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गंगा आरती की तैयारी पूरी, 19 मार्च से श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का खास इंतजाम

वाराणसी श्री काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के बाद काशी देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बन गई है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और पर्यटक वाराणसी पहुंच रहे हैं, जिसके चलते दशाश्वमेध, अस्सी और नमो घाट पर होने वाली गंगा आरती में भारी भीड़ उमड़ रही है। इसी को देखते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 19 मार्च से ललिता घाट पर भव्य गंगा आरती शुरू करने का निर्णय लिया है। 45 मिनट तक होगी गंगा आरती हिंदू नववर्ष के प्रथम दिन इसका शुभारंभ किया जाएगा। मंदिर न्यास के अनुसार, ललिता घाट पर सात अर्चकों द्वारा प्रतिदिन शाम 6:45 बजे से लगभग 45 मिनट तक गंगा आरती की जाएगी। इस आरती के माध्यम से विश्वनाथ धाम आने वाले श्रद्धालु गंगा द्वार से ही गंगा आरती के दर्शन कर सकेंगे। इससे पहले सितंबर 2025 में नमो घाट पर भी सात अर्चकों द्वारा गंगा आरती की शुरुआत की गई थी। उसी तर्ज पर अब ललिता घाट पर भी भव्य आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं को मिलेगी बेहतर सुविधा   काशी विश्वनाथ मंदिर के कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि यह पहल बाबा विश्वनाथ के भक्तों को बेहतर सुविधा देने के उद्देश्य से की जा रही है। श्रद्धालु गंगा द्वार की सीढि़यों पर बैठकर आराम से गंगा आरती का दर्शन कर सकेंगे। बाबा विश्वनाथ के दरबार और सामने मां गंगा की आरती का द्दश्य भक्तों को दिव्य आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करेगा। उन्होंने बताया कि काशी में दशाश्वमेध, अस्सी, शीतला और नमो घाट पर होने वाली गंगा आरती में अक्सर भारी भीड़ और ट्रैफिक के कारण कई श्रद्धालु समय पर आरती स्थल तक नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में 19 मार्च से ललिता घाट पर शुरू होने वाली गंगा आरती श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के दबाव को कम करने में सहायक साबित होगी। 

पीएम मोदी-अमित शाह की मौजूदगी में सरकार की अहम रणनीति बैठक

नई दिल्ली पश्चिमी एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच नई दिल्ली में सोमवार को उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और सीडीएस अनिल चौहान के साथ बैठक की। कुछ देर बाद प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बैठक में पहुंचे। इससे पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिमी एशिया के हालातों पर संसद के दोनों सदन (लोकसभा और राज्यसभा) में वक्तव्य दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया में बदलते हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं। गल्फ देशों में भारी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं। ताजा हालात को देखते हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत लाने का ऑपरेशन तेजी से जारी है। उन्होंने कहा, "सरकार इस समय भारतीय नागरिकों को सपोर्ट करने के लिए प्रतिबद्ध है। लगभग 67,000 नागरिकों की सुरक्षित वापसी हुई है। आगे भी पश्चिमी एशिया से लोगों को वापस लाने की पूरी कोशिश की जा रही है।" जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, इसलिए यह लड़ाई भारत के लिए खास चिंता की बात है। उन्होंने बताया, "हालात की गंभीरता को देखते हुए 1 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस) की मीटिंग हुई। इसमें ईरान में हुए एयरस्ट्राइक और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों के बारे में जानकारी दी गई। सीसीएस इस इलाके में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंतित थी। इसने इलाके की सुरक्षा और आर्थिक और कमर्शियल गतिविधियों पर पड़ने वाले असर पर भी ध्यान दिया।" विदेश मंत्री ने कहा, "लड़ाई लगातार बढ़ रही है और इलाके में सुरक्षा की हालत काफी खराब हो गई है। हमने देखा है कि असल में, लड़ाई दूसरे देशों में भी फैल गई है और तबाही और मौतें बढ़ रही हैं। पूरे इलाके में सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियों पर साफ असर पड़ा है और कुछ मामलों में तो रुक भी गई हैं। इसलिए हमने 3 मार्च को बातचीत और डिप्लोमेसी की अपनी अपील दोहराई और लड़ाई को जल्द खत्म करने की बात कही। मुझे यकीन है कि पूरा सदन भी जानमाल के नुकसान पर दुख जताने में मेरे साथ है।"

जीविका दीदीयों को सहकारी संघ देगा 2 लाख तक का लोन

बांका. स्वरोजगार और छोटे कारोबार के लिए अब जीविका दीदियों को माइक्रो फाइनेंस या नॉन बैंकिंग कंपनियों से ऋण लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब उन्हें जीविका के माध्यम से ही सप्ताह भर के अंदर लोन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए जिला परियोजना विभाग (जीविका) की ओर से स्थानीय स्तर पर तैयारी शुरू कर दी गई है। सुलभ तरीके से ऋण उपलब्ध कराने के लिए बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ का गठन किया गया है। इससे जिले की करीब तीन लाख से अधिक जीविका दीदियों को लाभ मिलेगा। बांका में 3 लाख महिलाओं को होगा फायदा जिले में लगभग 26 हजार से अधिक जीविका समूह संचालित हैं, जिनसे तीन लाख से अधिक महिलाएं जुड़कर विभिन्न प्रकार के कारोबार कर रही हैं। जिला परियोजना प्रबंधक राकेश कुमार ने बताया कि लोन लेने के लिए एप के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। लोन देने से लेकर उसे वापस करने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। कम राशि को भी किया जाएगा फाइनेंस बैंकिंग व्यवस्था के संचालन के लिए जिले में 13 सीएलएफ का चयन किया गया है, जिन्हें प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। नई वित्तीय वर्ष से इस योजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा। जीविका अधिकारियों के अनुसार समूह से जुड़ी महिलाओं को पहले एकमुश्त राशि दी जाती है, लेकिन कई बार स्वरोजगार के लिए अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में जीविका निधि के माध्यम से आसानी से ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। आवेदन से लेकर ऋण वापसी तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिसकी निगरानी प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक की जाएगी। तीन तरह का मिलेगा ऋण जीविका बैंक से ऋण लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन में तीन विकल्प दिए जाएंगे। अल्पकालीन ऋण 15 हजार रुपये तक, सूक्ष्म ऋण 15 हजार से 75 हजार रुपये तक तथा लघु ऋण 75 हजार से लेकर दो लाख रुपये तक मिल सकेगा। अल्पकालीन ऋण की अवधि अधिकतम 12 महीने, सूक्ष्म ऋण की 24 महीने और लघु ऋण की 36 महीने तक निर्धारित की गई है। जीविका दीदियों को सुलभ तरीके से ऋण उपलब्ध कराने के लिए जीविका निधि का गठन किया गया है। इससे जिले की तीन लाख से अधिक महिलाओं को लाभ मिलेगा। -राकेश कुमार, जिला परियोजना प्रबंधक, जीविका माइक्रो फाइनेंस के दबाव से राहत दिलाएगी जीविका ऋण योजना माइक्रो फाइनेंस और नॉन बैंकिंग कंपनियों की ओर से लोन वसूली के लिए किए जाने वाले दबाव और प्रताड़ना से लोगों को अब राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले वर्ष अमरपुर क्षेत्र में कर्ज के दबाव से तंग आकर एक दंपती समेत तीन लोगों ने आत्महत्या कर ली थी। ऐसी कई घटनाओं के बाद प्रशासन और समाज में चिंता बढ़ी थी। अब जीविका के माध्यम से सुलभ और पारदर्शी तरीके से ऋण उपलब्ध होने से महिलाओं को निजी कंपनियों के चंगुल में फंसने से बचाव मिलेगा। इससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिलने के साथ कर्ज के दबाव से होने वाली परेशानियों में भी कमी आने की संभावना है।  

Haryana की 59 पंचायतें 2 अप्रैल को दिल्ली में होंगी सम्मानित

यमुना नगर. पोषण, स्वास्थ्य जागरूकता, कुपोषण की रोकथाम तथा महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों को महिला एवं बाल विकास विभाग और केंद्र सरकार द्वारा सम्मानित किया जाएगा। इस वर्ष प्रदेश की 59 पंचायतों का चयन किया गया है। इनमें सबसे अधिक पंचायतें कुरुक्षेत्र जिले से हैं, जबकि करनाल और यमुनानगर की पंचायतें भी सूची में शामिल हैं। इन पंचायतों के प्रतिनिधियों, संबंधित खंड की CDPO और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 2 अप्रैल को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक चयनित पंचायत से तीन प्रतिनिधियों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। इनमें एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत का मुखिया या प्रतिनिधि और संबंधित खंड की सीडीपीओ शामिल होंगी। कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों का विवरण विभाग को भेजना आवश्यक है। मंत्रालय की ओर से कार्यक्रम में शामिल होने वाले आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और पंचायत प्रतिनिधियों को ट्रेन किराए की प्रतिपूर्ति भी दी जाएगी। निर्धारित मापदंडों के आधार पर हुआ है चयन : मिक्षा रंगा महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी मिक्षा रंगा ने बताया कि सुपोषित ग्राम पंचायतों को सम्मानित किए जाने के संबंध में विभाग को पत्र प्राप्त हुआ है और संबंधित पंचायतों को इसकी सूचना दे दी गई है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा निर्धारित मापदंडों के आधार पर ही इन पंचायतों का चयन किया गया है। जिलों के अनुसार चयनित पंचायतें जारी सूची के अनुसार कुरुक्षेत्र जिले से सबसे अधिक 13 पंचायतों का चयन हुआ है। करनाल से 11 पंचायतें, अंबाला और रोहतक से 6-6 पंचायतें, महेंद्रगढ़ से 6, यमुनानगर से 5 पंचायतें, पंचकूला से 3, भिवानी और रेवाड़ी से 2-2 पंचायतें चयनित हुई हैं। इसके अलावा चरखी दादरी, फरीदाबाद, फतेहाबाद, कैथल, सिरसा और सोनीपत से एक-एक पंचायत को सूची में शामिल किया गया है। इन पंचायतों ने पोषण अभियान को सफल बनाने, कुपोषण की रोकथाम और महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं। इन पंचायतों को मिलेगा सम्मान करनाल से गढ़ी गुजरान, हथियाना, खेड़ी सरफअली, भूडनपुर, बलरंगरन, डाकवाला रोड़ान, जूडला, मनूरा, अछनपुर, चखड़ा, चूरनी जागीर, अंबाला से मुनहारहेड़ी, नदियाली, भीलपुरा, मधेरी सेखान, कुरुक्षेत्र से बूला, चमूकलां, इसरहेड़ी, झीवैरी, खानपुर रोहड़ान, बहलौरपुर, जिनारपुर, जंधेड़ा, मूरादनगर, घिसरपड़ी, शाहबाद से कलसानी, शहजादपुर प‌ट्टी, रोहतक से ससरोली, करोंधा, पटवारपुर, घूसकनी, किसरांधी, सांपल, महेंद्रगढ़ से माधोगढ़, करिया, लबान, सेका, चरखीदादरी से माइकला, सिरसा से खाईशेरगढ़, पंचकूला से भगवानपुर, मौली, भिवानी से किकरल, नूनसार, यमुनानगर से पिंजौरा, भगवानपुर, संधाए, एमटी करहेड़ा, नगला जागीर, कैथल से सालूमाजरा, फतेहबाद से हिम्मतपुर, सोनीपत से रोलध लतीफपुर, रेवाड़ी से उसन, बराइवबास, फरीदाबाद से काबूलपुर बांगर ग्राम पंचायत शामिल हैं। सुपोषित ग्राम पंचायतों को सम्मानित किए जाने को लेकर विभाग की ओर से पत्र मिला है। संबंधित ग्राम पंचायतों को अवगत करवा दिया गया है। विभाग द्वारा निर्धारित मापदंडों के मुताविक ही इन ग्राम पंचायतों को सम्मान के लिए चुना गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों से सुरक्षा की गारंटी वाले टीके का लाभ लेने का किया आहवान

स्वस्थ नारी ही सशक्त समाज की आधारशिला राज्य सरकार लाड़ली बहनों और लाड़ली लक्ष्मी बेटियों के साथ महिलाओं को बना रही है सशक्त मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी नवरात्रि पर्व एवं गुड़ी पड़वा की दीं मंगलकामनाएं भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में माताओं-बहनों के स्वास्थ्य की चिंता करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सर्वाइकल कैंसर बेटियों की जिंदगी में सबसे कठिन समय होता है। मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर एचवीपी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई है। इसमें 14 वर्ष से अधिक आयु की बेटियों को 4 हजार रुपए मूल्य का यह टीका नि:शुल्क लगाया जा रहा है। वैक्सीन का एक टीका गर्भाशय एवं ग्रीवा कैंसर के प्रति भविष्य में बेटियों को जीवनभर की सुरक्षा की गारंटी देगा और उन्हें गंभीर रोग से बचाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस कल्‍चरल एंड इंर्फोमेशन सेंटर में महिलाओं के लिए आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर और एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आहवान किया कि बहनें और बेटियां सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए टीकाकरण का लाभ लेकर टीका अवश्य लगवा लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीका लगवा चुकी बेटियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए। साथ ही जबलपुर में 37 करोड़ रूपये से अधिक के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार लाड़ली बहनों से लेकर लाड़ली लक्ष्मी बेटियों तक निरंतर जनकल्याणकारी कार्यों को आगे बढ़ा रही है। लाड़ली बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार योजना की राशि को निरंतर बढ़ा रही है। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख से अधिक लाड़ली बहनों को अब 1500 रुपए की राशि हर माह उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। राज्य सरकार ने बहनों को रोजगारपरक उद्योगों में काम करने पर 5 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि अलग से देने का निर्णय लिया है। प्रदेश में लैंगिग असमानता को खत्म करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। स्थानीय निकायों के चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। लोकसभा और विधानसभा में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। बेटियां सेना से लेकर हर क्षेत्र में आगे बढ़कर बेहतर भविष्य का निर्माण कर रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अशोकनगर जिले में करीला धाम पहुंचकर माता जानकी और उनके पुत्र लव-कुश का आशीर्वाद प्राप्त किया और सभी प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री ने जबलपुर को दी 37 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में 10.51 करोड़ लागत से आधुनिक जनपद भवन का भूमि-पूजन और 27.16 करोड़ लागत से नवनिर्मित गीता भवन सहित 3 अन्य विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इनमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 21 स्वास्थ्य एवं उप स्वास्थ्य केंद्र और सोलर ट्रैफिक सिस्टम शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संस्कार धानी जबलपुर की छटा देश में सबसे अलग है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों को आगामी नवरात्रि पर्व एवं गुड़ी पड़वा की मंगलकामनाएं दीं। नेत्र दिव्‍यांग बालिकाओं का किया सम्‍मान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एचपीवी टीकाकरण पूर्ण कर चुकी बालिकाओं जिया सेन और अंशी विश्वकर्मा को प्रतीकात्मक रूप से प्रमाण पत्र प्रदान किए। उन्होंने नेत्रहीन कन्या विद्यालय जबलपुर की बालिकाओं से भेंट कर उनका सम्‍मान भी किया। इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने लखपति दीदी आरती चौधरी और सीता गोंड को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। पूर्व मंत्री श्री अजय बिश्नोई ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी देश का नेतृत्व करते हुए हर वर्ग के कल्याण के लिए योजनाएं शुरू कर रहे हैं। बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने के लिए शुरू की गई टीकाकरण की यह योजना मील का पत्थर सिद्ध होगी। देश और प्रदेश को आगे बढ़ाने में माताओं-बहनों का पूर्ण सहयोग सरकार को मिल रहा है। प्रदेश की आंगनवाड़ी एवं हेल्थ वर्कर्स की सहायता से विभिन्न प्रकार के कैंसर की पहचान करने के लिए आमजन को जागरुक किया जा सकता है। कार्यक्रम में विधायक श्री संतोष बरकड़े सहित जनप्रतिनिधि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता, लाड़ली बहनें एवं बड़ी संख्या में बेटियां उपस्थित थीं।  

West Asia संकट का असर: शेयर बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 1353 अंक गिरा

मुंबई पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने से वैश्विक बाजारों में गिरावट का माहौल देखने को मिल रहा है। इसके चलते सोमवार को घरेलू शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, विदेशी निधियों की निरंतर निकासी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने निवेशकों की भावना पर भारी असर डाला। रुपया 53 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 92.35 पर बंद हुआ। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,352.74 अंक या 1.71 प्रतिशत गिरकर 77,566.16 पर बंद हुआ, लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। दिन भर में, यह सूचकांक 2,494.35 अंक या 3.16 प्रतिशत गिरकर 76,424.55 पर पहुंच गया। इसी क्रम में, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 422.40 अंक या 1.73 प्रतिशत गिरकर 24,028.05 पर बंद हुआ। दिन के दौरान इसमें 752.65 अंक या 3.07 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 23,697.80 पर पहुंच गया। सेंसेक्स की कंपनियों का हाल सेंसेक्स पैक में अल्ट्राटेक सीमेंट को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, इसके शेयरों में 5.23 प्रतिशत की गिरावट आई, इसके बाद मारुति, महिंद्रा एंड महिंद्रा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, इंटरग्लोब एविएशन और अदानी पोर्ट्स प्रमुख रूप से पिछड़ने वाले शेयरों में शामिल थे। इसके विपरीत, रिलायंस इंडस्ट्रीज, सन फार्मा, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक को लाभ हुआ। क्यों गिरा बाजार? ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि कमजोर वैश्विक संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण निवेशकों की भावना पर भारी नकारात्मक प्रभाव पड़ा, जिसके चलते भारतीय शेयर बाजार लगभग 3 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ खुले और सत्र के अंत में तेजी से नीचे बंद हुए। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक जोखिमों में वृद्धि ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के निशान से ऊपर धकेल दिया और भारतीय रुपये को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा दिया, जिससे मुद्रास्फीति और बाहरी संतुलन को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। यूरोपीय बाजारों में दिखी गिरावट एशियाई बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 5.96 प्रतिशत और जापान का निक्केई 225 सूचकांक 5.20 प्रतिशत गिर गया। शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक भी नकारात्मक दायरे में बंद हुए। यूरोप के बाजारों में सत्र के मध्य में काफी गिरावट देखी गई। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। ब्रेंट क्रूड का भाव उछलकर 104.1 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड में 12.34 प्रतिशत की उछाल आई और यह 104.1 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। बाजार विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 6,030.38 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने पिछले कारोबार में 6,971.51 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। शुक्रवार को सेंसेक्स 1,097 अंक या 1.37 प्रतिशत गिरकर 78,918.90 पर बंद हुआ। निफ्टी 315.45 अंक या 1.27 प्रतिशत गिरकर 24,450.45 पर समाप्त हुआ। पिछले सप्ताह, बीएसई बेंचमार्क 2,368.29 अंक या 2.91 प्रतिशत गिर गया, और निफ्टी 728.2 अंक या 2.89 प्रतिशत गिर गया।

बिहार के युवाओं को मुख्यमंत्री उद्यमी योजना में 10 लाख तक मिलेगा इंसेटिव

सिवान. बिहार के सिवान जिले में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और युवाओं को उद्यमिता की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस योजना के तहत चयनित लाभुकों को उद्योग स्थापित करने के लिए सरकार की ओर से अधिकतम 10 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। जिला उद्योग केंद्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 15 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं। महाप्रबंधक विवेक कुमार ने बताया कि उद्योग विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य मुख्य उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और छोटे-छोटे उद्योगों की स्थापना के माध्यम से आर्थिक विकास को गति देना है। योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को आर्थिक सहायता के साथ उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी और आवेदन की प्रक्रिया के लिए अभ्यर्थी उद्योग विभाग की आधिकारिक वेबसाइट udyami.bihar.gov.in या जिला उद्योग केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। महाप्रबंधक ने जिले के युवाओं से योजना का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने की अपील की है। 373008 अन्नदाताओं के खाते में जाएगी 74.61 करोड़ राशि प्रधानमंत्री किसान सम्मान के लाभुक किसानों के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 13 मार्च को 22वीं किस्त की राशि जारी कर दी जाएगी। इसको लेकर सभी स्तर की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि जिले के तीन लाख 73 हजार आठ किसानों के खाते में 74.61 करोड़ रुपये भेजी जाएगी। यह राशि सीधे बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से आएगी। खास बात यह है कि रबी फसलों की सिंचाई के इस महत्वपूर्ण समय में खाते में आने वाली धनराशि किसानों को कृषि संबंधित कार्यों को पूरा करने में बड़ी राहत मिलेगी। डीएओ ने बताया कि भारत सरकार द्वारा 13 मार्च को पीएम किसान उत्सव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपराह्न पांच बजे से वेब कास्टिंग के माध्यम से उपस्थित किसानों को संबोधित करेंगे।

हरियाणा के थप्पड़ कांड में 6 और पुलिसकर्मी सस्पेंड

हिसार/पानीपत. घरौंडा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में तैनात डॉक्टर को एसएचओ के थप्पड़ मारने के मामले में रविवार को छह और पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। घटना वाले दिन चार मार्च को इन सभी की ड्यूटी सीएचसी में थी। थाना प्रभारी दीपक को पांच मार्च को सस्पेंड किया जा चुका है। उधर, पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के बाद सरकारी डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म करने की घोषणा कर दी है। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के राज्य प्रधान डा. अनिल, वरिष्ठ उप प्रधान डॉ. नितिन व स्टेट को-आर्डिनेटर डा. दीपक गोयल ने बताया कि सोमवार से प्रदेश में डॉक्टर अपनी ड्यूटी देंगे और ओपीडी शुरू करेंगे। उनका पुलिस प्रशासन से विश्वास उठ चुका है। इसलिए पीड़ित डॉ. प्रशांत अदालत जाएंगे। शनिवार को ओपीडी सेवाएं बंद रहने और रविवार को अवकाश के कारण उपचार लगभग ठप रहा। राज्यभर में प्रतिदिन औसतन 80 से 85 हजार मरीज प्रभावित रहे और दो दिन में यह संख्या करीब 1.6 लाख तक पहुंच गई। क्या कहते हैं आंकडे? प्रभावित सेवा     प्रभाव का प्रतिशत     विवरण सरकारी चिकित्सक भागीदारी     93%     औसतन इतने डॉक्टर हड़ताल में शामिल रहे, जिससे केवल सीमित सेवाएं ही मिल पाईं। नियोजित सर्जरी (Planned Surgeries)     95%     दो दिनों के भीतर अधिकांश सर्जरी स्थगित करनी पड़ीं और पोस्टमार्टम के मामले भी लंबित रहे। एमएलसी (MLC) सेवाएं     98%     यह सेवा सबसे अधिक प्रभावित हुई क्योंकि इसके लिए सरकारी डॉक्टर के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं। जिलों में घटती ओपीडी से बढ़ी परेशानी प्रदेश के कई जिलों में ओपीडी लगभग ठप रही। भिवानी में 130 में से करीब 100 चिकित्सक कार्य बहिष्कार में शामिल रहे। और पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कालेज में सामान्य दिनों की ढाई हजार ओपीडी के मुकाबले शनिवार को लगभग 1700 मरीज ही पहुंचे। हिसार में करीब 900 मरीज बिना उपचार लौट गए। यमुना नगर, जींद और झज्जर सहित कई जिलों में एनएचएम व जूनियर रेजिडेंट के सहारे सीमित सेवाएं चलती रहीं। राज्य स्तर के आंकड़ों के अनुसार 20 जिलों में प्रतिदिन 80-85 हजार मरीजों की ओपीडी प्रभावित रही। करनाल में लगभग 5200, हिसार में 6100, गुरुग्राम में 6800 और फरीदाबाद में 6300 मरीज प्रभावित हुए। क्या हुआ हड़ताल का असर? कुल प्रभावित ओपीडी: इन 20 जिलों में लगभग 80,000 से 85,000 मरीज प्रतिदिन प्रभावित हुए, जिसका कुल योग शनिवार और रविवार को लगभग 1.6 लाख के पार रहा। भागीदारी: राज्य के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की हड़ताल में भागीदारी का औसत 93% के आसपास रहा। शेष 7% में कुछ आयुष चिकित्सक और एनएचएम के कर्मी शामिल थे जो सीमित स्तर पर सेवाएं दे रहे थे। सेवा का नाम     प्रभाव का स्तर     मुख्य कारण/विवरण पोस्टमार्टम     90% से अधिक लंबित     प्रदेश के सभी जिलों में पोस्टमार्टम के मामले बड़ी संख्या में रुक गए। सर्जरी     95% रद्द     पूरे प्रदेश में नियोजित (Planned) सर्जरी को स्थगित करना पड़ा। एमएलसी (MLC)     98% बाधित     सरकारी डॉक्टर के हस्ताक्षर अनिवार्य होने के कारण यह सेवा लगभग पूरी तरह ठप रही। मेडिकल प्रमाण पत्र भी रुके प्रदेशभर में चिकित्सकों की दो दिन की हड़ताल का असर मेडिकल प्रमाण पत्र जारी होने पर भी पड़ा। भिवानी के पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कालेज और जिला नागरिक अस्पताल में जूनियर रेजिडेंट व एनएचएम चिकित्सकों ने केवल सीमित ओपीडी सेवाएं संभालीं, जबकि मेडिकल प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए। जिले में प्रतिदिन औसतन 30 से अधिक लोग मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने आते हैं, जबकि राज्य स्तर पर यह संख्या 500 से 600 तक है। प्रमाण पत्र न बनने से कई सरकारी नौकरियों के अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन में अड़चन आई। इन दिनों आईटीआई, पालिटेक्निक प्रशिक्षुओं के अलावा पुलिस, होमगार्ड व अन्य सुरक्षा इकाइयों में भर्ती प्रक्रिया में इसकी जरूरत पड़ रही है।

कूनो नेशनल पार्क में ज्वाला चीता ने दिया पांच शावकों को जन्म

श्योपुर. मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट का लगातार सफलता मिल रही है, सोमवार को ज्वाला चीता ने पांच शावकों को जन्म दिया है। इसी के साथ मध्य प्रदेश में कुल चीतों की संख्या 50 के पार पहुंच गई है। ज्वाला तीसरी बार मां बनी है। देश में जन्में चीतों की संख्या 33 पहुंच गई है। वहीं इन चीतों के जन्म के साथ कुल चीतों की संख्या 53 हो गई है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया के जरिए ज्वाला चीता और उसके शावकों का वीडियो शेयर कर यह खुशखबरी दी है। बता दें कि दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता ‘गामिनी’ ने तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया था। गामिनी दूसरी बार मां बनी। इससे पहले उसने 10 मार्च 2024 को छह शावकों को जन्म दिया था जिसमें से पांच शावक जिंदा हैं। इन नए शावकों के साथ भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है, जबकि देश में कुल चीता आबादी अब 38 तक पहुंच गई है। वन विभाग के अनुसार, सभी नवजात पूरी तरह स्वस्थ हैं और विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम उनकी सतत निगरानी कर रही है। प्रोजेक्ट चीता को मिल रही मजबूती अधिकारियों का कहना है कि लगातार मिल रही प्रजनन सफलताएं प्रोजेक्ट चीता की प्रभावशीलता को साबित कर रही हैं। फील्ड स्टाफ और पशु चिकित्सकों की समर्पित निगरानी के कारण कूनो में चीतों का अनुकूलन और प्रजनन दोनों सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं। हर नया जन्म इस महत्वाकांक्षी परियोजना को नई ऊर्जा दे रहा है।

पंजाब में सड़क हादसे में मारे गए टीचरों के परिवार को मिलेंगे 1 करोड़: शिक्षा मंत्री

चंडीगढ़. पंजाब सरकार सड़क हादसों में जान गंवाने वाले शिक्षकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने के लिए नई योजना बनाने पर विचार कर रही है। पंजाब विधानसभा में इस विषय पर चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि सरकार ऐसी रणनीति तैयार कर रही है, जिसके तहत दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले शिक्षकों के परिवारों को करीब एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जा सके। विधानसभा में यह मुद्दा शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने उठाया। उन्होंने ब्लॉक समिति चुनावों के दौरान सड़क हादसों में मारे गए दो शिक्षकों का मामला सदन में रखा और सरकार से उनके परिवारों के लिए विशेष सहायता की मांग की। शिक्षा मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि ब्लॉक समिति चुनावों के दौरान जिन दो शिक्षकों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई थी, उस मामले में विभाग की ओर से जो भी आर्थिक सहायता दी जानी है, वह नियमों के अनुसार दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी ओर से दोनों परिवारों को दस-दस लाख रुपये की सहायता पहले ही प्रदान की है। उन्होंने कहा कि मृतक शिक्षकों के परिवार के सदस्यों को नौकरी देने का मामला भी सरकार के विचाराधीन है। यह नियुक्ति पर्सोनल विभाग की गाइडलाइन के अनुसार की जाएगी। इस पर विधायक मनप्रीत अयाली ने कहा कि जिन शिक्षकों की मौत हुई है, उनके परिवार की स्थिति बेहद कठिन है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को ऐसे मामलों में परिवारों को दो करोड़ रुपये तक की सहायता देने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार के पास ऐसी कोई योजना है जिससे भविष्य में ऐसे मामलों में बेहतर आर्थिक सहायता दी जा सके। सरकार आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कर रही काम इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग बहुत बड़ा है और बड़ी संख्या में कर्मचारी विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हैं। ऐसे में सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार बैंकों के साथ बातचीत कर रही है, ताकि एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा सके जिसके तहत सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले शिक्षकों के परिवारों को एक करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में राज्य का बजट पेश किया गया है और सरकार कर्मचारियों की सुरक्षा तथा उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु के बाद उसके परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।