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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- सबके साथ, सबके विकास के लिए सबके प्रयासों एवं सबको विश्वास में लेकर बढ़ रहे हैं आगे

प्रदेश के सभी पर्यटन स्थलों तक हेलीकॉप्टर से पहुंचाएंगे पर्यटकों को कानून-व्यवस्था हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता, असामाजिक तत्वों का करेंगे सफाया भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज मध्यप्रदेश कई मामलों में देश में अव्वल है। प्रदेश को और आगे ले जाना है। हमारी सरकार खेती-किसानी, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और नए-नए उद्योग धंधों की स्थापना के जरिए प्रदेश के युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। हमारी सरकार सबके साथ और सहयोग से सबके विकास के लिए साझा प्रयासों एवं सबको पूरे विश्वास में लेकर विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को भोपाल में मीडिया ग्रुप द्वारा आयोजित 'इमर्जिंग बिजनेस कॉन्क्लेव (भोपाल चैप्टर)' में मीडिया संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस कान्क्लेव में मध्यप्रदेश की विशेषताओं के बारे में विस्तार से चर्चाकर प्रदेश के नवनिर्माण एवं बेहतरी के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों और आगामी कार्ययोजना की जानकारी भी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया संवाद में कहा कि हम प्रदेश के किसानों की जिंदगी बेहतर बनाना चाहते हैं। इसीलिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन से दुग्ध उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, आधुनिक खेती के प्रोत्साहन और किसानों को सम्मान निधि देकर उनके जीवन में स्वावलंबन लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग रोजाना नए-नए उद्योग धंधों की स्थापना हो रही है। इससे हमारे युवाओं को रेाजगार भी मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार जिले में देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का भूमिपूजन होना है। इससे पहले बुधवार, 3 सितम्बर को नई दिल्ली में पीएम मित्रा पार्क में निवेश के लिए इच्छुक निवेशकों के साथ मीटिंग एवं वन-टू-वन चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन सहित मेडिकल टूरिज्म के साथ फारेस्ट और वाइल्ड लाइफ टूरिज्म की ओर स्पेशल फोकस किया जा रहा हैं। प्रदेश के 13 प्रमुख तीर्थस्थानों में स्थायी प्रकार के निर्माण कार्यों एवं नियमित प्रबंधन कर इनका विकास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि श्रीमहाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में तेजी से टूरिज्म बढ़ा है। वर्ष 2024 में करीब 7 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन आए। इसी से प्रेरणा लेकर हमारी सरकार अब प्रदेश के सभी पर्यटन स्थलों में पर्यटकों को हेलीकाप्टर के जरिए पहुंचाने का प्रबंध कर रही है। बहुत जल्द हम प्रदेश में इसकी शुरूआत करने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का दिल है। मध्यप्रदेश की देश में केंद्रीय स्थिति का हम समुचित लाभ उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भरपूर लैंड बैंक, सरप्लस बिजली और मजबूत अधोसंरचना है। मध्यप्रदेश निवेशकों के लिए अनुकूल है। प्रदेश में बड़ी मात्रा में निवेश लाने के लिए हमने कई अप्रासंगिक कानून बदले हैं। उद्योग लगाने के लिए शासकीय अनुमतियां भी कम से कम कर दी हैं। हम निवेशकों के हित में 18 नई औद्योगिक नीतियां भी लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में मजबूत कानून व्यवस्था हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। असामाजिक और गुंडा तत्वों के लिए प्रदेश में कोई स्थान नहीं है। कानून को अपने हाथ में लेने वाले ऐसे तत्वों का प्रदेश से सफाया कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम राज्य की बेहतरी के लिए नए फैसले लेने में पीछे नहीं हटेंगे। लोकलुभावन वादों की जगह हम जनहित के निर्णयों पर तेजी से आगे बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया संवाद कार्यक्रम में एक निजी संस्थान द्वारा चलाए जा रहे हाईजीन प्रोग्राम के पोस्टर्स का विमोचन किया और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले समाजसेवियों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े, मीडिया समूह के राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक पदाधिकारी/प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।  

जमीन अधिग्रहण की खबर से खरीदारों को झटका, पश्चिम रिंग रोड का नया विवाद

इंदौर प्रस्तावित पश्चिम रिंगरोड में नया पेच आ गया है। 64 किमी लंबे पश्चिमी रिंगरोड के लिए जमीन अधिग्रहण करते हुए जिम्मेदारों ने एक वैध कालोनी को भी अधिग्रहण की सूची में शामिल कर लिया। कॉलोनी की जमीन को कृषि भूमि मानकर अवार्ड की तैयारी भी कर ली गई। कॉलोनी के प्लाटधारकों को नोटिस जारी हुआ न ही उनका पक्ष सुना गया। मंहगे दाम पर प्लाट खरीदने वालों को कॉलोनी की जमीन अधिग्रहण की जानकारी लगी तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए न्याय की गुहार लगाई। 70 से ज्यादा याचिकाएं हाई कोर्ट में दायर हुईं। सोमवार को इन सभी में एक साथ सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं।   मामला देपालपुर तहसील के मोहना और बेटमाखुर्द गांव में आने वाली नेचुरल वैली कॉलोनी का है। इस कॉलोनी में प्लाट खरीदने वालों के संघर्ष की कहानी भी अजीब है। कॉलोनी विकासकर्ता और उनके मार्केटिंग एजेंट ने लोगों से प्लाट के पैसे तो लिए लेकिन वे रजिस्ट्री से मुकर गए। प्लाट खरीदने वालों ने न्यायालय में याचिकाएं दायर की। लंबी जद्दोजहद के बाद इन प्लाटों की रजिस्ट्रियां हो सकीं। शासन ने रजिस्ट्री के वक्त प्रति वर्गफीट के हिसाब से स्टाम्प शुल्क भी खरीदारों से वसूला। रजिस्ट्री के बाद खरीदार यह सोचकर खुश थे कि आखिर उनका संघर्ष अंजाम तक पहुंच गया, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, दूसरी परेशानी उनका इंतजार कर रही थी। प्लाटों की रजिस्ट्री के कुछ दिन बाद ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने पश्चिम रिंग रोड के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमियों के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी। नेचुरल वैली कॉलोनी को भी अधिग्रहण की जाने वाली सूची में शामिल किया गया। विडंबना यह कि प्लाट मालिकों को भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना में स्वामी ही नहीं माना गया बल्कि उस विकासकर्ता को जिसने रजिस्ट्री खरीदारों के नाम की थी उसे स्वामी माना गया।   आवासीय कॉलोनी को प्राधिकरण मान रहा कृषि भूमि प्लाट खरीदारों की ओर से हाई कोर्ट में पैरवी कर रहे एडवोकेट अमित दुबे ने बताया कि यह वैध आवासीय कालोनी है। विधिवत अलग-अलग विभागों से अनुमति प्राप्त की गई थी, बावजूद इसके राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कालोनी की जमीन को कृषि भूमि मान रहा है। जिम्मेदारों ने यह तक पता लगाने की कोशिश नहीं की कि अधिग्रहित की जा रही भूमि आवासीय या कृषि। प्लाट स्वामियों ने प्राधिकरण के समक्ष आपत्ति भी जताई, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इस पर उन्होंने हाई कोर्ट की शरण ली। यह है पश्चिम रिंगरोड प्रस्तावित पश्चिम रिंगरोड 64 किमी लंबा है। यह शिप्रा से पीथमपुर नेट्रेक्स तक बनया जाना है और इसका निर्माण दो हिस्से में करने की योजना है। एक हजार करोड़ रुपये मुआवजा पश्चिम रिंगरोड में इंदौर और धार जिलों की जमीन आ रही है। इंदौर जिले की तीन तहसील और धार जिले की एक तहसील इसमें शामिल है। पश्चिम रिंगरोड की जद में आ रही जमीनों के लिए केंद्र शासन करीब एक हजार करोड़ रुपये की मुआवजा राशि तय कर चुका है। इंदौर जिले में 795 करोड़ और धार जिले में 200 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाना है। इंदौर जिले में 998 किसानों की जमीन पश्चिम रिंगरोड की जद में आ रही है।

मध्य प्रदेश की दीर्घकालिक विकास रणनीति के लिए रोलिंग बजट पर काम

 भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार पहली बार तीन साल का रोलिंग बजट तैयार करेगी। प्रदेश की दीर्घकालिक विकास रणनीति- विकसित मध्य प्रदेश 2047 पर केंद्रित वर्ष 2026-27, वर्ष 2027-28 एवं वर्ष 2028-29 के लिए त्रिवर्षीय रोलिंग बजट तैयार किया जाएगा। इसके लिए 15 सितंबर से 30 सितंबर तक विभागवार बैठकें होंगी। 31 अक्टूबर को नई योजनाओं के प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएंगे और एक अक्टूबर से 15 नवंबर तक द्वितीय चरण की चर्चा की जाएगी। बता दें कि इससे पहले बजट निर्माण में 28 से 31 जुलाई तक विभागीय प्रशिक्षण और प्रारंभिक चर्चा की जा चुकी है। इसके अलावा इस बार भी राज्य सरकार द्वारा शून्य आधार बजटिंग की प्रक्रिया को जारी रखते हुए वित्तीय अनुशासन और परिणाम आधारित बजट निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। शून्य आधार बजटिंग प्रणाली से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि हर योजना के पीछे ठोस उद्देश्य हो, उसका समाज पर प्रभाव दिखे और प्रत्येक व्यय राज्य की विकास प्राथमिकताओं से मेल खाता हो। बजट स्वीकृति के पहले हर योजना का होगा मूल्यांकन प्रत्येक योजना के लिए यह स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि उस पर खर्च क्यों किया जा रहा है, उसका लाभ किसे होगा और उसका सामाजिक व आर्थिक असर क्या होगा। इस प्रक्रिया में गैर-प्रभावी योजनाओं को समाप्त करने और समान प्रकृति की योजनाओं को एकीकृत करने पर भी विचार किया जाएगा। दिसंबर और जनवरी में मंत्री स्तरीय बैठकें होंगी आयोजित बजट निर्माण के लिए दिसंबर और जनवरी में मंत्री स्तरीय बैठकें आयोजित की जाएंगी। 31 मार्च 2026 को समायोजन प्रस्तावों की अंतिम तिथि रखी गई है। वेतन, भत्ते और स्थायी व्यय की भी गणना अलग होगी। विभागों को अपने स्थायी खर्चों जैसे वेतन, पेंशन, भत्तों की गणना करते समय विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। प्रत्येक वित्तीय वर्ष के वेतन में तीन प्रतिशत वार्षिक वृद्धि जोड़ी जाएगी। महंगाई भत्ते की गणना क्रमश: 74 प्रतिशत, 84 प्रतिशत और 94 प्रतिशत के हिसाब से होगी। संविदा कर्मचारियों के वेतन में चार प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का भी प्रविधान रहेगा। अजा-अजजा उपयोजना के लिए न्यूनतम बजट सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 16 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति उपयोजना के लिए न्यूनतम 23 प्रतिशत बजट सुनिश्चित करना अनिवार्य रहेगा। इसके लिए सेगमेंट कोडिंग व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे योजनाओं में पारदर्शिता आएगी। आफ-बजट व्यय और केंद्रीय योजनाओं पर भी रहेगी निगरानी जिन विभागों को भारत सरकार से सीधे फंड प्राप्त होता है, उन्हें वह राशि भी बजट प्रस्ताव में दर्शानी होगी। इसके अलावा, आफ-बजट ऋण, प्रोत्साहन योजनाओं का वित्तीय असर, और नवीन योजनाओं की स्वीकृति की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बजट की तैयारी के लिए जो आइएफएमआइएस प्रणाली अपनाई गई है, उसमें तय समय के बाद प्रविष्टि की अनुमति नहीं दी जाएगी। विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे सभी प्रस्ताव निर्धारित समय-सीमा में दर्ज करें और विभागीय बैठक के पूर्व पूरी जानकारी तैयार रखें।

मोहन सरकार की सौगात: खुद का स्टार्टअप शुरू करने वालों को 10 लाख रुपए की सहायता

भोपाल   अगर आप मध्यप्रदेश में रहते है और खुद का बिजनेस शुरु करना चाहते हैं तो ये खबर आपके काम की है। बिजनेस या खुद का काम शुरु करने में परेशानी आ रही है तो आपको बता दें कि आप मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही खास योजना से मदद ले सकते हैं। जी हां… मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत मध्य प्रदेश सरकार राज्य के युवाओं को अपना काम शुरू करने के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध करा रही है। इस योजना के तहत आप 10 लाख रुपये तक का लोन लेकर एक सफल बिजनेसमैन बन सकते हैं। क्या है मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एमपी में रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य और युवाओं को खुद का बिजनेस शुरू करने को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की शुरुआत 1 अगस्त, 2014 को की गई थी। हालांकि 2017 में इसमें संशोधन भी किए गए। ये एक सरकारी योजना है, जो 50,000 से 10,00,000 तक का ऋण प्रदान करती है। योजना के तहत लाभार्थियों को धन मार्जिन, ब्याज अनुदान और प्रशिक्षण का लाभ मिलता है, और उन्हें बैंक द्वारा दिए गए ऋण को चुकाने के लिए थोड़े समय की अवधि प्रदान की जाती है। इस योजना का उद्देश्य राज्य के बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना है। साथ ही प्रदेश में लघु, मध्यम और सूक्ष्म उद्योगों को बढ़ावा देकर युवाओं को आत्मनिर्भर व रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है। इस योजना के जरिए उद्योग, कृषि, सेवा क्षेत्र और अन्य व्यवसायों को प्रोत्साहित करना है। होनी चाहिए ये पात्रता -इस योजना का लाई लेने के लिए व्यक्ति को मध्य प्रदेश का मूल निवासी होना चाहिए। -उम्र 18 साल से 45 साल के बीच होनी चाहिए। -किसी भी अन्य सरकारी स्वरोजगार योजना का लाभ न लिया गया हो। -आवेदक के पास अपना एक बिजनेस प्लान होना चाहिए। -आवेदक कम से कम 5वीं कक्षा पास हो। मिलेंगे ये लाभ -योजना के तहत 50 हजार से 10 लाख रुपये तक का कर्ज उपलब्ध कराया जाता है। -सामान्य वर्ग के आवेदकों को परियोजना लागत का 15% तक (अधिकतम 1 लाख रुपये) दिए जाते हैं। -भोपाल गैस पीड़ितों को अतिरिक्त 20 फीसदी या अधिकतम 1 लाख की मदद। -5% तक ब्याज दर में सब्सिडी, महिलाओं को 7% तक ब्याज में सब्सिडी मिलती है।

ट्रंप को आई अक्ल? PM मोदी के कदम और US एंबेसी की पोस्ट ने बढ़ाई हलचल

नई दिल्ली चीन में SCO शिखर सम्मेलन के बैनर तले जब दुनिया की तीन महाशक्तियां मिल रही हैं तो इसका प्रभाव अमेरिका तक देखने को मिल रहा है. भारत, चीन और रूस के राष्ट्राध्यक्षों पीएम मोदी, राष्ट्रपति जिनपिंग और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात के बीच भारत में अमेरिकी दूतावास की ओर से एक बेहद अहम पोस्ट किया गया है. इस ट्वीट की टाइमिंग और इसका कंटेट भारत-अमेरिका संबंधों के लिए निर्णायक है.  भारत में अमेरिकी दूतावास की ओर से किए गए इस पोस्ट में कहा गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है, जो 21वीं सदी का एक निर्णायक रिश्ता है. अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि यह हमारे दोनों देशों के लोगों के बीच की स्थायी मित्रता ही है जो इस यात्रा को ऊर्जा प्रदान करती है.  इस पोस्ट में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का एक बयान भी है. इसमें उन्होंने कहा है कि भारत और अमेरिका के लोगों के बीच गहरी दोस्ती हमारे संबंधों का आधार है.  भारत में अमेरिकी दूतावास का ये ट्वीट तब आया है जब सोमवार सुबह ही चीन में पीएम मोदी, राष्ट्रपति जिनपिंग और राष्ट्रपति पुतिन की गर्मजोशी भरी मुलाकात हुई है. ये मुलाकात तब हो रही है जब ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी का हैवी टैरिफ लगाया है और ट्रंप के सलाहकार और रणनीतिकार भारत के खिलाफ सख्त बयान दे रहे हैं.  चीन के तियानजिन में पीएम मोदी, राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात की चर्चा दुनिया की राजनीति और कूटनीति को प्रभावित करने वाले हर देश की राजधानियों में हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (1 सितंबर 2025) सुबह को SCO के संबोधन में कहा कि ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को आउटडेटेड फ्रेमवर्क्स में कैद रखना भावी पीढ़ियों के प्रति घोर अन्याय है. उन्हें दुनिया को बदलाव को स्वीकार करने का संदेश देते हुए कहा कि नई पीढ़ी के बहुरंगी सपनों को हम पुराने जमाने की ब्लैक-एंड व्हाइट स्क्रीन पर नहीं दिखा सकते. इसके लिए स्क्रीन बदलनी होगी.  प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में रिफॉर्म्स का आह्वान करते हुए कहा कि इसकी 80वीं वर्षगांठ पर हम इसकी शुरुआत कर सकते हैं.  SCO में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से भी गर्मजोशी भरी मुलाकात की. पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन एक ही कार में बैठकर मीटिंग वैन्यू तक पहुंचे. इसके बाद अमेरिकी दूतावास से ये ट्ववीट आया है. अमेरिकी दूतावास ने इस ट्वीट में भारत के साथ व्यापारिक साझीदारी की दुहाई दी है. इस पोस्ट में भारत में अमेरिकी दूतावास ने लिखा है, "संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है — जो 21वीं सदी का एक निर्णायक रिश्ता है. इस महीने हम उन लोगों, प्रगति और संभावनाओं पर प्रकाश डाल रहे हैं जो हमें आगे बढ़ा रहे हैं. नवाचार और उद्यमिता से लेकर रक्षा और द्विपक्षीय संबंधों तक, यह हमारे दोनों देशों के लोगों के बीच की स्थायी मित्रता ही है जो इस यात्रा को ऊर्जा प्रदान करती है." आगे इस पोस्ट में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बयान है. इस बयान में रुबियो ने कहा है कि, 'दोनों देशों के लोगों के बीच स्थायी मैत्री हमारे सहयोग का आधार है और यह हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है, क्योंकि हम अपने आर्थिक संबंधों की अपार संभावनाओं को साकार करते हैं.' चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने SCO के संबोधन में अमेरिका का नाम लिए बिना 'चौधराहट''शीत युद्ध मानसिकता' और 'धमकाने वाली प्रथाओं' का विरोध करने का संदेश दिया. उन्होंने कहा, "हमें विश्व के एक समान और व्यवस्थित बहुध्रुवीय स्वरूप, तथा सभी के लिए लाभकारी और समावेशी आर्थिक वैश्वीकरण की वकालत करनी चाहिए और वैश्विक शासन प्रणाली को अधिक न्यायसंगत और समतापूर्ण बनाना चाहिए." शी जिनपिंग की भावनाओं से सहमति जताते हुए रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने SCO से यूरोप और एशिया में सुरक्षा की एक "नई प्रणाली" बनाने का आह्वान किया. उन्होंने इसे पश्चिमी नेतृत्व वाले गठबंधनों के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया, जिसका वे लंबे समय से विरोध करते रहे हैं. 

मौसम विभाग का अलर्ट: सितंबर में भारी बारिश, इन फसलों पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली अगस्त का पूरा महीना देश के विभिन्न राज्यों के लिए मॉनसूनी बारिश से भीगा रहा तो वहीं कई राज्यों में बाढ़ के प्रकोप ने रिकॉर्ड तोड़े हैं. अब सितंबर में भारत के किस क्षेत्र में कैसा मौसम रहेगा? देश में बारिश की क्या  स्थिति होगी? इसके लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान जारी किए हैं.  सितंबर में कैसा रहेगा मौसम? IMD का कहना है कि देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद है. लेकिन, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों समेत दक्षिण भारत के कुछ दूरदराज के इलाकों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, सितंबर 2025 में पूरे देश में मासिक औसत वर्षा दीर्घावधि औसत 109% (सामान्य से अधिक) रहने की संभावना है. साल 1971 से 2020 के बीच भारत में सितंबर महीने में बारिश का औसत आंकड़ा 167.9 मिमी रहा है. इन फसलों के लिए किसानों को रहना होगा सतर्क सामान्य से अधिक बारिश कुछ फसलों के लिए नुकसानदायक हो सकती है. ऐसे में किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है. भारत में ग्रीष्मकालीन फसलों जैसे चावल, कपास, सोयाबीन, मक्का और दालों को नुकसान हो सकता है. दरअसल, इन फसलों की कटाई आमतौर पर मध्य सितंबर से की जाती है. कितना रहेगा तापमान? तापमान के मामले में, सितंबर के दौरान पश्चिम-मध्य, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत के कई इलाकों में औसत अधिकतम तापमान सामान्य से कम या सामान्य के आसपास रहने की संभावना है. जबकि पूर्व-मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों और पश्चिमी तटीय इलाकों में औसत अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है. औसत न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश हिस्सों में यह सामान्य से अधिक या सामान्य के करीब रहने की संभावना है. हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में रात का तापमान सामान्य से कम रह सकता है. किसानों के लिए राहत की खबर सामान्य से अधिक बारिश खरीफ की फसलों के लिए अच्छी है और इससे बंपर पैदावार की उम्मीद बढ़ सकती है.सितंबर का यह मौसम पूर्वानुमान किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह खरीफ फसलों के सीजन का चरम समय है. सामान्य से अधिक बारिश उन फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है जिन्हें अधिक पानी की जरूरत होती है. हालांकि, कुछ इलाकों में बाढ़ जैसी स्थितियों का जोखिम भी बना रह सकता है. वहीं, पूर्वोत्तर, पूर्वी और दक्षिणी भारत में कम बारिश का खेती पर असर भी पड़ सकता है.  

MP में नक्शा बदल सकता है: रीवा और मैहर जिले में सीमाओं का होगा संशोधन

भोपाल  मध्यप्रदेश में प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन की कवायद जारी है। राज्य सरकार ने इसके लिए परिसीमन आयोग का गठन किया है, जो नए जिले और तहसील बनाने के साथ ही गांवों और कस्बों को इधर-उधर जोड़ने पर काम कर रहा है। इसी क्रम में अब रीवा और नवगठित मैहर जिले के बीच सीमांकन बदलने की तैयारी हो रही है। मुकुंदपुर सहित छह गांव रीवा में शामिल करने का प्रस्ताव मैहर के छह गांव—आनंदगढ़, आमिन, धोबहट, मुकुंदपुर, परसिया और पपरा—को रीवा जिले में मिलाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह प्रस्ताव मुख्य रूप से मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी को ध्यान में रखकर बनाया गया है, क्योंकि यह क्षेत्र रीवा से अधिक नजदीक है। मैहर जिला प्रशासन ने इस संबंध में अमरपाटन के राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे हितधारकों की राय लेकर रिपोर्ट तैयार करें। मैहर के अपर कलेक्टर शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी ने इस प्रस्ताव पर पंचायतों के सरपंचों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की राय मांगी है। नेताओं ने जताया विरोध हालांकि इस प्रस्ताव का विरोध भी शुरू हो गया है। सतना सांसद गणेश सिंह ने इन गांवों को रीवा में शामिल करने का विरोध जताया है। मैहर विधायक ने भी इस फैसले पर आपत्ति दर्ज की है। कांग्रेस विधायक राजेंद्र सिंह ने इसके खिलाफ जेल भरो आंदोलन चलाने और 1000 सत्याग्रहियों के साथ जेल जाने का ऐलान किया है। ग्रामीणों की राय बंटी गांवों के ग्रामीण भी इस प्रस्ताव को लेकर दो हिस्सों में बंटे हुए हैं। मुकुंदपुर और आसपास के कुछ गांवों के लोग बिजली, स्वास्थ्य और रीवा की नजदीकी का हवाला देकर रीवा में शामिल होने के पक्ष में हैं। वहीं, धोबहट और अन्य गांवों के कुछ लोग इस बदलाव का विरोध कर रहे हैं। आयोग ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट परिसीमन आयोग ने इस पूरे मामले पर मैहर जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें गांवों की भौगोलिक, सामाजिक, प्रशासनिक और आर्थिक परिस्थितियों का ब्योरा शामिल किया जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि ये छह गांव रीवा जिले में जोड़े जाएंगे या नहीं।

मंत्री सिंह ने कहा- बच्चों में एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत करें

भोपाल   स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि देश में राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिये बच्चों में "एक भारत-श्रेष्ठ भारत'' की भावना को मजबूत किया जाना जरूरी है। हमारी विविधता भरी सांस्कृतिक विरासत पूरी दुनिया में भारत को अलग पहचान दिलाती है। मंत्री श्री सिंह सोमवार को भोपाल में सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गोविंदपुरा, भेल की वार्षिक पत्रिका "वीथिका'' का विमोचन करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश में संचालित हो रहे सांदीपनि विद्यालयों में बच्चों की बहुमुखी प्रतिभा को तराशने का कार्य बेहतर तरीके से किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इन विद्यालयों में सभी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने का प्रयास किया है। सांदीपनि विद्यालय में बच्चों की सुविधा के लिये नि:शुल्क बस सेवा भी उपलब्ध करायी जा रही है। वार्षिक पत्रिका वीथिका विद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रीमती पूनम अवस्थी ने बताया कि वार्षिक पत्रिका वीथिका में संविधान के 75वें वर्ष के मौके पर संविधान से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियों का समावेश किया गया है। उन्होंने बताया कि भेल सांदीपनि विद्यालय का स्वयं का भवन लगभग 34 करोड़ रुपये की लागत से जल्द बनकर तैयार हो जायेगा। विद्यालय में के.जी. से 12वीं तक करीब 1080 बच्चे अध्ययनरत हैं। इन बच्चों को हिन्दी और इंगलिश मीडियम में अध्ययन की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। विद्यालय में पिछले वर्ष विभिन्न राज्यों की संस्कृति के आदान-प्रदान के लिये नागालैण्ड राज्य के बच्चों ने दौरा किया था। भेल विद्यालय के बच्चों ने मंत्री श्री सिंह को ट्रायबल पेंटिंग भी भेंट की।  

अमित शाह पहुंचे बाढ़ग्रस्त इलाके, पीड़ितों को हरसंभव मदद का आश्वासन

जम्मू-कश्मीर  जम्मू-कश्मीर में बारिश और भूस्खलन के चलते हालात बेहद खराब हो गए हैं. लगातार हो रही बारिश से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इस बीच सोमवार (1 सितंबर) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू का दौरा किया बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात की. मंत्री ने उन्हें राहत एवं पुनर्वास मुहैया कराए जाने का आश्वासन भी दिया. इस दौरान केंद्रीय मंत्री के साथ उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एवं जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा भी मौजूद थे. जम्मू के संभागीय आयुक्त रमेश कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हालात की जानकारी दी. बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों का जायदा लेने शाह रविवार रात जम्मू पहुंचे थे.   शाह ने की बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात अमित शाह ने जम्मू संभाग में बारिश, बाढ़ एवं भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का जायजा लिया. उन्होंने चक मांगू गांव के बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात की साथ ही तवी पुल, शिव मंदिर और जम्मू में बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए घरों का भी निरीक्षण किया. अधिकारियों ने बताया कि मंत्री ने ग्रामीणों से बातचीत की और उन्हें उचित राहत एवं पुनर्वास मुहैया कराए जाने का आश्वासन दिया. गृह मंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक की गई जिसमें ताजा स्थिति की समीक्षा की गई. मंत्री ने आदेश दिया कि मौसम विभाग और NDMA डेटा एनालिटिक्स और AI के उपयोग से बादल फटने के कारणों का अध्ययन करें. शाह ने GLOF Early Warning System के क्रिटिकल रिव्यू करने की जरूरत पर जोर दिया.   गृह मंत्रालय की सर्वेक्षण टीमें लेंगी नुकसान का जायजा अमित शाह ने हाल की प्राकृतिक आपदा की घटनाओं में हुई जनहानि पर दुख व्यक्त किया. साथ ही कहा कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ मजबूती के साथ खड़ी है और सुरक्षा, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण को सुगम बनाने के लिए त्वरित राहत, वित्तीय सहायता और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है. शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय की सर्वेक्षण टीमें जल्द ही यहां नुकसान का जायजा लेने आएंगी और उसके बाद त्वरित सहायता प्रदान की जाएगी. शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सभी एजेंसियों ने मिलकर संभावित नुकसान को बहुत कम किया है और समन्वित प्रयासों के साथ हम कई जानें बचाने में सफल हुए हैं, लेकिन व्यवस्था को और भी सुदृढ़ करने की आवश्यकता है. 130 से ज्यादा लोगों की मौत, 33 लापता बादल फटने, भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ में 14 अगस्त से किश्तवाड़, कठुआ, रियासी और रामबन जिलों में 130 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है वहीं 33 लोग लापता हैं. मृतकों में 34 तीर्थयात्री भी शामिल हैं, जो 26 अगस्त को माता वैष्णो देवी मंदिर जाते समय भूस्खलन की चपेट में आ गए थे. जम्मू और अन्य निचले इलाकों में बीते 26-27 अगस्त को मूसलाधार बारिश के कारण अचानक बाढ़ आ गई थी जिससे भारी नुकसान पहुंचा है.  

ट्रंप को बड़ा झटका: SCO में दुनिया में डंका बजा रही भारत-चीन-रूस की तिकड़ी

नई दिल्ली चीन के तियानजन शहर में SCO समिट ने इस बार पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी चिंफिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। तीनों नेताओं ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया, बातचीत की और कई मौकों पर साथ चलते भी दिखे। ये पल यूं तो सामान्य थे, लेकिन असल में यह अमेरिका और खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति के खिलाफ बड़ा संदेश माना जा रहा है। ऐसे वक्त में जब ट्रंप भारत, चीन और रूस तीनों पर दबाव डाल रहे हैं, यह एकजुटता साफ संकेत देती है कि देश अब 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के आगे झुकने को तैयार नहीं। सात साल बाद चीन गए पीएम मोदी पीएम मोदी सात साल के बाद चीन पहुंचे थे। शनिवार को SCO के 25वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद रविवार को उन्होंने शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय मुलाकात की। दोनों नेताओं ने सीमा विवाद को पीछे छोड़ व्यापार और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। यह मुलाकात वैश्विक व्यापार को स्थिर करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। सोमवार को समिट का दूसरा दिन सबसे अहम रहा। पीएम मोदी, चिनफिंग और पुतिन की गर्मजोशी ने माहौल ही बदल दिया। कभी प्रतिद्वंदी रहे देश अब ट्रंप की नीतियों से परेशान होकर साथ आते नजर आए। पीएम मोदी और पुतिन कार में गए साथ सोमवार का सबसे यादगार पल रहा पीएम मोदी और पुतिन का एक ही कार में बैठकर जाना। पुतिन अपनी सुरक्षा को लेकर काफी सख्त माने जाते हैं, लेकिन उन्होंने कार में बैठकर पीएम मोदी का थोड़ा इंतजार भी किया। यह कदम खास संदेश माना गया है। दूसरी तरफ, शी चिनफिंग और पुतिन ने अपने भाषणों में पश्चिमी देशों को आड़े हाथों लिया। शी चिनफिंग ने धौंस दिखाने वाले देशों की आलोचना की और पुतिन ने यूक्रेन युद्ध के लिए पश्चिमी देशों को जिम्मेदार बताया। अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान इस समिट का एक और दिलचस्प सीन यह भी रहा जब पीएम मोदी और पुतिन साथ चलते दिखे और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक किनारे खड़े होकर देखते रह गए।