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MP में हाईटेक सुरक्षा की शुरुआत: 15 अगस्त से सक्रिय होगी सेंट्रलाइज्ड 112 सेवा

भोपाल  मध्यप्रदेश में अब आपातकालीन सेवाएं और भी आसान और तेज हो जाएगी। 15 अगस्त 2025 से प्रदेश में इमरजेंसी सर्विसेज के लिए एक नया एकीकृत नंबर 112 शुरू होने जा रहा है। अब आपको पुलिस, एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड जैसी आपात सेवाओं के लिए अलग-अलग नंबर याद रखने की जरूरत नहीं होगी। बस एक नंबर 112 डायल करें, और मदद तुरंत आपके दरवाजे पर पहुंचेगी। इस नई पहल के तहत मध्यप्रदेश सरकार डायल 112 सेवा को हाईटेक और सेंट्रलाइज्ड बनाने जा रही है। इसके लिए एक अत्याधुनिक कॉल सेंटर तैयार किया जा रहा है, जो सीधे सेंट्रल सर्वर से जुड़ा होगा। इस सेवा के तहत सड़कों पर बोलेरो नियो और स्कॉर्पियो जैसी हाईटेक इमरजेंसी गाड़ियां दौड़ती नजर आएंगी, जो आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगी। 1200 नए वाहन मिलेंगे नई व्यवस्था के तहत पूरे प्रदेश में 1200 नए बोलेरो नियो “फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल” तैनात किए जाएंगे. ये वाहन जीपीएस, वायरलेस, डिजिटल नेविगेशन सिस्टम और लाइव लोकेशन ट्रैकिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस होंगे, जिससे किसी भी आपात स्थिति में पुलिस की मदद पहले से कहीं तेज़ और सटीक हो सकेगी. 10 साल तक चली ये सेवा बता दें कि डायल-100 सेवा वर्ष 2015 में सिर्फ पांच साल के लिए शुरू की गई थी, लेकिन विभिन्न तकनीकी समस्याओं, निविदा प्रक्रिया में देरी, कोविड-19 महामारी और प्रशासनिक कारणों के चलते यह सेवा 10 वर्षों तक चली. अब बीवीजी कंपनी के बजाय जीवीके कंपनी को नई डायल-112 सेवा का संचालन सौंपा गया है. पुलिस का ये दावा पुलिस विभाग का दावा है कि नई सेवा के माध्यम से प्रदेशवासियों को और भी अधिक भरोसेमंद, तेज़ व स्मार्ट सुरक्षा मिलेगी. नई तकनीक के इस्तेमाल से घटना स्थल तक पहुंचने का औसत समय भी घटेगा, जिससे आपराधिक घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. इस ऐलान के बाद से लोगों में नई सेवा को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है. 112 के साथ शुरू होगा मध्यप्रदेश आपातकालीन सेवाओं में एक नया अध्याय  फिलहाल, प्रदेश में इमरजेंसी सेवाओं के लिए डायल 100 नंबर का उपयोग होता है, जिसकी स्कीम 2015 में शुरू हुई थी और यह 5 साल के लिए थी। अब डायल 112 के साथ मध्यप्रदेश आपातकालीन सेवाओं में एक नया अध्याय शुरू करने जा रहा है। तो, 15 अगस्त से तैयार रहें, क्योंकि मध्यप्रदेश में आपकी सुरक्षा और सहायता के लिए सिर्फ एक कॉल काफी होगी- डायल 112. 

प्रदेश के किसानों को बाजार से दोगुनी मिलेंगे दाम, राज्य बनेगा ऑयल सीड हब

ग्वालियर   मध्य प्रदेश में खेती और यहां का शरबती गहूं देश दुनिया में पहचान रखता है. प्रदेश में खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए प्रयोग भी होते रहे हैं. यही वजह है कि लगातार कृषि क्षेत्र में अग्रसर मध्य प्रदेश अब ऑयल सीड हब बनने जा रहा है. जिसके तहत प्रदेश के तीन जिलों में स्पेशल प्रोग्राम चलाया जाएगा. यहां के किसान अब तीन फसलों के बीज खरीदेंगे नहीं बल्कि उगायेंगे और ये बीज सरकार के जरिए अन्य किसानों की आपूर्ति करेंगे. ये सभी जानते हैं कि, किसी भी फसल से उसके बीज का दाम काफी ज्यादा होता है. लेकिन आम तौर पर किसान बीज सहकारी समितियों की मदद से खरीदते हैं. गेहूं और धान को हटाकर मध्य प्रदेश में तिलहन फसलें यानी सोयाबीन, सरसों और मूंगफली की खेती भी प्रदेश के अलग अलग क्षेत्रों में लगायी जाती है. लेकिन इन फसलों के लिए बढ़ते रकबे के हिसाब से कृषि संस्थान भी पर्याप्त बीज नहीं उपलब्ध करा पा रहे हैं. यही वजह है कि अब मध्य प्रदेश में एक विशेष प्रोजेक्ट लाया गया है, जो किसानों के लिए उन्नत खेती के साथ भी कमाई का नया जरिया बनेगा. मध्य प्रदेश में तिलहन फसलों के लिए सीड हब प्रोजेक्ट भारत सरकार ने ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय को ऑयल सीड हब प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया है. जिसके तहत मध्य प्रदेश के तीन जिलों में प्रदेश भर के किसानों को तिलहन फसलों के बीज उपलब्ध कराने के लिए बीज तैयार कराये जाएंगे, जिसे सीड हब नाम दिया गया है. इन सीड हब में तीन प्रमुख फसलों के बीज तैयार कराये जाएंगे. पहले ऑयल सीड हब सीहोर में स्थापित किया जाएगा. जहां सोयाबीन के बीज तैयार होंगे. दूसरा मूंगफली के लिए शिवपुरी में और तीसरा हब मुरैना में सरसों के बीज के लिए है. चंबल में किसानों के सिर चढ़ी मूंगफली राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने ईटीवी भारत से खास बातचीत में बताया कि, ''पिछले कुछ वर्षों में मालवा के अलावा चंबल के शिवपुरी क्षेत्र में किसान मूंगफली की फसल लगाने लगे हैं. ऐसे में उन्हें मूंगफली की नई नई प्रजातियों की जरूरत है. कृषि विश्वविद्यालय ने मूंगफली की दो किस्में तैयार भी की हैं. इसके अलावा इस क्षेत्र में मूंगफली का रकबा भी लगातार बढ़ रहा है. पिछले साल के मुकाबले इस साल भी लगभग 1 लाख हेक्टेयर रकबा मूंगफली का बढ़ा है. ऐसे में मूंगफली के बीज किसानों को उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं. सीड हब प्रोजेक्ट इसे नई दिशा देगा. कैसे काम करता है सीड हब प्रोग्राम? सीड हब प्रोग्राम के तहत विश्वविद्यालय द्वारा किसी क्षेत्र में चयनित किसानों को फसल के बीज उपलब्ध कराये जाते हैं. इसके बाद किसान इनकी बुवाई कर फसल तैयार करता है. फसल में समय पर और जरूरी पोषण के लिए अच्छी गुणवत्ता का खाद दिया जाता है, और फसल पकने पर उसे हार्वेस्ट कर लिया जाता है. यह कार्य कृषि वैज्ञानिकों की देखरेख में पूरा किया जाता है. यही फसल उन्नत किस्म के बीज के तौर पर तैयार होगी और फिर कृषि विश्वविद्यालय उनसे यह फसल बीज के लिए लेगा. उसे प्रोसेस करेगा और फिर अन्य किसानों को उपलब्ध कराएगा. किसान क्यों नहीं करते आम फसल को बीज की तरह उपयोग? कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु के मुताबिक, ''आम तौर पर तैयार फसल का उपयोग किसान बीज के तौर पर नहीं कर पाते हैं. जिसकी बड़ी वजह है फसल में अलग अलग तरह के बीजों का समावेश. असल में जब किसान खेत में फसल की बुवाई करता है तो उसके लिए कई किस्म के बीज उपयोग ले लेता है. उदाहरण के लिए जब सरसों की बुवाई होती है तो उसमे कई बार काली सरसों के साथ कम पड़ने पर पीली सरसों या दूसरी वेराइटी के बीज बो दिए जाते हैं. जिसकी वजह से खेत में तैयार फसल में वेरिएशन आ जाता है और किसानों को उस सरसों को फसल की तरह ही बेचना पड़ता है. क्योंकि वह फसल सिर्फ तेल या सरसों के उपयोग की ही होती है. लेकिन सीड हब प्रोग्राम में किसानों को एक ही वेराइटी का बीज उपलब्ध कराया जाएगा और उससे तैयार फसल बीज के तौर पर उपयोग हो सकेगी. खुद नहीं, किसानों से ही क्यों तैयार करायेंगे बीज? असल में मूल रूप से फसलों के बीज तैयार करने की व्यवस्था कृषि संस्थानों पर होती है (निजी कंपनियों को छोड़कर), लेकिन यहां लगायी जाने वाली फसलें काफी सीमित क्षेत्र में ही लगायी जा सकती हैं. ऐसे में डिमांड के अनुसार, बीज व्यापक मात्रा में यहां तैयार नहीं किया जा सकता. इस स्थिति में किसान एक बेहतरीन विकल्प है, क्योंकि किसान अपने ही खेत में बीज के लिए फसल लगाएगा तो कृषि विश्वविद्यालय को अलग से जमीन की भी जरूरत नहीं होगी. साथ ही तैयार बीज से किसानों के लिए बीज की आपूर्ति भी आसानी से हो सकेगी. इस सब में किसानों को कैसे होगा फायदा? जब सवाल आता है कि, पूरी मेहनत किसान की बीज संस्थान लेगा तो किसानों का क्या फायदा? तो आपको बता दें कि यह किसान के लिए फायदेमंद सौदा होगा. क्योंकि, पहले तो इस प्रोग्राम के तहत कृषि वैज्ञानिक किसानों को फसल के जरिए बीज तैयार करना सिखायेंगे. जिससे भविष्य में वे खुद अपनी ही फसलों से भी बीज तैयार कर सकेंगे और उन्हें बाहर से बीज नहीं खरीदना पड़ेगा जो उनकी लागत को कम करेगा. दूसरा बड़ा फायदा फसल के दाम में अंतर आएगा. क्योंकि अमूमन आम फसल के दाम काफी कम होते हैं लेकिन उस फसल का बीज ऊंचे दाम पर बिकता है. उदाहरण के लिए सोयाबीन फसल का रेट लगभग 3 हजार से 5 हजार रुपये प्रति क्विंटल है. जबकि सोयाबीन के बीज की कीमत बाजार में 7 हजार रुपये से लेकर 35 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक उपलब्ध है. जब विश्व विद्यालय उनकी तैयार फसल खरीदेगा तो वह बीज के रेट पर खरीदेगा तो उन्हें दोगुने से तीन गुना तक ज्यादा दाम मिलेगा जो उनकी आय बढ़ाएगा. किसान चाहे तो खुद के द्वारा तैयार बीज अन्य किसानों को भी बेच सकेंगे. प्रदेश में कहां-कहां बनाये जाएंगे सीड हब जैसा की हमने पहले बताया कि, चंबल अंचल के शिवपुरी क्षेत्र … Read more

संपूर्ण PF झटपट निकालिए — EPFO की नई पॉलिसी दे रही राहत

नई दिल्ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) अकाउंट्स से अमाउंट निकालने के नियमों में बड़ा बदलाव कर सकता है. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रिटायमेंट फंड बॉडी ने एक प्रस्‍ताव पेश किया है, जिसमें ऐसा कहा गया है कि EPFO सदस्‍यों को हर 10 साल में 1 बार अपनी पूरी राशि या उसका कुछ हिस्‍सा निकालने की अनुमति दी जाए.  अगर ये प्रस्‍ताव पास हो जाता है तो इससे संगठित प्राइवेट सेक्‍टर में कार्य करने वाले 7 करोड़ से ज्‍यादा एक्टिव EPFO सदस्‍यों को राहत मिलेगी. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार 10 साल की सेवा पूरी करने के बाद सदस्‍यों की ओर से पैसा निकालने के नियमों को आसान बनाने पर विचार कर रही है.  यह उन लोगों को ध्‍यान में रखकर विचार किया जा रहा है, जो जल्‍द रिटायर्ड होना चाहते हैं. ऐसे में वह 58 साल तक इंतजार की बजाय रिटायरर्ड होते ही पूरा PF अमाउंट क्‍लेम कर सकते हैं.  क्‍यों ये बदलाव है जरूरी?  अभी तक EPF से पूरी रकम तभी निकाली जा सकती थी, जब कोई कर्मचारी 58 साल की आयु में रिटायर हो या नौकरी छोड़ने के दो महीने बाद भी बेरोजगार रहे. लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं जो 35 से 40 साल की उम्र में कर‍ियर बदलना चाहते हैं या किसी वजह से नियमित नौकरी नहीं कर पाते हैं. ऐसे में उनके लिए ये बदलाव काफी मददगार होगा.  7.5 करोड़ खाताधारकों को होगा लाभ नए नियमों का ईपीएफओ से जुड़े करीब 7.5 करोड़ सदस्यों को लाभ होगा, जो अपनी जरूरत पर अधिक धनराशि निकाल पाएंगे। यह बदलाव खासतौर पर उन लोगों की मदद करेगा, जो 58 साल की उम्र तक इंतजार नहीं करना चाहते और जल्दी रिटायर होना चाहते हैं। फिलहाल आप अपना पूरा पीएफ तभी निकाल सकते हैं जब 58 साल की उम्र में रिटायर हों या नौकरी छोड़ने के बाद दो महीने तक बेरोजगार रहें। मौजूदा समय में पीएफ खाते से सदस्य को मेडिकल, घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई, घर में शादी व कुछ अन्य जरूरी कार्यों के लिए धनराशि निकासी की अनुमति है, लेकिन उसमें भी तमाम सारी शर्तें हैं, जिनमें तय सीमा तक ही निकासी की जा सकती है। रिटायरमेंट का पैसा कम होगा: अगर कर्मचारी बीच-बीच में पीएफ से बड़ी रकमें निकाल लेंगे, तो जाहिर है कि जब वे रिटायर होंगे, तब उनके खाते में पैसा कम बचेगा। ब्याज का नुकसान: पीएफ लंबे समय के लिए बचत करने और उस पर अच्छा ब्याज पाने का जरिया है। बीच में पैसा निकालने से चक्रवृद्धि ब्याज (कंपाउंड इंटरेस्ट) का फायदा कम मिलेगा। इसका मतलब है कि आपका जमा किया पैसा उतनी तेजी से नहीं बढ़ पाएगा। भविष्य की चिंता: रिटायरमेंट के बाद के लिए जो वित्तीय सुरक्षा पीएफ से मिलती है, वह कमजोर हो सकती है। ईपीएफओ ने किए ये बदलाव      ईपीएफ अकाउंट से UPI या ATM के जरिए तुरंत 1 लाख रुपये तक की रकम निकालने की सुविधा मिलेगी. इससे इमरजेंसी में पैसा निकालना आसान हो जाएगा.      पहले एक लाख रुपये तक के क्‍लेम का ऑटोमैटिक निपटारा हो जाता था, लेकिन अब यह सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है. इसके लिए वेरिफिकेशन की आवश्‍यकता नहीं होगी.      प्रॉसेस को आसान बनाने के लिए ईपीएफओ ने क्‍लेम वेरिफिकेशन के लिए आवश्यक दस्तावेजों की संख्या 27 से घटाकर 18 कर दी है. इससे अब यह प्रक्रिया 3-4 दिनों में पूरी हो रही है.      अब पीएफ खाते से 90% राशि निकाली जा सकती है, अगर 3 साल की सेवा पूरी कर ली है और उस पैसे का उपयोग घर के डाउन पेमेंट या ईएमआई में करना है.  गौरतल‍ब है कि ईपीएफ अकाउंट से निकासी को लेकर सरकार समय-समय पर बदलाव करती रहती है, ताकि प्राइवेट सेक्‍टर के कर्मचारियों के लिए ज्‍यादा सरल प्रॉसेस मिले. ये बदलाव भी इसीलिए किए गए हैं, ताकि इमरजेंसी के समय बिना परेशानी के कर्मचारी अपने पैसे का यूज कर पाएं. बता दें पीएफ अकाउंट में 12 फीसदी का योगदान कर्मचारी और 12 फीसदी का योगदान नियोक्‍ता की ओर से दिया जाता है.   

कूटनीति में भारत का संतुलन: अमेरिका की चाहत पर रूस से दूरी नहीं

नई दिल्ली  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध की आड़ में भारत पर निशाना साधा है और खुली धमकी भी दे डाली है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि प्रेसीडेंट ट्रंप चाहते हैं कि जो देश रूस से तेल खरीदेंगे, उन पर पाबंदी लगाई जा सकती है। इससे पहले अमेरिका की अगुवाई वाले सैन्य गठबंधन नाटो यानी नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) के महासचिव मार्क रुट ने भारत, ब्राजील और चीन को खुली धमकी दे डाली थी। इससे पहले भारत ने अपना रुख एकदम साफ कर दिया था। भारत ने कहा था कि इस मामले में दोहरा मापदंड नहीं चलेगा। रूस ने हमेशा से ही भारत का साथ दिया है। वह आजादी के समय से ही भारत का साथ देता है। भारत के विकास में रूस का काफी योगदान है। आइए-समझते हैं। भारत ने कहा-दोहरा मापदंड नहीं चलेगा, हमें कोई टेंशन नहीं इन धमकियों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमारे लोगों के लिए ऊर्जा की जरूरतें पूरी करना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हमें इस मामले में किसी भी तरह के दोहरे मापदंड से बचना चाहिए। वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध संघर्ष और मध्य-पूर्व में तनाव जैसे वैश्विक भू-राजनीतिक व्यवधानों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों को देखते हुए सक्रिय रूप से कच्चे तेल के आयात स्रोतों को 27 देशों से बढ़ाकर 40 देशों तक कर दिया है। इसीलिए रूस पर पाबंदी जैसी किसी कार्रवाई से हम चिंतित नहीं हैं। रूस तो फाइटर भी दे रहा है और सोर्स कोड भी WIKIPEDIA के अनुसार, रूस यानी पूर्व सोवियत संघ भारत की स्वतंत्रता के समय से कई मौकों पर भारत के लिए मददगार रहा है। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में सोवियत संघ ने भारत का समर्थन किया था, जिससे भारत की स्थिति मजबूत हुई थी। साथ ही शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ भारत का एक प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता देश था। इससे भारत को अपनी सैन्य क्षमताओं को विकसित करने में मदद मिली। जबकि इन दोनों ही मौकों पर अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ दिया था। ये भारत को भूलना नहीं चाहिए। इसीलिए आज भी भारत अमेरिका के मुकाबले रूस पर ज्यादा भरोसा करता है। हाल ही में रूस ने अपना SU-57 फाइटर जेट देने की पेशकश भी की है और उसका सोर्स कोड भी। वहीं, अमेरिका और फ्रांस कभी भी अपना इंजन और सोर्स कोड देने से कतराते रहे हैं। 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध में दिया साथ विकीपीडिया के मुताबिक, पूर्व सोवियत संघ ने 1971 के युद्ध में भारत का समर्थन किया। उस वक्त भारत ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) को पाकिस्तान से आजादी दिलाने में मदद की थी। सोवियत संघ ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के खिलाफ किसी भी प्रस्ताव पर वीटो कर दिया, जिससे भारत को अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखने में मदद मिली। वहीं, अमेरिका ने 71 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान की मदद के लिए समंदर में अपना जंगी बेड़ा उतार दिया था। शीत युद्ध के दौरान रूस ने दिए हथियार तत्कालीन सोवियत संघ ने शीत युद्ध के दौरान भारत को खूब हथियार दिए। वह भारत के लिए प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता देश था। इसने भारत को टैंक, विमान, मिसाइल और अन्य सैन्य उपकरण प्रदान किए, जिससे भारत को अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिली। देश के आर्थिक विकास में भी रूसी झलक सोवियत संघ ने भारत को आर्थिक विकास में भी मदद की, विशेष रूप से भिलाई और बोकारो जैसे स्टील फैक्ट्रियों की स्थापना में। इसके अलावा, रूस की योजनाओं की ही तर्ज पर पंचवर्षीय योजनाएं भी शुरू की गई थीं। जो अब जारी नहीं हैं। भारत के विकास में रूसी समाजवाद की झलक भी दिखाई देती है। अंतरिक्ष में भी रूस ने मजबूती से बढ़ाया हाथ पूर्व सोवियत संघ ने 1984 में भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा को अंतरिक्ष में भेजने में भी मदद की थी। इसके अलावा, भारत के कई अंतरिक्ष मिशनों के लिए अपने रॉकेट भी दिए। सैटेलाइट विकास में भी जमकर सहयोग किया। दोनों देशों के बीच आज है बहुपक्षीय सहयोग भारत और रूस आज भी संयुक्त राष्ट्र, जी20, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन जैसे कई बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम कर रहे हैं। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी का भी समर्थन किया है। हालांकि, दोनों देशों के बीच संबंध बीच में असहज भी रहे, मगर वो जल्द ही पटरी पर लौट आए। ट्रंप ने क्यों बौखलाए, पहले इसे समझिए व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने गुरुवार को कहा, अगर 50 दिनों में रूस ने युद्धविराम या शांति समझौते की शर्तें नहीं मानीं, तो उस पर बेहद सख्त टैरिफ और सेकंडरी सैंक्शन लगाए जाएंगे। भारत जैसे देशों की ओर साफ इशारा करते हुए लैविट ने कहा कि जो देश रूसी तेल खरीदेंगे, वो भी इन प्रतिबंधों की चपेट में आएंगे। लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि युद्ध का अंत कूटनीतिक समाधान से हो। दरअसल, भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 85 फीसदी विदेशों से मंगाता है। वह रूस से अपनी कुल तेल जरूरतों का करीब 35.10 प्रतिशत आयात करता है। जबकि यूक्रेन से युद्ध के पहले वह रूस से केवल 2.10 फीसदी कच्चा तेल मंगाता था। नाटो चीफ ने क्यों दी थी ऐसी धमकी इससे पहले NATO के महासचिव मार्क रुटे ने भी भारत, चीन और ब्राजील को खुली चेतावनी दी थी। अगर रूस से व्यापार जारी रहा तो 100 फीसदी टैरिफ और सेकेंडरी सैंक्शन तय हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप चीन के राष्ट्रपति हैं, भारत के प्रधानमंत्री हैं या ब्राजील के राष्ट्रपति हैं और आप रूस के साथ व्यापार करना और उनका तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं, तो आपको यह पता होना चाहिए। अगर मॉस्को में बैठे व्यक्ति ने शांति वार्ता को गंभीरता से नहीं लिया, तो मैं 100% सेकंडरी सैंक्शन लगाऊंगा।  

बालाघाट की बड़ी उपलब्धि: आयुष्मान कार्ड बनाने में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान

भोपाल  आयुष्‍मान योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक पात्र लोगों के आयुष्‍मान कार्ड बनाने का विशेष अभियान पूरे देश में 14 अप्रैल 2025 से प्रारंभ किया गया है। इस अभियान में सर्वाधिक आयुष्‍मान कार्ड बनाने के मामले में बालाघाट जिला 81 प्रतिशत उपलब्धि के साथ प्रदेश में पहले स्‍थान पर है। बैतूल जिला 78 प्रतिशत के साथ दूसरे एवं अनुपपुर जिला 77 प्रतिशत के साथ तीसरे स्‍थान पर है। बालाघाट जिले में कलेक्‍टर श्री मृणाल मीणा के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक सराफ के निर्देशन में इस कार्य को एक मिशन के रूप में किया जा रहा है। बालाघाट जिले में 1 लाख 31 हजार 468 पात्र लोगों के आयुष्‍मान कार्ड बनाये जाने है। 16 जुलाई तक जिले में 1 लाख 7 हजार 54 लोगों के आयुष्‍मान कार्ड बनाकर बालाघाट ने पहला स्थान पाया है। मध्यप्रदेश में 16 जुलाई तक 5 लाख 66 हजार 967 आयुष्‍मान कार्ड बनाये का लक्ष्य है। जिसमें से केवल बालाघाट जिले में 1 लाख 7 हजार 54 कार्ड बनाये गए है। इस प्रकार देखा जाए तो प्रदेश में बने हर पांच आयुष्‍मान कार्ड में एक कार्ड बालाघाट जिले का बना है। इस उपलब्धि को हासिल करने में स्‍वास्‍थ्‍य, ग्रामीण विकास एवं महिला एवं बाल विकास विभाग का विशेष योगदान रहा है। आयुष्‍मान भारत निरामयम योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के व्यक्ति को एक साल में 5 लाख रुपये तक के मुफ्त उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है। योजना में आयुष्‍मान कॉर्ड धारक व्‍यक्ति का उपचार योजना में पंजीकृत अस्‍पताल में किया जाता है। मरीज के उपचार पर आए खर्च की राशि शासन द्वारा संबंधित अस्‍पताल को प्रदान कर दी जाती है।

मोदी के दौरे से पहले भारत का सरप्राइज गिफ्ट, मुस्लिम देश ने जताया भरोसा – पाकिस्तान में मिर्ची!

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा से पहले भारत ने मालदीव को एक खास तोहफा दिया है. ये तोहफा है मालदीव पुलिस के दस जवानों को वीआईपी सिक्योरिटी में ट्रेनिंग देना. वीआईपी सुरक्षा की ट्रेनिंग लेने के बाद ये सभी 10 कमांडो, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु के अंगरक्षक के तौर पर तैनात किए जाएंगे. इसी महीने के आखिरी हफ्ते में पीएम मोदी दो दिवसीय (25-26 जुलाई) मालदीव के दौरे पर जा रहे हैं. इन सभी दस कमांडो ने नोएडा में दो हफ्तों की वीआईपी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद शनिवार (19 जुलाई, 2025) को सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के महानिदेशक जीपी सिंह से दिल्ली में मुलाकात की. नोएडा में सीआरपीएफ का वीआईपी सिक्योरिटी ट्रेनिंग सेंटर है. देश के वीआईपी और दूसरे गणमान्य व्यक्तियों को वाई और जेड कैटेगरी की सुरक्षा सीआरपीएफ के हवाले है. गृह मंत्री अमित शाह और दलाई लामा तक की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ की सिक्योरिटी विंग के हवाले है. क्षेत्रीय संबंध होंगे मजबूत मालदीव पुलिस के कमांडो से मुलाकात के बाद सीआरपीएफ के डीजी जीपी सिंह ने कहा कि यह प्रशिक्षण शांति, प्रोफेशनलिज्म और पुलिसिंग में अधिक सहयोग के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता का प्रमाण है. सीआरपीएफ के मुताबिक, पड़ोसी देशों की पुलिस के साथ इस तरह के सहयोग से क्षेत्रीय संबंध मजबूत होंगे और पार्टनरशिप को ताकत मिलेगी. सीआरपीएफ ने एक संक्षिप्त बयान में कहा कि यह क्षेत्र में आपसी विश्वास और क्षमता निर्माण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक गौरवपूर्ण कदम है. इसी महीने की 25 तारीख को मालदीव का राष्ट्रीय दिवस है. मालदीव के नेशनल डे पर प्रधानमंत्री मोदी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे. दोनों देशों के बीच आई खटास होगी कम पीएम की यात्रा से दोनों देशों के बीच मुइज्जु के राष्ट्रपति बनने से आई खटास थोड़ी कम होने की उम्मीद है, क्योंकि साल 2023 में मालदीव का राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जु ने भारतीय नौसेना के हेलीकॉप्टर सहित क्रू-सदस्यों को अपने देश से निकाल दिया था. साथ ही मुइज्जु को चीन का करीबी माना जाता है. हालांकि, पिछले साल मुइज्जु ने भी दिल्ली का दौरा किया था और भारत को अहम सहयोगी बताया था. जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी के मालदीव दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम करार होने की उम्मीद है. साथ ही मालदीव के अलग-अलग द्वीपों को जोड़ने के लिए शुरू होने वाली फेरी (बोट नौवहन) के लिए भी भारत एक बड़ा अनुदान कर सकता है.

विश्व मंच पर चमका मध्य प्रदेश: सीएम यादव के विदेश दौरे से खुले निवेश और विकास के द्वार

भोपाल 'मैंने ऐसा कभी नहीं देखा कि किसी नेता ने 30 मिनट की चर्चा के बाद एमओयू साइन कर लिया हो.., मध्यप्रदेश आपको बुला रहा है, बेहिचक निवेश करें, हम भी आपको रिटर्न गिफ्ट देने में कोई कमी नहीं रखेंगे.., एमपी के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं, हर सेक्टर में निवेशकों का स्वागत है…, कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी.., जोत से जोत जले.., एमपी और बार्सिलोना जुड़वा भाई हैं..।' ये चंद भाषणों की लाइनें हैं जो मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दुबई-स्पेन की यात्रा से निकलकर आई हैं। इन लाइनों से यह पता चलता है कि सीएम डॉ. मोहन यादव एक प्रभावी लीडर के रूप में उभर रहे हैं। पहले यूके-जर्मनी-जापान यात्रा और फिर दुबई-स्पेन यात्रा ने इस बात के संकेत दिए हैं कि वैश्विक उद्योगपतियों पर उनका सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उनकी ताजा यात्रा को मास्टर स्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है।   गौरतलब है कि सीएम डॉ. यादव स्पेन पहुंचे तो उनका भारतीयों ने जोरदार स्वागत किया। उन्होंने मैड्रिड और बार्सिलोना में यहां विश्व की अग्रणी कंपनियों के शीर्ष पदाधिकारियों से वन-टू-वन मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान सीएम डॉ. यादव का अंदाज उद्योगपतियों को बेहद पसंद आया। निवेशक मध्यप्रदेश सरकार की नीतियों से संतुष्ट दिखाई दिए। स्पेन की नामी सेनेटरीवेयर कंपनी रॉका ग्रुप के कॉर्पोरेट संचालन निदेशक पाउ अबेलो ने सीएम डॉ. यादव को देवास स्थित कंपनी की इकाई ‘रॉका बाथरूम प्रॉडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ की जानकारी की। कंपनी ने देवास में 164.03 करोड़ का निवेश किया है, साथ ही 400 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी दिया है। इस जानकारी के बीच कंपनी ने प्रदेश के मुखिया को यूनिट के विस्तार और आगामी योजनाओं की जानकारी भी दी। लालीगा के मैचों में हो सकता है चमत्कार दूसरी ओर, सीएम डॉ. यादव ने स्पोर्ट्सफन टीवी एसएल के सह-संस्थापक सिद्धार्थ तिवारी के साथ भी बैठक की। इसमें तिवारी ने उन्हें सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि आपसी सहयोग से मध्यप्रदेश में फुटबॉल की प्रतिभाओं को खोजा जा सकता है। इसी तरह अमेक (Association Multisectorial de AMEC) के निदेशक एलेजांद्रो गैलेगो अल्काइडे ने सीएम डॉ. यादव से कहा कि उनकी कंपनी राज्य की वैश्विक ब्रांडिंग, मीडिया एनालिटिक्स, एआई आधारित संचार रणनीतियों औरै अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मध्यप्रदेश की पहचान को सशक्त करने की दिशा में सहयोग कर सकती है। इस यात्रा के दौरान सबसे खास रहा उनका लालीगा लीग का दौरा। हो सकता है कि आगामी लालीगा के मैचों में दुनियाभर के करोड़ों दर्शकों को मध्यप्रदेश के सांची और भीमबैठका जैसे टूरिज्म स्पॉट देखने को मिलें। अगर वाकई ऐसा होता है तो प्रदेश में टूरिज्म सेक्टर में न केवल टूरिस्टों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि भारी रोजगार भी मिलेगा। दुबई के निवेशक भी हुए प्रभावित स्पेन की ही तरह सीएम डॉ. मोहन यादव की दुबई यात्रा भी सफल रही। वे यहां भी 13 से 15 जुलाई के बीच विभिन्न व्यापारिक बैठकों और निवेश संवाद कार्यक्रमों में शामिल हुए। उनकी यह यात्रा मध्यप्रदेश के विकास यात्रा की एक मजबूत नींव साबित होगी। राज्य की मोहन सरकार ने इस विकास यात्रा को इस भावना के साथ डिजाइन किया था कि यह राज्य के आर्थिक विकास और वैश्विक साझेदारियों के लिए एक मजबूत आधार बने। दुबई में सीएम डॉ.यादव ने डीपी वर्ल्ड, जाएफजा (जेबेल अली फ्री ज़ोन), भारतीय उद्यमियों और निवेशकों के साथ कई रणनीतिक बैठकें की। एक बैठक में भारत मार्ट जैसे महत्वाकांक्षी वैश्विक व्यापार केंद्र को लेकर सहमति भी बनी। अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद अल यामाहि ने भी मध्यप्रदेश में निवेश के लिए हर संभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।  

मुख्यमंत्री साय बोले – नई औद्योगिक नीति के माध्यम से विकास और रोजगार सृजन कर रही है हमारी सरकार

फार्मास्यूटिकल इकाई का शुभारंभ प्रदेश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण कदम रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर के सेक्टर-05 स्थित एस्पायर फार्मास्यूटिकल्स की नवनिर्मित इकाई का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रबंधन को शुभकामनाएं दीं और उत्पादन इकाई का भ्रमण कर दवा निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री शसाय ने कहा कि कोविड के कठिन दौर में दवाइयों की किल्लत को देखते हुए इस इकाई के निर्माण का सपना देखा गया था और आज वह साकार हुआ है। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया कोविड के संकट से जूझ रही थी, तब भारत ने स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर एक मिसाल कायम की। श्री साय ने कहा कि फार्मास्यूटिकल्स की  इकाई का शुभारंभ प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति निवेशकों को आकर्षित कर रही है और पिछले सात-आठ महीनों में 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से कई परियोजनाओं पर कार्य आरंभ हो चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक इकाइयों के माध्यम से अधिक से अधिक रोजगार सृजन का कार्य कर रही है और ऐसी इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है, और इन 25 वर्षों में जो विकास हुआ है, उसमें पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह ने न केवल प्रदेश से भूखमरी को दूर किया, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी ठोस नींव रखी। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य गठन के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के जरिए लोगों को निःशुल्क इलाज मिल रहा है। श्री साय ने बताया कि पिछले डेढ़ वर्ष की अवधि में छह से अधिक विशेषज्ञ अस्पतालों के शुभारंभ का मैं साक्षी रहा हूं, जो दर्शाता है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री श्री मोदी का मानना है कि लोग बीमार न पड़ें, निरोगी रहें, और उनकी इसी संकल्पना के अनुरूप वेलनेस सेंटर के माध्यम से लोगों को आरोग्य प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार ने “विकसित छत्तीसगढ़ 2047” की परिकल्पना के तहत विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश की सकल राज्यीय उत्पाद (GSDP) 5 लाख करोड़ है, जिसे 2030 तक ₹10 लाख करोड़ और 2047 तक ₹75 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, और यह प्रदेशवासियों के सहयोग से ही संभव होगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर एस्पायर फार्मास्यूटिकल्स का भ्रमण कर उन्नत तकनीकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह इकाई पूरी तरह ऑटोमेटेड है, जहाँ टैबलेट, सिरप, ऑइंटमेंट और क्रीम जैसे विभिन्न प्रकार की दवाइयों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस इकाई के विस्तार से बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश के फार्मास्यूटिकल सेक्टर में यह एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक शुरुआत है। उन्होंने कहा कि भारत ने इस क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बनाई है और कोविड काल के दौरान पूरी दुनिया को यह एहसास हुआ कि दवाइयों और चिकित्सा संसाधनों का क्या महत्व है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों ने भी उस दौर में भारत की फार्मा क्षमता पर विश्वास जताया। उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में विकसित छत्तीसगढ़ की संकल्पना को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए विजन डॉक्यूमेंट जारी किया गया है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के औद्योगिक विकास में नवा रायपुर की केंद्रीय भूमिका है। यह क्षेत्र न केवल औद्योगिक निवेश के लिए उपयुक्त है, बल्कि सभी प्रमुख मार्गों से जुड़ाव के कारण लॉजिस्टिक्स की दृष्टि से भी अत्यंत सुविधाजनक है। डॉ. सिंह ने एस्पायर फार्मास्यूटिकल्स की टीम को इस नई शुरुआत के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह इकाई नवा रायपुर के विकास को नई गति देगी। इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, पवन साय, विधायक गुरु खुशवंत साहेब, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक ललित चंद्राकर, विधायक संपत अग्रवाल, विधायक अनुज शर्मा, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा, नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्षसंजय श्रीवास्तव, एस्पायर फार्मास्यूटिकल्स से कोमलचंद चोपड़ा, अनिल देशलहरा और उज्ज्वल दीपक सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

कावड़ियों की सुरक्षा व ट्रैफिक को देखते हुए सोमवार को स्कूलों की छुट्टी घोषित

 जबलपुर जबलपुर से गुजरने वाली कावड़ यात्रा को मद्देनदजर रखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से 21 जुलाई सोमवार को सभी स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा ये आदेश सभी शासकीय, निजी सीबीएसई, आईसीएसई सभी स्कूलों पर लागू होगा। जबलपुर जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश जारी करते हुए कहा कि, 21 जुलाई को जबलपुर में निकलने वाली कावड़ यात्रा में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए अवकाश घोषित किया गया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, कावड़ यात्रा के दिन भारी संख्या में श्रद्धालुओं के सड़क पर आने की वजह से शहर के कई मार्गों पर जाम लग जाता है, ऐसी स्थिति में स्कूली बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। घंटों स्कूली बच्चे और उनके परिजन ट्रैफिक में फंसना पड़ता है, लिहाजा 21 जुलाई को असुविधा से बचने के लिए सभी स्कूलों की छुट्टी घोषित की जाती है। नर्मदा का जल लेकर पैदल यात्रा करते हैं श्रद्धालु आपको ये भी बता दें कि, जबलपुर में कांवड़ यात्रा के दिन लाखों श्रद्धालु नर्मदा से जल लेकर करीब 35 किलोमीटर की यात्रा पैदल तय करते हुए खमरिया घाना स्थित शिवालय पहुंचते हैं। वहीं, पर नर्मदा जल अर्पित कर कर बाबा भोले की पूजा अर्चना करते हैं। पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर, हाईवे पर रूट डायवर्जन सावन के दूसरे सोमवार और आगामी शिवरात्रि पर्व को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। नेशनल हाईवे समेत कई प्रमुख मार्गों पर रूट डायवर्जन लागू कर दिया गया है ताकि कांवड़ यात्रा के दौरान कोई भी अव्यवस्था न हो। जनता से सहयोग की अपील प्रशासन ने आम जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि शिवभक्तों की आस्था और सुरक्षा दोनों प्राथमिकता में हैं, इसलिए आम नागरिक भी रूट डायवर्जन और सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करें। स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी से छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को होने वाली असुविधा को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही सूचना जारी कर दी है। यात्रा चरम पर, प्रशासन की बड़ी चुनौती हर साल की तरह इस बार भी अमरोहा में कांवड़ यात्रा का प्रभाव साफ नजर आ रहा है। बड़ी संख्या में शिवभक्तों के आने-जाने से जहां आस्था का माहौल है, वहीं ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी का निर्णय इस चुनौती को कम करने की दिशा में उठाया गया अहम कदम माना जा रहा है।

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर खास नजर: राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने की वार्डवार समीक्षा

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने विभिन्न वार्डों में संचालित निर्माण कार्यों की समीक्षा की राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने वार्डों का दौरा कर निर्माण कार्यों की जमीनी हकीकत परखी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर खास नजर: राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने की वार्डवार समीक्षा शहर विकास की रफ्तार पर फोकस, राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने किए निर्माण कार्यों का निरीक्षण निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हटाए जाएं अतिक्रमण भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने शनिवार को अधिकारियों को निर्देश दिए कि अतिक्रमण हटाने के कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि निकाय अधिकारी अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से करें। दर्जनों कॉलोनियों को मिलेगी सीसी रोड, स्ट्रीट लाइट्स राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने इच्छापूर्ण महादेव मंदिर, सोनागिरी ए-सेक्टर में रोड, नाली, शेड और पार्क की बाउंड्रीवाल का कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए। आनंद नगर मल्टी का कार्य नवंबर तक पूर्ण करने और उसका नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखने का सुझाव दिया। विभिन्न कॉलोनियों में सीवेज चैंबर की सफाई, सीसी रोड एवं स्ट्रीट लाइटों के लिए इस्टीमेट तैयार करने को कहा गया। अमृत 2.0 योजना से जुड़ेंगे सीवेज, अतिक्रमण हटेगा इंद्रपुरी ए-सेक्टर में रोड निर्माण, मंदिर की छत और फ्लोरिंग, सीवेज लाइन सुधार के निर्देश दिए। नवोदा कैंसर हॉस्पिटल के पास गंदगी फैलाने पर नोटिस जारी करने के आदेश दिए गए। अमृत 2.0 योजना से सीवेज लाइन जोड़ने, पार्कों की सफाई, गड्ढों की मरम्मत व अतिक्रमण हटाने पर भी जोर दिया गया। तेज़ी से पूरे करें विकासकार्य: राज्यमंत्री श्रीमती गौर इंद्रपुरी सी-सेक्टर में दुकानदारों द्वारा किए गए 10-10 फीट तक के अतिक्रमण को हटाने के निर्देश दिए और कार्यवाही के दौरान पुलिस बल की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया। सतनामी नगर, अर्जुन नगर, रोजवुड कॉलोनी आदि में नाले और सड़कों के निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाने और स्ट्रीट लाइट कार्य में तेजी लाने के आदेश भी दिए गए। बैठक में लवकुश यादव, पार्षद श्रीमती ममता विश्वकर्मा, श्रीमती छाया ठाकुर, संतोष ग्वाला सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।