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केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री के साथ मुख्यमंत्री ने की प्रदेश के सहकारिता विभाग की समीक्षा

प्रदेश में स्थापित होगा राज्य सहकारी महाविद्यालय, सहकारिता में शोध व अध्ययन को मिलेगा बढ़ावा: मुख्यमंत्री केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री के साथ मुख्यमंत्री ने की प्रदेश के सहकारिता विभाग की समीक्षा सहकारिता के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की उपलब्धियां अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय: केंद्रीय राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल सहकारिता को युवाओं के लिए कृषि, डेयरी, मत्स्य व सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का द्वार बनाया जाए: मुख्यमंत्री 12 सितम्बर से 12 अक्टूबर तक एम-पैक्स सदस्यता महाभियान, हर किसान-परिवार को सहकारिता से जोड़ने का संकल्प सहकारिता क्षेत्र में नवाचारों के मिल रहे अच्छे परिणाम, 16 बंद जिला सहकारी बैंक पुनर्जीवित, ₹306.92 करोड़ की सहायता से सभी बैंक लाभ में, वर्ष 2017 के कुल एनपीए 800 करोड़ से घटकर ₹278 करोड़ एफसीआई द्वारा 35 जनपदों में 96 स्थलों की पहचान, अप्रैल 2026 तक देश की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना पूरी होगी एम-पैक्स को ₹10 लाख तक ब्याज-मुक्त ऋण सीमा से बड़ा लाभ, अब तक ₹5,400 करोड़ का टर्नओवर और ₹120 करोड़ मार्जिन मनी 6,101 सोसाइटी में डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू, 6443 एम-पैक्स पीएम किसान समृद्धि केंद्र के रूप में हुए हैं अपग्रेड लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में सहकारिता के क्षेत्र में अध्ययन, अध्यापन और शोध को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सहकारी महाविद्यालय की स्थापना की तैयारी के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल की उपस्थिति में सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई। केंद्रीय राज्य मंत्री ने इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। बैठक में एम-पैक्स सदस्यता महाभियान पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सहकार से समृद्धि' मंत्र को आत्मसात करते हुए 12 सितम्बर से 12 अक्टूबर तक आयोजित अभियान के माध्यम से हर किसान और हर ग्रामीण परिवार को सहकारिता से जोड़ना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में आयोजित प्रथम सदस्यता महाअभियान में 30 लाख से अधिक नए सदस्य जुड़े थे, जिनमें 17.33 लाख किसान, 3.92 लाख अकुशल श्रमिक, 1.56 लाख कुशल श्रमिक, 2.20 लाख पशुपालक और 6,411 मत्स्यपालक शामिल थे। इस अभियान से सहकारिता क्षेत्र में ₹70 करोड़ का अंशदान प्राप्त हुआ था। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि द्वितीय महाअभियान को और व्यापक बनाया जाए तथा गाँव-गाँव में कैंप, ऑनलाइन/ऑफलाइन पंजीकरण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री ने कहा कि सहकारिता के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की उपलब्धियां अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय हैं और प्रधानमंत्री जी के विजन को साकार करने में प्रदेश अग्रणी भूमिका निभा रहा है। बैठक में सहकारी बैंकिंग सुधारों की समीक्षा करते हुए अवगत कराया गया कि 2017-18 से 2024-25 तक राज्य सरकार द्वारा 16 बंद जिला सहकारी बैंकों को ₹306.92 करोड़ की सहायता से पुनर्जीवित किया गया है। इन बैंकों का एनपीए 2017 में ₹800 करोड़ से घटकर मार्च 2025 में ₹278 करोड़ रह गया। मार्च 2025 तक ₹1000 करोड़ का ऋण व्यवसाय दर्ज हुआ और सभी बैंक लाभ में आ गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान और जमाकर्ताओं का विश्वास ही सहकारिता की असली पूँजी है, इसे हर हाल में सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने कहा कि सहकारिता भारतीय ग्रामीण समाज की प्राचीन परंपरा है। समाज को एकजुट रखने में इसकी बड़ी भूमिका है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सहकारिता क्षेत्र में नए इतिहास रच रहा है। अन्न भंडारण योजना की प्रगति पर चर्चा करते हुए बताया गया कि एफसीआई ने प्रदेश के 35 जनपदों में 96 स्थलों की पहचान की है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि 15 नवम्बर 2025 तक वित्तीय समापन प्रक्रिया पूरी कर जनवरी 2026 से निर्माण कार्य प्रारंभ कर अप्रैल 2026 तक पूरा कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि गोदाम निर्माण किसानों की समृद्धि का आधार है, इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।  इस अवसर पर एम-पैक्स के गठन और कार्यप्रणाली पर भी विस्तार से समीक्षा की गई। बताया गया कि 2024-25 में 266 एम-पैक्स के सापेक्ष चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 457 नये एम-पैक्स गठित हो चुके हैं, जबकि सितम्बर माह में 1,088 ग्राम पंचायतों में संगठन प्रक्रिया चल रही है। एम-पैक्स को उर्वरक वितरण हेतु ₹10 लाख तक ब्याज-मुक्त ऋण सीमा दी गई है, जिससे अब तक ₹5,400 करोड़ का टर्नओवर और ₹120 करोड़ की मार्जिन मनी प्राप्त हुई है। इसी प्रकार, 757 नवगठित एम-पैक्स के उन्नयन के लिए राज्य सरकार ₹1 लाख मार्जिन मनी तथा ₹1 लाख आधारभूत अवसंरचना विकास के लिए उपलब्ध करा रही है। डिजिटल भुगतान व्यवस्था के तहत 6,101 सोसाइटी में क्यूआर/यूपीआई आधारित प्रणाली लागू हो चुकी है। साथ ही, व्यवसाय विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए 5170 एम-पैक्स में सीएससी सेवाएं, 6443 एम-पैक्स को पीएम किसान समृद्धि केंद्र तथा 161 एम-पैक्स में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन औषधि केंद्र अस्पतालों के निकट स्थापित किए जाएं और सहकारिता को युवाओं के लिए कृषि, डेयरी, मत्स्य व सेवा क्षेत्रों में रोजगारमूलक अवसरों का द्वार बनाया जाए। बैठक में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रकाश शाही, धर्मपाल सिंह, संजय निषाद, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जेपीएस राठौर, भारत सरकार के सचिव सहकारिता डॉ. आशीष कुमार भूटानी, नाबार्ड के डीजीएम एनएल साहू तथा प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बदलते दौर में बदलती शादियां: दिखावे से हटकर अब प्रैक्टिकल अप्रोच, परिवार अपनाएंगे ये रास्ता?

इंदौर  बिटिया की शादी, सोना खरीदना है… ये हर माता-पिता की चाहत होती है, और यही भारतीय परंपरा भी है. लेकिन अब कुछ ऐसे माता-पिता भी हैं, जो कह रहे हैं कि बिना गहनों के कैसे बिटिया को विदा करेंगे? भारतीय शादी में श्रृंगार का अहम स्थान है, और उसमें सोने की ज्वेलरी सबसे ऊपर है. दुल्हन के श्रृंगार से लेकर वर-वधू के परिवारों की शान तक, हर जगह सोना ही मुख्य आकर्षण होता है. यही कारण है कि सोने के बिना भारतीय शादी की कल्पना अधूरी-सी लगती है.  हालांकि शादी में मिले सोने-चांदी को संजोकर रखना भी हमारी परंपरा रही है, जो एक तरह से सुरक्षित निवेश भी है. परंपरा के अनुसार, दुल्हन को विवाह के समय सोने के गहने देना न सिर्फ उसकी सुंदरता को बढ़ाने के लिए होता है, बल्कि यह उसके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का भी संकेत है.  दरअसल, मौजूदा समय में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं, लेकिन इस साल शादी का सीजन कई परिवारों के लिए मुश्किल भरा हो सकता है, क्योंकि इस वक्त सोना न सिर्फ महंगा हुआ है, बल्कि लगातार बढ़ती कीमतों ने उन परिवारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है, जिनके यहां इस साल शादी है.  एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए शादी का बजट सीमित होता है. इस बदले हुए दौर में लोग ज्वेलरी के अलावा डेकोरेशन, फोटोग्राफी और हनीमून पैकेज जैसी चीजों पर खर्च कर रहे हैं. खासकर शहरों में युवाओं की सोच बदल रही है. ऐसे में शादी का बजट बिगड़ता जा रहा है और सोने का भाव भी बढ़ता जा रहा है.  सबसे ज्यादा चिंता उन परिवारों को है, जिनके यहां इस साल शादी है, क्योंकि पिछले एक साल में सोना करीब 46-47% महंगा हो चुका है. जबकि इसी साल यानी 2025 में ही सोने की कीमत करीब 40 फीसदी बढ़ चुकी है. एक साल पहले 24K कैरेट 10 ग्राम गोल्ड की कीमत करीब 75 हजार रुपये थी, जो बढ़कर 1,10,000 रुपये को पार कर चुकी है.  एक साल में सोने की  कितनी बढ़ी है (24 कैरेट)  सितंबर-2024         सितंबर- 2025 ₹75,930         ₹1,11,280 यानी एक साल में 10 ग्राम सोने की कीमत में 35000 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है.  आमतौर पर एक मध्यवर्गीय परिवार शादी में 5 से 10 लाख रुपये खर्च करता है, एक अनुमान 5 लाख रुपये खर्च करने वाला परिवार कम से कम 20 ग्राम सोना खरीदता था, जो करीब 1.50 लाख रुपये में आ जाता था. लेकिन इस साल शादी में 5 लाख खर्च करने वाला परिवार परेशान है, वो सोच रहे हैं कि अब कितने का सोना खरीदें, क्योंकि सोना हर रोज महंगा हो रहा है, और बजट से भी बाहर हो रहा है. भारत में शादी को लेकर परंपरा और दिखावे का दबाव हमेशा रहा है. ऐसी स्थिति बिना गहनों की शादी भी नहीं हो सकती. 10 लाख रुपये तक शादी में खर्च करने वाले पहले 40 ग्राम सोना खरीदते थे, जो कि करीब 3 लाख रुपये में आज जाता था, अब इस साल 10 लाख रुपये शादी में खर्च करने वाले केवल 20 ग्राम ही सोना खरीद सकता है, क्योंकि 40 ग्राम खरीदने पर बजट बिगड़ जाएगा.  सोना महंगा होने पर अब क्या विकल्प?    सोने की कीमतों में उछाल का सीधा असर ज्वेलरी बाजार पर भी दिख रहा है. ज्वेलर्स की बिक्री में गिरावट आई है और कई दुकानदार किस्तों पर गहने देने की योजना ला रहे हैं. जानकार भी कह रहे हैं कि कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले महीनों में ज्वेलरी इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता है.  हालांकि सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद अब लोग परंपरा निभाने के लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं. शादी-ब्याह और त्योहारों में गहनों का महत्व बना रहता है, लेकिन बढ़ते दामों ने लोगों की पसंद और रणनीति दोनों बदल दी है.  1. हल्की और मिनिमल ज्वेलरी भारी नेकलेस और कंगन की जगह अब लोग हल्के डिजाइन चुन रहे हैं. छोटे चेन, स्लीक रिंग्स और मिनिमल ब्रेसलेट्स की डिमांड बढ़ी है. इससे सोना भी खरीदा जाता है और बजट पर बोझ भी कम पड़ता है. 2. 18 कैरेट और 14 कैरेट गोल्ड पहले लोग ज्यादातर 22 कैरेट और 24 कैरेट गोल्ड खरीदते थे, लेकिन अब 18K और 14K के गहने बनवा रहे हैं. इससे सोना सस्ता भी पड़ रहा है और फैशनेबल डिजाइनों की भी बड़ी रेंज मिलती है. 3. गोल्ड प्लेटेड और इमीटेशन ज्वेलरी खासकर शादी या फंक्शन के लिए, कई परिवार अब गोल्ड प्लेटेड ज्वेलरी या फिर हाई क्वालिटी वाली इमीटेशन ज्वेलरी ले रहे हैं. दिखने में ये लगभग असली सोने जैसी लगती हैं और खर्च काफी कम आता है. यानी बजट में होता है.  4. सिल्वर और प्लैटिनम सोने के विकल्प के तौर पर लोग अब सिल्वर और प्लैटिनम ज्वेलरी की तरफ रुख कर रहे हैं.. खासकर शहरी युवाओं में यह चलन बढ़ा है, क्योंकि यह आधुनिक लुक देता है और वैल्यू भी बनाए रखता है.

ट्रेन सफर में बोरियत खत्म! रेलवे ऐप पर फ्री मिलेगा मूवी और वेब सीरीज का मजा

मुंबई   सोचिए, आप ट्रेन में सफर कर रहे हैं, लंबी यात्रा है और आप बोर हो रहे हैं. काश! कोई नई फिल्म या वेब सीरीज देखने को मिल जाती. या फिर आपको अचानक जनरल टिकट लेना है, लेकिन लंबी लाइन देखकर पसीने छूट रहे हैं. या फिर आपको अपनी सीट पर गरमागरम खाना मंगवाना है. अब इन सभी कामों के लिए आपको 10 अलग-अलग ऐप रखने की कोई जरूरत नहीं है! भारतीय रेलवे ने अपने करोड़ों यात्रियों के लिए एक ऐसा 'सुपर ऐप' लॉन्च किया है, जो आपकी यात्रा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी समस्या का 'वन-स्टॉप सॉल्यूशन' है. इस क्रांतिकारी ऐप का नाम है- RailOne. और सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि अब इस ऐप में आपको मनोरंजन का भी पूरा खजाना मिलेगा! रेलवे ने इस ऐप में फ्री OTT (ओवर-द-टॉप) की सुविधा जोड़ दी है, जिससे आपका सफर अब कभी बोरिंग नहीं होगा. क्या है ये RailOne ऐप और क्यों है यह इतना खास? 1 जुलाई, 2025 को लॉन्च हुआ RailOne ऐप रेलवे की तरफ से एक बहुत बड़ा कदम है. इसे सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) ने बनाया है. इसका मकसद रेलवे की सभी अलग-अलग सेवाओं को एक ही छत के नीचे लाना है, ताकि यात्रियों को एक सहज और आसान अनुभव मिल सके. अब आपको UTS (जनरल टिकट के लिए), NTES (ट्रेन ट्रैकिंग के लिए) और IRCTC (रिजर्वेशन के लिए) जैसे कई ऐप अपने फोन में रखने की जरूरत नहीं है. ट्रेन में देखें फ्री फिल्में और वेब सीरीज रेलवे ने इसके लिए WAVES OTT प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी की है. यह प्लेटफॉर्म प्रसार भारती द्वारा नवंबर 2024 में लॉन्च किया गया था. आप अपनी यात्रा के दौरान फिल्में, वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री, ऑडियो प्रोग्राम और यहां तक कि गेम्स का भी मजा ले सकते हैं, वह भी बिल्कुल मुफ्त. सबसे अच्छी बात यह है कि यह कंटेंट 10 से ज्यादा भारतीय भाषाओं और बोलियों में उपलब्ध है. WAVES OTT ने देशभर के कंटेंट क्रिएटर्स, रीजनल ब्रॉडकास्टर्स और सांस्कृतिक संस्थानों के साथ मिलकर यह भाषाई विविधता सुनिश्चित की है. कैसे देखें फ्री OTT कंटेंट? सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से RailOne App डाउनलोड करें और लॉग इन करें. (आप अपने पुराने RailConnect या UTS क्रेडेंशियल्स का भी उपयोग कर सकते हैं). लॉग इन करने के बाद, ऐप के 'More Offerings' सेक्शन में जाएं. वहां 'Go To Waves' मेनू पर क्लिक करें. बस! आपकी स्क्रीन पर मनोरंजन का खजाना खुल जाएगा, जहां आप अपनी पसंदीदा फिल्म या शो चुनकर देख सकते हैं. सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, ये हैं RailOne के 5 और दमदार फीचर 1. हर तरह की टिकट बुकिंग एक जगह: यह इस सुपर ऐप की सबसे बड़ी ताकत है. अब आप एक ही जगह से रिजर्व्ड टिकट (जैसे स्लीपर, AC) और अनारक्षित यानी जनरल टिकट (UTS) दोनों बुक कर सकते हैं. अब जनरल टिकट के लिए स्टेशन पर लंबी लाइनों में लगने का झंझट खत्म. 2. ट्रेन की पल-पल की खबर (Live Tracking): आपकी ट्रेन कहां पहुंची? कितनी लेट है? अगले स्टेशन पर कब आएगी? इन सभी सवालों का जवाब अब आपको एक ही ऐप में मिलेगा. आप किसी भी ट्रेन का लाइव रनिंग स्टेटस, उसका रूट, स्टॉपेज और पूरा शेड्यूल आसानी से चेक कर सकते हैं. PNR स्टेटस जानना और सीट की उपलब्धता जांचना भी अब बस एक क्लिक की दूरी पर है. 3. सीट पर आएगा गरमागरम खाना (E-Catering): लंबे सफर में खाने की चिंता अब पुरानी बात हो गई. आप इस ऐप के जरिए अपनी यात्रा के दौरान आने वाले स्टेशनों के मेनू में से अपना पसंदीदा खाना ऑर्डर कर सकते हैं, जो सीधे आपकी सीट पर पहुंचाया जाएगा. 4. कुली और टैक्सी की बुकिंग भी: ऐप में आपको कुली (Porter) बुक करने और स्टेशन से अपने घर या होटल तक के लिए 'लास्ट-माइल' टैक्सी बुक करने की भी सुविधा मिलती है. 5. सीधी शिकायत, तुरंत सुनवाई: अगर आपको यात्रा के दौरान कोई भी समस्या होती है – चाहे वह सीट को लेकर हो, सफाई को लेकर हो या सुरक्षा को लेकर – तो अब आप इस ऐप के जरिए सीधे रेलवे कस्टमर सर्विस में अपनी शिकायत, सुझाव या फीडबैक दर्ज करा सकते हैं. निष्कर्ष (Conclusion) RailOne ऐप भारतीय रेलवे के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है. यह सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि एक सच्चा 'ट्रैवल कंपेनियन' है, जो आपकी यात्रा के हर पहलू का ध्यान रखता है. टिकट बुकिंग की आसानी से लेकर, लाइव ट्रैकिंग की सुविधा और अब मुफ्त मनोरंजन का तड़का, रेलवे ने वाकई यात्रियों के अनुभव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है. यह पहल साबित करती है कि भारतीय रेलवे न केवल यात्रियों की जरूरतों को समझ रहा है, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी का बेहतरीन इस्तेमाल भी कर रहा है. तो अगली बार जब आप ट्रेन का सफर प्लान करें, तो इस 'ब्रह्मास्त्र' को अपने फोन में रखना न भूलें!

सैंपल रजिस्ट्रेशन रिपोर्ट 2023: मध्य प्रदेश में हर दूसरा युवक अविवाहित, बिहार टॉप पर

भोपाल  मध्य प्रदेश में अविवाहित रहने वाले युवक-युवतियों का आंकड़ा चौंकाने वाला है. प्रदेश में कुल 50.9 फीसदी महिलाएं पुरुष ऐसे हैं, जिन्होंने शादी ही नहीं की. इसमें पुरुषों का आंकड़ा 54.7 फीसदी है, जबकि अविवाहित रहने वाली महिलाएं 46.8 फीसदी हैं. चौंकाने वाला यह आंकड़ा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम 2023 के हैं. बता दें कि भारत में जन्म और मृत्यु से संबंधित डाटा जुटाने के लिए 1969-70 में सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम यानी एसआरएस की शुरूआत हुई थी, ताकि सरकार को नीतियां बनाने में मदद मिल सके. मध्य प्रदेश में इस सर्वे के लिए 4 लाख लोगों को शामिल किया गया था. देश की कुल आबादी के 50.5 फीसदी लोग अविवाहित सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट के मुताबिक देश की कुल आबादी के 50.5 फीसदी लोगों ने कभी विवाह ही नहीं किया. इसमें महिलाओं का प्रतिशत 45.3 फीसदी जबकि पुरुषों का प्रतिशत 55.4 फीसदी है. इसके अलावा 3.6 फीसदी विधवा, तलाकशुदा हैं. देश में बिहार में सबसे ज्यादा अविवाहित सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट के मुताबिक देश में सबसे ज्यादा बिहार राज्य में 58.3 फीसदी अविवाहित हैं. जम्मू-कश्मीर में अविवाहितों का प्रतिशत 57.5 फीसदी है जबकि तमिलनाड़ु में सबसे कम 41.3 फीसदी अविवाहित महिला-पुरुष हैं. 2022 के मुकाबले 2023 मध्य प्रदेश में घटे अविवाहित सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में विवाहितों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है. साल 2022 में प्रदेश में औसतन अविवाहितों का प्रतिशत 51.4 था, जो 2023 में घटकर 50.9 फीसदी आ गया. तलाकशुदा महिलाओं की संख्या बढ़ी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में 45.2 फीसदी पुरुष शादीशुदा हैं, जबकि महिलाओं का प्रतिशत 42.9 फीसदी है. हालांकि मध्य प्रदेश में तलाकशुदा, विधवा और अलग होने वालों का प्रतिशत भी बढ़ा है. साल 2022 में ऐसे लोगों का कुल औसत 3.6 फीसदी था, जो 2023 में बढ़कर 3.9 फीसदी पहुंच गया है. इसमें महिलाओं का आंकड़ा पुरुषों से कमोवेश दोगुना है. 100 में से 5.6 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं जो तलाक ले चुकी हैं या अलग रह रही हैं. 16.8 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल के पहले मध्य प्रदेश के शहरों में लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ रही है. मध्य प्रदेश में 18 साल के होने के पहले ही 16.8 फीसदी युवतियों की शादी कर दी जाती है. मध्य प्रदेश में कम उम्र में लड़कियों की शादी करने का आंकड़ा बढ़ा है. 18 से 20 साल की उम्र के दौरान 19.2 फीसदी लड़कियों की शादी हो जाती है. मध्य प्रदेश में 18 से 20 साल के बीच ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरों में लड़कियों का विवाह का परसेंटेज बढ़ा है. ग्रामीण इलाकों में 19.2 फीसदी लड़कियों की शादी हो जाती है, जबकि शहरी इलाकों में 19.5 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 से 20 साल के बीच हो रही है. शहरों में शादी की औसत उम्र 23.9 साल मध्य प्रदेश में औसत शादी की उम्र 22.1 साल है जबकि शहरी इलाकों में यह प्रतिशत 23.9 साल है. मध्य प्रदेश में 62.5 फीसदी लड़कियों की शादी 21 साल से ज्यादा उम्र में हो जाती है. यह प्रतिशत बढ़ रहा है. शहरी के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी शादी की उम्र बढ़ रही है. 21 साल से ज्यादा उम्र में लड़कियों की शादी का परसेंटेज भी बढ़ा है. 100 में से 23.8 फीसदी लड़कियों की शादी 21 साल के बाद ही हो रही है जो देश के औसत 24.4 फीसदी से भी ज्यादा है.

एमपी में डिजिटल जनगणना की तैयारी, 3 जिलों में प्री टेस्ट और ऐप लॉन्च जल्द

 भोपाल  पिछल कई सालों से देश में जनगणना को लेकर काफी चर्चाएं चल रही हैं. लेकिन अब इसकी पूरी तरह से तैयारियां शुरू हो गई है. इस बार साल 2026-27 में देश में पहली बार डिजिटल जनगणना होगी. इसके लिए जनगणना निदेशालय की तरफ से एक ऐप को लॉन्च किया जाएगा, जो कि एंड्राइड-आईफोन दोनों में उपयोग किया जा सकता है. इस ऐप के माध्यम से हर घर का मुखिया ही अपने घर-परिवार की जानकारी खुद भरेगा. इसके बाद जनगणना अधिकारी, घर-घर जाकर पूरी जानकारी को क्रॉस चेक करेगा, फिर उसे डिजिटल फॉर्म पर डाटा को अपलोड किया जाएगा.  भारत 2027 में अपनी अब तक की सबसे आधुनिक और डिजिटल जनगणना आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। यह पहली बार होगा जब जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल होगी, जिसमें लगभग 34 लाख गणनाकर्ता अपने स्वयं के स्मार्टफोन और मोबाइल ऐप का उपयोग कर आंकड़े एकत्र करेंगे। यह पहल न केवल समयबद्ध और सटीक डेटा एकत्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि तकनीक-संचालित प्रशासन की नई मिसाल भी होगी। मोबाइल ऐप्स और स्व-गणना की सुविधा गृह मंत्रालय के अधीन रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) द्वारा तैयार की जा रही मोबाइल एप्लिकेशन, एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी और इसे अंग्रेजी सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपयोग किया जा सकेगा। यदि किसी कारणवश डेटा कागज़ पर एकत्र किया जाता है, तो उसे बाद में एक वेब पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा जिससे अलग से स्कैनिंग या डेटा एंट्री की आवश्यकता नहीं होगी। इस बार नागरिकों को स्वयं भी वेब पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना (self-enumeration) का विकल्प मिलेगा, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। जनगणना से पहले प्री टेस्ट मिली जानकारी के मुताबिक, जनगणना शुरू होने से पहले देशभर में प्री टेस्ट कराया जाएगा. इनमें मध्य प्रदेश के तीन जिलों को चुना गया है. जहां पर जनगणना से पहले प्री टेस्ट होगा, इनमें मध्य प्रदेश के ग्वालियर, रतलाम और सिवनी जिले शामिल हैं. यहां पर अक्टूबर से नवंबर महीने के बीच में 15 दिन का अभियान चलाया जाएगा. इस अभियान के माध्यम से जनगणना और घरों की गणना कि जाएगी. इसका सीधा मकसद यह है कि गड़बड़ी रोकने के लिए किया जाएगा.  दो चरणों में होगा आयोजन जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी:     हाउस-लिस्टिंग ऑपरेशन (अप्रैल से सितंबर 2026): इसमें आवास की स्थिति, सुविधाएं और घरों के पास उपलब्ध संपत्तियों से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी।     जनसंख्या गणना (फरवरी 2027): भारत के अधिकांश हिस्सों में फरवरी 2027 में यह चरण आरंभ होगा, जबकि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह सितंबर 2026 में होगा। पहली बार होगा जाति-आधारित डेटा संग्रहण इस जनगणना में एक और उल्लेखनीय पहल की जा रही है — घर के सदस्यों की जातियों का विवरण भी दर्ज किया जाएगा। यह कदम सामाजिक-आर्थिक नीतियों के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े प्रदान करेगा, जो दशकों से लंबित मांग रही है। खबर से जुड़े जीके तथ्य     2027 की जनगणना भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी।     34 लाख गणनाकर्ता अपने स्मार्टफोन से मोबाइल ऐप के माध्यम से आंकड़े एकत्र करेंगे।     पहली बार सभी भवनों का जियो-टैगिंग किया जाएगा, जिसमें जीआईएस मैप पर भवनों को उनके हाउस-लिस्टिंग ब्लॉक्स (HLBs) के साथ जोड़ दिया जाएगा।     RGI ने ₹14,618.95 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया है। पारदर्शिता और निगरानी के लिए वेबसाइट पूरे अभियान की रीयल-टाइम निगरानी और प्रबंधन के लिए एक समर्पित वेबसाइट भी तैयार की जा रही है। इससे प्रत्येक स्तर पर कार्य की प्रगति का निरीक्षण संभव होगा और पारदर्शिता बनी रहेगी। जनगणना 2027 भारत की प्रशासनिक कार्यप्रणाली में डिजिटल बदलाव का प्रतीक बनने जा रही है। न केवल आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि नीति निर्माण और योजना निर्धारण के लिए समयबद्ध और व्यापक जानकारी भी उपलब्ध हो सकेगी। यह डिजिटल युग में भारत के प्रशासनिक दृष्टिकोण का एक ऐतिहासिक परिवर्तन है। ऐसे की जाएगी जनगणना मध्य प्रदेश जनगणना निदेशालय की निदेशक भावना वालिम्बे ने जानकारी देते हुए कहा कि जनगणना के लिए एप के माध्यम से हर परिवार के सदस्यों की जानकारी अपलोड करने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए प्रश्नावली भी तैयारी की जा रही है, जिसमें सी सदस्यों का नाम, पारिवारिक स्थिति, घर संपत्ति का ब्योरा और रोजगार जैसी जानकारी शामिल की जाएगी. इसके अलवा, इसमें कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए क्रॉस चेक करने के लिए अधिकारी घर-घर जाकर जानकारी की जांच करेंगे. इसके साथ-साथ फील्ड में आने वाली चुनौतियों की रिपोर्ट प्रदेश का जनगणना निदेशालय तैयार करेगा. इसके बाद यह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी. मंत्रालय इस आधार पर फाइनल जनगणना शीट तैयार की जाएगी. 

बिहार की राजनीति में बड़े नेताओं का ताबड़तोड़ दौरा, क्या है पार्टी की रणनीति?

पटना   बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अब किसी भी वक्त चुनाव आयोग तारीखों का ऐलान कर सकता है. इसे देखते हुए बीजेपी पूरी ताकत झोंक रही है. पार्टी हर हाल में इस चुनाव में जीत दर्ज करने में जुट गई है. इसी कड़ी में 13 सितंबर को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, 15 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 17 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार का दौरा करेंगे. इन दौरों को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. पीएम मोदी के दौरे की तैयारियों का जायजा लेने सम्राट चौधरी 10 सितंबर को पूर्णिया पहुंचे थे. माना जा रहा है कि इसी सप्ताह एनडीए में सीट बंटवारे का भी अंतिम निर्णय हो सकता है. सीएम नीतीश से मुलाकात कर सकते हैं बीजेपी प्रेसिडेंट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 13 सितंबर को पटना पहुंचेंगे. यहां वे बिहार बीजेपी कोर कमेटी की बैठक में हिस्सा लेंगे. इस बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों और रणनीति का गहराई से आकलन किया जाएगा. इस दौरे पर उनकी मुलाकात सीएम नीतीश से भी हो सकती है. दोनों नेताओं के बीच सीट शेयरिंग को लेकर अंतिम रूपरेखा पर चर्चा होने की संभावना है. नड्डा का यह दौरा बीजेपी और जेडीयू के बीच गठबंधन की मजबूती को और पुख्ता करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है. पीएम मोदी का दौरा बिहार बीजेपी के लिए अहम नड्डा के दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 सितंबर को बिहार आएंगे. यह चुनावी साल में उनका सातवां दौरा होगा. पीएम मोदी अपने हर दौरे पर बिहार को नई परियोजनाओं की सौगात देते रहे हैं और इस बार भी उनके द्वारा करोड़ों रुपये की योजनाओं का ऐलान किए जाने की संभावना है. मोदी की मौजूदगी एनडीए कार्यकर्ताओं में जोश भरने और चुनावी माहौल को बीजेपी के पक्ष में मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगी.

दिवाली से पहले लाड़ली बहना योजना से हटेंगी अपात्र महिलाएं, सरकार करेगी बड़ा संशोधन

भोपाल  सरकार सबसे पहले अयोग्य लाभार्थियों से खुद अपना नाम सूची से वापस लेने की अपील करेगी। इसके बाद विभागीय टीमें जांच करेंगी और अपात्र नाम हटा दिए जाएंगे। सरकार का मानना है कि योजना में कुछ ऐसे नाम शामिल हो गए हैं, जिन्हें लाभ नहीं मिलना चाहिए था। सरकार का उद्देश्य है कि योजना का फायदा केवल पात्र/ योग्य महिलाओं तक पहुंचे। राशि बढ़ाकर 1500 रुपए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जून 2024 में घोषणा की थी कि दिवाली से लाडली बहनों को 1500 रुपए प्रतिमाह मिलेंगे। भाई दूज के बाद महिलाओं को यह बढ़ी हुई राशि दी जाएगी। वर्तमान लाड़ली बहनों की संख्या से गणना करने पर सरकार पर करीब 3100 करोड़ रुपए प्रति माह का भार बढ़  जाएगा। योजना की शुरुआत में योजना के तहत 1000 रुपए दिए जाते थे। अक्टूबर 2023 से राशि 1250 रुपए कर दी गई थी और अब इसे 1500 रुपए किया जा रहा है। सरकार का वादा है कि आगे चलकर इस राशि को बढ़ाकर 3000 रुपए प्रति माह किया जाएगा। 1.26 करोड़ महिलाएं लाभान्वित फिलहाल योजना में लगभग 1.26 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। यह प्रदेश की सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना मानी जा रही है। सरकार हर महीने करीब 1550 करोड़ रुपए इस पर खर्च कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसी योजना ने राज्य में बीजेपी सरकार की वापसी में अहम भूमिका निभाई और इसके बाद कई राज्यों ने भी इसी तर्ज पर योजनाएं शुरू कीं। 1.63 लाख अपात्रों के नाम सूची से हटाए  हाल ही में प्रशासन ने जांच के दौरान 1.63 लाख लाभार्थियों के नाम सूची से हटाए हैं। पाया गया कि कई महिलाओं ने समग्र आईडी में गलत जानकारी देकर योजना का अनुचित लाभ लिया था। सरकार अब यह सुनिश्चित कर रही है कि केवल योग्य बहनें ही योजना का लाभ प्राप्त करें। महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि योजना के लिए शर्ते और नियम बने हैं, जिसके अनुसार कार्रवाई की जाती है। अपात्रों के नाम योजना से हटाए भी जाते हैं।  यह है पात्रता की शर्तें – लाभार्थी महिला और उसके पूरे परिवार की कुल वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। – परिवार का कोई भी सदस्य आयकरदाता नहीं होना चाहिए। – महिला या उसके परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में नियमित या संविदा पद पर कार्यरत न हो, न ही किसी को पेंशन मिल रही हो। – परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) नहीं होना चाहिए। – परिवार की कुल जमीन 5 एकड़ से अधिक नहीं होनी चाहिए। – यदि महिला को या उसके परिवार को किसी अन्य योजना से हर महीने 1000 रुपये से अधिक सहायता मिल रही है, तो वह पात्र नहीं होगी। – परिवार में कोई भी सदस्य सांसद, विधायक, निर्वाचित जनप्रतिनिधि या मनोनीत पदाधिकारी (पंचायत वार्ड पंच व उपसरपंच को छोड़कर) नहीं होना चाहिए। – महिला या उसके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मंडल या उपक्रम में अध्यक्ष/सदस्य/संचालक के रूप में चयनित या मनोनीत नहीं होना चाहिए। 

जापान की नेवी ने रचा इतिहास! इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन 8000 KM की स्पीड से करती है वार

टोक्यो  जापान ने अपनी नेवी के जहाज से पहली बार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन फायरिंग का सफल टेस्ट कर इतिहास रच दिया है. समुद्र में तैनात टारगेट शिप पर दागे गए इस ‘शॉक वेपन’ ने साफ कर दिया कि परंपरागत तोप-गोलों का जमाना अब धीरे-धीरे पीछे छूट रहा है. जापान के रक्षा मंत्रालय की अधिग्रहण, तकनीक और लॉजिस्टिक्स एजेंसी (ATLA) ने खुलासा किया कि जून से जुलाई के बीच टेस्ट शिप JS Asuka से रेलगन के ट्रायल किए गए. चार तस्वीरें जारी करते हुए ATLA ने लिखा, ‘यह पहली बार है जब किसी वारशिप से रेलगन का टेस्ट किया गया और वह भी सीधे एक असली जहाज पर.’ क्या है रेलगन? रेलगन बारूद नहीं, बल्कि बिजली की ताकत से गोला दागती है. प्रोजेक्टाइल को इतनी गति मिलती है कि वह परंपरागत तोपों से कहीं अधिक दूरी और शक्ति के साथ टारगेट भेदता है. जापान की यह रेलगन करीब Mach 6.5 की स्पीड यानी आवाज की रफ्तार से साढ़े छह गुना (8,000 किलोमीटर प्रति घंटा) तक प्रोजेक्टाइल दाग सकती है. खास बात यह कि 120 लगातार फायरिंग के बाद भी बैरल की स्पीड में गिरावट दर्ज नहीं हुई. चीन और अमेरिका भी इस टेक पर लगे चीन भी इसी तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है और उसके पास सतत फायरिंग के सफल टेस्ट की खबरें आई हैं, लेकिन वह इसे अब तक तैनात नहीं कर पाया है. अमेरिका ने भी एक समय रेलगन प्रोजेक्ट पर अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन 2021 में तकनीकी चुनौतियों और लागत के चलते इसे बंद कर दिया. वहीं जापान अब इस हथियार को वास्तविक तैनाती की दिशा में सबसे आगे निकल आया है. क्यों इतनी खास है यह तकनीक? डिफेंस एक्सपर्ट मसाशी मुरानो ने जापान टाइम्स को बताया कि हाई-स्पीड एंटी-शिप मिसाइलों को परंपरागत मिसाइलों से इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल है. रेलगन इस चुनौती का जवाब हो सकता है. इसके दागे प्रोजेक्टाइल न सिर्फ बेहद तेज होते हैं, बल्कि पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में सस्ते भी हैं. जहां एयर डिफेंस मिसाइल की एक शॉट की कीमत करोड़ों-करोड़ होती है, वहीं रेलगन अपेक्षाकृत किफायती है. इसके अलावा, रेलगन से एंटी-एयर वॉरफेयर के लिए ‘एयरबर्स्ट म्युनिशन’ भी विकसित किए जा रहे हैं, जो हवा में ही फटकर घातक टुकड़े छोड़ते हैं. यह मिसाइलों और ड्रोन जैसे खतरों से निपटने में बेहद कारगर हो सकता है. जापान रेलगन को सिर्फ नौसैनिक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखना चाहता. योजना है कि इसे जमीन पर भी तैनात किया जाए, ताकि दुश्मन के आर्टिलरी यूनिट्स को निशाना बनाया जा सके और तटीय सुरक्षा को मजबूत किया जा सके. ATLA अब प्रोजेक्टाइल की उड़ान स्थिरता, फायर-कंट्रोल सिस्टम और सतत फायरिंग क्षमता को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है. हालांकि, अभी तक इसकी अधिकतम रेंज और रैपिड फायर की क्षमता उजागर नहीं की गई है.

नए सभापति सीपी राधाकृष्णन: शपथ ग्रहण कर किया कार्यभार ग्रहण

नई दिल्ली सीपी राधाकृष्णन ने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सीपी राधाकृष्णन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद सीपी राधाकृष्णन ने राज्यसभा के सभापति का कार्यभार संभाला। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने शुक्रवार को औपचारिक रूप से राज्यसभा के सभापति का पदभार ग्रहण किया। साथ ही एक्स पर सीपी राधाकृष्णन के पदभार ग्रहण करते हुए तस्वीरें भी शेयर की गई हैं। इससे पहले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने राजघाट पर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की तथा राष्ट्रपिता और उनके सत्य एवं अहिंसा के शाश्वत आदर्शों का सम्मान किया। उन्होंने सदैव अटल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की। राधाकृष्णन ने दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित पंडित दीन दयाल उपाध्याय के स्मारक पर भी पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने किसान घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनको नमन किया। साथ ही उन्होंने संसद भवन स्थित प्रेरणा स्थल पर महान विभूतियों को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने संसद भवन परिसर में एक पौधा भी लगाया और देश की समृद्ध विरासत एवं एक सतत भविष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति के रूप में सीपी राधाकृष्णन ने जगदीप धनखड़ की जगह ली है। धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उपराष्ट्रपति चुने जाने से पहले राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल के पद पर कार्यरत थे। सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी मौजूद रहे।

नशामुक्ति केंद्रों में अब होगी सख्त जांच! सामाजिक न्याय मंत्री कुशवाहा ने दिए निर्देश

सामाजिक न्याय मंत्री कुशवाहा ने नशामुक्ति केंद्रों की जाँच के दिये निर्देश राज्य स्तरीय कार्यक्रम कर दिव्यांगों की प्रतिभा को मंच देने के निर्देश भोपाल सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने प्रदेश में संचालित समस्त शासकीय नशा मुक्ति केंद्रों के निरीक्षण के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित कर केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण कराया जाए। उन्होंने यह निर्देश शुक्रवार को मंत्रालय में विभागीय समीक्षा बैठक में दिये। इसके साथ ही दिव्यांगों के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर मेडिकल बोर्ड के शिविर आयोजित करने के निर्देश भी दिए। मंत्री कुशवाहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "विकसित भारत का मंत्र-भारत हो नशे से स्वतंत्र" देशव्यापी कार्यक्रम के अंतर्गत मध्यप्रदेश में नशा मुक्ति के क्षेत्र में प्रभावी कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। नशा मुक्त समाज के लिए सामाजिक भागीदारी के साथ-साथ विभाग द्वारा जो कार्यक्रम और योजनाएं संचालित की जा रही है, उनका प्रभावी क्रियान्वयन मैदानी स्तर पर किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नशे से पीड़ित लोगों के लिए प्रदेश में 13 नशा मुक्ति-सह-पुनर्वास केन्द्र, सात आउट रिच एंड ड्रॉप इन सेंटर, तीन कम्युनिटी बेस्ड पियर-लेड इन्टरवेशन सेंटर तथा 8 जिला मुख्यालय पर डीडीआरसी संचालित किए जा रहे हैं। इन सभी संस्थानों के सुव्यवस्थित संचालन की नियमित समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन के लिए चलाए जा रहे "सुगम भारत अभियान" की भी नियमित समीक्षा की जाए। मंत्री कुशवाहा ने कहा कि दिव्यांगजन को प्रोत्साहित करने के लिए विभाग द्वारा राज्य स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिसमें प्रदेश भर के दिव्यांगजन जो गायन, वादन, नृत्य, अभिनय और खेलकूद में रुचि रखते हैं, उनको प्रतिभा दिखाने का अवसर प्राप्त हो सके। इसके लिए विभाग कार्यक्रम की रूपरेखा बनाकर प्रस्तुत करे। प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने बताया कि प्रदेश में नशा मुक्ति अभियान के अंतर्गत सामाजिक संगठन, शैक्षणिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ सामाजिक न्याय विभाग द्वारा लगातार जन-जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गांधी जयंती 2 अक्टूबर को विशेष ग्रामसभाओं का आयोजन भी कराया जाएगा। शैक्षणिक संस्थानों में युवाओं को नशे के दुष्प्रभाव से बचने के लिए छात्रावास स्तर पर नशा मुक्ति समितियों का गठन किया गया है। इसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। बैठक में प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण श्रीमती सोनाली वायंगणकर सहित अन्य विभाग की अधिकारी उपस्थित थे।