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छोटे उद्योगों और MSME को मिलेगा बढ़ावा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी बोले- रोजगार और निवेश बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता

रायपुर : लघु उद्योगों और एमएसएमई को मजबूत बनाकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का रोडमैप तैयार कर रही सरकार : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में वित्त मंत्री ने कहा—2047 तक विकसित भारत के साथ कदमताल करता विकसित छत्तीसगढ़ बनाना लक्ष्य एमएसएमई, स्टार्टअप, मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और निवेश को बढ़ावा देने पर दिया जोर रायपुर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी आज रायपुर के साइंस कॉलेज परिसर में लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में एमएसएमई, स्टार्टअप, उद्योग, रोजगार और निवेश की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक विकसित भारत का निर्माण देश का लक्ष्य और ध्येय है। इसी विकास यात्रा में छत्तीसगढ़ भी देश के अग्रणी राज्यों के साथ कदमताल करते हुए आगे बढ़े, इसके लिए राज्य सरकार दीर्घकालिक रोडमैप के साथ काम कर रही है। वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के निर्माण के लिए स्पष्ट रोडमैप के साथ कार्य प्रारंभ किया है। विकास के साथ देश की विरासत और सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त बनाने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था अब लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार है और आने वाले वर्षों में देश के विकास की गति को और तेज करने के लिए संरचनात्मक सुधारों तथा दीर्घकालिक नीतियों की आवश्यकता है। *‘छत्तीसगढ़ अंज़ोर विजन डॉक्यूमेंट’ के माध्यम से 2047 के विकास का रोडमैप* वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजना विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ के लिए ‘अंज़ोर विजन डॉक्यूमेंट’ तैयार कराया गया है। इसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि राज्य को देश के साथ कदमताल करते हुए अग्रणी राज्यों की श्रेणी में आगे बढ़ना है और राष्ट्र के विकास के महायज्ञ में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करनी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 का लक्ष्य केवल दूरगामी लक्ष्य नहीं है। इसके लिए 2030 और 2035 जैसे मध्यकालिक लक्ष्यों के साथ अल्पकालिक और वार्षिक लक्ष्य भी निर्धारित किए जा रहे हैं, ताकि दीर्घकालिक विजन को चरणबद्ध तरीके से धरातल पर उतारा जा सके। *दीर्घकालिक सोच के साथ आर्थिक सुधारों पर जोर* मंत्री चौधरी ने कहा कि देश के विकास के लिए दीर्घकालिक योजना और भविष्य को ध्यान में रखकर नीतियां बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत ने पहले भी 21वीं सदी और विजन 2020 जैसे लक्ष्य निर्धारित किए, लेकिन उनके अनुरूप दीर्घकालिक रोडमैप और आवश्यक नीतिगत सुधारों का अभाव रहा। उन्होंने कहा कि वर्ष 1991 का आर्थिक संकट देश के लिए गंभीर चुनौती था और उस दौर की आर्थिक परिस्थितियों से सबक लेते हुए भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत आधार तैयार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप अनेक क्षेत्रों में दीर्घकालिक निर्णय लिए जा रहे हैं। नवीकरणीय ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में बड़े निवेश इसी व्यापक विकास दृष्टिकोण का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की नींव तैयार करना है। *एमएसएमई और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर रोजगार सृजन के महत्वपूर्ण आधार* वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में सर्विस सेक्टर का तेजी से विस्तार हुआ है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और विशेष रूप से लेबर इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग को और विस्तार देने की आवश्यकता है। रोजगार के अधिक अवसर पैदा करने के लिए लघु उद्योगों, एमएसएमई और विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि छोटे उद्योग स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर पैदा करने के साथ-साथ सप्लाई चेन को मजबूत करते हैं। इसलिए प्रदेश में एमएसएमई, स्टार्टअप, विनिर्माण, निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल औद्योगिक वातावरण तैयार करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। चौधरी ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण की यात्रा में उद्योग जगत, उद्यमियों और लघु उद्योगों की भूमिका महत्वपूर्ण है। सरकार का प्रयास है कि नीतिगत सुधारों, निवेश के अनुकूल वातावरण और उद्यमिता को प्रोत्साहन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता को नई गति दी जाए।

जनवरी तक बदलेगा हॉकी मैदान का टर्फ, बड़े टूर्नामेंट की तैयारी

राजनांदगांव. ‘हॉकी की नर्सरी’ को आगामी जनवरी माह तक नए एस्ट्रोटर्फ की सौगात मिल जाएगी। पीडब्ल्यूडी विभाग ने दिल्ली की एजेंसी को वर्क आर्डर जारी कर दिया है, जिसके बाद युध्द स्तर पर पुराना एस्ट्रोटर्फ को हटाने की कवायद शुरू हो गई है। एस्ट्रोटर्फ तैयार होने के बाद अखिल भारतीय हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन हो सकेगा। बता दें कि 11 साल पहले 22 करोड़ की लागत से पूरे स्टेडियम का निर्माण कराया गया था, जिसमें एस्ट्रोटर्फ भी शामिल था। लेकिन टर्फ के खराब होने, सतह उखड़ने और जगह- जगह कीचड़ व काले धब्बे जमने के कारण न केवल खिलाड़ियों का खेलने एक तरह से बंद हो गया था, बल्कि 80 सालों से चली आ रही अखिल भारतीय महंत राजा सर्वेश्वरदास स्मृति हॉकी प्रतियोगिता के आयोजन की परंपरा खत्म हो गई थी। पिछले वर्ष मिली स्वीकृति के बाद अब करीब 5.64 करोड़ रुपए की लागत से नया एस्ट्रोटर्फ बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है। शनिवार से पुराने टर्फ को उखाड़ने का काम मजदूरों ने शुरू कर दिया है। एक सप्ताह में इसे पूरी तरह से उखाड़ दिया जाएगा। इसके बाद नया टर्फ लगाने का काम शुरू होगा। एस्ट्रोटर्फ बदलने के बाद वहां अन्य संसाधनों की भी जरूरत है। बहरहाल, टर्फ को धोने वाली स्प्रंकलर खराब हो चुका है, उसे सुधारना जरूरी होगा, जिसके बाद ही मैच हो सकेंगे। इसी तरह फ्लड लाइट की लंबे समय से मांग की जा रही है। वहीं पवेलियन के दोनों साइड धूप से बचने कुर्सी के उपर शेड लगाने की भी मांग की गई है।

VB-G RAM G: जल संरक्षण से सड़क और रोजगार तक 375 काम होंगे मंजूर, विजय शर्मा ने बताया पूरा प्लान

रायपुर : वीबी-जीरामजी से अब होंगे 375 प्रकार के अनुमेय कार्य – उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा जल संरक्षण से लेकर सड़क, स्कूल, पंचायत भवन, आजीविका, कृषि, पशुपालन और आपदा प्रबंधन के कार्य शामिल छत्तीसगढ़ के बजट में 4 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को मिलेगा विस्तार रायपुर   छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास को रोजगार, आजीविका और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़ने की दिशा में विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। मिशन के अंतर्गत अनुमेय कार्यों की संख्या अब 318 से बढ़ाकर 375 कर दी गई है।         उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने अनुमेय कार्यों की संख्या में वृद्धि पर हर्ष जताते हुए कहा कि वीबी-जीरामजी के अंतर्गत अनुमेय कार्यों की संख्या 318 से बढ़कर 375 होने से विकास कार्यों को गति प्राप्त होगी और ग्रामीण विकास सुदृढ होगा। छत्तीसगढ़ शासन ने मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में 4 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान का लाभ केवल मजदूरी भुगतान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके माध्यम से गांवों में ऐसी परिसंपत्तियों का निर्माण होगा, जो आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करेंगी।         शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के लिए वीबी-जीरामजी के तहत 3,354.85 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन प्रदान किया गया है। मिशन के अंतर्गत अकुशल श्रमिकों की मजदूरी दर 261 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन की गई है। रोजगार के दिनों में वृद्धि, मजदूरी दर में सुधार और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण का यह समन्वय ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा तथा गांवों के समग्र विकास को नई गति देगा।        उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत/2047 की परिकल्पना में गांवों को विकास की केंद्रीय इकाई के रूप में महत्व दिया है। वीबी-जीरामजी के माध्यम से रोजगार, आजीविका, जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अधोसंरचना को एक साथ जोड़ने का प्रयास इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ग्रामीण विकास को नई दिशा मिली है। क्यूआर कोड से मिलेगी अनुमेय कार्यों की जानकारी        उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि वीबी-जीरामजी के अंतर्गत 375 अनुमेय कार्यों को 4 मुख्य श्रेणियों और 30 उप-श्रेणियों में व्यवस्थित किया गया है। इनमें 68 प्रकार के व्यक्तिगत कार्य, 99 प्रकार के मरम्मत एवं रखरखाव संबंधी कार्य तथा समूह और सामुदायिक उपयोगिता से जुड़े कार्य शामिल हैं। अनुमेय कार्यों की जानकारी प्रत्येक ग्रामीण तक आसानी से पहुंचे, इसके लिए राज्य में क्यूआर कोड भी जारी किया गया है, जिसके माध्यम से ग्रामीण अनुमेय कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 2027 तक हर बालिका के लिए स्कूलों में शौचालय का लक्ष्य       वीबी-जीरामजी की कार्य-सूची में शासकीय विद्यालयों की अधोसंरचना को विशेष महत्व दिया गया है। विद्यालयों में शौचालयों की मरम्मत, अतिरिक्त कक्षों का निर्माण, प्रयोगशालाएं, रसोई शेड, परिसर की दीवार और खेल मैदान जैसे कार्य इसके अंतर्गत किए जा सकेंगे।       इसी दिशा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा ‘मेरी बेटी-मेरा अभिमान’ अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 26 जनवरी 2027 तक ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में 6,671 बालिका शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। यह पहल बालिकाओं की गरिमा, स्वच्छता और विद्यालयों में बेहतर सुविधाजनक वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हर गांव में मुक्तिधाम और प्रतीक्षालय की दिशा में आगे बढ़ रहा राज्य       ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सामुदायिक अधोसंरचना के विस्तार के लिए राज्य सरकार द्वारा हर गांव में मुक्तिधाम निर्माण का संकल्प लिया गया है। 6,524 गांवों में प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। वीबी-जीरामजी में श्मशान घाट तथा अन्य सामुदायिक अधोसंरचना से संबंधित निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को भी अनुमेय बनाया गया है। इसके अतिरिक्त जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए राज्य के 10 हजार से अधिक बंद अथवा डिफंक्ट बोरवेलों में सैंड फिल्टर एवं रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। जल सुरक्षा से लेकर भूजल पुनर्भरण तक       अनुमेय कार्यों की पहली मुख्य श्रेणी में जल संरक्षण और जल सुरक्षा से जुड़े कार्य शामिल हैं। इनमें नहर, बाढ़ नियंत्रण चौनल, चेकडैम, गली प्लग, भूमिगत डाइक, तालाबों का पुनर्जीवन, परकोलेशन टैंक, रिचार्ज पिट और रिचार्ज शाफ्ट, इंजेक्शन वेल, सिंचाई कुएं, माइक्रो एवं ड्रिप सिंचाई चौनल, वाटरशेड भूमि का पुनरुद्धार, वनीकरण एवं पौधरोपण, मृदा-नमी संरक्षण तथा रूफटॉप वर्षाजल संचयन जैसे कार्य शामिल हैं।       इन कार्यों से गांवों में जल संचयन क्षमता बढ़ाने, भूजल पुनर्भरण, सिंचाई सुविधा के विस्तार और कृषि भूमि की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों स्तरों पर जल संरक्षण से जुड़ी संरचनाओं के निर्माण एवं रखरखाव को भी इसमें स्थान दिया गया है। सड़क, स्कूल, पंचायत भवन और स्वच्छता सहित मजबूत होगी ग्रामीण अधोसंरचना       कार्यों की दूसरी मुख्य श्रेणी में ग्रामीण अधोसंरचना से संबंधित है। इसमें ग्रामीण सड़कें, पुलिया एवं क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाएं, ग्राम संपर्क सुविधाएं, ग्राम पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, ग्रामीण पुस्तकालय, सार्वजनिक भवन, स्कूल अधोसंरचना, रसोई शेड, अतिरिक्त कक्ष, प्रयोगशालाएं, स्कूल परिसर की दीवारें और खेल मैदान जैसे कार्य शामिल हैं।       इसके साथ श्मशान घाट, कब्रिस्तान, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता परिसर, अपशिष्ट पृथक्करण एवं संग्रहण केंद्र, सौर प्रकाश व्यवस्था, बायोगैस प्लांट, पार्किंग एवं परिवहन शेड सहित अन्य सामुदायिक सुविधाओं के निर्माण और विकास को भी अनुमेय कार्यों में शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत अनुमेय ग्रामीण आवास कार्य तथा जल जीवन मिशन के तहत निर्मित जलापूर्ति परिसंपत्तियों की मरम्मत एवं रखरखाव भी इस श्रेणी में शामिल हैं। आजीविका के साथ स्थानीय स्तर पर आय के अवसर       कार्यों की तीसरी मुख्य श्रेणी आजीविका संबंधी अधोसंरचना की है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षण-सह-कौशल विकास केंद्र, स्वयं सहायता समूहों के लिए वर्कशेड, ग्रामीण हाट एवं साप्ताहिक बाजार, खाद्यान्न एवं कृषि उपज भंडारण, कोल्ड स्टोरेज, कृषि मूल्य श्रृंखला से जुड़ी संरचनाएं, स्वयं सहायता समूह एवं फेडरेशन स्तर … Read more

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 की तैयारियों की मुख्यमंत्री योगी ने की समीक्षा, अधिकारियों को समय से सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश

यूपी के हुनर और उत्पादों को दुनिया का बाजार देगा ट्रेड शो: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 की तैयारियों की मुख्यमंत्री योगी ने की समीक्षा, अधिकारियों को समय से सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश   एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को मिलेगी गति, जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, ऑस्ट्रिया और बेलारूस होंगे भागीदार देश   72 देशों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से आएंगे करीब 600 अंतरराष्ट्रीय खरीदार, छह देशों के लिए होंगे प्रीमियम पवेलियन और बी2बी बैठकें   20 से अधिक नॉलेज सेशन में उद्योग और निवेश पर होगा मंथन, संबंधित विभागों के मंत्री और प्रमुख सचिव भी होंगे शामिल   ओडीओपी से डिफेंस-एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी, फार्मा और टेक्सटाइल तक दिखेगी यूपी की औद्योगिक ताकत   युवाओं को जोड़ने के लिए रील चैलेंज, यंग एंटरप्रेन्योर प्रतियोगिता और विशेष क्विज, छात्र संभालेंगे वॉलंटियर की जिम्मेदारी   500 से अधिक ईवी शटल बसें चलेंगी, सीसीटीवी से होगी निगरानी, आयोजन स्थल रहेगा स्वच्छ, व्यवस्थित और प्लास्टिक मुक्त    ग्रेटर नोएडा  उत्तर प्रदेश के हुनर, स्थानीय उत्पादों और औद्योगिक क्षमता को यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के जरिए वैश्विक मंच मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में ट्रेड शो की तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी करने के निर्देश दिए।   ट्रेड शो के चौथे संस्करण में जापान, वियतनाम, रूस, सिंगापुर, ऑस्ट्रिया और बेलारूस छह भागीदार देश होंगे। 72 देशों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से करीब 600 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के पहुंचने की संभावना है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यह आयोजन प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को गति देने के साथ वोकल फॉर लोकल और मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाएगा। युवाओं को यहां प्रत्यक्ष अनुभव और उद्यमिता के अवसर भी मिलेंगे।   मुख्यमंत्री योगी ने आयोजन की सफलता, सुरक्षा, विदेशी मेहमानों एवं आगंतुकों की सुविधा और विभागों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग निर्धारित समयसीमा में तैयारियां पूरी करें। किसी भी स्तर पर लापरवाही, अव्यवस्था अथवा कमी नहीं रहनी चाहिए। सुरक्षा, स्वच्छता, यातायात, आवास और आगंतुक सुविधाओं के लिए संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत जिम्मेदारी के साथ काम करें।   छह देशों के लिए प्रीमियम पवेलियन, होंगी बी2बी बैठकें छह भागीदार देशों के प्रतिनिधिमंडल समर्पित प्रीमियम फोयर पवेलियन, द्विपक्षीय व्यावसायिक सत्रों और संरचित बी2बी बैठकों के जरिए ट्रेड शो में भाग लेंगे। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ और विदेश स्थित भारतीय मिशनों के समन्वित प्रयासों से करीब 600 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के आने की संभावना है।   मुख्यमंत्री योगी ने विदेशी खरीदारों और प्रदर्शकों के लिए उचित आवास तथा भागीदार देशों के उच्चायुक्तों के लिए लायजन ऑफिसर नियुक्त करने को कहा। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय और तकनीकी विश्वविद्यालयों के छात्रों को आगंतुकों एवं प्रतिनिधियों की सहायता के लिए वॉलंटियर बनाया जाएगा। सीएम फेलो, उद्यमी मित्र और अन्य क्षेत्रीय संस्थानों के युवा स्वयंसेवक भी खरीदारों, प्रदर्शकों और मेहमानों की सहायता के लिए तैनात रहेंगे।   मुख्यमंत्री योगी ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ जोड़ने के निर्देश दिए। मंत्री, उद्योग जगत और व्यापारिक प्रतिनिधियों के बीच सार्थक संवाद के लिए अतिरिक्त बैठकें भी आयोजित की जाएंगी।   20 से अधिक नॉलेज सेशन, मंत्री और प्रमुख सचिव भी जुड़ेंगे ट्रेड शो में 20 से अधिक उच्च प्रभाव वाले नॉलेज सेशन होंगे। मुख्यमंत्री योगी ने प्रसिद्ध वक्ताओं के साथ इन्हें संक्षिप्त और प्रभावशाली बनाने के निर्देश दिए। टेक्निकल सेशन में संबंधित विभागों के मंत्रियों और प्रमुख सचिवों को आमंत्रित किया जाएगा, जिससे महत्वपूर्ण विषयों पर उच्चस्तरीय विचार-विमर्श और विभागीय समन्वय हो सके। नॉलेज सेशन में आम लोगों की भागीदारी भी प्रोत्साहित की जाएगी।   अवध, ब्रज और बुंदेलखंड की भी दिखेगी झलक मुख्यमंत्री योगी ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के साथ अवध, बुंदेलखंड और ब्रज क्षेत्रों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा, जिससे ट्रेड शो प्रदेश की सांस्कृतिक और आर्थिक विविधता का प्रतिनिधित्व कर सके। इसके लिए 25 सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के स्लॉट तैयार किए गए हैं। इनमें कथक नृत्य, पखावज और सितार वादन, भोजपुरी एवं आल्हा लोक गायन, राई और थारू जनजातीय नृत्य के साथ स्टार म्यूजिकल नाइट्स शामिल हैं।   ओडीओपी से डिफेंस-एयरोस्पेस तक दिखेगी ताकत इस वर्ष ट्रेड शो की केंद्रीय थीम ‘अद्वितीय सोर्सिंग का अद्भुत मंच’ है। इसमें वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट, वन डिस्ट्रिक्ट वन क्राफ्ट, सीएम युवा, एमएसएमई, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी, रक्षा एवं एयरोस्पेस, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, ऑटोमोबाइल एवं इलेक्ट्रिक वाहन, फार्मा एवं हेल्थकेयर, टेक्सटाइल एवं हथकरघा, टाउन ऑफ एक्सीलेंस एक्सपोर्टर्स, वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट (क्रेडाई) तथा पर्यटन एवं संस्कृति जैसे प्रमुख क्षेत्रों का प्रदर्शन होगा।   भूतल और द्वितीय तल के हॉल में 36,500 वर्ग मीटर प्रदर्शनी क्षेत्र पहले ही बुक हो चुका है। औद्योगिक विकास प्राधिकरणों और कॉरपोरेट संस्थाओं के लिए पूरा ले-आउट भी अंतिम रूप ले चुका है।   23 सितंबर तक तैयार होंगे सरकारी विभागों के स्टॉल मुख्यमंत्री योगी ने सभी सरकारी विभागों को 23 सितंबर तक स्टॉल लगाने का काम पूरा करने को कहा। प्रमुख स्थानों पर होर्डिंग, पोस्टर और दिशा-सूचक बोर्ड लगाए जाएंगे। नेटवर्क कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए अतिरिक्त टावर लगाने तथा विश्वसनीय इंटरनेट और वाई-फाई सेवा सुनिश्चित करने के लिए टेलीकॉम कंपनियों से संपर्क करने के निर्देश दिए गए हैं।   आयोजन स्थल स्वच्छ, व्यवस्थित और प्लास्टिक मुक्त रहेगा। प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित होंगे। यातायात, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छता, सुरक्षा, भोजन और पेयजल की व्यापक व्यवस्था होगी। तीनों संबंधित प्राधिकरण स्वच्छता, सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सुचारू आवागमन के लिए आपसी समन्वय से काम करेंगे। प्रमुख प्रवेश और निकास बिंदुओं पर सुरक्षा बल की तैनाती, फ्रिस्किंग, भीड़ प्रबंधन, निगरानी और निर्धारित पार्किंग की व्यवस्था रहेगी।   मुख्यमंत्री योगी ने भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। रील या सोशल मीडिया कंटेंट बनाते समय आगंतुकों को मर्यादा बनाए रखने और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।   500 से अधिक ईवी शटल बसों से आयोजन स्थल पहुंचेंगे आगंतुक पार्किंग क्षेत्रों और प्रदर्शनी स्थल के बीच पर्यावरण अनुकूल और परेशानी मुक्त परिवहन के लिए 500 से अधिक ईवी शटल बसें चलाई जाएंगी। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों और वीवीआईपी की सहायता के लिए नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर समर्पित यूपीआईटीएस सुविधा काउंटर संचालित किया जा … Read more

भारत ने जापान को बुरी तरह हराया, 49-24 की शानदार जीत के साथ Asian Games में कबड्डी अभियान शुरू

आइची-नागोया    भारत ने सोमवार को एशियाई खेल 2026 में अपने पुरुष कबड्डी अभियान की शानदार शुरुआत की और अपने पहले मैच में जापान को 49-24 से हराया। जापान ने बोनस पॉइंट के साथ स्कोरिंग की शुरुआत की, लेकिन भारत ने तुरंत जवाब दिया और अयान लोचब ने टच पॉइंट से स्कोर बराबर कर दिया। जल्द ही भारत ने मुकाबले पर पूरी तरह से पकड़ बना ली। आशु ने शानदार तीन-पॉइंट की रेड की, जिसके बाद भारत के डिफेंस ने जापानी रेडर को सफलतापूर्वक टैकल किया। इसके बाद एक और रेड पॉइंट मिला, जिससे भारत ने पहला 'ऑल-आउट' किया और 11-2 की बढ़त बना ली।   भारतीय टीम का दबदबा जारी रहा और उन्होंने दूसरा 'ऑल-आउट' करके अपनी बढ़त को 18-2 तक पहुंचा दिया। भारत हाफ-टाइम तक 31-9 की मजबूत बढ़त के साथ आगे था; आशु और देवांक ने रेडिंग में अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि सुनील कुमार और राहुल ने डिफेंस में अहम योगदान दिया। ब्रेक के बाद भी भारत का दबदबा कायम रहा। पवन सहरावत, अर्जुन देशवाल और असलम इनामदार भी खेल में शामिल हुए और टीम की अटैकिंग ताकत को और बढ़ाया। जापान ने दूसरे हाफ में बेहतर टक्कर दी और 20 से ज़्यादा पॉइंट हासिल किए, लेकिन भारत पूरे समय मुकाबले पर हावी रहा। आखिरकार भारत ने 49-24 से बड़ी जीत हासिल की और एशियाई खेलों में अपने अभियान की जोरदार शुरुआत की।   इस बीच, एशियाई खेल 2026 में भारत के लिए दिन शानदार रहा। भारत ने शूटिंग और मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में और मेडल जीते, साथ ही एथलीटों ने तैराकी में फाइनल के लिए क्वालीफाई किया और बॉक्सिंग, सॉफ्ट टेनिस और टेबल टेनिस में जीत हासिल की। शूटिंग में, पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल व्यक्तिगत फाइनल में हिमांशु ने सिल्वर और रुद्राक्ष ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। इससे पहले, रुद्राक्ष और हिमांशु क्रमशः तीसरे और सातवें स्थान पर रहकर फाइनल के लिए क्वालीफाई कर चुके थे, जबकि पार्थ माने 11वें स्थान पर रहे। भारतीय तिकड़ी ने टीम इवेंट में भी सिल्वर मेडल जीता था। मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में, सुचिका तरियाल ने महिलाओं के ट्रेडिशनल 60kg सेमीफ़ाइनल में सिंगापुर की टेओ हुई हून से हारने के बाद ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। बॉक्सिंग में, सुमित ने पुरुषों के 70kg राउंड ऑफ़ 32 मुकाबले में थाईलैंड के बुंजोंग सिंसिरी को हराकर कॉम्पिटिशन में आगे जगह बनाई।   सॉफ्ट टेनिस में, आध्या तिवारी और जय मीना ने कंबोडिया और मंगोलिया के खिलाफ़ अपने मिक्स्ड डबल्स ग्रुप B मैचों में जीत हासिल की। ​​हालांकि, उन्हें दक्षिण कोरिया के किम येओन-ह्वा और जैक्यू पार्क से हार का सामना करना पड़ा और फिर राउंड ऑफ़ 16 में फिलीपींस की क्रिस्टी सानोसा और शेरविन नुगुइट से भी हार मिली। स्विमिंग में, श्रीहरि नटराज पुरुषों के 50m बैकस्ट्रोक फ़ाइनल में पहुंचे, जबकि ऋषभ दास को रिज़र्व के तौर पर चुना गया। मणि आकाश और गीतेश शाह पुरुषों के 50m फ़्रीस्टाइल फ़ाइनल में जगह नहीं बना पाए, जबकि धनुष सुरेश पुरुषों के 100m ब्रेस्टस्ट्रोक फ़ाइनल के लिए क्वालिफ़ाई करने में नाकाम रहे। वुशु में, न्येमन वांगसु महिलाओं के चांगक्वान फ़ाइनल में 15वें स्थान पर रहीं। टेबल टेनिस में, भारत ने महिलाओं की टीम के ग्रुप F मैच में पाकिस्तान को 3-0 से हराया। हालांकि, सेपकटकरा में भारत को झटका लगा और पुरुषों की टीम के रेगु ग्रुप B मैच में जापान से हार का सामना करना पड़ा। भारत के खाते में चार सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज एशियन गेम्स 2026 में भारत के पदकवीर 1. इलावेनिल वलारिवन, सोनम मस्कर और विदर्सा विनोद- विमेंस 10 मीटर एयर राइफल टीम इवेंट (निशानेबाजी): सिल्वर 2. इलावेनिल वलारिवन- विमेंस 10 मीटर एयर राइफल (निशानेबाजी): सिल्वर 3. रुद्रांक्ष पाटिल, हिमांशु ढिल्लों और पार्थ राकेश माने- मेन्स 10 मीटर एयर राइफल टीम इवेंट (निशानेबाजी): सिल्वर 4. सुचिका तरियाल- विमेंस ट्रेडिशनल 60 किग्रा (MMA)- ब्रॉन्ज 5. रुद्रांक्ष पाटिल- मेन्स 10 मीटर एयर राइफल (निशानेबाजी): ब्रॉन्ज 6. हिमांशु ढिल्लों- मेन्स 10 मीटर एयर राइफल (निशानेबाजी): सिल्वर  

युवाओं के बीच CM योगी, सुभारती विश्वविद्यालय में होगा सीधा संवाद; नितिन नबीन-पंकज चौधरी भी रहेंगे मौजूद

युवाओं के बीच योगी, क्रांतिधरा से गूंजेगा संवाद – सुभारती विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे युवाओं से सीधा संवाद, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी रहेंगे मौजूद – युवा सम्मेलन के बाद पश्चिमी क्षेत्र के शक्ति केंद्र संयोजकों का सम्मेलन, संगठन की जमीनी तैयारियों पर भी मंथन मेरठ  सोमवार को क्रांतिधरा मेरठ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के युवा संवाद की साक्षी बनेगी। सुभारती विश्वविद्यालय के मांगल्य प्रेक्षागृह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ युवाओं के बीच पहुंचकर उनसे सीधे संवाद करेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री का करीब पांच घंटे का मेरठ प्रवास प्रस्तावित है। युवा सम्मेलन के बाद इसी परिसर में पश्चिमी क्षेत्र के शक्ति केंद्र संयोजकों का सम्मेलन होगा। युवा संवाद को लेकर सुभारती विश्वविद्यालय परिसर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कार्यक्रम में युवाओं के साथ संवाद के जरिए उनके सवालों और प्रदेश में शिक्षा, रोजगार, कौशल, उद्यमिता व भविष्य के अवसरों से जुड़े विषयों पर चर्चा की संभावना है। मुख्यमंत्री के संबोधन का विस्तृत एजेंडा हालांकि अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, इसलिए उनके संबोधन के विषयों को लेकर अंतिम दावा नहीं किया जा सकता। नितिन नबीन भी युवाओं से संवाद करेंगे। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार युवा सम्मेलन के बाद शक्ति केंद्र सम्मेलन प्रस्तावित है। युवा शक्ति के बीच मुख्यमंत्री की मौजूदगी मुख्यमंत्री के युवा संवाद को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में विशेष तैयारियां की गई हैं। युवाओं के बीच मुख्यमंत्री की मौजूदगी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेगी। युवा सम्मेलन के बाद भाजपा के पश्चिमी क्षेत्र की संगठनात्मक गतिविधियां भी इसी परिसर में आगे बढ़ेंगी। इसके लिए अलग जर्मन हैंगर तैयार किया गया है, जहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शक्ति केंद्र संयोजकों और मंडल अध्यक्षों की भागीदारी होगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मेरठ प्रवास के दौरान युवा संवाद के साथ संगठनात्मक बैठकों का भी कार्यक्रम है। रिपोर्टों के अनुसार पश्चिमी क्षेत्र के करीब पांच हजार शक्ति केंद्र संयोजकों से संवाद प्रस्तावित है। बूथ स्तर की सक्रियता, संगठन की तैयारियों और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कार्ययोजना पर चर्चा होगी। पांच घंटे में युवा संवाद से संगठन तक मुख्यमंत्री का मेरठ प्रवास करीब पांच घंटे का प्रस्तावित है। वह सुबह करीब 11 बजे सुभारती विश्वविद्यालय पहुंचेंगे और युवा सम्मेलन तथा शक्ति केंद्र सम्मेलन में शामिल होंगे। इसके बाद शाम करीब चार बजे उनके लौटने का कार्यक्रम बताया गया है। वहीं नितिन नबीन का मेरठ प्रवास करीब 24 घंटे का रहेगा। युवा संवाद और शक्ति केंद्र सम्मेलन के बाद वह पश्चिमी क्षेत्र के सांसदों, विधायकों, पूर्व जनप्रतिनिधियों और संगठन पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। होटल ब्रावुरा में भी संगठनात्मक बैठकें प्रस्तावित हैं। अगले दिन उनका सहारनपुर जाने का कार्यक्रम है। इस तरह सोमवार को मेरठ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम युवा संवाद के साथ शुरू होकर संगठनात्मक संवाद तक पहुंचेगा। सुभारती विश्वविद्यालय का परिसर दिनभर युवा शक्ति और संगठनात्मक गतिविधियों का केंद्र बना रहेगा।

टैरिफ से रिश्तों की नरमी तक, ट्रंप के चीन को लेकर बदले रुख की क्या है वजह?

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कभी चीन को अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बताते थे। उनका कहना था कि बीजिंग ने अमेरिकी कारखानों को कमजोर किया और मध्यम वर्ग को नुकसान पहुंचाया। इसी सख्त रुख के साथ वह करीब एक दशक पहले व्हाइट हाउस पहुंचे थे। लेकिन अब ट्रंप का चीन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रति रवैया काफी नरम नजर आ रहा है। जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिका की यात्रा पर पहुंचेंगे और ट्रंप उनके सम्मान में राजकीय डिनर देंगे। ट्रंप ने हाल में जिनपिंग को ‘बड़ा सज्जन’ बताया और कहा कि दोनों के रिश्ते बहुत अच्छे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से जुड़े कई मुद्दों पर पहले जैसा कड़ा रुख नहीं अपनाया है। ईरान को चीन की ओर से कथित तौर पर सैटेलाइट तस्वीरें दिए जाने की खबरों पर भी उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग ने सही बर्ताव किया है। 2020 में ट्रंप ने चीन पर अमेरिकी मतदाता रिकॉर्ड तक पहुंच बनाने का आरोप लगाया था, लेकिन अब उन्होंने जवाबी कार्रवाई को लेकर भी सावधानी दिखाई है। इस बीच चीन विनिर्माण के साथ AI और इलेक्ट्रिक गाड़ियों जैसी नई तकनीकों में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। इससे अमेरिका समेत कई औद्योगिक देशों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। चीन पर भारी टैरिफ का क्या निकला नतीजा डोनाल्ड ट्रंप ने चीन का रुख बदलने के लिए भारी टैरिफ और तकनीकी पाबंदियों का सहारा लिया था, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार इससे बेहतर नतीजे नहीं मिले। चीन ने इलेक्ट्रॉनिक सामान में इस्तेमाल होने वाले दुर्लभ खनिजों पर अपनी मजबूत पकड़ का इस्तेमाल करते हुए दबाव बनाया और दूसरे बाजारों में भी सामान की बिक्री बढ़ाई। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के सीनियर सलाहकार माइकल कोवरिग के मुताबिक, ट्रंप का शुरुआती तरीका सफल नहीं हुआ और दबाव की लड़ाई में जिनपिंग को बढ़त मिली। ट्रंप के कदमों से अमेरिका के पुराने सहयोगियों के साथ रिश्तों पर असर पड़ा है। AI पावर और सैन्य क्षमता बढ़ा रहा बीजिंग इसके बावजूद, दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। चीन AI और सैन्य क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है, जबकि ट्रंप प्रशासन दुर्लभ खनिजों के लिए साझेदारी और अमेरिका में एआई के विकास पर जोर दे रहा है। चीन पर अमेरिकी AI मॉडलों से अपनी कंपनियों को ट्रेनिंग देने के आरोप भी हैं। अमेरिकी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने कहा कि चीन को केवल एआई के मामले में खराब कहना सही नहीं है। इसे बड़े पैमाने पर देखने की जरूरत है। अमेरिका-चीन के रिश्ते में तनाव राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल (2017-21) में भी अमेरिका-चीन रिश्तों में बड़ा तनाव देखने को मिला था। 2018 में ट्रंप प्रशासन ने चीनी सामान पर भारी टैरिफ लगाकर व्यापार युद्ध शुरू किया, जिसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी सामानों पर टैरिफ बढ़ाया। कोरोना महामारी, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, हांगकांग और शिनजियांग जैसे मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच मतभेद बढ़े। जो बाइडेन के कार्यकाल (2021-25) में रिश्तों में सुधार की सीमित कोशिशों के बावजूद रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जारी रही। बाइडेन ने ट्रंप के ज्यादातर टैरिफ बरकरार रखे और सेमीकंडक्टर समेत कई तकनीकों पर चीन के लिए निर्यात प्रतिबंध बढ़ाए। यानी दोनों कार्यकालों में चीन को लेकर अमेरिकी नीति सख्त रही।

होर्मुज संकट ने बिगाड़ा ट्रंप का तेल गेम, अमेरिका में डीजल 6.49 डॉलर प्रति गैलन पहुंचा

नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बीते दिनों एक बयान देते हुए कहा था कि अमेरिका वेनेजुएला की तरह ईरान में बने रहने और तेल का खजाना अपने पास रखने का फैसला कर सकता है. लेकिन ट्रंप का ये तेल का खेल उनके लिए बड़ी टेंशन का सबब बनता जा रहा है. दरअसल, ईरान युद्ध से बिगड़े हालातों के बीच अमेरिका में डीजल की कीमतें अब नए रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई हैं. बीते हफ्तेभर में ही US Diesel Price में बड़ा उछाल आया है, जो देश में महंगाई का जोखिम बढ़ा रहा है. ईरान-होर्मुज ने बिगाड़ा ट्रंप का खेल ईरान से जंग और होर्मुज संकट ने मिलकर अमेरिका की ही तेल निकाल दिया है. अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के अनुसार, 19 सितंबर को डीजल की राष्ट्रीय औसत कीमत 6.4866 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई, जो पिछले रिकॉर्ड को भी पार कर गई. एक सप्ताह पहले यह कीमत 6.16 डॉलर थी. इसका मतलब है कि सिर्फ एक सप्ताह में डीजल की कीमत में लगभग 33 सेंट या 5.3% की बढ़ोतरी (US Diesel Price Hike) हुई है. सालभर में 75% महंगा हुआ डीजल AAA के आंकड़ों पर नजर डालें, तो पता चलता है कि डीजल के दाम में हालिया बढ़ोतरी के बाद अब Diesel Price एक साल पहले की तुलना में लगभग 75% अधिक महंगा हो चुका है, जब राष्ट्रीय औसत कीमत 3.71 डॉलर थी. अमेरिका और इजरायल ने पहली बार ईरान पर 28 फरवरी को हमला किया था और इसके बाद जैसे-जैसे युद्ध बढ़ा डीजल का दाम ट्रंप की टेंशन भी बढ़ाता चला गया. AAA का डेटा देखें, तो US-Iran War शुरू होने से ऐन पहले से पहले यानी 27 फरवरी को डीजल 3.75 डॉलर प्रति गैलन था, जबकि 19 सितंबर के रिकॉर्ड 6.49 डॉलर पर पहुंच गया. इसका मतलब है कि अमेरिका में डीजल का एक आम ग्राहक अब होर्मुज संकट से ठीक पहले की तुलना में प्रति गैलन लगभग 73% अधिक पेमेंट करने को मजबूर है. कैलिफोर्निया अमेरिका का सबसे महंगा फ्यूल मार्केट बन गया है. एएए के मुताबिक, राज्य में डीजल की औसत कीमत 8.4161 डॉलर प्रति गैलन है, डीजल की कीमत राष्ट्रीय औसत से लगभग 2 डॉलर प्रति गैलन ज्यादा है. Hormuz बना ट्रंप की टेंशन अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने से अमेरिकी उपभोक्ताओं, ट्रक चालकों, किसानों और व्यवसायों पर दबाव बढ़ा है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लंबे समय से जारी संकट ने ग्लोबल फ्यूल सप्लाई को प्रभावित किया है और अमेरिका पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिला है. Hormuz ही ट्रंप के टेंशन की सबसे बड़ी वजह बना हुई, जो 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान संघर्ष के शुरू होने के बाद से बुरी तरह से बाधित है. दुनिया की कुल तेल जरूरत के 20 फीसदी को पूरा करने के लिए जिम्मेदार इस समुद्री तेल रूट को ईरान ने बंद किया हुआ है. इससे Global Oil-Gas Supply का पांचवां हिस्सा ठप है. रॉयटर्स ने मार्च की रिपोर्ट पर गौर करें, तो में युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट के खाड़ी क्षेत्र के 8 प्रमुख उत्पादक देशों से तेल निर्यात फरवरी के स्तर से कम से कम 60% गिर गया था. तो दूसरी ओर रूसी रिफाइनरियों पर हमलों और मध्य पूर्वी देशों के रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में आई रुकावटों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है. दूसरों को सप्लाई कर खुद परेशान ग्लोबल ऑयल क्राइसिस के बीच अमेरिका उन बाजारों के लिए रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा, जो कमी का सामना कर रहे हैं, लेकिन द वॉल स्ट्रीट जर्नल की मानें, तो इससे खुद अमेरिका के घरेलू डीजल भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है. अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन का कहना है कि डीजल की कीमतें अब सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि क्रूड की लागत, रिफाइनिंग मार्जिन, डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट, टैक्स और डीजल के 'क्रैक स्प्रेड' यानी कच्चे तेल की इनपुट लागत और थोक डीजल कीमतों के बीच के अंतर को दर्शाती हैं. ग्लोबली डिस्टिलेट की सीमित आपूर्ति और Crude Price Hike ने तेल की लागत और रिफाइनिंग मार्जिन दोनों को बढ़ाया है. महंगाई का बढ़ा खतरा डीजल का महत्व सिर्फ ईंधन टैंक तक ही सीमित नहीं है. यह भारी ट्रकों, ट्रेनों, कृषि मशीनों और मछली पकड़ने वाली नावों समेत अमेरिकी माल ढुलाई नेटवर्क के एक बड़े हिस्से को प्रभावित करता है. यही कारण है कि डीजल संकट अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालता है, इसकी कीमतों में बढ़ोतरी माल ढुलाई दरों, कृषि लागत, खाद्य पदार्थों की कीमतें, औद्योगिक लागत और आखिर में उपभोक्ता पर महंगाई का बोझ बढ़ाती हैं.

PNS जुल्फिकार हाईजैक प्लान: अलकायदा के साथ मिलकर अमेरिकी-भारतीय जहाजों पर हमले की थी तैयारी

इस्लामाबाद पाकिस्तानी नौसेना युद्धकाल में ही नहीं, शांतिकाल में भी पूरी दुनिया के लिए खतरा है। 2014 में तो पाकिस्तानी नौसेना के बागी अफसरों ने अल कायदा आतंकवादियों के साथ मिलकर परमाणु हथियारों से लैस एक युद्धपोत को अगवा करने की कोशिश की थी। गनीमत रही कि उनकी यह कोशिश नाकाम हो गई और बागी अफसर पकड़े गए। नहीं तो उनकी योजना युद्धपोत को अगवा कर उसमें तैनात मिसाइलों से अरब सागर में तैनात भारतीय और अमेरिकी युद्धपोतों पर हमला करने की थी। अगर ऐसा होता तो यह किसी बड़े युद्ध की शुरुआत हो सकती थी। पीएनएस जुल्फिकार को अगवा करने की कहानी पाकिस्तानी युद्धपोत को अगवा करने की कोशिश 2014 में की गई थी। इस घटना का विस्तार से वर्णन स्टीव कोल की 2018 की बेस्टसेलर पुस्तक 'डायरेक्टोरेट एस' में किया गया है। इसकी योजना पाकिस्तानी नौसेना के दो कट्टरपंथी अधिकारी लेफ्टिनेंट जीशान रफीक और ओवैस जखरानी ने बनाई थी, हालांकि इसमें दर्जनों दूसरे अधिकारी और नौसैनिक शामिल थे। इन दोनों अधिकारियों का संबंध अल कायदा से था। उस समय पीएनएस जुल्फिकार पाकिस्तानी नौसेना का सबसे आधुनिक युद्धपोत था, जो चीन में निर्मित 3,144 टन वजनी चार टाइप एफ-22पी श्रेणी के फ्रिगेटों में से पहला था। पीएनएस जुल्फिकार से अमेरिकी युद्धपोत पर हमले की थी प्लानिंग इन दोनों की योजना चालक दल और कप्तान को बंधक बनाकर युद्धपोत का अपहरण करना ही नहीं था। बल्कि, इन दोनों ने युद्धपोत पर तैनात मिसाइलों से हमला कर अमेरिकी नौसेना के जहाज को डुबानी की भी प्लानिंग की थी। इनके निशाने पर अमेरिकी युद्धपोत यूएसएनएस सप्लाई था, जो एक फार्स्ट कॉम्बेट सपोर्ट शिप है। इसका इस्तेमाल मिशन पर तैनात अमेरिकी नौसेना के दूसरे युद्धपोतों को ईंधन, हथियार और खाने की डिलीवरी करने के लिए किया जाता है। उस समय यह जहाज उत्तरी अरब सागर में तैनात था, जो अमेरिकी नौसेना के एक फ्रिगेट के लिए सप्लाई लेकर जा रहा था। पीएनएस जुल्फिकार पर हथियारों की सप्लाई बागी अधिकारियों ने पीएनएस जुल्फिकार पर कब्जे के लिए छोटे हथियार और ऑटोमेटिक रायफलों को बैग में भरकर पहले ही अंदर पहुंचा दिया था। उन्होंने मिसाइल रूम और ऑपरेशन रूम की डुप्लिकेट चाभी भी बनवा ली थी। उन्हें एक और कमजोरी का पता था कि पीएनएस ज़ुल्फिकार पर मौजूद तोप और C-802 मिसाइलों को जहाज के मुख्य ऑपरेशन रूम के बाहर से ही तैयार और लॉन्च किया जा सकता था। C-802 मिसाइलों को दूसरे डेक से तब तक संचालित किया जा सकता था जब तक कि मिसाइलों का आटोमेटिक सिस्टम बंद रहता था। परमाणु हथियार से लैस था पीएनएस जुल्फिकार पीएनएस जुल्फिकार कोई साधारण जहाज नहीं था। यह पाकिस्तान की नौसेना सामरिक बल कमान का हिस्सा था, जिसे 2012 में स्थापित किया गया था। उस समय पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार दागने में सक्षम कोई पनडुब्बी नहीं थी, लेकिन 19 और 21 दिसंबर 2012 को इस फ्रिगेट ने कथित तौर पर C-802 क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया। इन मिसाइलों में दो से चार किलोटन की क्षमता वाला छोटा परमाणु हथियार भी लगाया जा सकता था, जो 1945 में अमेरिका द्वारा हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम की विस्फोटक क्षमता का लगभग 15 से 25 प्रतिशत था। हमले के लगभग छह सप्ताह बाद, भारत की खुफिया एजेंसी (R&AW) ने कराची से मिली जानकारी के आधार पर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को सूचित किया कि हमले के समय पीएनएस जुल्फिकार पर एक परमाणु हथियार मौजूद था गोलीबारी में मारे गए मुख्य अपहरणकर्ता 6 सितंबर 2014 की सुबह कराची में, लेफ्टिनेंट रफीक और जखरानी पीएनएस जुल्फिकार पर सवार हुए। उनके कुछ साथी नौसैनिक वर्दी में एक छोटी नाव में बंदरगाह की ओर बढ़े। एक सतर्क संतरी ने उन्हें देख लिया और गोलीबारी शुरू हो गई। जब गोलीबारी रुकी, तो रफीक और जखरानी समेत तीन हमलावर मारे गए। उन्हें अपने हथियारों का इस्तेमाल करने या फ्रिगेट की तोपों से फायरिंग करने का मौका नहीं मिला। 5 पाकिस्तान नौसैनिको को मौत की सजा मिली इस साजिश में शामिल पांच जीवित पाकिस्तानी नौसेना अधिकारियों को मार्च 2016 में एक गुप्त सैन्य मुकदमे के बाद नौसेना न्यायाधिकरण द्वारा मौत की सजा सुनाई गई थी। इनमें सब-लेफ्टिनेंट हम्माद अहमद, इरफानुल्लाह, मोहम्मद हम्माद, अरसलान नज़ीर और हाशिम नसीर शामिल थे। 2024 में उनकी मौत की सजा पर रोक लगा दी गई थी। उनके वर्तमान ठिकाने के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।

अमेरिका के F-35 फाइटर जेट के पार्ट्स हांगकांग भेजे गए, पेंटागन और कांग्रेस ने शुरू की जांच

 वॉशिंगटन ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका ले जाए जा रहे F-35 फाइटर जेट के बेहद संवेदनशील पुर्जों वाली एक खेप को हांगकांग भेज दिया गया। इस घटना के बाद अमेरिका ने जांच शुरू कर दी है, क्योंकि आशंका है कि ये पुर्जे चीनी अधिकारियों के हाथ लग सकते थे। पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शिपमेंट में F-35 का कैनोपी शामिल था और ये एयरक्राफ्ट के स्टील्थ सिस्टम का एक अहम हिस्सा है। यह सामान एक ब्रोकर के जरिए ले जाया जा रहा था लेकिन यह साफ नहीं है कि शिपमेंट को असल में कहां भेजा गया या ये पार्ट्स अभी किसके पास हैं। मामले की जांच शुरू इस घटना के बाद पेंटागन और कांग्रेस, दोनों ने ही जांच शुरू कर दी है। जून में अमेरिकी विदेश विभाग और पेंटागन के अधिकारियों ने कांग्रेस की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अहम कमेटियों के स्टाफ को जानकारी देना शुरू किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि ये ब्रीफिंग अभी भी जारी हैं और आगे भी और बैठकें होने की उम्मीद है। F-35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस ने पुष्टि की कि उसे F-35 लाइटनिंग II के पार्ट्स से जुड़ी शिपमेंट की समस्या के बारे में जानकारी थी। अमेरिकी अधिकारी इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ मिलकर इन पार्ट्स को वापस लाने, घटना की जांच करने और भविष्य में ऐसी घटना को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय करने पर काम कर रहे हैं। क्यों अहम हैं ये पुर्जे यह गायब हिस्सा पायलट के कॉकपिट के लिए सिर्फ एक सुरक्षा कवच से कहीं ज्यादा है। F-35 का कैनोपी कॉकपिट के ऊपर लगा एक ऐक्रेलिक बबल है जिस पर पारदर्शी रडार-एब्जॉर्बिंग मटीरियल की एक पतली परत चढ़ी होती है और यह कोटिंग विमान के रडार सिग्नेचर को कम करके उसके स्टील्थ डिजाइन का एक हिस्सा बनती है। समय के साथ कोटिंग खराब हो सकती है, जिसका मतलब है कि जैसे-जैसे F-35 फ्लीट बढ़ेगी, कैनोपी की मरम्मत या उन्हें बदलने की जरूरत होगी। अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए 1,300 से ज्यादा फाइटर जेट बनाए जा चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में F-35 के लिए मेंटेनेंस की सुविधाएं तो हैं लेकिन अभी उनमें से किसी में भी इसकी कैनोपी की मरम्मत करने की क्षमता नहीं है। F-35 प्रोग्राम पुर्जों को स्टोर करने, उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाने और उनकी मरम्मत करने के लिए दुनिया भर में फैली सुविधाओं के नेटवर्क पर निर्भर करता है। इस विमान को बनाने वाली कंपनी, लॉकहीड मार्टिन, प्रोग्राम की पूरी सप्लाई चेन को मैनेज करती है और पुर्जों को लाने-ले जाने के लिए कमर्शियल शिपिंग कंपनियों की मदद लेती है। कंपनी ने क्या कहा? कंपनी का कहना है कि सुरक्षा कारणों से वह अलग-अलग शिपमेंट के बारे में बात नहीं कर सकती लेकिन एयरक्राफ्ट के पार्ट्स की आवाजाही से जुड़े अमेरिकी नियमों का पालन करती है। कंपनी ने कहा, "हमारी टीमें F-35 प्रोग्राम की विश्वसनीयता और हमारे सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर शिपमेंट को पूरी सावधानी और सुरक्षा उपायों के साथ संभालती हैं।" यह ताजा घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी सरकार की F-35 के स्पेयर पार्ट्स को ट्रैक करने की क्षमता को लेकर लंबे समय से चिंताएं बनी हुई हैं। सरकारी जवाबदेही कार्यालय (GAO) की 2023 की एक रिपोर्ट में पाया गया कि मई 2018 से एक मुख्य ठेकेदार ने 85 मिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत के 1 मिलियन से ज्यादा F-35 स्पेयर पार्ट्स खो दिए थे। निगरानी संस्था के अनुसार, F-35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस ने उन नुकसानों में से 2 प्रतिशत से भी कम की समीक्षा की थी। GAO ने यह भी पाया कि अक्टूबर 2022 तक 66 मिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत के 900,000 से ज्यादा अतिरिक्त पार्ट्स की जानकारी समीक्षा के लिए प्रोग्राम ऑफिस को नहीं दी गई थी। यह समस्या कुछ हद तक F-35 के ग्लोबल स्पेयर-पार्ट्स पूल के मैनेजमेंट के तरीके से जुड़ी है। पार्ट्स पेंटागन के होते हैं, जबकि मुख्य कॉन्ट्रैक्टर ज्यादातर इन्वेंट्री को मैनेज करते हैं, जिससे सरकार के लिए उनकी लोकेशन और नुकसान का पता लगाने में कमियां रह जाती हैं। GAO ने कहा कि यह ग्लोबल पूल अमेरिका और विदेशों में 50 से ज्यादा जगहों पर फैला हुआ है। जून 2026 की एक रिपोर्ट में GAO ने कहा कि पेंटागन को अभी भी स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और कॉन्ट्रैक्टर्स पर ज्यादा निर्भरता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।