samacharsecretary.com

रायगढ़ में उत्कल दिवस एवं वार्षिकोत्सव स्नेह सम्मेलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज रायगढ़ के बाबा प्रियदर्शी राम ऑडिटोरियम, पंजरी प्लांट में उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति द्वारा आयोजित ‘उत्कल दिवस एवं वार्षिकोत्सव स्नेह सम्मेलन’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्यमंत्री  साय द्वारा भगवान जगन्नाथ स्वामी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं ‘वंदे उत्कल जननी’ के मधुर गायन के साथ हुआ। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को आत्मीयतापूर्वक संबोधित करते हुए  कहा कि वे यहां अतिथि के रूप में नहीं, बल्कि अपने परिवार के बीच आए हैं। उन्होंने कहा कि रायगढ़ की जनता ने उन्हें 20 वर्षों तक सांसद के रूप में अपना भरपूर आशीर्वाद दिया है और वही स्नेह एवं अपनापन उन्हें आज भी प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने ओडिशा और छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों राज्यों के बीच ‘रोटी-बेटी’ का अटूट रिश्ता है। उन्होंने कहा कि जशपुर के कुनकुरी से लेकर छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों तक बड़ी संख्या में लोग उड़िया भाषा बोलते हैं। देवभोग-गरियाबंद क्षेत्र में आज भी महाप्रसाद के रूप में भात मिलता है और छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में रथ यात्रा का आयोजन होता है।   मुख्यमंत्री  साय ने समाज की  पत्रिका ‘सुविधा’ का विमोचन किया, जिसमें समाज के रीति-रिवाज, उपलब्धियां एवं संपर्क विवरण संकलित किए गए हैं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने जगन्नाथ रथ यात्रा के आयोजन हेतु 5 लाख रुपये की राशि प्रदान करने की घोषणा की।  मुख्यमंत्री  साय ने अपने संबोधन में राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी के अनुरूप छत्तीसगढ़ में ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 8 लाख आवास रिकॉर्ड समय में पूर्ण किए जा चुके हैं। किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है तथा लगभग 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है, जिससे प्रदेश खुशहाली की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा  रामलला दर्शन योजना प्रारंभ की गई है, जिसके अंतर्गत अब तक लगभग 42 हजार श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर भगवान रामलला के दर्शन कर चुके हैं। इस योजना के माध्यम से आम नागरिकों को सुगम एवं व्यवस्थित रूप से तीर्थ दर्शन का अवसर प्राप्त हो रहा है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना को भी पुनः प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन हेतु श्रद्धालुओं को सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि धर्मांतरण कराने वालों के विरुद्ध कठोर कानून पारित किया गया है, जिसमें कड़ी सजा एवं जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इससे अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री  अमित शाह एवं जवानों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के प्रभाव को समाप्त करने में सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि अब ‘नियद नेल्लानार’ के तहत बस्तर में सड़कों, बिजली, शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं, जिससे क्षेत्र में विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में विभिन्न विभागों में 20 से 25 हजार भर्तियां की गई हैं। चयन मंडल का गठन कर पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिससे युवाओं को बिना किसी भेदभाव के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि पीएससी गड़बड़ी की उच्च स्तरीय जांच कराई गई है तथा ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से प्रशासन में पारदर्शिता लाते हुए भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के लिए सभी समाजों का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य वन एवं खनिज संपदा से समृद्ध है और वन उत्पादों के वैल्यू एडिशन के माध्यम से स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 प्रारंभ की गई है। इस योजना के तहत बकाया बिजली बिलों के भुगतान हेतु आसान किस्तों का विकल्प उपलब्ध कराया गया है तथा सरचार्ज में राहत या छूट दी जा रही है।  कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्कल समाज की 8 प्रतिभाओं को उनकी विशेष उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया।कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।  इस अवसर पर झारसुगुड़ा विधायक  टंकाधर त्रिपाठी, रायपुर उत्तर विधायक  पुरंदर मिश्रा, नगर निगम महापौर  जीवर्धन चौहान सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

बड़ी खबर: पंजाब में शुक्रवार को अवकाश घोषित, सभी शिक्षण संस्थान बंद

जालंधर. आज से अप्रैल का महीना शुरू हो गया है। इसके साथ ही इस महीने भी कई छुट्टियां आ रही हैं, जिसकी वजह से पंजाब में स्कूल, कॉलेज बंद रहेंगे। बच्चों की मस्ती के साथ-साथ कर्मचारियों की भी मौज लगेंगी। इस दौरान स्कूल, कॉलेज और सरकारी संस्थान बंद रहने वाले हैं। इस महीने की पहली सरकारी छुट्टी 3 अप्रैल को आ रही है। 3 अप्रैल यानी शुक्रवार को गुड फ्राइडे की छुट्टी रहेगी। इसके बाद बुधवार यानी 8 अप्रैल को श्री गुरु नाभा दास जी की जयंती आ रही है, जिसकी वजह से स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे। 14 अप्रैल, मंगलवार को बैसाखी है और डॉ. बी. आर. अंबेडकर की जयंती आ रही है। इसके बाद 19 अप्रैल को भगवान परशु राम की जयंती आ रही है, जो रविवार को आ रही है। आपको यह भी बता दें कि इन सरकारी छुट्टियों के अलावा 4 रविवार भी आ रहे हैं। प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल भारत के उत्तरी भाग में स्थित पंजाब में स्वर्ण मंदिर जैसे प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल हैं और 1900 ईसा पूर्व तक सिंधु घाटी सभ्यता के केंद्र के रूप में इसका ऐतिहासिक महत्व है। आप अवकाश प्राप्त कर त्योहारों में दर्शनीय स्थल में भाग ले सकते हैं। राज्य में हवाई, रेल और सड़क नेटवर्क के माध्यम से उत्कृष्ट संपर्क है, जिससे यह देश के विभिन्न हिस्सों से आसानी से पहुँचा जा सकता है। पर्यटकों को ऐतिहासिक महलों, युद्धक्षेत्रों और राज्य की शोभा बढ़ाने वाली शानदार सिख स्थापत्य कला का अवलोकन करने का अवसर मिलता है। 2026 के लिए पंजाबी में बैंक अवकाश पंजाब में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय छुट्टियों के अलावा बैंक अवकाश भी होते हैं। इन छुट्टियों के दौरान बैंक कर्मचारी अवकाश पर रहते हैं। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन के बीच हुए समझौते के अनुसार, हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को पंजाब और भारत के अन्य राज्यों के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बंद रहते हैं।

सिंहस्थ 2028 की तैयारी और विकसित मध्य प्रदेश का संकल्प, बजट में महिला सशक्तिकरण और कृषि समृद्धि को मिली नई रफ़्तार

भोपल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने वर्ष 2026-27 के बजट में सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, कृषि समृद्धि और बुनियादी अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता दी है। बजट में लाडली बहना जैसी सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं के लिये पर्याप्त बजट का प्रावधान करते हुए किसानों को राहत, ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना विस्तार और शिक्षा स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया है। साथ ही आगामी सिंहस्थ:2028 की तैयारियों के लिये भी अभी से बड़े बजटीय प्रावधान कर प्रदेश के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास को गति देने का प्रयास किया गया है। महिला सशक्तिकरण पर फोकस प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सरकार ने मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लिए बजट में 23,883 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके अलावा लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए 1,801 करोड़ रुपये तथा सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत 3,863 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यह प्रावधान महिला एवं बाल स्वास्थ्य और पोषण को सुदृढ़ करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। किसानों के लिए राहत और सुविधाओं का विस्तार कृषि क्षेत्र को सशक्त करने के लिए भी बजट में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। अटल कृषि ज्योति योजना के लिए 13,914 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही 5 हॉर्स पॉवर तक के कृषि पंपों और एक बत्ती कनेक्शन के लिए निःशुल्क बिजली सुविधा की प्रतिपूर्ति के लिये 5,276 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लिए 5,501 करोड़ रुपये तथा प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के लिए 1,299 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  ग्रामीण और शहरी अधोसंरचना को नई गति ग्रामीण विकास और अधोसंरचना के विस्तार के लिए भी सरकार ने बड़े बजटीय प्रावधान किए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए 6,850 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इससे हर गरीब परिवार को पक्की छत मिल सकेगी। ग्रामीण सड़कों और जिला मार्गों के उन्नयन के लिए लगभग 2968 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं शहरी परिवहन को बेहतर बनाने के लिए मेट्रो परियोजनाओं के लिये 656 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसके अतिरिक्त जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए 4,454 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।  शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान भविष्य की पीढ़ी को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्राथमिक शिक्षा के लिए 11,444 करोड़ रुपये तथा समग्र शिक्षा अभियान के लिए 5,649 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में नेशनल हेल्थ मिशन के लिए 4,600 करोड़ रुपये तथा आयुष्मान भारत को मजबूत करने के लिए भी पर्याप्त बजट दिया गया है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को गति धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में भी सरकार ने अहम कदम उठाया है। उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के लिए 3,060 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा ‘वेदान्त पीठ’ की स्थापना के लिए 750 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। रोजगार और निवेश को बढ़ावा प्रदेश में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 2,550 करोड़ रुपये का निवेश प्रोत्साहन पैकेज तथा एमएसएमई क्षेत्र के लिए 1,550 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार’ योजना के तहत 10,428 करोड़ रुपये का बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रस्तुत मध्यप्रदेश का बजट 2026-27 सामाजिक सुरक्षा, कृषि समृद्धि और अधोसंरचना विकास के संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह बजट प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

बिहार में स्वास्थ्य सुरक्षा बढ़ी: JE रोकथाम के लिए पंचायत स्तर पर एंबुलेंस सेवा

समस्तीपुर. एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) पर नियंत्रण को राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। राज्य स्वास्थ्य समिति ने 12 जिलों को निर्देश जारी करते हुए मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत संचालित एंबुलेंसों को प्रत्येक पंचायत से टैग करने को कहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके। इसके लिए जिला परिवहन पदाधिकारी से समन्वय स्थापित कर एंबुलेंसों की सूची तैयार की जाएगी। इसमें संचालकों के मोबाइल नंबर भी शामिल होंगे। यह सूची प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर उपलब्ध रहेगी। स्वास्थ्य समिति ने एंबुलेंस संचालकों के साथ एकरारनामा करना अनिवार्य किया है, ताकि मरीज को परिवहन में किसी प्रकार की बाधा न हो। साथ ही, टैग वाहनों और उनके संचालकों की जानकारी सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित करने का भी निर्देश दिया गया है, जिससे आमजन को आसानी से जानकारी मिल सके। इस सेवा के लिए 20 किलोमीटर तक 400 रुपये, 21 से 40 किलोमीटर तक 600 रुपये, 41 से 60 किलोमीटर तक 800 रुपये और 61 किलोमीटर से अधिक दूरी के लिए अधिकतम 1000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। इन जिलों के पंचायतों में होगी टैगिंग मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना अंतर्गत परिचालित एंबुलेंस का प्रत्येक पंचायत के साथ टैगिंग करना है। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने समस्तीपुर, पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, सारण, सीवान एवं गोपालगंज जिले को पत्र जारी किया है। निजी वाहन से लाने पर भी मिलेगा खर्च राज्य स्वास्थ्य समिति ने एईएस प्रभावित जिलों में मरीजों को अस्पताल तक लाने में होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था वर्ष 2026 में भी जारी रखने का निर्देश दिया है। इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और सिविल सर्जन को पत्र भेजा गया है। समिति ने अपने पत्र में कहा है कि एईएस प्रभावित क्षेत्रों में अक्सर मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाने निजी एंबुलेंस या अन्य वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में मरीज के परिजन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पहले से ही मरीज के परिवहन खर्च की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था कर दी है। इस व्यवस्था को वर्ष 2026 में भी जारी रखने का फैसला लिया गया है, ताकि किसी भी परिवार को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। समिति ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2020, 2021, 2022, 2023, 2024 और 2025 की तरह ही 2026 में भी निर्धारित दरों के अनुसार भुगतान किया जाएगा। गर्मी और बारिश में बढ़ता है एईएस का खतरा एईएस का प्रकोप आमतौर पर गर्मी और बारिश के मौसम में अधिक होता है। ऐसे समय में मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना जरूरी होता है। समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए परिवहन सुविधा को मजबूत करना प्राथमिकता है। सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि राज्य स्तर से पत्र जारी किया गया है। इस दिशा में प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी करेंगे अर्पित सम्राट विक्रमादित्य: शौर्य और न्याय के शाश्वत प्रतीक

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय काल-गणना के प्रणेता और न्यायप्रियता के प्रतीक चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य की गाथा अब बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी की गलियों में प्रतिध्वनित होगी। धर्म और संस्कृति की नगरी वाराणसी के बी.एल.डब्ल्यू. मैदान में आगामी 3 से 5 अप्रैल, 2026 (विक्रम संवत् 2083, वैशाख कृष्ण पक्ष) तक भारत के स्वाभिमान और विकास की गाथा का भव्य उत्सव मनाया जाएगा। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस त्रि-दिवसीय कार्यक्रम में महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य' का ऐतिहासिक मंचन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के गौरवशाली नेतृत्व में यह आयोजन भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों को जीवंत करेगा। इस गरिमामय समारोह का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में होगा। इस वृहद आयोजन का उद्देश्य देश के गौरवशाली इतिहास, विक्रम संवत् की वैज्ञानिकता और उस युग के अनुपम योगदान से जन-मानस को परिचित कराना है। बाबा विश्वनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी करेंगे अर्पित प्राचीन भारतीय कालगणना के ऐतिहासिक केंद्र उज्जैन में पिछले वर्ष विश्व की पहली 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' की सफल स्थापना के बाद, अब इसे देश के अन्य ज्योतिर्लिंगों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय काल गणना की समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने के इस प्रयास अन्तर्गत वाराणसी में सर्वप्रथम बाबा विश्वनाथ को यह वैदिक घड़ी समर्पित की जा रही है। इस घड़ी की विशेषता न केवल इसकी पारंपरिक गणना पद्धति है, बल्कि इसका डिजिटल विस्तार भी है। इसके लिए एक विशेष ऐप भी लॉन्च किया गया है जो विश्व की 180 से अधिक भाषाओं में समय और पंचांग की जानकारी उपलब्ध करा रहा है। उज्जैन से शुरू होकर काशी के गलियारों तक पहुँचने वाली यह पहल न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध कर रही है, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करने का कार्य भी कर रही है। महानाट्य के सांस्कृतिक गौरव की निरंतर यात्रा सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की यात्रा वर्ष 2007 में प्रारंभ हुई थी। सफलता के सोपान चढ़ते हुए इस नाटक का मंचन अब तक उज्जैन, भोपाल, आगरा और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों में किया जा चुका है, जहाँ हज़ारों दर्शकों ने इसे सराहा है। अप्रैल 2025 में दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित इसके मंचन को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने भी विशेष रूप से सराहा था। उन्होंने इस प्रस्तुति को सम्राट विक्रमादित्य के वैभव और भारतीय गौरव को जन-जन तक पहुँचाने का एक अनुकरणीय प्रयास बताया। महानाट्य विक्रमादित्य: शौर्य और न्याय का संगम सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य उज्जैनी के महान सम्राट के जीवन, उनके अदम्य साहस और न्यायप्रियता को जीवंत करता है। नाटक के माध्यम से 57 ईसा पूर्व प्रारंभ हुए 'विक्रम संवत्' के ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्त्व को सशक्त संवादों द्वारा प्रस्तुत किया गया है। दर्शकों को इसमें जहाँ 'सिंहासन बत्तीसी' और 'बेताल पच्चीसी' के रोचक प्रसंग देखने को मिलेंगे, वहीं भविष्य पुराण के गंभीर संदर्भों से भी परिचय होगा। महानाट्य प्रस्तुति का एक मार्मिक पक्ष विदेशी आक्रांताओं द्वारा भारतीय ज्ञान, विज्ञान और सांस्कृतिक धरोहर को पहुँचाई गई क्षति को भी दर्शाना है। इसके साथ ही सम्राट विक्रमादित्य के दरबार के 'नवरत्नों'—महाकवि कालिदास और महान खगोलशास्त्री वराहमिहिर—की विद्वता को भी बड़े प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा गया है। अत्याधुनिक तकनीक और भव्यता का मेल सम्राट विक्रमादित्य आधारित महानाट्य की लगभग 1 घंटे 45 मिनट की इस भव्य प्रस्तुति में कला और तकनीक का अद्भुत समन्वय देखने को मिलेगा। मंच पर 175 से अधिक कलाकार और सहयोगी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। नाटक को सजीव बनाने के लिए मंच पर रथ, अश्व (घोड़े), पालकी और ऊँटों का प्रयोग किया जाएगा। तीन अलग-अलग मंचों और अत्याधुनिक ग्राफिक्स व स्पेशल इफेक्ट्स से अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किये जाएंगे। विविध प्रदर्शनियाँ और सामाजिक संकल्प महानाट्य के साथ-साथ आयोजन स्थल पर विभिन्न ज्ञानवर्धक प्रदर्शनियाँ भी लगाई जा रही हैं। इनमें सम्राट विक्रमादित्य व अयोध्या, भारतीय ऋषि-वैज्ञानिक परंपरा पर केंद्रित 'आर्ष भारत', शिव पुराण, चौरासी महादेव,  हनुमान और मध्यप्रदेश के पवित्र स्थानों की विस्तृत जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक उत्सव मात्र नहीं है, बल्कि 'स्वच्छ और समृद्ध मध्यप्रदेश' के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जनसंपर्क विभाग मध्यप्रदेश इस ऐतिहासिक अवसर पर सभी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी का आह्वान करता है, ताकि हम अपनी जड़ों से जुड़कर एक उज्ज्वल भविष्य की नींव रख सकें। महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य: एक गौरवशाली प्रस्तुति उज्जैन की पावन धरा और न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य के स्वर्णिम इतिहास को जीवंत करने के लिए 'महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य' का मंचन एक ऐतिहासिक पहल है। इस भव्य नाटक की परिकल्पना मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा की गई है, जो भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता को दर्शाती है। इस कालजयी कृति का लेखन पद्म डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित ने किया है, जिनकी लेखनी ने इतिहास के पन्नों को सजीव कर दिया है। नाटक का कुशल निर्देशन संजीव मालवीय द्वारा किया गया है, जबकि प्रस्तुति संयोजक के रूप में राजेश सिंह कुशवाहा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस गौरवशाली कलाकृति की प्रस्तुति ' विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति, उज्जैन' द्वारा की जा रही है। यह महानाट्य मनोरंजन के साथ नई पीढ़ी को सम्राट विक्रमादित्य के साहस, न्याय और सुशासन के आदर्शों से परिचित कराने का एक सशक्त माध्यम भी है। ऐसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हमारी गौरवशाली विरासत को अक्षुण्ण रखने में सहायक सिद्ध होती हैं। ऐतिहासिक नाटक 'सम्राट विक्रमादित्य' का मुख्य आकर्षण: दिग्गज कलाकारों का सशक्त अभिनय सम्राट विक्रमादित्य के अदम्य साहस, त्याग और उनके नवरत्नों की विद्वता अब रंगमंच पर अपने अभिनव से रंग बिखेरने को तैयार है। ऐतिहासिक नाटक 'सम्राट विक्रमादित्य' का मुख्य आकर्षण दिग्गज कलाकारों का अभिनय है।नाटक के केंद्रीय पात्र सम्राट विक्रमादित्य की गरिमामयी भूमिका में विक्रम सिंह चौहान और डॉ. राहत पटेल नज़र आएंगे। वहीं, उनके बचपन के संघर्षों को कृष्णा राठौर (बाल विक्रमादित्य) जीवंत करेंगे। कथा को सूत्र में पिरोने का कार्य प्रख्यात सूत्रधार दुर्गेश बाली करेंगे। राजा गर्दभिल्ल की चुनौतीपूर्ण भूमिका में चेतन शाह और शंकर राव साठे अपने अभियान का प्रदर्शन करेंगे। महारानी वीरमति के रूप में रेणुका देशपांडे और भर्तृहरि के किरदार में सूरज चौधरी दर्शकों को उस कालखंड … Read more

नक्सलवाद पर छत्तीसगढ़ में हुआ ऐतिहासिक प्रहार, शांति और विकास की रफ्तार तेज – CM साय

रायपुर   छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में मिली बड़ी सफलता के बीच मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai से आज उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में उपमुख्यमंत्री Vijay Sharma ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ अब विकास, विश्वास और समृद्धि के नए युग में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्षों तक नक्सलवाद प्रदेश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बना रहा, खासकर बस्तर अंचल लंबे समय तक इसके प्रभाव में रहा। उन्होंने कहा कि अब हालात तेजी से बदल रहे हैं और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा मजबूत हो रही है। बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति और सुरक्षा का वातावरण बन रहा है, जिससे आमजन के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और प्रभावी रणनीति को दिया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भयमुक्त और सुरक्षित छत्तीसगढ़ का सपना साकार हो रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साहस और बलिदान को इस सफलता की नींव बताया। उन्होंने सुरक्षाबलों के समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके अथक प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि नक्सलमुक्त वातावरण में अब छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा। 

मध्यप्रदेश में 15 अप्रैल से शुरू होगी गर्मी, लू भी चलेगी; पहले हफ्ते आंधी-बारिश, अगले 4 दिन अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में अप्रैल की शुरुआत तो बारिश और ओले के साथ हुई है. राज्य में कई जिलों में मंगलवार की रात आंधी-बारिश के साथ हुई थी. इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है और तापमान भी गिरा है, लेकिन जल्दी ही मौसम बदलने की संभावना है. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 15 अप्रैल से राज्य में भीषण गर्मी पड़ने वाली है. सबसे ज्यादा ग्वालियर-चंबल संभाग तपेगा, जबकि इंदौर, भोपाल, उज्जैन और सागर संभाग भी गर्मी की चपेट में रहेंगे. फिलहाल 4 अप्रैल तक कई जिलों में बारिश जैसा मौसम बने रहने की संभावना है।  4 अप्रैल तक रहेगा बारिश का मौसम अप्रैल माह की शुरुआत हालांकि तेज आंधी और बारिश के साथ हो रही है. मौसम विभाग ने भोपाल में 1 से 4 अप्रैल तक प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्से में मौसम अलर्ट जारी किया है. 29 जिलों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है।  ग्वालियर-चंबल सबसे ज्यादा प्रभावित आने वाले दिनों में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र सबसे ज्यादा गर्म रहेगा। इसके अलावा इंदौर, भोपाल, उज्जैन और सागर संभाग के शहरों में भी तापमान तेजी से बढ़ेगा। महीने के आखिरी सप्ताह तक कई जिलों में पारा 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यहां दिख रहा गर्मी का असर बदलते मौसम के बीच गर्मी ने भी दस्तक दे दी है। नर्मदापुरम में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है। खजुराहो, दमोह, रतलाम और नौगांव में भी पारा 39 डिग्री के आसपास बना हुआ है। बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में तापमान 36 से 37 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। मौसम सिस्टम की वजह से बदलाव प्रदेश में इस समय चक्रवाती सिस्टम और ट्रफ सक्रिय हैं, साथ ही पश्चिमी विक्षोभ का असर भी देखने को मिलेगा। इसी वजह से शुरुआती दिनों में मौसम बदलेगा, लेकिन सिस्टम हटते ही गर्मी तेजी से बढ़ेगी।मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुंचता है और सामान्य से 5 डिग्री ज्यादा रहता है, तब हीट वेव की स्थिति बनती है। अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में प्रदेश के कई हिस्सों में यही हालात बनने की संभावना है। बार-बार बदलता रहा मौसम इस साल फरवरी और मार्च में मौसम ने कई बार करवट ली। कई जिलों में ओले और बारिश से फसलों को नुकसान हुआ। मार्च के आखिर तक भी आंधी-बारिश का दौर जारी रहा, जिससे गर्मी की शुरुआत टल गई थी। अब अप्रैल में मौसम का यह उतार-चढ़ाव खत्म होकर तेज गर्मी में बदलने वाला है।  इनमें इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, भोपाल समेत प्रमुख जिले शामिल हैं. 12 जिलों में ओले गिरने की संभावना है. 41 से ज्यादा जिलों में आंधी के साथ बारिश हो सकती है. धार जिले के कुक्षी और मनावर क्षेत्र में बुधवार तड़के ओले गिर चुके हैं. कई जिलों में रात के समय अचानक मौसम बदला और तेज हवाएं चलीं।  40 के पार पहुंचेगा पारा 4 अप्रैल के बाद मौसम साफ होने के साथ तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी. 15 अप्रैल के आसपास ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में दिन का तापमान 42-44 डिग्री तक पहुंच सकता है. अन्य संभागों में भी तापमान 40 डिग्री के पार जाने की संभावना है. यह मौसम परिवर्तन अप्रैल के पहले सप्ताह में बारिश और आंधी के रूप में राहत देगा, लेकिन उसके बाद में लू (Heatwave) और भीषण गर्मी का दौर शुरू हो जाएगा।  दिन में गर्मी का असर भी… नर्मदापुरम में तापमान 40 डिग्री पार आंधी, बारिश और ओलों के बीच गर्मी का असर भी दिखा। मंगलवार को नर्मदापुरम में तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। खजुराहो में 39.2 डिग्री, रतलाम-नौगांव में 39 डिग्री, दमोह में 39.1 डिग्री और खरगोन, रायसेन-उमरिया में 38 डिग्री रहा। प्रदेश के 5 बड़े शहरों में भोपाल और जबलपुर में 37 डिग्री दर्ज किया गया। इंदौर-ग्वालियर में 36.6 डिग्री और उज्जैन में 36 डिग्री रहा। अप्रैल में तेज गर्मी का ट्रेंड, हीट वेव भी चलेगी वर्तमान में प्रदेश में साइक्लोनिक सकुर्लेशन और ट्रफ सक्रिय हैं। 2 अप्रैल से वेस्टर्न डिस्टरबेंस भी सक्रिय होगा। इससे 4 अप्रैल तक कहीं आंधी और कहीं बारिश हो सकती है। इसके बाद सिस्टम लौटेगा और गर्मी का दौर शुरू होगा। दूसरे सप्ताह में तेज गर्मी पड़ेगी। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में ग्वालियर, धार, खरगोन, बड़वानी, नौगांव-खजुराहो में तापमान 44-45 डिग्री तक जा सकता है। दतिया, मुरैना, श्योपुर, बड़वानी, खरगोन और धार में भी बढ़ोतरी होगी। अप्रैल में दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में गर्म हवाएं चलती हैं, जिससे भीषण गर्मी पड़ती है। अलग-अलग इलाकों में हीट वेव का आधार अलग मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, तापमान सामान्य से 5°C ज्यादा होने पर हीट वेव मानी जाती है। मैदानी, पहाड़ी और तटीय इलाकों के लिए इसका आधार अलग होता है।     मैदानी इलाका- अधिकतम तापमान 40°C से ऊपर हो। मध्यप्रदेश में ज्यादातर मैदानी इलाका है, इसलिए 40 डिग्री के ऊपर हीट वेव की स्थिति बनती है।     सीवियर हीट वेव में तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री अधिक रहता है। ग्वालियर-चंबल, उज्जैन और सागर संभाग में ऐसी स्थिति बनती है।

इजरायल के सामने लेबनानी सेना ने किया सरेंडर, भागे हथियार डालकर, इजरायल का कब्जा अब तक किस पर?

बेरूत  ट्रंप अब ईरान के साथ समझौते की रणनीति पर उतर आए हैं लेकिन इजरायल लगातार अपनी जंग लड़ रहा है. मिडिल ईस्ट के कई देशों में चल रही खौफनाक बमबारी के बीच लेबनान की सेना ने हथियार डाल दिए हैं. 1 महीने लंबी लड़ाई लड़ने के बाद लेबनानी सेना दक्षिणी लेबनान के दो प्रमुख शहरों, रमीश (Rmeish) और ऐन एबेल (Ain Ebel) से अपने कदम पीछे खींचते हुए चली गई है. सेना का हटना इस बात का बड़ा संकेत है कि इजरायली डिफेंस फोर्सेस (IDF) अब मिडिल ईस्ट में अपना मकसद मजबूत करती जा रही है।  क्या लेबनान ने सच में ‘हथियार डाल दिए’ हैं? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबित लेबनान की आधिकारिक सेना हिजबुल्लाह के मुकाबले काफी कमजोर और कम संसाधनों वाली है. वो इजरायल की आधुनिक मशीनरी और एयरफोर्स का सामना करने की स्थिति में नहीं है. रमीश और ऐन एबेल जैसे शहरों से पीछे हटना इजरायल को लेबनान के भीतर घुसने का ‘खुला निमंत्रण’ देने जैसा है।  लेबनानी सेना के पीछे हटने का सीधा मतलब ये है कि नेतन्याहू का संकल्प पूरा हुआ. इजरायल लंबे समय से दक्षिण लेबनान में एक बफर जोन बनाना चाहता है ताकि हिजबुल्लाह के रॉकेट हमलों को रोका जा सके. लेबनान की सेना के हटते ही अब वहां सिर्फ हिजबुल्लाह के लड़ाके और इजरायली टैंक ही आमने-सामने होंगे।  अब तक लेबनानी सेना की मौजूदगी एक ‘बैरियर’ का काम करती थी लेकिन अब हिजबुल्लाह को अपनी रक्षा खुद करनी होगी. इजरायल के लिए अब इन इलाकों पर कब्जा करना और भी आसान हो गया है।  मिडिल ईस्ट की जंग में इसके बड़े मायने गाजा और ईरान के बाद अब लेबनान में इजरायल को बिना लड़े ही रास्ता मिल रहा है. ये बेंजामिन नेतन्याहू के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और सैन्य जीत है. हिजबुल्लाह ईरान का सबसे बड़ा और ताकतवर प्रॉक्सी ग्रुप है. लेबनान की सरकारी सेना का पीछे हटना यह दिखाता है कि लेबनान के भीतर भी अब हिजबुल्लाह को लेकर समर्थन कम हो रहा है या वहां का प्रशासन अब और तबाही नहीं झेलना चाहता।  सेना के हटते ही इन इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों में भारी खौफ है. लोग घर छोड़कर उत्तर की ओर भाग रहे हैं, जिससे लेबनान में एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो सकता है।  अगला कदम क्या होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनानी सेना का हटना इस बात की पुष्टि है कि अगले 24 से 48 घंटों में इजरायली टैंक रमीश और ऐन एबेल की सड़कों पर नजर आ सकते हैं. इजरायल अब लेबनान के भीतर ‘क्लीन-अप ऑपरेशन’ चलाएगा ताकि हिजबुल्लाह के ठिकानों और सुरंगों को जड़ से मिटाया जा सके।  1948 से शुरू हुआ सीमाओं का विस्तार इजरायल के नक्शे का इतिहास युद्धों की कहानियों से भरा पड़ा है. साल 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने जब विभाजन की योजना पेश की थी, तब इजरायल के लिए केवल 14,500 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र प्रस्तावित किया गया था, लेकिन 1948 में इजरायल की स्थापना के तुरंत बाद शुरू हुए पहले अरब-इजरायल युद्ध ने सब कुछ बदल दिया. इस जंग के खत्म होने तक इजरायल ने अपनी प्रस्तावित सीमाओं को तोड़ते हुए लगभग 20,700 वर्ग किलोमीटर के इलाके पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था. यहीं से इजरायल के भौगोलिक विस्तार के उस दौर की शुरुआत हुई, जिसने मध्य-पूर्व की राजनीति को हमेशा के लिए अस्थिर कर दिया।  सिक्स डे वॉर और कब्जे का सबसे बड़ा दौर इजरायल के इतिहास में 1967 की सिक्स डे वॉर मील का पत्थर साबित हुई. इस छोटी सी लेकिन भीषण जंग में इजरायल ने अपने पड़ोसी देशों को चौंकाते हुए वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी, गोलन हाइट्स और सिनाई प्रायद्वीप जैसे विशाल क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया. इस युद्ध के बाद इजरायल का आकार कई गुना बढ़ गया था. हालांकि बाद में शांति समझौतों के तहत सिनाई प्रायद्वीप को मिस्र को वापस लौटा दिया गया, लेकिन गोलन हाइट्स और वेस्ट बैंक जैसे इलाके आज भी विवाद और कब्जे के केंद्र में बने हुए हैं. यही वे इलाके हैं, जिनके लिए आज भी खून बह रहा है।  ईरान-इजरायल युद्ध और मौजूदा हालात आज के दौर में जब ईरान और इजरायल के बीच सीधी जंग छिड़ी हुई है, तो जमीन का यह विवाद और भी गहरा गया है. ईरान लगातार इजरायल पर फिलिस्तीनी और अरब जमीनों पर अवैध कब्जे का आरोप लगाता रहा है. मौजूदा संघर्ष में जहां इजरायल को अमेरिका का खुला समर्थन प्राप्त है, वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अस्मिता की लड़ाई बता रहा है. जानकारों का मानना है कि इजरायल द्वारा समय-समय पर अपनी सीमाओं को आगे बढ़ाना ही ईरान और उसके सहयोगियों के गुस्से की सबसे बड़ी वजह है. इस युद्ध में इजरायल को कड़ी चुनौती मिल रही है, जिससे उसकी विस्तारवादी नीति पर सवाल उठने लगे हैं।  कितना बढ़ गया इजरायल का कुल क्षेत्रफल? आंकड़ों की नजर से देखें तो इजरायल का विस्तार काफी चौंकाने वाला है. जिस देश की शुरुआत करीब 14,000 वर्ग किलोमीटर से होनी थी, उसका आधिकारिक क्षेत्रफल आज लगभग 22,072 वर्ग किलोमीटर होने का अनुमान है. इसमें गोलन हाइट्स जैसे वे इलाके भी शामिल हैं, जिन्हें इजरायल ने अंतरराष्ट्रीय विरोध के बावजूद अपने नक्शे में मिला रखा है. इजरायल का यह बदलता नक्शा न केवल क्षेत्र में उसकी सैन्य शक्ति को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भविष्य के युद्धों के पीछे जमीन की यह पुरानी लड़ाई ही सबसे बड़ी और मुख्य जड़ है।  ग्रेटर इजरायल की विचारधारा और इसका विवाद इजरायल के इर्द-गिर्द घूमने वाला सबसे बड़ा विवाद ग्रेटर इजरायल की विचारधारा है. यह कोई आधिकारिक सरकारी योजना नहीं है, लेकिन एक ऐसी विचारधारा है जो इजरायल के विस्तार की वकालत करती है. इस विचारधारा के समर्थक बाइबिल के आधार पर प्राचीन यहूदी राज्य की उन सीमाओं की कल्पना करते हैं जो आधुनिक इजरायल से कहीं ज्यादा बड़ी हैं. इस विचार के तहत फिलिस्तीन, लेबनान और सीरिया जैसे पड़ोसी देशों के हिस्सों को भी इजरायल के दायरे में लाने की बात की जाती है. यही वह विचारधारा है जिसे ईरान और अन्य अरब देश क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते हैं।  मध्य-पूर्व और अमेरिका की रणनीतिक भागीदारी इस पूरे भौगोलिक विस्तार और युद्धों के पीछे अमेरिका … Read more

श्रेयस अय्यर पर एक्शन, जीत के बावजूद लाखों का फटका पड़ा

मुल्लांपुर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के चौथे मुकाबले में 31 मार्च (मंगलवार) को पंजाब किंग्स (PBKS) ने गुजरात टाइटन्स (GT) पर 3 विकेट से जीत हासिल की. मुल्लांपुर के महाराज यादविंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में हुए इस मैच में पंजाब किंग्स को जीत के लिए 163 रनों का टारगेट मिला था, जिसे उसने पांच गेंद बाकी रहते हासिल कर लिया।  पंजाब किंग्स की जीत के हीरो ऑस्ट्रेलिया के कूपर कोनोली रहे, जिन्होंने 5 छक्के और 5 चौके की मदद से 44 बॉल पर नाबाद 72 रन बनाए. बैटिंग ऑलराउंडर कोनोली का ये आईपीएल में डेब्यू मुकाबला था. अपने डेब्यू मैच में ही उन्होंने गदर काट दिया और 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुने गए।  पंजाब किंग्स की गुजरात टाइटन्स पर जीत के बावजूद कप्तान श्रेयस अय्यर को स्लो ओवर रेट की वजह से भारी कीमत चुकानी पड़ी है. पंजाब किंग्स ने इस मैच के दौरान निर्धारित समय में अपने ओवर पूरे नहीं किए. आईपीएल की आचार संहिता (Code of Conduct) के अनुच्छेद 2.22 के तहत यह टीम की इस सीजन की पहली गलती थी. इसी के चलते पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेस अय्यर पर 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।  श्रेयस अय्यर पर कब लग सकता है बैन? पंजाब किंग्स से अगर दूसरी बार इस सीजन में स्लो ओवर रेट का अपराध होता है, तो श्रेयस अय्यर पर 24 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. साथ ही टीम के सदस्यों पर 6 लाख रुपये या या उनकी मैच फीस का 25 प्रतिशत (जो भी कम हो) जुर्माना लगाया जाएगा. वहीं, अगर टीम तीसरी बार स्लो ओवर रेट की दोषी पाई जाती है, तो मामला और गंभीर हो जाएगा. ऐसे में कप्तान श्रेयस अय्यर पर एक मैच का बैन लगाया जाएगा।  श्रेयस अय्यर के लिए स्लो ओवर रेट का मामला नया नहीं है, वह इससे पहले भी इस गलती के लिए सजा झेल चुके हैं. पिछले सीजन में भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने श्रेयस अय्यर पर दो बार कार्रवाई की थी. पहली बार नियम तोड़ने पर उन पर 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था. हालांकि, इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ और दूसरी बार वही गलती दोहराने पर श्रेयस अय्यर को 24 लाख रुपये का भारी जुर्माना भरना पड़ा था।  अब आईपीएल 2026 में एक बार फिर स्लो ओवर रेट के कारण श्रेयस अय्यर पर जुर्माना लगा है. इससे यह साफ हो गया है कि यह समस्या लगातार उनके साथ जुड़ी रही है। 

आज से लागू होगा नया टैक्स कानून, 1961 वाला कानून खत्म, HRA और 10 अन्य नियम होंगे बदल

 नई दिल्‍ली सरकार ने टैक्‍स की शब्‍दावली को सरल करने और टैक्‍स सिस्‍टम को आसान बनाने के लिए नया इनकम टैक्‍स कानून (Income Tax Act 2025) लागू कर दिया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा. यह कानून पुराने आयकर कानून 1961 की जगह लेगा. इस कानून के तहत कई नियमों में बदलाव हुए है।  HRA क्‍लेम करने से लेकर ITR डेडलाइन और आईटीआर भरने के लिए ईयर समेत 10 बड़े बदलाव किए गए हैं. साथ ही फॉर्म 16 और अन्‍य इनकम सर्टिफिकेट में भी बदलाव किया गया है. आइए जानते हैं नए कानून के तहत क्‍या-क्‍या बदल जाएगा।  1.टैक्‍स ईयर  ITR भरने के दौरान फाइनेंशियल ईयर (FY) और असेसमेंट ईयर (AY) को समाप्‍त कर दिया गया है और इसे आसान बनाते हुए सिर्फ एक ईयर TAX Year रखा गया है. पहले फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर को लेकर कई सारे कंफ्यूजन होते थे, जिसे अब चेंज कर दिया गया है।  2.ITR की डेडलाइन  नए कानून के तहत आईटीआर भरने की डेडलाइन में भी बदलाव हुआ है. आईटीआर-1 और आईटीआर-2 जमा करने के लिए लास्‍ट डेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जो 31 जुलाई है. लेकिन ITR 3 और ITR 4 के लिए डेडलाइन 31 अगस्‍त तक कर दिया गया है।  3.F&O ट्रेडर्स के लिए ज्‍यादा टैक्‍स  नए कानून के तहत शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों के लिए भी नियम बदला है. सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी के साथ डेरिवेटिव्‍स में ट्रेडिंग ज्‍यादा महंगा हो गया है. फ्यूचर और ऑप्‍शन (F&O) के तहत सिक्‍योरिटी ट्रांजैक्‍शन टैक्‍स (STT) को 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी और ऑप्‍शन प्रीमियम पर टैक्‍स और ऑप्‍शन पर एक्‍ससाइज 0.1 फीसदी और 0.125 फीसदी से बढ़कर 0.15 फीसदी कर दिया गया है।  4.HRA क्‍लेम को लेकर भी नियम मकान किराया भत्ता (HRA) का लाभ पहले की तरह मिलता रहेगा, लेकिन कुछ शर्तें रख दी गई हैं. कर्मचारियों को अब अपने मकान मालिक का PAN और किराए के भुगतान का वैध प्रमाण जमा करना होगा. कुछ मामलों में, HRA का दावा करते समय मकान मालिक की पूरी जानकारी, जिसमें पैन नंबर और किराए की राशि शामिल है, देना अनिवार्य होगा।  साथ ही एक और बड़ा बदलाव दावे को लेकर हो चुका है.  मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता के साथ-साथ बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे शहरों को भी अब 50% एचआरए छूट की कैटेगरी में रखा गया है. पुराने कानून के तहत मेट्रो शहरों को ही ये लाभ मिलता था. नए कानून के तहत नोएडा और गुरुग्राम जैसी जगहों पर रहने वाले लोग 40 फीसदी एचआर पर टैक्‍स छूट क्‍लेम कर सकते हैं।  5.मील कार्ड पर टैक्‍स फ्री लिमिट कंपनी की ओर से दिए जाने वाले फूड कार्ड पर टैक्‍स छूट को पहले के 50 रुपये प्रति मील से बढ़ाकर 200 रुपये प्रति मील कर दिया गया है. यह लाभ कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले फूड और नॉन-अल्‍कोहल ड्रिंग्‍स पर लागू होता है।  6.गिफ्ट और वाउचर छूट  कंपनी के गिफ्ट कार्ड, वाउचर और कूपन पर सालाना टैक्‍स फ्री लिमिट हर कर्मचारी 5,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई है. यह लाभ पुरानी और नई दोनों टैक्‍स व्यवस्थाओं के तहत दिया जाएगा।  7.एजुकेशन अलाउंस में छूट  पुरानी टैक्‍स व्यवस्था के तहत बच्चों के भत्तों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है.एजुकेशन अलाउंस हर बच्चा 100 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये हर महीने कर दिया गया है, जबकि हॉस्‍टल अलाउंस 300 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये हर महीने कर दिया गया है।  8.शेयर बायबैक पर अलग टैक्‍स  पहले स्‍लैब रेट्स पर अनुमानित डिविडेंड के तौर पर टैक्‍स लगाया जाता था, लेकिन अब कैपिटल गेन के तहत टैक्‍स लगाया जाएगा. इसका मतलब है कि अब आपको ज्‍यादा टैक्‍स भी देना पड़ सकता है. पर्सनल प्रमोटर्स पर ये करीब 30 फीसदी टैक्‍स लगेगा, जबकि कंपनी के प्रमोटर पर करीब 22 फीसदी का टैक्‍स लगेगा. रिटेल निवेशक पर होल्डिंग्‍स टाइम के हिसाब से STCG या LTCG टैक्‍स लगाया जा सकता है।  9.पैन नियमों में बदलाव केवल आधार कार्ड के आधार पर पैन कार्ड के लिए आवेदन करना अब मान्य नहीं है. आवेदकों को इसके साथ कुछ और दस्‍तावेज का उपयोग करना होगा. इसके साथ ही एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपये या उससे अधिक के कैश जमा राशि, 5 लाख रुपये से अधिक के वाहनों की खरीद, होटलों या कार्यक्रमों के लिए 1 लाख रुपये से अधिक का भुगतान और 20 लाख रुपये से अधिक की अचल संपत्ति लेनदेन पर पैन अनिवार्य कर दिया गया है।  10. इनकम टैक्‍स फॉर्म  अब फॉर्म 16 की जगह पर फॉर्म 130 दिया जाएगा. फॉर्म 16A की जगह पर फॉर्म 131, फॉर्म 26AS की जगह पर फॉर्म 168, फॉर्म 24Q की जगह फॉर्म 138 और फार्म 26Q की जगह पर फार्म 140 दिया जाएगा. इसी तरह बाकी फार्म के नाम में बदलाव किया गया है. हालांकि इनके काम में कोई बदलाव नहीं है. सिर्फ नाम ही चेंज हुआ है।