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पंजाब में बिजली संकट का खतरा बढ़ा, कोयले की कमी से 1,500 MW उत्पादन प्रभावित; कटौती की आशंका

चंडीगढ़  बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर कोयले की भारी कमी के कारण पंजाब भर में बिजली संकट और गंभीर हो गया है, जिससे राज्य में बिजली उत्पादन 1,500 मेगावाट तक घट गया है और बड़े थर्मल प्लांट कम क्षमता पर चलाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोयले की कमी के कारण देश भर में 63 GW बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है, जबकि केंद्र द्वारा कोयले की कम की गई आपूर्ति ने राजपुरा और तलवंडी साबो थर्मल प्लांटों को प्रभावित किया है, जिससे पंजाब के बिजली प्रबंधन पर और बुरा असर पड़ा है।     केंद्र सरकार कोयले की कमी को दूर करने और लोगों तथा उद्योगों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित बनाने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाए। कोयले की कमी से 1,500 मेगावाट बिजली उत्पादन घटा एक वीडियो संदेश में बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने कहा, “देश में कोयले की भारी कमी के कारण पंजाब में बिजली उत्पादन में लगभग 1,500 मेगावाट की गिरावट आई है। पिछले दो-तीन दिनों से राज्य में बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिस कारण मजबूरीवश घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती की जा रही है।”     मौजूदा बिजली संकट के पीछे सबसे बड़ा कारण देश भर में कोयले की भारी कमी है। उन्होंने आगे कहा, “यह समस्या सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि कोयले की कमी के कारण देश भर में लगभग 63 GW बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।“ देश भर में लगभग 63 गीगावाट (GW) क्षमता के थर्मल पावर प्लांट कोयले की किल्लत से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और अधिकांश निजी बिजली संयंत्रों के पास केवल 3 से 4 दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है, जिसके कारण वे अपनी आधी क्षमता (हाफ कैपेसिटी) पर चलने को मजबूर हैं। बिजली मंत्री ने पंजाब के प्रमुख प्राइवेट थर्मल पावर प्लांटों का ब्योरा देते हुए कहा कि नाभा पावर लिमिटेड (राजपुरा) और तलवंडी साबो पावर प्लांट (मानसा) पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा सप्लाई किए जाने वाले कोयले पर निर्भर हैं। केंद्र से पर्याप्त कोयला न मिलने के कारण ये दोनों बड़े प्लांट वर्तमान में आधी क्षमता पर ही बिजली उत्पादन कर पा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने राहत की बात बताते हुए स्पष्ट किया कि जिन थर्मल प्लांटों को पंजाब सरकार खुद कोयला मुहैया करा रही है, उनके पास अभी भी लगभग 10 दिन का स्टॉक है। मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने बताया कि देश भर के कई थर्मल पावर प्लांटों के पास सिर्फ तीन से चार दिनों का ही कोयला स्टॉक बचा है और नतीजतन वे अपनी आधी क्षमता पर चलने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा, “पंजाब के प्राइवेट थर्मल पावर प्लांट भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहे हैं, जहां कोयले की कमी के कारण आधी क्षमता पर बिजली उत्पादन हो रहा है।” सौंद ने कहा कि देश भर में कोयले की कमी से बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। केंद्र द्वारा कोयले की कम आपूर्ति ने राजपुरा और तलवंडी साबो थर्मल प्लांटों को प्रभावित किया है। कई बड़े थर्मल प्लांट कम क्षमता पर चलाने को मजबूर हो रहे हैं। बिजली मंत्री ने केंद्र सरकार से इस पर तुरंत चुप्पी तोड़ने की मांग की है। उन्होंने कोयले की कमी दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा। इसका उद्देश्य लोगों और उद्योगों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। दो-तीन दिन से राज्य में घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती हो रही है। यह बिजली की कमी के कारण मजबूरी में की जा रही है। बिजली संकट पर केंद्र सरकार को घेरा पंजाब में गहराते बिजली संकट को लेकर बिजली मंत्री तरनप्रीत सिंह सौंद ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए अपनी चुप्पी तोड़ने की अपील की है। मंत्री ने कहा कि केंद्र को देश और पंजाब के लोगों को स्पष्टीकरण देना चाहिए कि कोयले की यह नेशनल शॉर्टेज कब तक दूर होगी, ताकि राज्यों में आम जनता और उद्योगों को निर्बाध बिजली की आपूर्ति फिर से सुनिश्चित की जा सके। 1500 मेगावाट घटना बिजली उत्पादन बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर कोयले की कमी के कारण पंजाब भर में बिजली संकट और गंभीर हो गया है, जिससे राज्य में बिजली उत्पादन 1,500 मेगावाट तक घट गया है। मंत्री ने कहा कि यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है जो पूरे देश को प्रभावित कर रहा है। केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए और देश के लोगों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि कोयले की इस कमी पर काबू पाने में कितना समय लगेगा, ताकि पंजाब की आम जनता और उद्योगों को बिना रुकावट बिजली आपूर्ति दी जा सके। बिजली मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और कोयले की कमी को दूर करने के लिए तुरंत ठोस और उचित कदम उठाने चाहिए। कोयले की समस्या का हल जल्द से जल्द निकाला जाना चाहिए ताकि बिना रुकावट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। कोयले के भंडार की स्थिति : देश भर के कई थर्मल पावर प्लांटों के पास सिर्फ तीन से चार दिन का कोयला भंडार बचा है। पंजाब के निजी थर्मल पावर प्लांट भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहे हैं। यहां कोयले की कमी के कारण आधी क्षमता पर बिजली उत्पादन हो रहा है। जिन थर्मल प्लांटों को पंजाब सरकार कोयला देती है, वहां लगभग 10 दिनों का भंडार अभी भी उपलब्ध है।  केंद्र से स्पष्टीकरण की मांग : राजपुरा के नाभा पावर लिमिटेड थर्मल प्लांट और मानसा के तलवंडी साबो थर्मल प्लांट को केंद्र कोयला देता है। हालांकि केंद्र पूरी आपूर्ति सुनिश्चित करने में असमर्थ रहा है। सौंद ने कहा कि केंद्र को स्पष्ट करना चाहिए कि कोयले की इस कमी पर काबू पाने में कितना समय लगेगा। इससे पंजाब की आम जनता और उद्योगों को बिना रुकावट बिजली मिल सकेगी।  कोयले की कमी से बिजली संकट गहराया दूसरी ओर, उन्होंने कहा कि जिन थर्मल प्लांटों को पंजाब सरकार द्वारा कोयले की आपूर्ति की जाती है, वहां राज्य सरकार के प्रयासों से अभी भी … Read more

कांग्रेस ने बदले राज्यों के प्रभारी, सुखदेव भगत छत्तीसगढ़ तो सचिन पायलट पंजाब के प्रभारी बने

रायपुर  सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया गया है। विवादों के बाद भूपेश बघेल को पंजाब प्रभारी के पद से हटा दिया गया। उनकी जगह छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी दी गई। भूपेश बघेल को असम का महासचिव प्रभारी बनाया गया है। बता दें कि पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और उनके गुट ने बघेल के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की पंजाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर दोबारा ताजपोशी के बाद से चन्नी गुट नाराज था। चन्नी गुट के नेताओं के मुताबिक भूपेश बघेल ने प्रदेश प्रभारी होने के बावजूद कांग्रेस हाईकमान को पंजाब की असल ग्राउंड रियलिटी की जानकारी नहीं दी। चन्नी गुट बघेल और राजा वड़िंग को उनके पदों से हटाने पर अड़ा हुआ था। पूर्व सीएम चन्नी और उनके गुट के नेता तर्क दे रहे थे कि विधानसभा चुनाव में अगर कांग्रेस को अच्छा प्रदर्शन करना है तो वड़िग-बघेल को हटाकर इनकी जगह किसी अन्य मजबूत नेता को कमान सौंपी जाए। हाईकमान को आखिरकार चन्नी गुट के आगे झुकना पड़ा। कांग्रेस ने 6 राज्यों में बदले प्रभारी दूसरी ओर, सचिन पायलट को पंजाब और भूपेश बघेल को असम की कमान सौंपी गई, जबकि रणदीप सुरजेवाला को गुजरात के साथ कर्नाटक की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली है। ज्ञात हो इसी वर्ष गुजरात और पंजाब में चुनाव होने हैं। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी सिरीवेल्ला प्रसाद को प्रमोट करते हुए महाराष्ट्र का प्रभारी बनाया गया है। सिरीवेल्ला को पिछले कुछ वर्षों में किए गए बेहतर कार्यों के लिए अब जाकर इनाम मिला है। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को मिली थी हार छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी को साल 2023 के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद से पार्टी दोबारा प्रदेश में अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है. अब आने वाले चुनावों को लेकर कांग्रेस पार्टी अभी से ही फोकस कर रही है. अब सुखदेव भगत छत्तीसगढ़ में संगठन को सक्रिय करने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के संवाद बढ़ाने पर जोर देंगे, जिससे पार्टी को फायदा हो।  साल 2005 में पहली बार विधायक बने थे सुखदेव भगत सुखदेव भगत राजनीति में आने से पहले प्रशासनिक सेवा में थे. वह साल 2005 में कांग्रेस में शामिल हुए और उन्होंने लोहरदगा से चुनाव लड़ा. तब उन्होंने जीत दर्ज की और झारखंड विधानसभा पहुंचे. इसके बाद साल 2009 और 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा. लगातार दो बार हार से उनके राजनीतिक करियर पर भी ग्रहण लगने लगा था. फिर आया साल 2015 . अभी लोहरदगा सीट से सांसद हैं सुखदेव भगत इस साल लोहरदगा सीट पर उपचुनाव हुआ और उन्होंने मौका लपक लिया. वह चुनाव जीत गए और विधानसभा पहुंचे. इसी बीच 2013 से 2017 तक वह झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे. फिर 2019 में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. लेकिन तब एक बार उन्हें फिर से विधानसभा में हार मिली थी. इसके बाद 2022 में उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में वापसी. कांग्रेस ने उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें 2024 लोकसभा का चुनाव लोहरदगा से लड़वाया और वह जीते भी. कांग्रेस ने उन्हें कई राज्यों का ऑब्जर्वर भी बनाया था। 

कवर्धा में दही हांडी उत्सव में पहुंचे डिप्टी सीएम विजय शर्मा, उत्सव में लिया हिस्सा

रायपुर : उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा कवर्धा में आयोजित दही हांडी उत्सव में हुए शामिल शर्मा ने हाथी-घोड़ा-पालकी, जय कन्हैयालाल की का जयघोष कर उत्सव का उल्लास और भी बढ़ा दिया रायपुर उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा शनिवार को कवर्धा शहर के गांधी मैदान तथा भारत माता चौक में आयोजित दही हांडी उत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा रानी की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने परंपरा अनुसार सभी ग्वाला भाइयों का तिलक लगाकर स्वागत किया और उन्हें दही हांडी उत्सव में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। यादव समाज के प्रतिनिधियों ने उन्हें पारंपरिक सम्मान स्वरूप खुमरी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सभापति रामकुमार भट्ट, नितेश अग्रवाल सहित समस्त पार्षदगण, जनप्रतिनिधि, शहरवासी और यादव समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने समस्त शहरवासियों एवं प्रदेशवासियों को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दी। उन्होंने मंच से ही सभी उपस्थित जनों के साथ “हाथी-घोड़ा-पालकी, जय कन्हैयालाल की” का जयघोष कर उत्सव का उल्लास और भी बढ़ा दिया।        उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि गोविंदा उत्सव कवर्धा की गौरवशाली परंपरा है, जो समाज में एकता, भाईचारे और सहयोग की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने आगे कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हम सभी को धर्म, कर्म और कर्तव्य के प्रति प्रेरित करता है। कृष्ण लीला हमें यह संदेश देती है कि अन्याय और अधर्म पर सदैव धर्म की विजय होती है। शर्मा ने सभी युवाओं से आह्वान किया कि वे भगवान कृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें और समाज की सेवा में सक्रिय भूमिका निभाएं। दही हांडी उत्सव के दौरान हजारों की संख्या में शहरवासी, समाजजन और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। पूरा शहर कृष्ण भक्ति और जयघोष से गुंजायमान रहा।

सत्य निकेतन में बड़ा हादसा, अचानक ढही बिल्डिंग; 2 छात्रों को सुरक्षित निकाला, NDRF का रेस्क्यू जारी

नई दिल्ली दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में रव‍िवार को बड़ा हादसा हो गया. तीन मंज‍िला बिल्डिंग गिरने से बड़ी संख्या छात्र मलबे में दब गए. दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गई हैं. पुल‍िस और प्रशासन के अधि‍कारी भी मौके पर पहुंच रहे हैं. बताया जा रहा है कि हादसा करीब 1 बजकर 30 मिनट पर हुआ है. रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन जारी है।  सत्य निकेतन में बिल्डिंग का मलबा हटाने का काम जारी, मौके पर दमकल की 12 गाड़ियां मौजूद सत्य निकेतन इलाके में एक हॉस्टल की इमारत के गिरने के बाद अब मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से चलाया जा रहा है. मौके पर जेसीबी के साथ-साथ दमकल की भी 12 गाड़िया मौके पर मौजूद हैं. अंदर फंसे लोगों को जल्द से जल्द निकालने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है।  सीएम रेखा गुप्‍ता ने घटना पर जताया दुख सीएम रेखा गुप्‍ता ने घटना पर दुख जताया है. उन्‍होंने एक्‍स पर जानकारी दी क‍ि, ''RK पुरम के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना से बहुत चिंता है. DDMA, NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की टीमें युद्ध स्तर पर बचाव कार्य कर रही हैं. एहतियात के तौर पर बगल की इमारत को खाली करा लिया गया है। फँसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों को तुरंत मदद पहुँचाने की हर संभव कोशिश की जा रही है. हालात पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है और सभी संबंधित एजेंसियाँ आपसी तालमेल के साथ काम कर रही हैं। हर नागरिक की सुरक्षा और भलाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।  सीएम बोलीं- हर संभव कोशिश जारी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सत्य निकेतन में हुए हादसे पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि DDMA, NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की टीमें राहत-बचाव अभियान चला रही हैं।  उन्होंने बताया कि एहतियात के तौर पर हादसे से सटी इमारत को खाली करा लिया गया है. रेखा गुप्ता ने कहा कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित परिवारों को तत्काल मदद देने की हर संभव कोशिश की जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी एजेंसियां आपसी तालमेल से काम कर रही हैं. नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।  फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. मलबा पूरी तरह हटने के बाद ही पता चलेगा कि हादसे में कितने लोग फंसे थे और कितने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।    दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस हादसे पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि जल्द से जल्द लोगों को निकालने का प्रयास किया जा रहा है. राहत और बचाव कार्य जारी है।  दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा ने भी इस हादसे पर दुख जताया है. उनका कहना है कि NDRF, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, DDMA, MCD, CATS और सिविल डिफेंस की बचाव टीमें मौके पर मौजूद हैं और जो लोग फंसे हैं उन्हें निकालने की हर संभव कोशिश की जा रही है।  ये हादसा मोती बाग के सत्य निकेतन स्थित शिव मंदिर के पास की है, जहां एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई. घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंच गईं।  दोपहर 1 बजकर 33 मिनट पर मिली हादसे की जानकारी फायर डिपार्टमेंट को 1 बजकर 33 मिनिट पर इस हादसे की जानकारी मिली. फायर डिपार्टमेंट की 12 गाड़ियां मौके पर मौजूद हैं. राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाया जा रहा है और टीमें लगातार मलबा हटाने में जुटी हैं. 3 से 4 लोगों को मलबे से निकाला भी जा चुका है और घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है।  जानकारी के मुताबिक, इस बिल्डिंग में एक पीजी चल रहा था जिसकी वजह से मलबे में कई छात्रों के दबे होने की आशंका है. रेस्क्यू टीमों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी मलबा हटाने और लोगों को निकालने में जुटे हैं।  विधायक ने लिया हालात का जायजा आरके पुरम के विधायक अनिल शर्मा ने दुर्घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'ये बहुत दुखद घटना है. इससे ज्यादा दिल दहला देने वाली कोई बात नहीं हो सकती. स्टूडेंट्स अलग-अलग जगहों से इस बिल्डिंग में PGs में पढ़ने और रहने आते हैं, बिल्डिंग गिर गई है. हालांकि ये बताना मुश्किल है कि कितने स्टूडेंट्स हैं. चाहे वो पांच हों, दस हों, या बीस. लेकिन हमें पक्का पता है कि स्टूडेंट्स अंदर फंसे हुए हैं।   चश्‍मदीद ने कहा- बच्चे चिल्ला रहे हैं, हमें बचाओ, हमें बचाओ चश्मदीद युवक ने कहा, "मेरी दुकान पास ही है. हम अंदर बैठे थे तभी अचानक हमें भूकंप जैसी गड़गड़ाहट की आवाज़ सुनाई दी. हम तुरंत बाहर भागे, वहां बहुत धुआं और धूल थी. पूरी इमारत गिर चुकी थी. कुछ शव निकाले गए और चार ऐसे बच्चों को भी बचाया गया जिनकी सांसें चल रही थीं. मलबे के अंदर से अभी भी आवाज़ें आ रही हैं. बच्चे चिल्ला रहे हैं, 'हमें बचाओ, हमें बचाओ!'… वहां कम से कम 25-30 बच्चे थे. पास ही लड़कों और लड़कियों का PG था. 4-5 लोगों को बचाया गया है; 2-3 शव निकाले गए हैं और और भी शव मिलने की आशंका है. वे बेसमेंट बना रहे थे।  'बिल्डिंग गिरते ही हम भागकर निकले' हादसे के वक्त मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि इमारत अचानक गिर गई. लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले चारों तरफ धूल का गुबार फैल गया. आसपास मौजूद लोग तुरंत वहां से भागे. चश्मदीद के मुताबिक, मलबे में 20 से 30 लोग दबे हो सकते हैं. एक अन्य चश्मदीद ने भी बताया कि मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि हादसे के वक्त इमारत के अंदर कितने लोग मौजूद थे।  मलबे के नीचे से फोन कर रहे लोग मौके पर पहुंचे आरके पुरम के विधायक अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि कुछ लोग मलबे के नीचे से फोन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कई लोग अभी अंदर फंसे हो सकते हैं. बचाव अभियान लगातार जारी है।  स्थानीय … Read more

इंग्लैंड दौरे पर पाकिस्तान टीम की बढ़ी मुश्किलें, PCB ने जब्त किए खिलाड़ियों के मोबाइल

 बर्मिंघम पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का इंग्लैंड दौरा एक और विवाद में घिर गया है. एजबेस्टन में होने वाले सीरीज के तीसरे और आखिरी टेस्ट से पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने टीम के कुछ खिलाड़ियों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए. ये फोन आखिरी टेस्ट खत्म होने तक बोर्ड के पास ही रहेंगे. हालांकि किन खिलाड़ियों के फोन लिए गए हैं और बोर्ड ने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।  पाकिस्तानी समाचार चैनल 365 News की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टीम के सदस्यों के मोबाइल फोन पीसीबी को सौंप दिए गए हैं. पीसीबी ने भी अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि फोन लेना किसी टीम प्रोटोकॉल, अनुशासनात्मक प्रक्रिया या किसी अन्य वजह से जुड़ा है. कहीं ये तो नहीं कि पीसीबी को अब मैच फिक्सिंग का डर सता रहा है।  इस घटनाक्रम ने सबसे बड़ा सवाल खिलाड़ियों की निजता को लेकर खड़ा किया है. खास तौर पर यह जानना अहम है कि किसी खिलाड़ी का फोन कितने समय तक अपने पास रखा जा सकता है और किन परिस्थितियों में उसमें मौजूद निजी जानकारी तक पहुंच बनाई जा सकती है।  ICC का नियम काफी सख्त इंटरनेशनल क्रिकेट में खिलाड़ियों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) के नियम काफी सख्त हैं. मैच के दौरान ड्रेसिंग रूम समेत प्रतिबंधित क्षेत्रों में खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ मोबाइल फोन या किसी अन्य कम्युनिकेशन डिवाइस का इस्तेमाल नहीं कर सकते. ऐसे इलाकों में जाने से पहले खिलाड़ियों को अपने फोन सुरक्षित स्थान पर जमा करने होते हैं. इस नियम का मकसद मैच की अखंडता बनाए रखना और खिलाड़ियों या सपोर्ट स्टाफ के अनधिकृत संचार को रोकना है. लेकिन मैच के दौरान फोन रखने पर रोक का मतलब यह नहीं है कि बोर्ड किसी खिलाड़ी का निजी मोबाइल कई दिनों तक अपने पास रखे. दोनों परिस्थितियां अलग-अलग हैं।  हालंकि आईसीसी के एंट्री करप्शन कोड में इंटीग्रिटी जांच के दौरान अधिकृत अधिकारियों को फोन से जुड़ी व्यापक जानकारी मांगने का अधिकार है. अगर अधिकारियों के पास उचित आधार हो कि किसी डिवाइस में जांच के लिए जरूरी सामग्री मौजूद है, तो खिलाड़ी से मोबाइल सौंपने या उसमें मौजूद जानकारी उपलब्ध कराने को कहा जा सकता है।  ऐसी जांच में फोन के कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट रिकॉर्ड, मैसेज, चैट, फोटो, वीडियो, ऑडियो और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज तक शामिल हो सकते हैं. कुछ परिस्थितियों में खिलाड़ी से फोन का पासवर्ड या एक्सेस कोड भी मांगा जा सकता है. वैध मांग का पालन नहीं करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी है. अभी तक ना तो पीसीबी ने ऐसी किसी जांच की पुष्टि की है और ना ही किसी खिलाड़ी पर सट्टेबाजी, मैच फिक्सिंग या भ्रष्टाचार से जुड़ा आरोप लगाया गया है।  आईसीसी के एंटी करप्शन कोड और पीसीबी के अपने अधिकार क्षेत्र में भी अंतर है. पीसीबी के पास खिलाड़ियों के कॉन्ट्रैक्ट, टीम नियमों या आंतरिक अनुशासन व्यवस्था के तहत अलग प्रावधान हो सकते हैं. लेकिन बोर्ड ने फिलहाल यह नहीं बताया है कि आखिर किस नियम के तहत खिलाड़ियों के फोन कब्जे में लिए गए हैं। 

वाराणसी में बाढ़ प्रभावितों के राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

2017 के पहले बाढ़पीड़ितों को देते थे सूखी ब्रेड, अब मिलती है 26 सामानों वाली 50 किलो की किट : सीएम योगी वाराणसी में बाढ़ प्रभावितों के राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  मुख्यमंत्री ने कहा – पहले यही सामग्री, यही पैसा सपाई खाकर डकार जाते थे जिन किसानों की फसल डूबी है, उनका सर्वे कर मुआवजा देने का आदेश 10 वर्ष पहले 45 जिले बाढ़ से प्रभावित होते थे, दर्जनों जनपदों में मस्तिष्क ज्वर से बच्चे कालकवलित होते थे सीएम बोले, जब अच्छी सरकार आती है, अच्छी स्कीम लाती है, लूट-खसोट पर रोक लगाती है, गरीब को उसका हक उपलब्ध करवाती है मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर वितरित की राहत सामग्री लखनऊ/वाराणसी,  वाराणसी के विद्या विहार इण्टर कॉलेज में शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बाढ़ प्रभावितों के राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आज से 10 वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के 45 जिले बाढ़ से प्रभावित होते थे और दर्जनों जनपदों में मस्तिष्क ज्वर से बच्चे कालकवलित होते थे। मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, इतनी राहत सामग्री पहले नहीं मिलती थी। तब एक सूखी ब्रेड मिलती थी और हम देते हैं 50 किलो की किट, जिसमें 26 प्रकार के सामान होते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की डूबी फसलों का सर्वे किया जा रहा है। उन्हें भी मुआवजा देने के आदेश कर दिए गए हैं। सीएम योगी ने कहा कि उस समय न बच्चों के लिए दूध था, न गर्म भोजन, न राशन और न डिग्निटी किट। यही सामग्री या यही पैसा 2017 के पहले ये सपाई सब खा जाते थे। गरीब का हक खाकर डकार जाते थे। जब अच्छी सरकार आती है, अच्छी स्कीम लेकर आती है, लूट-खसोट पर रोक लगाती है और गरीब को उसका हक उपलब्ध करवाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गत वर्ष भी मुझे इस विद्यालय परिसर में आकर राहत कार्यों की समीक्षा करने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन ने क्या व्यवस्थाएं की हैं, इनका निरीक्षण करने का अवसर मिला था। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों से बातचीत की और राहत सामग्री का भी वितरण किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष वरुणा नदी में जब गंगा जी का जलस्तर बढ़ता है तो वरुणा नदी बैक फ्लो करती है और उसके कारण निचले क्षेत्र में जलजमाव की समस्या खड़ी हो जाती है। आज से 10 साल पहले इसी सीजन में भीषण जलजमाव से लोगों का आवागमन बाधित होता था, उन्हें परेशानी होती थी। उन्होंने कहा कि आज मेरे साथ बाढ़ नियंत्रण के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह साथ में हैं। पिछले नौ-साढ़े नौ वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में प्रत्येक क्षेत्र में जो कार्य हुए हैं, उसके परिणाम वाराणसी में भी देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए नए कलेवर के रूप में एक नई काशी का हम सब दर्शन कर रहे हैं। काशी विश्वनाथ धाम हो, काशी के घाट हों, काशी के अंदर रेलवे स्टेशन हो, बस स्टेशन हो, एयरपोर्ट हो, सड़कों के चौड़ीकरण का कार्य हो, रिंग रोड का कार्य हो, जनता को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने का कार्य हो या बाढ़ पर प्रभावी नियंत्रण करने के लिए किए गए उपाय हों, ये सभी आज काशी में देखने को मिल रहे हैं। जिस प्रदेश में आज से 10 वर्ष पहले दर्जनों जनपदों में मस्तिष्क ज्वर से बच्चे कालकवलित होते थे, आज इस बात को देखकर संतुष्टि होती है कि कुल मिलाकर 14 ऐसे जिले हैं, जहां आज पानी थोड़ा-बहुत आया है। उन क्षेत्रों का हम दौरा कर राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं। किट में 26 प्रकार के सामान हर प्रभावित परिवार को उपलब्ध करवाए जा रहे सीएम ने कहा कि व्यापक स्तर पर पूरा जिला प्रशासन जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता भी युद्ध स्तर पर राहत कार्य के साथ जुड़े हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो पैसा भेजा है, आपदा राहत निधि से उसी पैसे से सारी व्यवस्थाएं की जा रहीं हैं। इस किट में ढाई किलो लाई, कच्चा चना दो किलो, भुना चना दो किलो, चीनी एक किलो, 10 पैकेट बिस्किट, माचिस एक पैकेट, मोमबत्ती एक पैकेट, नहाने के दो साबुन, ढक्कनदार बाल्टी, तिरपाल, 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, दो किलो अरहर दाल, 10 किलो आलू। हल्दी, मिर्च, मसाले, एक लीटर रिफाइंड या सरसों का तेल, एक किलो नमक, सैनिटरी पैड, कपड़ा धोने के दो साबुन, एक तौलिया, एक सूती कपड़ा, 20 डिस्पोजेबल बैग, एक मग और 100 मिलीलीटर डिटॉल या सेवलॉन। यह 26 प्रकार के आइटम हर प्रभावित परिवार को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। मौत पर 24 घंटे के अंदर प्रभावित परिवार को राहत की व्यवस्था सीएम योगी ने कहा कि पानी का फैलाव होता है तो सांप, बिच्छू और अन्य कीड़ों के द्वारा काटने की शिकायतें आती हैं। मनुष्य और वन्यजीव संघर्ष के कारण भी बहुत सारी जगह जनहानि की शिकायतें आती हैं। मकान ढहने या बिजली गिरने से भी समस्याएं आती हैं। इन सबको भी आपदा राहत के रूप में शामिल किया गया है। किसी की डूबने से मौत हो गई, आकाशीय बिजली से असामयिक मौत हो गई, किसी किसान की खेत में काम करते समय, बटाईदार के खेत में काम करते समय या उनके परिवार के सदस्य की खेत में काम करते समय मौत हो गई, तो आपदा राहत निधि से अगले 24 घंटे के अंदर उस परिवार को चार लाख रुपये की सहायता हर हाल में मिल जाए, यह व्यवस्था कर दी गई है। किसी गरीब का मकान जल गया, किसी गरीब का मकान बाढ़ में बह गया या बाढ़ में टूट गया, तो उसको तत्काल प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना में एक आवास उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि जब अच्छी सरकार आती है कोई भेदभाव किसी के साथ नहीं करती, सबको उसका अधिकार मिले और यही अधिकार देने के लिए और समीक्षा करने के लिए प्रधानमंत्री के निर्देश पर आज वे यहां पर आए हैं। 21 राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों के रहने की व्यवस्था  मुख्यमंत्री ने बताया कि वाराणसी के 16 वार्डों में 567 परिवार प्रभावित हैं, जिनमें 2,486 नागरिक रह … Read more

योगी सरकार का खेल प्रतिभाओं को बड़ा तोहफा, लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज में बनेगा अत्याधुनिक सेंटर

खिलाड़ियों की चोट का इलाज अब लखनऊ में, तैयार हो रहा अत्याधुनिक स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर योगी सरकार का खेल प्रतिभाओं को बड़ा तोहफा, लखनऊ स्पोर्ट्स कॉलेज में बन रहा सेंटर अब दूसरे राज्यों का नहीं करना पड़ेगा रुख, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस होगा सेंटर सेंटर में होंगी क्रायोथेरेपी से लेकर शॉकवेव थेरेपी तक सात अत्याधुनिक मशीनों की सुविधा सिविल कार्य प्रगति पर, उपकरणों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी करीब 7.17 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले सेंटर को एक साल की समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में योगी सरकार एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रही है। राजधानी लखनऊ स्थित गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर की स्थापना की जा रही है। यह प्रदेश का पहला ऐसा सेंटर होगा, जहां खिलाड़ियों की फिटनेस, खेल संबंधी चोटों के उपचार, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और खेल प्रदर्शन में सुधार के लिए वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। सेंटर के निर्माण के बाद प्रदेश के खिलाड़ियों को खेल संबंधी चोटों के इलाज और आधुनिक पुनर्वास के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की अत्याधुनिक चिकित्सा एवं खेल विज्ञान सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इससे खिलाड़ियों को समय पर उपचार मिलने के साथ उनकी रिकवरी और खेल में वापसी की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी हो सकेगी। फिटनेस से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक एकीकृत व्यवस्था स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर का उद्देश्य केवल घायल खिलाड़ियों का उपचार करना नहीं, बल्कि उनकी शारीरिक क्षमता का नियमित वैज्ञानिक मूल्यांकन और प्रदर्शन में निरंतर सुधार करना भी है। सेंटर में खिलाड़ियों को फिजियोथेरेपी, स्पोर्ट्स साइंस आधारित प्रशिक्षण, पोषण संबंधी परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मार्गदर्शन की सुविधा मिलेगी। इसके माध्यम से खिलाड़ियों की फिटनेस का वैज्ञानिक आकलन कर उनकी जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण और रिकवरी की रणनीति तैयार की जा सकेगी। चोट के बाद पुनर्वास से लेकर मैदान पर वापसी तक खिलाड़ियों को विशेषज्ञों की निगरानी में सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। करीब 7.17 करोड़ रुपये की लागत से हो रहा तैयार स्पोर्ट्स सांइस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर की स्थापना के लिए शासन द्वारा 716.77 लाख रुपये (7.17 करोड़ रुपये) की स्वीकृति प्रदान की गयी है। परियोजना के माध्यम से खिलाड़ियों के लिए आधुनिक चिकित्सा, पुनर्वास और खेल विज्ञान से जुड़ा मजबूत सपोर्ट सिस्टम तैयार किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में अभी तक ऐसा सेंटर नहीं था। इसमें बाहर के लोगों को भी इलाज की सुविधा दिए जाने का प्रस्ताव है। फीस देकर आमजन भी अपनी चोटों का इलाज और पुनर्वास करा सकेंगे। सात अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होगा सेंटर खिलाड़ियों के उपचार और रिकवरी के लिए सेंटर में सात प्रमुख अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है। इनमें हॉल बॉडी क्रायोथेरेपी चैबर, रेडियल शॉकवेव थेरेपी डिवाइस, टीईसीएआर चिकित्सा उपकरण, वायवीय संपीडन चिकित्सा इकाई, कॉम्बो पेन मैनेजमेट इलेक्ट्रोथेरेपी यूनिट, क्लास-4 चिकित्सीय लेजर प्रणासी, फोकस्ड शॉकवेव थेरेपी यूनिट शामिल हैं।  हॉल बॉडी क्रायोथेरेपी चैबर सुविधा में तरल नाइट्रोजन के स्थान पर बिजली से संचालित क्रायोथेरेपी कक्ष की सुविधा होगी। इसमें -120°C से -140°C तक तापमान सीमा उपलब्ध होगी। जबकि रेडियल शॉकवेव थेरेपी डिवाइस दो एकीकृत कंप्रेसर के माध्यम से उच्च आवृत्ति, 20 Hz तक के इम्पल्स देने में सक्षम होगा। इसका डिजाइन आधुनिक और उपयोग में आसान बताया गया है। वहीं टीईसीएआर चिकित्सा उपकरण उच्च आवृत्ति इलेक्ट्रोथेरेपी के जरिए गहरे ऊतकों के उपचार की सुविधा मिलेगी। इसके माध्यम से विभिन्न प्रकार की उपचार प्रणालियां उपलब्ध होंगी, जिनमें धाव, टैडन, लिगामेंट, जोड़ तथा मांसपेशियों के उपचार जैसी सुविधाएं शामिल हैं। वायवीय संपीड़न चिकित्सा इकाई (प्न्यूमैटिक कंप्रेशन थेरेपी यूनिट) के माध्यम से दोनों पैरों, भुजाओं, कमर एवं शरीर के विभिन्न हिस्सों का एक साथ उपचार किया जा सकेगा। खिलाड़ियों के रिकवरी और पुनर्वास में यह उपयोगी होगा। कॉम्बो पेन मैनेजमेंट इलेक्ट्रोथेरेपी यूनिट में समकालिक, वैकल्पिक, पृथक एवं क्रमिक चैनल मोड में इलेक्ट्रोस्टिमुलेशन की सुविधा होगी। इसके जरिए गैल्वैनिक, फैराडिक, ट्रेबर्ट, अल्ट्रा राइज, हाई वोल्ट, माइक्रो करंट तथा टीईएनएस जैसी विभिन्न करंट थेरेपी उपलब्ध होगी। क्लास-4 चिकित्सीय लेजर प्रणाली में 2 इंच या उससे अधिक बैकलिट टच स्क्रीन डिस्प्ले और क्लास-4 जीएएआईएएस डायोड लेजर स्रोत होगा। इसकी न्यूनतम 10 वाट या उससे अधिक आउटपुट क्षमता होगी। फोकस्ड शॉकवेव थेरेपी यूनिट में मायोफेशियल ट्रिगर प्वाइंट, पीठ दर्द और गर्दन दर्द आदि के उपचार में उपयोगी होगा। इसके जरिए कैल्सिफिक टेंडिनोपैथी जैसी समस्याओं के उपचार में भी सहायता मिलेगी। निर्माण कार्य प्रगति पर, उपकरणों की खरीद जल्द स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर का सिविल निर्माण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। वहीं अत्याधुनिक चिकित्सा एवं खेल विज्ञान उपकरणों की खरीद के लिए कार्यदायी संस्था द्वारा टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। टेंडर प्रक्रिया के बाद उपकरणों की खरीद की कार्यवाही शुरू की जाएगी। परियोजना को कार्य प्रारंभ होने की तिथि से एक वर्ष की समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सेंटर के तैयार होने के बाद खिलाड़ियों को उपचार, रिकवरी और प्रदर्शन सुधार के लिए एकीकृत सुविधा उपलब्ध होगी। प्रशिक्षकों और खेल विशेषज्ञों की भी बढ़ेगी क्षमता इस सेंटर को खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रशिक्षकों, खेल अधिकारियों और खेल विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों के लिए भी क्षमता विकास के मंच के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास की सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे खेल से जुड़े मानव संसाधन को भी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और चोट प्रबंधन की बेहतर जानकारी मिल सकेगी। स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर महत्वपूर्ण पहल  प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण के साथ-साथ अत्याधुनिक चिकित्सा एवं खेल विज्ञान सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। स्पोर्ट्स साइंस एंड इंजरी मैनेजमेंट सेंटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह प्रदेश का पहला ऐसा सेंटर होगा, जहां खिलाड़ियों की फिटनेस, चोटों के उपचार, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और खेल प्रदर्शन से जुड़ी सुविधाएं एकीकृत रूप से उपलब्ध होंगी। -कुमार विनीत, विशेष सचिव, खेल विभाग

पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी बने सचिन पायलट, वड़िंग और चन्नी गुट को साधना होगा सबसे बड़ा टास्क

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की अटकलों के बीच अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस मामलों का प्रभारी नियुक्त किया है। उन्हें भूपेश बघेल की जगह यह जिम्मेदारी दी गई है। इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में चल रहे अंदरूनी विवाद को साधने की हाईकमान की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सचिन पायलट का पंजाब से कोई सीधा राजनीतिक आधार नहीं रहा है। उनकी राजनीति मुख्य रूप से राजस्थान तक केंद्रित रही है। वह टोंक से कांग्रेस विधायक हैं और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तथा उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। इससे पहले वह दौसा और अजमेर से लोकसभा सांसद भी रहे हैं। फिलहाल वह कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं और दिसंबर 2023 में उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रभारी महासचिव बनाया गया था। पंजाब के पूर्व CM चरणजीत सिंह चन्नी और उनका गुट बघेल और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से नाराज था। उनका आरोप था कि बघेल ने प्रदेश प्रभारी होने के बावजूद हाईकमान को जमीनी हकीकत नहीं बताई। उनका कहना था कि चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के लिए किसी मजबूत नेता को कमान सौंपी जाए। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। हाईकमान ने यह मांग मान ली। पायलट को दोनों गुटों को करना होगा एकजुट पंजाब में उनकी सबसे बड़ी परीक्षा पार्टी की गुटबाजी को नियंत्रित करना होगी। प्रदेश कांग्रेस में एक तरफ प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का खेमा है, जबकि दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों की अलग राजनीतिक सक्रियता दिखाई देती रही है। ऐसे में पायलट को दोनों पक्षों के बीच समन्वय कायम कर संगठन को एकजुट करना होगा। इसके अलावा प्रताप सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ बेहतर तालमेल बनाना भी उनके लिए अहम होगा। खास बात यह है कि रंधावा इस समय राजस्थान कांग्रेस के प्रभारी हैं। ऐसे में पायलट और रंधावा का संगठनात्मक तालमेल दोनों राज्यों में कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। पंजाब में बदलाव के पीछे भूपेश बघेल की कार्यशैली को लेकर पार्टी के भीतर उठ रहे सवाल भी अहम माने जा रहे हैं। पायलट को नया प्रभारी क्यों बनाया..3 पॉइंट     पंजाब कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी और मतभेदों से जूझ रही है। हाईकमान का मानना है कि पायलट संगठन को एकजुट कर सकते हैं।     राजस्थान में 2013 के चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद पायलट प्रदेशाध्यक्ष बनाए गए। उन्होंने पांच साल ग्राउंड पर काम किया और अलग-अलग गुटों से तालमेल बैठाते हुए 2018 के चुनाव में कांग्रेस को बहुमत दिला दिया। हाईकमान को उम्मीद है कि इसका फायदा पंजाब में मिलेगा।     पायलट का यूथ में बड़ा क्रेज है। पायलट ने जैसे 2018 में राजस्थान में कांग्रेस को जीत दिलाई थी, हाईकमान को उनसे पंजाब में वैसा ही करने उम्मीद है। पंजाब को लेकर लगातार मंथन उन पर राजा वड़िंग के पक्ष में अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय रहने के आरोप लगाए जाते रहे हैं, जिससे पार्टी के दूसरे धड़ों में असंतोष की धारणा बनी। पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल समेत वरिष्ठ नेताओं के बीच पंजाब को लेकर लगातार मंथन हुआ। इसके बाद बदलाव का फैसला सामने आया। अब पायलट के सामने 2027 के लिए कांग्रेस की नई चुनावी रणनीति तैयार करने, नेताओं को एक मंच पर लाने और जमीनी संगठन को मजबूत करने की चुनौती है। युवा चेहरे के तौर पर उनकी स्वीकार्यता और राजस्थान में संगठन चलाने का अनुभव पंजाब कांग्रेस के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब से हड़कंप, 12 की मौत और कई लोग अस्पताल में भर्ती

सागर मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा में शनिवार रात जहरीली शराब पीने से 12 लोगों की मौत हो गई। वहीं कई लोगों की हालत गंभीर होने पर उन्हें सागर स्थित बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) रेफर किया गया है। जानकारी के अनुसार रात में करीब दर्जनभर लोगों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बंडा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 12 लोगों की मौत हो गई। मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम बंडा अस्पताल में कराया जा रहा है। गंभीर हालत वाले पांच मरीजों को उपचार के लिए बीएमसी सागर भेजा गया है। घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्टर प्रतिभा पाल और पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया सहित प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी बंडा पहुंचे। अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति की जानकारी ली और मामले की जांच शुरू कराई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बंडा में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। जिलाधिकारी ने दी जांच की सलाह जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से अपील की कि पिछले 24 से 48 घंटे के दौरान किसी भी प्रकार की शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति को यदि किसी तरह के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो वह तुरंत चिकित्सक से जांच कराए। उन्होंने कहा, ”प्रशासन ऐसे सभी मामलों पर नजर रख रहा है और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। बंडा के पूर्व विधायक की अपील बंडा के पूर्व विधायक तरवर लोधी ने दावा किया कि 9 लोगों की मौत जहरीली शराब पीने के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि बंडा विकासखंड के बराज, घूघर, नौराज और आसपास के गांवों में रहने वाले कई लोगों ने शनिवार रात शराब का सेवन किया था, जिसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उन्होंने बताया कि परिजन उन्हें इलाज के लिए बंडा के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने कई लोगों को मृत घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि चार-पांच लोग बंडा सिविल अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि चार-पांच लोगों को सागर भेजा गया है। तरवर लोधी ने लोगों से अपील की कि जिन लोगों ने पिछले दो-तीन दिनों में बंडा क्षेत्र की किसी दुकान या अवैध रूप से शराब बेचने वालों से शराब खरीदकर पी है और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी थोड़ी भी परेशानी महसूस हो रही है, वे तुरंत अस्पताल पहुंचकर चिकित्सक से जांच कराएं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी प्रतिभा पाल और पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के नेतृत्व में प्रशासन और पुलिस का दल मौके पर मौजूद है। अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। इनकी हुई मौत पुलिस के अनुसार मृतकों में गोलू उर्फ चमन लोधी (45), निवासी गूगरा खुर्द, दिग्विजय लोधी (28), निवासी नौराज, करतार सिंह लोधी (30), निवासी नौराज, उजियार सिंह लोधी (56), निवासी गूगरा खुर्द, रोशन लोधी (30), निवासी पाटन थाना विनायका और राजेंद्र लोधी (32), निवासी नौराज-गूगरा शामिल हैं। गोलू उर्फ चमन को पहले से कैंसर की शिकायत होने की जानकारी भी सामने आई है। पांच मरीज बीएमसी रेफर हरनाम राय (42), निवासी चौका, उत्तम नत्थू नायक (42), निवासी दलपतपुर, मंगल रजक (40), निवासी गूगरा खुर्द, परम आदिवासी, निवासी हिनौता और धनसिंह आदिवासी (30), निवासी हिनौता को गंभीर हालत में बीएमसी सागर रेफर किया गया है। प्रशासन और पुलिस द्वारा घटना के कारणों की जांच की जा रही है। जहरीली शराब की आशंका को लेकर भी जांच की जा रही है।

नरेला में दिखा भाई-बहन के प्रेम का अनोखा संगम, 31 हजार से अधिक बहनों ने मंत्री सारंग को बांधी राखी

विविधता में एकता ही भारतीय संस्कृति की विशेषता- मंत्री सारंग नरेला रक्षाबंधन महोत्सव 2026: चौथे दिन 31 हज़ार 117 बहनों ने मंत्री सारंग को बांधे रक्षासूत्र विभिन्न धर्मों और समाजों की बहनों ने बांधी राखी; सामाजिक समरसता का दिया संदेश भोपाल  सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग को शनिवार को वार्ड क्रमांक 71 एवं 79 में आयोजित विश्व के सबसे बड़े नरेला रक्षाबंधन महोत्सव के चौथे दिन 31 हज़ार 117 बहनों ने राखी बांधकर अपना स्नेह और आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम में हिंदू, सिख और मुस्लिम सहित अन्य धर्मों और समाजों की बहनों ने राखी बाँधकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में GenZ बहनों ने भी महोत्सव में उत्साहपूर्वक भागीदारी की। मंत्री सारंग ने बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में स्नेह और रिश्तों की भावना किसी धर्म या समुदाय की सीमाओं में बंधी नहीं है। उन्होंने कहा कि बहनों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर रक्षाबंधन का पर्व मनाते हुए यह संदेश दिया कि स्नेह और विश्वास का यह बंधन समाज को जोड़ने वाली सबसे मजबूत कड़ी है। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता ही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता रही है। विविधता में एकता भारतीय संस्कृति की विशेषता मंत्री सारंग ने कहा कि विविधता में एकता ही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता रही है। नरेला रक्षाबंधन महोत्सव में विभिन्न धर्मों और समाजों की बहनों की एक साथ सहभागिता ने इसी महान भारतीय भावना को साकार किया। अलग-अलग आस्थाओं और सामाजिक पृष्ठभूमियों से आई बहनों ने एकजुट होकर रक्षासूत्र बांधा और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। विभिन्न धर्मों और समाजों की बहनों ने की सहभागिता नरेला रक्षाबंधन महोत्सव-2026 के चौथे दिन विभिन्न धर्मों और समाजों की बहनों ने सहभागिता कर मंत्री सारंग को रक्षासूत्र बांधकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। नरेला रक्षाबंधन महोत्सव केवल भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का उत्सव नहीं बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और आपसी विश्वास का महापर्व बन चुका है। विभिन्न धर्मों और समाजों की बहनों की सहभागिता ने इस आयोजन को और अधिक व्यापकता प्रदान कर रही है। बड़ी संख्या में GenZ बहनें हुई शामिल चौथ दिन वार्ड क्रमांक 71 एवं 79 में आयोजित नरेला रक्षाबंधन महोत्सव में बड़ी संख्या में GenZ बहनों की उत्साहपूर्वक भागीदारी ने महोत्सव की भव्यता को और बढ़ा दिया। GenZ बहनों ने पूरे उत्साह और आत्मीयता के साथ मंत्री सारंग को राखी बांधकर आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम में युवा पीढ़ी का भारतीय परंपराओं एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ाव की झलक दिखाई दी। तीसरे दिन 29 हज़ार 179 बहनों ने बांधे रक्षासूत्र मंत्री सारंग को नरेला रक्षाबंधन महोत्सव-2026 के तीसरे दिन 29 हज़ार 179 बहनों ने रक्षासूत्र बांधकर आशीर्वाद प्रदान किया। पिछले वर्ष 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने मंत्री सारंग को रक्षासूत्र बांधा था। इस वर्ष भी बहनों के उत्साह और सहभागिता को देखते हुए पिछले वर्ष का रिकॉर्ड टूटने की संभावना है। 6 सितंबर को यहां होंगे कार्यक्रम दिनांक 6 सितंबर को वार्ड क्रमांक 36 (प्रातः 11:00 बजे), वार्ड क्रमांक 70 (दोप. 01:00 बजे) एवं वार्ड क्रमांक 37 (शाम 04:00 बजे) में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यहां भी हजारों की संख्या में बहनें रक्षाबंधन कार्यक्रम में शामिल होंगी।