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पंजाब में जातिगत जनगणना की तैयारी तेज, 16 नवंबर से सेल्फ एन्यूमरेशन; 1 दिसंबर से शुरू होगा अभियान

चंडीगढ़  पंजाब में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जनगणना का काम पूरा होगा। केंद्र सरकार की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार Punjab Census News का मुख्य चरण एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक चलेगा। इससे पहले लोगों को अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए 16 से 30 नवंबर 2026 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी। मुख्य चरण के बाद पांच से नौ जनवरी 2027 तक दोबारा जांच का काम किया जाएगा। इस बार की जनगणना कई मायनों में महत्वपूर्ण होगी। लोगों से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें परिवार और आवास से जुड़ी जानकारी के साथ जाति, धर्म, शिक्षा, रोजगार, भाषा, प्रवास और कोविड-19 टीकाकरण सहित कई जानकारियां दर्ज की जाएंगी। इस दौरान 40 सवाल पूछे जाएंगे, जिसमें जाति धर्म, कोविड वैक्सीन लगाने से लेकर सारी जानकारी शामिल रहेगी। केंद्र सरकार की राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCPA) के फैसले के तहत इस बार जनगणना में जातिगत जनगणना को भी शामिल किया गया है। पंजाब में होने वाली जनगणना में भी जाति संबंधी जानकारी दर्ज की जाएगी। पंजाब सरकार के समन्वय से पूरा होगा काम पूरी जनगणना को डिजिटल बनाने के लिए मोबाइल एप तैयार किए गए हैं। केंद्र सरकार ने इस महाअभियान के लिए 11,718.24 करोड़ का बजट मंजूर किया है। जनगणना का काम पंजाब सरकार के समन्वय से पूरा किया जाएगा। केंद्र सरकार की राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के फैसले के बाद इस बार जातिगत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। ऐसे में पंजाब में भी लोगों से उनकी जाति से संबंधित जानकारी ली जाएगी। 2011 की जनगणना 2.77 करोड़ आबादी थी 2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब की कुल आबादी 2.77 करोड़ थी, जिसमें 1.46 करोड़ पुरुष और 1.31 करोड़ महिलाएं थीं। राज्य की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 13.89% रही, जबकि जनसंख्या घनत्व 551 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर और लिंगानुपात 895 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष था। पंजाब की कुल साक्षरता दर 75.84% थी, जिसमें पुरुष साक्षरता 80.44% और महिला साक्षरता 70.73% रही। राज्य की 62.52% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में, जबकि 37.48% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती थी। पहचान और परिवार से जुड़े 12 सवाल जनगणना में पहचान और परिवार से जुड़े 12 सवाल होंगे। इनमें व्यक्ति का नाम, लिंग, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, धर्म, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति तथा जाति, माता-पिता का नाम आदि की जानकारी ली जाएगी। इसके अलावा परिवार के सदस्यों से संबंधित आवश्यक विवरण भी दर्ज किए जाएंगे। शिक्षा और भाषा से जुड़े सवालों में व्यक्ति की साक्षरता के साथ डिजिटल साक्षरता की जानकारी भी ली जाएगी। इसके अलावा उच्चतम शैक्षणिक योग्यता और अध्ययन की शाखा से संबंधित जानकारी दर्ज होगी। रोजगार की स्थिति जानने के लिए पिछले एक वर्ष में काम किया या नहीं, आर्थिक गतिविधि की श्रेणी, व्यवसाय, उद्योग या व्यापार का प्रकार तथा काम की जगह तक पहुंचने के लिए की जाने वाली यात्रा से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। बच्चों और प्रवास का भी बनेगा आंकड़ा जन्म और प्रवास से संबंधित जानकारी में वर्तमान में जीवित बच्चों की संख्या, अब तक जन्मे कुल बच्चों की संख्या और पिछले एक वर्ष में जन्मे बच्चों की संख्या दर्ज की जाएगी। इससे राज्य में जन्म दर और आबादी में हो रहे बदलाव की तस्वीर सामने आएगी। जनगणना के दौरान आधार संख्या, मतदाता पहचान पत्र संख्या, पासपोर्ट संख्या और वाहन चलाने के लाइसेंस की उपलब्धता से संबंधित जानकारी भी मांगी जाएगी। इसके साथ कुल बैंक खातों, मोबाइल नंबर और कोविड-19 टीकाकरण की जगह की जानकारी भी दर्ज की जाएगी। पंजाब सरकार से होगा तालमेल पूरे अभियान को डिजिटल तरीके से संचालित करने की तैयारी है। इसके लिए मोबाइल आधारित अनुप्रयोग तैयार किए गए हैं। केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। पंजाब में जनगणना का काम राज्य सरकार के समन्वय से पूरा किया जाएगा। यूपी समेत इन राज्यों में शुरू होने वाली है जनगणना लद्दाख के बाद अब चार अन्य राज्यों में 1 दिसंबर से जनगणना 2027 की शुरुआत होने जा रही है। गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में जनसंख्या की गणना एक दिसंबर, 2026 से चार जनवरी, 2027 तक की जाएगी। अगले साल की शुरुआत में जिन राज्यों में चुनाव होने की संभावना है, वहां जनगणना की यह प्रक्रिया पहले शुरू की जा रही है। 16 नवंबर से खुल जाएगी स्व-गणना भारत के महापंजीयक (RGI) एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने राजपत्र अधिसूचना में कहा कि इन क्षेत्रों के नागरिक 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक स्व-गणना का विकल्प अपना सकते हैं। अधिसूचना में कहा गया है, ''गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड राज्य के बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर बाकी इलाकों में जनसंख्या की जनगणना एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक की जाएगी। इसके बाद पांच जनवरी 2027 से नौ जनवरी 2027 तक पुनरीक्षण चरण आयोजित किया जायेगा।' लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में बर्फ वाले इलाकों में चल रही जनगणना इसमें कहा गया कि गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के अन्य हिस्सों के लिए जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि पांच जनवरी 2027 की रात 12 बजे होगी। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि एक अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे होगी।'' पिछले महीने जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनसंख्या की गणना एक सितंबर से 30 सितंबर तक की जाएगी। मई में खत्म हो रहा इन विधानसभाओं का कार्यकाल जून 2025 को जारी एक सरकारी बयान में कहा गया था कि लद्दाख, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों को छोड़कर देश के बाकी हिस्सों के लिए संदर्भ तिथि एक मार्च 2027 होगी। गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 तक समाप्त हो जायेगा। एक अधिकारी ने कहा कि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी, मुख्य रूप से शिक्षक, जनगणना और चुनावी कार्यों में लगे हुए हैं। ऐसे में इन दोनों प्रक्रियाओं … Read more

PM मोदी की मंत्रियों संग कल अहम बैठक, कैबिनेट फेरबदल को लेकर बढ़ी हलचल

 नई दिल्ली केंद्र सरकार में मंत्रियों के कामकाज को लेकर सोमवार शाम अहम बैठक होने वाली है. पीएम मोदी इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे. इसमें कुछ मंत्रालयों के कामकाज, मंत्रियों के प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर बात होगी. बैठक को आने वाले समय में संभावित कैबिनेट फेरबदल से भी जोड़कर देखा जा रहा है।  बैठक में सामाजिक न्याय और जनकल्याण से जुड़े कामों पर खास ध्यान रहेगा. इसके लिए सिर्फ उन राज्यमंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों को बुलाया गया है, जिनका विभाग समाज कल्याण से जुड़ा है. सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में बाकी मंत्रालयों के मंत्रियों के साथ भी सिलसिलेवार ऐसी बैठकें होंगी।  इन मंत्रालयों के काम का होगा हिसाब सोमवार की चर्चा में मुख्य रूप से शिक्षा मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और कृषि मंत्रालय शामिल रहेंगे. इसमें देखा जाएगा कि तय योजनाएं जमीन पर कितनी तेजी से उतरी हैं और मंत्रियों ने अपनी जिम्मेदारियां किस तरह निभाई हैं।  बैठक का एक अहम हिस्सा जवाबदेही भी होगा. यानी जिन मंत्रियों को जो जिम्मेदारी दी गई है, उस पर उनका काम कैसा रहा, इस पर चर्चा की जाएगी. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि बैठक के बाद किसी मंत्री को लेकर तत्काल कोई फैसला होगा।  राज्यमंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठकें सरकार आने वाले दिनों में राज्यमंत्रियों के दूसरे समूह के साथ भी ऐसी बैठकें कर सकती है. इसका मकसद अलग-अलग मंत्रालयों के कामकाज को समझना है।  इन बैठकों में मंत्रियों के प्रदर्शन पर चर्चा होने की वजह से इन्हें कैबिनेट में होने वाले संभावित बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, अभी फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।  क्यों अहम मानी जा रही है बैठक? मंत्रियों के कामकाज की यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब सरकार के स्तर पर अलग-अलग मंत्रालयों के प्रदर्शन पर नजर रखी जा रही है. ऐसे में सोमवार की बैठक में होने वाली चर्चा आगे के फैसलों के लिए अहम हो सकती है।  फिलहाल सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि बैठक में किन मंत्रियों के कामकाज पर बात होती है और आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों का क्या रुख रहता है. इन्हीं चर्चाओं से आगे कैबिनेट में किसी बदलाव की तस्वीर साफ हो सकती है। 

अनुकंपा नियुक्ति में शादीशुदा बेटी के हक पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, भेदभाव नहीं कर सकती सरकार

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि सिर्फ वैवाहिक स्थिति के आधार पर बेटी को नियुक्ति के विचार से बाहर नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि तलाकशुदा बेटी द्वारा तलाक से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने के आधार पर उसके अनुकंपा नियुक्ति के दावे को खारिज करना उचित नहीं है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जल संसाधन विभाग के अस्वीकृति आदेश को निरस्त करते हुए महिला के आवेदन पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है। इसके लिए अधिकारियों को 40 दिन की समय-सीमा दी गई है। पिता की मृत्यु के बाद किया था आवेदन यह आदेश जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने तीजिया बाई यादव विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य मामले में सुनाया। याचिकाकर्ता तीजिया बाई यादव पति भरत यादव, उम्र करीब 42 वर्ष, निवासी नवागांव तखतपुर के पिता स्वर्गीय पिल्लू राम यादव जल संसाधन विभाग में चौकीदार के पद पर कार्यरत थे। सेवा में रहते हुए 26 अगस्त 2024 को उनका निधन हो गया। पिता की मृत्यु के बाद तीजिया बाई यादव ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। सक्षम अधिकारी ने आवेदन पर विचार करने के बाद दो जुलाई 2025 को आदेश जारी कर उनका दावा खारिज कर दिया। अस्वीकृति का प्रमुख आधार यह था कि आवेदन के साथ तलाक से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए थे। शादी के आधार पर बेटी को नहीं कर सकते बाहर हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एफएस खरे ने दलील दी कि केवल वैवाहिक स्थिति अथवा तलाक का दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर विचार करने से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने हाई कोर्ट के 30 नवंबर 2015 के पूर्व निर्णय का भी हवाला दिया। इस फैसले में हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि केवल शादीशुदा होने के आधार पर बेटी को अनुकंपा नियुक्ति के विचार से बाहर करना संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। अदालत ने नीति के उन प्रावधानों को असंवैधानिक माना था, जिनके तहत सिर्फ विवाह के आधार पर विवाहित बेटी को अनुकंपा नियुक्ति के लिए विचार से बाहर किया जाता था। सरकार ने भी माना, 2015 का फैसला लागू राज्य की ओर से उप महाधिवक्ता केजी यादव ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सक्षम अधिकारी ने उपलब्ध दस्तावेजों और लागू नीति के आधार पर आदेश पारित किया था। हालांकि, उन्होंने इस बात का विरोध नहीं किया कि वर्तमान मामले में उठाया गया कानूनी प्रश्न हाई कोर्ट के 30 नवंबर 2015 के फैसले से कवर होता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने जल संसाधन विभाग के दो जुलाई 2025 के अस्वीकृति आदेश को रद्द कर दिया और संबंधित अधिकारियों को तीजिया बाई यादव के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर कानून के अनुसार नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया।  

उज्जैन में विकास को मिलेगी नई उड़ान, ₹25 हजार करोड़ का निवेश और 75 हजार रोजगार; बोइंग विमानों की भी एंट्री

उज्जैन  उज्जैन अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश में औद्योगिक और ढांचागत विकास का एक नया हब बनकर उभर रहा है। सिंहस्थ-2028 के महाआयोजन से पहले शहर की पूरी तस्वीर बदलने की तैयारी है। वर्तमान में उज्जैन में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये की लागत से 129 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनमें से 55 से 60 प्रतिशत कार्य पूरे भी हो चुके हैं। प्रशासन का फोकस सिर्फ धार्मिक स्थलों के विकास पर ही नहीं है, बल्कि विक्रम उद्योगपुरी के जरिए करीब 20 हजार करोड़ रुपये का औद्योगिक निवेश भी लाया जा रहा है। इससे आने वाले समय में 75 हजार से ज्यादा नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 68 बड़ी कंपनियों का निवेश और 75 हजार नौकरियां     उज्जैन में रोजगार और निवेश के नए द्वार खुल रहे हैं। 2300 एकड़ में फैली विक्रम उद्योगपुरी में 350 एकड़ का मेडिकल डिवाइस पार्क आकार ले रहा है। यहां देश-विदेश की 68 से ज्यादा बड़ी कंपनियां निवेश कर रही हैं। 20 से अधिक कंपनियों ने अपनी इकाइयां स्थापित कर ली हैं और कई में उत्पादन भी शुरू हो गया है।     पेप्सिको इंडिया (1266 करोड़), अदाणी सीमेंट (1500 करोड़) और वीई कमर्शियल व्हीकल्स (580 करोड़) जैसी दिग्गज कंपनियों ने अपना काम शुरू कर दिया है, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। 437 एकड़ में एयरपोर्ट, बड़े विमान भी उतर सकेंगे उज्जैन को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए 437.5 एकड़ में एयरपोर्ट विकसित होगा। उज्जैन कलेक्टर रौशनकुमार सिंह के अनुसार, भूमि अधिग्रहण के लिए ₹590 करोड़ मंजूर हो चुके हैं। राज्य सरकार एयरपोर्ट अथॉरिटी को जमीन उपलब्ध करा चुकी है। मौजूदा करीब एक हजार मीटर लंबे रनवे को बढ़ाया जाएगा, ताकि एटीआर-72 के साथ बड़े यात्री विमान उतर सकें। जरूरत पर बोइंग विमान की लैंडिंग भी हो सकेगी। चार हेलीपैड भी तैयार किए जा रहे हैं। धार्मिक: 1125 करोड़ से संवरेंगे मंदिर, कृष्ण लोक और यूनिटी मॉल बनेगा     वर्ष 2022 में महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन में प्रतिदिन 1 से 1.5 लाख लोग आ रहे हैं। त्योहार, पर्व पर यह संख्या 4 से 5 लाख तक हो जाती है। आय और दान बढ़ा। अब महाकाल मंदिर के खजाने में 472 करोड़ रुपए हैं। इसी से प्रेरित होकर कृष्ण लोक बन रहा है।     धार्मिक नगरी के प्रमुख मंदिरों को टेंपल बॉन्ड स्कीम के तहत ₹1125 करोड़ से संवारा जाएगा। इसमें काल भैरव, मंगलनाथ, शनि मंदिर, 84 महादेव, अंगारेश्वर महादेव, गढ़कालिका, बगलामुखी माता, भूखी माता, सिद्धवट व सांदीपनि आश्रम शामिल हैं।     महाकाल लोक के बाद अब ₹220 करोड़ से 30 एकड़ में कृष्ण लोक और परिसर बनाया जाएगा। यहां 181 फीट ऊंची प्रतिमा लगेगी। काम 31 दिसंबर 2027 से पहले पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अलावा 3.20 हेक्टेयर में ₹300 करोड़ से यूनिटी मॉल बनाया जाएगा। आर्थिक : 68 से अधिक कंपनियों के निवेश प्रस्ताव, 75 हजार को रोजगार     2300 एकड़ की विक्रम उद्योगपुरी में 350 एकड़ का मेडिकल डिवाइस पार्क है। 20 से ज्यादा कंपनियों ने इकाइयां लगाई हैं, 25 से ज्यादा में उत्पादन शुरू। दूसरे चरण के लिए 35 कंपनियों के प्रस्ताव आए हैं।     बड़ी कंपनियां: पेप्सिको इंडिया ₹1266 करोड़ का निवेश कर चुकी है। अदाणी सीमेंट्स ₹1500 करोड़ और वीई कमर्शियल व्हीकल्स ₹580 करोड़ का निवेश कर रही हैं। अमूल-वॉल्वो का काम शुरू हो चुका है।     मेडिसिटी-आईटी: ₹592 करोड़ से 14 मंजिला मेडिसिटी बन रही है। इसमें 550 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल होगा। इंदौर-उज्जैन रोड पर ₹46 करोड़ के आईटी पार्क का 50% काम पूरा हो चुका है।     होटल-ब्रिज: रेडिसन, विवांता टाटा, हॉलिडे इन, लेमन ट्री और अनंता के होटल बन रहे हैं। शहर में 22 नए ब्रिज भी बन रहे हैं। इनमें 2 एलिवेटेड, शिप्रा पर 17 और 4 रेलवे ओवरब्रिज शामिल हैं। 1125 करोड़ से संवरेंगे मंदिर, आकार लेगा 'कृष्ण लोक'     'श्री महाकाल लोक' के निर्माण के बाद उज्जैन में पर्यटकों की संख्या में बंपर उछाल आया है। रोजाना 1 से 1.5 लाख और त्योहारों पर 5 लाख तक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इसी से प्रेरित होकर अब 30 एकड़ जमीन पर 220 करोड़ रुपये की लागत से भव्य 'कृष्ण लोक' का निर्माण किया जाएगा। यहां भगवान श्रीकृष्ण की 181 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा स्थापित होगी। साथ ही, 1125 करोड़ की 'टेंपल ब्लेंड स्कीम' के तहत काल भैरव, मंगलनाथ, शनि मंदिर, हरसिद्धि, 84 महादेव और सांदीपनि आश्रम सहित कई प्रमुख मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 300 करोड़ की लागत से यूनिटी मॉल भी बनाया जाना है। इन प्रोजेक्ट्स को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। 437 एकड़ में एयरपोर्ट, उतरेंगे बोइंग विमान हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 437.5 एकड़ जमीन पर एयरपोर्ट का विकास किया जा रहा है। उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह के मुताबिक, इसके भूमि अधिग्रहण के लिए 590 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं और एयरपोर्ट अथॉरिटी को जमीन भी सौंपी जा चुकी है। वर्तमान के एक हजार मीटर लंबे रनवे को इतना बढ़ाया जाएगा कि भविष्य में एटीआर-72 के साथ ही बोइंग विमान भी आसानी से लैंड कर सकें। इसके अलावा चार नए हेलीपैड भी तैयार हो रहे हैं। मेडिसिटी, आईटी पार्क और लग्जरी होटल्स का जाल     शहर में स्वास्थ्य और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नया रूप दिया जा रहा है। 592 करोड़ रुपये से 14 मंजिला 'मेडिसिटी' बन रही है, जिसमें 550 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशलिटी अस्पताल होगा। वहीं, इंदौर-उज्जैन रोड पर 46 करोड़ की लागत से बन रहे आईटी पार्क का आधा काम पूरा हो चुका है।     पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने के लिए रैडिसन, विवांता टाटा, हॉलिडे इन और लेमन ट्री जैसे ब्रांडेड होटल बन रहे हैं। यातायात सुगम बनाने के लिए शहरभर में 22 नए पुलों (ओवरब्रिज और एलिवेटेड) का निर्माण भी तेज गति से चल रहा है।  

सुखना चो पर 4 लेन पुल का निर्माण शुरू, एक साल तक रास्ता रहेगा बंद; जानें नया ट्रैफिक रूट

पंचकूला  चंडीगढ़ के सेक्टर 26 स्थित बापूधाम कॉलोनी-शास्त्री नगर के सुखना चो पर बने कॉज-वे को हाई लेवल ब्रिज बनाने के पहले चरण की बिड प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. हालांकि, चंडीगढ़ प्रशासन के इंजीनियरिंग विंग को फिलहाल प्राप्त हुई बिड के मूल्यांकन का कार्य पूरा करना है. इसके बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी. जबकि सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भी इस हाई लेवल ब्रिज के लिए लोगों को और एक साल का इंतजार करना होगा. वहीं, लोगों ने ईटीवी भारत से बातचीत में चंडीगढ़ प्रशासन के खिलाफ रोष प्रकट करते हुए कहा कि वे बीते कई वर्षों से ऐसे आश्वासन सुनते आ रहे हैं।  नाजुक पुल से गुजरते हैं हजारों वाहन: दरअसल, रोजाना हजारों गाड़ियां इस नाजुक पुल से आवाजाही करती हैं. क्योंकि इस रास्ते से होकर चंडीगढ़ के कई नामचीन कॉन्वेंट स्कूल, गोल्फ क्लब, मुख्य पर्यटन स्थल सूखना झील, हाईकोर्ट, हरियाणा व पंजाब विधानसभा, कैपिटल कॉम्प्लेक्स, चंडीगढ़ पुलिस मुख्यालय, पंजाब पुलिस मुख्यालय, पीजीआई, रोज गार्डन समेत अन्य कई महत्वपूर्ण कार्यालय, पर्यटन स्थल व मुख्य मार्केट हैं. यही कारण है कि इस मार्ग पर बापूधाम-शास्त्री नगर के नाजुक कॉज-वे से रोजाना हजारों वाहनों में लाखों लोग आवाजाही करते हैं. पंचकूला से लोग चंडीगढ़ में प्रवेश के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं, मनीमाजरा से भी सुबह से रात तक आवाजाही बनी रहती है. इसी तरह चंडीगढ़ से मनीमाजरा और पंचकूला जाने वाले वाहन चालक भी इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं।  जानिए लोगों ने क्या कहा:     इस पुल से रोजाना आवाजाही करने वाले मनीमाजरा निवासी जय धीमान ने बताया कि, "सबसे अधिक परेशानी बरसात के दिनों में होती है. जल भराव की समस्या होने से इस मार्ग पर पुल को पार करना एक चुनौती बना रहता है. कुछ समय पहले यह पुल टूट भी गया था. पुल पर जलभराव होने से लोगों को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने को मजबूर होना पड़ता है, जिस कारण उनका सफर काफी लंबा हो जाता है. रोड छोटा होने से हादसे होते रहते हैं।      वहीं, इस मार्ग से रोजाना आवाजाही करने वाले अमित ने कहा कि, "सबसे अधिक परेशानी सूखना झील से पानी छोड़े जाने के दौरान होती है. क्योंकि पानी का तेज बहाव पुल से ओवरफ्लो होता है. इस कारण एक-एक किलोमीटर का ट्रैफिक जाम लग जाता है. लेकिन जब पानी का बहाव काफी तेज हो तो पुलिस-प्रशासन मार्ग बंद कर देता है, जिससे लोगों को काफी घूमकर जाना पड़ता है. ऐसे में कुछ मिनटों का सफर ही करीब एक घंटे का हो जाता है. क्योंकि वैकल्पिक मार्गों पर पहले ही रोजाना आवाजाही करने वाला काफी ट्रैफिक रहता है. कई बार इस मार्ग पर एम्बुलेंस और आपात स्थिति के दौरान अन्य कई वाहन फंसते हैं. बापूधाम-शास्त्री नगर कॉज-वे के पास रात के समय स्ट्रीट लाइट काम नहीं करती. ऐसे में अंधेरा होने के चलते जानलेवा हादसे होने का खतरा बना रहता है, क्योंकि इस पुल से कई बार गाड़ियां नीचे गिर चुकी हैं. इस मार्ग से आवाजाही करने वाले वाहन चालकों/यात्रियों को अपनी सुरक्षा का ध्यान खुद ही रखना पड़ता है. नतीजतन, हर कोई सँभल संभल कर पुल से निकलता है, क्योंकि मोड़ काफी घुमावदार होने लेकिन सड़क संकीर्ण होने से हादसे होने का खतरा बना रहता है।  निर्माण शुरू होने से पहले ट्रैफिक प्लान जरूरी पुल का निर्माण शुरू होने में करीब एक महीने का समय लग सकता है। निर्माण के दौरान सड़क बंद रहने से पंचकूला, मनीमाजरा और आईटी पार्क की ओर से आने-जाने वाले वाहनों पर असर पड़ेगा। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, हरियाणा सिविल सचिवालय, सुखना झील और चंडीगढ़ के उत्तरी सैक्टरों की ओर जाने वाले लोगों को भी वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ेगा। यूटी के मुख्य अभियंता सीबी ओझा ने बताया कि ट्रैफिक पुलिस समेत संबंधित विभागों के साथ चर्चा कर वैकल्पिक ट्रैफिक प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि मनीमाजरा-सैक्टर 26 लिंक बंद होने के बाद मध्य मार्ग पर ट्रैफिक का बड़ा दबाव आ सकता है। किशनगढ़ रोड को भी विकल्प के तौर पर देखा जा रहा विभाग के अनुसार किशनगढ़ से सुखना चो के किनारे जाने वाली सड़क का इस्तेमाल वैकल्पिक मार्ग के रूप में किया जा सकता है। इसके अलावा सैक्टर 26 से भी ट्रैफिक डायवर्ट करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि गांव से गुजरने वाली संकरी सड़क पर अतिरिक्त ट्रैफिक संभालने की क्षमता सीमित है। फिलहाल निर्माण के दौरान लागू होने वाली अंतिम ट्रैफिक प्रबंधन योजना तैयार नहीं हुई है। ऐसे में रोजाना पंचकूला और चंडीगढ़ के बीच सफर करने वाले लोगों को अगले एक साल तक ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।     वहीं, स्थानीय निवासी अमन त्रिपाठी ने कॉज-वे के हाई लेवल ब्रिज में बदलने की बात पर मायूसी प्रकट करते कहा कि, "मैं सालों से ऐसा कुछ सुनते आ रहा हूं, लेकिन कभी कुछ नहीं हुआ. कॉज-वे पर लाइटिंग की कोई व्यवस्था नहीं है, जबकि हर साल आम लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है. स्थानीय या आसपास के लोग रोजाना कई तरह की मुश्किल झेलते हैं लेकिन हरियाणा से लोगों के आने के कारण ट्रैफिक अधिक होने से परेशानी कई गुणा बढ़ जाती है. ऐसे में लोगों को दूसरे मार्गों से होकर निकलना पड़ता है, जिससे दूरी अधिक बढ़ जाती है और समय भी काफी खराब होता है. हम सालों से इस पुल को देख रहे हैं, जो तीन-चार बार टूट चुका है. लेकिन हर बार काम चलाऊ मरम्मत कर दी जाती है.यहां कई हादसे हुए और कई होते होते रह गए, अब पुल के किनारे ग्रिल लगाई गई हैं. लेकिन जब कभी सूखना झील से पानी छोड़ा जाता है तो तेज बहाव सबकुछ साथ बहाकर ले जाता है।  17 करोड़ रुपये का टेंडर जारी : प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने बापूधाम-शास्त्री नगर कॉज-वे को हाई लेवल ब्रिज में बदलने के लिए करीब 17 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया. इसके अंतर्गत प्रशासन को अलग अलग बिड प्राप्त हुई हैं, जिनके मूल्यांकन का की प्रक्रिया पूरी किया जाना शेष है. चंडीगढ़ प्रशासन के चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद कॉज-वे पर हाई लेवल ब्रिज के निर्माण में करीब नौ महीने से एक वर्ष … Read more

RTE Admission 2027-28: छत्तीसगढ़ में पहले शुरू होगी दाखिला प्रक्रिया, 10 फरवरी तक मिलेंगे एडमिशन

रायपुर शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के मुफ्त दाखिले की प्रक्रिया में इस बार बड़ा बदलाव किया गया है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए आवेदन से लेकर दाखिले तक की प्रक्रिया करीब छह महीने पहले पूरी कर ली जाएगी। नए टाइम टेबल के अनुसार ऑनलाइन आवेदन दिसंबर 2026 में लिए जाएंगे। साथ ही 6 माह पहले यानि 10 फरवरी 2027 तक दाखिला पूरा कर लिया जाएगा। प्रदेश में आरटीइ की 6,562 सीटें खाली पिछले सत्र में प्रवेश प्रक्रिया अगस्त तक चली थी। यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब सत्र 2026-27 में तीन लॉटरी के बाद भी प्रदेश में आरटीइ की 6,562 सीटें खाली रह गई हैं। जिला-वार आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में आरटीइ के लिए निर्धारित 23,097 सीटों में से 16,535 पर ही बच्चों का दाखिला हुआ है। इस साल 6,851 स्कूलों के लिए 41,813 आवेदन प्राप्त हुए थे। इसके बावजूद सभी सीटें नहीं भर सकीं। रायपुर में सबसे ज्यादा 570 सीटें खाली राजधानी रायपुर में आरटीइ की 3,201 सीटों में से 2,631 पर दाखिला हुआ है। यहां 570 सीटें अब भी खाली हैं, जो प्रदेश के सभी जिलों में सबसे ज्यादा हैं। जिले में 7,742 आवेदन आए थे। इसके बावजूद 2,539 आवेदनों में सीट आबंटन नहीं हुआ है। बिलासपुर में 2,215 में से 1,704 सीटों पर दाखिला हुआ और 511 सीटें खाली रह गईं। दुर्ग में 1,581 सीटों में 1,167 दाखिले हुए और 414 सीटें खाली हैं। दूरस्थ जिलों में भी बड़ी संख्या में सीटें खाली दंतेवाड़ा में 411 सीटों में केवल 36 बच्चों का दाखिला हुआ, जबकि 375 सीटें खाली हैं। बीजापुर में 320 में से 23 दाखिले हुए और 297 सीटें खाली रह गईं। सुकमा में 312 में से 21 बच्चों को प्रवेश मिला और 291 सीटें खाली हैं। सरगुजा में भी 638 सीटों में से 299 सीटें खाली रह गई हैं। अगले सत्र से एक ही चरण में प्रवेश सत्र 2026-27 में आवेदन 16 फरवरी से 31 मार्च 2026 तक लिए गए थे। इसके बाद लाटरी अप्रैल में हुई और अलग-अलग चरणों में दाखिले की प्रक्रिया 17 अगस्त तक चली। अब सत्र 2027-28 में आवेदन 1 से 31 दिसंबर 2026 तक लिए जाएंगे। कंप्यूटर लाटरी 11-12 जनवरी 2027 को होगी। इसके बाद केवल एक चरण में प्रवेश दिया जाएगा और 10 फरवरी तक प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे आरटीइ के तहत प्रवेश पाने वाले बच्चों की कक्षाएं भी शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के आसपास समय पर शुरू हो सकेंगी। आरटीइ की स्थिति एक नजर में     कुल स्कूल : 6,851     कुल सीट : 23,097     कुल आवेदन : 41,813     कुल दाखिला : 16,535     तीन लॉटरी के बाद खाली सीट : 6,562     सीट आबंटन नहीं हुआ : 11,754 आवेदन     सबसे ज्यादा खाली सीट : रायपुर 570     इसके बाद : बिलासपुर 511, दुर्ग 414     सत्र 2027-28 में आवेदन : 1 से 31 दिसंबर 2026     लॉटरी : 11-12 जनवरी 2027     दाखिला पूरा करने की अंतिम तिथि : 10 फरवरी 2027  

सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं के लिए बड़ी तैयारी, 125+ स्पेशल ट्रेनें चलेंगी; AI कैमरों से होगी निगरानी

उज्जैन  उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 को लेकर रेलवे ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सिंहस्थ के दौरान देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए रेलवे 125 से अधिक स्पेशल ट्रेनें चलाने की तैयारी कर रहा है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने रविवार को इंदौर पहुंचकर रेलवे की तैयारियों और विकास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ के दौरान यात्रियों की सुविधा और भीड़ को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त संख्या में ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। प्रयास रहेगा कि यात्रियों को यात्रा के लिए ज्यादा किराया नहीं चुकाना पड़े। चेयरमैन सतीश कुमार ने इंदौर स्टेशन, शास्त्री ब्रिज और आसपास चल रहे रेलवे से जुड़े विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से स्टेशन रीडेवलपमेंट, यात्री सुविधाओं और इंदौर से जुड़े महत्वपूर्ण रेल प्रोजेक्ट्स की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने इंदौर-मनमाड़, इंदौर-खंडवा और इंदौर-उज्जैन रेल सेक्शन के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। सिंहस्थ के लिए 125 से ज्यादा ट्रेनें, यात्रियों के किराए पर भी फोकस सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए रेलवे ने अभी से यात्री परिवहन की योजना पर काम शुरू कर दिया है। चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि सिंहस्थ के दौरान 125 से अधिक ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इन ट्रेनों के जरिए उज्जैन के साथ इंदौर और आसपास के शहरों को जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। रेलवे का प्रयास होगा कि श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित रेल यात्रा मिल सके। ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के साथ यात्रियों पर अतिरिक्त किराए का बोझ न पड़े, इस पर भी ध्यान दिया जाएगा। सिंहस्थ के लिए 125 से ज्यादा ट्रेनें, यात्रियों के किराए पर भी फोकस सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए रेलवे ने अभी से यात्री परिवहन की योजना पर काम शुरू कर दिया है। चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि सिंहस्थ के दौरान 125 से अधिक ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इन ट्रेनों के जरिए उज्जैन के साथ इंदौर और आसपास के शहरों को जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। रेलवे का प्रयास होगा कि श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित रेल यात्रा मिल सके। ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के साथ यात्रियों पर अतिरिक्त किराए का बोझ न पड़े, इस पर भी ध्यान दिया जाएगा। इंदौर से चलने वाली स्पेशल ट्रेनों को नियमित करने पर काम इंदौर से अलग-अलग शहरों के लिए चलने वाली स्पेशल ट्रेनों को नियमित करने की मांग पर भी रेलवे काम कर रहा है। चेयरमैन ने कहा कि इंदौर से संचालित होने वाली कुछ स्पेशल ट्रेनों को नियमित करने की दिशा में प्रक्रिया जारी है। इससे इंदौर के यात्रियों को नियमित रेल कनेक्टिविटी मिलने के साथ सिंहस्थ के दौरान भी यातायात का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। इंदौर स्टेशन के रीडेवलपमेंट में तेजी के निर्देश रेलवे बोर्ड चेयरमैन ने इंदौर स्टेशन के रीडेवलपमेंट की प्रगति का भी जायजा लिया। उन्होंने कहा कि जून 2025 में भी उन्होंने स्टेशन का रिव्यू किया था। उस समय की स्थिति और वर्तमान स्थिति में काफी बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि स्टेशन के विकास और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आगे और क्या व्यवस्थाएं की जा सकती हैं, इस पर गंभीरता से चर्चा की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि स्टेशन के विकास की पूरी रूपरेखा जनरल मैनेजर और उनकी टीम के साथ साझा की गई है। इसे रेलवे बोर्ड के स्तर पर भी प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि यात्री सुविधाओं को बेहतर करने और विकास कार्यों को गति देने के लिए आवश्यक निर्णय लिए जा सकें। शास्त्री ब्रिज का निरीक्षण, नए रेलवे ओवरब्रिज पर भी चर्चा सतीश कुमार ने इंदौर के शास्त्री ब्रिज का भी निरीक्षण किया। ब्रिज के कारण यातायात और भविष्य में बढ़ने वाले दबाव को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि जिस मार्ग को चौड़ा करने का काम किया जा रहा है, उसके दौरान वैकल्पिक यातायात व्यवस्था बेहद जरूरी होगी। नए एलाइनमेंट को लेकर दिए गए सुझावों पर भी रेलवे गंभीरता से विचार कर रहा है। नए शास्त्री रेलवे ओवरब्रिज के शुरुआती दौर का काम जल्द शुरू करने की दिशा में काम किया जाएगा। सुरक्षा के लिए AI वाले कैमरे, चेहरा भी स्कैन कर सकेंगे रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक वाले कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा। इन कैमरों के जरिए स्टेशन परिसर में होने वाली गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी। नई तकनीक से लैस कैमरों में चेहरे की पहचान और स्कैनिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी। इससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और सुरक्षा एजेंसियों को समय पर अलर्ट करने में मदद मिल सकती है। चूहों की समस्या पर पेस्ट कंट्रोल बढ़ेगा, पेंट्री कार की विशेष सफाई रेलवे परिसरों और ट्रेनों में चूहों की समस्या को लेकर भी चेयरमैन ने अधिकारियों से जानकारी ली। वर्तमान में सामने आ रही समस्याओं को देखते हुए पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था पर ज्यादा ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। इंदौर-मनमाड़ और इंदौर-खंडवा रेल प्रोजेक्ट भी अहम चेयरमैन ने इंदौर से जुड़े महत्वपूर्ण रेल प्रोजेक्ट्स की भी समीक्षा की। इंदौर-मनमाड़ और इंदौर-खंडवा रेल सेक्शन के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा इंदौर-उज्जैन सेक्शन की क्षमता और यात्री सुविधाओं से जुड़े कामों को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई। सिंहस्थ के दौरान इंदौर से उज्जैन जाने वाले यात्रियों की संख्या काफी बढ़ने की संभावना है। ऐसे में इस रेल मार्ग की क्षमता और संचालन व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। इंदौर से चलने वाली स्पेशल ट्रेनों को नियमित करने पर काम इंदौर से अलग-अलग शहरों के लिए चलने वाली स्पेशल ट्रेनों को नियमित करने की मांग पर भी रेलवे काम कर रहा है। चेयरमैन ने कहा कि इंदौर से संचालित होने वाली कुछ स्पेशल ट्रेनों को नियमित करने की दिशा में प्रक्रिया जारी है। इससे इंदौर के यात्रियों को नियमित रेल कनेक्टिविटी मिलने के साथ सिंहस्थ के दौरान भी यातायात का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। इंदौर स्टेशन के रीडेवलपमेंट में तेजी के निर्देश रेलवे बोर्ड चेयरमैन ने इंदौर स्टेशन के रीडेवलपमेंट की प्रगति का भी जायजा लिया। उन्होंने कहा कि जून 2025 में … Read more

Old Monk की बिक्री पर FSSAI की सख्ती, ‘रम’ की जगह ‘रम फ्लेवर्ड स्पिरिट’ लिखना होगा

नई दिल्ली ओल्ड मॉन्क को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अहम बात कही है। इसके मुताबिक, ओल्ड मॉन्क को रम के तौर पर बेचना या उसका प्रचार करना सही नहीं है, क्योंकि इस प्रोडक्ट में मुख्य रूप से न्यूट्रल स्पिरिट का इस्तेमाल किया गया है। अदालत को बताया गय कि उत्पाद की वास्तविक प्रकृति उसके नाम या लेबल से ज्यादा अहम है। FSSAI की ओर से कहा गया कि इसे रम फ्लेवर्ड स्पिरिट की कैटेगरी में रखा जा सकता है। अदालत में सुनवाई के दौरान FSSAI के वकील ने साफ किया कि विवाद केवल बोतल पर लिखे लेबल का नहीं, बल्कि प्रोडक्ट की बनावट का है। ओल्ड मॉन्क में इस्तेमाल होने वाली न्यूट्रल स्पिरिट में रम फ्लेवर मिलाया गया है। कंपनी ने अपने लेबल में बदलाव कर नए वाले FSSAI के सामने पेश किए हैं। हालांकि, नियामक ने इन नए लेबल की समीक्षा के लिए अदालत से और समय मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी। ओल्ड मॉन्क की बिक्री पर हुई कार्रवाई यह विवाद महाराष्ट्र में ओल्ड मॉन्क की बिक्री पर हुई कार्रवाई के बाद सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र में जांच के दौरान न्यूट्रल स्पिरिट में फ्लेवरिंग पदार्थ पाए गए थे, जिसके बाद FSSAI ने प्रोडक्ट की बिक्री पर रोक लगाई थी। इसके बाद कंपनी ने पैकेजिंग में बदलाव करने पर सहमति जताई और बोतल पर एडेड फ्लेवर को प्रमुखता से दिखाने की बात कही। एफएसएसएआई की कार्रवाई केवल ओल्ड मॉन्क तक सीमित नहीं है। नियामक ने शराब बनाने वाली कई कंपनियों के उत्पादों में बाहरी फ्लेवर के इस्तेमाल, उम्र संबंधी दावों और भ्रामक लेबलिंग को लेकर कार्रवाई शुरू की है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, कई निर्माताओं की ओर से ऐसे बाहरी फ्लेवर मिलाए जा रहे थे, जिनसे उत्पादों में मानक रम या व्हिस्की जैसा स्वाद व सुगंध पैदा हो। मंत्रालय ने कहा कि ऐसे उत्पादों को उनकी वास्तविक प्रकृति के तहत रम फ्लेवर्ड स्पिरिट या व्हिस्की फ्लेवर्ड स्पिरिट के रूप में पहचाना जाना चाहिए। जांच में ओल्ड मॉन्क के XXX Rum पर 7 years old blended का दावा भी भ्रामक पाया गया। इसमें मुख्य मात्रा न्यूट्रल, बिना परिपक्व की गई स्पिरिट की थी, जबकि परिपक्व रम स्पिरिट की मात्रा 5 प्रतिशत से कम थी। नियमों के तहत मिश्रित स्पिरिट की उम्र का दावा उसमें शामिल सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट के आधार पर होना चाहिए।

मस्जिद के मलबे के नीचे मिला कुआं, मजबूत स्लैब ने चौंकाया; ASI की टीम करेगी पड़ताल

सहारनपुर  यूपी में सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बीते शनिवार को जिस मस्जिद को बुलडोजर से ढहाया गया था, मलबा हटाने के बाद उसके नीचे से कुआं निकला है। मलबा अब पूरी तरह साफ कर दिया गया है। दूसरी तरफ, 70 साल पुरानी अवैध मस्जिद गिराए जाने पर सियासत भी जारी है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से लेकर AIMIM ने बुलडोजर एक्शन के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। मलबा हटाने के बाद स्ट्रक्चर के नीचे मिला कुआं मस्जिद के स्ट्रक्चर के नीचे कुआं मिलने के बाद, सहारनपुर कलेक्ट्रेट में बनी अवैध मस्जिद को गिराने के एक्शन पर SDM सदर सुबोध कुमार ने कहा, 'हमने यह एक्शन अदालत के आदेश का पालन करते हुए किया है। इसी दौरान, यहां एक कुआं मिला है। संबंधित एजेंसियां इसकी ​​जांच करेंगी और बताएंगी कि यह कुआं कितना बड़ा है।' ईंटों से बना हुआ है कुएं का स्ट्रक्चर SDM सदर सुबोध कुमार आगे बोले कि टेक्निकल टीमों की पड़ताल के बाद ही सब कुछ स्पष्ट हो पाएगा। यह ईंटों से बना कुआं है और इसका स्ट्रक्चर भी ईंटों से ही बना है। पहली नजर में तो यह कुआं ही लग रहा है। 7 सितंबर को सहारनपुर जाएगा सपा का डेलिगेशन दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी ने बुलडोजर एक्शन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 7 सितंबर को समाजवादी पार्टी का एक डेलिगेशन सहारनपुर जाएगा। डेलिगेशन कलेक्ट्रेट का भी दौरा करेगा, जहां मस्जिद को गिराया गया है। डेलिगेशन ने शामिल सभी नेता पहले पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान के घर पर जमा होंगे। इसके बाद यहां से कलेक्ट्रेट जाएंगे। ईंटों से बनी है कुएं की संरचना प्रशासन के मुताबिक, प्रारंभिक तौर पर सामने आई संरचना ईंटों से बनी हुई है और देखने में यह कुआं ही प्रतीत होता है। हालांकि, अधिकारियों ने इसकी अंतिम पुष्टि के लिए तकनीकी जांच को जरूरी बताया है। एएसआई की टीम भी मौके की जांच करेगी, जिसके बाद कुएं की संरचना और संभावित ऐतिहासिक महत्व से जुड़े पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मस्जिद को गिराए जाने के बाद प्रशासन ने कलेक्ट्रेट परिसर से मलबे की एक-एक ईंट हटाने की कार्रवाई की। बताया गया कि मलबे को सहारनपुर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर निर्धारित स्थान पर ले जाकर डाला गया है। प्रशासन का कहना है कि परिसर को पूरी तरह साफ कर समतल किया जा चुका है। पोकलेन भी नहीं हटा पाई भारी स्लैब इस पूरी कहानी का एक दिलचस्प हिस्सा वह स्लैब भी है, जिसके नीचे कुआं मिला. मलबा हटाने के दौरान कर्मचारियों को एक मजबूत और भारी स्लैब मिला. उसे हटाने के लिए पोकलेन मशीन की मदद ली गई. लेकिन मशीन से भी स्लैब नहीं टूट पाया. इसके बाद कटर मंगवाया गया. स्लैब को काटने के बाद उसे हटाया गया. और फिर नीचे कुआं दिखाई दिया।  कलेक्ट्रेट परिसर में कुआं मिलने की खबर फैली तो मौके पर लोगों की भीड़ जुटने लगी. लोग एक-एक करके कुएं को देखने पहुंचने लगे. कुएं की गहराई कितनी है? यह कब बनाया गया होगा? इसका इस्तेमाल किस लिए होता होगा?ऐसे कई सवाल लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए. हालांकि इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।  कुएं के सामने आने के बाद सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल भी तैनात किया गया. कुएं के आसपास लोगों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है. प्रशासन की निगरानी में मलबा हटाने का काम भी जारी है. अब सिर्फ मलबा हटाने की कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीन के नीचे मिले इस ढांचे की जांच भी अहम हो गई है।  SDM बोले- प्रथम दृष्टया यह कुआं ही लग रहा है एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने बताया कि न्यायालय के आदेश के बाद की गई कार्रवाई में यह ढांचा सामने आया है. उनके मुताबिक, प्रथम दृष्टया यह कुआं ही दिखाई दे रहा है और इसकी गहराई करीब 20 फीट के आसपास है. लेकिन कुएं की असली कहानी अभी सामने आनी बाकी है. यह कितना पुराना है? इसे कब बनाया गया था? इसका इस्तेमाल किस लिए होता था? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिल सकेंगे।  अब ASI की जांच पर टिकी नजर प्रशासन के मुताबिक, मामले की जांच के लिए ASI की टीम मौके पर आएगी. जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि जमीन के नीचे मिला यह कुआं कितना पुराना है और इसका कोई ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व है या नहीं. फिलहाल, सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद हटाए जाने के बाद मलबे के नीचे मिला यह कुआं अब चर्चा का विषय बन गया है. भारी स्लैब के नीचे करीब 20 फीट गहरा दिखाई देने वाला कुआं आखिर कब बना और इसकी कहानी क्या है? इसका जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएगा।  मस्जिद के नीचे कुआं मिलने से बढ़ी सतर्कता मस्जिद के बीच में कुआं मिलने के बाद प्रशासन मामले में अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। कुएं को फिलहाल ढक दिया गया है, ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो और जांच के दौरान संरचना को सुरक्षित रखा जा सके। सपा का प्रतिनिधिमंडल करेगा सहारनपुर का दौरा इस बीच समाजवादी पार्टी ने भी पूरे मामले की जांच के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर भेजने का फैसला किया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रतिनिधिमंडल रविवार को सहारनपुर पहुंचकर घटनाक्रम की जानकारी जुटाएगा। सपा के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल मंडलायुक्त से मुलाकात कर मस्जिद ध्वस्तीकरण से जुड़े तथ्यों की जानकारी लेगा। पार्टी का दावा है कि 4 सितंबर की शाम प्रशासन की ओर से मस्जिद को सील किए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। प्रतिनिधिमंडल मौके की स्थिति देखने के बाद अपनी रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को सौंपेगा। सहारनपुर जाने वाले सपा डेलिगेशन की लिस्ट     लाल बिहारी यादव, नेता प्रतिपक्ष, विधान परिषद      चौधरी अब्दुल वाहिद, जिलाध्यक्ष     हाजी नवाब अंसारी, महानगर अध्यक्ष     हरेंद्र मलिक, सांसद      इकरा हसन, कैराना सांसद      चौधरी रूद्रसेन, राष्ट्रीय महासचिव      हाजी फजलुर्रहमान, पूर्व सांसद      अतुल प्रधान, सरधना विधायक      आशु मलिक, विधायक      उमर अली, विधायक      रामऔतार सैनी, विधायक      किरन पाल कश्यप, MLC     माविया अली, पूर्व विधायक      राहुल … Read more

बाढ़ पीड़ितों को CM योगी का भरोसा- आपदा की घड़ी में अकेले नहीं, डबल इंजन सरकार आपके साथ

बाढ़ पीड़ितों को CM योगी का भरोसा- आपदा की इस घड़ी में आप अकेले नहीं, डबल इंजन सरकार आपके साथ CM योगी ने बाढ़ प्रभावित चित्रकूट दौरे से पहले सेल्फी वीडियो जारी कर दिया बाढ़ राहत का संदेश बलिया, फर्रुखाबाद और वाराणसी का दौरा कर चुके हैं CM योगी  हर जीवन की सुरक्षा और हर परिवार तक राहत हमारा संकल्प : मुख्यमंत्री  लखनऊ  उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि सरकार उनके साथ खड़ी है। सीएम योगी ने रविवार को चित्रकूट के दौरे से पहले अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक सेल्फी वीडियो शेयर कर बाढ़ प्रभावित इलाकों में चल रहे राहत और बचाव कार्यों की जानकारी दी। सीएम योगी ने कहा कि ज्यादा बारिश के कारण प्रदेश के कुछ जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। सरकार पूरी तेजी के साथ लोगों तक मदद पहुंचाने में जुटी है। वह खुद बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर हालात देख रहे हैं और राहत-बचाव के कामों का जायजा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार के मंत्री भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों से मिल रहे हैं और राहत सामग्री बांट रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए भी सरकार काम कर रही है। सीएम योगी ने बताया कि वह बलिया, फर्रुखाबाद और वाराणसी का दौरा कर चुके हैं और आज चित्रकूट जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए लोगों की सेवा सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उनके सुख-दुख में साथ खड़े रहना भी है। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से कहा कि संकट की इस घड़ी में वे खुद को अकेला न समझें, सरकार पूरी तरह उनके साथ है। सीएम योगी ने कहा कि हर व्यक्ति की जान की सुरक्षा, हर प्रभावित परिवार तक राहत पहुंचाना और जरूरतमंदों की मदद करना सरकार की पहली प्राथमिकता है।