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EC की नई गाइडलाइन: 100 मिनट में शिकायतों का समाधान, निगरानी के लिए 5000 उड़नदस्ते मैदान में

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों के लिए 5 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी) में सख्त आदर्श आचार संहिता के निर्देश जारी किए हैं। 16 मार्च को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही इन क्षेत्रों में एमसीसी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। चुनाव आयोग ने सुनिश्चित किया है कि चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से हों, इसलिए केंद्रीय सरकार सहित सभी संबंधित पक्षों पर MCC के प्रावधान लागू किए गए हैं। मुख्य सचिवों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। इस बार कुल 824 विधानसभा सीटों पर चुनाव होंगे, जहां लगभग 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। करीब 2.19 लाख मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे और लगभग 25 लाख कर्मी चुनाव प्रक्रिया में तैनात रहेंगे। चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघनों पर त्वरित कार्रवाई के लिए 5,000 से अधिक फ्लाइंग स्क्वॉड्स (उड़नदस्ते) और 5,200 से ज्यादा स्टेटिक सर्विलांस टीमों की तैनाती की है। शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के अंदर करने का लक्ष्य रखा गया है। नागरिकों की शिकायतों के लिए 1950 टोल-फ्री नंबर और सी-विजिल ऐप के माध्यम से रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई है। राजनीतिक दलों को रैलियां, जुलूस या सभाओं के लिए पहले से पुलिस को सूचित करना अनिवार्य है, लाउडस्पीकर आदि की इजाजत लेनी होगी। सार्वजनिक स्थलों जैसे मैदानों या हेलीपैड के उपयोग के लिए सुविधा पोर्टल पर पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवेदन करना होगा। EC का सख्त निर्देश मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आधिकारिक कार्यों को चुनाव प्रचार से न जोड़ें व सरकारी मशीनरी, वाहनों या कर्मचारियों का दुरुपयोग न होने दें। निजी संपत्तियों पर बिना मालिक की अनुमति के पोस्टर, बैनर या झंडे नहीं लगाए जा सकेंगे। नागरिकों की निजता का सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा व निजी आवासों के बाहर प्रदर्शन या धरना प्रतिबंधित रहेगा। चुनाव आयोग ने सभी स्तर के अधिकारियों से निष्पक्षता बरतने और सभी दलों के साथ समान व्यवहार करने का आह्वान किया है। मतदान की तिथियां चार चरणों में निर्धारित की गई हैं। 9 अप्रैल को केरल, असम और पुडुचेरी में एक ही चरण में, 23 अप्रैल को पश्चिम बंगाल का पहला चरण और तमिलनाडु, जबकि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल का दूसरा चरण होगा। सभी राज्यों में मतगणना 4 मई 2026 को होगी। साथ ही 6 राज्यों में उपचुनाव भी घोषित किए गए हैं। चुनाव आयोग का उद्देश्य है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और कानून के अनुसार चले, जिससे लोकतंत्र की मजबूती बनी रहे।  

म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग की टीम ने जाना बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के नवाचार

भोपाल स्थानीय निकाय निर्वाचनों में राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार द्वारा किए गए तकनीकी नवाचारों एवं संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया के आधुनिकीकरण का अध्ययन करने के लिये राज्य निर्वाचन आयोग, मध्यप्रदेश के उप सचिव डॉ. सुतेश शाक्या, अवर सचिव  एन. के. लच्छवानी, विधिक सलाहकार  प्रदीप शुक्ला एवं आईटी कंसल्टेंट  राकेश शुक्ला ने बिहार का दौरा किया। बैठक में राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार के सचिव  मुकेश कुमार सिन्हा, विशेष कार्य पदाधिकारी  संजय कुमार सहित अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने बिहार में निर्वाचन प्रक्रिया में किए गए तकनीकी विस्तार और सुधारों का विस्तृत अध्ययन किया। अध्ययन के दौरान संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया के पूर्ण डिजिटलीकरण, बायोमेट्रिक/एफ.आर.एस. के माध्यम से मतदाता सत्यापन, ईवीएम द्वारा मतदान, मतदान केंद्र एवं मतगणना केंद्रों की वेबकास्टिंग द्वारा लाइव मॉनिटरिंग, वज्रगृह में डिजिटल लॉक की व्यवस्था, ओसीआर (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन) के माध्यम से मतगणना, जीआईएस मैपिंग, ई-वोटिंग प्रणाली तथा व्यापक जन-जागरुकता एवं प्रचार-प्रसार अभियान की जानकारी प्राप्त की गई। राज्य निर्वाचन आयोग, मध्यप्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने यह समझने का प्रयास किया कि किस प्रकार तकनीक के प्रभावी उपयोग से निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग, मध्यप्रदेश ने बिहार में लागू विभिन्न चुनावी नवाचारों एवं आधुनिक तकनीकी व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए इसे एक उल्लेखनीय उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि "हम AI SUMMIT में राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार द्वारा प्रस्तुत ई-वोटिंग के प्रयासों की प्रशंसा से प्रेरित होकर इसके सफल क्रियान्वयन को देखने बिहार आए थे। यहाँ चुनाव सुधारों की दिशा में तकनीकी नवाचार अत्यंत प्रभावी एवं सुव्यवस्थित ढंग से लागू किए गए हैं। प्रत्येक चरण में कार्य सफलतापूर्वक संपादित किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार ने न केवल ई-वोटिंग को अपनाया है, बल्कि संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया को डिजिटाइज कर एआई के माध्यम से सुदृढ़ बनाया है। उन्होंने यह भी कहा है कि मध्यप्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में इस प्रकार तकनीक प्रक्रियाओं एवं नवाचारों को अपनाने पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जायेगा।  

वोटर लिस्ट पुनरीक्षण का असर: नौ राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में 1.70 करोड़ मतदाताओं की कमी

 नई दिल्ली भारत के छह राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम पूरा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिन्हें अयोग्य पाया गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 9 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाताओं की संख्या मिलाकर 1 करोड़ 70 लाख से ज्यादा घट गई है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह हटाए गए मतदाताओं और नए जोड़े गए योग्य मतदाताओं के अंतर के आधार पर नेट बदलाव है। कितने घटे मतदाता? मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गुजरात, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, राजस्थान, छत्तीसगढ़, अंडमान-निकोबार द्वीप, गोवा और केरल समेत कुल नौ राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर शुरू होने से पहले मतदाताओं की संख्या लगभग 21.45 करोड़ थी। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद यह घटकर करीब 19.75 करोड़ रह गई, यानी कुल मिलाकर 1.70 करोड़ से अधिक मतदाता कम हो गए। गुजरात में 68 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम कटे सबसे ज्यादा नाम गुजरात में हटाए गए हैं। यहां कुल 68 लाख 12 हजार 711 मतदाताओं के नाम सूची से हटे, जिससे कुल मतदाता संख्या लगभग 5.08 करोड़ से घटकर 4.40 करोड़ रह गई, यानी करीब 13.40% की कमी दर्ज हुई। इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर रहा, जहां करीब 34.25 लाख नाम हटाए गए और मतदाता संख्या 5.74 करोड़ से घटकर 5.39 करोड़ हो गई। राजस्थान में 31 लाख तो छत्तीसगढ में 25 लाख मतदाता के नाम हटे अन्य राज्यों में भी बड़ी कटौती देखी गई। राजस्थान में लगभग 31.36 लाख मतदाताओं के नाम हटे, छत्तीसगढ़ में करीब 24.99 लाख, जबकि केरल में करीब 8.97 लाख नाम कम हुए। छोटे राज्यों में गोवा में लगभग 1.27 लाख नाम हटे। केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान-निकोबार, पुडुचेरी और लक्षद्वीप में भी मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई। किस वजह से हटाए गए मतदाताओं के नाम? चुनाव आयोग के अनुसार मतदाता सूची से नाम हटाने के मुख्य कारणों में मौत, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना, एक से अधिक जगह पंजीकरण होना या पात्रता से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल हैं। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करना लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और पात्र नागरिक अब भी नाम जुड़वाने, हटवाने या सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। यूपी, बंगाल और तमिलनाडु में SIR जारी आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के आंकड़े इस महीने के अंत तक जारी किए जाएंगे। देशभर में 12 राज्यों में चल रहे इस अभियान का अगला चरण अप्रैल से शुरू होगा, जिसके तहत पूरे देश में मतदाता सूचियों का सत्यापन जारी रहेगा। विवाद और कानूनी चुनौती,  असम में अलग प्रक्रिया इस पूरे अभियान के दौरान कई जगह शेड्यूल में बदलाव भी किए गए। बिहार की तरह ही तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह अभियान मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट रखने के लिए किया जा रहा है। असम में एसआईआर की जगह स्पेशल रिविजन प्रक्रिया अपनाई गई थी, जो 10 फरवरी को पूरी हो चुकी है। देशभर में चल रहा है अभियान चुनाव आयोग का यह विशेष पुनरीक्षण अभियान देश के कई हिस्सों में जारी है। बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अभी 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह काम चल रहा है, जहां लगभग 60 करोड़ मतदाता शामिल हैं। इसके बाद अगले चरण में 17 राज्यों और 5 केंद्रशासित प्रदेशों के करीब 40 करोड़ मतदाताओं को कवर किया जाएगा।

बंगाल में चुनाव आयोग का सख्त रुख: चुनाव ड्यूटी में लापरवाही पर 7 वरिष्ठ अधिकारी सस्पेंड

कलकत्ता पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही चुनाव आयोग (ECI) पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। चुनावी तैयारियों और ड्यूटी में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोपों के चलते आयोग ने विभिन्न जिलों के 7 राजपत्रित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता के साथ समझौता कर रहे थे। मुख्य सचिव को कड़ा आदेश: तुरंत शुरू करें विभागीय जांच चुनाव आयोग ने इस मामले में केवल निलंबन पर ही संतोष नहीं किया, बल्कि पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि इन सभी 7 अधिकारियों के खिलाफ बिना किसी देरी के अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। आयोग ने राज्य सरकार से इस पूरी कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। माना जा रहा है कि वोटर लिस्ट रिवीजन और ग्राउंड लेवल की तैयारियों में बरती गई अनियमितताओं के कारण यह गाज गिरी है। इन अधिकारियों पर गिरी गाज: मुर्शिदाबाद से लेकर डेबरा तक कार्रवाई निलंबित किए गए अधिकारियों में राजस्व, कृषि और विकास खंडों के महत्वपूर्ण पदों पर तैनात 'असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स' (AERO) शामिल हैं। कार्रवाई की जद में आए प्रमुख नाम इस प्रकार हैं: मुर्शिदाबाद जिले के समसेरगंज से सहायक निदेशक डॉ. सेफौर रहमान और फरक्का के राजस्व अधिकारी नीतीश दास को सस्पेंड किया गया है। वहीं, मयनागुड़ी की दलिया रे चौधरी, सुती विधानसभा क्षेत्र के एसके मुर्शिद आलम, और कैनिंग पुरबो के संयुक्त बीडीओ सत्यजीत दास व जॉयदीप कुंडू पर भी कड़ी कार्रवाई हुई है। इसके अलावा, डेबरा के संयुक्त बीडीओ देबाशीष विश्वास को भी कर्तव्य में लापरवाही का दोषी पाया गया है। चुनाव पूर्व सफाई अभियान की शुरुआत पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए आयोग किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। वोटर लिस्ट में सुधार और मतदान केंद्रों की समीक्षा का काम जोरों पर है। आयोग का मानना है कि यदि जमीनी स्तर के अधिकारी ही निष्पक्ष नहीं रहेंगे, तो लोकतंत्र के इस महापर्व की शुचिता प्रभावित हो सकती है।  

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: मध्य प्रदेश समेत छह राज्यों में बढ़ी SIR की समयसीमा

भोपाल /नई दिल्ली  चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश  6 राज्यों में मतदाता सूची में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन की समय सीमा को बढ़ा दिया है। चुनाव आयोग ने जिन राज्यों में एसआईआर की समय सीमा बढ़ाई है उनमें MP के अलावा गुजरात,उत्तर प्रदेश , छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और अंडमान शामिल हैं। चुनाव आयोग के अनुसार छह राज्यों/UT के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEOs) से मिली रिक्वेस्ट के आधार पर, इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने इन 6 राज्यों/UT में इलेक्टोरल रोल के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के शेड्यूल में बदलाव किया है। किस राज्य में क्या है नई तारीख इसमें 01.01.2026 को क्वालिफाइंग तारीख माना गया है। तमिलनाडु और गुजरात में ड्राफ्ट रोल के प्रकाशित होने की संशोधित तारीख 19 दिसंबर है। ये पहले 14 दिसंबर थी। वहीं, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान निकोबार ड्राफ्ट रोल के प्रकाशित होने की तारीख को 18 दिसंबर से बढ़ाकर 23 दिसंबर किया गया है। यूपी में ड्राफ्ट रोल के प्रकाशित होने की नई तारीख 26 दिसंबर की बजाय 31 दिसंबर होगी। केरल में पहले ही बढ़ाई थी तारीख केरल में राज्य चुनाव आयोग ने पहले ही एसआईआर के लिए एक्सटेंशन दे दिया है। राज्य की और समय की रिक्वेस्ट के बाद अब डेडलाइन 11 दिसंबर से बढ़ाकर 18 दिसंबर कर दी गई है। केरल में सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस, TMC, CPI(M) और SP ने आरोप लगाया कि कमीशन ने जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया और बिना वजह जल्दबाजी में रिवीजन टाइमलाइन के साथ आगे बढ़ा। आयोग के अनुसार, तमिलनाडु और गुजरात में SIR जमा करने की नई अंतिम तिथि अब 14 दिसंबर 2025 (रविवार) होगी, जबकि इससे पहले यह 19 दिसंबर 2025 (शुक्रवार) थी. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं अंडमान और निकोबार के लिए अंतिम तिथि 18 दिसंबर 2025 (गुरुवार) से बढ़ाकर 23 दिसंबर 2025 (मंगलवार) कर दी गई है. वहीं, यूपी में SIR की अंतिम तिथि 26 से बढ़कर 31 दिसंबर 2025 (बुधवार) कर दी गई है. चुनाव आयोग (EC) ने छह राज्यों आर केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की समय सीमा को आगे बढ़ा दिया है. यह कदम मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए उठाया गया है. उत्तर प्रदेश में फॉर्म जमा करने की अवधि 15 दिनों के लिए बढ़ाई गई है. तमिलनाडु और गुजरात में यह अवधि 3 दिनों के लिए बढ़ाई गई है. वहीं, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान निकोबार में 7 दिनों की अतिरिक्त मोहलत दी गई है. इस वृद्धि के साथ ही ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने की अवधि भी बढ़ा दी गई है. आयोग ने यह फैसला सुनिश्चित करने के लिए लिया है कि सभी पात्र नागरिकों के नाम सूची में शामिल हों.  

सचिन पायलट बोले—SIR प्रक्रिया लोकतंत्र पर प्रहार, चुनाव आयोग की भूमिका पर तीखी टिप्पणी

जगदलपुर  कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट ने जगदलपुर प्रवास के दौरान SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और बीजेपी पर सीधा राजनीतिक हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में छेड़छाड़ देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर गंभीर प्रहार है. सचिन पायलट ने दावा किया कि जिस तरह बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लाखों वोटरों के नाम सूची से हटाए गए थे, उसी पैटर्न को अब छत्तीसगढ़ में लागू करने की कोशिश हो रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार सबूत और दस्तावेज प्रस्तुत कर रही है, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से स्पष्ट और ठोस कार्रवाई नज़र नहीं आ रही. चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल पायलट ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने जैसी गंभीर प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता आवश्यक है, लेकिन कई अहम सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिले हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग को इसमें स्पष्टता बरतनी चाहिए, क्योंकि यह मुद्दा सीधे-सीधे लोकतंत्र से जुड़ा है. बीजेपी पर भी साधा निशाना पत्रवार्ता में उन्होंने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि घुसपैठ का मुद्दा केवल चुनाव के समय उठाया जाता है, जबकि 11 साल के शासन में केंद्र सरकार कितने लोगों को देश से बाहर कर सकी—इसका आंकड़ा देने से बचती है. “दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के वोटर सुरक्षित रहेंगे” पायलट ने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर दलित, आदिवासी और ओबीसी वर्ग के मतदाताओं का नाम सूची से कटने नहीं देगी. उन्होंने कहा कि इन समुदायों की सुरक्षा और अधिकारों को किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा. नक्सल विरोधी अभियान पर भी बोले पायलट पत्रवार्ता के दौरान उन्होंने बस्तर में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी. पायलट ने कहा कि कांग्रेस ने बस्तर में कई बड़े नेता खोए हैं और पार्टी हमेशा हिंसा के खिलाफ खड़ी रही है. उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना ज़रूरी है और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. जगदलपुर में पायलट के इस बयान ने SIR प्रक्रिया को लेकर सियासत को और तेज कर दिया है. पूर्व विधायक गुलाब कमरो का कटा नाम : महंत नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए बड़ा खुलासा किया कि भरतपुर के पूर्व विधायक गुलाब कमरो का नाम उनके ही पैतृक गांव की मतदाता सूची से हटा दिया गया है. महंत ने बताया कि कई बार खोजबीन के बाद उनका नाम रायगढ़ जिले के एक गांव की मतदाता सूची में पाया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस के पूर्व विधायक तक चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया से प्रभावित हो सकते हैं, तो आम लोगों को कितनी परेशानी झेलनी पड़ रही होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

एसआईआर कार्य की प्रगति की रोजाना समीक्षा करें कलेक्टर: निर्वाचन आयोग

निदेशक श्रीमती शुभ्रा सक्सेना और सचिव श्री बिनोद कुमार ने वर्चुअल बैठक में दिए निर्देश भोपाल भारत निर्वाचन आयोग की निदेशक श्रीमती शुभ्रा सक्सेना एवं सचिव श्री बिनोद कुमार ने बुधवार को मध्य प्रदेश के 19 जिलों के कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारीऔर नगर पालिक निगमों के कमिश्नरों के साथ वर्चुअल बैठक कर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मप्र श्री संजीव कुमार झा भी मौजूद रहे। निदेशक श्रीमती सक्सेना ने कहा कि जिलों में एसआईआर के कार्य को गंभीरता और प्राथमिकता से लिया जाए। उन्होंने मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान गणना पत्रकों के वितरण, मैपिंग, तथा डिजिटलाइजेशन की प्रगति की समीक्षा की और प्रदेश की स्थिति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने भोपाल, इन्दौर और ग्वालियर के उन विधानसभा क्षेत्रों के ईआरओ से सीधे बात की जहाँ कार्य की रफ्तार अपेक्षित नहीं रही। साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे ईआरओ के कार्य की प्रतिदिन समीक्षा करें और कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार सुनिश्चित करें। श्रीमती सक्सेना ने सभी जिलों को निर्देशित किया कि डिजिटलाइजेशन का कार्य जल्द से जल्द पूरा किया जाए। बीएलओ को सहयोग देने के लिये वालेंटियर्स की नियुक्ति, तथा तीनों महानगरों में विशेष कैम्प लगाकर गणना पत्रक भरवाने की व्यवस्था के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि कलेक्टर स्वयं मैदानी स्तर पर जाकर कार्य की स्थिति देखें और मैपिंग के कार्य को शत-प्रतिशत सटीकता के साथ पूरा कराएं। बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री संजीव कुमार झा ने कलेक्टर्स को निर्देश दिया कि वे ईआरओ कार्य की रोजाना मॉनिटरिंग करें, तथा गणना पत्रक के डिजिटलाइजेशन का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करें। उन्होंने कहा कि इस सप्ताह के भीतर सभी आवश्यक कार्य पूर्ण किए जाएँ। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिया कि झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में भी बीएलओ घर-घर जाकर दस्तक दें, और वालेंटियर्स मतदाताओं को फार्म भरने में आवश्यक सहयोग करें। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि एसआईआर कार्य की रफ्तार और गुणवत्ता आगामी दिनों में उनके सीधे फोकस में रहेगी।  

फर्जी कॉल्स से बचें: SIR पोर्टल के नाम पर OTP ठगी के खिलाफ आयोग का अलर्ट

जगदलपुर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत गणना फार्म भरने वाले मतदाताओ और नागरिकों को साइबर ठगी को लेकर सतर्क किया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा इस संबंध में गुरुवार को एक सूचना जारी की गई है। आयोग की ओर से जारी सूचना में कहा गया कि एसआईआर फार्म भरते समय मोबाइल नंबर देना पूरी तरह से सुरक्षित है, लेकिन नागरिकों को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है। कुछ साइबर अपराधी इसी बहाने ठगी करने की कोशिश कर सकते हैं। बताया गया कि बीएलओ (बूथ लेवल आफिसर) के माध्यम से एसआईआर फार्म भरने के लिए किसी भी प्रकार के ओटीपी की आवश्यकता नहीं होती है। कोई भी अधिकारी, कर्मचारी या बीएलओ आपसे ओटीपी नहीं मांगता है। यदि कोई व्यक्ति फोन करे और कहे कि आपके एसआईआर से जुड़े मोबाइल पर जो ओटीपी आया है, वह हमें दे दीजिए तो उन्हें तुरंत मना कर दें। कॉल करने वाले व्यक्ति को साफ-साफ मना करते हुए निर्वाचन कार्यालय अथवा बीएलओ से संपर्क कर इसकी जानकारी दे दी जाए। आयोग ने दबाव या धमकी की स्थिति में पुलिस को सूचना देने के लिए कहा है। पुलिस ने भी की अपील पुलिस ने भी नागरिकों को एसआईआर फार्म भरने की प्रक्रिया से जुड़ी एक नई प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी (स्कैम) के प्रति सतर्क किया है। साथ ही लोगों से अपील की है कि वे किसी भी सूरत में अपने मोबाइल फोन में प्राप्त वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें। आवश्यकता पड़ने पर जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 1950 तथा इंटरनेट मीडिया पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी छत्तीसगढ़ के फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम में जुड़ सकते हैं। एसआईआर ने पकड़ा जोर बस्तर जिले में एसआईआर का कार्य जोर पकड़ चुका है। बीएलओ गणना पत्रक भरवा रहे हैं। मतदाता और अन्य नागरिक भी इस कार्य में पूरा सहयोग कर रहे हैं। नईदुनिया ने शुक्रवार को शहर के समीप ग्राम पंचायत आड़ावाल के नयापारा में एसआईआर गणना पत्रक भरने एकत्र लोगों से चर्चा की तो उनका कहना था कि बीएलओ फार्म भरने में सहयोग कर रहे हैं। 2003 की मतदाता सूची से मतदाता संबंधी जानकारी भी बता रहे हैं इससे काम आसान हो गया है।

‘चुनाव आयोग BJP का पाप धो रहा’ — तेजस्वी का तीखा हमला, कहा बिहार बदलेगा अब की बार

पटना दूसरे चरण के मतदान से पहले तेजस्वी यादव ने एनडीए और डबल इंजन सरकार पर जोरदार हमला किया है। सोमवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चुनाव प्रचार समाप्त हो गया। कल दूसरे चरण का मतदान होगा। हमने 171 जनसभा की। हर जगह लोगों में बदलाव का मूड दिखा। बेरोजगारी, पलायन से लोग परेशान हैं। 20 साल राज करने पर भी एनडीए ने बिहार को अंतिम पायदान पर कर दिया। अब बिहार के लोगों को बिहार में ही सुविधा चाहिए। कोई छठ और दीपावली में ही घर न आये, हमेशा साथ रहे। उन्होंने नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी पर बिहार की जनता को पीछे रखने का आरोप लगाया और कहा कि 14 नवम्बर के बाद सब बदल जाएगा। तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार इस बार इतिहास रचेंगे। कलम राज ला रहे हैं। विकसित राज्य बनेगा। बीस सालों में मुख्यमंत्री केवल सुर्खियों में रहे। लेकिन अब बिहार केवल सुर्खियों में नहीं रहेगा। पढ़ाई, दवाई, कमाई, सिंचाई की सुविधा होगी। दूसरे राज्य न जाना पड़े, ऐसा बिहार बनाएंगे। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी गंभार आरोप लगाया। कहा कि बीजेपी पाप करती है और इलेक्शन कमीशन उसे धोने का काम करता है। नाव आयोग पहले चरण के मतदान के 4 दिन बाद भी आंकड़े सार्वजनिक नहीं किये कि कितने महिला और पुरुषों ने मतदान किया। यह मजाक है। तकनीक के इस युग में ये हाल है। भाजपा के पाप को आयोग धो रहा है। आयोग मर चुका है। चुनाव आयोग बताए कि समस्तीपुर में इतनी वीवीपैट परचियां कहाँ से आई। कहा कि सत्ता में बैठे लोग घबराये हुए हैं। गृह मंत्री अमित शाह पटना में अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं। यह बता रहे हैं कि किन किन को उठाना है। जिला को रिटायर्ड अधिकारी निर्देश दे रहे हैं। लेकिन हमारी पैनी नजर है। तेजस्वी यादव ने का कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार में उद्योग-धंधों की बात नहीं करते,बस नकारात्मक भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी अपराधियों के साथ मंच साझा कर रहे हैं, जिनमें आनंद मोहन, अनंत सिंह और हुलास पांडे जैसे नाम शामिल हैं। ये लोग कोई संत हैं क्या। तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी में शामिल हो जाने पर किसी के भी सारे पाप धुल जाते हैं।  

VVPAT पर्चियां मिलीं कचरे में, समस्तीपुर में EC का बड़ा एक्शन — ARO सस्पेंड

समस्तीपुर बिहार के समस्तीपुर के सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र में कचरे में बड़ी संख्या में वीवीपैट पर्चियां मिलने का मामला सामने आया। प्रशासन ने मौके से पर्चियों को जब्त कर लिया और संबंधित कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। मामले में समस्तीपुर के जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने बताया कि बहुत सारी श्रेडेड पर्चियों के बीच कुछ अनश्रेडेड पर्चियां भी पाई गईं, जिन्हें प्रशासन ने कन्फिस्केट कर सीजर कर लिया है। वहीं, चुनाव आयोग ने इन्हें मॉक पोल की पर्चियां बताया है और त्वरित कार्रवाई करते हुए एआरओ को सस्पेंड कर दिया है। जिलाधिकारी ने की अफवाह न फैलाने की अपील जिलाधिकारी ने कहा कि जिन लोगों से लापरवाही हुई है, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा रही है और जांच में यह स्पष्ट हो जाएगा कि ये पर्चियां किस समय की हैं। अफवाह न फैलाने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि यह पूरा तकनीकी मामला है, जांच करते हुए सभी चीजें स्पष्ट हो जाएंगी। घटना सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र की है, जहां शीतलपट्टी गांव के पास हजारों वीवीपैट पर्चियां कचरे में पाई गईं। जिलाधिकारी के अनुसार, यह सामग्री कमीशनिंग/डिस्पैच सेंटर के पास मिली, जहां श्रेडेड पर्चियों के साथ कुछ अनश्रेडेड पर्चियां भी देखी गईं। प्रशासन ने मौके से पर्चियों को जब्त कर लिया है और संबंधितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिलाधिकारी ने कहा कि जांच के बाद पर्चियों का समय और स्रोत स्पष्ट कर दिया जाएगा और तब तक किसी भी प्रकार की अटकलों से बचने की अपील की। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कमीशनिंग के दौरान 5% मशीनों पर 1000-1000 वोट का मॉक पोल होता है और सभी प्रत्याशियों के प्रतीक की लोडिंग जांचने के लिए बटन दबाकर परीक्षण किया जाता है। उन्होंने कहा कि स्थल पर काफी संख्या में कटी हुई/श्रेडेड पर्चियां भी मिली हैं, जिसकी जांच जारी है। इधर, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने शनिवार को बिहार के समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र के सरायरंजन में एक मतदान केंद्र के बाहर वीवीपैट पर्चियां मिलने के संबंध में त्वरित स्पष्टीकरण जारी किया और इस बात पर जोर दिया कि यह घटना केवल मॉक पोल पर्चियों से संबंधित थी और इससे चुनाव प्रक्रिया को कोई खतरा नहीं है। विपक्षी दलों और स्थानीय मीडिया द्वारा उठाई गई चिंताओं का समाधान करते हुए, निर्वाचन सदन में एक प्रेस वार्ता के दौरान कुमार ने कहा, "मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं किया गया है।"कुमार ने बताया कि समस्तीपुर के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) को तुरंत घटनास्थल का दौरा करने और जमीनी स्तर पर जांच करने का निर्देश दिया गया था। मुख्य चुनाव आयुक्त ने घोषणा की, "एआरओ चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार नकली मतदान सामग्री का उचित निपटान सुनिश्चित करने में विफल रहे। उन्हें तत्काल निलंबित किया जा रहा है और आईपीसी की धारा 188 (लोक सेवक के आदेश की अवज्ञा) के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा रही है।"