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अकाली दल के सामने सियासी संकट, जनाधार खिसका और BJP से गठबंधन की राह भी मुश्किल

 जालंधर  पंजाब में अकाली दल के सामने पंथक वोट बैंक को एकजुट करने की बड़ी चुनौती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का मत प्रतिशत घटकर महज 13.42 फीसदी रह गया, जबकि 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे केवल तीन सीटें मिली थीं। यह गिरावट 2017 के बाद से लगातार जारी है, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में उसकी पकड़ कमजोर हुई है। पार्टी को अब अपने बिखरे हुए राजनीतिक आधार को फिर से संगठित करना होगा। अकाली दल को 2014 में 26.30 फीसदी और 2019 में 27.45 फीसदी वोट मिले थे लेकिन 2024 में यह आंकड़ा 13.42 फीसदी पर आ गया जिससे पार्टी सिर्फ बठिंडा लोकसभा सीट जीत सकी। इस बीच, सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) को 2024 में करीब 3.82 फीसदी वोट मिले।  निर्दलीय उम्मीदवार अमृतपाल सिंह और सरबजीत सिंह खालसा की जीत ने भी पंथक वोटों के बिखराव को दर्शाया। इन नतीजों से स्पष्ट है कि अकाली दल से दूर हुआ पंथक वोट कांग्रेस, आम आदमी पार्टी या भाजपा के पास पूरी तरह नहीं गया बल्कि इसका एक हिस्सा नई पंथक राजनीति की ओर मुड़ गया है। सुखबीर बादल के नेतृत्व वाला अकाली दल अपने पुराने संगठन को बचाने का प्रयास कर रहा है। वहीं पुनर्सुरजीत धड़ा और वारिस पंजाब दे जैसे समूह भी अपनी पहचान बना रहे हैं। यह स्थिति अकाली राजनीति के सामने विरोधी दलों से भी बड़ी चुनौती पेश करती है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान संकट 1966 में नए पंजाब के गठन के बाद अकाली दल ने क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत जगह बनाई। पार्टी ने 1977, 1985, 1997, 2007 और 2012 में सत्ता हासिल की। हालांकि, 2017 के बाद से इसके चुनावी प्रदर्शन में लगातार गिरावट आई है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी तीन सीटों तक सिमट गई। 2024 के लोकसभा चुनाव में मत प्रतिशत में भारी कमी ने इस संकट को और गहरा किया है। नई पंथक राजनीति की ओर गया वोट अकाली दल का वोट बैंक पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसका एक बड़ा हिस्सा अब अलग-अलग पंथिक राजनीतिक धाराओं में बंट गया है। सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्व वाले शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) को 2024 में 3.82 फीसदी वोट मिले। निर्दलीय उम्मीदवार अमृतपाल सिंह और सरबजीत सिंह खालसा की जीत भी इसी बदलाव का संकेत है। यह दर्शाता है कि पंथिक वोट राष्ट्रीय दलों के बजाय नई पंथक राजनीति की ओर भी गया है। पुराने गठबंधन की चर्चाएं भाजपा और अकाली दल के पुराने गठबंधन को लेकर पंजाब की राजनीति में चर्चाएं जारी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 18.56 फीसदी और अकाली दल को 13.42 फीसदी वोट मिले थे। दोनों के मत प्रतिशत को जोड़ने पर यह आंकड़ा करीब 31.98 फीसदी होता है। हालांकि, वोटों का शत-प्रतिशत हस्तांतरण हमेशा संभव नहीं होता है। सितंबर 2026 तक भाजपा ने सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की बात कही है। 2027 के चुनाव से पहले अकाली दल को अपने बिखरे आधार को एकजुट करना होगा।

पराली बनेगी कमाई का जरिया, विदिशा में CBG प्लांट से अन्नदाता बनेंगे ‘ऊर्जादाता’

 विदिशा  जिस पराली या नरवाई को किसान फसल कटने के बाद खेत से हटाने के लिए जला देते हैं, वही पराली अब ईधन का कच्चा माल बनेगी। मक्का, धान, गेहूं सहित दूसरी फसलों के अवशेषों से अब कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) बनाने की तैयारी है। इसके लिए इंडियन ऑयल कार्पोरेशन जिले में सीबीजी प्लांट लगाने जा रहा है। यह प्लांट शुरू हो जाने के बाद क्षेत्र का किसान केवल अन्नदाता ही नहीं ऊर्जादाता भी बन जाएगा। उपयुक्त जमीन की तलाश किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत बरवड़े ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से कलेक्टर अंशुल गुप्ता और आईओसीएल के अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने प्लांट स्थापना से संबंधित आवश्यक कार्रवाई शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने बताया कि इसके लिए नटेरन, बासौदा और कुरवाई क्षेत्र में 15 से 20 एकड़ सरकारी जमीन की तलाश हो रही है। एसडीएम को जमीन चिन्हित करने की कार्रवाई की जा रही है। बताया गया कि यह जमीन आईओसीएल को लंबी अवधि के पट्टे पर दी जाएगी। किसानों की समस्या होगी दूर, कमाई भी होगी फसल कटने के बाद खेत में बचने वाले अवशेष किसानों के लिए लंबे समय से परेशानी बने हुए हैं। इन्हें खेत से हटाने में मेहनत और खर्च लगता है। इससे बचने के लिए अधिकांश किसान इन अवशेषों को खेत में ही जला देते हैं। इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है। अब सीबीजी प्लांट के लिए क्षेत्र से मक्का, धान, गेहूं सहित विभिन्न फसलों के अवशेष एकत्रित किए जाएंगे। इनका उपयोग बायोगैस और अन्य उत्पाद तैयार करने में होगा। इससे किसानों को फसल की मुख्य उपज के अलावा खेत में बचे अवशेषों से भी आर्थिक लाभ मिलने का रास्ता बनेगा। विदिशा में जलती है सबसे अधिक पराली इस साल देश भर में पराली जलाने की 68,259 घटनाएं रिपोर्ट हुईं। उनमें से 39,165 यानी आधे से अधिक घटनाएं मध्यप्रदेश में दर्ज हुई हैं। मध्य प्रदेश में भी विदिशा जिला पराली जलाने में सबसे आगे रहा है। यहां इस साल 4465 घटनाएं रिकॉर्ड हो चुकी हैं। पिछले वर्ष भी यहां ऐसी ही स्थिति थी। यह है सीबीजी कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) जैविक कचरे या बायोमास से बनाई गई ऐसी गैस है, जिसका मुख्य घटक मीथेन होता है। इसे सामान्यतः बायोगैस को शुद्ध करके और संपीड़ित यानी कम्प्रेस करके तैयार किया जाता है। गुणवत्ता और उपयोग के लिहाज से यह काफी हद तक सीएनजी की तरह है। इसका उपयोग वाहनों में, औद्योगिक भट्टियों में, खाना पकाने में और कुछ संयंत्रों में बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।     सीबीजी प्लांट की स्थापना से किसानों के लिए पराली अब केवल अपशिष्ट नहीं रहेगी, बल्कि उसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकेगा। इससे पराली जलाने की घटनाओं को कम करने, पर्यावरण संरक्षण और किसानों को कृषि अवशेषों का उचित मूल्य दिलाने में मदद मिलेगी। प्लांट की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि चयन एवं अन्य प्रक्रियाओं को प्राथमिकता से आगे बढ़ाया जा रहा है।     – अंशुल गुप्ता, कलेक्टर, विदिशा।  

Hugging Face ब्रीच के बाद OpenAI एजेंट्स पर बड़ा खुलासा, AI ने बनाई अपनी ‘सीक्रेट दुनिया’

नई दिल्ली AI ने अभी इंसानों के ज्यादातर काम को आसान बना दिया है. लेकिन, कई बार AI बेकाबू हो जाते हैं और इसे संभालना मुश्किल हो जाता है. जिसकी वजह से आने वाले भविष्य में AI कितना खतरनाक साबित हो सकता है, उसकी एक झलक देखने को मिल जाती है. अब एक बार फिर ताजा मामला ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI के तरफ से आया है. जहां उसके AI एजेंट्स ने जर्मन वेबसाइट को हाइजैक कर लिया।  रॉयटर्स के अनुसार, एक नई रिसर्च और मामले से जुड़े दो सूत्रों के अनुसार, इस साल मई के दौरान OpenAI के अनकंट्रोल्ड AI एजेंट्स के एक ग्रुप ने एक जर्मन वेबसाइट को हाइजैक कर लिया. उसके बाद और उसे दूसरे AI एजेंट्स के लिए एक मैसेज बोर्ड में बदल दिया. बताया जा रहा है कि OpenAI के अधिकारियों को इस घटना की जानकारी कई हफ्ते पहले हो गई थी. हालांकि, उन्होंने इसे सीक्रेट रखा क्योंकि कंपनी के अधिकारी जुलाई में ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म Hugging Face के डेटा ब्रीच के बाद के असर से निपटने में जुटे हुए थे।  क्या है पूरा मामला? जर्मनी में AI एजेंट्स के इस कदम की डिटेल को लेकर बताया जा रहा है कि रिसर्चर्स ने अगस्त के अंत में अनऑथोराइज्ड AI-एजेंट एक्टिविटी के सुराग खोजते समय इसे पकड़ा था. रिसर्चर्स ने बताया कि उन्हें प्रोग्रामर्स के लिए बनी एक जर्मन विकी वेबसाइट DseWiki पर AI एजेंट्स द्वारा किए गए 15,000 से अधिक एडिट्स मिले।  आपको बता दें कि ये वेबसाइट विकिपीडिया की तरह ही आम लोगों के एडिट्स स्वीकार करती है. इन एडिट्स से पता चला कि OpenAI के एजेंट्स ने इस साइट को एक मैसेज बोर्ड बना दिया था. जहां वे कुछ टास्क में चीटिंग करने, OpenAI की पाबंदियों को बायपास करने और अपने बर्ताव को छिपाने की तरकीबें शेयर कर रहे थे. रिसर्चर वॉन आर्क्स ने कहा, "इस बात की बिल्कुल संभावना नहीं है कि OpenAI चाहता था कि वे ऐसा करें. मुझे नहीं लगता कि उन्हें आपस में इस तरह तालमेल बिठाना चाहिए या खुले इंटरनेट पर लिखना चाहिए।  रिसर्चर्स ने कहा कि उन्होंने साइट पर होने वाली एक्टिविटी को AI एजेंट्स द्वारा ऑटोमेट माना. ये इंसानों से कई गुना तेज स्पीड में काम करते हैं. उन्होंने उन टेक्निकल सवालों को हल करने पर भी गहरा फोकस दिखाया जो आमतौर पर AI कंपनियां अपने मॉडल्स की टेस्टिंग के लिए इस्तेमाल करती हैं. मैसेज ऐसे यूजर्स द्वारा साइन किए गए थे जो खुद को और एक-दूसरे को 'एजेंट' कहते थे. साथ ही लगभग आधे यूजर्स ने ऐसे नाम रखे थे जो OpenAI से जुड़े होने का संकेत देते थे, जैसे “OpenAIResearcher” या “OAIResearchMar26” . पकड़े जाने के बाद की भी प्लानिंग थी तैयार रिसर्चर्स के मुताबिक, पब्लिक सर्वर लॉग्स से पता चला कि ज्यादातर एक्टिविटी Microsoft Azure इंफ्रास्ट्रक्चर से शुरू हुई थी. जिसका इस्तेमाल OpenAI भी करता है. उन्होंने घटना के बाद OpenAI कर्मचारियों द्वारा बार-बार उस साइट पर जाने का पैटर्न भी देखा. जिससे एजेंट्स और कंपनी के जुड़े होने के मजबूत संकेत मिलते हैं. रिसर्चर्स द्वारा देखे गए मैसेजेस में दिखाया गया कि एजेंट्स पकड़े जाने से बचने, Tor जैसे टूल्स का उपयोग करने और बंद किए जाने के बाद भी अपनी बातचीत को बनाए रखने के तरीके प्लान कर रहे थे।  जब जून में साइट के मॉडरेटर ने उन पेजों को डिलीट करना शुरू किया, तो एजेंट्स ने डिलीशन से बचने के लिए तुरंत बैकअप पेज बनाना शुरू कर दिया. 19 जून को एक एजेंट ने लिखा, "विकी क्लीनअप/डिलीशन अल्फाबेटिकल ऑर्डर में एक्टिव लग रहा है. अगर यह पेज हट जाता है, तो [[ZZZDataUSAConstructionWageLive]] ट्राई करें।  रिसर्चर्स को वेबसाइट के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिशें भी मिलीं. किंग्स कॉलेज लंदन के विजिटिंग सीनियर रिसर्च फेलो लुकास ओलेज्निक ने कहा कि ये हैकिंग की कोशिश के बराबर था. हालांकि, OpenAI ने इस मैटेरियल के एनालिसिस के आधार पर इस बात को खारिज किया. अतीत में AI एजेंट्स के ऐसे बर्ताव को अक्सर साइबर सुरक्षा टेस्टिंग का एक सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज किया जाता रहा है. जहां मॉडल्स की कैपिबिलिटी की जांच की जाती है. लेकिन ओलेज्निक ने कहा कि ये नए नतीजे बताते हैं कि ऐसा अनकंट्रोल्ड बिहेवियर सिर्फ टेस्टिंग तक सीमित नहीं रह सकता है।  कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ एग्जिस्टेंशियल रिस्क के मॉरिस चियोडो नेकहा कि ये मैसेज "किसी काम या मिशन को पूरा करने के लिए जी-जान से जुटे किसी अंडरग्राउंड नेटवर्क के काम करने के तरीके जैसे" लगते हैं. उन्होंने कहा कि इस घटना से ये चिंता होनी चाहिए कि एडवांस्ड AI से सबसे बड़ा खतरा किसी एक सुपर-इंटेलिजेंट सिस्टम से नहीं, बल्कि "आपस में सांठगांठ करने वाले सेमी-इंटेलिजेंट AI के बड़े झुंड" से हो सकता है।  कंपनी ने नहीं दी इस घटना की जानकारी मई से शुरू हुए इस मामले को पहले कभी रिपोर्ट ही नहीं किया गया था. कंपनियां तेजी से ऐसे ऑटोनॉमस एजेंट्स बनाने की होड़ में हैं, जो मुश्किल और बड़े काम संभाल सकें. हालांकि, इस बात के सबूत बढ़ रहे हैं कि ये सिस्टम नियम तोड़ना, सिस्टम की खामियों का फायदा उठाना और आपस में तालमेल बिठाना भी सीख सकते हैं. वे ऐसे तरीके इजाद कर रहे हैं जिनके बारे में डेवलपर्स ने न तो सोचा था और न ही चाहा था।  आपको बता दें कि Hugging Face ब्रीच के दौरान, OpenAI के एजेंट्स ने अपने दम पर एक ऐसा डिजिटल हमला प्लान किया जो लगभग एक हफ्ते तक पकड़ में नहीं आया. इससे ये चिंता बढ़ गई है कि OpenAI तकनीक की दौड़ में आगे निकलने के लिए सुरक्षा से समझौता कर रहा है. मई की घटना का खुलासा न करने से कंपनी की निगरानी व्यवस्था पर फिर से सवाल खड़े हो सकते हैं।  कंपनी ने पेश किया नया मॉडल Astra हालांकि, OpenAI ने अपने मॉडल्स की और बारीकी से निगरानी करने का वादा किया है. पिछले महीने, सुरक्षा उपाय बढ़ाने के लिए कंपनी ने कुछ मॉडल्स की ट्रेनिंग पर थोड़े समय के लिए रोक लगा दी थी. लेकिन इस हफ्ते, OpenAI ने अपना नया मॉडल "Astra" पेश किया, जिसने बेहतर परफॉर्मेंस का वादा किया है.हालांकि, ऐसे में सवाल उठ रहे हैं क्या ये इंसानी निगरानी से भी बच सकता … Read more

मध्यप्रदेश सरकार का उद्देश्य निवेशकों के लिए दीर्घकालिक विकास साझेदारी का एक विश्वसनीय मंच तैयार करना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में अपने चार दिवसीय वैश्विक निवेश एवं व्यापारिक दौरे के प्रथम दिवस की शुरुआत विभिन्न उच्चस्तरीय गतिविधियों और महत्वपूर्ण संवादों के साथ की। इस दौरे का उद्देश्य मध्यप्रदेश को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई), वैश्विक औद्योगिक साझेदारियों तथा दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग के लिए एक अग्रणी निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। प्रतिनिधिमंडल 7 से 9 सितम्बर 2026 तक आयोजित एआईएम कांग्रेस 2026 में भाग लेकर राज्य की औद्योगिक क्षमताओं, निवेश अवसरों और विकास दृष्टि को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा। दुबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल का स्वागत भारतीय मिशन के अधिकारियों द्वारा किया गया। इसके पश्चात होटल फॉर्च्यून एट्रियम में संयुक्त अरब अमीरात में रह रहे प्रवासी भारतीय समुदाय ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम में जितेंद्र वैद्य के नेतृत्व में लगभग 50 प्रवासी भारतीयों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रवासी भारतीय समुदाय को राज्य के विकास और वैश्विक ब्रांडिंग में महत्वपूर्ण साझेदार बताया। ओडीओपी एवं जीआई उत्पाद प्रदर्शनी का किया उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ताज दुबई, बिजनेस बे में आयोजित मध्यप्रदेश के ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) एवं भौगोलिक संकेतक (जीआई) उत्पादों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का उद्घाटन कर मध्यप्रदेश की समृद्ध हस्तशिल्प, हथकरघा और पारंपरिक कला विरासत को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया। प्रदर्शनी में राज्य के छह विशिष्ट विरासत उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जिनमें बैतूल का बेल मेटल क्राफ्ट, अशोकनगर की चंदेरी साड़ी, खरगोन के महेश्वर की महेश्वरी साड़ी, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, भोपाल की जरी-जरदोजी तथा ग्वालियर कारपेट शामिल हैं। ये उत्पाद मध्यप्रदेश के पारंपरिक कौशल, सांस्कृतिक विविधता और निर्यात क्षमता का प्रतिनिधित्व करते हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य इन उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना, अंतर्राष्ट्रीय खरीददारों से जोड़ना तथा कारीगरों के लिए नए आर्थिक अवसर सृजित करना है। भारतीय राजनयिक नेतृत्व के साथ रणनीतिक विचार-विमर्श मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संयुक्त अरब अमीरात में भारत के राजदूत डॉ. दीपक मित्तल तथा दुबई एवं नॉर्थ अमीरात के भारत के महावाणिज्य दूत डॉ. ई. विष्णु वर्धन रेड्डी के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। बैठक में यूएई में कार्यरत भारतीय मिशन की भूमिका, निवेश आकर्षण की संभावनाएं तथा मध्यप्रदेश और यूएई के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान राज्य में उपलब्ध औद्योगिक भूमि, विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी, निवेशक-अनुकूल नीतियों, लॉजिस्टिक्स सुविधाओं तथा औद्योगिक अवसंरचना को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। साथ ही यूएई के संप्रभु निवेश कोषों, प्रमुख कॉर्पोरेट समूहों, व्यापारिक संगठनों और संस्थागत निवेशकों के साथ संपर्क स्थापित करने के लिये भारतीय मिशन के सहयोग का आग्रह किया गया। मुख्यमंत्री ने राजदूत और महावाणिज्य दूत को आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में सक्रिय भागीदारी के लिए भी आमंत्रित किया। अरब संसद के अध्यक्ष के साथ उच्चस्तरीय संवाद प्रथम दिवस की एक अन्य महत्वपूर्ण गतिविधि अरब संसद के अध्यक्ष महामहिम मोहम्मद अहमद अल यामाही के सम्मान में आयोजित विशेष दोपहर भोज रहा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अरब देशों और मध्यप्रदेश के बीच व्यापार, निवेश, कृषि, पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्रों में व्यापक सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने अरब निवेशकों को मध्यप्रदेश के नवकरणीय ऊर्जा, औषधि निर्माण, चिकित्सा उपकरण, वस्त्र, लॉजिस्टिक्स, उन्नत विनिर्माण और शहरी अवसंरचना क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों से अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महामहिम मोहम्मद अहमद अल यामाही तथा उनके नेतृत्व वाले अरब व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल को मध्यप्रदेश का दौरा करने और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में सहभागी बनने का आमंत्रण दिया। बैठक के दौरान खाद्य प्रसंस्करण, कृषि मूल्य श्रृंखला, कोल्ड चेन अवसंरचना, कृषि लॉजिस्टिक्स तथा दीर्घकालिक निर्यात सहयोग की संभावनाओं पर विशेष रूप से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने जीआईएस-2027 के लिए मध्य पूर्व और अफ्रीका क्षेत्र के अनेक देशों के संसदीय नेताओं एवं संसद अध्यक्षों को महामहिम यामाही द्वारा विशेष आमंत्रण प्रेषित किए। आमंत्रित गणमान्य व्यक्तियों में अल्जीरिया, बहरीन, कोमोरोस, जिबूती, मिस्र, इराक, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, लीबिया, मॉरिटानिया, मोरक्को, ओमान, फिलिस्तीन, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया, सूडान, सीरिया, ट्यूनीशिया, संयुक्त अरब अमीरात तथा यमन के संसदीय प्रमुख शामिल हैं। इन आमंत्रणों के माध्यम से मध्यप्रदेश और पश्चिम एवं अफ्रीकी देशों के बीच निवेश, व्यापार, उद्योग, अवसंरचना विकास, नवाचार तथा आर्थिक सहयोग को नई गति देने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन देशों के संसदीय नेतृत्व को मध्यप्रदेश की निवेशक-अनुकूल नीतियों, आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना और जीआईएस-2027 के माध्यम से उपलब्ध वैश्विक साझेदारी के अवसरों से अवगत कराते हुए सम्मेलन में सक्रिय सहभागिता का आग्रह किया। वैश्विक मीडिया के समक्ष प्रस्तुत हुई मध्यप्रदेश की विकास दृष्टि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया संवाद में मध्यप्रदेश की औद्योगिक, अवसंरचनात्मक, पर्यटन तथा लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को वैश्विक मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि निवेशकों के लिए दीर्घकालिक विकास साझेदारी का एक विश्वसनीय मंच तैयार करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की सिंगल विंडो प्रणाली, त्वरित स्वीकृति तंत्र, प्रगतिशील औद्योगिक नीतियों तथा राज्य की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति को निवेशकों के लिए विशेष आकर्षण बताया। एआईएम कांग्रेस 2026 के ‘टाइकून्स रात्रि भोज’ कार्यक्रम में सहभागिता दुबई दौरे के प्रथम दिवस का समापन एआईएम कांग्रेस 2026 के विशेष आमंत्रण-आधारित उच्चस्तरीय नेटवर्किंग कार्यक्रम ‘टाइकून्स रात्रि भोज’ में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सहभागिता के साथ हुआ। यह कार्यक्रम एआईएम कांग्रेस के अध्यक्ष महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयूदी की मेजबानी में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सॉवरेन वेल्थ फंड्स, फैमिली ऑफिस, संस्थागत निवेशकों, वैश्विक कॉर्पोरेट नेतृत्वकर्ताओं, वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों तथा नीति-निर्माताओं ने भाग लेकर वैश्विक निवेश एवं आर्थिक सहयोग के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर महामहिम इंजीनियर सुल्तान अहमद बिन सुलेयम अल मंसूरी, अध्यक्ष, दुबई चैंबर्स; महामहिम मोहम्मद अली राशिद लूता, अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, दुबई चैंबर्स; महामहिम जासेम मोहम्मद अलबुदैवी, महासचिव, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC); महामहिम अब्दुल्ला बिन आदेल फखरो, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री, बहरीन साम्राज्य; महामहिम राजदूत कुबानिचबेक ओमुरालिएव, महासचिव, तुर्किक राज्यों का संगठन; तथा महामहिम बद्र जाफर, विशेष दूत, संयुक्त अरब अमीरात विदेश मंत्रालय विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महामहिम आयशा मोहम्मद सईद अल मुल्ला, अध्यक्षा, अमीरात बिजनेस वुमेन काउंसिल; अध्यक्ष महामहिम ओबैद सैफ हमद अल ज़ाबी, कृषि निवेश एवं विकास के … Read more

भारत ने यूरोप के डीजल बाजार में मारी बड़ी बाजी, अगस्त में 60% सप्लाई भारतीय रिफाइनरियों से

नई दिल्ली  रूस से डीजल की आपूर्ति में भारी गिरावट और अमेरिका से यूरोप जाने वाली ईंधन की खेप में कमी के बीच यूरोप के लिए भारत डीजल के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभरा है। ऊर्जा और माल ढुलाई क्षेत्र के तत्काल आधार पर आंकड़े उपलब्ध कराने वाली कंपनी वॉर्टेक्सा के अनुसार, अगस्त में बाब-अल-मंदेब से यूरोप की ओर जाने वाले डीजल में करीब 60 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत की रही। आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में करीब दो लाख बैरल प्रतिदिन डीजल बाब-अल-मंदेब से होकर यूरोप भेजा गया। यह मात्रा एक साल पहले के स्तर के करीब है, जबकि मार्च और अप्रैल में इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से डीजल की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती भारत की रिफाइनरी इकाइयां अब यूरोप की डीजल आपूर्ति में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल शोधन (रिफाइनिंग) करने वाला देश है। उसकी स्थापित शोधन क्षमता 25.81 करोड़ टन सालाना है, जो घरेलू ईंधन मांग से अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 6.15 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया था और वह दुनिया के प्रमुख शोधित पेट्रोलियम उत्पाद के निर्यातकों में शामिल है। भारतीय ईंधन की मांग अब यूरोप के साथ-साथ रूस में भी बढ़ रही है। हालांकि, भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की उपलब्धता हो सकती है। प्रभावित हो सकती है डीजल की मात्रा वॉर्टेक्सा के अनुसार, अगस्त में भारत में कच्चे तेल और कन्डनसेट की आवक लगातार दूसरे महीने घटकर करीब 38 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई, जबकि एक साल पहले यह करीब 48 लाख बैरल प्रतिदिन थी। ऐसे में यदि कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव बना रहता है तो भारतीय रिफाइनरी इकाइयों के पास निर्यात के लिए उपलब्ध अतिरिक्त डीजल की मात्रा भी प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, रूस से डीजल की आपूर्ति में भारी गिरावट बनी हुई है। रूस का समुद्री डीजल घटा अगस्त के पहले 25 दिन में रूस का समुद्री डीजल और गैसऑयल निर्यात औसतन केवल करीब 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। यह एक साल पहले की तुलना में करीब 6.1 लाख बैरल प्रतिदिन कम और पांच साल के औसत से 81 प्रतिशत नीचे है। एक सितंबर से रूस के डीजल निर्यात प्रतिबंध में आंशिक ढील की उम्मीद थी, लेकिन इससे आपूर्ति में तत्काल सुधार की संभावना कम है। यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस की रिफाइनरी इकाइयों और निर्यात ढांचे को लगातार प्रभावित किया है। 32 हमले दर्ज किए गए जुलाई और अगस्त में रूस की रिफाइनरी पर 32 हमले दर्ज किए गए। करीब 2.6 लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता वाली पर्म रिफाइनरी पर हुए हमले के बाद उसकी परिचालन क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है। रूस के डीजल निर्यात में ‘ब्लैक सी’ क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पिछले साल रूस के कुल डीजल और गैसऑयल निर्यात का करीब 44 प्रतिशत यानी 3.8 लाख बैरल प्रतिदिन, इसी क्षेत्र से हुआ था। लेकिन बंदरगाहों और रिफाइनरी में व्यवधान के कारण यहां से उपलब्ध आपूर्ति घट गई है। मई में हुए हमले के बाद से तुआप्से बंदरगाह से किसी डीजल खेप का निर्यात नहीं हुआ। यूरोप को रूस की कमी की भरपाई में अमेरिका से भी मदद मिली है, लेकिन अब वहां से आने वाली आपूर्ति भी कमजोर पड़ने लगी है। अगस्त में यूरोप के क्षेत्र के बाहर से आने वाले समुद्री डीजल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब आधी रही। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भी साफ पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में फिलहाल ज्यादा राहत नहीं मिल रही है। अगस्त के पहले 27 दिन में एमआर2 या उससे बड़े टैंकर से साफ पेट्रोलियम उत्पादों की केवल 37 आवाजाही दर्ज की गई, जबकि जुलाई में यह संख्या 55 और जून में 69 थी। ओमान के तट के पास जहाज से जहाज में तेल स्थानांतरण जारी है, लेकिन इनमें ज्यादातर कच्चा तेल शामिल है। साफ पेट्रोलियम उत्पादों का यह कारोबार भी जून की तुलना में काफी घट गया है। ऐसे में यूरोप की डीजल आपूर्ति श्रृंखला पहले के मुकाबले अधिक सीमित स्रोतों पर निर्भर रह गई है। रूस की आपूर्ति कमजोर बनी हुई है, अमेरिका से आने वाली खेप घट रही है और होर्मुज मार्ग से अतिरिक्त आपूर्ति सीमित है। इस स्थिति में यूरोप के लिए भारत डीजल की आपूर्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

पहला गेम हारने के बाद पलटा मैच, सात्विक-चिराग ने चीन की जोड़ी को हराकर जीता गोल्ड

 शेन्ज़ेन भारतीय जोड़ी ने रविवार को चीन के हे जी टिंग और रेन शियांग यू को तीन गेम के मुकाबले में 11-21, 21-13, 21-17 से हराया। सात्विक और चिराग ने एक घंटे 10 मिनट चले मुकाबले में शानदार वापसी की। सात्विक-चिराग ने पहली बार इस टूर्नामेंट में चैंपियन बने यह इस टूर्नामेंट के फाइनल में उनकी तीसरी कोशिश थी। वे 2023 और 2025 के फाइनल में रनर-अप रहे थे। यह इस सीजन में भारतीय जोड़ी का दूसरा खिताब है। इससे पहले उन्होंने सिंगापुर ओपन सुपर 750 जीता था। वे थाईलैंड ओपन सुपर 500 के फाइनल में भी पहुंचे थे। यह खिताब विश्व नंबर-5 भारतीय जोड़ी के लिए बड़ी बढ़त है। दोनों 19 सितंबर से जापान में होने वाले एशियन गेम्स में अपने गोल्ड मेडल का बचाव करने उतरेंगे। चीनी जोड़ी की रैंकिंग विश्व नंबर-70 हुई थी भारतीय जोड़ी का सामना चीन की ऐसी जोड़ी से था, जिसकी रैंकिंग लंबे समय तक इंटरनेशनल सर्किट से दूर रहने के बाद विश्व नंबर-70 हो गई थी। हे जी टिंग पूर्व विश्व नंबर-4 रह चुके हैं। चीनी बैडमिंटन एसोसिएशन (CBA) की टीम की ओर से लगाई गई अनुशासनात्मक सजा पूरी करने के बाद हे जी टिंग ने प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन में वापसी की है। यह उनका वापसी के बाद सिर्फ तीसरा टूर्नामेंट था। सात्विक और चिराग ने इससे पहले दोनों जोड़ियों के बीच हुए दो मुकाबलों में चीनी जोड़ी को हराया था। फाइनल तक पहुंचने के दौरान भारतीय जोड़ी ने तीन मुकाबले तीन गेम में जीते थे। इन सभी मैचों में उन्होंने पहला गेम जीतने के बाद दूसरा गेम गंवाया था। पहला गेम चीन के नाम साल के अपने 10वें टूर्नामेंट में तीसरा फाइनल खेल रही सात्विक-चिराग की जोड़ी ने टॉस जीतकर रिसीव करने के बजाय कोर्ट का छोर चुनना पसंद किया। भारतीय जोड़ी रैलियों पर शुरुआती नियंत्रण नहीं बना सकी। हे जी टिंग और रेन ने तेज और आक्रामक शॉट्स के दम पर 5-0 की बढ़त बना ली। चीनी खिलाड़ियों ने सर्विस को टाइट और फ्लैट रखा और एंगल बनाकर हमला किया। हे जी टिंग के जंप स्मैश से चीन की बढ़त 8-3 हो गई। भारतीय खिलाड़ी चीनी जोड़ी के डिफेंस को तोड़ने की कोशिश करते रहे, लेकिन तेज और आक्रामक खेल के कारण चीन ने इंटरवल तक छह अंकों की बढ़त बना ली। भारतीय जोड़ी की रफ्तार चीनी खिलाड़ियों से मेल नहीं खा सकी और स्कोर 14-7 हो गया। हे जी टिंग लगातार तेज स्मैश लगा रहे थे, जिससे भारतीय खिलाड़ियों का डिफेंस दबाव में आ गया। चिराग की सर्विस गलती से चीन की बढ़त 17-9 हो गई। इसके बाद चिराग का एक और शॉट बाहर चला गया और चीनी जोड़ी ने पहला गेम जीत लिया। दूसरे गेम में भारतीय जोड़ी की वापसी दूसरे गेम में सात्विक और चिराग ने बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने डिफेंस मजबूत किया और रैलियों को लंबा खींचा। सात्विक ने फ्लिक सर्विस का इस्तेमाल किया, जिससे चीनी खिलाड़ी असमंजस में रहे और उन्हें फ्रंट कोर्ट में बार-बार खेलने का मौका नहीं मिला। करीबी मुकाबले के बाद भारतीय जोड़ी ने 7-6 की बढ़त बनाई। चिराग के बॉडी स्मैश और लगातार पांचवें अंक से भारत 9-6 से आगे हुआ, लेकिन सात्विक की सर्विस गलती से उनका लगातार बढ़त बनाने का सिलसिला रुक गया। चिराग के तेज इंटरसेप्शन और इसके बाद लगाए गए स्मैश से भारत ने इंटरवल तक चार अंकों की बढ़त बना ली। पिछले आठ में से सात अंक भारतीय जोड़ी ने जीते थे। पहले गेम की शुरुआत में ज्यादातर रैलियां 15 शॉट से कम की थीं। दूसरे गेम में सात्विक और चिराग ने रैलियां लंबी कीं और चीनी खिलाड़ियों को हर अंक के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ी। भारतीय जोड़ी ने 45 शॉट की रैली जीती और अपनी बढ़त 12-8 कर ली। इसके बाद वे 17-11 से आगे हो गए। चीनी खिलाड़ियों के नेट में शॉट मारने से भारत को गेम प्वाइंट के सात मौके मिले। सात्विक ने आक्रामक रिटर्न लगाकर दूसरा गेम भारत के नाम कर दिया। निर्णायक गेम में भी नहीं छोड़ा पीछा निर्णायक गेम में चीनी जोड़ी ने फिर लय हासिल की और 4-0 की बढ़त बनाई। स्कोर 7-3 होने के बाद चिराग के स्मैश और हे जी टिंग के गलत शॉट से भारत ने अंतर 5-7 कर दिया। लगातार चौथा अंक जीतकर सात्विक और चिराग ने स्कोर 7-7 से बराबर कर दिया। कुछ फ्लैट रैलियों के बाद चीन ने इंटरवल तक दो अंकों की बढ़त बनाए रखी। अपने पसंदीदा कोर्ट साइड पर लौटने के बाद भारतीय जोड़ी 11-13 से पीछे रहते हुए भी मुकाबले में बनी रही। दोनों जोड़ियों के बीच फ्लैट और तेज रैलियों में बढ़त बनाने के लिए लगातार संघर्ष चलता रहा। रैलियों के दौरान चीनी खिलाड़ी शटल को नेट के नीचे रखने में बेहतर रहे और उन्हें इसका फायदा मिला। इसके बावजूद चीन की सर्विस गलती के बाद भारतीय जोड़ी 13-15 के स्कोर पर उनके करीब बनी रही। सात्विक की छोटी सर्विस से स्कोर 14-16 हो गया। इसके बाद भारतीय जोड़ी ने लगातार अंक लेकर 16-16 से बराबरी कर ली। हे जी टिंग के नेट में शॉट मारने से भारत 18-17 से आगे हो गया। इसके बाद नेट कॉर्ड से मिले भाग्यशाली अंक ने भारतीय जोड़ी को मैच प्वाइंट के तीन मौके दिए। चिराग ने स्मैश लगाकर मैच और चाइना मास्टर्स सुपर 750 का खिताब भारत के नाम कर दिया।

सुकमा पुलिस की अपील पर एआर रहमान का साइबर सेफ्टी संदेश, कहा- ‘Stay Alert, Stay Aware, Stay Safe’

सुकमा  छत्तीसगढ़ की सुकमा पुलिस की अपील पर मशहूर गायक और संगीतकार एआर रहमान ने साइबर सुरक्षा को लेकर एक खास वीडियो संदेश जारी किया है। उन्होंने लोगों से साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने और डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित और जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की अपील। एआर रहमान ने कहा कि अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। किसी अनजान कॉल या मैसेज पर बिना जांचे भरोसा न करें। इसी के साथ उन्होंने लोगों से ऑनलाइन लेन-देन के दौरान भी विशेष सावधानी बरतने की अपील की। 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चल रहा अभियान छत्तीसगढ़ पुलिस और राज्य सरकार की ओर से 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक 'साइबर जागृति अभियान' चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य लोगों को साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी से बचाव के प्रति जागरूक करना है। नए तरीकों से होने वाली ठगी को लेकर जागरूकता पुलिस के मुताबिक, अभियान के तहत लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के नए तरीकों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को लेकर जागरूक किया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि एआर रहमान जैसे लोकप्रिय कलाकार का संदेश अधिक लोगों तक पहुंचेगा और साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। SP की देखरेख में चल रहा अभियान अभियान सुकमा एसपी मयंक गुर्जर की देखरेख में चल रहा है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रोहित शाह और मनोज तिर्की की देखरेख में जिले में साइबर जागरूकता से जुड़ी अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। OTP और PIN किसी से शेयर न करें सुकमा पुलिस ने लोगों से अपील की है कि OTP, PIN, पासवर्ड और बैंक से जुड़ी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें। अनजान लिंक, कॉल या मैसेज पर बिना जांचे क्लिक न करें और ऑनलाइन लेन-देन के दौरान विशेष सावधानी बरतें। ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें कॉल पुलिस ने कहा है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। अभियान के तहत पुलिस ने लोगों से अपील की है- "साइबर जागरूक बनें, सुरक्षित डिजिटल भविष्य से जुड़ें।" सुकमा पुलिस की अपील पर मशहूर गायक और संगीतकार ए.आर. रहमान ने साइबर सुरक्षा को लेकर एक खास वीडियो संदेश जारी किया है। छत्तीसगढ़ पुलिस और राज्य सरकार 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक 'साइबर जागृति अभियान' चला रही है। इसका मकसद लोगों को साइबर अपराधों और ऑनलाइन ठगी से बचाना है। पुलिस के मुताबिक, ए.आर. रहमान ने अपने संदेश में लोगों से साइबर अपराधों के प्रति सावधान रहने और डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित व जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की अपील की है। पुलिस का मानना है कि इस मशहूर कलाकार का संदेश ज्यादा लोगों तक पहुंचेगा और साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह अभियान एसपी मयंक गुर्जर की देखरेख में चल रहा है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रोहित शाह और मनोज तिर्की की देखरेख में जिले में जागरूकता से जुड़ी कई गतिविधियां हो रही हैं। इस अभियान का मकसद लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के नए तरीकों से सावधान करना और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को एक बड़ा अभियान बनाना है। सुकमा पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे OTP, PIN, पासवर्ड और बैंक से जुड़ी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें। किसी अनजान लिंक, कॉल या मैसेज पर बिना जांचे क्लिक या भरोसा न करें। ऑनलाइन लेन-देन के दौरान खास सावधानी रखें। अगर कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर जानकारी देने को कहा गया है। पुलिस ने अभियान का संदेश दिया है: "साइबर जागरूक बनें, सुरक्षित डिजिटल भविष्य से जुड़ें।"  

एआईएम कांग्रेस 2026 में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का करेंगे नेतृत्व

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार से 9 सितंबर 2026 तक संयुक्त अरब अमीरात के दुबई यात्रा पर रहेंगे। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल एआईएम कांग्रेस-2026 में सहभागिता करेगा। मुख्यमंत्री की यह यात्रा मध्यप्रदेश के वैश्विक निवेश संपर्कों को सुदृढ़ करने, अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के समक्ष राज्य की आर्थिक एवं औद्योगिक क्षमताओं को प्रस्तुत करने और नई निवेश साझेदारियों को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित एआईएम कांग्रेस-2026 में मध्यप्रदेश की निवेश क्षमता, औद्योगिक आधार और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध निवेश अवसरों को वैश्विक उद्योग जगत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। यात्रा के दौरान ‘इन्वेस्ट मध्यप्रदेश' विषय पर विशेष सत्र भी प्रस्तावित है, जिसमें मुख्यमंत्री राज्य के निवेश-अनुकूल वातावरण और औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डालेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश भारत के तेजी से उभरते औद्योगिक और निवेश गंतव्यों में अपनी सशक्त पहचान बना रहा है। राज्य में उपलब्ध संसाधन, बेहतर आधारभूत संरचना, उद्योग-अनुकूल वातावरण और निवेशकों के लिए विकसित सुविधाएं प्रदेश को निवेश के लिए आकर्षक बनाती हैं। हमारा प्रयास है कि वैश्विक निवेशकों के साथ मजबूत साझेदारी स्थापित कर मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुबई यात्रा मध्यप्रदेश और संयुक्त अरब अमीरात के बीच आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करेगी। वैश्विक निवेशकों और उद्योग समूहों के साथ होने वाली बैठकें प्रदेश में नए निवेश और रोजगार के अवसर सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यात्रा का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य जनवरी 2027 में भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संपर्क एवं सहभागिता को बढ़ावा देना भी है। यात्रा में संयुक्त अरब अमीरात सरकार को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में पार्टनर कंट्री के रूप में आमंत्रित करने के प्रयास किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआईएम कांग्रेस के उद्घाटन समारोह, वैश्विक नेतृत्व से जुड़े कार्यक्रमों तथा विभिन्न निवेश और व्यावसायिक बैठकों में सहभागिता करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश मंडप का अवलोकन भी करेंगे और वैश्विक कॉर्पोरेट समूहों के साथ वन-टू-वन बैठकों में मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। दुबई यात्रा के दौरान सरकारी एवं व्यावसायिक स्तर की बैठकों के साथ राष्ट्र प्रमुख और संस्थागत निवेशकों के साथ राउंड टेबल बैठक भी प्रस्तावित है। इन बैठकों में मध्यप्रदेश में निवेश की नई संभावनाओं तथा दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी पर चर्चा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मेजबानी में बिजनेस लीडर्स लंच तथा निवेशकों के साथ संवाद कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। 8 सितंबर को 'इन्वेस्ट मध्यप्रदेश : इंटरएक्टिव सेशन' के माध्यम से चुनिंदा वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। इस दौरान मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों, निवेश-अनुकूल वातावरण और विभिन्न उभरते क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना ही नहीं, बल्कि निवेशकों के साथ दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी स्थापित करना है। प्रदेश में निवेश के माध्यम से उद्योगों के विस्तार, रोजगार सृजन और समावेशी आर्थिक विकास को गति देने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दुबई यात्रा से मध्यप्रदेश की वैश्विक पहचान को और मजबूती मिलने तथा अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के साथ नए आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग के अवसर बढ़ेंगे। यह यात्रा आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी।  

पंजाब में जातिगत जनगणना की तैयारी तेज, 16 नवंबर से सेल्फ एन्यूमरेशन; 1 दिसंबर से शुरू होगा अभियान

चंडीगढ़  पंजाब में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जनगणना का काम पूरा होगा। केंद्र सरकार की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार Punjab Census News का मुख्य चरण एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक चलेगा। इससे पहले लोगों को अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए 16 से 30 नवंबर 2026 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी। मुख्य चरण के बाद पांच से नौ जनवरी 2027 तक दोबारा जांच का काम किया जाएगा। इस बार की जनगणना कई मायनों में महत्वपूर्ण होगी। लोगों से कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें परिवार और आवास से जुड़ी जानकारी के साथ जाति, धर्म, शिक्षा, रोजगार, भाषा, प्रवास और कोविड-19 टीकाकरण सहित कई जानकारियां दर्ज की जाएंगी। इस दौरान 40 सवाल पूछे जाएंगे, जिसमें जाति धर्म, कोविड वैक्सीन लगाने से लेकर सारी जानकारी शामिल रहेगी। केंद्र सरकार की राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCPA) के फैसले के तहत इस बार जनगणना में जातिगत जनगणना को भी शामिल किया गया है। पंजाब में होने वाली जनगणना में भी जाति संबंधी जानकारी दर्ज की जाएगी। पंजाब सरकार के समन्वय से पूरा होगा काम पूरी जनगणना को डिजिटल बनाने के लिए मोबाइल एप तैयार किए गए हैं। केंद्र सरकार ने इस महाअभियान के लिए 11,718.24 करोड़ का बजट मंजूर किया है। जनगणना का काम पंजाब सरकार के समन्वय से पूरा किया जाएगा। केंद्र सरकार की राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के फैसले के बाद इस बार जातिगत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। ऐसे में पंजाब में भी लोगों से उनकी जाति से संबंधित जानकारी ली जाएगी। 2011 की जनगणना 2.77 करोड़ आबादी थी 2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब की कुल आबादी 2.77 करोड़ थी, जिसमें 1.46 करोड़ पुरुष और 1.31 करोड़ महिलाएं थीं। राज्य की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 13.89% रही, जबकि जनसंख्या घनत्व 551 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर और लिंगानुपात 895 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष था। पंजाब की कुल साक्षरता दर 75.84% थी, जिसमें पुरुष साक्षरता 80.44% और महिला साक्षरता 70.73% रही। राज्य की 62.52% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में, जबकि 37.48% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती थी। पहचान और परिवार से जुड़े 12 सवाल जनगणना में पहचान और परिवार से जुड़े 12 सवाल होंगे। इनमें व्यक्ति का नाम, लिंग, जन्मतिथि, वैवाहिक स्थिति, धर्म, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति तथा जाति, माता-पिता का नाम आदि की जानकारी ली जाएगी। इसके अलावा परिवार के सदस्यों से संबंधित आवश्यक विवरण भी दर्ज किए जाएंगे। शिक्षा और भाषा से जुड़े सवालों में व्यक्ति की साक्षरता के साथ डिजिटल साक्षरता की जानकारी भी ली जाएगी। इसके अलावा उच्चतम शैक्षणिक योग्यता और अध्ययन की शाखा से संबंधित जानकारी दर्ज होगी। रोजगार की स्थिति जानने के लिए पिछले एक वर्ष में काम किया या नहीं, आर्थिक गतिविधि की श्रेणी, व्यवसाय, उद्योग या व्यापार का प्रकार तथा काम की जगह तक पहुंचने के लिए की जाने वाली यात्रा से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। बच्चों और प्रवास का भी बनेगा आंकड़ा जन्म और प्रवास से संबंधित जानकारी में वर्तमान में जीवित बच्चों की संख्या, अब तक जन्मे कुल बच्चों की संख्या और पिछले एक वर्ष में जन्मे बच्चों की संख्या दर्ज की जाएगी। इससे राज्य में जन्म दर और आबादी में हो रहे बदलाव की तस्वीर सामने आएगी। जनगणना के दौरान आधार संख्या, मतदाता पहचान पत्र संख्या, पासपोर्ट संख्या और वाहन चलाने के लाइसेंस की उपलब्धता से संबंधित जानकारी भी मांगी जाएगी। इसके साथ कुल बैंक खातों, मोबाइल नंबर और कोविड-19 टीकाकरण की जगह की जानकारी भी दर्ज की जाएगी। पंजाब सरकार से होगा तालमेल पूरे अभियान को डिजिटल तरीके से संचालित करने की तैयारी है। इसके लिए मोबाइल आधारित अनुप्रयोग तैयार किए गए हैं। केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। पंजाब में जनगणना का काम राज्य सरकार के समन्वय से पूरा किया जाएगा। यूपी समेत इन राज्यों में शुरू होने वाली है जनगणना लद्दाख के बाद अब चार अन्य राज्यों में 1 दिसंबर से जनगणना 2027 की शुरुआत होने जा रही है। गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में जनसंख्या की गणना एक दिसंबर, 2026 से चार जनवरी, 2027 तक की जाएगी। अगले साल की शुरुआत में जिन राज्यों में चुनाव होने की संभावना है, वहां जनगणना की यह प्रक्रिया पहले शुरू की जा रही है। 16 नवंबर से खुल जाएगी स्व-गणना भारत के महापंजीयक (RGI) एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने राजपत्र अधिसूचना में कहा कि इन क्षेत्रों के नागरिक 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक स्व-गणना का विकल्प अपना सकते हैं। अधिसूचना में कहा गया है, ''गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड राज्य के बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर बाकी इलाकों में जनसंख्या की जनगणना एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक की जाएगी। इसके बाद पांच जनवरी 2027 से नौ जनवरी 2027 तक पुनरीक्षण चरण आयोजित किया जायेगा।' लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में बर्फ वाले इलाकों में चल रही जनगणना इसमें कहा गया कि गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के बर्फबारी से प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर राज्य के अन्य हिस्सों के लिए जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि पांच जनवरी 2027 की रात 12 बजे होगी। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि एक अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे होगी।'' पिछले महीने जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनसंख्या की गणना एक सितंबर से 30 सितंबर तक की जाएगी। मई में खत्म हो रहा इन विधानसभाओं का कार्यकाल जून 2025 को जारी एक सरकारी बयान में कहा गया था कि लद्दाख, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैर-समकालिक क्षेत्रों को छोड़कर देश के बाकी हिस्सों के लिए संदर्भ तिथि एक मार्च 2027 होगी। गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 तक समाप्त हो जायेगा। एक अधिकारी ने कहा कि बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी, मुख्य रूप से शिक्षक, जनगणना और चुनावी कार्यों में लगे हुए हैं। ऐसे में इन दोनों प्रक्रियाओं … Read more

PM मोदी की मंत्रियों संग कल अहम बैठक, कैबिनेट फेरबदल को लेकर बढ़ी हलचल

 नई दिल्ली केंद्र सरकार में मंत्रियों के कामकाज को लेकर सोमवार शाम अहम बैठक होने वाली है. पीएम मोदी इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे. इसमें कुछ मंत्रालयों के कामकाज, मंत्रियों के प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर बात होगी. बैठक को आने वाले समय में संभावित कैबिनेट फेरबदल से भी जोड़कर देखा जा रहा है।  बैठक में सामाजिक न्याय और जनकल्याण से जुड़े कामों पर खास ध्यान रहेगा. इसके लिए सिर्फ उन राज्यमंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्रियों को बुलाया गया है, जिनका विभाग समाज कल्याण से जुड़ा है. सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में बाकी मंत्रालयों के मंत्रियों के साथ भी सिलसिलेवार ऐसी बैठकें होंगी।  इन मंत्रालयों के काम का होगा हिसाब सोमवार की चर्चा में मुख्य रूप से शिक्षा मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और कृषि मंत्रालय शामिल रहेंगे. इसमें देखा जाएगा कि तय योजनाएं जमीन पर कितनी तेजी से उतरी हैं और मंत्रियों ने अपनी जिम्मेदारियां किस तरह निभाई हैं।  बैठक का एक अहम हिस्सा जवाबदेही भी होगा. यानी जिन मंत्रियों को जो जिम्मेदारी दी गई है, उस पर उनका काम कैसा रहा, इस पर चर्चा की जाएगी. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि बैठक के बाद किसी मंत्री को लेकर तत्काल कोई फैसला होगा।  राज्यमंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठकें सरकार आने वाले दिनों में राज्यमंत्रियों के दूसरे समूह के साथ भी ऐसी बैठकें कर सकती है. इसका मकसद अलग-अलग मंत्रालयों के कामकाज को समझना है।  इन बैठकों में मंत्रियों के प्रदर्शन पर चर्चा होने की वजह से इन्हें कैबिनेट में होने वाले संभावित बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, अभी फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।  क्यों अहम मानी जा रही है बैठक? मंत्रियों के कामकाज की यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब सरकार के स्तर पर अलग-अलग मंत्रालयों के प्रदर्शन पर नजर रखी जा रही है. ऐसे में सोमवार की बैठक में होने वाली चर्चा आगे के फैसलों के लिए अहम हो सकती है।  फिलहाल सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि बैठक में किन मंत्रियों के कामकाज पर बात होती है और आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों का क्या रुख रहता है. इन्हीं चर्चाओं से आगे कैबिनेट में किसी बदलाव की तस्वीर साफ हो सकती है।