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अवैध घुसपैठ पर बड़ी कार्रवाई: यूपी सरकार बनाएगी खास डिटेंशन सेंटर

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को अवैध घुसपैठ पर त्वरित और सख्त कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कानून व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समरसता सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिला प्रशासन अपने क्षेत्र में रहने वाले अवैध घुसपैठियों की पहचान सुनिश्चित करें और नियमानुसार कार्रवाई शुरू करें। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि घुसपैठियों को रखने के लिए प्रत्येक जनपद में अस्थायी डिटेंशन सेंटर बनाए जाएं। इन केंद्रों में विदेशी नागरिकता के अवैध व्यक्तियों को रखा जाएगा और आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने तक वहीं आवास सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिटेंशन सेंटर में रखे गए अवैध घुसपैठियों को तय प्रक्रिया के तहत उनके मूल देश भेजा जाएगा। इन केंद्रों में विदेशी नागरिकता वाले अवैध प्रवासियों को रखा जाएगा और आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने तक वहीं आवास सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिटेंशन सेंटर में रखे गए अवैध घुसपैठियों को तय प्रक्रिया के तहत उनके मूल देश वापस भेजा जाएगा। दरअसल, नेपाल से खुली सीमा साझा करता हैं। जहां दोनों देशों के नागरिक बिना रोक-टोक आ-जा सकते हैं, लेकिन अन्य देशों के लोगों पर जांच लागू होती है। योगी आदित्यनाथ ने तीन नवंबर को बिहार में चुनाव प्रचार के दौरान दावा किया था कि यदि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सत्ता में लौटता है, तो घुसपैठियों को राज्य से बाहर निकाला जाएगा और उनकी संपत्ति गरीबों में बांटी जाएगी। योगी माघ मेले की तैयारियों की समीक्षा के लिए प्रयागराज पहुंचे उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को आगामी माघ मेले की तैयारियों की समीक्षा करने और गंगा पूजन करने प्रयागराज पहुंचे। उन्होंने कहा कि सभी सहयोगियों के साथ माघ मेले की तैयारी करने,गंगा पूजन और हनुमान मंदिर में दर्शन पूजन करने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि नौ महीने के बाद मुझे यह अवसर फिर से प्राप्त हुआ है कि मां गंगा का पूजन कर माघ मेले की तैयारी को हम आगे बढ़ा सकें।  

उत्तर प्रदेश में अब तक 4.25 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड हो चुके हैं जारी, बरेली बना प्रदेश में नंबर वन

कैंसर, किडनी और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के निःशुल्क इलाज के लिए वर्ष 2023-24 में 700 करोड़ रुपये से अधिक किए गए खर्च 'वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज' पहल के तहत यूपी में स्थापित हो चुके हैं 80 से अधिक सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज मिशन इंद्रधनुष के तहत यूपी में 10 लाख से अधिक छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण सम्पन्न आगरा जिला अस्पताल में संचालित निःशुल्क हीमोडायलिसिस यूनिट, गरीब किडनी रोगियों के लिए बनी वरदान  यूपी में 28,000 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सुविधा उपलब्ध, ग्रामीणों को मिल रही विशेषज्ञ सलाह लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ गरीब और वंचित वर्गों को प्राथमिकता दी है। सीएम योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयुष्मान भारत योजना से लेकर पेंटावैलेंट वैक्सीनेशन जैसी योजनाएं प्रदेश में लाखों परिवारों के लिए संजीवनी साबित हो रही हैं। साथ ही सीएम के विजन के अनरूप चल रही कई राज्य स्तरीय योजनाओं के सफल क्रियान्वयन ने 2017 के बाद प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के परिदृश्य में अमूलचूल बदलाव लाया है। इसी क्रम में बरेली मंडल ने आयुष्मान योजना में प्रदेश में नंबर वन का रिकॉर्ड कायम किया है, जबकि आगरा के जिला अस्पताल में निशुल्क हीमोडायलिसिस यूनिट गुर्दा रोगियों के लिए वरदान बनी हुई है। आंकड़ों से साफ है कि सरकार का फोकस न केवल उपचार पर, बल्कि रोकथाम और पहुंच पर भी है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की वर्ष 2017 से प्राथमिकता रही है कि राज्य के  गरीब एवं वंचित वर्ग के मरीजों का न केवल अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो साथ ही इलाज के कारण पड़ने वाले वित्तीय बोझ को न्यूनतम किया जाए। इसी क्रम में सीएम योगी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में आयुष्मान योजना का सफल क्रियान्वयन हुआ है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) डैशबोर्ड के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अब तक 4.25 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी हो चुके हैं, जो राज्य की एक-चौथाई आबादी को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करता है। यूपी स्वास्थ्य विभाग की नवंबर 2024 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, किडनी और हृदय रोगों के निःशुल्क इलाज पर 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। जिसमें प्रमुख हिस्सा प्रदेश के गरीब परिवारों को इलाज के लिए मिली प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता का है। इसके अलावा सीएम योगी की 'वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज' पहल के तहत 80 जिलों में वर्तमान में 80 से अधिक अब सरकारी या निजी मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुके हैं। यह पहल ग्रामीण और छोटे शहरों के मरीजों को आसानी से सुपर-स्पेशियलिटी इलाज मुहैया करा रही है। बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देते हुए योगी सरकार ने टीकाकरण अभियान में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है। इस क्रम में राज्य में पेंटावैलेंट वैक्सीन (पेंटा वैक्सीन) का कवरेज राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार 92 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच गया है। 2017 में यह 50 प्रतिशत से कम था, लेकिन अब प्रदेश के अधिकांश बच्चों को इस टीकाकरण अभियान से कवर किया जा चुका है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में प्रति माह 20,000 से अधिक नियमित टीकाकरण सत्र आयोजित हो रहे हैं। इसके साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार मिशन इंद्रधनुष के तहत यूपी में 10 लाख से अधिक छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण भी किया चुका है। सीएम योगी की टीकाकरण की ये आक्रामक नीति के तहत विशेष रूप से वंचित परिवारों के बच्चों को प्राथमिकता दी जा रही है। आयुष्मान योजना में प्रदेश के बरेली मंडल का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा है। पीएमजेएवाई पोर्टल के अनुसार नवंबर 2025 तक बरेली में योजना के तहत जारी किये गये 900 करोड़ रुपये के क्लेम में से 90 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है, जो प्रदेश में सर्वोच्च है। कुल 4.53 लाख से अधिक क्लेम सेटल किये जा चुके हैं। बरेली स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार योजना के तहत बरेली में 1 लाख से अधिक गरीब मरीजों को निःशुल्क इलाज हुआ है। तो वहीं लक्ष्य के 95 प्रतिशत से अधिक गोल्डन कार्ड का वितरण किया जा चुका है। इस योजना के तहत  5.14 लाख मरीजों का फ्री इलाज कर बरेली ने प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया। 12 लाख से अधिक कार्ड बनाए गए, जिसमें छह सदस्यीय पात्र परिवारों और 60 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गों की 100 प्रतिशत कवरेज की गई है। जिसके चलते बरेली अब आयुष्मान का सुपर मॉडल बन चुका है। इसी क्रम में आगरा जिला अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर संचालित निःशुल्क हीमोडायलिसिस यूनिट ने जनवरी से अक्टूबर 2025 तक 726 मरीजों को 8,712 बार डायलिसिस की सुविधा प्रदान की है। 10 अत्याधुनिक मशीनों से लैस यह यूनिट गुर्दा रोगियों के लिए जीवन रेखा बन चुकी है। योगी सरकार की यह सुविधा राज्य के गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों की महंगी दरों से मुक्ति दिलाती है साथ ही उन्हें अत्याधुनिक और जरूरी इलाज आसानी से उपलब्ध करवा रही है।   सीएम योगी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य ढांचे का तेजी से आधुनिकीकरण किया है। जिसके तहत प्रदेश में वर्तमान में 80 से अधिक सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेज बन चुके हैं। जिनमें 3,500 आईसीयू बेड और 2,000 वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध हैं। साथ ही प्रदेश में 28,000 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सुविधा ग्रामीणों को विशेषज्ञ सलाह दे रही है।  

सीएम युवा उद्यमी योजना, रोजगार मेला व ओडीओपी योजना की बढ़ी विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा

  ओडीओपी योजना के तहत यूपी के परंपरागत एवं स्थानीय शिल्प को आईआईटीएफ 2025 में मिल रही वैश्विक पहचान आईआईटीएफ 2025 में प्रदेश के युवाओं की भागीदारी बन रही युवाओं की रचनात्मकता और उद्यमशीलता के प्रदर्शन का मंच   लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश एक युवा केंद्रित विकास की लहर का साक्षी बन रहा है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण हमें भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 (आईआईटीएफ) में देखने को मिल रहा है। इस वर्ष आईआईटीएफ 2025 में यूपी की भागीदारी ने न केवल प्रदेश के युवाओं की रचनात्मकता और उद्यमशीलता को उजागर कर रही है, बल्कि योगी सरकार की युवा प्रतिभाओं को नवाचार एवं आत्मनिर्भरता के लिए प्रोत्साहित करने और विकास के अवसर सृजित करने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित कर रही है। सीएम योगी के विजन में प्रदेश में चलाए जा रहे रोजगार मेला, सीएम युवा कार्यक्रम और ओडीओपी योजना उत्तर प्रदेश के युवाओं को सशक्त बना रही हैं। जो न केवल राज्य के युवाओं को नौकरी के अवसर प्रदान करने, उनके कौशल का विकास करने और उनमें उद्यमिता व नवाचार को बढ़ावा दे रही है। जहां रोजगार मेले युवाओं को रोजगार से जोड़ते हैं, तो वहीं सीएम युवा कार्यक्रम का ध्येय उनके कौशल और क्षमताओं को मजबूती प्रदान करना है। सीएम युवा कार्यक्रम प्रदेश के युवाओं को कौशल, मार्गदर्शन और संसाधनों से लैस करता है ताकि वे अपने उद्यमों को शुरू कर सकें ताकि वे ऐसे उद्यम या व्यवसाय स्थापित कर सकें, जो दूसरों के लिए भी रोजगार सृजित कर सकें। सीएम योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना ओडीओपी, उन्हें उनके अपने ही जनपद में स्थानीय कौशलों को सफल व्यवसायों में बदलने में मदद करता है। सीएम योगी की इस योजना का अनुकरण वर्तमान में देश के अन्य राज्य भी कर रहे हैं। आईआईटीएफ में अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने वाले कई युवाओं ने साझा किया कि योगी सरकार की इन योजनाओं ने कैसे उनके स्टार्ट अप आइडिया, उनके परंपरागत व स्थानीय कौशलों को फलते-फूलते उद्यमों में बदलने में मदद की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सपना एक ऐसे भविष्य का है जहां उत्तर प्रदेश के युवा नौकरी तलाशने वाले न होकर नौकरी सृजित करने वाले बनें, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में नवाचार और आत्मनिर्भरता को गति दें, साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाएं। योगी सरकार की युवा-अनुकूल नीतियों ने राज्य के विकास को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कौशल उन्नयन से लेकर स्टार्टअप समर्थन तक राज्य प्रशासन ने एक ऐसा वातावरण तैयार किया है जो युवाओं को अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सशक्त बनाता है। राज्य सरकार की ये पहलें केवल व्यक्तियों की मदद ही नहीं कर रही हैं, बल्कि वे उत्तर प्रदेश के समग्र विकास के आधारभूत ढांचे को मजबूत भी कर रही हैं। जिसमें नई विचारधाराएं, तकनीकी नवाचार और ऊर्जावान भागीदारी मुख्यधारा में आ रही हैं। आईआईटीएफ और यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय व प्रतिष्ठित मंचों में राज्य के युवा उद्यमियों की बढ़ती उपस्थिति योगी सरकार की सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता का मजबूत प्रतिबिंब है। जिस तरह से राज्य के युवा आत्मविश्वास के साथ आगे आ रहे हैं, हैंडीक्राफ्ट से लेकर कृषि-आधारित उद्योगों तक विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार ला रहे हैं, उत्तर प्रदेश अवसरों और उद्यमिता का केंद्र बनकर उभर रहा है। योगी सरकार का युवाओं को सशक्त बनाने पर ध्यान एक मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी राज्य की राह प्रशस्त कर रहा है।

माघ मेले की तैयारी पर बड़ा ऐक्शन: प्रयागराज पहुंचेंगे सीएम योगी

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को प्रयागराज दौरे पर रहेंगे और माघ मेले की तैयारी को लेकर आई ट्रिपलसी सभागार में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे, तथा सभी अधिकारियों के साथ मेले को भव्य और दिव्य बनाने की चर्चा करेंगे। योगी शनिवार को एक विवाह समारोह में भी शामिल होने के लिए प्रयागराज पहुंचेंगे। इन कार्यक्रमों में शामिल होंगे सीएम  सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री आई ट्रिपल सी सभागार में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। उसके उपरांत गंगा पूजन करने के बाद एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद वह लखनऊ के लिए प्रयागराज से प्रस्थान करेंगे, जिसको लेकर प्रशासन तैयारी में लगा हुआ है। वहीं, सीएम योगी के दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई है। उनकी सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए है।  बैठक में करेंगे इन मुद्दों पर चर्चा  गौरतलब है कि अगले वर्ष लगने वाले माघ मेले को भव्य और दिव्य बनाने के लिए मुख्यमंत्री योगी प्रयागराज दौरे पर रहेंगे। साथ ही साथ 2024 और 2025 में महाकुंभ के तर्ज पर इस बार का माघ मेला रहेगा। योगी माघ मेले को लेकर पुलिस प्रशासन के साथ भी बैठक करेंगे और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए किस तरीके का इंतजाम किए गए हैं इस पर भी चर्चा कर सकते हैं।  

नितीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए सीएम योगी

लखनऊ  बिहार में नई सरकार के गठन के अवसर पर आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। नितीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत एनडीए के तमाम मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया था। मुख्यमंत्री योगी जैसे ही पटना एयरपोर्ट पर पहुंचे तो समर्थकों के बीच अद्भुत उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देखते ही लोगों ने जय श्री राम के नारे लगाए। बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने गुरुवार को 10वीं बार शपथ ली। मुख्यमंत्री योगी की यह उपस्थिति न सिर्फ दोनों राज्यों के बीच बढ़ते राजनीतिक और विकासात्मक संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और समन्वय को नई दिशा प्रदान करती है। हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने एनडीए के पक्ष में सक्रिय भूमिका निभाई थी। चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने बिहार के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में अनेक जनसभाओं को संबोधित किया था। उनके प्रभावशाली वक्तव्यों, जनसंपर्क शैली और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता ने पार्टी के पक्ष में सकारात्मक माहौल तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चलाए गए चुनाव अभियान के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति ने पार्टी और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह और ऊर्जा भरी थी। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में विकसित भारत के लिए सुरक्षा, विकास, सुशासन और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों पर जनता के बीच स्पष्ट और सशक्त संदेश दिए। बिहार की जनता के प्रति उनकी आत्मीयता और भरोसेमंद नेतृत्व शैली ने न केवल मतदाताओं को प्रभावित किया बल्कि भाजपा संगठन को भी मजबूत आधार प्रदान किया। शपथ ग्रहण समारोह में उनकी उपस्थिति इस बात का भी प्रतीक है कि भारतीय जनता पार्टी केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि विकासात्मक और सामाजिक सहयोग के दृष्टिकोण से भी दोनों राज्यों के बीच संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उत्तर प्रदेश और बिहार, दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक रिश्ते सदियों से जुड़े रहे हैं। ऐसे में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों का एक साथ आना भविष्य में आपसी सहयोग की संभावनाओं को और व्यापक बनाता है।

योगी सरकार का नया विकास खाका, मेरठ-कानपुर-मथुरा होंगे विशेष शहरों की तर्ज पर विकसित

 लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन के समग्र शहरी विकास की समीक्षा करते हुए कहा कि तीनों शहरों का विकास केवल निर्माण-कार्य पर आधारित न हो, बल्कि उसमें स्थानीय पहचान, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक शहरी सुविधाओं का संतुलन साफ दिखाई दे. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं को चरणबद्ध ढंग से लागू किया जाए और काम समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा हो. बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तीनों मंडलों के मंडलायुक्त मौजूद रहे. बताया गया कि अयोध्या, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज की तर्ज पर अब मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन में समेकित विकास मॉडल लागू किया जा रहा है. इसके तहत कुल 478 परियोजनाओं को चिन्हित किया गया है, जिनमें मेरठ में 111, कानपुर में 109 और मथुरा-वृंदावन में 258 परियोजनाएं शामिल हैं. सभी परियोजनाओं को अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक श्रेणियों में विभाजित किया गया है. पहले चरण के रूप में वर्ष 2025-26 में तीनों शहरों की 38 प्राथमिक परियोजनाओं पर काम प्रस्तावित है. इनमें यातायात सुधार, चौराहों का पुनर्विकास, मल्टीलेवल पार्किंग निर्माण, हरित क्षेत्र विस्तार, सड़क और पेवमेंट सुधार, बिजली लाइनों को भूमिगत करने, जल प्रबंधन और पर्यटन सुविधाओं को उन्नत करने से जुड़े कार्य शामिल हैं. मेरठ: ग्रीन कॉरिडोर मॉडल पर बिजली बम्बा बाईपास टेड इन लेगेसी, राइजिंग टू टुमॉरो” की अवधारणा पर आधारित है. योजना का फोकस औद्योगिक पहचान को बनाए रखते हुए शहर को आधुनिक ट्रैफिक, सार्वजनिक परिवहन और हरित ढांचे से जोड़ना है. प्रमुख प्रस्तावों में मैनावती मार्ग चौड़ीकरण, मल्टीलेवल पार्किंग निर्माण, मास्टर प्लान की प्रमुख सड़कों का विकास, ग्रीन पार्क क्षेत्र का अर्बन डिजाइन सुधार, मकसूदाबाद में सिटी फॉरेस्ट और बोटैनिकल गार्डन, वीआईपी रोड सुधार, रिवरफ्रंट लिंक, ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और मेट्रो विस्तार शामिल है. ग्रेटर कानपुर के रूप में नए विस्तार क्षेत्र का मॉडल भी प्रस्तुत किया गया. मथुरा-वृंदावन: विजन-2030 के तहत धार्मिक पर्यटन मॉडल मथुरा-वृंदावन के लिए मास्टर प्लान को “विजन-2030” के रूप में प्रस्तुत किया गया. योजना का फोकस धार्मिक पर्यटन, यात्री सुविधाओं और शहर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना है. प्रमुख प्रस्तावों में स्ट्रीट फसाड डेवलपमेंट, मल्टीलेवल पार्किंग, बस पार्किंग, शहर के प्रमुख प्रवेश द्वारों का सौंदर्यीकरण, नए मार्गों का निर्माण, बरसाना–गोवर्धन–राधाकुंड कॉरिडोर सुधार, परिक्रमा मार्ग पर आधुनिक सुविधाएं, तथा नगर सीमा से धार्मिक स्थलों तक संकेतक और प्रकाश व्यवस्था शामिल है. निजी निवेश पर जोर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि परियोजनाओं को लागू करने में नवाचार और आधुनिक प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए. जहां संभव हो, पीपीपी मॉडल अपनाया जाए और निजी क्षेत्र के सहयोग से रेवेन्यू शेयरिंग की व्यवस्था विकसित की जाए. उन्होंने कहा कि शहरों के विकास का उद्देश्य ऐसा ढांचा तैयार करना है जो यातायात को सुगम बनाए, सार्वजनिक परिवहन और पैदल यात्रियों को प्राथमिकता दे तथा शहर अधिक हरित और स्वच्छ बने. मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि आवश्यक होने पर परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराया जाएगा.

पीएम मोदी के नेतृत्व में किसानों के सम्मान व कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही डबल इंजन सरकारः सीएम योगी

पीएम नरेंद्र मोदी ने कोयम्बटूर से जारी की किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त देश के 9 करोड़ से अधिक किसानों के खाते में आई 18000 करोड़ से अधिक की राशि, उत्तर प्रदेश के 2.15 करोड़ से अधिक किसान भी हुए लाभान्वित  सीएम योगी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त का उपहार देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जताया आभार  बोले सीएम- पीएम मोदी ने सशक्त कृषि व आत्मनिर्भऱ किसान के संकल्प को किया दृढ़  उप्र के कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई ऊर्जाः मुख्यमंत्री  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त का उपहार देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कोयम्बटूर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी की। इससे देश के 9 करोड़ से अधिक किसानों के खाते में 18000 करोड़ रुपये आए। वहीं इससे उत्तर प्रदेश के भी 2.15 करोड़ से अधिक किसान लाभान्वित हुए।  सशक्त कृषि-आत्मनिर्भर किसान के संकल्प को किया और दृढ़ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के यशस्वी नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार अन्नदाता किसानों के सम्मान एवं कल्याण हेतु निरंतर समर्पित भाव से कार्यरत है। आज इसी शृंखला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित 'दक्षिण भारत प्राकृतिक कृषि शिखर सम्मेलन-2025' में देश भर के 9 करोड़ से अधिक किसान बंधुओं को 18,000 करोड़ रुपये से अधिक राशि की किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त हस्तांतरित कर सशक्त कृषि और आत्मनिर्भर किसान के संकल्प को और दृढ़ किया है। उप्र के कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई ऊर्जा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पोस्ट में लिखा कि उत्तर प्रदेश के 2.15 करोड़ से अधिक किसानों को भी इस किस्त का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुआ है, जिससे राज्य के कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस उपहार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया।

दिव्यांगजन को विशेष अवसर देने पर बल, वंचित समाज को मुख्यधारा में लाया जाएगा

महिला और बाल विकास पर विशेष प्राथमिकता, महिलाएं देश और समाज की मुख्य धुरी कामकाजी महिलाओं के लिए पिंक इंडस्ट्रियल पार्क बनेगा, पिंक ट्रांसपोर्ट की भी व्यवस्था उत्तर प्रदेश 2047 तक बनेगा विकसित प्रदेश, AI और महिला सशक्तिकरण से होगा वास्तविक विकास  स्टेकहोल्डर वर्कशॉप में सामाजिक सुरक्षा पर बनी रणनीति विकसित उत्तर प्रदेश विजन-2047 पर एक साथ 9 विभागों ने साझा की अपनी रणनीति समाज कल्याण विभाग की स्टेकहोल्डर वर्कशॉप में योजना के क्रियान्वयन पर दिया गया जोर लखनऊ उत्तर प्रदेश को 2047 तक विकसित प्रदेश बनाने के लिए समाज कल्याण विभाग ने बुधवार को गोमतीनगर स्थित भागीदारी भवन में विभागीय स्टेकहोल्डर वर्कशॉप आयोजित की। यह वर्कशॉप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समावेशी व सक्षम उत्तर प्रदेश के संकल्प को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। इसमें प्रदेश के 9 विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभाग कर उज्जवल भविष्य की नई परिकल्पना और नीतियों को दिशा देने वाले महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। 2047 तक प्रत्येक क्षेत्र में होगा समेकित विकास समाज कल्याण विभाग की इस कार्यशाला का उद्देश्य सशक्त समाज, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीकी प्रगति, महिला सशक्तिकरण और सतत विकास की दिशा में आवश्यक नीतिगत हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श करना था। हितधारकों के सामूहिक विमर्श ने राज्य के दीर्घकालिक विकास एजेंडे को नई दिशा देने का कार्य किया। ‘उत्तर प्रदेश बनेगा बदलाव का मॉडल’ समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव एल. वेंकटेश्वर लू ने कहा कि विजन 2047 केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि समाज-केन्द्रित बदलाव का संकल्प है। हमारा लक्ष्य है कि प्रत्येक कमजोर वर्ग महिलाएं, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, बच्चे, अल्पसंख्यक और ट्रांसजेंडर समुदाय तक नीतियों का लाभ तेजी और समानता के साथ पहुंचे। दिव्यांगजन को विशेष अवसर देने की रणनीति पर बल समाज कल्याण विभाग की इस कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि समाज के हर वर्ग और समुदाय का विकास होगा। उत्तर प्रदेश की आबादी 25 करोड़ है जिसमें 75 लाख दिव्यांगजन हैं। विकसित उत्तर प्रदेश के तहत उनके सर्वांगीण विकास पर काम किए जाने के लिए एक रुपरेखा प्रस्तुत की गई । इस कार्यशाला में दिव्यांगजन के उत्थान पर विशेष चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश सरकार नौकरी के साथ साथ, उद्योग के लिए ऋण की भी व्यवस्था कराएगी। वंचित समाज और बुजुर्गों को मुख्यधारा में लाया जाएगा उत्तर प्रदेश विकसित सही मायने में तभी बनेगा जब हाशिए पर पड़ी अनुसूचित जाति, जनजाति ओबीसी और अल्पसंख्यकों को भी शिक्षित और समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही बच्चों और बुजुर्गों की सामाजिक सुरक्षा और विकास पर कार्य करने के लिए प्रतिबद्धता जताई गई। कार्यशाला में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में अभी 3 करोड़ वृद्धजन हैं। इनके लिए सेवा साथी एप से रोजगार और स्वावलंबन की दिशा में काम किया जा रहा है। वृद्धजनों के लिए एक व्यापक रणनीति पर चर्चा करते हुए बताया गया कि इनके सामाजिक सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाएगा। वृद्धों के लिए आवास बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। युवाओं और बच्चे के विकास पर जोर देना होगा उत्तर प्रदेश के विकास में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और आगे निभाएंगे। प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार उपलब्ध करना सरकार की प्राथमिकता है जिस पर कई विभाग अपने स्तर पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही जो बच्चे विकास की दौड़ में पीछे छूट गए हैं उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत किया जाएगा।     महिला और बाल विकास पर विशेष प्राथमिकता विकसित उत्तर प्रदेश @47 विजन में महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके स्वावलंबन पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई। इसके लिए पिंक इंडस्ट्रियल पार्क बनेगा जो केवल कामकाजी महिलाओं के लिए होगा। इस इंडस्ट्रियल पार्क में केवल महिलाएं ही उद्योग संचालित करेंगी और काम करेंगी। उनके लिए  महिला आधारित पिंक ट्रांसपोर्ट सेवा होगी जिसमें केवल महिलाएं ही यात्रा करेंगी। इस इंडस्ट्रियल पार्क में क्रेच होगा जहां छोटे बच्चों का ध्यान रखा जाएगा। आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए बच्चों को उचित पोषाहार महिला और बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव लीना जौहरी ने कहा कि अगर सही मायने में विकास करना है तो सबको साथ में मिलकर काम करना होगा। हमें केवल योजनाएं ही नहीं बनानी है बल्कि उसका क्रियान्वयन भी करना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 1890000 आंगनबाड़ी हैं। इसके माध्यम से बच्चों के पोषण का भरपूर ध्यान रखा जा रहा है। इसके माध्यम से हम बच्चों का ध्यान रखते हैं। उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं। जब बच्चें स्वस्थ होंगे तो स्वत: प्रदेश और देश का विकास हो जाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त करने से देश सशक्त होता है। उन्होंने बच्चों के मानसिक विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्र आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित होंगे ‌ 2047 तक उन्हें प्ले स्कूल की तरह विकसित किया जाएगा।  2047 के लिए एक विस्तृत रुपरेखा पर काम करने का आवश्यकता  पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सुभाष चंद्र शर्मा ने कहा कि देश काल और परिस्थिति तीनों को ध्यान में रखते हुए काम करना होगा। भारत अन्य देशों के मुकाबले भिन्न है इसलिए इसकी विविधता को देखते हुए कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमें 2047 में प्रदेश की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करना होगा।   

दुधवा नेशनल पार्क में ईको टूरिज्म को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगें ये प्रस्ताव

दुधवा नेशनल पार्क तक 226 करोड़ रूपये की लागत से होगा सड़कों का चौड़ीकरण व निर्माण विस्टाडोम कोच की यात्रा के अपग्रेडेशन के लिए 19.28 लाख रुपये स्वीकृत दुधवा नेशनल पार्क में 8 करोड़ रूपये की लागत से लगेगे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप साइनेज लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म बोर्ड ने दुधवा नेशनल पार्क और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। जिसमें दुधवा नेशनल पार्क तक सड़क, रेल और हवाई मार्ग के माध्यम से पर्यटकों की पहुंच को सुगम और सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया। इन प्रस्तावों का उद्देश्य न केवल प्रदेश में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देना है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करना है। राज्य सरकार के अनुमोदन के बाद जल्द ही ये परियोजनाएं धरातल पर उतरी जाएगीं, जो सीएम योगी के विजन के अनुरूप यूपी इको टूरिज्म का हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।   लखनऊ से लखीमपुर के बीच शुरू की गई एसी बस सेवा को पूरे इको पर्यटन सत्र तक जारी रखने का प्रस्ताव दुधवा नेशनल पार्क में सड़क मार्ग से पहुंच को सुगम बनाने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखनऊ से लखीमपुर के बीच पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई एसी बस सेवा को पूरे इको पर्यटन सत्र तक जारी रखने का प्रस्ताव रखा गया है। यह सेवा पर्यटकों को दुधवा नेशनल पार्क तक आरामदायक यात्रा प्रदान करेगी। इसी क्रम में, पलिया-मैलानी और बिछिया को जोड़ने वाली नई बस सेवा शुरू करने का सुझाव भी रखा गया है। यूपीएसआरटीसी को भेजे जाने वाले इन प्रस्तावों से नेशनल पार्क के आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यटन का विस्तार होगा। साथ ही रेलवे मार्ग से दुधवा नेशनल पार्क तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए दिल्ली से लखनऊ (मैलानी होते हुए) चलने वाली पुरानी ट्रेन को पुनः बहाल करने और इसमें एसी कोच जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया है। यह कदम विदेश एवं दूरदराज के पर्यटकों के लिए विशष रूप से लाभदायक साबित होगा। हिंडन से पलिया तक विमान सेवा शुरू करने का जल्द जारी होगी टेंडर हवाई संपर्क को मजबूत करने के लिए हिंडन से पलिया तक विमान सेवा शुरू करने का टेंडर वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) मॉडल पर तैयार किया जा रहा है। पर्यटन विभाग और सिविल एविएशन के समन्वय से यह परियोजना चालायी जाएगी। पात्रता शर्तों में भारत में पंजीकृत कंपनी, 6 सीटों वाले सिंगल व ट्विन इंजन विमान की सेवा शुरू करने का प्रस्ताव है। जिसके लिए निजी व चार्टेड विमान का संचालन करने वाली कंपनियों की सेवा ली जाएगी।बोर्ड की मंजूरी से यह सेवा पर्यटकों को समय की बचत देगी। दुधवा नेशनल पार्क तक 226 करोड़ रूपये की लागत से होगा सड़कों का चौड़ीकरण व निर्माण दुधवा नेशनल पार्क, लखीमपुर खीरी तक सड़क मार्ग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पीडब्ल्यूडी के माध्यम से 226.82 करोड़ रुपये की कई परियोजनाओं का प्रस्तावित की गई हैं। इसके तहत लखनऊ से दुधवा तक चार लेन सड़क संपर्क सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभिन्न चेनेज पर चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य भी शामिल हैं। जिसमें 21.14 करोड़ रुपये की लागता से पलिया हवाई पट्टी का 3 मीटर से 10 मीटर चौड़ीकरण कार्य, किशनपुर रोड का 32.95 करोड़ रुपये की लागत से 5.7 किमी चौड़ीकरण, लखीमपुर-बिजुआ-भीरा-पलिया मार्ग पर 21.6 करोड़ रूपये की लागत से इंटरलॉकिंग और सिसईया-धौराहरा-पलिया रोड का 134.23 करोड़ रुपये की लागत से 38.35 किमी सुदृढ़ीकरण जैसे कार्यों का प्रस्ताव रखा गया है। इन प्रोजेक्टस के निर्माण से जहां एक ओर नेशनल पार्क आने वाले पर्यटकों की पहुंच सुगम होगी साथ ही आस-पास के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के लोगों की यातायात व्यवस्था एवं अर्थिक गतिविधियों में भी लाभप्रद साबित होगी। विस्टाडोम कोच की यात्रा के अपग्रेडेशन के लिए 19.28 लाख रुपये स्वीकृत नेशनल पार्क के क्षेत्र में साइनेज की कमी को दूर करने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 8 करोड़ रुपये की परियोजना प्रस्तावित है। जिसमें अंतरराष्ट्रीय/राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप साइनेज स्थापित किए जाएंगे, जो पर्यटकों को दिशा-निर्देश प्रदान करेंगे। इनकी सैंपल डिजाइन पहले से तैयार हैं, जिन्हें अनुमोदन के पश्चात शीघ्र ही पार्क में लगाया जाना है। इनके अलावा, अनुभवात्मक पर्यटन पर फोकस करते हुए 82 क्षमता वाले विस्टाडोम कोच की यात्रा के अपग्रेडेशन के लिए 19.28 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। कतर्नियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य में गेरुआ नदी पर वर्तमान दो बोट के अलावा दो अतिरिक्त बोट सफारी शुरू करने का प्रस्ताव है, जो इको बोर्ड द्वारा संचालित होंगी। ये प्रस्ताव न केवल दुधवा नेशनल पार्क को को पर्यटन हब बनाएंगे, बल्कि स्थानीय निवासियों एवं क्षेत्र में रहने वाले जनजातिय समुदायों के युवाओं को रोजगार के नये मौके देंगे। साथ ही पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इन परियोजनाओं के सफल क्रियांवयन से नेशनल पार्क में आने वाले वार्षिक पर्यटक संख्या में 30 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है, जो उत्तर प्रदेश को इको टूरिज्म में अग्रणी राज्य बनाएंगी।

सीएम योगी के निर्देशानुसार प्रदेश में युवा व महिला उद्यमियों को स्वरोजगार से जोड़ने पर फोकस

लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार युवाओं को कौशल, पूंजी और बाजार से जोड़कर राज्य में सूक्ष्म व परंपरागत उद्योगों की नई क्रांति खड़ी कर रही है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (CM-YUVA) के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1.70 लाख युवाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि हर वर्ष 1 लाख से अधिक नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना का प्रयास किया जा रहा है। योगी सरकार की नीतियों का मूल उद्देश्य युवा, महिला और पारंपरिक हस्तशिल्प सभी को एक साझा आर्थिक विकास मॉडल से जोड़ना है। इस व्यापक दृष्टि ने स्वरोजगार, उद्यमिता और रोजगार सृजन की दिशा में प्रदेश में नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त किया है। युवा उद्यमिता को नई दिशा दे रही सीएम युवा योजना सीएम युवा योजना के तहत प्रदेश के 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को 5 लाख रुपये तक के उद्योगों और सेवा परियोजनाओं पर 100 प्रतिशत ब्याज-मुक्त तथा बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही, परियोजना लागत पर 10 प्रतिशत मार्जिन मनी का अनुदान भी दिया जा रहा है। न्यूनतम 8वीं पास और किसी मान्यता प्राप्त संस्था से कौशल प्रशिक्षण प्राप्त युवा इस योजना के लिए पात्र हो सकते हैं। प्रशिक्षण के बाद इनमें से अनेक युवा न सिर्फ खुद उद्यमी बन रहे हैं, बल्कि अन्य युवाओं और महिलाओं को भी रोजगार दे रहे हैं। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उद्योग आधारित आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को नए आयाम दे रही है। पारंपरिक कलाओं को मिली संजीवनी योगी सरकार ने ओडीओपी योजना के जरिए पारंपरिक हस्तकला एवं हस्तशिल्प को नया जीवन दिया है, जो 2017 से पहले समाप्ति के कगार पर थे। प्रदेश का शजर उद्योग इसका सबसे सशक्त उदाहरण है। देश में केवल केन नदी की रेत में मिलने वाला यह कीमती शजर पत्थर कभी मात्र कुछ हस्तशिल्प परिवारों की आजीविका का सहारा था। लेकिन सरकार ने इसे ओडीओपी से जोड़कर न सिर्फ इसका बाजारीकरण किया, बल्कि इसे जीआई टैग भी दिलाया। नतीजा यह रहा कि शजर उद्योग से जुड़े परिवारों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि सरकारी सहयोग, प्रशिक्षण और वित्तीय मदद कैसे किसी विलुप्तप्राय उद्योग को दोबारा जीवित कर सकती है। चाहें विश्वकर्मा श्रम सम्मान हो या टूलकिट वितरण हो, इन कार्यक्रमों के जरिए प्रदेश में कारीगरों को कुशल बनाकर उनकी आर्थिक उन्नति सुनिश्चित की जा रही है। उल्लेखनीय है कि शजर उद्योग के साथ ही प्रदेश भर में ओडीओपी के माध्यम से महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों और युवाओं को नए बाजार, प्रशिक्षण और डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं। इससे हजारों महिलाओं को स्वरोजगार मिला है और वे अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में सक्षम हुईं हैं। महिला स्वावलंबन, परंपरागत कारीगरी और आधुनिक विपणन का यह संगम अब उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक पहचान बनता जा रहा है।