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मस्जिद के मलबे के नीचे मिला कुआं, मजबूत स्लैब ने चौंकाया; ASI की टीम करेगी पड़ताल

सहारनपुर  यूपी में सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बीते शनिवार को जिस मस्जिद को बुलडोजर से ढहाया गया था, मलबा हटाने के बाद उसके नीचे से कुआं निकला है। मलबा अब पूरी तरह साफ कर दिया गया है। दूसरी तरफ, 70 साल पुरानी अवैध मस्जिद गिराए जाने पर सियासत भी जारी है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से लेकर AIMIM ने बुलडोजर एक्शन के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। मलबा हटाने के बाद स्ट्रक्चर के नीचे मिला कुआं मस्जिद के स्ट्रक्चर के नीचे कुआं मिलने के बाद, सहारनपुर कलेक्ट्रेट में बनी अवैध मस्जिद को गिराने के एक्शन पर SDM सदर सुबोध कुमार ने कहा, 'हमने यह एक्शन अदालत के आदेश का पालन करते हुए किया है। इसी दौरान, यहां एक कुआं मिला है। संबंधित एजेंसियां इसकी ​​जांच करेंगी और बताएंगी कि यह कुआं कितना बड़ा है।' ईंटों से बना हुआ है कुएं का स्ट्रक्चर SDM सदर सुबोध कुमार आगे बोले कि टेक्निकल टीमों की पड़ताल के बाद ही सब कुछ स्पष्ट हो पाएगा। यह ईंटों से बना कुआं है और इसका स्ट्रक्चर भी ईंटों से ही बना है। पहली नजर में तो यह कुआं ही लग रहा है। 7 सितंबर को सहारनपुर जाएगा सपा का डेलिगेशन दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी ने बुलडोजर एक्शन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 7 सितंबर को समाजवादी पार्टी का एक डेलिगेशन सहारनपुर जाएगा। डेलिगेशन कलेक्ट्रेट का भी दौरा करेगा, जहां मस्जिद को गिराया गया है। डेलिगेशन ने शामिल सभी नेता पहले पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान के घर पर जमा होंगे। इसके बाद यहां से कलेक्ट्रेट जाएंगे। ईंटों से बनी है कुएं की संरचना प्रशासन के मुताबिक, प्रारंभिक तौर पर सामने आई संरचना ईंटों से बनी हुई है और देखने में यह कुआं ही प्रतीत होता है। हालांकि, अधिकारियों ने इसकी अंतिम पुष्टि के लिए तकनीकी जांच को जरूरी बताया है। एएसआई की टीम भी मौके की जांच करेगी, जिसके बाद कुएं की संरचना और संभावित ऐतिहासिक महत्व से जुड़े पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मस्जिद को गिराए जाने के बाद प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर से मलबे की एक-एक ईंट हटाने की कार्रवाई की। बताया गया कि मलबे को सहारनपुर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर निर्धारित स्थान पर ले जाकर डाला गया है। प्रशासन का कहना है कि परिसर को पूरी तरह साफ कर समतल किया जा चुका है। पोकलेन भी नहीं हटा पाई भारी स्लैब इस पूरी कहानी का एक दिलचस्प हिस्सा वह स्लैब भी है, जिसके नीचे कुआं मिला. मलबा हटाने के दौरान कर्मचारियों को एक मजबूत और भारी स्लैब मिला. उसे हटाने के लिए पोकलेन मशीन की मदद ली गई. लेकिन मशीन से भी स्लैब नहीं टूट पाया. इसके बाद कटर मंगवाया गया. स्लैब को काटने के बाद उसे हटाया गया. और फिर नीचे कुआं दिखाई दिया।  कलेक्ट्रेट परिसर में कुआं मिलने की खबर फैली तो मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी. लोग एक-एक करके कुएं को देखने पहुंचने लगे. कुएं की गहराई कितनी है? यह कब बनाया गया होगा? इसका इस्तेमाल किस लिए होता होगा?ऐसे कई सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए. हालांकि इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।  कुएं के सामने आने के बाद सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल भी तैनात किया गया. कुएं के आसपास लोगों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है. प्रशासन की निगरानी में मलबा हटाने का काम भी जारी है. अब सिर्फ मलबा हटाने की कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीन के नीचे मिले इस ढांचे की जांच भी अहम हो गई है।  SDM बोले- प्रथम दृष्टया यह कुआं ही लग रहा है एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने बताया कि न्यायालय के आदेश के बाद की गई कार्रवाई में यह ढांचा सामने आया है. उनके मुताबिक, प्रथम दृष्टया यह कुआं ही दिखाई दे रहा है और इसकी गहराई करीब 20 फीट के आसपास है. लेकिन कुएं की असली कहानी अभी सामने आनी बाकी है. यह कितना पुराना है? इसे कब बनाया गया था? इसका इस्तेमाल किस लिए होता था? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिल सकेंगे।  अब ASI की जांच पर टिकी नजर प्रशासन के मुताबिक, मामले की जांच के लिए ASI की टीम मौके पर आएगी. जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि जमीन के नीचे मिला यह कुआं कितना पुराना है और इसका कोई ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व है या नहीं. फिलहाल, सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद हटाए जाने के बाद मलबे के नीचे मिला यह कुआं अब चर्चा का विषय बन गया है. भारी स्लैब के नीचे करीब 20 फीट गहरा दिखाई देने वाला कुआं आखिर कब बना और इसकी कहानी क्या है? इसका जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएगा।  मस्जिद के नीचे कुआं मिलने से बढ़ी सतर्कता मस्जिद के बीच में कुआं मिलने के बाद प्रशासन मामले में अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। कुएं को फिलहाल ढक दिया गया है, ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो और जांच के दौरान संरचना को सुरक्षित रखा जा सके। सपा का प्रतिनिधिमंडल करेगा सहारनपुर का दौरा इस बीच समाजवादी पार्टी ने भी पूरे मामले की जांच के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर भेजने का फैसला किया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रतिनिधिमंडल रविवार को सहारनपुर पहुंचकर घटनाक्रम की जानकारी जुटाएगा। सपा के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त से मुलाकात कर मस्जिद ध्वस्तीकरण से जुड़े तथ्यों की जानकारी लेगा। पार्टी का दावा है कि 4 सितंबर की शाम प्रशासन की ओर से मस्जिद को सील किए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। प्रतिनिधिमंडल मौके की स्थिति देखने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को सौंपेगा। सहारनपुर जाने वाले सपा डेलिगेशन की लिस्ट     लाल बिहारी यादव, नेता प्रतिपक्ष, विधान परिषद      चौधरी अब्दुल वाहिद, जिलाध्यक्ष     हाजी नवाब अंसारी, महानगर अध्यक्ष     हरेंद्र मलिक, सांसद      इकरा हसन, कैराना सांसद      चौधरी रूद्रसेन, राष्ट्रीय महासचिव      हाजी फजलुर्रहमान, पूर्व सांसद      अतुल प्रधान, सरधना विधायक      आशु मलिक, विधायक      उमर अली, विधायक      रामऔतार सैनी, विधायक      किरन पाल कश्यप, MLC     माविया अली, पूर्व विधायक      राहुल … Read more

बाढ़ पीड़ितों को CM योगी का भरोसा- आपदा की घड़ी में अकेले नहीं, डबल इंजन सरकार आपके साथ

बाढ़ पीड़ितों को CM योगी का भरोसा- आपदा की इस घड़ी में आप अकेले नहीं, डबल इंजन सरकार आपके साथ CM योगी ने बाढ़ प्रभावित चित्रकूट दौरे से पहले सेल्फी वीडियो जारी कर दिया बाढ़ राहत का संदेश बलिया, फर्रुखाबाद और वाराणसी का दौरा कर चुके हैं CM योगी  हर जीवन की सुरक्षा और हर परिवार तक राहत हमारा संकल्प : मुख्यमंत्री  लखनऊ  उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि सरकार उनके साथ खड़ी है। सीएम योगी ने रविवार को चित्रकूट के दौरे से पहले अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक सेल्फी वीडियो शेयर कर बाढ़ प्रभावित इलाकों में चल रहे राहत और बचाव कार्यों की जानकारी दी। सीएम योगी ने कहा कि ज्यादा बारिश के कारण प्रदेश के कुछ जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। सरकार पूरी तेजी के साथ लोगों तक मदद पहुंचाने में जुटी है। वह खुद बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर हालात देख रहे हैं और राहत-बचाव के कामों का जायजा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार के मंत्री भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों से मिल रहे हैं और राहत सामग्री बांट रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए भी सरकार काम कर रही है। सीएम योगी ने बताया कि वह बलिया, फर्रुखाबाद और वाराणसी का दौरा कर चुके हैं और आज चित्रकूट जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए लोगों की सेवा सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उनके सुख-दुख में साथ खड़े रहना भी है। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से कहा कि संकट की इस घड़ी में वे खुद को अकेला न समझें, सरकार पूरी तरह उनके साथ है। सीएम योगी ने कहा कि हर व्यक्ति की जान की सुरक्षा, हर प्रभावित परिवार तक राहत पहुंचाना और जरूरतमंदों की मदद करना सरकार की पहली प्राथमिकता है।

इंदौर की हवा ने भी बढ़ाया शहर का गौरव, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में मिला दूसरा स्थान; 7 सितंबर को ऐलान

इंदौर  स्वच्छता के सिरमौर इंदौर ने अब अपनी आबोहवा को शुद्ध रखने में भी एक नया मुकाम हासिल किया है। 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026' में इंदौर ने देश के शीर्ष तीन शहरों में अपनी जगह पक्की कर ली है। सूत्रों की मानें तो इस प्रतिष्ठित सर्वेक्षण में शहर ने दूसरा पायदान हासिल किया है। हालांकि, रैंकिंग की आधिकारिक और अंतिम घोषणा 7 सितंबर को नई दिल्ली में की जाएगी। इस खास उपलब्धि के लिए इंदौर को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना है। दिल्ली में मिलेगा 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सराहना पुरस्कार'     सात सितंबर को नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन के गंगा ऑडिटोरियम में 'स्वच्छ वायु दिवस' कार्यक्रम आयोजित होगा। इसी समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव परिणामों की विधिवत घोषणा करेंगे।     कार्यक्रम के दौरान इंदौर को 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सराहना पुरस्कार' से नवाजा जाएगा। यह सम्मान ग्रहण करने के लिए शहर के महापौर और निगमायुक्त को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों तक भी इस पुरस्कार की सूचना पहुंच चुकी है। इन प्रयासों से सुधरी शहर की आबोहवा वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम ने जमीनी स्तर पर कई अहम कदम उठाए, जिनका सीधा और सकारात्मक असर इस सर्वेक्षण में नजर आया। निगम के प्रमुख प्रयास इस प्रकार रहे:     सड़कों की मशीनीकृत सफाई: हवा में धूल के कणों को उड़ने से रोकने के लिए मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल किया गया।     ग्रीन बेल्ट का विस्तार: पर्यावरण को शुद्ध रखने और हरियाली बढ़ाने के लिए शहरभर में नए ग्रीन बेल्ट विकसित किए गए।     मलबे का उचित प्रबंधन: निर्माण कार्यों और तोड़फोड़ से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया गया।     रीसाइकिल और रीयूज: सीएंडडी कचरे (मलबे) के अधिकतम हिस्से को दोबारा उपयोग में लाने और उसे रीसाइकिल करने पर विशेष जोर दिया गया।     ई-वाहनों पर फोकस: प्रदूषण का स्तर घटाने के लिए सार्वजनिक परिवहन बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया गया। 7 सितंबर को आधिकारिक तौर पर साफ होगी तस्वीर वर्तमान में नगर निगम के सूत्रों के हवाले से इंदौर के दूसरे स्थान पर रहने की सुगबुगाहट है। हालांकि, शहर की वास्तविक रैंकिंग और स्थिति की अंतिम तस्वीर 7 सितंबर को दिल्ली के मुख्य समारोह में ही स्पष्ट होगी, जब परिणामों की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

सात्विक-चिराग का कमाल, चीन मास्टर्स के फाइनल में तीसरी बार बनाई जगह

शेनजेन  भारत के सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की पुरुष युगल जोड़ी ने शानदार रणनीतिक खेल का प्रदर्शन करते हुए मलेशिया के नूर मोहम्मद अजरीन अयूब और टैन वी कियोंग को तीन गेम में हराकर तीसरी दफा चीन मास्टर्स के फाइनल में जगह बनाई। इसके साथ ही भारतीय जोड़ी इस सत्र के अपने दूसरे खिताब से अब सिर्फ एक जीत दूर है। सात्विक-चिराग की दुनिया की पांचवें नंबर की जोड़ी ने दूसरे गेम में लड़खड़ाने के बाद जोरदार वापसी की और मलेशियाई जोड़ी को एक घंटे पांच मिनट में 21-15, 18-21, 21-11 से हराया। भारतीय जोड़ी 2023 और 2025 के में उपविजेता रही थी। एशियाई खेलों की चैंपियन भारतीय जोड़ी अब खिताबी मुकाबले में चीन के हे जी तिंग और रेन शियांग यू की जोड़ी से भिड़ेगी। चौथी वरीयता प्राप्त भारतीय जोड़ी ने शुरुआती गेम में 0-5 से पिछड़ने के बाद लगातार सात अंक हासिल किए। इसमें 34 शॉट की लंबी रैली भी शामिल थी जिससे उन्होंने 7-5 की बढ़त बना ली। सात्विक और चिराग ने भी कुछ गलतियां कीं, लेकिन ब्रेक तक वे 11-9 से आगे रहे। जब स्कोर 18-15 था तब दोनों जोड़ियों के बीच 54 शॉट की रैली हुई। इस दौरान मलेशियाई खिलाड़ी ने जमीन पर गिरने के बावजूद रैली जारी रखी, लेकिन अंत में उसका शॉट कोर्ट से बाहर चला गया। इसके बाद नूर ने एक और शॉट गलत खेला जिससे भारत को पांच गेम प्वाइंट मिले। सात्विक और चिराग ने दूसरे गेम प्वाइंट पर पहला गेम अपने नाम कर लिया। मलेशियाई जोड़ी ने फिर तेज शुरुआत करते हुए दूसरे गेम में 4-0 की बढ़त बनाई, लेकिन सात्विक और चिराग ने शानदार फ्लिक सर्व का इस्तेमाल करते हुए वापसी की और स्कोर 5-5 से बराबर कर दिया। नेट पर सात्विक की एक और गलती के बाद मलेशियाई जोड़ी ने ब्रेक तक 11-10 की बढ़त हासिल कर ली।दोनों जोड़ियों के बीच कड़ा संघर्ष जारी रहा और अंक 18-18 तक बराबर रहे। इसके बाद मलेशियाई जोड़ी ने मामूली बढ़त हासिल की और दूसरा गेम जीतकर मुकाबले को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया। दूसरे गेम के अंतिम हिस्से में हुई चूक को भारतीय खिलाड़ियों ने पीछे छोड़ते हुए निर्णायक गेम में 5-2 की बढ़त बना ली। इसके बाद खेल भावना का शानदार उदाहरण देखने को मिला। चिराग के रैकेट के फ्रेम से लगकर एक शॉट भारत के पक्ष में जाने के बाद उन्होंने टैन से माफी मांगी और उनसे हाथ मिलाया। इस अंक के बाद भारत 7-3 से आगे था। सात्विक और चिराग ने रैलियों पर अपना दबदबा बनाए रखा और ब्रेक तक 11-4 की मजबूत बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद सात्विक ने नूर के खिलाफ एक और जोरदार स्मैश लगाकर स्कोर 13-6 कर दिया। मलेशियाई जोड़ी धीरे-धीरे थकने लगी और उसका आत्मविश्वास भी कम होता गया। इसके बाद मुकाबला पूरी तरह भारतीय खिलाड़ियों के नियंत्रण में रहा। चिराग का शॉट बैकलाइन पर सटीक गिरने से भारत को 11 मैच प्वाइंट मिल गए। टैन ने इनमें से दो मैच प्वाइंट बचा लिए, लेकिन चिराग ने तीसरे मौके पर फ्लिक सर्व के जरिए अंक हासिल कर मुकाबला अपने नाम कर दिया। सात्विक और चिराग ने सेमीफाइनल में पहुँचने के लिए किस टीम को हराया? सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ने डेनमार्क के किम एस्ट्रुप और एंडर्स स्कारुप रासमुसेन को हराकर चीन मास्टर्स सुपर-750 के पुरुष डबल्स के सेमीफाइनल में जगह पक्की की। मुकाबला तीन गेम में हुआ और भारतीय जोड़ी ने 21-13, 16-21, 21-18 से जीत दर्ज की। सात्विक और चिराग की जोड़ी को किस जोड़ी ने हराया? सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी को बीडब्ल्यूएफ विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में दुनिया की तीसरे नंबर की चीनी जोड़ी लियांग वेई केंग और वांग चांग ने हराया। यह मैच 36 मिनट चला।      सात्विकसाईराज और चिराग ने किस टीम को हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई?     सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने मलेशिया की दुनिया की 19वें नंबर की जोड़ी जुनैदी आरिफ और याप रॉय किंग को कड़े मुकाबले में 21-23, 21-19, 21-17 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई।

FPI Selloff: दो महीने की खरीदारी के बाद विदेशी निवेशकों की बिकवाली, ₹7,443 करोड़ निकाले

मुंबई  मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच टेंशन शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव का बड़ा कारण बनी हुई है. इसका सीधा असर विदेशी निवेशकों के इन्वेस्टमेंट पर भी लगातार देखने को मिला है, जिससे बाजारों का सेंटीमेंट खराब हुआ है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब दो महीने तक लगातार निवेश करने के बाद एक बार फिर FPI का मूड खराब हो गया है और उन्होंने सितंबर के पहले हफ्ते में ही ताबड़तोड़ 7,443 करोड़ रुपये भारतीय बाजार से निकाले हैं।  US-Iran Tension के चलते कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती समेत तमाम कारणों ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली को सपोर्ट किया है।  दो महीने दनादन निवेश, अब भागे अमेरिका-ईरान में युद्ध कुछ समय के लिए थमने के दौरान इसका असर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs पर भी देखने को मिला था और चार महीने की तगड़ी बिकवाली के बाद आखिरकार भारतीय शेयर बाजार में उनकी वापसी हुई है. लेकिन, दो महीने तक दनादन निवेश करने के बाद अब एफपीआई का मूड फिर से बिगड़ा नजर आया और उनकी बिकवाली तेज हो गई है।  पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार से सितंबर महीने में पहले सप्ताह में ही इन विदेशी निवेशकों ने 7,443 करोड़ रुपये की मोटी रकम निकाली है. इससे पहले दो महीनों के निवेश पर नजर डालें, तो डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार FPI ने जुलाई में 20,200 करोड़ रुपये, जबकि बीते अगस्त महीने में 30,919 करोड़ रुपये लगाए थे।  इस साल अब तक 2.32 लाख करोड निकाले दो महीने के तगड़े निवेश के बावजूद विदेशी निवेशकों द्वारा सितंबर के शुरुआती हफ्ते में की गई इस बिकवाली के बाद अब साल 2026 में इनके भारतीय बाजार से भागते हुए पैसे निकालने का आंकड़ा और भी बढ़ गया है. आंकड़े देखें, तो 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की कुल निकासी 2.32 लाख करोड़ रुपये के आस-पहुंच गई है, जो बीते वित्त वर्ष के मुकाबले काफी ज्यादा है. बता दें कि 2025 में एफपीआई ने सालभर में 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाले थे।  ये बनीं बिकलावी की बड़ी वजह  भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों के फिर से भागने के पीछे के कारणों को देखें, तो इसके पीछे एक बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल माना जा रहा है, जो सीधे तौर पर अमेरिकी और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की खबरों से जुड़ा हुआ है।  एक्सपर्ट्स का कहना है कि Crude Oil Price Hike ने एफपीआई की चिंता एक बार फिर से बढ़ाने का काम किया है, क्योंकि इससे देश में महंगाई का जोखिम बढ़ रहा है. रिपोर्ट में जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि एफपीआई का आने वाले दिनों में रुख बॉन्ड यील्ड में होने वाला बदलाव पर केंद्रित रह सकता है।  

बरगी बांध से पानी छोड़े जाने के बाद नर्मदा उफान पर, जबलपुर में 10 फीट बढ़ा जलस्तर; रेल सुरक्षा बढ़ी

जबलपुर  अंचल में निरंतर बारिश के दौरान यात्रियों की सुरक्षित यात्रा और ट्रेनों के सुचारू संचालन के लिए जबलपुर मंडल ने व्यापक सुरक्षा तैयारियां की हैं। भारी बारिश, जलभराव, बाढ़ और मिट्टी के कटाव जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए संवेदनशील रेल संपत्तियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। संवेदनशील स्थानों पर 109 रेल कर्मचारियों की तैनाती     मंडल के महत्वपूर्ण पुलों, कटिंग और अन्य संवेदनशील स्थानों पर 109 रेल कर्मचारियों की तैनाती की गई है। मानसून पेट्रोलमैन और स्टेशनरी वाचमैन भारी बारिश के दौरान तथा उसके बाद ट्रैक की लगातार निगरानी कर रहे हैं। ट्रैक धंसने, गिट्टी बहने, जलभराव और तटबंध के कटाव जैसी स्थिति की तत्काल सूचना अधिकारियों और कंट्रोल कार्यालय को दी जा रही है। पेट्रोलिंग की निगरानी जीपीएस डिवाइस से की जा रही है। महत्वपूर्ण पुलों पर वाटर लेवल मानिटरिंग सिस्टम से जलस्तर की रियल टाइम निगरानी हो रही है। चुनिंदा स्टेशनों पर हवा की गति मापने के लिए एनीमोमीटर लगाए गए हैं। पुलों, पुलियाओं, तटबंधों और कटिंग स्थलों का निरीक्षण कर आवश्यक सुदृढ़ीकरण किया गया है। आपात स्थिति से निपटने के लिए गिट्टी, पत्थर, रेत की बोरियां, स्लीपर, रेल और जरूरी उपकरण भी रणनीतिक स्थानों पर उपलब्ध रखे गए हैं। मौसम विभाग, बरगी बांध प्राधिकरण, जिला प्रशासन तथा रेलवे के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। अधिकारियों और रखरखाव टीमों द्वारा चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। 10 फीट तक बढ़ा नर्मदा का जलस्तर     बरगी बांध के 13 जलद्वारों से शनिवार को तीसरे दिन भी 4032 क्यूमेक पानी की निकासी होती रही। लगातार बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने से नर्मदा उफान पर है। ऐसे में ग्वारीघाट में उमाघाट, दरोगाघाट, सिद्धघाट, नाव घाट जलमग्न हो गए हैं। घाट किनारे बनी होटलें भी पूरी तरह से डूब चुकी हैं। नागमंदिर तक पानी पहुंच जाने से घाट पर लगने वाली प्रसाद की दुकानें ऊपर चौक पर लग रही हैं।     नर्मदा का जलस्तर करीब 10 फीट तक बढ़ चुका है। मानसून सीजन में ये दूसरी बार है जब नर्मदा का विकराल रूप नजर आया है। इसके पूर्व 19 अगस्त 2026 को बरगी के द्वार खोले जाने से नर्मदा का जलस्तर बढ़ा था। वहीं नर्मदा का रौद्र रूप तिलवाराघाट, लम्हेटाघाट और भेड़ाघाट में भी देखने मिल रहा है। नर्मदा का जलस्तर बढ़ने और पानी तेज बहाव का नजारा देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग ग्वारीघाट, भेड़ाघाट पहुंच रहे हैं। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के लिए होमगार्डों की तैनाती की गई है। भारी बारिश के आसार कम रिमझिम जारी रहेगी     माह के शुरुआती दिनों में बरसने वाले बादल अब आगे बढ़ गए हैं। इसी के साथ मध्यम से भारी बारिश का दौर भी समाप्त हो गया है। अगले चार दिनों तक भारी बारिश के आसार कम ही हैं। हालांकि वर्तमान में सक्रिय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से जबलपुर सहित संभाग के जिलों में रिमझिम बारिश का दौर जारी रहेगा।     कहीं-कहीं तेज हवा के साथ बौछारें भी पड़ सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार वर्तमान में उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश और दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र शनिवार को कमजोर होकर सामान्य निम्न दबाव के क्षेत्र में बदल गया है। यह सिस्टम अगले 24 घंटों के दौरान इसी क्षेत्र में लगभग स्थिर बना रहेगा।  

बलरामपुर में सबसे ज्यादा बारिश, बेमेतरा में कम बरसे बादल; छत्तीसगढ़ में मानसून की रफ्तार सुस्त

रायपुर  छत्तीसगढ़ में मानसून (CG Monsoon) की सक्रियता अभी बनी हुई है। उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे लगे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के असर से प्रदेश में अगले 24 घंटे तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। शनिवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग (IMD Weather Update) ने रविवार को कुछ स्थानों पर बारिश के साथ एक-दो जगह गरज-चमक और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। कम दबाव के क्षेत्र से बारिश के आसार मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे लगे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र शनिवार को सक्रिय रहा। इससे संबंधित चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से 7.6 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है। इसके अगले दो दिनों में पूर्व-उत्तर-पूर्व दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। मानसून द्रोणिका भी इसी मौसमी प्रणाली वाले क्षेत्र से होकर छत्तीसगढ़ के उत्तर हिस्से की ओर प्रभाव डाल रही है। इसके अलावा दक्षिण गुजरात से उत्तर बांग्लादेश तक बनी दूसरी द्रोणिका भी मौसम को प्रभावित कर रही है। इन प्रणालियों के प्रभाव से प्रदेश में आगामी दिनों में बादलों की आवाजाही और बारिश की गतिविधियां बनी रहने के संकेत हैं। पेंड्रा रोड में सबसे कम तापमान शनिवार को प्रदेश के तापमान में भी अलग-अलग क्षेत्रों के बीच अंतर देखने को मिला। जगदलपुर में अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.8 डिग्री अधिक रहा। पेंड्रा रोड में न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.8 डिग्री कम है। रायपुर में अधिकतम तापमान 30.2 और न्यूनतम 23.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। दोनों तापमान सामान्य से 0.8 डिग्री कम रहे। बिलासपुर में 20 मिलीमीटर, जगदलपुर में 10.6 मिलीमीटर और दुर्ग में 10.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। लोरमी, दरिमा और कुमारदा में सर्वाधिक 10-10 मिलीमीटर वर्षा हुई। रायपुर में बादल छाए रहेंगे, एक-दो दौर बारिश रायपुर में आज गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। अधिकतम तापमान करीब 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है। जगदलपुर सबसे गर्म, पेंड्रा रोड सबसे ठंडा प्रदेश में शुक्रवार को जगदलपुर सबसे गर्म रहा। यहां अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं पेंड्रा रोड में न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री रहा। प्रदेश में अब तक बारिश की स्थिति सीजनल बारिश की बात करें तो छत्तीसगढ़ में सामान्य से 2% कम बारिश हुई है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में भी कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और कहीं-कहीं गरज-चमक की संभावना जताई है। बलरामपुर में 75% ज्यादा, बेमेतरा में 39% कम बारिश छत्तीसगढ़ में 1 जून से 4 सितंबर तक मानसून की बारिश का आंकड़ा भले ही सामान्य से सिर्फ 2% कम है, लेकिन जिलेवार तस्वीर काफी अलग है। प्रदेश में कहीं बारिश ने कमी का रिकॉर्ड बनाया है तो कहीं सामान्य से बहुत ज्यादा पानी गिरा है। सबसे ज्यादा बारिश बलरामपुर में 1433.1 मिमी (56.42 इंच) दर्ज की गई है, जो सामान्य से 75% ज्यादा है। दूसरी ओर बेमेतरा में सिर्फ 536.7 मिमी (21.13 इंच) बारिश हुई, जो सामान्य से 39% कम है। यानी प्रदेश के सबसे ज्यादा और सबसे कम बारिश वाले इन दो जिलों के बीच करीब 896.4 मिमी (35.29 इंच) बारिश का अंतर है। प्रदेश में कुल बारिश की तस्वीर 1 जून से 3 सितंबर तक छत्तीसगढ़ में औसत बारिश 944.7 मिमी (37.19 इंच) हुई है। इस अवधि में सामान्य बारिश 962.6 मिमी (37.90 इंच) मानी गई है। इस हिसाब से प्रदेश में बारिश 17.9 मिमी (0.70 इंच) कम, यानी 2% कम है। लेकिन यह आंकड़ा पूरे प्रदेश का औसत है। जिलों को अलग-अलग देखें तो तस्वीर काफी बदल जाती है। 33 जिलों में:     7 जिलों में सामान्य से 20% या उससे ज्यादा बारिश हुई।     4 जिले ऐसे हैं जहां बारिश 20% से ज्यादा कम रही।     22 जिलों में बारिश सामान्य श्रेणी में है। यानी राज्य की कुल बारिश सामान्य के आसपास है, लेकिन कई जिलों में बारिश का बैलेंस बिगड़ा हुआ है रायपुर में बादल, बौछार की संभावना रविवार को राजधानी रायपुर में मौसम मिला-जुला रहने का अनुमान है। सुबह से आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। दिन में एक-दो बार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछार पड़ने की संभावना है। अधिकतम तापमान करीब 31 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। प्रदेश में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ वज्रपात की चेतावनी दी है। मौसमी वर्षा अब तक सामान्य के करीब है और इसमें तीन प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

पंजाब सरकार का बड़ा ऐलान, फूड ग्रेन पॉलिसी को मिली हरी झंडी; अस्पतालों में 151 पदों को मंजूरी

चंडीगढ़  पंजाब कैबिनेट की बैठक  चंडीगढ़ में सीएम भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई। बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कैबिनेट मंत्री हरपाल चीमा ने बैठक के बाद फैसलों के बारे में जानकारी दी।  चीमा ने बताया कि बैठक में पीपीएससी ग्रुप-1 रेगुलेशन में संशोधन को मंजूरी दे दी गई। इसके अलावा बैठक में नई भर्तियां निकालने पर भी चर्चा हुई। बैठक में पंजाब फूड ग्रेन ट्रांसपोर्ट पालिसी को हरी झंडी दे दी गई। चमकौर साहिब अस्पताल में 33, मलेरकोटला व धूरी के अस्पतालों में 19 व डेंटल विभाग में 80 पदों को भरने की मंजूरी भी कैबिनेट की बैठक में दे दी गई। हरपाल चीमा ने बताया कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान अब तक युवाओं को 71 हजार सरकारी नौकरियां दी हैं।   मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में 251 नए पद सृजित करने को मंजूरी दी गई। इनमें चमकौर साहिब के उपमंडलीय अस्पताल के लिए 33, मालेरकोटला के स्वास्थ्य विभाग के लिए 19, चिकित्सा व दंत चिकित्सा अधिकारियों के 80 तथा उपमंडलीय अस्पतालों और नए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 119 पद शामिल हैं। इसके साथ ही पंजाब लोक सेवा आयोग में ग्रुप-ए के नियमों में संशोधन और नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई। वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने बताया कि नए पदों के सृजन का उद्देश्य सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों की कमी दूर करना और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। चमकौर साहिब के उपमंडलीय अस्पताल में 33 पद सृजित किए गए हैं। सरकार के अनुसार इससे अस्पताल में चिकित्सकीय स्टाफ की कमी दूर होगी और क्षेत्र के लोगों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। मालेरकोटला में स्वास्थ्य प्रशासन होगा मजबूत मालेरकोटला में स्वास्थ्य विभाग के लिए 19 नए पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सहायक सिविल सर्जन और जिला परिवार कल्याण अधिकारी सहित अन्य पद शामिल हैं। नया जिला बनने के बाद स्वास्थ्य प्रशासन को मजबूत करने के लिए इन पदों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चिकित्सा व दंत चिकित्सा अधिकारियों के 80 पद प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए चिकित्सा अधिकारियों और दंत चिकित्सा अधिकारियों के 80 पदों को मंजूरी दी गई। वहीं, उपमंडलीय अस्पतालों और नए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 119 पद सृजित किए गए हैं। इससे स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक स्टाफ उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। कैबिनेट ने खाद्यान्न से जुड़ी नीतियों को भी मंजूरी दी। इनमें पंजाब कस्टम मिलिंग नीति, खरीद विपणन सीजन-2026, पंजाब खाद्यान्न ढुलाई नीति-2027 और पंजाब खाद्यान्न श्रम एवं कार्टेज नीति-2027 शामिल हैं। सरकार के अनुसार इन नीतियों से खरीद, ढुलाई और श्रम व्यवस्था को सुचारु बनाने में मदद मिलेगी। कैबिनेट के अहम फैसले      पंजाब लोक सेवा आयोग में ग्रुप-ए के नियमों में संशोधन और नए पदों का सृजन।      चमकौर साहिब उपमंडलीय अस्पताल में 33 नए पद।      मालेरकोटला स्वास्थ्य विभाग में 19 नए पद।      चिकित्सा व दंत चिकित्सा अधिकारियों के 80 पद।      उपमंडलीय अस्पतालों और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 119 पद।      पंजाब कस्टम मिलिंग नीति और खरीद विपणन सीजन-2026 को मंजूरी।      पंजाब खाद्यान्न ढुलाई नीति-2027 तथा खाद्यान्न श्रम एवं कार्टेज नीति-2027 को स्वीकृति।  

पंजाब में बिजली संकट का खतरा बढ़ा, कोयले की कमी से 1,500 MW उत्पादन प्रभावित; कटौती की आशंका

चंडीगढ़  बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर कोयले की भारी कमी के कारण पंजाब भर में बिजली संकट और गंभीर हो गया है, जिससे राज्य में बिजली उत्पादन 1,500 मेगावाट तक घट गया है और बड़े थर्मल प्लांट कम क्षमता पर चलाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोयले की कमी के कारण देश भर में 63 GW बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है, जबकि केंद्र द्वारा कोयले की कम की गई आपूर्ति ने राजपुरा और तलवंडी साबो थर्मल प्लांटों को प्रभावित किया है, जिससे पंजाब के बिजली प्रबंधन पर और बुरा असर पड़ा है।     केंद्र सरकार कोयले की कमी को दूर करने और लोगों तथा उद्योगों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित बनाने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाए। कोयले की कमी से 1,500 मेगावाट बिजली उत्पादन घटा एक वीडियो संदेश में बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने कहा, “देश में कोयले की भारी कमी के कारण पंजाब में बिजली उत्पादन में लगभग 1,500 मेगावाट की गिरावट आई है। पिछले दो-तीन दिनों से राज्य में बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिस कारण मजबूरीवश घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती की जा रही है।”     मौजूदा बिजली संकट के पीछे सबसे बड़ा कारण देश भर में कोयले की भारी कमी है। उन्होंने आगे कहा, “यह समस्या सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि कोयले की कमी के कारण देश भर में लगभग 63 GW बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।“ देश भर में लगभग 63 गीगावाट (GW) क्षमता के थर्मल पावर प्लांट कोयले की किल्लत से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और अधिकांश निजी बिजली संयंत्रों के पास केवल 3 से 4 दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है, जिसके कारण वे अपनी आधी क्षमता (हाफ कैपेसिटी) पर चलने को मजबूर हैं। बिजली मंत्री ने पंजाब के प्रमुख प्राइवेट थर्मल पावर प्लांटों का ब्योरा देते हुए कहा कि नाभा पावर लिमिटेड (राजपुरा) और तलवंडी साबो पावर प्लांट (मानसा) पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा सप्लाई किए जाने वाले कोयले पर निर्भर हैं। केंद्र से पर्याप्त कोयला न मिलने के कारण ये दोनों बड़े प्लांट वर्तमान में आधी क्षमता पर ही बिजली उत्पादन कर पा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने राहत की बात बताते हुए स्पष्ट किया कि जिन थर्मल प्लांटों को पंजाब सरकार खुद कोयला मुहैया करा रही है, उनके पास अभी भी लगभग 10 दिन का स्टॉक है। मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने बताया कि देश भर के कई थर्मल पावर प्लांटों के पास सिर्फ तीन से चार दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है और नतीजतन वे अपनी आधी क्षमता पर चलने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा, “पंजाब के प्राइवेट थर्मल पावर प्लांट भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहे हैं, जहां कोयले की कमी के कारण आधी क्षमता पर बिजली उत्पादन हो रहा है।” सौंद ने कहा कि देश भर में कोयले की कमी से बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। केंद्र द्वारा कोयले की कम आपूर्ति ने राजपुरा और तलवंडी साबो थर्मल प्लांटों को प्रभावित किया है। कई बड़े थर्मल प्लांट कम क्षमता पर चलाने को मजबूर हो रहे हैं। बिजली मंत्री ने केंद्र सरकार से इस पर तुरंत चुप्पी तोड़ने की मांग की है। उन्होंने कोयले की कमी दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा। इसका उद्देश्य लोगों और उद्योगों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। दो-तीन दिन से राज्य में घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती हो रही है। यह बिजली की कमी के कारण मजबूरी में की जा रही है। बिजली संकट पर केंद्र सरकार को घेरा पंजाब में गहराते बिजली संकट को लेकर बिजली मंत्री तरनप्रीत सिंह सौंद ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए अपनी चुप्पी तोड़ने की अपील की है। मंत्री ने कहा कि केंद्र को देश और पंजाब के लोगों को स्पष्टीकरण देना चाहिए कि कोयले की यह नेशनल शॉर्टेज कब तक दूर होगी, ताकि राज्यों में आम जनता और उद्योगों को निर्बाध बिजली की आपूर्ति फिर से सुनिश्चित की जा सके। 1500 मेगावाट घटना बिजली उत्पादन बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर कोयले की कमी के कारण पंजाब भर में बिजली संकट और गंभीर हो गया है, जिससे राज्य में बिजली उत्पादन 1,500 मेगावाट तक घट गया है। मंत्री ने कहा कि यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है जो पूरे देश को प्रभावित कर रहा है। केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए और देश के लोगों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि कोयले की इस कमी पर काबू पाने में कितना समय लगेगा, ताकि पंजाब की आम जनता और उद्योगों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति दी जा सके। बिजली मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और कोयले की कमी को दूर करने के लिए तुरंत ठोस और उचित कदम उठाने चाहिए। कोयले की समस्या का हल जल्द से जल्द निकाला जाना चाहिए ताकि बिना रुकावट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। कोयले के भंडार की स्थिति : देश भर के कई थर्मल पावर प्लांटों के पास सिर्फ तीन से चार दिन का कोयला भंडार बचा है। पंजाब के निजी थर्मल पावर प्लांट भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहे हैं। यहां कोयले की कमी के कारण आधी क्षमता पर बिजली उत्पादन हो रहा है। जिन थर्मल प्लांटों को पंजाब सरकार कोयला देती है, वहां लगभग 10 दिनों का भंडार अभी भी उपलब्ध है।  केंद्र से स्पष्टीकरण की मांग : राजपुरा के नाभा पावर लिमिटेड थर्मल प्लांट और मानसा के तलवंडी साबो थर्मल प्लांट को केंद्र कोयला देता है। हालांकि केंद्र पूरी आपूर्ति सुनिश्चित करने में असमर्थ रहा है। सौंद ने कहा कि केंद्र को स्पष्ट करना चाहिए कि कोयले की इस कमी पर काबू पाने में कितना समय लगेगा। इससे पंजाब की आम जनता और उद्योगों को बिना रुकावट बिजली मिल सकेगी।  कोयले की कमी से बिजली संकट गहराया दूसरी ओर, उन्होंने कहा कि जिन थर्मल प्लांटों को पंजाब सरकार द्वारा कोयले की आपूर्ति की जाती है, वहां राज्य सरकार के प्रयासों से अभी भी … Read more

कांग्रेस ने बदले राज्यों के प्रभारी, सुखदेव भगत छत्तीसगढ़ तो सचिन पायलट पंजाब के प्रभारी बने

रायपुर  सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया गया है। विवादों के बाद भूपेश बघेल को पंजाब प्रभारी के पद से हटा दिया गया। उनकी जगह छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी दी गई। भूपेश बघेल को असम का महासचिव प्रभारी बनाया गया है। बता दें कि पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और उनके गुट ने बघेल के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर दोबारा ताजपोशी के बाद से चन्नी गुट नाराज था। चन्नी गुट के नेताओं के मुताबिक भूपेश बघेल ने प्रदेश प्रभारी होने के बावजूद कांग्रेस हाईकमान को पंजाब की असल ग्राउंड रियलिटी की जानकारी नहीं दी। चन्नी गुट बघेल और राजा वड़िंग को उनके पदों से हटाने पर अड़ा हुआ था। पूर्व सीएम चन्नी और उनके गुट के नेता तर्क दे रहे थे कि विधानसभा चुनाव में अगर कांग्रेस को अच्छा प्रदर्शन करना है तो वड़िग-बघेल को हटाकर इनकी जगह किसी अन्य मजबूत नेता को कमान सौंपी जाए। हाईकमान को आखिरकार चन्नी गुट के आगे झुकना पड़ा। कांग्रेस ने 6 राज्यों में बदले प्रभारी दूसरी ओर, सचिन पायलट को पंजाब और भूपेश बघेल को असम की कमान सौंपी गई, जबकि रणदीप सुरजेवाला को गुजरात के साथ कर्नाटक की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली है। ज्ञात हो इसी वर्ष गुजरात और पंजाब में चुनाव होने हैं। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी सिरीवेल्ला प्रसाद को प्रमोट करते हुए महाराष्ट्र का प्रभारी बनाया गया है। सिरीवेल्ला को पिछले कुछ वर्षों में किए गए बेहतर कार्यों के लिए अब जाकर इनाम मिला है। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को मिली थी हार छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी को साल 2023 के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद से पार्टी दोबारा प्रदेश में अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है. अब आने वाले चुनावों को लेकर कांग्रेस पार्टी अभी से ही फोकस कर रही है. अब सुखदेव भगत छत्तीसगढ़ में संगठन को सक्रिय करने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के संवाद बढ़ाने पर जोर देंगे, जिससे पार्टी को फायदा हो।  साल 2005 में पहली बार विधायक बने थे सुखदेव भगत सुखदेव भगत राजनीति में आने से पहले प्रशासनिक सेवा में थे. वह साल 2005 में कांग्रेस में शामिल हुए और उन्होंने लोहरदगा से चुनाव लड़ा. तब उन्होंने जीत दर्ज की और झारखंड विधानसभा पहुंचे. इसके बाद साल 2009 और 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा. लगातार दो बार हार से उनके राजनीतिक करियर पर भी ग्रहण लगने लगा था. फिर आया साल 2015 . अभी लोहरदगा सीट से सांसद हैं सुखदेव भगत इस साल लोहरदगा सीट पर उपचुनाव हुआ और उन्होंने मौका लपक लिया. वह चुनाव जीत गए और विधानसभा पहुंचे. इसी बीच 2013 से 2017 तक वह झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे. फिर 2019 में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. लेकिन तब एक बार उन्हें फिर से विधानसभा में हार मिली थी. इसके बाद 2022 में उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में वापसी. कांग्रेस ने उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें 2024 लोकसभा का चुनाव लोहरदगा से लड़वाया और वह जीते भी. कांग्रेस ने उन्हें कई राज्यों का ऑब्जर्वर भी बनाया था।