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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण मॉडल

रायपुर बारिश की हर बूंद को सहेजने और उसे धरती के भीतर पहुंचाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने देश के सामने जनभागीदारी का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राज्य के पांच जिले भी जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के शीर्ष 10 जिलों में स्थान बनाने में सफल रहे हैं। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय मंच पर साझा की। सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री  अरुण साव ने राज्य में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी. आर. पाटिल सहित विभिन्न राज्यों के जल संसाधन मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। जल संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम नहीं, जनअभियान बनाया : मुख्यमंत्री  साय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल शासकीय योजनाओं और जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़कर इसे व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया गया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और अपने गृहग्राम बगिया में हल चलाकर खेती कर चुके हैं। इसलिए खेती और ग्रामीण जीवन में पानी का महत्व उन्होंने बहुत करीब से देखा और समझा है। किसान के लिए पानी केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उसकी फसल, परिवार, आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया है। उन्होंने कहा कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में लगभग चार प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला छत्तीसगढ़ ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। यह उपलब्धि केवल जल संरचनाओं की संख्या की नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रदेश में विकसित हो रही सामूहिक चेतना और जनभागीदारी की भी उपलब्धि है। कोरिया से निकला ‘5 प्रतिशत मॉडल’, किसान स्वयं दे रहे जमीन मुख्यमंत्री  साय ने सम्मेलन में कोरिया जिले से शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का विशेष उल्लेख किया। यह मॉडल जल संरक्षण में किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी का अभिनव उदाहरण है। इस पहल के अंतर्गत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं। इस हिस्से में ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर जाने के बजाय वहीं एकत्र हो और धीरे-धीरे जमीन के भीतर समाहित हो सके। इस मॉडल की विशेषता यह है कि इसमें किसान जल संरक्षण के केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार हैं। किसान अपनी भूमि उपलब्ध करा रहे हैं, पंचायतें और स्थानीय समुदाय सहयोग कर रहे हैं तथा विभिन्न विभागों और योजनाओं के समन्वय से जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि गांवों में जल संरक्षण की इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं। खेत में ही वर्षा जल को रोकने से भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलने के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है। लंबे समय में इससे खेती की वर्षा पर निर्भरता कम करने और जल सुरक्षा बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी। JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीनों चरणों में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। पहले दो चरणों में देश में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद तीसरे चरण में राज्य ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के प्रथम चरण JSJB 1.0 में छत्तीसगढ़ में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं। इस चरण में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा। दूसरे चरण JSJB 2.0 में प्रदेश में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 23 लाख 7 हजार 768 जल संरचनाओं का कार्य पूरा हो चुका है। इस चरण में भी छत्तीसगढ़ ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया। अब तीसरे चरण JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस चरण में प्रदेश में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 77 हजार 719 जल संरचनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है। इस प्रकार अभियान के अलग-अलग चरणों में छत्तीसगढ़ ने बड़े पैमाने पर जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण की संरचनाओं को विकसित और दर्ज किया है। इन प्रयासों का मूल उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर बाहर जाने से रोकना, स्थानीय स्तर पर उसका संचयन करना और अधिक से अधिक पानी को जमीन के भीतर पहुंचाना है। छत्तीसगढ़ के पांच जिले देश के टॉप-10 में राज्य स्तर की उपलब्धि के साथ ही छत्तीसगढ़ के जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। जल संरक्षण के क्षेत्र में सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं। इन जिलों में जल संरक्षण को स्थानीय समुदायों से जोड़ते हुए गांव और पंचायत स्तर पर वर्षा जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण के कार्य किए गए हैं। स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप जल संरचनाओं के निर्माण के साथ लोगों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह उपलब्धि बताती है कि जब शासन की योजनाओं के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी जुड़ती है, तो जल संरक्षण जैसे बड़े लक्ष्य को भी जनांदोलन का रूप दिया जा सकता है। 26 से घटकर 19 हुए पानी की कमी वाले ब्लॉक राज्य में किए जा रहे जल संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में पानी … Read more

पटना को मिलेगा ₹8,456 करोड़ का एलिवेटेड कॉरिडोर, नीचे 4 लेन-ऊपर 6 लेन का होगा निर्माण

पटना. राजधानी पटना के न्यू बाईपास पर जाम की समस्या से स्थायी निजात दिलाने की दिशा में बड़ी पहल होने जा रही है। अनीसाबाद से दीदारगंज तक करीब 13.14 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड एट-ग्रेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह बिहार का पहला ऐसा कॉरिडोर होगा, जिसमें मौजूदा सड़क के ऊपर छह लेन की एलिवेटेड सड़क होगी।रियोजना पर करीब 8,456 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस हिसाब से प्रति किलोमीटर निर्माण लागत करीब 643 करोड़ रुपये होगी। परियोजना पूरी होने के बाद दक्षिणी पटना के करीब 150 मोहल्लों की 10 लाख आबादी को न्यू बाईपास पर भारी वाहनों के कारण लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। नीचे चार लेन, ऊपर छह लेन की सड़क अनीसाबाद से दीदारगंज के बीच वर्तमान चार लेन सड़क को यथावत रखते हुए उसके ऊपर छह लेन की एलिवेटेड सड़क बनाई जाएगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारी वाहनों और स्थानीय यातायात को अलग-अलग कर दिया जाएगा। भारी वाहन एलिवेटेड सड़क से सीधे गुजरेंगे। स्थानीय वाहन नीचे की सड़क और सर्विस रोड का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे न्यू बाईपास पर बार-बार लगने वाले जाम की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है। 22 किमी सर्विस रोड, 10 रैंप और चार अंडरपास परियोजना सिर्फ एलिवेटेड सड़क तक सीमित नहीं होगी। इसके तहत सड़क के दोनों ओर कुल 22 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड बनाई जाएगी। इसके अलावा यातायात को सुगम बनाने के लिए 10 रैंप, दो फ्लाईओवर, तीन छोटे पुल और चार अंडरपास का निर्माण किया जाएगा। पटना-गया रेललाइन पर आठ लेन का रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) भी बनाया जाएगा। न्यू बाईपास और आसपास के इलाकों में जलजमाव की समस्या दूर करने के लिए पांच किलोमीटर से अधिक लंबी आधुनिक ड्रेनेज प्रणाली भी विकसित की जाएगी। इन प्रमुख जगहों पर खत्म होगा जाम कॉरिडोर बनने के बाद अनीसाबाद, सरिस्ताबाद, 90 फीट, पुराना बस अड्डा, अशोक नगर, कंकड़बाग-अशोक रोड, भूतनाथ, पहाड़ी, गुरु गोविंद सिंह लिंक पथ, कर्मलीचक और दीदारगंज जैसे प्रमुख इलाकों में यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। अभी इन क्षेत्रों में स्थानीय वाहनों के साथ बड़ी संख्या में ट्रक और दूसरे भारी वाहन भी गुजरते हैं। दोनों तरह के ट्रैफिक के एक ही मार्ग पर होने के कारण बाईपास पर अक्सर जाम की स्थिति बनती है। कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु से जुड़ेगा कॉरिडोर कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन महासेतु के चालू होने के बाद इस कॉरिडोर की उपयोगिता और बढ़ जाएगी। उत्तर बिहार से आने-जाने वाले भारी वाहनों को पटना शहर के भीतर प्रवेश किए बिना आगे बढ़ने का बेहतर मार्ग मिलेगा। कोइलवर-बिहटा क्षेत्र से आने वाले बालू और निर्माण सामग्री से लदे ट्रकों के लिए भी यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण होगा। इससे गांधी सेतु और आरा-छपरा सेतु पर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। उत्तर बिहार तक माल ढुलाई होगी आसान कॉरिडोर के बनने से वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय और दरभंगा समेत उत्तर बिहार के कई जिलों तक माल ढुलाई आसान और तेज हो सकती है। इससे पटना के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था को फायदा मिलने की उम्मीद है। परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) पर प्रस्तावित है। इसमें परियोजना की लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार और 60 प्रतिशत राशि निर्माण एजेंसी की ओर से लगाए जाने का प्रावधान है। सरकार निर्धारित अवधि में एजेंसी को भुगतान करेगी। अब तैयार होगी डीपीआर परियोजना के लिए अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। इसके बाद निर्माण से जुड़े अगले चरणों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पथ निर्माण मंत्री ईं. कुमार शैलेन्द्र के अनुसार, यह परियोजना केवल एक एलिवेटेड सड़क का निर्माण नहीं है, बल्कि भविष्य के ग्रेटर पटना की बढ़ती यातायात जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही बड़ी योजना है। इसका उद्देश्य भारी और स्थानीय यातायात को अलग कर पटना के न्यू बाईपास पर जाम, दुर्घटना और जलजमाव जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान करना है। परियोजना से क्या बदलेगा? भारी वाहनों का अलग कॉरिडोर: ट्रक और दूसरे भारी वाहन छह लेन की एलिवेटेड सड़क से गुजर सकेंगे। स्थानीय यातायात को राहत: नीचे की सड़क और सर्विस रोड का इस्तेमाल स्थानीय वाहन कर सकेंगे। जाम में कमी: अनीसाबाद से दीदारगंज के बीच प्रमुख जाम प्वाइंट पर यातायात सुगम होगा। सुरक्षित आवागमन: मोहल्लों से मुख्य सड़क पर आने-जाने वाले लोगों के लिए यातायात व्यवस्था सुरक्षित होगी। जलजमाव से राहत: पांच किलोमीटर से अधिक लंबी आधुनिक ड्रेनेज प्रणाली विकसित होगी। पुलों पर दबाव कम: कच्ची दरगाह-बिदुपुर महासेतु के चालू होने के बाद गांधी सेतु समेत अन्य प्रमुख पुलों पर वाहनों का दबाव घट सकता है। व्यापार को रफ्तार: उत्तर बिहार के प्रमुख शहरों तक माल की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।

Gill-Bumrah का डाउनफॉल, Padikkal का उछाल; ICC Ranking के बाद शुभमन गिल के T20 भविष्य पर सवाल

नई दिल्ली भारतीय कप्तान शुभमन गिल और स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को ताजा ICC टेस्ट रैंकिंग में झटका लगा है. गिल बल्लेबाजों की रैंकिंग में दो पायदान फिसलकर 9वें स्थान पर पहुंच गए, जबकि बुमराह गेंदबाजों की रैंकिंग में दूसरे से तीसरे नंबर पर खिसक गए. दूसरी ओर, देवदत्त पडिक्कल ने 5 स्थान की छलांग लगाकर 54वां स्थान हासिल किया है।  श्रीलंका दौरे पर तीन पारियों में गिल के बल्ले से सिर्फ एक अर्धशतक निकला था. वह अब भी भारत के दूसरे सबसे ऊंची रैंकिंग वाले बल्लेबाज हैं, जबकि ऋषभ पंत 7वें स्थान पर कायम हैं. यशस्वी जायसवाल 11वें नंबर पर बरकरार हैं।  पडिक्कल के लिए श्रीलंका दौरा शानदार रहा. दो टेस्ट में 328 रन और दो शतक के साथ वह भारत के सबसे सफल बल्लेबाज रहे, जिसका फायदा उन्हें रैंकिंग में भी मिला।  वहीं बुमराह श्रीलंका दौरे पर घुटने की चोट के कारण नहीं खेल सके थे. वह अब गेंदबाजों की रैंकिंग में तीसरे स्थान पर हैं, जहां ऑस्ट्रेलिया के मिचेल स्टार्क और न्यूजीलैंड के मैट हेनरी उनसे आगे हैं।  श्रीलंका के सोनल दिनुषा ने भी रैंकिंग में जबरदस्त छलांग लगाई है. भारत के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में शानदार शतक के बाद वह 29 पायदान ऊपर चढ़कर बल्लेबाजों की रैंकिंग में 25वें स्थान पर पहुंच गए हैं।  2028 वर्ल्ड कप प्लान से बाहर हो चुका है ‘प्रिंस’? वर्ल्ड कप 2026 जीतने से ठीक पहले जो बल्लेबाज तीनों फॉर्मेट का कप्तान माना जा रहा था वो आज फटाफट क्रिकेट में हाशिए पर चढ़ाया जा चुका है. वैसे भारतीय क्रिकेट टीम जब भी किसी नए दौर में कदम रखती है, तो कुछ फैसले प्रशंसकों और विश्लेषकों को हैरान कर देते हैं. ऐसा ही एक चौंकाने वाला फैसला हाल ही में देखने को मिला, जब अफ़ग़ानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए घोषित भारतीय टीम से सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल का पत्ता फिर से कट गया।  शुभमन गिल को तीनों फॉर्मेट में भारत का अगला बल्लेबाजी स्तंभ माना जा रहा था. वनडे और टेस्ट में उन्हें कप्तानी की जिम्मेदारी देकर ‘भविष्य का कप्तान’ घोषित किया जा चुका है. ऐसे में टी20 टीम से उनका बाहर होना महज एक आराम देना नहीं, बल्कि भारतीय चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट के एक बड़े रणनीतिक बदलाव का सीधा संकेत है. यह फैसला साफ करता है कि टी20 इंटरनेशनल में अब गिल की जगह पक्की नहीं है और टीम मैनेजमेंट आगामी बड़े टूर्नामेंट्स के लिए नए विकल्पों को आजमा रहा है।  4 ओपनर्स की मौजूदगी: 2028 वर्ल्ड कप प्लान से गिल बाहर? भारतीय चयनकर्ताओं ने अफ़ग़ानिस्तान के खिलाफ सीरीज में चार बेहतरीन सलामी बल्लेबाजों को टीम में शामिल किया है. इनमें वैभव सूर्यवंशी , ईशान किशन, अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन जैसे आक्रामक नाम शामिल हैं. टीम में इन चार ओपनर्स की मौजूदगी सीधा इशारा करती है कि 2028 टी20 वर्ल्ड कप के शुरुआती खाके से शुभमन गिल फिलहाल बाहर हो चुके हैं. चयनकर्ताओं की इस रणनीति के पीछे मुख्य वजहों को समझने की कोशिश करते हैं. आज का टी20 क्रिकेट पहली ही गेंद से प्रहार करने वाले बल्लेबाजों की मांग करता है. टीम मैनेजमेंट शीर्ष क्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों जैसे वैभव और अभिषेक को प्राथमिकता दे रहा है, जो पावरप्ले का भरपूर फायदा उठा सकें. रोहित शर्मा और विराट कोहली के युग के बाद, टीम अब ‘एंकर’ (पारी संभालने वाले) बल्लेबाजों के बजाय ‘इम्पैक्ट’ (तेज रन बनाने वाले) खिलाड़ियों पर दांव लगा रही है. गिल की शैली पारी को बुनने की है, जो इस नए एप्रोच में फिट नहीं बैठ रही।  दो फॉर्मेट के कप्तान का टी20 स्ट्राइक रेट कमजोर कड़ी शुभमन गिल को टेस्ट और वनडे क्रिकेट का कप्तान (या उप-कप्तान) बनाकर बोर्ड ने उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया है। लेकिन टी20 इंटरनेशनल में उनका प्रदर्शन और विशेषकर उनका स्ट्राइक रेट उनके लिए सबसे बड़ा रोड़ा बन गया है. वैभव, संजू और अभिषेक के मुकाबले गिल का टी20 इंटरनेशनल में करियर स्ट्राइक रेट लगभग 135 से 139 के बीच झूलता रहा है. आज के दौर में जहां ओपनर्स 150 से अधिक के स्ट्राइक रेट से रन बना रहे हैं, वहां गिल का यह आंकड़ा काफी साधारण नजर आता है.शुरुआती ओवर्स में गिल को क्रीज पर सेट होने के लिए गेंदे चाहिए होती हैं. इससे पावरप्ले में टीम का रन रेट धीमा हो जाता है, जिसका दबाव आने वाले बल्लेबाजों पर पड़ता है. हलांकि आईपीएल में गिल ने शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत गेंदबाजी आक्रमण और कड़े हालात में वे लगातार तेज गति से रन बनाने में संघर्ष करते दिखे हैं।  क्या गिल के लिए रास्ते बंद हो चुके हैं? अफ़ग़ानिस्तान सीरीज से बाहर होने का मतलब यह कतई नहीं है कि शुभमन गिल का टी20 करियर खत्म हो गया है. हालांकि, इसने उनके लिए खतरे की घंटी जरूर बजा दी है यदि उन्हें टी20 टीम में दोबारा वापसी करनी है और 2028 वर्ल्ड कप की योजना का हिस्सा बनना है, तो उन्हें अपने खेल के तरीके में बड़ा बदलाव करना होगा. उन्हें आईपीएल और घरेलू टी20 मैचों में खुद को एक आक्रामक और निडर बल्लेबाज के रूप में साबित करना होगा, जो पहली ही गेंद से गेंदबाजों पर हावी हो सके. फिलहाल के लिए, ‘प्रिंस’ को यह समझना होगा कि टी20 क्रिकेट में सिर्फ क्लास नहीं, बल्कि ‘इम्पैक्ट’ और ‘स्पीड’ ही राज करती है। 

बीज से बाजार तक और खेत से निर्यात तक हर कदम पर राज्य सरकार किसानों के साथ किसानों को देंगे दिन में दस घंटे बिजली

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जिसके हाथ में हल है, वही इस देश का असली बल है। उन्होंने किसानों के पसीने को मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था का “फ्यूल” बताते हुए कहा कि सरकार खेत से लेकर खातों तक और बीज से लेकर बाजार तक हर कदम पर प्रदेश के किसानों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बलराम, बल के देवता ही नहीं, श्रम के सम्मान और कृषि गौरव के जीवंत प्रतीक हैं। हलधर के रूप में उन्होंने देश में खेती-किसानी को विस्तार दिया और इसे लोककल्याण का माध्यम भी बनाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को हल षष्ठी के अवसर पर ग्वालियर में हुए बलराम जयंती महोत्सव एवं सहकारी किसान समागम कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने यहां बड़ी संख्या में मौजूद किसानों और अन्नदाताओं को बलराम जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बलराम जयंती हमारे खेतों की हरियाली और किसानों की समृद्धि का पुनीत उत्सव है। आयोजकों ने मुख्यमंत्री को खेती-किसानी के पुण्य प्रतीक के रूप में हल भेंट किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक शिवपुरी को अपनी वर्तमान अवस्था से उबरने के लिए राज्य शासन की ओर से जरूरी मदद देने की घोषणा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान कल्याण से जुड़े चार महत्वपूर्ण कार्यों का शुभारंभ भी किया। मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक से ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल से किसान अब घर बैठे आवेदन कर सकेंगे। इस अवसर पर शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण योजना के सरलीकरण का भी शुभारंभ हुआ। इसके तहत खरीफ और रबी कृषि ऋण की अलग-अलग अदायगी की बाध्यता समाप्त करते हुए किसानों को अपनी सुविधा के अनुसार 12 माह में ऋण चुकाने की सुविधा दी गई है। मुख्यमंत्री ने किसान कृषक कवच योजना का भी शुभारंभ किया। इस योजना में ऐसे किसानों को भी ऋण और शासकीय योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया है, जिनके खातों की जांच लंबित होने से वे अब तक शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित थे। मुख्यमंत्री ने गांवों में सहकारिता गतिविधियों को मजबूत करने के लिए 200 नई पैक्स संस्थाओं के कार्यालयों का भी शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने अपेक्स बैंक की ग्वालियर में संभागीय शाखा का शुभारंभ भी इस अवसर पर किया। किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार बीज से बाजार तक और खेत से निर्यात तक किसान की पूरी यात्रा को मजबूत कर रही है। उन्होंने मध्यप्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की मंशा व्यक्त करते हुए कहा कि हम प्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनायेंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के हर ब्लॉक में एक वृंदावन ग्राम विकसित किया जा रहा है और चारा अनुदान 20 से बढ़ाकर 40 रुपये किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि हमारी विरासत है, एग्री-टेक और एग्री-बिजनेस हमारा भविष्य है। प्रदेश में तकनीक, प्रसंस्करण और बाजार के माध्यम से नई कृषि क्रांति लाई जा रही है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उद्यानिकी, जैविक खेती, मत्स्य पालन और नई फसलों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने किसानों से पानी की हर बूंद का सदुपयोग करने, प्राकृतिक खेती अपनाने, उत्पादन की ग्रेडिंग-प्रोसेसिंग-पैकेजिंग कर सीधे बाजार से जुड़ने, फसल विविधीकरण अपनाने और युवाओं को कृषि उद्यमिता से जोड़ने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की समृद्धि में ही मध्यप्रदेश की समृद्धि है। उन्होंने किसानों से फार्मर आईडी बनवाने की अपील करते हुए कहा कि इससे शासकीय योजनाओं, समर्थन मूल्य के भुगतान तथा सब्सिडी पर खाद-बीज की सुविधा आसान होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान  बलराम ने कृषि को प्रकृति के साथ जोड़कर स्वावलंबन का नया अध्याय शुरू किया था। भारतीय संस्कृति में खेती को सर्वोत्तम माना गया है। खेती से प्रकृति समृद्ध होती है और मनुष्य को अनाज मिलता है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने चार श्रेणियों- गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण का संकल्प लिया है। हमारे लिए सीमा पर जवान और खेतों में किसान दोनों बराबर सम्मान रखते हैं। अन्नदाता अपने अथक परिश्रम से देश को समृद्ध बनाता है। राज्य सरकार खेतों से लेकर खातों तक किसानों के कल्याण पर विशेष ध्यान दे रही है। किसानों को पैक्स समितियों के माध्यम से लाभ दिया जा रहा है। किसान कवच योजना के माध्यम से हमारी सरकार किसानों के साथ खड़ी है। प्रदेश में किसानों को सिंचाई के लिए 24 घंटे बिजली मिल रही है। अब दिन में भी बिजली मिलेगी। मध्यप्रदेश बिजली उत्पादन में अब देश का अग्रणी राज्य बना है। प्रदेश में सिंचाई का रकबा अभी 60 लाख हेक्टेयर से अधिक है, जिसे अगले ढाई वर्ष में 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों को कर्ज चुकाने की सुविधा दी है। अब उन्हें 6-6 माह में खाता पलटने की जरूरत नहीं है। नई व्यवस्था के मुताबिक, अब किसान वर्ष में किसी भी समय कर्ज की राशि भर सकते हैं। किसान अनाज के साथ उद्यानिकी फसलों से लाभ कमाएं। इसके लिए "एक बगिया मां के नाम'' योजना की शुरुआत की गई है। प्रदेश सरकार पशुपालन को भी प्रोत्साहित कर रही है। दूध उत्पादन को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए नई गौपालन योजना की शुरुआत की है। इस योजना में पशुपालकों को 40 लाख के ऋण पर 10 लाख का अनुदान दिया जा रहा है। किसानों को मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन और बकरी पालन जैसी योजनाओं से भी जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में युवा कल्याण के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। बोर्ड परीक्षाओं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप बांटे गए है। हमारे बच्चे पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर बनें। लेकिन खेती से रिश्ता बनाए रखें। कृषि हमारी समृद्ध संस्कृति की गौरवशाली विरासत है। शासकीय स्कूलों के बच्चों को किताबें, ड्रेस, साइकिलें बांटी जा रही हैं। प्रदेशभर में भव्य सांदीपनि विद्यालय बन रहे हैं। युवाओं को उद्योग और रोजगार से जोड़ा जा रहा है। हम समृद्ध मध्यप्रदेश में रोजगार देने वाले युवा तैयार करने पर काम कर रहे हैं। मध्यप्रदेश की धरती पर सबसे पहले केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की शुरुआत की गई है। मध्यप्रदेश … Read more

मुख्यमंत्री ने श्योपुर में बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली संबोधित किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों को सतत् रूप से सुविधाएं देने का कार्य किया जा रहा है, अब किसानों को सिंचाई के लिए दिन में भी बिजली की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे वे दिन के समय में भी अपनी फसलों में पानी दे सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषि उपज मंडी परिसर श्योपुर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव एवं किसान मेले को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने श्योपुर के किसानों से संवाद भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि उपज मंडी श्योपुर में किसानों के लिए नवीन विश्राम गृह निर्माण के लिये 60 लाख रूपये की घोषणा की। ग्वालियर एयरपोर्ट से कार्यक्रम से वर्चुअली जुडने के दौरान श्योपुर जिले के प्रभारी मंत्री एवं नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला, कृषि मंत्री  एदल सिंह कंषाना, वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामनिवास रावत और अपेक्स बैंक अध्यक्ष  महेन्द्र सिंह यादव उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्योपुर कहा कि प्रदेश में इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिसके तहत किसानों के कल्याण के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। किसानों के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण की सुविधा दी जा रही है। इसके तहत खरीफ एवं रबी फसलों के लिए 6-6 माह की अवधि ऋण चुकाने के लिए निर्धारित थी, जिसे बढाकर अब एक वर्ष कर दिया गया है, अर्थात किसान द्वारा जिस दिनांक से ऋण लिया जायेगा, उसे चुकाने की अवधि उस दिनांक से एक वर्ष तक की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय बढाने के लिए पशुपालन को भी बढावा दिया जा रहा है। दुग्ध सहकारी समितियों का और अधिक संख्या में गठन किया जाये और दुग्ध उत्पादन को बढाया जायें। उन्होंने कहा कि श्योपुर जिले में धान और गेहूं का बम्पर उत्पादन तो होता ही है, बल्कि जिले के किसान मोटे अनाज का उत्पादन भी कर रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर 12वी कक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले मेधावी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि गत दिवस मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रूपये की राशि प्रदाय की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपील की कि बच्चों को पढ़ायें तथा फिजूलखर्ची को रोकें, समाज में ऐसी परम्परा डाले, जिससे शादी-विवाह सहित अन्य सामाजिक आयोजनों में अधिक खर्च न हों। सामूहिक विवाह सम्मेलनों के माध्यम से विवाह संपन्न करायें। इस अवसर पर उन्होंने सभी को जन्माष्टमी की बधाई भी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर किसानों से संवाद किया। इस दौरान ग्राम राडेप के किसान  मुकुट चौधरी ने बताया कि शासन की योजना में कृषि अभियांत्रिकी के माध्यम से उन्हें पराली प्रबंधन के लिये कृषि यंत्र सब्सिडी पर प्राप्त हुए हैं, पराली प्रबंधन के लिए सुपर सीडर खरीदा था, जिस पर 1 लाख 20 हजार रूपये का अनुदान भी प्राप्त हुआ। बलराम कृषि महोत्सव एवं किसान मेले में आये किसानों को कृषि वैज्ञानिकों द्वारा खेती-किसानी की नवीन तकनीकी और फसलों के संबंध में लाभदायक जानकारी प्रदान की गई है। बलराम कृषि महोत्सव एवं किसान मेले के दौरान पशुपालन, कृषि, उद्यानिकी, मत्स्यपालन, एनआरएलएम द्वारा प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रगतिशील किसान  नरेन्द्र चौधरी,  भरत जाट,  शिशुपाल मीणा,  सोनू शर्मा,  बनवारी मीणा,  भुवनेश मीणा,  पूरण प्रजापति,  गोविद पटेलिया और  मान सिंह पटेलिया को शॉल एवं प्रशस्ती पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कक्षा 12वी में उत्कृष्ट परीक्षा परिणामों के लिए मेधावी विद्यार्थियों में अंकुश मेहर, भूमिका माहौर, आशा गुर्जर, अनमोल मीणा, अभय गुर्जर, पूनम जाट, वैष्णवी जाट, दीनबंधु मीणा, करण मीणा और मयंक शर्मा को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सहरिया विकास प्राधिकरण की अध्यक्ष  गुड्डी बाई, विधायक  बाबू जंडेल, नगरपालिका अध्यक्ष  रेणु सुजीत गर्ग, पूर्व विधायक  बृजराज सिंह चौहान, जिला पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत कृषि स्थाई समिति के सभापति  गिरधारी बैरवा, सांसद प्रतिनिधि  सुजीत गर्ग, कलेक्टर सु शीला दाहिमा, पुलिस अधीक्षक  मोती उर रहमान, जनप्रतिनिधि तथा बडी संख्या में किसानबंधु उपस्थित रहें।  

प्रधानमंत्री मोदी का देश के विकास और लोकतंत्र को सशक्त करने में अब तक योगदान रहा है अविस्मरणीय

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष केवल सत्ता के नहीं बल्कि निरंतर सेवा और राष्ट्र निर्माण के 25 वर्ष हैं। सात अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई यह संवैधानिक यात्रा आज एक ऐतिहासिक पड़ाव पर पहुंची है। गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री तक उन्होंने जन सेवा को अपना ध्येय माना और आज भी संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने देश के विकास और लोकतंत्र को सशक्त करने में अविस्मरणीय योगदान दिया है। इस गौरवपूर्ण यात्रा को जन-जन तक पंहुचाने के लिए प्रधानमंत्री  मोदी के जन्म दिवस 17 सितंबर से 17 अक्टूबर, एक माह तक सेवा-संकल्प अभियान चलाया जाएगा। प्रधानमंत्री  मोदी के सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषता सेवा का संस्कार है। यही संस्कार आज 'सेवा-संकल्प अभियान' के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प है। प्रधानमंत्री  मोदी के 25 वर्ष के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों को हम जनता के बीच ले जाएंगे। इस अभियान से जनकल्याण के लिए संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। अभियान को जन सहभागिता से जन संवाद का माध्यम बनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सेवा-संकल्प अभियान के संबंध में मंत्रालय में आयोजित बैठक में निर्देश दिए। बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह, महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री  नागर सिंह चौहान, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री मती कृष्णा गौर, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल, राज्यसभा सांसद डॉ. कविता पाटीदार, मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। जिलों की विकास पुस्तिकाएं जन-जन तक पहुंचाना किया जाए सुनिश्चित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जारी जन-विश्वास अभियान के अंतर्गत संचालित गतिविधियों को सेवा-संकल्प अभियान में सम्मिलित करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। सेवा-संकल्प अभियान की अवधि में आने वाले प्रत्येक शुक्रवार को सभी जिलों में जनकल्याण और जन संवाद की विशेष गतिविधियां संचालित की जाएं। अभियान के अंतर्गत प्रदेश के नवाचारों को प्रमुख रूप से प्रदर्शित और प्रोत्साहित किया जाए। अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में संकलित विकास पुस्तिकाएं जन-जन तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी मंत्री अपने-अपने विभाग और प्रभार के जिलों में इस अभियान की नियमित समीक्षा करें। हर जिले में तिथिवार कार्य योजना तय की जाए। जिन कार्यक्रमों में लाभार्थी संपर्क में है, वहां शासन द्वारा योजनावार लाभार्थी सूची संबंधित को उपलब्ध कराई जाए। जिला स्तर पर विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए। मध्यप्रदेश इस अभियान में ऐसा मॉडल प्रस्तुत करे, जिसे देश में सुशासन, सेवा और जन सहभागिता के उदाहरण के रूप में देखा जाए। प्रधानमंत्री  मोदी के जन्म दिवस पर महाकाल महालोक में बड़ी संख्या में होंगे दीप प्रज्ज्वलित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के जन्म दिवस 17 सितंबर को उज्जैन स्थित महाकाल महालोक में बड़ी संख्या में दीप प्रज्ज्वलित करने का कार्यक्रम आयोजित किया जाए। प्रधानमंत्री  मोदी ने प्रदेश में जिन महत्वपूर्ण परियोजनाओं और कार्यों का लोकार्पण या भूमि-पूजन किया है अथवा अन्य कोई महत्वपूर्ण सौगात दी है, उन सभी स्थानों पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की प्रस्तुति अहमदाबाद अथवा वडनगर में की जाए। प्रधानमंत्री  मोदी की पहल पर नर्मदा परियोजना और सरदार सरोवर बांध से जिन जिलों के सामाजिक-आर्थिक जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है, उन जिलों में नर्मदा परियोजना पर केन्द्रित गतिविधियां संचालित की जाएं। इसी प्रकार केन-बेतवा लिंक परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना से लाभान्वित होने वाले क्षेत्रों में प्रधानमंत्री  मोदी की इस पहल से जन-जन को अवगत कराया जाए। प्रदेश में विकसित प्रमुख सड़क परियोजनाओं से सुगम हुए यातायात और बढ़ी आर्थिक गतिविधियों की जानकारी का भी प्रचार-प्रसार किया जाए। सेवा-संकल्प अभियान के अंतर्गत होंगे 13 कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में सेवा-संकल्प अभियान की तैयारियों के संबंध में हुई बैठक में बताया गया कि अभियान के अंतर्गत 13 कार्यक्रम होंगे। इनमें आशीर्वाद का दीया, 25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत, नमो सेवा गाथा, आंगन का उत्सव, कहानी बदलाव की, विकसित भारत संकल्प यात्रा, सेवा ज्योति यात्रा, वड़नगर से वाराणसी, सेवा मेरा योगदान, सेवा सेतु अभियान-सरकार आपके द्वार, रंगोली राष्ट्र, राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज और जनसेवक महाकुंभ पंचायत से पार्लियामेंट तक शामिल हैं। आशीर्वाद के दीया के अंतर्गत हर एक दीया, प्रधानमंत्री  मोदी के 25 वर्षों की जनसेवा के प्रति आभार तथा विकसित भारत 2047 के सामूहिक संकल्प का प्रतीक होगा। प्रत्येक परिवार दीप प्रज्ज्वलित करके इस संकल्प का सहभागी बनेगा। सभी स्थानों पर जिला प्रशासन द्वारा पर्याप्त संख्या में दीयों (दीपक) की व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक समन्वय किया जाएगा। हितग्राही मूलक योजनाओं के लाभार्थी कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। 25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत के अंतर्गत 17 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच राष्टव्यापी ड्राइंग और भाषण प्रतियोगिता आयोजित होगी। स्कूल शिक्षा विभाग नोडल होगा तथा उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे। इसके अंतर्गत सभी सरकारी एवं निजी स्कूलों में प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा किए गए सेवा कार्यों और विकसित भारत की संकल्पना पर ड्राइंग प्रतियोगिता और भाषण प्रतियोगिता आयोजित होंगी। नमो सेवा गाथा के अंतर्गत पिछले 25 वर्षों के सेवा कार्य, प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाएं और देश में आए बदलावों की कहानी को सरल, भावनात्मक और संगीतमय नुक्कड़ नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा। इस गतिविधि में नोडल संस्कृति विभाग होगा और सामाजिक न्याय विभाग आवश्यक सहयोग करेगा। यह कार्यक्रम समस्त स्कूलों, कॉलेजों, पंचायत, सामुदायिक केंद्र एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित होंगे। आंगन का उत्सव के अंतर्गत 25 सितंबर से 7 अक्टूबर की अवधि में स्थानीय आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों के साथ उनकी माताओं को भी आमंत्रित किया जाएगा। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाए। उत्सव में पोषण, मातृ सहायता, टीकाकरण और सामुदायिक सेवा को सरल कहानियों में प्रस्तुत दिया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, महिला कल्याण, बाल विकास एवं कुपोषण से जुड़ी समस्त नीतियों एवं योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। लाभार्थी महिलाएं योजनाओं से उनके जीवन में आए बदलाव के छोटे अनुभव साझा करेंगी। आंगन का उत्सव के अंतर्गत आंगनवाड़ी सम्मान एवं मातृ संवाद कार्यक्रम … Read more

जनविश्वास पोर्टल अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने में होगा प्रभावी, बोले CM मोहन यादव

जनविश्वास पोर्टल, अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने में होगा प्रभावी और लाभकारी सिद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पोर्टल पर नियमित रूप से जानकारियां की जाएं अपलोड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय से की मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान पोर्टल की लांचिंग भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 7 अगस्त से आरंभ मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अब तक चार सप्ताह सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुके हैं। कम समय में ही अभियान का अत्यधिक सकारात्मक प्रभाव रहा है। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक सभी सप्ताह में एक दिन फील्ड पर जाकर जनता की समस्याओं का तुरंत निराकरण कर रहे हैं। जनविश्वास पोर्टल, अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने में प्रभावी और लाभकारी सिद्ध होगा। प्रत्येक स्तर पर अधिकारी इस पोर्टल में यूजर मैनुअल के अनुसार नियमित रूप से जानकारियां अपलोड करना सुनिश्चित करें। इसके समेकित उपयोग से मैदानी स्तर पर जनसामान्य को बहुत लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जन विश्वास पोर्टल की आज मंत्रालय में लाँच कर यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जन विश्वास अभियान के अंतर्गत किए जा रहे कार्यो की संपूर्ण जानकारी व्यवस्थित रूप से दर्ज करने के लिए मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान पोर्टल बनाया गया है। पोर्टल पर अभियान के अंतर्गत किए गए भ्रमण, निरीक्षण, जन संवाद, उद्यम संवाद, जिला स्तरीय समीक्षा बैठक, नीतिगत विषय, अभियान के दौरान दिए गए महत्वपूर्ण निर्देशों, जिले के प्रमुख नवाचारों और जिले की ओर से भेजे जाने वाले सुझावों को दर्ज किया जाएगा। प्रति सप्ताह दर्ज की जाने वाली जानकारी की उच्च स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी और राज्य स्तरीय मामलों के निराकरण के लिए आवश्यक समन्वय भी होगा। 

यूपी के युवाओं के लिए बड़ी सौगात, जन्माष्टमी से पहले योगी सरकार ने किए पांच बड़े ऐलान

जन्माष्टमी से पहले योगी ने युवाओं को दिए पांच बड़े उपहार आठ दिन में पढ़ाई, तकनीक, नौकरी और रोजगार सुरक्षा से जुड़े पांच बड़े फैसले 25 लाख टैबलेट खरीदने की मंजूरी, 3.16 लाख छात्रों की शुल्क भरपाई का रास्ता साफ मेडिकल इंटर्न का भत्ता 12 से बढ़ाकर 25 हजार, एडीओ पंचायत के 50 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती पांचवें उपहार में साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मियों को 20 से 40 हजार मानदेय के साथ सामाजिक सुरक्षा लखनऊ  जन्माष्टमी से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के युवाओं के लिए सौगातों का पिटारा खोल दिया है। महज आठ दिन के भीतर सरकार ने पांच बड़े फैसले किए हैं, जिनका सीधा संबंध युवाओं की पढ़ाई, तकनीक, सरकारी नौकरी, मानदेय और रोजगार की सुरक्षा से है। 25 लाख टैबलेट की खरीद से लेकर तीन लाख से अधिक छात्रों की अटकी शुल्क भरपाई, मेडिकल इंटर्न का भत्ता दोगुने से अधिक करने और एडीओ पंचायत के आधे पद सीधी भर्ती के लिए खोलने के बाद बुधवार को पांचवां बड़ा फैसला आउटसोर्स कर्मियों के लिए आया। उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सेवा निगम (यूपीकोस) के शुभारंभ के साथ करीब साढ़े तीन लाख कर्मियों के मानदेय, समय पर भुगतान और नौकरी की सुरक्षा का नया ढांचा तैयार कर दिया गया है। सरकार का पहला बड़ा फैसला मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर इंटर्नशिप कर रहे युवाओं से जुड़ा है। राजकीय मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सा संस्थानों और विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस व बीडीएस की रोटेटिंग इंटर्नशिप करने वालों का मासिक भत्ता 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है। वर्ष 2021 में इसे 7,500 से बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया गया था। अब इसमें एकमुश्त 13 हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है। दूसरा उपहार तकनीक से जुड़ा है। स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा और कौशल विकास समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत पात्र युवाओं को ये टैबलेट निशुल्क दिए जाएंगे। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 2,374.60 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। तीसरा फैसला उन 3,16,057 विद्यार्थियों के लिए राहत लेकर आया है, जो वर्ष 2025-26 में तकनीकी और प्रक्रियागत कारणों से छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं पा सके थे। सरकार इनके लिए पोर्टल दोबारा खोलेगी। इन विद्यार्थियों के भुगतान पर 551.85 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। चौथे फैसले से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए नया रास्ता खुला है। सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) के पद अभी तक शत-प्रतिशत प्रोन्नति से भरे जाते थे। सरकार ने व्यवस्था बदलकर 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से भरने का निर्णय लिया है। यानी अब युवाओं को सीधे एडीओ पंचायत बनने का अवसर मिलेगा। इन चार फैसलों के बाद बुधवार को मुख्यमंत्री ने पांचवां और बड़े दायरे वाला उपहार आउटसोर्स कर्मियों को दिया। यूपीकोस के शुभारंभ के साथ आउटसोर्सिंग के पदों को चार श्रेणियों में बांटकर न्यूनतम 20 हजार, 22 हजार, 25 हजार और 40 हजार रुपये मानदेय तय किया गया है। हर महीने की पांच तारीख तक पूरा वेतन सीधे बैंक खाते में पहुंचेगा। एजेंसी बदलने पर कार्यरत कर्मचारी नहीं बदले जाएंगे और मनमाने ढंग से छंटनी भी नहीं की जा सकेगी। इतना ही नहीं, आउटसोर्स कर्मियों को ईपीएफ और ईएसआई के दायरे में लाकर सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई है। महिला कर्मियों को सवेतन मातृत्व अवकाश और परिवार को इलाज की सुविधा मिलेगी। बैंक सैलरी खाते के जरिए दुर्घटना में मृत्यु अथवा दिव्यांगता पर 40 लाख रुपये तक का कवर भी मिलेगा। इस तरह जन्माष्टमी से पहले आठ दिनों में युवाओं के लिए फैसलों का दायरा पढ़ाई से शुरू होकर रोजगार की सुरक्षा तक पहुंचा है। छात्र को शुल्क भरपाई और टैबलेट, मेडिकल इंटर्न को बढ़ा भत्ता, प्रतियोगी युवा को सरकारी नौकरी का नया अवसर और पांचवें उपहार के रूप में साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मियों को बेहतर मानदेय के साथ नौकरी और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मिली है।

उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम बनने से लाखों कार्मिकों को मिलेगी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा

आउटसोर्स कर्मियों को बड़ी सौगात, नियोक्ता नहीं कर पाएंगे शोषण और अन्याय उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम बनने से लाखों कार्मिकों को मिलेगी सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा  मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया यूपी कॉस पोर्टल, इससे एक जगह मिलेगी सरकारी लाभ सबंधी व अन्य जानकारियां  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आउटसोर्स कर्मियों को वितरित किए चेक  लखनऊ  योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के लगभग लगभग पांच लाख आउटसोर्स कार्मिकों को बड़ी सौगात दी है। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के गठन के बाद अब नियोक्ता द्वारा न आउटसोर्स कर्मियों का शोषण हो पाएगा और न ही उनके साथ अन्याय हो पाएगा। पहली बार सम्मानजनक मानदेय सुनिश्चित हुआ। इसके साथ ही इससे सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। पांच साल में रिवीजन होगा। साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया में नियोक्ता का मनमानापन भी नहीं चल पाएगा।  मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया यूपी कॉस पोर्टल  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी कॉस पोर्टल व वेबसाइट की लॉन्चिंग की। यूपी कॉस पोर्टल से आउटसोर्स निगमकर्मियों को बड़ी सुविधाएं भी मिलेंगी। इसके जरिए ऑनलाइन माध्यम से भर्ती व जॉइनिंग प्रक्रिया की जानकारी मिलेगी। समय पर मानदेय व सरकारी लाभ के साथ ही आउटसोर्स कर्मियों की पूरी जानकारी एक जगह मिलेगी। इससे उपस्थिति की सटीक जानकारी व छुट्टी का प्रबंधन भी सुनिश्चित होगा। यहां शिकायत और समाधान की भी सुविधा होगी। समय पर ईपीएफ अंशदान व ईएसआईसी का लाभ सुनिश्चित होगा। पोर्टल पर विभाग, एजेंसी और आउटसोर्सकर्मियों के लिए एक ही मंच होगा।  एमओयू का किया गया हस्तांतरण भारतीय स्टेट बैंक के साथ आउटसोर्स कर्मियों को मिलने वाले लाभ व सामाजिक सुरक्षा के लिए एसबीआई के साथ एमओयू का हस्तांतरण भी किया गया।  मुख्यमंत्री ने आउटसोर्स कर्मियों को वितरित किये चेक  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में आउटसोर्स कर्मियों को चेक भी वितरित किये। इस दौरान लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। सीएम के हाथों इन्हें मिला चेक-  रोहित कुमार- फर्राश- सचिवालय प्रशासन विभाग      कसिन खान- रात्रि चौकीदार- सचिवालय प्रशासन विभाग सरिता-सफाई कर्मी- सचिवालय प्रशासन विभाग आशु कुमार- फर्राश- सचिवालय प्रशासन विभाग अरविंद कुमार यादव- वाहन चालक- सचिवालय प्रशासन विभाग रामकुमार- माली- सचिवालय प्रशासन विभाग जितेंद्र प्रसाद- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ  राजू कन्नौजिया- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ हंसराज सिंह- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ दिलीप कुमार- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ अंजनी कुमार- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ  नरेंद्र तिवारी- पंप ऑपरेटर नगर निगम लखनऊ ।

छत्तीसगढ़ में 700 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती का रास्ता साफ, पदोन्नति प्रक्रिया में देरी पर मंत्री ने जताई नाराजगी

700 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न करें – उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने ली समीक्षा बैठक  ​रायपुर,   राज्य में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गति लाने के उद्देश्य से आज उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने विभागीय अधिकारियों की मंत्रालय में समीक्षा बैठक ली। बैठक में 1 जुलाई 2026 को लिए गए निर्णयों पर अब तक हुई कार्यवाही का बिंदुवार क्रियान्वयन की समीक्षा की गया। मंत्री श्री वर्मा ने समयबद्ध कार्यों में देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रशासनिक ढिलाई को तुरंत दूर करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के सख्त निर्देश दिए। इस बैठक में सचिव श्री अविनाश चंपावत, आयुक्त श्रीमती रीता यादव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। ​प्राध्यापक भर्ती और पदोन्नति की समयसीमा तय        ​बैठक के दौरान राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में सत्र 2026-27 के तहत जारी प्रवेश प्रक्रिया का जायजा लिया गया। मंत्री श्री वर्मा ने सहायक प्राध्यापक के 700 पदों पर जारी भर्ती प्रक्रिया की रुकावटों को तत्काल दूर करने तथा प्राध्यापकों के 595 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। स्नातक प्राचार्य के पदों पर पदोन्नति की पेंडेंसी पर  सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने 15 सितंबर 2026 तक समस्त कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अपात्र होने के बावजूद पदोन्नति पाने वाले प्राध्यापकों की जांच कर उन पर की गई कार्यवाही की भी समीक्षा की गई। ​न्यायालयीन प्रकरणों पर चिंता और वेतनमान का त्वरित निराकरण      वरिष्ठ और प्रवर श्रेणी वेतनमान के प्रकरणों में हो रही देरी के कारण सहायक प्राध्यापकों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, जिस पर मंत्री ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने विभाग में लंबित न्यायालयीन प्रकरणों और याचिकाओं का ब्योरा मांगते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 1 अक्टूबर 2026 तक सभी विचाराधीन प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर आदेश जारी किए जाएं। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों की पीएच.डी. अनुमोदन की प्रगति और मंत्री कार्यालय द्वारा भेजी गई शिकायतों पर की गई कार्यवाही का विस्तृत विवरण तलब किया गया।  ​वित्तीय पारदर्शिता और शैक्षणिक गुणवत्ता पर जोर      मंत्री श्री वर्मा ने समीक्षा के दौरान पिछली बैठक में मांगी गई बजट संबंधी अधूरी जानकारी पर असंतोष जताया गया। उन्होंने  वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रत्येक शासकीय महाविद्यालय को आवंटित बजट की महाविद्यालयवार पूर्ण सूची तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से महाविद्यालयों में पदस्थ अतिथि व्याख्याताओं के शिक्षकीय कार्यों का नियमित आकस्मिक निरीक्षण करने का निर्णय लिया गया। ​सत्र प्रबंधन और नई नीतिगत पहल      ​छात्र-छात्राओं के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा मंत्री ने महाविद्यालयों में सीट वृद्धि की प्रक्रिया को सुचारू बनाने हेतु नया कैलेंडर लागू करने का सुझाव दिया। इसके तहत शासकीय व निजी महाविद्यालयों से सीट वृद्धि के प्रस्ताव दिसंबर तक मंगाकर जनवरी तक स्वीकृतियां जारी की जाएंगी, ताकि आदेशों में होने वाली त्रुटियों से महाविद्यालयों को मुक्ति मिल सके। लॉ और बी. एड. जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए 31 दिसंबर तक प्राप्त होने वाले ऑनलाइन आवेदनों का निराकरण समय सीमा के भीतर करने के निर्देश दिए गए।         ​इसके साथ ही, 4-वर्षीय बी.एड. पाठ्यक्रम हेतु एन.सी.टी.ई. (NCTE) दिल्ली की नैक ग्रेडिंग शर्तों पर चर्चा के लिए एक विशेष टीम गठित कर दिल्ली भेजने और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमानुसार प्रति सेक्शन 60 विद्यार्थियों के अनुपात को समायोजित करने के लिए अभी से तैयारियां शुरू करने के निर्देश जारी किए गए।