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उसे ढूंढ निकालो! — महादेव बेटिंग ऐप मामले में सुप्रीम कोर्ट का ईडी को कड़ा निर्देश

नई दिल्ली महादेव बेटिंग ऐप घोटाले में फरार चल रहे सह-संस्थापक रवि उप्पल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे आरोपी कानून और जांच एजेंसियों के साथ खेल नहीं सकते। कोर्ट ने उप्पल की याचिका खारिज करते हुए टिप्पणी की, यह चौंकाने वाला मामला है, अदालत को अब कुछ करना ही होगा। उसे ढूंढ निकालो। दुबई से भी फरार हुआ आरोपी रवि उप्पल, जो लंबे समय से दुबई में रह रहा था, भारतीय एजेंसियों के प्रत्यर्पण प्रयासों के बीच वहां से भी फरार हो गया। अब उसकी मौजूदगी का कोई स्पष्ट सुराग नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच जस्टिस एम.एम. सुंद्रेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने ईडी को उसकी तलाश की जिम्मेदारी सौंपी है। अदालत ने कहा कि उप्पल की पहुंच काफी लंबी है, तभी वह लगातार जगह बदल रहा है। ईडी का पक्ष और कोर्ट की प्रतिक्रिया अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत को बताया कि रवि उप्पल को 2023 में दुबई में हिरासत में लिया गया था, लेकिन वह दुबई की जेल से भी फरार हो गया है। इस पर जस्टिस सुंद्रेश ने सख्त लहजे में कहा, वह हर बार भाग नहीं सकता। अंततः उसे इस प्रक्रिया का हिस्सा बनना ही पड़ेगा। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत के सवाल पर हम नरमी बरतने को तैयार हैं, लेकिन सही समय आने पर ही उस पर विचार किया जाएगा। महादेव ऐप घोटाला महादेव बेटिंग ऐप कथित रूप से एक ऑनलाइन सट्टेबाज़ी नेटवर्क है, जिसके जरिए देशभर में हजारों करोड़ रुपए के लेन-देन किए गए। ईडी का आरोप है कि ऐप के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और विदेशी निवेश नियमों का उल्लंघन किया गया। रवि उप्पल और उसका सहयोगी सौरभ चंद्राकर इस पूरे नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड बताए जाते हैं।

कफ सिरप कांड में ED का बड़ा एक्शन, श्रीसन फार्मा के कई ठिकानों पर एक साथ रेड

बेंगलुरु  कोड्रिफ सिरप मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। सोमवार को ED यानी प्रवर्तन निदेशालय ने श्रीसन फार्मा से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की है। खबर है कि मध्य प्रदेश में इस जहरीले कफ सिरप के कारण 20 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई है। फिलहाल जांच जारी है। सिरप बनाने कंपनी श्रीसन फार्मा के मालिक जी रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया गया है। ईडी चेन्नई कोल्ड्रिफ कफ सिरफ मामले में PMLA के तहत तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई स्थित श्रीसन फार्मा के 7 ठिकानों पर छापेमारी की है। खास बात है कि इनमें तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल ऑफिस के शीर्ष अधिकारियों के ठिकाने भी शामिल हैं। वर्तन निदेशालय (ED) ने फार्मा से जु़ड़े कई परिसरों में सोमवार को छापामारी की है। हालांकि, छापामारी से जुड़ी अधिक डिटेल आनी बाकी है। बता दें कि कोल्ड्रिफ कफ सीरप को श्रीसन फार्मा ही बनाती है। कंपनी के मालिक हो चुके हैं गिरफ्तार बता दें इस फार्मा कंपनी के केस दर्ज किया गया है। फार्मास्युटिकल कंपनी स्रसेन फार्मा के मालिक रंगनाथन को चेन्नई में मध्य प्रदेश पुलिस ने पिछले दिनों गिरफ्तार किया था। अब कंपनी से जुड़े परिसरों में ईडी की छापामारी चल रही है। गौरतलब है कि कोल्ड्रिफ कफ सीरप के सेवन से मध्य प्रदेश में 22 बच्चों की जान गई है। वहीं, राजस्थान में भी इस सीरप के सेवन से बच्चों ने अपनी जान खोई है। श्रीसन फार्मा के मालिक जी रंगनाथन की भी हो चुकी गिरफ्तारी कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने की वजह से मध्य प्रदेश राजस्थान में हाल के दिनों में 20 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई है। मौत होने की वजह किडनी खराब होना रहा। श्रीसन फार्मा कंपनी द्वारा ही कोल्ड्रिफ कफ सिरप का उत्पादन किया जाता है। इस मामले में कंपनी के मालिक 73 वर्षीय जी रंगनाथन को भी 9 अक्तूबर को गिरफ्तार किया जा चुका है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की जांच में कंपनी और तमिलनाडु खाद्य एवं औषधि प्रशासन (टीएनएफडीए), दोनों के द्वारा तय मानकों के उल्लंघन का खुलासा हुआ। जिसमें कंपनी का खराब बुनियादी ढांचा और बार-बार सुरक्षा चूक का पता चला। कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मा ने अपने खराब बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय औषधि सुरक्षा नियमों के कई उल्लंघनों के बावजूद एक दशक से अधिक समय तक बिना किसी रोक-टोक के परिचालन जारी रखा। औषधि नियंत्रकों के खिलाफ हुई कार्रवाई बच्चों की मौत के बाद, मध्य प्रदेश सरकार ने दो औषधि निरीक्षकों और एफडीए के एक उप निदेशक को निलंबित कर दिया। साथ ही राज्य के औषधि नियंत्रक का तबादला भी कर दिया और मौतों की जांच के आदेश दिए, जबकि पुलिस ने लापरवाही के आरोप में छिंदवाड़ा जिले के एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया। तमिलनाडु सरकार ने राज्य के दो वरिष्ठ औषधि निरीक्षकों को भी निलंबित कर दिया है और श्रीसन फार्मास्युटिकल्स को बंद करने का आदेश दिया है। कफ सिरप में पाई गई डाइएथिलीन ग्लइकॉल की घातक मात्रा बच्चों की मौत के बाद कोल्ड्रिफ सिरप की जांच में उसमें डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की घातक मात्रा पाई गई। यह एक ऐसा रसायन है, जिसका इस्तेमाल अक्सर एंटीफ्रीज में किया जाता है, जिसे कई राज्यों में प्रतिबंधित कर दिया गया है। माना जाता है कि इस सिरप के कारण बच्चों की किडनी खराब हुई। बच्चों को हल्की खांसी और बुखार के लिए यह सिरप दिया गया था।  कई राज्यों में बैन हुई कोल्ड्रिफ सीरप मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ कफ सीरप के सेवन से 20 से अधिक बच्चों की जान गई है। इसके बाद राज्य सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए इस दवा की बिक्री पर बैन लगा दिया। इसके बाद राजस्थान समेत कई राज्यों में कोल्ड्रिफ कफ सीरप की बिक्री पर रोक लगा दी गई। इसमें गुजरात, पंजाब, यूपी, तमिलनाडु, बंगाल इत्यादि शामिल है। गंभीर खामियां हुईं उजागर ED अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी तमिलनाडु के वरिष्ठ ड्रग नियंत्रण अधिकारियों के आवासों और जहरीले सिरप की निर्माता कंपनी श्रीसन फार्मा से जुड़े परिसरों पर की गई। बता दें कि जो दवा जीवन बचाती है, उसने बच्चों को मौत दी। इस मामले ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया है। वहीं, नियामक निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण में भी गंभीर खामियों को उजागर किया है। श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के मालिक हो चुके हैं गिरफ्तार केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने कंपनी और तमिलनाडु खाद्य एवं औषधि प्रशासन (TNFDA) दोनों द्वारा कई उल्लंघन पाए। खराब बुनियादी ढांचे और बार-बार सुरक्षा उल्लंघनों के बावजूद, श्रीसन 2011 में लाइसेंस प्राप्त करने के बाद से बेरोकटोक काम करती रही।  चिकित्सकों ने दी ये सलाह गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की इस घटना ने लोगों को हिला कर रख दिया है। इस बीच चिकित्सकों ने कहा कि बिना किसी सलाह के बच्चों को दवा देना खतरनाक साबित हो सकता है। बाल रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि सीरप के सेवन से बलगम पतला हो जाता है, जिसको नवजात बाहर नहीं निकाल पाते हैं। बिना किसी चिकित्सकीय सलाह के छोटे बच्चों को इस प्रकार दवाएं देना हानिकारत साबित हो सकता है।(

ED को BMW तुरंत लौटाने का आदेश, हेमंत सोरेन को मिली बड़ी राहत

रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित भूमि घोटाला मामले में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली स्थित प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) अपीलीय ट्रिब्यूनल ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को उनकी लग्जरी बीएमडब्ल्यू कार तुरंत छोड़ने का निर्देश दिया है। यह कार ईडी ने 29 जनवरी 2024 को मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान सोरेन के दिल्ली स्थित आवास से जब्त की थी। ईडी ने उस समय हेमंत सोरेन के खिलाफ भूमि घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत छापेमारी की थी, जिसमें बीएमडब्ल्यू कार के अलावा कई दस्तावेज और अन्य सामग्री भी बरामद की गई थी। इसके बाद सोरेन ने जब्त की गई संपत्ति को छोड़ने के लिए पीएमएलए ट्रिब्यूनल में अपील दायर की थी। ट्रिब्यूनल के सदस्य वी.के. माहेश्वरी ने आदेश में कहा कि ईडी बीएमडब्ल्यू कार को तत्काल रिलीज करे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि अगर भविष्य में कोई नया सबूत सामने आता है, तो ईडी को कानून के अनुसार कार्रवाई करने की स्वतंत्रता होगी। ट्रिब्यूनल ने माना कि मामले में कार जब्त रखने का कोई ठोस आधार वर्तमान में मौजूद नहीं है। ट्रिब्यूनल ने यह भी याद दिलाया कि इस मामले में जब्त की गई अन्य सभी वस्तुएं, जिनमें डिजिटल उपकरण भी शामिल थे, पहले ही 22 मई 2025 के आदेश के तहत हेमंत सोरेन को लौटा दी गई थीं। मौजूदा अपील केवल बीएमडब्ल्यू कार को लेकर थी, जिसका अब निपटारा कर दिया गया है।  

ईडी का छापा: छतरपुर में शिवहरे परिवार के घर जांच, जमीन सौदे और बैंक रिकॉर्ड खंगाले गए

छतरपुर मध्‍य प्रदेश के छतरपुर जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के बगौता में तिराहे पर स्थित शिवहरे परिवार के निवास पर आज सुबह करीब 7 बजे प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने छापा मारा है. जानकारी के अनुसार, भोपाल से आई ED की 5 सदस्यीय टीम 4 पुलिसकर्मियों के साथ स्वर्गीय देवी दीन शिवहरे के परिवार के घर पर जाँच कर रही है. परिवार से जुड़े लोगों में रियल एस्टेट और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन व्यवसायी अनंत राम शिवहरे और मुकेश शिवहरे (सब इंजीनियर, पूर्व में पन्ना में कार्यरत) शामिल हैं. फिलहाल ED ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि किस मामले में जाँच की जा रही है. सुबह 7 बजे से चल रही कार्रवाई शिवहरे परिवार के यहां ED की 5 सदस्यीय टीम ने करीब सुबह 7 बजे छापा मारा था. तभी से ठेकेदार अनंतराम शिवहरे और उनके पुत्र सब इंजीनियर मुकेश शिवहरे के यहां ED की कार्यवाही चल रही है. ED की टीम ने अभी तक किसी भी प्रकार की कोई जानकारी नहीं दी है. वहीं घर के बाहर पुलिस के जवान को भी तैनात किया गया है. पाल से आई टीम, बैंक रिकॉर्ड भी खंगाले भोपाल से आई ईडी की पांच सदस्यीय टीम सुबह चार पुलिसकर्मियों के साथ स्वर्गीय देवीदीन शिवहरे के निवास पर पहुंची और जांच शुरू की। यह घर सागर-कानपुर रोड पर बगौता तिराहे के पास स्थित है। छापेमारी के दौरान ईडी टीम के साथ आईसीआईसीआई बैंक के अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने संबंधित बैंक खातों और लेन-देन से जुड़ी जानकारी जांच एजेंसी को उपलब्ध कराई। परिवार का ठेकेदारी और जमीन कारोबार से जुड़ाव जांच जिन लोगों को केंद्र में रखकर की जा रही है, उनमें अनंतराम शिवहरे और मुकेश शिवहरे शामिल हैं। अनंतराम पहले नल फिटिंग के ठेकेदार रहे हैं, जबकि मुकेश शिवहरे पन्ना में सब इंजीनियर के पद पर कार्यरत रह चुके हैं। उनकी पत्नी डॉ. सोनल शिवहरे वर्तमान में ईसानगर में पदस्थ हैं। बताया जा रहा है कि शिवहरे परिवार ठेकेदारी के साथ-साथ जमीन की खरीद-फरोख्त के व्यवसाय से भी जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी को शक है कि कुछ लेन-देन संदिग्ध हैं, जिन्हें लेकर दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। थाना प्रभारी ने की पुष्टि सिविल लाइन थाना प्रभारी सतीश सिंह ने भी ईडी की इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जांच एजेंसी ने कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की है और पुलिस टीम सहयोग के लिए मौके पर मौजूद रही। ED की कार्रवाई जारी जानकारी के मुताबिक, ED की टीम शिवहरे परिवार के यहां कार्यलायों के दस्‍तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड्स और जरुरी अन्‍य समानों की जांच कर रही है. दरअसल, अनंत राम शिवहरे रियल एस्‍टेट सेक्‍टर में कॉफी सक्रिय माने जाते हैं. इनकी बिल्डिंग कंस्‍ट्रक्‍शन प्रोजेक्‍ट्स में भी अहम भुमिका मानी जाती है. ED द्धारा शिवहरे परिवार के यहां छापा मारने के बाद से ही इलाके में हड़कंप मच गया है.

शराब घोटाले में छत्तीसगढ़ में बड़ा सुराग, ED सक्रिय, अधिकारियों से लगातार पूछताछ

रायपुर छत्तीसगढ़ के चर्चित 3200 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने घोटाले में संलिप्त आबकारी अधिकारियों को समन भेजकर तलब किया है. ईडी के इस समन के बाद एक बार फिर किसी बड़े एक्शन की तैयारी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई है. पिछले तीन दिनों से आबकारी अधिकारी ईडी दफ्तर जाकर बयान दर्ज करा रहे हैं. इसमें वे सभी अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने शराब घोटाला का मुख्य चालान पेश करने के लिए ईडी और ईओडब्ल्यू/एसीबी को तीन महीने और दो महीने का समय दिया है. ईडी जिन आबकारी अधिकारियों को समन भेजकर पूछताछ कर रही है, उसमें करीब 30 अधिकारी शामिल हैं. एक अधिकारी आशीष श्रीवास्तव का नाम बाद में शामिल किए जाने की सूचना मिल रही है. आबकारी अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से मिली है जमानत बता दें कि शराब घोटाले में ईओडब्ल्यू/एसीबी ने कोर्ट में जब चालान पेश किया, उसके बाद राज्य सरकार ने 22 आबकारी अधिकारियों को निंलबित किया था. इसमें 7 अफसर सेवानिवृत्त हो गए हैं. वर्तमान में सभी 22 अधिकारी निलंबित है, इन 22 अफसरों पर कमीशन के रूप में 88 करोड़ रुपए से ज्यादा लेने का आरोप लगा है. सुप्रीम कोर्ट से इन आबकारी अफसरों को जमानत मिल गई है. इन आबकारी अफसरों को भेजा गया है समन आबकारी उपायुक्त अनिमेष नेताम, अरविंद कुमार पाटले, नीतू नोतानी, नोहर सिंह ठाकुर, विजय सेन शर्मा, सहायक आयुक्त प्रमोद कुमार नेताम, विकास कुमार गोस्वामी, नवीन प्रताप सिंह तोमर, राजेश जायसवाल, मंजूश्री कसेर, दिनकर वासनिक, आशीष वासनिक, सौरभ बख्शी, प्रकाश पाल, रामकृष्ण मिश्रा, अलेख राम सिदार और सोनल नेताम के अलावा जिला आबकारी अधिकारी मोहित कुमार जायसवाल, गरीबपाल सिंह दर्दी, इकबाल अहमद खान, जर्नादन सिंह कौरव और नितिन कुमार खंडूजा को समन जारी किया है. इसके अलावा सेवानिवृत्त आबकारी अधिकारी एके सिंह, जेआर मंडावी, जीएस नरूटी, देवलाल वैद्य, एके अनंत, वेदराम लहरे और एलएल ध्रुव काे भी समन जारी किया है.

अंतरराष्ट्रीय लाल चंदन तस्करी में ED का सख्त एक्शन, अब्दुल जाफर फंसा

रायपुर लाल चंदन लकड़ी की अंतरराष्ट्रीय तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तस्कर अब्दुल जाफर पर शिकंजा कसा है. आरोपी अब्दुल जाफर की 8.6 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क कर ली है. आरोपी ने तस्करी से प्राप्त अवैध पैसे से यह संपत्ति खरीदी थी. जांच में सामने आया कि आरोपी ने 2016 में रायपुर के एक गोदाम में 576 लाल चंदन के लट्ठे छिपाकर रखे थे, जिनका कुल वजन 11 टन था. इन लट्ठों को रायपुर से दुबई भेजने की तैयारी की जा रही थी. राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) को सूचना मिली कि जाफर दुबई में लाल चंदन की तस्करी कर रहा है. सूचना के आधार पर डीआरआई की टीम ने 2 अक्टूबर 2016 को नागपुर में एक कंटेनर रोका. कंटेनर में 1,324 लाल चंदन के लड्डे (14 टन) स्पंज आयरन के नीचे छिपाकर रखे गए थे. नागपुर की कार्रवाई के बाद 4 अक्टूबर 2016 को रायपुर के गोदाम में छापा मारा गया, जिसमें छिपाए गए लाल चंदन के लट्ठों को जब्त किया गया. इसके बाद अब्दुल जाफर को गिरफ्तार किया गया, जो फिलहाल रायपुर जेल में बंद है.

ED का खुलासा: ‘BIG BOSS’ वॉट्सएप ग्रुप के जरिए घोटालों की प्लानिंग, चैतन्य के लिए पप्पू और सौम्या के लिए दीपेंद्र पहुंचाते थे पैसा

रायपुर  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ताजा चार्जशीट ने प्रदेश की सियासत गरमा दी है। कोर्ट में पेश चार्जशीट में दावा किया गया है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 'बिग बास ग्रुप' नामक एक संगठित गिरोह सक्रिय था, जिसमें बड़े अधिकारी, कारोबारी, नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल और उनके करीबी मित्र शामिल थे। यह नेटवर्क शराब, कोयला और ऑनलाइन सट्टेबाजी जैसे अवैध कारोबार से अरबों रुपये की कमाई के साथ-साथ अधिकारियों के खिलाफ सुनियोजित षड्यंत्र रचता था। चार्जशीट में दर्ज चैट्स और दस्तावेजों से ईडी का कहना है कि यह गैंग फिल्मी स्क्रिप्ट और मनगढ़ंत कहानियों का सहारा लेकर अफसरों की छवि को खराब करने में लगा था। खासकर एक विवादित आइपीएस की 'कल्पनाओं पर आधारित डायरी' को हथियार बनाकर ईमानदार अधिकारियों के खिलाफ अफवाहें फैलाकर उन्हें दबाव में लाने की कोशिश की गई। इससे कई अधिकारियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और वे मानसिक रूप से प्रताड़ित हुए। वॉट्सएप ग्रुप में शराब घोटाले से जुड़ी चर्चा और पैसों के लेन-देन की बातें हैं। ED ने अपनी चार्जशीट में खुलासा किया है कि पूर्व सीएम भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रही सौम्या चौरसिया शराब सिंडिकेट के लोगों से बातचीत के दौरान IAS अफसरों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करती थी, उन्हें गाली देती थी। इसके साथ ही उन्होंने कई बार सिंडिकेट के कुछ सदस्यों काे हिसाब किताब की जानकारी नहीं देने की बात भी लिखी है। चैट में इस बात का भी जिक्र है कि चैतन्य के लिए पप्पू बंसल, सौम्या के लिए दीपेंद्र कुरियर बॉय का काम करता था, ये उन्हें पैसे पहुंचाते थे, जिसे वह डिलीवर कहकर बात करते थे। चैट्स से खुला सिंडिकेट का राज, चैतन्य का नंबर बिट्टू नाम से सेव था शराब घोटाले में गिरफ्तार अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के मोबाइल की जांच में कई चौंकाने वाले राजफाश हुए हैं। अनवर के मोबाइल में चैतन्य बघेल का नंबर 'बिट्टू' नाम से सेव था, जिसमें पैसों की डीलिंग से लेकर नकली होलोग्राम बनाने तक की बातचीत सामने आई है। ईडी की चार्जशीट के अनुसार, ‘बिग बॉस’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप में चैतन्य बघेल, अनवर ढेबर, सौम्या चौरसिया, अनिल टुटेजा और पुष्पक जैसे प्रमुख सदस्य जुड़े थे। इस ग्रुप के जरिए शराब घोटाले की प्लानिंग, मनी लाड्रिंग, रकम के वितरण और हेराफेरी की सूचनाएं साझा की जाती थी। चैट्स में कब, किसे कॉल किया गया और कितनी देर बातचीत हुई, इसका पूरा विवरण भी चार्जशीट में शामिल है। 1000 करोड़ का कैश मैनेज किया भिलाई के शराब कारोबारी पप्पू बंसल ने ईडी की पूछताछ में बताया है कि उसने चैतन्य के साथ मिलकर 1000 करोड़ से अधिक कैश मैनेज किया। यह राशि अनवर ढेबर से दीपेन चावड़ा होते हुए कांग्रेस नेताओं रामगोपाल अग्रवाल और केके श्रीवास्तव तक पहुंचाई गई। बंसल ने यह भी माना कि उसे तीन महीने में 136 करोड़ रुपये मिले थे। पप्पू बंसल ने खोला राज दुर्ग-भिलाई के शराब कारोबारी और भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले लक्ष्मी नारायण उर्फ पप्पू बंसल ने पूछताछ में बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने माना कि उन्होंने और चैतन्य ने मिलकर 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा कैश को मैनेज किया। बंसल ने बताया कि यह रकम अनवर ढेबर से दीपेंद्र चावड़ा और फिर कांग्रेस नेताओं रामगोपाल अग्रवाल और केके श्रीवास्तव तक पहुंचाई जाती थी। बंसल ने यह भी स्वीकार किया कि तीन महीने की अवधि में ही उन्हें 136 करोड़ रुपए मिले। रियल एस्टेट में लगाया ब्लैक मनी ED ने आरोप लगाया कि चैतन्य ने अपने विठ्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट और बघेल डेवलपर्स एंड एसोसिएट्स में शराब घोटाले की रकम निवेश की। असल खर्च 13-15 करोड़ रुपए था, लेकिन दस्तावेजों में मात्र 7.14 करोड़ दिखाया गया। वहीं डिजिटल डिवाइस की जांच से पता चला कि एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ रुपए कैश में भुगतान किया गया, जिसका हिसाब रिकॉर्ड में नहीं था। इसी प्रोजेक्ट में त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने 19 फ्लैट खरीदे, लेकिन भुगतान खुद किया। ED के मुताबिक यह सब ब्लैक मनी को सफेद दिखाने के लिए किया गया। मोबाइल चैट्स से खुलासा ED ने जब अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के मोबाइल की जांच की तो चौंकाने वाले चैट्स मिले। अनवर के मोबाइल में चैतन्य का नंबर ‘बिट्टू’ नाम से सेव था। इसमें पैसों की डीलिंग और नकली होलोग्राम बनाने तक की चर्चा थी।

28 जगहों पर ED का शिकंजा, 4 करोड़ रुपये बरामद – कारोबारियों में हड़कंप

रायपुर 350 करोड़ के डीएमएफ घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। 3 सितंबर को ठेकेदार और कृषि कारोबारियों के 28 ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई में ईडी ने नकदी चार करोड़ रुपये, 10 किलो चांदी के जेवर के साथ आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजीटल उपकरण जब्त किए है। ईडी की ओर से शनिवार को जारी अधिकारिक बयान में कहा गया है कि अब तक की जांच में साफ हुआ है कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के डीएमएफ फंड की 350 करोड़ रुपये का उपयोग बीज निगम के जरिए किया गया था। बीज निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से विक्रेताओं, ठेकेदारों को कृषि व उपकरणों की आपूर्ति करने का काम दिया गया था।   60 प्रतिशत तक बंटा कमीशन ईडी की जांच से साफ हुआ कि मिनी दाल मिल, बीज आदि कारोबारियों से अनुबंध मूल्य का 60 प्रतिशत तक कमीशन रिश्वत के तौर पर संपर्ककर्ताओं द्वारा ली गई थी और बाद में कुछ अधिकारियों और अन्य सहयोगियों तक यह राशि पहुंचाई गई। राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड (बीज निगम) से संबंधित कारोबारियों, ठेकेदारों और बिचौलियों के ठिकानों से नकदी,चांदी के जेवर आदि जब्त कर आगे की जांच की जा रही है। इससे पहले ईडी ने 21.47 करोड़ रुपए की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की थी। इसके अलावा रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय में एक अभियोजन शिकायत भी दायर की गई है, जिसमें 16 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा इस मामले में निलंबित आइएएस रानू साहू, राज्य सेवा अधिकारी माया वारियर और मनोज कुमार द्विवेदी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। फिलहाल रानू साहू अंतरिम जमानत पर राज्य से बाहर रह रही है। इन जगहों पर मारा था छापा तीन सितंबर को तड़के पांच बजे ईडी की अलग-अलग टीम ने छापेमारी की कार्रवाई की थी। रायपुर के शंकरनगर में कृषि कारोबारी विनय गर्ग, स्वर्णभूमि कालोनी स्थित होटल व्यवसायी मनीदीप चावला, कृषि उपकरणों का कारोबार करने वाले राजेश अग्रवाल, ला विस्टा कॉलोनी अमलीडीह में पवन पोद्दार और सतपाल छाबड़ा के घर पर देर रात तक एजेंसी ने छानबीन की थी। सतपाल छाबड़ा का ओडिशा और छत्तीसगढ़ में एग्रीकल्चर उपकरणों का कारोबार है। इसके साथ ही दुर्ग जिले के पुरानी भिलाई में अन्ना भूमि ग्रीनटेक प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर शिवकुमार मोदी,शांति नगर स्थित विवेकानंद कालोनी में रहने वाले सीए आदित्य दिनोदिया के यहां भी टीम ने दबिश दी थी। अन्ना भूमि ग्रीनटेक प्राइवेट लिमिटेड कृषि और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में काम करती है। यह कंपनी ड्रिप सिंचाई प्रणाली, कांटेदार तार, चेन लिंक, आरसीसी बाड़ के खंभे,सौर पंप और कृषि उपकरणों की आपूर्ति करती है। वहीं राजिम-महासमुंद मार्ग स्थित उगम राज कोठारी के घर और दुकान में भी छापा पड़ा था। उमग राज कृषि यंत्रों की आपूर्ति का सरकारी ठेका लेते है। जांच टीम ने उनके घर और दुकान को सील कर रखा है।

मंदसौर में ED की कार्रवाई… ट्रांसफर के बाद भी पदस्थ आबकारी अधिकारी के घर मारा छापा

मंदसौर  मंदसौर में जिला आबकारी अधिकारी बीएल दांगी के घर बुधवार अलसुबह ईडी ने बड़ी कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि यश नगर स्थित उनके आवास पर सुबह करीब 4 बजे ईडी की टीम पहुंची और छापेमारी शुरू कर दी।आर्थिक अनियमितताओं की शिकायत के बाद की जा रही इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है। दांगी का हाल ही में मंदसौर से दतिया तबादला हुआ है, हालांकि वे अभी रिलीव नहीं हुए हैं। बता दें कि, डांगी के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जांच चल रही है और ईडी की ये कार्रवाई उसी जांच के सिलसिले में होना मानी जा रही है। इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है।ये भी बता दें कि, बीएल दांगी का हाल ही में मंदसौर जिला आबकारी पद से दतिया तबादला किया गया है, हालांकि, वो अबतक रिलीव नहीं हुए हैं। वहीं, दूसरी तरफ जांच टीम के सूत्रों का मानना है कि, इस छापामार कार्रवाई में बड़े खुलासे हो सकते हैं। ऐसे में बीएल दांगी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

कृषि कारोबारियों के ठिकानों पर ED का धावा, छत्तीसगढ़ के 4 जिलों में हड़कंप

रायपुर  छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचारों के खिलाफ एक बार फिर ईडी की कार्रवाई से हड़कंप मच गया। बुधवार की सुबह राजधानी रायपुर सहित दुर्ग, भिलाई और बिलासपुर में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कई स्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की है। ईडी की यह कार्रवाई मुख्य रूप से कृषि से संबंधित कारोबारियों के ठिकानों पर की गई है। मिली जानकारी के अनुसार रायपुर के शंकर नगर में कारोबारी विनय गर्ग के घर पर भी ईडी की टीम ने दबिश दी है। इसके साथ ही दुर्ग के अन्ना भूमि ग्रीनटेक प्रा. लि. के डायरेक्टर शिवकुमार मोदी के घर रेड जारी है। ईडी की इस कार्रवाई में 8 से 10 अधिकारियों के साथ सशस्त्र बल भी मौजूद है। दुर्ग में भी बड़ी कार्रवाई भिलाई 3 में भी ईडी ने कार्रवाई की है. अन्ना भूमि ग्रीनटेक प्राईवेट लिमिटेड के डायरेक्टर शिवकुमार मोदी घर पर छापा मारा गया है. रेड में ईडी के 6 से अधिक अधिकारी शामिल हैं. सीआरपीएफ की टीम भी घर के बाहर मौजूद है. वित्तीय अनियमितता को लेकर जांच की जा रही है. DMF घोटाला मामले में कार्रवाई केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय के छत्तीसगढ़ स्थित रायपुर जोनल ऑफिस ने बड़ी कार्रवाई की. टीम ने 18 लोकेशन पर सर्च ऑपरेशन चलाया. जांच एजेंसी के मुताबिक करीब 575 करोड़ के DMF घोटाला यानी “डिस्ट्रिक मिनरल फंड” से जुड़े घोटाला मामले में कार्रवाई की गई है.  इस सर्च ऑपरेशन के दौरान कई सरकारी अधिकारियों, प्राइवेट लोगों के साथ- साथ टेंडर जारी करने वाले अधिकारी, ठेकेदार के यहां सर्च ऑपरेशन को अंजाम दिया गया. इस सर्च ऑपरेशन के दौरान रायपुर के शंकर नगर इलाके में रहने वाले कारोबारी विनय गर्ग सहित उन ठेकदारों, बिचौलियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है , जिन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और कल्याण के लिए बनाए गए DMF फंड की बड़ी रकम को छत्तीसगढ़ बीज निगम के मार्फत गलत तरीके से फर्जीवाड़ा किया था. सर्च ऑपरेशन के दौरान काफी अहम सबूतों को , इलेक्ट्रोनिक एविडेंस और दस्तावेजों को जब्त किया गया है.  घूस लेने के लिए बदले गए थे नियम इस मामले की शुरुआती जांच रायपुर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और एसीबी (ACB) ने की. इस मामले की पड़ताल के बाद एसीबी ने करीब 6 हजार पन्नों का चार्जशीट भी स्थानीय कोर्ट में दायर किया था, इसके बाद इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी की इंट्री हुई. जांच एजेंसी के मुताबिक DMF के वर्क प्रोजेक्ट में भ्रष्ट्राचार करने के लिए फंड खर्च के नियमों को बदला गया और फंड खर्च के नए प्रावधानों में मटेरियल सप्लाई, ट्रेनिंग, कृषि उपकरणों, इलाके में रहने वाले लोगों और उनके बच्चों के खेलने – मनोरंजन के लिए सामग्री, मेडिकल उपकरणों, स्वास्थ लाभ सम्बंधित छोटे– बड़े कई उपकरणों की भी कैटेगरी को जोड़ा गया था. आरोप है कि बदले गए नियमों के सहारे DMF के तहत जरूरी विकास से जुड़े कार्यों को दरकिनार करके अधिकतम कमीशन वाले प्रोजेक्ट को अप्रूव किया गया. क्या है पूरा मामला ED की जांच में पता चला है कि ये छत्तीसगढ़ में DMF घोटाला केस में जेल में बंद कारोबारी मनोज कुमार द्विवेदी से जुड़ा कनेक्शन बड़ा महत्वपूर्ण है, आरोप है कि मनोज ने अपनी बनाई NGO में DMF फंड की राशि हासिल की. इसके बाद कमीशन तत्कालीन IAS रानू साहू सहित कई अन्य बड़े सफेदपोश लोगों तक पहुंचाया था. इस मामले की EOW और ED दोनों जांच कर रही है. ED की जांच में पता चला कि 2021-22 और 2022-23 में मनोज कुमार द्विवेदी ने निलंबित IAS रानू साहू और अन्य अधिकारियों से मिलीभगत की थी. अपने एनजीओ उदगम सेवा समिति के नाम पर कई डीएमएफ ठेके हासिल किए थे. अधिकारियों को टेंडर की राशि का 42 फीसदी तक कमीशन दिया गया था. रायपुर के 10 ठिकानों में रेड रायपुर में 8 से 10 अलग-अलग जगहों पर छापेमारी जारी है। लेकिन, यह कार्रवाई किस घोटाले या मामले से संबंधित है। इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। हालांकि जहां छापामार हुआ है वह कृषि और बुनियादी स्ट्रक्चर को लेकर काम करने वाली है। शुरूआती जानकारी के अनुसार एजेंसी की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले की जांच से संबंधित बताई जा रही है। इस बात की आशंका है कि कृषि कारोबार के माध्यम से पैसों के लेन-देन में गड़बड़ी की गई है। वहीं, सुबह सवेरे हुई कार्रवाई से बिजनेस वर्ल्ड में हलचल मची हुई है। फिलहाल ईडी की छापेमारी जारी है। लेकिन किसी तरह की आधिकारिक रूप से किसी तरह की जानकारी शेयर नहीं की गई है। लेकिन ऑफिशियल पुष्टि नहीं की गई है।