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बिहार के बाद केरल मिशन? विनोद तावड़े के कंधों पर बीजेपी को मजबूत करने का दारोमदार

 नई दिल्ली बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी नितिन नबीन ने ऐसे समय संभाली है, जब पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, पुदुचेरी और केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी तेज है. इनमें से किसी भी राज्य में बीजेपी के लिए चुनावी लड़ाई आसान नहीं है. नितिन नबीन ने अपनी ताजपोशी के साथ पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के लिए ताबड़तोड़ फैसले लेने शुरू कर दिए हैं.  नितिन नबीन ने बीजेपी के लिए सबसे मुश्किल माने जाने वाले केरल विधानसभा चुनाव की कमान विनोद तावड़े को सौंपी तो साथ ही चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. उनके साथ शोभा करंदलाजे को सह प्रभारी बनाया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि विनोद तावड़े बिहार की तरह ही केरल में भी कमल खिला पाएंगे? वहीं, आशीष शेलार को तेलंगाना नगर निकाय चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया है. उनके साथ अशोक परनामी व रेखा शर्मा को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा वरिष्ठ नेता राम माधव को ग्रेटर बेंगलुरु निकाय चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया गया है तो सतीश पुनिया और संजय उपाध्याय को सह प्रभारी का दातित्व सौंपा है.  विनोद तावड़े को मिला केरल का मुश्किल टास्क मिशन साउथ के तहत बीजेपी दक्षिण भारत के तमाम राज्यों में अपनी सियासी जमीन तलाश रही है. फिर चाहे तमिलनाडु हो या फिर केरल विधानसभा चुनाव का मैदान. पीएम मोदी समेत तमाम बड़े नेताओं की नजर इन राज्यों पर टिकी है. ऐसे में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने केरल की चुनावी जंग को फतह करने के लिए बिहार चुनाव जिताने वाले विनोद तावड़े को सौंपी है, उन्हें विधानसभा चुनाव का प्रभारी बनाया है और साथ ही कर्नाटक से आने वाली  शोभा करंदलाजे को सौंपा है.  केरल में सत्ता का रास्ते को ईसाई और मुस्लिम वोट के द्वारा तय होते है, जिसके चलते ही बीजेपी की राह काफी मुश्किल भरी रही है. बीजेपी केरल में तेजी से बढ़ी है, लेकिन सत्ता के सिंहासन तक पहुंचने में यूडीएफ और एलडीएफ एक बड़ी बाधा हैं. केरल का चुनाव इन्हीं दोनों गठबंधन के बीच सिमटा हुआ है.  हालांकि, बीजेपी को केरल में 2014 में14 प्रतिशत वोट मिले थे, 2019 में 16 प्रतिशत और 2024 में यह बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया.  बीजेपी को केरल की सत्ता तक पहुंचने के लिए 20 से 30 और 30 से 40 फीसदी के वोट क का सफर तय करना है. ऐसे में विनोद तावड़े को एक मुश्किल भरा टास्क नितिन नबीन ने सौंपा है.  बिहार की तरह केरल में खिला पाएंगे कमल विनोद तावड़े को भले ही केरल चुनाव में बीजेपी को जिताने की जिम्मेदारी मिली हो, लेकिन बिहार की तरह केरल की राह आसान नहीं है. केरल में बीजेपी के लिए इसलिए भी मुश्किल रहा है, क्योंकि यहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और लेफ्ट-सीपीएम के अगुवाई वाले एलडीएफ का अपना-अपना मजबूत वोट बैंक है. केरल में मुस्लिम और ईसाई वोटर ही नहीं हिंदू वोटर भी यूडीएफ और एलडीएफ के बीच बंटे हुए हैं, बीजेपी तेजी से अपने पैर पसारे हैं, पर सत्ता तक पहुंचने की मंजिल काफी मुश्किल भरी है.  केरल की कुल आबादी में नायर समुदाय करीब 15 फीसदी हिस्सेदारी रखता है. इसमें केरल के अपर कास्ट हिंदू आते हैं. इसके अलावा पिछड़ा वर्ग के तहत आने वाले एझवा समुदाय भी काफी अहम भूमिका निभाता है. इसकी केरल में कुल आबादी करीब 28 फीसदी है. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन खुद इस समुदाय से आते हैं. यानी विजयन का ये पारंपरिक वोट बैंक है. इसीलिए इस पर सीपीएम का एकाधिकार माना जाता है. केरल की राजनीति को जानने वाले बीजेपी की हार का कारण केरल की साक्षरता दर को भी मानते हैं. उनका कहना है कि केरल में देश के बाकी राज्यों के मुकाबले ज्यादा पढ़े-लिखे लोग हैं, जो किसी भी मुद्दे पर भावनाओं में बहकर वोट नहीं करते हैं. लोगों को हर विषय की अच्छी जानकारी होती है और वो स्पष्ट होते हैं कि उन्हें कहां और किसे वोट करना है. मुस्लिम और ईसाई में सेंधमारी कितनी मुश्किल केरल में मुस्लिम और ईसाई समुदाय की आबादी 45 फीसदी है. जिसमें बीजेपी अभी तक सेंध नहीं लगा पाई. इस 45 फीसदी वोटबैंक में बिना सेंधमारी किए केरल की सत्ता में आना मुमकिन नहीं है. हालांकि, पिछले चुनावों में बीजेपी का केरल के नायर समुदाय में वोट बैंक बढ़ा है. सबरीमाला के मुद्दे के बाद से ही ये समुदाय बीजेपी की तरफ झुकता नजर आया. केरल के 45 फीसदी वोट बैंक की हमने बात की, यानी अल्पसंख्यक वोट बैंक कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ का माना जाता है. ईसाई और मुस्लिम ज्यादातर इसी फ्रंट को चुनते हैं. वहीं केरल की पिछड़ी जातियों में लेफ्ट का काफी ज्यादा प्रभाव माना जाता है. केरल में हिंदू वोट करीब 55 फीसदी है, जिनके वोट एलडीएफ और यूडीएफ के बीच बंटे हुए हैं.  बीजेपी क्या हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण कर पाएगी केरल में हिंदू वोटों का कितना भी ध्रुवीकरण हो जाए ये बीजेपी को जीत तक नहीं पहुंचा सकते हैं. हिंदू वोटों के बड़े हिस्से पर लेफ्ट और कांग्रेस का कब्जा है. केरल में पिछले करीब 80 साल से आरएसएस लगातार काम कर रहा है. देश के अलग-अलग राज्यों में भी आरएसएस कार्यकर्ता और नेता बीजेपी के लिए जमीन बनाने का काम करते आए हैं और कई जगह पार्टी को सफलता भी हाथ लगी है. लेकिन केरल में अब तक कोई करिश्मा नहीं दिखा है.  राज्य के तकरीबन 80 फीसदी हिंदू दो प्रमुख संगठनों- एसएनडीपी और एएसएस के समर्थक हैं. इनमें एसएनडीपी को ओबीसी मानी जाने वाली जाति के और दूसरा एनएसएस अगड़ी जातियों में आने वाले नायर लोगों का संगठन है.  बीजेपी तमाम कोशिशों के बाद भी इन दोनों संगठनों में अपनी पैठ नहीं जमा सकी है.  एनएनडीपी के समर्थन वाले राजनीतिक संगठन बीडीजेएस से गठजोड़ कर नायर वोटों के बीच तोड़ी पकड़ बनाई है.  बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग कैसे होगी हिट  केरल में बीजेपी हर समुदाय में ध्रुवीकरण की तरफ देख रही है. हिंदू वोटों में ध्रुवीकरण करने में पार्टी कहीं न कहीं कामयाब भी रही है. बीजेपी कहीं न कहीं खुद को तीसरे मोर्चे के तौर पर स्थापित करने में कामयाब रही है. हालांकि ये उतनी संख्या में नहीं है, जिनती पार्टी … Read more

भाजपा की फंडिंग का खुलासा, चुनाव आयोग को दी गई रिपोर्ट में बताया गया 6,125 करोड़ रुपये का चंदा

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी ने ECI यानी भारत निर्वाचन आयोग को धनराशि का ब्योरा दिया है। पार्टी की तरफ से सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि भाजपा को 6 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का चंदा मिला है। खास बात है कि मंगलवार को भाजपा के नए अध्यक्ष चुने गए नितिन नवीन को अब इस धनराशि के इस्तेमाल का अधिकार मिलेगा। हाल ही में निर्वाचन आयोग को सौंपी गई भाजपा की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार पार्टी के पास लगभग 10,000 करोड़ रुपये की नकदी और जमा राशि हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि भाजपा के खातों में 2024-25 में 2,882.32 करोड़ रुपये की शुद्ध वृद्धि हुई। 31 मार्च 2025 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में पार्टी के ‘जनरल फंड’ में मौजूद धनराशि 12,164 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले साल 9,169 करोड़ रुपये थी। साल 2024-25 में, दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) और ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) को सत्ता से हटाने के बाद पार्टी के चुनाव प्रचार खर्च में लगभग दोगुनी वृद्धि हुई। यह खर्च पिछले साल 1,754.06 करोड़ रुपये था जो बढ़कर 3,335.36 करोड़ रुपये हो गया। चंदे में कितना धन मिला साल 2024-25 में, भाजपा को चंदे के रूप में 6,125 करोड़ रुपये मिले, जबकि पिछले साल 3,967 करोड़ रुपये मिले थे। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के पास 9,390 करोड़ रुपये की सावधि जमा है, और 2024-25 में उसे बैंकों से 634 करोड़ रुपये का ब्याज मिला। भाजपा ने 2024-25 में 65.92 करोड़ रुपये का आयकर रिफंड दाखिल किया और इस पर 4.40 करोड़ रुपये का ब्याज प्राप्त किया। चुनाव प्रचार पर कितना खर्च हुआ पार्टी का चुनाव खर्च 2024-25 में कुल खर्च का 88.36 प्रतिशत था। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में चुनाव पर खर्च की कुल राशि 3,335.36 करोड़ रुपये थी, जिसमें से 312.9 करोड़ रुपये उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करने पर खर्च किए गए, 583 करोड़ रुपये हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर यात्राओं पर खर्च हुए। चुनाव प्रचार के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर 1,125 करोड़ रुपये, कटआउट, होर्डिंग्स और बैनरों पर 107 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा, विज्ञापन पर 897 करोड़ रुपये, रैलियों और अभियानों पर 90.93 करोड़ रुपये, तथा बैठकों पर 51.72 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

दिल्ली में भाजपा मुख्यालय: नितिन नबीन बने नए अध्यक्ष, मोदी का समर्थन

नई दिल्ली भाजपा के नव निर्वाचित अध्यक्ष नितिन नबीन ने दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में पदभार संभाला।इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और जे.पी. नड्डा मौजूद हैं।भारतीय जनता पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल चुका है। मंगलवार को औपचारिक रूप से नितिन नबीन के नाम का ऐलान हुआ। नए अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत तमाम वरिष्ठ नेता, कई राज्यों के मुख्यमंत्री और संगठन के वरिष्ठ लोग शामिल हुए । खास बात यह भी है कि भाजपा की स्थापना के 45 साल पूरे हो चुके हैं और पार्टी को भी 45 वर्षीय राष्ट्रीय अध्यक्ष मिला है। भाजपा के इतिहास में यह संयोग संगठन के भीतर पीढ़ीगत बदलाव और भविष्य की राजनीति की दिशा का प्रतीक माना जा रहा है। युवा ऊर्जा और अनुभव के संतुलन के साथ नितिन नबीन से पार्टी को नई राजनीतिक ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद की जा रही है। आईए नितिन नबीन के सियासी सफर पर एक नजर डालते हैं। 23 मई 1980 को रांची में जन्मे नितिन नबीन की शुरुआती पढ़ाई पटना के सेंट माइकल हाई स्कूल से हुई। दिल्ली के सीएसकेएम पब्लिक स्कूल से उन्होंने सीनियर सेकेंडरी शिक्षा पूरी की। बिहार की राजनीति में नितिन नबीन का नाम नया नहीं है। राजनीति भले ही उन्हें विरासत में मिली, लेकिन पहचान अपने दम पर बनाई। उनके पिता नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा की गिनती भाजपा के कद्दावर नेताओं में होती थी, जो पटना पश्चिम विधानसभा सीट से चार बार विधायक रहे थे। पिता के निधन के बाद नितिन नबीन ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और संगठन के सधे हुए कार्यकर्ता और चुनावी रणनीतिकार के रुप में अपनी पहचान बनाई।पिता के निधन के बाद 2006 में पटना पश्चिम विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर नितिन नबीन पहली बार सदन पहुंचे। परिसीमन के बाद बांकीपुर सीट से उनकी राजनीतिक जमीन और मजबूत हुई। 2010, 2015, 2020 और 2025 में लगातार जीत दर्ज कर वे पांच बार विधायक बने। बिहार विधानसभा में वे उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिनकी जीत की निरंतरता पार्टी के लिए भरोसे का आधार रही है।बिहार की एनडीए सरकार में नितिन नबीन ने सड़क निर्माण, शहरी विकास, आवास और विधि जैसे अहम विभाग संभाले। प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक समझ का यह मेल ही उन्हें पार्टी के भीतर अलग पहचान देता है। हालांकि, 2025 में मंत्री बनने के कुछ ही समय बाद उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसके बाद उन्होंने बिहार सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।नितिन नबीन की असली ताकत संगठन में दिखी। 2016 से 2019 तक बिहार भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जमीनी कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क खड़ा किया। इसके बाद वे भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव बने। संगठन में पहचान बनी तो पार्टी ने उन्हें बिहार से बाहर जिम्मेदारियां सौंपीं। सिक्किम में संगठन प्रभारी और फिर छत्तीसगढ़ के सह-इंचार्ज के तौर पर उन्होंने चुनावी प्रबंधन की कमान संभाली।छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव नितिन नबीन के राजनीतिक करियर का निर्णायक मोड़ माना जाता है। जिस समय भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस को मजबूत माना जा रहा था और ज्यादातर सर्वे कांग्रेस की वापसी का दावा कर रहे थे, उस वक्त भाजपा ने नबीन पर भरोसा जताया। संगठनात्मक पुनर्गठन, बूथ स्तर तक समन्वय और रणनीतिक तैयारी का नतीजा रहा कि भाजपा ने स्पष्ट बहुमत से सत्ता में वापसी की।संगठन के भीतर उन्हें ऐसा व्यक्ति माना जाता है जो नेतृत्व की सीमाओं को समझता है और वरिष्ठ जनों को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता है। करीब दो दशकों का संगठनात्मक और चुनावी अनुभव, पांच बार विधायक रहने का रिकॉर्ड और मंत्री पद के अनुभव ने नितिन नबीन को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में एक मजबूत चेहरा बनाया।

नामांकन से मतदान तक: इस तरह चुना जाता है भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोमवार को अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की, जिसके तहत शीर्ष नेताओं ने कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन ( 45) के नामांकन पत्र दाखिल किए। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और वरिष्ठ नेताओं धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव और किरेन रीजीजू की मौजूदगी में निर्वाचन अधिकारी के लक्ष्मण को नामांकन पत्रों का एक सेट सौंपा। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और राज्य के अन्य नेताओं ने भी नितिन नवीन के समर्थन में नामांकन पत्रों का एक और सेट दाखिल किया।   बता दें कि नितिन नवीन को पिछले महीने ही पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी मौजूद थे। बिहार, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, असम, झारखंड समेत कई राज्यों के नेताओं ने भी नितिन नवीन के समर्थन में नामांकन पत्र दाखिल किए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत पार्टी के शीर्ष नेताओं के समर्थन से नितिन नवीन का भाजपा के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। आइए अब जानते हैं कि भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष कैसे चुना जाता है, क्या हैं योग्यताएं, नियम और पूरी प्रक्रिया… चुनाव की प्रक्रिया भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचक मंडल द्वारा चुना जाता है। यह मंडल पार्टी की राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों और विभिन्न राज्यों की परिषदों से चुने गए प्रतिनिधियों से मिलकर बनता है। इसकी निगरानी पार्टी के राष्ट्रीय निर्वाचन अधिकारी करते हैं।     निर्वाचक मंडल की सूची तैयार और प्रकाशित होने के बाद नामांकन शुरू होता है     नामांकन पत्र दाखिल किए जाते हैं। आमतौर पर उम्मीदवार तीन अलग-अलग सेट में नामांकन दाखिल कर सकता है     इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच होती है     उसके बाद नाम वापसी का समय मिलता है     नाम वापसी के बाद राष्ट्रीय निर्वाचन अधिकारी प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हैं कि चुनाव सर्वसम्मति से हो रहा है या मतदान की जरूरत है     अगर एक से अधिक उम्मीदवार बचते हैं, तो मतदान कराया जाता है और उसी दिन मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाते हैं     अगर नाम वापसी के बाद सिर्फ एक उम्मीदवार बचता है, तो उसे निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया जाता है राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की योग्यताएं     भाजपा संविधान के अनुसार, उम्मीदवार कम से कम 15 वर्ष से पार्टी का प्राथमिक (सक्रिय) सदस्य होना चाहिए     निर्वाचक मंडल के कम से कम 20 सदस्य संयुक्त रूप से उसका नाम प्रस्तावित करें     प्रस्ताव पर उम्मीदवार के हस्ताक्षर जरूरी हैं     यह प्रस्ताव कम से कम 5 अलग-अलग राज्यों से आना चाहिए, जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव पूरे हो चुके हों कार्यकाल कितना होता है? भाजपा संविधान की धारा 20 के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल 3 वर्ष का होता है। पार्टी चाहे तो इसे एक बार और 3 वर्ष के लिए बढ़ा सकती है। इस तरह अधिकतम 6 वर्ष तक एक व्यक्ति इस पद पर रह सकता है।

नितिन नबीन BJP के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय, नामांकन दाखिल; निर्विरोध चुने जाने के संकेत

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए नितिन नबीन ने नामांकन कर दिया है. इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में प्रस्तावक बने. बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान कल मंगलवार को होगा. इससे पहले सभी बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, सीनियर लीडर समेत तमाम लोग पार्टी कार्यालय में मौजूद रहे. बता दें, बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर बिना किसी विरोध के चुने जाने की संभावना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत पार्टी नेतृत्व इस पद के लिए उनकी उम्मीदवारी के समर्थन में है. बीजेपी के नेशनल रिटर्निंग ऑफिसर के. लक्ष्मण के बताए गए चुनाव शेड्यूल के मुताबिक, इस पोस्ट के लिए नामांकन सोमवार को दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे के बीच फाइल किया जाएगा और चुनाव प्रक्रिया पूरा होने के अगले दिन नए पार्टी चीफ के नाम की घोषणा की जाएगी. 19 जनवरी को शाम 4 बजे से शाम 5 बजे के बीच नॉमिनेशन पेपर्स की स्क्रूटनी की जाएगी. आज ही शाम 5 बजे से शाम 6 बजे के बीच नामांकन वापस लिए जा सकेंगे. बीजेपी के एक सोर्स ने पीटीआई को बताया, 'इस मौके पर हमारे लगभग सभी मुख्यमंत्री मौजूद रहेंगे. इसके अलावा बीजेपी के सभी स्टेट यूनिट प्रेसिडेंट और पार्टी के दूसरे बड़े नेता भी यहां मौजूद रहेंगे.' नबीन जो बिहार से पांच बार के विधायक हैं और हाल ही में बीजेपी के नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट बनाए गए हैं, सोमवार को पार्टी के नेशनल प्रेसिडेंट पद के लिए अपना नॉमिनेशन जमा करेंगे. बीजेपी के राष्ट्रीय रिटर्निंग ऑफिसर के. लक्ष्मण द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, नितिन नबीन अध्यक्ष पद के लिए नामांकन सोमवार को दोपहर 2 बजे से 4 बजे के बीच दाखिल करेंगे. इसके बाद शाम 4 से 5 बजे तक नामांकन पत्र की जांच की जाएगी और शाम 5 से 6 बजे के बीच नामांकन वापसी की प्रक्रिया की जाएगी. अगर इस प्रक्रिया के बाद जरूरत पड़ती है तो 20 जनवरी को मतदान होगा, लेकिन वर्तमान स्थिति में नितिन नबीन के निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने की संभावनाएं हैं. हालांकि, नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का आधिकारिक ऐलान 20 जनवरी को ही किया जाएगा. पर नामांकन प्रक्रिया के बाद बीजेपी के नए अध्यक्ष को लेकर तस्वीर साफ हो जाएगी. बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी का कहना है कि पार्टी का संगठनात्मक ढांचा पूरी तरह लोकतांत्रिक प्रक्रिया से तय होता है. उन्होंने कहा कि सोमवार को नामांकन होगा और अगले दिन नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर दी जाएगी. पीएम मोदी और अमित शाह होंगे प्रस्तावक सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन तीन अलग-अलग सेट में नामांकन दाखिल कर सकते हैं. एक नामांकन पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा प्रस्तावक होंगे. जबकि दूसरे सेट में 20 से ज्यादा निर्वाचित बीजेपी प्रदेश अध्यक्षों के नाम हो सकते हैं. तीसरे सेट में बीजेपी नेशनल काउंसिल के सदस्यों का समर्थन होने की बात कही जा रही है. दिग्गज नेताओं का दिल्ली में जमावड़ा पार्टी के नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में हलचल तेज है. इस चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए बीजेपी शासित राज्यों के लगभग सभी मुख्यमंत्री, राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्य दिल्ली पहुंच रहे हैं. बीजेपी के एक सूत्र ने पीटीआई को बताया कि हमारे लगभग सभी मुख्यमंत्री इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे. इसके अलावा बीजेपी के सभी राज्य यूनिटों के  अध्यक्ष और पार्टी के अन्य प्रमुख नेता भी यहां मौजूद रहेंगे. कैसे होता है बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव? बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव पार्टी की राष्ट्रीय परिषद और राज्य परिषदों के प्रतिनिधियों से मिलकर बने निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है और इस प्रक्रिया की देखरेख पार्टी के राष्ट्रीय प्रतिवेदक द्वारा की जाती है. बीजेपी के संविधान के अनुसार, किसी राज्य के निर्वाचक मंडल के कोई भी 20 सदस्य संयुक्त रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए ऐसे व्यक्ति का नाम प्रस्तावित कर सकते हैं जो चार कार्यकाल तक पार्टी का सक्रिय सदस्य रहा हो और जिसकी सदस्यता के पंद्रह वर्ष पूरे हो चुके हों. लेकिन ऐसा संयुक्त प्रस्ताव कम-से-कम पांच राज्यों से आना चाहिए, जहां राष्ट्रीय परिषद के लिए चुनाव संपन्न हो चुके हों. कल होगा शपथ ग्रहण सूत्रों का कहना है कि नितिन नबीन को निर्विरोध बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाएगा और वह कल सुबह 11:30 बजे पीएम मोदी, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा, नितिन गड़करी, बीजेपी शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और प्रदेशों के अध्यक्ष और संगठन मंत्रियों की मौजूदगी में बीजेपी अध्यक्ष पद का पदग्रहण करेंगे.   कौन हैं नितिन नबीन नितिन नबीन बिहार के पांच बार के विधायक हैं  और पार्टी में मजबूत संगठनकर्ता के रूप में जाने जाते हैं. वह 2010 से लगातार बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक चुने गए हैं. वह पहली बार 2006 में पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से बिहार विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे. हाल ही में उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. अब वह पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कमान संभालने के लिए तैयार हैं. उनके नेतृत्व में पार्टी आगामी चुनौतियों और संगठनात्मक मजबूती की दिशा में नया रोडमैप तैयार करेगी बीजेपी के नेशनल प्रेसिडेंट का चुनाव एक इलेक्टोरल कॉलेज करता है, जिसमें पार्टी की नेशनल काउंसिल और स्टेट काउंसिल के रिप्रेजेंटेटिव होते हैं, और इस प्रोसेस की देखरेख पार्टी के नेशनल रिटर्निंग ऑफिसर करते हैं. बीजेपी के संविधान के अनुसार किसी राज्य के इलेक्टोरल कॉलेज के कोई भी 20 सदस्य मिलकर ऐसे व्यक्ति का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित कर सकते हैं, जो चार बार एक्टिव सदस्य रहा हो और जिसकी सदस्यता पंद्रह साल की हो. हालांकि ऐसा संयुक्त प्रस्ताव कम से कम पांच राज्यों से आना चाहिए, जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव पूरे हो चुके हों, ऐसा इसमें तय है. शुक्रवार को चुनाव शेड्यूल जारी करते हुए, पार्टी के राष्ट्रीय रिटर्निंग ऑफिसर के लक्ष्मण ने कहा था, 'जरूरत पड़ने पर 20 जनवरी को मतदान होगा … Read more

BJP के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कल, राजस्थान से भारी समर्थन के संकेत

नईदिल्ली  भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर पार्टी संगठन में हलचल तेज हो गई है। सोमवार को दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पार्टी के राष्ट्रीय निर्वाचन अधिकारी लक्ष्मण द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे। इस दौरान पार्टी के लगभग सभी मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में राजस्थान की भूमिका इस बार खास मानी जा रही है। राजस्थान से पार्टी के 20 वरिष्ठ नेताओं को प्रस्तावक के रूप में नामित किया गया है। इन नेताओं में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, दोनों उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और प्रेमचंद बेरवा सहित कई केंद्रीय व राष्ट्रीय स्तर के नेता शामिल हैं। दिल्ली में दिखेगा शीर्ष नेतृत्व का जमावड़ा सोमवार को होने वाले नामांकन कार्यक्रम के दौरान भाजपा मुख्यालय में शीर्ष नेतृत्व का जमावड़ा देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी नामांकन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचेंगे। इस दौरान उनकी कई केंद्रीय मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इन बैठकों में संगठनात्मक मुद्दों के साथ-साथ आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर भी चर्चा हो सकती है। राजस्थान से ये 20 नेता बने प्रस्तावक भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन के लिए राजस्थान से जिन 20 नेताओं को प्रस्तावक बनाया गया है, उनमें संगठन और सरकार दोनों का संतुलित प्रतिनिधित्व देखने को मिलता है। प्रस्तावकों की सूची इस प्रकार है— मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बेरवा राष्ट्रीय मंत्री अलका गुर्जर अरुण चतुर्वेदी अशोक परनामी सतीश पूनिया सीपी जोशी पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ राज्यसभा सदस्य घनश्याम तिवाड़ी सांसद मंजू शर्मा ओंकार सिंह लखावत सी. आर. चौधरी जसवंत विश्नोई कैलाश चौधरी प्रभु लाल सैनी नारायण पंचारिया अजय पाल सिंह पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावकों की यह सूची न केवल संगठनात्मक अनुभव को दर्शाती है, बल्कि राजस्थान में भाजपा के भीतर मौजूद विभिन्न राजनीतिक धाराओं का भी प्रतिनिधित्व करती है। 20 जनवरी को होगा नए अध्यक्ष का ऐलान नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा 20 जनवरी को की जाएगी। पार्टी में लंबे समय से इस ऐलान का इंतजार किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि बिहार के पांच बार के विधायक नितिन नबीन को 14 दिसंबर को भाजपा का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। हालांकि, खरमास के कारण वे औपचारिक रूप से अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण नहीं कर सके थे। खरमास की अवधि 14 जनवरी को समाप्त हो चुकी है, जिसके बाद अब औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। संगठन को मजबूत करने पर फोकस कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद से नितिन नबीन लगातार सक्रिय नजर आए हैं। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों का दौरा कर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ बैठकें कीं। संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और आगामी चुनावों की रणनीति पर उनका खास फोकस रहा है। इससे पहले वे पार्टी में कई अहम संगठनात्मक पदों पर रह चुके हैं, जिनमें भारतीय जनता युवा मोर्चा के बिहार अध्यक्ष का पद भी शामिल है। राजनीतिक दृष्टि से अहम मानी जा रही प्रक्रिया भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव ऐसे समय हो रहा है, जब पार्टी लोकसभा चुनावों के बाद नए राजनीतिक समीकरणों और आगामी राज्यों के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी है। ऐसे में नए अध्यक्ष की भूमिका संगठनात्मक मजबूती, चुनावी रणनीति और सरकार व संगठन के बीच समन्वय के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। राजस्थान से बड़ी संख्या में प्रस्तावकों का चयन यह संकेत देता है कि पार्टी राज्य नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर खास महत्व दे रही है। अब सभी की निगाहें सोमवार के नामांकन और 20 जनवरी को होने वाले औपचारिक ऐलान पर टिकी हैं

वोट बैंक बंटा तो मजबूत हुआ BJP-शिंदे गठबंधन, विपक्ष की टूट से 32 सीटों का नुकसान

मुंबई मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों के नतीजों के विश्लेषण से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। विपक्षी दलों उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के बीच गठबंधन टूटने का सीधा फायदा सत्ताधारी भाजपा और एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना को मिला है। आंकड़ों के अनुसार, कम से कम 32 वार्डों में विपक्षी मतों के विभाजन के कारण महायुति की राह आसान हो गई। महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग (SEC) द्वारा जारी उम्मीदवार-वार मतदान डेटा के विश्लेषण से पता चलता है कि बिखरे हुए विपक्ष के कारण भाजपा 21 वार्डों में जीत दर्ज की है। शिंदे की शिवसेना को 10 वार्डों में जीत हासिल हुई है। वहीं, अजीत पवार की NCP को सिर्फ एक वार्ड में लाभ मिला है। गठबंधन का गणित और फ्रेंडली फाइट चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस का साथ छोड़कर अपने चचेरे भाई राज ठाकरे (MNS) के साथ गठबंधन किया था। इसके जवाब में कांग्रेस ने प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के साथ हाथ मिलाया। दो वार्डों (173 और 225) में तो स्थिति और भी खराब रही, जहां शिवसेना (UBT) के उम्मीदवारों को बीजेपी से हार का सामना करना पड़ा क्योंकि शिंदे गुट के साथ 'फ्रेंडली फाइट' के चलते विपक्षी वोट बंट गए। इन वार्डों में बिगड़ा खेल आपको बता दें कि मुंबई की दहिसर (पश्चिम) सीट से शिवसेना (शिंदे) की रेखा यादव ने जीत दर्ज की। कांग्रेस उम्मीदवार को यहां 5,070 वोट मिले। इसी सीट पर शिवसेना (UBT) को 4,314 वोट मिले। जिससे शिंदे सेना 2,474 वोटों से जीत गई। अंधेरी (पश्चिम) का भी यही हाल देखने को मिला। भाजपा के उम्मीदवार रूपेश सावरकर ने जीत दर्ज की है। यहां शिवसेना (UBT) को 8,655 वोट प्राप्त हुए। कांग्रेस ने इस वार्ड में 4,380 वोट काटे। बीजेपी मात्र 538 वोटों से जीती। घाटकोपर की बात करें तो अश्विनी माटे (BJP) ने जीत दर्ज की। यहां एमएनएस को 6,793 वोट मिले। कांग्रेस ने 6,467 वोट हासिल किए, जिससे विपक्ष हार गया। मानखुर्द और धारावी जैसे इलाकों में भी विपक्षी फूट का असर दिखा। मानखुर्द (वार्ड 135) में बीजेपी ने AIMIM और शिवसेना UBT के बीच बराबर वोट बंटने का फायदा उठाकर जीत हासिल की। उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस को 24 सीटें जीतने पर बधाई दी, लेकिन गठबंधन टूटने के नुकसान पर चुप्पी साधे रखी। उन्होंने बस इतना कहा, "राजनीति में अगर-मगर पर बात नहीं की जा सकती।" उनके खेमे का मानना है कि 'मराठी वोट' एकजुट करने के लिए मनसे के साथ जाना जरूरी था। मुंबई कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत का रुख इसके विपरीत है। सचिन सावंत ने कहा, "अगर गठबंधन बरकरार रहता तो नतीजे अलग होते। लेकिन उद्धव जी ने राज ठाकरे के साथ जाने का फैसला किया। हमारे लिए ठाकरे भाइयों के साथ जाना संभव नहीं था।" उन्होंने स्वतंत्र चुनाव लड़ने के फैसले को सही ठहराया।  

कौन बनेगा मुंबई का मेयर? शिंदे की चाल ने BMC की राजनीति में बढ़ाया रोमांच

मुंबई मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव परिणामों के बाद अब सत्ता के समीकरणों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बार किसी भी स्थिति में मुंबई पर अपना मेयर बिठाने का संकल्प लिया था। 89 सीटें जीतकर बीजेपी इस सपने के करीब भी पहुंच गई है, लेकिन सत्ता की चाबी अब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हाथों में नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार, एकनाथ शिंदे ने बीजेपी की मजबूरी को भांपते हुए एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। खबर है कि शिंदे गुट की ओर से मुंबई के मेयर पद की मांग की जा सकती है।   तर्क यह दिया जा रहा है कि यह वर्ष बालासाहेब ठाकरे का जन्मशताब्दी वर्ष है। शिंदे गुट इस मौके पर बालासाहेब की इच्छा पूरी करने का हवाला देते हुए बीजेपी से ढाई साल के लिए मेयर पद की मांग कर सकता है। इसके अलावा, स्थायी समिति के अध्यक्ष पद और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी शिंदे सेना अपना दावा ठोक सकती है। बीजेपी के लिए शिंदे अनिवार्य बीएमसी में बहुमत के लिए 114 पार्षदों की आवश्यकता है। वर्तमान स्थिति के मुताबिक, बीजेपी की 89 सीटें, शिंदे सेना की 29 सीटें, ठाकरे गुट की 65 सीटें और मनसे की 6 सीटें हैं। बीजेपी के पास 89 सीटें हैं, लेकिन बिना शिंदे गुट के 29 पार्षदों के वह बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर सकती। इसी बढ़त का फायदा उठाकर अब शिंदे सेना सौदेबाजी की तैयारी में है। होटल पॉलिटिक्स की शुरुआत एकनाथ शिंदे ने कल ही अपने सभी 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को बांद्रा के 'ताज लैंड्स एंड' होटल में शिफ्ट कर दिया है। सत्ता स्थापना की प्रक्रिया पूरी होने तक ये सभी पार्षद वहीं रहेंगे। शिंदे के इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है और इसे बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। फडणवीस की प्रतिक्रिया मेयर पद को लेकर मचे घमासान पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "हमें पूर्ण बहुमत मिला है। ऊपर वाले ने ही तय किया है कि मुंबई में महायुति का ही मेयर बनेगा। शिंदे साहब और हम साथ बैठकर सब तय करेंगे और मुंबई को बेहतर तरीके से चलाएंगे।" पार्षदों को होटल में रखने के सवाल पर फडणवीस ने कहा कि जैसे हमने अपने पार्षदों को साथ बुलाया, वैसे ही उन्होंने भी किया होगा। अब हमें तोड़-फोड़ की कोई जरूरत नहीं है।  

बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव: नियम, प्रक्रिया और टाइमलाइन पर एक नजर

 नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी ने अपने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह पूरी प्रक्रिया पार्टी के देशव्यापी संगठनात्मक अभियान ‘संगठन पर्व-2024’ के तहत कराई जा रही है. चुनाव कार्यक्रम को शुक्रवार को बीजेपी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने अधिसूचित कर दिया है. पार्टी संविधान के तहत राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव एक तय प्रक्रिया के अनुसार होता है, जिसमें इलेक्टोरल कॉलेज, नामांकन, जांच, नाम वापसी और जरूरत पड़ने पर मतदान शामिल है. स्टेप 1: इलेक्टोरल कॉलेज की सूची जारी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया की शुरुआत 16 जनवरी 2026 को हुई. दोपहर 12 बजे इलेक्टोरल कॉलेज की सूची प्रकाशित की गई. बीजेपी के संविधान के अनुसार, इलेक्टोरल कॉलेज में पार्टी की राष्ट्रीय परिषद (नेशनल काउंसिल) के सदस्य और राज्यों की परिषदों से चुने गए प्रतिनिधि शामिल होते हैं. सिर्फ यही सदस्य राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में मतदान के पात्र होते हैं. स्टेप 2: नामांकन प्रक्रिया अगला अहम चरण नामांकन का होता है. 19 जनवरी 2026 को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक नई दिल्ली स्थित बीजेपी के केंद्रीय कार्यालय में नामांकन दाखिल किए जाएंगे. पार्टी नियमों के मुताबिक, उम्मीदवार का कम से कम चार कार्यकाल या 15 साल तक सक्रिय सदस्य होना अनिवार्य है. नामांकन के लिए किसी एक राज्य के इलेक्टोरल कॉलेज के कम से कम 20 सदस्यों का प्रस्ताव जरूरी है. इसके साथ ही समर्थन ऐसे कम से कम 5 राज्यों से होना चाहिए, जहां नेशनल काउंसिल के चुनाव पूरे हो चुके हों. स्टेप 3: जांच और नाम वापसी नामांकन की समय-सीमा समाप्त होते ही उसी दिन शाम 4 बजे से 5 बजे तक नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी. इसके बाद उम्मीदवारों को शाम 5 बजे से 6 बजे तक नाम वापस लेने का अवसर मिलेगा. शाम 6:30 बजे राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी की जाएगी, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि चुनाव सर्वसम्मति से हो रहा है या मतदान की जरूरत पड़ेगी. स्टेप 4: मतदान और नतीजे यदि नाम वापसी के बाद एक से ज्यादा वैध उम्मीदवार मैदान में रहते हैं तो 20 जनवरी 2026 को सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक मतदान होगा और उसी दिन नतीजों की घोषणा की जाएगी. हालांकि, यदि नाम वापसी के बाद सिर्फ एक ही उम्मीदवार बचता है तो उसे निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया जाएगा. संभावित उम्मीदवार का प्रस्तावक कौन-कौन? सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन तीन अलग-अलग सेट में नामांकन दाखिल कर सकते हैं.  एक नामांकन पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा प्रस्तावक होंगे. दूसरे सेट में 20 से ज्यादा निर्वाचित बीजेपी प्रदेश अध्यक्षों के नाम हो सकते हैं. तीसरे सेट में बीजेपी नेशनल काउंसिल के सदस्यों का समर्थन होने की बात कही जा रही है. अंतिम चरण में पदभार ग्रहण यदि नितिन नबीन पूर्णकालिक बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाते हैं तो पार्टी मुख्यालय में औपचारिक कार्यक्रम होगा. उन्हें दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यालय तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में ले जाया जाएगा. इसके साथ ही बीजेपी में राष्ट्रीय नेतृत्व का औपचारिक हस्तांतरण पूरा होगा. इसके अलावा, संगठन पर्व-2024 का समापन और पार्टी के अगले संगठनात्मक और चुनावी चरण की शुरुआत मानी जाएगी. बीजेपी के नए अध्यक्ष का चुनाव आने वाले वर्षों की राजनीतिक और चुनावी रणनीति तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.

दिल्ली में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन से की मुलाकात

नई दिल्ली/ रायपुर आज दिल्ली प्रवास के दौरान विधानसभा अध्यक्ष माननीय डॉ रमन सिंह जी ने भाजपा के नव नियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष (राष्ट्रीय) और छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी माननीय श्री  नितिन नबीन जी से आत्मीय मुलाकात कर उन्हें नव दायित्व के लिए मंगलकामनायें व्यक्त कीं। इस दौरान उन्होंने नितिन नबीन जी से विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा कर उनको उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं।