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सीएम मोहन यादव का एलान: प्रदेश के मजरे, टोले और सांदीपनि स्कूल जल्द सड़कों से जुड़ेंगे

भोपाल  जल्द ही प्रदेश के मजरे, टोले ओर सांदीपनि स्कूल सड़कों से जुड़ेंगे। इन्हें आपस में जोड़ने के लिए 7 हजार 135 सडकें बनाई जाएंगी। यह काम सुगम संपर्कता परियोजना के तहत किए जाएंगे। सड़क निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ड्रोन का उपयोग किया जाएगा। सिपरी सॉफ्टवेयर का उपयोग अब सिर्फ डीपीआर तैयार करने के लिए ही नहीं किया जाएगा, बल्कि इससे सड़क के साथ पुल-पुलियों की स्थिति की निगरानी करने में भी मदद ली जाएगी। सीएम ने की समीक्षा एमपी के सीएम डॉ. मोहन यादव ने उक्त परियोजना की समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक में संबंधित अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए गए कि गांव-गांव के विकास के लिए सड़कों की इस परियोजना का काम तेजी से किया जाए। जहां आबादी 100 से पार, वहीं बिछेगी सड़क इस परियोजना की खासियत ये है कि इसके तहत 100 से अधिक आबादी वाले मजरों-टोलों को सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा। ये सड़कें वीबी-जीराम-जी योजना के अंतर्गत बनावाई जाएंगी। 7000 से ज्यादा सड़कों का नेटवर्क तैयार करने वाले इस काम पर 1000 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं। सुगम संपर्कता परियोजना के तहत शुरू किए जाने वाले इस काम के लिए प्रदेश की प्रत्येक जनपद पंचायत तीन करोड़ तक की स्वीकृति दे सकेंगी। यह भी होगा -पूर्व में बनी सड़कों की रिम्स पोर्टल के माध्यम से जियो-इंवेंट्री की जा रही है। इससे नई सड़कों के चयन में दोहराव की स्थिति नहीं बनेगी। जियो इंवेंट्री में राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, पीएमजीएसवाय, मुख्य जिला सड़क और संपर्कता एप से चयनित सड़कें शामिल हैं।  -निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 33 हजार 655 सड़कों में से 17 हजार 437 सड़कों की जियो इंवेंट्री का कार्य पूरा कर लिया है। इसके साथ ही 9 जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक सर्वे कार्य पूर्ण कर लिया गया है। रतलाम, जबलपुर, आगर-मालवा, मंदसौर और पन्ना उक्त काम में आगे है। ऐसे समझें पूरा प्लान कुल सड़कें- 7,135 बजट- करीब 1000 करोड़ रुपए कवरेज- 100+ आबादी वाले सभी मजरे-टोले योजना- वीबी-जीराम-जी योजना के तहत होना है निर्माण तकनीक- ड्रोन से मॉनिटरिंग, सिपरी सॉफ्टवेयर से निगरानी मंजूरी का अधिकार- हर जनपद पंचायत को 3 करोड़ रुपए तक की स्वीकृति प्रगति रिपोर्ट कुल चिह्नित सड़कें- 33,655 जियो इंवेंट्री पूरी- 17,437 80% से ज्यादा सर्वे वाले जिले रतलाम जबलपुर आगर-मालवा मंदसौर पन्ना क्या बदलेगा? -अब हर गांव अपने नजदीकी शहरों से जुड़ेगा -बच्चों के लिए पक्की सड़क बनीं तो स्कूल जाना आसान होगा -मरीजों को समय पर अस्पताल तक पहुंचना आसाना होगा -किसानों को मंडी तक बेहतर कनेक्टिविटी -बरसात में कटने और कीचड़ में बदलने वाली सड़कें अब पक्की होंगी  

कूनो में बोत्सवाना के चीते हुए फिट, 6 का क्वारंटाइन समाप्त, बड़े बाड़ों में पहली छलांग

 श्योपुर मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट के तीसरे चरण में बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों में से 6 चीतों का क्वारंटाइन समय पूरा होगया. जिसके बाद उन्हें बड़े बाड़ों में शिफ्ट कर दिया गया है. कूनो प्रबंधन ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि एक महीने बाद सभी चीते फिट है और कूनो के नए माहौल में रच बस रहे है।  पिछले दिनों 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से कुल 9 चीते कूनो पहुंचे थे, जिनमें 6 मादा और तीन नर शामिल थे. नियम के मुताबिक, इन सभी को अलग रखा गया था. अब सेहत की जांच और अफसरों की मंजूरी के बाद,चार मादा और दो नर चीतों को बड़े बाड़ों में छोड़ दिया गया है।  वन विभाग के अफसरों के मुताबिक बचे हुए तीन चीतों को भी बहुत जल्द बड़े बाड़ों में शिफ्ट कर दिया जाएगा. इसकी तैयारी चल रही है और यह काम भी जल्द ही पूरा हो जाएगा।  अधिकारियों के अनुसार,बोत्सवाना से आए सभी नौ चीते एकदम फिट हैं और उन्हें कूनो का वातावरण रास आ रहा है. भारत से बरसों पहले गायब हो चुके चीतों को वापस लाने की दिशा में इस प्रोजेक्ट को बहुत अहम माना जा रहा है।  चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने 'आजतक' को फोन कॉल पर बताया कि इन सभी की सेहत और रहने-सहने के ढंग पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है, ताकि आगे चलकर इन्हें सुरक्षित तरीके से खुले जंगल में छोड़ा जा सके।  यहां बता दें कि वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क में कुल 50 चीते हो गए हैं, जिनमें से 12 चीते खुले जंगल में घूम रहे हैं।  अलग-अलग क्वारंटाइन बाड़ों में रखा गया था बता दें कि बीते 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से विशेष विमान फिर सेना के हेलीकॉप्टर के जरिए कूनो पहुंचे थे। नौ चीतों के इस जत्थे में 6 मादा और 3 नर शामिल थे। बायो-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत इन्हें अलग-अलग क्वारंटाइन बाड़ों में रखा गया था। विशेषज्ञों की निगरानी के बाद अब 4 मादा और 2 नर चीतों को बड़े शिकार वाले बाड़ों में शिफ्ट कर दिया गया है। अधिकारियों ने दी हरी झंडी वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बाकी बचे 3 चीते भी पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें भी अगले कुछ दिनों में बड़े बाड़ों में भेज दिया जाएगा। कूनो प्रबंधन के अनुसार सभी चीते कूनो के वातावरण में बहुत तेजी से ढल रहे हैं। उनकी सेहत और व्यवहार पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। चीता प्रोजेक्ट के तहत वर्तमान में स्थिति     देश में वर्तमान में चीतों की कुल संख्या 53     कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या 50     गांधी सागर पार्क में चीतों की संख्या 3     कूनों के खुले जंगल में चीते 12     एनक्लोजर में मौजूद चीतों की संख्या 38 कूनो में चीतों का 'अर्धशतक', देश में कुल 53 चीते कूनों की धरती पर इन चीतों की शिफ्टिंग के बाद नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या अब 50 पहुंच गई है। वहीं गांधी सागर नेशनल पार्क में 3 चीतों को मिलाकर देश में चीतों की कुल संख्या 53 हो गई है।  चीतों का तीसरा घर, ढाई महीने बाद होगी शिफ्टिंग देश के महत्वकांक्षी चीता पुनर्स्थापन प्रोजेक्ट के तहत मध्य प्रदेश में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) को चीतों का तीसरा घर बनाया जाएगा। यहां ग्राउंड पर तेजी से काम चल रहा है। बुंदेलखंड की धरती पर जल्द ही प्रदेश के सबसे बड़े वन्य प्राणियों के घर में चीते दौड़ लगाते नजर आएंगे। करीब 2339 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभयारण्य प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जहां अब चीता, तेंदुआ और बाघ एक साथ नजर आने की तैयारी है। मोहली रेंज में बनाया जा रहा एनक्लोजर बोमा चीता प्रोजेक्ट व वन विभाग अधिकारियों के अनुसार संभव है, बोत्सवाना से कूनो लाए गए 9 चीतों में से 4 चीतों को नौरादेही शिफ्ट किया जाएगा। इनमें 1 नर और 3 मादा शामिल हो सकते हैं। आगामी मई-जून तक शिफ्टिंग का टारगेट रखा है। नौरादेही में चीतों के लिए सबसे उपयुक्त मोहली रेंज को चुना गया है। यहां घास के विशाल मैदान, छायादार पेड़ और पर्याप्त संख्या में शाकाहारी वन्यजीव मौजूद हैं, जो चीतों के लिए आदर्श परिस्थितियां तैयार करते हैं। इसके अलावा सिंगपुर और झापन रेंज भी चयनित की गई हैं।

जिला और तहसील स्तर पर कामर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित करें

जिला एवं तहसील स्तर पर भी कामर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित करें मंत्रिमण्डल समिति ने की पेट्रोल, डीजल, एलपीजी एवं सीएनजी की आपूर्ति की समीक्षा भोपाल अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम एवं मध्यपूर्व देशों की स्थिति के दृष्टिगत प्रदेश पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा के लिये गठित मंत्रिमण्डल समिति की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। बैठक में समिति के सदस्यों ने जिला एवं तहसील स्तर पर कामर्शियल एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी की आपूर्ति की समीक्षा की। बैठक में समिति के सदस्यों ने कहा कि किसी भी स्तर की अनियमित्ता एवं कालाबाजारी पाए जाने पर तत्काल कार्यवाही करें। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में एलपीजी की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दें। प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। क्रूड ऑयल की पर्याप्त उपलब्धता के कारण प्रट्रोलियम पदार्थों की लगातार आपूर्ति हो रही हैं। बैठक में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, खाद्य, नागरिक आपूति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप, अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरूण शमी, आयुक्त खाद्य कर्मवीर शर्मा और ऑयल कम्पनी के स्टेट नोडल ऑफिसर अजय श्रीवास्तव उपस्थित थे। शहरों में 25 और गाँवों में 45 दिन में सिलेंडर बुकिंग बैठक में बताया गया कि घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग शहरों में 25 दिन और गाँवों में 45 दिन के अंतराल में की जा रही है। वर्तमान में गैस बुकिंग की संख्या सामान्य है, जिसकी पूर्ति नियमित रूप से की जा रही है। प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता है। जिन घरों तक पाईप लाइन पहुँच गई है, उन घरों में पीएनजी कनेक्शन दिये जा रहे है। पिछले 1 दिन में 225 नवीन पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं। 70 प्रतिशत तक दिए जा रहे है कामर्शियल सिलेण्डर बैठक में ऑयल कम्पनी के स्टेट नोडल ऑफिसर श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान में भारत सरकार के निर्देशानुसार 70 प्रतिशत की सीमा के अधीन कामर्शियल सिलेंडर उपलब्ध कराये जा रहे है। शुरूआत में 20 प्रतिशत इनकी आपूर्ति हो रही थी। कालाबाजारी पर कार्यवाही प्रदेश में गैस सिलेंडर की कालाबाजारी करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जा रही है। अभी तक 3226 स्थानों पर कार्यवाही कर 3872 सिलेंडर जब्त किये गये है और 11 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई है। पीएनजी कनेक्शन विस्तार पर जोर बैठक में जानकारी दी गई कि सभी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) संस्थाओं को अगले 3 माह में 2 लाख नये पीएनजी कनेक्शन दिये जाने वाले का लक्ष्य दिया गया है। साथ ही सीजीडी संस्थाओं द्वारा प्रतिदिन किये जा रहे आवेदन एवं उसके विरुद्ध दिये जा रहे पीएनजी कनेक्शन की सतत मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। सीजीडी संस्थाओं को पीएनजी के लाभ एवं पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया से संबंधित एफएक्यू तैयार कर उपलब्ध कराने के निर्देश नोडल सीजीडी संस्था थिंक गैस को दिये गए हैं। भारत सरकार के गतिशक्ति पोर्टल पर सीजीडी संस्थाओं को पाइप-लाइन अपलोड करने के निर्देश दिये गये। सीजीडी संस्थाएँ जिलेवार एवं लोकेलिटीवाइज कैम्प शेड्यूल कर जिला प्रशासन एवं विभाग को उपलब्ध करायेंगी। शहर के जिन स्थानों में पाइप-लाइन गई है, उसके आस-पास के क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को ऑयल कम्पनी द्वारा अवगत कराया गया है कि वह पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने के लिये तत्काल आवेदन करें। इसके बाद पीएनजी कनेक्शन प्राप्त नही करने की स्थिति में आगामी 3 माह में एलपीजी का कनेक्शन बंद किया जा सकता है। जिला आपूर्ति अधिकारियों को एमपीआईडीसी के जिला अधिकारी, जिले में स्थित पॉलीटेक्निक तथा आईटीआई से प्रशिक्षणार्थियों की सूची सीजीडी संस्था को उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं। सीजीडी संस्था द्वारा इन प्रशिक्षणार्थियों को वर्तमान वेण्डर के साथ क्लब कर मैन पॉवर बढ़ाया जाएगा। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) में प्रदेश में कार्यरत 10 संस्थाओं को पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, जहां घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की मांग और शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। पीएनजी पाइप लाइन जिन क्षेत्रों में बिछ चुकी है, वहां आवासीय परिसर, स्कूल, हॉस्टल, कॉलेज, कम्युनिटी किचन और आंगनवाड़ी केंद्रों को आवेदन प्राप्त होने के 5 दिन में पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पीएनजी कनेक्शन की प्रगति की निगरानी के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर, एडीएम, जिला आपूर्ति अधिकारी और संबंधित सीजीडी संस्थाओं के अधिकारी समीक्षा करेंगे। केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के लिये नगरीय प्रशासन एवं विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक निर्माण एवं म.प्र. औद्योगिक विकास निगम द्वारा सीजीडी संस्थाओं को उनके आवेदन करने के 24 घंटे में पाइप-लाइन बिछाने की आरओयू अनुमति दिये जाने के आदेश जारी किये गये हैं। विभाग द्वारा 10 से अधिक आरओयू आवेदनों की 24 घंटे के अंदर स्वीकृति जारी की गई है। सीजीडी संस्थाओं को घरेलू एवं व्यावसायिक पीएनजी के आवेदनकर्ताओं को पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने के लिये सीजीडी संस्थाओं के कंट्रोल रूम नम्बर इस प्रकार हैं। अवंतिका गैस लिमिटेड – इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर (9424098887), गैल गैस लिमिटेड – देवास, रायसेन, शाजापुर, सीहोर (7880001788), नवेरिया गैस लिमिटेड – धार (07292-223311), थिंक गैस – भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी (1800-5727-107), आईओसीएल – गुना (9425991090), मउगंज, रीवा (9424836488), अशोकनगर (9425119522), मुरैना (7223982333), बीपीसीएल – मैहर, सतना शहडोल (9424738607), सीधी, सिंगरौली (9424341954), गुजरात गैस लि. – रतलाम (7412230292) शामिल है। प्रदेश के इन स्थानों से पाइप-लाइन के आस-पास के घरेलू एवं व्यावसायिक उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिये आवेदन कर सकते हैं।  

कोमा में मोजतबा खामेनेई: युद्ध और सीजफायर से बेखबर, लोकेशन के बारे में चौंकाने वाली जानकारी

तेहरान   ब्रिटेन के अखबार द टाइम्स ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मोजतबा खामेनेई अचेत हैं और गंभीर हालत में उनका इलाज कराया जा रहा है. पहले भी ये खबरें आई थीं कि वे उसी अमेरिका-इजरायल एयर स्ट्राइक में घायल हुए थे, जिसमें उनके पिता और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई थी. एक डिप्लोमैटिक मेमो में ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के बरे में ये जानकारी दी गई है. यह मेमो अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों पर आधारित है. इसे खाड़ी देशों के सहयोगी देशों के साथ साझा किया गया है।  द टाइम्स की खबर के मुताबिक मोजतबा खामेनी फिलहाल अचेत अवस्था में हैं और गंभीर हालत में उनका इलाज कराया जा रहा है. उनकी लोकेशन के बारे में बताते हुए कहा गया है कि उनका इलाज ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 140 किलोमीटर दक्षिण में स्थित कोम शहर में चल रहा है. पहले कहा जा रहा था कि उन्हें युद्ध के बीच रूस ले जाया गया है और मॉस्को में उनका इलाज किया जा रहा है. हालांकि बाद में रूस के राजदूत ने बताया था कि वे ईरान के अंदर ही हैं और अब ब्रिटिश अखबार द टाइम् ने भी इसकी पुष्टि की है।  कैसे अमेरिकी हमले से बचे मोजतबा खामेनेई? ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों से इसलिए बच गए, क्योंकि मिसाइलों से उनके घर पर हमला होने से कुछ मिनट पहले ही वह अपने बगीचे में टहलने के लिए बाहर निकल गए थे. जिस अमेरिकी-इजरायली अटैक में उनके पिता अली खामेनेई और अन्य परिवार को मारा गया, उसी में मोजतबा खामेनेई को भी टारगेट किया गया था. हालांकि उसी वक्त बाहर निकलने की वजह से वह मिसाइल अटैक में सेंकेड के अंतर से बाल-बाल बच गए. ‘द टेलीग्राफ’ को मिले एक लीक ऑडियो से पता चलता है कि 28 फरवरी को स्थानीय समयानुसार सुबह 9:32 बजे जब इजरायली ‘ब्लू स्पैरो’ बैलिस्टिक मिसाइलों ने उनके आवास पर हमला किया, उससे कुछ ही पल पहले वह ‘कुछ काम से’ बाहर चले गए थे।  अब शासन करने के काबिल नहीं मोजतबा     मोजतबा खामेनेई को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार दावा किया कि वो या तो अमेरिकी हमलों में मारे जा चुके हैं या फिर बेहद जख्मी हालत में हैं. उन्होंने ये भी कहा कि वो सार्वजनिक तौर पर दिखते नहीं, जिसकी वजह से ये संदेह और गहरा हो जाता है।      मोजतबा खामेनेई को युद्ध की शुरुआत में ही ईरान का सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया गया था लेकिन वे कभी दिखाई नहीं दिए. उनके संदेश में कभी-कभी आते हैं और ज्यादातर मामलों में ईरान की सैन्य इकाई आईआरजीसी ही बयान देती है।      मोजतबा खामेनेई का आखिर संदेश सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज खोलने और सीजफायर के बयान के बाद आया था. इस संदेश में कहा गया था कि ईरान झुकेगा नहीं और सेनाएं अमेरिका पर पलटवार करेंगी।      अब द टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि मोजतबा खामेनेई के संदेश भी उनके नहीं हैं क्योंकि वे अचेत अवस्था में हैं और शासन करने के काबिल नहीं बचे हैं. जिस मेमो का जिक्र अखबार में किया गया है, वो इजरायल और अमेरिका की खुफिया एजेंसियों की जानकारी पर आधारित है. इसमें ये भी बताया गया है, कि मोजतबा खामेनेई किसी भी फैसले या युद्ध संचालन में शामिल होने की स्थिति में नहीं हैं. ईरान की ओर से अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।   

बस्तर में शांति के बाद विकास का नया चरण: ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ पर पीएम मोदी से चर्चा

बस्तर में शांति के बाद विकास का नया चरण : ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से चर्चा प्रधानमंत्री से मुलाकात में नक्सलवाद समाप्ति पर आभार, बस्तर के समग्र विकास की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली प्रवास के दौरान आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  से भेंट कर बस्तर के समग्र, समावेशी एवं सतत विकास के लिए तैयार ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश की तीन करोड़ जनता की ओर से प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके संकल्प और मार्गदर्शन में 31 मार्च तक माओवाद के उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री को बताया कि अब बस्तर में शांति स्थापित होने के बाद राज्य सरकार का फोकस तेजी से विकास, रोजगार सृजन और जनजीवन को सशक्त बनाने पर है। इसके तहत बस्तर रोडमैप 2.0 में एग्रो एवं एग्रो-फॉरेस्ट सेक्टर, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, और पर्यटन विकास को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे। ‘नियद नेल्ला नार’ योजना की सफलता पर प्रधानमंत्री ने जताई प्रसन्नता मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बस्तर में अब तक किए गए विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज की रणनीति पर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से ‘नियद नेल्ला नार योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना की और कहा कि इससे गंभीर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत किए गए कार्यों का नेशनल काउंसिल फॉर एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) द्वारा थर्ड पार्टी मूल्यांकन कराया गया है। सर्वे के अनुसार 93 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक स्कूल उपलब्ध हैं, जहाँ 97 प्रतिशत बच्चों को मध्याह्न भोजन, गणवेश एवं पुस्तकें मिल रही हैं। 97 प्रतिशत गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जबकि अधिकांश गांव आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से जुड़े हैं और 89 प्रतिशत ग्रामीणों का आयुष्मान कार्ड बन चुका है। मार्च 2026 तक राशन कार्ड एवं आधार कार्ड का संतृप्तिकरण 95 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। कनेक्टिविटी, आजीविका और सामाजिक सशक्तिकरण पर विशेष फोकस मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर रोडमैप 2.0 के तहत ‘नियद नेल्ला नार योजना’ का विस्तार करते हुए अब इसमें 10 जिलों को शामिल किया जा रहा है, जिनमें बस्तर के 7 जिलों के साथ गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना प्रारंभ की गई है, जो वर्तमान में बस्तर के 38 मार्गों पर संचालित है। साथ ही, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों से क्षेत्र में आत्मगौरव और नई ऊर्जा का संचार हुआ है। नक्सल-मुक्त पंचायतों में एल्वद योजना के तहत एक करोड़ रुपए तक के विकास कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं, वहीं आत्मसमर्पित नक्सलियों और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई के क्षेत्र में तेजी से विस्तार मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया कि दंतेवाड़ा एजुकेशन सिटी की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में भी एजुकेशन सिटी बनाई जा रही है। जगदलपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रारंभ हो चुका है तथा दूरस्थ क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्र भी अब सुचारू रूप से संचालित हो रहे हैं।दंतेवाड़ा के गीदम में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि इंद्रावती नदी पर मटनार और देउरगांव बैराज सहित 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक की सिंचाई परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जिससे कृषि और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी। आजीविका उन्नयन और आय वृद्धि पर केंद्रित रणनीति मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर के 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपए से कम है, जिसे अगले तीन वर्षों में बढ़ाकर 30 हजार रुपए प्रति माह तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए आत्मनिर्भर आजीविका क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और हितग्राहियों को एनआरएलएम, सहकारी समितियों, एफपीओ एवं वनधन केंद्रों से जोड़ा जाएगा। साथ ही, ‘बस्तर मुन्ने’ नामक संतृप्तता शिविर कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है, जिसके माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिविर लगाकर लोगों को योजनाओं का लाभ और समस्याओं का त्वरित समाधान उपलब्ध कराया जाएगा। प्रधानमंत्री को बस्तर आने का दिया न्यौता मुख्यमंत्री साय ने बताया कि बस्तर की जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी  से विशेष स्नेह रखती है और प्रधानमंत्री का भी इस क्षेत्र के प्रति गहरा लगाव है। उन्होंने प्रधानमंत्री को बस्तर आने का निमंत्रण देते हुए रेल एवं सिंचाई परियोजनाओं के भूमिपूजन के लिए समय देने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री से हुई यह भेंट अत्यंत उपयोगी रही और उनके मार्गदर्शन के अनुरूप राज्य सरकार बस्तर के सर्वांगीण विकास की दिशा में तेजी से कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि बस्तर अब भविष्य की संभावनाओं का केंद्र बनकर उभर रहा है।

दतिया उपचुनाव पर सियासी माहौल गरम, हाईकोर्ट में सुनवाई 15 अप्रैल तक टली

दतिया उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज, हाईकोर्ट में सुनवाई टली प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पहुंचे डॉ मिश्रा के  निवास,बंद कमरे में की चर्चा भोपाल  दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सजा के खिलाफ दायर अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद अगली तारीख 15 अप्रैल निर्धारित की गई है। न्यायाधीश डॉ. स्वर्ण कांता शर्मा ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के उपरांत यह आदेश दिया। उल्लेखनीय है कि बैंक फ्रॉड मामले में राजेंद्र भारती को गत 2 अप्रैल को दिल्ली की एमपी/एमएलए कोर्ट ने तीन वर्ष की सजा सुनाई थी। सजा के बाद उनकी विधायकी समाप्त हो गई, जिससे दतिया विधानसभा सीट रिक्त हो गई है। सुनवाई टलने के साथ ही मध्यप्रदेश की राजनीति, विशेषकर भोपाल में, हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के निवास पहुंचकर उनसे करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में चर्चा की। इस मुलाकात को दतिया उपचुनाव की संभावित रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। दतिया विधानसभा सीट लंबे समय से डॉ. मिश्रा का मजबूत गढ़ रही है, जहां से वे तीन बार विधायक रह चुके हैं। हालांकि पिछले चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार का सामना करना पड़ा था। वर्तमान परिस्थितियों में सीट रिक्त होने के कारण उपचुनाव की स्थिति बन रही है, और ऐसे में डॉ. मिश्रा के फिर से मैदान में उतरने की संभावना प्रबल मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अब 15 अप्रैल की सुनवाई और उसके बाद के घटनाक्रम पर सबकी नजरें टिकी हैं, जो दतिया उपचुनाव की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकते हैं।

भाजपा विधायक संजय पाठक के लिए माफी नहीं, कोर्ट में होगी हाजिरी

जबलपुर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व जज विनय सराफ की युगलपीठ ने आपराधिक अवमानना केस की सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश के कटनी जिले के विजयराघवगढ़ से भाजपा विधायक संजय पाठक को तलब किया है। कोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया है। सुनवाई के दौरान विधायक संजय पाठक की ओर से हलफनामा पेश किया गया, जिसमें उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए बिना शर्त माफी मांगी। कोर्ट ने इस हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले को गंभीरता से लिया और आगे की सुनवाई के लिए व्यक्तिगत पेशी जरूरी बताई। फोन करने से शुरू हुआ विवाद कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित द्वारा दायर याचिका में उल्लेख किया गया था कि विधायक से संबंधित कंपनी के खिलाफ अवैध उत्खनन के मामले में न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने एक सितम्बर, 2025 को सुनवाई से इंकार कर दिया था। उन्होंने अपने आदेश में कहा था कि विधायक ने उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, जिससे निष्पक्षता प्रभावित हो सकती थी। निष्पक्षता के लिए जज हुए अलग न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने मामले की निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था। साथ ही उन्होंने पूरे प्रकरण को प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने के निर्देश भी दिए थे। आपराधिक अवमानना का केस दर्ज याचिका में कहा गया कि विधायक का यह कृत्य न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। न्यायिक कार्य में हस्तक्षेप आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है। हाई कोर्ट ने दो अप्रैल को मामले का संज्ञान लेते हुए विधायक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए थे। मुकुल रोहतगी ने की पैरवी सुनवाई के दौरान विधायक संजय पाठक की ओर से देश के पूर्व अटार्नी जनरल और वरिष्ठ अधिवक्त मुकुल रोहतगी ने पैरवी की। उन्होंने तर्क दिया कि आपराधिक अवमानना में दंड तभी लागू होता है, जब गलती अक्षम्य हो या व्यक्ति उसे स्वीकार न करे।  

कैबिनेट निर्णय: ST छात्रों को ₹10 हजार की सहायता, उज्जैन से एयरबस विमानों का संचालन शुरू होगा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्री परिषद की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। जन कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए 16,720 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। वित्तीय प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान (FTRI) की स्थापना की स्वीकृति दी गई। वाणिज्यिक कर विभाग की 8 योजनाओं के लिए 2030-2031 तक 2,952 करोड़ रुपये का अनुमोदन किया गया है। इसके अलावा चना एवं मसूर फसल के आगामी तीन वर्षों में उपार्जन के लिए 3,174 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। पीएम श्री विद्यालय योजना के लिए 940 करोड़ मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में वन क्षेत्रों में पुनरुत्पादन, पुनर्स्थापना एवं संरक्षण के लिए 5,215 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत अशासकीय विद्यालयों को ट्यूशन फीस की प्रतिपूर्ति के लिए 3039 करोड़ रुपये की स्वीकृति की गई है। पीएम श्री विद्यालय योजना के लिए 940 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। छात्रगृह योजना में प्रतिमाह 10 हजार रुपये इसके अलावा, कक्षा 9वीं से 12वीं तक अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को निःशुल्क पुस्तकें प्रदान करने के लिए 693 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रगृह योजना में प्रतिमाह 10 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे। योजनांतर्गत प्रति वर्ष 100 नवीन विद्यार्थियों एवं पूर्व से अध्ययनरत विद्यार्थी लाभांवित होंगे। इसमें 50 नवीन स्नातक, 50 नवीन स्नातकोत्तर और 50 पूर्व से अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए एक वर्ष के मान से 1.80 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उज्जैन में भूमि अधिग्रहण के लिए 590 करोड़ उज्जैन में शासकीय हवाई पट्टी में एयरबस विमानों के संचालन के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए 590 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि उज्जैन देश-विदेश में धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है, जहां 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक ज्योर्तिलिंग महाकालेश्वर एवं सांदिपनी आश्रम स्थित है तथा सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन भी होता है, जिससे यहां पर काफी अधिक संख्या में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को दूरस्थ क्षेत्रों से आवागमन होता रहता है। विक्रम उ‌द्योगपुरी एवं अन्य औ‌द्योगिक क्षेत्रों के कारण औ‌द्योगिक गतिविधियों में तेजी से वृ‌द्धि हो रही है। इसके अतिरिक्त उज्जैन कृषि एवं सेवा क्षेत्र की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण एवं विकासशील नगर है। इसलिए उज्जैन में हवाईपट्टी का उन्नयन/विस्तार आवश्यक है। मंदसौर की कातना सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 88.41 करोड़ मंदसौर जिले की कातना सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 88.41 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना से मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील के 12 ग्रामों में 3500 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा का लाभ होगा। मंत्रि परिषद द्वारा निर्णय लिया गया कि वित्तीय प्रशासन एवं प्रबंधन से संबंधित सभी स्तरों के कार्मिकों को केंद्रीकृत एवं मानकीकृत प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु वित्तीय प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान (FTRI) की स्थापना आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासनिक एवं प्रबंधन अकादमी, भोपाल के परिसर में की जाएगी। संस्थान का उद्देश्य वित्तीय प्रशासन एवं प्रबंधन से संबंधित सभी स्तरों के कार्मिकों को केंद्रीकृत एवं मानकीकृत प्रशिक्षण प्रदान करना होगा, जिससे विभागीय कार्यकुशलता, वित्तीय अनुशासन तथा पारदर्शिता में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित किया जा सके। प्रदेश में वर्तमान में संचालित सात लेखा प्रशिक्षण शालाओं का चरणबद्ध एकीकरण कर राज्य स्तरीय एकीकृत प्रशिक्षण व्यवस्था स्थापित की जायेगी। संस्थान हेतु पद सृजन पर राज्य शासन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं होगा। तीन वर्षों 2026-27, 2027-28, 2028-29 में स्थापना और संचालन के लिए वित्तीय लागत 26 करोड़ रुपये आएगी। राजस्व व्यय संबंधी 8 योजनाओं के लिए 2951.86 करोड़ वाणिज्यिक कर विभाग के अंतर्गत राजस्व व्यय संबंधी संचालित 8 योजनाओं के लिए 2030-2031 तक निरन्तरता और 2951.86 करोड़ रुपये का अनुमोदन दिया गया है। इसमें मप्र नगरीय अधोसंरचना विकास निधि का वर्ष 2026-2027 से 2030-2031 तक निरन्तरता और 1317.62 करोड़ रुपये का अनुमोदन किया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी कार्य, विभागीय परिसंपत्तियों का संधारण, आबकारी सामग्री की खरीद, विभागीय दुकानों का संचालन एवं कार्यालय भवनों के निर्माण से संबंधित कार्यों के लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 120.98 करोड़ रुपये का अनुमोदन किया गया। स्टाम्पों की लागत के लिए व्यय राशि रुपये 806 करोड़ रुपये तथा मुख्यालय स्थापना व्यय एवं जिला कार्यपालिका स्थापना के लिए 1428 करोड़ रुपये का अनुमोदन दिया गया। मंत्री परिषद द्वारा केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत कार्य योजनाओं के प्रावधानों के अनुसार वन क्षेत्रो में पुनरुत्पादन, पुनर्स्थापना एवं संरक्षण कार्यवृत्तों में उपचार कार्य के लिए 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक कुल 5 वर्षों के लिए 5215 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके अंतर्गत प्रथम वर्ष उपचार कार्यों के साथ-साथ विगत वर्षों में कराए गए कार्यों का रखरखाव भी सम्मिलित है। अशासकीय विद्यालयों को ट्यूशन फीस की प्रतिपूर्ति के लिए 3039 करोड़ आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत अशासकीय विद्यालयों को ट्यूशन फीस की प्रतिपूर्ति के लिए 3039 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम अनुसार गैर अनुदान प्राप्त अशासकीय स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने के एवज में फीस प्रतिपूर्ति योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 से वित्तीय वर्ष 2030-31 तक 3039 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।  

सीएम साय ने पीएम मोदी को भेंट की ‘माता कौशल्या के राम’ बेल मेटल कलाकृति, श्रीराम के आदर्शों से प्रेरित छत्तीसगढ़

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती बेल मेटल से निर्मित ‘माता कौशल्या के राम’ की अद्वितीय कलाकृति भेंट की। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ वह पावन धरा है, जहाँ भगवान श्रीराम का ननिहाल स्थित है और यह भूमि प्रभु श्रीराम से गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि भेंट की गई यह कलाकृति प्रदेश की आस्था, परंपरा और सृजनशीलता का सजीव प्रतिरूप है, जो जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और उत्कृष्ट शिल्पकौशल को दर्शाती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित ‘रामलला दर्शन योजना’ के माध्यम से प्रदेश के हजारों श्रद्धालु अयोध्या धाम के दर्शन कर रहे हैं, जिससे आस्था और श्रद्धा को जन-जन तक जोड़ने का कार्य निरंतर हो रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार सेवा, संस्कार और सुशासन के पथ पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ विकास और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित करता रहेगा।

अप्रैल में राशनकार्डधारियों को मिलेगा केरोसिन, 528 किलोलीटर का आबंटन जारी

रायपुर  प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली पीडीएस के तहत अप्रैल 2026 के लिए केरोसिन का आबंटन जारी कर दिया गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने केंद्र सरकार से प्राप्त प्रथम तिमाही (अप्रैल-जून) के कोटे में से 528 किलोलीटर केरोसिन राशनकार्डधारियों के लिए आवंटित किया है। यह केरोसिन उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से वितरित किया जाएगा। खाद्य विभाग के अनुसार, अंत्योदय और प्राथमिकता श्रेणी के सभी राशनकार्डधारियों को इसका लाभ मिलेगा। शहरी क्षेत्रों में प्रति राशनकार्ड अधिकतम 1 लीटर और ग्रामीण क्षेत्रों (अनुसूचित एवं गैर-अनुसूचित) में अधिकतम 2 लीटर केरोसिन दिया जाएगा। राज्य शासन ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि केरोसिन का समय-सीमा में उठाव और वितरण सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार कर हितग्राहियों को उनकी पात्रता की जानकारी देने को कहा गया है। जिन उचित मूल्य दुकानों में केरोसिन की मांग कम है, वहां शेष स्टॉक को जरूरत वाले दुकानों में पुनः आबंटित किया जाएगा। इससे किसी भी क्षेत्र में केरोसिन की कमी न हो और सभी पात्र हितग्राहियों को निर्धारित मात्रा मिल सके। अप्रैल माह के लिए आवंटित केरोसिन का उठाव 30 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से करना होगा। वहीं, ऑयल कंपनियों के अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे लैप्स कोटा की जानकारी 30 अप्रैल तक विभाग को उपलब्ध कराएं। खाद्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार बिलासपुर जिले कोे सर्वाधिक 36 किलोलीटर, बस्तर, कांकेर, जांजगीर-चांपा, कोरबा, दुर्ग, बलौदाबाजार-भाटापारा, महासमुंद, रायपुर और जशपुर जिले को 24-24 किलोलीटर तथा राज्य के अन्य शेष जिलों को 12-12 किलोलीटर केरोसिन आबंटित किया गया है।