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करूंगा.” मुकाबले में अब नए समीकरण संजय सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद मुंगेर की सियासत में हलचल तेज हो गई है. माना जा रहा है कि यह कदम विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर ला सकता है. सूत्रों के मुताबिक, भाजपा इसे “मास्टरस्ट्रोक” मान रही है, जबकि जन सुराज समर्थकों में नाराजगी देखने को मिल रही है. पहले से ही त्रिकोणीय माने जा रहे मुकाबले में अब नए समीकरण बनते दिख रहे हैं. चर्चा में कुमार प्रणय की प्रॉपर्टी बता दें कि मुंगेर सीट से बीजेपी उम्मीदवार कुमार प्रणय इन दिनों अपनी संपत्ति को लेकर चर्चा में हैं. नामांकन के दौरान दिए गए हलफनामे में उन्होंने इतनी बड़ी संपत्ति की जानकारी दी है कि लोग हैरान रह गए. प्रणय की कुल संपत्ति करीब 177 करोड़ रुपये बताई गई है, जिससे वे बिहार चुनाव के सबसे अमीर उम्मीदवारों में शामिल हो गए हैं.

घाटशिला उपचुनाव: झामुमो का तीर या भाजपा का कमल — जनता किसका देगी साथ?

घाटशिला घाटशिला उपचुनाव नजदीक है। 11 नवंबर को घाटशिला सीट पर चुनाव कराया जाएगा। वहीं, बता दें कि घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन, झामुमो के उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के उम्मीदवार रामदास मुर्मू के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है जिससे घाटशिला विधानसभा उपचुनाव दिलचस्प बन गया है। बता दें कि कुल 13 प्रत्याशी घाटशिला विधानसभा उपचुनाव लड़ेंगे। 13 में से 9 प्रत्याशी पहली बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, मुख्य मुकाबला फिलहाल सत्तारूढ़ झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन और भाजपा के बाबूलाल सोरेन के बीच है। एक तरफ झामुमो अपने दिवंगत नेता रामदास सोरेन की विरासत पर भरोसा जता रहे है तो दूसरी ओर, भाजपा नेता चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन मोदी सरकार की योजनाओं के दम पर मैदान में उतरे हैं, लेकिन झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के प्रत्याशी रामदास मुर्मू ने मैदान में उतरकर इस बार मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। रामदास सोरेन के आकस्मिक निधन से खाली हुई इस सीट पर अब उनके बेटे सोमेश चंद्र सोरेन मैदान में हैं और भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन ताल ठोक रहे हैं। दोनों ही संताल समाज से आते हैं। इसलिए इसकी संभावना है कि आदिवासी मत दोनों तरफ जाएगा। भाजपा के अपने सहयोगी लोजपा के सहारे चार प्रतिशत दलित मतों को साथ लाने की कोशिश में हैं। झामुमो गठबंधन के मुस्लिम मंत्री भी अल्पसंख्यक मतों को अपने पाले में लाने के लिए लगे हैं, लेकिन भाजपा आदिवासी मतों के अलावा कुड़मी, पिछड़ी और अन्य दलित मतों पर नजर रख रही है। चंपाई के गहरे मित्र विद्युतवरण महतो की भी इस क्षेत्र में काफी पकड़ है। वे तीन बार से जमशेदपुर लोकसभा के सांसद भी हैं। ज्ञात हो कि रामदास सोरेन एक साल से ज्यादा समय से किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनका 15 अगस्त को एक अस्पताल में निधन हो गया था। इसी के कारण घाटशिला सीट पर उपचुनाव कराने की आवश्यकता पड़ी जिसके लिए 11 नवंबर को मतदान होगा। वहीं, चुनाव आयोग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से लगभग पांच प्रतिशत अधिक है। 2,56,252 मतदाताओं में से 1,31,180 महिलाएं और 1,25,078 पुरुष मतदाता हैं।  

वाम-दल एकजुट: भाकपा (माले) ने JMM को दिया समर्थन, दीपंकर भट्टाचार्य का BJP पर तीखा वार

घाटशिला झारखंड के घाटशिला (अनुसूचित जनजाति) विधानसभा क्षेत्र के लिए हो रहे उपचुनाव में भाकपा (माले) की केंद्रीय कमेटी ने झामुमो उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की है। पार्टी महासचिव कॉमरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने विश्वास व्यक्त किया है कि भाजपा को घाटशिला में करारी हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन एकजुट होकर इस चुनाव में झामुमो के साथ खड़ा है। भट्टाचार्य ने उम्मीद जाहिर की है कि झामुमो उम्मीद्वार सोमेश सोरेन विजय होकर घाटशिला की जनता की आकांक्षाओं को पूरी करेंगे। भाकपा माले के विधायक कॉ अरूप चटर्जी और कॉ चंद्रदेव महतो लगातार घाटशिला की जनता से संपर्क बनाए हुए हैं और शीघ्र ही वहां उनका प्रचार-अभियान शुरू होने वाला है। झारखंड और बिहार में भाजपा लिए कोई जगह खाली नहीं भाकपा माले ने झारखंड की जनता को सतर्क करते हुए कहा कि सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। भाकपा माले ने कहा कि भाजपा को झारखंड में अलग-थलग किए बगैर झारखंडियों के जल-जंगल-जमीन और रोजगार के संघर्ष को अपने मुकाम पर नहीं पहुंचाया जा सकता है। झारखंड की जनता अभी भी भाजपा के डबल इंजन राज में व्याप्त भ्रष्टाचार, कॉरपोरेट लूट, किसानों की जमीन की छिनतई, भुखमरी और बेरोजगारी को भूले नहीं हैं। भाकपा माले ने कहा कि वर्तमान उपचुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त देकर दिल्ली में मोदी सरकार को यह संदेश दे दिया जाए कि झारखंड और बिहार में भाजपा लिए कोई जगह खाली नहीं है।  

नजाकत अहमद शाह को छत्तीसगढ़ में ग्रैंड वेलकम, आतिशबाजी और गुलदस्ते से स्वागत

रायपुर 6 महीने पहले 22 अप्रैल 2025, पहलगाम के बैसरन मैदान में आतंकियों ने 26 पर्यटकों की जान ली थी। आतंकी जब पर्यटकों पर गोलियां बरसा रहे थे, तब वहां छत्तीसगढ़ के बीजेपी कार्यकर्ता अरविंद अग्रवाल और उनके दोस्त भी अपनी-अपनी फैमिली के साथ मौजूद थे। वे सभी खूबसूरत वादियों में रील बना रहे थे। लोकल गाइड नजाकत अहमद शाह ने जब गोलियों की आवाज सुनी तो उसने सभी को नीचे बैठने को कहा। उसने अरविंद अग्रवाल के कुनबे के दो बच्चों को गले लगाकर सुरक्षित बचा लिया। बाद में वह पूरी टोली को खूनी मैदान से बाहर ले जाने में कामयाब हो गए। नजाकत शाह का ग्रैंड वेलकम पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश में गुस्से की लहर दौड़ गई। फिर भारतीय सेना ने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों को ऑपरेशन सिंदूर से सबक सिखाया। पहलगाम हमले के पीड़ित और प्रत्यक्षदर्शी आज भी उस घटना को याद कर सिहर उठते हैं। इस बुरे वक्त में दोस्ती के रिश्ते भी बने। सर्दियों में कंबल का कारोबार करने वाले नजाकत अहमद शाह हर साल की तरह गुरुवार को चिरमिरी पहुंचे। इस बार नजाकत अहमद के लिए यह यात्रा यादगार बन गई। चिरमिरी पहुंचते ही अरविंद अग्रवाल समेत इलाके लोग 50 लोग उनके स्वागत के लिए पहुंचे। सभी ने नजाकत को माला पहनाकर सम्मानित किया। उन्होंने अग्रवाल परिवार के साथ लंच पर वक्त बिताया और अपनी यादें साझा कीं। अरविंद अग्रवाल की बचाई थी जान अरविंद अग्रवाल ने पहलगाम हमले को याद करते हुए बताया कि जब आतंकियों ने गोलीबारी शुरू की, तब नजाकत अहमद शाह ने उन्हें बचा लिया। उस समय उनकी पत्नी और चार साल की बेटी थोड़ी दूर थीं। नजाकत ने सबको नीचे बैठने को कहा, फिर मेरी बेटी और मेरे दोस्त के बेटे को गले लगा लिया, जिससे उनकी जान बच गई। नजाकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले गए और वापस मेरी पत्नी को बचाने के लिए दौड़े। हम कभी नजाकत के एहसान को नहीं भूल सकते हैं। नजाकत अहमद शाह ने बताया कि उनका परिवार सालों से छत्तीसगढ़ में कपड़े बेचने आता रहा है। मुझे बहुत खुशी हुई कि पहलगाम से लौटने के बाद भी अग्रवाल परिवार उनसे फोन पर संपर्क में रहा। अब उनसे मिलकर बहुत अच्छा लग रहा है। शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ हमारे लिए घर जैसा है और हम हर साल तीन महीने व्यापार के लिए यहां आते हैं। आतिशबाजी से स्वागत नजाकत अहमद शाह जब अरविंद अग्रवाल के घर पहुंचे तो उनका ग्रैंड वेलकम हुआ। अरविंद अग्रवाल के घर पहुंचते ही बीजेपी नेता ने पहले गुलदस्ता देकर स्वागत किया। फिर आतिशबाजी की गई। इस स्वागत से नजाकत अहमद शाह भी गदगद थे।

BJP में 9 महीने की खींचतान खत्म, जिलाध्यक्ष ने नई कार्यकारिणी बनाई

गुना नौ महीने से बहुप्रतीक्षित गुना भाजपा की जिला कार्यकारिणी में महामंत्री पद पाने की दौड़ में लगी जोड़-तोड़ की राजनीति को उस समय विराम लग गया जब गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिकरवार ने अपने नौ महीने के कार्यकाल के बाद अपनी जिला कार्यकारिणी घोषित कर दी। इस 22 सदस्यीय कार्यकारिणी में 9 केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थकों को महत्वपूर्ण पद मिले है। विधायक के एक समर्थक को मिली जगह, बागी बाहर विधायक पन्नालाल शाक्य के एक मात्र समर्थक संतोष धाकड़ को महामंत्री पद से नवाजा गया है। वहीं सिंधिया समर्थक के रूप में पूर्व पार्षद रविन्द्र रघुवंशी और चन्द्रप्रकाश अहिरवार को महामंत्री बनाया गया है। इस कार्यकारिणी में आपस में लड़ने वाले भाजपा के उपाध्यक्ष आरएन यादव और हीरेन्द्र सिंह चौहान बंटी बना को बाहर का रास्ता दिखाया है। इस समाज ने किया कार्यकारिणी का विरोध इस कार्यकारिणी के बनते ही विरोध के स्वर शुरू हो गए हैं। गुर्जर समाज के सीताराम गुर्जर ने कहा कि इस कार्यकारिणी में गुर्जर समाज को स्थान नहीं देकर हमारे समाज के साथ धोखा किया है। जबकि यह समाज जिले में बहुतायत संख्या में है। भाजपा की जिला कार्यकारिणी को घोषित न किए जाने को लेकर पत्रिका ने 25 अक्टूबर के अंक में खबर प्रकाशित की थी।  जिला कार्यकारिणी में इन नेताओं मिले ये पद     जिला उपाध्यक्षः गिर्राज भार्गव,प्रबल प्रताप सिंह, महेन्द्र किरार, शिवपाल परमार, सुशील दहीफले, जगदीश मीना रिटायर्ड आरटीओ, गायत्री भील. गोमती ओझा     जिला महामंत्रीः संतोष धाकड़, रविन्द्र रघुवंशी, चन्द्रप्रकाश अहिरवार     जिला मंत्रीः कुसुमलता कुशवाह, रुद्र देव सिंह, श्रीकृष्ण भोला सोनी, अनिल जैन रुपश्री, सुनीता बंजारा, वीर बहादुर यादव, उमा लोधी, आशा शर्मा     कोषाध्यक्ष- मोहित नामदेव     सह कोषाध्यक्ष- राजेश साहू     कार्यालय मंत्री- सुरेन्द्र जीत सिंह     सह कार्यालय मंत्री बृज नारायण शर्मा     सह कार्यालय मंत्री- शंभू सेन     मीडिया प्रभारी अंकुर श्रीवास्तव     सह मीडिया प्रभारी-ओमप्रकाश राठौर

मध्य प्रदेश में निगम-मंडलों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू, सभी विभागों में अलग-अलग समय पर होगी भर्ती

भोपाल  मध्य प्रदेश भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी घोषित किए जाने के बाद राजनीतिक नियुक्तियों का दौर आरंभ हो गया है। विधानसभा चुनाव 2023 के बाद से ही निगम- मंडल और आयोग में नियुक्ति के लिए कई नेता इंतजार कर रहे थे, अब लगभग दो वर्ष बाद सरकार नियुक्तियों के लिए तैयार तो हुई है लेकिन एकसाथ नियुक्तियां करने के बजाय छोटी-छोटी सूची निकालने की तैयारी है। पिछले सप्ताह दिव्यांगजन आयुक्त के पद पर अजय खेमरिया की नियुक्ति का आदेश निकालने के बाद अब निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष पद पर अटल बिहारी वाजपेयी मप्र हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. खेमसिंह डेहरिया की नियुक्ति करने की प्रक्रिया चल रही है। इस आयोग का कार्यकाल लगभग एक वर्ष पूर्व समाप्त हो गया था, लेकिन नियुक्ति न होने से पद एक्सटेंशन पर चल रहा है। नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है सूत्रों के मुताबिक फिलहाल कई विभागों के अधीन आने वाले निगम- मंडलों में नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। उच्च शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले निजी विनियामक आयोग में सचिव के पद पर दिनेश गुर्जर की नियुक्ति किए जाने की संभावना है। इसके अलावा आयोग के प्रशासनिक सदस्य के रूप में सेवानिवृत्त आइएएस महेश चौधरी को नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ते भी दिए जाएंगे विधानसभा चुनाव के बाद जब डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया गया था, तब चौधरी उनके ओएसडी नियुक्त हुए थे। इसके बाद अब राजनीतिक नियुक्तियां आरंभ होंगी। मध्य प्रदेश में भाजपा ने कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाने की योजना बनाई है। इसके तहत दीनदयाल अंत्योदय समितियों का पुनर्गठन भी किया जाएगा, जो प्रशासनिक अधिकार और सरकारी योजनाओं की निगरानी का काम करेंगी। कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने के साथ-साथ उन्हें यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ते भी दिए जाएंगे। यह योजना 34 साल बाद पहली बार लागू की जा रही है। मिलेंगे प्रशासनिक अधिकार पहले चरण में गांव से राजधानी भोपाल तक दीनदयाल अंत्योदय समितियों का गठन किया जाएगा। इन्हें मध्य प्रदेश (लोक अभिकरणों के माध्यम से) दीनदयाल अंत्योदय कार्यक्रम का क्रियान्वयन अधिनियम 1991’ और 20 सूत्रीय कार्यक्रम एवं क्रियान्वयन कमेटी के तहत अधिकार संपन्न बनाया जाएगा। एक्ट होने के कारण इन समितियों को कई तरह के प्रशासनिक अधिकार भी मिल जाएंगे। इसके बाद सहकारी समितियों के चुनाव करवाकर गांव से लेकर राजधानी तक की सहकारी समितियों में कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। सत्ता में कार्यकर्ताओं की भागीदारी सत्ता में कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने के माडल पर काम कर रही भाजपा सरकार ने सरकारी योजनाओं की राजधानी से ग्राम पंचायत स्तर तक निगरानी के लिए दीनदयाल अंत्योदय समितियों के पुनर्गठन का रास्ता साफ कर दिया है। दीनदयाल अंत्योदय समितियों में राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री और जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री अध्यक्ष होंगे। हर स्तर पर गठित समितियों में एससी और एससी वर्ग की महिलाओं के लिए पद आरक्षित रहेंगे। यानी सत्ता में कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

महेंद्र नागर निष्कासित, CM मोहन का स्पष्ट संदेश: किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा

गुना   मध्य प्रदेश की भाजपा हाईकमान ने गुना किसान हत्या के आरोपी महेंद्र नागर को बीजेपी से निष्कासित कर दिया गया है। ग्राम गणेशपुरा के बूथ अध्यक्ष रहे महेंद्र नागर समेत 13 ज्ञात और एक अज्ञात आरोपी के विरुद्ध फतेहगढ़ थाने में हत्या का मामला दर्ज हुआ है। आरोप है कि 6 बीघा जमीन को लेकर हुए विवाद में आरोपियों ने पड़ोसी रामस्वरुप की हत्या कर दी। महेंद्र नागर का इलाके में दबदबा था। मामला सामने आने के बाद एसपी अंकित सोनी के निर्देश पर बनी पुलिस की टीमों ने एक आरोपी को हिरासत में ले लिया है। बाकी आरोपी भी पुलिस के रडार पर हैं, जिनकी भी जल्दी ही गिरफ्तारी होने की बात सूत्र बता रहे हैं। CM मोहन बोले- किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा मामले में सीएम मोहन ने संज्ञान लेते हुए पुलिस और प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जमीनी विवाद से शुरू हुआ था मामला यह पूरा विवाद गुना जिले के गणेशपुरा गांव का है, जहां नागर समाज के दो पक्षों में जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। यह विवाद हिंसक झड़प में बदल गया और 40 वर्षीय किसान रामस्वरूप नागर की थार गाड़ी से कुचलकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में 14 नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या, षड्यंत्र और अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

भाजपा को घाटशिला में बड़ा झटका, हेमंत साहू ने छोड़े सभी पद

जमशेदपुर घाटशिला उपचुनाव नजदीक है। इसके चलते भाजपा ने तैयारी शुरू कर दी है। भाजपा ने घाटशिला उपचुनाव के लिए आक्रामक अभियान शुरू कर दिया है। वहीं, इसी बीच जमशेदपुर महानगर जिला कार्यसमिति के सदस्य हेमंत साहू ने भाजपा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता व सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। साहू ने अपना त्यागपत्र भाजपा जमशेदपुर महानगर के जिलाध्यक्ष सुधांशु ओझा को सौंपा है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि वे पार्टी के प्रत्येक दायित्व और प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे रहे हैं और उनके इस्तीफे को स्वीकार किया जाए। हेमंत साहू ने अपने त्यागपत्र में इस्तीफे का कोई विशेष कारण नहीं बताया है। वहीं, पार्टी नेतृत्व की ओर से इस पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। बता दें कि घाटशिला उपचुनाव 11 नवंबर को होगा। ऐसे में हेमंत साहू का सभी पदों से इस्तीफा देना इसके पीछे जरूर कोई बड़ा कारण छुपा हो सकता है। अभी तक पार्टी नेतृत्व की ओर से इस पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।  

सियासी भूचाल: BJP ने एक झटके में 4 नेताओं को दिखाया दरवाज़ा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) में अनुशासनहीनता का बम फट पड़ा है। पार्टी ने अपने चार वरिष्ठ नेताओं को निष्कासित कर यह साफ कर दिया है कि NDA के साझा उम्मीदवारों के खिलाफ जाने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। चुनावी मौसम में यह कार्रवाई बीजेपी के अंदर बढ़ती असंतोष की आवाज़ों को शांत करने की रणनीति मानी जा रही है। पार्टी लाइन से हटे, तो हुई कार्रवाई सूत्रों के मुताबिक, जिन चार नेताओं पर गाज गिरी है, उनमें वरुण सिंह, अनूप कुमार, पवन यादव और सूर्य भान सिंह शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये चारों नेता NDA समर्थित उम्मीदवारों के विरुद्ध अलग-अलग सीटों से स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर गए थे। पार्टी नेतृत्व ने इसे सीधी अवज्ञा मानते हुए उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है। कहां-कहां से थे उम्मीदवार वरुण सिंह बहादुरगंज, अनूप कुमार गोपालगंज, पवन यादव कहलगांव और सूर्य भान सिंह बड़हरा विधानसभा सीट से चुनावी अखाड़े में थे। इन चारों पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी के फैसले और अनुशासन का उल्लंघन करते हुए गठबंधन के उम्मीदवारों के खिलाफ ताल ठोंकी। JDU ने भी की सख्ती इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यू) ने भी बागी सुर अपनाने वाले 16 नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया था। पार्टी के प्रदेश महासचिव चंदन कुमार सिंह ने उनके निष्कासन की घोषणा की थी। JDU का कहना था कि गठबंधन के खिलाफ जाकर चुनाव लड़ना या संगठन को कमजोर करना सीधे तौर पर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। कौन-कौन हुए बाहर जिन नेताओं पर कार्रवाई हुई, उनमें कई पूर्व विधायक, मंत्री और एमएलसी शामिल हैं — जैसे मुंगेर के पूर्व मंत्री शैलेश कुमार, सीवान के श्याम बहादुर सिंह, भोजपुर के रणविजय सिंह, शेखपुरा के सुदर्शन कुमार, और गोपालपुर के विधायक नरेन्द्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल आदि। इन सभी को पार्टी से बाहर कर गठबंधन में एकता का संदेश देने की कोशिश की गई है। चुनावी रणनीति पर बड़ा असर बीजेपी और जेडीयू दोनों की यह सख्ती इस बात का संकेत है कि NDA इस बार बगावती सुरों को किसी भी कीमत पर दबाना चाहता है। अमित शाह के हालिया बिहार दौरे के बाद यह स्पष्ट है कि पार्टी बूथ स्तर तक संगठन को मज़बूत करने और विरोधी खेमे को एकजुटता का संदेश देने की रणनीति पर काम कर रही है।