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मोदी सरकार का तोहफा: प्रधानमंत्री जनधन योजना में अब मिलेगी ₹10,000 तक ओवरड्राफ्ट सुविधा

नई दिल्ली  नरेंद्र मोदी सरकार की चर्चित योजना- प्रधानमंत्री जनधन के 11 साल पूरे हो गए हैं। योजना के तहत खोले गए खातों की संख्या 11 वर्ष में बढ़कर 56.16 करोड़ हो गई है। वहीं, खातों में 2.68 लाख करोड़ रुपये जमा किए गए। योजना के तहत खाताधारकों को कई बड़ी सुविधाएं मिलती हैं। इनमें से एक सुविधा ओवरड्राफ्ट की है। आइए इस सुविधा के बारे में विस्तार से जान लेते हैं। क्या है ओवरड्राफ्ट लिमिट प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत लाभार्थी 10000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। बता दें कि ओवरड्राफ्ट के तहत अगर आपके खाते में पर्याप्त पैसा नहीं है, फिर भी आप एक निश्चित सीमा तक पैसे निकाल सकते हैं या लेनदेन कर सकते हैं। योजना के तहत सभी लाभार्थियों को 2 लाख रुपये के दुर्घटना बीमा कवर के साथ एक निःशुल्क रुपे डेबिट कार्ड प्राप्त होता है। क्या कहते हैं आंकड़े बीते दिनों वित्त मंत्रालय ने बताया कि जनधान के तहत खातों की संख्या मार्च 2015 के 14.72 करोड़ से बढ़कर 13 अगस्त 2025 तक 56.16 करोड़ हो गई है। खाताधारकों में 56 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। वहीं 67 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में सीधे 45 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए। भारत की 94 प्रतिशत वयस्क आबादी का अब बैंक खाता है। 38.68 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड जारी प्रधानमंत्री जनधन योजना के खाताधारकों को कुल 38.68 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड जारी किए गए हैं। इससे उन्हें नकदी रहित लेनदेन की सुविधा मिली है और अंतर्निहित दुर्घटना बीमा कवर तक पहुंच प्राप्त हुई है। ये खाते प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), अटल पेंशन योजना (एपीवाई), और माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी बैंक (मुद्रा) योजना के लिए पात्र हैं।

सरकार ने बढ़ाई PM SVANidhi स्कीम की डेडलाइन, बिना गारंटी मिलेगा लोन

नई दिल्ली कोरोना महामारी के दौर में, जब लोगों के छोटे रोजगार ठप हो गए थे और खासतौर पर रेहड़ी-पटरी वालों का बिजनेस पूरी तरह से खत्म हो गया था, तो ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने इनकी मदद के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि या पीएम स्वनिधि योजना की शुरुआत की थी, जिसके तहत उन्हें अपना बिजनेस खड़ा करने में मदद के लिए सरकार 80,000 रुपये तक का लोन मुहैया करा रही थी और वो भी बिना गांरटी के, अब मोदी सरकार ने इस स्कीम के तहत मिलने वाले लोन की लिमिट में इजाफा कर दिया है और अब लाभार्थियों को 80 हजार नहीं, बल्कि 90,000 रुपये तक का गारंटी-फ्री लोन मिलेगा. यही नहीं स्वनिधि योजना की डेडलाइन भी 2030 तक बढ़ाई गई है.  31 मार्च 2030 तक मिलेगा फायदा केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के विस्तार और पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है, जो करोड़ों रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे विक्रेताओं के लिए बड़ी राहत भरा कदम है. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के इस फैसले से 1.15 करोड़ रेहड़ी-पटरी वालों को लाभ मिलेगा, जिनमें 50 लाख नए लाभार्थी भी शामिल हैं. आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ वित्त सेवा विभाग द्वारा इसका संचालन 31 मार्च 2030 तक जारी रहेगा. इस फैसले से सरकारी खजाने पर 7,332 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय आएगा.  80 नहीं, अब 90 हजार तक लोन   सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना की डेडलाइन को बढ़ाने के साथ ही इसके तहत लाभार्थियों को मिलने वाले लोन की लिमिट में भी बढ़ोतरी की है. बता दें कि इसमें जरूरतमंदों को सरकार तीन किस्तों में 80,000 रुपये का लोन देती है और 10, 20 और 50 हजार रुपये तीन चरणों में दिए जाते थे. लेकिन अब इसकी लिमिट को बढ़ाते हुए स्मॉल बिजनेस की शुरुआत के लिए पहले चरण में 15,000 रुपये, दूसरे चरण में 25,000 रुपये और तीसरे चरण में 50,000 रुपये का लोन मिलेगा. इस सरकारी योजना का पूरा लाभ लेने के लिए क्रेडिबिलिटी जरूरी है. मतलब कोई व्यक्ति अपना व्यापार शुरू करने के लिए अप्लाई करता है, तो पहले उसे 15,000 रुपये का लोन मिलेगा और फिर उसके द्वारा ये लोन की रकम निर्धारित समय में चुकाने ही वो स्कीम के तहत अगला 25,000 रुपये का लोन पा सकेगा. इसी तरह जब वो इस लोन को चुका देगा, तो उसे एकमुश्त 50,000 रुपये का लोन पाने का योग्य माना जाएगा. सरकारी डेटा पर नजर डालें, तो 30 जुलाई 2025 तक 68 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को 13,797 करोड़ रुपये के 96 लाख से ज्यादा लोन वितरित किए गए हैं. करीब 47 लाख लाभार्थी डिजिटली सक्रिय हैं, जिन्होंने 6.09 लाख करोड़ रुपये वैल्यू के 557 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन किए हैं. सिर्फ आधार लाएं और लोन ले जाएं जैसा कि बताया कि ये सरकार की बिना गारंटी वाली लोन स्कीम है, यानी इसे लेने के लिए आपको किसी भी तरह की कोई चीज गारंटी के तौर पर गिरवी नहीं रखनी होगी. सिर्फ आधार कार्ड के जरिए आपको ये लोन आसानी से चरणबद्ध तरीके से मिल जाता है. आपको करना ये है कि पैसा तय समय में वापस करना है. नियमों को देखें, तो पीएम स्वनिधि योजना के तहत जितनी लोन की राशि ली जाती है, उसे सालभर में चुकाया जा सकता है. यही नहीं इसमें EMI Payment की सुविधा भी मिलती है.  रुपे क्रेडिट कार्ड समेत ये सुविधाएं भी सरकार द्वारा साफ किया गया है कि पीएम स्वनिधि योजना के जो लाभार्थी समय पर दूसरा लोन चुकाएंगे, उन्हें यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड भी मिलेगा, जिससे उनकी व्यावसायिक और व्यक्तिगत आर्थिक जरूरतें पूरा करने में उन्हें मदद मिलेगी. इसके अलावा स्मॉल बिजनेस शुरू करने वाले लाभार्थियों को डिजिटल पेमेंट के लिए प्रोत्साहित करने के लिए रिटेल और थोक लेन-देन के लिए 1,600 रुपये तक का डिजिटल कैशबैक भी मिलेगा. योजना के विस्तार के साथ सरकार का लक्ष्य इसकी पहुंच को और व्यापक बनाने के साथ छोटे व्यापारियों के लिए वित्तीय सहायता को मजबूत करना है.

पेंशन के लिए बड़ा बदलाव, EPFO ने तय किया—1 महीने के योगदान से मिलेगा लाभ

नई दिल्ली कर्मचारियों की पेंशन को लेकर ईपीएफओ ने एक बड़ा बदलाव किया है. अब छह महीने से कम तक भी नौकरी करके छोड़ने वाले व्‍यक्तियों को EPS का लाभ दिया जाएगा. इन लोगों को अब अपनी पेंशन में कंट्रीब्‍यूशन खोना नहीं पड़ेगा.  रिटायरमेंट फंड जुटाने वाली संस्‍थान ने EPS नियम के तहत पहले कोई भी सर्विस, जो 6 महीने के अंदर खत्म होती थी उसे 'जिरो कम्‍प्‍लीट ईयर' के परिणाम में पेंशन मिलने के उपयोग नहीं मानती थी और 5 महीने तक नौकरी करके छोड़ने वालों को पेंशन का अधिकार नहीं दिया जाता था. हालांकि अब नए नियमों के तहत अप्रैल- मई 2024 के दौरान जारी किए गए एक सर्कुलर में ये अधिकार दे दिया गया है.  ईपीएफओ ने स्पष्‍ट कर दिया है कि अगर कोई व्‍यक्ति 1 महीने की भी सेवा पूरी करता है और ईपीएस के तहत योगदान देता है तो उसे भी ईपीएस के तहत पेंशन का अधिकार होगा.  क्या है EPFO का नया नियम? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के नए नियम के मुताबिक, कोई व्यक्ति चाहे 1 महीने नौकरी करे, लेकिन यदि उसने EPS में योगदान किया है तो वह EPS पेंशन के लिए पात्र होगा। यानी पेंशन पाने का हक अब सेवा के पूरे साल की बजाय, योगदान के आधार पर तय किया जाएगा। EPFO ने क्यों बदले नियम? ईपीएफओ का यह फैसला उन सेक्टर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जहां कम समय के लिए जॉब ऑफर की जाती है। मसलन, BPO, लॉजिस्टिक्स, अनुबंध (Contract) स्टाफिंग और शॉर्ट-टर्म प्रोजेक्ट्स में हर साल हजारों लोगों को चंद महीने बाद ही फायर कर दिया जाता है। फाइनेंस और सेल्स से जुड़ी जॉब भी ऐसे ही होती हैं।  ये बदलाव क्‍यों था जरूरी?  इस बदलाव से बहुत लोगों को राहत मिलने वाली है. खासकर बीपीओ, लॉजिस्टिक्स और अनुबंध स्टाफिंग को, जहां जल्दी निकासी सामान्य है. यह युवा कर्मचारियों को नौकरी के हितों की रक्षा करेगा. ये उन सभी के लिए काफी लाभदायक साबित होगा, जो काफी कम समय के लिए किसी कंपनी को ज्‍वाइन करते हैं. मान लीजिए अगर किसी ने एक महीने तक ही नौकरी की और फिर नौकरी नहीं कर पाए, फिर उसे पीएफ का पैसा तो मिल सकता है, लेकिन ईपीएस में कंट्रीब्‍यूशन समाप्‍त हो जाएगा. ऐसे में यह नियम उन कर्मचारियों के लिए लाभदायक होगा.  इन सेक्टरर्स में छह माह से कम नौकरी करने वाले हजारों कर्मचारी EPS कंट्रीब्यूशन के बावजूद पेंशन से वंचित हो जाते थे। उनका EPS कंट्रीब्यूशन भी बेकार हो जाता था। नया नियम युवाओं और अनियमित कार्यबल के लिए एक बड़ी राहत होगी। PF खाताधारक क्या करें? आपने यदि किसी कंपनी में 6 महीने से कम नौकरी की है और EPS कंट्रीब्यूशन किया है। तो अपने PF पासबुक की जांच करें कि EPS कंट्रीब्यूशन दर्ज है या नहीं। अगर EPS हिस्सा नहीं दिख रहा तो 2024 के सर्कुलर का हवाला देते हुए EPFO को शिकायत करें। शिकायत करते समय पासबुक का स्क्रीनशॉट या PDF फॉर्मेट सेव कर लें। पुराने नियमों में क्या था? 6 महीने से कम सेवा को शून्य पूर्ण सेवा वर्ष (Zero completed year) माना जाता था। ऐसे कर्मचारियों को EPS राशि निकालने की अनुमति नहीं होती थी, जिससे उनका योगदान वहीं अटक जाता था। यह प्रक्रिया न्यायसंगत नहीं मानी जा रही थी, क्योंकि योगदान देने के बावजूद अधिकार नहीं मिल रहा था। एक्सपर्ट्स की राय रिटायरमेंट प्लानिंग विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला पेंशन फंड की समावेशिता बढ़ाने वाला है और उन कर्मचारियों के हित में है, जिनका करियर शुरुआती दौर में अस्थिर होता है। आप भी पीएफ खाताधारक हैं तो ये जान लीजिए  अगर आपने 6 महीने के अंदर इस्‍तीफा दिया है तो EPS योगदान के लिए अपने PF पासबुक की जांच करें और अगर आपको पेंशन का हिस्सा नहीं दिया गया है, तो 2024 के स्पष्टीकरण का उल्लेख करते हुए EPFO को शिकायत करें.  आवेदन करते वक्‍त अपने पासबुक का स्‍क्रीनशॉट या पीडीएफ सेव कर लें. अक्‍सर देखा गया है कि कम उम्र के सेवा वाले कर्मचारियों को ईपीएस फंड निकालने की अनुमति नहीं दी जाती थी, जिससे उनका कंट्रीब्‍यूशन वहीं फंसा रह जाता था, लेकिन ईपीएफओ के इस बदलाव ने इन लोगों को भी ये अधिकार दिया है. 

भारत ने बचाया दुनिया को तेल संकट से, रिपोर्ट में सामने आया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर टैरिफ को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया है और बार-बार भारत पर हमला बोल रहा है. ट्रंप के सहयोगी पीटर नवारो ने यहां तक दावा किया है कि यूक्रेन संघर्ष असल में 'मोदी का युद्ध' है, और आरोप लगाया कि भारत रियायती तेल खरीद के जरिए रूस का समर्थन कर रहा है.  इस बीच, उद्योग सूत्रों ने कई तथ्‍यों के हवाले से सभी झूठ को खारिज कर दिया है और यह बताया है कि अगर भारत रूसी तेल नहीं खरीदता तो वैश्विक स्‍तर पर परिणाम कितने भयानक हो सकते थे. सूत्रों का कहना है कि भारत ने रूसी तेल खरीदकर एक ग्‍लोबल संकट को रोका. अगर भारत खरीदना बंद कर देता, तो आज कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती थी.   रिपोर्ट में सोर्स के हवाले कहा गया है कि भारत के आयात ने वैश्‍विक बाजारों को स्थिर किया है और रूस को आर्थिक मदद देने के बजाय, दुनियाभर के कंज्‍यूमर्स के लिए ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में मदद की है. इस कदम की अमेरिकी वित्त मंत्री जेनेट येलेन समेत कई इंटरनेशनल हस्तियों ने भी सराहना की है.  जब 137 डॉलर प्रति बैरल हुआ था कच्‍चा तेल ग्‍लोबल मार्केट से रूसी तेल के बाहर हो जाने की पिछली आशंकाओं ने ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ा दी थीं. मार्च 2022 में इसकी कीमत 137 डॉलर प्रति बैरल उच्‍च स्‍तर पर पहुंच चुका था. जिसके बाद भारत ने रूसी तेल की खरीदारी करते हुए ग्‍लोबल स्थिति को संभाला है. ANI के सूत्रों के अनुसार, भारत ने नियमों के तहत ही रूसी तेल की खरीदारी की है और किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है.  नवारो का क्‍या है दावा  ट्रंप के सहयोगी पीटर नवारो ने इस सप्‍ताह के शुरुआत में ही ब्‍लूमबर्ग को एक इंटरव्‍यू दिया, जिसमें उन्‍होंने दावा किया कि भारत रियायती दर पर तेल खरीदकर रूस की मदद कर रहा है. अगर भारत रूसी तेल को खरीदना अभी बंद कर दे तो उसे अमेरिकी टैरिफ में तुरंत 25 फीसदी की छूट मिल सकती है. नवारो ने कहा कि यूक्रेन में शांति का रास्‍ता, भारत से होकर जाता है. उद्योग के सूत्रों ने बताया कि प्रचलित दावों के विपरीत, भारतीय रिफाइनर रूसी तेल के लिए अमेरिकी डॉलर का उपयोग नहीं करते हैं. सूत्रों ने कहा कि खरीद तीसरे देशों के व्यापारियों के माध्यम से की जाती है और AED जैसी मुद्राओं में निपटाई जाती है. अमेरिकी सरकार ने कभी भी भारत से खरीद बंद करने के लिए नहीं कहा. भारत का व्यापार पूरी तरह से वैध है और G7 और यूरोपीय संघ के तय प्राइस नियमों के अंतर्गत है.  कालाबाजारी तेल पर क्‍या कहा?  भारत द्वारा तेल की कालाबाजारी की अटकलों का भी खंडन किया गया. सूत्रों ने आगे कहा, 'रूसी तेल पर ईरानी या वेनेज़ुएला के तेल की तरह प्रतिबंध नहीं है. इसे पश्चिमी देशों द्वारा मुनाफाखोरी रोकने के लिए बनाई गई तय लिमिट सिस्‍टम के तहत बेचा जाता है. अगर अमेरिका रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाना चाहता, तो उसने प्रतिबंध लगा दिया होता, उसने ऐसा नहीं किया क्योंकि उसे बाजार में रूसी तेल की जरूरत है.'  भारत रूसी तेल पर फोकस  भारत के रूसी तेल शोधन का केंद्र बनने के आरोपों को भी खारिज कर दिया है. उद्योग के सूत्रों ने कहा कि भारत दशकों से दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर रहा है. कच्‍चे तेल का शोधन और ईंधन का निर्यात, ग्‍लोबल व्‍यवस्‍था इसी तरह काम करती है. रूसी कच्‍चे तेल पर प्रतिबंध लगाने के बाद यूरोप खुद भारतीय डीजल और जेट ईंधन पर निर्भर हो गया है.  क्या रिफाइनरियां अपना मुनाफ़ा विदेश भेज रही हैं, इस पर सूत्रों ने स्पष्ट किया कि करीब 70% रिफाइंड ईंधन घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारत में ही रहता है. रिलायंस की एक रिफाइनरी इस युद्ध से बहुत पहले, 2006 से ही निर्यात पर फोकस है. घरेलू उपयोग बढ़ने के साथ ही रिफाइंड ईंधन का निर्यात वास्तव में कम हुआ है.

बुंदेलखंड में नया धार्मिक स्थल, छतरपुर में बन रहा पहला श्रीकृष्ण धाम

छतरपुर  मध्य प्रदेश के छतरपुर में बुंदेलखंड का पहला श्रीकृष्ण धाम बनकर तैयार हो गया है। 30 अगस्त को पूरी भव्यता और गरिमा के साथ बनाए जा रहे श्रीकृष्ण महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। छतरपुर विधायक और भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष ललिता यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मेला ग्राउण्ड में आयोजित मंचीय कार्यक्रम में शामिल होने के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण की शोभायात्रा में भी शामिल होगे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव हवाई मार्ग से दोपहर 12 बजे छतरपुर आएगे। वे मेला ग्राउण्ड पहुंचेगे जहां मंचीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर नौगांव रोड पर 2 करोड़ 20 लाख की लागत से बनने वाले श्रीकृष्ण धाम के बारे में एलईडी के माध्यम से प्रस्तुति दी जाएगी। श्रीकृष्ण धाम में भगवान श्रीकृष्ण का विग्रह होगा तथा बचपन से लेकर रहसलीला का चित्रण किया जाएगा। श्रीकृष्ण धाम में गरीब बेटियों के विवाह के लिए बेटी विवाह वाटिका बनाई जाएगी तथा बारातियों को ठहरने के लिए कमरों का भी निर्माण होगा। यहां सुंदर और आर्कषक पार्क एवं ध्यानकेंद्र भी बनाया जाएगा।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यही पर श्रीकृष्ण धाम का भूमि-पूजन करेंगे। इस अवसर पर वृंदावन के कलाकारों द्वारा मयूर नृत्य और रहसलीला की मनोहारी प्रस्तुतियां दी जाएगी। बनारस के कलाकार शंखनाद करेंगे जबकि हरिद्धार के पंडितों द्वारा गंगा आरती की प्रस्तुति की जाएगी। समारोह में मुंबई की भजन गायिका द्वारा राधाकृष्णों के भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। मंचीय कार्यक्रम के बाद मेला ग्राउण्ड से भगवान श्रीकृष्ण की शोभायात्रा प्रारंभ होगी जो छत्रसाल चौक, महल, चौक बाजार, हटवारा होकर बस स्टैंड पहुंचेगी जहां इसका समापन हो जाएगा। शोभायात्रा में भगवान श्रीकृष्ण और राधा सहित विभिन्न अवतारों की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अनेक अतिथि शोभायात्रा में सहभागिता करेंगे। इस दौरान रास्ते में जगह-जगह मटकी फोड़ के आयोजन होगे। विधायक ललिता यादव ने सभी क्षेत्रवासियों, नगरवासियों, श्रद्धालुओं तथा भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं से श्रीकृष्ण महोत्सव में पूरी उत्साह और उमंग के साथ शामिल होने तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्वागत करने की अपील की है।

‘गर्व से स्वदेशी’ बने भारत, मनसुख मांडविया का बड़ा संदेश

नई दिल्ली केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित पहले खेल सामग्री निर्माण सम्मेलन की अध्यक्षता की। इसमें भारत ने खेल क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में नीति आयोग, वाणिज्य मंत्रालय, डीपीआईआईटी, फिक्की, सीआईआई, एमएसएमई और खेल उद्योग से जुड़े प्रमुख हितधारकों ने हिस्सा लिया। इस बैठक का उद्देश्य भारत की खेल सामग्री निर्माण क्षमता के लिए एक नया रोडमैप तैयार करना था। अपने 'एक्स' हैंडल पर इस कार्यक्रम की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने लिखा, "युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में आयोजित पहले खेल सामग्री निर्माण सम्मेलन की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत न केवल एक वैश्विक खेल शक्ति बनने की ओर अग्रसर है, बल्कि विश्वस्तरीय भारत निर्मित खेल सामग्री का हब बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।" उन्होंने लिखा, "मंत्रालय, राष्ट्रीय खेल महासंघों और उद्योग से जुड़े हितधारकों के साथ मिलकर एक टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की गई, जो एक दूरदर्शी नीति तैयार करेगी और इस क्षेत्र की अपार संभावनाओं को साकार करने का मार्ग खोलेगी। खेल के मैदानों से लेकर पोडियम तक, अब गर्व से स्वदेशी की ओर बढ़ने और आत्मनिर्भर भारत बनाने का समय आ गया है।" भारत का खेल सामग्री क्षेत्र 2024 में करीब 42,877 करोड़ रुपये का है। साल 2027 तक इसके 57,800 करोड़ रुपये और 2034 तक 87,300 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह क्षेत्र देश में पांच लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है, जिनमें अधिकतर मेरठ, जालंधर, लुधियाना और दिल्ली-एनसीआर के एमएसएमई क्लस्टर्स में कार्यरत हैं। भारत एशिया में तीसरा सबसे बड़ा खेल सामग्री निर्माता है। दुनिया में भारत 21वां सबसे बड़ा निर्यातक है। भारत ने 2023–24 में खेल सामग्री 90 से अधिक देशों को निर्यात की। सबसे ज्यादा निर्यात अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और फ्रांस में किया जा रहा है, जबकि दक्षिण अफ्रीका, यूएई, कनाडा और स्वीडन में नए अवसर बढ़ रहे हैं।

ड्रोन टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ने किया शुभारंभ

नोएडा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शनिवार को नोएडा पहुंचे। दोनों नेताओं ने सेक्टर-81 स्थित राफी मोहिब ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और रक्षा उपकरण एवं इंजन टेस्ट फैसिलिटी का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बढ़ती रक्षा क्षेत्र की चुनौतियों को देखते हुए अत्याधुनिक ड्रोन, एयरक्राफ्ट इंजन और एयरोस्पेस टेस्ट फैसिलिटी देश के लिए बड़ी उपलब्धि है। भारत 1947 से लगातार चुनौतियों का सामना करता आ रहा है और 'ऑपरेशन सिंदूर' ने युद्ध के नए दौर में देश की सामर्थ्य और शक्ति का प्रदर्शन किया है। आपके पास ताकत है तो दुनिया आपके सामने नतमस्तक होती है। शास्त्र और शस्त्र दोनों का बेहतर समन्वय होगा तो शांति कायम होगी। उन्होंने शेर और बकरी का उदाहरण देते हुए कहा कि शेर सामर्थ्य और राज दोनों का प्रतीक है। सीएम योगी ने महाराणा प्रताप की वीरता का भी उल्लेख किया और कहा कि उत्तर प्रदेश में नौ ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां संचालित हैं। राज्य सरकार ने साढ़े 12 हजार एकड़ भूमि डिफेंस कॉरिडोर के लिए उपलब्ध कराई है, जिसमें आगरा, अलीगढ़, झांसी, चित्रकूट और कानपुर शामिल हैं। साथ ही लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल की यूनिट स्थापित की गई है, जिसने 'ऑपरेशन सिंदूर' में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। सीएम योगी ने कहा कि लखनऊ की मुस्कुराहट तब और बढ़ेगी जब वहां से ब्रह्मोस मिसाइल दुश्मन पर निशाना साधेगी। उन्होंने नई ड्रोन यूनिट को बधाई देते हुए आश्वस्त किया कि यूपी सरकार देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह यूनिट देश को समर्पित है और डिफेंस सिस्टम में साइंटिफिक रिवॉल्यूशन का प्रतीक है। 2017 में महज 10 लोगों के साथ कंपनी की शुरुआत हुई थी और आज 3,600 से ज्यादा वैज्ञानिक व इंजीनियर यहां काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका या चीन का कोई भी डिफेंस सिस्टम इस कंपनी के बने ड्रोन को डिटेक्ट नहीं कर सकता। इसे देश की सबसे इनोवेटिव एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बताते हुए उन्होंने कहा कि यह सिस्टम दुश्मन में दहशत पैदा करने वाला है। रक्षा मंत्री ने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था इतनी खराब थी कि यहां उद्योग लगाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, लेकिन आज योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य निवेशकों की पहली पसंद बन गया है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि ड्रोन अब सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण को याद करते हुए कहा कि विरोध झेलने के बावजूद भारत ने हमेशा नई राह बनाई है। मात्र 14 महीनों में इस कंपनी और डीआरडीओ के बनाए प्रोडक्ट्स 'ऑपरेशन सिंदूर' में इस्तेमाल हुए। संकल्प, साहस और विज्ञान के मेल से ही यह संभव हो पाया और सेना के जवानों की वीरता का भी जिक्र किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- पर्यटन किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती में बड़ी अहम भूमिका निभाता है

म.प्र. की पर्यटन नीति भा रही है निवेशकों को पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने 7 निवेशकों को जारी किये एलओए 60 करोड़ से अधिक का होगा निवेश और रोजगार सृजन अधिकांश निवेशकों ने होटल रिसॉर्ट में दिखाई रूचि 75 करोड़ से अधिक के विरासत कार्यों का हुआ शिलान्यास शिल्पकारों के लिए वेबसाइट और ग्वालियर किले की कार्ययोजना का हुआ विमोचन निवेश के लिए हो रहे सर्वांगीण प्रयासों से अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल : विधानसभा अध्यक्ष श्री तोमर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रमुख निवेशकों और हितधारकों से किया संवाद भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पर्यटन किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती में बड़ी अहम भूमिका निभाता है। पर्यटन से राष्ट्रीय आय तो बढ़ती ही है, साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होते हैं। पर्यटन और तीर्थाटन, ये हमारे देश और विशेषकर मध्यप्रदेश की समृद्धि के प्रमुख प्रवेश द्वार हैं। मध्यप्रदेश, देश का दिल है। प्रदेश की वैश्विक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए ही पर्यटन विकास को विशेष महत्व दिया जा रहा है। राज्य सरकार समावेशी प्रयासों के जरिए समाज के सभी वर्गों को जोड़कर पर्यटन क्षेत्र के विस्तार और संवर्धन के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर पर्यटन कॉन्क्लेव में साढ़े तीन हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 6 निवेशकों को लैटर ऑफ अलॉटमेंट प्रदाय किये गये, इससे 60 करोड़ से अधिक का निवेश और बड़ी संख्या में रोजगार सृजन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को ग्वालियर के राजमाता विजया राजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित दो दिवसीय रीजनल टूरिज्म कान्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरें विश्व स्तर पर आकर्षण का केंद्र हैं। इनके संरक्षण और प्रचार-प्रसार से प्रदेश न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर, विकसित और समृद्ध भारत’ के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में आज राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस मनाया जा रहा है। इस शुभ अवसर पर ग्वालियर में पहली बार रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव हो रहा है। ग्वालियर देश की राजधानी के करीब का क्षेत्र है। यहां राजा मानसिंह तोमर के काल में बना ऐतिहासिक किला दुनिया में पहचान रखता है। इसकी स्थापत्य कला अद्भुत है। बड़े-बड़े सत्ताधीशों को बुरे समय में इसी किले में बंदी बनाकर रखा गया। इस कठिन दौर में ग्वालियर में एक आध्यात्मिक आत्मा का प्रकटीकरण हुआ। मुरैना के मितावली के चौंसठ योगिनी मंदिर के डिजाइन के आधार पर वर्ष 1912 में दिल्ली में संसद भवन का निर्माण हुआ। यह दुनिया भर में लोकतंत्र का सबसे आकर्षक भवन है। अब नए संसद भवन को विदिशा के मंदिर के डिजाइन पर बनाकर तैयार किया गया है। इसमें बना डोम सांची स्तूप की कॉपी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जो पहली बार चीता देखते हैं, वो आश्चर्यचकित हो जाते हैं। चीता गांवों में घूमते नजर आते हैं। प्रदेश में मनुष्य और वन्य प्राणियों के बीच सह अस्तित्व और साहचर्य भाव नजर आता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर संगीत सम्राट तानसेन और बैजू बावरा की विरासत है। राजा मानसिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय, ग्वालियर के भवन निर्माण के लिए 50 करोड़ की धनराशि आवंटित की गई है। जीवाजी विश्वविद्यालय में पीएम उषा योजना के तहत विकास कार्यों के लिए भी बड़ी धनराशि दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीवा के बाद अब पर्यटन विकास के लिए ग्वालियर अंचल को भी कई सौगातें मिल रही हैं। ग्वालियर के राजा मानसिंह किले में विभिन्न विकास कार्यों के लिए इंडिगो कंपनी द्वारा अपने कॉर्पोरेट सोशल रेस्पांसिबिलिटी फंड (सीएसआर कोष) से 100 करोड़ रुपए दिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी पूरी दुनिया को देश की विरासतों और पर्यटन केंद्रों के बारे में बता रहे हैं। वे 'मेक इन इंडिया', 'मेड इन इंडिया', 'वोकल फॉर लोकल' और 'स्वदेशी अपनाओ' अभियान के जरिए देश के नागरिकों को स्वदेशी से स्वाबलंवन की ओर प्रवृत्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर की रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में उद्योगपति श्री सचिन गुप्ता ने 1000 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा अन्य निवेशकों एवं उद्योग समूहों की ओर से कुल 3500 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव राज्य सरकार को इस कान्क्लेव के माध्यम से मिले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि यह कॉन्क्लेव 11 से 13 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली 'मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट' की तैयारियों का हिस्सा है। टूरिज्म सैक्टर के लिए यह महत्वपूर्ण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि रविवार (31 अगस्त) को मुरैना जिले को अनेक सौगातें मिलेंगी। मुरैना के पीपरसेरा औद्योगिक प्रक्षेत्र में करीब 500 करोड़ रुपए की लागत से हाइड्रोजन कारखाने का शिलान्यास किया जा रहा है। कॉन्क्लेव में होटल एवं रिसोर्ट के लिए प्राप्त हुए निवेश प्रस्‍ताव कॉन्क्लेव में प्रमुख निवेशकों ने ग्वालियर–चंबल और सागर संभाग में निवेश की इच्छा जताकर पर्यटन के विकास की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। यह ऐतिहासिक पल दोनों संभागों के लिए आर्थिक समृद्धि और रोजगार के नए द्वार खोलेगा। निवेशकों को लैटर ऑफ अलॉटमेंट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव के दौरान पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 7 भूमियों के लिए 6 निवेशकों को लैटर ऑफ अलॉटमेंट (LOA) प्रदान किए। प्रदेश में इससे सीधे तौर पर 60 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश और प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के असंख्य अवसर पैदा होंगे। इन भूमियों पर होटल, रिसॉर्ट और ईको टूरिज्म यूनिट आदि का निर्माण किया जाएगा। श्री अरूण तिवारी को 40 कक्षों के साथ ईको टूरिज्म एक्टिविटी के लिये गांधी सागर मंदसौर और हेमाबर्डी धार में, श्री यश जैन को 20 कक्षों का रिसॉर्ट बनाने रहीपुरा बुराहनपुर में, श्रीमती स्मृति मुकुल थोराट, मेसर्स श्री साईं वेयर हाउस एण्ड एग्रो सर्विस को 20 कक्षों का रिसॉर्ट बनाने बिजाना शाजापुर में, श्री अमित उपाध्याय को 25 कक्षों का होटल/ रिसॉर्ट बनाने के लिये कागपुर विदिशा में, श्री संजय पाव को 22 कक्षों के साथ ईको टूरिज्म एक्टिविटीज के लिये गांधी सागर मंदसौर में और श्री विकास नेमा/प्रवीण … Read more

ITR फाइलिंग पर नया अपडेट: ₹3 लाख कमाने वालों के लिए क्या है नियम?

नई दिल्ली  जिन लोगों का आयकर ऑडिट नहीं होता, उनके लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2025 है। अब केवल तीन हफ्ते बचे हैं और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इस बारे में SMS रिमाइंडर भेजना शुरू कर दिया है। आयकर विभाग की ओर से भेजे जा रहे SMS में लिखा है- अब तक 3 करोड़ से ज्यादा आईटीआर दाखिल किए जा चुके हैं! कृपया 15.09.25 से पहले ई-फाइलिंग पोर्टल पर AY 2025-26 के लिए अपना आईटीआर दाखिल और ई-वेरिफिकेश करें। सालाना सैलरी 3 लाख रुपये हो तब? ऐसे में अब सवाल है कि किसके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करना जरूरी है। क्या उन लोगों के लिए भी रिटर्न फाइल करना जरूरी है जिसकी सालाना सैलरी 3 लाख रुपये तक है? नांगिया एंड कंपनी एलएलपी की कार्यकारी निदेशक संजोली माहेश्वरी ने कहा- वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की आय सीमा टैक्सपेयर की कुल आय और चुने गई टैक्स रिजीम यानी पुरानी या नई टैक्स रिजीम पर आधारित है। ईटी की खबर में संजोली माहेश्वरी ने कहा- यदि टैक्सपेयर की कुल आय मूल छूट सीमा से अधिक है तो टैक्सपेयर को अनिवार्य रूप से आईटीआर दाखिल करना चाहिए। नई टैक्स व्यवस्था के लिए मूल छूट सीमा 3 लाख रुपये और पुरानी टैक्स व्यवस्था के लिए 2.5 लाख रुपये है। किस तरह के होते हैं फॉर्म आईटीआर फॉर्म एक (सहज) और आईटीआर फॉर्म चार (सुगम) सरल फॉर्म हैं जो बड़ी संख्या में छोटे तथा मध्यम करदाताओं की जरूरतों के अनुरूप हैं। सहज को ऐसे व्यक्ति दाखिल कर सकते हैं, जिसकी वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक हो और जो वेतन, एक मकान की संपत्ति, अन्य स्रोतों (ब्याज) तथा कृषि आय से 5,000 रुपये प्रति वर्ष तक की आय प्राप्त करता हो। सुगम को ऐसे व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) और कंपनियों द्वारा दाखिल किया जा सकता है, जिनकी वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक हो और व्यवसाय से और कोई पेशेवर आय हो। आईटीआर-2 उन व्यक्तियों और एचयूएफ द्वारा दाखिल किया जाता है जिनकी आय, व्यवसाय या पेशेवर लाभ या प्राप्ति से नहीं होती है।  

राजवाड़ा मार्केट इंदौर: सराफा से लेकर अन्य व्यापारी भी रात 10 बजे तक करेंगे कारोबार

इंदौर  राजवाड़ा क्षेत्र के बाजार में अब देर रात तक चहल-पहल रहेगी। सराफा व्यापारियों के साथ आते हुए क्षेत्र के अन्य बाजारों ने भी रात 10 बजे तक दुकानें खुली रखने की घोषणा कर दी है। एक सितंबर से इस पर अमल होगा। राजवाड़ा क्षेत्र के व्यापारियों ने इस मुद्दे पर चर्चा के बाद अपने सदस्य व्यापारियों के लिए सूचना जारी कर दी है। व्यापारी एसोसिएशनों द्वारा जारी किए गए सर्कुलर में त्योहार और क्षेत्र के व्यापार को बढ़ाने को निर्णय का कारण बताया गया है। हालांकि असल कारण फुटपाथ व दुकानों के सामने कब्जे रोकना माना जा रहा है। सराफा में लग रही चाट-चौपाटी के खिलाफ चांदी-सोना जवाहरात व्यापारी एसोसिएशन ने असहयोग आंदोलन छेड़ रखा है। ओटलों पर किराएदारी बंद करने के बाद सराफा बाजार में दुकानें रात 10 बजे तक खोलने का निर्णय लिया गया है। शुक्रवार को इंदौर रिटेल रेडीमेड गारमेंट व्यापारी एसोसिएशन ने बैठक के बाद इस पर सहमति जताई है। एसोसिएशन के सदस्य 600 गारमेंट कारोबारियों के साथ अन्य 300 दुकानदार भी देर रात तक दुकानें खुली रखने के लिए तैयार हो गए हैं। सराफा व्यापारी कैविएट दायर करेंगे सराफा चाट चौपाटी के खिलाफ मुहिम चला रहे चांदी-सोना व्यापारी कानूनी तौर पर भी अपना पक्ष मजबूत करने में लगे हैं। बताया जा रहा है कि व्यापारियों पर कदम पीछे खींचने और दुकानें नौ बजे तक बंद करवाने के लिए राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। इस बीच व्यापारी गुमाश्ता कानून का हवाला देकर कह रहे हैं कि उन्हें रात 11 बजे तक दुकानें खुली रखने की छूट है, ऐसे में कोई भी जल्द बंद करने का दबाव नहीं बना सकता। चौपाटी वालों के अदालत जाने या ऐसी किसी अन्य याचिका पर एक पक्षीय आदेश से सुरक्षा के लिए सराफा व्यापारियों ने हाई कोर्ट में कैविएट दाखिल करने की तैयारी भी कर ली है। कृष्णपुरा व्यापारी एसोसिएशन भी समर्थन में कृष्णपुरा व्यापारी एसोसिएशन ने इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के साथ समन्वय कर साझा निर्णय लिया है कि आगामी दिनों में त्योहारों का सीजन रहेगा। ऐसे में वो भी रात 10 बजे तक दुकानें खुली रखेंगे। इस दौरान राजवाड़ा-कृष्णपुरा तक क्षेत्र को पूरी तरह व्यवधान मुक्त रखने, यातायात प्रबंधन, महिला सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी और नगर निगम के अतिक्रमण व्यवस्था को चाक-चौबंद पुख्ता प्रबंधन के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को व्यापारी पत्र भी लिखेंगे। दुकानदारों को त्योहारी के लिए तैयारी करनी है     त्योहार का सीजन आ गया है। ऐसे में दुकानदारों को त्योहारी के लिए तैयारी करनी है। हमारा लक्ष्य है कि आम नौकरीपेशा लोग काम से फ्री होकर रात को बाजार में खरीदारी के लिए आ सकें। इसके लिए हम अभी से प्रचार अभियान चलाएंगे। – अक्षय जैन, अध्यक्ष, इंदौर रिटेल रेडीमेड गारमेंट व्यापारी एसोसिएशन एक सितंबर से रात 10 बजे तक खुला रहेगा बाजार     रात तक दुकानें खुली रखने के निर्णय में हमारी एसोसिएशन साथ है। राजवाड़ा के साथ कृष्णपुरा के सभी रेडीमेड गारमेंट्स संस्थान एक सितंबर से रात 10 बजे तक सेवाएं देंगे। – विजेंद्रसिंह चौहान, अध्यक्ष, कृष्णपुरा व्यापारी एसोसिएशन