samacharsecretary.com

हमें किसी की जमीन नहीं चाहिए, लेकिन अपनी रक्षा करेंगे: राजनाथ सिंह

महू  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- हमें किसी की जमीन नहीं चाहिए लेकिन अपनी जमीन की रक्षा के लिए हम किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। जब हम आगे की ओर देखते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि भारत के सामने चुनौतियां बड़ीं हैं. उन्होंने कहा- देश की रक्षा केवल सीमा पर तैनात सैनिकों द्वारा ही नहीं की जाती, बल्कि नई तकनीक विकसित करने वाले वैज्ञानिकों, हथियार प्रणाली बनाने वाले उद्योगपतियों और अगली पीढ़ी को युद्ध के लिए तैयार करने वाले शिक्षकों द्वारा भी की जाती है। राजनाथ ने यह बात महू में आयोजित रण संवाद 2025 के दूसरे दिन बुधवार को कही। उन्होंने कहा- हमें अपनी एकता, अपनी स्पष्ट नीयत और पूरी प्रतिबद्धता के साथ इस देश को आगे ले जाना है। इसी आत्मविश्वास के साथ हम 2047 की ओर पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगे। भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। रणनीति को मजबूत करेगा रण संवाद रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा- मैं कहना चाहूंगा कि आज का 'रण संवाद' सिर्फ विचारों का आदान-प्रदान नहीं है बल्कि सुरक्षा, नीति-निर्माण और तीनों सेनाओं के विभिन्न पहलुओं को समझने का एक अवसर है। यहां होने वाली चर्चाएं हमें यह सोचने का अवसर देंगी कि हम भारत को कैसे और अधिक सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बना सकते हैं। ये न केवल रक्षा रणनीति को मजबूत करेंगी बल्कि एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण बनाने में भी मददगार साबित होंगी। युद्ध का स्वरूप बदल रहा है आधुनिक दौर में युद्ध अब सिर्फ जमीन, समुद्र और आकाश तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि अंतरिक्ष और साइबर स्पेस तक फैल चुके हैं। सैटेलाइट सिस्टम, एंटी-सैटेलाइट हथियार और स्पेस कमांड सेंटर अब शक्ति के नए साधन बन गए हैं। आज साइबर वॉरफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन और सैटेलाइट आधारित निगरानी युद्ध की नई दिशा तय कर रहे हैं। नॉन-लीनियर और मल्टी-डोमेन वारफेयर की चुनौती आज के समय में युद्ध का कोई तयशुदा स्वरूप नहीं है। यह युग नॉन-लीनियर और मल्टी-डोमेन वारफेयर का है। ऐसे में हमें अपनी रणनीति को लचीला और समयानुकूल बनाना होगा। किसी निश्चित युद्ध नीति पर आंख मूंदकर भरोसा करना अब संभव नहीं है। संवाद है भारत की परंपरा वैश्विक माहौल में संवाद की कमी ही टकराव और शत्रुता का बड़ा कारण बनती है। युद्धकाल में भी संवाद के रास्ते खुले रखना जरूरी है। भारतीय परंपरा में युद्ध और संवाद हमेशा एक-दूसरे से जुड़े रहे हैं। युद्ध से पहले संवाद हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है। रणनीतिक-कूटनीतिक दृष्टिकोण को नई दिशा मिलेगी रण संवाद केवल अकादमिक अभ्यास नहीं, बल्कि भारत की सामरिक और कूटनीतिक सोच को परिष्कृत करने वाला मंच है। यहां से निकलने वाले विचार भविष्य में भारत की रक्षा रणनीति को मजबूत करेंगे और दीर्घकालिक कूटनीति को दिशा देंगे। लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह शाही ने कहा कि रण संवाद यानी युद्ध पर संवाद, एक प्लेटफॉर्म है। जिसका उद्देश्य युद्ध कला और युद्ध संचालन की ट्रेनिंग है। यह इस विश्वास पर आधारित है कि जो लोग युद्ध की योजना बनाते हैं, प्रशिक्षण देते हैं और उसको अंजाम देते हैं, उन्हें युद्ध के प्रमाणों की सामूहिक जिम्मेदारी उठानी है। ये सेमिनार ऐसा मंच उपलब्ध कराता है, जहां यूनिफॉर्म लर्नर, स्कॉलर्स, टेक्नोलॉजिस्ट, पॉलिसी मेकर, इंडस्ट्री और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर विचार विमर्श करते हैं। इस साल के सेमिनार का थीम है- इम्पैक्ट ऑफ टेक्नोलॉजी ऑफ वॉर फेयर। दो सब थीम भी हैं। एक- इमरजिंग टैक्नोलॉजी इन्टरेक्ट ऑफ फ्यूचर वॉर…दूसरी- जिस पर आज चर्चा हो रही है रिफॉर्म इन ट्रेनिंग कैटेलाइज टेक्नोलॉजिकल एंड डेवलपमेंट। इसमें ट्रेनिंग इनिशिएटिव ऑफ सिस्टम, इनडिकेटर एक्सरसाइजेज एंड टेक्नोलॉजी पर विचार-विमर्श करेंगे। पहले दिन सीडीएस ने कहा था- ऑपरेशन सिंदूर जारी है रण संवाद 2025 के पहले दिन मंगलवार को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा था- भले ही भारत शांतिप्रिय देश है, लेकिन हम शांतिवादी नहीं हैं। दुश्मन गलतफहमी में न रहे। देश की सेनाएं युद्ध के लिए हमेशा तैयार हैं। सीडीएस चौहान ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है। ऑपरेशन सिंदूर एक आधुनिक संघर्ष था, जिससे हमने कई सबक सीखे। उनमें से ज्यादातर पर अमल चल रहा है।

सुशासन एक्सप्रेस रथ घर-घर पहुंच रही शासन की सेवाएं- मुख्यमंत्री

रायपुर : विष्णु के सुशासन में ग्रामीणों की समस्याओं का हो रहा त्वरित निराकरण सुशासन एक्सप्रेस रथ घर-घर पहुंच रही शासन की सेवाएं- मुख्यमंत्री  रायपुर जिला प्रशासन द्वारा सुशासन को लेकर की जा रही अभिनव पहल रायपुर रायपुर जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री के निर्देश में आम जनता को शासन की योजनाओं और सेवाओं को घर के समीप पहुंचाने की दिशा में “सुशासन एक्सप्रेस” नाम से एक अभिनव और अनुकरणीय पहल शुरू की गई है, जो जनसमस्याओं के त्वरित निदान मॉडल के रूप में स्थापित हुई है। इसका शुभारंभ 29 मई को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के तहत ग्राम भैंसा में आयोजित समाधान शिविर में किया था। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में प्रारंभ की गई इस पहल के माध्यम से हजारों ग्रामीणों को शासन की दो दर्जन से अधिक सेवाओं का लाभ सहजता से मिलने लगा है।  ग्रामीणों ने कहा अब घर के समीप ही मिल रही है सुविधा ग्राम पंचायत संकरी के युवा उत्तम साहू के लिए खुशी का क्षण था जब घर बैठे ही उन्हें लर्निंग लाइसेंस मिल गई, जो उनके गांव में आए सुशासन रथ से मिली। उत्तम कहते हैं कि उनके घर में अन्य सदस्यों ने लाइसेंस बनाया तो गांव के बाहर जाना पड़ा था और समय भी लगा था, अब कुछ दिन पहले गांव में कोटवार ने हांका लगाया तो सुशासन रथ आने की जानकारी मिली। मैंने वहां जा कर आवेदन किया। प्रक्रिया पूरी हुई और मुझे लाइसेंस मिल गया। सांकरा के रहने वाले राजेश कुमार यादव भी बड़े प्रफुल्लित हैं  कि उनका राशन कार्ड बन गया, इसके लिए बार-बार पंचायत कार्यालय में जाना नहीं पड़ा  उन्होंने सुशासन रथ में आवेदन दिया, प्रक्रिया पूरी होने के बाद राशन कार्ड बन गया। उत्तम और राजेश मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहते हैं कि अब जिला प्रशासन रायपुर द्वारा उनके घर के समीप ही शासकीय सेवाएं मिल रही हैं जिसके लिए उन्हें अलग से समय निकाल कर जाना पड़ता था, कई बार कागजात अपूर्ण होने पर दुबारा भी जाना पड़ता था।  67 हजार से अधिक आवेदनों का त्वरित निराकरण सुशासन एक्सप्रेस के माध्यम से अब तक कुल 75,864 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 67,788 आवेदनों का त्वरित निराकरण किया जा चुका है। शेष लंबित आवेदनों की कार्यवाही भी प्राथमिकता से की जा रही है। सुशासन एक्सप्रेस के माध्यम से अब तक जरूरतमंद 15,741 आवेदकों को आय प्रमाण पत्र, 5741 को जाति प्रमाण पत्र, 4273 को निवास प्रमाण पत्र, 7536 को आयुष्मान भारत कार्ड, 6014 को राशन कार्ड, 8269 को ड्राइविंग लाइसेंस, 1306 को किसान क्रेडिट कार्ड, 2051 को नरेगा जॉब कार्ड, 577 को जन्म प्रमाण पत्र, 50 को मृत्यु प्रमाण पत्र, 4093 श्रमिकों को श्रम कार्ड, 5070 लोगों को आधार कार्ड, 883 को किसान किताब, 814 पात्र आवेदकों को पेंशन, 1346 एचएसआरपी का लाभ देेने के साथ ही महिला एवं बाल विकास, पुलिस, आवास सहित अन्य योजनाओं से भी बड़ी संख्या में लोग लाभान्वित हो रहे हैं।  गांव में ही लग रहा ‘वन-स्टॉप कैंप किसी भी गांव में सुशासन एक्सप्रेस पहुंचने से तीन दिन पहले सूचना जारी की जाती है। मौके पर पटवारी, पंचायत सचिव, स्वास्थ्य टीम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आधार व आयुष्मान कार्ड बनाने वाले कर्मचारी और जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहते हैं। इस तरह गांव में ही छोटा ‘वन-स्टॉप शिविर’ तैयार हो जाता है। प्रथम चरण- पूर्ण, अब सुशासन एक्सप्रेस दूसरे चरण में  प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार-2025 के सकारात्मक परिणाम को देखते हुए जिला प्रशासन रायपुर ने इसी तर्ज पर सुशासन एक्सप्रेस की शुरूआत की, जिसका उद्देश्य शासकीय अमले का एक साथ गांवों में पहुंचकर उनकी समस्याओं और आवेदनों का तत्परता से निराकरण करना है। सुशासन एक्सप्रेस के प्रथम चरण की शुरूआत अभनपुर, आरंग, धरसींवा और तिल्दा विकासखण्ड के गांवों से हुई। उक्त चारों विकासखण्डों की 300 से अधिक ग्राम पंचायतों में तथा नगर पंचायत आरंग के 17 वार्डों में सुशासन एक्सप्रेस के माध्यम से समस्याओं और आवेदनों का तत्परता से निराकरण किया गया। प्रथम चरण की सफलता के बाद अब जिला प्रशासन ने इसका दूसरा चरण भी प्रारंभ कर दिया है, जिसमें अभनपुर, धरसींवा एवं तिल्दा विकासखंड के ग्रामीण इलाके शामिल है, जहां सुशासन एक्सप्रेस निर्धारित तिथियों में पहुंच रही है। सुशासन एक्सप्रेस के साथ गांव-गांव में पहुंचकर विभिन्न विभागों का मैदानी अमला लोगों की समस्याओं और आवेदनों का निराकरण कर रहा है।  नाम मात्र खर्च में बड़ा बदलाव कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह ने बताया कि जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए सुशासन एक्सप्रेस संचालित करने के आइडिया को मूर्तरूप देने के लिए कंडम हो चुकी चार एंबुलेंस को जिला प्रशासन द्वारा मरम्मत कराकर इन्हें सुशासन एक्सप्रेस में परिवर्तित किया गया। नाम मात्र खर्च में तैयार किए गए इन मोबाइल सेवा वैन ने ग्रामीण अंचलों में सुशासन की नई राह प्रशस्त की है। रायपुर जिले की सुशासन एक्सप्रेस की सफलता वास्तव में शासन-प्रशासन की इच्छाशक्ति, नवाचार और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति पहुंचाने की दिशा में एक अनुकरणीय मॉडल है।

भाषाई एकता का केंद्र बनेगा मध्य प्रदेश, परमार बोले- पूरे देश में जाएगा संदेश

हिंदी भाषी मप्र से, देश भर में गुंजायमान होगा "भाषाई एकात्मता" का संदेश: उच्च शिक्षा मंत्री परमार प्रदेश के प्रत्येक विश्वविद्यालय में सिखाई जाएगी भारतीय भाषा : मंत्री परमार उच्च शिक्षा मंत्री ने मंत्रालय में समस्त सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की समीक्षा की भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में, प्रदेश के समस्त सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठक हुई। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि देश के हृदय प्रदेश की संज्ञा से सुशोभित हिंदी भाषी मध्यप्रदेश, भारत की अनेकता में एकता की संस्कृति को चरितार्थ करते हुए एक नई पहल करने जा रहा है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में देश की सभी प्रमुख भाषाओं को सिखाने के लिए कोर्स कराए जाएंगे ताकि प्रदेश का युवा देश के किसी भी राज्य या क्षेत्र में जाए तो वहां के निवासियों से सहजता से संवाद कर सकें और एकरूप हो सकें। परमार ने कहा कि हम इस नवाचार के माध्यम से सभी भाषाओं के प्रति अपना प्रेम संदेश भी प्रेषित करना चाहते हैं। परमार ने कहा कि भारत अलग- अलग भाषाओं और बोलियों का देश है लेकिन इसकी आत्मा एक है। हमारा यह नवाचार, देश भर में भाषाई एकात्मता का संदेश देगा। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत 17 सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में, देश की विभिन्न भारतीय भाषाओं को सिखाने के लिए सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा कोर्स अथवा क्रेडिट के साथ सामान्य पाठ्यक्रम में सम्मिलित करके, प्रारंभ किए जाने को लेकर व्यापक कार्ययोजना के साथ क्रियान्वयन करें। परमार ने कहा कि समस्त विश्वविद्यालयों को भारतीय भाषाओं को सिखाने के लिए, भाषाएं आबंटित की गई हैं। प्रत्येक विश्वविद्यालय आवंटित भाषाओं को सिखाने के लिए कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन करेंगे। इससे प्रदेश के विश्वविद्यालयों से, पूरे देश में भाषाई सौहार्दता का संदेश जाएगा। भाषाएं जोड़ने का काम करती हैं, तोड़ने का नहीं; यह व्यापक संदेश प्रदेश के उच्च शैक्षणिक संस्थानों से देश भर में गुंजायमान होगा। मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश की उच्च शिक्षा को लेकर धारणाओं मे परिवर्तन आना चाहिए, इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों को उच्च शिक्षा को गुणवत्ता पूर्ण बनाने के लिए निरंतर क्रियाशील रहना होगा। परमार ने समस्त विश्वविद्यालयों से रिक्त पदों की अद्यतन जानकारी प्राप्त की और विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक पदों में भर्ती की प्रक्रिया, रोस्टर के पालन के साथ नियमानुरूप शीघ्र करने के निर्देश दिए। परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय को इकाई मानकर, रोस्टर का निर्धारण कर पदपूर्ति की प्रकिया पूर्ण करें और पदपूर्ति के लिए सभी विश्वविद्यालय शीघ्र विज्ञापन जारी करें। परमार ने नकल पर नकेल कसने के लिए, उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन एवं डिजिटल सिक्योरिटी पर विस्तृत चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। परमार ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय परीक्षा एवं मूल्यांकन की पारदर्शिता के लिए डिजिटल मूल्यांकन को बढ़ावा दें और मेधावी विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं को अपने पोर्टल पर सार्वजनिक उपलब्ध कराए ताकि इससे अन्य विद्यार्थी प्रोत्साहित हों। परमार ने विश्वविद्यालय परिसर को विद्यार्थी केन्द्रित एवं आकर्षक बनाने को भी कहा। विद्यार्थियों की अंकसूची एवं डिग्री की उपलब्धता, डिजिलॉकर में सुनिश्चित किए जाने के भी निर्देश दिए। बैठक में मंत्री परमार ने समस्त विश्वविद्यालयों के विविध कार्यों, गतिविधियों, संस्थागत आवश्यकताओं एवं कार्ययोजनाओं पर बिंदुवार विस्तृत चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में विश्वविद्यालयों के रिक्त पदों पर भर्ती, उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन एवं डिजिटल सिक्योरिटी, भारतीय भाषा का अध्ययन एवं क्रेडिट से जोड़ना, अपार/स्वयं/समर्थ पोर्टल पर प्रगति, विभिन्न परियोजनाओं (वर्ल्ड बैंक/रुसा/राज्य) के अंतर्गत निर्माण कार्य, सेंटर फॉर एक्सीलेंस के अनुदान व्यय, विश्वविद्यालय परिसर को विद्यार्थी केंद्रित एवं आकर्षक बनाने की कार्ययोजना, छात्रावासों को सुविधायुक्त बनाए जाने की कार्ययोजना, सुदृढ़ वित्तीय एवं लेखांकन प्रणाली अपनाया जाना, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की गतिविधियां एवं मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी पुस्तक सहायता केंद्र में पुस्तकों की उपलब्धता एवं विक्रय को लेकर व्यापक विमर्श हुआ। बैठक में भाषाओं को सिखाने के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाकर, कोर्स सिलेबस एवं शेष प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए चार विवि के कुलगुरुओं की एक समिति का गठन किया गया। बैठक में विश्वविद्यालयों को सिखाए जाने को लेकर भारतीय भाषाएं आबंटित की गई। इसमें बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल को तमिल, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर को कन्नड़, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इन्दौर को मराठी एवं तेलगू, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर को तेलगू एवं पंजाबी, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा को सिंधी और गुजराती, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन को मलयालम,सिंधी और असमिया, महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छतरपुर को गुजराती, राजा शंकरशाह विश्वविद्यालय छिन्दवाड़ा को तमिल और मराठी, पंडित शंम्भूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय शहडोल को बांग्ला, क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगौन को गुजराती, महात्मा गाँधी विश्वविद्यालय चित्रकूट को उड़िया और महर्षि पाणिनी विश्वविद्यालय उज्जैन को उड़िया भाषा सिखाने के लिए भाषा का आवंटन किया गया है। ये विश्वविद्यालय, उक्त आवंटित भाषा सिखाने के लिए क्रियान्वयन करेंगे। बैठक में विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलगुरुओं ने उच्च शिक्षा में गुणात्मक वृद्धि के लिए आवश्यक एवं महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा एवं सभी सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलगुरू एवं कुलसचिव सहित विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।  

सितंबर में मिलेगी ‘लाड़ली बहना’ की 28वीं किस्त, जानें पूरी जानकारी

भोपाल मध्य प्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। एमपी की सबसे चर्चित योजनाओं में से एक लाड़ली बहना योजना की 28वीं किस्त का महिलाओं को बेसब्री से इंतजार है। जानकारी के लिए बता दें कि लाड़ली बहना योजना के तहत आने वाली महिलाओं को हर महीने 1250 रुपये की राशि दी जाती है। ये राशि जल्द ही 1500 रुपये होने वाली है। सीएम मोहन यादव ने एक कार्यक्रम में ऐलान किया था कि दीवाली के दो दिन बाद यानी भाईदूज से लाडली बहनों को 1500 रुपये हर महीने दिए जाएंगे। कब आएगी 28वीं किस्त लाड़ली बहनों को योजना की 27वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले 7 अगस्त को जारी की गई थी। जिसके तहत 1.27 करोड़ हितग्राही महिलाओं के खाते में 1500 रुपये जारी किए गए थे। जिसमें रक्षाबंधन का शगुन भी शामिल था। वहीं 28वीं किस्त के लिए इतंजार कर रही महिलाओं को बता दें कि हर महीने योजना की राशि 10 से 15 तारीख के बीच जारी होती है। इस बार भी इन्हीं तारीखों के बीच राशि जारी की जाएगी।   इस महीने से मिलेंगे 1500 रूपये मध्यप्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग के ऑफिसियल एक्स अकाउंट पर भी सीएम के ऐलान का वीडियो शेयर करते हुए इस बात की जानकारी दी गई है। इस बार दीपावली 18 अक्टूबर को है यानी की दो महीने बाद लाड़ली बहना योजना की किस्त में 250 रूपये की बढ़ोत्तरी कर दी जाएगी।

जम्मू-कटरा रूट पर बड़ा हादसा, भूस्खलन में 31 की जान गई, 22 ट्रेनें रद्द

कटरा जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश की वजह से हालात बिगड़े हैं. कटरा स्थित माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर बुधवार को हुए बड़े भूस्खलन में कम से कम 31 लोगों की मौत हो गई और 23 लोग घायल हुए हैं. कई जगहों पर भूस्खलन के बाद मलबा जमा होने और पत्थर गिरने से जम्मू-कटरा राजमार्ग बंद हो गया है. भारी बारिश के कारण नॉर्दर्न रेलवे ने बुधवार को 22 ट्रेनें रद्द कर दीं और 27 ट्रेनों को शॉर्ट-टर्मिनेट किया. इनमें वैष्णो देवी बेस कैंप से चलने वाली 9 ट्रेनें भी शामिल हैं. बीते दिन त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित मंदिर के मार्ग का बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया था. बचाव अभियान जारी है और आशंका है कि मलबे के नीचे और लोग फंसे हो सकते हैं. लगातार बारिश ने जम्मू-कश्मीर में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा कर दी है. जम्मू में पुल ढह गए, बिजली लाइनों और मोबाइल टावरों को भारी नुकसान पहुंचा. मंगलवार को सुबह 11.30 बजे से शाम 5.30 बजे के बीच जम्मू में 6 घंटे में 22 सेंटीमीटर बारिश हुई. हालांकि आधी रात के बाद बारिश में कमी आई, जिससे जिले को थोड़ी राहत मिली. इस बीच, मंगलवार तक लगातार बारिश के कारण आई बाढ़ और जलभराव से 3,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. राहत कार्य जिला प्रशासन, जेके पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना और स्थानीय वॉलंटियर्स की संयुक्त टीमों द्वारा चलाया जा रहा है. प्रभावित लोगों को अस्थायी शेल्टर्स में खाना, साफ पानी और मेडिकल सहायता दी जा रही है. वैष्णो देवी धाम के रास्ते पर भूस्खलन की घटना में जान गंवाने वालों में 9 लोगों की पहचान नहीं हो पाई है हालांकि, केंद्रशासित प्रदेश के कई हिस्सों में टेलीकॉम ब्लैकआउट हो गया है, जिससे लाखों लोग संपर्क से बाहर हैं. प्रशासन का ध्यान हाई-रिस्क इलाकों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाने पर है. जम्मू और आसपास के इलाकों में आंधी-तूफान और बारिश वर्तमान में जम्मू और आसपास के इलाकों में तेज आंधी-तूफान और भारी बारिश हो रही है. सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र हैं – जम्मू शहर, आरएसपुरा, सांबा, अखनूर, नगरोता, कोट भलवाल, बिश्नाह, विजयपुर, पुरमंडल, कठुआ और ऊधमपुर. वहीं रियासी, रामबन, डोडा, बिलावर, कटरा, रामनगर, हीरानगर, गूल और बनिहाल में हल्की बारिश हो रही है. जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बादल 12 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंच रहे हैं, जो बेहद सक्रिय तूफानों का संकेत है. सिस्टम ईस्ट-नॉर्थईस्ट की ओर बढ़ रहा है और पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बारिश जारी रह सकती है. 22 ट्रेनें रद्द और 27 ट्रेनों को किया गया शॉर्ट-टर्मिनेट भारी बारिश के कारण नॉर्दर्न रेलवे ने बुधवार को 22 ट्रेनें रद्द कर दीं और 27 ट्रेनों को शॉर्ट-टर्मिनेट किया. कटरा, जम्मू और ऊधमपुर से चलने वाली कई सर्विस प्रभावित हुई हैं, जिनमें वैष्णो देवी बेस कैंप से चलने वाली 9 ट्रेनें भी शामिल हैं. चक्की नदी में बाढ़ आने से पठानकोट–कंदरोरी (हिमाचल प्रदेश) के बीच रेल यातायात भी रोका गया है. हालांकि, कटरा–श्रीनगर मार्ग प्रभावित नहीं है.

खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा- उपार्जन केन्द्रों पर पारदर्शिता अनिवार्य, किसानों के हितों से नही होगा समझौता

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा) की समर्थन मूल्य पर खरीदी की तैयारियां युद्ध स्तर पर की जाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं कि जायेगी। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े। श्री राजपूत ने मंगलवार को मंत्रालय में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा) उपार्जन तैयारियों की समीक्षा करते हुए ये निर्देश दिये। बैठक में अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरुण शमी, प्रबंध संचालक नागरिक आपूर्ति निगम अनुराग वर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि खरीदी कार्य की तैयारियों में कोई ढिलाई न बरती जाये। उन्होंने सभी उपार्जन केन्द्रों पर सतत् निगरानी रखने के निर्देश अधिकारियों को दिये। श्री राजपूत ने कहा कि किसी भी उपार्जन केन्द्र पर किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी की किंचित भी शिकायत बर्दाश्त नहीं कि जायेगी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि खरीदी के दौरान किसानों की सुविधा के सभी इंतजाम किये जायें, ताकि किसानों को कतारों में खड़े न रहना पड़े और तौल एवं भुगतान प्रक्रिया सरल और तेज रहे। खाद्य मंत्री ने निर्देश दिये कि किसान द्वारा समर्थन मूल्य पर विक्रय उपज का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर किसान के आधार लिंक बैंक खाते में किया जाये। बैठक में उपार्जन केन्द्रों की व्यवस्थाओं, परिवहन, भंडारण और भुगतान की समय-सीमा पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री श्री राजपूत ने निर्देश दिये कि विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर मूँग एवं उड़द की खरीदी के दौरान उपार्जन केंद्रों में कराई गई जांच की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि अनियमितताओं को लेकर संबंधित खरीदी केन्द्रों और अधिकारियों की जबाहदेही तय की जायेगी। खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि खरीदी प्रक्रिया में गड़बड़ी, गुणवत्ता परीक्षण में लापरवाही या किसानों को भुगतान जैसी शिकायतों पर कठोर कदम उठाये जाएंगे। खाद्य मंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसानों के हितों से समझौता किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। जिन केन्द्रों में अनियमितता सामने आई है उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई होगी भविष्य में खरीदी केन्द्रों की नियमित मॉनिटरिंग के साथ-साथ ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत किया जायेगा, जिससे किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न उठाना पड़ें। 

उज्जैन में दूसरा ग्लोबल स्पिरिचुअल कॉन्क्लेव, सिंहस्थ 2028 और निवेश के मुद्दे पर विचार-विमर्श

उज्जैन  महाकाल की नगरी उज्जैन में आज 27 अगस्त को दूसरी ग्लोबल स्पिरिचुअल कॉन्क्लेव आयोजित होगी। होटल अंजुश्री में होने वाली इस कॉन्क्लेव में देशभर में मंदिरों के प्रमुखजन, बड़ी होटल चेन के मुखिया शामिल होंगे। इसमें स्पिरिचुअल क्षेत्र में होने वाले नवाचारों पर चर्चा होगी। मध्यप्रदेश सरकार का फोकस उज्जैन में निवेश लाना है। ऐसे में स्पिरिचुअल क्षेत्र में काम कर रही संस्थाओं के प्रमुखों को भी बुलाया गया है। होटल अंजुश्री में होने वाली इस कॉन्क्लेव में काशी विश्वनाथ और महाकाल जैसे मंदिरों में भीड़ प्रबंधन पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत निवेशकों से चर्चा करेंगे। उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों को लेकर बड़े होटल समूह, एयरलाइंस और मंदिरों के लिए काम करने वाली टेक कंपनियां भी शामिल होंगी। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और पर्यटन विभाग मिलकर यह आयोजन कर रहे हैं। पीएचडी चैंबर द्वारा पहला ऐसा आयोजन पिछले साल अयोध्या में किया गया था। श्रीराम मंदिर अयोध्या, महाकाल और काशी विश्वनाथ जैसे मंदिरों में लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के चलते भीड़ प्रबंधन पर सरकारी अधिकारी, विशेषज्ञ और धर्मगुरु चर्चा करेंगे। स्पिरिचुअल टूरिज्म सेक्टर में एआई, वर्चुअल रियलिटी जैसी तकनीकों के प्रभाव पर भी बात होगी। आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय पर्यटन संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इस आयोजन रूह-मान्टिक में शामिल होंगे। धर्मगुरु गौरांग दास प्रभु के अलावा केंद्र-राज्य के वरिष्ठ अफसर भी आयोजन में हिस्सा लेंगे। उज्जैन की आध्यात्मिक शक्ति और शहरी विकास पर चर्चा पीएचडी चैम्बर और केपीएमजी द्वारा धर्मस्थलों पर भीड़ प्रबंधन को लेकर बनी रिपोर्ट भी जारी होगी। महाकाल परिसर के आसपास की अर्थव्यवस्था, उज्जैन की आध्यात्मिक शक्ति और शहरी विकास पर भी बात होगी। कलेक्टर रौशनकुमार सिंह ने बताया कि कॉन्क्लेव निवेश एवं भीड़ प्रबंधन के मकसद से आयोजित की जा रही है। इसमें सीएम और केंद्रीय मंत्री स्पिरिचुअल क्षेत्र में काम रही संस्थाओं के प्रमुखों के साथ सीधी बात करेंगे। इसके अलावा होटल चेन, एयरलाइंस एवं अन्य कंपनियों के लोगों से भी बातचीत होगी। समिट एक ही दिन की है और इसमें देशभर के ख्यात मंदिरों का संचालन कर रहे लोग आएंगे। वह लोग अपने यहां हो रहे प्रयोगों की जानकारी कॉन्क्लेव में देंगे। इसके मुताबिक उज्जैन में व्यवस्था जुटाई जाएगी। उज्जैन का प्रशासनिक दल लखनऊ पहुंचा उज्जैन सिंहस्थ के लिए चल रही तैयारियों को लेकर निजी समूह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा करेंगे। इनमें रेडीसन होटल समूह, इंडिगो, अकासा एयरलाइंस, ऑनलाइन ट्रेवल एजेंसियां आदि शामिल होंगी। आयोजन सिंहस्थ को लेकर कई निवेश समझौते भी हो सकते हैं। प्रयागराज कुंभ की व्यवस्थाओं की जानकारी जुटाने के लिए उज्जैन का प्रशासनिक दल लखनऊ पहुंचा। इसमें सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीषसिंह, कलेक्टर रौशनकुमार सिंह, निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा और यूडीएम सीईओ संदीप सोनी शामिल हैं। कलेक्टर ने बताया कि प्रयागराज कुंभ में तैनात रहे अफसरों से वन टू वन चर्चा की जा रही है। उनके अनुभव के आधार पर उज्जैन सिंहस्थ में भी व्यवस्था जुटाई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे द्वितीय वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन रूह mantic का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार 27 अगस्त को उज्जैन में प्रदेश के द्वितीय वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन रूह mantic का शुभारंभ करेंगे। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मेलन में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम इंदौर रोड स्थित अंजुश्री होटल में प्रात: 10:30 बजे से पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा पर्यटन मंत्रालय और मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के सहयोग से आयोजित किया जाएगा।आध्यात्मिक गुरु गौरांग दास प्रभु मुख्य भाषण देंगे और सम्मेलन का आध्यात्मिक वातावरण तैयार करेंगे। पर्यटन मंत्रालय के अपर सचिव एवं महानिदेशक सुमन बिल्ला (आईएएस) और मध्य प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (पर्यटन) शिव शेखर शुक्ला (आईएएस) सहित वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में आध्यात्मिक पर्यटन पर पीएचडीसीसीआई-केपीएमजी की रिपोर्ट 'आस्था और प्रवाह: भारत के पवित्र स्थलों में जनसमहू का मार्गदर्शन' का विमोचन भी किया जाएगा।  

Ladli Behna Yojana: मध्यप्रदेश की लाड़ली बहनों को सितंबर में मिलेगा बड़ा लाभ

भोपाल  मध्य प्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। एमपी की सबसे चर्चित योजनाओं में से एक लाड़ली बहना योजना की 28वीं किस्त का महिलाओं को बेसब्री से इंतजार है। जानकारी के लिए बता दें कि लाड़ली बहना योजना के तहत आने वाली महिलाओं को हर महीने 1250 रुपये की राशि दी जाती है। ये राशि जल्द ही 1500 रुपये होने वाली है। सीएम मोहन यादव ने एक कार्यक्रम में ऐलान किया था कि दीवाली के दो दिन बाद यानी भाईदूज से लाडली बहनों को 1500 रुपये हर महीने दिए जाएंगे। कब आएगी 28वीं किस्त लाड़ली बहनों को योजना की 27वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले 7 अगस्त को जारी की गई थी। जिसके तहत 1.27 करोड़ हितग्राही महिलाओं के खाते में 1500 रुपये जारी किए गए थे। जिसमें रक्षाबंधन का शगुन भी शामिल था। वहीं 28वीं किस्त के लिए इतंजार कर रही महिलाओं को बता दें कि हर महीने योजना की राशि 10 से 15 तारीख के बीच जारी होती है। इस बार भी इन्हीं तारीखों के बीच राशि जारी की जाएगी। इस महीने से मिलेंगे 1500 रूपये मध्यप्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग के ऑफिसियल एक्स अकाउंट पर भी सीएम के ऐलान का वीडियो शेयर करते हुए इस बात की जानकारी दी गई है। इस बार दीपावली 18 अक्टूबर को है यानी की दो महीने बाद लाड़ली बहना योजना की किस्त में 250 रूपये की बढ़ोत्तरी कर दी जाएगी। भाई दूज से हर महीने मिलेंगे 1500 हालांकि अब वो दिन दूर नहीं है, जब खाते में हर महीने 1500 रुपये आना शुरू हो जाएंगे। अगले महीने सितंबर में आने वाली लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त के रूप में 1250 रुपये मिलेंगे। हालांकि अक्टूबर यानी महज सिर्फ एक महीने के बाद से ही हर महीने खाते में 1500 रुपये आने शुरू हो जाएंगे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि हर साल लाडली बहनों को मिलने वाली राशि को बढ़ाया जाएगा और साल 2028 तक लाभार्थियों के खाते में 3000 रुपये आने शुरू हो जाएंगे

भोपाल में ‘मछली’ परिवार पर शिकंजा, 12 पटवारी करेंगे नप्‍ती, 99 एकड़ जमीन विवादित

भोपाल  राजधानी भोपाल में 23 दिन में 7 प्रॉपर्टी जमींदोज करने व करीब 125 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के बाद जिला प्रशासन मछली परिवार पर फिर से शिकंजा कंसने वाला है। भोपाल के अनंतपुरा कोकता बायपास क्षेत्र में ही पशुपालन विभाग की 99 एकड़ जमीन का सीमांकन होगा। 27 अगस्त से जमीन की नप्ती का प्लान तैयार किया है। इसमें 2 राजस्व निरीक्षक और 12 से ज्यादा पटवारी जुटेंगे।  खबर है कि 99 एकड़ में से काफी हिस्से में मछली परिवार का दखल सामने आया है। एक कॉलोनी का कुछ हिस्सा भी शामिल हैं। इसलिए इसकी पड़ताल की जा रही है। मछली परिवार सहित 20 लोगों को पहले ही नोटिस दिए जा चुके हैं। कार्यवाही से पहले प्लान का प्रजेंटेशन भी कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को दिखाया गया। यह कार्रवाई गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव और तहसीलदार सौरभ वर्मा करेंगे।  99 एकड़ जमीन का सीमांकन करने में 7 से 10 दिन का समय लग सकता है। यह जमीन 12 से 13 रकबे में है। एडीएम अंकुर मेश्राम ने बताया कि कार्यवाही को लेकर प्लान तैयार किया है। 27 अगस्त से सीमांकन की शुरुआत की जाएगी। कार्रवाई से पहले सोमवार को प्लान का प्रजेंटेशन भी कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को दिखाया गया। यह कार्रवाई गोविंदपुरा एसडीएम रवीश कुमार श्रीवास्तव और तहसीलदार सौरभ वर्मा करेंगे। सूत्रों के अनुसार, 99 एकड़ में से काफी हिस्से में मछली परिवार का दखल सामने आया है। एक कॉलोनी का कुछ हिस्सा भी शामिल हैं। इसलिए इसकी पड़ताल की जा रही है। मछली परिवार समेत 20 लोगों को पहले ही नोटिस दिए जा चुके हैं।  गोविंदपुरा अनुभाग की टीम सीमांकन में रहेंगी। यदि इसमें किसी का अवैध कब्जा सामने आता है तो उसे हटाने की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि जिला प्रशासन मछली परिवार की अन्य संपत्तियों की जांच में जुटा। इसी बीच पशुपालन विभाग ने कोकता बायपास स्थित 99 एकड़ जमीन का सीमांकन कराने के लिए आवेदन दिया था। अधिकारियों का दावा है कि इस जमीन पर भी मछली परिवार सहित 20 लोगों ने कब्जा किया है। इसके आधार पर प्रशासन ने रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया। वही सभी 20 लोगों को नोटिस जारी किए।  23 दिन में ऐसे हुई कार्रवाई- ड्रग्स तस्करी और दुष्कर्म मामले में गिरफ्तार शाहवर मछली व उसके भतीजे यासीन के परिवार की अवैध कोठी को 21 अगस्त को गिरा दिया गया था। करीब 15 हजार स्क्वायर फीट एरिये में बनी कोठी, पोर्च, गैराज, पार्क था। इस जमीन की अनुमानित कीमत 25 करोड़ रुपए आंकी गई है। इससे पहले 30 जुलाई को कार्रवाई की गई थी। जिसमें 6 संपत्तियों को जमींदोज कर 100 करोड़ रुपए कीमत की सरकारी जमीन कब्जा मुक्त कराई गई थी। 12 से 13 रकबा में पूरी जमीन जानकारी के अनुसार, 99 एकड़ जमीन का सीमांकन करने में 7 से 10 दिन का समय लग सकता है। यह जमीन 12 से 13 रकबे में है। एडीएम अंकुर मेश्राम ने बताया कि कार्रवाई को लेकर प्लान तैयार किया है। बुधवार से सीमांकन की शुरुआत कर दी जाएगी। गोविंदपुरा अनुभाग की टीम सीमांकन में रहेंगी। यदि इसमें किसी का अवैध कब्जा सामने आता है तो उसे हटाने की कार्रवाई की जाएगी। ताले खुले मिले, थाना प्रभारी को लिखा लेटर इधर, हुजूर एसडीएम विनोद सोनकिया ने बिलखिरिया कलां थाना प्रभारी को एक पत्र लिखा है। जिसमें बताया कि 30 जुलाई को कार्रवाई के दौरान तीन मंजिला बिल्डिंग को सील किया गया था। इस बिल्डिंग की ऊंचाई अधिक होने, पर्याप्त मशीन नहीं होने और महिलाओं के विरोध के चलते यह कार्रवाई की गई थी। 21 अगस्त को जिला प्रशासन, पुलिस और नगर निगम की टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान सील किए गए घर के ताले खोले गए थे। इसमें से एक ताला बदला पाया गया और एक ताला खुला मिला था। ऐसे में गड़बड़ी की आशंका है। इसलिए सील किए गए तालों के खोले एवं बदले जाने से संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। 23 दिन में ऐसे हुई कार्रवाई… ड्रग्स तस्करी और दुष्कर्म मामले में गिरफ्तार शाहवर मछली और उसके भतीजे यासीन के परिवार की अवैध कोठी को 21 अगस्त को गिरा दिया गया था। करीब 15 हजार स्क्वायर फीट एरिये में बनी कोठी, पोर्च, गैराज, पार्क था। इस जमीन की अनुमानित कीमत 25 करोड़ रुपए आंकी गई है। इससे पहले 30 जुलाई को कार्रवाई की गई थी। जिसमें 6 संपत्तियों को जमींदोज कर 100 करोड़ रुपए कीमत की सरकारी जमीन कब्जा मुक्त कराई गई थी। घेराबंदी कर गिरफ्तार किए गए थे शाहवर और यासीन- शाहवर मछली व उसके भतीजे यासीन को क्राइम ब्रांच ने गैमन मॉल के पास से घेराबंदी कर गिरफ्तार किया था। तलाशी में उनके पास से तीन ग्राम एमडी ड्रग, एक देशी पिस्टल बरामद हुई थी। यासीन के मोबाइल में ऐसे वीडियो भी मिले थे, जिनमें वह युवकों को निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटता दिख रहा था। मोबाइल में युवतियों के आपत्तिजनक वीडियो भी पाए गए। पुलिस रिमांड में पूछताछ के दौरान दोनों ने चौंकाने वाले खुलासे किए थे। आरोपी राजस्थान से भी ड्रग लाते थे। सड़क के रास्ते नशे का सामान लाया जाता था। इसके बाद भोपाल के अलग-अलग पब व लाउंज में पुराने और भरोसेमंद फिक्स कस्टमरों तक ड्रग्स पहुंचाई जाती थी। 21 अगस्त को कोठी को तोड़ने की कार्रवाई की गई थी। इन दोनों कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन मछली परिवार की अन्य संपत्तियों की जांच में जुटा। इसी बीच पशुपालन विभाग ने कोकता बायपास स्थित 99 एकड़ जमीन का सीमांकन कराने के लिए आवेदन दिया। अफसरों का दावा है कि इस जमीन पर भी मछली परिवार सहित 20 लोगों ने कब्जा किया है। इसके आधार पर प्रशासन ने रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया और सभी 20 लोगों को नोटिस जारी किए। बता दें कि कोकता बायपास पर मछली परिवार के नाम पर 26 एकड़ जमीन दर्ज है। इसमें 12 एकड़ पर कोर्टयार्ड प्राइम नामक कॉलोनी में 250 प्लॉट काटे गए, जबकि 14 एकड़ देवेंद्र लोधी (लोधी बिल्डर्स) को बेचकर कोर्टयार्ड कस्तूरी कॉलोनी बनाई गई है। दोनों कॉलोनियां टीएंडसीपी से अप्रूव हैं। घेराबंदी कर गिरफ्तार किए गए थे शाहवर और यासीन शाहवर मछली और उसके भतीजे यासीन को क्राइम ब्रांच ने गैमन मॉल के पास से … Read more

मध्यप्रदेश बना देश का सबसे बड़ा टमाटर उत्पादक, सब्जी उत्पादन में तीसरे नंबर पर

उद्यानिकी स्टोरी भोपाल  मध्यप्रदेश देश में सब्जी उत्पादन की दृष्टि से तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। प्रदेश में किसानों द्वारा 12 लाख 85 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। इनमें सर्वाधिक उत्पादन टमाटर का है, उल्लेखनीय मध्यप्रदेश टमाटर के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश में 2024-25 में एक लाख 27 हजार 740 हैक्टर में टमाटर की खेती की गई है इसमे 36 लाख 94 हजार 702 मीट्रिक टन का उत्पादन संभावित है। विगत 4 वर्षों में प्रदेश में टमाटर के रकबे में 16,776 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। वर्ष 21-22 में प्रदेश में 1,10,964 हेक्टेयर में किसानों द्वारा टमाटर की खेती की गई थी जो वर्ष 24-25 में बढ़कर 1 लाख 27 हजार 740 हेक्टेयर हो गया है, जो बाजार में टमाटर की मांग और प्रदेश के टमाटर की पहचान का ही परिणाम है। मध्यप्रदेश के टमाटर की महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में बहुत माँग है। किसानों की मेहनत और सरकार की योजनाओं का परिणाम है कि टमाटर का उत्पादन सब्जियों में सर्वाधिक 28.92 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है। प्रदेश में उद्यानिकी फसलों की औसत उत्पादकता 15.02 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है। मध्यप्रदेश में उद्यानिकी फसलों का कुल रकबा 26 लाख 91 हजार हेक्टर में से प्रदेश में किसानों द्वारा 12 लाख 40 हजार  हेक्टेयर में  245 लाख 98 मीट्रिक टन सब्जी का उत्पादन कर देश में तीसरे स्थान पर बना हुआ है। सब्जियों फसलों में टमाटर, धनिया और लहसुन के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। कुछ वर्षों से किसानों में टमाटर उत्पादन के प्रति आकर्षण बढ़ा है। राज्य सरकार भी टमाटर के बीज 50 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है। टमाटर पर आधारित लघु उद्योगों की संख्या भी बड़ी है। PMFME योजना से किसानों को फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट लगना आसान हुआ है।  अनूपपुर जिले के किसानों ने टमाटर उत्पादन में रचा नया इतिहास अनूपपुर जिले के 15 हजार किसानों ने टमाटर की खेती कर एक लाख 40 हजार मीट्रिक टन टमाटर की रिकॉर्ड पैदावार की है। जिले के तीन प्रमुख क्लस्टर जैतहरी, अनूपपुर और पुष्पराजगढ़ में टमाटर की खेती व्यापक रूप से की जा रही है। इससे लगभग 15,500 किसान प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। जिले में हाइब्रिड एवं स्थानीय किस्मों के टमाटर की खेती की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा बीज ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति पर 50-50 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इससे किसानों की लागत कम और उत्पादन के साथ आय बेहतर हुई है। अनूपपुर जिले का टमाटर मध्यप्रदेश के शहडोल, रीवा और सतना सहित छत्तीसगढ़ के रायपुर, अंबिकापुर, बिलासपुर और महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों तक भेजा जा रहा है। इससे किसानों को बाजार की उपलब्धता के साथ-साथ बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। किसानों की आय वृद्धि के उद्देश्य से स्थानीय स्तर पर विपणन सुविधा भी उद्यानिकी विभाग द्वारा विकसित की गई है। टमाटर की खेती में प्रति हेक्टेयर 50 से 60 हजार रुपए की लागत आती है। इससे किसानों को डेढ़ से 2 लाख रुपए तक का मुनाफा प्राप्त हो रहा है। प्रति एकड़ के हिसाब से यह मुनाफा एक लाख रुपए तक पहुंच रहा है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है।