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नदियां हमारी प्रत्यक्ष शक्तियां हैं : दादा गुरू

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में पानी को बचाने और सहेजने के लिए सरकार के साथ ही आम नागरिक भी सजग और सक्रिय हैं। इसी कारण मध्यप्रदेश केन्द्र सरकार द्वारा करवाए गए जल संरक्षण और जन संचयन के कार्यों में अग्रणी राज्य है। नर्मदा मिशन जैसी संस्थाएं जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने का सराहनीय कार्य कर रही हैं। मध्यप्रदेश में सभी शासकीय विभाग पानी बचाने और लोगों को जल स्त्रोतों के जीर्णोद्धार के लिए मिलकर कार्य करने की भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अतिथियों ने परिसर स्थल में देशी उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। बाल चित्रकार श्री विक्रम लोधी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मां नर्मदा का चित्र भेंट किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को रवीन्द्र भवन में नर्मदा चिंतन बौद्धिक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर श्री दादा गुरु भगवान ने प्रवचन द्वारा मार्गदर्शन दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और दादा गुरु ने स्मित अपराजिता की पुस्तक "समर्थ दृष्टि: साधना के शिखर" का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विभिन्न श्रेष्ठ सामाजिक कार्य करने वाले व्यक्तियों को समर्थ नर्मदा अलंकरण प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में कुंए, बावड़ियां, पोखर, नहर और अन्य जल स्त्रोतों एवं जल संरचनाओं के संरक्षण के कार्य चल रहे हैं। गुड़ी पड़वा से प्रारंभ हुए जल गंगा संवर्धन अभियान की गतिविधियां आगामी 30 जून तक निरंतर चलेंगी। इतनी लंबी अवधि के इस अभियान का उद्देश्य जल संरचनाओं को उपयोगी बनाना और पानी के प्रति जन जागृति बढ़ाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संवर्धन अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है। प्रदेश में अनेक त्यौहार भी शासन-प्रशासन के साथ मिलकर मनाए गए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकास और विरासत के संरक्षण के आहवान पर मध्यप्रदेश अमल कर रहा है। पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नदियों के उद्गम स्थलों के अवलोकन और उन्हें उपयोगी बनाए रखने की दिशा में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग कार्य कर रहा है। ऐसे प्रयासों में सराहनीय जनभागीदारी मिल रही है। वरिष्ठ राष्ट्रवादी विचारक श्री गोपाल आर्य ने कहा कि हमारे देश में अमृता देवी जैसी महिलाएं हुई हैं, जो वृक्षों को बचाने के लिए बलिदान से भी पीछे नहीं हटी। साधक और शासक जब समाज के बीच में रह कर कार्य करते हैं तो श्रेष्ठ परिणाम सामने आते हैं। कार्यक्रम में दादा गुरू ने कहा कि भारत की संस्कृति ने दुनिया को दर्शन दिया है। हमारी प्रकृति यह संकेत दे रही है कि हम सभी मिलकर पर्यावरण की चिंता करें। हमारी नदियां हमारी शक्ति है। गंगा-यमुना-नर्मदा जल के रूप में प्रवाहित होने वाली प्रत्यक्ष शक्तियां हैं। नर्मदा पथ व्यक्तित्व निर्माण का पथ है। दादा गुरू ने मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान में हो रहे कार्य की प्रशंसा की। मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन नागर ने प्रदेश में जनसहयोग से जल संरचनाओं के संरक्षण के कार्यों का विवरण दिया। कार्यक्रम में खेल मंत्री श्री विश्वास सारंग, राज्यसभा सदस्य  माया नारोलिया, विधायक श्री भगवानदास सबनानी और अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  

सीएम योगी के निर्देश पर 100 निजी अस्पतालों का रोका भुगतान, 100 अस्पताल योजना से निलंबित

लखनऊ योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह बनाने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले निजी चिकित्सालयों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश हैं कि योजना के लाभार्थियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अस्पतालों की सूचीबद्धता और गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया को किया गया और अधिक सख्त  साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना देश के आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण योजना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में इसे अधिक प्रभावी, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए समय-समय पर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी दिशा में अस्पतालों की सूचीबद्धता और गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाया गया है। योगी सरकार द्वारा अस्पताल इम्पैनलमेंट मॉड्यूल (एचईएम) पोर्टल के माध्यम से सूचीबद्ध अस्पतालों का सत्यापन निर्धारित मानकों के आधार पर किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों के लिए 35 महत्वपूर्ण मानकों को पूरा करना अनिवार्य किया गया है। इनमें अस्पताल का पंजीकरण प्रमाणपत्र, फायर सेफ्टी एनओसी, आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता, एचएफआर पंजीकरण सहित अन्य जरूरी दस्तावेज और व्यवस्थाएं शामिल हैं। 200 निजी चिकित्सालयों ने मानकों के अनुरूप नहीं पूरी की प्रक्रिया  सीईओ ने बताया कि नेशनल हेल्थ अथॉरिटी और स्टेट हेल्थ एजेंसी की ओर से ई-मेल, दूरभाष, संदेश, पत्राचार और वर्चुअल बैठकों के माध्यम से अस्पतालों को हर स्तर पर सहायता दी गई। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अब तक 95 प्रतिशत से अधिक अस्पताल सफलतापूर्वक एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेट हो चुके हैं। हालांकि, कुछ निजी अस्पतालों ने निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं की। योगी सरकार की ओर से उन्हें कई बार अवसर दिए गए, लेकिन इसके बावजूद करीब 200 निजी चिकित्सालयों ने मानकों के अनुरूप प्रक्रिया पूरी नहीं की। इनमें आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़, बागपत, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, बिजनौर, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, फर्रुखाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, हाथरस, जौनपुर, झांसी, कन्नौज, कानपुर नगर, कुशीनगर, ललितपुर, लखनऊ, मथुरा, मऊ, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, प्रतापगढ़, संतकबीरनगर, सुल्तानपुर, वाराणसी, शाहजहांपुर, जालौन, मिर्जापुर, अंबेडकरनगर, रामपुर और सोनभद्र सहित कई जिलों के अस्पताल शामिल हैं। 100 निजी अस्पतालों का रोका गया भुगतान सीएम योगी के निर्देश पर ऐसे अस्पतालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 100 अस्पतालों का भुगतान रोक दिया गया है, जबकि करीब 100 अन्य अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को केवल मानक आधारित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं ही प्राप्त हों। बता दें कि योगी सरकार ने सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को एनएबीएच गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त करने के लिए भी निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही राज्य और जिला स्तर पर अस्पतालों की नियमित ऑडिट और मॉनिटरिंग भी कराई जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को समय रहते रोका जा सके। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के अधिकतम उपयोग पर भी विशेष जोर दे रही है। अस्पतालों में डिजिटल माध्यम से मरीजों के निस्तारण को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए एबीडीएम सक्षम एचएमआईएस प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।  इसके अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (ईएचआर) प्रणाली को भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इससे मरीजों का स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा और इलाज की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और तेज होगी। राज्य स्तर से अस्पतालों को पोर्टल संचालन और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही ऐसे मामलों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, जिनमें चिकित्सकों की डिग्री अथवा विवरण के अनुचित उपयोग की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

SIR मुद्दे पर कांग्रेस का हमला, Sukhjinder Singh Randhawa ने दी आंदोलन की चेतावनी

चंडीगढ़. पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में शुरू किए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव से महज कुछ महीने पहले इस प्रक्रिया को लागू करना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर संदेह खड़ा करता है। पूर्व उप-मुख्यमंत्री रंधावा ने जारी बयान में कहा कि पंजाब में विधानसभा चुनावों के लिए दस महीने से भी कम समय बचा है। ऐसे में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू करने के पीछे केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि जब पंजाब और उत्तर प्रदेश में चुनाव लगभग एक ही समय पर होने हैं तो SIR पंजाब में अब क्यों लागू किया जा रहा है। चुनाव के बाद SIR की मांग उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग का उद्देश्य मतदाता सूचियों को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है तो यह प्रक्रिया चुनाव के बाद भी करवाई जा सकती थी। चुनावों से ठीक पहले इस कदम से लोगों में राजनीतिक मंशा को लेकर शंका पैदा होना स्वाभाविक है। रंधावा ने आरोप लगाया कि भाजपा केंद्र सरकार के प्रभाव में चुनावी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए करना चाहती है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नजर रखने को कहा उन्होंने कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल में भी मतदाता सूचियों को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। पंजाब में किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम सूची से हटाने या उसे मतदान से वंचित करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गांव-गांव और शहर-शहर अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से निगरानी करेगी ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे। साथ ही उन्होंने सभी विपक्षी दलों से भी मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की।

‘कमाई से 5 गुना ज्यादा खर्च कैसे?’ राहुल गांधी की फंडिंग को लेकर BJP ने घेरा

नई दिल्ली राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर खुलासा करते हुए BJP ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। BJP सांसद संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पिछले 22 साल में किए अपने 54 दौरों पर राहुल गांधी ने करीब 60 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह उनकी इनकम के 5 गुना से भी ज्यादा है। संबित पात्रा के मुताबिक, राहुल गांधी करीब 22 साल से निर्वाचित पद पर हैं। उन्होंने इन वर्षों में कई बार विदेश दौरे किए हैं। उन्होंने आधिकारिक तौर पर 54 विदेश यात्राएं की हैं। ये यात्राएं सार्वजनिक हैं, लेकिन इनका खर्च पब्लिक नहीं है। राहुल गांधी की हर विदेश यात्रा पर करीब 3-4 लोग उनके साथ गए और उनकी विदेश यात्राओं का कुल खर्च 60 करोड़ रुपये है। राहुल गांधी ने विदेश यात्राओं पर इनकम से 5 गुना कैसे किया खर्च? उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास 2013-14 से 2022-23 तक राहुल गांधी की इनकम का विवरण है। इस दौरान, 10 साल में राहुल गांधी की इनकम 11 करोड़ रुपये थी। 11 करोड़ रुपये की इनकम वाले राहुल गांधी ने 60 करोड़ रुपये सिर्फ अपने विदेश दौरों पर खर्च किए हैं। ये कैसे मुमकिन है। उनको कौन फंड कर रहा है। क्या किसी विदेशी कंपनी ने फंड किया तो क्या राहुल गांधी ने नियमों का पालन किया। विदेशी दौरों पर खर्च 60 करोड़ संबित पात्रा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि साल 2004 से 2026 के बीच राहुल गांधी ने 54 व्यक्तिगत (निजी) विदेश यात्राएं की हैं। उन्होंने दावा किया कि इन यात्राओं पर लगभग 60 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसमें कोई भी आधिकारिक सरकारी या संसदीय दौरा शामिल नहीं है। पात्रा ने राहुल गांधी के चुनावी हलफनामों का जिक्र करते हुए कहा कि आकलन वर्ष 2013-14 से 2022-23 तक फॉर्म 26 के हलफनामों में उनके द्वारा घोषित आय के विवरण के आधार पर, 10 वर्षों में उनकी कुल घोषित आय 11 करोड़ रुपये थी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आय 11 करोड़ रुपये थी, तो विदेशी यात्राओं पर 60 करोड़ रुपये कैसे खर्च किए गए? किस साल में राहुल गांधी ने कितने पैसे कमाए और कितने खर्च किए? संबित पात्रा बोले कि राहुल गांधी ने 2014-15 में अपनी विदेश यात्रा पर 4.5 करोड़ रुपये खर्च किए थे। वहीं, 2017-18 में राहुल गांधी ने 1.20 करोड़ रुपये कमाए थे और 6 करोड़ रुपये विदेश यात्रा में खर्च किए थे। वहीं, 2019-20 में राहुल गांधी ने 1.39 करोड़ रुपये कमाए थे और उन्होंने विदेश दौरे पर 4.6 करोड़ खर्च कर दिए थे। इसके बाद, 2018-19 में राहुल गांधी की इनकम 1.22 करोड़ थी और उन्होंने अपनी विदेश दौरे पर 3.9 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इसके बाद 2021-22 में राहुल गांधी ने 1.03 करोड़ रुपये कमाए और विदेश यात्रा पर 2.6 करोड़ रुपये खर्च किए। 20 साल में कितनी बढ़ी राहुल गांधी की संपत्ति? बीजेपी सांसद ने ये भी बताया कि 2004 में राहुल गांधी ने जब पहली बार चुनाव लड़ा था, तब उनके चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के मुताबिक, उनकी संपत्ति 55.58 लाख थी। वहीं, 2024 में जब आखिरी बार उन्होंने चुनाव आयोग को हलफनामा दिया तो अपनी संपत्ति करीब 21 करोड़ रुपये की बताई थी। ये कैसे मुमकिन है कि राहुल गांधी अपनी इनकम से कई गुना ज्यादा पैसे विदेश दौरों पर खर्च भी करते रहे और उनकी इनकम लगातार बढ़ती गई।  संबिता पात्रा को मंत्री बनने के लिए करना होगा कुछ काम बीजेपी के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर रमेश ने कहा कि विश्वगुरु' होने के उनके दावे पूरी तरह से विफल हो गए हैं। वह दिन-ब-दिन चीन के सामने घुटने टेक रहे हैं। इसलिए यहां से ध्यान हटाने के लिए यह सब किया जा रहा है। राहुल गांधी की अतीत की विदेश यात्राओं के बारे में बात करने के बजाय, पात्रा को मंत्री पद पर दावा करने के लिए बेहतर विषय ढूंढने चाहिए। बीजेपी को देश को देना चाहिए जवाब कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने कहा कि देश नौकरियों, किसानों, मणिपुर और चीन पर जवाब चाहता है। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया बीजेपी को विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दुष्प्रचार वाला अभियान चलाने के बजाय बेरोजगारी, महंगाई, गिरती खपत, विदेश नीति में विफलताओं और कमजोर अर्थव्यवस्था पर सवालों का जवाब देना चाहिए।

Aadi Utsav is a wonderful confluence of tribal pride, culture, and entrepreneurship: Chief Minister Dr. Yadav

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ''आदि उत्सव'' जैसे आयोजन प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी विरासत से विकास के संकल्प को पूरा करने का माध्यम भी हैं। जनजातीय संस्कृति से जुड़ी वैभवशाली परम्पराओं के प्रदर्शन और संरक्षण में ऐसे उत्सवों का विशेष महत्व है। पिछले एक दशक से यह आयोजन जनजातीय समाज की गौरवशाली परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव हमारी प्राकृतिक, सांस्कृतिक और वैभवशाली विरासत को सहेजने के साथ आधुनिक उद्यमिता के माध्यम से उसे नए आयाम देने का सशक्त मंच बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उत्सव ऐसा प्रतीत हो रहा है, मानो होली और दीपावली एक साथ आ गई हों। उन्होंने मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, सिवनी, उमरिया और छिंदवाड़ा अंचल से पहुंचे गोंड एवं बैगा समाज के भाई-बहनों का स्वागत करते हुए आयोजन की भव्यता की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंडला जिले में रामनगर में हुए ''आदि उत्सव'' को मंत्रालय से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंडला का गोंड आर्ट, कर्मा, सैला और रीना नृत्य तथा बैगा समाज का परधोनी नृत्य जनजातीय संस्कृति की सुंदर अभिव्यक्ति हैं। इन परंपराओं को संरक्षित करने के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने कोदो-कुटकी सहित अन्य मोटे अनाजों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए विशेष अभियान चलाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उत्सव जनजातीय महापुरुषों और वीर नायकों बिरसामुंडा, रानी दुर्गावती, टंट्याभील, राजा शंकरशाह, कुंवर रघुनाथशाह, दलपतशाह की शौर्य गाथाओं का स्मरण कराने वाला प्रेरणादायी मंच भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ने और जनजातीय महापुरुषों के वंशजों का सम्मान करने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। यह आयोजन जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। आदि उत्सव में हुआ है शिल्पियों का संगम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत एक दशक से आदि उत्सव का आयोजन हो रहा है जो प्रशंसनीय है। आदि उत्सव में बैगा ही नहीं गौंड और अन्य जनजातीय बंधु हिस्सा ले रहे हैं। आदि शिल्प में उद्यमियों और शिल्पियों का संगम भी हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति बोली और परंपराओं को हमें अगली पीढ़ी तक ले जाना है। जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करने के लिए पारंपरिक वाद्य यंत्र भी यहां उपयोग में लाए गए हैं। साथ ही कर्मा सेला, लोक नृत्य की छटा बिखरी है। अन्न का उत्सव भी मनाया जा रहा है। प्रदेश में कोदो कुटकी के उत्पादन को प्रोत्साहन दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति समाज के नायक भगवान बिरसा मुंडा, रानी दुर्गावती, टंट्या मामा, रघुनाथ शाह, भभूत सिंह आदि के सम्मान के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। इनमें ऐसे जनजाति नायकों के जन्म स्थल और कर्म स्थल पर कैबिनेट बैठक और अन्य आयोजन किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंडला के मेडिकल कॉलेज का नाम राजा ह्दय शाह के नाम पर करने की पहल की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदि उत्सव के अवसर पर मेगा स्वास्थ्य शिविर के आयोजन की प्रशंसा की। जनजातियों के लिए बढ़ाया है बजट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति वर्ग के कल्याण के लिए 47 हजार 425 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया। तेंदूपत्ता संग्रह कार्य का लाभ जनजाति समाज को मिल रहा है। पीएम जनमन और धरती आबा अभियान से जनजातियों का हित संवर्धन हुआ है। वन धन केंद्रों के माध्यम से भी जनजातीय वर्ग लाभान्वित हो रहा है। अधोसंरचना विकास के कई कार्य किए जा रहे हैं। आकांक्षा योजना के क्रियान्वयन और सांदीपनि एवं एकलव्य विद्यालयों से जनजाति समाज के विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। सिकल सेल जैसे रोगों के नियंत्रण की पहल भी की गई है। गोंडवाना गौरव को नई पहचान दे रहा ‘आदि उत्सव’: केन्द्रीय मंत्रीओरांव केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रीजुएल ओरांव ने कहा कि गोंडवाना राजवंश के इस ऐतिहासिक महल का जीर्णोद्धार कराने के बाद वर्ष 2016 से लगातार यह आदि उत्सव आयोजित किया जा रहा है। जनजातीय गौरव को सम्मान देने की पहल सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी, जब 1999 में उन्होंने पहली बार जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया। मंडला के इस महल के जीर्णोद्धार के लिए मंत्रालय ने 1.97 करोड़ रुपये स्वीकृत किये। आज प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान, प्रधानमंत्री जनमन, आहार अनुदान, विभिन्न छात्रवृत्तियाँ, जनजातीय बच्चों की उच्च शिक्षा जैसे अनेक काम जनजातीय समाज के कल्याण के लिए किये जा रहे हैं। आदि उत्सव राष्ट्रीय स्तर पर बना रहा विशिष्ट पहचान : मंत्री  उइके लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  सम्पतिया उइके ने कहा कि रामनगर का ‘आदि उत्सव’ अब केवल क्षेत्रीय आयोजन नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और गौरव के प्रतीक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत गोंडी बोली में करते हुए जनजातीय समाज की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया। आज यह आयोजन एक बड़े उत्सव के रूप में स्थापित हो चुका है, जिसमें जनजातीय संस्कृति, लोक कला, परंपराओं और इतिहास का भव्य प्रदर्शन किया जा रहा है। आदि उत्सव भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम : सांसदकुलस्ते सांसदफग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि यह आयोजन जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर आज तक राज परिवार, पंडा, पुजारी एवं भूमका समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिन्होंने जनजातीय विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई है। इस अवसर पर प्रदेश तथा देश के अन्य हिस्सों से आए विभिन्न राज परिवार के सदस्य, जनजातीय गौरव की जानी-मानी हस्तियाँ सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी एवं विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे जनजातीय वर्ग के लोग भी मौजूद रहे।    

आम आदमी को कम खर्च में आवास उपलब्ध कराने के लिए कार्य करें हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेशवासियों के विकास, उनके जीवन स्तर में सुधार करना और जन-जन के कल्याण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से योजनाओं और कार्यक्रमों का क्रियावयन सुनिश्चित करते हुए सभी विभाग अपनी सार्थकता को स्थापित करें। विभाग अपने कार्य क्षेत्र की कठिनाइयों और चुनौतियों को चिन्हित करते हुए, सकारात्मक भाव से उनका निराकरण करें। विभाग और जिले जिन क्षेत्रों में पीछे हैं, उनमें सुधार के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। मध्यप्रदेश को सभी क्षेत्रों में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना हमारा प्रयास हो। जनहित में किए जाने वाले सभी नवाचारों को राज्य सरकार प्रोत्साहित करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों और योजनाओं के क्रियावयन के संबंध में शुक्रवार को मंत्रालय में आयोजित नोडल विभागों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। बैठक में मुख्य सचिवअनुराग जैन सहित अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।     स्वामित्व योजना में महिलाओं के नाम से कराई जाए रजिस्ट्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि की नि:शुल्क रजिस्ट्री के कार्य का लाभ प्रदेश के सभी ग्रामवासियों को दिलवाने के लिये अभियान के स्वरूप में संचालित किया जाए। लोकहित के  इस  कार्य में जनप्रतिनिधियों- पंचायत प्रतिनिधियों की सहभागिता आवश्यक रूप से सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामित्व योजना में महिलाओं के नाम रजिस्ट्री कराई जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र हितग्राहियों को जमीन के नि:शुल्क पट्टे वितरित किए जाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि घोषित करने की प्रक्रिया को सरल बनाना आवश्यक है। कलेक्टर समय सीमा निर्धारित करते हुए पूरी संवेदनाशीलता और सक्रियता से कार्य करें। इससे ग्रामीण क्षेत्र से शहरों में हो रहे पलायन को कम करने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहरी क्षेत्र से सटे गांवों के लिए प्रक्रिया का क्रियान्वयन क्षेत्र का नियोजन कर किया जाए। इससे क्षेत्र के सौंदर्यीकरण में मदद मिलेगी और स्थानीय निवासियों को स्कूल, खेल के मैदान, मूलभूत आवश्यकताओं की दुकानों और धर्मशालाओं जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकेंगी। नर्मदा समग्र मिशन से जुड़े सभी कार्यों की समीक्षा के लिए माह के पहले सोमवार को होगी बैठक मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बैठक में बताया गया कि नर्मदा समग्र मिशन की स्थापना के संबंध में नोडल विभाग/स्पेशल सेल के गठन की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर स्थानीय लोगों को जागरूक कर नर्मदा समग्र अभियान से जोड़ा जाए। जीवनदायिनी मां नर्मदा मध्यप्रदेश की लाइफलाइन है। अमरकंटक स्थित नर्मदा उद्गम स्थल सहित सभी प्रमुख नदियों के उद्गम स्थलों को संरक्षित करने की आवश्यकता है। यहां प्राकृतिक सौंर्दय बना रहे और सीमेंट क्रांकीट के पक्के निर्माण कम हो, इसके लिए उद्गम स्थलों से दूर सुव्यवस्थित सैटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा समग्र मिशन से जुड़े सभी कार्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए सभी विभागों के अधिकारियों को माह के पहले सोमवार को बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा परिक्रमा यात्रियों की सुविधा के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए। पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर की जाए समीक्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रीष्मकाल में नगरीय निकाय एवं ग्राम पंचायतों में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गर्मी के मौसम में सभी को पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर समीक्षा की जाए। जल संरक्षण के लिए कार्य करने मे जन सामान्य को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि अपने ग्राम और वार्ड की बेहतरी के लिए कार्य करने के इच्छुक व्यक्तियों को ''जन्मभूमि से कर्मभूमि तक'' का अभियान चलाये और उन्हें जल संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा जाए। जनप्रतिनिधियों के सहयोग से जल संरक्षण गतिविधियों को अभियान का रूप दिया जाए। बैठक में पीएचई, नगरीय विकास और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को ग्रीष्मकाल में विभाग की तैयारियां वॉटरशेड मिशन की जानकारी दी। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के किसी बसाहट में वर्तमान में जल परिवहन की आवश्यकता नहीं है। नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए विभाग नलजल योजना पर तेजी से कार्य कर रहा है। प्रदेश भर में अमृत-1 और अमृत-2 योजना के अंतर्गत पानी और सीवरेज प्रबंधन के लिए कार्य निरंतर प्रगति पर है।   उत्तर प्रदेश सरकार के साथ चित्रकूट धाम के समग्र विकास के लिए होगी संयुक्त बैठक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि चित्रकूट धाम के समग्र विकास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के साथ संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। चित्रकूट धाम की मंदाकिनी नदी में पानी की धारा को अविरल रखने की योजना पर कार्य किया जाएगा। देश में विरासत से विकास के मॉडल के साथ धार्मिक पर्यटन का इकोसिस्टम तैयार किया गया है। ओंकारेश्वर के ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के महातम्य से जन-जन को अवगत कराना जरूरी है। ममलेश्वर के विकास से भविष्य में भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। उन्होंने श्रीराम वन गमन पथ,कृष्ण पाथेय और चित्रकूट धाम में जारी विकास कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के दिशा निर्देश दिए। होमगार्ड बल का क्षमता संवर्धन होगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाकाल महालोक के प्रबंधन के लिए मंदिर समिति द्वारा होमगार्ड की व्यवस्था की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थानों पर भी होमगार्ड के माध्यम से व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे होमगार्ड बल का क्षमता संबर्धन भी होगा, जिसका उपयोग प्रदेश में अन्य स्थानों पर भी किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला पर्यटन परिषदों को भी जिला स्तर पर पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में सहभागी बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभिन्न समाजों और संस्थाओं द्वारा बनाई जाने वाली धर्मशालाओं में राज्य शासन सहयोग प्रदान करें, इससे धार्मिक पर्यटन के लिए आने वाले गरीब वर्ग को राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ:2028 के दृष्टिगत उज्जैन के दताना मताना हवाई पट्टी के स्थान पर 2700 मीटर लंबी नवीन … Read more

10 लाख से अधिक आवास हुए स्वीकृत

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में हर जरूरतमंद परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराने के संकल्प को साकार करते हुए मध्यप्रदेश ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के क्रियान्वयन में देशभर में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में 10 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे आवास निर्माण एवं हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराने में देश के अग्रणी राज्यों में मध्यप्रदेश ने अपनी मजबूत पहचान बनाई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्तसंकेत भोंडवे ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) अंतर्गत मध्यप्रदेश ने आवासों की ग्राउंडिंग में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश में 98.04 प्रतिशत आवासों की ग्राउंडिंग पूर्ण हो चुकी है। यह प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध कार्यप्रणाली का परिणाम है। वहीं 9 लाख से अधिक आवार्सी का निर्माण पूर्ण कर पात्र हितग्राहियों को सौंपा जा चुका है। योजना के माध्यम से हजारों परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार हुआ है, जिससे उनके जीवन स्तर, सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मान में सकारात्मक बदलाव आया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का उद्‌देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, निम्न आय वर्ग एवं मध्यम आय वर्ग के शहरी परिवारों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। योजना अंतर्गत हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे मूलभूत सुविधाओं से युक्त पक्के घर में जीवन यापन कर सकें। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध निर्माण कार्यों के चलते प्रदेश लगातार राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है।भोंडवे ने बताया कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक पात्र शहरी परिवार को आवास योजना का लाभ समय पर प्राप्त हो सके। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के माध्यम से प्रदेश में न केवल आवास निर्माण को गति मिली है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास, रोजगार सृजन एवं सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिला है। राज्य शासन द्वारा भविष्य में भी योजना के प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन हेतु निरंतर प्रयास किए जाते रहेंगे।  

मुख्यमंत्री श्विष्णु देव साय ने उच्च स्तरीय बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की

रायपुर मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में बस्तर में आयोजित होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की तैयारियों को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। यह महत्वपूर्ण बैठक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित होगी, जिसमें मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री शामिल होंगे।  बैठक के दौरान अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण (पीपीटी) के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा परिषद की बैठक में उठाए जाने वाले विभिन्न विषयों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। मुख्यमंत्री ने सभी बिंदुओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्रीसाय ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपते हुए निर्देश दिए कि आयोजन की तैयारियों में किसी प्रकार की कमी न रहे और सभी व्यवस्थाएं गंभीरता एवं समन्वय के साथ सुनिश्चित की जाएं।       मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में मध्य क्षेत्रीय परिषद के राज्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह परिषद देश की ऐसी क्षेत्रीय परिषद है जहां सदस्य राज्यों के बीच किसी प्रकार का विवाद नहीं है, जो आपसी सहयोग और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय परिषदें राज्यों तथा केंद्र और राज्यों के बीच विभिन्न विषयों पर संवाद, सहयोग और समन्वय को मजबूत करने का प्रभावी मंच बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “मजबूत राज्य ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं” और इसी भावना के साथ क्षेत्रीय परिषदें विकास, प्रशासनिक समन्वय और राष्ट्रीय एकता को नई दिशा प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इन परिषदों ने राज्यों के बीच स्वस्थ सहयोग और विकासोन्मुखी सोच को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।                  मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि बस्तर में इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति स्थापना के बाद इस स्तर की राष्ट्रीय बैठक का आयोजन यह दर्शाता है कि राज्य सरकार क्षेत्र के विकास और नई संभावनाओं को लेकर पूरी तरह संकल्पित है। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्रीअमित शाह के नेतृत्व में नक्सल उन्मूलन से क्षेत्र में शांति स्थापित हुई है तथा अब बस्तर विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इंद्रावती की गोद से बस्तर विकास की नई गाथा लिखेगा और मध्य क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करेगी।

शुभेंदु सरकार का सख्त कदम, RG कर मामले में तीन IPS अफसरों पर गिरी गाज

 कोलकाता पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सूबे की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कई तरह की बातें कही हैं. उन्होंने कहा कि बंगाल में कुल मिलाकर अराजकता का माहौल था और हमने अब सख्ती शुरू कर दी है. शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को नबन्ना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "आरजी कर डॉक्टर रेप और मर्डर केस को ठीक से न संभालने के आरोप में तीन IPS अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है. कोलकाता पूर्व पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल, पूर्व डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (नॉर्थ) अभिषेक गुप्ता और डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (सेंट्रल) इंदिरा मुखर्जी को सस्पेंड किया गया है।  CM शुभेंदु ने  में आगे आरोप लगाया कि ये अधिकारी पीड़ित परिवार को रिश्वत देने और बिना किसी लिखित आदेश के प्रेस कॉन्फ्रेंस करने में शामिल थे. इन तीनों IPS अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी।  उन्होंने कहा, "हमें जानकारी मिली है कि कोलकाता की प्रेसिडेंसी जेल में स्मार्टफ़ोन का इस्तेमाल किया जा रहा था. हमने जांच शुरू की और पाया कि आरोप सही थे." उन्होंने बरामद किए गए मोबाइल फोन दिखाए गए, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति का पता चल सके।  'हम पता लगाएंगे…' सीएम शुभेंदु ने कहा कि मैंने आरजी कर घटना की जांच में कोलकाता पुलिस की भूमिका पर गृह विभाग से रिपोर्ट मांगी है. उस वक्त इस घटना को ठीक से नहीं संभाला गया था. पुलिस को जो भूमिका निभानी चाहिए थी, वह उसने नहीं निभाई।  "हम पता लगाएंगे कि क्या पुलिस अधिकारियों को राजनीतिक नेताओं के इशारे पर काम करना पड़ा था. एक पुलिस DC का रवैया और भाषा अनुचित थी।  बंगाल सरकार ने आरजी कर मामले से जुड़े तीन आईपीएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. कोलकाता के पूर्व CP विनीत गोयल उनमें से एक हैं।  आरजी कर मामला क्या है? यह घटना 9 अगस्त, 2024 को हुई थी. कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक जूनियर डॉक्टर का शव अस्पताल की बिल्डिंग के अंदर एक सेमिनार हॉल में मिला था. कोलकाता पुलिस ने 33 साल के एक सिविक वॉलंटियर, संजय रॉय को, डॉक्टर के साथ रेप और उसकी हत्या करने के शक में गिरफ्तार किया था. बाद में इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया।  इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए और पीड़ित के लिए इंसाफ की मांग की गई. पीड़ित की मां ने हाल ही में हुए बंगाल चुनावों में पानीहाटी सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।  विधानसभा चुनावों से पहले, आरजी कर की पीड़िता को इंसाफ दिलाना बीजेपी के मुख्य वादों में से एक था. 20 जनवरी, 2025 को एक ट्रायल कोर्ट ने संजय रॉय को इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई. हालांकि, डॉक्टर के परिवार का आरोप है कि इस अपराध को अंजाम देने में वह अकेला नहीं था।  पिछले दिनों परिवार ने कोलकाता हाई कोर्ट को बताया कि उन्होंने कई ऐसे पहलुओं के बारे में जानकारी जुटाई है, जिनकी सीबीआई और राज्य पुलिस ने ठीक से जांच नहीं की है. उन्होंने कहा कि एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट की राय के मुताबिक, घटना के वक्त वहां कई लोग मौजूद हो सकते हैं। 

गंगा एक्सप्रेसवे पर सफर हुआ महंग,फास्टैग से कटेगा दूरी के हिसाब से टोल

 लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) पर अब सफर करने वालों को टोल टैक्स का देना होगा। यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार गंगा एक्सप्रेसवे पर गुरुवार आधी रात्रि 12 बजे से टोल टैक्स वसूला जाएगा। यह वसूली अडाणी समूह द्वारा बनाए गए गंगा एक्सप्रेसवे के 80 फीसद हिस्से में होगी। जबकि आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा बनाए गए हिस्से में टोल टैक्स की वसूली शुक्रवार रात 12 बजे से शुरू होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 29 अप्रैल को हरदोई में 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया था। टोल टैक्स की वसूली 15 दिन बाद शुरू किए जाने का निर्णय किया गया था। सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर बिना किसी शुल्क के सफर करने का आनंद उठा रहे वाहन चालकों की जेब पर अब मार पड़ेगी। शासन द्वारा दी गई 15 दिन की फ्री राइड की समय सीमा गुरुवार को समाप्त हो गयी। 14 मई की आधी रात से इस एक्सप्रेस-वे पर टोल टैक्स वसूलने की प्रक्रिया विधिवत शुरू भी कर दी गयी। इंटरचेंज सोनिक के मैनेजर गौरव शर्मा ने बताया कि टोल का शुल्क वसूलने के लिए सारी मशीनें एक्टिव कर ली गयी हैं। 16 लोगों के स्टाफ से व्यवस्थाएं सुचारू रखी जायेंगी। एंट्री-एग्जिट प्वाइंट्स पर टोल दरों की सूची भी चस्पा कर दी गई है। 15 दिन तक एक्सप्रेसवे का सफर था फ्री पहले डिजिटल एक्सप्रेसवे का संचालन 30 अप्रैल से आरंभ हो चुका है। शासन ने वाहनों का संचालन आरंभ होने के साथ ही 15 दिन तक टोल वसूली नहीं करने के आदेश दिए थे। अब रात बीती रात 12 बजे टोल का संचालन शुरू कर दिया गया। वाहनों की संख्या बढ़ाने पर भी कार्यदाई संस्थाए जोर जुगत में लगी है। कोई असुविधा न हो इसे लेकर भी जिले से जुड़े दोनों इंटरचेंज पर काम चालू है। लाइट, ट्रामा आदि की व्यवस्थाएं भी पूरी की गई। मैनेजर के मुताबिक एक टोल पर अभी ढाई हजार से तीन हजार वाहन दर्ज हो रहे। इनकी संख्या अब बढ़ने के आसार भी जग रहे हैं। पूरी तरह ऑनलाइन, जितना सफर उतना टोल उन्नाव के सोनिक टोल के मैनेजर गौरव शर्मा ने बताया कि यह पूरी तरह से फास्टटैग आधारित ट्रांजिट सिस्टम है। जिसमें आपके द्वारा तय की गई दूरी के अनुसार ही शुल्क कटता है। प्रारंभिक निर्धारण के अनुसार कार/जीप से 2.55 प्रति किमी (पूरे सफर पर लगभग 1,515) बस और ट्रक पर 8.20 प्रति किलोमीटर (पूरे सफर का करीब 5,700 रुपये उससे अधिक) लिया जाएगा। प्रति किमी कार/जीप के लिए रुपये 2.55, हल्के कमर्शियल वाहन के लिए रुपए 4.5 रुपये, बस/ट्रक के लिए रुपये 8.20 रुपए पूरी यात्रा का है। मेरठ से प्रयागराज तक कार से लगभग रुपये 1500 से रुपये 1800 तक का टोल खर्च आ सकता है। एक्सप्रेसवे पर बैरियरलेस ऑटोमैटिक टोल सिस्टम है, जो फास्टैग से सीधे टोल काटेगा।