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ट्रंप का ऐलान: दो-तीन हफ्तों में अमेरिका ईरान से वापस लौटेगा, जंग का अंत होगा

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध को खत्म करने को लेकर बड़ा बयान दिया. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका जल्द ही ईरान से अपनी सेना वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर देगा. उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिका को युद्ध खत्म करने के लिए ईरान के साथ किसी समझौते की जरूरत नहीं है।  ट्रंप ने ऐलान किया है कि अमेरिकी सेना अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान छोड़ देगी. ट्रंप ने दावा करते हुए कहा ईरान में 'रिजीम चेंज' का लक्ष्य पूरा हो चुका है. इसीलिए अमेरिका अब इस संघर्ष को लंबा खींचने के पक्ष में नहीं है।  हालांकि ट्रंप ने समझौते की शर्त को हटा दिया है, लेकिन उन्होंने ये भी संकेत दिया कि युद्ध खत्म होने से पहले एक डील हो सकती है. उन्होंने कहा, हो सकता है कि उससे पहले कोई समझौता हो जाए।  भले ही ट्रंप ने युद्ध जल्द खत्म करने का ऐलान कर दिया हो, लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अब तक जंग खत्म करने की बात नहीं कही है. हाल ही में नेतन्याहू ने कहा था कि वो ईरान के साथ जंग खत्म करने की कोई डेडलाइन तय नहीं कर सकते हैं।  पश्चिम एशिया में कार्यरत अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ ईरान की धमकी के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, 'उन्होंने (ईरान ने) उन्हें किस बात की धमकी दी? उन्होंने उन्हें कैसे धमकी दी? क्या उन्होंने कहा कि वो उन्हें उड़ा देंगे? क्या वो उन पर हमला करेंगे? वो ऐसा नहीं करेंगे. वो उन पर परमाणु हथियार से हमला नहीं करेंगे. उनमें से ज्यादा लोग (ईरानी नेतृत्व) पहले ही मर चुके हैं।  अमेरिका और इजरायल का ईरान पर संयुक्त हमला बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से 28 फरवरी को ईरान पर हमला कर दिया था. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. हमलों में खामेनेई की बेटी-दामाद, बहू और नातिन की भी जान चली गई. इसके अलावा, अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के कई दिग्गज अधिकारियों ने भी अपनी जान गवां दी।  खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का सुप्रीम लीडर बनाया गया. ऐसी खबरें सामने आई कि मोजतबा हमलों में घायल हो गए हैं. हालांकि, मोजतबा इस समय कहां हैं, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। 

डॉ. मोहन यादव ने बच्चों पर की पुष्प वर्षा, हजारों बच्चों का हुआ प्रदेश के स्कूलों में प्रवेश

भोपाल मध्यप्रदेश के बच्चों के लिए 1 अप्रैल का दिन बेहद खास रहा। एक तरफ उन्हें नि:शुल्क साइकिल मिली, तो दूसरी ओर वे स्कूल जाने के लिए भी प्रेरित हुए। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 'स्कूल चलें हम' राज्य स्तरीय प्रवशोत्सव कार्यक्रम-2026 का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने विद्यार्थियों को निःशुल्क साइकिल का वितरण भी किया। कार्यक्रम की शुरुआत में सीएम डॉ. यादव ने बच्चों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस दौरान बच्चों ने उनके साथ सेल्फी भी ली।   गौरतलब है कि सीएम डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उसके बाद उन्होंने बच्चों पर पुष्प वर्षा की। उन्होंने दोबारा स्कूल जाने का निर्णय लेने वाले बच्चों को किताबें भेंट कीं और उनके माता-पिता का अभिनंदन किया। इस मौके पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि आज का दिन अद्भुत है। एक साथ हजारों बच्चे स्कूल में प्रवेश कर रहे हैं। जिनका स्कूल दूर है उन्हें साइकिल मिल रही है। आज समय बदल रहा है। कांग्रेस के शासनकाल में संभव नहीं था कि साइकिल मिल जाए। आप भाग्यशाली हैं कि आपको किताबें मिल रही हैं, साइकिल मिल रही है, यूनिफॉर्म के लिए राशि मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समय बदल रहा है, देश बदल रहा है। हमारी सरकार भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है।   नामांकन में बढ़ोत्तरी पर गर्व-मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार और शिक्षा विभाग ने माता-पिता का दिल जीता है। आज ड्रॉप आउट जीरो हो गया है। यह बहुत बड़ी बात है। आज हम गर्व से कह सकते हैं कि नामांकन में 19.6 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह छोटी बात नहीं। उन्होंने कहा कि शासकीय विद्यालयों में बच्चों की प्रगति 32.4 फीसदी से हुई है। सरकारी स्कूलों पर भरोसा बढ़ रहा है। सांदीपनि स्कूलों और पीएम श्री स्कूलों में बच्चों के लिए सारी सुविधाएं मौजूद हैं। बच्चे सांदीपनि स्कूलों में पढ़ने के लिए प्राइवेट स्कूल तक छोड़ रहे हैं। इन स्कूलों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सारी सुविधाएं हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत किताबों को स्थानीय भाषाओं में आदिवासी क्षेत्रों में वितरित की जा रही हैं। हर बच्चा स्कूल जाने के लिए उत्साहित-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज हर बच्चा स्कूल जाने के लिए उत्साहित है। अनुसूचित जनजाति के लिए 95 हजार क्षमता वाले 1 हजार 913 छात्रावासों का संचालन हो रहा है। अनुसूचित कार्य विभाग के 25 हजार से ज्यादा विद्यालयों में 20 लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। हमारी सरकार हर वर्ग के कल्याण के लिए कार्य कर रही है। आज हमने 1-6-9वीं क्लास में एडमिशन की प्रक्रिया आसान की है। हमारी सरकार ने करीब एक लाख प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप दिए। हमने इसके लिए बजट में इस बार ढाई सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। जो बच्चे स्कूलों में टॉप कर रहे हैं, उन्हें स्कूली दी जा रही है। 55 लाख विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म दिया जा चुका है। 76 हजार से ज्यादा शिक्षकों को नियुक्ति दी है। मेरी शुभकामना है कि हमारे बच्चे हर क्षेत्र में जाएं और नाम रोशन करें।  आज हमारे लिए उत्सव का दिन-स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा आज का दिन स्कूली शिक्षा विभाग के लिए दीपावली का दिन है। आज प्रदेश के बच्चे स्कूलों में प्रवेश कर रहे हैं। हमारा इनरॉलमेंट बढ़ रहा है। मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि आज हमने एक करोड़ बच्चों को इनरॉल किया है। हमारा पूरा विभाग ड्रॉप आउट को रोकने का प्रयास कर रहा है। हमारी सरकार बच्चों की बेहतरी के लिए काम कर रही है। हम किताबों को निशुल्क देने में सफल हुए हैं। सरकार का प्रयास है कि विकासखंड स्तर पर बुक फेयर लगाए जाएं, जहां शासकीय के साथ निजी स्कूलों के बच्चों को भी पाठ्यपुस्तक निगम की सस्ती किताबों का लाभ मिल सके। मैं बच्चों को स्कूल प्रवेशोत्सव की शुभकामनाएं देता हूं। हम बच्चों का भविष्य सुनहरा बनाने के लिए संकल्पित हैं। जनजातीय कल्याण मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। शासकीय स्कूलों में बच्चों को मध्यान भोजन, नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें, साइकिलें, स्कूटी, लैपटॉप तक वितरित किए जा रहे हैं।  

नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता: 25 माओवादी कैडरों ने छोड़ी बंदूक

रायपुर. छत्तीसगढ़ के इतिहास में अहम मोड़ दर्ज हो गया है. वर्षों से हिंसा, डर और बंदूक के साये में जी रहे दण्डकारण्य क्षेत्र ने अब शांति और भरोसे की ओर कदम बढ़ाया है. नक्सल उन्मूलन की दिशा में बड़ी सफलता तब सामने आई, जब 25 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा में वापसी की. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे न केवल आत्मसमर्पण, बल्कि “विश्वास की जीत” बताया है. 25 माओवादी कैडरों की मुख्यधारा में वापसी दण्डकारण्य क्षेत्र में चल रहे “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत 25 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है. इनमें 12 महिलाएं भी शामिल हैं. ये सभी माओवादी लंबे समय से जंगलों में सक्रिय थे और अलग‑अलग हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे हैं. आत्मसमर्पण के साथ ही इन कैडरों ने बंदूक छोड़कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा जताया है. सीएम विष्णुदेव साय ने बताया ऐतिहासिक दिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज का दिन दण्डकारण्य और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक है. उन्होंने कहा कि वर्षों से चली आ रही हिंसा और डर की विचारधारा का आज अंत होता दिख रहा है. यह लोकतंत्र, जन‑विश्वास और सरकार की नीति की जीत है. मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के लिए नई शुरुआत बताया. ₹1.47 करोड़ के इनामी नक्सलियों ने किया सरेंडर मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आत्मसमर्पण करने वाले 25 माओवादी कैडरों पर कुल 1 करोड़ 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था. इनका मुख्यधारा में लौटना इस बात का संकेत है कि अब भटके हुए लोगों का भरोसा सरकार की पुनर्वास नीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बढ़ रहा है. 93 हथियार और ₹14 करोड़ से ज्यादा की बरामदगी सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई और सरकार की समन्वित रणनीति के चलते माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. इस कार्रवाई के दौरान 93 घातक हथियारों के साथ कुल ₹14.06 करोड़ की बरामदगी हुई है. यह बरामदगी साफ तौर पर दिखाती है कि नक्सली तंत्र अब कमजोर पड़ चुका है. ""दण्डकारण्य क्षेत्र आज वामपंथी उग्रवाद के अंत के ऐतिहासिक और निर्णायक क्षण का साक्षी बन रहा है। “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के तहत आज 25 माओवादी कैडरों (12 महिला सहित) ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की। इन पर कुल ₹1.47 करोड़ का इनाम घोषित था। माओवादी…"" – Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) दण्डकारण्य में लौट रहा शांति का भरोसा मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह घटना केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भरोसे और शांति की वापसी है. दण्डकारण्य क्षेत्र अब धीरे‑धीरे सामान्य जीवन, स्थिरता और विकास की ओर बढ़ रहा है. यहां के लोग हिंसा नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की चाह रख रहे हैं. इतिहास में याद रखा जाएगा 31 मार्च 2026 मुख्यमंत्री ने कहा कि 31 मार्च 2026 का दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में उस तारीख के रूप में याद रखा जाएगा, जब नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक परिणाम सामने आए. यह वह दिन है, जब प्रदेश ने हिंसा के अंधेरे से निकलकर एक नए और शांतिपूर्ण युग की ओर कदम बढ़ाया.

कुवैत से केरल पहुंचे प्लेन में 20 शव, क्या है इस रहस्यमयी घटना का कारण?

कोच्चि कुवैत में जान गंवाने वाले 20 भारतीयों के पार्थिव शरीर मंगलवार को केरल के कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे. विमान सेवाओं में आए व्यवधान के कारण इन शवों को वतन लाने में काफी समय लगा. कुवैत एयरवेज की विशेष उड़ान KU5632 कोलंबो के रास्ते कोच्चि पहुंची. इस विमान में कोई भी यात्री सवार नहीं था, यह विशेष रूप से केवल शवों को लाने के लिए संचालित की गई थी।  पिछले कुछ दिनों में कुवैत में अलग-अलग घटनाओं में जान गंवाने वाले कम से कम 20 भारतीयों का शव मंगलवार को इस विशेष उड़ान से कोच्चि एयरपोर्ट पहुंचा. हालांकि, इस घटना का वहां चल रहे वार (युद्ध) से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण उड़ानों के शेड्यूल में जो दिक्कतें आई थीं, उसी की वजह से इन पार्थिव शरीरों को भेजने में देरी हुई।  हवाई अड्डा प्रशासन ने बताया कि विमान के लैंड करते ही सभी 20 शवों को उनके पैतृक स्थानों पर भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी. मरने वालों में अधिकांश लोग केरल के कोझिकोड, अलाप्पुझा और कोट्टायम जिलों के रहने वाले थे. इसके अलावा, कुछ शवों को सड़क मार्ग से तमिलनाडु भी भेजा जाना है, जिसके लिए एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक प्रबंध पहले ही कर लिए गए। थे।  कुवैत में फंसे इन पार्थिव शरीरों की घर वापसी का मामला पिछले काफी समय से लंबित था. मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध की वजह से कुवैत से होने वाली विमान सेवाओं पर असर पड़ा था, जिसके चलते यह देरी हुई. अब सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इन शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया है।  अधिकारियों ने कहा, "पिछले कुछ दिनों में कुवैत में जिन लोगों की मौत हुई है। वे केरल और तमिलनाडु के अलग-अलग हिस्सों के रहने वाले थे। उनके शवों को मंगलवार रात एक ही उड़ान से कोच्चि लाया गया। हमें हर मामले में मौत के कारणों की जानकारी नहीं है। जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद हम शवों को उनके परिजनों को सौंप देंगे।" अधिकारियों ने बताया कि शवों को कुवैत से कोलंबो होते हुए कोच्चि तक एक विशेष उड़ान से लाया गया। CIAL के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने शवों को सौंपने से पहले की सभी औपचारिकताएं पूरी कीं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कुवैत से उड़ान सेवाओं में हाल ही में आई बाधाओं के कारण इन पार्थिव शरीरों का परिवहन रुका हुआ था। अब जब उड़ान सेवाएं आंशिक रूप से बहाल हो गई हैं, तो सभी 20 पार्थिव शरीरों को एक ही उड़ान से एक साथ लाया गया। इन पार्थिव शरीरों को देर रात कोझिकोड, अलाप्पुझा, कोट्टायम और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों सहित विभिन्न इलाकों के लिए रवाना किया जाएगा। विमान (KU5632) की वापसी की उड़ान 1 अप्रैल को स्थानीय समयानुसार 10:55 बजे कोच्चि से कुवैत के लिए रवाना होगी। इस उड़ान में भी कोई यात्री सवार नहीं होगा। अधिकारी और सहायक एजेंसियां ​​चौबीसों घंटे काम कर रही हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मृतकों की अंतिम यात्रा पूरे सम्मान के साथ और बिना किसी और देरी के संपन्न हो।

वित्तीय वर्ष की शुरुआत में महंगाई का झटका, कमर्शियल LPG की कीमत ₹195.5 बढ़ी

 नई दिल्ली मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष का सीधा असर अब जनता की जेब पर पड़ रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण सरकारी तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर के दामों में 195.50 रुपये की भारी बढ़ोतरी कर दी है. बुधवार से लागू हुई इन नई कीमतों ने व्यापारियों और रेस्टोरेंट संचालकों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी तेल कंपनियों के मुताबिक, दिल्ली में अब 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत 2,078.50 रुपये हो गई है।  इससे पहले, 1 मार्च को 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत में 114.5 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।  'कीमतों 50 फीसदी की बढ़ोतरी…' कमर्शियल गैस के दामों में बढ़ोतरी से घर पर खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले एलपीजी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं आया है. घरेलू कुकिंग गैस (LPG) की कीमतें, जिनमें आखिरी बार 7 मार्च को 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर पर 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, अभी भी वैसी ही बनी हुई हैं. दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत 913 रुपये है।  क्या घरेलू सिलेंडर की बढ़ी कीमत हालांकि कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत दी है। कंपनियों ने 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में यह सिलेंडर अभी भी 913 रुपये में मिल रहा है। घरेलू गैस के दाम आखिरी बार 7 मार्च को 60 रुपये बढ़ाए गए थे। कितनी हुई कीमत कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में इसकी नई कीमत 2,078.50 रुपये हो गई है। इससे पहले 1 मार्च को भी 114.5 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। कोलकाता में 19 किलो वाला सिलेंडर अब 2208 रुपये का हो गया। मुंबई में 2031 रुपये की कीमत हो गई। वहीं चेन्नई में 2246.50 रुपये में यह सिलेंडर मिलेगा। पटना में इसकी कीमत 2365 हो गई। पहले भी बढ़े थे दाम बता दें कि इससे पहले पिछले महीने भी घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी हुई थी। उस समय घरेलू सिलेंडर पर 60 रुपये और कमर्शियल पर 114.50 रुपये महंगा हुआ था। इस बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपये हो गई। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को इंटरनेशनल बेंचमार्क और एक्सचेंज रेट के आधार पर ATF और LPG की कीमतों में बदलाव करती हैं।  पश्चिम एशिया में जंग की वजह से एनर्जी सप्लाई चेन में रुकावट आने के बाद से ग्लोबल तेल की कीमतों में लगभग 50 फीसदी की तेज़ी आई है।  पिछले साल मार्च में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती के बाद से, इनकी कीमतें अभी भी स्थिर बनी हुई हैं; दिल्ली में अभी पेट्रोल की कीमत 94.72 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल की कीमत 87.62 रुपये प्रति लीटर है।  दिल्ली में इतना है सिलिंडर का रेट सरकारी तेल कंपनियों द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश की राजधानी दिल्ली में अब 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर की कीमत 2,078.50 रुपये हो गई है। इससे पहले 1 मार्च को भी कीमतों में 114.5 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, यानी मात्र एक महीने के अंतराल में व्यापारिक गैस के दाम 300 रुपये से अधिक बढ़ चुके हैं। खाद्य वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं कमर्शियल गैस के महंगे होने से रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों की लागत बढ़ जाएगी। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में बाहर खाना और अन्य खाद्य वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं। हालांकि, घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) की कीमतों में फिलहाल किसी बदलाव की खबर नहीं है।  

चंडीगढ़ में पानी के बिल में 5% की बढ़ोतरी, सीवरेज सेस भी हुआ महंगा

चंडीगढ़ नया वित्त वर्ष बदलने के साथ ही आज से कई तरह के चार्ज भी बढ़ गए हैं। पहली अप्रैल से वाटर टैरिफ पांच प्रतिशत बढ़ गया है। सीवरेज सेस में भी बढ़ोतरी हो गई है यह बढ़कर ही पानी के बिल में जुड़ेगा। अभी तक 0-15 किलोलीटर (एक किलोलीटर में एक हजार लीटर) पानी पर प्रति केएल 3.47 रुपये खर्च आता है जो बढ़कर 3.64 रुपये प्रति किलोलीटर हो गया है। 60 केएल से अधिक पर 24.31 रुपये प्रति केएल खर्च बिल में जुड़कर आने लगेगा। कम पानी खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को मामूली अतिरिक्त खर्च वहन करना होगा। जैसे पहली 0-15 किलोलीटर की स्लैब में 15 पैसे की बढ़ोतरी से तीन से पांच रुपये ही अधिक चुकाने होंगे। निगम ने प्रापर्टी मालिकों को राहत देते घोषणा की है कि 31 मई तक प्रापर्टी टैक्स जमा करने पर 20 प्रतिशत तक छूट दी जाएगी। यह छूट रिहायशी संपत्तियों पर 20 प्रतिशत तक और कमर्शियल, इंडस्ट्रियल व अन्य संपत्तियों पर 10 प्रतिशत तक लागू होगी। 31 मई के बाद टैक्स जमा करने वालों पर 25 तक पेनल्टी और 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगाया जा सकता है। पिछले वर्ष निगम ने रिकार्ड प्रापर्टी टैक्स जमा किया था। प्रॉपर्टी खरीदना हुआ और महंगा शहर में कलेक्टर रेट में 10% से लेकर 22% तक की बढ़ोतरी की गई है। रिहायशी, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और कृषि भूमि सभी इसके दायरे में हैं। सेक्टर 1 से 12 में दरें अब ₹2.37 लाख प्रति वर्ग गज तक पहुंच गई हैं। सेक्टर 14 से 37 के लिए ₹1.81 लाख प्रति वर्ग गज तय किया गया है। बाहरी सेक्टरों (38 और आगे) में यह ₹1.33 लाख प्रति वर्ग गज हो गया है। फ्लैट और मकानों के लिए भी अलग-अलग फ्लोर के हिसाब से नई दरें लागू हुई हैं। कॉर्नर प्रॉपर्टी पर 5% अतिरिक्त शुल्क देना होगा, जबकि रिहायशी प्लॉट को नर्सिंग होम या अस्पताल में बदलने पर 25% से ज्यादा अतिरिक्त फीस लगेगी। पानी के बिल में भी बढ़ोतरी पानी की दरों में मामूली लेकिन असरदार इजाफा किया गया है। 0–15 किलोलीटर पानी अब ₹3.64 प्रति किलोलीटर मिलेगा। ज्यादा खपत पर अतिरिक्त चार्ज बढ़ेगा। हालांकि कम खपत वाले उपभोक्ताओं पर इसका असर सीमित रहेगा, लेकिन कुल बिल में हल्की बढ़ोतरी तय है। साथ ही पानी की बर्बादी रोकने के लिए अप्रैल से जून तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। कूड़ा उठाने का शुल्क बढ़ा नगर निगम ने घरों से कचरा उठाने की फीस में 5% तक की वृद्धि की है। छोटे घरों से लेकर बड़े कोठियों तक सभी श्रेणियों में चार्ज बढ़ा है। 2 मरला तक के घरों के लिए शुल्क ₹60 से अधिक हो गया है, जबकि बड़े घरों के लिए ₹425 तक पहुंच गया है। बिजली बिल में भी असर घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए पहले स्लैब (0–100 यूनिट) में दर बढ़ाकर ₹2.95 प्रति यूनिट कर दी गई है। 100 यूनिट इस्तेमाल करने वालों को अब ₹15 ज्यादा देने होंगे। 200 यूनिट तक खपत करने वालों के बिल में भी हल्की बढ़ोतरी देखी जाएगी। शराब भी हुई महंगी, बिक्री के नए विकल्प नई एक्साइज पॉलिसी लागू होने के साथ शराब की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। ₹500 की बोतल अब करीब ₹510 में मिलेगी। ₹2000 की बोतल की कीमत ₹2040 तक पहुंच गई है। खास बात यह है कि अब शहर में पेट्रोल पंप और किराना दुकानों पर भी शराब उपलब्ध होगी, जिससे इसकी पहुंच और आसान हो जाएगी। डोमेस्टिक कंज्य के लिए नई पानी की दरें खपत की सीमा (केएल में) नई दर (रुपये प्रति केएल) 01-15 3.64 16-30 7.30 31-60 12.16 60 से अधिक 24.31 अन्य कंज्यूमर के लिए नई पानी की दरें (1 अप्रैल से प्रभावी) कंज़्यूमर का प्रकार नई दर (रुपये प्रति केएल) कमर्शियल 36.47 इंस्टीट्यूशनल 30.39 टैक्सी स्टैंड 36.47

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की घोषणा का 24 घंटे में हुआ प्रभावी पालन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की एक दिन पूर्व की गई घोषणा का 24 घंटे में हुआ पालन 375 करोड़ रुपए की राशि 600 से अधिक एमएसएमई इकाइयों के खातों की अंतरित सोमवार को मुख्यमंत्री ने 250 इकाइयों को किए थे 169.50 करोड़ अंतरित एमएसएमई मंत्री काश्यप ने मुख्यमंत्री की सहृदयता के लिए किया आभार व्यक्त भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की एक दिन पूर्व की गई घोषणा का 24 घंटे में पालन हुआ है। वित्त विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई 375 करोड़ रुपए की राशि आज ही एमएसएमई विभाग ने 600 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाइयों के खातों में प्रोत्साहन तथा अनुदान राशि अंतरित भी कर दी है। उल्लेखनीय है कि सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में संपन्न हुए कार्यक्रम में 250 इकाइयों को 169 करोड़ 57 लाख की राशि अंतरित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ यादव ने शेष इकाइयों से वायदा किया था कि उन्हें भी जल्दी ही मदद की जाएगी।एमएसएमई मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप ने विभाग और उद्यमियों की ओर से मुख्यमंत्री की सहृदयता के लिए आभार व्यक्त किया है। उल्लेखनीय है कि सर्वाधिक रोजगार सृजन के सशक्त माध्यम एमएसएमई के लिए मुख्यमंत्री डॉ यादव द्वारा प्रदेश में निवेश एवं उद्यम का जाल बिछाने की संभावनाओं में वृद्धि करने के उद्देश्य से एमएसएमई विकास नीति 2025 लागू की है। नीति में निवेशकों को विभिन्न सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने तय किया है कि निवेशकों को स्वीकृत सुविधाओं का समयावधि में वितरण हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ यादव के निर्देश एवं विशेष प्रयासों से वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन इकाइयों की लंबित देयताओं के भुगतान के लिए वित्त विभाग द्वारा समुचित बजट आवंटन विभाग को उपलब्ध कराया गया । एमएसएमई इकाइयों को स्वीकृत सुविधाओं के वितरण की निरंतरता में 31 मार्च मंगलवार को 600 से अधिक इकाइयों को राशि रु. 375 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की गयी। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन इतनी बड़ी मात्रा में अनुदान राशि वितरण होने पर निवेशकों में उत्साह एवं प्रदेश की नीतियों के प्रति विश्वास और प्रबल हुआ है। एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप ने एमएसएमई इकाइयों को उनकी स्वीकृत सुविधाओं के समयावधि में वितरण के लिए मुख्यमंत्री का का आभार व्यक्त किया है। एमएसएमई जगत के उद्यमियों एवं संघो द्वारा भी उक्त पहल पर हर्ष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया गया है। उन्होंने कहा है कि शासन की इस पहल से न केवल स्थापित एमएसएमई इकाई निरंतर प्रगति कर रही हैं अपितु देश एवं विदेश के निवेशक भी प्रदेश में नए निवेश के लिए आकर्षित हो रहे हैं।  

बस्तर में नक्सलवाद पर बड़ी सफलता: टॉप नक्सल लीडरों का एनकाउंटर, हथियारों के साथ सरेंडर, ये हैं 5 कारण

जगदलपुर  छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद लगभग खत्म हो गया है। सुरक्षाबल के जवानों ने डेडलाइन 31 मार्च 2026 से पहले ही नक्सलियों के कई टॉप लीडरों का एनकाउंटर किया। इसके साथ ही बड़ी संख्या में नक्सलियों के सरेंडर के कारण जवानों को बड़ी सफलता मिली है। नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबल कैंप की स्थापना से जवानों को इस मिशन में बड़ी मदद मिली है। बस्तर संभाग के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि नक्सल विरोधी अभियान में स्थानीय लोगों का साथ मिला। इसके साथ ही रणनीति बनाई गई थी कि फोर्स की पहुंच उन इलाकों में होनी चाहिए जो हार्डकोर नक्सली माने जाते हैं। जिसके बाद सुरक्षा कैंप की स्थापना पर फोकस किया गया। कैंप की स्थापना से स्थानीय लोगों से संवाद आसान हुआ इसके साथ की नक्सलियों की गतिविधियों पर सीधी नजर रखी गई। जिस कारण से नक्सलवाद के खिलाफ जीत मिली है। हार्डकोर नक्सली इलाके में फोर्स की पहुंच बस्तर संभाग में 2025 में नक्सल विरोधी अभियान के साथ-साथ क्षेत्र की जनता से संवाद के मकसद से 58 नवीन सुरक्षा कैम्प की स्थापना की गई। इसके साथ ही 22 मार्च 2026 तक 15 नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित किए गए। जिसमें नारायणपुर जिले के हार्डकोर नक्सली इलाका माने जाने वाले जटवर, मदौड़ा, वाड़ापेंदा, कुरूषकोड़ो, हच्चेकोटी, आदनार, बोटेर, दिवालूर, तुमनार। बीजापुर जिले के आदवाड़ा, मुक्कावेली, गुण्डेपुरी, पालसेगुड़ी, सेन्ड्रा, बड़ेगुण्डेम जैसे स्थान पर सुरक्षा कैंप की स्थापना की गई। ग्रामीणों तक योजनाओं का पहुंचा लाभ बस्तर संभाग के सुरक्षा कैम्पों की स्थापना के साथ-साथ विकास कार्य को भी प्राथमिकता दी गई। नक्सली इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, बिजली, बैंक, आंगनबाड़ी केन्द्र एवं अन्य सुविधायें उपलब्ध कराया गया। जिस कारण से नक्सल प्रभावित क्षेत्रवासियों में शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ाने लगा। नक्सलियों के खिलाफ रणनीति के साथ लड़ाई लडी गई। अलग-अलग मोर्चे पर रणनीति तैयार की गई थी। जो गांव नक्सलवाद से मुक्त हो रहे थे वहां, सरकारी योजनाएं पहुंचाकर ग्रामीणों का विश्वास हासिल किया गया। सुंदरराज पी, पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज नक्सलियों के सरेंडर से संगठन कमजोर बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खात्मे के लिए नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादी कैडरों को सरेंडर के लिए प्रेरित किया गया। इसके लिए 'पूना मारगेम' अभियान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के तहत 2025 में 1573 और 2026 में 373 माओवादियों ने सरेंडर किया है। जिस कारण से नक्सली संगठन को झटका लगा। वहीं, 2024 में 792 माओवादियों ने हिंसा त्यागकर सरकार की नीतियों का साथ दिया और समाज की मुख्यधारा में लौटे हैं। बड़े नक्सलियों का एनकाउंटर नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबल के जवानों ने टॉप नक्सली लीडरों को टारगेट किया। नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबल के जवानों ने बसवाराजू, माड़वी हिडमा जैसे नक्सलियों का एनकाउंटर किया। जिसके बाद से नक्सली संगठन कमजोर होता गया। नक्सल संबंधी घटनाओं का विवरण साल 2024 साल 2025 साल 2026 (22 मार्च तक) मुठभेड़ में मारे गए नक्सली 217 256 26 गिरफ्तार नक्सली 929 898 94 नक्सलियों द्वारा बरामद हथियार 286 677 237 सरेंडर करने वाले नक्सली 792 1573 373 बरामद किए गए आईईडी विस्फोटक 308 894 220 हथियार के साथ सरेंडर से झटका माओवादी संगठनों को सबसे बड़ा झटका उस समय लगा जब नक्सलियों ने अपने हथियारों के साथ सरेंडर किया। बस्तर संभाग में पुलिस ने नक्सली मुठभेड़, माओवादियों द्वारा डम्प किये गये हथियार एवं पूना मारगेम के तहत सशस्त्र माओवादियों द्वारा हिंसा त्यागकर समाज के मुख्यधारा में शामिल होनों से नक्सली संगठन को झटका लगा।  

संस्कृति के सम्मान से होता है विकास का सशक्त आरंभ — मुख्यमंत्री साय

जहां संस्कृति का सम्मान होता है, वहीं से विकास की नई शुरुआत होती है — मुख्यमंत्री साय लोक-आस्था, परंपरा और विकास का संगम बना कुँवरगढ़ महोत्सव रायपुर छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विकास के संगम का सशक्त प्रतीक ‘कुँवरगढ़ महोत्सव’ का आज धरसींवा  में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा भव्य शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर पर मुख्यमंत्री साय ने 136 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करते हुए क्षेत्र को बड़ी सौगात दी। उन्होंने ग्राम कूंरा का नाम उसके ऐतिहासिक गौरव के अनुरूप ‘कुँवरगढ़’ करने की महत्वपूर्ण घोषणा की, जिससे क्षेत्रवासियों में उत्साह का वातावरण देखने को मिला। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि कुँवरगढ़ महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक-आस्था, परंपरा और गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और उसे नई पहचान देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है और बस्तर, सरगुजा, कोरिया तथा सिरपुर महोत्सव की श्रृंखला में अब कुँवरगढ़ महोत्सव भी एक विशिष्ट पहचान बनाएगा। इस दौरान उन्होंने नवनिर्मित तहसील कार्यालय का लोकार्पण करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र के नागरिकों को राजस्व संबंधी कार्यों में त्वरित और बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री साय ने क्षेत्र के विकास को नई गति देने के उद्देश्य से गौरवपथ निर्माण, रानीसागर तालाब के सौंदर्यीकरण, पुलिस चौकी की स्थापना, खारून नदी में एनीकट निर्माण, खेल मैदान के उन्नयन तथा रायपुर के टेकारी-नयापारा से बड़े नाला मार्ग के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा, आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा और आमजन के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा। उल्लेखनीय है कि धरसींवा क्षेत्र का प्राचीन ग्राम कूंरा, जिसे अब ‘कुँवरगढ़’ के रूप में पुनर्स्थापित किया जा रहा है, अपने भीतर गौरवशाली इतिहास समेटे हुए है। यह क्षेत्र आदिवासी शासक राजा कुँवर सिंह गोंड के साम्राज्य का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, जिनकी वीरता और विरासत आज भी यहां के जनजीवन में जीवंत है। उत्तर में माता कंकालिन, दक्षिण में माता चंडी, पश्चिम में माता महामाया और पूर्व में भगवान चतुर्भुजी की उपस्थिति इस क्षेत्र को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। लगभग 12 हजार की आबादी वाला यह क्षेत्र अपनी परंपरा और विकास के संतुलन के साथ आगे बढ़ रहा है। महोत्सव में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए हैं तथा स्थानीय लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बनी हुई हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं। उन्होंने जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि अनेक क्रांतियों और परंपराओं की साक्षी रही है। उन्होंने लोगों को नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय संग्रहालय के अवलोकन के लिए भी प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की पावन धरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रभु राम का ननिहाल है और वनवास काल का अधिकांश समय उन्होंने यहीं व्यतीत किया।दंडकारण्य, माता शबरी का आश्रम, माता कौशल्या की नगरी तथा गुरु घासीदास जी और गहिरा गुरु जैसे संतों की तपोभूमि होने के कारण यह प्रदेश आध्यात्मिक रूप से अत्यंत समृद्ध है। उन्होंने आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास का स्मरण करते हुए कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ अनेक क्रांतियां इस धरती पर हुई हैं। मुख्यमंत्री ने धरसींवा विधायक अनुज शर्मा की इस पहल की सराहना करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने दो वर्षों के कार्यकाल में किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में धरसींवा विधायक अनुज शर्मा, विधायक मोतीलाल साहू, सुमोना सेन, देवजीभाई पटेल, अंजय शुक्ला, संभागायुक्त महादेव कावरे, कलेक्टर गौरव सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।

ईरान ने होर्मुज में टोल वसूली को दी मंजूरी, अमेरिकी और इजरायली जहाजों पर बैन

तेहरान  ईरान जंग में जिसका डर था, वो हो गया. ईरान की संसद ने होर्मुज पर टोल लगाने वाले ‘कानून’ को मंजूरी दे दी है. जी हां, ईरान की संसद की सुरक्षा समिति ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लिए एक नई प्रबंधन योजना को मंजूरी दी है. इसमें जहाजों पर टोल और कुछ देशों पर बैन लगाने का प्रस्ताव है. इस मंजूरी के बाद अब होर्मुज से अमेरिका और इजरायल के जहाजों पर बैन लग गया है. इस तरह अब ईरान ने दुनिया के इस सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्ग यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण और मजबूत करने का फैसला किया है. यह जानकारी ईरानी सरकारी मीडिया ने दी है।  इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) के अनुसार, इस नए प्लान में रणनीतिक जलमार्ग यानी होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए रियाल आधारित टोल सिस्टम लागू किया गया है. इसका मतलब है कि  होर्मुज से गुजरने पर सभी जहाजों को टोल देना होगा. इस प्लान में समुद्री सुरक्षा, जहाजों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और होर्मुज से गुजरने के वित्तीय नियमों से जुड़ी बातें भी शामिल हैं।  अमेरिकी-इजरायली जहाजों पर बैन IRIB के मुताबिक, इस योजना के तहत अमेरिकी और इजरायली जहाजों के गुजरने पर प्रतिबंध लगाया गया है और उन देशों पर भी प्रतिबंध बढ़ाया गया है, जो ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगाते हैं. साथ ही ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता को फिर से मजबूत किया है और ओमान के साथ मिलकर इसके प्रबंधन के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने पर जोर दिया है।  ईरान के इस कदम से खलबली ईरान का यह कदम दुनिया में खलबली मचाने वाला है. यह कदम पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिकी-इजरायली गठबंधन के बीच चल रहे संघर्ष के बीच उठाया गया है, जो अब दूसरे महीने में है. इससे तेहरान की ओर से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक यानी होर्मुज पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश का संकेत मिलता है. अब तक जो हालात हैं, उससे साफ है कि होर्मुज पर ईरान का एकक्षत्र राज है।  अमेरिका रहा है होर्मुज पर फेल इसी बीच अमेरिका अब तक होर्मुज खोलने में विफल रहा है. वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण फिर से स्थापित करना चाहता है ताकि जहाजों की आवाजाही स्वतंत्र रूप से हो सके. उन्होंने फॉक्स न्यूज से कहा, ‘बाजार में पर्याप्त आपूर्ति है और हम देख रहे हैं कि रोजाना ज्यादा से ज्यादा जहाज गुजर रहे हैं, क्योंकि अलग-अलग देश फिलहाल ईरानी शासन के साथ समझौते कर रहे हैं. समय के साथ अमेरिका जलडमरूमध्य पर नियंत्रण फिर से हासिल करेगा और वहां जहाजों की आवाजाही स्वतंत्र होगी, चाहे वह अमेरिकी एस्कॉर्ट के जरिए हो या बहुराष्ट्रीय एस्कॉर्ट के जरिए।