samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में 79.27 करोड़ के विकास कार्यो का किया भूमि-पूजन

हर काल और हर युग में रही है उज्जैन की गौरव गाथा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में 79.27 करोड़ के विकास कार्यो का किया भूमि-पूजन 25 करोड़ रूपये से अधिक की लागत से रीगल टॉकीज का होगा उन्नयन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश की सात पवित्र नगरियों में अवंतिका (उज्जैन) भी शामिल है। यहां राजा विक्रमादित्य, महाकवि कालिदास, सम्राट अशोक, चंद्र प्रद्योत के नाम अजर-अमर हो चुके हैं। हमारे पास राष्ट्र वीर दुर्गादास राठौर की ऐतिहासिक विरासत भी है। आज उनकी छत्री के जीर्णोद्धार के लिए भूमिपूजन किया गया है। हर काल और युग में उज्जैन की गौरवशाली गाथा रही है। हम एक नये दौर में प्रवेश कर रहे है। उज्जैन गोपाल मंदिर क्षेत्र स्थित रीगल टॉकीज का इतिहास बहुत गौरवशाली रहा है। यहां भगवान महाकालेश्वर की सवारी निकलती है, सिंहस्थ के दौरान यहां से पेशवाई निकलती है और यह स्थान हरि और हर के मिलन का साक्षी भी होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को उज्जैन में गोपाल मंदिर छत्री चौक स्थित कार्यक्रम में 79.27 करोड़ रूपये लागत के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें 25.15 करोड़ रूपये की लागत से रीगल टॉकीज के विकास कार्य, आगामी सिंहस्थ महापर्व के अंतर्गत 22.30 करोड़ रूपये की लागत से गदा पुलिया से रविशंकर नगर, जयसिंह पुरा होते हुए लालपुल ब्रिज तक मार्ग चौड़ीकरण कार्य और 31.83 करोड़ रूपये की लागत से गाड़ी अड्डा चौराहे से वी.डी क्लाथ मार्केट, निकास चौराहा, खजूर वाली मस्जिद, के.डी. गेट मार्ग वाया जूना सोमवारिया से बड़ी पुलिया तक मार्ग चौड़ीकरण कार्य का भूमिपूजन किया गया है। कार्यक्रम में रीगल टॉकीज के उन्नयन पर आधारित लघु फिल्प का प्रसारण भी किया गया। रीगल टॉकीज का निर्माण कार्य 36 हजार स्क्वेयर फीट क्षेत्र में किया जाएगा।       मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन शहर का हर काल में विशेष महत्व रहा है। आगामी सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए विकास के कार्य निरंतर किये जा रहे हैं। आज उज्जैन को कुल 107 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात मिली है। आगामी सिंहस्थ महापर्व में स्नान क्षिप्रा नदी के जल से ही होगा। सेवरखेडी – सिलारखेड़ी परियोजना से क्षिप्रा नदी में पूरे वर्ष जल रहेगा, क्षिप्रा सदैव प्रवहमान रहेगी। सिंहस्थ में सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही उज्जैन को नई 4 लेन सड़क की सौगात मिलने वाली है। साथ ही लगभग 10 हजार करोड़ की लागत से नई मेट्रो लाइन उज्जैन से इंदौर और पीथमपुर को कनेक्ट करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विक्रम उद्योगपुरी में इंडस्ट्रियल सैट अप किया गया है और यहां से हम विश्व स्तरीय उत्पाद बनाकर विश्व के कई देशों को सप्लाई कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लखपति दीदी योजना ने बहनों का सशक्तिकरण किया है। प्रधानमंत्री मोदी से प्रेरणा लेकर बहनों के सशक्तिकरण के लिए प्रदेश सरकार ने लाड़ली बहना योजना शुरू की है, जिसमें बहनों को अभी 1250 रुपए की राशि दी जा रही है। जल्दी ही बहनों को प्रतिमाह 1500 रुपए की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने माताओं-बहनों को स्थानीय निकाय चुनावों में 33 प्रतिशत आरक्षण दिया है। अब ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देना चाहते हैं। सरकार हर वर्ग के विकास के लिए कार्य कर रही है। अब प्रदेश में सरकारी और निजी मिलाकर कुल 32 मैडिकल कॉलेज हो जाएंगे। वर्ष 2002-03 के बाद मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ रहा है। पिछले डेढ़ साल में 7.5 लाख हेक्टेयर सिंचाई रकबा बढ़ा है।                                                       कार्यक्रम में विधायक अनिल जैन कालूहेडा, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, संजय अग्रवाल, कैलाश प्रजापत, गणमान्य नागरिक मौजूद थे। आभार प्रर्दशन एमआईसी सदस्य शिवेंद्र तिवारी ने किया। मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री ने 52 करोड़ के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उज्जैन में एक अन्य कार्यक्रम में 52 करोड़ 69 लाख रुपए से अधिक की लागत से राष्ट्र वीर दुर्गादास छत्री के संरक्षण संवर्धन एवं विभिन्न विकास कार्यों का भूमि पूजन किया। मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय तथा मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, रवि सोलंकी, संजय अग्रवाल आदि उपस्थित रहे। वीर दुर्गादास छत्री पर किया माल्यार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय मंत्री शेखावत तथा अन्य अतिथियों द्वारा राष्ट्र वीर दुर्गादास छत्री पर पहुंचकर माल्यार्पण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को राष्ट्र वीर दुर्गादास के पराक्रम एवं शौर्य एवं देश के गौरवशाली इतिहास से परिचित करवाने के लिए विभिन्न कार्य किए जाएंगे। इनमें राष्ट्र वीर दुर्गादास की प्रतिमा स्थापना के साथ ही पैदल पुल, बगीचा, एक्टिविटीज जोन, रिटेनिंग वॉल, पार्किंग, हॉर्स ट्रैकिंग जोन, ओपन एयर थिएटर, संग्रहालय निर्माण आदि कार्य सम्मिलित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रस्तावित निर्माण कार्यों का नक्शे पर अवलोकन किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। 

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: भोपाल ओवरब्रिज विवाद की जांच अब मैनिट प्रोफेसर करेंगे

जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोपाल के बहुचर्चित 90 डिग्री ओवरब्रिज मामले में ठेकेदार कंपनी मेसर्स पुनीत चड्ढा को बड़ी राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने ठेकेदार पर कठोर कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई है। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया है कि ओवरब्रिज की जांच मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) भोपाल के वरिष्ठ प्रोफेसर से कराई जाए और 10 सितंबर तक रिपोर्ट पेश की जाए। याचिका में ठेकेदार ने दलील दी कि निर्माण पूरी तरह से पीडब्ल्यूडी अधिकारियों द्वारा दी गई डिजाइन के आधार पर हुआ। इसलिए कंपनी को दोष देना अनुचित है, जबकि विभागीय जांच में दोषी अफसरों पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। कोर्ट ने भी असलियत सामने लाने के लिए स्वतंत्र तकनीकी जांच का आदेश दिया। जांच का खर्च (करीब एक लाख रुपये) फिलहाल ठेकेदार वहन करेगा।   क्या है पूरा मामला? 145 करोड़ की लागत से बने ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज को अगस्त 2023 में यातायात के लिए खोला गया। इसके बाद 90 डिग्री के खतरनाक मोड़ की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। मुख्यमंत्री के आदेश पर 8 इंजीनियर निलंबित हुए, जिनमें 2 मुख्य अभियंता भी शामिल। पुल बनाने वाली कंपनी और डिजाइन कंसल्टेंट को ब्लैकलिस्ट किया गया। सरकार ने घोषणा की कि पुल को रीडिजाइन कर सुधारा जाएगा और रेलवे भी इसके लिए अतिरिक्त जमीन देगा।

31 अक्टूबर के बाद नहीं देना पड़ेगा सेस? GST काउंसिल ने दिए संकेत

नई दिल्ली वस्तु एवं सेवा कर परिषद की बैठक 3 सितंबर को होने जा रही है। इस बैठक में 31 अक्टूबर तक क्षतिपूर्ति उपकर समाप्त करने पर चर्चा की जा सकती है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर 31 मार्च, 2026 को समाप्त होने वाला था। हालांकि, उपकर संग्रह को पहले ही समाप्त करने के लिए चर्चाएं शुरू हो गई हैं, क्योंकि कोरोना महामारी के दौरान राज्यों को राजस्व की कमी की भरपाई के लिए, लिए गए ऋण पूरी तरह से चुकाने के करीब पहुंच रहे हैं। यह पुनर्भुगतान 18 अक्टूबर के आसपास पूरा होने की उम्मीद है, लेकिन सरकार सुचारू संचालन के लिए इसे अक्टूबर के अंत तक बढ़ा सकती है। सरकारी सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि उपकर संग्रह से लगभग 2,000-3,000 करोड़ रुपए का अधिशेष प्राप्त हो सकता है, जिसे केंद्र और राज्यों के बीच समान रूप से साझा किया जाएगा। कानून में क्षतिपूर्ति के लिए उपकर को केवल पांच वर्षों के लिए अनिवार्य किया गया था, क्योंकि राज्यों को चिंता थी कि 2017 में जीएसटी लागू होने पर उन्हें कर राजस्व का नुकसान होगा। इसलिए राज्य के राजस्व में कमी की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति उपकर लगाया गया था। केंद्र ने राज्यों की ओर से 2.69 लाख करोड़ रुपए उधार लिए और वित्तीय प्रबंधन में सहायता के लिए उन्हें ऋण के रूप में प्रदान किए। हालांकि, महामारी के दौरान लिए गए ऋणों के भुगतान हेतु, जब राजस्व में तेज गिरावट आई थी, इस उपकर को जून 2022 से मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया था। वस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को क्षतिपूर्ति) अधिनियम, 2017 के अनुसार, ऋणों का भुगतान पूरा होने के बाद उपकर संग्रह बंद हो जाएगा। वित्त मंत्रालय ने सभी वस्तुओं पर 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो जीएसटी दरों के लिए जीएसटी परिषद को अपना प्रस्ताव भेजा है, जो मौजूदा चार स्लैब संरचना का स्थान लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के अनुसार, गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों को कम करने के उद्देश्य से एक नियोजित जीएसटी सुधार के माध्यम से नागरिकों को इस दिवाली दोहरा बोनस मिलेगा।

नया नियम: प्राइवेट सेक्टर में 10 घंटे की शिफ्ट, ओवरटाइम के घंटे बढ़े

नई दिल्‍ली  इन्‍फोसिस के फाउंडर नारायणमूर्ति ने पिछले दिनों सप्‍ताह में 70 घंटे काम करने का जो शिगूफा छोड़ा था, उसका असर अब दिखने वाला है. महाराष्‍ट्र सरकार अपने प्रदेश की प्राइवेट कंपनियों में वर्किंग ऑवर यानी काम के घंटे बढ़ाने की तैयारी में है. फिलहाल सरकार और कंपनियों के बीच बातचीत चल रही है और इस पर फैसला हुआ तो रोजाना 9 घंटे के बजाय 10 घंटे काम करने होंगे. सरकार महाराष्‍ट्र शॉप एंड स्‍टैब्लिशमेंट (रेगुलेशन ऑफ एम्‍पलॉयमेंट एंड कंडीशन ऑफ सर्विस) एक्‍ट, 2017 में बदलाव करने पर विचार कर रही है. इसके तहत दुकानों, होटल और कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए काम के घंटे बढ़ाने का प्रस्‍ताव दिया गया है. राज्‍य के श्रम विभाग ने इस प्रस्‍ताव पर कैबिनेट की बैठक में भी चर्चा किया और सबकुछ सही रहा तो जल्‍द ही इस नए नियम को लागू किया जा सकता है. कैबिनेट में हुई चर्चा हिंदुस्तान टाइम्स (एचटी) की रिपोर्ट के अनुसारमंगलवार को राज्य श्रम विभाग ने इस प्रस्ताव को कैबिनेट के सामने पेश किया। मंत्रियों ने इस पर चर्चा तो की, लेकिन उन्होंने इसे मंजूरी देने से पहले कुछ और जानकारियां मांगी हैं। एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि प्रस्ताव के प्रावधानों और उनके प्रभाव को लेकर अभी और स्पष्टता की जरूरत है। इसलिए अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है । प्रस्तावित परिवर्तन क्या हैं? श्रम विभाग 2017 के कानून में लगभग पांच बड़े बदलाव करने की योजना बना रहा है, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण काम के घंटों में वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त, प्रस्ताव में यह भी सुझाव दिया गया है कि वयस्क एक बार में छह घंटे से ज़्यादा काम तभी कर सकते हैं जब उन्हें आधे घंटे का ब्रेक दिया जाए। फ़िलहाल, एक कर्मचारी अधिकतम पाँच घंटे तक लगातार काम कर सकता है। विभाग ने तीन महीने की अवधि में कर्मचारियों के लिए अनुमेय ओवरटाइम की सीमा 125 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे करने की भी सिफारिश की है। वर्तमान में, कर्मचारी 10.5 घंटे (ओवरटाइम सहित) तक काम कर सकते हैं, लेकिन नए प्रस्ताव में इस सीमा को बढ़ाकर 12 घंटे करने का प्रस्ताव है। अत्यावश्यक कार्य के मामलों में, 12 घंटे की मौजूदा दैनिक सीमा को पूरी तरह से समाप्त किया जा सकता है, जिससे कार्य घंटों की कोई अधिकतम सीमा नहीं रहेगी। ये परिवर्तन किस पर लागू होंगे? अगर ये नियम लागू होते हैं, तो प्रस्तावित बदलाव केवल 20 या उससे ज़्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों पर ही लागू होंगे। मौजूदा नियम 10 या उससे ज़्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों पर लागू होते हैं। एक वरिष्ठ मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर एचटी को बताया, "मंत्री प्रावधानों और उनके प्रभाव पर अधिक स्पष्टता चाहते थे, इसलिए आज निर्णय स्थगित कर दिया गया।" अधिकारियों ने बताया कि इस क्षेत्र की लंबे समय से लंबित मांग के बाद कैबिनेट में यह प्रस्ताव रखा गया। लंबे कार्य घंटों पर बहस इस वर्ष जनवरी में, लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के अध्यक्ष एस.एन. सुब्रह्मण्यन ने 90 घंटे के कार्य सप्ताह की वकालत करके एक ऑनलाइन बहस छेड़ दी थी और सुझाव दिया था कि कर्मचारियों को रविवार सहित सप्ताहांत पर भी काम करना चाहिए। उद्योग जगत के एक नेता के इस बयान ने कार्य-जीवन संतुलन पर बहस को फिर से हवा दे दी है, जो पिछले वर्ष इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति द्वारा 70 घंटे के कार्य सप्ताह के आह्वान के बाद शुरू हुई थी। जैसे-जैसे अधिक नेता काम के घंटों को बढ़ाने की वकालत करने के लिए आगे आ रहे हैं, थकान, मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट और ऐसी अपेक्षाओं की स्थिरता के बारे में चिंताएं बढ़ रही हैं।  कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और स्मार्ट एक्सेसरीज़ ब्रांड, एलिस्टा ने पहले कहा था कि "उत्पादकता लंबे समय तक काम करने से नहीं, बल्कि ध्यान और दक्षता से बढ़ती है। ज़रूरत से ज़्यादा काम करने से थकान, रचनात्मकता में कमी और काम की गुणवत्ता में गिरावट आती है।" ओवरटाइम पर भी नया प्रस्‍ताव श्रम विभाग ने ओवरटाइम की लिमिट को भी बढ़ाने का प्रस्‍ताव दिया है, जो एक तिमाही में 125 से बढ़ाकर 144 घंटे किए जाने की तैयारी है. अभी कोई भी कर्मचारी ओवरटाइम को मिलाकर अधिकतम 10.5 घंटे रोजाना काम कर सकता है, जबकि नए प्रस्‍ताव में इस अवधि को बढ़ाकर 12 घंटे किया जाएगा. आपात स्थिति के समय मौजूदा 12 घंटे की टाइम लिमिट को खत्‍म करके अनलिमिटेड किया जाएगा. इसका मतलब है कि ऐसी स्थिति में कर्मचारी 24 घंटे काम कर सकेंगे. यह बदलाव किनपर लागू होंगे? अगर यह प्रस्ताव कानून बन जाता है, तो यह बदलाव उन्हीं कंपनियों पर लागू होंगे, जहां 20 या उससे ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। अभी यह कानून 10 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होता है। आखिर ऐसा प्रस्ताव क्यों लाया गया? अधिकारियों का कहना है कि यह प्रस्ताव उद्योग जगत की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखकर लाया गया है । हालांकि, कैबिनेट में इसपर अभी चर्चा जारी है और कोई निर्णय होने में अभी समय लग सकता है। किन कंपनियों पर लागू होगा श्रम विभाग का यह प्रस्‍ताव ऐसी कंपनियों पर लागू किया जाएगा, जहां 20 से ज्‍यादा कर्मचारी काम करते हैं. अभी यह नियम 10 कर्मचारी वाली कंपनियों और दुकानों पर लागू है. फिलहाल सरकार इस पर और स्‍पष्‍टीकरण चाहती है और उसकी मंशा है कि नियम बनाने से पहले इसके सभी पहलू पर विचार किया जाना चाहिए. पिछले दिनों लार्सन एंड ट्रूबो के चेयरमैन एसएन सुब्रमण्‍यन ने सप्‍ताह में 90 घंटे काम कराने और सप्‍ताहांत यानी रविवार को भी काम करने की बात कहकर यह विवाद छेड़ा था.

जंगली हाथियों की ट्रैकिंग होगी आसान, कान्हा में लगाए जाएंगे विदेशी कॉलर आईडी

मंडला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (MP High Court)को एक्सपर्ट कमेटी के चेयरमैन ने अवगत कराया कि कान्हा टाइगर रिजर्व में रखे गए जंगली हाथी को 15 दिन में छोड़ दिया जाएगा। विदेश से मंगाई गई कॉलर आइडी पहनाई जाएगी। ताकि उसकी ट्रैकिंग की जा सके। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने उक्त जानकारी को रिकार्ड पर ले लिया। साथ ही शहडोल से पकड़कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व लाए गए हाथी की मौत को गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन को फटकार लगाई। याचिका रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने दायर की थी। कोर्ट ने मांगा 30 साल का पूरा विवरण एमपी कोर्ट ने निर्देश दिया कि जंगली हाथियों को पकड़ने की प्रक्रिया में वाइल्ड लाइफ एक्ट का पालन किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को नियत की गई। जंगली हाथियों को पकड़ने को लेकर दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया था कि पिछले 30 वर्षों में पकड़े गए हाथियों का पूरा विवरण पेश किया जाए। सरकार की तरफ से पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया था कि वर्ष 2017 से अब तक 10 जंगली हाथियों को पकड़ा गया है। जिसमें से दो हाथियों को विदेश से मंगवाई गई कालर आइडी पहनाकर छोड़ दिया। अब हाथियों की होगी एक पहचान अब तक आपने बाघों के अलग-अलग नाम सुने होंगे, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी बाघों के अलग-अलग नाम रखे गए हैं. उनकी एक अलग आइडेंटिफिकेशन है. उनकी पूरी हिस्ट्री प्रबंधन के पास होती है, और जरूरत पड़ने पर एक ही झटके में ये किस तरह का टाइगर है, इसका व्यवहार कैसा रहता है, कहां-कहां मोमेंट रहता है, सब कुछ जानकारी मिल जाती है. ठीक उसी तरह से अब हाथियों की भी एक अलग पहचान बनाई जा रही है. मध्य प्रदेश में बांधवगढ टाइगर रिजर्व में ही ऐसा पहली बार हो रहा है जहां हाथियों को आईडेंटिफाई किया जा रहा है. उनको एक अलग नाम दिया जा रहा है, जिसकी शुरुआत भी हो चुकी है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उपसंचालक पीके वर्मा बताते हैं कि, ''हाथियों को नाम देने का काम, उनकी आइडेंटिटी बनाने का काम 25 मई से शुरु कर दिया है और जब तक पूरा नहीं हो जाएगा तब तक यह काम किया जाएगा. ये इसलिए किया जा रहा है कि अब लंबे वक्त से हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में परमानेंट तौर पर निवास कर रहे हैं और वे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ही हो चुके हैं. इसलिए उनका आइडेंटिफिकेशन भी जरूरी है. उनका इतिहास, उनका डाटा तैयार करना ताकि एक क्लिक पर उनके बारे में सब कुछ जाना जा सके. इसी के लिए उनकी एक आईडी जेनरेट की जा रही है, जिससे उनकी एक इंडिविजुअल पहचान हो सकेगी. हम उन्हें एक अलग नाम दे देंगे, एक अलग आईडी दे देंगे. जैसे टाइगर का t1 T2 होता है ठीक इसी तरह से हाथियों का भी एक कोड वर्ड होगा और उनका एक अलग नाम होगा, और उसी नाम से वो जाना जाएगा.'' कैसे होगी पहचान ? बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक बताते हैं कि, ''हाथियों की पहचान करने के लिए उनके जो शरीर में मार्क्स होते हैं, उस आधार पर उनको पहचान दी जाएगी. जैसे किसी हाथी का कान फोल्ड होता है, किसी का कान कटा होता है, कोई तस्कर होता है, किसी का दांत उठा हुआ होता है, किसी का टेढ़ा-मेढ़ा होता है, किसी का टूटा हुआ होता है. इसके अलावा पीठ की पॉजीशन किसी की फ्लैट होती है, किसी का उठा हुआ होता है. किसी के पूंछ में बाल नहीं होते हैं. किसी के पूंछ कटे होते हैं, हर हाथी के कुछ ना कुछ मार्क्स होते हैं. उनकी यूनिक पहचान होती है. इस आधार पर उनका आइडेंटिफिकेशन किया जा रहा है. क्या होगा फायदा? हाथियों का आईडेंटिफिकेशन कर देने से, उनको एक अलग नाम दे देने से आखिर क्या फायदा होगा. इसे लेकर उपसंचालक बताते हैं कि, ''उनकी एक अलग पहचान हो जाने से हम उन्हें ट्रैक कर पाएंगे. उनके हर मूवमेंट पर नजर रख पाएंगे. साथ ही हमारे पास हर हाथी का डाटा होगा, उसके बारे में पूरी जानकारी होगी. साल भर किस तरह का व्यवहार करता है, कौन सा हाथी कनफ्लिक्ट में शामिल रहता है, कौन शांत रहता है, कौन किस दिशा में किस सीजन में कहां मूवमेंट करता है. कौन सा हाथी हर्ड (झुंड) के साथ ही रहता है, कौन सा हर्ड के बाहर जाता है. किस तरह का व्यवहार होता है ये सब कुछ पता रहेगा तो हाथियों की देखरेख में भी मदद मिलेगी.'' जब बांधवगढ़ के हुए हाथी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथी पिछले कई सालों से छत्तीसगढ़ से होकर संजय गांधी टाइगर रिजर्व के कॉरिडोर वाले रास्ते से बांधवगढ़ आते जाते रहे हैं. पहले स्थाई तौर पर नहीं रहते थे, आते थे चले जाते थे. लेकिन साल 2018 में जब बांधवगढ टाइगर रिजर्व में 40 हाथियों का एक दल पहुंचा, उसके बाद से यहीं रह गए और फिर वापस नहीं गये. इनकी संख्या में लगातार इजाफा होता गया और अब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ही इन्होंने अपना नया ठिकाना बना लिया है. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की पहचान बाघों के साथ-साथ हाथियों के लिए भी होने लगी है. बांधवगढ़ में अभी कितने हाथी ? बांधवगढ टाइगर रिजर्व में अभी कितने हाथी हैं इसे लेकर टाइगर रिजर्व के उप संचालक पीके वर्मा बताते हैं कि, ''40 से 50 के लगभग हाथी हैं. कुछ महीने पहले 10 साथियों की डेथ हो गई थी और 5 से 10 हाथी ऐसे हैं जिनका मूवमेंट इधर-उधर होता रहता है. कभी आते हैं, कभी चले जाते हैं. लगभग 50 हाथी परमानेंट तौर पर रह रहे हैं. अभी जब इनका आइडेंटिफिकेशन किया जा रहा है तो यह और अच्छी बात होगी कि इनका एक्चुअल डाटा भी निकल कर सामने आ जाएगा.'' हाथियों को बांधवगढ़ क्यों पसंद आया? आखिर हाथियों को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ही क्यों पसंद आया? इसे लेकर कुछ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि, ''हाथियों की मेमोरी पावर बहुत ज्यादा होती है और उन्हें पीढ़ियों की चीजें याद रहती हैं, वो अपने रास्ते कभी नहीं भूलते हैं. जब कभी भी उन्हें कहीं पर थोड़ा अनसिक्योर लगता है, जंगल में मानव दखल बढ़ने लगता है, या उनके लिए … Read more

एमपी सरकार की तैयारी: थ्री स्टार टेंट सिटी से पर्यटन महोत्सव में बढ़ेगी रफ्तार

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार विलासितापूर्ण टेंट सिटी के जरिए पर्यटन को रफ्तार देने की तैयारी में है। थ्री स्टार सुविधाओं वाली यह टेंट सिटी पर्यटन महोत्सव के दौरान बसाई जाएगी। इसका आयोजन प्राकृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद प्रसिद्ध सात पर्यटन स्थलों पर सितंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच होगा। पर्यटन मंडल अभी तक हनुवंतिया, गांधीसागर, चंदेरी और कूनो में पर्यटन महोत्सव का आयोजन करता आ रहा है, जहां टेंट सिटी लगाई जाती है। देसी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इस साल से ओरछा, मांडू और तामिया में भी इस आयोजन की तैयारी है, जहां टेंट सिटी स्थापित की जाएंगी। यह अस्थायी ढांचा 90 दिनों के लिए खड़ा किया जाएगा। पर्यटन मंडल के कंपनी सचिव अंकित कौरव ने बताया कि इन स्थलों पर टेंट सिटी स्थापित करने और संचालन के लिए निजी कंपनियों के साथ दीर्घकालिक अनुबंध होना है। तैयारी होते ही बुकिंग शुरू हो जाएगी ये अनुबंध अब पांच से दस वर्षों के लिए होंगे। ओरछा, मांडू, तामिया और हनुवंतिया में टेंट सिटी के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। कूनो और गांधी सागर में टेंट सिटी गुजरात स्थित लालूजी एंड संस और चंदेरी में सनसेट रिजर्व द्वारा स्थापित की जाएंगी। टेंट सिटी तैयार होते ही बुकिंग शुरू हो जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि गांधीसागर में सितंबर से ही टेंट सिटी की शुरुआत होगी। चंदेरी और कूनो में इसकी शुरुआत अक्टूबर में होगी। इसके बाद हनुमंतिया, मांडू, तामिया और ओरछा में नवंबर माह से टेंट सिटी लगा दी जाएगी। ओरछा, मांडू, तामिया, हनुवंतिया और चंदेरी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक स्मारकों के लिए जाने जाते हैं। वहीं गांधीसागर पिछले कुछ वर्षों में एक जल क्रीड़ा स्थल के रूप में उभरा है, जबकि कूनो वन्यजीव प्रेमियों के लिए मनोरंजक छुट्टियां प्रदान करता है। महोत्सव में इस तरह की गतिविधियां महोत्सव में पैराग्लाइडिंग, हाट एयर बैलूनिंग, रिवर क्रूज, ट्रैकिंग और बोटिंग मुख्य आकर्षणों में शामिल हैं। झीलों वाले स्थलों पर जल क्रीड़ा की गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। योग और ध्यान सत्र तथा आयुर्वेदिक उपचार की व्यवस्था भी इस महोत्सव का हिस्सा होगी। लोक नृत्य, शास्त्रीय संगीत समारोह और नाटक आगंतुकों को राज्य की कला और संस्कृति से परिचित कराएंगे। आगंतुक स्थानीय हस्तशिल्प वस्तुएं खरीद सकेंगे और स्थानीय व्यंजनों का आनंद ले सकेंगे। एमपी में पर्यटन को गति मिलेगी     तीन नए स्थलों पर भी टेंट सिटी की शुरुआत करने का उद्देश्य इन स्थलों को टूरिज्म सर्किट से जोड़ना है। इससे इन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान और प्रदेश में पर्यटन को गति मिलेगी। – विदिशा मुखर्जी, अपर प्रबंध संचालक, मप्र पर्यटन मंडल।  

नए कॉमन इम्पेनलमेंट एग्रीमेंट से एमपी में निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज प्रभावित

भोपाल  इंश्योरेंस कंपनियों का नया कॉमन इम्पेनलमेंट एग्रीमेंट का असर मध्य प्रदेश में दिखेगा। राजधानी भोपाल समेत प्रदेशभर के निजी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। निजी अस्तपाल संचालकों ने घोषणा की है कि वे एक सितंबर से कैशलेस इलाज बंद कर देंगे। हालांकि,आयुष्मान भारत योजना में मरीजों को इलाज की सुविधा मिलता रहेगी।कॉमन इम्पेनलमेंट एग्रीमेंट के तहत एक जैसी सर्जरी के लिए छोटे और बड़े अस्पतालों को समान भुगतान दिया जाएगा।  हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदकर कैशलेस इलाज की उम्मीद लगाए बैठे लाखों लोगों को बड़ा झटका लगा है। भोपाल समेत प्रदेशभर के निजी अस्पतालों ने घोषणा की है कि वे एक सितंबर से कैशलेस इलाज बंद कर देंगे। छोटे-बड़े अस्पतालों को समान भुगतान निजी नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रणधीर सिंह ने कहा है कि कॉमन इम्पेनलमेंट में एक सर्जरी के लिए छोटे-बड़े अस्पतालों को समान भुगतान का प्रावधान किया गया है। यह कैस संभव है। बड़े अस्पतालों का खर्च ज्यादा होता है। पहले से ही पेमेंट में देरी और क्लेम रिजेक्ट होने की समस्या बनी हुई है। ऐसे में यह नया फ्रेमवर्क घाटे का सौदा है। इस लिए हम इसका विरोध कर रहे हैं।  पूरे प्रदेश में दिखेगा असर डॉ. रणधीर सिंह ने बताया कि राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के सभी बड़े अस्पताल संचालक हमारे साथ है। उन्होने कहा कि कॉमन इम्पेनलमेंट एग्रीमेंट देश भर में हो रहा है। उन्होने कहा है कि अगर कंपनियां इसमें बदलाव नहीं करती है तो विरोधा जारी रहेगा। उन्होने कहा कि आयुष्मान भारत योजना में मरीजों को इलाज की सुविधा मिलता रहेगी।  ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा? अगर यह फैसला लागू होता है, तो प्रभावित बीमा कंपनियों के ग्राहकों को अस्पताल में इलाज कराने के लिए पहले अपनी जेब से पैसे चुकाने होंगे। बाद में, वे इंश्योरेंस कंपनी से रीइम्बर्समेंट (पैसे की वापसी) का क्लेम कर सकेंगे। इससे मरीजों को आर्थिक परेशानी और तनाव का सामना करना पड़ सकता है। भारत में मेडिकल महंगाई हर साल 7-8% बढ़ रही है, जिसमें स्टाफ की सैलरी, दवाइयां और अन्य खर्च शामिल हैं। ऐसे में, अस्पतालों का कहना है कि पुराने रिम्बर्समेंट रेट्स पर काम करना मुश्किल है और बीमा कंपनियां टैरिफ घटाने पर जोर दे रही हैं। साथ ही, क्लेम सेटलमेंट में देरी और डिस्चार्ज अप्रूवल में लंबा समय लेने की भी शिकायत है। बीमा कंपनियों और GI काउंसिल की प्रतिक्रिया द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GI काउंसिल) ने AHPI के इस कदम को “अचानक और एकतरफा” बताया है। काउंसिल का कहना है कि इससे नागरिकों में भ्रम और चिंता फैल रही है और हेल्थ इंश्योरेंस सिस्टम में भरोसा कमजोर हो सकता है। उन्होंने कहा कि कैशलेस सुविधा बंद होने से मरीजों को इमरजेंसी में तुरंत इलाज के लिए वित्तीय व्यवस्था करनी पड़ सकती है, जो जान जोखिम में डाल सकता है। क्या है समाधान? GI काउंसिल ने AHPI से अपना फैसला वापस लेने और बीमा कंपनियों के साथ रचनात्मक बातचीत जारी रखने का आग्रह किया है। AHPI और बीमा कंपनियों के बीच बैठकें भी शेड्यूल हैं, जहां इन मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की जाएगी। सभी की कोशिश है कि ग्राहकों के हितों को नुकसान न पहुंचे। कैशलेस इलाज के लिए IRDAI का लक्ष्य यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय बीमा नियामक प्राधिकरण (IRDAI) पूरे देश में 100% कैशलेस क्लेम सेटलमेंट को बढ़ावा दे रहा है। IRDAI चाहता है कि बीमा कंपनियां ग्राहकों के लिए सहज और तेज इलाज की सुविधा सुनिश्चित करें। हालांकि, अस्पतालों पर कोई सीधे नियामक नियंत्रण नहीं है, जिससे यह समस्या और जटिल हो जाती है। एकजुट उद्योग GI काउंसिल ने जोर देकर कहा कि जब कोई बीमाकर्ता अनुचित तरीके से टार्गेट होता है, तो पूरा उद्योग एकजुट हो जाता है, क्योंकि इससे करोड़ों नागरिक प्रभावित होते हैं, जो हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर हैं। उनका लक्ष्य हर भारतीय नागरिक के लिए हेल्थ इंश्योरेंस को एक विश्वसनीय और सस्ती सुरक्षा कवच बनाए रखना है। इंश्योरेंस कंपनियों और प्राइवेट अस्पतालों के बीच जंग! जानें क्या है कारण  जरा सोचिए, आप अपनी हेल्थ इंश्योरेंस कार्ड लेकर अस्पताल पहुंचे हैं और उम्मीद करते हैं कि इलाज बिना किसी दिक्कत के कैशलेस हो जाएगा। न कोई अडवांस पेमेंट देनी पड़ेगी, नही ढेर सारे पेपर्स भरने होंगे। सुनने में कितना अच्छा लगता है।  कैशलेस इलाज के प्रोसेस को आसान बनाने के लिए एक 'कॉमन इंपैनलमेंट' (साझा पैनल) का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर पर्दे के पीछे हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों और प्राइवेट अस्पतालों के बीच ठनी हुई है। बीमा कंपनियों का मानना है कि इससे प्रक्रियाएं आसान होंगी, लोगों को ज्यादा अस्पतालों तक पहुंच मिलेगी और प्रीमियम भी कम रखने में मदद मिलेगी। वहीं, कई अस्पताल कहते हैं कि यह फ्रेमवर्क एकतरफा है। क्यों चिंतित हैं अस्पताल? अस्पतालों का कहना है कि कॉमन इंपैनलमेंट (empanelment) एग्रीमेंट का मौजूदा ड्राफ्ट उनसे ठीक से राय-मशविरा किए बिना तैयार किया गया है। फेडरेशन ऑफ प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स असोसिएशन ऑफ इंडिया (FPHNAI) का कहना है कि पैकेज रेट्स, ऑपरेशन से जुड़े नियम और पेमेंट की शर्ते अवास्तविक हैं और बीमा कंपनियों के पक्ष में झुकी हुई हैं। अस्पतालों का कहना है कि बढ़ती मेडिकल महंगाई के बावजूद इलाज की दरों को सालों से अपडेट नहीं किया गया है। इससे उन्हें खर्च में कटौती करनी पड़ती है, जिससे इलाज की क्वॉलिटी पर असर पड़ सकता है। किन अस्पतालों को फायदा? कॉमन इंपैनलमेंट सिस्टम के मोटे-मोटे आइडिया का अस्पताल पूरी तरह से विरोध नहीं कर रहे हैं। छोटे अस्पतालों को इसमें शामिल होने में फायदा दिख रहा है। इससे उनकी पहुंच बढ़ेगी। पर बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल चेन्स स्टैंडर्डाइज्ड प्राइसिंग को लेकर सतर्क हैं, क्योंकि उनकी ऑपरेशनल कॉस्ट अधिक होती है। वे रीइम्बर्समेंट में देरी और क्लेम रिजेक्शन पर बार-बार होने वाले विवादों की भी शिकायत करते हैं। बीमा कंपनियों का क्या कहना है? इंश्योरेंस कंपनियां तर्क देती हैं कि कॉमन इंपैनलमेंट को सिस्टम आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। हर बीमा कंपनी के साथ अलग-अलग एग्रीमेंट करने की बजाय, सिंगल एग्रीमेंट उन्हें सभी इंश्योरेंस कंपनियों तक पहुंच देगा। इससे मरीजों के लिए बिना किसी अडवांस पेमेंट के इलाज कराना आसान हो जाएगा। मरीजों को कितना फायदा? मरीजों के लिए एक … Read more

व्हाट्सएप पर बिना इंटरनेट वीडियो कॉलिंग की सुविधा, गूगल का कमाल

नई दिल्ली  Google ने हाल ही में अपनी Pixel 10 सीरीज को वैश्विक बाजार में लॉन्च किया है, जिसमें एक बेहद उपयोगी और नया फीचर दिया गया है। कंपनी के दावे के अनुसार, यह दुनिया की पहली ऐसी स्मार्टफोन सीरीज है जो बिना किसी नेटवर्क के भी WhatsApp के माध्यम से ऑडियो-वीडियो कॉल की सुविधा प्रदान करती है। यह सीरीज 28 अगस्त से बिक्री के लिए उपलब्ध होगी। सैटेलाइट के जरिए होगी ऑडियो-वीडियो कॉल Google ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में बताया कि Pixel 10 सीरीज के यूजर्स जल्द ही सैटेलाइट कनेक्टिविटी के साथ WhatsApp पर कॉल कर पाएंगे। यह फीचर उन आपातकालीन स्थितियों में बहुत काम आएगा जहां कोई नेटवर्क या वाई-फाई उपलब्ध नहीं होता। इस तकनीक के माध्यम से यूजर्स अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स का उपयोग करके कम्यूनिकेट कर सकेंगे। Google के पोस्ट में एक टीजर भी दिखाया गया है, जिसमें सैटेलाइट कनेक्टिविटी के साथ ऑडियो-वीडियो कॉल की संभावना को दर्शाया गया है। हालांकि, यह सुविधा सिर्फ उन टेलीकॉम ऑपरेटरों के नेटवर्क पर ही काम करेगी जो सैटेलाइट सर्विस देते हैं। भारत में इस फीचर का लाभ लेने के लिए यूजर्स को अभी इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि देश में सैटेलाइट सर्विस की शुरुआत अभी तक नहीं हुई है। हालांकि, BSNL ने सोशल मीडिया पर इस सेवा के बारे में संकेत जरूर दिए हैं। सैटेलाइट के जरिए होगी ऑडियो-वीडियो कॉल Google ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में बताया कि Pixel 10 सीरीज के यूजर्स जल्द ही सैटेलाइट कनेक्टिविटी के साथ WhatsApp पर कॉल कर पाएंगे। यह फीचर उन आपातकालीन स्थितियों में बहुत काम आएगा जहां कोई नेटवर्क या वाई-फाई उपलब्ध नहीं होता। इस तकनीक के माध्यम से यूजर्स अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स का उपयोग करके कम्यूनिकेट कर सकेंगे।  Google के पोस्ट में एक टीजर भी दिखाया गया है, जिसमें सैटेलाइट कनेक्टिविटी के साथ ऑडियो-वीडियो कॉल की संभावना को दर्शाया गया है। हालांकि, यह सुविधा सिर्फ उन टेलीकॉम ऑपरेटरों के नेटवर्क पर ही काम करेगी जो सैटेलाइट सर्विस देते हैं। भारत में इस फीचर का लाभ लेने के लिए यूजर्स को अभी इंतजार करना पड़ सकता है, क्योंकि देश में सैटेलाइट सर्विस की शुरुआत अभी तक नहीं हुई है। हालांकि, BSNL ने सोशल मीडिया पर इस सेवा के बारे में संकेत जरूर दिए हैं। दुनिया का पहला फोन होने का दावा Google का दावा है कि Pixel 10 सीरीज सैटेलाइट के जरिए WhatsApp ऑडियो और वीडियो कॉल की सुविधा देने वाला दुनिया का पहला फोन होगा। हालांकि, कंपनी ने इस तकनीक के काम करने के तरीके के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है। अभी तक, सैटेलाइट सेवाओं का उपयोग केवल उन क्षेत्रों में ऑडियो कॉल और SMS भेजने के लिए होता है जहां कोई नेटवर्क नहीं होता। यह सेवा भी केवल उन्हीं देशों में उपलब्ध है जहां सैटेलाइट सर्विस शुरू हो चुकी है।  दुनिया का पहला फोन होने का दावा Google का दावा है कि Pixel 10 सीरीज सैटेलाइट के जरिए WhatsApp ऑडियो और वीडियो कॉल की सुविधा देने वाला दुनिया का पहला फोन होगा। हालांकि, कंपनी ने इस तकनीक के काम करने के तरीके के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है। अभी तक, सैटेलाइट सेवाओं का उपयोग केवल उन क्षेत्रों में ऑडियो कॉल और SMS भेजने के लिए होता है जहां कोई नेटवर्क नहीं होता। यह सेवा भी केवल उन्हीं देशों में उपलब्ध है जहां सैटेलाइट सर्विस शुरू हो चुकी है।

महू आर्मी वार कॉलेज में बोले राजनाथ सिंह – जल, थल, वायु सेना का हर जवान सीखेगा ड्रोन तकनीक

इंदौर आत्मनिर्भर भारत ने स्वदेशी प्लेटफार्म पर तेजस, एडवांस आर्टलरी गन सिस्टम, आकाश मिसाइल तैयार किए हैं। यह दूसरे देशों को संदेश है कि भारत में भी विश्वस्तरीय हथियार तैयार हो रहे है। अब हम पांचवी पीढ़ी का फाइटर एयरक्राफ्ट बना रहे हैं और हमारे कदम जेट इंजन के निर्माण की ओर भी बढ़ रहे है। वर्ष 2024 तक हमारा रक्षा उत्पादन 46 हजार 425 करोड़ था। अब यह बढ़कर 1.5 लाख करोड़ करोड़ हो गया है। इसमें 33 हजार करोड़ प्रायवेट सेक्टर का योगदान है। एयर डिफेंस वेपन सिस्टम सुदर्शन चक्र देश के महत्वपूर्ण स्थानों के सुरक्षा कवच के रूप में तैयार होगा। भारतीय वायुसेना भी लंबी दूरी की मिसाइलों से लेकर नेक्स्ट जेनरेशन बियॉन्ड विजुअल रेंज के हथियारों को शामिल करके खुद को लगातार मजबूत कर रही है। ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए काउंटर यूएएस ग्रिड को और मजबूत किया जा रहा है। इसके अलावा, चाहे खरीद हो या नीतिगत बदलाव, हम अपनी सेनाओं को मजबूत करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। ये बातें ये बातें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महू के आर्मी वार कालेज में आयोजित ‘रण संवाद‘ के दूसरे दिन कही। उन्होंने बताया आगामी युद्ध में हाइपरसाेनिक मिसाइल, एआई, साइबर अटैक का अहम रोल होगा। 2027 तक भारत की जल, थल व वायु सेना के हर जवान को ड्रोन तकनीक का अनुभव होगा। विश्व अभी कोल्ड वार के युग है और अभी प्राक्सी वार भी चल रहे है। इस वजह से भारती सैन्य इकायों को तकनीक रुप से मजबूत किया जाएगा। हमें कोई चुनौती देगा तो उसका द्ढता से जवाब देंगे महाभारत के दौरान भी रण संवाद हुआ था। कृष्ण ने युद्ध से पहले शांति का संदेश दिया था लेकिन दुर्योधन ने मना किया। जब महाभारत खत्म हुआ तो युधिष्ठिर और भीष्म के बीच संवाद हुआ था। युद्ध के पूर्व व बाद में इस तरह के संवाद हमेशा होते आए है। शांति के समय युद्ध की तैयारी होती है और युद्ध के माध्यम से शांति पाने का प्रयास किया जाता है। आज के वैश्विक परिवेश में, अक्सर संवाद का टूटना ही शत्रुता और संघर्ष का मूल कारण बनता है। दूसरी ओर, युद्ध के समय भी, संवाद के माध्यमों को बनाए रखना आवश्यक है। महू में हो रहा रण संवाद केवल एक अकादमिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह हमारे सामरिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण को और परिष्कृत करेगा। साइबर, ड्रोन व उपग्रह आधारित होंगे भविष्य के युद्ध राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध की कोई निश्चित प्रणाली या कठोर सिद्धांत नहीं है, जिस पर हम आँख बंद करके भरोसा कर सकें। केवल सैनिकों की संख्या या हथियारों के भंडार का आकार अब पर्याप्त नहीं है। साइबर युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानव रहित हवाई वाहन और उपग्रह-आधारित निगरानी भविष्य के युद्धों को आकार दे रहे हैं। सटीक-निर्देशित हथियार, वास्तविक समय की खुफिया जानकारी और डेटा-संचालित जानकारी अब किसी भी संघर्ष में सफलता की आधारशिला बन गई है। भविष्य के युद्ध केवल हथियारों की लड़ाई नहीं होंगे, वो तकनीक, खुफिया, अर्थव्यवस्था और कूटनीति का मिला-जुला रूप होंगे।" परिस्थितियाँ और चुनौतियां तेजी से बदल रही है। दूसरों के पास इसका जवाब देने और अपनी पसंद के विपरीत शर्तों पर अखाड़े में कदम रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।  

स्ट्रीट वेंडर्स को राहत, पीएम स्वनिधि योजना 31 मार्च 2030 तक बढ़ी

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के पुनर्गठन और विस्तार को 31 मार्च, 2030 तक मंजूरी दे दी। इस योजना के लिए कुल 7,332 करोड़ रुपए का प्रावधान है। कैबिनेट की एक रिलीज में कहा गया है कि इस पुनर्गठित योजना का लक्ष्य 50 लाख नए लाभार्थियों सहित 1.15 करोड़ लाभार्थियों को लाभ पहुंचाना है। आवास एवं शहरी मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) पर संयुक्त रूप से इस योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी रहेगी। इसमें डीएफएस की भूमिका, बैंकों/वित्तीय संस्थानों और उनके जमीनी स्तर के अधिकारियों के माध्यम से ऋण/क्रेडिट कार्ड तक पहुंच को सुविधाजनक बनाने की रहेगी। बयान में कहा गया है कि पुनर्गठित योजना की प्रमुख विशेषताओं में पहली और दूसरी किस्तों में बढ़ी हुई ऋण राशि, दूसरा ऋण चुकाने वाले लाभार्थियों के लिए यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड का प्रावधान और खुदरा व थोक लेनदेन के लिए डिजिटल कैशबैक प्रोत्साहन शामिल हैं। इस योजना का दायरा चरणबद्ध तरीके से जनगणना कस्बों व अर्ध-शहरी क्षेत्रों आदि बढ़ाया जा रहा है। इस बढ़ी हुई ऋण संरचना में पहली किस्त के ऋण को 10,000 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए और दूसरी किस्त के ऋण को 20,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए तक कर दिया गया है, जबकि तीसरी किस्त 50,000 रुपए पर अपरिवर्तित रहेगी। यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड की शुरुआत से रेहड़ी-पटरी वालों को किसी भी आकस्मिक व्यावसायिक और व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तत्काल ऋण उपलब्ध होगा। इसके अलावा, डिजिटल अपनाने को बढ़ावा देने के लिए, रेहड़ी-पटरी वाले खुदरा और थोक लेनदेन पर 1,600 रुपए तक के कैशबैक प्रोत्साहन का लाभ उठा सकते हैं। यह योजना उद्यमिता, वित्तीय साक्षरता, डिजिटल स्किल और कनवर्जेंस के माध्यम से मार्केटिंग पर ध्यान केंद्रित करते हुए रेहड़ी-पटरी वालों की क्षमता निर्माण पर भी केंद्रित है। एफएसएसएआई के साथ साझेदारी में, रेहड़ी-पटरी वालों के लिए मानक स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। रेहड़ी-पटरी वालों और उनके परिवारों के समग्र कल्याण और विकास को सुनिश्चित करने के लिए, मासिक लोक कल्याण मेलों के माध्यम से 'स्वनिधि से समृद्धि' घटक को मजबूत किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत लाभ लाभार्थियों और उनके परिवारों तक पूर्ण रूप से पहुंचे। सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान कठिनाइयों का सामना करने वाले रेहड़ी-पटरी वालों का समर्थन करने के लिए 1 जून, 2020 को पीएम स्वनिधि योजना शुरू की थी। हालांकि, इस योजना की शुरुआत से ही, यह रेहड़ी-पटरी वालों के लिए वित्तीय सहायता से कहीं अधिक साबित हुई है। प्रसिद्ध प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने पहले ही महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर ली हैं। 30 जुलाई, 2025 तक, 68 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी वालों को 13,797 करोड़ रुपए के 96 लाख से अधिक ऋण वितरित किए जा चुके हैं। लगभग 47 लाख डिजिटल रूप से सक्रिय लाभार्थियों ने 6.09 लाख करोड़ रुपए के 557 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए हैं, जिससे उन्हें कुल 241 करोड़ रुपए का कैशबैक प्राप्त हुआ है। 'स्वनिधि से समृद्धि' पहल के तहत, 3,564 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के 46 लाख लाभार्थियों का प्रोफाइल तैयार किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप 1.38 करोड़ से अधिक योजनाओं को मंजूरी दी गई है। बयान में कहा गया है कि इस योजना के विस्तार में व्यवसाय विस्तार और सस्टेनेबल ग्रोथ के अवसरों को समर्थन देने के लिए वित्त का एक विश्वसनीय स्रोत प्रदान कर रेहड़ी-पटरी वालों के समग्र विकास की परिकल्पना की गई है। इससे न केवल रेहड़ी-पटरी वालों को सशक्त बनाया जाएगा, बल्कि समावेशी आर्थिक विकास, रेहड़ी-पटरी वालों और उनके परिवारों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान को भी बढ़ावा मिलेगा, उनकी आजीविका में वृद्धि होगी और अंततः शहरी क्षेत्रों को एक जीवंत, आत्मनिर्भर इकोसिस्टम में बदला जा सकेगा।