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एक देश, 14 बॉर्डर! जानिए वो अनोखा देश जिसकी सरहदें छूती हैं सबसे ज्यादा देशों को

बीजिंग  दुनिया में एक ऐसा देश भी है जिसकी सीमाएं 14 अलग-अलग देशों से मिलती हैं. यह जानकर कई लोगों को आश्चर्य हो सकता है लेकिन यह सच है. आपको बता दें कि अपनी इस खासियत वाला यह देश दुनिया का एकमात्र देश है. तो आइए जानते हैं क्या है इस देश का नाम और इसकी सीमाएं किन देशों से मिलती है. एक बड़ा देश  दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश चीन दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसकी सीमाएं 14 देशों से मिलती है. इसकी सीमाएं पहाड़ों, रेगिस्तान, जंगलों और नदियों के पार हजारों किलोमीटर तक फैली हुई हैं. यह देश अपनी सीमा भारत, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, म्यांमार, वियतनाम, कंबोडिया, उत्तर कोरिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, अफगानिस्तान, रूस और मंगोलिया से जोड़ता है. दुनिया में कोई भी दूसरा देश इतनी सारी सीमाओं को नहीं छूता है.  संस्कृति और भाषाओं का संगम  अब क्योंकि चीन की सीमाएं इतने सारे देशों से लगती हैं इस वजह से यह संस्कृतियों, भाषाओं और परंपराओं का एक संगम बन चुका है. पश्चिम में बर्फ से ढके हिमालय से लेकर वियतनाम और म्यांमार के जंगलों तक सीमा के कई क्षेत्र विविध जातिय समूह का निवास स्थान बन चुके हैं.  भौगोलिक विविधता  चीन की सीमाएं गोबी रेगिस्तान और हिमालय पर्वतों से लेकर विशाल नदी घाटियों और घने जंगलों तक काफी मनमोहक परिदृश्यों से होकर गुजरती हैं. यह विविधता चीन की जलवायु और बायोडायवर्सिटी के साथ-साथ इन जगहों पर रहने वाले लोगों के व्यापार और रहने के तरीकों को भी प्रभावित करती है.  सुरक्षा और सीमा प्रबंधन  14 देशों के साथ सीमाएं होने की कई चुनौतियां हैं. चीन को हजारों किलोमीटर क्षेत्र में सुरक्षा, सीमा नियंत्रण और निगरानी बनाए रखनी पड़ती है. इसे संभालने के लिए देश एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम और मजबूत सैन्य उपस्थिति का इस्तेमाल करता है.  14 पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को संभालना कोई आसान काम नहीं है. कूटनीति, व्यापार और बातचीत के जरिए चीन दुनिया की आबादी के एक बड़े हिस्से को प्रभावित करता है और ऐसी नीतियों को आकार देने में एक बड़ी भूमिका भी निभाता है. चीन की सीमाएं विविधता और कूटनीति की कहानी बयां करती है. चीन दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसकी भूमि सीमाएं 14 देशों के साथ साझा होती हैं और यह अवसरों और चुनौतियां दोनों का एक बड़ा केंद्र बिंदु है. इतने सारे देशों के पड़ोसी के रूप में चीन वैश्विक राजनीति में एक बड़ा प्रभाव प्रदान करता है.

भ्रष्टाचार पर चीन का बड़ा प्रहार: पूर्व मंत्री तांग रेनजियान को रिश्वतखोरी में मौत की सज़ा

शेन्जेन चीन के पूर्व कृषि एवं ग्रामीण मामलों के मंत्री तांग रेनजियान को भ्रष्टाचार और घुसखोरी के मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। उन पर अपने मंत्री रहने के दौरान 3 अरब रुपये से ज्यादा की रिश्वतखोरी का आरोप है। दावा किया जा रहा है कि उन्होंने 2007 से 2024 तक पद पर रहते हुए अकूत संपत्तियां बनाई थीं। जिसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच में यह साबित हुआ है कि उन्होंने आय से ज्यादा की कमाई की और अपने पद का दुरुपयोग किया। ऐसे में कोर्ट ने न सिर्फ संपत्ति जब्त कर ली, बल्कि तांग रेनजियान को मौत की सजा भी सुनाई है। पूर्व मंत्री ने कमाए थे 3 अरब रुपये चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, पूर्व कृषि एवं ग्रामीण मामलों के मंत्री तांग रेनजियान को रविवार को जिलिन प्रांत की एक अदालत में रिश्वतखोरी के आरोप में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। रिपोर्ट में बताया गया कि तांग ने 2007 से 2024 तक विभिन्न पदों पर रहते हुए 268 मिलियन युआन (37.6 मिलियन डॉलर) से अधिक मूल्य की नकदी और संपत्ति सहित रिश्वत ली। चांगचुन इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने यह कहते हुए उनकी मृत्युदंड की सजा दो साल के लिए निलंबित कर दी कि उन्होंने अपने अपराध स्वीकार कर लिए हैं। तांग को कम्युनिष्ट पार्टी ने किया निष्कासित चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था द्वारा जांच के दायरे में रखे जाने और पद से हटाए जाने के छह महीने बाद, नवंबर 2024 में तांग को निष्कासित कर दिया था। तांग की जांच असामान्य रूप से तेज थी और रक्षा मंत्री ली शांगफू और उनके पूर्ववर्ती वेई फेंगहे के खिलाफ भी इसी तरह की जांच की गई थी। जिनपिंग ने चलाया है शुद्धिकरण अभियान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2020 में चीन के घरेलू सुरक्षा तंत्र के शुद्धिकरण का अभियान शुरू किया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पुलिस, अभियोजक और न्यायाधीश "पूरी तरह से वफादार, पूरी तरह से शुद्ध और पूरी तरह से विश्वसनीय" हों। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, कृषि और ग्रामीण मामलों के मंत्री नियुक्त होने से पहले, तांग 2017 से 2020 तक पश्चिमी प्रांत गांसु के गवर्नर थे। जनवरी में, शी ने कहा था कि भ्रष्टाचार चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा है और यह लगातार बढ़ रहा है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, पूर्व कृषि एवं ग्रामीण मामलों के मंत्री तांग रेनजियान को रविवार को जिलिन प्रांत की एक अदालत में रिश्वतखोरी के आरोप में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। रिपोर्ट में बताया गया कि तांग ने 2007 से 2024 तक विभिन्न पदों पर रहते हुए 268 मिलियन युआन (37.6 मिलियन डॉलर) से अधिक मूल्य की नकदी और संपत्ति सहित रिश्वत ली। चांगचुन इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने यह कहते हुए उनकी मृत्युदंड की सजा दो साल के लिए निलंबित कर दी कि उन्होंने अपने अपराध स्वीकार कर लिए हैं। तांग को कम्युनिष्ट पार्टी ने किया निष्कासित चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था द्वारा जांच के दायरे में रखे जाने और पद से हटाए जाने के छह महीने बाद, नवंबर 2024 में तांग को निष्कासित कर दिया था। तांग की जांच असामान्य रूप से तेज थी और रक्षा मंत्री ली शांगफू और उनके पूर्ववर्ती वेई फेंगहे के खिलाफ भी इसी तरह की जांच की गई थी। जिनपिंग ने चलाया है शुद्धिकरण अभियान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2020 में चीन के घरेलू सुरक्षा तंत्र के शुद्धिकरण का अभियान शुरू किया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पुलिस, अभियोजक और न्यायाधीश "पूरी तरह से वफादार, पूरी तरह से शुद्ध और पूरी तरह से विश्वसनीय" हों। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, कृषि और ग्रामीण मामलों के मंत्री नियुक्त होने से पहले, तांग 2017 से 2020 तक पश्चिमी प्रांत गांसु के गवर्नर थे। जनवरी में, शी ने कहा था कि भ्रष्टाचार चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा है और यह लगातार बढ़ रहा है।

साइबर किल चेन को रक्तबीज बताते हुए उसे तोड़ने के लिए वैश्विक समन्वय और संगठित प्रयास की आवश्यकता जताया गया जोर

चीन, पाकिस्तान जैसे देशों की 'ऑफेंसिव स्ट्रैटेजी' का डटकर मुकाबला करना बेहद जरूरी  -सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपीएसआईएफएस में जारी तीन दिनी सेमिनार के अंतिम दिन एक्सपर्ट्स ने कई प्रमुख विषयों पर पैनल डिस्कशन में लिया हिस्सा -साइबर किल चेन को रक्तबीज बताते हुए उसे तोड़ने के लिए वैश्विक समन्वय और संगठित प्रयास की आवश्यकता जताया गया जोर -अपराधियों को सजा दिलाने तथा न्यायिक प्रक्रिया को सही तरीके से लागू कराने के लिए पारंपरिक तौर-तरीकों से साथ भविष्य आधारित तकनीक के प्रयोग पर हुआ मंथन -फॉरेंसिक साइंस में उन्नति, जीनोम मैपिंग, जिनियोलॉजिकल डाटाबेस निर्माण व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग जैसे विषयों और बदलते परिदश्यों को लेकर हुई सकारात्मक चर्चा लखनऊ  उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार भविष्य आधारित तकनीकों के प्रयोग के जरिए प्रदेश के समक्ष उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का सामना करने की तैयारी कर रही है। इस दिशा में सीएम योगी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेस (यूपीएसआईएफएस) में जारी तीन दिवसीय सेमिनार के तीसरे व अंतिम दिन बुधवार को कई अहम विषयों पर लेकर चर्चा हुई। इसमें साइबर सुरक्षा से लेकर फॉरेंसिक साइंस की उन्नति से लेकर कई विषयों पर पैनल डिस्कशन का आयोजन हुआ जिसमें जीनोम मैपिंग, जिनियोलॉजिकल डाटाबेस निर्माण, एआई व आंत्रप्रेन्योरशिप जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।              इसी कड़ी में साइबर क्राइम को लेकर एक्सपर्ट्स ने माना कि चीन-पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की ओर से भारत की साइबर सुरक्षा में सेंध लगाने की बढ़ती कोशिशों पर लगाम लगाने की जरूरत है। एक्सपर्ट्स ने माना कि चीन-पाकिस्तान की ऑफेंसिव स्ट्रैटेजी का सामना करने के लिए भारत को तेजी से सिक्योर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करनेकी जरूरत है। साइबर क्राइम की सबसे अहम कड़ी साइबर किल चेन को रक्तबीज बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे वैश्विक प्रयासों के जरिए ही तोड़ा जा सकता है। वहीं, फॉरेंसिक की फील्ड में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य आधारित तकनीकों के प्रयोग के जरिए पीड़ितों को न्याय व सहायता दिलाने के साथ दोषियों को दंड दिलाने पर जोर दिया गया। इस दौरान भारत समेत विश्व के कई मामलों का न केवल उल्लेख किया गया बल्कि, उससे मिलने वाली सीख पर भी चर्चा की गई।         छोटा सा परिवर्तन ला सकता है बहुत बड़ा इंपैक्ट बुधवार को पैनल डिस्कशन में हिस्सा लेते हुए महाराष्ट्र के प्रमुख सचिव ब्रजेश सिंह ने साइबर खतरे व पुलिसिंग के वैश्विक परिदृश्य को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दुनिया में आज छोटा सा परिवर्तन बहुत बड़ा इंपैक्ट ला सकता है। हिज्बुल्ला पेजर अटैक इसका उदाहरण है। उन्होंने कहा कि साइबर किल चेन रक्तबीज की तरह है। भारत का सबसे बड़े पोर्ट यानी 3 महीने के लिए जीएनपीटी का पोर्ट ऑपरेट नहीं हो पाया एक मालवेयर के कारण। यह साइबर किल चेन का उदाहरण था। साइबर क्राइम इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक प्रयासों के जरिए ही तोड़ा जा सकता है। उन्होंने बताया कि लॉकबिट को तोड़ने के लिए 11 देशों की सुरक्षा एजेंसियों को साथ आकर काम करना पड़ा। यानी, साइबर क्राइम पर आकर ट्रेडिशनल पुलिसिंग के मेथड फेल हो जाते हैं। साइबर किल चेन मॉड्यूलर होता है। रेकॉन, वेपनाइजेशन, डिलीवरी व उत्पीड़न समेत 7 स्टेज इसका हिस्सा हैं।  संकट को रियल टाइम में मैप करना जरूरी ब्रजेश सिंह ने कहा कि संकट को रीयल टाइम में मैप करना जरूरी है। एक बार खतरा भांपने के बाद सबूतों को चिह्नित कर उन्हें सुरक्षित करने की जरूरत है। साइबर केसेस की भी चेन ऑफ कस्टडी भी फॉरेंसिक्स की तरह ही काम करती है। उन्होंने कहा कि अगले चरण में मनी कटऑफ जरूरी हो जाता है। इसमें वॉलेट, ब्लॉकचेन, डिजिटल मनी समेत जैसी सभी तथ्यों पर कार्य करने की जरूरत है। इसके अगले चरण में क्रिमिनल इंफ्रास्ट्रक्चर को सीज करने की जरूरत है। इसके अतिरिक्त, पोटेंशियल विक्टिम को अलर्ट करने व रिस्पॉन्स मैकेनिज्म पर कार्य करने की जरूरत है और उनकी मदद की जानी चाहिए। साइबर क्राइम पीड़ितों के लिए मदद, परामर्श और न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया त्वरित होनी चाहिए। डिजिटल अरेस्ट समेत जितने भी साइबर फ्रॉड हैं उसे न केवल रोकना है बल्कि हर केस से सीख लेकर एक विस्तृत मैकेनिज्म तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने आरबीआई का साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क की तारीफ करते हुए जोर देकर कहा कि भारत में डिजिटल सॉवरेनिटी में फोकस करना होगा, इससे केस सॉल्विंग में मदद मिलेगी। साथ ही, यह भी कहा कि हेल्थ डेटा कितना जरूरी है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अगर हमें पता होता कि जिन्ना को तपेदिक है तो शायद स्थिति अलग होती। साइबर सिक्योरिटी भी कृषि की तरह है, इसे बाहर से इंपोर्ट नहीं किया जा सकता है, इसे भारत में ही विकसित करना होगा।  तेजी से बदल रही है हैकिंग की प्रक्रिया ऑस्ट्रेलिया के साइबर एक्सपर्ट रॉबी अब्राहम ने वर्चुअल माध्यम से पैनल डिस्कशन में जुड़कर हैकिंग की बदलती प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहले प्रोग्रामिंग, स्क्रिप्टिंग, ओएस, नेटवर्किंग प्रोटेकॉल,शेलकोड राइटिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होता था। उन्होंने विभिन्न मालवेयर की जानकारी देते हुए बताया कि फिलीपींस के एक स्टूडेंट ने आई लव यू वॉर्म बनाया था जिसे ईमेल से सर्कुलेट किया गया जिससे 8.7 बिलियन यूएस डॉलर का विश्व को नुकसान हुआ। इसी प्रकार, कन्फिगर वॉर्म के जरिए एक रूसी साइबर क्राइम ग्रुप ने 9 बिलियन यूएस डॉलर का नुकसान कुल 190 देशों में किया। क्रिप्टोलॉकर के पीछे रूसी साइबर क्राइम ग्रुप का हाथ होने की आशंका है जिसके जरिए 27 मिलियन बिटक्वॉइन की ग्लोबली कमाई की गई और इसको फिरौती के रूप में इस्तेमाल किया गया। पर आज के परिदृष्य में चीजें बदल चुकी हैं। उनके अनुसार, अब ई-मेल व सोशल मीडिया पर रैनसमवेयर और फिशिंगवेयर के जरिए साइबर हमले हो रहे हैं। इसके जरिए ब्राउजिंग डाटा, क्रिप्टो वॉलेट समेत कॉन्फिडेंशियल जानकारियों तक हैकर्स का एक्सेस बढ़ जाता है। अब हैकिंग के बजाए हैकर्स लॉगिंग पर फोकस करते हैं। इससे वह सिस्टम एक्सेस कर ऐसे क्रिडेंशियल्स को हासिल कर लेते हैं जो या तो सीधे तौर पर फायदा पहुंचाता है या उसे डार्क वेब पर बेच देते हैं। इसे रोकने के लिए रेगुलर सिक्योरिटी ट्रेनिंग, सभी अकाउंट को एमएफए इनेबल करना, एंटीवायरस का इस्तेमाल, ई-मेल और मैसेज के प्रति … Read more