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345 करोड़ के विकास कार्यों के साथ झाबुआ चमकेगा, CM मोहन यादव ने किया लोकार्पण

भोपाल/झाबुआ मध्यप्रदेश में 12 सितंबर का दिन महिलाओं के नाम रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने झाबुआ जिले के पेटलावद में प्रदेश की 1.26 करोड़ से अधिक लाड़ली बहनों के खाते में 1541 करोड़ से ज्यादा रुपये ट्रांसफर किए। यह राशिलाड़ली बहना योजना की 28वीं किश्त थी। इसके अलावा प्रदेश के मुखिया ने 53.48 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों को 320.89 करोड़ रुपये, 31 लाख से ज्यादा बहनों को एलपीजी सिलेंडर रीफिलिंग के लिए 48 करोड़ रुपये, बीपीएल परिवारों के दिव्यांग हितग्राहियों को कस्टमाइज्ड व्हीकल दिए। उन्होंने पेटलावद में 345.34 करोड़ के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन भी किया। उन्होंने विभिन्न विभागों की थीम पर आधारित प्रदर्शनियों का अवलोकन किया। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पारंपरिक झूलड़ी-पगड़ी पहनाकर और तीर कमान भेंटकर भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में सीएम डॉ. यादव ने कांग्रेस पर भी जमकर प्रहार किया।   कांग्रेसियों के पेट में मरोड़ें उठने लगीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि झाबुआ खेती और सब्जी उत्पादन में नई इबारत लिख रहा है। यहां का टमाटर देश के साथ-साथ विदेशों तक जाता है। लाड़ली बहनों को आज एक बार फिर सिंगल क्लिक से 1250 रुपए की सौगात मिली है। यह रक्षाबंधन के आनंद की तरह है। कांग्रेस ने महिलाओं को कभी एक रुपया भी नहीं दिया। कांग्रेसियों को शर्म आनी चाहिए, उन्हें डूब मरना चाहिए। हमारी सरकार ने सावन के महीने में जब लाड़ली बहनों को 1500 रुपये दिए तो कांग्रेसियों के पेट में मरोड़ें उठने लगीं। उनको नींद नहीं आ रही थी, उनका पूरा ध्यान वोट बैंक पर था। कांग्रेसियों ने बेशर्म होकर कहा कि बहनों को पैसे दो तो शराब पी जाती हैं। बहनों को इस बात का जवाब कांग्रेसियों को देना होगा। बहनें पूरे परिवार को देखकर चलती हैं। वे बच्चों की दवाई से लेकर हर चीज में पैसे का सदुपयोग करती हैं। कांग्रेसी जो मन में आ रहा है बेशर्मी से बोल रहे हैं। पूरा प्रदेश इन्हें माफ नहीं करेगा। इस राज्य के लोग बहनों का अपमान कभी बर्दाश्त करने वाले नहीं हैं। कांग्रेस ने कभी फूटी कौड़ी नहीं दी। उन्होंने कभी बहनों की चिंता नहीं की। जब हम बहनों के लिए योजना लेकर आए तो कांग्रेसी सवाल-जवाब करने लगे। कांग्रेसी देख लें, योजना शुरू भी हुई और चल भी रही है। इस योजना में अभी तक 41 हजार करोड़ की राशि दी जा चुकी है। कांग्रेसियों सुन लो बहनों के लिए हमारे खजाने में कोई कमी नहीं है। हम भविष्य में बहनों को 3 हजार रुपये देने के लिए वचनबद्ध हैं। झाबुआ के लोगों को बाहर जाने की नहीं होगी जरूरत सीएम डॉ. यादव ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में यहां मौजूद कपास की मिलें बंद होती गईं, कपास के खेत घटते गए। परिणाम यह हुआ कि प्रदेश में कपड़ा बनना करीब-करीब बंद हो गया। अब झाबुआ के लोगों को बाहर जाने की जरूरत नहीं है। इस पूरे क्षेत्र में रोजगार के बड़े पैमाने पर अवसर मिलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशवासियों को जीएसटी से छूट मिली है। वे भारत को आत्मनिर्भर बनाते हुए दुनिया के सामने चट्टान की तरह खड़े हैं। दुनिया के हर मंच पर प्रधानमंत्री मोदी के पहुंचने से ही सबेरा आता है। दुनिया भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है। भारत सरकार देश के 85 करोड़ जरूरतमंदों को नि:शुल्क राशन वितरित कर रही है। प्रधानमंत्री उज्जवला कनेक्शन के माध्यम से बहनों को 48 करोड़ रुपए की सहायता राशि भेजी गई है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सुरक्षा संदेश, हेलमेट पहनकर छात्रों को किया जागरूक

हेलमेट पहनकर स्टूडेंट्स को CM डॉ. यादव ने दिया सुरक्षा का पाठ, रोड सेफ्टी पर दिया जोर स्कूल के टॉपर्स स्कूटी चलाते वक्त यातायात सुरक्षा नियमों का रखें ध्यान : स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री सिंह भोपाल स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने आहवान किया है कि स्कूल शिक्षा विभाग के स्कूटी वितरण से लाभान्वित टॉपर्स स्कूटी चलाते वक्त यातायात सुरक्षा नियमों का सावधानीपूर्वक पालन करें। उन्होंने कहा कि 11 सितम्बर को भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विद्यार्थियों को स्कूटी वितरण कार्यक्रम में हेलमेट पहन कर स्कूटी पर सवारी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हेलमेट पहन कर विद्यार्थी को यह संदेश भी दिया कि वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना जरूरी है। यातायात नियमों का रखे ख्याल स्कूल एवं परिवहन मंत्री सिंह ने हितग्राही विद्यार्थियों से सुरक्षा के लिये यातायात नियमों का पालन करने का आहवान किया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि स्कूटी चलाते वक्त हेलमेट अनिवार्य रूप से पहने और पीछे बैठने वालो को भी दोनों हेलमेट पहनें के लिये कहें। ट्रैफिक सिग्नल, जेब्रा क्रॉसिंग और स्टॉप लाइन का पालन जरूर करें। वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग न करें, मोबाइल का उपयोग दुर्घटना का कारण बनता है। सड़‍क पर मुड़ने से पहले इंडिकेटर अवश्य दें और हॉर्न का अनावश्यक प्रयोग न करें। गलत दिशा में न चलें और ओवरटेक से बचें। वाहन की नियमित जाँच करें। ब्रेकलाइट, टायर और अन्य उपकरण सही हालत में रखें। दो पहिया वाहनों पर दो से ज्यादा लोग न बैठें। परिवहन मंत्री ने बताया कि परिवहन विभाग ने 16 वर्ष से 18 वर्ष तक की उम्र में 50 सीसी से कम इंजन वाली गेयरलेस वाहन के लिये, 16 साल की उम्र में लर्नर लायसेंस ओर 18 साल पूरे होने पर गियर वाले लाइट मोटर व्हीकल के लिये स्थायी ड्रायविंग लायसेंस दिये जाने का प्रावधान है। लर्नर लायसेंस जारी होने के 30 दिन बाद 180 दिन के भीतर ड्रायविंग टेस्ट देना अनिवार्य किया गया है। पिछले 3 वर्षों में 23 हजार 454 टॉपर्स को दी गई स्कूटी प्रदेश में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहन देने के लिये राज्य सरकार ने 3 वर्ष पहले नि:शुल्क स्कूटी प्रदाय योजना शुरू की थी। इस योजना में अब तक सरकारी हायर सेकेण्डरी स्कूल में 23 हजार 454 टॉपर विद्यार्थियों को 246 करोड़ 58 लाख रूपये की राशि व्यय कर स्कूटी प्रदान की गई है। टॉपर्स द्वारा चयन की गई पेट्रोल स्कूटी पर 90 हजार और इलेक्ट्रिकल व्हीकल चयन करने पर एक लाख 20 हजार रूपये की राशि उनके बैंक खातों में अंतरित की गई है। इस राशि में रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और हेलमेट की सुविधा भी शामिल है।  

जुलाई के मुकाबले अगस्त में बढ़ी महंगाई, रिटेल इनफ्लेशन 1.61% से बढ़कर 2.07% पर पहुंची

नई दिल्ली अगस्त में रिटेल महंगाई दर जुलाई के 1.6% से थोड़ा बढ़कर 2.7% पर पहुंच गई है। इसकी वजह कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी है।रिटेल महंगाई के आधिकारिक आंकड़े आज सरकार ने जारी किए हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी, RBI का लक्ष्य महंगाई को 4% ±2% की सीमा में रखने का है। जुलाई में खाने-पीने के सामानों की कीमत घटी थीं महंगाई के बास्केट में लगभग 50% योगदान खाने-पीने की चीजों का होता है। इसकी महीने-दर-महीने की महंगाई माइनस 1.06% से घटकर माइनस 1.76% हो गई है। जून महीने में ग्रामीण महंगाई दर 1.72% से घटकर 1.18% हो गई है। वहीं शहरी महंगाई 2.56% से घटकर 2.05% पर आ गई है। RBI ने महंगाई का अनुमान घटाया 4 से 6 अगस्त तक हुई RBI मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग में भी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान 3.7% से घटाकर 3.1% कर दिया था। महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है? महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। ज्यादा चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की कीमत बढ़ेगी। इस तरह बाजार महंगाई की चपेट में आ जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो बाजार में पैसों का अत्यधिक बहाव या चीजों की शॉर्टेज महंगाई का कारण बनता है। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी। सब्जियों और दालों की अच्छी पैदावार का असर रिपोर्ट के अनुसार, लगातार अच्छी पैदावार और सप्लाई में सुधार की वजह से सब्जियों और दालों के दाम कम हुए हैं. सितंबर में भी टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है. यही वजह है कि जरूरी सामानों का दाम नियंत्रण में है. प्याज और आलू में सबसे तेज गिरावट बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि प्याज की खुदरा कीमतों में सालाना आधार पर 37.5% की गिरावट दर्ज की गई है, जो जनवरी 2021 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है. आलू की कीमतें भी 44 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं. दालों की कीमतें भी घटीं दालों में भी लगातार गिरावट जारी है. अगस्त में तुअर/अरहर की कीमतों में 29% तक की कमी आई है. इसके अलावा उड़द में 8.9%, मूंग में 5.2% और मसूर में 1.4% की गिरावट देखी गई है. ग्लोबल मार्केट और सरकार के कदम से मदद वैश्विक स्तर पर भी खाद्य और ऊर्जा की कीमतें नियंत्रण में हैं. साथ ही, सरकार ने FMCG और टिकाऊ वस्तुओं पर GST दरें कम की हैं, जिससे महंगाई को और राहत मिली है. बैंक ऑफ बड़ौदा का अनुमान है कि इसका असर CPI पर 55-75 बेसिस प्वाइंट तक दिखेगा. खरीफ सीजन का समर्थन रिपोर्ट में कहा गया है कि इस खरीफ सीजन में दालों की बुवाई का क्षेत्र बढ़ा है. इसी वजह से उत्पादन अच्छा हुआ है और कीमतों पर दबाव कम हुआ है. अनाजों में भी चावल की कीमतें धीरे-धीरे नीचे आ रही हैं. CPI से तय होती है महंगाई एक ग्राहक के तौर पर आप और हम रिटेल मार्केट से सामान खरीदते हैं। इससे जुड़ी कीमतों में हुए बदलाव को दिखाने का काम कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI करता है। हम सामान और सर्विसेज के लिए जो औसत मूल्य चुकाते हैं, CPI उसी को मापता है। अमेरिका में बढ़ी महंगाई! गैस, ग्रॉसरी, होटल और हवाई टिकट सब कुछ हुआ महंगा अमेरिका में खुदरा महंगाई दर अगस्त 2025 में बढ़कर 2.9 प्रतिशत हो गई, जो इस साल जनवरी के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गैस, किराने का सामान, होटल के कमरे, हवाई किराया, कपड़े और पुरानी कारों की कीमतों में बढ़ोतरी इसके पीछे प्रमुख कारण रही। जुलाई में खुदरा महंगाई दर 2.7 प्रतिशत थी, यानी अगस्त में इसमें 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि उस समय हुई है जब उपभोक्ता पहले से ही बढ़ती लागतों के दबाव में हैं, जिससे घरेलू बजट पर असर पड़ रहा है। कोर महंगाई भी बनी हुई है ऊंची न्यूज एजेंसी भाषा ने रिपोर्ट के अनुसार बताया कि अगर खाद्य और ईंधन की अस्थिर कीमतों को हटा दिया जाए, तो कोर महंगाई दर अगस्त में 3.1 प्रतिशत रही, जो जुलाई के समान है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि महंगाई का दबाव केवल अस्थायी कारकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक रूप से अर्थव्यवस्था में फैला हुआ है। फेड की अगली बैठक पर टिकी नजरें यह डेटा ऐसे समय आया है जब फेडरल रिजर्व अगले सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक करने वाला है। अनुमान लगाया जा रहा है कि नीति निर्धारक प्रमुख ब्याज दर को मौजूदा 4.3 प्रतिशत से घटाकर लगभग 4.1 प्रतिशत कर सकते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दरों में कटौती का दबाव और बढ़ती महंगाई मिलकर फेड के सामने एक कठिन स्थिति उत्पन्न कर रहे हैं। उन्हें एक संतुलन साधना होगा। जहां आर्थिक विकास को समर्थन मिले, लेकिन महंगाई भी काबू में रहे।

छत्तीसगढ़ बाढ़ में सीएम मोहन की मानवीय पहल, राहत सामग्री बालाघाट से रवाना

भोपाल मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छत्तीसगढ़ के बाढ़ पीड़ितों के लिए मानवीय पहल की है। बालाघाट से दो ट्रक राहत सामग्री रवाना की गई है। इससे पहले सीएम ने पांच करोड़ रुपये की सहायता भी दी थी। मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव ने पड़ोसी छत्तीसगढ़ राज्‍य में अतिवृष्टि एवं बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए मानवीय पहल की है। बाढ़ पीड़ित लोगों की मदद के लिए बालाघाट से राहत सामग्री लेकर 02 ट्रक छत्तीसगढ़ के रायपुर के लिए रवाना किये गए है। बालाघाट-सिवनी लोकसभा क्षेत्र की सांसद भारती पारधी ने राहत सामग्री को झंडी दिखाकर बालाघाट से रायपुर के लिए रवाना किया। इस अवसर पर कलेक्‍टर मृणाल मीना समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर छत्तीसगढ़ के बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री से भरे 02 ट्रक रवाना किये गए है। इनमें बर्तन, कपड़े, चादर, कम्‍बल और राशन सामग्री शामिल है। बाढ़ पीड़ितों के लिए 100 क्विंटल चावल, 10 क्विंटल दाल, 15 क्विंटल नमक, 1500 कम्‍बल, 02 हजार चादर और 950 बर्तन सेट मध्‍यप्रदेश की ओर से छत्तीसगढ़ भेजे गए है। मध्‍यप्रदेश की ओर से उपलब्‍ध करायी गई यह मदद छत्तीसगढ़ के बाढ़ पीड़ितों के लिए मुश्किल वक्‍त में सहारा बनेगी।

CM मोहन का बहनों को तोहफा: लाड़ली बहना योजना की 28वीं किस्त में 1.26 करोड़ खातों में पहुँचे ₹1541 करोड़

पेटलावद मध्य प्रदेश की करोड़ों लाड़ली बहनों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार, 12 सितंबर को झाबुआ जिले के पेटलावद से लाड़ली बहना योजना की 28वीं किस्त जारी कर दी है। इस बार योजना के तहत 1.26 करोड़ महिला लाभार्थियों के खातों में 1541 करोड़ रुपए से ज्यादा भेजे गए हैं।  पेंशनधारियों को भी राहत महिला लाभार्थियों के साथ ही मुख्यमंत्री ने 53.48 लाख से ज्यादा पेंशनधारियों (pensioners) के खातों में भी 320.89 करोड़ रुपए की राशि डाली। इस कदम से बुजुर्गों और पेंशन पाने वालों की जिंदगी में आर्थिक राहत की उम्मीद जगी है। गृहिणियों को मिला सिलेंडर रीफिल सहयोग कार्यक्रम में 31 लाख से ज्यादा महिलाओं को गैस सिलेंडर (gas cylinder) रीफिलिंग के लिए 48 करोड़ रुपए की राशि ट्रांसफर की गई। यह मदद खासतौर पर गृहिणियों (housewives) को मिलेगी, जो महंगे सिलेंडर खर्च से परेशान रहती हैं। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में 345.34 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले विकास कार्यों (development works) का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया। इसमें सड़क (roads), शिक्षा (education), स्वास्थ्य (health) और पेयजल (drinking water) जैसी जरूरी सुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। दीपावली के बाद से मिलेंगे 1500 मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की है कि दीपावली के बाद से हर महिला को 1500 रुपए  दिए जाएंगे। यह राशि 2028 तक बढ़कर 3000 रुपए हो जाएगी, जो महिलाओं को आर्थिक रूप से और मजबूत बनाने में मदद करेगी। लाड़ली बहना योजना की विशेषताएं     लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को सीधे बैंक खाते में सहायता राशि भेजी जाती है। इस बार 12 सितंबर को योजना की किस्त जारी की गई, जो आमतौर पर 10-11 तारीख को दी जाती थी। ऐसे में इस बार की राशि के आने में एक दिन का विलम्ब देखने को मिला है। एमपी लाड़ली बहना योजना की 28वीं किस्त पर एक नजर…     सीएम मोहन यादव ने 12 सितंबर को झाबुआ जिले के पेटलावद से लाड़ली बहना योजना की 28वीं किस्त जारी की। इसमें 1.26 करोड़ महिलाओं के खातों में 1541 करोड़ रुपए भेजे गए।     31 लाख से अधिक महिलाओं को गैस सिलेंडर रिफिलिंग के लिए 48 करोड़ रुपए जारी किए गए।     दीपावली के बाद हर महिला को 1500 रुपए दिए जाएंगे, जो 2028 तक बढ़कर 3000 रुपए हो जाएंगे।     लाड़ली बहना योजना का लाभ उन महिलाओं को मिलता है, जो मध्य प्रदेश की निवासी हों और जिनके परिवार में आयकर दाता या सरकारी कर्मचारी न हों। पात्रता और आवेदन प्रक्रिया लाड़ली बहना योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं महिलाओं को मिलता है, जो मध्य प्रदेश की निवासी हों और जिनके परिवार का कोई सदस्य आयकर दाता न हो या सरकारी कर्मचारी न हो। योजना का लाभ विवाहित, तलाकशुदा, या विधवा महिलाओं को मिलता है। अगर किसी महिला को योजना से संबंधित कोई समस्या हो या सहायता राशि न मिल रही हो, तो वह 0755 2700800 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकती है। इसके अलावा, वे लाडली बहना योजना के ऑफिशियल पोर्टल cmladlibahna.mp.gov.in पर भी जाकर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकती हैं। लाडली बहना योजना: कब म‍िलेंगे 1500 रुपये मुख्‍यमंत्री लाडली बहना योजना की 28वीं क‍िस्‍त का पैसा 1.26 करोड़ मह‍िलाओं के खाते में ट्रांसफर कर द‍िया गया है। मुख्‍यमंत्री डॉक्‍टर मोहन यादव ने झाबुआ के पेटलावद से मह‍िलाओं के खाते में 1541 करोड़ रुपये ट्रांसफर क‍िए। इस दौरान उन्‍होंने फ‍िर से दोहराया कि‍ भैया दूज के बाद मह‍िलाओं के खाते में 1500 रुपये आने लगेंगे। हेलिकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाने की योजना गरीब व जरूरतमंद लोगों को मेडिकल इमरजेंसी के समय बड़े शहर के अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए हेलिकॉप्टर योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत हेलिकॉप्टर से मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाएगा। इसका पूरा खर्च सरकार उठाती है। कब मिलेंगे 1500, कैसे पहुंचेंगे 3000, सीएम ने खुद बताया     दिवाली के बाद भाई दूज के तुरंत बाद से हर महीने मिलेंगे 1500 रुपये     2026 से महिलाओं को 2000 रुपये महीना मिलेंगे     2027 से लाडली बहनों को 2500 रुपये मिलना शुरू हो जाएगा     2028 से लाडली बहनों की राशि को बढ़ाकर 3000 रुपये कर दिया जाएगा LPG गैस रिफिल का पैसा भी ट्रांसफर लाडली बहना योजना और सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के अलावा 31 लाख से अधिक बहनों को एलपीजी सिलेंडर रीफिलिंग की 48 करोड़ रुपये भी भेज दिए गए हैं। झाबुआ जिले के पेटलावद में 345.34 करोड़ के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। पेंशनधारकों के खाते में भी पहुंचा पैसा लाडली बहना योजना के अलावा सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत 53.48 लाख लाभार्थियों के खाते में 320.89 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। प्रदेश में बुजुर्गों, दिव्यांगों व महिलाओं के लिए कई तरह की पेंशन योजना चलाई जा रही हैं। लाडली बहना की 28वीं क‍िस्‍त ट्रांंसफर, ऐसे चेक करें स्‍टेटस मुख्‍यमंत्री लाडली बहना योजना की 28वीं क‍िस्‍त जारी कर दी गई है। अगर आपके मोबाइल पर मैसेज नहीं आया है तो ऑफ‍िश‍ियल पोर्टल https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाकर आवेदन एवं भुगतान की स्‍थ‍ित‍ि पर जाकर चेक कर सकते हैं। लाडली बहना योजना की 28वीं क‍िस्‍त जारी, चेक करें मोबाइल लाडली बहना योजना की 28वीं क‍िस्‍त का पैसा ट्रांसफर कर द‍िया गया है। मुख्‍यमंत्री मोहन यादव ने स‍िंगल क्‍ल‍िक के माध्‍यम से 1541 करोड़ रुपये मह‍िलाओं के खाते में भेज द‍िए हैं। Ladli Behna Yojana: 25 मार्च से शुरू हुए थे फॉर्म भरना लाडली बहना योजना की शुरुआत 25 मार्च, 2023 से हुई थी। इसके बाद बहुत सारे नाम योजना से हटाए भी गए। वर्तमान में 1.26 करोड़ महिलाओं को इस योजना का पैसा मिल रहा है। हालांकि 2023 से ही नए रजिस्ट्रेशन बंद पड़े हैं। लाडली बहना योजना: अंतिम सूची में नाम है या नहीं, ऐसे चेक करें लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त का पैसा किसी भी समय खाते में आने वाले हैं। आपका नाम अंतिम सूची में है या हट गया है, इसका पता आप ऑनलाइन कर सकते हैं। ऑफिशियल पोर्टल पर आपको अंतिम सूची के टैब पर क्लिक करना होगा। … Read more

सिर्फ 20 रुपये में बनती है दवा, बिकती है 100 में – मेडिकल स्टोर्स कितनी कमाई कर रहे?

नई दिल्ली दवा की असली कीमत और उस पर मिलने वाला मुनाफा शायद ही आम लोगों को पता हो. हम और आप जिस दवा की स्ट्रिप 100 रुपये में खरीदते हैं, वही दवा मेडिकल स्टोर वाले को कितने में पड़ती है और उस पर कितना मार्जिन जुड़ता है, यह सुनकर आप चौंक सकते हैं. इसका जवाब जानने के लिए हमने दवाइयों के डिस्ट्रीब्यूटर  से बात की. डिस्ट्रीब्यूटर ने विस्तार से बताया कि दवाइयां बेचने पर कितना मार्जिन मिलता है. आइए, आपको भी बताते हैं. जब हमने डिस्ट्रीब्यूटर से पूछा कि मेडिकल वाले दवाइयों पर कितना प्रॉफिट कमा लेते हैं, तब उन्होंने बताया कि दवाइयों में प्रॉफिट मार्जिन, कंपनियों, दवा के प्रकार और कई जगहों पर निर्भर करता है. मुख्य तौर पर देखें तो दवाइयों का प्रॉफिट मार्जिन 4-5 तरह का होता है.  फार्मा दवाइयों पर मार्जिन सबसे पहले, फार्मा कैटेगरी की दवाइयों में 20 से 30% का मार्जिन होता है. इसमें न्यूनतम बीस प्रतिशत तो होता ही है. इस कैटेगरी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव डॉक्टर को दवाई के लिए परामर्श देता है और उसके अनुसार जो दवाइयां बेची जाती हैं, उनमें बीस से पैंतीस प्रतिशत का मार्जिन मिल जाता है.  जेनरिक दवाइयों पर ज्यादा फायदा दूसरी तरह की दवाइयां होती हैं जेनरिक. जेनरिक दवाइयों में प्रॉफिट मार्जिन ज्यादा होता है. जेनरिक दवाइयां रिटेलर खुद अपने पास से बेचने की कोशिश करता है या ग्राहक को बेचता है. रिटेलर्स को इस तरह की दवाइयां बेचने में 50 से 75 प्रतिशत का प्रॉफिट होता है.  डॉक्टर्स के जरिए भी होती है कमाई इसके अलावा, तीसरी कैटेगरी है पर्सनल मोनोपोलाइज़्ड कंपनियां. इसमें डॉक्टरों को उन दवाइयों को रिकमेंड करने के लिए कहा जाता है, जिसमें डॉक्टर का कमीशन भी शामिल हो सकता है. इस तरह की दवाइयों में 30 से 35 फीसदी तक का प्रॉफिट मार्जिन होता है. इनमें मैटेरियल का प्रतिशत थोड़ा कम होता है. क्या क्वालिटी का मसला? इसके अलावा, कुछ दवाइयां ऐसी होती हैं, जो अलग-अलग कंपनियां बनाती हैं. उनमें मैटेरियल का इस्तेमाल 90 फीसदी तक ही होता है और ऐसी दवाइयों में 90 फीसदी तक बचत होती है.  दरअसल, दवाइयों में मैटेरियल उपयोग का क्राइटेरिया 90 से 110 फीसदी तक होता है. कई कंपनियां दवाइयों में 90 फीसदी तक के मैटेरियल का इस्तेमाल करती हैं, जो रिटेलर को काफी कम कीमत में मिलती है. जेनरिक में मैटेरियल 100 फीसदी तक होता है. सरकार के नियम हैं कि दवा 90% से कम या 110% से ज्यादा नहीं हो सकती. मतलब, 90% में भी अगर सामग्री पूरी तरह से है, तो दवा शुद्ध मानी जाएगी.   यही कारण है कि कई दवा कंपनियां ज्यादा मुनाफा कमाती हैं, क्योंकि वे दवा में मिनिमम मात्रा तक ही मैटेरियल मिलाती हैं. वहीं, बड़ी कंपनियां दवाइयों में अच्छी मात्रा में सामग्री मिलाती हैं. ऐसे में कुछ कंपनियों की दवाइयों में 90 फीसदी तक प्रॉफिट होता है. मान लीजिए अगर दवा 100 रुपये की है तो फार्मा की बड़ी कंपनी उसे 65 रुपये में बनाएगी. वहीं, जेनरिक दवा 25 रुपये में बनकर तैयार हो जाएगी.  खांसी की दवाई पर कितना मार्जिन? अनीष बताते हैं कि जो खांसी की जेनरिक दवाई होती है, वह 8 रुपये में बनकर आती है और दुकानदारों को 20 से 30 रुपये तक मिल जाती है. अब इसकी MRP 80-100 रुपये या ज्यादा होती है और ऐसे में इसमें अच्छा खासा मुनाफा हो जाता है.

उड़ान भरते ही रनवे पर गिरा SpiceJet विमान का पहिया, मुंबई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग

मुंबई  गुजरात के कांडला से मुंबई आ रहे स्पाइसजेट के Q400 विमान का आउटर व्हील टेकऑफ के तुरंत बाद रनवे पर गिर गया. मुंबई में लैंडिंग के समय पायलट ने इमरजेंसी की घोषणा की, हालांकि विमान की सेफ लैंडिंग हुई. स्पाइसजेट का बॉम्बार्डियर DHC8-400 विमान, जिसकी उड़ान संख्या SG-2906 थी, ने शुक्रवार दोपहर 2.39 बजे कांडला एयरपोर्ट के रनवे नंबर 23 उड़ान भरी. टेक आफ के तुरंत बाद टावर कंट्रोलर ने विमान से एक काले रंग की बड़ी वस्तु रनवे पर गिरती देखी. इंस्पेक्शन टीम ने जाकर देखा तो प्लेन का पहिया गिरा हुआ था. फ्लाइट ने दोपहर 15:51 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CSMIA) पर तकनीकी खराबी की सूचना के बाद इमरजेंसी लैंडिंग की. एयरपोर्ट प्रशासन ने सावधानी के तौर पर फुल इमरजेंसी घोषित किया था. हालांकि, विमान ने रनवे नंबर 27 पर सुरक्षित लैंडिंग की. विमान में चालक दल समेत करीब 78 यात्री सवार थे. वे सभी सुरक्षित हैं. लैंडिंग के बाद एयरपोर्ट पर सामान्य परिचालन बहाल हो गया. बॉम्बार्डियर DHC8-400 में ट्राइसाइकिल लैंडिंग गियर सिस्टम होता है, जिसमें नोज गियर पर दो पहिये और प्रत्येक मुख्य लैंडिंग गियर पर दो मुख्य पहिये होते हैं. स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, '12 सितंबर को कांडला से मुंबई जा रहे स्पाइस जेट Q400 विमान का एक बाहरी पहिया उड़ान भरने के बाद रनवे पर पाया गया. विमान ने मुंबई की अपनी यात्रा जारी रखी और हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतरा. लैंडिंग के बाद, विमान टर्मिनल तक पहुंचा और सभी यात्री सामान्य रूप से उतरे.' इससे पहले 29 अगस्त को स्पाइसजेट की दिल्ली-श्रीनगर फ्लाइट की श्रीनगर एयरपोर्ट पर प्रायोरिटी लैंडिंग करानी पड़ी थी. अधिकारियों ने बताया कि फ्लाइट अचानक तेजी से नीचे आने लगी, तभी कैप्टन ने श्रीनगर एयरपोर्ट के एटीसी से प्रायोरिटी लैंडिंग की अनुमति मांगी. दरअसल, फ्लाइट में केबिन प्रेशर की चेतावनी मिली थी. इसके बाद फ्लाइट SG-385 को श्रीनगर एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा गया. स्पाइसजेट की इस फ्लाइट में 4 बच्चों सहित 205 यात्री और चालक दल के 7 सदस्य सवार थे. यात्रियों या चालक दल के सदस्यों ने किसी भी प्रकार की चिकित्सा सहायता का अनुरोध नहीं किया.

रामलला की शरण में मॉरीशस सरकार, प्रधानमंत्री डॉ. नवीन चंद्र रामगुलाम का भव्य स्वागत

श्रीरामलला के दरबार में प्रधानमंत्री रामगुलाम ने टेका मत्था रामलला की शरण में मॉरीशस सरकार, प्रधानमंत्री डॉ. नवीन चंद्र रामगुलाम का भव्य स्वागत  एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया अभिनंदन, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक कार्यक्रमों से गूंजी अयोध्या  भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहुंचे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर  रामलला की आरती उतारी, मंदिर निर्माण कार्यों का किया अवलोकन अयोध्या  प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या शुक्रवार को एक विशेष अवसर की साक्षी बनी, जब मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीन चंद्र रामगुलाम अपनी पत्नी वीना रामगुलाम और करीब 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां पहुंचे। प्रधानमंत्री रामगुलाम ने सबसे पहले भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर में पत्नी के साथ विधि-विधान से दर्शन-पूजन कर लोककल्याण की कामना की। वह भूटान के प्रधानमंत्री के बाद दूसरे राष्ट्राध्यक्ष बने, जिन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन-पूजन किए। दोपहर करीब 12 बजे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री अपनी पत्नी वीना रामगुलाम और 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचे। मुख्यमंत्री योगी बने स्वागत-अभिनंदन के सूत्रधार एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं मौजूद रहे और उन्होंने प्रधानमंत्री का औपचारिक स्वागत किया। योगी ने फूलों का गुलदस्ता और स्मृति चिह्न भेंट कर ‘अतिथि देवो भवः’ की परंपरा निभाई। एयरपोर्ट परिसर में रेड कार्पेट बिछाकर, मंत्रोच्चारण और पारंपरिक कलश-आरती से प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया गया। इस दौरान ढोल-नगाड़ों और शंखनाद की गूंज ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। रामलला के दरबार में भावविभोर प्रधानमंत्री एयरपोर्ट से निकलने के बाद प्रधानमंत्री का काफिला भारी सुरक्षा घेरे के बीच सीधे श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचा। वहां उन्होंने पत्नी के साथ रामलला की आरती उतारी और लंबे समय तक प्रभु का दर्शन करते रहे। शीश नवाकर भगवान राम से दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती का आशीर्वाद मांगा। करीब आधा घंटे तक परिसर में रहकर उन्होंने मंदिर निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। इस दौरान कई बार उनके मुख से “जय श्रीराम” के उद्घोष गूंजे। पीएम का आगमन सांस्कृतिक एकता का प्रतीक: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मॉरीशस के प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत और मॉरीशस के बीच सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रतीक है। वहीं, प्रधानमंत्री डॉ. रामगुलाम ने भी अयोध्या की पवित्र धरती पर आने पर अपनी गहरी प्रसन्नता व्यक्त की और भगवान राम के प्रति आस्था प्रकट की। राम मंदिर परिसर में हुआ विशेष आयोजन राम मंदिर परिसर में प्रधानमंत्री डॉ. नवीन चंद्र रामगुलाम और उनके प्रतिनिधिमंडल के लिए टाटा कंपनी की ओर से मंदिर निर्माण से जुड़ी एक विशेष लघु फिल्म प्रदर्शित की गई। करीब दो मिनट की इस प्रस्तुति में मंदिर की भव्यता, शिल्पकला और निर्माण की अद्भुत झलक दिखाई गई। फिल्म की जानकारी और विवरण सीडीओ कृष्ण कुमार सिंह ने विस्तार से प्रस्तुत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं प्रधानमंत्री को राम मंदिर का मॉडल भेंट कर सम्मानित किया। वहीं, प्रधानमंत्री की पत्नी वीना रामगुलाम को अंगवस्त्र विशेष सम्मान प्रदान किया गया। इस क्षण ने पूरे माहौल को और अधिक गरिमामय बना दिया। भारत-मॉरीशस संबंधों की पृष्ठभूमि भारत और मॉरीशस के बीच संबंध सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गहराई से जुड़े हुए हैं। मॉरीशस की आबादी का बड़ा हिस्सा भारतीय मूल का है और वहां रामायण, भगवान राम और भारतीय परंपराओं के प्रति विशेष आस्था देखी जाती है। मॉरीशस के त्योहार, साहित्य और सांस्कृतिक जीवन में रामकथा आज भी जीवंत है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री रामगुलाम का यह अयोध्या दौरा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है। एयरपोर्ट पर अतिथि देवो भव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद प्रधानमंत्री का स्वागत किया, रेड कार्पेट, तिलक, पुष्पवर्षा और पारंपरिक आरती से हुआ अभिनंदन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों व ढोल-नगाड़ों ने माहौल को सजा दिया था। वहीं प्रधानमंत्री रामगुलाम भी अपने स्वागत से भावविभोर होकर इसे अविस्मरणीय बताया। तगड़ी रही सुरक्षा व्यवस्था अयोध्या में प्रधानमंत्री के आगमन पर तगड़े सुरक्षा इंतजाम। एयरपोर्ट से लेकर मंदिर तक चप्पे-चप्पे पर पुलिस व सुरक्षा बल तैनात, सीसीटीवी से पूरे मार्ग की निगरानी। मंदिर परिसर में पुलिस बल और एटीएस की टीमों ने कमान संभाल रखी थी।

तीन साल में यूपीआईटीएस ने आंकड़ों और प्रभाव में खुद को दोगुना से ज्यादा किया मजबूत

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो : तीन साल में बढ़ा आकार, बढ़ी पहचान तीन साल में यूपीआईटीएस ने आंकड़ों और प्रभाव में खुद को दोगुना से ज्यादा किया मजबूत  2023 से 2025 तक इस मेगा आयोजन में प्रदर्शकों और विज़िटर्स की संख्या में हुआ भारी इजाफा  यूपीआईटीएस में विदेशी खरीदारों की बढ़ती उपस्थिति ने उत्तर प्रदेश को दिलाई वैश्विक पहचान प्रदेश की औद्योगिक, कृषि और सांस्कृतिक ताकत को दुनिया के सामने रखने का मंच बना यूपीआईटीएस  हर साल बढ़ रही प्रदर्शकों, खरीदारों और विज़िटर्स की संख्या राज्य के औद्योगिक परिदृश्य के विस्तार का दे रही संकेत  यूपीआईटीएस 2025 में 400 से बढ़कर 500 विदेशी खरीदारों की भागीदारी का रखा गया है लक्ष्य 25 से 29 सितंबर के बीच होने वाले मेगा आयोजन के लिए क्यूआर कोड आधारित एप से होगा स्मार्ट रजिस्ट्रेशन  लखनऊ  उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) ने महज़ तीन वर्षों में खुद को देश और दुनिया के व्यापार मानचित्र पर स्थापित कर लिया है। 2023 में हुए पहले आयोजन से लेकर 2025 के तीसरे संस्करण तक यह शो हर साल आकार, प्रभाव और भागीदारी के लिहाज से और भव्य होता जा रहा है। प्रदर्शकों, विज़िटर्स और विदेशी खरीदारों की लगातार बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि यूपी अब निवेश, व्यापार और वैश्विक पहचान के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शुरू हुए यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का तीसरा संस्करण 25 से 29 सितंबर के बीच ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में होने जा रहा है। यह केवल प्रदर्शनी नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, कृषि और सांस्कृतिक ताकत को दुनिया के सामने रखने का मंच बन गया है। हर साल इसमें प्रदर्शकों, खरीदारों और विज़िटर्स की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि राज्य का औद्योगिक परिदृश्य किस तरह विस्तार पा रहा है। 2023 : प्रथम संस्करण से मिली नई दिशा उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई। इसका उद्घाटन महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था। यह आयोजन राज्य के उद्योग जगत के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ। इसमें करीब 70 हजार B2B विज़िटर्स पहुंचे, जिनमें उद्योग और कारोबार जगत के बड़े नाम शामिल थे। 2 लाख 37 हजार बी2सी विज़िटर्स ने घरेलू बाजार के प्रति गहरी दिलचस्पी दिखाई। वहीं, 1914 प्रदर्शक (एग्जिबिटर्स) ने अपने उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन किया। 400 से अधिक विदेशी खरीदार (फॉरेन बायर्स) ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नए अवसरों को तलाशा। इस पहले ही आयोजन ने यूपी के उत्पादों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई और स्थानीय उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जोड़ने का अवसर दिया। 2024 : दूसरे संस्करण में और भी भव्य आयोजन पहले संस्करण की सफलता ने 2024 के आयोजन को और बड़े पैमाने पर पेश करने की राह दिखाई। इस बार उद्घाटन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया। आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि यूपीआईटीएस का प्रभाव और दायरा लगातार बढ़ रहा है। इस दौरान, बी2बी विज़िटर्स की संख्या 1 लाख से अधिक रही, यानी लगभग दोगुनी बढ़त। वहीं, बी2सी विज़िटर्स की संख्या 3 लाख के पार पहुंच गई। 2122 प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया, जो पिछले साल से बढ़ोतरी का स्पष्ट संकेत है। इसके अतिरिक्त, इस मेगा इवेंट में 350 से अधिक विदेशी खरीदार शामिल हुए, जिनकी मौजूदगी ने राज्य के कारोबार को और अधिक अंतरराष्ट्रीय अवसर दिए। दूसरे संस्करण ने यह साबित कर दिया कि यूपीआईटीएस अब केवल राष्ट्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख मंच बन चुका है। 2025 : तीसरे संस्करण से नई ऊंचाइयों की ओर अब 2025 का तीसरा संस्करण आयोजित होने जा रहा है और यह पिछले दोनों आयोजनों से कहीं ज्यादा भव्य और बड़ा होने वाला है। आयोजकों ने जिन लक्ष्यों को सामने रखा है, वे इसकी बढ़ती ताकत को स्पष्ट करते हैं। इस बार 5 लाख से अधिक कुल विज़िटर्स आने की उम्मीद है। इनमें 2.5 लाख बी2बी विज़िटर्स और 3 लाख बी2सी विज़िटर्स शामिल होंगे। प्रदर्शकों की संख्या बढ़कर 2500 से अधिक हो जाएगी। 500 से अधिक विदेशी खरीदार आने की संभावना है, जिनके लिए अलग से समर्पित मीटिंग हॉल बनाए गए हैं। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अब क्यूआर कोड आधारित मोबाइल एप से होगी, जिससे पारदर्शिता और सुविधा सुनिश्चित होगी। तीसरा संस्करण इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार मानचित्र पर अपनी अलग और मजबूत पहचान बनाने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।    

PM सूर्यघर योजना में छत्तीसगढ़ का बड़ा लक्ष्य, 1.3 लाख नहीं, अब 5 लाख छतों पर सोलर पैनल लगाने की तैयारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ विद्युत उत्पादन के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत मार्च 2027 तक प्रदेश के 1 लाख 30 हजार घरों की छतों पर सौर पैनल लगाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन हमारा प्रयास इससे भी आगे बढ़कर इसे 5 लाख छतों तक पहुँचाने का है। इस योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं को बड़ी सब्सिडी दी जा रही है। 1 किलोवॉट से 3 किलोवॉट क्षमता तक के सोलर संयंत्र लगाने पर 30 हजार से लेकर 78 हजार रुपये तक की केंद्रीय सहायता सीधे बैंक खाते में दी जा रही है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार भी अतिरिक्त सब्सिडी दे रही है। इससे उपभोक्ताओं को कुल लागत का 75 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नवा रायपुर में आयोजित 97वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस “फोरम ऑफ रेगुलेटर्स” को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज हम अपने राज्य स्थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहे हैं। इन 25 वर्षों में हमारी उत्पादन क्षमता करीब 30,000 मेगावाट तक पहुँच गई है। स्टेट सेक्टर, निजी क्षेत्र और केंद्रीय सेक्टर की भागीदारी से आज छत्तीसगढ़ की धरती से 30 हजार मेगावाट से अधिक बिजली का उत्पादन हो रहा है। हाल ही में हमने 32 हजार मेगावाट से अधिक क्षमता वाले बिजलीघरों की स्थापना के लिए एमओयू किए हैं। इनमें ताप विद्युत, पंप स्टोरेज, परमाणु, बैटरी स्टोरेज और सौर ऊर्जा परियोजनाएँ शामिल हैं। हमारा लक्ष्य आने वाले वर्षों में 60 हजार मेगावाट से अधिक बिजली उत्पादन करने वाला राज्य बनने का है। मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि प्रति व्यक्ति बिजली खपत के मामले में छत्तीसगढ़ देश से काफी आगे है। यहाँ खपत 2,211 यूनिट है, जबकि भारत में यह औसत केवल 1,255 यूनिट है। छत्तीसगढ़ अपनी आवश्यकता से अधिक बिजली का उत्पादन कर रहा है और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। हम अपने राज्य के साथ ही पड़ोसी राज्यों को भी बिजली उपलब्ध करा रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दो दिन पहले ही हमने कैबिनेट बैठक में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 2030 तक लागू रहने वाली नीति में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को औद्योगिक नीति में प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री साय ने देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्युत नियामक आयोगों के अध्यक्षगण, पदाधिकारियों और विशेषज्ञों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देश के ऊर्जा क्षेत्र की प्रगति के लिए जो गहन विचार-विमर्श हुआ है, इसका उपभोक्ताओं सहित हम सभी को दूरगामी लाभ मिलेगा। उन्होंने आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ को चुनने हेतु विशेष आभार भी प्रकट किया। इस अवसर पर केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष जिश्नु बरुआ, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष हेमंत वर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव रोहित यादव सहित राज्य विद्युत नियामक आयोग के अन्य सदस्य एवं अन्य राज्यों से आए सदस्यगण उपस्थित थे।