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पीएम मोदी के लिए कांग्रेस का ट्वीटेड सरप्राइज: फ्लाइट टिकट बुक, जनता का ध्यान आकर्षित

  नई दिल्ली असम के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक बेहद व्यंग्यात्मक पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री से हिंसा प्रभावित मणिपुर जाने की अपील की है.  X पर एक पोस्ट में, खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा, "चुनाव वाले राज्य हमेशा आपकी सर्वोच्च प्राथमिकता होते हैं, लेकिन मणिपुर को "छोड़ा नहीं जाना चाहिए. राज्य 2023 से जल रहा है, और अब फिर से जल रहा है." खेड़ा ने दोनों राज्यों के बीच कम दूरी की तरफ इशारा करते हुए लिखा, “आप आज असम में हैं. मणिपुर यहां से सिर्फ एक घंटे की दूरी पर है. कृपया वहां भी जाइए. प्रधानमंत्री की उपस्थिति मणिपुर के लोगों को आश्वस्त करने में बहुत मददगार साबित हो सकती है.”  'मेरे पास आपका नंबर नहीं था…': कांग्रेस नेता ने फ्लाइट टिकट की फोटो साझा करते हुए लिखा, "आपकी आसानी के लिए हमने गुवाहाटी से इम्फाल का टिकट बुक कर दिया है, आपको बस विमान में सवार होना है. चूंकि मेरे पास आपका नंबर नहीं था, इसलिए मैं टिकट यहीं साझा कर रहा हूं." उन्होंने केंद्र के 'PM CARES' फंड पर कटाक्ष करते हुए संदेश दिया कि प्रधानमंत्री वहां जाकर दिखाएं कि वह वाकई मणिपुर की परवाह करते हैं. मणिपुर में 2023 से जारी हिंसा और बीच-बीच में भड़कती घटनाओं को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर सवाल उठाता रहा है. वहीं सरकार का कहना है कि शांति बहाली के प्रयास जारी हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. इस अनूठे राजनीतिक विरोध ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. जहां कांग्रेस समर्थक इसे मणिपुर की अनदेखी का मुद्दा बना रहे हैं, वहीं आलोचक इसे राजनीतिक नौटंकी करार दे रहे हैं.

कांग्रेस का बड़ा कदम: बंगाल में ममता के खिलाफ अकेले चुनाव लड़ेगी पार्टी, एजेंडा क्या होगा?

कलकत्ता  पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव अप्रैल-मई में होने वाले हैं. लेकिन, अभी से ही संकेत मिलने लगे हैं कि बंगाल की लड़ाई भी लगभग दिल्ली और बिहार जैसी ही हो सकती है – बंगाल में भी कांग्रेस करीब करीब उसी भूमिका में नजर आ सकती है, जैसा कांग्रेस का रवैया दिल्ली और बिहार में देखा जा चुका है. पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ अपनी मुहिम को धार देने के लिए ममता बनर्जी दिल्ली में हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिल चुकी हैं, और सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने अपने केस की पैरवी भी कर चुकी हैं. साथ ही, ममता बनर्जी चाहती हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस संसद में महाभियोग का प्रस्ताव लाए, और तृणमूल कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल उसको सपोर्ट करें – लेकिन, सपोर्ट के बदले में वो कुछ भी शेयर नहीं करना चाहती हैं.  मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो पहले से ही तृणमूल कांग्रेस के पश्चिम बंगाल चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर रखा है. अब तो कांग्रेस ने भी पश्चिम बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है – ऐसी सूरत में बंगाल के चुनाव नतीजे दिल्ली और बिहार से कितने अलग होंगे, देखना महत्वपूर्ण होगा. पश्चिम बंगाल की संभावित चुनावी जंग ये तो अब पूरी तरह साफ हो गया है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को चुनावी लड़ाई सिर्फ बीजेपी के खिलाफ नहीं लड़ना है. 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी बहुत ज्यादा सीटें तो नहीं जीत पाई थी, लेकिन मुख्य विपक्षी दल तो बन ही गई. कांग्रेस का तो खाता भी नहीं खुल पाया था.  मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग के मुद्दे पर विपक्ष का साथ चाह रहीं ममता बनर्जी से दिल्ली में जब कांग्रेस के बारे पूछा गया तो उनका जवाब था कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी. कांग्रेस के साथ किसी भी तरह के चुनावी गठबंधन की संभावना को नकारते हुए ममता बनर्जी पहले भी कह चुकी हैं, तृणमूल कांग्रेस की रणनीति साफ है, जबकि बाकी पार्टियां टीएमसी के खिलाफ लड़ने की रणनीति बनाती हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर अब कांग्रेस का रुख भी सामने आ गया है. कांग्रेस का कहना है, प्रदेश संगठन और कार्यकर्ताओं की लंबे समय से मांग रही है कि पार्टी राज्य में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के साथ चुनावी मैदान में उतरे. पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने आलाकमान के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा है कि केंद्रीय नेतृत्व ने बंगाल कांग्रेस की भावनाओं का सम्मान किया और अकेले चुनाव लड़ने के फैसले को मंजूरी दी. बंगाल कांग्रेस की तरफ से एक बयान में कहा गया है, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी, सांसद ईशा खान चौधरी सहित सूबे के सीनियर नेताओं की मौजूदगी में व्यापक विमर्श हुआ – और तय हुआ कि पार्टी 2026 का विधानसभा चुनाव अकेले दम पर लड़ेगी. बीजेपी के खिलाफ ममता बनर्जी की लड़ाई में कांग्रेस की ही तरह एक और मोर्चा खड़ा हो रहा है. सीपीएम की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने हाल ही में टीएमसी से सस्पेंड विधायक हुमायूं कबीर से मुलाकात की थी. मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनवाने की घोषणा करके चर्चा में आए हुमायूं कबीर ने जनता उन्नयन पार्टी बनाई है, और ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करने का दावा कर रहे हैं.  बंगाल चुनाव में कांग्रेस की भूमिका 2025 के शुरू में दिल्ली विधानसभा चुनाव और आखिर में बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही. पश्चिम बंगाल के 2021 के चुनाव में तो राहुल गांधी की भूमिका रस्मअदायगी जैसी थी. राहुल गांधी एक दिन के लिए पश्चिम बंगाल में कैंपेन करने गए थे, और कोविड के कारण आगे के कार्यक्रम रद्द कर दिए गए थे.  2025 के पश्चिम बंगाल चुनाव में कांग्रेस की भूमिका का अंदाजा कैसे लगाया जाए? क्या राहुल गांधी दिल्ली और बिहार की तरह बंगाल में भी कांग्रेस को चुनाव लड़ाने वाले हैं या 2021 की ही तरह रस्मअदायगी निभाने की तैयारी है?  दिल्ली में हुई कांग्रेस की मीटिंग में ममता बनर्जी के सबसे बड़े विरोधी अधीर रंजन चौधरी भी शामिल थे, जो 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद से हाशिये पर भेजे जा चुके हैं. और, ये भी ममता बनर्जी के फेवर में ही जाता है. 2024 के चुनाव से पहले ही ममता बनर्जी ने घोषणा कर डाली थी कि वो अकेले चुनाव लड़ेंगी. पहले तो सुनने में आया था कि वो कांग्रेस को दो सीटें गठबंधन के तहत देने के तैयार भी थीं, लेकिन बाद में मना कर दिया. और, भारत जोड़ो न्याय यात्रा के साथ राहुल गांधी के पश्चिम बंगाल में प्रवेश की पूर्व संध्या पर ही 'एकला चलो रे' घोषणा कर दी थी. फिर कांग्रेस नेतृत्व की तरफ से ममता बनर्जी के प्रति बयानों में सम्मान के भाव ही प्रकट किए जा रहे थे.  दिल्ली और बिहार चुनावों में राहुल गांधी के तेवर को देखें तो अंदाज बिल्कुल अलग था. दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल के खिलाफ राहुल गांधी उतने ही आक्रामक नजर आते थे, जितना बीजेपी के नेता. शीशमहल से लेकर दिल्ली शराब घोटाले तक, राहुल गांधी ने एक एक मामला गिनाकर अरविंद केजरीवाल को कठघरे में खड़ा कर दिया था.  ये भी था कि अरविंद केजरीवाल का भी कांग्रेस के प्रति ममता बनर्जी जैसा ही रवैया था. ममता बनर्जी ने तो विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक में रहते हुए भी अरविंद केजरीवाल का समर्थन किया था. मतलब, कांग्रेस के खिलाफ. जैसे समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने चुनाव कैंपेन भी किया था.  बिहार चुनाव राहुल गांधी दिल्ली की तरह तो नहीं लड़ रहे थे, लेकिन कोई कमी भी नहीं छोड़ी थी. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के साथ वोटर अधिकार यात्रा करते हुए उनको मुख्यमंत्री पद का चेहरा नहीं बताया. तेजस्वी यादव के बड़े भाई और प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बता देने के बाद भी. बाद में जो हुआ, न होता तो भी नतीजे शायद ही अलग होते.  तृणमूल कांग्रेस के लिए बंगाल … Read more

MP कांग्रेस में बड़ा बदलाव, जंबो कार्यकारिणी को खत्म करने का संगठन का ऐलान

भोपाल  कांग्रेस संगठन के ताज़ा निर्देशों ने मध्य प्रदेश कांग्रेस की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल के सख्त आदेश के बाद प्रदेश कांग्रेस में टेंशन का माहौल बन गया है। अब जिलों में मनमाने तरीके से बड़ी कार्यकारिणी बनाने पर रोक लगा दी गई है। जिला अध्यक्षों को मिला सीधा आदेश कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सभी राज्यों की इकाइयों और जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर साफ निर्देश दिए हैं कि — बड़े जिलों में अधिकतम 55 सदस्य छोटे जिलों में सिर्फ 35 सदस्य ही जिला कार्यकारिणी में शामिल किए जाएंगे। यह फैसला AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई बैठक में लिया गया। 15 दिन में कार्यकारिणी गठन के निर्देश वेणुगोपाल ने यह भी साफ कर दिया है कि सभी जिलों को 15 दिन के भीतर नई गाइडलाइन के अनुसार जिला कार्यकारिणी का गठन करना होगा। MP में पहले ही तोड़ी जा चुकी है गाइडलाइन मध्य प्रदेश में गुटबाजी को साधने के लिए लंबे समय से जम्बो कार्यकारिणी बनाने की परंपरा रही है। लेकिन नए निर्देश आने से पहले ही 30 जनवरी को कांग्रेस ने तीन जिलों की कार्यकारिणी जारी कर दी, जिनमें तय सीमा से कहीं ज्यादा पदाधिकारी बना दिए गए। आंकड़े जो बढ़ा रहे हैं संगठन की मुश्किल छिंदवाड़ा: 240 सदस्य सागर: 150 से ज्यादा पदाधिकारी मऊगंज (छोटा जिला): 40 सदस्य भोपाल शहर: 106 नामों की सूची भोपाल ग्रामीण: 85 सदस्यों की सूची तैयार इन आंकड़ों ने अब कांग्रेस संगठन को असमंजस में डाल दिया है।  अब क्या बदलेगी MP कांग्रेस की रणनीति? राष्ट्रीय नेतृत्व के सख्त रुख के बाद सवाल यह है कि— क्या जारी की गई जम्बो कार्यकारिणियों में कटौती होगी? या फिर संगठन और प्रदेश नेतृत्व के बीच टकराव बढ़ेगा? फिलहाल, कांग्रेस के नए फरमान ने मध्य प्रदेश की सियासत में नई बेचैनी और सियासी हलचल जरूर पैदा कर दी है।

भागीरथपुरा हादसे के पीड़ितों को आर्थिक और रोजगार राहत देने की मांग जोर पकड़ रही

इंदौर  देश के सबसे स्वच्छ और मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से बीमार हुए लोगों और जान गवाने वालों के परिजन को न्याय दिलाने की मांग उठाते हुए कांग्रेस ने शहर के राजबाड़ा पर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान उन 32 लोगों के परिवार के सदस्य भी शामिल हुए, जिनकी मौत उल्टी-दस्त से ग्रस्त होने से हुई है। इस दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंच से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि, सरकार पीड़ित परिवारों को एक करोड़ रुपए मुआवजा दें। नगर निगम में परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। अगर ये मांग पूरी नहीं होती है तो 8 दिन के बाद कांग्रेस पार्टी पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए जनता से निवेदन कर पूरा इंदौर बंद कराएगी। इंदौर में बनाई जाएं दो वाटर लैब शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि, दो वाटर लैब हर तैयार की जाए। कार्यकर्ता का यह दायित्व है कि घर-घर जाकर उस पानी के सैंपल लेकर जांच कराएं। भागीरथपुरा में रहने वाले छह माह के अव्यान साहू की मां ने कहा, इंदौर के दूषित पानी ने मेरे बेटे की जान ले ली। अन्य परिवारों ने भी उनकी परेशानी बताई। कई परिवारों ने कहा कि, अभी तक सहायता तक नहीं मिल सकी। धरना स्थल पर पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा, महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना सेतिया, विपिन वानखेड़े, शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे, उषा नायड़, अधिवक्ता प्रमोद द्विवेदी, शेख अलीम, पंडित कृपा शंकर शुक्ला, सत्यनारायण पटेल समेत अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि, हर परिवार की अपनी वेदना है। शहरवासियों ये महसूस करो कि, हमारे घर ये त्रासदी आ जाती तो क्या होता? जिन्हें हमने कुर्सी दी, वोट दिया उनसे सवाल करना जरूरी है। अब पानी से किसी की मौत न हो इसके लिए सभी को जागना जरूरी है। संसद तक इस मामले कि गूंज उठ चुकी है। देश के प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री, सुमित्रा महाजन और शिवराज सिंह चौहान ने सवाल क्यों नहीं पूछा? जिस पानी को हम जीवन देने का माध्यम मानते हैं, उस पानी का जहर इंदौर नगर निगम ने लोगों को पिला दिया। ये सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, व्यवस्था का पतन है। सवाल पूछा तो बोले- इंदौर को बदनाम कर रहे हैं पटवारी ने कहा- भागीरथपुरा में जो हुआ वो पूरे इंदौर और पूरे प्रदेश के पानी की स्थिति है। जनता का जीवन इतना सस्ता है कि, दो लाख रुपए देकर सबने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर दिया। उन परिवारों को लालच दिया गया कि, आवाज मत उठाना, एक भी शब्द कहा तो सहायता नहीं मिलेगी। सज्जन सिंह वर्मा और प्रतिनिधि मंडल को काले झंडे दिखाए गए। आखिर कैसा शहर बन रहा है हमारा इंदौर ? जब हम सवाल पूछते हैं तो मंत्री कहते हैं- इंदौर को बदनाम कर रहे हैं। दो हजार करोड़ रुपए की बन गई नकली फाइल जीतू पटवारी ने कहा, निगम में 2 हजार करोड़ रुपए की नकली फाइल बन गई। उनके पैसे भी निकल गए। कोर्ट में मुकदमा चल रहा है, लेकिन आरोपी कोई नहीं है। एक भी राजनीतिक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं। महापौर की साइन से फाइल बनती है। एमआइसी की साइन से फाइल बनती है। पार्षद फाइल पर साइन कर आगे बढ़ाते हैं। अधिकारी उसे आगे बढ़ाते हैं तो राजनीतिक लोगों की 2 हजार करोड़ रुपए के घोटाले में कोई जिम्मेदारी क्यों नहीं? ये रुपए जनता के ही थे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से इस्तीफे की मांग वहीं, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि, हमने इंदौर की जनता से आह्वान किया था कि, न्याय के लिए आएं। इस दौरान उन्होंने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से इस्तीफा देने की मांग की। साथ हीये भी कहा कि, कांग्रेस न्याय के लिए हमेशा लड़ती रहेगी। जिस शहर के सीएम खुद प्रभारी, वहां नहीं रुक रहीं मौतें- रीना सेतिया महिला प्रदेश अध्यक्ष रीना सेतिया ने कहा कि, 9 विधायक, 2 मंत्री, महापौर भाजपा के हैं। सीएम खुद इंदौर के प्रभारी मंत्री हैं, बावजूद इसके शहर को जहरीला पानी मिला। इंदौर में लगातार मौतें हो रही हैं, लेकिन अब तक किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। हम इन पीड़ित परिवारों के साथ संवेदना व्यक्त करते हैं और उनके न्याय के लिए लंबी लड़ाई भी लड़नी पड़ी तो पीछे नहीं हटेंगे।

कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में कांग्रेस ने 73 जिला महामंत्री बनाए; 18 नए महासचिव और सागर-मऊगंज DCC घोषित

भोपाल  कांग्रेस हाईकमान के साथ हाल ही में हुई बैठक के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस (Madhya Pradesh Congress) संगठन में लंबे समय से लंबित संगठनात्मक नियुक्तियों को तेजी से आगे बढ़ाया गया है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार उठ रही नाराजगी और संगठनात्मक ढिलाई पर असंतोष जताए जाने के बाद प्रदेश में ताबड़तोड़ नियुक्तियों का दौर शुरू हो गया है. इसी क्रम में पार्टी ने 18 जिलों में संगठन महासचिवों की नियुक्ति और 14 प्रकोष्ठों के अध्यक्षों एवं संयोजकों की घोषणा कर दी है. सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में हुई बैठक में संगठनात्मक देरी पर नाराजगी जताए जाने के बाद प्रदेश नेतृत्व ने प्राथमिकता के आधार पर जिला इकाइयों का पुनर्गठन शुरू किया. कहां किसे मिली नियुक्ति सागर, छिंदवाड़ा और मऊगंज जिलों की जिला कार्यकारिणी घोषित की गई. पार्टी के अंदरूनी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कई असंतुष्ट नेताओं को भी संगठन में एडजस्ट किया गया है ताकि स्थानीय स्तर पर मनमुटाव कम किया जा सके. सागर जिले में पूर्व जिलाध्यक्ष राजकुमार पचौरी को जिला संगठन महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है. पचौरी पहले भी जिला अध्यक्ष रह चुके हैं और दोबारा उसी पद के लिए प्रयासरत थे. उन्हें कमलनाथ समर्थक माना जाता है. इसी तरह सिंगरौली ग्रामीण में संकठा सिंह और सिंगरौली शहर में सुरेश कुमार दुबे को संगठन महासचिव बनाया गया है. पार्टी सूत्र बताते हैं कि इन नियुक्तियों में क्षेत्रीय संतुलन, स्थानीय प्रभाव और वरिष्ठ नेताओं को साधने की रणनीति प्रमुख रही. 14 प्रकोष्ठों के प्रमुखों की नियुक्ति कांग्रेस ने 14 प्रकोष्ठों के अध्यक्ष, संयोजक और समन्वयकों की नियुक्ति की है। अलग-अलग जातियों को साधने के लिए बंगाली समाज, बंजारा समाज, तैलिक साहू राठौर समाज, सर्व विश्वकर्मा समाज, स्वर्णकला, कोली/कोरी समाज, रजक समाज के नेताओं को समन्वयक संयोजक बनाया है। छिंदवाड़ा में ज्यादा फोकस पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा की जिला कांग्रेस कमेटी में पदाधिकारियों और सदस्यों को मिलाकर 258 पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है। छिंदवाड़ा में कमलनाथ और नकुलनाथ को जिला कांग्रेस कमेटी में संरक्षक बनाया गया है। छिंदवाड़ा की जिला कार्यकारिणी में 73 महामंत्री बनाए पूर्व सीएम कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा की जिला कांग्रेस कमेटी(DCC) में पदाधिकारियों और सदस्यों को मिलाकर 258 पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है। छिंदवाड़ा में कमलनाथ और नकुलनाथ को जिला कांग्रेस कमेटी में संरक्षक बनाया गया है। छिंदवाड़ा की जिला कांग्रेस कमेटी में कुल 258 नेताओं की नियुक्ति कार्यवाहक अध्यक्ष- 2 कोषाध्यक्ष-1 कार्यालय मंत्री- 2 प्रवक्ता- 1 मीडिया प्रभारी- 1 सोशल मीडिया प्रभारी उपाध्यक्ष- 33 महामंत्री-73 सचिव- 70 सहसचिव- 3 आमंत्रित सदस्य- 62 विशेष आमंत्रित- 9 कुल पदाधिकारी – 258 छिंदवाड़ा में 258 की नियुक्ति कार्यवाहक अध्यक्ष- 2, कोषाध्यक्ष-1, कार्यालय मंत्री- 2, प्रवक्ता- 1, मीडिया प्रभारी- 1, सोशल मीडिया प्रभारी, उपाध्यक्ष- 33, महामंत्री-73, सचिव- 70, सहसचिव- 3, आमंत्रित सदस्य- 62, विशेष आमंत्रित- 9, कुल पदाधिकारी – 258 की नियुक्ति की गई है। सागर में 23 जिला महामंत्री   उपाध्यक्ष-8, महामंत्री- 23, सचिव- 21, कार्यकारिणी सदस्य- 8, संरक्षक सदस्य- 11, विशेष आमंत्रित सदस्य- 42, प्रवक्ता-2, स्थाई आमंत्रित सदस्य- 23, स्थाई कार्यालय मंत्री-1, सोशल मीडिया अध्यक्ष-1 और निर्वाचन प्रभारी -1 की नियुक्ति की गई है। सागर में 23 जिला महामंत्री बनाए उपाध्यक्ष-8 महामंत्री- 23 सचिव- 21 कार्यकारिणी सदस्य- 8 संरक्षक सदस्य- 11 विशेष आमंत्रित सदस्य- 42 प्रवक्ता-2 स्थाई आमंत्रित सदस्य- 23 स्थाई कार्यालय मंत्री-1 सोशल मीडिया अध्यक्ष-1 निर्वाचन प्रभारी -1 मऊगंज में 23 महामंत्री विंध्य की मऊंगज विधानसभा सीट में कांग्रेस ने उपाध्यक्ष-7, महामंत्री- 23, सचिव- 28 और कोषाध्यक्ष- 1 की नियुक्ति की है। हालांकि इस नियुक्ति से स्थानीय कार्यकर्ता नाराज बताए जा रहे हैं। दरअसल, जिन्हें उम्मीद थी कि पद मिलेगा उन्हें कुछ नहीं मिला। नेताओं की परिक्रमा करने वालों को प्राथमिकता दी गई है। प्रदेश कांग्रेस संगठन महासचिव संजय कामले ने कहा कि शेष जिला कार्यकारिणियों की घोषणा भी जल्द की जाएगी. उनका कहना है कि वर्तमान चरण में प्राथमिकता उन जिलों को दी गई जहां संगठनात्मक गतिविधियाँ लंबे समय से रुकी हुई थीं या स्थानीय स्तर पर असंतोष की स्थिति थी. पार्टी अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर प्रदेश में यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है. संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले के नेतृत्व में जिला इकाइयों का पुनर्गठन और नियुक्तियों की श्रृंखला जारी है. पार्टी की रणनीति आगामी चुनावी तैयारियों के लिए जिलों में अधिक सक्रिय और मजबूत संगठनात्मक ढांचा खड़ा करने पर केंद्रित बताई जा रही है.  

मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस के धान खरीदी आंदोलन पर साधा निशाना, कहा– मुद्दाविहीन राजनीति कर रही है कांग्रेस

रायपुर धान खरीदी का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश में गर्म है. इस मुद्दे पर कांग्रेस के प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस मुद्दाविहीन है, इसलिए इस तरह का आंदोलन कर रही है. कांग्रेस का धर्म ही विरोध करना है. नारायणपुर रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मीडिया से चर्चा में कहा कि आज धान खरीदी की अंतिम तारीख है, धान खरीदी अच्छे से हो रही है. दो दिन पहले ही समीक्षा कर अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि किसानों का धान समय पर बिके और टोकन मिलने में देर न हो. अधिकारी लगातार इस पर काम कर रहे हैं. वहीं जमीन गाइडलाइन को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि गाइडलाइन में संशोधन किए गए हैं. सुझाव भी मांगे गए थे. अभी इस पर वर्किंग चल रही है. वहीं निजी अस्पतालों के आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं करने के ऐलान पर उन्होंने कहा कि जो भी बकाया है, उसे जारी किया जाएगा. बता दें कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नारायणपुर में दो दिन के प्रवास पर रहेंगे. राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा भी मुख्यमंत्री के साथ जा रहे हैं. इस दौरान 361 करोड़ के अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन होगा.

अंबाला नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने मेयर और पार्षद के 2 फरवरी तक मांगे आवेदन

अंबाला. कांग्रेस ने अंबाला नगर निगम चुनावों के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी ने मेयर और पार्षद पदों के इच्छुक उम्मीदवारों से 2 फरवरी तक आवेदन मांगे हैं। इसके बाद किसी का फार्म स्वीकार नहीं किया जाएगा। हाल ही में शहरी कांग्रेस कमेटियों के गठन के बाद यह कदम उठाया गया है, जिससे कार्यकर्ताओं में उत्साह है। आवेदन बायोडाटा, जाति प्रमाण पत्र, आधार और वोटर कार्ड के साथ अंबाला शहर कांग्रेस भवन में या ईमेल द्वारा जमा किए जा सकते हैं। फार्मों में से चयन करने के बाद चुनाव में उतरने वाले प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगाई जाएगी। बता दें, बीते दिनों से कांग्रेस ने अपनी गतिविधियों को बढ़ाना शुरू कर दिया है। जिला स्तर पर शहरी कांग्रेस कमेटियों का गठन कर दिया गया है। अब नगर निगम चुनावों को लेकर भी पूरी तरह से मैदान में उतरने का प्लान बनाया जा रहा है। इसी के चलते जिला स्तर पर कमेटी की ओर से फैसला लिया गया है, जिसमें मेयर से लेकर पार्षद तक से चुनाव में उतरने के लिए इच्छुक लोगों के आवेदन मांगे गए हैं। जिला कांग्रेस प्रवक्ता जनार्दन ठाकुर ने बताया कि कांग्रेस का संगठन बनने से कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के दिशा निर्देशानुसार, कांग्रेस पार्टी का समर्पित कोई भी कार्यकर्ता महिला या पुरुष मेयर का चुनाव या पार्षद का चुनाव लड़ना चाहता है तो वह प्रत्याशी अपने बायोडाटा के साथ-साथ अपना जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड व वोटर कार्ड अंबाला शहर कांग्रेस भवन में जाकर जमा करवा सकता है। वहीं जिला कांग्रेस कमेटी ने एक ईमेल आईडी भी जारी किया है। प्रत्याशी चाहे तो इस ईमेल आईडी पर भी अपना आवेदन कर सकता है।

कांग्रेस ने किया बड़ा फैसला: खैरागढ़ में पहली बार मंडल कांग्रेस कमेटियों का गठन, 28 अध्यक्ष नियुक्त

खैरागढ़   छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए प्रदेश के सभी जिलों में पहली बार मंडल कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों की नियुक्ति की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट की सहमति के बाद मंडल अध्यक्षों की जिलेवार सूची जारी की। प्रदेशभर में कुल 1370 मंडल कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। कांग्रेस का दावा है कि इस फैसले से पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूती मिलेगी और आगामी चुनावों में इसका सीधा लाभ मिलेगा। इसे भाजपा की तर्ज पर मंडल स्तर तक संगठनात्मक ढांचे को सशक्त करने की कांग्रेस की रणनीतिक पहल माना जा रहा है। पार्टी के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू ने बताया कि मंडल अध्यक्षों को अपने-अपने क्षेत्रों की स्पष्ट जिम्मेदारी दी गई है। वे बूथ, सेक्टर और मंडल स्तर पर संगठन को सक्रिय करेंगे, जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाएंगे और पार्टी की नीतियों को आम जनता तक पहुंचाएंगे। उनके अनुसार यह नई संरचना कांग्रेस को अधिक अनुशासित, सक्रिय और चुनावी रूप से प्रभावी बनाएगी। इसी क्रम में खैरागढ़ जिले में कुल 28 मंडल कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है। खैरागढ़ नगर, छुईखदान, मुढ़ीपार और गंडई विकासखंडों में मंडलवार अध्यक्ष घोषित किए गए हैं। पार्टी नेतृत्व ने सभी वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है, जिससे संगठन में संतुलन और क्षेत्रीय सहभागिता सुनिश्चित हो सके। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति से संगठन को नई धार मिलेगी और स्थानीय मुद्दों को अधिक प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा। खासकर केसीजी जिले जैसे क्षेत्र में मंडल स्तर पर संगठन का विस्तार कांग्रेस की चुनावी रणनीति को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

हर्री स्टेशन पर कांग्रेस का रेल रोको प्रदर्शन, कोरोना काल के बाद बंद ट्रेनों के ठहराव को लेकर उठी आवाज

गौरेला–पेण्ड्रा–मरवाही जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में पेंड्रा रोड–अनूपपुर रेल मार्ग पर स्थित हर्री रेलवे स्टेशन में रेल रोको आंदोलन किया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कोरोना काल के बाद कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव बंद कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र की जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस का कहना है कि कोरोना काल से पहले जिन ट्रेनों का हर्री स्टेशन पर नियमित ठहराव था, उन्हें यथावत बहाल किया जाए। इस मांग को लेकर जिला कांग्रेस अध्यक्ष गजमती भानू सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता हर्री स्टेशन पहुंचे और रेल रोको प्रदर्शन किया। आंदोलन को देखते हुए स्टेशन परिसर में RPF, GRPF सहित स्थानीय पुलिस बल तैनात रहा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जानबूझकर हर्री स्टेशन पर ट्रेनों का स्टॉपेज बंद किया गया है। इसके चलते स्टेशन से लगे लगभग 50 पंचायतों के हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि यात्रियों को मजबूरी में पेंड्रा रोड या अनूपपुर रेलवे स्टेशन जाना पड़ता है, जो बीमार, बुजुर्ग, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों के लिए बेहद तकलीफदेह है। इस संबंध में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने DRM बिलासपुर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि पूर्व की तरह हर्री स्टेशन पर बिलासपुर–रीवा–बिलासपुर, बिलासपुर–इंदौर–बिलासपुर, बिलासपुर–भोपाल–बिलासपुर और बिलासपुर–चिरमिरी–बिलासपुर जैसी ट्रेनों का ठहराव बहाल किया जाए। कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया कि जनहित को देखते हुए यदि मांगें नहीं मानी गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

इंदौर में भागीरथपुरा कांड को लेकर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, दिग्विजय सिंह बोले– हो न्यायिक जांच

इंदौर भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद कांग्रेस ताकत दिखाने के लिए आज फिर से सड़क पर उतरी है। आज शहर में न्याय यात्रा निकाली जा रही है। इसमें दिग्विजय सिंह, सज्जन सिंह वर्मा मीनाक्षी नटराजन, उमंग सिंघार सहित प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से कांग्रेस विधायकों सहित अन्य बड़े नेता पहुंचे हैं। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के इंतजार में यात्रा रूकी रही। हाईकोर्ट के सिटिंग जज के द्वारा कराई जाए जांच न्याय यात्रा में शामिल दिग्विजय सिंह ने भागीरथपुरा मामले की न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने कहा है कि जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज द्वारा कराई जाए। दोषी कर्मचारी, अधिकारी और राजनेता की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी भी जिम्मेदारी है और उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। दिग्विजय सिंह ने हिंदू महा सम्मेलन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस दर्दनाक घटना में हिंदू ही मारे गए हैं, तो क्या इस प्रकार का आयोजन आगे नहीं टाला जा सकता था? उन्होंने कहा कि देश में फिर से आग लगाना नहीं चाहिए।   जिला और शहर कांग्रेस दावा कर रही है कि भागीरथपुरा के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग लेकर निकाली जा रही यात्रा में बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े और शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के अनुसार सिर्फ कांग्रेस के कार्यकर्ता नहीं बल्कि आम लोग भी यात्रा में शामिल हो रहे हैं। बड़ा गणपति से मौन रैली के रूप में यात्रा शुरू हुई, जिसका राजवाड़ा पर देवी अहिल्या प्रतिमा पर समापन होगा। यात्रा में सबसे आगे कांग्रेस सेवा दल, महिला कांग्रेस फिर प्रदेश नेतृत्व और सबसे अंत मे शहर कांग्रेस के कार्यकर्ता मौजूद हैं।   कांग्रेस के अनुसार सरकार और नगर निगम की लापरवाही, विफलता के बाद भी जिम्मेदार बेशर्मी से पद पर बने हुए हैं। जिम्मेदारों की लापरवाही से लोगों की मौत हुई और सरकार दो लाख रुपये नागरिकों की जान की कीमत लगा रही है। न्याय यात्रा के दौरान कांग्रेसियों ने हाथों में तिरंगा लेकर मंत्री व महापौर से इस्तीफे की मांग के साथ मृतकों के आश्रितों को एक-एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग कर रहे हैं।