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CM भगवंत मान की कैबिनेट बैठक में कई अहम निर्णय, युवाओं के लिए नौकरियां और छात्रों को बड़ी राहत

चंडीगढ़ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब मंत्रिमंडल ने बुधवार को कई अहम फैसलों को मंजूरी दे दी है. इन फैसलों का उद्देश्य नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट) की दोबारा होने वाली परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थियों को बड़ी राहत देना, नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना, जनता के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, कचरा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और प्रदेश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (कारोबार को आसान बनाने) में और सुधार करना है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान लिए गए इन फैसलों में नीट परीक्षार्थियों और उनके साथ एक अटेंडेंट (सहायक) के लिए मुफ्त बस सफर, 1,013 लेक्चरारों और 156 जूनियर इंजीनियरों (जे.ई.) की भर्ती, पटियाला और जालंधर में गीले कचरे पर आधारित कंप्रेस्ड बायोगैस प्रोजेक्टों की स्थापना और पंजाब में निवेश व औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति, 2026’ में अहम संशोधन शामिल हैं।  इस बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया, “मंत्रिमंडल ने विद्यार्थी कल्याण, शिक्षा, रोजगार के अवसर पैदा करने, बुनियादी ढांचे के विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, प्रशासनिक सुधारों और औद्योगिक विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी है, जो जनता की भलाई और आर्थिक प्रगति के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हैं.” नीट (अंडर ग्रेजुएट) की दोबारा परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों को बड़ी राहत देते हुए कैबिनेट ने उम्मीदवारों और उनके साथ जाने वाले एक अटेंडेंट के लिए पंजाब और चंडीगढ़ में परीक्षा केंद्रों तक मुफ्त बस सफर को मंजूरी दी है. उल्लेखनीय है कि 3 मई, 2026 को हुई नीट की परीक्षा रद्द कर दी गई थी और अब यह परीक्षा 21 जून, 2026 के लिए पुनर्निर्धारित की गई है।  विद्यार्थियों और उनके अटेंडेंट की सुविधा के लिए पंजाब रोडवेज, पनबस और पी.आर.टी.सी. की बसें 20, 21 और 22 जून को पंजाब और चंडीगढ़ के परीक्षा केंद्रों तक आने-जाने के लिए मुफ्त सफर की सुविधा प्रदान करेंगी. विद्यार्थियों को इस सुविधा का लाभ लेने के लिए सिर्फ अपना एडमिट कार्ड दिखाना होगा और उनसे कोई किराया नहीं लिया जाएगा. मुफ्त सफर सुविधा का वित्तीय बोझ ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा उठाया जाएगा और वित्त विभाग द्वारा इसकी भरपाई की जाएगी. यह पहल विद्यार्थी कल्याण, शिक्षा को बढ़ावा देने और किफायती व सुलभ जनता परिवहन सेवाओं को सुनिश्चित करने के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।  लेक्चरार कैडर के 1,013 पद भरे जाएंगे; आयु सीमा में पांच साल की छूट को मंजूरी मंत्रिमंडल ने एजुकेशन रिक्रूटमेंट डायरेक्टोरेट के माध्यम से लेक्चरार कैडर (ग्रुप-बी) के बैकलॉग और नए सृजित पदों सहित 1,013 मंजूरशुदा रिक्त पदों को भरने की भी मंजूरी दे दी. कैबिनेट ने स्कूल शिक्षा विभाग में लेक्चरार कैडर के पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए ऊपरी आयु सीमा में पांच साल की एकमुश्त छूट भी दी है. इस कदम का उद्देश्य नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना और सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है।  लोक निर्माण विभाग में जूनियर इंजीनियर के 156 पदों को मंजूरी एक और अहम फैसला लेते हुए, मंत्रिमंडल ने लोक निर्माण विभाग में 156 जूनियर इंजीनियरों की भर्ती को मंजूरी दे दी है, जिसमें जूनियर इंजीनियर (सिविल) के 127 पद और जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) के 29 पद शामिल हैं. इस भर्ती से विभाग का कामकाज और सुचारू बनेगा और प्रभावी योजना, निगरानी और कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी. ये सभी पद पंजाब अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड (पी.एस.एस.एस.बी.) द्वारा सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाएंगे।  पटियाला और जालंधर में गीले कचरे पर आधारित सी.बी.जी. प्रोजेक्ट को मंजूरी कचरे के स्थायी प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिमंडल ने नगर निगम पटियाला और नगर निगम जालंधर में 100 टी.पी.डी. की क्षमता वाले गीले कचरे पर आधारित कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्रोजेक्टों को मंजूरी दे दी है और ये प्रोजेक्ट नामांकन के आधार पर एच.पी.सी.एल. रीन्यूएबल एंड ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एच.पी.आर.जी.ई.) को सौंपे जाएंगे. प्रदेश भर की 166 शहरी स्थानीय इकाइयों में प्रतिदिन लगभग 4,000 टन म्यूनिसिपल ठोस कचरा पैदा होता है. इस प्रोजेक्ट के तहत गीले कचरे की वैज्ञानिक ढंग से प्रोसेसिंग की जाएगी जिससे कचरे के नीचे दबी जगहें साफ हो सकेंगी, शहरी सफाई और जनता के स्वास्थ्य में सुधार होगा, नवीकरणीय ऊर्जा और जैविक खाद पैदा होगी, मीथेन का उत्सर्जन घटेगा और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।  सीनियरिटी से संबंधित विवादों को सुलझाने के लिए पंजाब सिविल सेवाएं नियमों में संशोधन मंत्रिमंडल ने पंजाब सिविल सर्विसेज (जनरल एंड कॉमन कंडीशंस ऑफ सर्विस) रूल्स-1994 के नियम-8 में संशोधन को भी मंजूरी दे दी है. यह संशोधन उन स्थितियों का समाधान करता है जहां एक जैसी योग्यता प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों की जन्म तिथि भी एक जैसी होती है. ऐसे मामलों में अंतर-सीनियरिटी अब मेरिट के आधार पर निर्धारित की जाएगी, जिसमें संबंधित पद के लिए निर्धारित न्यूनतम शैक्षिक योग्यता में प्राप्त अंतिम ग्रेडिंग या प्रतिशतता शामिल होगी।  निवेश को बढ़ावा देने के लिए ‘औद्योगिक और व्यापार विकास नीति-2026’ में संशोधन पंजाब के औद्योगिक माहौल को और मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण फैसले में मंत्रिमंडल ने ‘औद्योगिक और व्यापार विकास नीति-2026’ और पंजाब उद्योग क्रांति पहल के तहत विभिन्न सेक्टोरल नीतियों में संशोधनों को मंजूरी दी है. इन संशोधनों में वित्तीय रियायतें सिर्फ मौजूदा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एम.एस.एम.ई.) की बजाय मौजूदा औद्योगिक इकाइयों पर लागू होने का प्रावधान किया गया है. ये औद्योगिक क्लस्टरों, अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं और पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियों से संबंधित प्रावधानों को भी मजबूत करती हैं।  पहली 50 योग्य इकाइयों के लिए 10 लाख रुपये का एकमुश्त प्रोत्साहन में अब न्यूनतम गोल्ड लेवल जेड.ई.डी. सर्टिफिकेशन या उससे अधिक सर्टिफिकेशन प्राप्त करने वाले उद्योग शामिल होंगे, जबकि सेक्टोरल नीतियों में समग्र प्रोत्साहन सीमाओं से संबंधित प्रावधानों को संकेतात्मक और गैर-कानूनी माना जाएगा. इन सुधारों से निवेश को बढ़ावा मिलने, औद्योगिक विकास को मजबूती मिलने और पंजाब के देश में सबसे आकर्षक निवेश स्थान के रूप में उभरने की उम्मीद है। 

3 मेजबान देश, 14 टीमें और 54 मैच… जानिए कैसा होगा वनडे वर्ल्ड कप 2027 का महाकुंभ

नई दिल्ली क्रिकेट के सबसे बड़े टूर्नामेंट आईसीसी वनडे विश्व कप 2027 को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है. 24 साल बाद यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट एक बार फिर अफ्रीकी धरती पर लौटने जा रहा है. साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस मेगा इवेंट की संभावित तारीखें भी सामने आ गई हैं. ईएसपीएन क्रिकइंफो की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व कप 4 अक्टूबर 2027 से शुरू होकर 21 नवंबर 2027 तक खेला जाएगा।  आईसीसी बोर्ड की अहमदाबाद में हुई बैठक में इन तारीखों पर सहमति बन चुकी है. अब जुलाई में स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग में होने वाली आईसीसी की वार्षिक आम बैठक (AGM) में इस पर अंतिम मुहर लग सकती है. आखिरी बार अफ्रीका में वनडे वर्ल्ड कप 2003 में खेला गया था, जब साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और केन्या ने इसकी मेजबानी की थी. अब करीब ढाई दशक बाद क्रिकेट का यह महाकुंभ फिर अफ्रीकी महाद्वीप में लौट रहा है।  हालांकि साउथ अफ्रीका इससे पहले 2007 टी20 विश्व कप, 2009 चैम्पियंस ट्रॉफी और 2023 महिला टी20 विश्व कप की सफल मेजबानी कर चुका है. लेकिन वनडे विश्व कप की वापसी को लेकर उत्साह अलग स्तर पर है. 2023 और 2025 के संस्करणों में सिर्फ 10 टीमों ने हिस्सा लिया था, लेकिन 2027 विश्व कप में एक बार फिर 14 टीमें मैदान पर उतरेंगी. इससे प्रतियोगिता और भी रोमांचक होने की उम्मीद है।  टूर्नामेंट के प्रारूप के अनुसार 14 टीमों को दो समूहों में बांटा जाएगा, जिनमें प्रत्येक समूह में 7-7 टीमें होंगी. दोनों ग्रुप से शीर्ष तीन-तीन टीमें सुपर सिक्स चरण में पहुंचेंगी. इसके बाद सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले खेले जाएंगे. क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि 14 टीमों के फॉर्मेट की वापसी से विश्व कप में बड़े उलटफेर और रोमांचक मुकाबलों की संख्या बढ़ेगी।  टूर्नामेंट में कुल 54 मुकाबले खेले जाएंगे. इनमें से कम से कम 41 मैच साउथ अफ्रीका के आठ अलग-अलग स्टेडियमों में आयोजित होंगे. जिम्बाब्वे को 8 से 10 मुकाबलों की मेजबानी मिलने की संभावना है. हरारे और बुलावायो के अलावा इस बार विक्टोरिया फॉल्स भी विश्व कप का हिस्सा बनेगा।  विक्टोरिया फॉल्स के पास बन रहा खूबसूरत स्टेडियम विक्टोरिया फॉल्स में बन रहा फाले मोसी-ओ-तुन्या इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम इसी साल तैयार हो जाएगा और विश्व कप से पहले यहां घरेलू क्रिकेट भी खेला जाएगा. नामीबिया को भी कुछ मैचों की मेजबानी मिलने वाली है, जिससे पहली बार यह देश वनडे विश्व कप आयोजन का हिस्सा बनेगा. साउथ अफ्रीका और जिम्बाब्वे पूर्ण सदस्य देश होने के कारण सीधे विश्व कप के लिए क्वालिफाई कर चुके हैं. वहीं नामीबिया को टूर्नामेंट में जगह बनाने के लिए क्वालिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा।  अगर प्रस्तावित कार्यक्रम पर अंतिम मुहर लग जाती है, तो अक्टूबर 2027 में दुनिया की 14 सर्वश्रेष्ठ टीमें क्रिकेट के सबसे बड़े खिताब के लिए अफ्रीकी धरती पर भिड़ती नजर आएंगी. 2027 विश्व कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि 2027-31 फ्यूचर टूर प्रोग्राम (FTP) की शुरुआत भी होगा. इसी दौरान आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) के भविष्य पर भी बड़ा फैसला ले सकती है।  फिलहाल जिम्बाब्वे, आयरलैंड और अफगानिस्तान डब्ल्यूटीसी का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन आईसीसी सभी 12 पूर्ण सदस्य देशों को इसमें शामिल करने पर विचार कर रही है. साथ ही एकमात्र टेस्ट मैचों को भी डब्ल्यूटीसी अंक प्रणाली का हिस्सा बनाने की चर्चा चल रही है। 

क्रिकेट फैंस को लगा बड़ा झटका! इंग्लैंड सीरीज के दौरान केन विलियमसन ने लिया संन्यास

नईदिल्ली  क्रिकेट के गलियारों से बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है. न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज केन विलियमसन (Kane Williamson) ने इंग्लैंड क्रिकेट टीम के खिलाफ जारी टेस्ट सीरीज के बीच इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेकर सबको चौंका दिया है. संन्यास लेने से पहले वह न्यूजीलैंड की तरफ से इंटरनेशनल लेवल पर 2010 से 2026 के बीच कुल 378 मुकाबले खेलने में कामयाब रहे. इस दौरान उनके बल्ले से 452 पारियों में 48.12 की औसत से 19346 रन निकले. जिसमें 48 शतक और 103 अर्धशतक शामिल है. 251 रनों की खेली गई दोहरी शतकीय पारी उनकी एक मैच की एक पारी में खेली गई सर्वोच्च पारी रही।  विलियमसन ने न्यूजीलैंड की तरफ से सबसे ज्यादा इंटरनेशनल रन के साथ खत्म किया करियर  केन विलियमसन ने न्यूजीलैंड की तरफ से इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का साथ अपने क्रिकेट करियर का समापन किया है. उन्होंने पूरे इंटरनेशनल क्रिकेट के दौरान कुल 19346 रन बनाए. विलियमसन के बाद दूसरे स्थान पर पूर्व बल्लेबाज रॉस टेलर का नाम आता है. जो न्यूजीलैंड की तरफ से इंटरनेशनल लेवल पर 2006 से 2022 के बीच 18199 रन बनाने में कामयाब रहे. तीसरे स्थान पर 15289 रनों के साथ पूर्व कप्तान स्टीफन फ्लेमिंग काबिज हैं. फ्लेमिंग अपनी टीम की तरफ से 1994 से 2008 के बीच खेलने में कामयाब रहे।  विलियमसन ने टेस्ट क्रिकेट में बनाए सबसे ज्यादा रन विलियमसन अपने इंटरनेशनल क्रिकेट करियर के दौरान टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने में कामयाब रहे. टीम के लिए रेड बॉल क्रिकेट में उन्होंने कुल 110 मुकाबले खेले. जहां वह 195 पारियों में 54.06 की औसत से 9515 रन बनाने में कामयाब रहे. इसके बाद उनके बल्ले से वनडे फॉर्मेट की 167 पारियों में 48.69 की औसत से 7256 और टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट की 90 पारियों में 33.44 की औसत से 2575 रन निकले।  केन विलियमसन टेस्ट क्रिकेट में 33 शतक और 38 अर्धशतक, वनडे में 15 शतक और 47अर्धशतक एवं टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 18 अर्धशतक लगाने में कामयाब रहे। 

अरुण साव के निर्देश पर ठेकेदार को नोटिस, निरीक्षण में धीमी प्रगति मिलने पर जताई नाराजगी

उप मुख्यमंत्री अरुण साव के निर्देश पर ठेकेदार को नोटिस जारी, निरीक्षण के दौरान काम की धीमी प्रगति पर जताई थी नाराजगी साव ने 6 जून को किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन पर बन रहे ओवरब्रिज की देखी थी प्रगति, लेट-लतीफी पर ठेकेदार और अधिकारियों को लगाई थी फटकार रायपुर.  उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण की धीमी प्रगति पर ठेकेदार को नोटिस जारी किया है। उप मुख्यमंत्री साव ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान 6 जून को राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशलूर-जगदलपुर मार्ग में किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन के ऊपर बन रहे फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज का निरीक्षण किया था। उन्होंने निरीक्षण के दौरान काम के पिछड़ने एवं लेट-लतीफी पर ठेकेदार और अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उन्होंने अनुबंध के अनुसार कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर गहरी नाराजगी जताते हुए ठेकेदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। बस्तर जिले में केशलूर के पास 69 करोड़ 36 लाख रुपए की लागत से इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग के राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता ने निर्माण एजेंसी मेसर्स अशोक कुमार मित्तल को जारी नोटिस में कहा है कि साइट उपलब्ध होने के बावजूद मैन-पॉवर, मटेरियल और मशीनरी की खराब व्यवस्था के कारण अलग-अलग चरणों में निर्माण के समयबद्ध लक्ष्यों को हासिल नहीं किया जा सका है। कार्यस्थल पर काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे है और तय किए गए माइलस्टोन्स (महत्वपूर्ण पड़ावों) के अनुरूप नहीं है। विभाग द्वारा प्रगति की लगातार समीक्षा कर कार्यों में तेजी लाने के लिए बार-बार निर्देशित और नोटिस जारी करने के बावजूद काम की गति असंतोषजनक है। विभाग ने ठेकेदार को जारी नोटिस में कहा है कि उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री द्वारा विगत 6 जून को साइट के निरीक्षण के दौरान काम की बेहद धीमी प्रगति पर गंभीर चिंता जताई गई थी। उन्होंने अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार ठेकेदार के विरूद्ध तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उप मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य अभियंता ने ठेकेदार को नोटिस जारी कर तुरंत पर्याप्त मैन-पॉवर, मशीनरी, सामग्री और अन्य जरूरी संसाधन जुटाकर काम में तेजी लाने तथा प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए तय लक्ष्यों को हासिल करने सभी जरूरी उपाय करने के निर्देश दिए हैं। काम की प्रगति में उल्लेखनीय सुधार नहीं पाए जाने पर विभाग द्वारा अनुबंध के प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

रोजगार मांगने नहीं, रोजगार देने की ओर बढ़ रहे पंजाब के युवा; सरकार दे रही पूरा सहयोग : भगवंत मान

चंडीगढ़  वर्तमान समय में पंजाब नवीन विचारों, विशिष्ट सोच और उद्यमी युवाओं द्वारा लीक से हटकर पहलकदमियां करने के कारण विकास की नई कहानी रच रहा है, जिसकी वजह से राज्य देश भर में सबसे पसंदीदा स्टार्टअप स्थल के रूप में उभर रहा है जहां युवा अपने विचारों को व्यवसाय और रोजगार के अवसरों में बदल रहे हैं। इस सोच की पैरवी करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज 31 स्टार्टअप्स और उनके संस्थापकों को 1.07 करोड़ रुपए की सीड ग्रांट वितरित की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सफल उद्यमियों की अगली पीढ़ी न सिर्फ पंजाब से आए बल्कि पंजाब में अपनी कंपनियां भी स्थापित करे, जिससे राज्य के अंदर ही नौकरियों और कमाई के अवसर पैदा हों। स्टार्टअप को पंजाब के भविष्य के आर्थिक विकास का मुख्य स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है कि किसी भी शानदार उद्यम को वित्तीय सहायता की कमी के कारण छोड़ा न जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘पंजाब स्टार्टअप और इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026’ के तहत सीड ग्रांट को 3 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया गया है, जिसमें 7 स्टार्टअप्स को 5-5 लाख रुपये और 24 स्टार्टअप्स को 3-3 लाख रुपए की ग्रांट मिल रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ये उद्यम रोजगार के हजारों अवसर पैदा करेंगे और युवाओं में नौकरियों की तलाश में विदेश जाने के रुझान को कम करने में मदद करेंगे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि मुफ्त बिजली, किसानों को दिन में बिजली सप्लाई और कई अन्य सुधारों जैसी पहलकदमियों से यह पता चलता है कि कैसे नए विचार लोगों को सीधा लाभ पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि उद्यमिता और नवाचार में मिल रहे भरपूर समर्थन के साथ पंजाब, भारत का स्टार्टअप हब बनने के रास्ते पर लगातार आगे बढ़ रहा है। स्टार्टअप्स को सीड ग्रांट वितरित करने संबंधी समारोह के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आज पंजाब के उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक दिन है, खासकर हमारे युवा उद्यमियों के लिए जो नए विचारों के साथ अपना कारोबारी सफर शुरू कर रहे हैं। 31 स्टार्टअप्स को 1.07 करोड़ रुपए की सीड ग्रांट दी जा रही है। 7 स्टार्टअप्स को 5-5 लाख रुपए की ग्रांट मिल रही है, जबकि 24 स्टार्टअप्स को 3-3 लाख रुपए की ग्रांट मिल रही है। ये युवा उद्यमी अपने विचारों के माध्यम से सपनों को साकार कर रहे हैं और वे इस सहयोग के हकदार हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आम आदमी पार्टी (आप) खुद एक ऐसे विचार से पैदा हुई थी जब देश में परिवारवाद की राजनीति का दबदबा था और आम आदमी को अनदेखा कर दिया गया था। कई पहलुओं से ‘आप’ एक स्टार्टअप भी थी जिसने झाड़ू के अपने प्रतीक के साथ राजनीतिक व्यवस्था को साफ किया। 2022 के विधानसभा चुनाव में पंजाब के लोगों ने 7 पूर्व मुख्यमंत्रियों और उनके परिवारों को बाहर का रास्ता दिखाया और ईमानदार सरकार को मौका दिया। उस फैसले ने पंजाब को बदल दिया है और इसे देश का एक अग्रणी राज्य बना दिया है। पंजाबियों की उद्यमी भावना को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाबी अपनी मेहनत, जज्बे और उद्यम के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। उसी भावना से प्रेरित होकर हमारे युवा नए उद्यम शुरू कर रहे हैं और नए अवसर पैदा कर रहे हैं। वे सिर्फ कारोबार नहीं चला रहे, वे पंजाब के भविष्य को नया रूप दे रहे हैं। पंजाबी मूल के सफल उद्यमियों के उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और दुनिया भर में बहुत सी सफल कंपनियां पंजाबियों द्वारा स्थापित या सह-स्थापित की गई हैं। जोमैटो, ओला और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां इसकी उदाहरण हैं कि कैसे पंजाबियों ने विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। पंजाब हमेशा उद्यमियों की धरती रहा है। पंजाबी जहां भी जाते हैं, वे कारोबार स्थापित करते हैं, रोजगार पैदा करते हैं और अपनी अलग छाप छोड़ते हैं। हमारा लक्ष्य है कि सफल संस्थापकों की अगली पीढ़ी न सिर्फ पंजाब से आए बल्कि पंजाब में अपनी कंपनियां भी स्थापित करे। इनोवेशन इको-सिस्टम (नवीनतम प्रणाली) की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सीड मनी ( स्टार्टअप के लिए सहायता राशि) प्रदान करने का उद्देश्य स्टार्टअप्स पर आने वाले शुरुआती बोझ को कम करना और उन्हें अपने विचारों को हकीकत में बदलने तथा आगे बढ़ने का भरोसा देना है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को नवाचार के केंद्र बनना चाहिए जहां विचार क्लासरूम से परे उत्पाद, सेवाएं, कंपनियां और समाधान की नींव बनते हैं। अपने विदेशी दौरों को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि दक्षिण कोरिया के पैंगयो टेक्नो वैली और नीदरलैंड्स के वर्ल्ड हॉर्टी सेंटर में उन्होंने देखा कि कैसे एक योजनाबद्ध इनोवेशन इको-सिस्टम पूरे क्षेत्र को बदल सकता है। इस मॉडल से पता लगता है कि जब इको-सिस्टम को सही ढंग से डिज़ाइन किया जाता है तो विचार विश्व स्तरीय कंपनियों की नींव बन सकते हैं। इसी तरह नीदरलैंड्स में वर्ल्ड हॉर्टी सेंटर के अपने दौरे के दौरान मैंने देखा कि कैसे इनोवेशन नई तकनीकों की टेस्टिंग, लागूकरण और व्यावसायीकरण के माध्यम से खेतीबाड़ी और बागबानी को बदल सकती है। पंजाब की कृषि क्षमता के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब में भविष्य का विकास उच्च-मूल्य वाली खेतीबाड़ी, एग्री-टेक, फूड प्रोसेसिंग, सुरक्षित खेती, कोल्ड चेन और एग्री-लॉजिस्टिक्स के माध्यम से होना चाहिए। हमारे किसान हमेशा प्रगतिशील रहे हैं और पंजाब सरकार उन्हें आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और नए कारोबारी मॉडलों तक पहुंच प्रदान करने के लिए वचनबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये स्टार्टअप्स रोजगार के अवसर पैदा करके और युवाओं में भरोसा बहाल करके पंजाब में सार्थक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि हर उद्यमी पंजाब का ब्रांड एंबेसडर बने। आप जहां भी जाएं, पंजाब का नाम रोशन करें और दुनिया को बताएं कि पंजाब नवाचार के लिए तैयार है, पंजाब स्टार्टअप के लिए तैयार है और पंजाब भविष्य के लिए तैयार है। पंजाब सरकार की ओर से पूर्ण समर्थन का भरोसा देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह … Read more

PM मोदी का नया सियासी वार! कांग्रेस ग्रोथ रेट का जिक्र कर विपक्ष पर साधा निशाना

नई दिल्ली एनडीए की मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला. पीएम मोदी ने कहा कि जिस धीमी विकास दर को दशकों तक ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ कहा गया, उसे वास्तव में ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ कहा जाना चाहिए था, क्योंकि उस दौर की नीतियों, शासन शैली और आर्थिक फैसलों के लिए कांग्रेस जिम्मेदार थी, न कि देश की संस्कृति या बहुसंख्यक समाज. पीएम मोदी ने जो बातें कहीं हैं, वो कांग्रेस के ल‍िए मुसीबत के बीज की तरह हैं. क्‍योंक‍ि बीजेपी अब इस शब्‍द को लोगों के बीच ले जाएगी, उन्‍हें बताएगी क‍ि कांग्रेस राज में क‍िस तरह ह‍िन्‍दुओं के माथे पर कलंक मढ़ा गया।  पीएम मोदी ने कहा, NDA के 12 वर्षों की एक बड़ी सफलता ये भी है कि देश कांग्रेस के कुचक्र से आजाद हुआ है. कांग्रेस ने देश को लाचारगी, बेचारगी और हीन भावना के गर्त में गिरा दिया था. देश को यही एहसास कराया जाता था कि भारत में विकास धीरे-धीरे ही होता है, भारत में तेज विकास संभव ही नहीं है और बड़ी ही चतुराई से धीमी विकास को एक नाम दिया था, ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ यानी कार्यशैली कांग्रेस की, दायित्व कांग्रेस का, विफलता कांग्रेस की लेकिन कलंक देश की बड़ी हिंदू आबादी के नाम लगाया गया. जबकि असल में इस कुसंस्कृति का नाम होना चाहिए था कांग्रेस ग्रोथ रेट।  ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ और ‘NDA ग्रोथ रेट’ का अंतर समझाया पीएम मोदी ने कहा- सवाल ये है कि अगर 12 साल में इतना कुछ हो सकता है तो फिर दशकों तक क्यों नहीं हुआ? ये ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ और ‘NDA ग्रोथ रेट’ का अंतर है. एक व्यवस्था लोगों को इंतजार कराती थी. आज की व्यवस्था परिणाम दिखाती है. एक व्यवस्था काम अटकाती-भटकाती थी. आज की व्यवस्था कहती है, काम अभी होगा, समय पर होगा और बड़े पैमाने पर होगा. इसलिए 2014 से 2026 की कहानी केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, ये उस भारत की कहानी है, जिसने पहली बार अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ना तय किया है।  कहां से आया ये शब्‍द ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ शब्द मुख्य रूप से 1950 से 1980 के दशक के बीच भारत की औसत आर्थिक विकास दर के लिए इस्तेमाल किया गया था. उस दौर में भारत की जीडीपी वृद्धि दर करीब 3 से 3.5 प्रतिशत के आसपास रहती थी. जबकि आबादी तेजी से बढ़ रही थी. नतीजा यह हुआ कि प्रति व्यक्ति आय में बहुत सीमित बढ़ोतरी हुई. कहते हैं क‍ि इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले भारतीय अर्थशास्त्री राज कृष्‍णा ने किया था. उनका मकसद धीमी आर्थिक वृद्धि को व्यंग्यात्मक ढंग से बताना था. बाद में नेताओं ने इसका इस्‍तेमाल करना शुरू कर द‍िया, ज‍िसका ज‍िक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क‍िया।  पीएम मोदी ने इसे ‘कांग्रेस ग्रोथ रेट’ क्यों कहा? प्रधानमंत्री मोदी का तर्क है कि धीमी विकास दर के लिए भारत की सभ्यता, संस्कृति या समाज को जिम्मेदार ठहराना गलत था. उनके मुताबिक उस समय देश में जिस तरह की आर्थिक नीतियां लागू थीं, वे कांग्रेस सरकारों द्वारा बनाई गई थीं. स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक भारत में लाइसेंस-परमिट राज, सरकारी नियंत्रण वाली अर्थव्यवस्था और सीमित निजी निवेश का मॉडल लागू रहा. उद्योग लगाने से लेकर उत्पादन बढ़ाने तक लगभग हर काम के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत पड़ती थी. पीएम मोदी का कहना है कि विकास की धीमी गति की वजह यही नीतियां थीं. इसलिए उस दौर को हिंदू ग्रोथ रेट कहने के बजाय कांग्रेस ग्रोथ रेट कहना अधिक उचित होगा।  अटल सरकार का जिक्र क्यों किया? अपने भाषण में मोदी ने कहा कि देश ने पहली बार तेज विकास की झलक तब देखी जब अटल जी की सरकार आई. अटल सरकार के दौर में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना, ग्रामीण सड़क योजना, दूरसंचार क्षेत्र में सुधार और बुनियादी ढांचे पर बड़े निवेश जैसे कदम उठाए गए थे. बीजेपी लंबे समय से दावा करती रही है कि आर्थिक सुधारों को गति देने और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव मजबूत करने में अटल सरकार की बड़ी भूमिका रही. मोदी ने इसी संदर्भ में अटल सरकार को तेज विकास का शुरुआती मॉडल बताया। 

समावेशी विकास और जनकल्याण के पथ पर तेजी से बढ़ रहा मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश समावेशी विकास, नवाचार और जनकल्याण के दृढ़ संकल्प के साथ निरंतर बढ़ रहा आगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में बताई गईं मध्यप्रदेश की उपलब्धियां भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में गुरूवार को नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में सभी वर्गों के विकास के लिए किए जा रहे विशेष प्रयत्नों से अवगत करवाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि काउंसिल की बैठक में 'विकसित भारत @2047' के संकल्प को साकार करने के लिए केंद्र और राज्यों की साझी भागीदारी, समन्वित प्रयासों तथा विकास के विभिन्न आयामों पर व्यापक और सार्थक चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश भी विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए सुशासन, समावेशी विकास, नवाचार और जनकल्याण के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब देंगे विकास को गति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में जानकारी दी कि प्रदेश को नक्सलवाद का खात्मा केंद्र सरकार द्वारा तय की गई समय-सीमा से पहले करने में सफलता मिली है। प्रदेश के जो क्षेत्र नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहां विकास की गति तेज की जाएगी। युवाओं के विकास पर विशेष रूप से जोर रहेगा। इसके साथ ही प्रदेश में बहनों और बेटियों की उन्नति, कृषक कल्याण, नए मेडीकल कॉलेजों के माध्यम से उपचार कार्य को गुणवत्तापूर्ण बनाते हुए बेहतर कार्य हो रहा है। इसी तरह आरोग्य मंदिर सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन में भी मध्यप्रदेश अग्रसर है। नदी जोड़ो परियोजनाओं के क्रियान्वयन की तैयारी की गई है। पीएममहाविद्यालयों के माध्यम से युवाओं को अनेक संकायों और विषयों के अध्ययन से जोड़ा गया है। कौशल विकास और औद्योगिकीकरण के प्रयास तेज हुए हैं। देश में सबसे पहले पीएम मित्र पार्क की धार जिले में स्थापना हुई है, यहां शीघ्र ही इकाइयों द्वारा रिकार्ड समय में कार्य प्रारंभ हो रहा है। भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के वेस्ट को निष्पादित करने के साथ ही प्रदेश में जनकल्याण की दृष्टि से अनेक नए कार्य प्रारंभ करने पर ध्यान दिया जा रहा है। नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की इस बैठक में मुख्यत: 'मूलभूत मानव पूंजी और भविष्य के लिए तैयार कौशल', 'उत्पादक रोजगार, उद्यमिता और विकेंद्रीकृत विकास', 'स्वास्थ्य, पोषण और कल्याण' एवं 'सभी के लिए समानता और गरिमा' से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में देश में उद्यमिता को बढ़ावा देने, कौशल विकास को बढ़ाने और स्थायी रोजगार के अवसर सृजित करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।  

शेयर बाजार में शानदार रैली, ट्रंप के यू-टर्न का असर; शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स-निफ्टी उछले

मुंबई  भारतीय शेयर मार्केट हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को गजब की तेजी के साथ खुले हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान मसले पर यू-टर्न के बीच निवेशकों ने खरीदारी का माहौल पहले ही मिनट से बना दिया. नतीजन सेंसेक्स 950 अंकों की बंपर तेजी के साथ 74,788 लेवल पर और निफ्टी 260 अंक की उछाल के साथ 23,428 पर खुला।  आईटी के साथ बैंकिंग सेक्टर ने दिखाया दम निफ्टी आईटी के साथ निफ्टी फार्मा में भी कमाल की तेजी देखी गई. मजबूत शेयरों की बात करें तो इसमें एलएंडटी, ट्रेंट, इटरनल, इंडिगो और बजाज फाइनेंस शामिल रहे. इनके शेयरों में 2 से 3 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई. उम्मीद के अनुसार बैंकिंग शेयर भी इस पॉजिटिव खबर के चलते कमाल का प्रदर्शन कर रहे हैं. एचडीएफसी बैंक हो या आईसीआईसीआई बैंक या फिर देश का सबसे बडा पब्लिक सेक्टर बैंक एसबीआई ने मार्केट को तेजी दी. मार्केट की इस धमाकेदार शुरुआत से एक बात साफ दिखाई दे रही है कि ज्यादातर सेक्टर्स हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं।  मिडिल ईस्ट में अमेरिका के यू-टर्न का असर आज अगर भारतीय शेयर मार्केट में आई तेजी की वजह देखें तो वो सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति का वो बयान है, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ जंग खत्म होने की बात कही थी. इसके बाद ही निवेशकों का भरोसा बाजार पर लौटा. दूसरी तरफ अमेरिकी मार्केट की भी गुरुवार को हालत सुधरी, जिसका सीधा असर देश के शेयर मार्केट पर आज दिखाई दे रहा है।  अमेरिकी बाजार में भी रही तेजी गुरुवार को अमेरिकी बाजार की बात करें तो डाउ जोन्स 1.86% चढ़ा, वहीं, एसएंडपी 500 में 1.75% की तेजी देखी गई. इसके अलावा नैस्डैक 2.5% उछलकर बंद हुआ. इसके ठीक एक दिन पहले बुधवार को अमेरिकी मार्केट में उठा-पटक का दौर था।  एशियाई मार्केट में दिखा जोर मिडिल ईस्ट में दिख रही शांति का असर एशियाई मार्केट पर भी दिखाई दिया. निक्केई 225 में 3% से ज्यादा तेजी आई. इसके साथ ही हैंग सेंग 1.5% ऊपर बंद हुआ. वहीं, शंघाई कंपोजिट में 1% की बढ़त रही. देश के शेयर मार्केट के साथ ग्लोबल मार्केट पिछले कारोबारी दिन (बुधवार) के मुकाबले गुरुवार को ज्यादा स्टेबल नजर आए।  कच्चा तेल एक बार फिर 90 डॉलर के नीचे शांति वार्ता की उम्मीदों के बीच एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे जा चुकी हैं. खबर लिखे जाने तक ब्रेट क्रूड ऑयल 88.59 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. वहीं WTI क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल पर है. कच्चा तेल सस्ता होना भारत के लिए गुड न्यूज है, इससे देश की महंगाई और इंपोर्ट बिल में कमी आती है।  विदेशी निवेशकों को लेकर चिंता अभी भी भारतीय बाजार में घरेलू निवेशक जमकर खरीदारी कर रहे हैं. दूसरी तरफ विदेशी निवेशक की लागातर निकासी देश की के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. बीते दिन यानी 11 जून को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बाजार से करीब 1,987 करोड़ रुपये के शेयर निकाले. वहीं दूसरी तरफ घरेलू निवेशकों ने 4,224 करोड़ रुपये की खरीदारी की. एनएसडीएएल के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशक इस महीने जून में अभी तक 45,512 करोड़ रुपये भारतीय शेयर मार्केट से निकाल चुके हैं। 

ब्रिक्स प्रतिनिधियों के सम्मान में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विशेष आयोजन, कृषि मंत्रियों संग हुई अहम चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों से मुलाकात इन्दौर में अतिथियों और प्रतिनिधियों के सम्मान में दिया रात्रि भोज इन्दौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल कृषि मंत्रियों एवं अन्य विदेशी प्रतिनिधियों एवं अतिथियों से मुलाकात की। उन्होंने अतिथियों का देश के दिल मध्यप्रदेश की औद्योगिक राजधानी इन्दौर में स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी के सम्मान में रात्रि भोज भी दिया। अतिथियों के स्वागत के साथ मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और पर्यटन वैभव को प्रदर्शित करने वाले रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। सांस्कृतिक संध्या में प्रदेश की लोक कला, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना पर आधारित प्रस्तुतियों ने देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों का मन मोह लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम द्वारा से मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन स्थलों की विशेषताओं को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया। रात्रि भोज एवं सांस्कृतिक आयोजन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी राम सिलावट, कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, सांसद शंकर लालवानी तथा सुकविता पाटीदार, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, जिला पंचायत अध्यक्ष के श्रीमती रीना सतीश मालवीय, विधायक श्रीमती मालिनी गौड़, सुउषा ठाकुर, रमेश मेंदोला, मधु वर्मा तथा गोलू शुक्ला, सावन सोनकर, प्रताप करोसिया, सुमित मिश्रा, श्रवण सिंह चावड़ा, सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

नहीं रहे शूटिंग के गोल्डन बॉय जसपाल राणा, खेल जगत में शोक की लहर

नईदिल्ली  जाने-माने भारतीय शूटिंग कोच और एशियाई खेलों के पूर्व गोल्ड मेडलिस्ट जसपाल राणा का निधन हो गया है। वे 49 साल के थे। नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (NRAI) के प्रेसिडेंट कलिकेश नारायण सिंह देव के अनुसार, राणा ने गुरुवार रात दिल्ली के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली। हाल ही में, जर्मनी के म्यूनिख में हुए ISSF वर्ल्ड कप से भारतीय टीम की वापसी की फ़्लाइट के दौरान बीमार पड़ने के बाद राणा का एक मेडिकल प्रोसीजर हुआ था। नई दिल्ली पहुंचने पर उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया और स्टेंट लगाने के लिए एक मेडिकल प्रोसीजर किया गया। राणा भारतीय पिस्टल शूटर्स के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच के तौर पर काम कर रहे थे। कैसे हुई जसपाल राणा की मौत? निशानेबाज से कोच बने जसपाल राणा जर्मनी से लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के MAX अस्पताल में भर्ती करवाया गया और फिर आज कुछ देर पहले उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली। सूत्रों के मुताबिक, फ्लाइट में उनके सीने में तेज दर्द हुआ था। दिल्ली में विमान लैंड होने के बाद, उन्हें दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने के कारण तुरंत साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, अभी डॉक्टर की तरफ से उनकी मौत की वजह नहीं बताया गई है। मूल रूप से उत्तराखंड के उत्तरकाशी निवासी जसपाल राणा को निशानेबाजी के क्षेत्र में उनकी उत्कृष्ट सफलता के लिए साल 2002 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा के निधन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर गहरा दुख व्यक्त किया है।