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भारत ने खेला बड़ा दांव, होर्मुज जीता, अब रूस से मिलेगा LNG का खजाना

नईदिल्ली /मॉस्को  मिडिल ईस्ट में मची भीषण तबाही की आग अब भारत की रसोई से लेकर फैक्ट्रियों तक पहुंच चुकी है. रॉयटर्स की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने अपनी तेल और गैस कंपनियों को साफ कह दिया है कि वे रूस से एलएनजी (LNG) खरीदने के लिए अपनी कमर कस लें. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा ‘पॉलिसी चेंज’ माना जा रहा है. मिडिल ईस्ट के बिगड़ते हालात ने दुनिया भर के देशों को मजबूर कर दिया है कि वो तेल और गैस के लिए दूसरे विकल्प तलाशें. हालांकि, भारत को हॉर्मुज के रास्ते से ‘फ्री पास’ मिला हुआ है, लेकिन सरकार एनर्जी सप्लाई के मामले में अब कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं है।  Oil Prices को काबू में रखने का निकाला उपाय कतर के ‘रास लफ्फान’ गैस हब पर हमलों से उत्पादन सालों के लिए पिछड़ गया है. 19 मार्च को नई दिल्ली में रूसी ऊर्जा उप-मंत्री पावेल सोरोकिन और हरदीप सिंह पुरी के बीच हुई बैठक में एलएनजी सप्लाई फिर से शुरू करने पर सहमति बनी है।  अमेरिका से शुरू हुई क्या बात? भारत ने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू कर दी है ताकि रूसी गैस खरीदने पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का असर न पड़े. अमेरिका पहले ही भारत को रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों का वेवर दे चुका है ताकि ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें काबू में रहें।  अब भारत एलएनजी के लिए भी ऐसी ही छूट चाहता है. हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस बार रूस के साथ होने वाला सौदा 2012 के GAIL-Gazprom समझौते जितना सस्ता नहीं होगा, क्योंकि अब यह पूरी तरह ‘सेलर्स मार्केट’ है।  भारत-रूस क्रूड ऑयल ट्रेड S&P ग्लोबल और अन्य एजेंसियों ने दुनिया भर में गैस की कमी की चेतावनी दी है. होर्मुज संकट और कतर में तबाही के कारण इस साल ग्लोबल सप्लाई में 35 मिलियन टन की कमी आ सकती है. कतर और यूएई के नए गैस प्रोजेक्ट्स अब 3 से 5 साल की देरी से चल सकते हैं. भारत पहले ही फरवरी के बाद से रूस से 5-6 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीद चुका है और अब कुकिंग गैस यानी LPG के साथ-साथ एलएनजी के लिए भी रूस पर भरोसा बढ़ा रहा है। 

भारत बना ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का काल, दुश्मन आसमान में जलकर राख होंगे

नई दिल्ली भारत की रक्षा ताकत में अब एक और बड़ा और खतरनाक इजाफा हो गया है. रक्षा मंत्रालय ने नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में 858 करोड़ रुपए के दो बड़े एग्रीमेंट साइन किए हैं.  इनका सीधा मकसद भारत के आसमान और समंदर की सुरक्षा को पूरी तरह से अभेद्य बनाना है. इंडियन आर्मी को रूस का टुंगुस्का एयर डिफेंस सिस्टम मिलने वाला है।  यह सिस्टम दुश्मन के विमानों, ड्रोन्स और क्रूज मिसाइलों को पलक झपकते ही हवा में खाक कर देगा. इसके साथ ही इंडियन नेवी के P8I एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस के लिए भी एक बड़ी डील हुई है. बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ यह करार भारत में ही होगा. इससे देश के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया विजन को एक बहुत बड़ा बूस्ट मिलेगा. भारत अब हर तरह के खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।  ‘445 करोड़ में रूस से मिला एयर डिफेंस सिस्टम’ भारतीय सेना को अब टुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम मिलेगा. इसके लिए रूस की कंपनी के साथ 445 करोड़ रुपए का बड़ा एग्रीमेंट साइन हुआ है. यह आधुनिक मिसाइल सिस्टम भारत की एयर डिफेंस पावर को कई गुना बढ़ा देगा. दुश्मन का कोई भी विमान, ड्रोन या क्रूज मिसाइल अब भारत की सीमा में घुस नहीं पाएगा. इससे रूस और भारत का रक्षा सहयोग भी और ज्यादा मजबूत हुआ है।  ‘नेवी के P8I एयरक्राफ्ट के लिए बोइंग से हुई डील’ भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए भी बड़ा कदम उठाया गया है. नौसेना के P8I विमान की जांच और मेंटेनेंस के लिए एक अहम समझौता हुआ है. यह एग्रीमेंट 413 करोड़ रुपए में बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ साइन किया गया है. यह काम पूरी तरह से भारत में ही किया जाएगा।  ‘मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को मिला बूस्ट’ P8I विमानों का मेंटेनेंस देश के अंदर ही होने से बहुत बड़ा फायदा होगा. इससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भारी ताकत मिलेगी. देश में ही मेंटेनेंस की आधुनिक सुविधाएं काफी मजबूत होंगी. भारत अब रक्षा उपकरणों के रखरखाव के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहेगा. यह डिफेंस सेक्टर में स्वदेशीकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। 

1 अप्रैल से टोल की दरें बढ़ेंगी, 5-10% तक महंगा होगा सफर, जबलपुर से अन्य शहरों का सफर भी होगा महंगा

जबलपुर  वाहन चालकों के लिए 1 अप्रैल से सफर महंगा होने जा रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा टोल टैक्स में 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा रही है, जो हर साल की तरह इस बार भी लागू होंगी। इस बढ़ोतरी का सीधा असर जबलपुर से नागपुर, रायपुर, प्रयागराज और भोपाल जैसे प्रमुख शहरों की यात्रा पर पड़ेगा। वाहन चालकों को अब हर टोल प्लाजा पर ज्यादा राशि चुकानी होगी। 5 से 10 रुपए तक बढ़ेगा टोल जानकारी के अनुसार, जबलपुर के आसपास स्थित टोल प्लाजा पर कार चालकों को 5 से 10 रुपए तक अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। वहीं FASTag के जरिए मिलने वाले करीब 3 हजार रुपए के एनुअल पास में भी लगभग 75 रुपए तक की बढ़ोतरी की संभावना है। कैसे तय होता है टोल रेट टोल टैक्स की दरें होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) के आधार पर तय की जाती हैं। हर साल के अंत में इंडेक्स का मूल्यांकन कर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय नए रेट जारी करता है। टोल की राशि सड़क की लंबाई और उस पर बने इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे फ्लाईओवर, अंडरपास, टनल आदि के आधार पर भी तय होती है। जहां ज्यादा सुविधाएं होती हैं, वहां टोल भी अधिक लगता है। लोगों में नाराज वाहन चालकों का कहना है कि टोल बढ़ाना समझ में आता है, लेकिन सड़कों का मेंटेनेंस भी उतना ही जरूरी है। भोपाल रोड की हालत खराब बताई जा रही है, जबकि बरेला के आगे अभी भी काम जारी है। इसके बावजूद पूरा टोल वसूला जा रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी है। कारों के लिए अभी इतना लिया जा रहा है टोल बरगी टोल (नागपुर रोड)    165 रुपए सिहोरा टोल (प्रयागराज रोड)    130 रुपए शहपुरा टोल (भोपाल रोड)    90 रुपए बरेला टोल (रायपुर रोड)    35 रुपए जबलपुर से दमोह, सागर अभी हाईवे घोषित है, लेकिन बना नहीं है, जिसके चलते यह अभी स्टेट हाइवे की श्रेणी में आता है। इसी तरह से जबलपुर से पाटन, तेंदुखेड़ा जबलपुर से गोटेगांव में स्टेट हाईवे को टोल है। वाहन मालिकों का कहना है कि टोल टैक्स बढ़ाए जाना अच्छा है, पर सड़क का मेंटेनेंस भी जरूरी होता है। उनका कहना है कि सड़क को साल भर मेनटेन नहीं किया जाता है। भोपाल रोड अभी भी खराब है। इसके बाद भी टोल पूरा देना पड़ता है। इसी तरह बरेला के आगे काम चल रहा है। एक अप्रैल से सालाना पास के लिए 3075 रुपए देने होंगे NHAI ने कार के लिए बनाए जाने वाले सालाना पास की कीमतों में 75 रुपए की बढ़ोतरी की। ये बढ़ोतरी भी 1 अप्रैल से लागू होगी। अभी सालाना पास 3 हजार रुपए में बनता है, जिसमें 200 टोल बूथ क्रॉस करने की लिमिट होती है। 1 अप्रैल से बनने वाले सालाना पास के लिए अब 3075 रुपए देने पड़ेंगे। सालाना रिवीजन के तहत बढ़ी कीमतें सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, जब फास्टैग एनुअल पास की शुरुआत की गई थी, तभी इसके नोटिफिकेशन में हर साल कीमतों की समीक्षा और बदलाव का प्रावधान रखा गया था। यह बढ़ोतरी उसी सालाना रिवीजन प्रक्रिया का हिस्सा है। देश भर में हाईवे टोल की दरों में बदलाव के लिए जो फॉर्मूला तय है, उसी के आधार पर इस बार 2.5% की वृद्धि की गई है। 52 लाख से ज्यादा लोग इस्तेमाल कर रहे हैं यह पास सरकार ने 15 अगस्त से इस खास एनुअल पास की शुरुआत की थी, जिसे उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर रिस्पॉन्स मिला है। अब तक 52 लाख से ज्यादा हाईवे कार यूजर्स इस स्कीम से जुड़ चुके हैं। इस पास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे एक साल में कितनी भी बार रिचार्ज कराया जा सकता है और यह लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों के लिए काफी किफायती साबित होता है। 31 मार्च तक पुराने रेट पर खरीदने का मौका अगर आप अक्सर हाईवे पर सफर करते हैं और इस बढ़ोतरी से बचना चाहते हैं, तो आपके पास अभी मौका है। अधिकारियों ने बताया कि जो यूजर्स 31 मार्च तक अपना पास रिचार्ज करा लेंगे या नया पास खरीदेंगे, उन्हें यह पुराने रेट यानी 3,000 रुपए में ही मिल जाएगा। 1 अप्रैल की सुबह से सिस्टम में नई दरें अपडेट कर दी जाएंगी।

अब स्कूल में नहीं चलेगा मोबाइल, UP में नई पॉलिसी लागू

लखनऊ उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में 1 अप्रैल से शुरू हो रहा नया शैक्षणिक सत्र (2026-27) छात्र-छात्राओं के लिए एक नई सुबह लेकर आ रहा है। अब स्कूलों की प्रार्थना सभा केवल प्रार्थना तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह ज्ञान और सूचना का केंद्र बनेगी। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बढ़ते 'स्क्रीन टाइम' के दुष्परिणामों को देखते हुए छात्रों के लिए समाचार पढ़ना अनिवार्य कर दिया है, जबकि कैंपस में मोबाइल लाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। प्रार्थना सभा में 'न्यूज बुलेटिन' माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब छात्र प्रार्थना सभा में प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अखबारों की सुर्खियां पढ़ेंगे। इसका उद्देश्य छात्रों में पढ़ने की आदत (Reading Habit) विकसित करना है। इस पहल के तहत केवल खबर पढ़ना ही काफी नहीं होगा, बल्कि शिक्षकों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे समाचारों में आए कठिन शब्दों का सही उच्चारण सुनिश्चित कराएं। साथ ही, उन शब्दों का अर्थ और वाक्य प्रयोग भी समझाया जाएगा, जिससे छात्रों की भाषा दक्षता और सामान्य ज्ञान (GK) दोनों में सुधार होगा। मानसिक स्वास्थ्य की चिंता परिषद ने किशोरावस्था में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल की लत से बच्चों में आंखों की रोशनी कमजोर होना, एकाग्रता की कमी और ऑनलाइन गेम्स के प्रति बढ़ते रुझान जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं। इन्हीं को देखते हुए स्कूलों में छात्रों के मोबाइल लाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। परिषद का मानना है कि इससे बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर सकारात्मक असर पड़ेगा। तकनीक का सही संतुलन दिलचस्प बात यह है कि एक ओर जहां मोबाइल पर पाबंदी है, वहीं दूसरी ओर परिषद छात्रों को 'डिजिटल साक्षर' बनाने की ओर भी कदम बढ़ा रहा है। नई व्यवस्था के तहत:     सभी पंजीकृत विद्यार्थियों की व्यक्तिगत ईमेल आईडी बनाई जाएगी।     शिक्षण के लिए स्मार्ट क्लास और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ाया जाएगा।     छात्रों को 'खान एकेडमी', 'द टीचर एप', 'मनोदर्पण' और 'करियर एडवाइजर' जैसे पोर्टल्स के व्यावहारिक उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा का मेल शिक्षा विभाग की यह पहल पारंपरिक पुस्तकों-अखबारों के प्रति जुड़ाव और आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बीच एक बेहतर संतुलन बनाने की कोशिश है। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के पहले जारी आदेशों को अब जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने जशपुर में मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम का किया शुभारंभ : खिलाड़ी बास्केटबॉल शतरंज कैरम और टेबल टेनिस खेल का करेंगे अभ्यास

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज जशपुर में 3 करोड़ 52 लाख रुपए की लागत से निर्मित मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेल अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने के बेहतर अवसर प्रदान करता है और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री  साय ने स्टेडियम का अवलोकन किया और वहां उपस्थित खिलाड़ियों के साथ खेल का आनंद भी लिया।उन्होंने खिलाड़ियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया और कहा कि सरकार प्रदेश में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी उचित मंच मिल सके। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, टीमवर्क और आत्मविश्वास विकसित करने का सशक्त साधन है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर दिया जाए। मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम में खिलाड़ियों को बास्केटबॉल के साथ-साथ शतरंज, कैरम और टेबल टेनिस जैसे खेलों का अभ्यास करने की आधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी। यह स्टेडियम न केवल खेल गतिविधियों को बढ़ावा देगा, बल्कि जशपुर क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी बनेगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष  रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष  सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष  अरविन्द भगत,  कृष्णा राय, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत अध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष  गंगाराम भगत,  विजय आदित्य सिंह जुदेव, सरगुजा कमिश्नर  नरेन्द्र दुग्गा, आईजी  दीपक कुमार झा, कलेक्टर  रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  लाल उमेद सिंह, डीएफओ  शशि कुमार, जिला पंचायत सीईओ  अभिषेक कुमार, खिलाड़ी और कोच उपस्थित थे।

भाजपा की चार्जशीट से गरमाया बंगाल: ममता सरकार पर गंभीर आरोप

कोलकाता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार के खिलाफ चार्जशीट जारी की है। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह चार्जशीट टीएमसी सरकार के 15 सालों के काले कारनामों का संकलन है। भाजपा ने 40 पन्नों की चार्जशीट 'टीएमसी के 15 साल, पश्चिम बंगाल लहूलुहान' में तृणमूल कांग्रेस सरकार के 15 साल की खामियों को गिनाया है। इसमें घुसपैठ, व्यापक भ्रष्टाचार और संस्थागत पतन, वित्तीय कुप्रबंधन, प्रशासनिक विफलता, कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा, कृषि संकट, स्वास्थ्य सेवा का पतन और घोटालों का जिक्र है। चार्जशीट में आरोप लगाए गए हैं कि टीएमसी समर्थित सिंडिकेट घुसपैठियों को 'वोट बैंक' बनाने में मदद करने के लिए नकली आईडी कार्ड उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकी खतरे में पड़ रही है। पश्चिम बंगाल की 2,216.7 किलोमीटर लंबी सीमा में से 569 किलोमीटर सीमा पर अभी भी बाड़ नहीं लगी है, जिसका कारण टीएमसी सरकार की ओर से घुसपैठ को बढ़ावा देने के लिए जमीन अधिग्रहण में की गई देरी है। 'बंगाल में सिंडिकेट राज' का आरोप लगाते हुए भाजपा ने कहा है कि कोयला, पीडीएस, एसएससी और मनरेगाजैसे क्षेत्रों में संस्थागत भ्रष्टाचार व 'कट-मनी' (कमीशन) की संस्कृति सभी नागरिक सेवाओं में फैल चुकी है। भाजपा ने चार्जशीट में दावा किया कि बंगाल में 2016 से अब तक 300 राजनीतिक हत्याएं और 13,000 से ज्यादा हत्या के प्रयास हुए। मुर्शिदाबाद, मोमिनपुर और महेशतला में बार-बार सांप्रदायिक अशांति फैली। महिलाओं के खिलाफ अपराधों का जिक्र करते हुए भाजपा ने आरोप लगाया कि पार्क स्ट्रीट से लेकर संदेशखाली तक न्याय दिलाने में सरकार विफल रही है। बंगाल में अकेले 2023 में महिलाओं के खिलाफ 34,738 अपराध दर्ज किए गए। भाजपा ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल से 6,688 कंपनियों का पलायन और 18,450 एमएसएमई बंद हुए हैं। इसी कारण बड़े पैमाने पर पूंजी का पलायन हुआ है। वहीं, बेरोजगारी दर के कारण 40 लाख से ज्यादा युवाओं को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, "यह चार्जशीट बंगाल की जनता की ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ लगाई हुई है, जिसे भाजपा एक आवाज दे रही है। एक प्रकार से आने वाले चुनाव में बंगाल की जनता को तय करना है कि भय को चुनना है या भरोसे को चुनना है।" उन्होंने कहा कि यह चार्जशीट, सोनार बांग्ला का स्वप्न दिखाकर सिंडिकेट राज स्थापित कर बंगाल की जनता का शोषण करने वाले शासन की कहानी है। टीएमसी के कुशासन में बंगाल भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बन चुका है। ऊपर से नीचे तक आपराधिक सिंडिकेट जनता को परेशान कर रहे हैं। विकास के अभाव में बंगाल उद्योग के लिए एक प्रकार से कब्रिस्तान बन चुका है। अमित शाह ने कहा कि इस बार बंगाल की जनता ने तय किया है कि प्रचंड बहुमत के साथ प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाई जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 6 मई को पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी और 45 दिन में सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जो भूमि उपलब्ध करानी है, वह भारत सरकार को बंगाल की भाजपा सरकार उपलब्ध करा देगी और हम घुसपैठ को रोकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ढेर सारी भर्तियों में जो घोटाले हुए, उनमें कई युवाओं की उम्र सीमा समाप्त हो चुकी है। हम इसमें 5 साल का रिलैक्सेशन देंगे, और जिन युवाओं की भर्ती के लिए उम्र सीमा समाप्त हो चुकी है, उन्हें एसएससी भर्तियों में मौका भी देंगे, साथ ही पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगे।

मेहनतकश श्रमिकों का सशक्तिकरण ही विकसित छत्तीसगढ़ की नींव है — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज जशपुर में आयोजित जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन में 79,340 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिजनों को 27.15 करोड़ रुपए की राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन ने की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बावजूद छत्तीसगढ़ में पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ईंधन आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है, लेकिन केंद्र सरकार की प्रभावी विदेश नीति और विभिन्न देशों के साथ मजबूत संबंधों के कारण आपूर्ति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें और अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिससे लोगों में अनावश्यक भय और भ्रम का वातावरण बन रहा है।उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और पेट्रोल, डीज़ल या गैस का अनावश्यक भंडारण न करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे पहले ईंधन की उपलब्धता बनी रही है, वैसे ही आगे भी निर्बाध रूप से मिलती रहेगी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने श्रमिकों के कल्याण के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संचालित 12 विभिन्न योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिकों को बच्चे के जन्म पर 20,000 रुपए की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा मकान निर्माण के लिए 1.5 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। श्रमिकों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ई-रिक्शा खरीदने में भी सहायता दी जा रही है, जिसे पहले 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपए कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। यदि किसी श्रमिक का बच्चा 10वीं या 12वीं बोर्ड परीक्षा में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करता है, तो उसे 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके साथ ही मेधावी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पहले 100 बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 200 सीट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए “दीनदयाल भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना” संचालित की जा रही है, जिसके तहत ऐसे मजदूरों को सालाना 10,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाती है। उन्होंने जानकारी दी कि हाल ही में लाखों भूमिहीन मजदूरों के खातों में लगभग 495 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई है। मुख्यमंत्री  साय ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि जनधन खातों के माध्यम से अब योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि पहले भेजी गई राशि का बड़ा हिस्सा बीच में ही खत्म हो जाता था, लेकिन अब पूरी राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों मजबूत हुए हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रोविडेंट फंड (PF) प्रणाली को यूनिवर्सल बनाया गया है, जिससे श्रमिक देश के किसी भी हिस्से में काम करने पर अपना पीएफ लाभ जारी रख सकते हैं। इसके अलावा न्यूनतम पेंशन राशि को बढ़ाकर 1000 रुपए किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ईएसआईसी अस्पतालों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों को बेहतर और निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री  साय ने अपने संबोधन के अंत में श्रमिकों को प्रदेश के विकास की रीढ़ बताते हुए कहा कि उनके परिश्रम और योगदान से ही राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सभी श्रमिकों का सम्मान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रदेशभर में आयोजित हो रहे श्रमिक सम्मेलन—श्रम मंत्री श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश में श्रमिक सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि श्रमिकों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचे और उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों को प्रसूति सहायता के रूप में 20,000 रुपए, मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता, छात्रवृत्ति सहित कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही 10वीं और 12वीं में टॉप-10 में आने वाले श्रमिकों के बच्चों को 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले सवा दो वर्षों में 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे ट्रांसफर की गई है। इसके अलावा “अटल शिक्षा योजना” के तहत श्रमिकों के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि श्रमिकों को योजनाओं का पूरा लाभ मिले और उनके जीवन स्तर में सुधार हो। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने भी राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए श्रमिकों से इनका अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की। इस अवसर पर श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष  शंभूनाथ चक्रवर्ती, नगर पालिका जशपुर के अध्यक्ष  अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यशप्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष जशपुर  गंगाराम भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि, श्रमिक बंधु एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

कृषि एवं विज्ञान में नवाचार विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का किया शुभारंभ

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कृषि महाविद्यालय रीवा में विकसित भारत 2047 के लिए विज्ञान और कृषि में नवाचार विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुभारंभ किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती हमारी अर्थव्यवस्था का आधार है। हम वर्तमान में विपुल अन्न और फल सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। उत्पादन बढ़ाने के लिए हमने खाद और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग किया है, जिसके कारण धरती माता बीमार हो गई हैं। धरती माता को स्वस्थ रखना और भावी पीढ़ी को स्वस्थ जीवन देने के लिए प्राकृतिक खेती इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है । गोपालन पर आधारित प्राकृतिक खेती से ही हमें अच्छे स्वास्थ्य की नेमत मिलेगी। हर किसान अपनी कुल जमीन के दस प्रतिशत भाग पर प्राकृतिक विधि से अनाज फल और सब्जी का उत्पादन करें जिससे कम से कम उसके परिवार को रसायन रहित पौष्टिक आहार मिल सके। सेमिनार का आयोजन कृषि महाविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर, एकेएस यूनिवर्सिटी तथा श्याम दुलारे तिवारी शिक्षा एवं शोध संस्थान द्वारा किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही देश के गृहमंत्री  अमित शाह जी ने बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में प्राकृतिक खेती के प्रकल्प का शुभारंभ किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती के लिए किया जा रहे प्रयासों की सराहना की। कृषि वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अन्न उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ऐसी किस्म का विकास करें जिससे माटी की उर्वरा शक्ति बनी रहे, धरती बीमार न हो और पौष्टिक अनाज से हम सब भी स्वस्थ रहें। समारोह में सांसद  जनार्दन मिश्र ने कहा कि वर्ष 2047 की अनुमानित जनसंख्या को ध्यान में रखकर प्राकृतिक खेती तथा अनाज उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित करना होगा। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के स्थान पर जैविक विधि से बनाई गई खाद तथा कीटनाशकों का उपयोग करना होगा, जिससे धरती का स्वास्थ्य और मानव के लिए हितकारी जीवाणु, कीट और पक्षी रह सकें। सेमिनार में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर पी.के. मिश्रा ने कहा कि कोरोना काल ने हमें प्रकृति की ओर लौटने और प्राकृतिक खेती को अपनाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। हमारा अस्तित्व तभी तक है जब तक हम प्रकृति के अनुसार आचरण करेंगे। निर्माण कार्यों, बड़े बांध, खनन परियोजनाओं से वनों का विनाश होने के साथ-साथ खेती की जमीन घट रही है। साथ ही पूरी दुनिया में जल संकट की आहट है। युवा, कृषि वैज्ञानिक और शोधकर्ताओं के कंधों पर इन संकटों को दूर करने की जिम्मेदारी है। हमारे पूर्वजों ने बहुत सोच समझकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खेती के साथ गोपालन को जोड़ा और धरती तथा गौ को माता के समान आदर दिया। हमें पुन: उसी तरफ चलने की आवश्यकता है। सेमिनार में उप मुख्यमंत्री ने कृषि महाविद्यालय की पत्रिका हरियाली, प्राकृतिक खेती की पुस्तिका तथा गौ आधारित प्राकृतिक खेती एवं 17 शोध पत्रों के संकलन का विमोचन किया। सेमिनार में एकेएस विश्वविद्यालय के चांसलर  अनंत सोनी ने ऊर्जा संरक्षण तथा खेती में नवाचार के संबंध में विचार व्यक्त किए। कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ. एसके त्रिपाठी ने प्राकृतिक खेती के लिए महाविद्यालय में किए जा रहे शोध की जानकारी दी। सेमिनार में प्रोफेसर डॉ. आरके तिवारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सेमिनार में  एके जैन, डॉ. एसके पाण्डेय, प्रोफेसर एके शर्मा तथा वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता शामिल हुए। सेमिनार में आठ राज्यों के कृषि वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं।  

2 अप्रैल की सुनवाई से पहले हाईकोर्ट जजों ने भोजशाला की जमीनी हकीकत परखी

धार शहर की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़े प्रकरण में मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शनिवार को दोपहर में आकस्मिक रूप से स्थल का निरीक्षण किया। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच धार पहुंचे और लगभग एक घंटे तक भोजशाला परिसर का बारीकी से अवलोकन किया बाहरी और आंतरिक परिसर का लिया जायजा इस दौरान न्यायमूर्तिगण ने भोजशाला के बाहरी एवं आंतरिक दोनों परिसरों की स्थिति और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सर्वे की सारी प्रक्रिया के बारे में सूक्ष्मता से जानकारी ली। इस दौरान कलेक्टर, एसपी सहित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। आयोजनों और सर्वे की ली जानकारी मिली जानकारी के अनुसार न्यायमूर्तिगण ने परिसर में होने वाले मंगलवार और शुक्रवार के आयोजनों की जानकारी भी ली, कहां और किस प्रकार आयोजन होते हैं, इसकी विस्तृत जानकारी अधिकारियों से प्राप्त की। इंदौर खंडपीठ न्यायमूर्तिगण ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा किए गए सर्वे के संबंध में भी अधिकारियों से स्थानीय जानकारी ली। एएसआइ के अधिकारी ने मौके पर उपस्थित रहकर पूरी स्थिति से अवगत कराया। 16 मार्च को कहा था विवादित स्थल खुद देखेंगे बता दें कि ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की याचिका पर इंदौर हाई कोर्ट में विचाराधीन है। इसमें भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को स्पष्ट किया जाना है। प्रकरण में गत 16 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान इंदौर खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के दौरान विवादित स्थल का स्वयं निरीक्षण करने की बात कही थी। इसी क्रम में करीब 12 दिन बाद न्यायाधीशों ने भोजशाला का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। शनिवार दोपहर लगभग 1:52 बजे न्यायाधीशों का वाहनों का काफिला भोजशाला परिसर पहुंचा और करीब 2:50 बजे तक निरीक्षण जारी रहा। इसके बाद वाहनों का काफिला वापस रवाना हो गया। इस मौके पर कलेक्टर प्रियंक मिश्रा व एसपी मयंक अवस्थी मौजूद रहे। आगे होगी नियमित सुनवाई गौरतलब है कि आगामी 2 अप्रैल से इस मामले में नियमित सुनवाई प्रस्तावित है। ऐसे में न्यायमूर्तिगण का यह स्थल निरीक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मौके का प्रत्यक्ष अवलोकन उन्हें वास्तविक स्थिति समझने में सहायक होगा और आगे की सुनवाई में यह एक मजबूत आधार बन सकता है। पहले क्या हुआ था धार स्थित भोजशाला में 22 मार्च 2024 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर सर्वे कार्य शुरू किया गया। यह सर्वे लगातार 98 दिनों तक चला। जुलाई 2024 में सर्वे रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत कर दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के कारण आगे की कार्रवाई लंबित रही। वर्ष 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उक्त रोक हटाए जाने के बाद अब मामले में आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।

CM का मेगा ऐलान: अब हर घर पहुंचेगा नर्मदा का पानी 24×7, ₹1356 करोड़ की योजना लॉन्च

इंदौर  शहर में बढ़ती पानी की जरूरत पूरी करने की कवायद शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को 1356 करोड़ की नर्मदा चतुर्थ परियोजना का दशहरा मैदान में भूमिपूजन करेंगे। पेयजल व्यवस्था के लिए टनल निर्माण, क्लोरीनेशन सिस्टम भी बनेगा। सीएम सिरपुर में 20 एमएलडी के एसटीपी प्लांट का भी लोकार्पण करेंगे। वर्ष 2029 से इंदौर को चौथे चरण का पानी देने की योजना है। परियोजना के संबंध में भाजपा कार्यालय में नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, एमआइसी सदस्य अभिषेक शर्मा आदि ने मीडिया को जानकारी दी। 24 घंटे पानी की सप्लाई और 29 गांवों में बिछेगी पाइपलाइन इंदौर महापौर भार्गव ने बताया कि नर्मदा के चौथे चरण की योजना पूरी होने से शहर में करीब 900 एमएलडी पानी की सप्लाई होगी। अमृत 2.0 योजना के तहत इस परियोजना से शहर में 24 घंटे जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। 29 गांवों के 10 वार्ड में पाइप लाइन बिछाई जाएगी। दो लाख से ज्यादा नए नल कनेक्शन से पानी सह्रश्वलाई होगा। 40 नई टंकियों का निर्माण कर जल वितरण होगा। चौथे चरण में यशवंत सागर की क्षमता 30 से बढ़ाकर 45 एमएलडी कर रहे हैं। पैकेज 2     पैकेज-2 के तहत वांचू पाइंट से राऊ सर्कल तक 2235 एमएम की 39 किमी लंबी ग्रेविटीमेन पाइपलाइन बिछाकर तीन जगह 2870 मीटर लंबाई में टनल निर्माण किया जाएगा। राऊ सर्कल पर क्लोरिनेशन सिस्टम बनेगा। 448.23 करोड़ रुपए में लगभग 30 महीने में काम पूरा करने का लक्ष्य है। पैकेज 3     पैकेज-3 और 4 के तहत 40 नए ओवरहेड टैंक बनेंगे, 76 टैंकों का नवीनीकरण किया जाएगा। पैकेज-3 में 15 से 35 लाख लीटर क्षमता के 20 नए ओवरहेड टैंक का निर्माण कर 29 मौजूदा टैंकों का सुदृढ़ीकरण होगा। इन टैंकों को जोड़ने के लिए 400 से 600 एमएम की 27.4 किमी लंबी फीडर पाइपलाइन तथा 1200 मिमी व्यास की 4.7 किमी ग्रेविटी मेन व 685 किमी डिस्ट्रीब्यूशन लाइन बिछाई जाएगी।     1 लाख 26 हजार पानी के कनेक्शन घरों में देकर 1 लाख 8 हजार से अधिक वाटर मीटर लगाए जाएंगे। इससे 24 घंटे प्रेशर के साथ पानी सह्रश्वलाई होगी। यह काम 36 महीने में 410.50 करोड़ में किया जाएगा। स्मार्ट मॉनिटरिंग से लीकेज व पानी की बर्बादी पर नियंत्रण किया जाएगा।     यहां बनेंगी 40 नई टंकियां, पैकेज-3 के तहत पुराने रजिस्ट्रार ऑफिस का गार्डन, खालसा चौक, आइडीए गार्डन, लवकुश विहार, निरंजनपुर मंडी, कबीटखेड़ी, रेवेन्यू नगर, ट्रेजर टाउन, कावेरी परिसर, कैलोद करताल, लिंबोदी टैंक, पालदा इंडस्ट्रीज एरिया, आरटीओ पत्थर मुंडला, ओमेक्स हिल, देवगुराडिय़ा, कु्हेड़ी, पंचवटी कॉलोनी, अरंडिया, मायाखेड़ी, शक्करखेड़ी, रेवती। पैकेज 4     पैकेज-4 में 20 नए ओवरहेड टैंक का निर्माण तथा 892 किमी लंबी वितरण पाइपलाइन बिछाई जाएगी।     साईं गंगौत्री, लक्ष्मीबाई मंडी, एकेवीएन कैंपस, मैकेनिक नगर, पीयू 4 गार्डन, विजय नगर, सयाजी होटल के पीछे, हाट बाजार के सामने कंचनबाग, महल कचहरी, शिवाजी नगर, कलेक्टोरेट पार्क आदि।