samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महराजगंज में ₹208 करोड़ से अधिक की 79 परियोजनाओं का किया लोकार्पण/शिलान्यास

महराजगंज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब आपका वोट सही जगह पड़ता है, तब विकास, सुरक्षा, रोजगार और सुशासन सुनिश्चित होता है, लेकिन एक गलत वोट जातिवाद, क्षेत्रवाद, परिवारवाद, माफियावाद, अराजकता और गरीबों की जमीनों पर कब्जे जैसी दुष्प्रवृत्तियों को जन्म देता है। डबल इंजन सरकार ने इन प्रवृत्तियों पर प्रभावी रोक लगाकर प्रदेश में सुशासन और विकास का नया वातावरण तैयार किया है। महराजगंज समेत पूरे पूर्वांचल को माफिया, दंगा व भय के माहौल से बाहर निकालकर विकास, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, मजबूत सड़क नेटवर्क, सिंचाई, रोजगार और सुरक्षा से जोड़ा है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को महराजगंज में ₹208 करोड़ से अधिक की 79 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत उपस्थित जन-समूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र एवं टूलकिट भी वितरित किए। पहले जनता के करोड़ों रुपये कब्रिस्तानों की बाउंड्री वॉल पर खर्च होते थे मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा व सहयोगी दलों के विधायक बनने के बाद विधानसभा क्षेत्रों में मंदिरों के सौंदर्यीकरण और जनसुविधाओं के विकास को प्राथमिकता दी गई। पहले जनता के करोड़ों रुपये कब्रिस्तानों की बाउंड्री वॉल पर खर्च होते थे, जबकि अब वही धन मंदिरों में बेहतर सुविधाएं विकसित करने और आम जनता के हित में लगाया जा रहा है। महराजगंज में दिख रहा विकास सही सांसद और विधायक चुनने का परिणाम है। बनेलिया माई के नाम पर रोहिन नदी पर बैराज का निर्माण हो या गोरखपुर से सोनौली तक फोरलेन मार्ग का कायाकल्प, ये सब जनता के एक सही वोट की ताकत से संभव हुआ है।   डबल इंजन सरकार ने बदली महराजगंज की तस्वीर मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले महराजगंज इंसेफेलाइटिस, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, अराजकता, माफियावाद और पलायन की त्रासदी झेल रहा था। दिमागी बुखार मासूम बच्चों की जान ले रहा था, सड़कें गड्ढों में तब्दील थीं, बिजली व्यवस्था चरमराई हुई थी, गरीबों की जमीनों पर कब्जे आम थे और किसान, नौजवान व बेटियां खुद को असुरक्षित महसूस करते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार बनने के बाद महराजगंज की तस्वीर बदल गई। इंसेफेलाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण हुआ, मेडिकल कॉलेज संचालित हुआ, नौतनवा, फरेंदा, चौक, सिसवा, श्यामदेउरवा, घुघली और पनियरा बेहतर सड़क नेटवर्क से जुड़ गए तथा गोरखपुर-सोनौली फोरलेन बनने से यात्रा समय दो घंटे से घटकर 45-50 मिनट रह जाएगा। गोरखपुर के नए बाईपास, ठूठीबारी से जिला मुख्यालय तक मजबूत सड़क नेटवर्क, पुलों के निर्माण और रोहिन नदी पर बने बनेलिया माई बैराज से क्षेत्र में कनेक्टिविटी और सिंचाई दोनों को नई ताकत मिली है। वनटांगिया गांवों को पट्टा, मतदाता पहचान और सरकारी योजनाओं से जोड़कर सम्मानजनक जीवन देने का काम भी डबल इंजन सरकार ने किया है। बीमारी ही नहीं, ‘बीमारू’ टैग भी खत्म हो गया मुख्यमंत्री ने कहा कि महराजगंज अब शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिले में मेडिकल कॉलेज, आईटीआई, पॉलीटेक्निक और अन्य शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना हो चुकी है, जबकि स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए नए उद्योगों और बंद चीनी मिलों को नई कार्ययोजना के साथ पुनः शुरू करने की तैयारी है। महराजगंज, कुशीनगर और सिद्धार्थनगर से इंसेफेलाइटिस जैसी घातक बीमारी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और केवल बीमारी ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश का ‘बीमारू’ टैग भी हट गया है। उत्तर प्रदेश देश के विकास इंजन के रूप में उभर रहा है, जिसे आगे बढ़ने से अब कोई नहीं रोक सकता।  प्रदेश में माफिया का आतंक समाप्त मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने गरीबों की पीड़ा को कभी नहीं समझा, जबकि डबल इंजन सरकार हर जरूरतमंद तक योजनाओं का लाभ पहुंचाकर उनके जीवन में बदलाव ला रही है। वनटांगिया गांवों में भी राजस्व गांवों जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। हर गरीब को आवास, हर घर को शौचालय, राशन और आयुष्मान भारत के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा मिल रही है, जबकि गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिले हैं। महराजगंज के सैकड़ों नौजवान उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हुए हैं और किसान सिंचाई, बीज, ट्रैक्टर, उन्नत खेती तथा सरकारी क्रय केंद्रों का लाभ उठा रहे हैं। माफिया का आतंक समाप्त हो चुका है, गरीबों की जमीनों पर कब्जा नहीं हो सकता, बेटियां सुरक्षित हैं और किसी में भी गोहत्या या जबरन अत्याचार करने का दुस्साहस नहीं बचा है। राममंदिर और काशी विश्वनाथ धाम में बाधक बनी थीं सपा, कांग्रेस मुख्यमंत्री ने कहा कि सदियों के संघर्ष के बाद अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण हुआ है। महराजगंज के हजारों नौजवान, महिलाएं, किसान, व्यापारी और बुजुर्ग भी राममंदिर आंदोलन में सक्रिय रूप से जुड़े रहे। 492 वर्ष बाद मंदिर का शिलान्यास हुआ और 496 वर्ष बाद प्रधानमंत्री के कर-कमलों से अयोध्या में रामलला विराजमान हुए। दुनिया का सबसे भव्य राममंदिर अयोध्या में बना है और अखंड रामायण पाठ के बीच ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं भगवान राम और हनुमान जी आशीर्वाद दे रहे हों। डबल इंजन सरकार में भव्य राममंदिर और काशी विश्वनाथ धाम जैसे ऐतिहासिक कार्य संभव हुए, जबकि सपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां इन कार्यों में हमेशा बाधा बनती रहीं। इसी बाधा को पश्चिम बंगाल की जनता ने भी हमेशा के लिए उखाड़ फेंका है। इसलिए आप सबसे यही आग्रह करने आया हूं कि इन जनप्रतिनिधियों के साथ मजबूती से खड़े रहिए। सीमावर्ती क्षेत्र विकास की दौड़ में कभी पीछे न रहे भारत-नेपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत और सीमावर्ती क्षेत्र की संवेदनशीलता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नौतनवा, फरेंदा और सोनौली जैसे क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, ताकि यहां का नागरिक कभी खुद को पिछड़ा महसूस न करे। भारत और नेपाल सिर्फ दो पड़ोसी देश नहीं, बल्कि साझा संस्कृति, आस्था और रोटी-बेटी के अटूट रिश्ते से जुड़े मित्र राष्ट्र हैं। बौद्ध परिपथ और अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े महराजगंज, नौतनवा और फरेंदा का विकास केवल सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से भी बेहद जरूरी है। विपक्ष के नकारात्मक नैरेटिव से बचते हुए “नेशन फर्स्ट” के साथ रहे हर देशवासी मुख्यमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह देश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कोरोना महामारी का सफलतापूर्वक मुकाबला किया था, उसी तरह पश्चिम … Read more

गांवों को मिलेगी नई ताकत! ‘जी राम जी अधिनियम 2025’ से बदलेगी ग्रामीण छत्तीसगढ़ की तस्वीर

विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2025 ग्रामीण छत्तीसगढ़ के सशक्तिकरण का नया अध्याय 1 जुलाई 2026 से लागू होगी नई रोजगार गारंटी व्यवस्था, अब 100 के बजाय मिलेंगे 125 दिन का काम रायपुर भारत सरकार द्वारा ग्रामीण आजीविका और समग्र विकास को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से श्विकसित भारत-जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 अधिसूचित किया गया है। यह क्रांतिकारी कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में प्रभावी होगा और वर्तमान मनरेगा  का स्थान लेगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस नई व्यवस्था को प्रदेश में पूरी तत्परता से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का संदेश           मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अधिनियम को ग्रामीण समृद्धि का आधार बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत-2047 के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में यह अधिनियम एक मील का पत्थर है। छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए 125 दिनों के सुनिश्चित रोजगार की कानूनी गारंटी हमारे ग्रामीण भाई-बहनों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और खुशहाली का नया सवेरा लेकर आएगी। हमारी सरकार इस व्यवस्था को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ और लाभ          125 दिनों के रोजगार की गारंटी नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार के इच्छुक वयस्क सदस्यों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम की वैधानिक गारंटी मिलेगी। यह वर्तमान 100 दिनों की सीमा से 25 प्रतिशत अधिक है। केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना हेतु 95 हजार 692.31 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट प्रावधान किया है। राज्यों के अंशदान सहित कुल परिव्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा। मजदूरी का भुगतान सीधे श्रमिकों के खातों में (DBT) साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। देरी होने पर श्रमिक श्विलंब क्षतिपूर्तिश् के हकदार होंगे। यदि काम की मांग करने के निर्धारित समय के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो शासन द्वारा संबंधित श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों के चयन के लिए अधिक अधिकार दिए गए हैं, जिससे गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों (जैसे जल संरक्षण, कृषि अधोसंरचना) का निर्माण होगा। सुगम संक्रमण  की व्यवस्था          श्रमिकों और प्रशासन की सुविधा के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएं की गई हैं। वर्तमान ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। 30 जून 2026 तक मनरेगा के तहत चल रहे सभी कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे और 1 जुलाई से स्वतः नई व्यवस्था में समाहित हो जाएंगे। नए श्रमिक ग्राम पंचायत स्तर पर सहजता से अपना पंजीयन करा सकेंगे। विकसित भारत 2047 का आधार          यह अधिनियम केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और उत्पादक बनाने का महा-अभियान है। छत्तीसगढ़ में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण अधोसंरचना, जल संरक्षण और कृषि सुधार को अभूतपूर्व गति मिलेगी, जो राज्य को विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में तेजी से आगे ले जाएगी। * धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक * सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक

‘कुछ मीडिया में गए, कुछ RTI एक्टिविस्ट बने’— CJI के बयान से छिड़ी नई बहस

नई दिल्ली भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI सूर्यकांत ने शुक्रवार को कोर्ट में एक ऐसी बात कही जो चर्चा में आ गई है. एक वकील के मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना 'कॉकरोच' से की और कहा कि ऐसे लोग मीडिया, सोशल मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमले करते हैं।   उन्होंने ऐसे लोगों को 'समाज के परजीवी' भी कहा. यह टिप्पणी तब आई जब एक वकील सीनियर एडवोकेट का दर्जा पाने के लिए कोर्ट में याचिका लेकर आया था।  भारत में वकालत में एक खास रैंक होती है जिसे 'सीनियर एडवोकेट' कहते हैं. यह दर्जा कोर्ट खुद किसी वकील को देती है जब वो यह समझे कि उस वकील का अनुभव, काम और पेशेवर आचरण इसके लायक है. यह दर्जा मांगा नहीं जाता बल्कि दिया जाता है. कोई वकील खुद इसके लिए याचिका नहीं लगाता।  कोर्ट में क्या हुआ? CJI सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच के सामने एक वकील ने याचिका दाखिल की थी. वो चाहते थे कि दिल्ली हाई कोर्ट उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा दे. लेकिन उन वकील के पेशेवर आचरण और सोशल मीडिया पर उनके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा को देखकर बेंच बहुत नाराज हो गई।  CJI ने साफ कहा कि अगर दिल्ली हाई कोर्ट उन्हें यह दर्जा दे भी दे तो सुप्रीम कोर्ट उसे रद्द कर देगा. उन्होंने वकील से पूछा कि क्या यह दर्जा कोई मेडल है जो सजावट के लिए रखा जाए. और यह भी पूछा कि क्या ऐसे व्यक्ति को सीनियर एडवोकेट बनना चाहिए।  CJI ने 'कॉकरोच' और 'परजीवी' क्यों कहा? सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि समाज में पहले से ऐसे 'परजीवी' हैं जो सिस्टम पर हमला करते हैं. फिर उन्होंने कहा कि कुछ बेरोजगार युवा जिन्हें कोई नौकरी नहीं मिलती और पेशे में कोई जगह नहीं होती, वो मीडिया, सोशल मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं और सबको निशाना बनाने लगते हैं. इन्हें उन्होंने 'कॉकरोच जैसे युवा' कहा. CJI ने वकील से पूछा कि क्या वो भी उन लोगों के साथ हाथ मिलाना चाहता है।  वकीलों की डिग्री पर भी उठाए सवाल CJI ने एक और बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि वो CBI से कहना चाहते हैं कि बहुत से वकीलों की डिग्रियों की जांच की जाए क्योंकि उनकी असलियत पर गंभीर सवाल हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस मामले में कभी कुछ नहीं करेगी क्योंकि उन्हें वकीलों के वोट चाहिए।  आखिर में क्या हुआ? वकील ने बेंच से माफी मांगी और अपनी याचिका वापस लेने की इजाजत मांगी. बेंच ने याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी।   

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- उज्जैन की जनता सिंहस्थ तैयारियों में निभा रही अहम भूमिका

उज्जैन की जनता सिंहस्थ संबंधी कार्यों में सहयोग कर पेश कर रही हैं नई मिसाल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने हरसिद्धि पाल से रामघाट मार्ग चौड़ीकरण कार्य का किया निरीक्षण उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ:2028 के लिए श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के आवागमन एवं सुविधाएं बढ़ाने के लिए घाटों एवं मार्गों के चौड़ीकरण कार्य किए जा रहे है। सरकार द्वारा सभी कार्यों की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। सिंहस्थ के लिये सभी कार्य इस तरीके से किए जा रहे है कि पौराणिक और धार्मिक नगरी उज्जैन को लंबे समय तक उनका लाभ प्राप्त हो। उज्जैन के जनप्रतिनिधि, सभी धर्म के अनुयायी और नागरिक विकास कार्यों का समर्थन कर रहे है और सहयोग प्रदान कर देश के लिए एक नई मिसाल बन रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को उज्जैन में रामघाट पहुंचकर हरसिद्धि पाल से राम घाट मार्ग चौड़ीकरण कार्य का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के दौरान निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत कार्य तेजी गति, गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूर्ण करें। होमगार्ड द्वारा आयोजित बाढ़ बचाव प्रशिक्षण का अवलोकन किया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरसिद्धि पाल से रामघाट मार्ग चौड़ीकरण के निरीक्षण के बाद होमगार्ड द्वारा आयोजित बाड़ बचाव प्रशिक्षण का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे होमगार्ड जवानों की हौसला अफजाई की। डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट संतोष कुमार जाट ने जानकारी दी कि होमगार्ड द्वारा 250 होमगार्ड जवानों को बाढ़ बचाव के लिए डीप डाइविंग, नाविकों, स्विमिंग, लाइफ जैकेट के उपयोग का तरीका, आपदा और बाढ़ बचाव सामग्री का उचित प्रयोग, अंडर वॉटर रेस्क्यू और सर्फेस वॉटर रेस्क्यू का 15 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रवि सोलंकी, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, संजय अग्रवाल, सिंहस्थ मेला अधिकारी सह संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजीपी राकेश गुप्ता और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।  

शौर्य संकल्प योजना से युवाओं को मिलेगा आत्मविश्वास और अवसरों का नया मंच: राज्यमंत्री गौर

युवाओं को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक अभियान है शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना: राज्यमंत्री गौर शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना का हुआ शुभारंभ भोपाल, नर्मदापुरम और रायसेन के चयनित अभ्यर्थियों को वितरित की किट पहली बार ओबीसी छात्रावासों में फ्री मेस, दिल्ली छात्रगृह योजना की राशि 1550 से बढ़ाकर 10 हजार भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने शुक्रवार को अपेक्स बैंक परिसर के समन्वय भवन में 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना' का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया और विधायक श्री भगवानदास सबनानी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में योजना के अंतर्गत भोपाल, नर्मदापुरम और रायसेन जिले के चयनित अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया, जिन्हें राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने प्रशिक्षण किट वितरित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने युवाओं का स्वागत करते हुए इसे अपने राजनीतिक जीवन का एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हमने यह प्रण लिया था कि पिछड़ा वर्ग के युवाओं का जीवन बेहतर बनाने के लिए हम कुछ ठोस करेंगे और यह योजना युवाओं को सशक्त बनाने का एक बड़ा अभियान है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बताया कि 45 दिन तक चलने वाली यह विभाग की पहली ऐसी रोजगार परक प्रशिक्षण योजना है, जो ओबीसी अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, शौर्य, समर्पण और संकल्प का ज्ञान भी देगी। हमारी योजना का नाम ही 'शौर्य और संकल्प' है, जो अपने आप में एक प्रेरणा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नियत किए गए विकास के 4 स्तंभों में युवाओं को एक अहम स्तंभ बताते हुए मंत्री श्रीमती गौर ने युवा शक्ति का आह्वान किया कि वे किसी के भ्रम में न आएं। हमारी केंद्र और राज्य सरकार कौशल, संकल्प और प्रेरणा के जरिए युवाओं को निखारने का काम कर रही है, जो राष्ट्रसेवा की सशक्त राह पर आगे बढ़ाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त करते हुए मंत्री श्रीमती गौर ने विभागीय उपलब्धियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार ओबीसी हॉस्टल में 'मेस' की सुविधा शुरू होने जा रही है, जहां विद्यार्थियों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की संवेदनशीलता है कि 'दिल्ली छात्रगृह योजना' की सहायता राशि को 1,550 रुपए से बढ़ाकर सीधे 10 हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है। इसके अलावा छात्राओं को बेहतर वातावरण देने के लिए 31 कन्या छात्रावासों को 'आदर्श छात्रावास' के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूरे देश में मध्यप्रदेश पहला राज्य और हमारा विभाग पहला विभाग है, जो 'सोशल इंपैक्ट बॉन्ड' के माध्यम से युवाओं को ट्रेनिंग देकर विदेश भेजने की तैयारी कर रहा है। 'सरदार पटेल कोचिंग योजना' के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी विद्यार्थियों को नीट, क्लैट और जेईई जैसी परीक्षाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का संकल्प हमारी सरकार ने किया है। कार्यक्रम में महापौर श्रीमती मालती राय ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार मानते हुए कहा कि राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने ओबीसी वर्ग के छात्रों की बेहतरी के लिए एक शानदार योजना को जमीन पर उतार दिया है। मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि राज्यमंत्री श्रीमती गौर के प्रयासों से ही आज यह ऐतिहासिक योजना मूर्त रूप ले रही है। विधायक श्री भगवानदास सबनानी ने कहा कि 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण' जैसी योजना देशभर में केवल मध्यप्रदेश सरकार ने ही शुरू की है। इससे प्रतीक होता है कि सरकार सभी वर्गों के विकास के प्रति कितनी संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ रही है। आयुक्त पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण श्री सौरभ सुमन ने बताया कि इस योजना के लिए कुल 6,687 आवेदन प्राप्त हुए थे। पारदर्शी स्क्रीनिंग के बाद 3,664 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के लिए अंतिम रूप से चयनित किया गया है, जिनमें 2,030 छात्र और शेष छात्राएं शामिल हैं। इन चयनित अभ्यर्थियों को सैद्धांतिक और प्रैक्टिकल शिक्षा दी जाएगी। इसके अलावा, आधुनिक तरीके से तैयारी करने के लिए 'ऐप बेस्ड ट्रेनिंग मटेरियल' भी उपलब्ध रहेगा। आयुक्त श्री सुमन ने छात्रों को विश्वास दिलाया कि योजना की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए अगर आवश्यकता हुई तो मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री के अनुमोदन के बाद अन्य जिलों तक इस योजना का विस्तार किया जाएगा और सीटों की संख्या में भी विस्तार किया जाएगा।  

भोजशाला विवाद में हिंदू पक्ष की जीत की बड़ी वजह बने ये धार्मिक प्रमाण

धार  मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI की 98 दिन तक चली वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट को सही मानते हुए भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर स्वरूप वाला स्थल माना है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐतिहासिक साक्ष्य, साहित्य, संरचनाएं और ASI की रिपोर्ट यह स्थापित करती हैं कि यह स्थान राजा भोज से जुड़ा संस्कृत अध्ययन और देवी वाग्देवी सरस्वती की आराधना का प्रमुख केंद्र था।  इस मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस अशोक अवस्थी की खंडपीठ ने की. यह मामला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि दोनों जजों ने खुद भोजशाला परिसर का दौरा कर जमीनी स्थिति का निरीक्षण किया. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह निर्णय सिर्फ दस्तावेजों और रिपोर्टों के आधार पर नहीं बल्कि स्थल के प्रत्यक्ष निरीक्षण के बाद दिया गया है।  पूजा पर रोक वाला पुराना आदेश रद्द कोर्ट ने कहा कि अगर कमाल मौला मस्जिद से जुड़े मुस्लिम पक्षकार चाहें तो वे मस्जिद के लिए धार शहर या उसके आसपास वैकल्पिक जमीन आवंटित करने की मांग सरकार से कर सकते हैं. अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी मांग आने पर सरकार उस पर विचार करेगी. हिंदू पक्ष की ओर से अदालत में एक और महत्वपूर्ण मांग रखी गई थी. इसमें राजा भोज की आराध्या मानी जाने वाली वाग्देवी सरस्वती की प्राचीन प्रतिमा को लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम से वापस भारत लाने के लिए आदेश देने की मांग की गई थी।  कोर्ट ने इस पर कहा कि याचिकाकर्ता सरकार को ज्ञापन दे सकते हैं और सरकार इस विषय पर विचार कर सकती है. भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद का विवादित क्षेत्र 18 मार्च 1904 से संरक्षित स्मारक के रूप में दर्ज है. यह परिसर 1958 के प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल अधिनियम के तहत भी संरक्षित है. लंबे समय से यह विवाद बना हुआ था कि इस स्थल का धार्मिक स्वरूप क्या है. हिंदू पक्ष इसे देवी वाग्देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र बताता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता रहा है।  ASI रिपोर्ट में मिले मंदिर के कई प्रमाण अदालत के आदेश पर ASI ने यहां 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था. इस सर्वे के दौरान परिसर की दीवारों और खंभों पर कई ऐसे चिन्ह और आकृतियां मिलीं जिन्हें हिंदू मंदिर स्थापत्य से जुड़ा माना गया. रिपोर्ट में कमल, केले के स्तंभ, घंटियां, पल्लव, श्रीफल युक्त कलश और देवी-देवताओं की उकेरी गई मूर्तियों का उल्लेख किया गया. इसके अलावा संस्कृत श्लोक, शिलालेख और धार्मिक प्रतीकों के भी प्रमाण मिले. ASI ने इन सभी अवशेषों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई थी।  सर्वे में जमीन के नीचे भी मंदिर जैसे ढांचे के संकेत मिलने की बात कही गई. परिसर में एक हवनकुंड मिलने का भी जिक्र रिपोर्ट में किया गया है. अदालत ने कहा कि इन सभी साक्ष्यों से यह साबित होता है कि यह स्थल हिंदू धार्मिक और शैक्षणिक परंपरा से जुड़ा रहा है. हाईकोर्ट ने ASI के वर्ष 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया जिसमें हिंदुओं के पूजा अधिकारों को सीमित किया गया था जबकि मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी. अदालत ने कहा कि ऐसा आदेश समानता और धार्मिक अधिकारों के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।  कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. साथ ही परिसर की पवित्रता, धार्मिक स्वरूप और कानून व्यवस्था बनाए रखना भी सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है. अदालत ने अपने निष्कर्ष में कहा कि भोजशाला में हिंदू पूजा की परंपरा कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।  हिंदुओं के पूजा अधिकारों पर लगी रोक हटाई गई इसके अलावा कोर्ट ने माना कि ऐतिहासिक साहित्य और उपलब्ध साक्ष्य यह स्थापित करते हैं कि यह स्थल परमार राजवंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था. इसी के साथ हाईकोर्ट ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की रिट याचिका संख्या 10497/2022 और कुलदीप तिवारी की याचिका संख्या 10484/2022 का निपटारा करते हुए विस्तृत निर्देश जारी किए. फैसले के बाद भोजशाला विवाद को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है और अब आगे सरकार के कदमों पर सभी की नजर बनी हुई है। 

सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा फैसला, शिक्षा समेत कई विभागों के सचिव बदले गए

 पटना बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने एक बार फिर बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 15 सीनियर अधिकारियों का शुक्रवार को एक साथ ट्रांसफर कर दिया गया। कई विभागों के सचिव और अपर मुख्य सचिव बदले गए हैं। वहीं, कुछ प्रमंडलों के आयुक्त को भी इधर-उधर किया गया है। बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल शिक्षा विभाग के नए सचिव होंगे। 1996 बैच के आईएएस सैंथिल कुमार को श्रम संसाधन विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। वह पिछड़ा और अति पिछड़ा कल्याण विभाग के भी अपर मुख्य सचिव के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे। वह पहले गन्ना उद्योग विभाग के एसीएस थे। नई व्यवस्था में एचआर श्रीनिवास को पिछड़ा एवं अति पिछड़ा कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। कोसी और पूर्णिया के प्रमंडलीय आयुक्त का ट्रांसफर मुंगेर प्रमंडल के आयुक्त प्रेम सिंह मीणा को भागलपुर प्रमंडल के आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। कोसी (सहरसा) और पूर्णिया के प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार का पटना ट्रांसफर कर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग का प्रधान सचिव बना गया है। पंकज पाल पथ निर्माण विभाग के नए सचिव पीएचईडी विभाग के पंकज कुमार पाल सचिव को पथ निर्माण विभाग का सचिव बना दिया गया है। वहीं, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह को सूचना प्रावैधिकी विभाग में तबादला कर दिया गया है। उनके पास बेल्ट्रॉन के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार रहेगा धर्मेंद्र गन्ना उद्योग विभाग के सचिव सहकारिता विभाग के सचिव आईएएस धर्मेंद्र सिंह का गन्ना उद्योग विभाग में ट्रांसफर कर दिया गया है। इसी तरह, दीपक आनंद को श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग से हटाकर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में तैनात किया गया है। विनोद सिंह गुंजियाल शिक्षा विभाग के नए सचिव, बी राजेंदर को हटाया बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल को शिक्षा विभाग का सचिव बना दिया गया है, वह विभाग के संपूर्ण प्रभार में रहेंगे। इसके अतिरिक्त वह खेल विभाग में भी सचिव का पद संभालेंगे। दोनों विभागों के वे अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे। साथ ही, बी राजेंदर को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर दिया गया है। वह सामान्य प्रशासन विभाग के एसीएस हैं। भागलपुर के प्रमंडलीय आयुक्त का ट्रांसफर भागलपुर के प्रमंडलीय आयुक्त अवनीश कुमार सिंह का पटना ट्रांसफर कर दिया गया है। वह खान एवं भूतत्व विभाग का सचिव बनाए गए हैं। दरभंगा के प्रमंडलीय आयुक्त हिमांशु कुमार राय को कोसी प्रमंडल का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। जीविका के सीईओ हिमांशु शर्मा को विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है। उनके पास जीविका का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा। पूर्णिया के डीएम के पास प्रमंडलीय आयुक्त का भी प्रभार पूर्णिया के डीएम अंशुल कुमार को पूर्णिया के प्रमंडलीय आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। श्रीकांत कुंडलिक खांडेकर को सीएम सचिवालय में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। भोजपुर और नालंदा के उप विकास आयुक्त का ट्रांसफर भोजपुर जिला परिषद की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी गुजंन सिंह को सीएम सचिवालय में संयुक्त सचिव की पोस्ट मिली है। नालंदा के उप विकास आयुक्त को पटना का उप विकास आयुक्त सह जिला परिषद का मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी नियुक्त किया गया है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- गुरुदेव की कृपा से जीवन में सत्य और संस्कारों की प्रेरणा मिलती है

गुरुदेव के आशीर्वाद से ही सनातन और सत्य मार्ग का अनुसरण करने की प्रेरणा मिलती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में जय गुरुदेव आश्रम में गुरुदेव से की भेंट गुरुदेव के अमृत प्रवचन का श्रवण किया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाखों अनुयायियों को संबोधित किया मुख्यमंत्री डॉ. यादव लोक कल्याणकारी कार्यों से अब जनता के हो गए है लाडले : गुरुदेव उमाकांत महाराज जय गुरुदेव आश्रम उज्जैन में सिंहस्थ जैसा नजारा, स्व अनुशासन से अनुशासित लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में जय गुरुदेव आश्रम में गुरुदेव महाराज से भेंट कर आशीर्वाद लिया और उनके अमृत प्रवचनों का श्रवण किया। गुरुदेव उमाकांत जी महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आशीर्वाद देते हुए कहा कि सदा ऐसे ही समाज की सेवा में लगे रहे और सत्य, सनातन, अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए जन सेवा करते रहें। आज आप अपने कार्यों से जनता के प्यारे बन गए है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुदेव के निर्देश पर मंच से ही गुरुदेव के अनुयायियों को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा गुरुदेव की उज्जैन में आना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुरुवर को देखकर ऐसा लगता है कि स्वयं ईश्वर को देख लिया हो, यह आश्रम परमात्मा का घर है, परमात्मा का आशीर्वाद है कि हमें गुरुवर का आशीर्वाद उनके स्वरूप में मिल रहा है और जीवन में सत्य कार्य करने का जो मार्गदर्शन हमें गुरुवर के चरणों से मिलता है उसे जीवन जीने का नया मार्ग हमें प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाराज जी का आशीर्वाद चिर काल तक हम सभी को मिलता रहे और आनंद के साथ जीवन का यापन करें। सनातन धर्म में मान्यता है कि 84 लाख योनियों के बाद हमें यह मानव जीवन मिलता है। इस मानव जीवन को सही तरीके से जीने का जो मार्ग आपके द्वारा बताया जाता है उससे जीवन सरल और संयमित होकर जीने का मार्ग मिल जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा की महाराज जी की कृपा से हमने प्रदेश में गौशालाओं को बनाने और संरक्षण देने का काम कर रहे हैं। उज्जैन सहित अन्य धार्मिक नगरों में भी शराब बंदी के लागू की है और प्रदेश में उज्जैन ओंकारेश्वर, महेश्वर दतिया, पीतांबरा पीठ, सलकनपुर, ओरछा, चित्रकूट सहित 19 नगर में शराबबंदी का आदेश भगवत कृपा से ही हो पाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 में उज्जैन को हम मेट्रो सिटी के साथ-साथ आध्यात्मिक, सांस्कृतिक नगरी के रूप में भी स्थापित कर पाएंगे। उज्जैन अब धार्मिक नगरी के साथ उत्सव की नगरी भी हो गई है गुरुदेव की कृपा से अब हम हर जिले में गीता भवन बना रहे हैं, जहां पर भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों का वाचन और आध्यात्मिक अध्ययन भी हो सकेगा। भगवान श्रीकृष्ण के अनुयायी होते हुए हम सब गोपालन को भी अपना रहे हैं और गोपालक परिवारों को आर्थिक सहायता भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के साथ देश के अलग अलग जगहों से आए भक्त जय गुरुदेव आश्रम के माध्यम से भक्ति मार्ग की ओर आगे बढ़ रहे हैं। गुरुदेव के आशीर्वाद से ही हम प्रदेश की जनता की समर्पित भाव से सेवा में लगे हैं। महाराज गुरुदेव का आशीर्वाद और उनका मार्गदर्शन सदैव मिलता है।  

वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई फसल किस्मों और आधुनिक तकनीकों से किसानों को मिल रहा है लाभ – मुख्यमंत्री साय

इकोनॉमी के विकास के लिए वैल्यू एडिशन आधारित उत्पादन करना होगा -राज्यपाल डेका   वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई फसल किस्मों और आधुनिक तकनीकों से किसानों को मिल रहा है लाभ – मुख्यमंत्री साय इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 11 वें दीक्षांत समारोह मे शामिल हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री 1880 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, 13 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक मिले रायपुर  छत्तीसगढ़ की लगभग 80 प्रतिशत अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। आज भूमि लगातार संकुचित होती जा रही है। अतएव हमें कम जमीन में ज्यादा से ज्यादा उत्पादन के लिए कार्य करना होगा। अर्थव्यवस्था के तेजी से विकास के लिए वैल्यू एडिशन उत्पादन आज की महती आवश्यकता है। राज्यपाल रमेन डेका एवं कुलाधिपति इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर ने विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में यह बात कही। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विशिष्ट अतिथि के रूप में कृषि मंत्री राम विचार नेताम और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के पूर्व निदेशक और प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह उपस्थित थे । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के सभागार में आयोजित भव्य एवं गरिमामय दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को पदक एवं उपाधियां वितरित की गई। विभिन्न संकायों में प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को 13 स्वर्ण, 7 रजत एवं 2 कांस्य पदक सहित 128 शोधार्थियों को पी.एच.डी, 518 विधार्थियों को स्नातकोत्तर और 1234 विधार्थियों को स्नातक उपाधि प्रदान की गई। कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल रमेन डेका ने इन उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह छात्र जीवन का एक बहुत बड़ा अवसर होता है। यह केवल डिग्री प्राप्त करने का दिन नही बल्कि भविष्य की शुरूआत का प्रतीक है। जब यह विश्वविद्यालय स्थापित हुआ था तब यहां केवल दो या तीन स्ट्रीम ही उपलब्ध थी। लेकिन समय के साथ शिक्षा और अवसरों का विस्तार हुआ है।  डेका ने कहा कि आज कृषि परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। अब यह विज्ञान तकनीकी, नवाचार और उद्यमिता से संचालित हो रही है। विश्वभर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, उपग्रह मानचित्र, सटीक कृषि जलवायु अनुकूल तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी और डेटा विश्लेषण का उपयोग बढ़ रहा है।   भारत भी तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। ड्रोन द्वारा उर्वरक एवं कीटनाशक छिड़काव, डिजिटल उपकरणों से मृदा स्वास्थ्य निगरानी, मोबाइल ऐप द्वारा किसान परामर्श और ई-नाम बाजार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल रहे हैं। किसानों और युवाओं को भी आधुनिक और उन्नत खेती की ओर बढ़ना चाहिए। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। लेकिन अब हमें बासमती जैसे उच्च गुणवत्ता वाले धान के उत्पादन पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे कार्पोरेट कंपनियों द्वारा खरीद आसान होगी और किसानों को बेहतर लाभ मिल सकेगा। हाइड्रोपोनिक्स और प्राकृतिक खेती के लिए भी भविष्य में बड़ी संभावनाएं है। विद्यार्थियों को भी कृषि के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए।   डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भूमि और जल संरचना कृषि के लिए अनुकूल है। यहां पानी आसानी से नीचे नहीं जाता जिससे उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलती है। सही तकनीक और सोच के साथ कृषि को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है तथा वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई फसल किस्मों और आधुनिक तकनीकों से किसानों को बड़ा लाभ मिल रहा है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए खेती को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन,फल-सब्जी और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार, कृषि उपकरणों की उपलब्धता तथा मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने विद्यार्थियों से ड्रोन, एआई और डिजिटल तकनीकों को खेती से जोड़कर किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सेतु बनने का आव्हान किया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रदेश में कृषि को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान की सबसे ज्यादा प्रजातियां है। सुगन्धित धान के लिए हमारा राज्य जाना जाता है। फल, फूल और मसाले की भी अपार संभावनाएं यहां है। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे आने का आग्रह करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के ज्ञान का लाभ छत्तीसगढ़ को मिलेगा।  समारोह में दीक्षांत भाषण डॉ. अशोक कुमार सिंह ने दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने दीक्षांत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया उन्होंने विश्वविद्यालय की गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर विस्तृत प्रकाश डाला। साथ ही उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को दीक्षा उपदेश दिया। आभार प्रदर्शन कुलसचिव द्वारा किया गया। दीक्षांत समारोह में क्षेत्र के विधायक पद्मअनुज शर्मा, विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलपति, विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल, विद्या परिषद तथा प्रशासनिक परिषद के सदस्यगण, प्राध्यापक, वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के अधिकारी, उपाधि तथा पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी तथा उनके पालकगण उपस्थित थे।

भोजशाला विवाद में चर्चा में आए Kuldeep Tiwari, जिन्होंने वर्षों तक जारी रखी मंदिर के लिए कानूनी जंग

इंदौर. धार की ऐतिहासिक नगरी से उठी न्याय की गूंज ने आज पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इंदौर हाई कोर्ट का वह ऐतिहासिक फैसला, जिसने सदियों से चले आ रहे संशय के कुहासे को छांटते हुए भोजशाला को स्पष्ट रूप से 'मंदिर' के स्वरूप में परिभाषित कर दिया है, महज एक कानूनी आदेश नहीं बल्कि करोड़ों आस्थावानों के धैर्य की विजय है। लेकिन इस विजय गाथा के पीछे एक ऐसा नाम है, जिसने कानून की बारीकियों को अपनी साधना बनाया और साक्ष्यों के अंबार से सत्य को बाहर खींच लाया। वह नाम है अधिवक्ता कुलदीप तिवारी। कौन हैं कुलदीप तिवारी? कुलदीप तिवारी केवल एक वकील नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत के पुनरुद्धार के लिए समर्पित एक 'कानूनी सेनानी' के रूप में उभरे हैं। 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' के माध्यम से उन्होंने धर्म और न्याय के बीच एक ऐसा सेतु बनाया है, जिसने इतिहास के धूल धूसरित पन्नों को फिर से पलटने पर मजबूर कर दिया। जब लोग केवल चर्चाओं में व्यस्त थे, तब कुलदीप तिवारी ने अदालतों की चौखट पर दस्तक दी। उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति की है जो दलीलों से ज्यादा, जमीन से जुड़े उन साक्ष्यों पर विश्वास करता है जिन्हें झुठलाया नहीं जा सकता। चाहे वह स्तंभों पर उकेरी गई नक्काशी हो या दीवारों पर मौन खड़े संस्कृत के शिलालेख, तिवारी ने हर एक प्रतीक को अदालत के समक्ष एक गवाह के रूप में खड़ा किया। क्यों खास थी उनकी याचिका? कुलदीप तिवारी की याचिका केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि 'ऐतिहासिक न्याय' की एक मार्मिक अपील थी। उन्होंने बहुत ही सुलझे हुए अंदाज में अदालत को यह समझाया कि किसी भी स्थान का धार्मिक स्वरूप उसकी बनावट, उसके मूल चरित्र और वहां सदियों से चली आ रही परंपराओं से तय होता है। उनका तर्क बड़ा सरल था “सत्य कभी पराजित नहीं होता, वह केवल समय के फेर में ओझल हो जाता है।” उन्होंने वैज्ञानिक साक्ष्यों की मांग की, एएसआई (ASI) सर्वे की पैरवी की और तकनीकी तकनीकों जैसे 'ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार' (GPR) के महत्व को समझाया। उनकी इसी समझाइश का नतीजा था कि कोर्ट ने आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति से जांच के आदेश दिए, जिसकी रिपोर्ट ने आज इस फैसले की नींव रखी। सत्य परेशान हो सकता है किंतु पराजित नहीं। भोजशाला का निर्णय हमारे ही पक्ष में आएगा – कुलदीप तिवारी याचिकाकर्ता – भोजशाला प्रकरण #भोजशाला #dhar #indore #Bhojshala #Kuldeep_Tiwari pic.twitter.com/3csscSEVLQ — Kuldeep Tiwari (@kuldeep1805) May 13, 2026 भोजशाला: राजा भोज की ज्ञान स्थली और वाग्देवी का वास कुलदीप तिवारी ने अपनी विशेष दलीलों में हमेशा इस बात पर जोर दिया कि धार की यह भोजशाला परमार वंश के राजा भोज द्वारा निर्मित एक अद्वितीय विश्वविद्यालय और माता सरस्वती (वाग्देवी) का पावन मंदिर है। उन्होंने इतिहास के लच्छेदार वृत्तांतों से परे जाकर वास्तुशिल्प के उन प्रमाणों को पेश किया, जो यह चीख-चीख कर कहते हैं कि इस परिसर की आत्मा विशुद्ध रूप से सनातनी है। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद, जिसमें परिसर को 'मंदिर' माना गया है, कुलदीप तिवारी का नाम इतिहास में उस सूत्रधार के रूप में दर्ज हो गया है जिसने कानूनी अस्त्रों से आस्था के मंदिर की रक्षा की। न्याय की दहलीज पर एक अटूट संकल्प कुलदीप तिवारी की यह यात्रा आसान नहीं थी। उन्हें कई मोर्चों पर विरोध और चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका 'समझाइश वाला लहजा' और 'कानूनी संयम' कभी नहीं डगमगाया। वे अक्सर कहते हैं कि यह लड़ाई किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि उस सत्य के पक्ष में है जो इतिहास की विसंगतियों के कारण कहीं खो गया था।