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राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद प्रतिभावान विद्यार्थियों ने CM विष्णु देव साय से की सौजन्य भेंट

रायपुर : राष्ट्रपति से भेंट कर लौटे प्रतिभावान विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से की सौजन्य मुलाकात राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की प्रतिभा और समृद्ध लोक संस्कृति की विद्यार्थियों ने छोड़ी अमिट छाप राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से संवाद के अनुभव विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के साथ किए साझा मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों को दी बधाई, कहा – आपकी उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय राष्ट्रपति ने CWSN विद्यार्थी नुकेश कुमार वर्मा को बांधी राखी, छात्राओं की सुवा नृत्य प्रस्तुति को सराहा रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से भेंट कर लौटे छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सौजन्य मुलाकात की। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री साय को राष्ट्रपति भवन की अपनी यादगार यात्रा और राष्ट्रपति महोदया के साथ हुए आत्मीय संवाद के अनुभव सुनाए। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को इस विशेष अवसर के लिए बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में गौरव की बात है। प्रदेश के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनकी यात्रा के संबंध में जानकारी ली। विद्यार्थियों ने बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मिलना उनके जीवन का अविस्मरणीय अनुभव रहा। राष्ट्रपति महोदया ने उनसे सहजता और आत्मीयता के साथ बातचीत की तथा उनकी शिक्षा, रुचियों और भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में जाना। विद्यार्थियों ने राष्ट्रपति भवन के भ्रमण और वहां बिताए क्षणों से जुड़े अपने अनुभव भी मुख्यमंत्री के साथ साझा किए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे बच्चों में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। उन्हें सही अवसर, प्रोत्साहन और मंच मिले तो वे हर क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर सकते हैं। ऐसे अवसर विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उनके सपनों को नई ऊंचाई देते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से पूरी लगन और मेहनत के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखने तथा जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। उल्लेखनीय है कि रक्षाबंधन के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रतिभावान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से भेंट और संवाद का विशेष अवसर प्राप्त हुआ था। इस अवसर पर राष्ट्रपति महोदया ने विद्यार्थियों से आत्मीयतापूर्वक बातचीत की। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। राष्ट्रपति भवन में इस मुलाकात का एक अत्यंत भावुक और यादगार क्षण उस समय आया, जब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने CWSN (Children with Special Needs) विद्यार्थी नुकेश कुमार वर्मा को स्वयं राखी बांधी। राष्ट्रपति महोदया का यह आत्मीय स्नेह नुकेश के साथ ही वहां उपस्थित विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए भी जीवनभर संजोकर रखने वाली स्मृति बन गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति की सुंदर झलक भी राष्ट्रपति भवन में देखने को मिली। छात्राओं ने प्रदेश के पारंपरिक सुवा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा, गीत-संगीत और सांस्कृतिक सौंदर्य से सजी इस प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने प्रस्तुति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की सराहना की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह विशेष रूप से प्रसन्नता की बात है कि प्रदेश के बच्चों ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा से जुड़े राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की प्रतिभा के साथ उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी सुंदर परिचय दिया। उन्होंने कहा कि हमारी लोक संस्कृति हमारी पहचान और हमारी अमूल्य धरोहर है। नई पीढ़ी जब इसे आत्मसात कर देश के प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुत करती है, तो हमारी परंपराओं को नई ऊर्जा और व्यापक पहचान मिलती है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि राष्ट्रपति महोदया से प्राप्त प्रोत्साहन और इस यात्रा से मिले अनुभव को वे अपने जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाएं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे अपने सपनों को बड़ा रखें, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और अपनी उपलब्धियों से परिवार, प्रदेश और देश को गौरवान्वित करें। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से भेंट करने वाले विद्यार्थियों में नारायणपुर जिले की राजवती पोयाम, सुकमा जिले के हिमांशु ठाकुर, दुर्ग जिले की पायल राजानी, महासमुंद जिले की रागनी साहू, रायपुर जिले के नुकेश कुमार वर्मा तथा महासमुंद जिले के दुर्गेश साहू एवं डिगेश सेन शामिल थे। इस अवसर पर डॉ. मुक्ति बैस, राज्य नोडल अधिकारी, समग्र शिक्षा, रायपुर तथा चंद्रशेखर मिथलेश, व्याख्याता (भौतिकी), शासकीय आशी बाई गोलछा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महासमुंद भी उपस्थित थे।

रायपुर: वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस, कई मुद्दों पर रखेंगे बात

रायपुर : वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की पत्रवार्ता रायपुर वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप विभागीय गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर आज छत्तीसगढ संवाद के  आडिटोरियम (नवा रायपुर,अटल नगर ) में प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा और माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार “हरित छत्तीसगढ़, समृद्ध छत्तीसगढ़” के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए वन संरक्षण का अर्थ केवल वनों की सुरक्षा नहीं है। वनों के संरक्षण के साथ वनवासियों की समृद्धि, जनजातीय संस्कृति का संरक्षण, किसानों की आय में वृद्धि, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार, वन्यजीव संरक्षण तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से बेहतर वन प्रबंधन हमारी प्राथमिकताओं का हिस्सा हैं। किसान वृक्ष मित्र योजना-किसान की आय के साथ हरियाली         मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि हमारी सरकार ने वृक्षारोपण को किसानों की आय से भी जोड़ा है। किसान वृक्ष मित्र योजना में पात्र नागरिकों को 5 एकड़ तक 100 प्रतिशत वित्तीय अनुदान तथा 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान दिया जाता है। पिछले दो वर्षों में 36 हजार 896 हितग्राहियों की 62 हजार 441 एकड़ कृषि भूमि में 3.675 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया है। वनवासी परिवारों की समृद्धि हमारी पहली प्राथमिकता  छत्तीसगढ़ में जंगल और जंगल पर निर्भर समुदाय एक-दूसरे से अलग नहीं है, इसलिए हमारी सरकार ने वन संरक्षण के साथ-साथ वनोपज संग्राहकों की आय और उनकेपरिवारों के कल्याण को प्राथमिकता दी है। छत्तीसगढ़ में तेंपदूत्ता संग्र्रहण दर 5,500 प्रति मानक बोरा है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2025 में 11.44 लाख परिवारों द्वारा 13.85 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्र्रहण किया गया और 757 करोड़ का ऑनलाइन भुगतान किया गया। 7.14 लाख संग्राहकों को 153 करोड़ प्रोत्साहन पारिश्रमिक का भुगतान किया गया। 12.40 लाख महिला संग्राहकों को चरण पादुका वितरित की गई तथा वर्ष 2026 में 12.38 लाख पुरुष संग्राहकों को चरण पादुका का वितरण प्रस्तावित है।  कश्यप ने बताया कि समर्थन मूल्य पर 36 हजार 580 क्विंटल वनोपज की खरीदी की गई, जिसमें संग्राहकों को राशि 16.66 करोड़ रूपए का आनलाईन भुगतान तथा 13 हजार से अधिक संग्राहक परिवारों को लाभ पहुंचा गया है। राजमोहिनी देवी सुरक्षा योजना में 1862 प्रकरणों में 26.08 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया। तेन्दूपदूत्ता संग्राहक परिवार के 8 हजार 533 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति योजनाओं के अन्तर्गत 12.07 करोड़ रूपए की छात्रवृत्ति दी गई। वर्ष 2026 में अबूझमाड़ में 13 नए तेंदूपत्ता फड़ प्रारंभ किए गए हैं। महिला सशक्तिकरण वनोपज को आजीविका से जोड़ा मंत्री कश्यप ने बताया कि प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन एवं पीएम जनमन योजना के अंतर्गत लघु वघुनोपज के संग्रहण और प्रसंस्करण से 6 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों के 70 हजार से अधिक सदस्य लाभान्वित हुए हैं। वन धन केन्द्रों से जुडी महिला समूहों को 5 करोड़ से अधिक कमीशन दिया गया है। उन्होंने बताया कि वन धन केन्द्रों में 181 प्रकार के हर्बल उत्पादों का निर्माण किया गया है ,जिसका मूल्य राशि 4.42 करोड़ रूपए रहा। धमतरी जिले में महानदी तट एवं अनुपनुयोगी पंचायत भूमि की 120 एकड़ भूमि पर महिला समूहों द्वारा खस का रोपण किया गया है। गौरेला-पेन्ड्रा -मरवाही, बिलासपुरु, कांकेर, धमतरी और कोरबा के 65 ग्रामों की 1,854 महिलाओं द्वारा अपनी बाड़ियों में 64 हजार 798 सिंदूरी तथा 7 लाख 48 हजार 092 सतावर पौधे लगाए गए हैं। बस्तर में शांति के साथ विकास और रोजगार की नई शुरुआत कश्यप ने बताया कि पिछले दो वर्षों में बस्तर अंचल के माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, इसका परिणाम यह है कि वन विभाग अब अति-संवेदनशील क्षेत्रों में भी वानिकी एवं विदोहन कार्य पुनः प्रारंभ कर रहा है। दंतेवाड़ा , सुकमा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर, कोण्डागांव एवं कांकेर के दूरूस्थ वनक्षेत्रों में इमारती लकड़ी एवं बांस विदोहन के कार्य किये जायेंगे। इमारती लकड़ी विदोहन, बांस विदोहन और अन्य कार्यो से कुल 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजन का अनुमान है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने के साथ पलायन कम करने तथा लोगों का जल, जंगल-जमीन और बस्तर की संस्कृति से जुड़ाव मजबूत करने का प्रयास है। दूरस्थ वनांचलों में सड़क, मोबाइल और बुनियादी सुविधाएं  मंत्री कश्यप ने बताया कि वन संरक्षण के साथ हमारी सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि वन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और दूरसंचार जैसी मूलमूत सुविधाओं से वंचित न रहें। पीएम जनमन योजना के तहत 20 प्रकरणों में 58.002 हेक्टेयर एवं 99.995 किलोमीटर मार्ग के लिए अनुमनुति दी गई।        वन अधिकार अधिनियम, 2006 की धारा 3(2) के तहत 417 प्रकरणों में 1,300- 1,400 किलोमीटर मार्ग के लिए ग्रामसभा की अनुशंसा के बाद अनुमति जारी की गई।  वन संरक्षण एवं संवर्धन अधिनियम के तहत जिलों में बीएसएनएल के 62 में से 59 टावरों को रिकॉर्ड 70 दिनों में अनुमति प्रदान की गई है। विगत 2.5 वर्षों में विद्यालय, अस्पताल, आंगनबाड़ी , सड़क, विद्युत एवं दूरदूसंचार लाईन, पेयजल, सिंचाई, कौशल विकास एवं सामुदायिक केन्द्र सहित 13 प्रकार के विकास कार्यों के लिए वन अधिकार अधिनियम की धारा 3 (2) के तहत कुल 1168 प्रकरणों में वनभूमि के विपथन की कार्यवाही की गई। वन्यजीव संरक्षण बाघों की संख्या 18 से बढ़कर 35 वनमंत्री कश्यप ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2022 में प्रदेश में 18 बाघ थे, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 35 हो गए हैं। यह 94 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि है।2,829.387 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला गुरुघासीदास-तमोर पिंगला देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जिसकी अधिसूचना वर्ष 2024 में हुई।एनटीसीए द्वारा बांधवगढ़ से 3 बाघिनों के ट्रांसलोकेशन की अनुमनुति दी गई है। एनक्लोजर और पेट्रोलिंग कैंप तैयार हैं तथा बरसात के बाद स्थातनांरण किया जाना है। कृष्ण मृग संरक्षण को माननीय प्रधानमंत्री जी से मिली सराहना मंत्री कश्यप ने बताया कि  बारनवापारा अभयारण्य में कृष्ण मृगों की संख्सं 77 से बढ़कर 200 के पार पहुंच गई है। इस उपलब्धि की सराहना स्वयं माननीय प्रधानमंत्रीं नरेन्द्र मोदी जी ने 26 अप्रैल 2026 के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में की। वर्तमान में इन्द्रावती में हमारे राजकीय … Read more

सभी 75 जिलों में ‘सेवा ज्योति’ के लिए स्थान चिन्हित करें, राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज में उत्तर प्रदेश की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री

‘सेवा संकल्प अभियान’ को जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाएं, न्याय पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचे सरकार की उपलब्धियों की कहानी: मुख्यमंत्री 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा ‘सेवा संकल्प अभियान’, 13 प्रमुख कार्यक्रमों के जरिए जन-जन तक पहुंचेगी प्रधानमंत्री मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा और विकास की यात्रा उपलब्धियों को आंकड़ों तक सीमित न रखें, लाभार्थियों के जीवन में आए बदलाव की वास्तविक कहानियां सामने लाएं: मुख्यमंत्री ‘आशीर्वाद का दीया’ से होगा अभियान का शुभारंभ, लाभार्थी परिवारों के घर जलेंगे दीप, दिव्यांगजन को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण भी दिए जाएंगे 25 लाख लाभार्थियों की कहानी से लेकर डिजिटल इन्फ्लुएंसर और 400-500 सांस्कृतिक टोलियों तक, गांव से राज्य स्तर तक चलेगा जनसंपर्क अभियान सभी 75 जिलों में ‘सेवा ज्योति’ के लिए स्थान चिन्हित करें, राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज में उत्तर प्रदेश की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री  17 अक्टूबर को 1.25 लाख जनप्रतिनिधियों के साथ होगा ‘जनसेवा महाकुंभ’, पंचायत से पार्लियामेंट तक लिया जाएगा ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प लखनऊ,   प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के 25 वर्षों के निरंतर सेवा काल की जनकल्याणकारी उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने और प्रत्येक नागरिक को ‘विकसित भारत 2047’ के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा। एक माह के इस व्यापक अभियान में 13 प्रमुख कार्यक्रमों के माध्यम से सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण, विकास और जनभागीदारी की कहानी समाज के हर वर्ग तक पहुंचाई जाएगी। ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘25 करोड़ बच्चों के सपनों का भारत’, ‘नमो सेवा गाथा’, ‘आंगन का उत्सव’, ‘कहानी बदलाव की’, ‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’, ‘सेवा ज्योति यात्रा’, ‘वडनगर-सेवाराणसी यात्रा’, ‘सेवा मेरा योगदान’, ‘सेवा सेतु अभियान’, ‘रंगोली राष्ट्र एवं घर-घर से राष्ट्र तक’, ‘राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज’ और ‘जनसेवा महाकुंभ’ इसके प्रमुख कार्यक्रम होंगे। इनके साथ प्रमुख स्मारकों पर लेजर शो, प्रमुख तीर्थस्थलों पर महायज्ञ एवं विशेष अनुष्ठान तथा ग्राम चौपाल और सीधा संवाद भी अभियान का हिस्सा होंगे।   मंगलवार को अभियान की कार्ययोजना पर उच्चस्तरीय चर्चा के के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के 25 वर्षों का सार्वजनिक जीवन सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण की निरंतर यात्रा है। इस अवधि में देश में हुए नीतिगत सुधारों, जनकल्याणकारी कार्यों और ऐतिहासिक बदलावों को जनता के सामने प्रभावी ढंग से रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के 12 वर्षों और प्रदेश सरकार के 10 वर्षों में हुए विकास कार्यों से आम नागरिक के जीवन में जो सकारात्मक परिवर्तन आया है, उसकी वास्तविक तस्वीर सामने आए। अभियान का उद्देश्य केवल उपलब्धियों को बताना नहीं, बल्कि युवा, महिला, किसान और वंचित वर्ग समेत प्रत्येक नागरिक को ‘विकसित भारत 2047’ के सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ना भी है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान की पहुंच जिला मुख्यालयों और विकासखंडों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। न्याय पंचायत और ग्राम पंचायत स्तर तक अभियान को पहुंचाने का विशेष प्रयास किया जाए। स्थानीय स्तर पर लोगों को यह जानकारी मिले कि केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं तथा विकास परियोजनाओं से उनके गांव, क्षेत्र और परिवार के जीवन में क्या बदलाव आया है। उन्होंने निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों, युवाओं, महिलाओं, लाभार्थियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते हुए अभियान को वास्तविक जनभागीदारी का स्वरूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि उपलब्धियों को केवल योजनाओं की सूची अथवा आंकड़ों के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय लोगों के जीवन में आए बदलाव की कहानी के रूप में सामने लाया जाए। इसके लिए लाभार्थियों के अनुभवों का संकलन भी किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अभियान के दौरान तैयार होने वाली सामग्री प्रमाणिक और तथ्यपरक हो तथा उसका स्थायी डेटा-बैंक तैयार किया जाए। इसमें विधानसभा, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर तक केंद्र सरकार के पिछले 12 वर्षों तथा राज्य सरकार के पिछले 10 वर्षों के विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं का विवरण तथा लाभार्थियों की अद्यतन सूची शामिल हो।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों, महत्वपूर्ण अवस्थापना एवं कनेक्टिविटी परियोजनाओं, शिक्षा एवं कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं खेल, पंचायती राज एवं सुशासन तथा ओडीओपी से जुड़े कार्यों को भी डेटा-बैंक में शामिल किया जाए। काशी विश्वनाथ धाम, राम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या समेत प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के पुनर्विकास, एक्सप्रेसवे, मेट्रो रेल नेटवर्क, नए एयरपोर्ट, विश्वविद्यालय, आयुष विश्वविद्यालय, अटल आवासीय विद्यालय, मेडिकल कॉलेज, एम्स, खेल विश्वविद्यालय और आधुनिक स्टेडियम, ग्राम सचिवालय, पंचायत भवन, डिजिटल लाइब्रेरी, अमृत सरोवर तथा ओडीओपी से जुड़े उद्यमियों और लाभार्थियों की सफलता की कहानियों का भी संकलन किया जाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के प्रभावी संचालन के लिए शासन, मुख्यमंत्री कार्यालय और जनपद स्तर पर समन्वय की स्पष्ट व्यवस्था हो।  मुख्यमंत्री कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा और प्रतिदिन की प्रगति मुख्यमंत्री को उपलब्ध कराई जाएगी। सभी जिलों में मुख्य विकास अधिकारी पूरे अभियान के नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। वे संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए कार्यक्रमों को न्याय पंचायत, ग्राम पंचायत, वार्ड और मोहल्ला स्तर तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। अभियान की प्रदेश और जनपद स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा होगी।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री जी के जन्मदिवस के अवसर पर शाम सात बजे ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से अभियान की शुरुआत हो। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से लाभान्वित परिवार अपने घरों में दीप प्रज्वलित करें। इसके लिए लाभार्थियों की सूची न्याय पंचायत, ग्राम पंचायत, ब्लॉक, वार्ड और मोहल्ला स्तर तक तैयार कर लगातार अपडेट रखी जाए। उन्होंने कहा कि नगर विकास, ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभाग इस कार्यक्रम में विशेष भूमिका निभाएं और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में इसकी प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करें। प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, नदी घाटों, मंदिरों, पार्कों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और चिकित्सालयों में भी विशेष दीप प्रज्वलन कराया जाए। इसी अवसर पर दिव्यांगजन को कृत्रिम अंग एवं अन्य सहायक उपकरण वितरित करने की व्यवस्था की जाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आशीर्वाद का दीया’ को केवल प्रतीकात्मक आयोजन न बनाकर सरकार और लाभार्थियों के बीच सीधे जुड़ाव का अवसर बनाया जाए। ग्राम पंचायत और न्याय पंचायत स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित विभागों की सक्रिय भागीदारी हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि अभियान की गतिविधियां गांव के अंतिम छोर तक पहुंचें।  इसके साथ ही 17 सितंबर … Read more

Stock Market Fall: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी पर भी दबाव

मुंबई  अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्‍चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच आज बुधवार को बाजार की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई.  शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 706 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 76,238 पर आ गया. वहीं निफ्टी में भी गिरावट देखी गई और ये 23,850 के स्तर से नीचे फिसल गया. तेल की कीमतों में उछाल के बीच निफ्टी 50 में 231 अंकों या 0.96 प्रतिशत की गिरावट देखी गई. निफ्टी मिडकैप 100 में 1.16 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.97 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।  आज सभी सेक्‍टोरल इंडेक्‍स में गिरावट देखी जा रही है, जिनमें आईटी और ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा नुकसान में हैं. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के अधिकांश शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, केवल अदाणी पोर्ट्स और सन फार्मा ही अपवाद रहे। Sensex-Nifty खुलते ही क्रैश  शेयर मार्केट में बुधवार को कारोबार की शुरुआत होते ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,944 की तुलना में फिसलकर 76,471 पर ओपन हुआ और फिर पलक झपकते ही बुरी तरह क्रैश होकर 76,135 के लेवल पर आ गया. सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए एनएसई का निफ्टी भी ओपनिंग के साथ ही बड़ी गिरावट लेकर क्रैश हो गया. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 24,055 के मुकाबले रेड जोन में 23,858 पर खुला और फिर देखते ही देखते फिसलकर 23,786 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।  इन 10 शेयरों का बुरा हाल शेयर बाजार में अचानक आए इस बड़े भूचाल के बीच सबसे बुरे हाल में जो 10 शेयर नजर आए, उनमें बीएसई की लार्ज कैप कैटेगरी में शामिल IndiGo Share (2.70%), Eternal Share (1.90%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे. तो वहीं मिडकैप कैटेगरी में शामिल GVT&D Share (3.10%), Godrej Properties Share (3%), MFSL Share (2.90%), TI India Share (2.50%), Voltas Share (2.20%) फिसलकर कारोबार कर रहे थे।  बात बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के स्मॉलकैप कैटेगरी की करें, तो यहां भी ज्यादातर शेयर रेड जोन में कारोबार करते हुए दिखे. यहां पर KFIN Tech Share (3.45%), Brigade Share (3%) और Chola Holdings Share (2.50%) गिरकर ट्रेड कर रहे थे।  ट्रंप का ये ऐलान, फिर मचा कोहराम  Stock Market Crash के पीछे के कारणों की बात करें, तो इसका सीधा कनेक्शन डोनाल्ड ट्रंप से है, जो एक बार फिर से वॉर मोड में नजर आ रहे हैं. उन्होंने बुधवार को दावा किया कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर अब अमेरिका का लगभग पूरा कंट्रोल है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी अर्थव्यवस्था क्रैश की ओर बढ़ रही है. इसके साथ ही Donald Trump ने उस मीडिया रिपोर्ट को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया जा रहा था कि US ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करने की कोशिश कर रहे हैं।  कच्चे तेल में उबाल, बाजारों में भगदड़ Hormuz Strait को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा. ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम 96 डॉलर प्रति बैरल, तो WTI क्रूड की कीमत बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई. मर्बन क्रूड ऑयल प्राइस भी रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 7 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. इससे एशियाई शेयर बाजारों का सेंटीमेंट भी बिगड़ा Japan Nikkei करीब 1800 अंक से ज्यादा फिसलकर, हांगकांग का HangSeng Index करीब 300 अंक की गिरावट में और साउथ कोरिया के कोस्पी इंडेक्स (KOSPI Index) करीब 4 फीसदी फिसलकर कारोबार कर रहा था।   

यूपी की उपलब्धि पर CM योगी गदगद, GeM पर तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने की सराहना

जेम पर यूपी की उपलब्धि को सीएम योगी ने सराहा, तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर दी बधाई शासकीय खरीद में पारदर्शिता और समावेशिता के लिए प्रदेश को मिला राष्ट्रीय सम्मान जेम पर अब तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक की प्रदेश सरकार की खरीद, एमएसई की भागीदारी ₹55,972 करोड़ से अधिक चालू वित्तीय वर्ष में सरकारी खरीद में एमएसई की हिस्सेदारी बढ़कर 59 प्रतिशत, यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 86 प्रतिशत महिला उद्यमियों, एससी/एसटी उद्यमों और स्टार्टअप्स की भी जेम पर बढ़ी भागीदारी लखनऊ,   गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) के माध्यम से शासकीय खरीद में पारदर्शिता एवं समावेशिता सुनिश्चित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश को मिली राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सराहना की है। प्रदेश को जेम पर श्रेष्ठ योगदान के लिए तीन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। मंगलवार को एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी, प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल एवं स्टेट जेम नोडल एवं डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने मुख्यमंत्री से भेंट कर उन्हें इस उपलब्धि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि जेम के माध्यम से प्रदेश सरकार ने प्रारंभ से अब तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक की शासकीय खरीद की है। इसमें ₹55,972 करोड़ से अधिक की खरीद एमएसई से हुई है। इस प्रकार कुल शासकीय खरीद में एमएसई की भागीदारी 55 प्रतिशत से अधिक रही है। मुख्यमंत्री ने जेम के माध्यम से सरकारी खरीद में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ छोटे उद्यमों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की। तीन राष्ट्रीय पुरस्कारों से यूपी का सम्मान जेम पर उत्तर प्रदेश की उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। विगत दिनों नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित जेम के 10वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उत्तर प्रदेश को सार्वजनिक खरीद के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए तीन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया। उत्तर प्रदेश को मिले पुरस्कारों में, जेम ओवरऑल एक्सीलेंस अवार्ड, हाईएस्ट जेम प्रोक्योरमेंट वैल्यू और बेस्ट आउटरीच बिल्डिंग अवार्ड शामिल हैं। इन पुरस्कारों को एमएसएमई के प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील ने प्राप्त किया। चार साल में 43 से बढ़कर 59 प्रतिशत हुई एमएसई की हिस्सेदारी वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई तक जेम के माध्यम से प्रदेश की कुल ₹7,235 करोड़ की शासकीय खरीद हुई। इसमें एमएसई (पैन इंडिया) से ₹4,253 करोड़, यानी 59 प्रतिशत की खरीद की गई, जिसमें उत्तर प्रदेश के अपने उद्यमों की हिस्सेदारी 86 प्रतिशत, यानी ₹3,646 करोड़ रही। इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल ₹22,337 करोड़ की जेम खरीद में एमएसई (पैन इंडिया) से ₹12,181 करोड़ यानी 55 प्रतिशत की खरीद हुई थी, जिसमें यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 82 प्रतिशत यानी ₹9,976 करोड़ रही।  वर्ष 2024-25 में ₹16,830 करोड़ की कुल जेम खरीद में एमएसई का योगदान ₹8,952 करोड़ यानी 53 प्रतिशत था, जिसमें यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत यानी ₹7,264 करोड़ रही। इसी तरह 2023-24 में कुल ₹20,248 करोड़ की जेम खरीद में एमएसई से ₹8,771 करोड़ यानी 43 प्रतिशत की खरीद हुई थी, जिसमें यूपी के एमएसई की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत यानी ₹6,680 करोड़ थी। इस तरह चार वर्षों में जेम पर कुल सरकारी खरीद में एमएसई की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत से बढ़कर 59 प्रतिशत हो गई है। एमएसई से हुई इस खरीद में प्रदेश के अपने उद्यमों की हिस्सेदारी भी 76 प्रतिशत से बढ़कर 86 प्रतिशत पहुंच गई है। महिला, एससी/एसटी उद्यमियों और स्टार्टअप्स को मिला अवसर जेम ने उत्तर प्रदेश के छोटे उद्यमियों को प्रदेश की सीमाओं से बाहर देशभर के सरकारी खरीदारों तक पहुंच उपलब्ध कराई है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में जुलाई तक प्रदेश के एमएसई को जेम के माध्यम से ₹16,953 करोड़ का कुल कारोबार मिला। इसमें महिला उद्यमियों को ₹2,202 करोड़, एससी/एसटी उद्यमियों को ₹255 करोड़ और स्टार्टअप्स को ₹2,360 करोड़ का कारोबार प्राप्त हुआ। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के छोटे उद्यमियों को जेम से ₹27,235 करोड़ का कारोबार मिला था। इसमें महिला उद्यमियों को ₹4,755 करोड़, एससी/एसटी उद्यमियों को ₹752 करोड़ और स्टार्टअप्स को ₹3,203 करोड़ का कारोबार प्राप्त हुआ। इसी तरह, वर्ष 2024-25 में सभी एमएसई को ₹21,275 करोड़ का कारोबार मिला, जिसमें महिला उद्यमियों का हिस्सा ₹3,310 करोड़, एससी/एसटी का ₹507 करोड़ और स्टार्टअप्स का ₹2,139 करोड़ था। 2023-24 में एमएसई को ₹18,230 करोड़ का कारोबार मिला था, जिसमें महिला उद्यमियों को ₹2,583 करोड़, एससी/एसटी को ₹438 करोड़ और स्टार्टअप्स को ₹2,435 करोड़ का कारोबार मिला। योगी सरकार की समावेशी खरीद नीति का दिख रहा असर जेम के यूपी स्टेट नोडल और डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने बताया कि प्रदेश में एमएसई को सरकारी खरीद में अधिक अवसर देने के लिए योगी सरकार ने 26 नवंबर 2024 को शासनादेश जारी कर समावेशी सरकारी खरीद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया था। इसके बाद जेम पर एमएसई की भागीदारी और खास तौर पर उत्तर प्रदेश के एमएसई से होने वाली सरकारी खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। सरकार का फोकस छोटे उद्यमों के साथ महिला उद्यमियों, एससी/एसटी उद्यमियों और स्टार्टअप्स को भी सरकारी बाजार से जोड़ने पर है। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों और सेवाओं के लिए बाजार बढ़ने के साथ उद्यमिता और रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। योगी सरकार जेम को ई-गवर्नेंस, पारदर्शी सरकारी खरीद और स्थानीय उद्यमों को बाजार उपलब्ध कराने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर रही है। एक तरफ सरकारी विभागों को प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए उत्पाद और सेवाएं खरीदने का विकल्प मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के छोटे उद्यमों, महिलाओं, एससी/एसटी उद्यमियों और स्टार्टअप्स को बड़े सरकारी बाजार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। ₹6.39 करोड़ के प्लॉट-शेड की नीलामी से मिले ₹32.54 करोड़ जेम सरकारी खरीद के साथ सरकारी परिसंपत्तियों का बेहतर मूल्य दिलाने का भी माध्यम बन रहा है। इसका बड़ा उदाहरण कानपुर में एमएसएमई विभाग के औद्योगिक प्लॉट और शेड की नीलामी में सामने आया। उद्योग निदेशालय, कानपुर ने 13 से 21 जुलाई 2026 के बीच औद्योगिक आस्थानों के 34 औद्योगिक प्लॉट एवं शेड की 99 वर्ष की लीज के लिए नीलामी की। इनका अपेक्षित/आरक्षित मूल्य ₹6.39 करोड़ था। प्रतिस्पर्धी बोली के बाद इनका विक्रय मूल्य ₹32.54 करोड़ पहुंच गया। इससे सरकार को आरक्षित … Read more

PF खाताधारकों के लिए बड़ी खबर! EPFO 3.0 में ATM-UPI से जोड़ने का प्लान

 नई दिल्ली प्रोविडेंट फंड (PF) से पैसे निकालने वाले करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने मौजूदा सिस्टम को अपग्रेड कर EPFO 3.0 लाने की तैयारी में है. इसके तहत एडवांस क्लेम की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने पर फोकस किया जा रहा है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीमारी, शादी या घर खरीदने जैसी जरूरतों के लिए ₹5 लाख तक के एडवांस क्लेम 3 से 4 दिन में सेटल किए जा सकते हैं. हालांकि, इस प्रस्तावित सुविधा को लेकर EPFO की ओर से अंतिम आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है. इसलिए फिलहाल इसे संभावित बदलाव के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।  क्या है EPFO 3.0? EPFO 3.0 को मौजूदा आईटी सिस्टम का ज्यादा आधुनिक और सेंट्रलाइज्ड वर्जन माना जा रहा है. इसका मकसद PF से जुड़े कामकाज को ज्यादा तेज, आसान और सुविधाजनक बनाना है. मौजूदा व्यवस्था में EPFO का डेटा अलग-अलग रीजनल ऑफिस के सर्वर से जुड़ा हुआ है. इसकी वजह से कई बार पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतें और सर्वर डाउन जैसी समस्याएं सामने आती हैं. नए सिस्टम में डेटा और प्रोसेसिंग को ज्यादा सेंट्रलाइज्ड और आधुनिक बनाने की योजना है. सीधे शब्दों में कहें तो EPFO चाहता है कि PF खाते से जुड़े काम बैंकिंग सेवाओं की तरह ज्यादा आसान और डिजिटल तरीके से किए जा सकें।  ऑटो सेटल होंगे ₹5 लाख तक के क्लेम? EPFO 3.0 में ऑटो-सेटलमेंट को और व्यापक बनाने की योजना बताई जा रही है. इसके तहत एडवांस क्लेम को सिस्टम खुद प्रोसेस कर सकता है. बीमारी, शादी और घर खरीदने जैसी जरूरतों से जुड़े क्लेम में अगर सभी जरूरी जानकारी और शर्तें पूरी होती हैं, तो कंप्यूटराइज्ड सिस्टम डेटा का वेरिफिकेशन कर सकता है. ऐसे मामलों में हर क्लेम को मैनुअली अप्रूव करने के लिए अधिकारी के हस्तक्षेप की जरूरत कम हो सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ₹5 लाख तक के एडवांस क्लेम को करीब 3 से 4 दिन में सेटल करने का लक्ष्य हो सकता है. क्लेम मंजूर होने के बाद पैसे सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाएंगे।  क्लाउड-बेस्ड होगा नया EPFO सिस्टम EPFO 3.0 को क्लाउड-बेस्ड सिस्टम में अपग्रेड करने की तैयारी है. इसका मकसद मौजूदा तकनीकी समस्याओं को कम करना और पोर्टल की क्षमता व स्थिरता बढ़ाना है. अभी कई बार कर्मचारी PF से जुड़ा काम करने के लिए पोर्टल पर लॉगिन करते हैं, लेकिन सर्वर या वेबसाइट की तकनीकी समस्या के कारण उन्हें परेशानी होती है. नए सिस्टम से ऐसी दिक्कतों को कम करने और ऑनलाइन सेवाओं को ज्यादा सुचारू बनाने की उम्मीद है।  ATM और UPI से PF विड्रॉल की सुविधा? EPFO के डिजिटल बदलाव की चर्चा सिर्फ ऑनलाइन क्लेम तक सीमित नहीं है. भविष्य में PF खाते को आधुनिक बैंकिंग सिस्टम और UPI जैसे डिजिटल पेमेंट नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर भी काम होने की बात सामने आई है. इसके तहत छोटे एडवांस या इमरजेंसी जरूरतों के लिए कर्मचारियों को लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है. मेडिकल इमरजेंसी जैसी परिस्थितियों में तय सीमा तक ATM या UPI के जरिए PF से पैसे निकालने की सुविधा देने के विकल्प पर भी विचार किए जाने की बात कही जा रही है. हालांकि, यह सुविधा अभी लागू नहीं हुई है और इसके लिए आधिकारिक नियम व प्रक्रिया का इंतजार करना होगा।  EPFO 3.0 के लॉन्च में क्यों हो रही देरी? EPFO 3.0 की कुछ सुविधाओं को पहले जुलाई में लॉन्च किए जाने की चर्चा थी. हालांकि, वेबसाइट और सिस्टम से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के कारण लॉन्च टल गया. इसके बाद अगस्त में लॉन्च होने की संभावना जताई गई, लेकिन यह भी नहीं हो सका. अब सितंबर में इसके कुछ फीचर्स शुरू किए जाने की उम्मीद की जा रही है. हालांकि, जब तक EPFO की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक लॉन्च की तारीख और सुविधाओं को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा सकती। 

अगस्त बना 125 साल का सबसे गर्म महीना, सितंबर में भी कम बारिश की चेतावनी

नई दिल्ली मॉनसून की सुस्ती के साथ अल नीनो हावी होता जा रहा है. इसी का असर अगस्त में देखा गया, जब कम बारिश के कारण देश में अगस्त महीने की गर्मी 125 सालों में सबसे ज्यादा रही है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक अगस्त महीने के दौरान औसत अधिकतम तापमान 1901 के बाद चौथा सबसे अधिक है, जो पिछले 125 साल में अगस्त का चौथा सबसे अधिक टेंपरेचर है. खासकर रात का तापमान ज्यादा परेशान कर रहा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, आमतौर पर अगस्त मानसून का सबसे भीगा और ठंडा महीना होता है, लेकिन इस बार औसत तापमान 28.01 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 0.67 डिग्री अधिक है।  रात का तापमान बना सबसे बड़ा कारण अगस्त 2026 के इतना गर्म होने का कारण दोपहर की धूप नहीं बल्कि सूरज ढलने के बाद का मौसम रहा है. अगस्त में रात में औसत न्यूनतम तापमान 24.36 डिग्री दर्ज किया गया. यह 1901 के बाद अगस्त का सबसे अधिक रात का तापमान है.जबकि दिन का औसत अधिकतम तापमान 31.66 डिग्री रहा, जो रिकॉर्ड में चौथा सबसे अधिक रहा.पूर्व में बंगाल, झारखंड और पूर्वोत्तर इलाकों में रातों का तापमान रिकॉर्ड हाईलेवल पर पहुंच गया है।  सितंबर में भी मॉनसून सुस्त भारत मौसम विभाग का कहना है कि जून, जुलाई और अगस्त का ट्रेंड सितंबर में भी बना रहेगा.पूरे देश में औसत से कम बारिश का पूर्वानुमान है.सितंबर 2026 के दौरान पूरे देश में मासिक वर्षा सामान्य से कम (LPA 91%) के करीब रहने की संभावना है.इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान देशभर में मॉनसून कमजोर रहने से 4 जून से 31 अगस्त 2026 के बीच औसत से 14% कम बारिश हुई है।  मॉनसून की बारिश में भी असमानता अगस्त महीने में देश भर में मॉनसूनी बारिश की 16 फीसदी से अधिक की कमी दर्ज की गई. बारिश की कमी, कहीं कम और कहीं ज्यादा बारिश के कारण और असमान वितरण भी देखा गया. उत्तर प्रदेश में भी नोएडा, गाजियाबाद समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुकाबले अवध (लखनऊ-कानपुर आदि) और पूर्वांचल में अच्छी बारिश हुई. दिल्ली में अगस्त में ठीकठाक बारिश हुआ. हरियाणा में गुरुग्राम के आसपास इलाकों को छोड़कर कम बारिश हुई. राजस्थान में कम बारिश चिंता का सबब रही है।  प्रशांत महासागर में अल नीनो का असर प्रशांत महासागर अल नीनो को लेकर हालात लगातार मजबूत रहे हैं. प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान 3 डिग्री तक बढ़ने का खतरा है. ग्लोबल वार्मिंग और मजबूत अल नीनो के मॉनसून के दौरान तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है।  सितंबर में बारिश का अनुमान गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल और उससे सटे उत्तरी तटीय ओडिशा और उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव वाले क्षेत्र की वजह से भारत मौसम विभाग ने कई राज्यों में अगले कुछ दिन के दौरान भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. छत्तीसगढ़ में सितंबर को ज्यादातर जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ-साथ कहीं-कहीं बहुत ज्यादा भारी बारिश होने की संभावना है।  2 और 3 सितंबर, 2026 को कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है.पश्चिम बंगाल में भी ज्यादातर जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है.ओडिशा, पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश, झारखंड और बिहार में भी अगले 2 दिन अच्छी बारिश के आसार हैं. पूर्वी उत्तर प्रदेश में 2 से 6 सितंबर के दौरान कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना है। 

वंदे भारत से भी तेज रफ्तार! दिल्ली-पटना बुलेट ट्रेन से बदलेगा बिहार-UP का सफर

पटना / नई दिल्ली देश के कई हिस्‍सों में हाई-स्‍पीड यानी बुलेट ट्रेन का जाल बिछाने का काम पूरे जोरशोर से चल रहा है. मुंबई से अहमदाबाद के बीच देश में पहली बुलेट ट्रेन दौड़ाने की तैयारी अपने चरम पर है. साल 2027 में इस रूट के कुछ हिस्‍सों पर हाई-स्‍पीड ट्रेन ऑपरेट करने का प्रयास है. भारत सरकार ने बिहार और उत्‍तर प्रदेश में भी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनाने की योजना बनाई है. अब दिवाली-छठ से पहले रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने इसपर बड़ा अपडेट दिया है. उन्‍होंने बताया कि दिल्‍ली से कानपुर, लखनऊ और पटना के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है. बता दें कि दिल्‍ली से पटना का रेल रूट सबसे व्‍यस्‍ततम रेल मार्गों में से एक है, ऐसे में इस सेक्‍शन में बुलेट ट्रेन चलने से हजारों-लाखों लोगों को काफी राहत मिलेगी. रेल मंत्री ने बताया कि हाई-स्‍पीड ट्रेन से दिल्‍ली से पटना महज 4.5 घंटे में पहुंचा जा सकेगा. फिलहाल यह सफर 12 घंटों का है. इस तरह जो काम राजधानी, वंदे भारत और दुरंतो जैसी प्रीमियम सुपरफास्‍ट ट्रेनें नहीं कर सकीं वो बुलेट ट्रेन से संभव हो सकेगा. साथ ही बिहार-यूपी वालों का सपना भी पूरा होगा।  बिहार-यूपी वालों का सपना साकार करने की दिशा में मोदी सरकार लगातार काम कर रही है. आने वाले कुछ सालों में दिल्‍ली से कानपुर, लखनऊ और पटना के बीच बुलेट ट्रेन के दौड़ने का सपना साकार होने वाला है. देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा संकेत दिया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुद बताया कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना को उत्तर प्रदेश और बिहार तक ले जाने की योजना पर काम चल रहा है. इस हाई-स्‍पीड रेल कॉरिडोर के बनने के बाद दिल्ली से लखनऊ का सफर करीब दो घंटे और राष्ट्रीय राजधानी से पटना की यात्रा महज साढ़े चार घंटे में पूरी की जा सकेगी. दिल्‍ली से पटना की दूरी 1000 किलोमीटर है. इस तरह बुलेट ट्रेन की संभावित रफ्तार 250 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रहने की संभावना है. प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर दिल्ली को उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों से जोड़ेगा।  बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में कौन से बड़े शहर रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने बताया कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में आगरा, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और पटना जैसे प्रमुख शहर शामिल होंगे. इससे दिल्ली और इन शहरों के बीच मौजूदा रेल यात्रा समय में भारी कमी आने की उम्मीद है. वैष्णव के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजना के तहत दिल्ली से आगरा की करीब 200 किलोमीटर दूरी केवल 58 मिनट में तय की जा सकेगी. वहीं 455 किलोमीटर दूर कानपुर पहुंचने में करीब 1 घंटे 50 मिनट लगेंगे. दिल्ली से लखनऊ की करीब 495 किलोमीटर दूरी 2 घंटे 12 मिनट में पूरी होने का अनुमान है. इसी तरह 750 किलोमीटर दूर प्रयागराज तक पहुंचने में लगभग तीन घंटे और 945 किलोमीटर दूर वाराणसी तक करीब 3 घंटे 33 मिनट लग सकते हैं. दिल्ली से पटना की करीब 1,170 किलोमीटर की दूरी लगभग 4.5 घंटे में पूरी करने का लक्ष्य होगा।  हाई-स्‍पीड रेल नेटवर्क का बढ़ता दायरा बुलेट ट्रेन का दायरा लगातार बढ़ रहा है. रेल मंत्री ने कहा कि परियोजना के साकार होने पर यह मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के बाद देश में बुलेट ट्रेन नेटवर्क का अगला बड़ा चरण होगा. साथ ही यह राष्ट्रीय राजधानी को उत्तर प्रदेश और बिहार के कई प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला पहला व्यापक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बन सकता है. इससे दिल्ली-उत्तर प्रदेश-बिहार बेल्ट में रहने वाले लाखों यात्रियों को तेज और सुविधाजनक परिवहन विकल्प मिलने की उम्मीद है. आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और पटना जैसे धार्मिक और पर्यटन केंद्रों तक तेज कनेक्टिविटी से पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है. इसके अलावा कारोबार, निवेश और रीजनल इकोनोमिक एक्टिविटीज में भी तेजी आने की उम्मीद है।  180 किलोमीटर वाली सेमी हाई-स्‍पीड ट्रेन फिलहाल भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम डिजाइन स्पीड वाली सेमी हाई स्पीड सर्विसेज ऑपरेट हो रही हैं. इसके मुकाबले मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे और परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटे निर्धारित है. इस परियोजना के तहत मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा समय घटकर करीब 1 घंटे 58 मिनट होने की उम्मीद है. देश की पहली हाई स्पीड रेल सेवा अगस्त 2027 में शुरू होने की संभावना है और शुरुआती चरण में सूरत-वापी सेक्शन खोले जाने की योजना है। 

राष्ट्रीय पोषण माह की तैयारी, ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ बनेगी जनभागीदारी की थीम

‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की थीम पर मनेगा 9वां राष्ट्रीय पोषण माह मध्यप्रदेश में पोषण, बाल विकास और मातृ स्वास्थ्य संबंधी चलेंगे व्यापक जन-जागरूकता अभियान पोषण वाटिका, पोषण मेले और गर्म पके भोजन की गुणवत्ता की होगी सामुदायिक निगरानी 9 सितम्बर से शुरू होगा राष्ट्रीय पोषण माह भोपाल  इस वर्ष 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का आयोजन ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की थीम पर व्यापक जनभागीदारी के साथ किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत आयोजित होने वाले पोषण माह का उद्देश्य आंगनवाड़ी केन्द्रों को पोषण, देखभाल और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास की गतिविधियों का प्रभावी केन्द्र बनाते हुए समुदाय की सक्रिय भागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस वर्ष 9 सितम्बर से राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जा रहा है। पोषण को जनआंदोलन बनाने पर जोर इस वर्ष पोषण माह को केवल जागरूकता अभियान तक सीमित न रखते हुए समुदाय को आंगनवाड़ी केन्द्रों से जोड़ने और पोषण सेवाओं में उसकी भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए प्रदेशभर में स्थानीय खाद्य पदार्थों, संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, बच्चों के प्रारंभिक विकास, गर्म पके भोजन की गुणवत्ता तथा मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियां आयोजित होंगी। स्थानीय खाद्य पदार्थों से सजेगा पोषण का संदेश आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन को लेकर आंगनवाड़ी केन्द्रों पर स्थानीय एवं कम लागत में उपलब्ध खाद्य पदार्थों से पौष्टिक व्यंजनों की रेसिपी डेमोंस्ट्रेशन गतिविधियां होंगी। पोषण मेलों के माध्यम से स्थानीय सुपर फूड, मौसमी फल-सब्जियों, दालों, अनाज, मिलेट्स, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, मेवा और बीज सहित प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों की उपयोगिता बताई जाएगी। ‘प्रोटीन रिच फूड’ अभियान के माध्यम से परिवारों को रोजमर्रा के भोजन में किफायती और आसानी से उपलब्ध प्रोटीन स्रोत शामिल करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। आंगनवाड़ी केन्द्रों की पोषण वाटिकाओं में उत्पादित खाद्य पदार्थों तथा स्थानीय मौसमी खाद्य सामग्री को भी प्रदर्शित कर उनके नियमित उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा। बच्चों की थाली में मिलेगा ताजा और विविधतापूर्ण गर्म पका भोजन आंगनवाड़ी केन्द्रों पर 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को दिए जाने वाले गर्म पके भोजन की गुणवत्ता और विविधता पर विशेष ध्यान रहेगा। स्थानीय उपलब्धता के अनुसार खाद्य सामग्री में विविधता सुनिश्चित करने के साथ साप्ताहिक मेन्यू को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। आंगनवाड़ी केन्द्रों पर गर्म पके भोजन की तैयारी, स्वच्छता और संतुलित पोषण को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न डेमोस्ट्रेशन किए जाएंगे। इनमें बच्चों के पालक, पंचायत प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह और मातृ समितियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। आंगनवाड़ियों के प्रबंधन में समुदाय बनेगा भागीदार ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की थीम को धरातल पर उतारने के लिए समुदाय की निगरानी और सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। आंगनवाड़ी केन्द्रों पर सहयोगी मातृ समिति/आंगनवाड़ी प्रबंधन समिति को सक्रिय किया जाएगा और पोषण माह के दौरान कम से कम एक बैठक आयोजित की जाएगी। आंगनवाड़ी केन्द्रों पर नाश्ता एवं गर्म पके भोजन के मेन्यू बोर्ड प्रदर्शित किए जाएंगे। इनके माध्यम से हितग्राहियों को मिलने वाले पोषण आहार की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेगी। समुदाय को भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और मेन्यू के अनुसार वितरण की निगरानी में भी सहभागी बनाया जाएगा। पहले 1000 दिन पर विशेष फोकस, विकासात्मक विलंब की होगी पहचान बाल विकास के लिए पोषण के साथ गुणवत्तापूर्ण देखभाल को भी पोषण माह का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। विशेष रूप से जीवन के पहले 1,000 दिनों में उचित पोषण और संवेदनशील देखभाल के महत्व को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा संशोधित होम विजिट शेड्यूलर के माध्यम से बच्चों के विकास और अभिभावकों की काउंसलिंग पर जोर दिया जाएगा। नवचेतना और आधारशिला पाठ्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ विकासात्मक विलंब वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य विभाग एवं आरबीएसके राष्ट्रीय स्वास्थ्य बाल कार्यक्रम टीम के माध्यम से आवश्यक सेवाओं के लिए रेफर किया जाएगा। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में लाभार्भियों को 100 प्रतिशत लाभ पहुँचाना पोषण माह के दौरान प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को भी व्यापक रूप से जोड़ा जाएगा। पात्र गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को योजना से जोड़ने के लिए 100 प्रतिशत सैचुरेशन ड्राइव चलाया जाएगा। लंबित प्रकरणों की समीक्षा कर सत्यापन, स्वीकृति और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। योजना की पात्रता, मिलने वाले लाभ, किश्तों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी महिलाओं तक पहुंचाने के लिए विशेष जागरूकता अभियान होंगे। लाभार्थियों की सफलता की कहानियों को भी सोशल और जनसंचार माध्यमों के जरिए साझा किया जाएगा। आंगनवाड़ी बनेगी पोषण और बाल विकास की सामुदायिक प्रयोगशाला राष्ट्रीय पोषण माह-2026 के माध्यम से मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी केन्द्रों को केवल सेवाएं उपलब्ध कराने वाले केन्द्र के बजाय समुदाय की साझेदारी से पोषण, स्वास्थ्य, देखभाल और प्रारंभिक बाल विकास की सामुदायिक प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ समाज में जागरूकता के साथ स्पष्ट संदेश है कि बच्चों का पोषण और उनका समग्र विकास केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।  

MP को मिलेगा नया निवेश मंच! भोपाल में 2027 ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के लिए जमीन तय

भोपाल  राजधानी में वर्ष 2027 में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। कोलार क्षेत्र के सतगढ़ी और महाबड़िया सहित आसपास के इलाकों का अधिकारियों ने निरीक्षण किया। स्थल चयन की प्रक्रिया के बाद महाबड़िया गांव को समिट के लिए बेहतर विकल्प माना गया है। यहां आयोजन के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध होने के साथ आसपास के क्षेत्र में जरूरी सुविधाएं विकसित करने की भी संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2025 में भोपाल के मानव संग्रहालय क्षेत्र में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित होने के बाद वर्ष 2027 में दोबारा राजधानी में यह आयोजन कराने का निर्णय लिया था। अब सरकार ने इसके लिए बुनियादी तैयारियां शुरू कर दी हैं। आधा दर्जन से ज्यादा जगहों का लिया जायजा उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, एमपीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक, भोपाल कलेक्टर और अन्य अधिकारियों की टीम ने कोलार क्षेत्र के  सतगढ़ी, महाबड़िया,  रातीबड़ और करीब आधा दर्जन गांवों की लोकेशन देखी। अधिकारियों ने आयोजन के लिए उपलब्ध जमीन, पहुंच मार्ग और भविष्य में विकसित की जा सकने वाली सुविधाओं का जायजा लिया। पड़ताल के बाद महाबड़िया को समिट के लिए उपयुक्त स्थान माना गया है।   बारिश के बाद शुरू होंगे विकास कार्य समिट में देश-विदेश से उद्योगपति और निवेशक पहुंचेंगे। इसे देखते हुए आयोजन स्थल और आसपास के क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की तैयारी है। बारिश खत्म होने के बाद सड़क और दूसरी जरूरी सुविधाओं से जुड़े काम तेजी से शुरू किए जाने की संभावना है। लोक निर्माण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास विभाग समेत अन्य संबंधित विभागों को भी आयोजन से पहले क्षेत्र में जरूरी व्यवस्थाएं विकसित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।  छह महीने में सड़कों का नेटवर्क मजबूत करने की तैयारी समिट स्थल तक उद्योगपतियों और अन्य मेहमानों की आसान पहुंच के लिए कोलार क्षेत्र में सड़क नेटवर्क को बेहतर किया जाएगा। योजना के तहत डीमार्ट से सतगढ़ी तक सड़क और मानसरोवर डेंटल कॉलेज के पास से फोरलेन सड़क बनाने की तैयारी है। इसके अलावा केरवा और एयरपोर्ट की ओर से भी आयोजन स्थल तक सीधे संपर्क मार्ग विकसित करने की योजना है।   दुबई में निवेशकों को न्योता देंगे सीएम ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले मध्यप्रदेश सरकार विदेशों में भी निवेशकों से संपर्क बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सितंबर के दूसरे सप्ताह में दुबई जाने वाले हैं। वहां वे उद्योगपतियों से मुलाकात कर मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं और राज्य की औद्योगिक नीतियों की जानकारी देंगे।