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कंवर समाज ने मुख्यमंत्री साय को दी बधाई, करमा तिहार में आने का न्योता

रायपुर, जापान और दक्षिण कोरिया प्रवास से लौटने के उपरांत  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से कंवर समाज के प्रदेश अध्यक्ष श्री हरवंश मिरी एवं महासचिव श्री नकुल चंद्रवंशी के नेतृत्व में समाज के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री निवास में भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री साय एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशिल्या साय को बधाई दी। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री साय को आगामी भादो एकादशी पर्व पर आयोजित होने वाले करमा तिहार के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। यह आयोजन दिनांक 03 सितम्बर 2025 को नवा रायपुर, अटल नगर स्थित नवीन मुख्यमंत्री निवास परिसर में संपन्न होगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कंवर समाज के उपाध्यक्ष थानसिंह दीवान, कोषाध्यक्ष बसंत दीवान, कार्यकारिणी सदस्य शिवकुमार कंवर, महानगर इकाई के कार्यवाहक अध्यक्ष मनोहर पैंकरा, सचिव मनहरण चंद्रवंशी, सदस्य हेमलाल कंवर सहित युवा कंवर प्रभाग के युवा संरक्षक  तीरमेंद्रू सिंह कंवर एवं टुकेश कंवर भी उपस्थित थे।

मोदी सरकार का नया स्ट्रैटेजी मोड: ट्रंप टैरिफ के बीच लॉकडाउन जैसी योजनाओं पर नजर

नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ लागू कर दिया है। इस टैरिफ का सीधा असर भारतीय निर्यातकों और कामगारों पर पड़ने वाला है। वहीं टैरिफ से लाखों नौकरियों पर भी खतरा मंडरा रहा है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बम से बचने का रास्ता मोदी सरकार ने निकाल लिया है। कोविड लॉकडाउन के दौरान जिस तरह की योजनाएं लागू की गई थीं, कुछ उसी स्टाइल में सरकार लोगों को राहत देने की योजना बना रही है। इसके अलावा अमेरिका से अलग बाजार तलाशने और ग्लोबल सप्लाई चेन के एकीकरण के लिए लंबी अवधि की रणनीतियों पर काम किया जा रहा है। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दो सीनियर अधिकारियों ने बताया कि सरकार सबसे पहले नकदी की समस्या का समाधान निकालने पर विचार कर रही है। वहीं निर्यात और रोजगार बचाने के लिए सरकार कोविड स्टाइल में योनजाएं चलाना चाहती है। ट्रंप के टैरिफ की वजह से कई तरह के दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे कि भुगतान में देरी, देर से सामान का पहुंचना, ऑर्डर रद्द होना। वहीं निर्यात को बरकरार रखने के लिए नई मार्केट की जरूरत है। जब तक नई मार्केट नहीं मिलती, निर्यातकों को ऑपरेशन जारी रखने के लिए राहत देना जरूरी है। सरकार कर सकती है राहत पैकेज का ऐलान अधिकारियों के मुताबिक सरकार ने कोरोना लॉकडाउन के दौरान जिस तरह के राहत पैकेज का ऐलान किया था, उसी तरह के राहत पैकेज का एक बार फिर ऐलान हो सकता है। उद्योगों में नकदी की समस्या, खास तौर पर लघु और मध्यम उद्योगों के लिए इस तरह की योजनाएं जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इमर्जेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) जैसी योजनाओं पर फोकस करना चाहती है जो कि 100 फीसदी गारंटी के साथ बिना जमानत के लोन उपलब्ध करवा सकें। इससे लाखों छोटे और मध्यम उद्योग दीवालिया होने से बच जाएंगे। लॉकडाउन के दौरान जब 68 दिनों के लिए औद्योगिक गतिविधियां ठप हो गई थीं, तब इसी योजना ने उद्योगों को बचा लिया था। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समस्या और उसके समाधान को देखते हुए इन योजनाओं में बदलाव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तत्काल राहत के साथ सरकार चरणबद्ध तरीके से भी योजानाएं लागू करेगी जिससे लंबी अवधि की रणणनीति तैयार हो सके। नकदी उपलब्ध करवाने के साथ ही मौजूदा व्यापार समझौतों को मजबूत करने और नई मार्केट में अवसरों की तलाश का काम भी तेज होगा। जीएसटी से भी राहत अधिकारियों ने कहा कि टैक्स से जुड़ी भी कई राहत देने पर सरकार विचार कर रही है। इसमें जीएसटी रिफॉर्म भी शामिल है। अगले सप्ताह होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में टैक्स घटाने से संबंधित कई फैसले हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर मजबूती की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था को खतरा नहीं है। टैरिफ जैसे बाहरी फैक्टर भारत की अर्थव्यवस्था को ज्यादा प्रभावित नहीं कर पाएंगे। जीडीपी में निर्यात का मामूली योगदान अधिकारियों ने कहा कि घरेलू उपभोग की वजह से अर्थव्यवस्ता लचीली है। निर्यात अर्थव्यवस्ता के लिए महत्वपूर्ण है लेकिन यह भारत की जीडीपी 4.12 ट्रिलियन डॉलर का छोटा हिस्सा है। निर्यात का जीडीपी में योगदान केवल 10 फीसदी यानी 438 मिलियन डॉलर का ही है। ऐसे में जून में समाप्त होने वाली तिमाही में भी आर्थिक वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही।  

पीएम मोदी ने LAC पर शी जिनपिंग को दी अहम सलाह, मानवता के लिए जरूरी सहयोग पर जोर

तियांजिन चीन के तियांजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हुई। अमेरिका से टैरिफ वॉर के बीच दोनों नेताओं की बीच इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शी जिनपिंग से कहा कि दोनों देशों का आपसी सहोयग 2.8 अरब की आबादी और मानवता के लिए जरूरी हो गई है। एलओसी को लेकर भी प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के प्रयासों से सीमा पर शांति का माहौल बना है। शी जिनपिंग ने भी प्रधानमंत्री मोदी की बात पर सहमति जताते हुए कहा कि अब दोनों देशों का साथ आना जरूरी है। पीएम मोदी ने कहा, सैनिकों के पीछे हटने के बाद सीमा पर शांति एवं स्थिरता कायम है। सीमा प्रबंधन को लेकर हमारे विशेष प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनी थी जो कि कारगर साबित हुई है। हमारे द्विपक्षीय सहयोग से 2.8 अरब लोगों का कल्याण जुड़ा है। भारत और चीन के बीच सीधी उड़ान सेवाएं फिर से शुरू हो रही हैं जो कि बेहद खुशी की बात है। पीएम मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन की सफल अध्यक्षता के लिए शी जिनपिंग को बधाई देते हुए कहा, हम आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बता दें कि चीन ने इसी महीने कहा है कि वह रेयर अर्थ, उर्वरक और टनल बोरिंग मशीन के निर्यात से बैन हटाने को तैयार है। वहीं टैरिफ वॉर के मामले में भी चीन भारत के ही साथ खड़ा है। हाल ही में दोनों देशों ने टूरिस्ट वीजा को लेकर प्रतिबंधों को खत्म कर दिया है। इसके अलावा चीन ने तिब्बत में बौद्धों के धार्मिक स्थल पर भारतीयों को आने-जाने की इजाजत दे दी है। जानकारों का कहना है कि पश्चिम से मिल रही चुनौतियों के बीच एशिया को मजबूत करने की दिशा में यह सार्थक कदम है। अगर भारत और चीन के बीच संबंध सुधरते हैं तो यह अमेरिका के लिए भी बड़ी चुनौती होगी। पीएम मोदी रविवार से शुरू हो रहे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के दो दिवसीय वार्षिक शिखर सम्मेलन में मुख्य रूप से भाग लेने के लिए चीन में हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन की व्यापार और शुल्क संबंधी नीतियों के बाद भारत और अमेरिका के संबंधों में आए तनाव के मद्देनजर शी के साथ मोदी की बैठक अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। तियानजिन की अपनी यात्रा से पहले मोदी ने कहा था कि विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए भारत और चीन का मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है। जापान के समाचार पत्र ‘द योमिउरी शिंबुन’ के साथ एक इंटरव्यू में मोदी ने कहा कि भारत और चीन के बीच स्थिर और सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों का क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति और समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। मोदी ने शुक्रवार को प्रकाशित इंटरव्यू में कहा, “विश्व अर्थव्यवस्था में मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए, दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के रूप में भारत और चीन का विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है।” मोदी की चीन यात्रा चीनी विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा के एक पखवाड़े से भी कम समय के बाद हुई है।

महिलाओं की सुरक्षित यात्रा के लिए बिहार सरकार का कदम, 80 नई पिंक बसें होंगी शुरू

पटना राज्य में महिलाओं के लिए पिंक बस सेवा का विस्तार होने जा रहा है। वर्तमान में 20 पिंक बसें प्रदेश में चल रही है, लेकिन सितंबर में 80 नई बसें सड़कों पर उतरेंगी। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) के अनुसार 30 नई बसें डिपो में पहुंच चुकी हैं। इस सप्ताह शेष बसें भी पहुंच जाएंगी। पटना में वर्तमान में आठ पिंक बसों का विभिन्न रूटों पर परिचालन होता है। 80 नई बसों में से 22 बसें पटना को मिलेगी। जो जल्द नई रूट पर चलेंगी। बीएसआरटीसी ने नई 80 बसें मंगाने का आदेश दिया था, जो चरणबद्ध तरीके से पटना और अन्य जिलों में चलाई जाएंगी। ये बसें महिलाओं की सुरक्षित और आरामदायक यात्रा के लिए हैं, जिसमें महिला कंडक्टर और स्टाफ तैनात होंगे। पिंक बस चलने से महिलाओं को आटो पर निर्भरता कम होगी और सस्ती, सुरक्षित यात्रा का विकल्प मिलेगा। पटना की सड़कों पर महिलाओं के लिए संचालित पिंक बस सेवा का दायरा अब और बढ़ जाएगा। अभी आठ पिंक बसें चल रही हैं, लेकिन सितंबर माह में कुल 30 पिंक बसें पटना की सड़कों पर उतर जाएंगी। 22 नई बसों को जल्द ही रूट पर उतारने की तैयारी 22 नई बसों को जल्द ही रूट पर उतारने की तैयारी चल रही है। अभी 10 बसों के विभिन्न रूट पर परिचालन के लिए आवेदन किया गया है। जल्द ही 12 और बसों की परमिट लिया जाएगा। पटना में 10 नई रूटों पर पिंक बसों को चलाया जाएगा। इसमें पटना से हाजीपुर, पालीगंज, बिहटा व बेली रोड प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अतिरिक्त आने वाले समय में कुर्जी, अशोक राजपथ सहित कुछ अन्य रूट पर भी बसों का परिचालन शुरू होगा। अभी पिंक बसें मुख्य रूप से भीड़भाड़ वाले मार्गों जैसे गांधी मैदान, पटना जंक्शन, दानापुर और फुलवारीशरीफ रूट पर चलाई जाती हैं। बीएसआरटीसी के प्रशासक अतुल कुमार वर्मा ने बताया कि जैसे-जैसे नई बसें उपलब्ध होंगी, वैसे-वैसे इन्हें पटना समेत अन्य प्रमुख शहरों में उतारा जाएगा। नई बसों के आने से महिला यात्रियों को ऑटो और अन्य छोटे वाहनों पर निर्भरता कम करनी होगी और उन्हें सस्ती दर पर आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा।

यात्रियों के लिए खुशखबरी, त्योहार सीजन में दौड़ेगी कमलापति-दानापुर पूजा स्पेशल

भोपाल त्योहारों के अवसर पर यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए पश्चिम मध्य रेलवे ने दुर्गा पूजा, दीपावली एवं छठ पर्व के दौरान अतिरिक्त ट्रेन चलाने का फैसला किया है। इस क्रम में रानी कमलापति-दानापुर-रानी कमलापति के बीच द्वि-साप्ताहिक 11-11 ट्रिप पूजा स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह विशेष ट्रेन रानी कमलापति से प्रस्थान कर नर्मदापुरम, इटारसी, पिपरिया, गाडरवारा, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिहोरा रोड, कटनी, मैहर एवं सतना स्टेशनों से होकर अपने गंतव्य तक पहुंचेगी। ट्रेन 01667 (रानी कमलापति-दानापुर) पूजा स्पेशल ट्रेन 01667 रानी कमलापति से दानापुर स्पेशल ट्रेन 27 सितंबर से 1 नवंबर तक द्वि-साप्ताहिक शनिवार एवं मंगलवार को एक्सप्रेस ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन से दोपहर 2:25 बजे प्रस्थान कर, नर्मदापुरम 3:25 बजे, इटारसी 3:55 बजे, पीपरिया 5:10 बजे, गाडरवारा 5:45 बजे, नरसिंहपुर 6:25 बजे, जबलपुर रात 7:25 बजे, सिहोरा रोड 8:10 बजे, कटनी 9:20 बजे, मैहर 10:10 बजे, सतना 10:45 बजे पहुंचकर और अगले दिन रविवार एवं बुधवार को सुबह 8:45 बजे दानापुर स्टेशन पहुंचेगी।   ट्रेन 01668 (दानापुर-रानी कमलापति) इसी प्रकार ट्रेन 01668 दानापुर से रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन 28 सितंबर से 2 नवंबर तक द्वि-साप्ताहिक रविवार एवं बुधवार को एक्सप्रेस ट्रेन दानापुर स्टेशन से सुबह 11 बजे प्रस्थान कर प्रयागराज छिवकी रात 8:30 बजे, पहुंचकर अगले दिन सतना रात 12:55 बजे, मैहर 1:28 बजे, कटनी 2:30 बजे, सिहोरा रोड 3:13 बजे, जबलपुर 3:50 बजे, नरसिंहपुर सुबह 5:00 बजे, गाडरवारा 5:30 बजे, पिपरिया 6 बजे, इटारसी 7:10 बजे, नर्मदापुरम 7:48 बजे पहुंचकर और सोमवार एवं गुरुवार को सुबह में 8:55 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी।

मोदी सरकार का तोहफा: प्रधानमंत्री जनधन योजना में अब मिलेगी ₹10,000 तक ओवरड्राफ्ट सुविधा

नई दिल्ली  नरेंद्र मोदी सरकार की चर्चित योजना- प्रधानमंत्री जनधन के 11 साल पूरे हो गए हैं। योजना के तहत खोले गए खातों की संख्या 11 वर्ष में बढ़कर 56.16 करोड़ हो गई है। वहीं, खातों में 2.68 लाख करोड़ रुपये जमा किए गए। योजना के तहत खाताधारकों को कई बड़ी सुविधाएं मिलती हैं। इनमें से एक सुविधा ओवरड्राफ्ट की है। आइए इस सुविधा के बारे में विस्तार से जान लेते हैं। क्या है ओवरड्राफ्ट लिमिट प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत लाभार्थी 10000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। बता दें कि ओवरड्राफ्ट के तहत अगर आपके खाते में पर्याप्त पैसा नहीं है, फिर भी आप एक निश्चित सीमा तक पैसे निकाल सकते हैं या लेनदेन कर सकते हैं। योजना के तहत सभी लाभार्थियों को 2 लाख रुपये के दुर्घटना बीमा कवर के साथ एक निःशुल्क रुपे डेबिट कार्ड प्राप्त होता है। क्या कहते हैं आंकड़े बीते दिनों वित्त मंत्रालय ने बताया कि जनधान के तहत खातों की संख्या मार्च 2015 के 14.72 करोड़ से बढ़कर 13 अगस्त 2025 तक 56.16 करोड़ हो गई है। खाताधारकों में 56 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। वहीं 67 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में सीधे 45 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए। भारत की 94 प्रतिशत वयस्क आबादी का अब बैंक खाता है। 38.68 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड जारी प्रधानमंत्री जनधन योजना के खाताधारकों को कुल 38.68 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड जारी किए गए हैं। इससे उन्हें नकदी रहित लेनदेन की सुविधा मिली है और अंतर्निहित दुर्घटना बीमा कवर तक पहुंच प्राप्त हुई है। ये खाते प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), अटल पेंशन योजना (एपीवाई), और माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी बैंक (मुद्रा) योजना के लिए पात्र हैं।

सरकार ने बढ़ाई PM SVANidhi स्कीम की डेडलाइन, बिना गारंटी मिलेगा लोन

नई दिल्ली कोरोना महामारी के दौर में, जब लोगों के छोटे रोजगार ठप हो गए थे और खासतौर पर रेहड़ी-पटरी वालों का बिजनेस पूरी तरह से खत्म हो गया था, तो ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने इनकी मदद के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि या पीएम स्वनिधि योजना की शुरुआत की थी, जिसके तहत उन्हें अपना बिजनेस खड़ा करने में मदद के लिए सरकार 80,000 रुपये तक का लोन मुहैया करा रही थी और वो भी बिना गांरटी के, अब मोदी सरकार ने इस स्कीम के तहत मिलने वाले लोन की लिमिट में इजाफा कर दिया है और अब लाभार्थियों को 80 हजार नहीं, बल्कि 90,000 रुपये तक का गारंटी-फ्री लोन मिलेगा. यही नहीं स्वनिधि योजना की डेडलाइन भी 2030 तक बढ़ाई गई है.  31 मार्च 2030 तक मिलेगा फायदा केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के विस्तार और पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है, जो करोड़ों रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे विक्रेताओं के लिए बड़ी राहत भरा कदम है. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के इस फैसले से 1.15 करोड़ रेहड़ी-पटरी वालों को लाभ मिलेगा, जिनमें 50 लाख नए लाभार्थी भी शामिल हैं. आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ वित्त सेवा विभाग द्वारा इसका संचालन 31 मार्च 2030 तक जारी रहेगा. इस फैसले से सरकारी खजाने पर 7,332 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय आएगा.  80 नहीं, अब 90 हजार तक लोन   सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना की डेडलाइन को बढ़ाने के साथ ही इसके तहत लाभार्थियों को मिलने वाले लोन की लिमिट में भी बढ़ोतरी की है. बता दें कि इसमें जरूरतमंदों को सरकार तीन किस्तों में 80,000 रुपये का लोन देती है और 10, 20 और 50 हजार रुपये तीन चरणों में दिए जाते थे. लेकिन अब इसकी लिमिट को बढ़ाते हुए स्मॉल बिजनेस की शुरुआत के लिए पहले चरण में 15,000 रुपये, दूसरे चरण में 25,000 रुपये और तीसरे चरण में 50,000 रुपये का लोन मिलेगा. इस सरकारी योजना का पूरा लाभ लेने के लिए क्रेडिबिलिटी जरूरी है. मतलब कोई व्यक्ति अपना व्यापार शुरू करने के लिए अप्लाई करता है, तो पहले उसे 15,000 रुपये का लोन मिलेगा और फिर उसके द्वारा ये लोन की रकम निर्धारित समय में चुकाने ही वो स्कीम के तहत अगला 25,000 रुपये का लोन पा सकेगा. इसी तरह जब वो इस लोन को चुका देगा, तो उसे एकमुश्त 50,000 रुपये का लोन पाने का योग्य माना जाएगा. सरकारी डेटा पर नजर डालें, तो 30 जुलाई 2025 तक 68 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को 13,797 करोड़ रुपये के 96 लाख से ज्यादा लोन वितरित किए गए हैं. करीब 47 लाख लाभार्थी डिजिटली सक्रिय हैं, जिन्होंने 6.09 लाख करोड़ रुपये वैल्यू के 557 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन किए हैं. सिर्फ आधार लाएं और लोन ले जाएं जैसा कि बताया कि ये सरकार की बिना गारंटी वाली लोन स्कीम है, यानी इसे लेने के लिए आपको किसी भी तरह की कोई चीज गारंटी के तौर पर गिरवी नहीं रखनी होगी. सिर्फ आधार कार्ड के जरिए आपको ये लोन आसानी से चरणबद्ध तरीके से मिल जाता है. आपको करना ये है कि पैसा तय समय में वापस करना है. नियमों को देखें, तो पीएम स्वनिधि योजना के तहत जितनी लोन की राशि ली जाती है, उसे सालभर में चुकाया जा सकता है. यही नहीं इसमें EMI Payment की सुविधा भी मिलती है.  रुपे क्रेडिट कार्ड समेत ये सुविधाएं भी सरकार द्वारा साफ किया गया है कि पीएम स्वनिधि योजना के जो लाभार्थी समय पर दूसरा लोन चुकाएंगे, उन्हें यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड भी मिलेगा, जिससे उनकी व्यावसायिक और व्यक्तिगत आर्थिक जरूरतें पूरा करने में उन्हें मदद मिलेगी. इसके अलावा स्मॉल बिजनेस शुरू करने वाले लाभार्थियों को डिजिटल पेमेंट के लिए प्रोत्साहित करने के लिए रिटेल और थोक लेन-देन के लिए 1,600 रुपये तक का डिजिटल कैशबैक भी मिलेगा. योजना के विस्तार के साथ सरकार का लक्ष्य इसकी पहुंच को और व्यापक बनाने के साथ छोटे व्यापारियों के लिए वित्तीय सहायता को मजबूत करना है.

पेंशन के लिए बड़ा बदलाव, EPFO ने तय किया—1 महीने के योगदान से मिलेगा लाभ

नई दिल्ली कर्मचारियों की पेंशन को लेकर ईपीएफओ ने एक बड़ा बदलाव किया है. अब छह महीने से कम तक भी नौकरी करके छोड़ने वाले व्‍यक्तियों को EPS का लाभ दिया जाएगा. इन लोगों को अब अपनी पेंशन में कंट्रीब्‍यूशन खोना नहीं पड़ेगा.  रिटायरमेंट फंड जुटाने वाली संस्‍थान ने EPS नियम के तहत पहले कोई भी सर्विस, जो 6 महीने के अंदर खत्म होती थी उसे 'जिरो कम्‍प्‍लीट ईयर' के परिणाम में पेंशन मिलने के उपयोग नहीं मानती थी और 5 महीने तक नौकरी करके छोड़ने वालों को पेंशन का अधिकार नहीं दिया जाता था. हालांकि अब नए नियमों के तहत अप्रैल- मई 2024 के दौरान जारी किए गए एक सर्कुलर में ये अधिकार दे दिया गया है.  ईपीएफओ ने स्पष्‍ट कर दिया है कि अगर कोई व्‍यक्ति 1 महीने की भी सेवा पूरी करता है और ईपीएस के तहत योगदान देता है तो उसे भी ईपीएस के तहत पेंशन का अधिकार होगा.  क्या है EPFO का नया नियम? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के नए नियम के मुताबिक, कोई व्यक्ति चाहे 1 महीने नौकरी करे, लेकिन यदि उसने EPS में योगदान किया है तो वह EPS पेंशन के लिए पात्र होगा। यानी पेंशन पाने का हक अब सेवा के पूरे साल की बजाय, योगदान के आधार पर तय किया जाएगा। EPFO ने क्यों बदले नियम? ईपीएफओ का यह फैसला उन सेक्टर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जहां कम समय के लिए जॉब ऑफर की जाती है। मसलन, BPO, लॉजिस्टिक्स, अनुबंध (Contract) स्टाफिंग और शॉर्ट-टर्म प्रोजेक्ट्स में हर साल हजारों लोगों को चंद महीने बाद ही फायर कर दिया जाता है। फाइनेंस और सेल्स से जुड़ी जॉब भी ऐसे ही होती हैं।  ये बदलाव क्‍यों था जरूरी?  इस बदलाव से बहुत लोगों को राहत मिलने वाली है. खासकर बीपीओ, लॉजिस्टिक्स और अनुबंध स्टाफिंग को, जहां जल्दी निकासी सामान्य है. यह युवा कर्मचारियों को नौकरी के हितों की रक्षा करेगा. ये उन सभी के लिए काफी लाभदायक साबित होगा, जो काफी कम समय के लिए किसी कंपनी को ज्‍वाइन करते हैं. मान लीजिए अगर किसी ने एक महीने तक ही नौकरी की और फिर नौकरी नहीं कर पाए, फिर उसे पीएफ का पैसा तो मिल सकता है, लेकिन ईपीएस में कंट्रीब्‍यूशन समाप्‍त हो जाएगा. ऐसे में यह नियम उन कर्मचारियों के लिए लाभदायक होगा.  इन सेक्टरर्स में छह माह से कम नौकरी करने वाले हजारों कर्मचारी EPS कंट्रीब्यूशन के बावजूद पेंशन से वंचित हो जाते थे। उनका EPS कंट्रीब्यूशन भी बेकार हो जाता था। नया नियम युवाओं और अनियमित कार्यबल के लिए एक बड़ी राहत होगी। PF खाताधारक क्या करें? आपने यदि किसी कंपनी में 6 महीने से कम नौकरी की है और EPS कंट्रीब्यूशन किया है। तो अपने PF पासबुक की जांच करें कि EPS कंट्रीब्यूशन दर्ज है या नहीं। अगर EPS हिस्सा नहीं दिख रहा तो 2024 के सर्कुलर का हवाला देते हुए EPFO को शिकायत करें। शिकायत करते समय पासबुक का स्क्रीनशॉट या PDF फॉर्मेट सेव कर लें। पुराने नियमों में क्या था? 6 महीने से कम सेवा को शून्य पूर्ण सेवा वर्ष (Zero completed year) माना जाता था। ऐसे कर्मचारियों को EPS राशि निकालने की अनुमति नहीं होती थी, जिससे उनका योगदान वहीं अटक जाता था। यह प्रक्रिया न्यायसंगत नहीं मानी जा रही थी, क्योंकि योगदान देने के बावजूद अधिकार नहीं मिल रहा था। एक्सपर्ट्स की राय रिटायरमेंट प्लानिंग विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला पेंशन फंड की समावेशिता बढ़ाने वाला है और उन कर्मचारियों के हित में है, जिनका करियर शुरुआती दौर में अस्थिर होता है। आप भी पीएफ खाताधारक हैं तो ये जान लीजिए  अगर आपने 6 महीने के अंदर इस्‍तीफा दिया है तो EPS योगदान के लिए अपने PF पासबुक की जांच करें और अगर आपको पेंशन का हिस्सा नहीं दिया गया है, तो 2024 के स्पष्टीकरण का उल्लेख करते हुए EPFO को शिकायत करें.  आवेदन करते वक्‍त अपने पासबुक का स्‍क्रीनशॉट या पीडीएफ सेव कर लें. अक्‍सर देखा गया है कि कम उम्र के सेवा वाले कर्मचारियों को ईपीएस फंड निकालने की अनुमति नहीं दी जाती थी, जिससे उनका कंट्रीब्‍यूशन वहीं फंसा रह जाता था, लेकिन ईपीएफओ के इस बदलाव ने इन लोगों को भी ये अधिकार दिया है. 

भारत ने बचाया दुनिया को तेल संकट से, रिपोर्ट में सामने आया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर टैरिफ को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया है और बार-बार भारत पर हमला बोल रहा है. ट्रंप के सहयोगी पीटर नवारो ने यहां तक दावा किया है कि यूक्रेन संघर्ष असल में 'मोदी का युद्ध' है, और आरोप लगाया कि भारत रियायती तेल खरीद के जरिए रूस का समर्थन कर रहा है.  इस बीच, उद्योग सूत्रों ने कई तथ्‍यों के हवाले से सभी झूठ को खारिज कर दिया है और यह बताया है कि अगर भारत रूसी तेल नहीं खरीदता तो वैश्विक स्‍तर पर परिणाम कितने भयानक हो सकते थे. सूत्रों का कहना है कि भारत ने रूसी तेल खरीदकर एक ग्‍लोबल संकट को रोका. अगर भारत खरीदना बंद कर देता, तो आज कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती थी.   रिपोर्ट में सोर्स के हवाले कहा गया है कि भारत के आयात ने वैश्‍विक बाजारों को स्थिर किया है और रूस को आर्थिक मदद देने के बजाय, दुनियाभर के कंज्‍यूमर्स के लिए ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में मदद की है. इस कदम की अमेरिकी वित्त मंत्री जेनेट येलेन समेत कई इंटरनेशनल हस्तियों ने भी सराहना की है.  जब 137 डॉलर प्रति बैरल हुआ था कच्‍चा तेल ग्‍लोबल मार्केट से रूसी तेल के बाहर हो जाने की पिछली आशंकाओं ने ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ा दी थीं. मार्च 2022 में इसकी कीमत 137 डॉलर प्रति बैरल उच्‍च स्‍तर पर पहुंच चुका था. जिसके बाद भारत ने रूसी तेल की खरीदारी करते हुए ग्‍लोबल स्थिति को संभाला है. ANI के सूत्रों के अनुसार, भारत ने नियमों के तहत ही रूसी तेल की खरीदारी की है और किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है.  नवारो का क्‍या है दावा  ट्रंप के सहयोगी पीटर नवारो ने इस सप्‍ताह के शुरुआत में ही ब्‍लूमबर्ग को एक इंटरव्‍यू दिया, जिसमें उन्‍होंने दावा किया कि भारत रियायती दर पर तेल खरीदकर रूस की मदद कर रहा है. अगर भारत रूसी तेल को खरीदना अभी बंद कर दे तो उसे अमेरिकी टैरिफ में तुरंत 25 फीसदी की छूट मिल सकती है. नवारो ने कहा कि यूक्रेन में शांति का रास्‍ता, भारत से होकर जाता है. उद्योग के सूत्रों ने बताया कि प्रचलित दावों के विपरीत, भारतीय रिफाइनर रूसी तेल के लिए अमेरिकी डॉलर का उपयोग नहीं करते हैं. सूत्रों ने कहा कि खरीद तीसरे देशों के व्यापारियों के माध्यम से की जाती है और AED जैसी मुद्राओं में निपटाई जाती है. अमेरिकी सरकार ने कभी भी भारत से खरीद बंद करने के लिए नहीं कहा. भारत का व्यापार पूरी तरह से वैध है और G7 और यूरोपीय संघ के तय प्राइस नियमों के अंतर्गत है.  कालाबाजारी तेल पर क्‍या कहा?  भारत द्वारा तेल की कालाबाजारी की अटकलों का भी खंडन किया गया. सूत्रों ने आगे कहा, 'रूसी तेल पर ईरानी या वेनेज़ुएला के तेल की तरह प्रतिबंध नहीं है. इसे पश्चिमी देशों द्वारा मुनाफाखोरी रोकने के लिए बनाई गई तय लिमिट सिस्‍टम के तहत बेचा जाता है. अगर अमेरिका रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाना चाहता, तो उसने प्रतिबंध लगा दिया होता, उसने ऐसा नहीं किया क्योंकि उसे बाजार में रूसी तेल की जरूरत है.'  भारत रूसी तेल पर फोकस  भारत के रूसी तेल शोधन का केंद्र बनने के आरोपों को भी खारिज कर दिया है. उद्योग के सूत्रों ने कहा कि भारत दशकों से दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर रहा है. कच्‍चे तेल का शोधन और ईंधन का निर्यात, ग्‍लोबल व्‍यवस्‍था इसी तरह काम करती है. रूसी कच्‍चे तेल पर प्रतिबंध लगाने के बाद यूरोप खुद भारतीय डीजल और जेट ईंधन पर निर्भर हो गया है.  क्या रिफाइनरियां अपना मुनाफ़ा विदेश भेज रही हैं, इस पर सूत्रों ने स्पष्ट किया कि करीब 70% रिफाइंड ईंधन घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारत में ही रहता है. रिलायंस की एक रिफाइनरी इस युद्ध से बहुत पहले, 2006 से ही निर्यात पर फोकस है. घरेलू उपयोग बढ़ने के साथ ही रिफाइंड ईंधन का निर्यात वास्तव में कम हुआ है.

बुंदेलखंड में नया धार्मिक स्थल, छतरपुर में बन रहा पहला श्रीकृष्ण धाम

छतरपुर  मध्य प्रदेश के छतरपुर में बुंदेलखंड का पहला श्रीकृष्ण धाम बनकर तैयार हो गया है। 30 अगस्त को पूरी भव्यता और गरिमा के साथ बनाए जा रहे श्रीकृष्ण महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। छतरपुर विधायक और भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष ललिता यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मेला ग्राउण्ड में आयोजित मंचीय कार्यक्रम में शामिल होने के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण की शोभायात्रा में भी शामिल होगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव हवाई मार्ग से दोपहर 12 बजे छतरपुर आएगे। वे मेला ग्राउण्ड पहुंचेगे जहां मंचीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर नौगांव रोड पर 2 करोड़ 20 लाख की लागत से बनने वाले श्रीकृष्ण धाम के बारे में एलईडी के माध्यम से प्रस्तुति दी जाएगी। श्रीकृष्ण धाम में भगवान श्रीकृष्ण का विग्रह होगा तथा बचपन से लेकर रहसलीला का चित्रण किया जाएगा। श्रीकृष्ण धाम में गरीब बेटियों के विवाह के लिए बेटी विवाह वाटिका बनाई जाएगी तथा बारातियों को ठहरने के लिए कमरों का भी निर्माण होगा। यहां सुंदर और आर्कषक पार्क एवं ध्यानकेंद्र भी बनाया जाएगा।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यही पर श्रीकृष्ण धाम का भूमि-पूजन करेंगे। इस अवसर पर वृंदावन के कलाकारों द्वारा मयूर नृत्य और रहसलीला की मनोहारी प्रस्तुतियां दी जाएगी। बनारस के कलाकार शंखनाद करेंगे जबकि हरिद्धार के पंडितों द्वारा गंगा आरती की प्रस्तुति की जाएगी। समारोह में मुंबई की भजन गायिका द्वारा राधाकृष्णों के भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। मंचीय कार्यक्रम के बाद मेला ग्राउण्ड से भगवान श्रीकृष्ण की शोभायात्रा प्रारंभ होगी जो छत्रसाल चौक, महल, चौक बाजार, हटवारा होकर बस स्टैंड पहुंचेगी जहां इसका समापन हो जाएगा। शोभायात्रा में भगवान श्रीकृष्ण और राधा सहित विभिन्न अवतारों की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अनेक अतिथि शोभायात्रा में सहभागिता करेंगे। इस दौरान रास्ते में जगह-जगह मटकी फोड़ के आयोजन होगे। विधायक ललिता यादव ने सभी क्षेत्रवासियों, नगरवासियों, श्रद्धालुओं तथा भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं से श्रीकृष्ण महोत्सव में पूरी उत्साह और उमंग के साथ शामिल होने तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्वागत करने की अपील की है।