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जनता दर्शन में अनोखा संवाद: सीएम ने बच्चे से की पढ़ाई पर बात, दी सलाह- मोबाइल नहीं, किताबों पर दो ध्यान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में लोगों की समस्याओं को सुना और जल्द से जल्द निराकरण के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने एक बच्चे को चॉकलेट दी और उसकी पढ़ाई के बारे में पूछताछ की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। इस दौरान प्रदेश भर से आए पीड़ितों मुख्यमंत्री ने मुलाकात की और उनका प्रार्थना पत्र लिया और आश्वस्त किया कि सरकार सभी की उचित समस्याओं के निस्तारण के लिए प्रतिबद्ध है। निश्चिंत होकर घर जाइए, आपकी समस्याओं का निस्तारण होगा। मुख्यमंत्री ने जनपदों के प्रशासनिक व पुलिस अफसरों को निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण समय सीमा के अंदर सुनिश्चित किया जाए।   ‘जनता दर्शन’ में अभिभावकों के साथ कुछ बच्चे भी आए थे। मुख्यमंत्री ने बच्चों को चॉकलेट दी और उनसे पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। एक बच्चे के पास पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि किताबें पढ़ो। सोशल मीडिया का प्रयोग उतना ही करो, जितनी आवश्यकता है। इसका अत्यधिक प्रयोग घातक है। सीएम ने मोबाइल आदि का प्रयोग भी कम करने की सलाह दी। निवेश और उद्योग विकास में देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं ‘जनता दर्शन’ में मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान दो उद्यमियों ने अपनी समस्याएं रखीं। मुख्यमंत्री ने प्रार्थना पत्र को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों, विशेषकर उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) व जिला प्रशासन को समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में निवेश का बेहतरीन इकोसिस्टम तैयार किया गया है। सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम सहित कई पारदर्शी व्यवस्थाएं लागू की हैं। उद्यमियों की परेशानी को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निवेश और उद्योग विकास में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।   अवैध कब्जे के मामले पर सीएम हुए सख्त कासगंज से आए पीड़ित ने सीएम के समक्ष पुलिस से जुड़ी शिकायत रखी। पीड़ित ने अपने प्रकरण में कार्रवाई पर देरी की शिकायत की। इस पर सीएम योगी ने पुलिस अधीक्षक को मामले का संज्ञान लेते हुए समस्या के समयबद्ध निराकरण का निर्देश दिया। वहीं एक प्रकरण पारिवारिक विवाद से भी जुड़ा आया। अवैध कब्जे से जुड़ी शिकायत पर सीएम सख्त हुए, उन्होंने कहा कि ऐसे मामले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने पीड़ित को आश्वस्त किया कि नियमानुसार तत्काल कार्रवाई होगी।

MP में स्टापेंड संशोधन लागू न होने पर मेडिकल कॉलेजों में 8 हजार डॉक्टर्स हड़ताल पर

भोपाल. मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत जूनियर डॉक्टरों ने लंबित स्टाइपेंड संशोधन को लेकर सोमवार सुबह 9 बजे से हड़ताल शुरू कर दी है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) के नेतृत्व में रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे ओपीडी में सेवाएं नहीं देंगे। हालांकि आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी और ऑपरेशन थिएटर में केवल गंभीर मरीजों का ही इलाज किया जाएगा। हड़ताल का असर प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है, क्योंकि रेजिडेंट डॉक्टर अस्पतालों के अधिकांश काम का भार संभालते हैं। ओपीडी सेवाएं बंद डॉक्टरों की हड़ताल के कारण सरकारी मेडिकल कॉलेजों की ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए मेडिकल कॉलेजों की ओपीडी में पहुंचते हैं। ऐसे में ओपीडी सेवाएं बंद रहने से मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। सिर्फ गंभीर मरीजों का ऑपरेशन जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन थिएटर में भी केवल अति गंभीर मरीजों का ही ऑपरेशन किया जाएगा। सामान्य और इलेक्टिव सर्जरी जैसे हर्निया, रॉड इंप्लांट और अन्य तय ऑपरेशन फिलहाल टल सकते हैं। इसका सीधा असर इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों पर पड़ेगा। अप्रैल 2025 से लागू होना था संशोधित स्टाइपेंड JDA के अनुसार शासन के आदेश के मुताबिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित स्टाइपेंड संशोधन एक अप्रैल 2025 से लागू होना था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। साथ ही अप्रैल 2025 से देय एरियर का भुगतान भी नहीं हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि इस संबंध में कई बार शासन और संबंधित विभागों को अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। प्रदेशभर के 8 हजार डॉक्टर आंदोलन में शामिल JDA के नेतृत्व में प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के करीब आठ हजार रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न इस आंदोलन में शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में इलाज और मरीजों की मॉनिटरिंग का लगभग 70 प्रतिशत काम यही डॉक्टर संभालते हैं, इसलिए उनके आंदोलन का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। तीन दिन से काली पट्टी बांधकर कर रहे थे विरोध डॉक्टरों ने शुक्रवार से ही शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था और पिछले तीन दिनों से काली पट्टी बांधकर काम कर रहे थे। इसके बावजूद मांगों पर निर्णय नहीं होने के कारण अब उन्होंने हड़ताल का रास्ता अपनाया है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि सरकार जल्द निर्णय लेती है तो आंदोलन समाप्त कर दिया जाएगा, अन्यथा विरोध को और तेज किया जाएगा।

सीएम योगी ने दी बच्चों को सीख- किताबें पढ़ो, सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रयोग न करो

लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। इस दौरान प्रदेश भर से आए पीड़ितों के पास मुख्यमंत्री स्वयं चलकर पहुंचे। उनका प्रार्थना पत्र लिया और आश्वस्त किया कि सरकार सभी की उचित समस्याओं के निस्तारण के लिए प्रतिबद्ध है। निश्चिंत होकर घर जाइए, आपकी समस्याओं का निस्तारण होगा। मुख्यमंत्री ने जनपदों के प्रशासनिक व पुलिस अफसरों को निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण समय सीमा के अंदर सुनिश्चित किया जाए। निवेश और उद्योग विकास में देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं ‘जनता दर्शन’ में मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान दो उद्यमियों ने अपनी समस्याएं रखीं। मुख्यमंत्री ने प्रार्थना पत्र को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों, विशेषकर उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) व जिला प्रशासन को समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में निवेश का बेहतरीन इकोसिस्टम तैयार किया गया है। सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम सहित कई पारदर्शी व्यवस्थाएं लागू की हैं। उद्यमियों की परेशानी को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निवेश और उद्योग विकास में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अवैध कब्जे के मामले पर सीएम हुए सख्त कासगंज से आए पीड़ित ने सीएम के समक्ष पुलिस से जुड़ी शिकायत रखी। पीड़ित ने अपने प्रकरण में कार्रवाई पर देरी की शिकायत की। इस पर सीएम योगी ने पुलिस अधीक्षक को मामले का संज्ञान लेते हुए समस्या के समयबद्ध निराकरण का निर्देश दिया। वहीं एक प्रकरण पारिवारिक विवाद से भी जुड़ा आया। अवैध कब्जे से जुड़ी शिकायत पर सीएम सख्त हुए, उन्होंने कहा कि ऐसे मामले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने पीड़ित को आश्वस्त किया कि नियमानुसार तत्काल कार्रवाई होगी। किताबें पढ़ो, सोशल मीडिया का न्यूनतम प्रयोग करो ‘जनता दर्शन’ में अभिभावकों के साथ कुछ बच्चे भी आए थे। मुख्यमंत्री ने बच्चों को चॉकलेट दी और उनसे पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। एक बच्चे के पास पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि किताबें पढ़ो। सोशल मीडिया का प्रयोग उतना ही करो, जितनी आवश्यकता है। इसका अत्यधिक प्रयोग घातक है। सीएम ने मोबाइल आदि का प्रयोग भी कम करने की सलाह दी।

होली ब्रेक खत्म, आज से विधानसभा सत्र; अफीम की खेती बनेगा बड़ा मुद्दा

रायपुर होली के अवकाश के बाद आज से छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्रवाई एक बार फिर शुरू होगी. दुर्ग में भाजपा नेता के खेत में अफीम की खेती पर आज सदन गरमाएगा. विपक्ष मुद्दे पर चर्चा के लिए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी ला सकता है. तय कार्यक्रम के अनुसार, आज सदन में मंत्री दयालदास बघेल और मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विभागों को लेकर चर्चा होगी. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्री केदार कश्यप, मंत्री दयालदास बघेल और मंत्री रामविचार नेताम सदन के पटल पर विभिन्न पत्र रखेंगे. सदन में आज दो ध्यानाकर्षण भी लगाए गए हैं, जिन्हें विधायक भावना बोहरा और ब्यास कश्यप द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा. इसके अलावा सभापति गोमती साय द्वारा प्रतिवेदनों की प्रस्तुति भी की जाएगी. आज से विधानसभा में अनुदान मांगों पर चर्चा की शुरुआत होगी, जिसमें डिप्टी सीएम अरुण साव और विजय शर्मा शामिल होंगे.

सेंसेक्स 2400 और निफ्टी 700 अंक लुढ़का

नई दिल्ली. अमेरिका-ईरान युद्ध ने भारतीय शेयर बाजार को गहरी चोट दी है. पिछले छह सत्रों में से पांच में बाजार में गिरावट देखने को मिली है. खास बात यह है कि पिछले चार दिनों में ही निवेशकों को 13.46 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने दलाल स्ट्रीट का मूड बुरी तरह बिगाड़ दिया और निवेशकों ने ताबड़तोड़ बिकवाली की. आखिरी कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को भारतीय बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 ताश के पत्तों की तरह ढह गए. कारोबार के आखिरी घंटों में बिकवाली का ऐसा भूचाल आया कि सेंसेक्स 1,097 अंक लुढ़ककर 78,918.90 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी ने भी 315.45 अंक का गोता लगाई और 24,450.45 के स्तर पर सिमट गया. बीएएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप, जो 27 फरवरी को 463.25 लाख करोड़ रुपये था वह 6 मार्च तक घटकर 449.79 लाख करोड़ रुपये रह गया. बाजार विश्‍लेषक मान रहे हैं कि युद्ध लंबा चला तो यह नुकसान और भी गहरा हो सकता है. 52 हफ्ते के निचले स्तर पर कई नामी कंपनियां बाजार में बिकवाली का आलम यह था कि बीएसई 500 की कई दिग्गज कंपनियां अपने 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं. इनमें एसीसी लिमिटेड, अंबुजा सीमेंट्स, बर्जर पेंट्स इंडिया, इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड और सोनाटा सॉफ्टवेयर जैसी कंपनियां शामिल हैं. 4,374 शेयरों में से 2,304 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि 258 शेयर अपने साल के सबसे निचले स्तर को छू गए. बैंकिंग सेक्टर में ‘रक्तपात’ बाजार की इस गिरावट में सबसे बड़ी भूमिका बैंकिंग सेक्टर ने निभाई. सेंसेक्स के शेयरों में आईसीआईसीआई बैंक सबसे बड़ा लूजर रहा, जिसके शेयर 3.39% तक गिर गए. इसके अलावा एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और भारतीय स्टेट बैंक में भी 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. बीएसई बैंकेक्स और बीएसई ऑटो इंडेक्स में भारी बिकवाली रही. अल्ट्राटेक सीमेंट और लार्सन एंड टुब्रो जैसे भारी वजन वाले शेयरों ने भी बाजार को नीचे खींचने में कोई कसर नहीं छोड़ी. हालांकि, इस सुनामी के बीच भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), रिलायंस इंडस्ट्रीज और सन फार्मास्युटिकल जैसे शेयरों ने थोड़ी मजबूती दिखाई और हरे निशान में बंद हुए. संभलेगा या और गिरेगा बाजार शेयर बाजार विश्‍लेषकों का मानना है कि निफ्टी के लिए अब 24,600 और 24,700 के स्तर बड़ी रेजिस्टेंस बन गए हैं. यदि निफ्टी 24,300 के स्तर से नीचे फिसलता है तो यह तेजी से 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक गिर सकता है. युद्ध की अनिश्चितता के बीच निवेशकों को फिलहाल आक्रामक खरीदारी से बचना चाहिए.

राम मंदिर में नव वर्ष समारोह: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु श्रमिकों और कर्मचारियों को करेंगी सम्मानित

अयोध्या भगवान श्रीराम की नगरी में नव संवत्सर (नव वर्ष) पर ऐतिहासिक आयोजन होने वाला है. समारोह को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हई हैं. राम मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले इस विशेष समारोह की मुख्य अतिथि भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु होंगी. वे मंदिर में अनुष्ठान के बाद श्रमिक और कर्मचारियों को सम्मानित भी करेंगी. बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति राम मंदिर परिसर में लगभग चार घंटे तक रहेंगी. वे मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र और श्रीराम नाम मंदिर की स्थापना भी करेंगी. विशेष बात ये है कि मंदिर समिति ने पहली बार किसी बड़े कार्यक्रम के दौरान दर्शन सुचारु रखने की योजना बनाई है. जानकारी के मुताबिक 19 मार्च को सुबह 9 बजे से अनुष्ठानों की शुरुआत होगी. दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के 51 वैदिक आचार्य अनुष्ठानों को संपन्न कराएंगे. काशी के आचार्य पद्मभूषण पंडित गणेश्वर शास्त्री के नेतृत्व में समस्त अनुष्ठान होंगे. कार्यक्रम की व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं. सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही अतिथियों के स्वागत, बैठने की व्यवस्था, पार्किंग और आवागमन की सुचारु व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. ट्रस्ट के मुताबिक श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ मंदिर के दूसरे तल की धार्मिक गतिविधियों को नई आध्यात्मिक ऊर्जा मिलेगी. यह यंत्र श्रीराम की शक्ति, मर्यादा और राष्ट्र चेतना का प्रतीक माना जाता है. राष्ट्रपति की उपस्थिति से यह आयोजन राष्ट्रीय महत्व का स्वरूप ग्रहण करेगा. हिंदू नववर्ष के शुभारंभ अवसर पर 19 मार्च को प्रस्तावित नव संवत्सर समारोह की तैयारियों को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बैठक भी की थी. जिसमें आयोजन की रूपरेखा, अतिथियों की व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई थी.

दतिया में बच्ची की छोटे भाई-बहनों के साथ खेलते समय साइलेंट अटैक से मौत

दतिया. भांडेर अनुभाग के ग्राम तालगांव निवासी 15 वर्षीय दसवीं की छात्रा उर्वांगी दुबे उर्फ गुनगुन पुत्री विनय दुबे की हाल निवास आलमपुर जिला भिंड स्थित अपने घर पर साइलेंट अटैक की वजह से शनिवार को अचानक मौत हो गई। कम उम्र में अचानक हुई इस मौत ने परिजन को विचलित और हैरान कर दिया। भांडेर क्षेत्र में इतनी कम उम्र में साइलेंट अटैक से मौत का यह पहला और इकलौता मामला बताया जा रहा है। इस घटना के बारे में उर्वांगी के पिता विनय ने बताया कि वे भिंड जिले के आरुषि में बतौर शिक्षक पदस्थ होकर आलमपुर में किराए के मकान में अपने परिवार के साथ रहते हैं। शनिवार को सामान्य दिन की तरह सुबह करीब दस बजे अपने दो अन्य बच्चों सहित उर्वांगी को हंसता खेलते छोड़ गए थे। करीब पौने तीन बजे उन्हें घर से मोबाइल पर सूचना मिली कि उर्वांगी की तबियत अचानक से बिगड़ गई है। घर पहुंचकर डॉक्टर को बुलाया, लेकिन डॉक्टर के आने से पहले ही उसने दमतोड़ दिया। परीक्षण करने वाले डॉक्टर भी इसे साइलेंट अटैक का केस मान रहे हैं। शनिवार शाम को ही भांडेर के तालगांव में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उर्वांगी कक्षा 10 की छात्रा थीं और शुक्रवार को ही उसकी वार्षिक परीक्षा संपन्न हुई थी। वह तीन भाई बहिनों में सबसे बड़ी थी। क्या कोरोना वैक्सीन साइलेंट अटैक की वजह – इस मामले में सीएचसी भांडेर पर पदस्थ एवं पूर्व बीएमओ डा.आरएस परिहार ने बताया कि साइलेंट हार्ट अटैक को साइलेंट मायोकार्डियल इंफार्क्शन (एसएमआई) के नाम से जाना जाता है। यह तब होता है जब हृदय को रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है, लेकिन लक्षण इतने हल्के या असामान्य होते हैं कि अधिकांश व्यक्तियों को यह अहसास ही नहीं होता कि कोई जानलेवा घटना घट रही है। हाल के समय में साइलेंट अटैक के चलते कम उम्र एवं युवाओं में मौत के कई मामले सामने आ रहे हैं, जिसे लेकर कोरोना और उसकी वैक्सीन को लेकर भी कथित तौर पर आशंका जताई जाती है। इस घटना को लेकर भी परिजन ने आशंका जताई कि कोरोना काल में उर्वांगी को भी वैक्सीन लगी थी, कहीं उसका कोई प्रभाव तो नहीं पड़ा। इस मामले में विशेषज्ञ राय ली गई तो डा.आरएस परिहार ने बताया कि साइलेंट अटैक की वजह कोरोना या कोरोना वैक्सीन की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन खानपान और दैनिक दिनचर्या भी ऐसी मौतों की एक वजह हो सकती है।  

रसोई गैस सप्लाई नियम बदला: अब 21 दिन बाद ही कर सकेंगे अगली बुकिंग

नई दिल्ली   ईरान-इजराइल युद्ध और दुनियाभर में ईंधन की अनिश्चितता को देखते हुए घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति में बदलाव किया गया है। अब कोई भी घरेलू उपभोक्ता पिछली डिलीवरी के 21 दिन बाद ही अगला सिलेंडर बुक कर सकेगा। 15 नहीं अब 21 दिन के अंदर ही मिलेगा सिलेंडर पहले यह अंतराल 15 दिन का था, लेकिन अस्थिर वैश्विक हालात को ध्यान में रखते हुए इसे बढ़ाकर 21 दिन कर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि सभी घरेलू उपभोक्ताओं को समान रूप से गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने गैस एजेंसियों के सिस्टम (सॉफ्टवेयर) में बदलाव कर नई व्यवस्था लागू कर दी है। उपभोक्ताओं को गैस डिलीवरी में कोई परेशानी नहीं होगी महावीर गैस एजेंसी के संचालक देव नारायण महतो ने बताया कि अब 21 दिन के अंतराल के बाद ही दूसरा सिलेंडर बुक किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को गैस डिलीवरी में कोई परेशानी नहीं होगी। यह अस्थायी व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते।  

अग्निवीर भर्ती रैली: बरेली में 11 मार्च से आयोजन, 12 जिलों के उम्मीदवार शामिल होंगे

बरेली भारतीय सेना 11 मार्च से अग्निवीरों की भर्ती करेगी। इसके लिए 12 जिलों के अभ्यर्थी स्थानीय जाट रेजीमेंट सेंटर पहुंचेंगे। 23 मार्च तक चलने वाली इस भर्ती के अभ्यर्थियों को तिथिवार बुलाया गया है। वे तय तिथि से एक शाम पहले जाट रेजीमेंट सेंटर पहुंचेंगे। सैन्य अधिकारी एवं जिला प्रशासन इससे संबंधित तैयारियों में जुटा है। बरेली सेना भर्ती क्षेत्र के बरेली, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, सीतापुर, संभल, पीलीभीत, हरदोई, फर्रुखाबाद और बदायूं के अभ्यर्थी भर्ती में शामिल होंगे। 11 मार्च की सुबह छह बजे से दौड़ शुरू होगी। ये काम करना जरूरी बरेली के सेना भर्ती कार्यालय ने अभ्यर्थियों से अपील की कि अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड करके रखें। जिनके प्रवेश पत्र पंजीकृत ई-मेल आइडी पर नहीं मिले, वे अभ्यर्थी सेना भर्ती कार्यालय में सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे के बीच संपर्क कर सकते हैं। 11 मार्च को शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को 10 मार्च की शाम से ही जाट रेजीमेंट सेंटर परिसर में प्रवेश दिया जाएगा। वहां प्रशासन की ओर से भोजन-शयन की व्यवस्थाएं की गई हैं। अग्निवीर भर्ती रैली का कार्यक्रम     11 मार्च – टेक्निकल (सभी 12 जिले के अभ्यर्थियों के लिए)।     12 मार्च – ट्रेड्समैन (आठवीं व दसवीं) (सभी 12 जिले के अभ्यर्थियों के लिए तथा अग्निवीर (क्लर्क/एसकेटी) (सभी 12 जिले के अभ्यर्थियों के लिए)।     13 मार्च – जनरल ड्यूटी-बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती और लखीमपुर खीरी जिले के अभ्यर्थियों के लिए।     14 मार्च – जनरल ड्यूटी-शाहजहांपुर और सीतापुर जिले के अभ्यर्थियों के लिए।     15 मार्च – जनरल ड्यूटी- संभल और पीलीभीत जिले के अभ्यर्थियों के लिए।     16 मार्च – जनरल ड्यूटी- हरदोई जिले के अभ्यर्थियों के लिए।     17 मार्च – जनरल ड्यूटी- फर्रुखाबाद जिले के अभ्यर्थियों के लिए।     18 मार्च – जनरल ड्यूटी- बदायूं जिले के अभ्यर्थियों के लिए।     19 मार्च – जनरल ड्यूटी- बरेली जिले के अभ्यर्थियों के लिए  

न्यायपालिका को अदृश्य दुश्मनों से खतरा, इंटरपोल से सहयोग की अपील

रायपुर अदालतों को मिल रहे लगातार धमकी भरे ई-मेल ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। अदालत परिसरों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है, लेकिन जांच एजेंसियों के हाथ अब तक खाली होने से उनके साइबर सुरक्षा तंत्र और तकनीकी क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसे देखते हुए अब इन अदृश्य दुश्मनों का सुराग लगाने के लिए ही इंटरपोल से मदद ली जा रही है। राज्य साइबर सेल की ओर से इस संबंध में अब पहल की गई है। जिला अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ई-मेल देश के विभिन्न राज्यों की अदालतों के साथ ही बिलासपुर हाई कोर्ट, रायपुर, दुर्ग और कोरबा जैसी जिला अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ई-मेल भेजे गए थे। एक महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी स्थिति यह है कि जांच एजेंसियों के पास ठोस सुराग के नाम पर कुछ भी नहीं है। अत्याधुनिक डिजिटल हथियारों का उपयोग किया राज्य पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामले तो दर्ज किए हैं, लेकिन एनआइए से लेकर साइबर सेल तक की सक्रियता के बावजूद नतीजा सिफर (शून्य) है। जांच में यह बात सामने आई है कि ई-मेल भेजने वाले ने अपनी पहचान छिपाने के लिए वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) और टोर (ओपन-सोर्स साफ्टवेयर) ब्राउजर जैसे अत्याधुनिक डिजिटल हथियारों का उपयोग किया है। विदेशी सर्वर पर स्थित कंपनियों से डेटा प्राप्त करने में होने वाली महीनों की देरी और इंटरपोल की लंबी कागजी प्रक्रिया ने जांच की रफ्तार को पूरी तरह कुंद कर दिया है। संसाधनों का अभाव बनी चुनौती पुलिस मुख्यालय के अधिकारी यह स्वीकार करते हैं कि हमारे पास फिलहाल ऐसी कोई स्पेशल रिस्पांस टीम नहीं है, जो अंतरराष्ट्रीय सर्वर के पीछे छिपे अपराधियों को 24 घंटे के भीतर बेनकाब कर सके। अदालतों के बाहर सघन चेकिंग, बैग स्कैनिंग और अतिरिक्त सुरक्षा घेरे के कारण लोग और वकील परेशान हैं। सिर्फ शरारत मान लेना बड़ी चूक अब तक कोई अप्रिय घटना नहीं होने के कारण जांच एजेंसियां इसे सिर्फ डराने वाली शरारत के रूप में देख रही हैं। लेकिन विदेशी धरती से बैठकर देश की संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। मामले की तह तक जाना राज्य की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। विशेषज्ञों की कमी पर हाई कोर्ट जता चुका है नाराजगी बिलासपुर हाई कोर्ट ने पिछले दिनों साइबर एक्सपर्ट्स की नियुक्तियां न होने पर नाराजगी जताई थी। गृह विभाग की ओर से जवाब दिया गया कि भर्ती प्रक्रिया जारी है, लेकिन बम की इन धमकियों ने यह साफ कर दिया है कि डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में हम कितने पीछे हैं। जब तक राज्य में उच्चस्तरीय साइबर विशेषज्ञ और त्वरित डेटा रिकवरी तंत्र नहीं होगा, तब तक अदृश्य अपराधी इसी तरह हमारी व्यवस्था को चुनौती देते रहेंगे। भविष्य में ऐसी धमकियां और गंभीर रूप ले सकती हैं विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं केवल सुरक्षा एजेंसियों की तकनीकी क्षमता ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित करती हैं। यदि समय रहते अत्याधुनिक उपकरण, प्रशिक्षित विशेषज्ञ और त्वरित डेटा एक्सेस व्यवस्था विकसित नहीं की गई, तो भविष्य में ऐसी धमकियां और गंभीर रूप ले सकती हैं।