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छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट की योजना: गौतम अडानी, कमलनाथ और मुख्यमंत्री यादव की अहम जुगलबंदी

छिंदवाड़ा   देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह अडानी ग्रुप छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट लगाने की तैयारी कर रहा है. मध्य प्रदेश सरकार ने इस प्रस्ताव को कैबिनेट में चर्चा के लिए रखा है. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अडानी ग्रुप के मालिक गौतम अडानी से इस बारे में गहन मंथन किया है. न्यूक्लियर पॉवर प्लांट छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के पास 750 एकड़ में बनना है।  अडानी ग्रुप को 16 साल पहले दी जमीन छिंदवाड़ा के चौसरा गांव में करीब 16 साल पहले अडानी ग्रुप को थर्मल पॉवर प्लांट बनाने के लिए सरकार ने 750 एकड़ जमीन ट्रांसफर की थी. इसका नाम पेच थर्मल एनर्जी रखा गया था. कंपनी ने अपना ऑफिस भी बनाया, जमीन कवर्ड की लेकिन प्लांट का काम शुरू नहीं हो पाया. अब इसी जमीन पर थर्मल पॉवर प्लांट की जगह न्यूक्लियर थर्मल पॉवर प्लांट प्रस्तावित किया गया है. छिंदवाड़ा में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट का प्रस्ताव मंत्री परिषद में रखा गया है।  अडानी से मीटिंग पर क्या बोले कमलनाथ पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने जिला कांग्रेस कमेटी के हवाले से प्रेस नोट जारी कर कहा है "छिंदवाड़ा के समग्र विकास के लिए हमारा संकल्प दृढ़ है. वर्षों से जो भूमि अनुपयोगी पड़ी है, उसे अब विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का समय आ गया है. इसी उद्देश्य से छिंदवाड़ा में प्रस्तावित न्यूक्लियर पॉवर प्रोजेक्ट को लेकर हमने गंभीरता से पहल की है।  कमलनाथ ने कहा "इस संदर्भ में गौतम अडानी से सकारात्मक चर्चा हुई है, ताकि क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकें. मेरा हमेशा से प्रयास रहा है कि छिंदवाड़ा को विकास के मॉडल के रूप में स्थापित किया जाए. यह परियोजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो क्षेत्र के भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।  थर्मल पॉवर प्लांट की जगह न्यूक्लियर पॉवर प्लांट अडानी ग्रुप को छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के आसपास 299.614 हेक्टेयर यानि करीब 750 एकड़ जमीन सरकार ने दी थी. अडानी ग्रुप ने 39.6 0 करोड़ रुपए की कमिटमेंट गारंटी भी मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी में जमा कर दी. लेकिन किन्हीं कारणों से प्रोजेक्ट अब तक शुरू नहीं हो पाया. अब अडानी पॉवर लिमिटेड ने इस थर्मल पावर प्लांट की जगह न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने का प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार के सामने रखा है. इस प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिलनी का इंतजार है।  किसानों ने किया था विरोध, कोर्ट ने भी मांगा था जवाब जमीन अधिग्रहण को लेकर कई बार पीड़ित किसानों और उनके परिवारों ने विरोध भी किया है. साल 2021 और 2023 में किसानों ने अधिग्रहण हुई जमीन पर कब्जा कर फसल लगा दी थी. हालांकि बाद में प्रशासन की मदद से फसल पर बुलडोजर चलाया गया. किसानों का आरोप है कि कंपनी ने जब जमीन का अधिग्रहण किया था तो उनसे वादा किया था कि जल्द यहां पर पॉवर प्लांट लगाया जाएगा।  जिन किसानों की जमीन पॉवर प्लांट के लिए अधिग्रहण की गई है, उनके परिवार से एक व्यक्ति को नौकरी दी जाएगी. लेकिन ना तो जमीन पर काम शुरू हुआ और ना ही किसी को नौकरी मिली. हमारी जमीन वापस की जाए. वहीं, 2022 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट नेपॉवर प्लांट का काम शुरू नहीं होने पर अडानी ग्रुप से जवाब मांगा था।  40 साल पहले हुआ था जमीन का अधिग्रहण छिंदवाड़ा के चौसरा गांव के पास पेंच नदी के पानी से थर्मल पॉवर प्लांट बनाने के लिए 1986-1988 के दौरान मध्य प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड ने जमीन अधिग्रहित की थी. 1320 मेगावाट के इस प्लांट के लिए चौरई तहसील के चौसरा, हिवेरखेड़ी, धनोरा,थांवरीटेका,डागावानी पिपरिया गांवों की जमीन ली गई थी।  न्यूक्लियर पॉवर प्लांट प्लान से क्या लाभ     स्थानीय युवाओं को बड़े स्तर पर पर रोजगार मिलेगा     क्षेत्र में उद्योग एवं व्यापार को नई गति मिलेगी     आधारभूत जरूरतें सड़क, बिजली और जल व्यवस्था मजबूत होगी     शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार होगा     सालों से बंजर पड़ी भूमि का सही उपयोग होगा

भारत ने 10 उपग्रहों की ताकत से तोड़ा दुनिया का घमंड, वाशिंगटन से बीजिंग तक उड़ा तहलका

बेंगलुरु  करीब दो दशक पहले भारतीय वैज्ञानिकों ने एक सपना देखा था. यह सपना बस स्‍टॉप से निकली उस एक बस की तरह था, जो निश्चित स्‍टॉप पर अपनी सवारियों को छोड़ती हुई आगे बढ़ रही थी. इसरो के वैज्ञानिक भी कुछ ऐसा ही करना चाहते थे, लेकिन उसके सपने में बस की जगह एक रॉकेट ने ले रखी थी. तब तक पाकिस्‍तान जैसों की औकात ही क्‍या, अमेरिका जैसे विकसित देश के लिए भी यह कर दिखाना किसी बड़े ख्‍वाब से कम नहीं था. आखिरकार वह तारीख आ ही गई, जब भारत ने कुछ ऐसा किया, जिसने वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक तमाम विकसित देशों के होश उड़ा दिए।  जी हां, 28 अप्रैल 2008 की उस शाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के PSLV-C9 ने अंतरिक्ष की तरफ शुरू दौड़ के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से टेकऑफ हुए PSLV-C9 रॉकेट से एक साथ दस उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा गया था. इस रॉकेट को अंतरिक्ष की दस अलग अलग लोकेशन पर इन उपग्रहों को ड्रॉप करना था. एक छोटी सी चूक और लोकेशन में रत्‍ती भर का अंतर पूरे मिशन पर पानी फेर सकती थी. पूरी दुनिया की निगाहें भारत के पहले ‘मल्टी-पेलोड लॉन्च’ पर टिकी हुई थीं. आखिरकार, इसरो के वैज्ञानिकों की मेहनत रंग लाई और PSLV-C9 ने अपना मिशन सफलता पूर्वक पूरा कर लिया।  दुनिया के लिए बेहद खास थी यह घटना     PSLV-C9 की सबसे सफलता यह थी कि उसने एक साथ 10 उपग्रह लॉन्च किए. उस समय के लिए यह एक अवश्विसनीय उपलब्धि थीऋ तब तक स्‍पेस में सेटेलाइट लॉन्च का काम ज्‍यादातर अमेरिका, रूस, यूरोप और चीन जैसे देश ही करते थे. ऐसे में भारत की इस सफलता ने पूरी दुनिया को चौंका दिया था।      तकनीकी रूप से भी यह मिशन बहुत खास था. PSLV रॉकेट को चार स्‍टेज में मिशन को पूरा करना था और इसमें अलग-अलग तरह के ईंधन का इस्तेमाल होना है. इस मिशन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इस एक ही मिशन में कई सेटेलाइट्स को अलग-अलग समय और अलग-अलग ऊंचाई पर छोड़ना था।      PSLV-C9 ने यह साबित कर दिया कि भारत कम खर्च में भी बेहतरीन और भरोसेमंद स्‍पेश मिशन को पूरा कर सकता है. इस मिशन के बाद दुनिया के कई देशों ने भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देखना शुरू किया. जिन देशों के पास अपने रॉकेट नहीं थे, उन्हें भारत एक सस्ता और भरोसेमंद विकल्प नजर आया।  भारत के लिए यह उपलब्धि क्यों बड़ी थी?     भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में बहुत छोटे स्तर से शुरुआत की थी. धीरे-धीरे वैज्ञानिकों की मेहनत से देश ने अपने रॉकेट और सेटेलाइट बनाना सीखा. PSLV-C9 की सफलता उसी मेहनत का नतीजा थी. यह सिर्फ एक तकनीकी सफलता नहीं थी, बल्कि यह साबित करता था कि भारत अब अपने दम पर बड़े काम कर सकता है।      इस मिशन के बाद इसरो ने छोटे उपग्रहों के लॉन्च पर और ध्यान दिया. आगे चलकर इसी अनुभव की वजह से 2017 में भारत ने एक साथ 104 उपग्रह लॉन्च करने का रिकॉर्ड भी बनाया. यानी PSLV-C9 ने ही भविष्‍य की बड़ी सफलताओं की राह तैयार की थी।      PSLV-C9 की सफलता इसलिए भी खास थी, क्योंकि यह सीमित संसाधनों में हासिल की गई थी. इसरो का बजट दुनिया की बड़ी स्‍पेस एजेंसियों से काफी कम थी. इसका शानदार प्रदर्शन PSLV-C9 के जरिए पूरी दुनिया देख चुकी थी. वहीं, इस सफलता ने भारत को आत्मनिर्भरता की तरफ देखने की नई दिशा भी दी थी।      PSLV-C9 की सफलता का फायदा भारत को आर्थिक तौर पर भी हुआ. इसरो ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बनाई और दूसरे देशों के उपग्रह लॉन्च करने का काम भी मिलने लगा. इससे भारत को कमाई के नए मौके मिले और देश की छवि और ताकत बेहद मजबूत हुई।  PSLV-C9 ने एक साथ इतने सारे सेटेलाइट्स को कैसे लॉन्च किया? पीएसएलवी-सी9 ने एक साथ 10 उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया. इस मिशन की असली सफलता मल्टीपल पेलोड्स को एक साथ ले जाने की टेक्‍नोलॉजी थी. रॉकेट में मेन सेटेलाइट कार्टोसैट-2ए को सबसे पहले अलग किया था. फिर लगभग 45 सेकंड बाद पर अन्य सभी छोटे सेटेलाइट्स को एक-एक उनकी सही जगह पर स्‍थापित किया गया।  स्‍पेस में स्‍थापित किए गए 10 उपग्रह कौन से थे और इनका वजन कितना था? सभी 10 सेटेलाइट्स का कुल वजन करीब 824 किलो था, इसमें सबसे भारी 690 किलो का कार्टोसैट-2ए सैटेलाइट था. इसके अलावा, इस मिशन में 83 किलो का आईएमएस-1 और 50 किग्रा किलो के आठ नैनो सेटेलाइट्स शामिल थे. कार्टोसैट-2ए एक भारतीय सेटेलाइट था, जो हाई-रिजॉल्‍यूशन तस्वीरें लेने की क्षमता रखता था. इसके अलावा, आईएमएस-1 भी एक भारतीय मिनी सेटेलाइट था, जिसे नई टेक्‍नोलॉजी का परीक्षण करने के लिए बनाया गया था. आठ नैनो सेटेलाइट कनाडा, जर्मनी, जापान, डेनमार्क, नीदरलैंड यूनिवर्सिटी ने तैयार किए थे. क्‍या कार्टोसैट-2ए सेटेलाइट को लेकर क्‍या विवाद हुआ था? कार्टोसैट-2ए सेटेलाइट को लेकर सवाल खड़ा हुआ कि यह एक डिफेंस सेटेलाइट था. इस सवाल ने लॉन्च के समय काफी बड़ी बहस छेड़ दी थी. आधिकारिक तौर पर, कार्टोसैट-2ए को शहरी और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट बताया गया था. लेकिन, इसकी हाई रिजॉल्‍यूशन क्षमता को देखते हुए यह कहा गया कि भारत ने पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों की निगरानी के लिए मिलिट्री सेटेलाइट स्‍पेस में भेजा है. क्या यह सचमुच कोई विश्व रिकॉर्ड था? हां, उस समय यह एक बड़ी उपलब्धि थी. पीएसएलवी-सी9 की सफलता के साथ, भारत एक ही मिशन में सबसे अधिक सेटेलाइट लॉन्च करने वाला देश बन गया था . हालांकि रूस ने 2007 में एक रॉकेट से 16 उपग्रह लॉन्च किए थे, लेकिन उनका कुल वजन केवल 300 किलोग्राम के आसपास था, जबकि भारत ने 824 किलोग्राम वजन ले जाकर सबसे भारी पेलोड ले जाने का रिकॉर्ड बनाया था. बाद में इसरो ने 2017 में पीएसएलवी-सी37 मिशन से 104 सेटेलाइट लॉन्च करके इस रिकॉर्ड को तोड़ दिया था.

शराब सिंडिकेट की बढ़ती मनमानी पर लगाम, क्यूआर कोड से होगी डिजिटल निगरानी

शराब सिंडिकेट की मनमानी पर लगाम शराब दुकानों पर क्यूआर कोड का डिजिटल पहरा 10 दिन तक आबकारी विभाग का विशेष सर्च ऑपरेशन क्यूआर कोड चस्पा न करने वाले लायसेंसियों पर गिरेगी गाज भोपाल आबकारी आयुक्त मध्यप्रदेश द्वारा प्रदेश की मदिरा दुकानों पर हो रही मनमानी वसूली और नियमों के उल्लंघन को रोकने के लिए अब तकनीक और सख्ती करने का निर्णय लिया है। विभाग के संज्ञान में आया है कि कई जिलों में शराब की दुकानों पर न केवल अधिकतम विक्रय मूल्य एमआरपी से अधिक दाम वसूले जा रहे हैं, बल्कि प्रतिस्पर्धा के चलते न्यूनतम विक्रय मूल्य एमएसपी से कम पर भी मदिरा बेची जा रही है। इस गंभीर अनियमितता को विभागीय निर्देशों की खुली अवहेलना मानते हुए आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने अब हर मदिरा दुकान पर 'क्यूआर कोड' चस्पा करना अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को सशक्त बनाएगी, जिससे वे मौके पर ही अपने स्मार्टफोन से स्कैन कर ब्रांड की वास्तविक और कानूनी दरों का सत्यापन कर सकेंगे। आयुक्त सक्सेना ने कहा कि अब हर मदिरा दुकान पर ई-आबकारी पोर्टल द्वारा जनरेटेड क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य है। इसे स्कैन करते ही उपभोक्ता के मोबाइल पर संबंधित जिले की रेट लिस्ट खुल जाएगी। कोई दुकान संचालक यदि निर्धारित एमएसपी से कम या एमआरपी से ज्यादा पर बिक्री करता है, तो मध्यप्रदेश राजपत्र की कंडिका 21.2 एवं 21.3 के तहत उसके विरुद्ध लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी कठोर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। उपभोक्ता अब सीधे मौके पर ही रेट का मिलान कर सकेंगे। आबकारी आयुक्त सक्सेना ने कहा कि यह कदम उपभोक्ताओं को पारदर्शी सेवाएं देने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। ई-आबकारी पोर्टल के माध्यम से जिला अधिकारियों को विशेष क्यूआर कोड उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें दुकानों के प्रमुख हिस्सों पर लगाना होगा। कोई लायसेंसी यदि इन नियमों की अनदेखी करता है या निर्धारित दरों से अलग बिक्री करता पाया जाता है, तो उसे भारी दंड का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मदिरा उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर उत्पाद उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी पारदर्शिता को जमीन पर उतारने के लिए प्रदेश भर में 28 अप्रैल 2026 से 7 मई 2026 तक एक विशेष 10 दिवसीय जांच अभियान चलाया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट 11 मई तक अनिवार्य रूप से तलब की गई है। मदिरा दुकानों पर विक्रय मूल्यों के सत्यापन हेतु चस्पा किये जाने वाले क्यूआर कोड सम्बन्धी निर्देश 1. क्यूआर कोड को ए-3 आकार के स्टिकर पेपर पर प्रिंट कराया जाये। 2. पेपर न्यूनतम 250 जीएसएम की गुणवत्ता का होना चाहिए। 3. स्टिकर में ग्लू पर्याप्त गुणवत्ता/मात्रा का होना चाहिए, जिससे इसे एक बार चस्पा होने पर निकाला न जा सके। 4. प्रत्येक मदिरा दुकान हेतु 5 क्यूआर कोड प्रिंट कराये जाएं :- I. 3 क्यूआर कोड को अभी मदिरा दुकान के ऐसे स्थानों पर चस्पा कराये जाएँ जहाँ से अधिकतम उपभोक्ताओं द्वारा इन्हें आसानी से स्कैन किया जा सके। II. शेष 2 क्यूआर कोड को भविष्य में आवश्यकता हेतु सुरक्षित रखा जाए, जिन्हें पूर्व में चस्पा क्यूआर कोड फटने अथवा क्षतिग्रस्त होने पर पुनः चस्पा कराया जाए। 5. क्यूआर कोड विभाग द्वारा प्रिंट कराये जाकर मदिरा दुकानों पर चस्पा कराये जाएँ, जिसका स्टेशनरी हेतु निर्धारित कोषालय शीर्ष से भुगतान किया जाये। 6. सम्बंधित वृत्त प्रभारी द्वारा मदिरा दुकान के क्यूआर कोड को स्कैन किया जाकर यह परिक्षण कर लिया जाए कि इसके माध्यम से मदिरा के विक्रय मूल्य (एमएसपी एवं एमआरपी) की जानकारी प्रदर्शित हो रही है। 7. क्यूआर कोड चस्पा होने पर, सम्बंधित वृत प्रभारी से मदिरा दुकान की फोटो प्राप्त की जाए जिसमे क्यूआर कोड प्रदर्शित हों। समस्त दुकानों पर उक्त कार्यवाही होने पर कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र इस कार्यालय को प्रेषित किया जाए।  

स्ट्रीट डॉग्स का बढ़ता आतंक, गर्मी में होते हैं आक्रामक; सतना में 3 घंटे में 40 लोगों को काटा

भोपाल  मध्य प्रदेश में स्ट्रीट डॉग्स यानी आवारा कुत्ते खूंखार हो रहे हैं। हाल ही में कई मामले सामने आ चुके हैं। ताजा मामला सतना का है। यहां सिर्फ 3 घंटे में ही 40 लोगों को कुत्तों ने काटा था। भोपाल में कुत्तों के काटने के हर रोज 50 केस पहुंच रहे हैं। सतना में कुत्तों के हमले के बाद लोगों में हड़कंप मच गया था। जान बचाने के लिए वे दुकानों और घरों में छिपते नजर आए, जबकि जिला अस्पताल में एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए अचानक भीड़ उमड़ पड़ी। भोपाल के अस्पतालों में रोजना 40 नए केस राजधानी भोपाल में डॉग बाइट के मामलों ने फिर से बढ़ने लगे हैं। जेपी और हमीदिया अस्पताल में रोजाना 50 से 60 नए मरीज आ रहे हैं, जबकि हर रोज दोनों अस्पतालों में 200 से ज्यादा लोग वैक्सीनेशन के लगवाने आते हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि गर्मी शुरू होते ही फिर से केस बढ़ रहे हैं। जनरल ओपीडी में 92 प्रतिशत रैबीज के वैक्सीनेशन के केस आ रहे हैं। अस्पतालों में डॉक्टर ने डॉग बाइट की कैटेगरी बना ली है इंदौर में अप्रैल में हर दिन 146 केस इंदौर में अप्रैल के 24 दिनों (24 अप्रैल तक) में डॉग बाइट के 3493 मामले सामने आए हैं। यानी औसतन करीब 146 केस प्रतिदिन दर्ज किए गए हैं। जनवरी में 5198, मार्च में 5109 मामले आए थे। वहीं दिसंबर में 5471 केस थे। बुजुर्ग को बगल के कुत्ते ने काटा जेपी अस्पताल में वैक्सीन लगवाने आए एक मरीज ने बताया कि उनके पड़ोसी एक कुत्ते को खाना देते हैं। एक दिन जब वे अपने घर से निकल रहे थे, तभी उस कुत्ते ने उन्हें काट लिया। वहीं खड़ी एक महिला ने भी बताया कि उनके साथ भी ऐसा ही हुआ—बगल के कुत्ते ने उनके पैर में नाखून मार दिया था। एमपी में डॉग बाइट के इतने आंकड़े पूरे मध्यप्रदेश में कुत्तों के काटने का खतरा बना रहता है। कई इलाके ऐसे हैं, जहां कुत्तों के डर से बच्चे घरों के बाहर खेलने तक नहीं जाते। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 2024 के आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश में 10.09 लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। इनमें से 6 लाख से अधिक बड़े शहरों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में हैं। 9 लोगों की रेबीज से मौत भी हुई केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 से जनवरी 2025 तक प्रदेश में करीब 3.39 लाख डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं। इनमें 2022 में 66,018, 2023 में 1,13,499, 2024 में 1,42,948 और 2025 (जनवरी) में 16,710 मामले दर्ज हुए। इसी अवधि में कम से कम 9 लोगों की रेबीज से मौत भी हुई है। देशभर के आंकड़ों से तुलना करें तो मध्यप्रदेश डॉग बाइट मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल है, जहां हर साल मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। 2022 में जहां करीब 21.89 लाख मामले देशभर में थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 37.15 लाख से अधिक हो गई। गर्मी में क्यों बढ़ते हैं कुत्तों के हमले पशु चिकित्सक एसआर नागर के मुताबिक, गर्मी का मौसम कुत्तों के व्यवहार को आक्रामक बना देता है। कुत्तों के शरीर में स्वेट ग्लैंड (पसीना निकालने वाले छिद्र) नहीं होते, इसलिए वे इंसानों की तरह शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते। इस वजह से उनमें चिड़चिड़ापन और आक्रामकता बढ़ जाती है। अगर उन्हें खाने-पीने की कमी हो या किसी तरह का खतरा महसूस हो, तो वे तुरंत हमला कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल से जून के बीच तापमान बढ़ने के साथ डॉग बाइट के मामलों में और तेजी आ सकती है। इस दौरान कुत्तों के खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें पर्याप्त पानी देना और तेज धूप से बचाना जरूरी है, ताकि उनका व्यवहार शांत बना रहे।

हनीमून मर्डर केस: राजा रघुवंशी की पत्नी सोनम को 11 महीने बाद मिली जमानत

इंदौर  इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की मेघालय में हनीमून के दौरान हत्या करने की आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को जमानत मिल गई है। राजा के भाई विपिन रघुवंशी ने इसकी पुष्टि की है। प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या करने की आरोपी सोनम को हत्याकांड के 11 महीनों बाद अदालत से राहत मिली है। सोनम गिरफ्तारी के बाद से जेल में बंद थी। उसका प्रेमी राज भी शिलॉन्ग जेल में बंद है। इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी अपनी नई नवेली दुल्हन सोनम रघुवंशी के साथ 23 मई 2025 को हनीमून पर मेघालय गए थे। यहां अचानक दोनों के गायब होने की खबर आई। कई दिनों की तलाश के बाद 2 जून को एक खाई में राजा रघुवंशी की लाश मिली थी तो हत्या करके फेंके जाने की बात सामने आई। हत्याकांड के कुछ दिनों बाद सोनम को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था। सोनम रघुवंशी ने गिरफ्तारी के बाद हत्याकांड का खुलासा किया और बताया कि उसने अपने प्रेमी राज के साथ पति को मार डालने की साजिश रची थी। इसी के तहत वह राजा को शिलॉन्ग ले गई थी। इंदौर से ही गए राज के तीन दोस्तों के साथ मिलकर सोनम ने अपने हाथों से ही अपना सुहाग उजाड़ लिया था। पति को मारकर उसने खाई में फेंक दिया। राजा को धारदार हथियार से मारा गया था और पत्थर से भी वार किया गया था। सोनम और राज ने इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए बेहद चालाकी के साथ पूरी साजिश रची थी। वह इस लूटपाट के दौरान हुई हत्या के रूप में दिखाना चाहते थे। जमानत किस आधार पर मिली है? इस सवाल पर उन्होंने बताया कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से उसे उठाया गया था, उस दौरान पुलिस ने नहीं बताया था कि सोनम को क्यों उठाया गया है। इसी आधार पर सोनम के वकील ने तर्क दिए थे। पेशी पर मुझे बुलाया नहीं गया था। राज कुशवाहा की जमानत के लिए अर्जी लगाई गई है। हम लोग हाईकोर्ट में जाएंगे। राजा रघुवंशी मर्डर केस में गिरफ्तार पांच में से अब तक चार आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। इनमें सोनम, लोकेंद्र सिंह तोमर, गार्ड बलबीर अहिरवार और शिलोम जेम्स हैं। 11 मई 2025 को शादी, 21 को हनीमून और 23 को हुई थी राजा की हत्या राजा रघुवंशी की सोनम से शादी इसी साल 11 मई 2025 को हुई थी। सोनम रघुवंशी और राजा 21 मई को हनीमून मनाने के लिए मेघालय के शिलॉन्ग गए थे, जहां 23 मई को हनीमून के दौरान लापता हो गए। 10 दिन बाद पुलिस ने 30 फीट गहरी खाई से उनका क्षत-विक्षत शव बरामद किया, जिस पर धारदार हथियार से किए गए कई घाव थे। सोनम तब लापता थी। इसके बाद यूपी में उसने सरेंडर किया था। उससे पूछताछ के बाद आकाश, आनंद और विशाल को पकड़ा था। सोनम के राज कुशवाहा से प्रेम सबंध थे। हालांकि, उसके परिवार ने इस बात से इनकार किया था। पत्नी सोनम राजा को दर्शनीय स्थलों की सैर के बहाने एक सुदूर स्थान पर बुलाकर ले गई थी। उनके पीछे अन्य तीनों हत्या के आरोपी भी चले गए थे। फिर दो छुरों से वार कर उसकी हत्या कर दी, जिनमें से एक छुरा बाद में जंगल से बरामद किया गया। सोनम घटनास्थल से भाग गई और बाद में उसने उत्तर प्रदेश में पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। सोनम और राज सहित सभी पांचों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। तीन बार रद्द हो चुकी थी जमानत याचिका सोनम पति राजा रघुवंशी की हत्या के आरोप में जून 2025 से शिलॉन्ग जेल में बंद है। सोनम की ओर से इससे पूर्व तीन बार जमानत याचिका दायर की गई, लेकिन तीनों बार कोर्ट ने खारिज कर दी थी। जबकि, सोनम रघुवंशी के मददगार रहे लोकेंद्र सिंह तोमर, गार्ड बलबीर अहिरवार और शिलोम जेम्स को अदालत ने जमानत दे दी थी। अब सोनम की चौथी याचिका मंजूर करते हुए कोर्ट ने उसे जमानत दे दी है। राजा रघुवंशी की हत्या में सोनम रघुवंशी का सहयोगी रहा उसका कथित प्रेमी राज कुशवाह अभी भी जेल में बंद है। यूपी में पकड़ी गई थी सोनम हत्याकांड को अंजाम देने के बाद सोनम बड़ी चालाकी से वहां से भाग निकली थी। इंदौर आकर उसने प्रेमी के साथ मुलाकात भी की और फिर जब तीन आरोपी पकड़े गए तो उसे अपनी गिरफ्तारी का अंदाजा हो गया और वह आखिरकर यूपी में पकड़ी गई। सोनम ने जिस तरह इस हत्याकांड को अंजाम दिया उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। परिवार ने तोड़ लिया था रिश्ता सोनम रघुवंशी तब से ही शिलॉन्ग जेल में बंद थी। शुरुआत में उसके परिवार ने सोनम से रिश्ता तोड़ने और किसी तरह की कानूनी मदद नहीं उपलब्ध कराने की बात कही थी। सोनम के भाई राजा के लिए वकील उपलब्ध कराने की बात कह रहे थे। हालांकि, बाद में सोनम को कानूनी मदद दी गई। राजा रघुवंशी के परिवार ने शिलॉन्ग में जाकर उस जगह पूजा-पाठ भी किया था जहां राजा की हत्या की गई थी।

पाकिस्तान में तेल संकट, पेट्रोलियम मंत्री ने कहा- 5-7 दिन का कच्चा तेल बचा, लॉकडाउन की तैयारी

 इस्लामाबाद वैश्विक मंचों पर खुद को 'मध्यस्थ' के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के सामने अब एक गंभीर घरेलू संकट खड़ा हो गया है। पाकिस्तान के ऊर्जा और वित्त मंत्रालय की ओर से एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने पूरे देश में खलबली मचा दी है। सरकार ने यह स्वीकार किया है कि देश के पास कच्चे तेल का रिजर्व केवल 5-7 दिनों का ही बचा है, जबकि डीजल और एलपीजी जैसे अन्य ईंधनों का स्टॉक भी कुछ ही हफ्तों में खत्म हो सकता है। संकट की जड़: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना पाकिस्तान के इस अचानक उपजे ऊर्जा संकट का सीधा तार मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों से जुड़ा है। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण ईरान ने होर्मुज को व्यापारिक जहाजों के लिए लगभग बंद कर दिया है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मुख्य रूप से खाड़ी देशों (सऊदी अरब, कुवैत आदि) से होने वाले आयात पर निर्भर है। रास्ता बंद होने और जहाजों की कमी से सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। पेट्रोलियम मंत्री का कुबूलनामा और वर्तमान हालात पाकिस्तान के केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने ईरान-अमेरिका संघर्ष से जुड़ी मौजूदा भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच देश के ईंधन भंडार को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समा टीवी के कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यह युद्ध जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी अनिश्चितता पैदा हो रही है। मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा किया कि पाकिस्तान का ऊर्जा तंत्र इस समय बाहरी झटकों के प्रति बेहद संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि देश के पास वर्तमान में केवल 5 से 7 दिनों का कच्चा तेल मौजूद है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि पाकिस्तान के पास एक दिन का भी पेट्रोल रिजर्व (भंडार) नहीं है। वहीं डीजल का स्टॉक 26-28 दिन और LPG का स्टॉक केवल 15 दिनों के लिए पर्याप्त है। पाकिस्तान दुनिया का पहला देश बन गया है जिसने आधिकारिक तौर पर एयरलाइंस के लिए ईंधन की कमी की चेतावनी (NOTAM) जारी कर दी है। अली परवेज मलिक ने वैश्विक बाजारों में अत्यधिक अस्थिरता की ओर इशारा करते हुए बताया कि इतिहास में दुबई क्रूड की कीमतें कभी भी 170 डॉलर के उच्च स्तर तक नहीं पहुंची थीं। इस अस्थिरता को देखते हुए देश की ऊर्जा भंडारण क्षमता को मजबूत करना अब एक तत्काल आवश्यकता बन गई है। 'कोविड काल' जैसी पाबंदियों की वापसी की तैयारी ईंधन बचाने के लिए शाहबाज शरीफ सरकार बेहद सख्त कदम उठाने पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए देश में लॉकडाउन जैसे नियम लागू किए जा सकते हैं। कॉरपोरेट और सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों को घर से काम करने का निर्देश दिया जा सकता है, ताकि सड़कों पर गाड़ियां कम चलें। स्कूलों और कॉलेजों को बंद करके शिक्षा को फिर से ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करने की योजना है। लोगों से निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने और कार शेयर करने की अपील की जा रही है। आसमान छूती महंगाई और चरमराती अर्थव्यवस्था पाकिस्तान पहले से ही भयंकर आर्थिक संकट और महंगाई से जूझ रहा है। इस ऊर्जा संकट के कारण सरकार अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों की समीक्षा 15 दिनों की जगह हर हफ्ते कर सकती है। युद्ध क्षेत्र से तेल लाने वाले जहाजों का बीमा 30,000 डॉलर से बढ़कर 4,00,000 डॉलर तक पहुंच गया है। इसका सीधा बोझ आम जनता की जेब पर पड़ेगा। परिवहन महंगा होने से फल, सब्जियां, राशन और जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। 'मध्यस्थ' पाकिस्तान के लिए कितनी बड़ी विडंबना? अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान अक्सर खुद को इस्लामी देशों और पश्चिमी ताकतों के बीच एक 'मध्यस्थ' के रूप में स्थापित करने की कोशिश करता है। लेकिन वर्तमान हालात बताते हैं कि जो देश दूसरों के विवाद सुलझाने का दावा करता है, वह अपनी बुनियादी जरूरतों (ऊर्जा सुरक्षा) को सुरक्षित रखने में बुरी तरह विफल साबित हो रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और आईएमएफ (IMF) के कड़े नियमों के बीच यह तेल संकट पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए 'ताबूत में आखिरी कील' साबित हो सकता है।  

जन-जन को जोड़ा जाए जल संरचनाओं के संरक्षण से 25 मई को गंगा दशहरा पर करें सभी श्रमदान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 27 अप्रैल को विधानसभा में प्रस्तुत नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने के संकल्प के लिए मंत्रि-परिषद की महिला सदस्यों ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अभिनंदन किया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उइके, महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर, नगरीय‍विकास एवं आवास राज्य मंत्री मती प्रतिमा बागरी तथा पंचायत और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री मती राधा सिंह ने पुष्प-गुच्छ भेंटकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया। प्रदेश में बढ़ा गेहूं उपार्जन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश में गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया। मध्यम और बड़े किसानों को स्लॉट बुकिंग की सुविधा दी गई। इस श्रेणी के 1 लाख 60 हजार 261 किसानों ने स्लॉट बुक किए हैं। स्लॉट बुकिंग की अवधि 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई तक की गई है। प्रदेश में अब तक कुल 9.49 लाख स्लॉट बुक हुए हैं जिनमें 4.49 लाख किसानों ने अपनी फसल बेची है। अब तक कुल 19.31 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन हो चुका है, जिसके लिए 2 हजार 547 करोड़ रूपए की राशि भुगतान की जा चुकी है। प्रत्येक शनिवार के अवकाश दिवस में भी स्लॉट बुकिंग और उपार्जन जारी रहेगा। प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 प्रति केन्द्र की गई है। किसान को तहसील के स्थान पर जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय करने की सुविधा दी गई। किसानों को राहत देते हुए एफए क्यू मापदण्ड को शिथिल करते हुए चमकविहीन गेहूं की सीमा 50% तक, सूकड़े दाने की सीमा 06% से बढ़ाकर 10% तक और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा बढ़ाकर 06% तक की गई। जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक, स्वयंसेवी संस्थायें जल संरक्षण में करें सहयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 19 मार्च से प्रारंभ जल गंगा संवर्धन अभियान 30 जून तक चलेगा। सभी जिलों में कई गतिविधियां और नवाचार हो रहें है। इसी अभियान के मध्य 25 मई को गंगा दशहरा है। इस दिन पूरे प्रदेश में एक साथ जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत विभिन्न गतिविधियां वृहद स्तर पर आयोजित की जायें। अधिक से अधिक व्यक्ति अपने आस-पास की जल संरचनाओं की बेहतरी के लिए श्रमदान करें। जन-जन को जल संरचनाओं के संरक्षण से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देशित किया अभियान नगरीय एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में एक साथ गतिविधियां आयोजित की जायें। जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक, स्वयंसेवी संस्थायें, स्व-सहायता समूह, व्यापारी संगठन एवं अन्य शासकीय, अशासकीय संस्थाओं को भी जोड़ा जाये। मंत्रीगण अपने-अपने प्रभार के जिलों में अभी से ही इस कार्यक्रम की तैयारी की रूपरेखा बनाएं। मंत्रीगण अपने-अपने क्षेत्र में नागरिकों को जनगणना में भाग लेने के लिए करें प्रोत्साहित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 26 अप्रैल को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 133वें संस्करण में भारत की जनगणना 2027 पर केन्द्रित चर्चा की। इस बार जनगणना का अनुभव अलग रहने वाला है क्योंकि यह पूरी तरह से डिजिटल है। गणना करने वाले कर्मचारियों के पास मोबाइल ऐप है। नागरिक खुद भी अपनी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सकते हैं। प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा जनगणना का महत्व बताते हुये जनगणना की प्रक्रिया में सभी के भाग लेने का आव्हान किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रीगण से अपने-अपने क्षेत्र में नागरिकों को जनगणना के महत्व के बारे में जागरूक करते हुए उन्हें प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण परिणामोन्मुख शिक्षा का मॉडल बन रहें हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य शासन की अपेक्षाओं के अनुरूप सांदीपनि विद्यालयों से बेहतर परिणाम आने लगे हैं। हाल के ही दसवी एवं बारहवीं बोर्ड परीक्षा के नतीजों में इन विद्यालयों के 58 छात्र-छात्राओं ने मेरिट में स्थान बनाया। दसवीं की मेरिट सूची में 41 विद्यार्थी सांदीपनि विद्यालयों से हैं वही बारहवीं में 17 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। विगत 4 वर्षों में सांदीपनि विद्यालयों में कक्षा दसवीं में उत्तीर्ण विद्यालयों का प्रतिशत 68 से बढ़कर 88 हो गया। कक्षा बारहवीं का परिणाम इस अवधि में बढ़कर 59 प्रतिशत से 89 प्रतिशत हो गया। सांदीपनि विद्यालय गुणवत्तापूर्ण परिणामोन्मुख शिक्षा का मॉडल बन रहें हैं। कान्हा में आए जंगली भैसे मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वन्य जीव संरक्षण और जैव विविधता सहयोग का नया केन्द्र बन गया है। प्रदेश में एक सदी से अधिक समय से जंगली भैस प्रजाति विलुप्त हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि आज 28 अप्रैल को कान्हा नेशनल पार्क बालाघाट के सूपखार में जंगली भैंसे का पुनर्स्थापन किया गया। चार जंगली भैंसों को उनके नये प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है। यह जंगली भैंसें असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाये गये हैं। मध्यप्रदेश और असम के बीच वन्य जीवों के आदान-प्रदान का नया अध्याय शुरू हो रहा है। असम से गैडें/रायनों के 2 जोड़े लाने की भी योजना है। जंगली भैंसों के आने से मध्यप्रदेश में जैव विविधता का नया आयाम जुड़ा है।  

लोधी समाज वीरता और‍किसान योद्धा परंपरा का प्रतीक

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को नई ऊर्जा दे रहा है। आज राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि पर शौर्य यात्रा के माध्यम से हम, भूले-बिसरे उन नायकों को समाज के सामने ला रहे हैं, जिन्होंने अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ सबसे पहले संगठित विद्रोह किया। राजा हिरदेशाह को नर्मदा टाइगर के नाम से भी जाना जाता है। वे 1842 की क्रांति के महानायक थे, जिनकी शौर्य गाथा आज भी बुंदेला, लोधी और जनजातीय समाज के नाटकों, लोक गीतों और लाखों-लाख हृदय में जीवित है। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी और आदर्श है। समाज के महापुरुषों के संघर्ष को भी याद करने की आवश्यकता है। जो संघर्षों से लड़ना जानता है, समाज उसका अभिनंदन करता है। राज्य शासन राजा हिरदेशाह के संघर्ष और देश की आजादी में उनके योगदान पर शोध कराएगी। इतिहास के गौरवशाली पृष्ठ पुन: खुलने चाहिए। राजा हिरदेशाह के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाएगा। नर्मदा के किनारे हीरापुर में राजा हिरदेशाह के नाम से एक तीर्थ स्थल का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1842 की क्रांति के महानायक राजा हिरदेशाह लोधी की स्मृति में जंबूरी मैदान पर हुए ऐतिहासिक आयोजन और शौर्य यात्रा को संबोधित किया। कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह, सांसद  फग्गन सिंह कुलस्ते, सांसद  दर्शन सिंह चौधरी तथा राजा हिरदेशाह लोधी और गोंड राजा नरवर शाह के वंशज उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा टाइगर राजा हिरदेशाह पुस्तक का किया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1842 की क्रांति के नायक नर्मदा टाइगर राजा हिरदेशाह पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का राजा हिरदेशाह पर शोध और उनके संघर्ष को पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा के लिए समाज के प्रतिनिधियों द्वारा अभिवादन किया गया। राज्य सरकार प्रदेश की विरासत और महान हस्तियों के सम्मान में कर रही है निरंतर गतिविधियां संचालित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोधी समाज वीरता और‍किसान योद्धा परंपरा का प्रतीक है। अंग्रेजों की बढ़ती दखलअंदाजी, करों के भारी बोझ और किसानों के शोषण ने राजा हिरदेशाह को विद्रोह के लिए प्रेरित किया। राजा हिरदेशाह की कहानी केवल युद्ध की नहीं, बल्कि एकता, साहस और देशभक्ति की गाथा है। आज के युवाओं के लिए उनका स्पष्ट संदेश है कि अत्याचार के खिलाफ खड़े होना, हर भारतीय का कर्तव्य है। राज्य सरकार प्रदेश की विरासत और महान हस्तियों के सम्मान में निरंतर गतिविधियां संचालित कर रही है। रानी अवंतीबाई के नाम पर सागर में राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। राज्य सरकार द्वारा सनातन संस्कृति के सभी तीज-त्यौहार धूमधाम से मनाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए कृषक कल्याण वर्ष मनाने की पहल की है। महान सम्राट विक्रमादित्य पर भी शोध संस्थान बनाया गया है। प्रदेश सरकार सांस्कृतिक पुनरोत्थान के लिए संकल्पित है। इसीलिए प्रत्येक नगरीय निकाय में सर्व सुविधायुक्त भव्य गीता भवन बनाए जा रहे हैं। सभी जनपदों में एक-एक वृंदावन ग्राम भी तैयार किए जा रहे हैं। समाज के युवाओं को साहसी, सामर्थ्यवान, शिक्षित और संस्कारवान बनने की आवश्यकता है पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि यह कार्यक्रम अपने पुरखों के बलिदान को स्मरण करने का है। आज सामाजिक जीवन में शिक्षित होने के साथ संस्कारित बनने का संकल्प भी लेना चाहिए। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने देश की आजादी के गुमनाम नायकों को याद करने का आह्वान किया था। आज सवाल यह नहीं है कि 1857 की क्रांति बड़ी थी या 1842 की। राजा हिरदेशाह के द्वारा 1842 में आरंभ की गई बुंदेली क्रांति से 1942 भारत छोड़ो आंदोलन तक का कालखंड भारत के ऐतिहासिक आंदोलन में सबसे महत्वपूर्ण 100 वर्ष हैं। राजा हिरदेशाह ने 1842 से 1858 तक लगातार ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। आज राजा मेहरबान सिंह को भी याद करने का अवसर है, जिन्होंने कभी कोई लड़ाई नहीं हारी। यह आयोजन ऐसे वीरों के बलिदान को याद करने के लिए है। उनके परिवारों का सम्मान करने का दिन है। लोधी समाज सामर्थ्यवान हैं, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए दुश्मनों से लोहा लिया, प्रश्न यह है कि वो पिछड़े कैसे हो गए। समाज के युवाओं को साहसी, सामर्थ्यवान, शिक्षित और संस्कारवान बनने की आवश्यकता है। आज हम सभी राजा हिरदेशाह लोधी के बलिदान को नमन कर रहे हैं। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि राजा हिरदेशाह लोधी ने 1857 की क्रांति से पहले आजादी के लिए 1842 में क्रांति का बिगुल फूंका था। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। राज्य सरकार सभी शहीदों के बलिदान को नमन कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से राजा हिरदेशाह लोधी के बलिदान और उनके कार्यों को पाठ्यक्रम में शामिल कराने का अनुरोध किया। नर्मदा के तट से आजादी की क्रांति का पहला बिगुल फूंका गया था पूज्य दादा गुरु ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में पहली क्रांति नर्मदा के तट पर 1842 में शुरू हुई थी, यह तथ्य हम सबको गौरवान्वित करने वाला है। राजा हिरदेशाह ने इसका नेतृत्व किया और अपना बलिदान दिया। इस आयोजन में जहां धैर्य है वहीं धर्म भी है। शौर्य दिवस के अवसर पर हमें सनातन धर्म के मार्ग पर चलते हुए अखंड भारत के निर्माण में योगदान का संकल्प लेना है। राजा हिरदेशाह ने बुंदेलों, जनजातियों और सकल समाज को एकजुट कर राष्ट्र के लिए लड़ने को तैयार किया था। नर्मदा के तट से आजादी की क्रांति का पहला बिगुल फूंका गया था। प्रदेश में रानी अवंतीबाई, वीरांगना दुर्गावती जैसी वीरांगनाओं ने अपने राज्य की रक्षा के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था। युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करना आवश्यक लोधी-लोधा समाज के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक  जालम सिंह पटेल ने कहा कि लोधी समाज के गौरव राजा हिरदेशाह ने ब्रिटिश शासन के कानूनों का विरोध करते हुए 1842 की क्रांति का नेतृत्व किया। इस संघर्ष में उनके करीब 12 भाई बलिदान हुए। उनकी पूरी संपत्ति राजसात कर ली गई थी। लोधी एक किसान और योद्धाओं का समाज है।  जालम सिंह पटेल ने कहा कि लोधी समाज ने नशे के खिलाफ मुहिम शुरू की है। उन्होंने युवाओं को इस मुहिम में सहयोग करने के … Read more

सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी पहल

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र कल्याण को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वृद्धजनों के लिए एक मजबूत और संवेदनशील सामाजिक सुरक्षा तंत्र विकसित किया है, वहीं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में विभागीय योजनाएँ प्रभावी रूप से धरातल पर क्रियान्वित हो रही हैं। इन प्रयासों से वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है। सरल प्रक्रिया, सहज लाभ राज्य में वरिष्ठ नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए किसी अलग “सीनियर सिटीजन कार्ड” की आवश्यकता नहीं है। आधार कार्ड एवं अन्य वैध दस्तावेजों के माध्यम से आयु और पात्रता का सत्यापन कर सीधे लाभ प्रदान किया जा रहा है, इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, सरल और सुलभ बनी है। वृद्धाश्रम :- सम्मानजनक जीवन का आधार प्रदेश के राजधानी रायपुर सहित विभिन्न जिलों में संचालित 27 वृद्धाश्रम निराश्रित एवं असहाय वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित आश्रय बनकर उभरे हैं। वर्तमान में यहां 675 वृद्धजन लाभान्वित हो रहे हैं। यहाँ निःशुल्क आवास, पौष्टिक भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक सुविधाएँ नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर मिल रहा है। पैलिएटिव केयर (प्रशामक गृह) :- विशेष देखभाल की व्यवस्था गंभीर रूप से बीमार एवं बिस्तर पर आश्रित वृद्धजनों के लिए राज्य में 13 प्रशामक गृह संचालित हैं। वर्तमान में रायपुर, कबीरधाम, दुर्ग, बालोद, रायगढ़ एवं बेमेतरा में 140 वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं। इन केंद्रों में निरंतर देखभाल, उपचार सहयोग और आवश्यक सेवाएँ प्रदान की जाती हैं, जिससे संवेदनशील स्थिति में भी उन्हें मानवीय और सम्मानजनक जीवन मिल सके। वृद्धावस्था पेंशन :- आर्थिक संबल का आधार सामाजिक सुरक्षा के तहत पात्र वृद्धजनों को नियमित पेंशन दी जा रही है। बीपीएल एवं एसईसीसी वंचन समूह के वृद्धजनों को 500 रुपए प्रतिमाह तथा 80 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को 680 रुपए प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जा रही है। यह सहायता उनके दैनिक जीवन में आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान को मजबूती देती है। सहायक उपकरण और तीर्थ यात्रा :- नई ऊर्जा का संचार वरिष्ठ नागरिक को सहायक उपकरण प्रदाय योजना के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के निराश्रित वृद्धजनों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना के तहत चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर अधिकतम 6900 रुपए तक के उपकरण जैसे व्हीलचेयर, वॉकर, बैसाखी, छड़ी, श्रवण यंत्र, चश्मा, ट्राइसाइकिल सहित अन्य आवश्यक सामग्री प्रदान की जाती है, जिससे उनका जीवन अधिक सहज बन सके। 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों की तीर्थ यात्रा योजना के माध्यम से उन्हें आध्यात्मिक और मानसिक संतुलन का अवसर मिल रहा है, जो उनके जीवन में नई ऊर्जा का संचार करता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 14 यात्राओं के माध्यम से 10 हजार 694 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। समग्र कल्याण की दिशा में निरंतर प्रयास छत्तीसगढ़ शासन का लक्ष्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को समाज की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है। पेंशन, स्वास्थ्य देखभाल, आवास, सहायक सुविधाओं और सामाजिक जुड़ाव के माध्यम से राज्य अपने वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक सशक्त, संवेदनशील और समग्र सामाजिक सुरक्षा तंत्र स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय और मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में यह प्रयास आने वाले समय में और अधिक प्रभावी रूप से वृद्धजनों के जीवन को गरिमामय बनाने की दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे।  

AAP को बड़ा झटका: 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने से बदला राजनीतिक समीकरण

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्य सभा सांसद बीजेपी में शामिल हो गए हैं। इसको लेकर राज्य सभा सचिवालय ने भी अधिसूचना जारी कर दी है। इसी के साथ उच्च सदन में भाजपा की ताकत भी बढ़ी है और सांसदों की संख्या 113 हो गई है। जिन सात सांसदों ने बीजेपी का दामन थामा है, उनमें से 6 पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं और स्वाती मालिवाल दिल्ली से है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राज्य सभा सांसदों का बीजेपी में जाना अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दरअसल, दिल्ली हारने के बाद अब आम आदमी पार्टी की पंजाब में ही सरकार है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली चुनाव हारने के बाद पूरा ध्यान पंजाब पर लगा दिया है। AAP के बागी सांसदों के शामिल होने से बीजेपी खुश नजर आ रही है। दरअसल, राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने विधासनभा चुनाव 2022 में AAP की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। जो सांसद बीजेपी में शामिल हुए हैं उनमें- राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, राजिंदर गुप्ता और स्वाति मालीवाल शामिल है। क्या बीजेपी को मिलेगा फायदा? AAP के सातों राज्य सभा सांसदों के विलय के बाद उच्च सदन में भले ही बीजेपी का संख्या बल बढ़ा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर फायदा कम होता नजर आ रहा है। अपनी रणनीति से 2022 में राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने AAP को जीत दिलाई हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नेताओं का कोई जनाधार नहीं है। ऐसे में बीजेपी के लिए इनका कितना उपयोगी साबित होना संभव है, यह आने वाला समय बताएगा। पंजाब में चड्ढा का इस्तेमाल करेगी बीजेपी वहीं पंजाब में बीजेपी अब राघव चड्ढा का इस्तेमाल करेगी, क्योंकि प्रदेश में कायदे से पार्टी अपनी उपस्थिति भी दर्ज नहीं करा पाई है। इसके अलावा बीजेपी पर पंजाब में किसान विरोधी होने का आरोप भी लगता है। खासकर केंद्र के कृषि कानूनों के विवाद के बाद। संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य किसान संगठनों ने बीजेपी पर किसानों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। इसलिए अकाली दल भी अब बीजेपी के साथ नहीं है। चड्ढा के सामने भी होगी चुनौती राघव चड्ढा AAP की तरफ से राज्य सभा में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते थे, लेकिन अब बीजेपी में जाने के बाद उनके सामने कई चुनौतियां होगी। दरअसल, इससे पहले तक वे बीजेपी के मुखर विरोधी रहे है और कई मौके पर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। खासतौर पर कृषि कानूनों को लेकर। ऐसे में प्रदेश की जनता और बीजेपी में अपनी जगह कैसे बनाते है, यह आने वाला समय बताएगा। उन्हें न केवल पार्टी की विचारधारा के साथ तालमेल बैठाना होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का भरोसा भी जीतना होगा।