samacharsecretary.com

हैदराबाद में महिलाओं के साथ गंदा खेल? मंत्री ने AIMIM पर उठाए सवाल

हैदराबाद केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार ने आरोप लगाए हैं कि अन्य राज्यों से हैदराबाद आ रहीं हिंदू लड़कियों पर अत्याचार हो रहा है। उन्होंने इसके आरोप 'असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM के समर्थन' से संचालित एक मादक पदार्थ गिरोह पर लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि यहां पुराने शहर में हिंदू नाबालिग लड़कियों को निशाना बना रहा है, उनका अपहरण कर रहा है और उन पर हमला कर रहा है। भाजपा नेता ने कहा है कि उन्होंने निशाना बनी महिलाओं के परिवार से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।  रिपोर्ट के अनुसार, संजय ने कहा, 'पश्चिम बंगाल में हिंदुओं के पास कोई सेफ्टी कवर नहीं है…। अब वो ऐसी ही स्थिति का सामना हैदराबाद के पुराने शहर में कर रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'शुरुआत में वो बर्थडे पार्टी के नाम पर स्कूल से एक लड़की को फुसलाकर मुस्लिम क्लासमेट के घर ले गए, जहां उसे ड्रग्स मिली हुई चॉकलेट दी गई…। बाद में उसे किडनैप किया गया और 6 दिनों तक उनपर अत्याचार किया गया।' उन्होंने कहा, 'जब लड़की के माता-पिता पुलिस के पास पहुंचे, तो वापस भेज दिया गया और बगैर किसी जांच के केस बंद कर दिया गया। बाद में उस लड़की को वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल किया गया और अन्य दोस्तों को भी लाने के लिए दबाव बनाया गया।' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पीड़िता ने 9 और ऐसी ही लड़कियों के नाम बताए हैं, जो ऐसे ही हालात से गुजरी हैं। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि स्थानीय पुलिस डरी हुई है, क्योंकि वह AIMIM के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाए कि एक नाबालिग को नशेड़ियों के एक गिरोह ने अगवा कर लिया था। उन्होंने कहा कि जब वह घर लौटी और परिवार ने पुलिस में शिकायत की, तो मामले को बगैर उचित जांच के बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा, 'लड़की अब लत से जूझ रही है और उसका बर्ताव बदल गया है। सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य सबूत होते के बाद भी गैंग के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।' खास बात है कि उन्होंने सीसीटीवी की तस्वीरें भी दिखाईं, जहां दो युवक एक लड़की का अपहरण करते नजर आ रहे हैं। हिंदू स्क्वॉड बनाने की चेतावनी संजय का कहना है कि ऐसे कथित अपराध की एक पीड़िता के पैरेंट्स ने आत्महत्या की कोशिश की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी से तत्काल कार्रवाई करने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि पुराने शहर में हिंदू प्रोटेक्शन स्क्वॉड तैयार किए जाएंगे। पुलिस क्या बोली इधर, चार मीनार पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा, 'एक जांच की गई थी और लड़की का पता लगा लिया गया था, लेकिन हमें यौन उत्पीड़न के कोई भी सबूत नहीं मिले। लड़की पहले भी दो बार गुमशुदा हो चुकी थी।' रिपोर्ट के अनुसार, एक अधिकारी ने कहा, 'सबसे ताजा मामले में ही, एक लड़की का कहा है कि वह आरोपी के साथ मर्जी से गई थी। वह नाबालिग है और ऐसे में आरोपी के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज किया गया है।'

कांग्रेस विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा— बृहस्पति सिंह को बीजेपी जॉइन कर लेनी चाहिए अगर पार्टी से असंतुष्ट हैं

रायपुर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर प्रदेश में सियासत जारी है. इस बीच शनिवार को कांग्रेस से निष्कासित पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह ने कई गंभीर आरोप लगाए. उनके बयानों के बाद जिला कांग्रेस कमेटी ने थाने पहुंचकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की. इस पर विधायक पुरंदर मिश्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर बृहस्पत सिंह कांग्रेस में परेशान हैं, तो वे बीजेपी में शामिल हो जाएं. बीजेपी बड़े दिल वाली पार्टी है. रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि बृहस्पत सिंह कांग्रेस के पुराने आदिवासी नेता हैं. वे अपने मन की बात खुलकर बोल देते हैं. कांग्रेस का कल्चर हमेशा से आदिवासियों को अपमानित और बेइज्जत करने वाला रहा है. पहले भी कांग्रेस के आदिवासी नेता अमरजीत भगत का माइक छीना गया था और अब बृहस्पत सिंह को अपशब्द कहकर अपमानित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों का अपमान उचित नहीं. इसलिए कांग्रेस न लोकसभा और न विधानसभा कहीं भी नहीं है, फिर भी वे घमंड कर रहे. अगर बृहस्पत सिंह कांग्रेस में परेशान हैं, तो बीजेपी में आ जाएं. हमारी पार्टी विशाल हृदय वाली है, समुद्र में एक लोटा पानी आए या चला जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता है. बता दें कि शनिवार को कांग्रेस से निष्कासित पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह ने वीडियो जारी कर पार्टी के कुछ नेताओं के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए. 5 से 7 लाख रुपए लेकर जिला अध्यक्ष की नियुक्ति का आरोप लगाया गया. इस संबंध में छत्तीसगढ़ सह प्रभारी जरिता लैतफलांग पर कड़ी कार्रवाई की मांग की. वायरल वीडियो में पूर्व कांग्रेस विधायक बृहस्पति सिंह ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन कांग्रेस प्रभारी शैलजा कुमारी ने भी पैसे लेकर टिकट वितरण किया था. इसके कारण कांग्रेस को सत्ता से हाथ धोना पड़ा.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का बयान चर्चा में, अंता उपचुनाव को लेकर भाजपा पर साधा निशाना

अजमेर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा है कि भाजपा ने अंता विधानसभा क्षेत्र में 28 मुकदमे वाले व्यक्ति को जिताया था, जिसके कारण अब उपचुनाव की नौबत आई है। उन्होंने कहा कि वहां की जनता अब ठगा सा महसूस कर रही है और इस बार कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद जैन भाया को भारी मतों से समर्थन दे रही है। डोटासरा शुक्रवार को अजमेर पहुंचे, जहां उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की धर्मपत्नी इंदिरा देवी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान जयपुर रोड पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए स्वागत के बीच उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर तीखे प्रहार किए। डोटासरा ने कहा कि भाजपा का दो साल का शासन कुशासन साबित हुआ है। राज्य में विकास कार्य ठप हैं और जनता कांग्रेस सरकार की पांच साल की कल्याणकारी योजनाओं को याद कर रही है। उन्होंने कहा कि अंता में कांग्रेस के प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया एक समाजसेवी और लोकप्रिय व्यक्ति हैं, जिन्हें 36 कौमों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 11 साल में जितने वादे किए, उनमें से कोई भी पूरा नहीं किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह पौने दो साल जैसे पोपा बाई का राज चल रहा है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार चरम पर है और जिन योजनाओं से जनता को सीधा लाभ मिलता था, उन्हें समाप्त कर दिया गया है, ऐसे में जनता कांग्रेस के पक्ष में मतदान करेगी। उन्होंने कहा कि पहले भाजपा ने आपराधिक छवि वाले उम्मीदवार को मैदान में उतारा था, उसी का परिणाम है कि दोबारा चुनाव कराना पड़ रहा है। जनता की गाढ़ी कमाई के दो सौ करोड़ रुपए इस चुनाव में खर्च हो रहे हैं क्योंकि उन्होंने गलत व्यक्ति का चयन किया था। भरतपुर में मंत्री के सामने कार्यकर्ताओं के हंगामे पर प्रतिक्रिया देते हुए डोटासरा बोले कि आने वाले समय में ये ही कार्यकर्ता हर जगह इनके कपड़े फाड़ेंगे। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए डोटासरा ने कहा कि मोदी सरकार वोट चोरी से बनी है। हरियाणा, महाराष्ट्र और जयपुर में इसी तरह का खेल हुआ है। राहुल गांधी सबूतों के साथ अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग जवाब नहीं दे रहा है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि दिलावर जी पौने दो साल से क्या कर रहे हैं, यह उनसे पूछा जाए। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता या बच्चों के हित में कोई बात नहीं की। बस एक पेड़ मां के नाम लगाओ का नारा दे रहे हैं और दूसरी ओर लाखों पेड़ अडानी को कटवाने दे रहे हैं। डोटासरा ने कहा कि राजस्थान की जनता अब बीजेपी के कुशासन से ऊब चुकी है और कांग्रेस की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। अंता उपचुनाव में कांग्रेस की जीत तय है और यह परिणाम आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए संकेत साबित होगा।

बिहार चुनाव में वोटिंग बढ़ी, AAP ने भाजपा पर टिकट बांटकर वोटिंग प्रभावित करने का लगाया आरोप

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्डतोड़ वोटिंग को राजनीतिक दल अलग-अलग चश्मे से देख रहे हैं। कोई इसे सरकार के पक्ष में जनता का समर्थन बता रहा है तो किसी को बदलाव की बयार दिख रही है। इस बीच आम आदमी पार्टी (आप) ने इसमें एक नया एंगल जोड़ दिया है। पार्टी ने इसे 'वोट चोरी' का दूसरा हिस्सा बताते हुए कहा है कि भाजपा ने अपने वोटर्स को टिकट देकर दूसरे शहरों से बिहार भेजा, इसी वजह से 75 साल में सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने एक यूट्यूब वीडियो के सहारे दावा किया कि लाखों वोटर्स को भाजपा ने अलग-अलग शहरों से बिहार भेजा था। उन्होंने जिस वीडियो को शेयर किया है उसमें कुछ लोग गले में भाजपा का पटका लटकाए दिख रहे हैं। वह कहते हैं कि वोट देने के लिए बिहार जा रहे हैं और टिकट की व्यवस्था भाजपा की ओर से की गई है। बताया गया कि हरियाणा के करनाल से भाजपा ने वोटर्स को बिहार भेजा था। भारद्वाज ने वीडियो के साथ लिखा, 'भाजपा के करनाल के जिला अध्यक्ष स्टेशन पर मौजूद हैं। भाजपा ने संगठित तरीके से वोटरों को चिन्हित किया। SIR में भाजपा के द्वारा चिन्हित वोटरों की वोट नहीं काटी गई। फिर लाखों तादाद में वोटरों को अलग अलग शहरों से चुनाव से पहले बिहार भेजा गया। ट्रेन की टिकट आदि सारे इंतजाम भाजपा ने किए। इस तरीके से बिहार की वोटिंग 75 साल के सबसे ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची।' बिहार में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान बिहार विधानसभा के लिए पहले चरण के मतदान में गुरुवार को 3.75 करोड़ से अधिक मतदाताओं में से 64.66 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जो राज्य में 'अब तक का सबसे ज्यादा' मतदान प्रतिशत है। इसमें अभी और इजाफे की संभावना है। पहले चरण में 18 जिलों के कुल 121 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ, जहां मतदाताओं की कुल संख्या 3.75 करोड़ से अधिक थी। बिहार में इससे पहले सबसे ज्यादा 62.57 प्रतिशत मतदान 2000 में दर्ज किया गया था। कोविड-19 महामारी के साये में हुए 2020 के विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत 57.29 रहा था।

‘ताई-भाई’ का दौर खत्म? मालवा में नई पीढ़ी की एंट्री और 2028 के लिए बिछ रही नई बिसात

इंदौर   मध्य प्रदेश में बीजेपी की नई कार्यकारिणी की घोषणा ने राजनीति में हलचल मचा दी है. पहले प्रदेश स्तर की टीम बनी, फिर इंदौर शहर की कार्यकारिणी घोषित हुई. इन दोनों में कई नए चेहरे शामिल किए गए हैं. इससे सवाल उठ रहा है कि क्या इंदौर और मालवा क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे पुराने गुटों का दौर अब खत्म होने की ओर है? इंदौर की राजनीति में दशकों से दो बड़े नाम हावी रहे हैं – पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, जिन्हें प्यार से ‘ताई’ कहा जाता है, और कैलाश विजयवर्गीय, जो ‘भाई’ के नाम से मशहूर हैं. दोनों के अपने-अपने समर्थक हैं और कई बार इनके बीच खींचतान भी सामने आई है. लेकिन नई सूची में इन दोनों गुटों के पुराने चेहरों को जगह नहीं मिली. इसके बजाय युवा और नए नेताओं को मौका दिया गया है. सबसे चर्चित नाम है गौरव रणदिवे का. उन्हें प्रदेश कार्यकारिणी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है. गौरव विजयवर्गीय के करीबी माने जाते हैं. उनकी नियुक्ति के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने एक बयान दिया – “मैं जो पौधा लगाता हूं, उसे कभी नहीं काटता.” यह बात सुनने में साधारण लगती है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे गहरा संदेश माना जा रहा है. मतलब साफ है कि विजयवर्गीय अपने चुने हुए लोगों को आगे बढ़ाना चाहते हैं और उन्हें मजबूत करना उनका पुराना तरीका है. इंदौर नगर कार्यकारिणी में भी यही पैटर्न दिखा. ताई और भाई के पुराने साथियों को बाहर रखा गया. उनकी जगह नए कार्यकर्ताओं और युवा नेताओं को शामिल किया गया. कुछ पुराने नेता इससे नाराज भी हैं. पार्टी के अंदर खुसुर-फुसुर की खबरें आ रही हैं, लेकिन बीजेपी हाईकमान ने फिलहाल स्थिति को संभाल लिया है. असंतोष को दबाने की कोशिश की जा रही है. दरअसल, जब प्रदेश कार्यकारिणी में गौरव रणदिवे को जगह मिली तो कैलाश विजयवर्गीय का एक बयान सुर्खियों में रहा। उन्होंने कहा- मैं जो पौधा लगाता हूं, उसे काटता नहीं हूं। जानकारों के मुताबिक, प्रदेश कार्यकारिणी में गौरव रणदिवे को शामिल करना इंदौर से एक नए पावर सेंटर की शुरुआत माना जा रहा है। इसके बाद जब इंदौर नगर कार्यकारिणी का ऐलान हुआ तो उसमें भी ताई और भाई गुट के चेहरे लगभग गायब थे। इस कार्यकारिणी में नए चेहरों को आगे बढ़ाया गया है। इस बदलाव के बाद असंतोष के सुर भी सुनाई दिए हैं, मगर बीजेपी ने जैसे-तैसे डैमेज कंट्रोल किया है। ताई और भाई के गुट को तवज्जो न देकर नए गुटों के नेताओं को आगे बढ़ाकर पार्टी क्या मैसेज देना चाहती है? क्या 2028 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से नई लीडरशिप तैयार हो रही है? भास्कर ने इसे लेकर एक्सपर्ट्स से बात की। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह बदलाव 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है. बीजेपी नहीं चाहती कि पुरानी गुटबाजी पार्टी को नुकसान पहुंचाए. इसलिए नई पीढ़ी को तैयार करने का प्लान है. इंदौर बीजेपी का गढ़ रहा है. यहां से आठ विधानसभा सीटें हैं और सभी पर पार्टी का कब्जा है. लेकिन लंबे समय तक एक ही चेहरों पर निर्भर रहने से कार्यकर्ताओं में थकान आ सकती है. नई लीडरशिप से जोश भरने की कोशिश है. कुल मिलाकर, यह बदलाव संगठन को मजबूत करने और भविष्य की तैयारी का हिस्सा लगता है. पुरानी गुटबाजी को कम करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है. अब देखना यह है कि नए चेहरे कितना असर दिखा पाते हैं और क्या वाकई इंदौर की राजनीति में नया दौर शुरू हो रहा है. पार्टी के भीतर एकता बनी रहेगी या फिर नई खींचतान शुरू होगी – यह आने वाला वक्त बताएगा. लेकिन फिलहाल बीजेपी ने साफ संदेश दे दिया है कि अब समय नई पीढ़ी का है. ताई-भाई के युग से हटकर युवाओं की नई खेमेबंदी इंदौर की बीजेपी में दशकों तक सत्ता के दो ही केंद्र माने जाते रहे- 'भाई' यानी कैलाश विजयवर्गीय और 'ताई' यानी सुमित्रा महाजन। संगठन से लेकर टिकट वितरण तक, हर फैसला इन्हीं दो ध्रुवों के इर्द-गिर्द घूमता था। लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है। एक नया युवा नेतृत्व आकार ले रहा है, जो इन दोनों के साये से बाहर अपनी पहचान बना रहा है। शहर की राजनीति में अब दो नए शक्ति केंद्र उभरते दिख रहे हैं। 1. नया युवा गुट: इस गुट का नेतृत्व गौरव रणदिवे, विधायक मनोज पटेल, एकलव्य गौड़ और सावन सोनकर कर रहे हैं। ये चारों नेता अक्सर एक साथ पोस्टरों और कार्यक्रमों में नजर आते हैं। यह गुट सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय है और राजनीति के नए तौर-तरीकों पर जोर देता है। 2. पुराना संरचनात्मक गुट: इस गुट का नेतृत्व विधायक रमेश मेंदोला, विधायक गोलू शुक्ला और नवनियुक्त नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के हाथ में माना जा रहा है। नगर टीम में इनके समर्थकों को ज्यादा पद मिले हैं, जिससे संगठन के भीतर इनका प्रभाव स्पष्ट दिखता है। पुराने गुटों को नई कार्यकारिणी में ज्यादा तवज्जो नहीं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (ताई) के समर्थकों को इस कार्यकारिणी में कोई स्थान नहीं मिला है। पूर्व पार्षद सुधीर देड़गे और उनके दो अन्य समर्थकों के नामों पर चर्चा थी, लेकिन उन्हें भी शामिल नहीं किया गया। सांसद शंकर लालवानी खेमे से कंचन गिदवानी को मंत्री बनाया गया है, जबकि महापौर के करीबी भरत पारख को उपाध्यक्ष पद मिला है। सूत्रों के अनुसार, सांसद शंकर लालवानी ने नगर टीम के लिए चार नाम सुझाए थे, जिनमें से केवल एक नाम (कंचन गिदवानी) को जगह मिली। इसमें भी वरिष्ठता का ध्यान नहीं रखा गया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के गुट के नेताओं को भी कार्यकारिणी में अपेक्षित स्थान नहीं मिला। विजयवर्गीय समर्थक भूपेंद्र केसरी को महामंत्री पद की चर्चा के बाद उपाध्यक्ष पद से ही संतोष करना पड़ा। वहीं, गोविंद पंवार को सह कार्यालय मंत्री बनाया गया है।

अंता सीट पर गर्म हुआ माहौल, जीत के लिए कांग्रेस-भाजपा ने झोंकी पूरी ताकत

जयपुर/बारां अंता विधानसभा उपचुनाव की जंग अब अपने अंतिम और निर्णायक दौर में है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने इस चुनावी रण को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस ने मैदान में करीब 300 नेताओं की फौज उतार दी है, जिनमें सांसदों से लेकर पीसीसी पदाधिकारियों तक शामिल हैं। हर गांव और हर बूथ पर नेताओं को तैनात किया गया है ताकि मतदाता तक सीधा संपर्क बनाया जा सके। वहीं बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी प्रचार में उतर चुकी हैं। आज अंता में वसुंधरा राजे और सीएम भजनलाल शर्मा का संयुक्त रोड शो रखा गया है। पार्टी ने अब तक 272 नेताओं को जिम्मेदारी दी है, जिनमें 40 बड़े नेताओं को स्टार प्रचारक बनाया गया है। चुनाव प्रभारी, सह प्रभारी और स्थानीय स्तर पर ग्राम पंचायतवार 170 प्रभारी नियुक्त किए गए हैं। हर पंचायत में 3-3 नेताओं को जिम्मेदारी देकर कांग्रेस ने बूथ स्तर पर माइक्रो मैनेजमेंट पर जोर दिया है। कांग्रेस विधायक सचिन पायलट बुधवार को अंता में रोड शो कर चुके हैं।  गोविंद डोटासरा, सुखजिंदर रंधावा, सचिन पायलट और टीकाराम जूली जैसे दिग्गज नेता पहले ही प्रचार में जुट चुके हैं। आने वाले दिनों में अशोक गहलोत के भी अंता पहुंचने की संभावना है। भाजपा की रणनीति और बड़ा रोड शो वहीं भाजपा भी अब पूरी ताकत से मैदान में उतर रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आज 6 नवंबर (गुरुवार) को अंता में भव्य रोड शो करेंगे। उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, सांसद दुष्यंत सिंह, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और भाजपा प्रत्याशी मोरपाल सुमन भी एक विशेष रथ पर सवार होंगे। यह पहला मौका होगा जब भजनलाल शर्मा और वसुंधरा राजे एक साथ किसी सीट पर प्रचार करते दिखाई देंगे। वसुंधरा राजे पहले ही प्रचार अभियान की शुरुआत कर चुकी हैं। रोड शो की तैयारियां पूरी रोड शो दोपहर 12 बजे मांगरोल के सुभाष चंद्र बोस सर्किल से शुरू होकर आज़ाद चौक होते हुए सीसवाली चौराहा तक निकाला जाएगा। पूरे मार्ग पर 51 स्वागत द्वार सजाए गए हैं और जगह-जगह कार्यकर्ता फूल बरसाकर स्वागत करेंगे। कार्यक्रम में महिला और युवा कार्यकर्ताओं की बड़ी भागीदारी रहेगी। भाजपा का दावा है कि यह रोड शो क्षेत्र में पार्टी के प्रति जनसमर्थन को और मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का कार्यक्रम सुबह 10:50 बजे जयपुर से प्रस्थान के बाद झालावाड़ होते हुए मांगरोल पहुंचेगा। दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक रोड शो के बाद वे पुनः जयपुर लौटेंगे। चुनावी महत्व अंता उपचुनाव से भले ही विधानसभा का समीकरण न बदले, लेकिन दोनों दल इसे राजनीतिक संदेश देने का मौका मान रहे हैं। भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री बनने के बाद से राजस्थान में अब तक 7 उपचुनाव हो चुके हैं। लेकिन यह पहला उपचुनाव है जब सीएम भजनलाल शर्मा व पूर्व सीएम वसुंधरा राजे एक साथ रोड शो में नजर आएंगे। वहीं कांग्रेस के भी तमाम बड़े नेता लगातार अंता में आ रहे हैं। छोटी-छोटी सभाओं तक में जा रहे हैं। कांग्रेस सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश में है, जबकि भाजपा सत्ता में जनसमर्थन दिखाने के लिए पूरा जोर लगा रही है। आखिरी तीन दिनों में दोनों दलों के दिग्गज नेताओं के बीच सियासी शक्ति प्रदर्शन देखने को मिलेगा।  

ओडिशा उपचुनाव में गरजे सीएम विष्णुदेव: बोले, भाजपा लाएगी परिवर्तन की लहर

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज पड़ोसी राज्य ओडिशा के नुआपाड़ा विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की धुआंधार चुनावी हुंकार भरने जा रहे हैं. संगठन के निर्देश पर सीएम साय, विधायक पुरंदर मिश्रा और सह-प्रभारी लता उसेंडी के साथ पंचमपुर में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे. ओडिशा रवाना होने से पहले सीएम साय ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि “नुआपाड़ा में भाजपा की बहुमत वाली जीत पक्की है. हम विकास की गारंटी दे रहे हैं.” बता दें, नुआपाड़ा सीट दिवंगत बीजेडी नेता राजेंद्र ढोलकिया के निधन से खाली हुई है. 11 नवंबर को मतदान होने हैं और 14 को नतीजे सामने आएंगे. भाजपा ने इस उपचुनाव के लिए 40 स्टार प्रचारकों की फौज उतारी है, जिसमें ओडिशा सीएम मोहन माझी, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, अश्विनी वैष्णव समेत मुख्यमंत्री साय शामिल हैं. इसी बीच, एग्रीस्टेक पोर्टल में रिकॉर्ड पंजीयन के बावजूद कुछ किसानों के खेत का रकबा कम दिखने की शिकायतें सामने आईं. सीएम साय ने तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिए-ई-केवाईसी में गड़बड़ी सुधारो, डुप्लीकेशन हटाओ. इस बार पिछले साल से एक लाख ज्यादा किसानों ने पंजीयन कराया. धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू, पारदर्शिता के लिए कमांड कंट्रोल सेंटर भी गठित. बिहार में पहले चरण के मतदान से ठीक पहले सीएम साय ने पटना में हुंकार भरी. उन्होंने कहा कि एनडीए स्पष्ट बहुमत से सरकार बना रहा है. राजद-कांग्रेस ने तो पशुओं का चारा भी खा लिया, लेकिन बिहार की जनता पीएम मोदी पर भरोसा जता रही है.

पहले चरण की वोटिंग से पहले बड़ा झटका, संजय सिंह ने जन सुराज छोड़ BJP में किया शामिल

मुंगेर  विधानसभा चुनाव से ठीक एक दिन पहले मुंगेर सीट पर बड़ा उलटफेर हो गया है. जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार संजय सिंह ने अचानक पार्टी छोड़कर भाजपा (एनडीए) का दामन थाम लिया है. संजय सिंह ने आज भाजपा प्रत्याशी कुमार प्रणय की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली और उनके समर्थन में उतर आए. इस कदम से मुंगेर में चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं. मतदान से ठीक पहले जन सुराज के उम्मीदवार का भाजपा में शामिल होना विपक्ष के लिए झटका साबित हो सकता है. अब देखना यह होगा कि इस फैसले का असर मतदान पर कितना पड़ता है. बता दें कि मुंगेर में कल वोटिंग है. इससे पहले अक्टूबर में जन सुराज के तीन और उम्मीदवारों ने नाम वापल ले लिए थे. ये कैंडिडेट दानापुर, ब्रह्मपुर और गोपालगंज शामिल थे. और अब इस लिस्ट में मुंगेर का नाम शामिल हो गया है. जोरदार स्वागत मुंगेर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जन सुराज के पूर्व प्रत्याशी संजय सिंह का भाजपा में जोरदार स्वागत किया गया. इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष अरुण पोद्दार, जिला प्रभारी विकास सिंह, क्षेत्रीय प्रभारी राजेश झा, प्रीति सिंह समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे. भाजपा में शामिल होते हुए संजय सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही बिहार और देश का विकास संभव है. जन सुराज की सोच अच्छी थी, लेकिन जनता भाजपा के विकास मॉडल पर भरोसा करती है. अब मैं भाजपा प्रत्याशी कुमार प्रणय की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करूंगा.” मुकाबले में अब नए समीकरण संजय सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद मुंगेर की सियासत में हलचल तेज हो गई है. माना जा रहा है कि यह कदम विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर ला सकता है. सूत्रों के मुताबिक, भाजपा इसे “मास्टरस्ट्रोक” मान रही है, जबकि जन सुराज समर्थकों में नाराजगी देखने को मिल रही है. पहले से ही त्रिकोणीय माने जा रहे मुकाबले में अब नए समीकरण बनते दिख रहे हैं. चर्चा में कुमार प्रणय की प्रॉपर्टी बता दें कि मुंगेर सीट से बीजेपी उम्मीदवार कुमार प्रणय इन दिनों अपनी संपत्ति को लेकर चर्चा में हैं. नामांकन के दौरान दिए गए हलफनामे में उन्होंने इतनी बड़ी संपत्ति की जानकारी दी है कि लोग हैरान रह गए. प्रणय की कुल संपत्ति करीब 177 करोड़ रुपये बताई गई है, जिससे वे बिहार चुनाव के सबसे अमीर उम्मीदवारों में शामिल हो गए हैं.

घाटशिला उपचुनाव: झामुमो का तीर या भाजपा का कमल — जनता किसका देगी साथ?

घाटशिला घाटशिला उपचुनाव नजदीक है। 11 नवंबर को घाटशिला सीट पर चुनाव कराया जाएगा। वहीं, बता दें कि घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन, झामुमो के उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के उम्मीदवार रामदास मुर्मू के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है जिससे घाटशिला विधानसभा उपचुनाव दिलचस्प बन गया है। बता दें कि कुल 13 प्रत्याशी घाटशिला विधानसभा उपचुनाव लड़ेंगे। 13 में से 9 प्रत्याशी पहली बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, मुख्य मुकाबला फिलहाल सत्तारूढ़ झामुमो के सोमेश चंद्र सोरेन और भाजपा के बाबूलाल सोरेन के बीच है। एक तरफ झामुमो अपने दिवंगत नेता रामदास सोरेन की विरासत पर भरोसा जता रहे है तो दूसरी ओर, भाजपा नेता चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन मोदी सरकार की योजनाओं के दम पर मैदान में उतरे हैं, लेकिन झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के प्रत्याशी रामदास मुर्मू ने मैदान में उतरकर इस बार मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। रामदास सोरेन के आकस्मिक निधन से खाली हुई इस सीट पर अब उनके बेटे सोमेश चंद्र सोरेन मैदान में हैं और भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन ताल ठोक रहे हैं। दोनों ही संताल समाज से आते हैं। इसलिए इसकी संभावना है कि आदिवासी मत दोनों तरफ जाएगा। भाजपा के अपने सहयोगी लोजपा के सहारे चार प्रतिशत दलित मतों को साथ लाने की कोशिश में हैं। झामुमो गठबंधन के मुस्लिम मंत्री भी अल्पसंख्यक मतों को अपने पाले में लाने के लिए लगे हैं, लेकिन भाजपा आदिवासी मतों के अलावा कुड़मी, पिछड़ी और अन्य दलित मतों पर नजर रख रही है। चंपाई के गहरे मित्र विद्युतवरण महतो की भी इस क्षेत्र में काफी पकड़ है। वे तीन बार से जमशेदपुर लोकसभा के सांसद भी हैं। ज्ञात हो कि रामदास सोरेन एक साल से ज्यादा समय से किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनका 15 अगस्त को एक अस्पताल में निधन हो गया था। इसी के कारण घाटशिला सीट पर उपचुनाव कराने की आवश्यकता पड़ी जिसके लिए 11 नवंबर को मतदान होगा। वहीं, चुनाव आयोग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस निर्वाचन क्षेत्र में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से लगभग पांच प्रतिशत अधिक है। 2,56,252 मतदाताओं में से 1,31,180 महिलाएं और 1,25,078 पुरुष मतदाता हैं।  

वाम-दल एकजुट: भाकपा (माले) ने JMM को दिया समर्थन, दीपंकर भट्टाचार्य का BJP पर तीखा वार

घाटशिला झारखंड के घाटशिला (अनुसूचित जनजाति) विधानसभा क्षेत्र के लिए हो रहे उपचुनाव में भाकपा (माले) की केंद्रीय कमेटी ने झामुमो उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की है। पार्टी महासचिव कॉमरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने विश्वास व्यक्त किया है कि भाजपा को घाटशिला में करारी हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन एकजुट होकर इस चुनाव में झामुमो के साथ खड़ा है। भट्टाचार्य ने उम्मीद जाहिर की है कि झामुमो उम्मीद्वार सोमेश सोरेन विजय होकर घाटशिला की जनता की आकांक्षाओं को पूरी करेंगे। भाकपा माले के विधायक कॉ अरूप चटर्जी और कॉ चंद्रदेव महतो लगातार घाटशिला की जनता से संपर्क बनाए हुए हैं और शीघ्र ही वहां उनका प्रचार-अभियान शुरू होने वाला है। झारखंड और बिहार में भाजपा लिए कोई जगह खाली नहीं भाकपा माले ने झारखंड की जनता को सतर्क करते हुए कहा कि सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। भाकपा माले ने कहा कि भाजपा को झारखंड में अलग-थलग किए बगैर झारखंडियों के जल-जंगल-जमीन और रोजगार के संघर्ष को अपने मुकाम पर नहीं पहुंचाया जा सकता है। झारखंड की जनता अभी भी भाजपा के डबल इंजन राज में व्याप्त भ्रष्टाचार, कॉरपोरेट लूट, किसानों की जमीन की छिनतई, भुखमरी और बेरोजगारी को भूले नहीं हैं। भाकपा माले ने कहा कि वर्तमान उपचुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त देकर दिल्ली में मोदी सरकार को यह संदेश दे दिया जाए कि झारखंड और बिहार में भाजपा लिए कोई जगह खाली नहीं है।